Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Sri Ramakrishna Teachings ·

Sri Ramakrishna : Life and Teachings : English & Hindi : 20 Feb 2023

Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Shivananda

तो स्वामी शिवंद जी महाराज जी रेमिनेस ऑन श्री रामकृष्ण। ओके। सो व्हाट महापुरुष महाराज सेस दैट व्हेन वी विजिटेड हिम द थॉट ऑफ वेदर और नॉट श्री रामकृष्ण वाज़ अ डिवाइन इंकार्नेशन नेवर क्रॉस्ड आवर माइंड। यू नो मेनी टाइम्स पीपल केम टू विजिट श्री रामकृष्ण थिंकिंग दैट इफ ही इज एन अवतार और इफ ही इज अ परमहंस और इफ ही इज़ सच अ ग्रेट पर्सन एज ही इज़ मेड आउट टू बी देन लेट हिम लेट अस टेस्ट हिम व्हाट काइंड ऑफ़ मिरेकल ही कैन डू व्हाट काइंड ऑफ़ स्ट्रेंज थिंग्स ही कैन डू सो वी कैन गेट अ साइन दैट ओके ही इज़ एन अवतार बट व्हेन ठाकुरस ओन डिसाइपल ठाकुर डायरेक्ट दिस यंग बॉयज़ हु हैड सच ए ग्रेट फेथ एंड वेनरेशन ऑन ठाकुर व्हेन दे केम दे नेवर थॉट दैट ठाकुर वेदर ठाकुर इज़ एन अवतार और नॉट द सेम वे सी व्हेन अ चाइल्ड अ चाइल्ड हैज़ सच अ ग्रेट फेथ ऑन हिज मदर दैट व्हाटएवर मदर सेस चाइल्ड विल एक्सेप्ट इट विल नेवर ओकर इन द माइंड ऑफ़ अ चाइल्ड दैट वेदर हिज मदर इज़ अ गॉडेस और वेदर हिज़ मदर इज़ अ क्वीन और वेदर हिज़ मदर इज़ अ इवन अ बेगर। फॉर अ चाइल्ड द इकोनॉमिक सोशल स्टेटस ऑफ हिज मदर डज नॉट मैटर। देयर इज सिंपली दैट लव। अ चाइल्ड डजंट लव हिज मदर बिकॉज़ हिज मदर हैज़ सो मच मनी एंड शी कैन परचेस सो मेनी टॉयज़ फॉर द चाइल्ड। और अह चाइल्ड विल नॉट स्टॉप लविंग हर मदर। इफ इवन शी इज़ अ बेगर एंड शी हैज़ टू वर्क इन द होम ऑफ़ अनदर पीपल लाइक अ मेड और शी इवन इफ शी हैज़ टू बेक फॉर हर फ़ूड फ्रॉम वन होम टू अनदर होम। द चाइल्ड्स लव फॉर हिज़ मदर इज़ एब्सोल्यूट इरिस्पेक्टिव ऑफ़ व्हाट इज़ द स्टेटस ऑफ़ हिज़ मदर। तो सिमिलरली हियर इफ बट व्हाट हैपेंस इफ देयर इज समवन एल्स से फॉर ए रिलेटिव और से फॉर अ फ्रेंड अ फ्रेंड विल सी परहप्स अ पर्सन विल सी इफ आई वांट टू हैव अ फ्रेंडशिप विथ अनदर पर्सन और इफ आई वांट टू हैव सम रिलेशनशिप विथ अनदर पर्सन वेदर हिज़ फाइनेंसियल कंडीशन अह प्लेज़ अ बिग पार्ट इन आवर डिसीजन। नाउ अ डेज वी सी दैट मैरिज एडवर्टाइज इन न्यूज़पेपर दैट द बॉय और द गर्ल हैज़ दिस मेनी डिग्रीज़ एंड ही अर्न्स दिस मेनी दिस मच रूपीस। सो मैरिज इज़ ऑलवेज बेस्ड ऑन इकोनॉमिक स्टेटस। इट रेयरली हैपेंस। इट हैप्स इन मूवीज़ परहैप्स दैट अ रिच मैन अह मैरिज़ अ पुअर पर्सन और अ पुअर पर्सन इज़ मैरिड टू अ रिच पर्सन। इट रेयरली इट हैप्स इन मूवीज़ इन आवर एक्चुअल लाइफ वी सी दैट अ बॉय इज़ अ डॉक्टर ही विल ऑलवेज प्रेफर अ डॉक्टर वाइफ इन अ गर्ल इज़ फॉर एग्जांपल इफ शी इज़ चार्टर्ड अकाउंटेंट समथिंग लाइक दैट शी विल ऑलवेज प्रेफर अ बॉय हु इज़ आल्सो हाइली एजुकेटेड एंड देन दे आर ऑलवेज थिंकिंग ऑफ़ देर करियर बट अह रिलेशनशिप बिटवीन अ चाइल्ड एंड मदर इज़ अबव सच फाइनेंशियल इकोनॉमिक कंसीडरेशन देयर देयर लव इज एन एब्सोल्यूट लव। सो सिमिलरली व्हेन देयर आर मेनी अदर डिसाइपल्स हु केम टू श्री रामकृष्ण एंड दे थॉट दैट ओके लेट मी सी दैट इफ दिस पर्सन इज एबल टू डू सम मिरेकल फॉर मी ऑ नॉट बट वी सी दैट व्हेन दिस बॉयज हु केम टू श्री रामकृष्ण नरेंद्र राखा लाटू एंड देन दिस निरंजन योगेन अह विज्ञान अह विज्ञानानंद जी महाराज व्हेन व्हेन दिस बॉयज केम टू श्री रामकृष्ण दे नेवर थॉट दैट वेदर श्री रामकृष्ण कैन परफॉर्म मिरेकल्स फॉर अस और नॉट बिकॉज़ फॉर देम द रिलेशनशिप वि ठाकुर वाज़ बेस्ड ऑन प्योर लव ऑन प्योर फेथ एंड डिवोशन एंड द रिलेशनशिप बिटवीन अ डिवोटी एंड गॉड व्हेन इट इज़ बेस्ड ऑन प्योर लव बेस्ड ऑन प्योर डिवोशन देन डिवोटी डजंट आस्क फॉर एनीथिंग इन रिटर्न डिवोटी विल नॉट से दैट ओके ठाकुर टुडे इज माय एग्जाम एंड आई हैवंट स्टडीड वेरी हार्ड। सो प्लीज मेक मी पास इन माय एग्जाम सो दैट आई विल हैव गुड करियर लेटर ऑन। अ गुड डिवोटी विल वर्क हार्ड ऑन हिज ओन बिहाफ रेदर देन आस्किंग फॉर गुड मार्क्स फ्रॉम ठाकुर। अ पर्सन हु इज़ पुअर ही विल नॉट आस्क ठाकुर दैट प्लीज गिव मी मनी सो दैट आई कैन लीव कंफर्टेबली। इफ आई वांट टू अर्न मनी इट इज़ माय ड्यूटी माय रिस्पांसिबिलिटी टू वर्क हार्ड एंड अर्न इनफ। आई विल नॉट बोदर ठाकुर फॉर दैट। आई विल बोदर ठाकुर ओनली फॉर ज्ञान भक्ति एंड वैराग्य। सो दिस वन सेंटेंस इट टेल्स अस सो मच अबाउट द रिलेशनशिप दिस यंग बॉयज हेड फॉर वि ठाकुर। आई एम अगेन रीडिंग दिस सेंटेंस दैट व्हेन वी विजिटेड हिम द थॉट ऑफ फेदर और नॉट ठाकुर वाज़ अ डिवाइन इनकारनेशन नेवर क्रॉस आवर माइंड्स वी कुड नॉट फोरसी दैट ही वुड क्रिएट सच अ सुपर ह्यूमन मोमेंट थ्रूउ द वर्ल्ड ऑफ कोर्स व्हेन यू मीट समवन जस्ट बिकॉज़ यू लव हिम डिअरली यू हैव अ ग्रेट फेथ ऑन हिम यू विल नेवर इमेजिन दैट लेटर ऑन स्वायर ओन ऑन अनदर बॉय हु यूज्ड टू कम वि देम टू मीट ठाकुर एंड ही यूज्ड टू सीट ऑन द फ्लोर अलोंग वि देम एंड ही आल्सो यूज्ड टू लिसन टू ठाकुर वि सच अ वंडरस रेप्ट अटेंशन ही वाज़ नरन नरन वाज़ जस्ट देयर फ्रेंड जस्ट देयर ब्रदर महापुरुष महाराज सेज़ दैट वी नेवर इमेजिन दैट लेटर ऑन नरन वुड गो टू अमेरिका एंटायर अमेर नॉट एंटायर अमेरिका ऑफ कोर्स बट थिंकिंग पीपल द पीपल हु वेर द सी सिकर ऑफ अ हायर वे ऑफ लाइफ। मेनी ऑफ़ देम वेर इन अ प्रोमिनेंट पोजीशन ऑफ अमेरिकन सोसाइटी। मेनी ऑफ़ देम वुड फॉल फॉर द चार एंड ग्रेस ऑफ़ स्वामी जी एंड दे वुड कम टू वेननेरेट एंड हैव सच अ ग्रेट फेथ फॉर हिम। एंड बाय एक्सटेंशन टुवर्ड्स ठाकुर। एंड वेंट स्वामी जी वुड रिटर्न टू इंडिया इवन राजास एंड महाराजास वुड कॉम्पीट विथ ईच अदर टू ड्रैग हिज चेरियोट दे वुड रिमूव द हॉर्सेज फ्रॉम ह चेरियर्ड एंड राजास देमसेल्फ वुड यू नो दे वुड ड्राइव हिज चेरियड थ्रू द स्ट्रीट्स ऑफ देयर ओन किंगडम्स सो दैट वाज़ सच अ ग्रेट पावर ऑफ़ स्वामी जी एंड बाय एक्सटेंशन ऑफ कोर्स टुवर्ड्स अह आवर ठाकुर। सो दिस वी हैव टू दे से दैट वी नेवर इमेजिन व्हेन वी यूज्ड टू कम टू दक्षिणेश्वर दैट वन डे श्री रामकृष्ण मूवमेंट विल एंगल्फ एंटायर वर्ल्ड एंड सो मेनी ग्रेट पीपल वुड कम टू देयर विल बी अ बेलूर मठ ही नेवर इमेजिन एंड सो मेनी किंग्स एंड क्वींस एंड ऑल दिस डिप्लोमेट्स एंड वाइससरॉय इवन द वाइसरॉय ऑफ़ इंडिया ही वाज़ सच अ ग्रेट पर्सन ही हिमसेल्फ वुड विजिट बेलूर मठ वी नेवर इमेजिन दैट हु वुड नो दैट द होल वर्ल्ड वुड बिकम इंटॉक्सिकेटेड वि दिस मैन ओनली थ्री एंड हाफ क्यूबिक टोल सच ही इज़ सच अ नॉर्मल लुकिंग पर्सन आउटसाइड फ्रॉम आउटसाइड श्री रामकृष्णा बट वन डे द एंटायर वर्ल्ड विल बिकम इंटॉक्सिकेटेड विथ हिम दे वुड फॉल दे वुड केम टू हैव सच अ ग्रेट वेनरेशन फॉर हिम ही लव्ड अस वेरी मच इट वास द डेप्थ ऑफ ह लव दैट ड्रू अस टू हिम हाउ शैल आई डिस्क्राइब ह लव इट वाज़ इनफेबल इन आवर चाइल्डहुड वी हैड द एक्सपीरियंस ऑफ़ पैरेंटल अफेक्शन एंड डिड नॉट थिंक देयर कुड बी एनीथिंग ग्रेटर अगेन ही रेफर्स टू हिज मदर दैट व्हेन ही वाज़ द चाइल्ड ही हैड अ ग्रेट अफेक्शन हिज़ मदर यूज़्ड टू लव हिम ग्रेटली एंड हाउ कैन ही इमेजिन दैट व्हेन ही वुड ग्रो अप देयर विल बी अनदर ग्रेट मैन सच एस ठाकुर हु वुड बी एबल टू लव हिम हु वुड बी एबल टू केयर फॉर हिम केयर फॉर हिम विथ सच अ ग्रेट लव अगेन बट व्हेन वी केम टू ठाकुर एंड फेल्ट ह लव वी फाउंड द अफेक्शन ऑफ आवर पेरेंट्स टू बी ऑफ़ लेसर काइंड। सी इवन द पे लव ऑफ देयर पेरेंट्स वाज़ ऑफ़ लेसर काइंड देन ठाकुर। व्हाई? बिकॉज़ देयर वाज़ वन हिंट वन वी मे से परसेंटेज ऑफ़ वर्ल्डलीनेस अटैच टू इट। बट इन ठाकुरस लाइफ इन ठाकुरस लव दैट वाज़ प्योर डिवाइन लव। प्योर गॉडली लव। देयर वाज नॉट ए हिंट ऑफ एनी वर्ल्डलीनेस इन हिज लव। आफ्टर कमिंग टू हिम वी फेल्ट दैट वी हैड अराइव्ड होम दैट ऑल दोज़ प्रीवियस इयर्स वी हैड बीन रोमिंग अबाउट इन अ स्ट्रेंज कंट्री। सच अ ग्रेट स्टेटमेंट व्हेन दे केम टू ठाकुर दे फेल्ट दैट यस दिस इज़ आवर होम। दिस आर दिस इज़ ही इज़ आवर ट्रू फादर एंड मदर। एंड बिफोर कमिंग हियर वी वेर डूइंग वी वेर रोमिंग इन अ स्ट्रेंज कंट्री सच सी इवन द साहित्यिक द वे ऑफ राइटिंग दिस इज सो ग्रेट इफ यू थिंक अबाउट दिस वर्ड्स यू विल फील दैट दिस वर्ड्स आर कमिंग फ्रॉम ह आर्ट ही डजंट हैव टू थिंक अबाउट इट सच ग्रेट वर्ड्स एंड सच अ ग्रेट लिटरली स्टाइल ही सेस दिस वर्ड्स बिफोर कमिंग टू ठाकुर ही थॉट दैट वी वेर रोमिंग इन सम स्ट्रेंज कंट्री यू कैन जस्ट इमेजिन इन योर माइंड दैट यू नो ओल्ड डेज व्हेन पीपल यूज्ड टू बेक फ्रॉम होम टू होम दिस मक्स इन सर्च ऑफ सम डिवाइन एक्सपीरियंसेस इन सर्च ऑफ सम डिवाइन गाइडेंस एंड देन आफ्टर दे आर टायर्ड आफ्टर बेगिंग फॉर द होल डे एंड ट्रैवलिंग होल डे दे आर सीटेड बिनीथ अ ग्रेट बनियन ट्री एंड एवरीथिंग इज़ काम एंड क्वाइट एंड इवनिंग इज फॉलिंग डाउन बर्ड्स आर सिंगिंग दैट रिवर इज फ्लोइंग गोइंग अलोंग साइड दे दे आर सीटेड विथ देयर बैक रेस्टेड अगेंस्ट दैट बनियन ट्री देयर आईज आर क्लोज एंड दे आर प्रेगइंग इन देयर माइंड एंड सडनली दे हैड अ ग्रेट विज़न दैट गॉड हिमसेल्फ अपीयर्स बिफोर देम एंड प्लेसेस देम दिस हैज़ हैपेंड इन इंडियास हिस्ट्री सो मेनी टाइम्स सो मेनी सेंट्स एंड प्रोफेट्स हैव ट्रेवल्ड थ्रू आउट इंडिया एंड इन सर्च ऑफ़ सम डिवाइन एक्सपीरियंस इन सर्च ऑफ़ सम डिवाइन गाइडेंस एंड व्हेन दे आर कंप्लीटली टायर्ड देयर एंटायर दे हैव ऑल देयर वर्ली थिंकिंग ऑल देयर वर्ल्डली डिजायर्स हैव ड्रोन आउट ऑफ देयर माइंड दे हैव सरेंडर कंप्लीटली एट द गॉड्स फीट दैट टाइम व्हेन ऑल एल्स इज़ लॉस्ट ऑल होप आर लॉस्ट व्हेन एट दे आर एट द एंड ऑफ़ देयर डिजायर एट द एंड ऑफ़ देयर वर्ल्डली लाइफ सडनली दैट गॉड्स एक्सपीरियंस द डिवाइन लाइट एंड एंटर्स देयर हार्ट। वी कैन इमेजिन यू नो इट इज़ नॉट रिटन पर से एनीवेयर बट दिस इज़ द कंडेंस एक्सपीरियंस ऑफ़ सो मेनी सेंट्स एंड प्रोफेट्स थ्रूउ इंडिया। सो महापुरुष महाराज इन सच सच अ एप लैंग्वेज ही कंडेंसेस ऑल दिस एक्सपीरियंसेस एंड टेल्स अस इन दिस सच अ सिंपल स्मॉल सेंटेंस दैट व्हेन वी केम टू ठाकुर इट फेल्ट लाइक वी हैव कम होम एंड बिफोर दैट वी वेर ट्रेवलिंग इन सम स्ट्रेंज कंट्री वी डिडंट इवन नो दैट व्हाट वी वेर सर्चिंग फॉर ओनली आफ्टर कमिंग टू ठाकुर वी रियलाइज दैट वी वेर मुमुक्षु एंड वी वेर नॉट कंटेंट वि द प्लेजर्स ऑफ आवर सेंसेस और द प्लेज़र्स ऑफ दिस वर्ल्डली लाइफ। वी डिडंट इवन नो दैट बिफोर वी केम टू ठाकुर। ओनली व्हेन वी केम टू ठाकुर ओनली व्हेन वी गेन हिज ब्लेसिंग्स एंड ह डिवाइन ग्रेस ओनली देन वी रियलाइज दैट व्हाट इज रियल होम एंड व्हाट वी यूज्ड टू डू बिफोर कमिंग हियर दैट वाज़ जस्ट रोमिंग थ्रू द स्ट्रीट्स एंड फॉरेस्ट्स एंड द माउंटेंस एंड द हिल्स ऑफ इंडिया। ओनली आफ्टर कमिंग टू ठाकुर आवर हार्ट हैड बिकम काम डाउन आवर माइंड शैल कूल डाउन आवर ग्रेट डिवोशन इज बोर्न टुवर्ड्स श्री रामकृष्ण एंड वी हैव रिसीव डिवाइन लाइट डिवाइन गाइडेंस इन आवर हार्ट

श्रीरामकृष्ण कथामृत : तृतीय दर्शन

नाउ हिंदी श्री रामकृष्ण कथामृत अच्छा वो जो बद्ध जीव मुक्त जीव की बात हमने की किस तरह से ये जो बद्ध जीव होते हैं वो शामरुग जिस तरह से ये ठाकुर बंगाल में थे तो मछली का उदाहरण देते थे बाकी हम लोगों को शाहमरुग का उदाहरण पता है कि शाहमरुग या तो ऑस्ट्रिक जो होता है यदि कोई उसको शिकार करने के लिए आता है तो वो क्या करता है कि रेती में अपना मुंह छुपा देता है और सोचता है कि क्योंकि मैं खतरे को नहीं देख पा रहा हूं हूं क्योंकि मैं शिकारी को नहीं देख पा रहा हूं तो शिकारी है ही नहीं। इस तरह से कोई विचित्र बात वह अपने मन में सोचता है और आखिर में वह शिकार हो जाता है। तो इस तरह से ठाकुर कहते हैं कि अच्छा ठाकुर आगे क्या कहते हैं? बद्ध जीव संसार के कामिनी कांचन में फंसे हैं। उनके हाथ पैर बंधे हैं। किंतु फिर भी वे सोचते हैं कि संसार में कामिनी कांचन में ही सुख है और यहां हम निर्भय हैं। वे नहीं जानते इन्हीं में इनकी मृत्यु होगी। बद्ध जीव जब मरता है तब उसकी स्त्री कहती है तुम तो चले पर मेरे लिए क्या कर गए। माया भी ऐसी होती है कि बद्ध जीव पड़ा तो है मृत्युशैया पर पर चिराग में ज्यादा बत्ती जलती हुई देखकर कहता है तेल बहुत जल रहा है बत्ती खम कर दो बद्ध जीव ईश्वर का स्मरण नहीं करता यदि अवकाश मिला तो या तो गप करता है या तो फालतू काम करता है पूछने पर कहता है क्या करूं चुपचाप नहीं बैठ सकता इसीलिए मैं घेरा बांध रहा हूं कभी ताश ही खेलकर समय काटता है। सब लोग स्तब्ध होकर के सुन रहे हैं। देखिए हम लोग ने भी इस तरह से बद्ध जीव बहुत देखे हैं। संसार में दूसरों को क्या हम अपने ही बारे में कह सकते हैं कि हमको जितना टाइम ये स्पिरिचुअल डिवोशन में देना चाहिए। जितना समय हमारे पास अवेलेबल है किंतु हम उसका मिसयज करते हैं। उसी को देखकर के हमको पता चलता है कि हम अभी कहां पे है। यह जो ठाकुर कहते हैं ना कि यदि किसी चोर को पता चल जाए कि मेरे बगल वाले कमरे में वो बहुत सारा खजाना है। किंतु बीच में एक बहुत बड़ा ताला है। बहुत स्ट्रांग ताला है। बहुत एक स्ट्रांग दरवाजा है। तो चोर क्या कभी वो शांति से बैठेगा? ये ये पता चलने के बाद कि बगल के कमरे में खजाना है। वो वो कहीं से वो हथियार वगैरह जुगाड़ करके साधन वगैरह जुगाड़ करके वो दरवाजे को तोड़ पाएगा। भले ही चाहे उसको कितना ही मेहनत करना पड़े दरवाजा तोड़ के भीतर में जाएगा और खजाना जो है वो लूट लेगा। तो हमारे जीवन में हमको हम देखिए कि बहुत सारे लोग कहते हैं कि हां मुझे जग ध्यान करना है या तो फिर मुझे पढ़ाई लिखाई करनी है किंतु मुझे समय नहीं मिल रहा। आप सही-सही अपने अपने दिन के सामने देख के सोचिए कि आप यदि कोई काम करते हैं तो क्या वो सही उस काम की जरूरत है कि उस काम को उस समय आप नहीं करके ईश्वर के लिए थोड़ा समय निकाल सकते हैं। हम लोग अपने खास करके हम साधु लोगों के लिए हम लोग सब मैं खुद सब समय में इस तरह का कोई ना कोई एक एक्सक्यूज खोज करके मैं ऑफिस में बैठा रहता हूं कि हां चलो अभी ये किताब को ट्रांसलेट करना है। अभी यह नई किताब पब्लिश हो रही है तो उसके ऊपर काम करना है। अभी मैगज़ीन तो हर महीने निकलता ही है। तो चलो उसको ये ट्रांसलेशन वगैरह कंप्लीट कर दो। ये मैं खुद मैं अपने बारे में कह रहा हूं कि यदि मैं अपने रूम में जाकर अपने कमरे में जाकर के जितना समय बैठता हूं उस समय को मैं दुगना या तीन गुना आराम से कर सकता हूं। किंतु फिर भी ये जो मन है ये सब समय ये कुछ ना कुछ ये बहाने फेंकता रहता है कि अरे नहीं ऑफिस में यह काम है ऑफिस में वो काम है। अरे कोई मिलने को आया है ना कि किसी का फोन आया है। अभी प्रिंटर के साथ बात करनी है। अभी अकाउंट देखना है। नॉट नेसेसरी कि मैं उस समय नहीं देखूंगा तो सब कुछ बंद हो जाएगा। तो ये जो है कि अपना मन हमेशा कुछ ना कुछ एक्सक्यूज फेंकता रहता है। कुछ ना कुछ बहाने करता रहता है कि अरे अभी नहीं इसको करने से चलेगा कल करूंगा। परसों करूंगा। तो जैसे वो लड़के जो होते हैं ना परीक्षा की तैयारी करनी है तो सब समय उनका मन जो है अभी जैसे ही पढ़ाई लिखाई का कुछ ले बैठे वो किसी मित्र ने फोन किया कि अरे चलो वहां पे जाकर घूम के आते हैं। तो अब वो मन के मन के मन के भीतर इतनी लालच पैदा हो जाती है। अरे अभी ये पढ़ाई लिखाई तो मैं रात को भी कर पाऊंगा। अभी वो उसने फोन किया है या तो फिर मिलने को आए। चलो मैं उसके साथ में गप लगाता हूं या चलो थोड़ा घूम के आता हूं या चलो कहीं पे बैठ के सिनेमा वगैरह देख के आता हूं। तो ये जो है कि जब जो काम करना है उसको नहीं करके जो हमको अच्छा लगता है वो काम करना प्रेय और श्रेय हमारे जैसे उपनिषद में कहा गया है प्रेय जो है जो मुझे करना अच्छा लगता है जिस जो मेरी इंद्रियों को संत संतोष देता है और श्रेय जो है जो कि मेरे भविष्य के जीवन के लिए वो श्रेष्ठ है वो चाहे वो आध्यात्मिक साधना ही हो या तो आपकी पढ़ाई लिखाई हो या तो तो फिर आप बिजनेसमैन है तो कोई जो भी आपका प्रोडक्शन वगैरह है वो है जो भी है जो कुछ काम है जो आपके लिए श्रेष्ठ है भविष्य के लिए वो करना वो है आपके लिए श्रेय और प्रेय है जो कि आपकी इंद्रियों को संतोष देता है सुख देता है तो हम खुद जो है ये हम में से कोई भी ये प्योर मुक्त जीव या मुमुक्षु जीव या बद्ध जीव ऐसे नहीं है। हम लोगों में सब में मिश्रण होता है। कभी-कभी ये ईश्वरीय जो हमारी ये जो मुमुक्षुत्व है वो इतना जागृत हो जाता है हमको लगता है अरे ये सब छोड़ो संसार बंसार कहीं अभी चलो मैं आश्रम में जाकर के आज पूरा दिन बिताता हूं वही मंदिर में बैठूंगा वहां लाइब्रेरी में जाऊंगा किसी साधु के साथ बात करूंगा ऐसी भीतर में से इस तरह की एक इच्छा आ जाती है और कभी-कभी ऐसा लगता है कि अरे अभी ये सब छोड़ो चलो थोड़ा सा इंद्रियों का सुख भोग कर ले या ऐसा कुछ ना कुछ तो हम सब लोग जो है वो हम सब में ये जो क्वालिटीज जो है वो मिश्रित कब कहीं कौन सी क्वालिटीज आगे बढ़ जाए, कब कहीं कौन सी क्वालिटी रिग्रेशन में चली जाए, हमको समझ में नहीं आता है। तो इसीलिए यह जो कथामृत वगैरह जो है उसका पाठ करना क्यों आवश्यक है? जिससे कि हम लोग सब समय ये अलर्ट रहे कि अच्छा ठीक है चलो कल मैंने बहाना बना करके जो मुझे जितना जप करना था मैंने एक बार सोचा था मां की किताब पढ़ी थी तो कि मां प्रतिदिन 1 लाख जप करती थी। अभी हम लोगों में जनरली ऐसा माना जाता है कि हमको जो मंत्र मिलता है वो इतना लंबा है कि उसको आप यदि दिन भर भी बैठे रहेंगे आप 24 घंटों में से आपको मान लीजिए पांच छ घंटा आपको दैनिक जो आपकी जो क्रिया है उसमें लगेगा नींद नींद के लिए चाहिए मान लीजिए 8 घंटे तो आपके हाथ में 16 घंटे बचते हैं तो यदि मैं 16 घंटे बैठकर के जप करूंगा तो क्या 1 लाख होगा तो हम लोग जनरली मानते हैं नहीं होगा क्योंकि हमारा मंत्र जो है वह बड़ा लंबा है। तो मैंने क्या सोचा कि मां ने तो कहा था कि यदि मेरा मंत्र जप करना चाहो तो तुम या तो राधा नाम जप करो या तो सिर्फ मां नाम जप करो। तो मैंने सोचा मां का नाम जप करके मैं 1 लाख करता हूं। देखता हूं वो होता है कि नहीं। यदि मैं इस तरह से रेगुलर कर करने को सकूंगा कर पाऊंगा यदि दो-ती घंटे बैठकर के दिन में तो मैं उसको प्रतिदिन का प्रैक्टिस बना दूंगा। तो मैं कितने दिन इस तरह से प्रैक्टिस किया मुझे लगता है शायद एक सप्ताह तक एक सप्ताह के बाद में मैं पूरी बात ही भूल गया क्योंकि मेरे हाथ में कोई बहुत अच्छी किताब आ गई और मैं किताबों के लिए बहुत ही मतलब मेरा लोभ है पढ़ने का तो मैं सब समय नई-नई किताबें खोजता रहता हूं। तो जो एक मेरी अच्छी बहुत अच्छी किताब मुझे मिल गई पढ़ने के लिए। तो जितने दिन मैं पढ़ता रहा वो बात ही पूरी मेरे दिमाग से निकल गई कि हां मैंने ऐसा कोई मतलब व्रत लिया था या प्रतिज्ञा की थी या तो सोच के रखा था कि चलो प्रतिदिन तीन-चार घंटे बैठने जप करते हैं। फिर जब किताब खत्म हो गई तब याद आया अरे वो हां मैंने तो ऐसा सोचा था। किंतु बाय दैट टाइम वो पूरा वो जो उत्साह था जो एंथूजियाज्म था वो चला गया और जैसे मैं रेगुलर जो करता हूं वो करने लगा। तो हम लोग भी हम लोगों को ऐसा कोई बहुत मतलब ये अपने को बड़ा नहीं मान लेना चाहिए कि रामकृष्ण मिशन में आ गए हैं तो हम जो है हमारी जो साधना है या मुमुक्षत्व जो है वो हम एक लेवल पे आ गए हैं। अभी हमको कोई डरने की जरूरत नहीं। यह रिग्रेशन जो है वो प्रतिदिन हमारे सामने कोई ना कोई टेंप्टेशन का कोई ना कोई लोभ लालच का स्वरूप ले आ जाता है। वो जैसे सात्विक इच्छाएं भी स्वामी जी कहते हैं कि ये सर ठाकुर खुद कहते हैं सत्व भी जो है वो जंजीर है। सत्व भी जो है वो हमारे पैर में एक सोने की जंजीर है। हमको लगता है जो तमस है, रजस है और उससे प्रगटित जो भोग है वो हमारे पैरों में वो जो लोहे की जंजीर की तरह है। किंतु इवन जो सत्व भी है, जो सात्विक इच्छाएं भी है कि हां चलो मैं कोई अच्छी सी किताब पढ़ता हूं या तो चलो मैं कोई पिलगिरी मेज पे जाता हूं या तो चलो मैं कोई अच्छा काम करता हूं। ये सब चीजें भी हमारे पैरों में सोने की जंजीरें हैं। और जो समय हमने एलोकेट किया है मेडिटेशन के लिए जग ध्यान करने के लिए यदि वो उसमें व्याघात पहुंचाती है तो वो भी हमारे लिए एक तरह का डिस्ट्रैक्शन है। ये जो कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान ये जो संपूर्ण एक लाइफस्टाइल जो हमको कहा गया है तो हम लोग सब लोग कहते हैं कि अरे स्वामी जी ने तो कहा है कर्म योग करो। अरे स्वामी जी ने तो कहा है कि ये जो भक्ति मार्ग में जो जो भी हमको दर्शित किया गया है वो सबका अनुष्ठान करना है। आपको प्रार्थना भी करनी है। आपको मंदिर में भी जाना है। आपको साधु संग भी करना है। भक्ति मार्ग का तो अर्थ ही यही है। तो फिर हम यह सब क्यों ना करें? यह सब करना है। हमारा दिन 24 घंटे का है। 24 घंटे में से 121 घंटा जो है हमारे पास में जो रहता है। तो ये इस दिन को हमको अच्छे से यदि अरेंज करना है तो चार योग है। किंतु यदि हमने एक घंटा जो एलोकेट किया है जो जप ध्यान करने के लिए दैट इज राज योग। यदि हम उस समय ये बाकी का बाकी का काम बीच में ले आते हैं। सुबह का समय है। संध्या का समय है जप ध्यान करने का। उस समय मैं कहता हूं कि अरे नहीं मैं ऑफिस में बैठकर काम करूंगा कर्म योग करूंगा तो फिर वो कर्म योग कर्म योग नहीं रहता फिर वो कर्म भोग ही रह जाता है। मैं अपनी दूसरी रिस्पांसिबिलिटीज को अवॉइड करके यह कर रहा हूं। कर्म योग योग कब होता है? जबकि मैं अपने खुद के बेनिफिट के लिए पैसा अर्जन करता हूं। तब वो सिर्फ कर्म रहता है। और जब वो नहीं करके मैं समाज के कल्याण के लिए काम करता हूं। भले ही चाहे मैं किसी भी क्षेत्र में हूं। भले ही चाहे मैं गवर्नमेंट सर्वेंट हूं, भले ही चाहे मैं प्राइवेट जॉब कॉरपोरेशन में जॉब कर रहा हूं या तो भले ही चाहे मेरा खुद का बिजनेस है। यदि मेरे मन में एक अल्टीमेटली एक अल्ट्रो अल्ट्रोइज्म की भावना है कि हां मैं जो धन अर्जित करूंगा उसको मैं इस तरह से डोनेट करूंगा जिससे कि लोगों का कल्याण होगा। यदि मैं इस तरह से सोचता रहता हूं तो अच्छी बात है। मैं वो जो मेरे खुद के ईगो को बढ़ाने के लिए मेरी खुद की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए जो मैं कर्म करता हूं उससे तो यह कर्म योग बेटर है। इसलिए कर्म योग का विधान किया गया। इसलिए नहीं कि मैं जो शाम को या सुबह को या तो फिर दोपहर को मैं एक घंटे बैठने का मैंने नियम किया है। उस समय में कर्म योग करूं। तो वो तो कर्म योग नहीं होता। वो तो कर्म भोग ही हो जाता है क्योंकि मैं जब ध्यान में वो मुझे जब ध्यान नहीं करना है जब ध्यान की रिस्पांसिबिलिटी छोड़ के भाग करके वो कर रहा हूं तो फिर वो कर्म योग नहीं रहेगा तो ये इसलिए जो कर्मणा गहना गति वो जो कहते हैं ना गीता में जो कर्म की गति है वो बहुत गहन है। बहुत सारे लोग दुविधा में फंस जाते हैं। अरे मैं तो स्वामी जी का कहा हुआ कर्म योग ही तो कर रहा हूं। तो फिर मैं गलत क्या कर रहा हूं? तो गलत यह है कि यह समय आपका मेडिटेशन का है। वो छोड़कर के आप भाग रहे हैं। इसलिए वो कर्म योग नहीं रहेगा। कर्म भोग हो जाएगा। ये चीजें हम खुद रामकृष्ण मिशन में हमको ये थोड़ा सा एक सेंस रहना चाहिए हम लोगों को। क्योंकि मैं खुद के बारे में कहता हूं कि हमारा जब मैगजीन 20 तारीख को प्रेस में जाता है तो 20 तारीख को प्रेस में जाएगा तो क्या होगा कि हमको बहुत ही अटेंशन देकर के उसके तीन-चार दिन चार-प दिन आगे लंबा टाइम बैठ के हमको काम करना पड़ता है जिससे कि वो रेडी हो जाए। तो अभी वो जो एक लंबा टाइम बैठ के वो एक हैबिट हो जाती है ना फिर वो उसको बोलो अरे चाय लेके आओ। उसको बोलो थोड़ा लंबा देर तक लंबी देर तक बैठना है तो थोड़ा ये नाश्ता लेके आओ। ये वो चारप लोग मिलकर काम करते बड़ा आनंद आता है। उसमें भी एक उसका भी एक आनंद है। वो देरी तक शाम को 7 8 9:00 बजे तक बैठ के काम करने का। कभी कोई बड़ा प्रोजेक्ट आ जाता है। तो फिर किंतु जब काम खत्म हो जाता है। फिर जब रूम में जाते हैं किसी दिन जल्दी चले जाते हैं। 6:00 बजे या 7:00 बजे तब मन में लगता है अरे ये क्या मैं बैठकर के ये सब किताब पढ़ रहा हूं या तो फिर जप कर रहा हूं। चलो ऑफिस में जाकर के कुछ अच्छा सा नया प्रोजेक्ट चालू करते हैं। ये जो नया प्रोजेक्ट चालू करने का ये जो लालच जो प्रकट हो जाता है वो कहां से होता है कि ये देरी तक बैठकर के काम करने से हमारे मन में एक तरह का एक रजस बंध जाता है। तो फिर हमने जब नियम किया था कि शाम को ठाकुर कहते हैं कि जब संध्या हो जाए जब तुम अपने हाथ में यह जो यह है बाल अपने हाथ के वो जब तुम ना देख पाओ तो उस समय की ये घड़ी थी आजकल तो हम घड़ी पहन के रखते हैं तो मुझे बड़ा मतलब हंसी आया था जब पहली बार ठाकुर ने तो मुझे अपनी वो इस तरह से अपने हाथ में देख रहे हैं कि संध्या हुई कि नहीं मैंने कहा ये ये किस तरह का है ठाकुर ने क्या सही में घड़ी पहन के रखी थी ठाकुर ने घड़ी पहन के नहीं रखी थी उस समय की वो जो अपनी ट्रेडिशनल घड़ी है संध्या हो जाती है तो आप अपने हाथ पे जो बाल हुए हैं उसको आप गिन नहीं पाएंगे। उसका अर्थ है संध्या हो गई है। जब संध्या हो गई है ठाकुर कहते हैं सब कुछ छोड़कर के ईश्वर का नाम लेने का समय आ गया है। तो वो उस समय मुझे हंसी आई थी कि इस तरह से ठाकुर जैसे घड़ी में देख के वो हम देखते हैं ना क्या टाइम हुआ है। इस तरह से ठाकुर अपने वो रिस्ट की ओर देख के हाथ की ओर देख के कहते हैं कि संध्या हुई कि नहीं हुई। तो अभी एक बार हमने नियम बनाया कि संध्या हो गई है तो हम बाकी सब कुछ छोड़कर के रूम में चले जाएंगे। कुछ सात्विक का साधना करेंगे तो उस समय ये जो सत्व जो है अपने मन में अपना मन जो है सत्व से भर जाता है। अभी हर रोज प्रतिदिन उसी समय वो मेरे मन में सत्व जो है वो प्रकट होना शुरू हो जाएगा। मुझे रिमाइंड करवाएगा। मैं जिधर बैठा हूं ऑफिस में तो मेरा मन अंतर्मुख होने लगेगा। अरे यह सब काम अभी अच्छा नहीं लग रहा है। चलो छोड़कर के रूम में चले जाते हैं। किंतु यदि कुछ दिन हमने बैठकर के ये जो ऑफिस का काम करते ही गए करते ही गए फिर उस समय संध्या के समय एक रजस प्रकट होना शुरू हो जाता है तो फिर क्या होगा? मैं यदि रूम में जाकर के बैठूंगा माला भी हाथ में लूंगा। आंख लाइट वगैरह बंद कर दूंगा। आंख बंद कर दूंगा। वो अच्छे से बैठ गया हूं। और मेरी हैबिट है चाय का कप सामने रखने की। बीच-बीच में चाय पीता हूं। तो वो सब मैंने प्रिपरेशन कर दी। किंतु मेरा मन जो है वह दौड़ता रहता है। वह सोचता रहता है कि अरे अभी मेरे पास में थोड़ा सा टाइम है तो एक नया प्रोजेक्ट चालू करें और नए प्रोजेक्ट से और कोई अच्छा काम करें। तो किंतु उस समय यह प्रोजेक्ट के बारे में सोचना नई किताब के बारे में सोचना वो कर्म योग बिल्कुल नहीं हुआ। वो कर्म भोग हो गया। क्योंकि मेरे मन में उस समय रजस प्रकट हो गया है। और मैं उस रजस को संतोष करने के लिए यह सब सोच रहा हूं। तो यह जो कर्म क्या है? कर्म कब करना है? किस तरह से करना है? कब बंद कर देना है वो सब इतना गहन सब विषय है कि हम लोग जो यह जो टेशन भीतर में से आते रहते हैं तो यह सब हम नहीं समझेंगे कि हमारे लिए क्या कर्म करना कब करना किस तरह से करना उचित है तब तक जो है हम इस टेशन के सामने यह जो लोभ लालच के सामने इसी तरह मछली का जो उदाहरण दिया है कि जाल में फंस चुकी है संसार में फंस चुकी है फिर भी अपना मन जो है वह मिट्टी में अपना जो मुंह जो है मिट्टी में छुपाए बैठी है। सोचती है कि अभी मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं। मैं जो कर रही हूं वो ठीक है। किंतु वो एक दिन जो मछवरा उसको जाल वो खींच लेगा तब उसको समझ में आएगा कि हाय रे अभी क्या किंतु अभी क्या होगा तो देरी हो गई जो करना था वो समय बीत गया। जीवन का अंत आ गया और अभी जो भी है वो अगले जन्म में करना है। इस जन्म तो हो गया पूरा। अच्छा तो अभी हम कल मिलेंगे आज यहीं तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु