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Swami Vivekananda's Teachings ·

Swami Vivekananda English & Hindi 12 May 2023

Swami Vivekananda

ओके सो हर इस यू कैन सी स्वामी विवेकानंद से कृष्णा डी लॉर्ड टॉक्स तू अर्जुन और गुणाकेश लोड ऑफ शिकार ऑफ स्लीप डी वन हूं हूं कैन स्लीप अकॉर्डिंग तू हज विश्व अबाउट नेपोलियन इकोसी डेट ही कैन स्लीप ऑन हज हॉर्सबैक इन डी फील्ड ऑफ मेटल बिकॉज़ वही दत स्लीप इस वेरी नेसेसरी तू मेंटेन ओवर हेल्थ नो एन परसों हूं इस कंटीन्यूअस इन एन बटर और इन एन वेरी स्ट्रेसफुल पोजीशन आईएफ यू डोंट गेट प्रॉपर्ली हिमायत गेट टायर्ड इजीली ही विकम गेट स्ट्रेसफुल इजीली ही और ही माइट स्टार्ट मेकिंग रंग डिसीजंस हम आई स्टार्ट मेकिंग मिस्टेक्स और ऑन डी फील्ड ऑफ बटर रंग डिसीजंस और मिस्टेक्स कैन बी प्रूफ सेटल पर हिमसेल्फ कलीग और आर्मी मां सो था इस वही पर नेपोलियन स्लिपर्स वेरी इजी तू कम इन डेट बीइंग एबल तू स्लीप व्हेनेवर ही वांटेड दत बाज व्हाट मेड हम एन वेरी इफेक्टिव जनरल ऑन डी फील्ड बट हर वन आईटी इस सैड अबाउट अर्जुन डेट मेंस समथिंग कंपलीटली डिफरेंट नो यू नो जनरली डॉक्टर रिकमेंड सेवन फाइव तू सेवन और हाफ हॉर्स तू ऑलमोस्ट 8 ओवर स्लीप एवरीडे बट डेट इस पर जनरल संसारी पीपल और परसों हूं इसे नोटिस सड़क बट एन सड़क वंश स्टार्टर्स डूइंग मेडिटेशन एनर्जी फ्रॉम दिस पीरियड फ्रॉम डी सोल कोई चीज इनसाइड स थे बॉडी इस नथिंग एक्चुअली आईटी इस सोल मेड सो लीड लाइक यू नो डेट ओसियन और इट्स वेव्स वेव्स डू नोट एक्जिस्टेंस आउटसाइड ऑफ ओसियन वेव्स आर ओसियन इन मोशन वेव्स आर वाटर इन मोशन व्हेन आईटी इसे कम और कोयल आईटी इस एन ओसियन व्हेन आईटी इसे एक्टिव व्हेन आईटी इस से एनर्जिटिक और वर्किंग दें आईटी इस सो डी से थिंक इस हर ट्रू था व्हेन वर्तमान इस कम और क्यूट और पोजीशन इट्स इन ऑन एन सेल्फ दें आईटी इस आत्मन दें आत्मा इस मेनिफेस्टेड आउटसाइड इन दिस एक्सटर्नल वर्ल्ड दें आईटी टेक्स्ट डी फॉर्म ऑफ दिस बॉडी सो व्हेनेवर दिस आत्मा दिस गेट्स ऑफ आत्मन डी गेट्स ऑफ सुपर कॉन्शसनेस बी ओपन मोर और मोर अवर बॉडी गैंगस्टर शांति आत्मन रडार दें फ्रॉम डी फूड वे नो डेट इन ऑर्डर तू सरवाइव वे नीड और वे नीड स्लीप वे नीड फूड वे नीड सम कंफर्ट बट वे हैव सीन अगेन और अगेंस्ट हो योजीज सम गुड योगी सम ग्रेट योजीज सम टाइम्स थे डेमोंस्ट्रेट ग्रेट एबिलिटीज वे हैव सीन डेट इन कथामृत सिर्फ देवर इस एन स्टोरी ऑफ योगी देवर एक्सकैवेटिंग सम साइट देवर वज से सम माउंटेन और समथिंग एन केव और समथिंग देवर एक्सकैवेटिंग आईटी दे व ओपनिंग आईटी और सुद्दनली दे फाउंड एन योगी दत योगी बाज इन समाधि पर सच ए लॉन्ग टाइम अनफॉर्चूनेटली डी पीपल हूं वेयर एक्सकैवेटिंग दे साइड देवर सो बाद मिनट डर स्विच ऑफ मैटेरियलिस्टिक बैंक ऑफ मन अप इस योगी सो मैच था ही जेन एक्सटर्नल कॉन्शसनेस और डी मोमेंट ही गेंद एक्सटर्नल कॉन्शसनेस ही डिड इनीशिएटली सो दिस हैपेंस थिस इस एन वेरी अनफॉर्च्युनाते इंसिडेंट बट व्हाट कैन बी डन बट हर इन कथामृत सिर्फ वे सी डेट ही इस दिस डिवाइन पावर पॉसिबल तू हैव हो कैन एन बॉडी सरवाइव इन सच एक्सट्रीम कोल्ड और हिट वे सी डेट हो योग इस लाइव अपन हिमालय विदाउट टी हेल्प ऑफ अन्य क्लॉथ विदाउट दी हेल्प ऑफ वायरिंग अन्य वार्म क्लोज और विदाउट अन्य फायर दे लाइव अमोंग थे आइस माउंटेंस नो माउंटेंस विदाउट अन्य प्रोटेक्शन सो दे कैन वे स्टैंड एक्सट्रीम ऑफ हिट और कोल्ड दिस इस वन थिंक देवर आर में योगेश हूं लाइव ब्यूरीड अंडर्स अंदर दी सॉइल अंदर दी अर्थ और इनसाइड डी वाटर दिस इस अलसो पॉसिबल सो दे लाइव विदाउट और योगेश सीवीसी दे रे मां इन समाधि पर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम डेट मिंस दे कैन लाइव विदाउट फूड अलसो और हर आईटी इसे डी लॉर्ड ऑफ डेट मेंस ऑल ऑफ दिस थिंग्स तू गेट डी मटेरियल थिंग्स डेट्स अवर बॉडी अर्जुन हेड फाइंड कंट्रोल ओवर दिस नो दिस इस एसेंशियल पर योजीज पर वॉरियर्स बिकॉज़ वन यू को इन डी बटर यू बिल हैव तू हैव योर बॉडी ऑफ देवर फिजिकल फिटनेस यू बिल हैव तू हैव योर बॉडी आते डी पिक ऑफ इट्स फिजिकल परफॉर्मेंस ओनली दें यू कैन डिफीट योर एनीमीज सो डेट एबिलिटी तू कंट्रोल डी फूड कंट्रोल डी और कंट्रोल डी हिट और कोल्ड और इंजरी और पेन और सफरिंग एवरीथिंग इंक्लूडिंग स्लीप इस एसेंशियल पर ए वारियर एसेंशियल पर ए योगी सो डेट इस वही और चुनाव इस रेड ही इस डी लॉर्ड ऑफ स्लीप ही हुए कन्कर्ड स्लीप नो स्वामी विवेकानंद कुरुक्षेत्र डी फील्ड ऑफ वर्चुअल डेट इस डी बैटलफील्ड कुरुक्षेत्र इस द वर्ल्ड मिंस हर सी गीता इसे इन्फॉर्म अलघुरी गीता भी सी डेट जनरली वे रीड यस डेट वज एन मेटल फील्ड कुरुक्षेत्र धोवे गीता ओपन धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र जो ऑफ मी रिलेटिव्स हैव गेदर इन ऑर्डर तू फाइट दिस धृतराष्ट्र सेड तू संजय प्लीज तेल मी अबाउट डेम सो दिस कुरुक्षेत्र बट सोमेटाइम्स वे सी ओनली एक्सटर्नल पार्ट ओनली विमेंसिंह पांडव पांडव आर इन फीवर ऑफ धर्म सो पीपल हूं फॉलो अधर्म आर फाइटिंग डी पीपल हूं फॉलो चंद्र चंद्र बैटलफील्ड ऑफ कुरुक्षेत्र इस कॉल्ड धर्मक्षेत्र मीनिंग ऑफ दिस एंटायर स्टोरी ऑफ भागवत गीता धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र इस नोट मीर्ली एन बैटलफील्ड बट आईटी इसे डी फील्ड ऑफ वर्चुअल आईटी इस डी फील्ड ऑफ अवर हार्ट आईटी इस अवर कॉन्शसनेस इन विच स्वामीजी सेस डी पांडव रिप्रेजेंटिंग धर्म राइट येर ने फाइट दी 100 अदर ब्रदर्स कौरव जो डेट वे लव डेट इस जो डेट वे डिजायर और हो तू कंटेंट अगेंस्ट डी हीरोइन भाई सोल इस डी जनरल सी डी एंटायर एलिगिरी ऑफ गीता सो शॉर्टली और सो ब्यूटीफुल एक्सप्लेन बाय स्वामी जी

स्वामी विवेकानन्द

हम सोचते हैं की धार्मिक और धर्म का युद्ध जहां पर हुआ जी कुरुक्षेत्र में उसको धर्मक्षेत्र कहा जाता है और धर्म और धर्म का युद्ध क्यों हुआ क्योंकि पांडव थे वो धर्म के पक्ष में थे भगवान कृष्णा खुद स्वयं उनके साथ में थे और जो कौरव थे वो धर्म के पक्ष में थे अभी जैसे हमने एक बहुत ही एक सिंपल एक उदाहरण देकर हम देख सकते हैं की जब कौरव अर्जुन और दुर्योधन दोनों भगवान कृष्णा के पास गए उनको हेल्प मांगने के लिए मदद मांगने के लिए की आप जो है हम लोगों का युद्ध होने वाला है आप हमको मदद कीजिए अभी दोनों का भगवान कृष्णा के ऊपर में हक बंता है क्यों क्योंकि भगवान तो रिलेटेड है दोनों के साथ में कृष्णा तो दोनों के साथ में वो रिलेटेड है तो अभी देखा वहां जाकर के क्या हुआ की कृष्णा का तो भगवान कृष्णा की और इतना भक्ति है की भगवान कृष्णा के पर के पास जाकर खड़ा र गया भगवान कृष्णा सोए हुए थे तो वह दोनों जाकर के अपेक्षा कर रहे हैं की जो भगवान जैसे ही कृष्णा जैसे निद्रा में से उत्थित होंगे जागृत होंगे हम उनसे अपनी मदद मांगेंगे तो दुर्योधन जाकर के उनके सर के पास खड़ा हो गया ये की मैं जो हूं कृष्णा का इक्विवेलेंट हूं और मैं उनके सर के पास खड़ा रहूंगा और अर्जुन को पता है की भगवान तो सामग्र संसार के ईश्वर है वो उनके सामने कुछ नहीं है तो भगवान कृष्णा के पर के सामने अर्जुन खड़ा र गया अभी क्या हुआ कृष्णा ने आंख कोली तो सबसे पहले वो दुर्योधन खड़ा था सर के सामने तो दुर्योधन के ऊपर में उनकी नजर गई और दूसरी नजर गई अर्जुन के ऊपर में क्योंकि उनके पर के पास खड़ा था तो कृष्णा ने कहा की दुर्योधन को फिर जैसे ही भगवान कृष्णा जागृत हुए इन दोनों ने कहा की हम आपके पास में मदद मांगने के लिए आए हैं हम दोनों युद्ध कर रहे हैं और आप तो हमारे दोनों के नाती है रिलेटिव है तो आप हमको मदद कीजिए तो कृष्णा कहते हैं ठीक है तुमको दोनों को मदद करूंगा उन्हें सबसे पावरफुल आर्मी इन दिस वर्ल्ड वो की मेरे पास है वो मैं एक तो दे सकता हूं दूसरा हूं मैं तो आपको दो में से जो एक चाहिए वो ले लीजिए या तो मेरा सीनरी लीजिए या तो मुझे लीजिए तो अभी बात हुई की सबसे पहले वो किसको चॉइस देंगे तो दुर्योधन को देंगे क्योंकि दुर्योधन जो है कृष्णा के सर के पास खड़ा था और दूसरा चॉइस हो गया अर्जुन का तो दुर्योधन ने सोचा की कृष्णा को लेक क्या करेंगे उसके तो दो हाथ है दो पर है एक सर है वो ज्यादा से ज्यादा सुदर्शन चक्र भी यदि चला लेने तो भी उनकी जो आर्मी है वो इतनी पावरफुल है की हजार दो हजार लोगों को यदि वह सुदर्शन चक्र से मार भी दे तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता है इतनी बड़ी आर्मी से मैं सब जीत लूंगा उसे समय कृष्णा फिर से कहते हैं की मैं जो है किंतु मुझे ले सकते हो किंतु मैं युद्ध नहीं है तो यह देख करके वह दुर्योधन और भी खुश हो गया चलो मैन सुदर्शन चक्र भी निकाल गया इक्वेशन में से अभी सिर्फ युद्ध करने के लिए रहा उनका सिर्फ आर्मी तो कृष्णा को हटाओ कृष्णा को लेने की कोई जरूर नहीं है कृष्णा की आर्मी को ले लो ये का के वो कृष्णा की आर्मी को लेकर के खुश होकर के चला गया तो अभी वो अर्जुन चुपचाप खड़ा है यहां पे सामने है तो कृष्णा बोलना है भाई तुम्हारा अभी तो मैं ही बच्चा हूं तुमको अभी और कोई ऑप्शन ही नहीं है मुझे ही लेना होगा तो कृष्णा कहता है की यदि मुझे पहले भी ऑप्शन यदि मिलता तो मैं आप ही को लेट ऐसा मत सोचिए की मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं है अभी कोई क्या करें मतलब वो जैसे कहते हैं ना बैगर्स है वो नो चॉइस इस तरह से की मैं भिखारी हूं तो भिखारी यदि अपने घर आता है तो जो रोटी सब्जी वगैरा जो हमने बनाया है वो हम उसको देंगे उसकी इच्छा के अनुसार नया खाना तो हम बनाने वाले नहीं है तो फिर ऐसे ही बेकार से नो चॉइस तो अर्जुन कहते हैं की मैं भगवान ऐसा नहीं है की मेरे पास कोई चॉइस नहीं है मेरा 24 से पहले यदि मुझे मिलता तो भी आप ही होते और अभी आपने तो मेरी चॉइस में तो कोई फर्क ही नहीं पड़ा तो ठीक है चलो भगवान कृष्णा उनको मिल गया उसके बाद में युद्ध क्षेत्र में क्या हुआ हमको पता है तो देखिए वैसे हम लोग सोचते हैं की यह सब कहानी पढ़ के की कौरव जो है वो धर्म के धर्म के पक्ष में है और पांडव है जो वो धर्म के पक्ष में है इन दोनों के बीच में जहां पे युद्ध हुआ कुरुक्षेत्र उसको धर्मक्षेत्र कहा जाएगा धर्म भूमि कहा जाएगा किंतु स्वामी जी कहते हैं की यह जो वाक्य ऐतिहासिक जो युद्ध है इसके अलावा यह जो महाभारत का युद्ध प्रतिदिन हमारे हृदय में हमारे मां में हमारे चित में हमारी चेतन में खेल रहा है यहां पर कौरव कौन है तो हमारे जो वासनाएं हमारी कामनाएं हमारे ईर्ष्या हमारा क्रोध मो मो मच्छर या घमंड अहंकार यह सब है और पांच पांडव कौन है तो मेरी ज्ञान भक्ति वैराग्य सत्य अहिंसा असते परिग्रह तप शूज संतोष स्वाध्याय ईश्वर परिधान मैत्री करुणा मोदित अपेक्षा यह सब मिल्क होते हैं पांच पांडव तो यह जो मेरे जो सदगुण है और मेरे जो दुर्गुण है मेरे चित के भीतर में मेरे मां के भीतर में सदैव संग्राम रथ है यह जो मां है वो है सही-सही धर्मभूमि धर्मक्षेत्र और ये जो अर्जुन है हमारी बुद्धि वो है हमारी संकल्प शक्ति अभी आज मुझे सुबह को उठाना है तो अभी मैं सोचूंगा अरे भाई रात को बहुत डर तक नींद नहीं आया क्यों क्योंकि गम बहुत पद रहा है तो अभी क्या करें चलो थोड़ी डर और सो लेते हैं ऐसा करके सुबह को मैं नहीं उठाता हूं मैं मंगल आरती में नहीं जाऊंगा तो यह जो सब सुबह में उठने की जो बात है की साढे कर बजे उठाना है तो मैं क्या करूं रात को मैं सोया ही हूं 2:00 बजे 4:30 बजे उठने से तो फिर पूरा दिन भर मेरा खराब जाएगा तो जान दो ऐसा जब ये मेरे जो मेरी जो लोग है लालच है जो कंफर्ट अपने की जो बांदा सुख अपने की जो मेरी इच्छा है वो मुझे बेड की और मेरे बिस्तर की और पकड़ के रखती है और ये जो अर्जुन रूपी जो बुद्धि है जो जनरल है जो सेनापति है वह मेरा कान पड़कर के मुझे वो बिस्तर में से खड़ा करने का पर्यटन करता है अभी अर्जुन ने कान पड़ा है और ये जो है वो जो दुर्योधन ने हाथ पकड़ के रखा है अभी वो हाथ छोड़ेगा ना ये कान छोड़ेगा क्या होगा वो तो वीडियो ईश्वर के हाथ में है हमारी संकल्प शक्ति कितनी दृढ़ है ना की हमारी सुख अपने की लालसा या वासना उसमें ज्यादा शक्ति है रिपोर्ट इसमें ज्यादा शक्ति है वह निश्चय करता है की प्रतिदिन यह जो महाभारत का युद्ध हो रहा है हमारे हृदय में उसमें कौन जीतेगा ये प्रतिदिन संघर्ष जो है हमारे हृदय में चला राहत है ऐसी कितनी ही कहानी है वो जैसे छोटा बच्चा होता है ना छोटा बच्चा जैसे ठाकुर कहते हैं एक बार बहुत सुंदर उदाहरण है जब मंदिर में वो कभी जाएंगे तो बंदर लोग बैठे हैं अभी आपको लगेगा की मंदिर में तो सब साधु संत महात्मा बैठे हैं कोई अच्छा सा कोई सड़क है कोई भक्ति है बैठ करके आंख बैंड करके प्रार्थना कर रहा है या कोई पुजारी महाराज पूजा कर रहे हैं या तो कोई जो संत है वो बाहर में वो त्रिशूल लगा करके वो सर पे बहुत लगाकर के वो आंख बैंड करके ओम ओम जाप कर रहे हैं तो यह सब देख कर के आपको लगेगा बंदर जो है वो एकदम शांति से बैठे हैं तो आपको लगेगा अरे वह पवित्र वातावरण का बंदर पर भी असर होने लगा तो ठाकुर कहते हैं ऐसी बात नहीं है बंदर को यदि दिन भर के लिए स्थिर होकर के बैठने हुए देखो तो समझ लो की वह प्लेन कर रहा है की अभी इसके बाद में क्या और मिश्चीफ करनी है इसके बाद में क्या तूफान खड़ा करना है इसके बाद में किस तरह से लोगों को परेशान करना है अब यात्रा स्थल पर जाते हैं तो बंदरों का जो ये जो क्या बोलेंगे अभी मैंने उन लोगों का प्रभाव बोलिए ना की हनुमान का आशीर्वाद बोलिए ना की फिर उनकी वह जो है की उनकी मिश्चीफ बोलिए जैसी आपकी श्रद्धा किसी के वो जो है वो चश्मा निकाल कर के चले जाएंगे किसी के हाथ में कोई चीज है खाने की तो वो पकड़ के ले जाएंगे ना की वो अभी कुछ दोनों पहले एक वीडियो देखा था एक छोटा बच्चा है तो उसको पकड़ करके खींच के ले जान को पर्यटन कर रहा है और वो बच्चे की मां उसके पीछे दौड़ रही है उसको बचाने के लिए तो यह बंदर जो है ऐसा लगेगा मंदिर में बैठ करके फिर बैठे हैं तो पता नहीं किस तरह के वह भगवान महावीर के भगवान राम के बीच कर रहे हैं ना की अभी और क्या तोड़-फोड़ करनी है वो प्लानिंग कर रहा है वो पता नहीं चला अभी आखिर में जो होना है तो वो तो ईश्वर की इच्छा है महावीर भी ए सकते हैं भगवान महावीर स्वयं और बंदर का स्वरूप लेकर के ए सकते हैं मनुष्य का स्वरूप लेकर ए सकते हैं हमने पढ़ा सुना होगा शायद की राजा महाराजा सिम है ना की वृंदावन में एक बार एक मंदिर में बैठे थे एक एक जगह में भूल गया तो वहां पे एक बार मंदिर में बैठे थे राम नाम संकीर्तन चल रहा था सुद्दनली देखा की एक वृद्ध पुरुष सर के मुंह के ऊपर में दिव्या और कांति और लंबी सफेद दाढ़ी है सुबर दाढ़ी है और वो आकर के वो सुंदर पितांबरी वस्त्र पहने आकर के और सर के ऊपर में तिलक है लाल कलर का आकर के बैठ गया और एक कोनी में मंदिर के चुपचाप शांति से ओपन मी होकर के राम नाम सुन रखा अभी राजा महाराज बैठ करके उसको देख रहे किंतु कुछ बोलने ही रहा है फिर अभी जैसे ही वो वृद्ध पुरुष चले गए खड़े होकर के तो इमीडीएटली राजा महाराजा ने कहा देखा था उनको वो भगवान महावीर स्वयं थे मनुष्य का रूप धरण करके राम नाम सुनने को आए थे वो जो कहते हैं ना जहां राम नाम है जब तक राम नाम लिया जाएगा भगवान महावीर स्वयं आकर के राम नाम सुनेंगे तो अभी जैसे ठाकुर का उदाहरण है की बंदर जो है वो आंख बैंड करके क्या सोच रहे हैं और राम नाम सुन रहे हैं राम नाम का चिंतन कर रहे हैं की अभी क्या तोड़-फोड़ करेंगे लोगों को कैसे परेशान करेंगे वो प्लेन कर रहे कब कहानी जाकर के क्या होगा कुछ ठीक नहीं तो वैसे ही हमारे मां में भी यह दुर्गा और सदगुण हमारी सब इच्छा संकल्प शक्ति अध्यात्म और ब्रह्म मार्ग में आगे बढ़ाने की हमारी इच्छा यह एक और हमको तांती है हमारा कान पड़कर के एक और अर्जुन हमारा हाथ पकड़ करके दुर्योधन खींचना है की चलो यहां पे आओ सुख भोग करेंगे आनंद करेंगे शांति से मजे से रहेंगे और यहां पे भगवान अर्जुन है वो भगवान कृष्णा और अर्जुन कहते हैं की नहीं युद्ध क्षेत्र में युद्ध करना होगा जैसे ठाकुर क्या कहते हैं की जब वो ये जो एक जो महाजी बांग्लादेश हिंदी में पता नहीं है अभी शब्द जो नव चलता है वो नवी कहो ना की सेलर कहो जो भी कहो तो वो जो ये जो नो का चलने वाला जब जड़ तूफान दृष्टि होता है तो क्या होता है एक बार खड़े होकर के जोर से वो जो वो जो हमेशा मा करके और वो जो अपना पलटूल करके पाल यानी की सेल इंग्लिश में जिसको बोलते हैं उसको खोल करके कैसे भी तरह से तूफान पर कर देगा और फिर जैसे वह सब शांत हो जाएगा हवा है वो पानी का वो जो चोर है वो सब शांत हो जाएगा तब आराम से नोखा में लेकर के तंबाकू खाएगा तो वैसे ही यह जो एक बार युद्ध कर लेना है खड़े होकर के कष्ट करके वो जो छोटी बंद करके ना की वो जैसे कहते हैं और शिखा बंद करके एक बार जो है कमर काश के हिंदी में शब्द है कमर कसके एक बार युद्ध कर लेना है मां को शांत कर लेना है उसके बाद ठाकुर बोलते हैं जो पेंशन आए पेंशन खाए अर्थात पेंशन खावे अर्थात की वो पूरा जीवन पूरा लाइफ जो है वो नौकरी किया है अभी रिटायर हो गए हैं तो गवर्नमेंट की और से पेंशन आता है या तो फिर वो जो जहां पर जब करते थे वहां से पेंशन आता है तो अभी बिना कम किया उनको सैलरी मिलता है अर्थात की एक बार खड़े होकर के दत करके कमर काश के साधना कर ली तो फिर जो है बाकी का जीवन हम शांति सुकून आनंद से बिताएंगे और हम जहां पर भी जाएंगे तो हमारी जो प्रेजेंस है उससे लोग आकर्षित होंगे उससे वह लोग शांति अपने के लिए लोग हमारे पास आएंगे जैसे जरूर कहते हैं ना की जब फूल खिलता है तो वो मधुमक्खी को इनविटेशन नहीं देना पड़ता की यस है की वो इस इस दिन को इस समय यह इवेंट होने वाला है आप सब अपने परिवारजनों के साथ पधार सकते हैं और एटीजी के अनुसार वो जो है की आपका इनकम टैक्स जो है वो माफ है वगैरा सब वो जैसा हमारे यहां से जैसे इनविटेशन जाते हैं ठाकुरमार स्वामी जी की अतिथि पूजा कहा दिन उसे तरह से इनविटेशन फिर देने की जरूर नहीं पड़ती वो जब फूल किले से वो जो है मधुमक्खी अपने से वो ए जाति है अभी अपने आश्रमों में देखेंगे धीरे-धीरे करके वो मतलब पहले पहले जो थे की आज ही में वो जय राम वाटिका वो वर्णन पढ़ रहा था की अभी मां थी उसे समय तो इतने कुछ-कुछ लोग जाते थे दो-तीन पांच दो तीन पांच करके लोग मां के पास में जाते थे और मां के पास में आशीर्वाद लेते थे और ऐसे कई दिन गए भी थे की कोई जय नंबर टीम नहीं जाता और मां फिर ठाकुर के सामने देख करके हाथ जोड़कर के वो बोलती है की ठाकुर आज के कुछ केले अलोना एक्टिव छैलोना एक्टिव मेलो नमक ठाकुर इस तरह से वो तैयार किया था उनका मां इस तरह से गठित किया था की जगत मातृ रूप में वो प्रतिष्ठित हो चुकी थी अभी कोई भक्ति कोई लड़का बच्चा उनके पास में नहीं आता है उनके ऊपर कृपा नहीं करती है तो मां को ऐसा लगता है की अरे मेरा इस जगत में आने का क्या प्रयोजन है यदि मैं किसी बच्चे को उसको आशीर्वाद देने ही शक्ति हूं उसको दीक्षा नहीं दे शक्ति हूं तो मां इस तरह से ठाकुर को बीच-बीच में ऐसा हाथ जोड़कर के पूछती थी की ठाकुर आज के न्यूज़ खेल ले लो ना ठाकुर आज एक भी बच्चा आया नहीं मेरे पास में ऐसा होता था और कभी आप भी जाएंगे तो दो कर पांच ऐसा करके आएंगे क्योंकि रास्ता जो है की ट्रांसपोर्टेशन सुविधा ठीक नहीं थी वो कितना ही वह जो कड़ाव कीचड़ हो जाता था माटी से तो वो दृष्टि होने से बारिश होने से तो बहुत कम लोग आते थे किंतु यही मां का जब बेहद देहांत हुआ महासम्मती हुई इसके बाद में जय राम बाटी में जब मातृ मंदिर की रचना हुई मातृ मंदिर का कंस्ट्रक्शन हुआ जब उसका मंत्र मंदिर का जी दिन उसे दिन का जो वर्णन जो है मैं आज सुबह को ही पढ़ रहा था इतना सुंदर वर्णन है हजारों हजारों लोग कहां कहां से पूरे मतलब भारत में से वो आकर के वहां पर वह प्रसाद का रहे हैं वहां पर संकीर्तन हो रहा है वह जो शरद महाराज वहां पर थे वह एक के बाद एक लोगों को दीक्षा पे दीक्षा दिए जा रहे हैं जरूर मठ में जितने लोग कठे नहीं कुत्ते उससे कहानी ज्यादा लोग जो है जयरामबाती मातृ मंदिर के वो जो उसके वो जो विमो ये जो कंसेंरेशन सेरेमनी कहते हैं उसमें वो उपस्थित हो गए थे वो आसपास के गांव से गरीब महिलाएं औरत एक के बाद एक दाल के बाद दाल उनके आने लगे और वो मंदिर में वो जो संकीर्तन भजन में योगदान दिया वो रात को भजन किया और भी डेरी रात हो गई है तो कहां वो अपने गांव वापस जाएंगे तो वहीं रास्ते पे ही लाइन लगाकर के सब सो गए कोई मतलब जो अच्छे घर की महिलाएं हैं औरत है उन्होंने देखा की जहां पे पंगत है वहां पे उछिष्ट खाना पड़ा है तो वो उच्चिष्ठ तनाव है तो वहां से लेकर के वो प्रसाद ग्रहण करके ए रही है देखिए वो संभ्रांत घर की महिलाएं और कुछ तो पड़ा है वो एक कोनी में वहां से वह अन्ना लेकर के का रही है क्यों क्योंकि मां के मंदिर की वो जो पंगत है वहां पर यह अन्ना बना है वहां पर लोगों ने अंग ग्रहण किया ये तो महाप्रसाद जहां पर कीर्तन हो रहा था वह कीर्तन भूमि की राज और राजगढ़ धूल है वो सब भक्ति लोग अच्छे-अच्छे घर के बड़े-बड़े घर के जमींदार भगत ऐसे सब को राजगण लेकर के वो जहां पे कीर्तन हुआ था धौली लेकर के अपने सर पे दाल रहा है और अपने वो किसी वो पॉकेट में वो कहानी वो ऐसा मंडल बनाकर के अपने घर ले जा रहा है की इतनी पवित्र राजकरण और कहां मिलने वाली है भगवान कृष्णा चैतन्य वो जो गौरांग महाप्रभु वो जब कीर्तन किया करते थे तब इतनी पवित्र रचना वो वहां पे होती थी और वो एक दिन था और ये एक दिन है तो देखिए की मां के रहते बेचारे दो पांच भक्तों के लिए मंत्र मंदिर का जब गठन हुआ मंत्र मंदिर जब बना 2000 लोग कहां कहां से ए करके वहां पर मां का दर्शन करके धन्य होते हैं तो ऐसे ही वह जो भी है जब युद्ध क्षेत्र धर्म क्षेत्र में युद्ध होगा युद्ध में यदि हम जीत जाएंगे और हृदय का जो कमल है वो प्रस्फुनित हो जाएगा तो अपने आप जो है मधुमक्खियां वो मधु पान करने के लिए इकट्ठा हो जाएगी हमको किसी को दावत देने की जरूर नहीं है और कई ऐसे वो गुप्त ब्रह्मा ज्ञानी जैसे वो राजा महाराजा विज्ञान आनंद जी को बोलते थे डेक्ष और विज्ञान आनंद के अध्यक्षों पेशेंट थे पेशेंट यानी की वो हरि प्रश्न हमारा इनको ये लोग लाड में पैशन करके बुलेट थे तो राजा महाराजा स्वामी जी तो राजा महाराज कहते हैं की पेशेंट को गुप्त ब्रह्मज्ञानी किस तरह से वो स्वामी जी के घर का स्वामी जी का वो जो गंगा का किनारा है वह स्वामी जी का घाट बना रहे हैं और कितना मेहनत करना पड़ता है धूप है और मैन उसे थूक के भीतर में वो मजदूर लोगों के साथ में कम करना यानी उन लोगों का टेंपर भी तो उसे टाइप का होता है ना वह लेबर लोगों का तो उनके साथ में कम करना इतनी धूप है खाने पीने का कोई ठीक नहीं है एकदम शांत कुछ चित से कम किया जा रहा है एक स्वामी जी की कहानी है ना सनी होगी बहुत सुंदर बात है एक दिन वो विज्ञान महाराज जो पोस्ट बना पोस्ट घाट वो घाट बनाने के लिए कम कर रहे हैं वो खड़े हैं सुबह से खड़े हैं दोपहर भर रुद्रा है और एकदम इतना तप है इतना वो मैन प्रचंड रोड है प्रचंड तप है उसमें खड़े हैं गला सुख जा रहा है किंतु पानी पीना है भजन करना है वो सब बाद में पहले तो वो जो कम है उसको ठीक करो ऐसा करके वो कम कर रहे हैं उसे समय स्वामी जी अपने यदि बेलूर मठ में गए होंगे तो दो माल का वह जो मैथवादी है पुराना मैथवादी तो पहले वो फर्स्ट फ्लोर में स्वामी जी का रूम है तो अपने स्वामी जी के रूम के सामने वो वरांडा है गंगा को फेस करके तो उसे वरांडा में स्वामी जी खड़े थे नीचे में देखा विज्ञान महाराज बिना पानी पिए प्यास को कम कर ही रहे इतनी धूप में तो स्वामी जी ने क्या किया एक शरबत का एक गिलास था उनके पास में तो शरबत था उन्होंने पी लिया पीलिया तो थोड़ा सा एक-दो बूंद जितना बच्चा होगा अपने एक सेवक को बोला की जाकर के विज्ञान महाराज को यह देख के आओ तो वो सेवक जा करके वो खाली सेवक भी सोच रहा है की स्वामी जी ऐसा मजाक क्यों करेंगे ये तो मैंने हंसी मजाक गुरु भाइयों में चला है किंतु विज्ञान महाराज बेचारे भूखे प्यास खड़े हैं इस तरह से वो शरबत का ग्लास था पी लिया एक बूंद बच्चा है ऐसा उनको देना ये तो बड़ा ही करूर मजाक है स्वामी जी ने ऐसा क्यों किया सेवक भी ऐसा सोचते सोचते जाकर के बड़े संकोच के साथ में बोला महाराज विज्ञान महाराज को की स्वामी जी ने भेजो है तो अभी विज्ञान महाराज जी बेचारे सोच में पद गए की स्वामी जी मेरे साथ में इस तरह से मजाक क्यों करेंगे किंतु वो तो गुरुगत प्राण है स्वामी जी के ऊपर में आघात भक्ति श्रद्धा है तो वो गिलास लिया और एक दो बूंद एक बूंद दो बूंद जो शरबत बच्चा था वो पी लिया और जैसे ही पिया उनकी प्यास भूख जो भी है वो पूरा वो मिट्टी गया और ऐसा मां जैसे की अमृत पिया हो इस तरह से वह मजबूत सख्त और नरेश मेट जिसको बोलते हैं इस साउंड को मिला की जैसे की वो उनके जन्म जन्म की प्यास बुझ गई हो तो उन्होंने देखा की हां देखिए की स्वामी जी सही सही वो शिवा के अवतार है स्वामी जी सही सही ठाकुर ने वैसा ही स्वामी जी को दलपति के रूप में उनके जो सन्यासियों सन्यासियों के नेता के रूप में वैसे ही नहीं सिलेक्ट किया तो किंतु वो सब करने के लिए वो सब अपने के लिए अपने मां में जो मूल युद्ध सब समय जो चला राहत है उसमें हमको विजय प्राप्त करनी होगी वरना तो फिर एक बात है की वो जो स्वप्न धर्म से पर्यटन महत्व भारत गीता में ऐसा भी कहा गया है अर्थात यदि पूरा युद्ध इस जन्म में नाही जीत पे थोड़ा बहुत भी एक-दो सत्र को मार दिया और फिर हम खुद मा गए कोई गम नहीं अगले जन्मो में फिर से तलवार उठाएंगे फिर से त्रिशूल उठाएंगे फिर से शत्रुओं का वध करने के लिए तत्पर होंगे