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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द 23 Sep 2024 | Raja Yoga | Swami Vivekananda

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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय नम हम लोग मैं जब राजकोट में था तो राजयोग का स्टडी प्रारंभ किया था तो उसके बाद में मेरे यहां पर आने के बाद में कंप्लीट नहीं हो पाया आधा छोड़ना पड़ा था और फिर राजयोग टॉपिक एक ऐसा है ना कि उसके लिए थोड़ा सा स्टडी करके थोड़ा सा सोच समझ करके बैठना पड़ता है तो थोड़ा सा आलस की वजह से भी मैंने यह टॉपिक फिर से हाथ में नहीं लिया था तो फिर से इसको किंतु करते हैं प्रारंभ और अभी तक जो हो चुका है उसका मैं एक आउटलाइन सबसे पहले आपको दे देता हूं हमको पता है कि राजयोग पुस्तक जो आज हमारे पास में है कंप्लीट वर्क्स में भी और वैसे अलग से जो एक पुस्तक मिलती है स्वामी जी की स्वामी विवेकानंद की उसके दो पार्ट है पहले पार्ट में तो कुछ लेक्चर है और सेकंड पार्ट में पतंजलि के जो योग सूत्र है उसका सामान्य ट्रांसलेशन है तो इस दो पार्ट में से यहां पर जो हम राजयोग का स्टडी कर रहे हैं उसके के लिए मैंने तीन लेक्चर को सिलेक्ट किया है उसमें से सबसे पहला लेक्चर है यह एक्चुअली फर्स्ट पार्ट जो है जो कि स्वामी जी के लेक्चर का कलेक्शन है उसमें से थर्ड चैप्टर है प्राण फोर्थ चैप्टर है साइकिक प्राण एंड फिफ्थ चैप्टर है हाउ टू कंट्रोल साइकिक प्राण तो दिस थ्री चैप्टर्स यह तीन चैप्टर है इसको हम सबसे पहले लेंगे राजयोग के भीतर में तो इन तीन चैप्टर्स में हमने प्राण चैप्टर प्रारंभ किया था और इस चैप्टर में हमने देखा था कि किस तरह से स्वामी जी हमको प्राणायाम का बेसिक डेफिनेशन समझाते हैं तो यहां पर देखेंगे कि जो डॉक्यूमेंट मैंने आपको दिया है उसमें मैंने स्वामी जी के पूरे लेक्चर को कुछ टॉपिक में बांट दिया है उसमें सबसे पहला टॉपिक है आकाश और प्राण यानी कि प्राण की बेसिक डेफिनेशन प्राणायाम की बेसिक डेफिनेशन तो वोह आ जाती है आकाश और प्राण रूपी इस टॉपिक में उसके बाद में देखेंगे कि यह जो टॉपिक है उसमें सबसे इंपॉर्टेंट जो पैसेज है उसको मैंने हाईलाइट करके रखा है यहां पे अभी सेकंड टॉपिक है सुपर पावर और यह सुपर पावर टॉपिक में जो सबसे इंपोर्टेंट पैसेज है यहां पे ये जो डॉक्यूमेंट है इस डॉक्यूमेंट में स्वामी जी का कंप्लीट लेक्चर है जो कि कंप्लीट वर्क्स में जिस तरह से दिया गया है तो इसी कंप्लीट लेक्चर को मैंने टॉपिक में बांट दिया है प्रत्येक टॉपिक में से एक सबसे इंपॉर्टेंट पैराग्राफ को मैंने हाईलाइट कर दिया है जिससे कि क्या होगा कि जबी हम इस चैप्टर को रिवाइज करें तो ये जो हाईलाइट पैसेज है सिर्फ उसी को भी पढ़ ले तो भी हमको एक ओवरऑल आईडिया आ जाएगा कि स्वामी जी हमको स्वामी विवेकानंद हमको क्या कहना चाहते हैं तो यह हाईलाइट पैसेज सेकंड टॉपिक का है सुपर पावर्स और यह फिर थर्ड टॉपिक है समाधि उसका यह हाईलाइट पैसेज है और यहां पे यह जो लास्ट लाइन है यहां तक हम लोग रुके थे आठ लेक्चर ऑलरेडी राजयोग के हो चुके हैं उसमें तीन टॉपिक हमने कवर किए हैं चौथा टॉपिक अद्वैत और फिर यहां से पूरा बाकी है अभी तक यह डॉक्यूमेंट मैंने कंप्लीट नहीं किया है इसलिए सभी टॉपिक में नहीं दे पाया हूं व धीरे-धीरे करके दूंगा मैं अ दूसरी एक बात है कि आप कहेंगे कि यह जो टॉपिक है किस बेसिस पर दिए गए हैं तो देखिए कि स्वामी जी का तो मन किस तरह से काम करता था उनके लेक्चर देने की स्टाइल कैसी थी उसके बारे में हमने पहले भी थोड़ा सा डिस्कस किया था स्वामी जी ऐसा कोई पार्टिकुलर टॉपिक पकड़ करके उसको कंप्लीट करें सेकंड टॉपिक चालू करके उसको कंप्लीट करें ऐसा नहीं करते थे वो कहां से कहां जंप लगाते थे वो जैसे कि एक व भागवत में है ना एक कहानी चालू होती है बीच में में से दूसरी कहानी चालू हो जाती है फिर वह कहानी खत्म होने से पहले उसी दूसरी में से तीसरी कहानी चालू हो जाए 101 कहानियां एक साथ में चलती रहती है फिर आखिरी कहानी समाप्त होगी तो उसके पहले वाली कहानी में आ जाएगा तो आ जाएंगे वह जो लेखक तो इस तरह से यहां पर भी स्वामी जी के कंप्लीट वर्ष में भी ऐसा हमको बहुत सारे ऐसे उदाहरण मिलते हैं स्वामी जी एक टॉपिक स्टार्ट करते हैं किंतु फिर उस टॉपिक में से दूसरा टॉपिक दूसरे में से तीसरा टॉपिक वो सब करते करते फिर आखिर में वो फर्स्ट टॉपिक का वही फिर समाप्ति करते हैं तो यह स्वामी जी की स्टाइल है तो कोई प्रश्न करेगा कि यह जो टॉपिक मैंने यहां पर दिए हैं यह सुपर पावर फिर ये आकाश और प्राण यह सब चीजों की ऑथेंटिसिटी क्या है यह सब चीजों का प्रमाण प्रमाण प्रमाण भूता क्या है तो इसका तो उत्तर मैं कहूंगा कि अपनी क्षुद्र बुद्धि से अपनी सामान्य बुद्धि से हम लोग ये जो डिस्कस करते हैं थिंकिंग करते हैं तो यह सामान्य बुद्धि से ही यह सब दिए गए हैं टॉपिक इन सब टॉपिक को बहुत ज्यादा सीरियसली लेने की जरूरत नहीं है जो लोग स्वामी विवेकानंद का सही सही डीप अभ्यास करना चाहते हैं तो उनको यह सब टॉपिक डिस्कार्ड करके डायरेक्ट टेक्स्ट में चले जाकर के टेक्स्ट में ही डीप अपने मन को पोना होगा किंतु जैसा होता है समय थोड़ा सा अभाव होता है समय का और हम सबके पास में इसको ऊपर ऊपर से देखते ही चले जाना है तो इसके लिए मैंने यह टॉपिक बनाए हैं और टॉपिक के अनुसार हम लोग जाएंगे तो राजयोग में स प्राण प्रकरण में स्वामी जी ने सबसे पहला टॉपिक किया है आकाश और प्राण अभी इसका अर्थ क्या है यहां पर सबसे पहले स्वामी जी यह समझाना चाहते हैं कि यह जो विश्व ब्रह्मांड है यह कॉस्मो है यह यूनिवर्स है यह दो तरह के एलिमेंट से ब बना हुआ है एक एलिमेंट को स्वामी जी कहते हैं आकाश दूसरे एलिमेंट को कहते हैं प्राण यह पदार्थ जितने भी है जैसे मान लीजिए यह मेरे चश्मे है यह मेरा देह है यह मेरे वस्त्र है फिर यह जो टेबल है यह किताब है न कि यह पूरी पृथ्वी है पशु पक्षी है पेड़ पौधे हैं चांद है सितारे हैं यह मंगल ग्रह है यह सूर्य है तो ये जितने भी पदार्थ आप इस विश्व ब्रह्मांड में देख सकते हैं देख रहे हैं उन सबको स्वामी जी कहते हैं यह आकाश आकाश रूपी तत्व के यह सभी पदार्थ बने हुए हैं तो फिर प्राण क्या है प्राण है वह फंडामेंटल एनर्जी कॉस्मिक एनर्जी जो कि इस इस आकाश के ऊपर में कार्य करती है तो अभी यह मॉडर्न जो फिजिक्स है यह मॉडर्न फिजिक्स भी कहता है कि ये यूनिवर्स बेसिकली दो तत्त्वों का बना हुआ है एक तत्व को नाम दिया है मैटर दूसरे तत्व को नाम दिया है एनर्जी जैसे कि अग्नि और और अब जैसे कि ये दिया सलाई है तो दिया सलाई जो है वह पदार्थ की बनी हुई है मैटर की बनी हुई है आकाश की बनी हुई है फिर उसमें जो अग्नि प्रज्वल होता है वह हो गई एनर्जी या तो फिर उसकी दाहिद तो एक है दिया सलाई वो हो गया आकाश और जब दिया सलाई को जलाते हैं उसमें से जो आगुण प्रकट होता है वह हो गई ऊर्जा या हो गया प्राण तो यह प्राण और आकाश पदार्थ और ऊर्जा मैटर और एनर्जी इन दोनों का ही यह पूरा विश्व बना हुआ है और फिर आइंस्टाइन ने आकर के बताया कि यह मैटर ही एनर्जी में कन्वर्ट होता है एनर्जी ही मैटर में कन्वर्ट होती है ये दोनों इंटरकनेक्टेड है इंटर कन्वर्टिबल है और उसका जो फेमस मैथमेटिक्स का सूत्र है e इक्वल एसी स्क्वा e अर्थात एनर्जी और ए अर्थात मास तो एनर्जी इज इक्वल टू मास इनटू द स्क्वेयर ऑफ स्पीड ऑफ लाइट सी का अर्थ है स्पीड ऑफ लाइट एंड सी स्क्वेयर अर्थात की ट स्क्वेयर ऑफ स्पीड ऑफ लाइट तो ये एनर्जी जो है वो मास में कन्वर्ट होती है मास एनर्जी में कन्वर्ट होता है इस सूत्र का सबसे बड़ा उदाहरण है एटम बोम एटम बम के भीतर में क्या होता है जो यूरेनियम दो तरह के बम होते हैं एटम बम एक तो फिशन बम है एक फ्यूजन बम है फिशन बोम में क्या होता है कि ये जो यरो यूरेनियम वगैरह हेवी एटम्स जो होते हैं उसका जो न्यूक्लियस होता है न्यूक्लियस के टुकड़े कर देते हैं तो टुकड़े करने से क्या होगा जो बाइंडिंग एनर्जी जो है वो रिलीज होती है और उसमें से यह एटम बम रूपी धमाका होता है और यह जो फिश फ्यूजन बम है फ्यूजन बम क्या करता है जो हाइड्रोजन के एटम्स जो होते हैं उनको टकराता है जोर से तो उसमें से कुछ एटम्स का अणु एनर्जी में दहन होता है ऊर्जा में दहन होता है और उसमें से प्रचंड एनर्जी प्रकट होती है आज ये सूरज की जो एनर्जी है तारों की जो एनर्जी है वो न्यूक्लियर फ्यूजन से ही प्रकट होती है व वहां पे यह जो अणु और परमाणु है उनका दहन होता है जैसे कि कार के भीतर में हम पेट्रोल डालेंगे तो पेट्रोल का दहन होक के कैसे कार को ऊर्जा मिलती है जैसे कोयले को जला कर के हम कैसा चूल्हा जलाते हैं जैसे कि ये जो लिक्विड पेट्रोलियम गैस जो है एलपीजी व वो जला करके हम कैसे रोटी पकाते हैं तो वैसे ही यहां पर सूरज के भीतर में हाइड्रोजन एटम जो होते हैं ये एटम्स का दहन हो होता है उनको भट्ठी में जो सूरज का जो ग्रेविटी है ग्रेविटी रूपी भट्ठी में जलाया जाता है और उसमें से यह प्रचंड ऊर्जा प्रकट होती है तो आकाश और प्राण ये दो एलिमेंट है जब पृथ्वी सृष्टि का प्रारंभ होता है उस समय यह आकाश यह पदार्थ का स्वरूप धारण करता है यह जो प्राण है प्राण आकाश को धक्का देता है आकाशीय जितने भी पदार्थ है विश्व के उन सब में परिणत होता है सूक्ष्म आकाश है किंतु स्थूल आकाश में परिणत होता है और उसमें से ही यह सूर्य सितारे फिर यह आकाश गंगा फिर यह ग्रह ग्रह के ऊपर में पेड़ पौधे मनुष्य पशु पक्षी हम सब लोग प्रकट होते हैं और जब सृष्टि का लय होता है विनाश होता है प्रलय होता है तब यही आकाश अपने पोटेंशियल फॉर्म में सूक्ष्म स्वरूप में वह विलीन हो जाता है तो यह और स्थिति और प्रलय की य साइकल है प्राण जो है आकाश के ऊपर में कार्य करके आकाश के द्वारा पृथ्वी का सृष्टि का सर्जन करती है और प्रलय के समय प्राण और आकाश दोनों ही अपने सटल फॉर्म में सूक्ष्म फॉर्म में परिणत होते हैं तो यह हो गई प्राण और आकाश की यह डेफिनेशन यहां पर देखिए कि स्वामी जी ने यह जो पैसेज इस टॉपिक का जो ऑपरेटिव पैसेज है इंपोर्टेंट पैसेज उसको मैं सिर्फ एक बार पढ़ लेता हूं स्वामी जी कहते हैं एट द एंड ऑफ अ साइकल द एनर्जी नाउ डिस्प्ले इन द यूनिवर्स क्वाइट डाउन एंड बिकम पोटेंशियल जो सृष्टि का एक चक्र जब समाप्त होता है तब सृष्टि के भीतर में जितनी भी एनर्जी है जितनी भी मैटर है प्राण और आकाश अपने सूक्ष्म स्वरूप में व परिणत होते हैं एट द बिगिनिंग ऑफ द नेक्स्ट साइकल दे स्टार्ट अप स्ट्राइक अपॉन द आकाश एंड आउट ऑफ द आकाश इवोल्व दिस वेरियस फॉर्म्स जब नया सृष्टि का नई साइकल जब प्रारंभ होती है नया चक्र जब प्रारंभ होता है त प्राण क्या करता है आकाश के ऊपर में आघात करता है और आकाश विश्व के जितने भी पदार्थ है उन सबका स्वरूप धारण करता है ए एस द आकाशा चेंस दिस प्राण चेंस आल्सो इनटू ऑल दिस मेनिफेस्टेशन ऑफ एनर्जी जैसे ही आकाश अपने सूक्ष्म स्वरूप में से स्थूल स्वरूप धारण करता है मनुष्य का देह धारण करेगा वस्त्र वस्त्र का देह धारण करेगा पशु का देह धारण करेगा पेड़ का देह धारण करेगा वैसे ही य प्राण जो है प्राण में भी वो धीरे-धीरे करके उसका वो स्वरूप परिवर्तन होता है जिसको कि हम इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म कहते हैं जिसको कि हम ग्रेविटी कहते हैं जिसको कि हम स्ट्रांग और वीक न्यूक्लियर फोर्स कहते हैं वह सब विश्व की जितनी भी एनर्जी है जितनी फोर्स है उसमें कन्वर्ट होता है और मनुष्य के देह में जो हमारे विचार जो है विचारों के भीतर में यह कन्वर्ट होता है हमारे देह के भीतर में भी पंचप्राण है व्यान अपान समान उदान इस तरह से प्राण अपान व्यान समान और उदान यह जो पंच प्राण है हमारे भीतर में भी इस प्राण का मेनिफेस्टेशन होता है तो देखिए प्राण और आकाश इन दोनों के दो स्वरूप है एक तो सूक्ष्म स्वरूप है एक स्थूल स्वरूप है सूक्ष्म स्वरूप में वह सृष्टि का प्रलय होता है उस समय वह सूक्ष्म स्वरूप में होते हैं और सृष्टि का प्रारंभ होता है इवोल्यूशन होता है इस कॉस्मो का उस समय यह सब विभिन्न देह विभिन्न स्वरूप धारण करते हैं तो यहां पर पूरा हमको स्वामी जी ने यह प्राणायाम में योग शास्त्र का कॉस्मोलॉजी समझाया अभी स्वामी जी क्या कहते हैं बड़ा ही इंटरेस्टिंग टॉपिक कि मान लीजिए कि यह प्राण जो है वैश्विक प्राण इस वैश्विक प्राण को हम नियमन करना सीख ले तो हम इस नियमन की शक्ति से क्या से क्या नहीं कर पाएंगे हमारे भीतर में जो प्राण है और बाहर में विश्व में जो प्राण है वैसे तो प्राण तो एक ही है तो हमारे भीतर वाले प्राण को हमने कंट्रोल करना सीख लिया तो इस हमारे भीतर वाले प्राण में से मनुष्य के प्राण में से हम वैश्विक प्राण को भी बड़े ही आसानी से कंट्रोल कर पाएंगे तो ऐसा यदि होगा तो हमारे पास में सुपर पावर्स आ जाएंगे स्वामी जी क्या कहते हैं दिस ओपनस टू अस द डोर टू ऑलमोस्ट अनलिमिटेड पावर वैश्विक प्राण को जब हम दे प्राण से कंट्रोल कर सके तो हमारे पास में अद्भुत शक्तियां प्रकट होगी सपोज फॉर इंस्टेंस अ मैन अंडरस्टूड द प्राण परफेक्टली एंड कुड कंट्रोल इट व्ट पावर ऑन अर्थ वुड नॉट बी हिज यदि कोई साधक प्राण को ठीक-ठीक समझ ले और प्राण को संयमित करना नियमन करना सीख ले प्राण को कंट्रोल करना सीख ले तो इस विश्व में ऐसी कौन सी शक्ति होगी जो कि उसके कंट्रोल में नहीं होगी क्योंकि विश्व ही तो पूरा प्राण और आकाश का बना हुआ है आकाश के ऊपर में आघात तो प्राण ही करता है तो पूरा विश्व उसके कंट्रोल में आ जाएगा ही वुड बी एबल टू मूव द सन एंड स्टार्स आउट ऑफ देयर प्लेसेस सूर्य और सितारे जो है उनको वह अपने मन से ही कंट्रोल करना सीख लेगा अपनी यह जो ऑर्बिट है उनकी जो गति है उसमें से उसको हटा करके दूसरी डायरेक्शन में भेज सकता है टू कंट्रोल एवरीथिंग इन द यूनिवर्स फ्रॉम एटम्स टू द बिगेस्ट सस इस यूनिवर्स में कॉस्मो में जो कुछ भी है सूक्ष्म से सूक्ष्म अणु और परमाणु से प्रारंभ करके विराट से विराट चांद तारे सितारे जो है उन सबको वह कंट्रोल कर पाएगा बिकॉज ही वुड कंट्रोल द प्राण क्योंकि व प्राण को कंट्रोल कर सकता है दिस इज द एंड एंड एम ऑफ प्राणायाम प्राणायाम का हेतु प्राणायाम का लक्ष्य यही है प्राण का नियमन करना व्हेन द योगी बिकम परफेक्ट देयर विल बी नथिंग इन नेचर नॉट अंडर हिज कंट्रोल जब योगी परफेक्ट हो जाता है तो इस कॉस्मो में इस ब्रह्मांड में ऐसी कोई भी चीज नहीं कोई भी वस्तु नहीं कुछ कुछ भी नहीं जो कि उसके कंट्रोल में उसके अंडर में ना आ जाए इफ ही ऑर्डर्स द गॉड्स और द सोल्स ऑफ द डिपार्टेड टू कम दे विल कम एट हिज बिडिंग यदि वह देवताओं को भी आदेश करेगा जो पितृ है जो लोग गुजर गए हैं जिनका देहांत हो गया है उनकी जो आत्माएं अंतःकरण जो भटक रहे हैं पितृलोक में इधर उधर उन सबको भी जदी वह आदेश करेगा कंट्रोल करेगा कमांड करेगा तो वे लोग भी आकर के उसके सामने उपस्थित होंगे और उसकी आज्ञा का पालन करेंगे ल द फोर्सेस ऑफ नेचर विल ओबे हिम एज स्लेव्स पूरे विश्व की जितनी भी शक्तियां है वह इस योगी को गुलाम की तरह अपना जो भी कार्य करवाने को कहेगी जो योगी करने को कहेगा यह शक्तियां वह कार्य गुलाम की तरह करेगी व्हेन द इग्नोर सी दिस पावर्स ऑफ द योगी दे कॉल देम द मिरेकल्स जो अज्ञानी व्यक्ति है वह जब योगी की इस योगिक शक्ति को देखता है तो वह अज्ञानी व्यक्ति योगी को एक जादूगर जादूगर कहता है और उसकी शक्ति को जादू कहता है जादू या तो फिर मिरेकल किंतु यहां पे मिरेकल या जादू जैसा कुछ नहीं है यहां पे प्योर साइंस है आजकल देखिए कि ये पॉपुलर कल्चर जो है अपना जो टीवी है सिनेमा है यह जो नोवेल्स है इसमें इस तरह की जो सुपर पावर्स है इसके बारे में बहुत कुछ चलता है लोगों को आजकल सुपर हीरोज देखना बड़ा पसंद है जैसे कि यह हैरी पॉटर है ना ये जो पहले पहले वाली जब बातें में कर रहा हूं पहले एक स्टार वर्स करके एक मूवी आया था उसमें क्या था जो हीरो है अपने ब्रेन से अपने माइंड से फोर्स यूज करता था और किसी को भी वह हरा सकता था उस फोर्स का यूज करके फिर यह है रिपोर्टर बोल कर के एक चला किताबें भी और मूवीज भी उसमें देखेंगे कि उन लोग जादू की स्कूल में पढ़ाई करते हैं जादू सीखते हैं तो उससे पहले एक सुपरमैन था तो सुपरमैन के पास सुपरमैन हवा में उड़ सकता था फिर उसके पहले हम देखेंगे ये अपने पुराण है यह बाइबल है कितनी ही सब कहानियां है यह देवता जो है वह हवाई मार्ग से वह आना जाना करते थे यह पुष्पक विमान के बारे में बताया गया है भगवान राम का जो राम बाण ब्रह्मास्त्र उसके बारे में सब वार्ता है जैसे शंकराचार्य की वो जो कहानी है कि जब उभय भारती ने शंकराचार्य को कहा यह जो उभय भारती वाली बात हमने डिस्कस की थी ना कि शंकराचार्य और मंडन मिश्र का डिबेट हुआ डिबेट के भीतर में उभय भारती वो थी अंपायर वो थी जज और थी वो मंडन मिश्रा की पत्नी तो अभी जब मंडन मिश्रा हार गया डिबेट में तो उभय भारती ने कहा कि ठीक है चलो वो तो हार गए मेरे पति किंतु उनकी पत्नी होने के नाते मेरा भी हक है कि आपको एक प्रश्न करने का शंकराचार्य को उभय भारती ने कहा तो शंकराचार्य ने कहा ठीक है आप एक प्रश्न कीजिए सहधर्मिणी होने के नाते वो प्रश्न कर सकती है तो उभय भारती ने कहा कि यह जो संसार जो है संसार के भीतर में पति और पत्नी किस तरह से रहते हैं इसके बारे में वह उभय भारती ने प्रश्न किया अभी शंकराचार्य पड़ गए मुश्किल में वो तो थे बाल ब्रह्मचारी अभी संसार और पति और पत्नी यह सब बेचारे को क्या पता तो उन्होंने कहा अच्छा ठीक है मुझे थोड़ा सा समय दीजिए मैं समय में सब रिसर्च करके आपके पास में आता हूं अभी प्रॉब्लम ये है कि शंकराचार्य है सन्यासी तो खुद तो संसार नहीं कर सकते तो एक गुफा में चले गए गुफा में ध्यान कर रहे हैं ध्यान करके उन्होंने योग मार्ग से अपना सूक्ष्म देह छोड़ स्थूल देह में से सूक्ष्म देह के रूप में बाहर आ गए गुफा के भीतर में उनका देह पड़ा रहा है किंतु खुद वोह सूक्ष्म देह से भ्रमण कर रहे हैं कि कहां प जाए कैसे इस अनुभव को प्राप्त करें देखा कि एक राजमहल के भीतर में एक राजा का अभी मृत्यु हुआ है और उसका देह पड़ा हुआ है तो शंकराचार्य ने क्या किया सूक्ष्म देह से इस राजा के स्थूल देह के भीतर में प्रवेश किया वो प्रवेश करके अभी जैसे ही शंकराचार्य ने प्रवेश किया तो मृत देह था वोह तो जीवित हो गया तो शंकरा अभी राजा का देह है देह है राजा का भीतर में है शंकराचार्य अब ये देह के माध्यम से शंकराचार्य सब अनुभव ले रहे हैं किस तरह से रानियों के राजा की जो रानी होती है उसके साथ में राजा किस तरह से रहता है फिर जो राज्य वगैरह है वह किस तरह से चलाता है सब अनुभव शंकराचार्य सूक्ष्म रूप से इस राजा के देह के माध्यम से ले रहे हैं अभी यह सब ठीक चल रहा था एकाएक मंत्री को एक दिन संदेह हुआ उसने सोचा कि यह जो राजा पहले था वो तो बड़ा ही कामी था भोगी था वो चतुर था मतलब जो राजाओं के भीतर में ये जो सब गुणधर्म होते हैं ना कि दूसरों के ऊपर में दूसरों का हक छीन कर के अपनी धन संपत्ति का वर्धन करना दूसरों की जमीन छीन लेना यह सब तो पुराने राजा में बहुत सारे थे अभी यह जो नया राजा है मृत्यु के बाद में फिर से सजीव हो गया है वैद्य राज ने तो कह दिया था कि ये तो मृत्यु हो गया किंतु फिर भी जब सजीव हुए तो लगता है कि जैसे उनका पूरा देह ही परिवर्तन स्वभाव ही परिवर्तन हो गया है अभी तो किस तरह से धर्म के आधार पर वोह अपना राज्य चला रहे हैं र्म के आधार पर सब कुछ कर रहे हैं और इतना एफिशिएंटली राज्य चला रहे हैं एडमिनिस्ट्रेशन इतना पक्का है कि राज्य में सुख समृद्धि बढ़ रही है प्रजा भी बड़ी खुश है तो मंत्री ने ठीक किया कि निश्चय ही किसी योगी सूक्ष्म देह से राजा के देह के स्थूल देह के भीतर में निवास कर रहा है अभी मंत्री को लगा कि ये योगी जो राजा के देह में रह रहा है उसके पीछे में भी कोई कारण होगा और जिस दिन यह कारण समाप्त होगा यह योगी अपना का ये देह छोड़ कर के चला जाएगा तो मंत्री ने सोचा एक काम करते हैं मंत्री को भी यह सब योग वगैरह थोड़ा बहुत समझ में आता था तो उसने सोचा कि यह जो योगी होगा उसका देह स्थूल देह कहीं ना कहीं तो पड़ा ही होगा यदि उस स्थूल देह को नष्ट कर देते हैं तो योगी सूक्ष्म दे फिर वो उसके पास में और कोई उपाय नहीं है व राजा के स्थूल देह के भीतर में ही उस योगी को रहना पड़ेगा यह सब सोच कर के मंत्री ने क्या किया कुछ सैनिकों को लेकर के राज्य के आसपास में जो गुफा वगैरह है जहां पे योगी लोग जनरली साधना करते हैं वहां पे उसने खोजबीन स्टार्ट की और जहां पे भी देखे उसने आदेश दे दिया जहां पे भी ऐसा समाधि स्थ योगी दिखे इमीडिएट आके मुझे समाचार दो तो किसी को पता चला कि एक गुफा है पास में ही उसमें एक योगी स्थिर होकर के समाधि स्थ होकर के बैठा है लग रहा है कि शरीर में बिल्कुल ही प्राण नहीं है तो यह मंत्री समझ गया कि यही य योगी का स्थूल देह है वो अभी मंत्री दौड़ कर के जा रहा है गुफा में जाएगा और योगी के स्थूल देह को जला देगा तो फिर यह योगी मजबूर होकर के राजा के देह में रहेगा और राज्य अच्छे से लंबे समय तक चलेगा तो यह सब ये मंत्री सोच रहा है यहां पे शंकराचार्य को पता नहीं कहां से हवा मिल गई होगी वो गुप्तचर तो 10 दिशा में रहते हैं तो शायद हो सकता है कि कहीं से समाचार मिल गया होगा शंकराचार्य ने भी राजा का देह त्याग किया अपने स्थूल देह में जाकर के प्रवेश किए और फिर वहां से निकल गए फिर से वो जहां पर डिबेट हो रही थी उभय भारती के साथ में वहां पर और उभय भारती को बता दिया कि इस तरह से संसार में रहा जाता है इस तरह से ये पति और पत्नी का यह सब बिहेवियर होता है तो ऐसा तो देखिए कि ये योगिक शक्तियां है यह सब योगिक शक्तियों के बारे में पढ़ कर के हमको ऐसा लगेगा अरे यह तो चमत्कार ही तो है जो चमत्कार के बिना इसके भीतर में कैसे कोई अपना सूक्ष्म देह छोड़कर किसी के देह में चला जा सकता है किंतु देखिए कि यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि यह एक पूरा साइंस है जो प्राण है और जो आकाश है उसी का यह सब कुछ बना हुआ है और हमारे भीतर में जो प्राण है दैहिक प्राण इस प्राण के माध्यम से हम वैश्विक प्राण को भी नियमन कर सकते हैं वैश्विक प्राण को भी कंट्रोल कर सकते हैं और इसके माध्यम से हमारे पास में ऐसी सब शक्तियां प्रकट होगी कि चांद और सितारों को हम अपनी जगह से हटा दे सकते हैं जैसे कि ये महाभारत के युद्ध में व जो भगवान कृष्ण ने वह जो एक्लिप्स अर्थात कि सूर्य ग्रहण जैसा टेंपररी करवा दिया था तो जिससे तो यह जो मतलब सूर्य और चांद की गति को भी जद वो जो परिवर्तित कर सकते हैं यह शक्तियां इन लोगों में रहती है तो इसमें जादू कुछ नहीं है भगवान कृष्ण जो किए हैं या तो फिर शंकराचार्य ने जो किया है वही हम लोग भी कर सकते हैं यदि हमको यह प्राणायाम रूपी सायंस समझ में आता है तो यह हो गया सेकंड टॉपिक इसके बाद में थर्ड टॉपिक है समाधि इस टॉपिक में स्वामी जी क्या कहते हैं स्वामी जी कहते हैं कि मनुष्य का जो मन है वह तीन लेवल के ऊपर में रहता है एक तो है सबकॉन्शियस यानी कि निम्न चेतन फिर यह कॉन्शियस यानी कि चेतन और फिर सुपरकॉन्शियस यानी कि अति चेतन तो ये जब हम ज इसको दूसरी तरह से यह स्वप्न जागृत सुषुप्ति और फिर तुरीय इस अवस्था के माध्यम से भी कहा जाता है स्वप्ना और सुश उक्ति है सबकॉन्शियस और फिर यह जागृत अवस्था है कॉन्शियस और यह तुरीय अवस्था है सुपरकॉन्शियस तो जब हमारा मन इस प्राण जब अपने मन को धक्का मार कर के सुपरकॉन्शियस लेवल पर भेजता है तो हमारा मन समाधि में होता है और फिर यह जो सुपरकॉन्शियस लेवल जो है पूरे विश्व के जितने भी पॉजिटिव आइडियाज क्रिएटिविटी जो कुछ भी है एक्चुअली जो आत्मन जो है या ब्रह्मण जो है वही तो रिपोजिटरी है ना अल्टीमेट बैंक है जिसके भीतर में सत चित और आनंद है सत यानी कि एक्जिस्टेंस चित यानी कि नॉलेज और आनंद यानी कि आनंद तो एक्चुअल जो एसिस्टेंसिया भी जीवन के रिलेटेड ज्ञान है और जितना भी आनंद है सब तो ब्रह्मण के भीतर में है अल्टीमेटली देखिए कि हमको क्या चाहिए मनुष्य को अपने जीवन में क्या चाहिए कोई ज्ञान के पीछे दौड़ता है तो कोई आनंद के पीछे दौड़ता है इतना ही तो अभी ज्ञान को जद अनुभव कहे तो यह कितने ही लोग पूरे विश्व में ट्रेवल करते हैं एक जगह पर बैठ नहीं पाते हमको कोई यदि ऐसा कहेगा एक जगह पर बैठ जाओ तो हम लोग पागल हो जाएंगे क्यों क्योंकि हमको सतत घूमना फिरना एक हमारा हैबिट है हमको यह मनुष्य नेचर है कि एक जगह पर नहीं बैठ के हमेशा जगह परिवर्तन करें कोई कोई नया नया अनुभव करें नई नई बातें नई नई जानकारी प्राप्त करें तो ये ज्ञान प्राप्त करना हमारा नेचर है और आनंद प्राप्त करना अभी हम आध्यात्मिक आनंद नहीं समझते हैं तो हम लोग य वैशक आनंद में डूब जाते हैं किंतु पता चलेगा कि वैशक आनंद जो है इंद्रिय जनित आनंद वो क्षण ुर है क्षण भर के लिए है आज है कल नहीं है जबकि ये आध्यात्मिक आनंद वो हमेशा के लिए है और इसमें कभी भी कमी नहीं होती यह एक इस तरह का आनंद है जो कि हमेशा हमेशा के लिए अ अखू अनंत रहने वाला है अजर अमर रहने वाला है तो यह आध्यात्मिक आनंद और यह ज्ञान प्राप्ति यह आनंद आध्यात्मिक हो कि वैशक हो और यह ज्ञान प्राप्ति हो अनुभव प्राप्ति हो इसी के पीछे में तो मनुष्य दौड़ता है तो इन दोनों की जो अल्टीमेट रिपोजिटरी है अल्टीमेट स्टोरेज जो है वो है आत्मन या फिर ब्रह्मण तो ये आत्मन में जब मन स्थित हो जाएगा आत्मन के भीतर में हमारा मन सुपरकॉन्शियस में जाकर के विलीन हो जाएगा तो जितना भी आनंद है जितनी भी क्रिएटिव आर्ट्स है जितनी भी क्रिएटिव शक्तियां है वो सब हमारे भीतर में मेनिफेस्ट होगी ये देखिए इतिहास को देखिए कितने कितने बड़े-बड़े पोएट्स हो चुके हैं कितने बड़े-बड़े लेखक हो चुके हैं कितने बड़े-बड़े यह आपको आर्टिस्ट हो चुके हैं कितने बड़े-बड़े राजनेता हो चुके हैं नाट्य का हो चुके हैं ये जो भी साइंस और आर्ट्स का यह जो फील्ड है कितने बड़े-बड़े वैज्ञानिक हो चुके हैं तो ये साइंस और आर्ट यह जो क्रिएटिविटी है वो पूरी सुपरकॉन्शियस लेवल से आती है बहुत सारे लोगों को यह पता नहीं होता है कि मेरा म सुपरकॉन्शियस में विलीन हो गया है वे लोग ऐसा सोचते हैं कि मैं बहुत सोचता हूं तो मुझे यह ज्ञान प्राप्त हुआ है ये लोग सोचते हैं कि धर्म जो है वह विज्ञान के रास्ते में अंतराय मात्र है किंतु यह बात सही नहीं है यदि आप ठीक-ठीक धर्म को समझे धर्म अर्थात कि अपना योग मुझे यह धर्म शब्द इतना अच्छा नहीं लगता मुझे यह योग वेदांत आध्यात्मिकता यही शब्द सबसे ज्यादा अच्छे लगते हैं तो जैसे जैसे हम यह ध विज्ञान है ये आध्यात्मिकता है योग है वेदांत है इसके भीतर में प्रवेश करेंगे इतना ही हमारा मन यह कॉन्शियस लेवल से सुपरकॉन्शियस की ओर अग्रेसर होना शुरू होगा और ऊपर से ऊपर उठता जाएगा और जैसे-जैसे हम पास में आते जैसे कि आपने पहाड़ पर चढ़ने की शुरुआत की तो जैसे-जैसे आप पहाड़ चढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे ही आप देखेंगे हवा ज्यादा से ज्यादा शुद्ध हो रही है ये वहां की ये जो पोल्यूशन है जमीन के लेवल पे जो होता है सी लेवल पे वो पोल्यूशन कम होगा बादल बादल हट जाएंगे सूर्य आपको स्पष्ट वो आपको दृष्टि गोचर होगा स्पष्ट रूप से सूर्य का दर्शन होगा बादल के भी ऊपर में पहाड़ उठते हैं तो स्पष्ट रूप से आप सूर्य को देख पाएंगे तो वैसे ही आध्यात्मिकता के सोपान हम जितने भी सर करते जाएंगे हम लोग जितने ही पसार करते जाएंगे वैसे-वैसे ही आत्म सूर्य और ज्यादा से ज्यादा स्पष्ट तर रूप से प्रकाशित हो होता जाएगा तो यहां पर स्वामी जी जो कहते हैं इस टॉपिक में मैंने जो सिलेक्टेड पैसेज जो लिया है उसको पढ़ता हूं स्वामी जी क्या कहते हैं तो माइंड कैन एजिस्ट ऑन स्टिल हायर प्लेन यह जो सब कॉन्शियस और कॉन्शियस लेवल है निम्न चेतना और चेतन अवस्था जो है इससे भी ऊपर में एक अवस्था ऐसी है अति चेतना या सुपरकॉन्शियस जिसमें कि अपना मन विलीन हो सकता है और वन द माइंड हैज अटें टू दैट स्टेट चच इज कॉल्ड समाधि परफेक्ट कंसंट्रेशन सुपरकॉन्शसनेस इट गोज बियोंड द लिमिट्स ऑफ रीजन एंड कम्स फेस टू फेस विथ फैक्टस चच नो इंस्टिंक्ट और रीजन कैन एवर नो जब अपना मन संपूर्ण स्थिर हो जाता है कंसंट्रेशन और सुपर कस जिसको कि हम कहेंगे समाधि मन संपूर्ण रूप से स्थिर हो जाता है अति चेतना में विराजित हो जाता है तब हम समाधि प्राप्त करते हैं समाधि में विलीन हो जाते हैं और समाधि में रहने के समय हमको कुछ ऐसे तथ्य जानने को मिलते हैं ऐसे कुछ तथ्य हमारी दृष्टि के सामने आते हैं जिसको कि हम वैसे नॉर्मल कॉन्शियस लेवल पर नहीं जान सकते जैसे कि ठाकुर के दर्शन जब ठाकुर भाव राज्य में चले जाते थे समाधि में चले जाते थे एक के बाद एक कितने ही दर्शन होते थे उन दर्शन को फिर सत्या असत्य नरेण ने बहुत उस ये किया है टेस्टिंग किया है ठाकुर का और नरेण को पता चला है नरेण यानी कि स्वामी विवेकानंद का कॉलेज का नाम तो कॉलेज में पढ़ते थे ठाकुर के पास आते थे उस समय का तो नरेण ने यह सब बड़े ही टेस्ट किए सब समय पता चला कि ठाकुर के जो दर्शन है व सही सही है यह कोई गलत जिसको कि लोग कहते हैं मन का भ्रम है या तो फिर ये स् क्रिजो फेनिया है न कि ये लुसने है तो यह ठाकुर के दर्शन ना ही स्कज फ्रेनिया थे ना ही लुसिन थे ना ही मन का भ्रम था सत्य सत्य इस जगत के कौन से कोने में कौन सी जगह प क्या होता था किसके मन में क्या है भूतकाल वर्तमान भविष्य सब ठाकुर के सामने खुल जाता था एक बार की बात है कि जब जब ठाकुर एकाएक समाधि में चले गए फिर समाधि से बाहर आकर के उन्होंने कहा कि मैंने देखा कि किसका कहां तक हुआ है अर्थात की ठाकुर के जितने भी शिष्य थे उसमें से कौन से शिष्य की कहां तक आध्यात्मिक प्रगति हुई है कोई आध्यात्मिकता में बहुत आगे बढ़ा है तो कोई आध्यात्मिकता में अभी भी प्रारंभ ही कर रहा है और किसका क्या अंतराय है तो फिर वो मास्टर महाशय भी थे हाजरा भी था हाजरा ने प्रश्न करना शुरू किया एक के बाद एक कि किसका कहां तक पहुंचा है तो देखिए कि ठाकुर यहां तक देख सकते थे दूसरों के मन में वोह जाकर के मन की बात समझ सकते थे और यह भी समझ सकते थे कि कौन किसके आध्यात्मिक मार्ग में अंतराय कहां पे है यह बैरियर कहां पर आ जाती है क्या उसको अटका के रखता है यह जो रिचली मैनर में हमने जो पाठ कर रहे थे हम ग्रेट समर उस चैप्टर का तो हमने देखा कि स्वामी जी निवेदिता को कहते हैं कि मनुष्य के चरित्र को समझने की ठाकुर की जो कैपेसिटी है वह अद्भुत थी और यह ठाकुर की कैपेसिटी के सामने मेरी जो लोगों के चरित्र को समझने की क्षमता है वह तो कुछ भी नहीं है इसीलिए मैं ठाकुर का जो जजमेंट होता है किसी भी व्यक्ति के ऊपर में किसी भी व्यक्ति के बारे में उसको मैं आंख बंद करके फॉलो करता हूं मेरा जजमेंट लोगों के बारे में गलत हो सकता है किंतु ठाकुर का जजमेंट कभी भी गलत नहीं होता था और इसीलिए स्वामी जी ने जब राम कृष्ण मिशन की स्थापना की उस समय ट्रस्टीस में अपने गुरु भाइयों को ही लिया अपने खुद के शिष्यों को स्वामी जी ने नहीं लिया था तो यह जब हम सुपरकॉन्शियस लेवल पर चले जाते हैं तो आइंस्टाइन ने जिस तरह से रिलेटिविटी डेवलप की न्यूटन ने यह लॉज ऑफ ग्रेविटेशन डेवलप किए ठाकुर को ये जो आध्यात्मिक दर्शन वगैरह जो होते थे वो साइंस हो न की आर्ट्स हो ना कि स्पिरिचुअलिटी हो कोई भी फील्ड हो इस जगत का उस उस में सर्वश्रेष्ठ विचार सर्वश्रेष्ठ भाव सर्वश्रेष्ठ आइडियाज हमको समाधि में जाकर के मिलेंगे हमको लगेगा कि आइंस्टाइन है या न्यूटन है ना कि राफा है ना कि कालिदास है वो सब कहां समाधि ज्ञान य योग वेदांत सब प्रैक्टिस किया करते थे किंतु बात ऐसी है कि जब आप अपने मन को किसी भी एक विषय पर केंद्रित करेंगे मन को जब स्थिर करेंगे तो ऑटोमेटिक ये ये जो कंसंट्रेशन की शक्तियां हमारे मन को धीरे-धीरे सपर कॉन्शियस लेवल की ओर ले जाएंगे इसलिए यहां पर स्वामी जी ने शब्द यूज किया है ना व्हिच इज कॉल्ड समाधि व्हाट इज समाधि परफेक्ट कंसंट्रेशन एंड सुपरकॉन्शसनेस अर्थात कि जब कंसंट्रेशन परफेक्ट होता है जब हम पूरा जगत को भूल जाते हैं तब हम समाधि में चले जाते हैं तो यह परफेक्ट कंसंट्रेशन आर्टिस्ट का भी हो सकता है क्रिकेटर्स का भी हो सकता है वो जो अच्छे-अच्छे क्रिकेटर है वे लोग जब बेट लेकर के खड़े होंगे तो उनका मन सिर्फ बॉल की ओर ही है और इधर-उधर क कहीं पे नहीं है ये लाखों लोगों का ऑडियंस वहां पर हजारों लोगों वहां पर बैठे हुए स्टेडियम में वो जो फील्डिंग करने वाले हैं अपोजिट टीम वाले हैं वो जितने भी लोग हैं अंपायर है कुछ भी उसको नहीं देखता जो सर्वश्रेष्ठ बैट्समैन होगा उसको सिर्फ बॉल ही दिखेगा जैसे कि अर्जुन को प्रश्न किया गया कि तुमको क्या दिख रहा है तो अर्जुन ने उत्तर दिया सिर्फ पंखी की आंख ही दिख रही है और पेड़ नहीं दिख रहा पंखी का देह नहीं दिख रहा और कुछ नहीं दिख दिख रहा है क्यों क्योंकि पंखी की आंख के ऊपर में तीर मारना है तो जिसके जो निशान को भेद करना है जो लक्ष्य को ऊपर में वार करना है लक्ष्य ही दिखना चाहिए और कुछ नहीं दिखना चाहिए वरना तो पढ़ाई करने के लिए बैठे हैं किताब खोल कर के और बीच-बीच में मोबाइल खोल कर के देख रहे हैं कि अभी क्या नोटिफिकेशन आया है अभी क्या मेरे मित्र ने क्या मैसेज भेजा है कहां पर क्या हो रहा है हर 5 मिनट में मोबाइल खोल कर के बैठेंगे आज मोबाइल जो है इतना भयानक शत्रु हो गया हम लोगों का वो हेल्प भी बहुत करता है और मन को भी बिगाड़ करके रख देता है तो यह आज के जमाने में यह कंसंट्रेशन लोगों का बहुत ही कम हो गया है इसलिए हम लोगों को यह सब बातें जादू चमत्कार जैसी लगती है कि स्वामी जी कह तो रहे हैं स्वामी जी के खुद के जीवन में तो यह सब देखा नहीं हमने स्वामी जी को खुद को तो हमने 39 इयर्स की एज में मृत्यु समाधि महासमाधि लेते हुए देखा तो ना ही अपने शरीर को हील कर पाए ना ही हमने उनके के भीतर में कोई मिरेकल अस पावर देखे तो स्वामी जी जो जीज नहीं कर पाए हैं निर्विकल्प समाधि में स्थित होने के बावजूद तो हम क्या कर पाएंगे ऐसे सब प्रश्न होते हैं प्रश्नों की हार माला प्रारंभ होती है किंतु एक बात याद रखनी है कि ठाकुर मां स्वामी जी इन तीनों ने भी ये अपनी जो जादुई शक्तियां है कोर्ट अन कोर्ट जादुई शक्तियां अर्थात कि ये जादुई शक्तियां नहीं बेसिकली ये साइंस ही है प्राणायाम का साइंस आध्यात्मिकता का साइंस इसका यूज करके लोगों के कल्याण के लिए किया है नहीं कि अपनी खुद की सत्ता बढ़ाने के लिए अपनी खुद की प्रेस्टीज बढ़ाने के लिए अपना खुद का मान सम्मान बढ़ाने के लिए कोई भी साधक आएगा ठाकुर महा स्वामी जी के पास में तो इन शक्तियों का प्रयोग करके यह लोग इस साधक के मार्ग में जो अंतराय है जन्म जन्मांतर के जो कर्मों का बोझा इस साधक के सर पर पड़ा हुआ है उसको यह लोग समाप्त कर देंगे यह जो योगिक शक्तियां है उसका सबसे ग्रेटेस्ट फेस्टेन तो यही है कि कोई भी साधक हो उसको आध्यात्मिकता के रास्ते पर अग्रसर करवाना आध्यात्मिकता के रास्ते में आगे बढ़ने के लिए उसको सहाय करना यही तो आध्यात्मिक शक्तियों का सबसे बड़ा प्रयोग है सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रयोग है वरना यदि मैं अपने खुद के स्वार्थ के लिए करना शुरू करूंगा तो यह भूत और पिशाच की तरह आकर के मुझे ही खा जाएगी जैसे वह जो कहानी है ना एक आदमी ने वो एक भूत मिल गया वो उसको गुरु के पास जाकर के कहता है कि मुझे बहुत सारी चीजें चाहिए आप मुझे किसी भूत या किसी को दिलवा दीजिए जिसके पास में यह सब चीजें मांगने लगू तो यह गुरु ने अच्छा ठीक है एक भूत को इसको दे दिया अब यह भूत को बोला कि मुझे बहुत बड़ा महल बना कर के दे दो तो ठीक है उस किंतु भूत ने कहा कि मैं तुम जो चाहोगे मैं सब करूंगा किंतु अब तुमको मुझे सतत काम देते रहना होगा जैसे जिस क्षण तुम्हारा काम खत्म हो गया मैं तुमको खा जाऊंगा तोय आदमी बोलता है मुझे इतनी सारी चीजें चाहिए तो उसमें उसका काम कभी खत्म ही नहीं होगा तो वो बोलता है सबसे पहले महल बना दो तो भूत ने महल बना दिया फिर बोला कि एक बहुत बड़ा गांव बना दो महल के आसपास मेरे प्रजा जो लोग मेरे गुलाम होकर के रहे हैं तो दूसरा गांव बना दिया सोना माओर लाओ ये ले आ जो भी मांगा फटाफट फटाफट करके ये भूत कर रहा है अभी आखिर में ये आदमी परेशान हो गया वो बोलता है कि जीवन की जितनी चीजें मुझे चाहिए थी सब तो मैंने प्राप्त कर ली अभी मैं इस भूत का क्या करूं और यदि मैं इसको काम नहीं दूंगा तो मुझे खा जाएगा तो वो बेचारा दौड़ा दौड़ा गुरु के पास में गया अभी मैं मुझे बचा लीजिए मेरा सब काम खत्म हो गया है अभी भूत मुझे खाने को तैयार हो गया है तो भाई गुरु ने कहा एक काम बोलो करो उसको बोलो किय कुत्ते की पूंछ को सीधा करें तो कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होने वाली तो भूत को काम में लगा दिया जैसे ही सीधा करता है वैसे ही वो टेढ़ी हो जाती है तो ये जो सब सिद्धियां है ये भूत की तरह है यदि अपने खुद के प्रतिष्ठा के लिए अपने खुद के भोग सुख के लिए इसका प्रयोग किया तो ये भूत की तरह हमको खा जाएगी बेटर है कि इसका उपयोग इसका व्यवहार हमेशा लोक कल्याण के लिए करें तो ठाकुर महा स्वामी जी के पास में जो सिद्धियां थी उस सिद्धियों का उन्होंने इस तरह से यूज किया था सुपर पावर जैसे सुपरमैन हवा में उड़ सकता है तो वैसे इन लोगों ने हवा में नहीं उड़ कर के हमारे मन को आध्यात्मिक राज्य में उड़ने के लिए उन्होंने हमेशा अवश्य सहायता की है तो यह हो गया सुपर पावर समाधि और आकाश और प्राण का विज्ञान इसके बाद में यहां से स्वामी जी आगे क्या कहते हैं आगे के क्या टॉपिक है इसको हम कल से फिर आगे देखें आज यही ओ शांति शांति शांति हरि त श्री राम कृष्णा