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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द : 10 June 2024

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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपे अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नम स्वामी जी जब सेकंड टाइम अमेरिका गए थे उस समय उनके जो शिष्य थे शिष्य तो नहीं कहेंगे फ्रेंड कहेंगे या तो फिर कहेंगे डिसाइल फ्रांसिस लगेट और बेटी लगेट स्वामी जी को अपना जो वहां पर एक फार्म था वहां पर ले गए उसका नाम था रिजली रिजली बोलकर के एक टाउन वहां पर उनका एक मेनर था मेनर यानी कि एक बहुत बड़ा मकान तो उसका नाम दिया रिजली मेनर तो रिजली मेनर एक खुली जगह में था वहां पर पास में ही बड़े-बड़े पहाड़ों की हार माला थी और बहुत लंबा एक मैदान जैसा था जहां पर रह कर के स्वामी जी क्योंकि वह भारत में जिस तरह से उन्होंने वेदांत का प्रचार किया रामकृष्ण मिशन की स्थापना की उससे जो उनके शरीर और मन में जो क्लांत प्रकट हुई उससे थोड़ा सा छुटकारा पाने के लिए डॉक्टरों ने कहा कि आप विदेश यात्रा कीजिए और कहीं पर एक जगह पर शांति से थोड़े दिन बैठिए तो स्वामी जी जी आए थे इसके लिए अमेरिका साथ में थी निवेदिता और साथ में थे स्वामी तुर्या जी महाराज तो वो जो 10 सप्ताह रिजली मैनर में रुके थे और जोसेफाइन मैक्लाउड इस 10 सप्ताह को कहती है द ग्रेट समर अर्थात कि भव्य ग्रीष्मा उस समय स्वामी जी अपने यह चीर परिचित लोगों से घिरे हुए अपने मित्रों से जो लोग स्वामी जी से सब समय वेदांत की बातें सुनना तो चाहते थे किंतु स्वामी जी को तंग नहीं नहीं करते थे परेशान नहीं करते थे बिना मतलब क्वेश्चन करके या तो फिर बिना मतलब उनके ऊपर में कोई टेंशन खड़ा करके तो वहां पर स्वामी जी बड़ा शांति से रह रहे थे उस दिनों की बात है एक सुंदर सी एक छोटी सी घटना है स्वामी जी वैसे तो टेंशन में थे और उनको तो डायबिटीज रोग भी उस समय स्टार्ट हो गया था तो इस तरह से कहा जाता है कि अपने हाथों से कुछ कार्य करें तो आप के मन की जो चिंता धारा है वो थोड़ी सी आप उसको भूल जाएंगे जो आपके मन में जो भी टेंशन चल रहा है जो भी कोई बात जो कि आपके मन में बार-बार विक्षेप खड़ा कर रही है उस बात को आप भूल जाएंगे तो आप अपने हाथों से थोड़ा सा कार्य कीजिए तो भारत में तो यह सब कार्य चल रहा था और स्वामी जी की जो इच्छा थी इतनी स्पीड से इतनी एफिशिएंटली शायद उनके गुरु भाई उस कार्य को नहीं कर पा रहे थे तो स्वामी जी को गुस्सा भी आ जाता था उन लोगों के ऊपर पर में वो भी घटनाएं हमने देखी है तो व सब चीजों को भूल जाने के लिए स्वामी जी ने ठीक किया कि अपने हाथों से कुछ करेंगे तो वहां पे मोड स्टू बोल कर के एक लड़की थी वो वहां पे उस जो स्वामी जी का वो जो जो जिन लोगों जिस गेस्ट को अ फ्रांसिस लगेट ने इकट्ठा किया था उन कुछ चुने हुए गेस्ट जो लोग स्वामी जी के परिचित थे और जिनके साथ में स्वामी जी थोड़ा सा रिलैक्स होकर के बात कर सकते थे तो जिन गेस्ट को फ्रांसिस लेग ने इकट्ठा किया था उनमें से एक थी यह मोड स्टम और वो थी एक चित्रकार तो स्वामी जी एक दिन मोड स्टम को अ रिक्वेस्ट किए कि आप क्या मुझे चित्रकारी सिखा सकते हैं यह पेंटिंग सिखा सकते हैं क्या तो पेंटिंग सीख कर के क्या होता है एक नई विद्या सीख रहे हैं अपने हाथों से कार्य कर रहे हैं तो उसके ऊपर में पूरा मन चला जाएगा बाकी सब भूल जाएंगे तो ठीक है वो एग्री हो गई तो जिस दिन को पेंटिंग सिखाना था प्रथम दिन था देखा कि स्वामी जी अपने हाथ में एक एप्पल लेकर के उपस्थित हुए एक सेब लेकर के और व सेब उन्होंने इस मोड स्टम को दिया और कहा इन द होप दैट अवर लेसंस बिकम फ्रूटफुल इस आशा में कि हमारे यह जो लेसंस अर्थात कि चित्रकारी विद्या सीखने का जो प्रारंभ किया है वह फल प्रसुति प्रथा भी है कि सब समय जब आप टीचर के पास सीखने के लिए जाते हैं तो कुछ समित पाणी ही ऐसा लेकर के हाथ में वह उस समय तो गुरुकुल में अग्नि प्रकट करते थे तो तो अगली अग्नि जलाने के लिए काष्ठ अर्थात की लकड़ियां लकड़ियां लेकर के यह शिष्य अपने गुरु के आश्रम में जाते थे तो एक सिंबल है यह तो एक सिंबॉलिकली स्वामी जी ने सेब का फल मोड़ स्टम को दिया और यह पेंटिंग सीखना प्रारंभ किया और फिर पेंटिंग सीखने के बाद में उन्होंने हरि महाराज यानी कि स्वामी तुर्या जी और निवेदिता इन दोनों का पेंटिंग भी बनाया था और निवेदिता कहती है कि मने वो अपने बारे में कटाक्ष करके कहती है कि मैं जितनी कुरूप दिखती हूं उससे भी ज्यादा कुरूप ये पेंटिंग दिखता है किंतु जो भी है दूसरे लोग ऐसा कहते थे किंतु निवेदिता वाज वेरी हैप्पी कि जिस तरह से पेंटिंग बना रहे थे स्वामी जी बाकी सब चीजों को भूल कर के एटलीस्ट उतने समय तक वो जो भारत का कार्य क्यों नहीं आगे बढ़ रहा क्यों नहीं मठ की जमीन पर फटाफट नए-नए बिल्डिंग बनने चालू हो जाते क्यों नहीं पूरे भारतवर्ष में रिलीफ ऑपरेशंस चालू हो जाते यह सब जो स्वामी जी की चिंता थी और स्वामी जी के जो उस समय के कलकत्ता के डिसाइल्स या फिर यह चेन्नई के डिसाइल्स इतनी स्पीडली स्वामी जी चाहते थे उतना स्पीडली काम क्यों नहीं कर पा रहे वो सब चिंता कुछ समय के लिए वो भूल गए अभी इस घटना को लेकर के एक दिन रात को को खाने के समय थोड़ा सा हंसी मजाक स्टार्ट हो गया अब जैसे कि अपने मित्रों के साथ में हम बैठे हैं तो मित्र लोग कैसे एक दूसरों की मजाक करते हैं मने इट्स अ होलस सम थिंग तो हंसी मजाक करते-करते अ मिसेस बुल ने एक बार बोल दिया कि देखिए कि स्वामी जी इतना अच्छा आध्यात्मिक उपदेश देते हैं इतना अच्छा वेदांत सिखाते हैं इतना अच्छा योग सिखाते हैं इतना अच्छा स्पिरिचुअलिटी सिखाते हैं किंतु जब भी हम कहेंगे कि स्वामी जी इज अ ग्रेट टीचर तो स्वामी जी इस बात को कोई पता नहीं देंगे अर्थात कि कोई फिक्र नहीं है कि कोई उनकी निंदा करें न कि स्तुति करें कोई ऐसा कहे कि स्वामी जी इज अ ग्रेट योगी डजन मैटर कोई फर्क नहीं पड़ता स्वामी जी इज अ ग्रेट टीचर तो कोई भी फर्क नहीं पड़ता स्वामी जी इज अ वर्ल्ड टीचर तो स्वामी जी सब एक कान से डाल कर के दूसरे कान से निकल जाएगा वो भीतर में प्रशंसा से उनके मन में ना ही घमंड प्रकट होगा ना ही यह झूठ मुठ की दीनता कोई कोई लोगों की आप प्रशंसा करेंगे वो झूठ मूठ की दनता दिखाना शुरू करेंगे अरे भाई मैं कौन हूं मैं तो मूर्ख हूं मुझे कुछ नहीं आता यह तो सब आप भगवान की कृपा है ऐसा वोह दीनता दिखाना शुरू करेंगे स्वामी जी को वह सब चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता था ना ही घमंड दिखाते थे ना ही वह झूठ मूठ की दनता दिखाते थे किंतु यदि आप स्वामी जी को ऐसा कहे कि स्वामी जी आप बहुत अच्छे पेंटिंग दौड़ रहे हैं पेंटिंग कर रहे हैं अभी इतने ही दिनों में आपने पेंटिंग सीखना शुरू किया और इतने ही दिन में आपने पेंटिंग करना शुरू भी कर दिया बहुत अच्छे पेंटिंग कर रहे हैं आप तो ऐसा करके जब स्वामी जी की प्रशंसा करेंगे तो स्वामी जी बड़े खुश हो जाएंगे कि हां मेरी ये पेंटिंग स्किल है उसके बारे में ये लोग प्रशंसा कर रहे है ये मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है ऐसा तो ये बात मिसेस बुल कहती है और जब मिसेस बुल ने यह बात स्टार्ट की तो जितने भी गेस्ट वहां प थे निवेदिता भी थी और हरि महाराज भी थे वो बेटी ले गट भी थी जोसेफाइन मैक्लाउड भी थी फिर ये मोड टूम भी थी सब लोगों ने इसमें हां में हां भला करके वो बोलना शुरू कर दिया कि हां सही बात है कि हम जब स्वामी जी की यह प्रशंसा करते हैं कि स्वामी जी यू आर ए ग्रेट योगी आप मेडिटेशन करते हैं तो सब चीजों में स्वामी जी को कोई फर्क नहीं पड़ता किंतु जब भी यह पोएट्री है या पेंटिंग है ऐसी सब चीजों में स्वामी जी की प्रशंसा करेंगे स्वामी जी का चेहरे पर बड़ी खुशी की झलक िकल आया दिखाई देगी माने कि वो उनको अच्छा लगता है यह प्रशंसा सुनना तो स्वामी जी जब यह सब लोग सब मिलकर के स्वामी जी की मजाक कर रहे थे इस समय तो स्वामी जी वैसे तो चुपचाप बैठे थे शांति से उनका मन कैसा वो दूसरे राज्य में घूमता है तो आधा मन दूसरे राज्य में चल रहा है और आधा मन वहां पर है य आधे मन से बाकी सब सुन रहे हैं तो अच्छा यहां तक तो हुआ सडन फिर का जो डिस्क्रिप्शन है ना मैं थोड़ा सा पढ़ता हूं इतना सुंदर डिस्क्रिप्शन है सडन स्वामी जी वोक अप एकाएक जैसे की नींद में से जग गए अभी तक तो इतना सब हंसी मजाक हुआ तो उनको तो कोई फर्क नहीं पड़ा किंतु एक समय ऐसा आया सडन जैसे कि नींद में से जग गए सडन अलर्ट हो गए और अलर्ट होकर के क्या कहा पता है यू सी देयर इज वन थिंग कॉल्ड लव एंड देयर इज अनदर थिंग कॉल्ड यूनियन देखो एक चीज है जिसको कहते हैं योग और दूसरी चीज है उसको कहते हैं प्रेम एंड यूनियन इज ग्रेटर देन लव योग हमेशा प्रेम से महान है आई डू नॉट लव रिलीजन मैं धर्म को प्रेम नहीं करता आई हैव बिकम आइडेंटिफिकेशन मैं एकही भूत हो गया हूं एकाकार हो गया हूं इट इज माय लाइफ आध्यात्मिकता वेदांत योग मेरा जीवन बन चुका है सो नो मैन लव्स ट थिंग इन व्हिच हिज लाइफ हैज बीन स्पेंट इन व्हिच ही रियली हैज अ कंप्लिशन समथिंग यदि किसी व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन देकर के कोई विद्या अर्जन की है अपना पूरा जीवन देकर के जिसने कोई सामर्थ्य प्राप्त किया है उस चीज को वो व्यक्ति प्रेम नहीं करता इन व्हिच वी लव इज नॉट यट अवर सेल्फ जिस चीज को हम प्रेम करते हैं उसके साथ में अभी तक हम एकही भूत नहीं हो गए उसके साथ में अभी तक हम एकाकार नहीं हो गए योर हस्बैंड डिड नॉट लव म्यूजिक फॉर व्हिच ही हैड ऑलवेज डूड अभी मिसेस ओली बुल को कहते हैं मिसेस ओली बुल के जो हस्बैंड थे ओली वो एक ग्रेट म्यूजिशियन थे तो उनका उदाहरण देकर के स्वामी जी कहते हैं कि आपके जो हस्बैंड है आपके जो पति है वह म्यूजिक को अर्थात की संगीत को प्रेम नहीं करते थे जिसके बा जिसके ऊपर में उन्होंने अपना पूरा जीवन दिया वह संगीत को प्रेम नहीं करते थे ही लव्ड इंजीनियरिंग इन चच एज यट ही न्यू कंपैरेटिव लिटिल किंतु वो इंजीनियरिंग को प्रेम करते थे इंजीनियरिंग अर्थात कि सिविल इंजीनियरिंग उनको रास्ता वगैरह बनाने का थोड़ा सा शौक था तो ये जो इंजीनियरिंग है उसको वो प्रेम करते थे देखिए किस तरह से स्वामी जी समझाते हैं संगीत कि जिसके लिए मिस्टर ओली बुल्ले पूरा जीवन दे दिया उसको वो प्रेम नहीं करते थे उसके साथ में वो एकाकार हो गए थे उसके साथ में उनका यूनियन हो गया था किंतु वो इंजीनियरिंग को प्रेम करते थे क्यों इंजीनियरिंग को उन्होंने एक हॉबी के रूप में एक शोक के रूप में उन्होंने डेवलप किया था दिस इज द डिफरेंस बिटवीन भक्ति एंड ज्ञान ज्ञान और भक्ति के बीच में यही डिफरेंस है एंड दिस इज व्हाई ज्ञान इज ग्रेटर देन भक्ति और इसीलिए ज्ञान है व भक्ति से महान है देखिए स्वामी जी जो कहते हैं इसके भीतर का जो अर्थ है कितना डीप है जिस चीज को हम जिस चीज के ऊपर में हम पूरा जीवन दे देते हैं जिस चीज को हम अपनी सांस के साथ में बुन लेते हैं प्रति क्ण जिस चीज का हमारे मन में स्मरण होता है जिस चीज को हम अपने प्राण उस प्राण से भी ज्यादा हम चाहते हैं उसको सिर्फ चाहत नहीं कहेंगे उसको सिर्फ प्रेम नहीं कहेंगे वो हमारा स्वरूप हो जाता है या तो हम उस मय हो जाते हैं जैसे कि यह समाधि की जो डेफिनेशन है ना अ देखिए जैसे कि अ तत अर्थ मात्र निर्वासन स्वरूप शून्य मीव समाधि योग शास्त्र में समाधि की डेफिनेशन क्या है त त तदर्थ मात्र स्वरूप शून्य मी व समाधि अर्थात कि जो जिस चीज के ऊपर में मैं अपने मन को एकाग्र करता हूं जैसे कि मान लीजिए एक दिए की वाट है दिया जल रहा है मैं दिए के ऊपर में अपने मन को एकाग्र करता हूं तो फिर जब एक समय ऐसा आएगा मुझे लगेगा कि यह जो दिया जल रहा है वह भी है और मैं भी हूं मैं हूं क्योंकि मैं सब समय कुछ ना कुछ विचार मेरे मन में आते रहते हैं आज सुबह से उठकर के मेरे साथ में क्या हुआ कल मेरे साथ में क्या होने वाला है वगैरह वगैरह दुनिया भर के विचार मेरे मन में आते रहेंगे और सामने साथ-साथ में दिए की वाट भी दिखती रहेगी जब तक ये दो चीजें तब तक सेपरेशन है किंतु धीरे-धीरे करके मैं अपने को भूलना शुरू हो जाता हूं मैं कौन हूं मेरा कार्य क्या है मेरा उद्देश्य क्या है मेरा धर्म क्या है मेरा शिक्षण क्या है मेरे संस्कार क्या है यह सब धीरे-धीरे करके भूलना शुरू हो जाऊंगा और जो दिए की वाट है जिसके ऊपर में मैं अपने मन को एकाग्र कर रहा था सिर्फ वो दिए की वाट ही रह जाएगी बाकी सब अदृश्य हो जाएगा स् रूप शून्य मीव समाधि अपना स्वरूप शून्य हो जाता है तदर्थ मात्र निर्भाग अर्थात कि वह जो जो चीज है जिसके ऊपर में मैं मन को एकाग्र कर रहा हूं सिर्फ वही चीज रहेगी मेरा खुद का स्वरूप शून्य हो जाएगा तब समाधि होगी तो इसको कहते हैं यूनियन अर्थात की योग या तो फिर समाधि जिस चीज को मैं अपना जीवन सर्वस्व दे देता हूं उसको मैं प्रेम नहीं करता प्रेम तो बहुत छोटी ची चीज है मैं इसके साथ में एकाकार हो जाता हूं व मेरा स्वरूप हो जाता है व मेरी प्रत्येक सांस के साथ में यह चीज चलती है और जो कि जिसको कि अच्छा मेरा हॉबी है मेरे कुछ शौक है वो सब मेरे यह सब ऐसी चीजें हैं जिसको कि मैं प्रेम करता हूं अच्छा ठीक है मुझे गार्डनिंग का शौक है अभी जैसे देखिए मैं अपना ही उदाहरण दूं तो मुझे सबसे ज्यादा जो पसंद है सबसे ज्यादा जिसके ऊपर में मैंने अपना समय दिया है वह है लिखना और पढ़ना तो यह लिखाई और पढ़ाई के साथ में मैं एकी भूत हो गया हूं एकाकार हो गया हूं किंतु साथ-साथ में ही लिखाई पढ़ाई के लिए दिन भर मुझे अपनी कुर्सी पर बैठे रहना पड़ेगा तो अभी यह तो क्या है शरीर के लिए ठीक नहीं है हेल्थ के लिए ठीक नहीं है तो मैंने साथ-साथ में गार्डनिंग का हॉबी डेवलप किया है यहां पब्लिकेशन की टेरेस पे एक छोटा सा गार्डन है वहां पर जाकर के मैं पानी डालूंगा वहां प जाकर के मैं थोड़ी सी जो सुखी डाले हैं तो मेरे पास में एक सकेटर है सकेटर अर्थात कि एक ऐसी कैची एक ऐसी कातर जिससे कि आप सूखी डालियों को काटते हैं तो ये सकेटर से मैं सूखी डालियां काटता रहता हूं फिर उसमें वो फर्टिलाइजर डालता रहता हूं आपको देख कर के लगेगा अरे ये दिन भर गार्डन में ही बिताता है क्या किंतु बात वो नहीं है गार्डनिंग को मैं प्रेम करता हूं क्योंकि एक हॉबी के रूप में मैंने इसको डेवलप किया है किंतु जिस चीज के साथ में मेरा आइडेंटिफिकेशन है जिस चीज जिके साथ में मेरा यूनियन है वह है लिखाई और पढ़ाई तो यह प्रेम और भक्ति ज्ञान और भक्ति यूनियन और लव यह दोनों के बीच में यह डिफरेंस है जो कि स्वामी जी हमको समझाते हैं और इसलिए मैंने यह किस्सा जो है वह कितना परफेक्ट है यह राजयोग की भूमिका के रूप में राजयोग जो हम सीख रहे हैं स्वामी विवेकानंद का कंप्लीट वर्क वॉल्यूम वन इसमें का जो थर्ड लेक्चर है प्राण प्राण का हम थोड़ा सा अध्ययन कर रहे हैं और उसमें से पढ़कर के चर्चा कर रहे हैं तो यह राजयोग का जो इंट्रोडक्शन के रूप में यह कितना सुंदर किस्सा है स्वामी जी का जीवन ऐसे छोटे-छोटे किस्सों से भरा हुआ है अब बात हंसी मजाक की चल रही है और यह ऐसा चीज है कि जिसके बारे में किसी लेक्चर में भी नहीं दिया गया किसी प्रवचन किसी लेटर जो स्वामी जी लिखते हैं उसमें भी ऐसी कोई चीज नहीं है बस वो चुपचाप बैठे थे और अपना आइसक्रीम खा रहे थे वो स्वामी जी का क्या था रिजली मैनर में ये बेटी लगेट अर्थात कि फ्रांसिस लगेट की वाइफ वो स्वामी जी को बड़ी मने भक्ति करती थी बड़ी श्रद्धा करती थी तो वो क्या करती थी कि वो चाहती थी कि स्वामी जी सबके साथ में बैठे खाना खाने के लिए वगैरह किंतु कभी भी उनके सर पर प्रेशर नहीं डालेगी 10 लोग बैठे हैं और स्वामी जी का अपने मूड के अनुसार था कि यदि खाना खाना है सबके साथ में तो खाएंगे और यदि ऐसा मूड हुआ कि अभी हो गया बस बहुत हो गया तो खड़े होकर चले जाएंगे हालांकि शिष्टाचार ऐसा है उस समय का कि सब लोग साथ में बैठेंगे और सब लोग साथ में खाना खाके एक साथ में उठेंगे तो किंतु स्वामी जी पर कोई बंधन नहीं है क्योंकि यह लोग स्वामी जी को पूरा फ्रीडम देना चाहते थे जिस तरह से वह रहना चाहे उस तरह से भले वो रहे तो इस तरह से फ्रीडम देने के लिए बेटी लगेट स्वामी जी के ऊपर में ऐसा कोई बंधन नहीं डालती थी किंतु उसकी मन की तो इच्छा थी कि जहां पर सभी लोग बैठे हुए हैं स्वामी जी वहां पर बैठे और सबके साथ में बातें करें क्योंकि सब लोग तो आतुर थे स्वामी जी की बातें सुनने के लिए उनके साथ में गप लगाने के लिए तो उसके पास में एक ट्रिक थी अभी जैसे कि रात का भोजन चल रहा है और स्वामी जी का मन हुआ अभी मैं बस हो गया मेरा काम हो गया खत्म मैं उठ कर के खड़ा होकर के बाहर में जाकर थोड़ा सा अकेला टहल होता हूं तो जैसे ही स्वामी जी खड़े होंगे इमीडिएट ये बेटी क्या कहेगी कि अच्छा मुझे ऐसा लग रहा है कि खाने के बाद में आइसक्रीम है तो जैसे ही स्वामी जी ये बात सुनेंगे वो बिल्कुल आराम से बैठ जाएंगे अच्छा आइसक्रीम है तो चलो आइसक्रीम खाके ही जाते हैं बाकी और स्वामी जी को चॉकलेट आइसक्रीम बड़ा पसंद था और वो क्या कहते थे पता है मुझे चॉकलेट बड़ा पसंद है क्योंकि मेरा जो स्किन का कलर है वो भी चॉकलेट जैसा है ब्राउन है इसलिए मुझे चॉकलेट आइसक्रीम बड़ा पसंद है तो स्वामी जी को बिठाने के लिए बिठा कर के रखने के लिए बेटी यह सब प्रलोभन देती तो यहां पर है स्वामी जी बढ़िया मजे से आइसक्रीम खा रहे हैं सब हंसी मजाक चल रहा है और सडन एक ऐसी बात कह दी जो कि आध्यात्मिक जगत के यह जो गुढ़ रहस्य है योग क्या है समाधि क्या है प्रेम क्या है ज्ञान क्या है भक्ति क्या है उसके ऊपर में एकदम सहज सरल स्पष्ट रूप से प्रकाश डालती है तो य एक छोटी सी कहानी अच्छा योग का हमने जहां तक देखा स्वामी जी कहते हैं कि प्राण को संयमित करके प्राण को नियमित करके नियमन करके प्राण का हम हमारे भीतर में जो प्राण है उसका नियमन करके अर्थात प्राणायाम के द्वारा जो कॉस्मिक प्राण है उसको कंट्रोल कर सकते हैं क्योंकि कॉस्मिक प्राण यानी कि कॉस्मिक फोर्सेस जैसे कि ग्रेविटी है या तो इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म है और यह जो स्वामी जी ने जिसका उल्लेख नहीं किया है शायद किंतु वो जो भी दूसरी फोर्सेस से स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स या तो वीक न्यूक्लियर फोर्स इन सबको हम प्राणायाम के द्वारा हमारे भीतर के प्राण से कॉस्मिक प्राण को कंट्रोल कर सकते हैं जैसे कि रिमोट कंट्रोल है रिमोट कंट्रोल से हम कोई भी चीज को कैसे कंट्रोल करते हैं वैसे ही हमारे भीतर में इंडिविजुअल भीतर में जो इंडिविजुअल प्राण है वह कॉस्मिक प्राण का रिमोट कंट्रोल है इस इंडिविजुअल प्राण प्राण से कॉस्मिक प्राण को नियमन कर सकते हैं कंट्रोल कर सकते हैं और इससे जो सिद्धि प्रकट होती है वह सिद्धि का भी स्वामी जी ने उल्लेख किया है और वह सिद्धि क्या है एक पैराग्राफ में जो स्वामी जी ने कहा पढ़ लेते हैं ही कुड क व्ट पावर ऑन अर्थ वुड नॉट बी हिज पृथ्वी पर की ऐसी कौन सी शक्ति होगी जो उसकी नहीं होगी ही वुड बी एबल टू मूव द सन एंड स्टार्स आउट ऑफ देयर प्लेसेस और सितार की गति वह परिवर्तित कर दे सकता है टू कंट्रोल एवरीथिंग इन द यूनिवर्स इस विश्व ब्रह्मांड में जो कुछ भी है उसको वह कंट्रोल कर सकता है फ्रॉम द एटम्स टू द बिगेस्ट सनस छोटे से छोटे अणु से प्रारंभ करके विराट से विराट सूर्य तक को सब कुछ कंट्रोल कर सकता है बिकॉज क्यों ही वुड कंट्रोल द प्राणों कि वह प्राण को कंट्रोल करता है दिस इज द एंड एंड एम ऑफ प्राणायाम यही है प्राणायाम का असली उद्देश्य असली एम तो यहां तक हमने सब कुछ देखा अभी इसके बाद में स्वामी जी टॉपिक को चेंज करते हैं स्वामी जी क्या कहना चाहते हैं बहुत सारी अभी जैसे कि यहां पर स्वामी जी बार-बार साइंस का उदाहरण देते हैं तो हमको यह प्रश्न हो सकता है कि जद वेदांत इतना महान था यदि योग इतना एडवांस था तो आज का जो मॉडर्न साइंस और साइंस का जो पुत्र है टेक्नोलॉजी उसकी मदद से ये अमेरिकन और ब्रिटिश लोग इंडस्ट्रियल इजेशन और टेक्नोलॉजी की मदद से पूरे विश्व पर राज कर रहे हैं तो भारत में यह गरीबी यह बैकवर्ड मेंस यह सब क्यों है भारत लग रहा है जैसे कि स्टोन एज में जी रहा है और यह अमेरिका और यूरोप लग रहे हैं कि जैसे स्टीम एज में जी रहे हैं स्टीम एज अर्थात कि जो स्टीम इंजन जो चलता था वोह और स्टोन एज अर्थात की पत्थर युग जहां पर आदमी पत्थर को तोड़ करके और पत्थर से चीजें बना कर के अपना जीवन निर्वाह करता था तो भारत लग रहा है स्टोन जज में जी रहा है और यूरोप अमेरिका लग रहा है स्टीम एज में जी रहा है स्टीम की वजह से यह लोग बड़े-बड़े रेलगाड़ी यह बड़े-बड़े ये आग बोट जिसको गन बोट कहते हैं गन बोट अर्थात कि इस तरह का जहाज जिसमें गन लगी है तोप लगी है और इस तोप की वजह से ये लोग सातों समुंदर के ऊपर में विजय प्राप्त की है भारत जैसे कितने ही देश पर ये लोग राज करते हैं तो यह तो हो गया गन बोट से लेकर के ट्रेन तक सब कुछ चलाते हैं और भारतवासी जैसे पत्थर तोड़ के अपना गुजरान करते हैं तो ऐसा क्यों तो इस बात का उत्तर स्वामी जी एक थोड़ा सा दूसरे तरीके से देते हैं पहले तो उनका कहना है कि हम लोगों का ऋषि मुनियों का ऐसा था कि जो बेसिक प्रिंसिपल है उसको डेवलप कर दिया जाए उसके बाद में इस प्रिंसिपल के आधार में जो डिटेल वर्कआउट होनी है जो साइंस वर्कआउट होना है जो टेक्नोलॉजी वर्कआउट होनी है वह भले धीरे-धीरे चाहे होती रहे हम लोग जो कि प्रैक्टिकल चीजों के ऊपर में ध्यान देने की बजाय थियर के ऊपर में ध्यान दे थियर को डेवलप कर दे एक बार थिरी डेवलप हो गई तो थिरी के आधार पर बाकी सब कुछ डेवलप होता रहेगा जैसे कि आपको पता है कि कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन यह कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन की थिरी चल रही थी इस तरह से कि जब बिग बैंग हुआ अर्थात कि बहुत बड़ा विस्फोट जब होगा तो यूनिवर्स का कॉस्मो का टेंपरेचर तो बहुत ज्यादा बढ़ गया होगा जब भी धमाका होता है आप लोग दीपावली में तो देखते हैं कि जब एक धमाका हुआ बम फटा बहुत ज्यादा टेंपरेचर बहुत ज्यादा यह गर्मी हो गया धीरे किंतु एक धमाका खत्म होने के एका दो मिनट के बाद में जो टेंपरेचर बढ़ा था जो गर्मी प्रकट हुई थी वह चली जाएगी यदि आप धमाके के सामने खड़े रहेंगे तो आपको हो सकता है कि 10-15 सेकंड के लिए 20-2 सेकंड के लिए गर्म लगे उसके बाद में वह जैसा टेंपरेचर था ऐसा हो जाएगा तो धमाका होने से टेंपरेचर बढ़ता है तो अभी विज्ञानियों ने यह ठीक किया कि यह बिग बैंग धमाका जब हुआ था उसका अर्थ की यूनिवर्स का यह तो सबसे बड़ा धमाका था पूरे हिस्ट्री में तो उसका अर्थ है कि टेंपरेचर भी तो इतना सारा बढ़ गया होगा तो यह टेंपरेचर बिल्कुल जीरो हो गया होगा क्या आज बिल्कुल जीरो नहीं हुआ होगा उन्होंने मैथमेटिक्स की वजह से मैथमेटिक्स का हेल्प लेकर के कैलकुलेशन करके ये ठीक किया कि समथिंग लाइक 2.5 डिग्री ना 3 डिग्री ऐसा कुछ टेंपरेचर अभी भी होगा 2 डिग्री समथिंग इतना टेंपरेचर ब्रह्मांड का अभी भी होगा बिल्कुल एब्सलूट जीरो नहीं हो जाएगा यह उन्होंने मैथमेटिक्स की म मदद से ठीक किया अभी देखिए यह टेंपरेचर ब्रह्मांड का आप कैसे लेने को जाएंगे मुझे बुखार आ गया है तो मैं वो जो थर्मोमीटर होता है थर्मोमीटर को अपने मुंह में रख कर के ना ऐसा कुछ करके मैं अपना टेंपरेचर लूंगा जद ये किताब है ना कि ये कुछ भी है मेरे सामने उसका टेंपरेचर लेना है तो थर्मोमीटर स्पर्श करवाएंगे तो इसका टेंपरेचर में ले लूंगा विश्व ब्रह्मांड का टेंपरेचर आप कैसे लेंगे कॉस्मो का कैसे टेंपरेचर लेंगे तो यह तो थिरी थिरी ही रह गई इसका प्रैक्टिकल उसको कैसे प्रूव करेंगे कि हां सही में ब्रह्मांड का टेंपरेचर अभी 2 डिग्री प्लस समथिंग कुछ है ऐसा हाउ विल यू डिटरमाइंड अभी यह थिरी चल रही थी उस समय कुछ साइंटिस्ट लोग यह जो एंटेना होते है ना डिस्क जिसके मदद से आप कम्युनिकेशन करते हैं यह जो मोबाइल के टावर वगैरह आजकल जो होते हैं उसका जो पूर्वज जो थे वो बड़े बड़े एंटेना कुछ साइंटिस्ट लोग लगा रहे थे और उनमें पता चला कि सब समय एक बैकग्राउंड नोइज आता रहता है कितना ही उसके इंस्ट्रूमेंट को कैलिबर करते रहे वो नोइज तो आता ही रहेगा आता ही रहेगा ये कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है अभी यह प्रॉब्लम उन लोगों का था और यहां प ये साइंटिस्ट लोग सर पर हाथ रख के बैठे थे कि हम लोग कैसे ब्रह्मांड का टेंपरेचर लेंगे और जैसे वो ऐसा कोइंसिडेंस होता है कि ये दोनों लोग एक दिन इकट्ठा हो गए कहीं पे और यह दोनों ने डिस्कस करके ठीक किया कि यह जो उनकी थिरी है जो कि दिखा रहा है कि कॉस्मो का टेंपरेचर 2 डिग्री प्लस समथिंग होगा और यह जो डिस्क एंटेना है उसमें जो बैकग्राउंड नोइज जो दिखा रहा है वो एक्चुअली कॉस्मो का टेंपरेचर दिखा रहा है 2 डिग्री अबोव जीरो तो यह जिन लोगों ने यह सब डिस्कवरी किया उनको इमीडिएट नोबेल प्राइज मिल गया तो देखिए सब से पहले आपके पास में थिरी होनी चाहिए तो थिरी को लेकर के ही तो आप यह प्रैक्टिकल डेवलपमेंट सब कर सकते हैं तो स्वामी जी यह कहना चाहते हैं कि भारत की यह जो परिस्थिति थी उसमें ऐसा था कि ऋषि मुनियों ने पहले थिरी डेवलप कर दी और उन्होंने ठीक किया कि बाद की जनरेशन जो है वह उसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन खोजती रहेगी तो स्वामी जी क्या कहते हैं वन पलटी द हिंदू माइंड इज ट इट ऑलवेज इंक्वायर फॉर द लास्ट पॉसिबल जनरलाइजेशन हिंदू मानस की एक ऐसी वैशिष्ट्य है विशिष्टता है कि वह लास्ट पॉसिबल जनरलाइजेशन के ऊपर में जाकर अटकता है उसको खोजता है अर्थात कि यह लास्ट पॉसिबल जनरलाइजेशन का अर्थ है कि सबसे सामान्य नियम क्या है जैसे कि देखिए कि मेरा मेरी एज है शायद मान लीजिए कि 45 के आसपास में मेरी एज है मेरी मेरा वेट है वो शायद 70 केजी के आसपास में है मैं गेरवा कपड़े पहनता हूं अभी आप थोड़ा सा बाहर में जाएंगे आपको एक ऐसा कोई मिल जाएगा जिसकी उम्र 202 साल होगी जिसका वेट होगा शायद 60 65 किग्रा और वो लाल कलर के कपड़े पहने का तो ये दो अलग-अलग व्यक्ति दिख रहा हैं उनमें कॉमन क्या है कि कॉमन है कि दोनों पुरुष है उसके बाद में मान लीजिए एक स्त्री वहां से निकलती है तो यह पुरुष और स्त्री में फिर कॉमन क्या है कॉमन है कि दोनों मनुष्य है अच्छा फिर अभी आप मान लीजिए कि अमेरिका में जाए अमेरिका में ये लोग रहते हैं तो आप कहेंगे कि अच्छा यह भारतीय है वो अमेरिकन है तो दोनों में कॉमन क्या है जो दोनों पृथ्वी के रहवासी है अर्थात कि ये कॉमन कॉमन कॉमन क्या है निकालते जाइए निकालते जाइए आखिर में पता चलेगा कि पृथ्वी पर जितने भी लोग रहते हैं हम सब मनुष्य हैं अच्छा फिर मनुष्य का कंपेयर आप जैसे मान लीजिए बंदर के साथ में या चिंपांजी के साथ में करते हैं तो चिंपांजी और मनुष्य में कॉमन क्या है तो हम दोनों जीवित प्राणी है जैसे पत्थर को साथ में कंपेयर करें तो पत्थर निर्जीव है किंतु मनुष्य और चिंपांजी दोनों जीवित है तो चिंपांजी और मनुष्य में कॉमन क्या है कि हम सभी लोग जीवित प्राणी है इसको जो लास्ट जनरलाइजेशन कहते हैं कि आखिरी सामान्य करण क्या है वह खोजने का हिंदू मानस का यह वैशिष्ट्य था हमारी विशिष्टता थी कि यह जगत में जो कुछ भी चल रहा है उन सभी चीजों के पीछे एक ऐसा कौन सा फार्मूला है एक कौन सा एक ऐसा नियम है जिसके मदद से जिसके आधार पर इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी है उन सबको हम डिस्क्राइब कर पाए उन सबको हम समझ पाए लीविंग द डिटेल्स टू बी वर्क्ड आउट आफ्टर वर्ड्स और डिटेल जो है उसको बाद की जनरेशन के ऊपर में छोड़ देते हैं वे लोग इसको धीरे-धीरे करके वर्क आउट करेंगे द क्वेश्चन इज रेज्ड इन द वेदास वेद में एक प्रश्न खड़ा किया गया है उपस्थित किया गया है व्ट इज दैट नोइंग विच वी शैल नो एवरीथिंग ऐसा क्या है जिसको जानने से सब कुछ जाना जा सकता है दस ऑल बुक्स एंड ऑल फिलोसोफी दैट हैव बीन रिटन हैव बीन ओनली टू प्रूव ट बाय नोइंग वच एवरीथिंग इज नोन अर्थात कि जितनी भी किताबें लिखी गई जितनी भी थिरी प्रपोज की गई उन सबके पीछे वही रिसर्च का टॉपिक था वही एक बेसिक आईडिया था कि ऐसा क्या है जिसको जानने से सब कुछ जाना जा सकता है तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शाति पर श्री रा कृष्ण परम स्तु