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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः आज मैं सोच रहा था कि किस टॉपिक पर बोला जाए वैसे तो स्वामी जी वाला अपना टॉपिक ही है किंतु मैंने सोचा कल जैसे कि मैंने आपके साथ में सब फोटोग्राफ शेयर किए थे मैं गया था वहां पर ट्राइबल विलेज में और आपको तो पता है शायद मैंने पहले भी कहा था मैंने काफी समय राजी में बिताया था यही इसी तरह ट्राइबल डेवलपमेंट करते-करते तो वह सब पुराने दिनों की बातें वह सब वापस याद आ गई वहां पर भी इसी तरह के वो पहाड़ थे नदियां थी झरने थे और छोटे-छोटे गांव मिट्टी के बने घर और वही यह सब छोटे-छोटे बच्चे वहां पर खेल रहे थे यही बात है यहां पर जो एक डिफरेंस मैंने देखा जो कि वहां पर नहीं था वह है कि गवर्नमेंट स्कूल काफी जगह पर चल रही है यहां पर जो कि रांची में नहीं थी रांची में हमारी ही स्कूले थी हमने ही बहुत सारी स्कूल एस्टेब्लिश की थी तो एक तरह से देखें तो वह एक डेवलपमेंट हमको यहां पर देखने को मिला एक्स्ट्रा अदर देन दैट जियोग्राफी और ह्यूमन इंटरेस्ट प्राय सभी कुछ एक तरह का लगा तो मैंने सोचा क्यों नहीं मैं कुछ इस तरह से शेयर करूं आज कि मेरा यह जो इंटेलेक्चुअल डेवलपमेंट है किस वजह से मैं इस रास्ते की ओर आया कौन से विचार कौन सी विचारधाराएं मुझे व राची ले गई थी और राची से यहां तक ले के आई तो लेट मी थिंक थोड़ा सा पर्सनल भी हो जाएगी बातें जनरली जिसको मैं अवॉइड करता हूं किंतु फिर भी लेट मी ट्राई कि इंटेलेक्चुअल डेवलपमेंट मेरा किस तरह से हुआ है क्योंकि ठाकुर मुझे सीधे यहां पर नहीं लेकर आए बहुत मुझे गोलगोल घुमाया है तो कभी-कभी लगता था कि इतना गोल घूमने का क्या तात्पर्य है और कभी-कभी लगता है कि नहीं उससे मेरा एक जो इनर डेवलपमेंट होना था वह बड़े ही शोर फूटिंग पर बड़े ही स्ट्रांग फाउंडेशन पर हुआ है यदि मैं सीधा आ जाता तो बहुत सारी चीजें ऐसी रह जाती जिसके बारे में मेरी अंडरस्टैंडिंग अल्प ही रह जाती या तो नहीं मत मात्रा में हो जाती सो लेट मी ट्राई मैं जब 10थ में पढ़ाई कर रहा था तब की बात है मैं जब स्कूल जाता था तो देखता था रास्ते में कुछ उस समय मुझे नहीं पता था किंतु अभी मुझे पता है कि कुछ गरीब लोग वहां पर मैदान में रहते थे तो मैदान में क्यों रहते हैं खुले में क्यों रहते हैं घर क्यों नहीं है उनके पास में और यह सब प्रश्न मुझे बड़े सताते थे जब मैं उनके बच्चों को देखता था वहां पर खेलते हुए स्कूल में नहीं जाएंगे पहनने को कपड़े नहीं है बाल बेर बिखेर है चेहरे पर धूल मिट्टी लगी हुई है कौन सी मां अपने बच्चे को इस तरह से छोड़ेगी इस तरह के बच्चे को देख कर के क्या मां को नहीं आएगी मां उसको क्या ठीक-ठाक कपड़े वगैरह नहीं पहनाए गी व उसको स्नान वगैरह नहीं करवाएगी खाना नहीं देगी क्योंकि देख रहा हूं कि वह वहां पर जो कूड़ा कचरा पड़ा है उसमें से ये लोग खाना खोज रहे हैं तो यह जो डिस्पेलर क्या इन लोगों को सहाय करने वाला कोई नहीं है क्या इतना बड़ा गवर्नमेंट इतने सारे लोग जो कि मोटर में गाड़ी में बैठ कर के यहां पास से गुजर रहे हैं तो तो क्या उनको ऐसा नहीं लगता कि थोड़ा देर खड़े होकर के थोड़ा उनको शेयर करें उनके साथ में खाना शेयर करें रुपया शेयर करें क्यों मतलब गरीब लोगों को इस तरह से हमने क्यों छोड़ दिया है जैसे कि कंपलीटली तर छोड़ दिया है यह प्रश्न मुझे उस समय सताता था तो एक दिन मैंने क्या किया 10थ का वेकेशन था 10थ में मैं पढ़ता था 10थ का वेकेशन था व मेरा एक मित्र था तो मैंने उसको बोला चलो एक काम करते हैं वहां पर व जो ग्राउंड है वहां पर हम च जाते हैं और यह जो गरीब बच्चे हैं जो भिखारी के बच्चे सब उनको कुछ हम पढ़ाई लिखाई सिखाते हैं तो वह पहले तो थोड़ा सा उसको अच्छा लगा कि हां हां चलो यह सब करते हैं किंतु बाद में वह भी थोड़ा सा टेंशन में आ गया कि यह सब करने से उसके माताजी पिताजी क्या कहेंगे उसको मैंने कहा सोचो मत इतना सब कुछ चलो चलते हैं तो हम लोग गए वहां पे और देखा कि वोह कुछ बच्चे खेल रहे हैं तो अभी बच्चों के साथ में डायरेक्ट बात करने से तो कोई लाभ नहीं मैंने सोचा उनके पेरेंट्स के साथ बात की जाए कि हम लोग आएंगे नेक्स्ट डे और ये पार्टिकुलर टाइम प शाम को आएंगे कुछ सिखाएंगे बच्चों को यदि हो सके तो आपकी यदि अनुमति है तो बिना उनकी अनुमति के तो होगा नहीं तो उन लोगों ने अभी मैं खोज रहा हूं दो-तीन बड़े पेरेंट्स को एक दो आदमी दिख गए तो मैंने उनको बताया कि हम लोग आपके बच्चे को कुछ सिखाना चाहते हैं यहां पर आएंगे तो मैंने सोचा था कि वे लोग बड़े ही अभिभूत हो जाएंगे अरे वह हमारे बच्चे को कोई मुफत में कुछ सिखा रहा है हम तो स्कूल में नहीं भेज रहे तो कोई आ कर के सिखा रहा है तो बहुत अच्छी बात है किंतु ऐसा नहीं वो एकदम बड़ा ही सीरियसली ये हो गया सशंकित हो गया क्यों भई आप यहां पे आएंगे क्यों हमारे बच्चों को सिखाएंगे आपको इससे क्या मिल रहा है आपका क्या फायदा है तो मैंने कहा फायदा कुछ नहीं है आप यह मत सोचिए कि वो उनके मन में बाद में मुझे पता चला कि उनके मन में ऐसा लग गया कि हम उनके बच्चों को उठा कर के ले जाएंगे ये जो पूरी गैंग जो होती है ना इस तरह से बच्चों को चुरा करके ले जाती है और उनसे पास में से भीख मंगवा है यह सब बहुत चलता है और खास कर के ऐसे बच्चे जिनका कि कोई आसरा ना हो जिनके पेरेंट्स बिल्कुल ही असहाय हो ऐसे बच्चों के साथ में तो ऐसा बहुत कुछ होता है तो ला बड़ा ही इतना डाउटफुल हो गया तो यह देख कर के मेरा मित्र थोड़ा घबरा गया वो बोला कि नहीं नहीं कल से नहीं आना है और मैं तो तुम्हारा साथ नहीं दूंगा बोलकर उसी दिन व चला गया मैंने थोड़ा सा भी पहले तो मुझे भी थोड़ा सा डर भी लगा और थोड़ा सा मैं निरत्सु हूं ऊपर से मेरे पर ये लोग डाउट करते हैं किंतु मैंने हिम्मत नहीं हार करके दूसरे दिन में फिर से गया फिर से मैंने वही बात की दूसरे दिन देखा कि उनका टेंपर थोड़ा सा ठीक हुआ है उनको लगा कि नहीं नहीं यह आदमी लड़का जो है मैं तो स्कूल में ही पढ़ता था 10थ का वेकेशन था तो इतना कोई बुरा नहीं लग रहा है उसकी बातों से तो उन्होंने सोचा कि अच्छा ठीक है आप फिर एक दिन आइए फिर से एक बार बात करेंगे तीसरे दिन में गया यही बात करने के लिए क्या आप परमिशन देते हैं तो तीसरे दिन उन लोगों ने कहा अच्छा ठीक है आप आइए एक दिन देखते हैं तो चौथे दिन में गया तो देखा कि बच्चे वैसे ही खेल रहे हैं मैदान में चार पांच वो महिलाएं खड़ी थी यह देखने के लिए कि मैं वो कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहा हूं तो मैंने अभी खेलते उन्होंने कहा यह है बच्चे ले लीजिए अभी सिखाइए जद जो सिखाना है तो हम लोग तो स्कूल में पढ़े हैं तो स्कूल में हम हम लोग बड़ा ही सिस्टमिक सब कुछ देखे हैं कि सब बच्चे एक साथ में लाइन में बैठ जाते हैं छोटे बच्चे तो जमीन पर बैठेंगे बड़े होकर के बेंच प बैठते थे टीचर आएंगे तो सब खड़े होंगे फिर टीचर सिखाएंगे तो सब बड़ा ही सिंसियर लिखाई पढ़ाई करेंगे और टीचर चले जाएंगे तो फिर से खड़े होकर के उनको विदाई देंगे यह सब स्कूल में देखा है आई वाज एब्सलूट नोट एट ऑल प्रिपेयर्ड कि जो हुआ नेक्स्ट वो एक बच्चा वहां पे दौड़ रहा है तो दूसरा वहां प दौड़ रहा है मैं पकड़ पकड़ करके एक जगह प बिठा रहा हूं जैसे ही दो बच्चे साथ में बैठते हैं साथ-साथ में झगड़ा मारामारी ऐसा सब चालू कर देते हैं मने उनका लाइफ कैसा है देखिए कि बचपन से ही ना ही उनके पैरेंट्स है ना ही अपने समाज में उनके ऊपर में थोड़ा सा भी ध्यान दिया तो उनका लाइफ जैसे कि कंप्लीट अन डिसिप्लिन कंप्लीट फेरल इंग्लिश में एक शब्द है गुजरा हिंदी करेंगे तो कहेगा जंगली वो जंगली पशु की तरह वे लोगों को बड़ा किया गया है तो उन लोगों को ये कांसेप्ट ही नहीं है कि एक साथ में बैठे कुछ मैं पढ़ा हं तो सीखे कंसंट्रेशन जैसा कोई नाम निशान नहीं है और उस दिन में पहले दिन जो पढ़ा उनके साथ में था एक घंटा मैंने स्ट्रगल किया मैं एकदम उस दिन तो मैं इतना डिप्रेसो गया था फिर मैंने छोड़कर मैं चला गया मैंने कहा कि ये तो इंपॉसिबल है उनको कुछ भी सिखाना इनके साथ में कुछ भी करना क्या किया जाए किंतु दूसरे दिन में फिर से गया मैंने कहा कि नहीं इतना आसानी से हिम्मत नहीं हार है कैसे भी करके हम प्रयास करेंगे तो गया तो देखा मैंने आश्चर्य की बात देखी कि सभी बच्चों के चेहरे धुले हुए हैं मैंने धूल मिट्टी से साफ कर दिए गए हैं बालों को थोड़ा बहुत सजा करके रखा है कपड़े भी थोड़े ठीक-ठाक दिख रहे हैं और सब लाइन में बैठे हैं मैंने कहा यह क्या हो गया तो फिर वहां पे दो-तीन बूढ़ी अम्माएं थी तो उन्होंने कहा कि हमने कल देखा कि आपने कितना मेहनत किया इन लोगों के लिए ये बच्चे तो वैसे ही है कोई उनके ऊपर ध्यान देने वाला नहीं और वैसे ही घूमते फिरते रहते हैं झगड़ा करते हैं एक दूसरे को मारते हैं हम लोग देखते भी नहीं किंतु आपने यदि इतना स्ट्रगल किया इनके साथ में तो लगा हमको कि नहीं हमको भी साथ में थोड़ा कोऑपरेट करना चाहिए तो इनको सबको एकदम शांत करके बिठाया था अभी जैसे ही मैंने पढ़ाना शुरू किया कंसंट्रेशन तो कुछ आएगा नहीं एक दो मैंने कविताएं हैं या तो फिर यह नंबर्स से अभी मैंने तो पढ़ा लिखाई हम लोग जो करते हैं सिखाना तो हमको आता नहीं है और ये बच्चे जिन्होंने कभी कुछ नहीं सिखा है 8 न 10 साल की उम्र के बच्चे होंगे कभी स्कूल नहीं गए उनको हम क्या सिखाएंगे मेरा तो कोई बैकग्राउंड नहीं है तो मैं स्ट्रगल कर रहा हूं मैंने जो सीखा वो समझाने की यह मैथमेटिक्स है मतलब व नंबर्स है ये मल्टीप्लिकेशन है ये लेटर्स है वगैरह वगैरह जो कि एक्चुअली स्कूल में पढ़ाना चाहिए यह जो इनफॉर्मल एजुकेशन के लिए यह सब कोई काम का नहीं है वह सब मुझे बहुत बाद में पता चला था उस दिन तो मैं वैसे ही जो फॉर्मल एजुकेशन में फर्स्ट स्टैंडर्ड में जो सिखाया जाता है वह समझाने का प्रयास कर रहा हूं कंसंट्रेशन तो बच्चों का कभी होगा नहीं किंतु मैंने देखा जैसे ही एक बच्चा खड़ा होगा या दूसरे के साथ में झगड़ा करेगा तो वोह जो दो-तीन बूढ़ी अम्माएं वहां प बैठी थी उसको ऐसा मारेंगे वो चुपचाप फिर से बैठ जाएगा और मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता बच्चों को मारने का वह तो हमारी थिरी में आता ही नहीं है कभी भी तो मैं एकदम यह हो जाता था एजिटेटेड मैंने उसको क्यों मारते हो ऐसा करके क्यों मारते हो भाई ये तो छोटा बच्चा है वो बोले वो माता जी कहती है कि हम उसको यदि नहीं माने मारेंगे तो आपकी एक भी बात वोह सुनेगा नहीं तो मैंने कहा अभी आपके बच्चे हैं आप जाने बेटर मैं क्या बोल सकता हूं और मैंने तो डिसिप्लिन करने का प्रयास किया देखा कि कुछ होने हो नहीं रहा है तो जो भी है व किंतु दैट वाज वन डे कि मुझे थोड़ा सा सेटिस्फेक्शन हुआ कि चलो एटलीस्ट पेरेंट्स तो यह स्वीकार करते हैं कि मैं जो एक जेनन पर्पस के साथ में वहां पर जाता हूं और जेनुइनली उनको कुछ सिखा रहा हूं तो दैट वाज मैंने बहुत ही मुझे अच्छा लगा उस दिन उसके बाद में मेरा वेकेशन था वो 10थ का वो जो एक दो महीना जो होता है आई थिंक वन मंथ मैं वहां पर गया होंगा तो एक महीने में किंतु मैंने देखा कि बच्चों के डिसिप्लिन में उनके पेरेंट्स के इंटरेस्ट में और मेरी सिखाने की एबिलिटी में कितना परिवर्तन आ गया है बाय द एंड ऑफ द फर्स्ट मंथ और फिर जब मैंने कहा कि अभी तो मैं नहीं आ पाऊंगा मेरा स्कूल स्टार्ट हो रहा है और स्कूल में तो जाना पड़ेगा और स्कूल में सब 10थ 11थ और 12थ का जद प्रिपरेशन करना है तो इस तरह से एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी के लिए तो समय नहीं है तो वे लोग बेचारे बड़े ही दुखित हो गए थे बड़े ही यह हो गए थे किंतु अभी क्या किया जाए जो है सो है तो ट वाज माय फर्स्ट फॉर फर्स्ट इनरोड इनटू दिस टाइप ऑफ थिंकिंग दिस टाइप ऑफ लिविंग कि अपना जो जीवन है क्या हम उसमें से कुछ भी नहीं दे सकते इन लोगों के लिए जो कि डिस्पेस फॉर्चूनेटली थोड़ा बहुत गरीब है और कैसे भी करके काम निकाल रहा है ये लोग तो बिल्कुल सड़क पर रहते हैं उनका जीवन और मृत्यु इसका कोई कीमत ही नहीं है मैंने नजरों से देखा कि कब कोई मर जाएगा ये लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता अरे वो मर गया मर गया मतलब क्या अरे कोई शौक नहीं दुख नहीं ताप नहीं य यहां पर बच्चे मरते रहते हैं जैसे कि एक क्या कहेंगे कूड़ेदान के भीतर में और कूड़ेदान के भीतर में ही जन्म होता है वहीं पर मृत्यु होता है मनुष्य के जीवन का जैसे कोई कीमत ही नहीं है ट वाज तो अभी यह जो थिंकिंग किंतु मेरा जो स्टार्ट हुआ उसके बाद में जब स्कूल स्टार्ट हुई तो मैंने सोचा कि इसके पीछे का राज क्या है एक्चुअली एक तो यह है कि हम लोग बड़े ही निष्ठुर है समाज बड़ा निष्ठुर है यह सब तो चलो अभी सोच कर के कोई लाभ नहीं है समाज को तो आप कुछ चेंज नहीं कर सकते व्हाट कैन आई डू मैं इन लोगों के लिए क्या कर सकता हूं तो यह सोचते सोचते अभी मैंने सोचा कि यदि इसी तरह से मैं अपने दो हाथों से एक सर लेकर के यदि उनको सिखाने का प्रयास करूंगा बात ज्यादा दूर आगे नहीं बढ़ेगी देयर शुड बी सम लार्जर सॉल्यूशन ऐसा कोई बड़ा सोल्यूशन होना चाहिए भारत की उस उस समय की पॉपुलेशन समथिंग लाइक एक करोड़ 100 करोड़ तो हो चुकी थी 100 करोड़ ना सवा करोड़ तो यह जो पॉपुलेशन है अपनी उसमें से मैंने स्टेटिस्टिक्स थोड़ा स्टडी स्टार्ट किया और उस समय क्या था कि मैं न्यूज़पेपर वगैरह काफी पढ़ पढ़ता रहता था तो एक जनरल एक मेरा बड़ा अच्छा अंडरस्टैंडिंग था कि क्या हो रहा है सोसाइटी में तो मैं ये सब स्टेटिस्टिक्स पढ़ता रहता था कि 50 पर लोग पुअर है और जो यूएन यूनाइटेड नेशंस की ये जो पॉवर्टी की डेफिनेशन है इट सेल्फ कि मैंने दिन में इतना रुपया आपका होगा इससे कम यदि आपका र आपकी आय होगी आमदनी होगी तो आप गरीब है वो जो डेफिनेशन जो है इट सेल्फ वो बड़ी ही लोअर लेवल की है माने वो बड़े ही गरीब लोग होंगे वही उस डेफिनेशन के बिलो आते हैं और भारत में ऐसे डेस्प्रिंग 50 पर के आसपास थी 50 पर 40 पर और इन जनरल पुअर थे और भी ज्यादा थे तो मैंने यह सब स्टेटिस्टिक्स पढ़ते हैं किंतु जब तक नजरों से देखते नहीं है तब तक तो हम लोगों के हृदय कोप नहीं करता है ना तो मैं स्टेटिस्टिक्स पढ़ते आता था एक इंटेलेक्चुअल कंसर्न था किंतु साथ-साथ में ही यह सब चीजें मैंने नजरों से देखी और हृदय को जब स्पर्श की तब मैंने कुछ ज्यादा ही सीरियसली इसके ऊपर सोचना स्टार्ट किया तो उस समय अभी न्यूजपेपर पढ़ते हैं तो न्यूज़पेपर में क्या है कि वह ऊपर ऊपर से सब शैलो जिसको कहते हैं ना ऊपर ऊपर से सब कुछ समझाया जाता है यदि आपको कोई भी सब्जेक्ट में मास्टरी महारत करनी है महारत हासिल करनी है तो आपको बड़ा ही डीप में उसमें जाना पड़ेगा तो मैं सोच रहा था कि क्या करें क्या नहीं करें तो बाय दैट टाइम मेरे हाथ में अ एक वैसे ही पढ़ते पढ़ते ही एक आईडिया जो जनरेट होते हैं एक आईडिया जनरेट हुआ राइज एंड फॉल ऑफ द सिविलाइजेशन ऑन अ लार्जर स्केल कि क्यों कि कोई किसी भी सिविलाइजेशन का राइज होता है वो पनपती है बढ़ती है फूलती है उसका विकास होता है और अल्टीमेटली क्यों उस सिविलाइजेशन का रास होता है उसका पतन होता है अंतिम आखिर में उसका संहार हो जाता है यह जो राइज एंड फॉल ऑफ द सिविलाइजेशन यह आईडिया मुझे इतना अच्छा लग गया कि मैंने सोचा इसके बारे में ज्यादा डीप में पढ़ाई लिखाई की जाए तो फिर मैं फ्रॉम दैट मोमेंट ऑनवर्ड दैट पॉइंट नव ऑनवर्ड पढ़ाई लिखाई वगैरह छोड़ कर के अपना स्कूल वगैरह छोड़ कर के मैंने अपने पर्सनल स्टडी में ज्यादा ध्यान दिया उस समय मेरा एक इतना अकल नहीं था हो सकता है कि मैं इस सब्जेक्ट को लेकर के शायद स्टडी कर सकता था किंतु मुझे ऐसा मेरे मन में ऐसा था उस समय कि पढ़ाई लिखाई यदि ज्यादा करेंगे तो संसार की ओर चले जाएंगे अपना एक छोटा सा एक अपना बुद्धि हो जाएगा एक स्वार्थ परता अपने में आ जाएगी मेरे खुद के और फैमिली के ऊपर ज्यादा और कुछ मैं सोचूंगा नहीं एंड आई वांट टू डू समथिंग ग्रेटर इन माय लाइफ आई वांटेड टू कंट्रीब्यूट समथिंग फार रिचिंग तो वो कैसे हो सकता है तो यह जो सब्जेक्ट था राइज एंड ए फॉल ऑफ द सिविलाइजेशन इसके बारे में मैंने सीरियसली सोचना शुरू किया और अभी यह सब्जेक्ट जद ज्यादा डिटेल में स्टडी करना है तो व्हाट इज द मींस ऑफ डूइंग दैट दैट इज स्टडिंग हिस्ट्री तो वहां पे हमारे शहर में एक बहुत बड़ा लाइब्रेरी था काफी लाइब्रेरियंस बहुत अच्छा लाइब्रेरी की दृष्टि से किताबों की दृष्टि से वह शहर था तो मैंने बार-बार लाइब्रेरी में जाक के ऐसी बहुत सारी किताबें पढ़ी एट द एंड ऑफ द डे मुझे धीरे-धीरे करके समझ में आने लगा कि हिस्ट्री है क्या और किस तरह से यह हिस्टोरिकल डेवलपमेंट होता है क्योंकि आज हमारे समाज में जो हो रहा है उसका यदि हिस्ट्री उसका डेप्थ आप नहीं समझेंगे तब तक हम आज क्या हो रहा है वो इतना अच्छे से नहीं समझ पाएंगे हिस्टोरिकल डेवलपमेंट समझना बड़ा ही आवश्यक है और वो भी किसी एक सोसाइटी का या एक नेशन का या एक समाज का नहीं ग्लोबल हिस्ट्री क्योंकि कोई भी देश कोई भी सिविलाइजेशन अपने आप में तो कुछ ज्यादा हासिल नहीं कर पाती उसको तो इंटरेक्शन करके बहुत कुछ डेवलप होता है कोई भी सिविलाइजेशन अपने आप में इंडिपेंडेंट नहीं है इवन जो कि एंसटिटाइट थी यह ंग हो मोहेंजो दड़ोस गैरह वह भी आपस में उनका ट्रेड एंड रिलेशनशिप बड़ा ही स्ट्रांग था तो आपको ग्लोबल हिस्ट्री पढ़नी होगी किस तरह से ग्लोबल सिविलाइजेशंस जैसे कि वेस्टर्न सिविलाइजेशंस है जैसे कि हमारी ईस्टर्न सिविलाइजेशन से और फिर यह साउथ उस समय अफ्रीका की सिविलाइजेशन जैसे कि नाइल ली सिविलाइजेशन किस तरह से डेवलप हुई उनका किस तरह से विकास व्हाट वेर द फैक्टर्स कि जो कि सिविलाइजेशन के डेवलपमेंट में वो मेजर उनका इन्फ्लुएंस होता है तो जैसे-जैसे यह मैं पढ़ता गया वैसे-वैसे मुझे समझ में आता गया कि कोई भी सिविलाइजेशन माने उस समय की मेरी अंडरस्टैंडिंग में बता रहा हूं उस समय जो मुझे समझ में आता गया कि कोई भी सिविलाइजेशन है व यदि डेवलप होती है तो इसके पीछे का सबसे बड़ा राज होता है यह जो लर्निंग क्योंकि दो चीजें हैं एक तरह की सिविलाइजेशन जद वह लर्निंग छोड़ कर के अंधश्रद्धा में या तो फिर वॉर फेयर में जद डूब जाएगी मिलिटरी जम जिसको कहते हैं ये जब वो सिविलाइजेशन मिलिटरी एडवेंचर्स में चली जाएगी तो वो उसका खुद जो जिस पर अटैक करता है उसका तो विनाश होता है खुद का भी विनाश होता है और दूसरी सिविलाइजेशन है जैसे कि जिसका कल्चरल डेवलपमेंट होता है उसका साइंटिफिक डेवलपमेंट होता है उसका इन जनरल डेवलपमेंट इन लर्निंग होता है और उस ऐसे दो क्लासिकल एग्जांपल है एक है एथेंस दूसरा है स्पार्टा अभी एथेंस दोनों ग्रीक सिटी स्टेट थे एथेंस में क्या था एक के बाद एक फिलोसोफर साइंटिस्ट उन लोगों का जन्म होना शुरू हुआ और उन्होंने एक जो कंट्रीब्यूशन किया वो जो आज भी जो एथेंस के जो साइंटिस्ट थे सोक्रेट था प्लेटो था एरिस्टोटल था उनको हम आज भी याद करते हैं आज भी उनका जो कंट्रीब्यूशन है उसको स्टडी किया जाता है जब जबकि स्पार्टा क्या था स्पार्टा वाज अ मिलिटरी स्ट्रेट मिलिटरी स्टेट उसने क्या है बहुत सारे लोगों पर आक्रमण करके बहुत सारे लोगों को गुलाम बना कर के रखा था अभी उनका एक ही काम है स्पार्टन जो रूलिंग क्लास था उनका एक ही काम था कि कैसे भी करके इन गुलामों को कंट्रोल में रखा जाए तो पूरा सोसाइटी मिलिटरी एडवेंचर की ओर ओरिएंटेड था वहां पर बच्चों को बच्चियों को बचपन से ही ये जिम्नास्टिक में भेजा जाता था फिजिकली स्ट्रांग होना है युद्ध कैसे करना है वो सीखना है और गुलामों को कैसे कंट्रोल में किया जाए यह सीखना है आज देखिए कि 2000 साल के बाद में एथेंस का जो कंट्रीब्यूशन है आज भी हम याद रखते हैं जबकि स्पार्टा हिस्ट्री की किताबों में ही चला गया वो वॉर फेयर के करते-करते ही उसका वह समाप्ति हो गई उसकी सो दैट वाज माय फर्स्ट लेसन कि लर्निंग जो है दैट इज द मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग इन द डेवलपमेंट ऑफ अ सिविलाइजेशन वो फिलोसॉफिकल लर्निंग हो कल्चरल लर्निंग हो आर्ट हो फिर साइ हो टेक्नोलॉजी हो एनी टाइप ऑफ लर्निंग इज वेरी एसेंशियल फॉर द डेवलपमेंट ऑफ सिविलाइजेशन और जैसे ही मिलिटरी एडवेंचर में आप गए वहीं पर आपका खात्मा हो गया आपके साथ में जो लोग रहते हैं उसका भी समाप्ति हो गई सो दैट वाज माय फर्स्ट अंडरस्टैंडिंग और जैसे-जैसे करके मैं इसको और ज्यादा स्टडी करता गया मैंने देखा कि अभी देखिए हम लोगों के साथ में इंडिया के साथ में खास करके प्रॉब्लम क्या है कि इंडिया की हिस्ट्री को ई बहुत अच्छे से बहुत विषद रूप से से जो कि आम आदमी को एक्सेसिबल हो इस तरह से नहीं लिखी गई और दूसरा कि यदि हम अपनी रिसेंट हिस्ट्री को पढ़ते हैं तो हमको क्या जानने को मिलता है कि पहले इसने आक्रमण किया और हमारी पिटाई की फिर उसने आक्रमण किया फिर उसने आक्रमण किया ये जो पिछले 1000 साल की जो हिस्ट्री है वो हिस्ट्री जैसा है ही नहीं कुछ यदि फ्रीडम मूवमेंट के आगे यदि देखा जाए तो वो कुछ है कि हां चलो मने भारत एक हुआ भारत जागृत हुआ हमने फाइट बैक किया कैसे भी करके और हमको यह आजादी हा हुई वो कुछ पढ़ने लायक है किंतु यह जो प्री इंडिपेंडेंस हिस्ट्री है वह तो सब इस लॉन्ग लिटनी ऑफ डिप्रेशन माने जितना जितना पढ़ते जाएंगे उतना उतना डिप्रेशन में जाते जाएंगे और जोसको क्लासिकल हिस्ट्री कहते हैं हिस्ट्री ऑफ बुद्धिज्म हिस्ट्री ऑफ वैदिक एजस उस समय मेरे मन में ऐसा था यह विदेशी सब ऑथर्स को पढ़ कर के मेरे मन में ऐसा हो गया था सवार कि वह सब अंधश्रद्धा है है और वह सब कपोल काल्पनिक सब हिस्ट्रिया है भारत में कब था ऐसा वैदिक यु कौन कह पाएगा हिस्टोरिकल जिसको कि प्रॉपर हिस्ट्री कहते हैं एविडेंस बेज हिस्ट्री आर्कियोलॉजी बेज हिस्ट्री ऐसा तो कुछ है नहीं ऐसा एक मेरे मन में सवार हो गया था तो इंडियन हिस्ट्री को छोड़ कर के यह फॉरेन खास करके वेस्टर्न हिस्ट्री उसको ही मैंने बहुत ज्यादा पढ़ा था और वेस्टर्न हिस्ट्री पढ़ करर के क्या समझ में आता है पहले तो एक अंडरस्टैंडिंग हुआ कि यह जो लर्निंग है दैट इज द मोस्ट इंपोर्टेंट कंट्रीब्यूशन इन द सर्वाइवल ऑफ अ सिविलाइजेशन दूसरा एक जो बहुत ही इंपोर्टेंट लेसन है जो कि कि वेस्टर्न स्टडीज आपको समझाता है कि रिलीजन जो है वो बड़ा ही डेंजरस चीज है क्योंकि रिलीजन आपको फेनेटिसिजम की ओर ले जाता है आपको यह जिहाद ना कि कहो ना कि क्रुसेड कहो उसकी ओर ले जाता है धर्म युद्ध की ओर ले जाता है और यह जो वेस्टर्न क्रिश्चियन हिस्ट्री को देखिए जो कि आजकल मॉडर्न हिस्टोरियन जिसको जिस तरह से उसको लिखते हैं कि जिस तरह जब से ये क्रिश्चियनिटी का उदय हुआ है तब से यह जो एथेंस और ग्रीस का जो लर्निंग है उसका तो सफा हो ही गया उन्होंने इस तरह से एक के बाद एक युद्ध किए आपस में एक दूसरों के ऊपर में इतना अत्याचार किए कि यूरोप पूरा डार्क एजेस में डूब गया इट वाज ओनली आफ्टर द रेनेसा रेनेसा बोलकर के रीबर्थ ऑफ लर्निंग बोलकर के ये एथेंस के जो फिलोसोफर थे साइंटिस्ट थे उनका जो यह कंट्रीब्यूशन उसको पुनर्जीवित करके फिर से यूरोप का नए सीरे से प्रारंभ हुआ जिसको कि ये लोग कहते हैं रेनेसा तो यूरोप का हिस्ट्री किस तरह से ये लोग डिपिक्ट करते हैं कि एक तो था गोल्डन एज जिसमें कि था एथेंस और स्पार्टा जो कि हमको पहले से ही वार्निंग देता है एथेंस जैसा होना है स्पार्टा जैसा नहीं होना एथेंस में फिलोसोफर थे साइंटिस्ट थे सब कुछ था बहुत ही उनका सॉलिड कंट्रीब्यूशन था और स्पार्टा में थे ये सोल्जर्स थे ये फाइटर्स थे ये कमांडर्स थे वगैरह वगैरह जिन्होंने बहुत सारी पॉपुलेशन को गुलाम बना कर के रखा था सो दैट वाज फर्स्ट लर्निंग उसके बाद में स्टार्ट होता है डार्क एजेस अर्थात कि ये क्रिश्चियन चर्च का प्रभाव और उसके बाद में आता है रेनेसा और एनलाइन मेंट रेनेसा अर्थात कि रीबर्थ ऑफ लर्निंग यह पुराने एथेंस के फिलोसोफर की विद्याओं को पुनर्जीवित किया गया और पुनर्जीवित करने के बाद में जो एक के बाद एक गैलेक्सी ऑफ फिलोसोफर साइंटिस्ट इंडस्ट्रियलिस्ट ह्यूमैनिस्ट उन लोगों का जो जन्म हुआ यूरोप में तो यूरोप और बाद में अमेरिका ऐसी महा सताए बन गई जिसके सामने अपनी यह हजारों साल पुरानी सभ्यता उसने उसके सामने घुटने टेक दिए और सिर्फ भारत नहीं यह रशिया है जापान है चाइना है जितनी भी पुरानी सभ्यताएं थी इस्लामिक सभ्यताएं जितने भी इस्लामिक देश थे एक समय था जबकि पर्शिया है बगदाद है सऊदी अरेबिया है उन सबका बड़ा नाम था जब इस्लाम का गोल्डन एज चल रहा था किंतु जब से यूरोप में रहने सा आया तो जितनी भी यह ग्रेट सिविलाइजेशन थी इस्लामिक सिविलाइजेशन इंडियन चाइनीज रशियन जापानीज सब लोग जैसे कि उसके सामने मंत्र मुग्ध होकर के उनके सामने घुटने टेक दिए सो दैट इज द ग्रेटेस्ट लेसन ऑफ द हिस्ट्री कि साइंस टेक्नोलॉजी फिलोसोफी आर्ट्स एंड ह्यूमैनिज्म इसका डेवलपमेंट होना चाहिए और यही डेवलपमेंट आपकी सिविलाइजेशन को सर्वश्रेष्ठ बनाएगा और जहां पे यह रिलीजियस फेनेटिसिजम है या तो फिर यह मिलिटरी एडवेंचर्स है उसमें जैसे ही आप गए तो वैसे ही आपका खात्मा हो जाएगा तो और यह जो पुराने थे एथेंस और ग ग्रीक उसका मॉडर्न इक्विवेलेंट क्या है तो ब्रिटेन और जर्मनी देखिए ब्रिटेन में भले ही चाहे ब्रिटेन ने कॉलोनियलिज्म के द्वारा भारत प इतना अत्याचार किया किंतु फिर भी ब्रिटेन के भीतर में आप देखेंगे कि मिलिटरी एडवेंचर्स को इतना बड़ा पार्ट नहीं उनका था जितना कि एक के बाद एक साइंटिस्ट आते गए एक के बाद एक फिलोसोफर आते गए ये न्यूटन से प्रारंभ करके एक के बाद एक जिन्होंने ब्रिटेन को इतना सर्वश्रेष्ठ बना दिया ये एक जो एक सेंस ऑफ एडवेंचर होता है सेंस ऑफ क्यूरियोसिटी होती है सेंस ऑफ वंडर होता है ऐसा मैंने पूरे मानव सभ्यता के इतिहास में देखेंगे कहीं-कहीं पर इस तरह का एक जैसे कि एक जादुई चमत्कार होता है और इतने सारे फिलोसोफर इतने सारे साइंटिस्ट इतने सारे आर्टिस्ट एक साथ में प्रकट होते हैं जो कि उस जगह को मतलब एक इस तरह से बना देते हैं जैसे कि इट इज अ बिकन ऑफ होप बिकन ऑफ फ्लाइट फॉर द मैनकाइंड मनुष्य के लिए जैसे कि एक आशा की किरण बन कर के वह खड़े हो जाते हैं आज देखिए कि ब्रिटेन के जो साइंटिस्ट थे उस समय के पोस्ट रेनेसा और प्री मॉडर्न एज उन्होंने कितना जोरदार कितना जबरदस्त कंट्रीब्यूशन किया है तो आज का एथेंस है ब्रिटेन और आज का स्पार्टा था जर्मनी जर्मनी में हिटलर आया हिटलर ने देखा कि मुझे बस हमारे पे जो हुआ है फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में जो हार हुई है है उसका बदला लेना है और हिटलर के आने से पहले ही जर्मनी जो था वो ऑटो वोन बिसमार्क बोलक के एक था वहां पे एक स्टेट्समैन उसने जिस तरह से जर्मनी का गठन किया था कि आर्मी को बड़ी स्ट्रांग करना है मिलिट्री एडवेंचर करने हैं कैसे भी करके आसपास के देशों के ऊपर में राज्य करना है तो यह जो मिलिटरी ज्म का जो एक स्टार्ट हुआ तो यह इसने आखिर में जर्मनी के साथ में क्या किया जर्मनी सेकंड वर्ल्ड वॉर के अंत में जर्मनी की जो हालत थी वो हम आज इमेजिन भी नहीं कर पाएंगे हिस्ट्री पढ़ कर के या तो फिर यह उस समय के वीडियोस देख कर के पता चलेगा पूरा जर्मनी का खात्मा हो चुका था वो मतलब और जर्मनी का खुद का तो खात्मा हो गया उन्होंने जिन जिन के ऊपर में अत्याचार किया जिनके ऊपर में आक्रमण किया और वहां पर जो बर्बरता उन्होंने की वह मतलब पढ़ कर के सोच कर के हमारा हृदय दहल जाएगा इस तरह से उन्होंने राक्षस की तरह बिहेव किया है तो वही एथेंस और स्पार्टा आज के ज में समय में ब्रिटेन और जर्मनी इसके तरह से रूप में वो उभरा है और यदि यह तो हो गया वेस्टर्न हिस्ट्री हम इंडियन हिस्ट्री की ओर देखें तो हमको क्या देखने को मिलता है वह तो एक था एक 1000 साल की हमारी एक अंधेरी रात उसको छोड़ दे आधुनिक समय में देखिए कि गांधी जी गांधी जी ने आकर के जिस तरह से उनका एक लार्ज हार्ट था उन्होंने देखा कि देशवासी जो इतने गरीब हैं उनके लिए कुछ करना है और यह भी करना यह तो एक उनका सबसे बड़ा एक सद्गुण था दूसरा कि अहिंसा क्योंकि हिस्ट्री में देखेंगे कि जब भी मिलिट्री एडवेंचर हम करने का प्रारंभ करते हैं हम विनाश को ही न्यता देते हैं तो अहिंसा इ सच पावरफुल कांसेप्ट आपको समाज को भीतर से स्ट्रांग करना है नहीं कि मैं मेरी आज यह परिस्थिति है मैं गुलाम हूं उसका कारण क्या है कारण यह नहीं है कि दूसरे के पास में बहुत बड़ी मिलिट्री पावर है मिलिट्री शक्ति है बात यह है कि मेरे भीतर में डिवीजन है यह गांधी जी ने रिकॉग्नाइज किया कि जिस तरह से दलितों प अत्याचार करते हैं वो अत्याचार करके करके फिर जब विदेशी आक्रमणकारी आए तो उन्होंने क्या किया जिन लोगों के ऊपर में हिंदू उच्च ये जो सब वर्ण थे जो कि अपने को हायर क्लास कहलाते हैं हायर कास्ट कहलाते हैं उन्होंने ये जो लोअर कला कास्ट सो कॉल्ड लोअर कास्ट के ऊपर में जो अत्याचार किए तो विदेशी लोगों को क्या करना है ये लोअर कास्ट को पकड़ कर के उनको अपने साथ में कर लेना है तो वही लोग फिर आकर के ये जो हायर कास्ट है उन लोगों को फिर ये लोग ये करेंगे ब्रिटिश साम्राज्य में देखिए कि कौन सैनिक थे कौन ये हवालदार सूबेदार उनकी आर्मी और पुलिस में कौन थे यही सब लोअर कास्ट के लोगों को ज्यादा करके भर करके उन्होंने रखा था जिससे कि वो अपर कास्ट हिंदुओं को वो कंट्रोल में कर पाए और साथ में यह रिलीजियस डिवीजन कर दिया ये हिंदू है यह मुस्लिम है ये ये है वो वो है तो कैसे भी करके इंडिया को यदि दबा करके रखना है तो डिवाइड एंड रूल दैट इज द बिगेस्ट पॉलिसी तो डिवाइड एंड रूल का सोल्यूशन क्या है बात यह नहीं है कि हम उस ब्रिटेन से भी ज्यादा बड़ी गन बोट बनाए ब्रिटेन से भी बड़ी आर्मी बनाए यदि आर्मी बना कर के गन बोट बना कर के ब्रिटेन को यदि हमने हरा दिया होता तो बाद में वही जो डिवीजन तो सोसाइटी में थे वोह तो वैसे के वैसे ही रहेंगे भारत के कितने टुकड़े हो जाते यदि इस तरह से हमने विजय प्राप्त की होती तो कहना मुश्किल है भारत को हम अखंड भारत के रूप में रख ही नहीं पाते तो सॉल्यूशन इज डिवाइड एंड रूल का क्या सॉल्यूशन है टुगेदर धर वि स्टैंड ये जो यूनिटी इन डाइवर्सिटी दैट इज द सोल्यूशन एकम सत विपरा बहुदा वदंती ये स्वामी जी की भाषा में या तो अपने शास्त्र की भाषा में ये यूनिटी अर्थात कि ये अपनी मातृभूमि है मातृभूमि के प्रति हमारा सबसे पहला कर्तव्य है और यदि हमारे भाई बहन जो लोग इस तरह से पॉवर्टी में यह जो बेचारे सफर कर रहे हैं लोअर कास्ट बोल कर के यदि समाज ने उनको तर छोड़ दिया है तो खुले हृदय से उनको अपने घर में निमंत्रण देना उनके लिए अपना जी जान बांट लेना जिससे कि उनकी सेवा करके हम अपने भारत देश को फिर से परिपूर्ण बना सके दैट इज द सॉल्यूशन तो यह जो सॉल्यूशन गांधी जी का मुझे इतना अच्छा लगा बिकॉज कि देखिए कि धीरे-धीरे करके जो मेरी चिंता रा प्रारंभ हुई थी कि गरीब लोगों के लिए कुछ करना है वहां से लेकर के मैं जब गांधी जी तक आया पूरा हिस्ट्री पढ़ कर के सब कुछ एक साथ में जैसे कि फिट होता जाता है हिस्ट्री पढ़ कर के समझा कि आपके ऊपर में अत्याचार होते हैं आप वीक होते हैं इसका सॉल्यूशन मिलिटरी या तो फिर आर्मी या तो वॉर कभी भी नहीं है क्रुसेड या तो जिहाद या तो यह धर्म युद्ध यह सब सिविलाइजेशन के सॉल्यूशन कतई नहीं है जो सिविलाइजेशन इस सब में जाती है हिस्ट्री का वर्डिक्ट बड़ा ही क्लियर है उनका सफाया हो जाता है वह कभी भी एक बार इस गड्ढे में गिरी उससे कभी बाहर नहीं आती तो दैट वाज द बिगेस्ट लेसन कि मैंने हिस्ट्री में से पढ़ा और गांधी जी का जो थिंकिंग था हिस्टोरिकल लेसंस के साथ में इतना परफेक्ट मैच हो जाता है कि मैंने सोचा कि नहीं गांधी जी इज द परफेक्ट पर्सन फॉर इंडिया तो उस समय की जो मेरा माइंडसेट था मेरे दो आइडियल थे एक तो है गांधी जी जो कि कहते हैं कि हृदय को इतना बड़ा करो अपने गरीब भाइयों बहनों के लिए रो जिससे कि आप उनके लिए अपने जीवन को न्योछावर कर सकू गांधी जी कहते हैं पढ़े लिखे लड़कों को गांव में जाना चाहिए तभी तो जाकर के गांव का रिजूवनेशन होगा रिफॉर्मेशन होगा क्योंकि इंडिया लीव्स इन द विलेजेस भारत रहता है गांव में तो यह जो लेसन था मुझे इतना स्पर्श कर गया कि ना गांधी जी जो कहते हैं बिल्कुल ठीक है और दूसरा जो मेरा आइडियल था उस समय का वोह थे आइंस्टाइन क्योंकि यह तो बड़ा ही क्लियर है हिस्ट्री का लेसन कि किसी भी तरह का जो लर्निंग है क्यूरियोसिटी है वंडरमेंट है कंट्रीब्यूशन टू द लार्जर आइडियाज ऑफ द मैनकाइंड जो है वही सही सही अपनी य भूमि को सिंचित करता है हमको स्ट्रांग बनाता है तो यह दो मेरे उस समय आइडियल थे एक तो थे गांधी जी जो कि कहते हैं कि भारत रह रहा है गांव में और सब पढ़े लिखे लड़कों को जाने चाहिए जाना चाहिए गांव में जिससे कि गांव का रिजूवनेशन हो और गांव का रिजूवनेशन होने से यह गरीबी जो है वह धीरे-धीरे करके दूर हो और दूसरा जो मेरा आइडियल था आइंस्टाइन आइंस्टाइन इज अ फिगर हेड क्योंकि यदि प्लेटो है ना कि एरिस्टोटल है सोक्रेट है यह जो एथेंस के जो बड़ बड़े विद्वान थे वहां से स्टार्ट करके यह न्यूटन है जितने भी है जो साइंटिस्ट आर्टिस्ट जिनका की कंट्रीब्यूशन रहा उन सबका कल्मिनेशन है आइंस्टाइन आइंस्टाइन के बारे में कहा जाता है उसका साइंटिफिक कंट्रीब्यूशन इज वन ऑफ द ग्रेटेस्ट दी ग्रेटेस्ट ऐसा भी कहने वाले लोग हैं इन द ह्यूमन सिविलाइजेशन तो ये दो ट्रीम मेरी उस समय मेरे माइंड में इकट्ठा हुई थी और यह दोनों को लेकर के मैं सोच रहा था तभी जैसे कि यह घटना परंपरा होती है देखिए कि किस तरह से वो चलता है वो गुजरात में उस समय अर्थक्वेक आया और मैंने सोचा कि मुझे यह रिलीफ कुछ करना चाहिए क्योंकि बाय दिस टाइम मेरा भीतर से रेडी हो गया था कि अभी जो एक फैमिली करना अपने खुद के बारे में सोचना यह सब नहीं करना है आई वांट टू डू समथिंग लार्जर अभी फिलोसॉफिकली तो मेरा माइंड रेडी हो गया है किंतु एक्चुअल एक्शन में क्या लाना चाहिए तो ये अर्थक्वेक आ गया और दैट वाज वन अपॉर्चुनिटी कैसे भी करके रामकृष्ण मिशन की कि एक प्राइवेट सेंटर वहां पे था वहां पे मेरा संपर्क हो गया और उन्होंने कहा कि ठीक है यदि रिलीफ करना है तो आप जा सकते हैं अपने लिमडी केंद्र में लिमडी बोलकर के एक है सेंटर वहां पे जहां से य रिलीफ एक्टिविटी होती थी तो मैं वहां पे गया रिलीफ वगैरह किया किंतु यह सब तो ठीक है रिलीफ वगैरह किया सबसे बड़ा जो था कि मेरे हाथ में स्वामी जी की किताब आ गई लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा एंड ट वाज सच अ रेवलेशन फॉर मी मेरा देखिए कि स्वामी जी का मेरा जो कांटेक्ट है जो चीज मुझे सबसे ज्यादा इंस्टेंट अट्रैक्ट मुझे अट्रैक्शन मुझे किस चज से हुआ तीन चीजों से सबसे पहला है तो स्वामी जी का ह्यूम निज्म कि हृदय इतना विशाल है स्वामी जी का कि कितने गरीब लोगों के लिए वोह किस तरह से रोते हैं उन्होंने गरीब लोगों के लिए किस तरह से अपना पूरा जीवन न्योछावर किया दैट वाज फर्स्ट लर्निंग फर्स्ट पॉइंट ऑफ कांटेक्ट सेकंड था कि स्वामी जी अंडरस्टैंडिंग ऑफ हिस्ट्री मैं ऑलरेडी मैंने इतना पढ़ चुका था बाय दैट टाइम मैंने स्वामी जी को पढ़ना स्टार्ट किया कि स्वामी जी जो कुछ भी कहते हैं फटाफट फटाफट करके मैं उसको समझ जा रहा हूं कि हां ये हिस्टोरिकल पैरेलल कहां पर स्वामी जी ड्रॉ कर रहे हैं किस तरह से स्वामी जी राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन के बारे में बता रहे हैं किस तरह से स्वामी जी भारत की हिस्ट्री समझाते हैं किस तरह से स्वामी जी वेस्ट की हिस्ट्री समझाते हैं पश्चिम की पश्चिमी देशों की यूरोप और अमेरिका की हिस्ट्री को समझाते हैं एकदम फटाफट फटाफट करके मेरे माइंड में बैठना शुरू हो गया जैसे कि जैसे मैं स्वामी जी को सालों साल साल पढ़ रहा हूं इस तरह से मुझे लगने लगा पहली बार पढ़ने में और तीसरा है स्वामी जी का की अंडरस्टैंडिंग ऑफ साइंस स्वामी जी का ज्ञान योग पढ़ेंगे राजयोग पढ़ेंगे इन जनरल कोई भी वर्क्स उनका पढ़ेंगे देखें कि ही जज अ वेरी कीन वेरी पावरफुल अंडरस्टैंडिंग ऑफ साइंस तो यह तीन चीजें थी कि जो कि मुझे इमीडिएट इंटेंटली पहला ही पेज पढ़ा मैंने और इंटेंटली मुझे जो जिस चीज ने अट्रैक्ट किया कि हां अरे स्वामी जी अभी देखिए इन जनरल किसी को आप पढ़ते हैं कोई फिलोसोफर को या कोई धार्मिक व्यक्ति को किसी को भी तो क्या है कि अपना पॉइंट ऑफ कांटेक्ट इनिशियल पॉइंट ऑफ कांटेक्ट नहीं होता है तो उसके आइडियाज को समझने में और स्वीकार करने में हमको बड़ा दिक्कत होती है मैंने गांधी जी को इंटेंटली स्वीकार क्यों कर लिया क्योंकि मेरा हिस्टोरिकल बैकग्राउंड था मैंने ऑलरेडी समझ चुका था कि मिलिटरी ज्म या तो यह फिर यह युद्ध किसी भी तरह का सॉल्यूशन नहीं है फिजिकल स्ट्रेंथ इज नॉट अ सॉल्यूशन इंटेलेक्चुअल कल्चरल स्ट्रेंथ इज द सॉल्यूशन ऑफ द राइज एंड फॉल ऑफ द सिविलाइज ये ऑलरेडी समझ करके फिर जब गांधी जी को पढ़ना शुरू किया इतने सारे पॉइंट ऑफ कांटेक्ट थे गांधी जी जो कहते हैं फटाफट फटाफट करके मैं पकड़ लेता था तो सिमिलरली यहां पे स्वामी जी को समझना मेरे लिए इतना आसान क्यों हो गया क्योंकि ऑलरेडी हिस्ट्री साइंस और ह्यूम निज्म लार्ज हार्टेड बस तीनों ऑलरेडी स्वामी जी में थे जो कि जिसकी वजह से स्वामी जी को समझना स्वामी जी को स्वीकार करना इंस्टेंट मेरे लिए संभव हो पाया सो दैट वाज द इनिशियल कांटेक्ट उस उसके बाद में किंतु देखिए कि स्वामी जी इज नॉट जस्ट हिस्टोरियन स्वामी जी इज नॉट जस्ट ह्यूम निस्ट स्वामी जी इ नॉट जस्ट साइंटिस्ट स्वामी जी समथिंग मोर यह जो आत्म तत्व है वो तो स्वामी जी का असली कंट्रीब्यूशन है वही तो स्वामी जी की असली पहचान है आप गांव में जाकर के काम करें गरीब लोगों के लिए काम करें ना कि फिर आप कोई अपना खुद का साइंटिफिक थिरी डेवलप कर दे व सब चीजें ठीक है किंतु तो आत्म तत्व तो कहता है कि जगत अपने से मिथ्या है यह सब आप कितना भी कर दो राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन रूपी य जो चक्की है वो उसमें तो हमेशा चलती रहेगी हम हमेशा उसमें पिसने वाले हैं सृष्टि स्थिति प्रलय यह हमेशा चलता रहने वाला है आप कितना ही गांव में जाकर के काम करो कितना ही कुछ भी ना कर दो जब तक आत्म तत्व नहीं समझेंगे तब तक आपके हृदय को संतोष नहीं मिलेगा और यह स्पिरिचुअलिटी जो डायमेंशन है वह जब तक ओपन नहीं होगी वह जब तक आपका मन उससे भरपूर नहीं हो जाएगा यह जो बाहर में जो हम जितना भी काम कर रहे हैं रे धीरे करके वो सब पॉलिटिक्स में परिणत हो जाएगा तो ट वास स्वामी जी रियल कंट्रीब्यूशन किंतु इस चीज को मैं स्वीकार कैसे करूंगा स्वामी जी जब हिस्ट्री के बारे में कहते हैं सेवा के बारे में कहते हैं साइंस के बारे में कहते हैं मैं फटाफट करके स्वीकार कर लेता हूं किंतु हाउ डज रिलीजन प्लेज अ पार्ट क्योंकि रिलीजन के अगेंस्ट में ऑलरेडी मेरा एक प्रेजुड बन चुका था हिस्ट्री पढ़ कर के वेस्टर्न हिस्ट्री पढ़ कर के खास करके कि रिलीजन इज अ वेरी डिस्ट्रक्टिव फॉर यह जो डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ रोमन एंपायर बोलकर के एक बड़ा ही सेमिनल वर्क अमेरिक यूरोप में लिखा गया है तो उसका कंक्लूजन क्या है कि रोमन एंपायर जो कि इतना बड़ा साम्राज्य था उसका सफाया किसने कर दिया उसका मने डिक्लाइन और फॉल कैसे हुआ तो दो चीजों ने एक तो है बर्बेरिस म दूसरा है यह क्रिश्चियनिटी बर्बेरिस म अर्थात कि जो कि साइंस और कल्चर के विरोध में जो सब बर्बे ट्रा थी उन्होंने हमला किया मने वही मिलिटरी एडवेंचर वो मिलिटरी एडवेंचर दूसरों ने इसके ऊपर में हमला करके उसका सफाया कर दिया और दूसरा कि क्रिश्चियनिटी क्रिश्चियनिटी ने जो अंधश्रद्धा है यूरोप में प्रवेश करवाई और उसकी वजह से जो साइंटिफिक डेवलपमेंट अटक गया एक जैसे कि सबसे बड़ा फेमस उदाहरण है गैलीलियो का गैलीलियो ने जैसे कहा पृथ्वी सूर्य की आसपास ऑर्बिट करती है घूमती है वैसे ही उसको नजरबंद कर दिया गया उसके ऊपर में ये सब किया गया केस वगैरह और उसके बाद में यह इनक्विजिशन स्पेनिश इनक्विजिशन माने क्रिश्चियनिटी का हिस्ट्री बड़ा बेकार है साइंटिफिक लोगों के साथ में साइंटिस्ट लोगों के साथ में इन जनरल तो हाउ कैन रिलीजन बी ए पार्ट ऑफ द सॉल्यूशन तो उस समय अभी यह तो मुझे बाकी सब लोगों की हिस्ट्री पढ़कर समझ में आया कि रिलीजन प्लेज अ वेरी नेगेटिव पार्ट किंतु वहां पर ब्रिटेन में एक दूसरा भी हिस्टोरियन है उसका नाम है है आर्नोल्ड टोयन बी और ये आर्नोल्ड टोयन बी ने सेकंड वर्ल्ड वॉर के अंत में हिस्ट्री लिखना शुरू किया और उसने जिस तरह से सिविलाइजेशंस का स्टडी किया एक के बाद एक और उसका जो कंक्लूजन है बड़ा ही साइंटिफिक है मैंने बड़े ही डिटेल में उसको पढ़ा और पढ़ कर के आई एम इंटेलेक्चुअली कन्विंस्ड कि उसका जो कंक्लूजन वो एक लंबी यात्रा है उसमें नहीं जाकर के उसका कंक्लूजन सीधा सधी बता देता हूं कि राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन के पीछे में यदि सबसे बड़ा फैक्टर है तो वह रिलीजन जब रिलीजन माने सही सही धर्म धर्म भी तो दो तरह के होते हैं एक तो धर्म एक तो श्रद्धा दूसरा है अंधश्रद्धा यदि सही सही श्रद्धा का उदय होता है तो वो सिविलाइजेशन का राइज होता है और यदि श्रद्धा अंधश्रद्धा में परिणत हो जाती है तो सिविलाइजेशन का फॉल होता है तो यह राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन रूपी जो टॉपिक है उसका कंक्लूजन और ये आर्नोल्ड टोन भी किस तरह से देते हैं राइस के पीछे में है श्रद्धा और फोल के पीछे में है अंधश्रद्धा तो यह तो एक पहली बार मुझे इंटेलेक्चुअली क्लियर हुआ कि रिलीजन के भीतर में भी दो एस्पेक्ट है एक तो है रियल रिलीजन दूसरा कि दिखावे का धर्म दिखावे का धर्म कहो ना कि अंधश्रद्धा कहो यह हमारे पतन के लिए वो माने वो फैक्टर है वह जवाबदार है किंतु सही सही श्रद्धा या तो सही सही रिलीजन इज नॉट ए फैक्टर फॉर फॉल वो तो उसका व वो तो राइज के लिए जिम्मेदार है वो तो विकास के लिए उसका तो सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन है तो यह एक मुझे इंटेलेक्चुअल कन्विंसिंग को इस तरह से कहेंगे कि धर्म में जद ये यह आता है फेनेटिसिजम प्रवेश कर जाता है तो हमारे पतन का कारण होता है यह तो समझ में आ गया किंतु सही सही धर्म का पालन करने से पूरा सिविलाइजेशन पूरा समाज पूरा सोसाइटी देश मानव सभ्यता किस तरह से विकसित होती है किस तरह से विकास प्राप्त करती है वो व्हाट इज द कनेक्शन बिटवीन देम बोथ तो फिर ये जो चर्निंग मेरा एक पैरेलल स्टार्ट हुआ ऑलरेडी स्वामी जी मेरे हाथ में आ ही गए थे ठाकुर की कृपा से स्वामी जी को स्वामी जी के साथ में ये पॉइंट ऑफ कांटेक्ट एस्टेब्लिश हो ही गए थे कि हां स्वामी जी का लार्ज हार्टेड बस ह्यूम निज्म गरीबों के लिए इतना उनका रोधन क्रंदन और उनकी ये जो उनकी ये जो सिंपैथी कंपेज ये एक मुझे एकदम इमीडिएट अट्रैक्ट करने लगा स्वामी जी का हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग इतना पावर फुल है कि मैंने यह जो सालों साल की मेरी जो स्टडी थी सब कुछ फटाफट फटाफट करके स्वामी जी के साथ में मैच हो रही है सो दैट वाज सेकंड पॉइंट एंड स्वामी जी अंडरस्टैंडिंग ऑफ साइंस दैट वाज थर्ड पॉइंट तो ये ऑलरेडी स्वामी जी के साथ में कांटेक्ट एबिश हो गया था वही जो पजल था कि ये स्वामी जी इतने अच्छे आदमी होकर के साधु क्यों हो गए ही कुड हैव बीन समवन लाइक आइंस्टाइन ही कुड हैव बीन समवन लाइक गांधी जी जो कि उस समय मेरे आइडियल थे राइट तो उन लोगों के जैसे नहीं हो कर के साधु क्यों हो गए क्योंकि गांधी जी का इतना बड़ा कंट्रीब्यूशन है हमको पता है कि फ्रीडम मूवमेंट में उनका ही सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन है हमको पता है कि साइंटिफिक जगत में आइंस्टाइन का कितना बड़ा कंट्रीब्यूशन है जबकि मैं ये सब पढ़ रहा था 1990 में 19195 उस समय के आसपास की बात है उस समय स्वामी जी का कहीं पर नामो निशान नहीं था हिस्ट्री में पढ़ कर के रखा था कि अमेरिका जाकर के प्रवचन दिया तो अभी अमेरिका जाकर के प्रवचन लोग लाखों लोग दे देते हैं वो कौन सी बड़ी बात है तो स्वामी जी का कंट्रीब्यूशन क्या है व्हाट इज स्वामी जी तो ये जो मिसिंग एस्पेक्ट था दैट वाज द स्वामी जीस अंडरस्टैंडिंग ऑफ वेदांत स्वामी जीस अंडरस्टैंडिंग स्वामी जी की एक्सप्लेनेशन है आत्म तत्व के बारे में तो यह दोनों ओर से मैं स्वामी जी की ओर आ रहा था यहां पे मेरा हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग कंप्लीट हुआ यह आर्नोल्ड टो एनबी को पढ़ कर के और यहां पे स्वामी जी को पढ़ना मैंने ऑलरेडी स्टार्ट कर दिया था ऑलरेडी मेरे सर के भीतर में चल रहा है कि स्वामी जी इतने अच्छे होने के बाद में फिर ये साधु क्यों बन गए तो बोथ ऑफ दिस पॉइंट केम टुगेदर इन वेदांत और वेदांत का पर्स निफिट क्या है दैट इज श्री रामकृष्ण मां शारदा देवी तो स्वामी जी को पढ़ने के बाद में ही इमीडिएट यह समझने के बाद में ही कि सही सही धर्म ही मानव सभ्यता के विकास के लिए कारण भूत है मैंने ठाकुर और मां को पढ़ना शुरू किया और एक अंडरस्टैंडिंग धीरे-धीरे करके मेरे माइंड में यह डेवलप होनी शुरू हुई कि हां एक्चुअल धर्म क्या है एक्चुअल आत्म तत्व क्या है एक्चुअल वेदांत क्या है एक जो एक हमने एक वेस्टर्न अंडरस्टैंडिंग समझ कर के धर्म के बारे में जो एक नेगेटिव जो सब समझ लिया है कि धर्म अर्थात कि लोगों को इकट्ठा होना कोई फेनेटिक रीजन एक खड़ा करना और जिसकी वजह से हम लोगों को ऐसा समझ लेना कि हम लोग सर्वश्रेष्ठ हैं दूसरे लोग मूरख है अपनी श्रेष्ठता स्थापित करना दूसरों पर अत्याचार करना आक्रमण करना यही है धर्म ये मिलिटरी एडवेंचर और ये रिलीजन ये दोनों है जिसने कि एक के बाद एक सभ्यताओं को तोड़ा है ये जो एकदम ठीक मेरे मन में बैठ गया था दिस वाज द काउंटर पॉइंट कि एक्चुअल रिलीजन यह है कि हृदय की विशालता यह अंतर्मुखी तब तक हम धर्म को समझने में हमने पहला कदम भी नहीं बढ़ाया है यह जो बहिर्मुखी कि फेस्टिवल है जैसे कि टेंपल्स है जैसे कि सेलिब्रेशंस है जैसे कि जो कुछ भी कहो एक्सटर्नल वह तो सिर्फ एक वन ऑफ द एस्पेक्ट ऑफ रियल रिलीजन धर्म का वह एक अंग मात्र है धर्म का सर्वश्रेष्ठ स्वरूप क्या है तो वह है अंतर्मुखी का संयम करना वह है त्याग और वैराग्य के रास्ते पर आगे बढ़ना वह है शरणागति अर्थात कि अपने अहंकार को संपूर्ण रूप से निषेचित करके ईश्वर के श्री चरणों में अर्पित कर देना यह है सही सही धर्म जो कि आप यह यात्रा जो है आप अकेले बिताते हैं आपके साथ में और कोई नहीं रहता धर्म के बारे में ठाकुर म स्वामी जी के बारे में हम लोग इकट्ठा होकर के चाहे कितनी ही बातें कर द एट द एंड ऑफ द डे हम जब आंख बंद करके अपने कमरे में या तो मंदिर में बैठते हैं तब आप है और आत्मन है या तो फिर आप है और ईश्वर है जिसके ऊपर में आपको श्रद्धा है द्वैतवाद है तो ईश्वर अद्वैतवाद है तो आत्मन या तो फिर ब्राह्मण तो आप है और वो है बस वही दो है और तीसरा और कोई नहीं है आप दोनों का ये जो रिलेशन है वही है रियल स्पिरिचुअलिटी तो फिर मैंने फिर क्या है कि अपने माइंड में दो डिवीजन कर दिए एक एक है रिलीजन जो कि एक्सटर्नल एस्पेक्ट है दूसरा है स्पिरिचुअलिटी व्हिच इज के इंटरनल एस्पेक्ट है और फिर वहां से यह जो ठाकुर म स्वामी जी को समझना और उनके अनुसार जीवन को ढालना वो एक मेरी दूसरी यात्रा प्रारंभ हुई तो यह है आज जो कल्मिनेशन है मेरे माइंड में मुझे ऐसा लगता है कि मनुष्य सभ्यता ने मैं अभी सिविलाइजेशनल स्टडी की दृष्टि से ही देख रहा हूं नॉट फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ रिलीजन सिविलाइजेशनल स्टडी की दृष्टि से देखें तो तीन सबसे बड़े लोग है जिनके प्रति आज मेरी श्रद्धा है एक तो है गांधी जी का ह्यूमैनिज्म जिन्होंने यह बात एकदम ठीक-ठीक रिकॉग्नाइज की कि मिलिटरी एडवेंचर किसी काम का नहीं है एट द एंड ऑफ द डे आज हमारे यह जो पड़ोसी देश है सब जगह पे आप देखिए जहां-जहां पे मिलिटरी स्ट्रांग हुई है वहां वहां पे वह देश का खात्मा हो गया है तो एक तो अवॉइड मिलिटरी एडवेंचर्स एंड हैव अ ग्रेट हार्ट तो यह जो है गांधी जी का अंडरस्टैंडिंग दूसरा है आइंस्टाइन का यह जो वंडरमेंट क्यूरियोसिटी साइंटिफिक कंट्रीब्यूशन वो और तीसरा है स्वामी जी का आत्म तत्व या तो फिर स्वामी जी का वेदांत तो मेरी दृष्टि से एज ऑफ टुडे तीन ग्रेटेस्ट कंट्रीब्यूटर्स है इन मॉडर्न एज गांधी जी आइंस्टाइन और स्वामी विवेकानंद एंड विद दिस माय अंडरस्टैंडिंग इज कंप्लीट तो देखिए कि मेरा यह जो जर्नी था जहां से मैंने स्टार्ट किया और जर्नी करते करते य जो इंटेलेक्चुअल जो होता है डेवलपमेंट वह कहां पर आके कल्मिनेट हुआ व पहले मैं इस तरह से बच्चों को सिखाता था वहां पर मेरे शहर में बाद में मैंने घर छोड़ कर के मैं रांची गया मैंने देखा कि कुछ सीरियस कंट्रीब्यूशन करना है ऐसे नहीं चलेगा ऊपर ऊपर से तो मैंने रांची में इतना सारा काम किया और एज ऑफ टुडे अभी मेरी कोई भीतर से कोई इच्छा नहीं है कि मुझे यह करना है या वो करना है जैसे कि वह ठाकुर कहते हैं ना कि हवा में उड़ते हुए पत्ते की तरह हवा जहां की ले जाए आपको वहां पर आपको जाना है तो ये जो इंटेलेक्चुअल मैच्योरिटी होती है साथ-साथ में ही आती है एक शरणागति कि ईश्वर जो करवाएंगे करेंगे अभी मेरी इच्छा बहुत है कि मैं गांव में जाकर काम करूं मेरी इच्छा यह भी बहुत है कि पढ़ाई लिखाई करूं यह भी इच्छा बहुत है कि बहुत लंबा समय में अकेले बैठ कर के थोड़ा सा आत्मचिंतन करूं किंतु मैं एक्चुअली जो करूंगा डिपेंड की यह संघ के हाथ में है तो वे लोग तो डिसाइड करेंगे कि मैं कहां जाऊंगा क्या करूंगा मेरा क्या रोल रहेगा तो अभी अपनी इच्छाओं को ठाकुर के चरणों में अर्पित करके जो मेरे से करवाएंगे वह हम करेंगे सो ट इज एक्सटर्नल एस्पेक्ट ये जो मेरा इंटेलेक्चुअल डेवलपमेंट था वो कुछ इस तरह से हुआ तो मैंने सोचा कि थोड़ा सा आज शेयर करो क्योंकि कल जो गया था मैं वहां पर तो मैं रास्ते से जा रहा हूं और फिर क्या है वहां पर दो गांव के एक गांव से हमको दूस दूसरे गांव की ओर जाना था तो फिर मेरे साथ में एक दूसरे एक महाराज भी थे ब्रह्मचारी तो उसने कहा चलो महाराज पैदल चलते हैं तो मैंने कहा चलो फिर चलते हैं पैदल तो वो रास्ता है गांव का वहां पर कोई नहीं है आसपास में एक और है बड़े-बड़े पहाड़ और ये जंगल और ये साथ में एक नदी एक झरना बह रहा है और खुले खेत है और खेत में सब लोग काम करते हैं तो ये रास्ते से जा रहा था जा रहा था यही सब मेरे मन में वो चिंतन स्टार्ट हो गया कभी-कभी क्या है डे टू डे लाइफ में हम अपना हिस्ट्री य डेवलपमेंट वगैरह तो सोचते नहीं है किंतु जब आप प्रकृति के स्तर से रमणीय जगह पर चले जाते हैं तब आपके मन के भीतर के वो जो दरवाजे बंद होते हैं एक एक खुल जाते हैं और कितना ही फिलोसॉफिकल थिंकिंग स्टार्ट हो जाता है तो कल मैं पूरा रास्ते पर चलते चलते यही सोच रहा था कि मैं कहां था और कहां पर आ गया हूं सो मैंने सोचा कि उसमें से थोड़ा बहुत आपके साथ में शेयर करूं तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शा शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु दोनों के बीच में कॉमन है आत्म श्रद्धा और अभय और निर्भयता करेज जिसको कहते हैं गांधी जी को बहुत ही मिस रिप्रेजेंट किया गया है गांधी जी के बारे में कुछ नहीं पढ़ कर के उनके ऊपर में ओपिनियन देने वाली एक पूरी सेना खड़ी हो गई है उस समय की भारत की परिस्थिति की जो आर्थिक सामाजिक परिस्थिति उसके बारे में कुछ भी नहीं समझ कर के गांधी जी के बारे में 10 पेज भी नहीं पढ़ कर के गांधी जी के बारे में एक स्ट्रांग ओपिनियन रखने वाले बहुत सारे लोग खड़े हो गए आजकल तो व व में वह पढ़ कर के तीन चार लाइन का मैसेज गांधी जी के बारे में कोई भी ओपिनियन बना लेना वह उससे तो हमारा काम नहीं होगा मैं कहूंगा कि उनको आप थोड़ा सा सीरियसली स्टडी कीजिए और खास करके जिस कांटेक्ट में गांधी जी ने यह सब किया है कांटेक्ट इज वेरी इंपोर्टेंट आज के भारत में गांधी जी का मैसेज काम नहीं करेगा किंतु उस समय की जो बात थी भारत की जो परिस्थिति थी भारत के भीतर के जो डिवीजन थे सबसे बड़ी बात यह है ये इसके बारे में स्वामी जी ने भी बहुत कहा है कि जो भारत के भीतर में जो उच्च वर्णों ने जो निम्न वर्णों की जो परिस्थिति बना कर के रखी थी वो इतनी भयावह थी और इसमें किसी को दोष देने का भी नहीं है गांधी स्वामी जी खुद कहते हैं कि जो इस्लामिक आक्रमण प्रारंभ हुए तभी से यह भारत में जो नात जात वगैरह इतना बढ़ गया है सो एक पूरा हिस्टोरिकल कॉन्टेक्स्ट है गांधी जी ने जो कहा वह हवाहवा में नहीं किया है या कहा है उन्होंने कॉन्टेक्स्ट में किया है और कहा है सो दैट स्टडी इज रिक्वायर्ड मैंने 10 साल तक यह सब स्टडी किया है तब कहीं जाकर के मुझे थोड़ा सा कन्विसिटी कि थोड़ा सा अच्छे से स्टडी कीजिए और देन यू विल अंडरस्टैंड कि किस कांटेक्ट में यह सब किया गया है और कहा गया है