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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद वॉल्यूम टू पेज नंबर 209 स्वामी विवेकानंद की ज्ञान योग के ऊपर में जो सीरीज है उसमें कॉस्मस द मैक्रो कजम जो प्रवचन है उनका या तो फिर कहेंगे क्लास क्लास उन्होंने लिया था उसमें से हम पाठ और चर्चा कर रहे हैं अभी तक स्वामी जी ने जो एक सबसे दो तीन इंपोर्टेंट पॉइंट हमारे सामने रखे एक तो है कि कांसेप्ट ऑफ इवोल्यूशन स्वामी जी कहते हैं कि उस समय की जो क्रिश्चन लोगों की परिस्थिति थी वे लोग इवोल्यूशन को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे कहते थे कि पूरा विश्व ब्रह्मांड भगवान ने एक ही बार एक जादुई छड़ी घुमा दी और पूरा ब्रह्मांड प्रकट हो गया व पशु पक्षी मनुष्य प्राइमेट मेमल जो भी आप कहो जलचर स्थल चर और हवा में उड़ने वाले जितने भी पशु पक्षी सब एक साथ में आ गए इवोल्यूशन की बात सुन कर के उनको बड़ा डर लग जाता था स्वामी जी कहते हैं कि वेदांत इ इन कंपलीटली इन ट्यून विथ इवोल्यूशन जद इवोल्यूशन वाले इवोल्यूशन का कांसेप्ट एक्सेप्ट कर ले इवोल्यूशन अर्थात की जैसे बीज में से वटवृक्ष बनता है वह बीज का इवोल्यूशन है फिर वटवृक्ष अपना पूरा ब्लूप्रिंट है अपना पूरा डीएनए है वो डीएनए को कंसंट्रेट करके रिफाइन करके एक छोटे से बीज में व उसको जन्म देता है तो यह वटवृक्ष का फिर से बीज में परिणति होना यह हो गया इवोल्यूशन तो स्वामी जी कहते पहले तो तुम इवोल्यूशन स्वीकार करो तो हम आपका इवोल्यूशन स्वीकार कर लेंगे हमको लगेगा कि स्वामी जी यह क्या कह रहे हैं यदि अच्छा यह तो एक पॉइंट हुआ दूसरा पॉइंट स्वामी जी ने क्या कहा कि पूरा यह जो इवोल्यूशन का सीरीज है उसको एक सिंगल ऑर्गेनिस्ट म या सिंगल कॉन्शसनेस के रूप में लीजिए एक और यदि प्रोटोप्लास्मिक लैंग्वेज में कहेंगे तो बिग बैंग यदि मटेरियल यूनिवर्स की बात करते हैं और यदि हम ऑर्गेनिक यूनिवर्स की कॉन्शियस अ लाइफ की बात करते हैं तो सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म तो वहां से लेकर के ऑन दी अदर हैंड भगवान रामकृष्ण तक की हमारी इवोल्यूशन की जर्नी है पृथ्वी के ऊपर में उसको सिंगल कॉन्शियस नेस सिंगल यूनिट के रूप में लीजिए तो अभी प्रश्न होता है ये एक सेकंड पॉइंट रखा थर्ड पॉइंट स्वामी जी ने रखा कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी या तो फिर कंजर्वेशन ऑफ एवरीथिंग दैट इज इन दिस यूनिवर्स स्वामी जी क कहते हैं स्वामी जी तो मैंने साइंस कहता है स्वामी जी साइंस की बात हमारे सामने रखते हैं कहते हैं एक जगत में से एक यूनिट एनर्जी या एक यूनिट पार्टिकल भी ना तो हम ऐड कर सकते हैं ना ही हम यहां से ले सकते हैं और स्वामी जी की बात थर्मोडायनेमिक्स का फर्स्ट लॉ जो था वो तो सही था ही किंतु गोइंग बियोंड दैट आइंस्टाइन का स्पेशल थिरी ऑफ रिलेटिविटी वो कहता है e इक्वल एमसी स्क्वा माने थर्मोडायनेमिक्स वाज द ओल्ड साइंस एंड रिलेटिविटी एंड क्वांटम आर द न्यू साइंस तो स्वामी जी ओल्ड साइंस की दृष्टि से जितने सही थे उतने ही सही वो न्यू साइंस की दृष्टि में है स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी क्या कहता है मैटर को जदी आप कन्वर्ट करेंगे तो एनर्जी में कन्वर्ट होगा और एनर्जी मैटर में कन्वर्ट होगी किंतु ऐसा कभी नहीं होगा कि मैटर और एनर्जी चले जाए अदृश्य हो जाए ब्रह्मांड में से या तो फिर बिग बैग के बाद में कोई नई हवा में से कहीं दूसरे ब्रह्मांड में से पैरेलल यूनिवर्स में से एनर्जी आ जाए हालांकि दिस इज कॉल्ड फ्रंटियर ऑफ साइंस वो एक पूरा सेपरेट इशू है क्वांटम डायनेमिक्स का किंतु यदि उसको फिलहाल छोड़ दिया जाए तो आप विश्व ब्रह्मांड में से ना ही एक यूनिट एनर्जी ऐड कर सकते हैं ना ही रिमूव कर सकते हैं ना ही एक सिंगल पार्टिकल ऑफ एटम ऐड और रिमूव कर सकते हैं तो तीन पॉइंट स्वामी जी ने हमारे सामने रखे उसके बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं जो अपना एक ग्रांड फिनाले जिसको कहते हैं ना इंग्लिश में एक ग्रांड कंक्लूजन की ओर स्वामी जी जा रहे हैं द वर्क आई एम डूइंग नाउ इज जस्ट व्हाट आई पुट इन टू मी स्वामी जी ने कल कहा था मैं अभी जो कार्य कर रहा हूं वो कार्य आउटपुट है किस चीज का आउटपुट है जो इनपुट मैंने अपने भीतर में डाला था पुट इन टू मी इन द शेप ऑफ एयर फूड एंड अदर थिंग्स इन द शेप ऑफ किस रूप में हवा है पानी है आहार है किताब किताबों में से वांच किया है ठाकुर के पास से शिक्षा प्राप्त की है यह सब जो इंटेलेक्चुअल एंड मटेरियल फूड दैट ही हैड टेकन वो उसी का आउटपुट हमको यह उनके कार्य के रूप में दिख रहा है इट इज ओनली अ क्वेश्चन ऑफ चेंज एंड मेनिफेस्टेशन यह आहार और यह कार्य यह हमको लगता है कि बहुत डिफरेंट है किंतु यह चेंज और मेनिफेस्टेशन ही मने उसका जो स्वरूप है वही बदला है और कुछ नहीं बदला जैसे कि इक्वल्स एसी स्क्वा हमको लगेगा कि एनर्जी जैसे यह माइक है या तो ये किताब है तो आपको आप लोग को लगेगा कि किताब में कहां कोई एनर्जी होने वाली है किंतु ये किताब का माने एक ग्राम का भी एकवा भाग ले और उसका दहन किया जाए फ्यूजन किया जाए तो उसमें से इतना प्रचंड एन एनर्जी प्रकट होगा कि पूरे राजकोट शहर का वह ध्वंस कर दे इतनी एनर्जी इस एटम्स किताब के एटम्स के भीतर में है तो माने मैटर या तो एनर्जी लगती है बहुत डिफरेंट एक बम फटता है और किताब अपनी लाइब्रेरी में है बोलेंगे कि कहां दोनों में इक्विवेलेंस है किंतु इक्वल्स एमसी स्क्वेयर वही एनर्जी जदी साइंटिस्ट लोगों ने वो जो कोलाइडर्स होते हैं ना एक्सीलरेटर्स और कोलाइडर्स पार्टिकल फिजिक्स में उसमें उन्होंने एक्सपेरिमेंट करके देखा है कि कोई भी एक पार्टिकल है उसको बहुत ही स्पीड से उसको हवा में फेंकते हैं तो उसकी जो स्पीड की एनर्जी है उसकी वजह से उसका मास जो है उसका वेट जो है वह इंक्रीज होता है तो यह सब लेबोरेटरी में एक्सपेरिमेंट हो चुके हैं तो जो ग्रहण करते हैं और जो प्रकट होता है कार्य के रूप में वह लगता है बहुत डिफरेंट किंतु एक ही चीज है उसका स्वरूप अलग-अलग है देयर कैन नॉट बी एडेड इन द इकोनॉमी ऑफ दिस यूनिवर्स वन पार्टिकल ऑफ मैटर और वन फुट पाउंड ऑफ फोर्स इस विश्व ब्रह्मांड की ये इकोनॉमी है इकोनॉमी शब्द उन्होंने यूज किया है बैलेंस शीट जैसे होती है कि यह प्रॉफिट और लॉस ऐसा कुछ तो यह जो विश्व की इकोनॉमी है उसमें एक सिंगल पार्टिकल ऑफ मैटर भी आप ऐड नहीं कर सकते एक सिंगल फुट पाउंड ऑफ फोर्स फुट फुट पाउंड यूनिट था उस समय का अभी वो जूल्स कि ऐसा कोई यूनिट है एनर्जी का तो एक सिंगल यूनिट ऑफ एनर्जी ना ही आप ऐड कर सकते हैं नोर कैन वन पार्टिकल ऑफ मैटर और वन फुट पाउंड ऑफ फोर्स बी टेकन आउट ना ही उसमें से इसको आप माइनस कर सकते हैं इफ दैट बी द केस व्हाट इज दिस इंटेलिजेंस यदि यह बात सही है कि कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी तो ये इंटेलिजेंस क्या है यह चेतन शक्ति क्या है यह कॉन्शसनेस क्या है जो कि हमको इवोल्यूशन के अंत में देखने को मिलती है इवोल्यूशन की शुरुआत में तो हम यह मैटर और एनर्जी का बना हुआ ब्रह्मांड देखते हैं बिग बैंग के बाद में धीरे-धीरे करके लाइटर एलिमेंट्स हेवियस में कन्वर्ट होते गए आखिर में ये भगवान बुद्ध भगवान महावीर भगवान राम कृष्ण ऐसे महापुरुष लोगों ने जन्म लिया तो भगवान राम कृष्ण ने महाकाली का दर्शन किया या तो फिर राम कृष्ण स्वयं जिस चेतना को रिप्रेजेंट कर रहे हैं जिस हायर कॉन्शियस लेवल पे विराजित है वो कहां से आया वो क्या है उसका स्वरूप क्या है इफ इट वाज नॉट प्रेजेंट इन द प्रोटोप्लास्मिक ऑल ऑफ ए सडन समथिंग कमिंग आउट ऑफ नथिंग वच इज एब्सर्ड स्वामी जी एकदम बहुत ही इंपोर्टेंट स्टेटमेंट देते हैं कहते हैं कि यदि यह हायर इंटेलिजेंस य सुपरकॉन्शियस निस यदि उस प्रोटोप्लास्मिक नहीं होता तो वह कहीं हवा में से कहीं से प्रकट हुआ होता कहीं एक एक दूसरी ही जगह से प्रकट प्रगट हुआ होता चच इज एब्सर्ड जो कि जो कि गलत है एब्सर्ड का क्या करेंगे कटाक्ष मय शब्द है एब्सर्ड यानी कि गलत किंतु हास्यास्पद तरीके से गलत तो जद बिग बैंग के समय यह हायर कॉन्शसनेस सुपर कॉन्शसनेस या तो आत्मन या तो ब्रह्मण वो वो उपस्थित नहीं होता तो वही आत्म दर्शन वही ब्रह्म साक्षात्कार वही महाकालिका दर्शन वही निर्विकल्प समाधि में सुपर कॉन्शियस लेवल पर स्थिति यह आखिर आज के समय में संभव नहीं होता ही भगवान बुद्ध निर्वाण प्राप्त करते ना ही भगवान राम कृष्ण को माहाकाली का दर्शन होता नहीं कि स्वामी जी वहां लेक मिशिगन के किनारे पर बैठे हैं एका एक मन ऊपर में उठने लगा फिर पता चला कि नहीं अरे अभी तो बहुत सारा काम करना है वह एक स्टोरी बहुत सुंदर है आइलैंड पार्क में स्वामी जी गए थे तो थाउज आइलैंड पार्क में अपने आठ 10 लोग ही थे स्टार्टिंग में बाद में 12 हुए तो कहा जाता है कि जैसे जीसस के 12 डिसाइल थे तेवा तो पागल था जुड़ा वो तो निकल गया किंतु जो फेथ फुल डिपल जो 12 थे तो वैसे ही स्वामी जी के साथ में अल्टीमेटली 12 लोग रहे थे किंतु एक साथ में नहीं वो आगे पीछे हुए थे कोई कोई लोग तो जो भी है स्वामी जी ने क्लासेस करना स्टार्ट कर दिया और फिर कुछ दिन बीते उस बात को और एक रात को देखा बारिश हो रही है प्रचंड बारिश हो रही है और उस मिस डचर जिनकी कॉटेज थी ये थाउज आइलैंड पार्क में जिन्होंने स्वामी जी को इनवाइट किया था तो ये मिस डचर एकदम रात हो गई है बारिश हो रही है प्रचंड बारिश इस इस समय में तो कोई बाहर नहीं निकलेगा और स्वामी जी की जो मिस डचर की ये जो कोटेज थी थाउज आइलैंड पार्क में अभी भी वो कॉटेज है रामकृष्ण मिशन को मिली हुई है बहुत सुंदर उसमें वहां पर छोटा सा मेमोरियल भी है तो कॉटेज एक थोड़े से पहाड़ के ऊपर में थी चट्टान के ऊपर में वहां जाना भी तकलीफ म मुश्किल है वो फिसलने वाला रास्ता था और रात ऐसा इस समय एक भयानक समय कहीं एकदम सडन दरवाजा किसी ने खटखटाया तो यह मिस डचर या जो भी वहां पर उपस्थित होंगे उन्होंने सोचा इतनी बारिश इस पहाड़ के ऊपर में इस रात को कौन आया होगा उन्होंने दरवाजा खोला देखा कि दो स्त्रियां खड़ी है दो औरतें वहां पर खड़ी है और उन्होंने कहा कि द वे मेरी मैगडेलीन और द डिसाइल्स ऑफ जीसस केम टू जीसस वी हैव केम टू स्वामी जी वे लोग थे ये सिस्टर क्रिस्टीन और मिसेस फंकी सिस्टर क्रिस्टिन नहीं वो थी आडा अंसल आडा अंसल और दूसरी कौन थी वो मिसेस फंकी ही थी शायद मोस्ट प्रोबेबली मैं दूसरी का नाम भूल गया किंतु आडा अंसल मेन है वहां प तो नहीं आइड अंसेल नहीं सॉरी मिसेस फंकी और सिस्टर क्रिस्टीन यस ये दो थी तो ये दोनों ने आकर के स्वामी जी को प्रणाम किया और फ्रॉम दैट मोमेंट ऑनवर्ड दे बिकम द क्लोजेस्ट डिसाइल ऑफ स्वामी जी स्वामी जी ने बार-बार इनको लेटर लिखा है सिस्टर क्रिस्टीन भगिनी क्रिस्टीन तो स्वामी जी के साथ में भारत भी आई थ थी और जब सिस्टर निवेदिता की स्कूल थी उसमें उसने कंट्रीब्यूशन भी बहुत कुछ किया है तो ये दोनों बाद में आए थे व स्वामी जी के पास में तो स्वामी जी क्या करते थे क्योंकि उनका स्टार्टिंग के क्लासेस कुछ-कुछ मिस हो गए थे तो स्वामी जी ने ठीक किया कि कुछ दिन इनके साथ में वो वॉकिंग करने के लिए जाएंगे संध्या के समय वो वॉकिंग करते थे व सुंदर प्राकृतिक नजारा था तो वो कहीं खुले में चलने के लिए टहलने के लिए जाते थे तो एक दिन ऐसा हुआ आखिरी आखिरी समय में थाउज आइलैंड क्लास उनके वो क्लासेस खत्म होने को आए थे शायद एक या दो ही दिन बचे होंगे तो स्वामी जी ने कहा कि चलो हम लोग चलते हैं थोड़ा टहलने के लिए अभी स्वामी जी ने जिस तरह से कहा इन लोगों को ऐसा लगा कि स्वामी जी शायद हमको दीक्षा देंगे स्वामी जी शायद हमको कुछ आशीर्वाद देंगे तो वे लोग भी और बारिश का समय है तो वो सिस्टर क्रिस्टीन ने वो छाता ले लिया था क्रिस्टिन ग्रीन स्टीड उसका नाम था तो उसने छाता ले लिया अभी छाता लेकर के गए वहां प वो एक ओख ओख का वृक्ष था ओ यानी सिसम का वृक्ष बड़ा स्वामी जीक ना स्वामी जी पाइन पाइन था तो वहां पर वो स्वामी जी जनरली ध्यान किया करते थे तो वहां पर ये लोग गए तो स्वामी जी ने कहा अभी हम लोग बैठते हैं तो उन्होंने दोनों महिलाएं स्वामी जी के सामने बैठ गई उन्होंने सोचा कि स्वामी जी शायद ब्रह्मचर्य की दीक्षा देंगे क्योंकि वहां पर ही स्वामी जी ने ये ये था अभयानंद और ये कृपानंद इन दोनों को सन्यास दीक्षा दी थी तो उनको लगा कि स्वामी जी हमको भी दीक्षा देंगे ऐसा कुछ करेंगे तो स्वामी जी बैठे और बैठने के बाद में सीधे ध्यान में चले गए तो इन लोगों को लगा स्वामी जी ध्यान कर रहे तो चलो हम भी ध्यान करते हैं तो उन्होंने वर्णन किया है कि वो जो ध्यान का जो पावर था ध्यान का जो अनुभव था हमने अपने जीवन में कभी भी इतना पावर अनुभव नहीं किया है स्वामी जी इस तरह से जड़ हो गए जैसे कि पूरा शरीर काष्ट का बन हुआ है और पावरफुल वेव्स ऑफ डिविली उनमें से चारों और फैलने लगे और इस हद तक वो ध्यान में डुब गए थे बारिश स्टार्ट हुआ और प्रचंड बारिश हो रही है तो यह दोनों महिलाएं वो छाता लेकर आई थी तो स्वामी जी के सर पर छाता रख के खड़ी है और किंतु स्वामी जी को कोई बाह्य भान नहीं है कोई बाह्य यह नहीं है सेंस नहीं है वो ध्यान में डूबे हैं तो डूबे हैं फिर कुछ समय के बाद में स्वामी जी के बाकी सब डिसाइल आए स्वामी खोज करते करते देखा कि ये तो बहुत जबरदस्त बारिश हो रही है और स्वामी जी अभी तक वापस नहीं आए वकिंग और दोनों महिलाएं भी है उनके साथ में क फस ना गए हो तो यह लोग भी आए देखा कि स्वामी जी ध्यान में मग्न है किंतु फिर धीरे-धीरे करके स्वामी जी का बाह्य जो होश है बाह्य ज्ञान जो है वह लौट आया और फिर वह खड़े होकर के वो अपनी कोटेज में वापस आ गए तो उस समय स्वामी जी ने कहा था कि मेरा मन इस हद तक ऊपर चला गया था कि शायद वापस आने का संभावना ना रहता किंतु स्वामी जी के साथ में हर बार ऐसा होता है कि जितनी भी बार वोह गन समाधि में चले जाते हैं उतनी ही बार ठाकुर ने कहा था ना कि तुमको यह निर्विकल्प समाधि का अनुभव स्वामी जी को ठाकुर ने काशीपुर गार्डन हाउस में दिया था और फिर क्या कहा था कि ताला लगा दिया है चाबी अभी मेरे पास रहेगी तो वो आखिर में ऑफकोर्स 1902 4थ जुलाई की रात को हमको पता है कि स्वामी जी एक बार समाधि में गए उनका कार्य समाप्त हो गया था तो वो जो समाधि में गए तो फिर वो वापस नहीं आए तो प्रश्न यह है कि जदिया कॉन्शसनेस उस समय उपस्थित नहीं रहा होता तो स्वामी जी को इस तरह के अनुभव कहां से होने वाले थे तो स्वामी जी आगे कहते हैं इट देयर फॉर अभी यह बहुत ही इंपोर्टेंट पैसेज है मैंने अपनी किताब में इसको पूरा मार्क करके रखा है स्वामी जी कहते हैं इट देयर फोर फॉलोज एब्सलूट दैट द परफेक्ट मैन द फ्री मैन द गॉड मैन हु हैज गन बियोंड द लॉज ऑफ नेचर इससे क्या फॉलो होता है क्या साबित होता है क्या प्रूव होता है कि परफेक्ट मैन द फ्री मैन द गॉड मैन जो सर्वश्रेष्ठ पुरुषोत्तम है जिस जो कि प्रकृति की मर्यादा से ऊपर उठ गया है प्रकृति के नियमों के परे चला गया है एंड यह जगत ब्रह्मांड में जो कोई भी बंधन है हमारे ऊपर में इन सबके वह पार चला गया है ट्रांसडूसिन जिसका इवोल्यूशन की सर्वोच्च सीमा पर जो जाकर के खड़ा है अभी उसमें इवोल्यूशन होने को कुछ बाकी नहीं है इवोल्यूशन का अंत जो है वहां तक जो पहुंच गया है थ्रू बर्थ एंड डेथ यह जो जन्म मृत्यु जरा व्याधि की साइकिल है उसको भी उसने तोड़ दिया है ट मैन कॉल्ड द क्राइस्ट मैन बाय द क्रिश्चियंस वो मनुष्य जिसको कि क्रिश्चियन लोग क्राइस्ट मैन कहते हैं एंड द बुद्धा मैन बाय द बुद्धिस्ट बुद्धिस्ट लोग कहते हैं बुद्धा मैन एंड द फ्री बाय द योगी योगी लोग कहते हैं वो मुक्त है वो संपूर्ण पुरुष दैट परफेक्ट मैन हु इज एट द एट वन एंड ऑफ द चेन ऑफ इवोल्यूशन वह संपूर्ण पुरुष जो कि इवोल्यूशन के इस प्रवाह में इवोल्यूशन की इस साइकल के एक छोर पे है अंतिम छोर पे है वाज इवॉल्वड इन द सेल ऑफ द प्रोटोप्लास्मिक मैन जो कि आज हमको इस युग में देखने को मिलता है वही बुद्धा मैन वही परफेक्ट मैन इस इवोल्यूशन की शुरुआत में भी प्रेजेंट होगा या तो फिर कह सकते हैं थोड़ा सा स्वामी जी की नाट्यालय स्टाइल में डे टू डे स्टाइल में कह सकते हैं कि यह हायर कॉन्शसनेस जो हमको हायर ऑर्गेनिस्ट म में देखने को मिलती है वह हायर कॉन्शसनेस बिग बैंग के समय भी उपस्थित होगी यह जो हमारे ब्रेन में थाउज ट्रिलियंस ऑफ कनेक्शंस है मने कनेक्शंस अर्थात कि न्यूरॉन्स की संख्या तो बिलियंस में है ही है कि ब्रेन सेल होते हैं उसको न्यूरॉन कहते हैं तो न्यूरॉन्स की संख्या तो बिलियंस में है ही है किंतु इनके भीतर के जो कनेक्शंस है एक न्यूरॉन का दूसरे तीसरे चौथे न्यूरॉन के साथ में जो कनेक्शन वो कनेक्शंस ट्रिलियंस में है आजकल जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है जिसका कि बहुत चला है वो हाईएस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इसके भीतर में जो ट्रांजिस्टर के कनेक्शंस हैं वो समथिंग अराउंड न ट्रिलियन कनेक्शन है जिसको कि बेस्ट मोस्ट कटिंग एड कटिंग एज एआई जिसको कहते हैं हार्डवेयर मनुष्य के ब्रेन में 100 ट्रिलियन कनेक्शंस है माने मनुष्य के ब्रेन में जो न्यूरॉन्स के भीतर रिलेशनशिप है उसकी संख्या इस विश्व ब्रह्मांड में जितने तारे हैं उससे भी ज्यादा है तो सोच लीजिए कि हमारा ब्रेन कितना कॉम्प्लेक्शन है तो यह कॉम्प्लेक्शन के ऊपर में जो हार्डवेयर के ऊपर में जो सॉफ्टवेयर चलता है वह कितना कॉम्प्लिकेटेड होगा तो आज हमारा प्रश्न होता है कि मनुष्य के ब्रेन जैसी इतना कॉम्प्लेक्शन इवोल्यूशन ने आज प्रकट कर दिया तो क्या इस तरह की कॉम्प्लेक्शन बिग बैंग के समय में उपस्थित थी तो हां पोटेंशियल रूप में उपस्थित थी किंतु इससे भी ज्यादा इस हार्डवेयर के ऊपर में यह 100 ट्रिलियन कनेक्शन वाला अपना जो ब्रेन है यह कटिंग एज मशीन है उसके ऊपर में जो कॉन्शसनेस जो सॉफ्टवेयर रन होता है हायर कॉन्शसनेस रूपी वो कॉन्शसनेस क्या कहीं हवा में से प्रकट हो गया जादूई लकड़ी चलाता है जादूगर और वो हेट में से वो रैबिट निकालता है खरगोश निकालता है वैसे ही वो कहीं हवा में से एक सॉफ्टवेयर प्रकट हो गया यह हायर कॉन्शियस प्रकट हो गई स्वामी जी कहते हैं लॉ ऑफ कंजर्वेशन की दृष्टि से यह संभव नहीं है यह हायर कॉन्शसनेस बिग बैंग के समय उपस्थित होगी ही होगी अदर वाइज वोह इवोल्यूशन होक के इस हद तक हम ना पहुंच पाते और दो-तीन बात स्वामी जी ने साथ में भी कही है जिसने इवोल्यूशन के अंत तक पहुंच गया अभी हमको प्रश्न होगा कि इवोल्यूशन का अंत कैसे आ सकता है क्या मनुष्य का शरीर जो है यह जो हमने आज का स्वरूप प्राप्त किया है वह क्या आखिरी स्वरूप है क्या इससे आगे चेंज नहीं होगा अभी यदि थोड़ा सा भी हम इमेजिनेशन चला के देखते हैं तो हमको लगता है कि हमारा फिजिकल इवोल्यूशन तो भी कहीं तक होने वाला है जैसे मान लीजिए पृथ्वी पे भगवान ना करे ना कि न्यूक्लियर वर हो जाए पृथ्वी का एटमॉस्फियर रेडियो एक्टिव हो जाए तो हम लोगों को क्या करना पड़ेगा बड़ी-बड़ी शिप्स लेकर के स्पेसशिप लेकर के स्पेस में कॉलोनी बनानी पड़ेगी वो चांद पे कॉलोनी बनाए ना कि मंगल ग्रह पर बनाए ना कि स्पेस में ही कुछ कॉलोनी बनाए तो वहां की ग्रेविटी के अनुसार चांद या मंगल या कोई भी ग्रह पे रहते हैं या तो कोई बड़ी स्पेसशिप में रहते हैं तो वहां की ग्रेविटी के अनुसार वहां के एटमॉस्फियर के अनुसार अपना शरीर संपूर्ण रूप से चेंज होने वाला है दो हाथ और पैर की जरूरत नहीं रहेगी शायद कोई अपना ब्रेन निकाल कर के जैसे कुछ साइंस फिक्शन में पढ़ते हैं मेरी सबसे फेवरेट कल्पना एक एक बहुत बड़ा कंप्यूटर बना दिया है एक रोबोट के भीतर में रखा है जिसके साथ में अपना ब्रेन निकाल करके हमने फ्यूज कर दिया है यानी ब्रेन भी रहा और बॉडी रह गया पूरा रोबोट का या तो कंप्यूटर का यानी जितने भी डिसीज वगैरह है उससे भी मुक्ति मिल गई और यह ह्यूमन कॉन्शियस नेस है वह भी अपनी रह गई तो मान लीजिए यदि भविष्य में हम लोग इवोल्यूशन के उस लेवल पर पहुंच जाए कि यह ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस या तो ब्रेन मशीन इंटरफेस डेवलप करके अपनी बॉडी को ही पुला तिला जदी दे दे ये दो हाथ दो पैर ये हृदय हार्ट किडनी इस तरह के बॉडी की जरूरत ही नहीं है हमको हमको तो हमारा कॉन्शसनेस कहां प्रेजेंट है वो तो ब्रेन में ही तो है कॉन्शसनेस का वो केंद्र बिंदु ब्रेन को निकाल कर के कंप्यूटर के भीतर में रख दो कंप्यूटर को किसी रोबोट में रख दो बस हो गया आपका तो यदि इस लेवल के इवोल्यूशन तक पहुंच जाए तो मने उससे भी तो कहीं ज्यादा आगे जा सकते हैं मत स्काई इज द लिमिट राइट तो स्वामी जी ने कैसे कह दिया कि भगवान राम कृष्ण या भगवान बुद्ध वो इवोल्यूशन के अंतिम छोर तक पहुंच गए हैं ध्या द एपिटोल तो यहां पे उनका जो कहने का मतलब है फिजिकल बॉडी नहीं कॉन्शियस निस ये हमारी जो कॉन्शसनेस है व जब हम निर्विकल्प समाधि प्राप्त करते हैं या तो फिर अद्वैत अनुभूति प्राप्त होती है या तो फिर ईश्वर दर्शन होता है तो कॉन्शियस निस की दृष्टि से वो अंतिम छोर है व वो अंतिम सीमा है कि जहां तक हम लोग इस विश्व ब्रह्मांड में पहुंच सकते हैं इसके बाद में हम जो कुछ चाहे करें ठाकुर ने कहा है ना सारेगामा पाधाई नी पर हम ज्यादा नहीं रह पाएंगे क्योंकि वो नी वो उसका आलाप जो है वो बड़ा ही कष्टकलम पे आ जाएंगे यानी कि निर्विकल्प समाधि प्राप्त करेंगे यदि निर्विकल्प समाधि में हमारा 21 दिन रहेंगे हम तो हमारा शरीर का मृत्यु होगा हमारा शरीर विनाश हो जाएगा किंतु फिर उसका एक सेकंड एक है कि उस निर्विकल्प समाधि की भूमि से वापस आकर के विश्व कल्याण के लिए कार्य करें तो जैसे कि वो तोतापुरी के साथ में ठाकुर का आर्गुमेंट हो रहा था तो तोतापुरी ने कहा कि हमको प्रतिदिन साधना करनी है जैसे कि ये कमंडलु है मैं प्रतिदिन इसको नहीं दंगा तो कमंडल जो है वो गंदा हो जाएगा वो खराब हो जाएगा धूल मिट्टी लग जाएगी तो ठाकुर ने क्या कहा कि कमंडलु यदि सोने का हो जाता है तो क्या उसको धोने की जरूरत रहेगी तो तोतापरी कहते तो जरूरत नहीं रहेगी वैसे पानी से निकाल दो तो हो गया तो यदि अपनी कॉन्शसनेस वो सोने की हो जाए ईश्वर को स्पर्श करके शुद्ध पवित्र अपा प विद्ध हो जाए जन्म मृत्यु जरा व्याधि के चक्र के परे हो जाए ईश्वर स्वयं अपने हृदय में विराजमान हो तब हम जदी जदी पृथ्वी पर अवतरण करेंगे तो वी विल बी दी एपिटोल विल बी द हाईएस्ट लेवल ऑफ इवोल्यूशन यह जो इवोल्यूशन को इस मनुष्य को जो देना है उसके अंतिम छोर पर हम पहुंच गए हैं शरीर भले चाहे मनुष्य का हो उसके भीतर की जो आत्मन है वह ईश्वरीय है वह दिव्य है तो यह पूरा चक्र स्वामी जी ने अद्वैत देखिए धीरे-धीरे करके अद्वैत प्रवेश कर रहा है कि यह भी एक बात है यदि हम शास्त उपनिषद समझने का प्रयत्न करते हैं मैं मैं अपना खुद का अनुभव समझाता हूं कि मैंने जब मैं ट्रेनिंग सेंटर में था तो बड़ा सुन के रखा था कि शंकराचार्य का भाष्य पढ़ना है वही रामकृष्ण मिशन की हाईएस्ट फिलोसोफी है वही पूरे विश्व की हाईएस्ट फिलोसोफी ऐसी कोई फिलोसोफी नहीं जो कि शंकर के अद्वैत अद्वैत इंटरप्रिटेशन जो है शंकर का उपनिषद के ऊपर में उसके सामने आ पाए तो उसके सामने टिक पाए तो मैंने बड़े ही इंटरेस्ट से हमारे ट्रेनिंग सेंटर में शंकर भाष्य के ऊपर में क्लासेस है वो अटेंड करने की शुरुआत की किंतु कुछ ही समय में मुझे पता चला कि वो जिस तरह से शंकराचार्य आर्गुमेंट के बाद आर्गुमेंट कर रहे हैं जो पॉइंट रेज कर रहे हैं वो मेरी समझ में जा ही नहीं रहे है दो चीज है एक तो मेरा खुद का रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर के प्रति इतना आकर्षण था कि मैं अपना फ्री टाइम सब अपनी किताब पढ़ कर के निकलता था नहीं शास्त्र पढ़ कर के तो वो एक मेरा होमवर्क में एक गैप रह जाता था दूसरा कि पहले से ही मेरा ऐसा है कि आई प्रेफर फैक्ट्स टू फिलोसोफी मैं क्यों किसी का इंटरप्रिटेशन पढ़ने को जाऊं मैं मुझे फैक्ट्स चाहिए तो हिस्ट्री साइंस ये सब फैक्ट से भरपूर है तो वो मुझे पढ़ना ज्यादा अच्छा लगता है रदर देन कि आप एक स्पेक्युलेटिव जी का यह ज्ञान योग स्वामी जी के वेदांत के ऊपर में लेक्चर और स्वामी जी इन जनरल पढ़ने का प्रयत्न किया पढ़ना शुरू किया तब मुझे पता चला कि स्वामी जी की दृष्टि से वेदांत का जो प्रतिपादित विषय है वह है महावाक्य अहम ब्रह्मास्मि मेरे भीतर में जो कॉन्शसनेस है इट इज इक्विवेलेंट टू इट इज जस्ट अ रे ऑफ द कॉस्मिक कॉन्शसनेस जैसे कि सूरज का प्रकाश एक घड़े के भीतर में पड़ता है घड़े के भीतर में पानी है है तो पानी में जिस तरह से एक प्रतिबिंबित सूर्य दिखता है अभी जद घड़ा टूट जाए और पानी बैर ये ढल जाए तो प्रतिबिंबित सूर्य कहां जाएगा वो कहीं नहीं जाएगा उसका अस्तित्व ही नहीं था असली सूर्य ही था तो वैसे ही हमारे भीतर में एक प्रतिबिंबित चैतन्य है यदि हम ईश्वर को ईश्वर का साक्षात्कार कर ले आत्म ज्ञान प्राप्त कर ले तो यह घट जो है यह देह जो है या तो देह तो नहीं चला जाएगा देह के भीतर में जो वासनाओं का समूह है वो वो रूपी घट टूट जाएगा और वो जो प्रतिबिंबित सूर्य था वो चला जाएगा और असली सूर्य का सीधा प्रकाश अपने भीतर में से प्रकट होना शुरू हो जाएगा तो अहम ब्रह्मास्मि का यह अर्थ है अभी मैंने देखा कि स्वामी जी जो चीज प्रतिपादित करना चाहते हैं वही विषय उपनिषदों का है वही उपनिषद यही बात कहना चाहते हैं कि अहम ब्रह्मास्मि किंतु अभी एक बात मुझे समझ में आ गया कि यह उपनिषद का सब्जेक्ट है फिर मैंने रिवर्स में जाकर के पढ़ना शुरू कर दिया तो अभी मैं मुझे पता है कि कंक्लूजन क्या है और कंक्लूजन अभी मुझे यही देखना है कि अपने शास्त्र में इस कंक्लूजन को किस तरह से डिराइवर करते हैं तो वो पोर्शन जो मैंने पढ़ लिया तो बाकी का पढ़ने की जरूरत नहीं है बाकी का जैसे ये इवोल्यूशन और ये लॉ ऑफ कंजर्वेशन और यह बीच में से वटवृक्ष वटवृक्ष में से बीज यह जो सब स्वामी जी करते हैं वो सब हमको कोई जानने की जरूरत नहीं है हमको तो वही जानना है कि स्वामी जी क्या प्रतिपादित करना चाहते थे स्वामी जी का क्या व एस्टेब्लिश क्या करना चाहते हैं तो एस्टेब्लिश करना यही चाहते हैं कि यह जो बुद्धा मैन है यह क्राइस्ट मैन है यह जो फ्री मैन है योगियों की दृष्टि से वो जद एक छोर पर विराजमान है तो वही बुद्धा मैन वही क्राइस्ट मैन वही फ्री मैन उसके प्रारंभ के छोर पर भी विराजमान है ट्रीट दिस एंटायस क्वेंस एज वन लाइफ वन कॉन्शसनेस वन यूनिट यही स्वामी जी एस्टेब्लिश करना चाहते हैं उस एस्टेब्लिश करने के लिए उन्होंने इतना सारा सब आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट हमारे सामने प्रकट किया अभी यह उन्होंने मॉडर्न मनुष्य के लिए मॉडर्न भाषा में प्रकट किया है अभी पूरा उस इतिहास में प्राचीन युग में उस समय की फिलोसॉफिकल इवोल्यूशन को ध्यान में रखते हुए उस समय की आर्गुमेंट हमारे सामने प्रस्तुत की गई थी तो हमको बात यह नहीं है कि वह शास्त्र की जितने भी आर्गुमेंट है जितने भी वो पेरिफेरल पॉइंट्स रेज किए गए हैं उसको बड़ा डीप में जाकर के समझने की जरूरत है वो कोई जरूरत नहीं है प्रतिपादित विषय एस्टेब्लिश करने का जो पॉइंट है अहम ब्रह्मा स्मी वो एक बार हमको समझ में आ जाता है तो पूरे शास्त्र हमको समझ में आ जाता है ये इस दृष्टि से है कि यदि मैं समझ लू कि तत्व मसी श्वेत के तो माने तुम्हारे भीतर में भी वही आत्मन है गुरु ने मुझे यह बोल दिया और मैंने ये विश्वास कर लिया तो ये विश्वास करने के लिए मुझे वो क्वांटम डायनेमिक्स रिलेटिविटी ना कि थर्मोडायने ना कि वह किस तरह से वोह स्टीम इंजन काम करता है वह कोई सीखने की जरूरत नहीं है वह तो सिर्फ एक उपमा देने के लिए स्वामी जी ने हमारे सामने रखा है जैसे ही हमने प्रतिपादित विषय समझ लिया तो उपमा को हमने वहीं पर रख दिया तो ज्ञान योग को देखेंगे ज्ञान योग का हार्ट यही है कि वही उपनिषदों के द्वारा प्रमाण भूत कुछ कुछ सेंट्रल कांसेप्ट स्वामी जी हमारे सामने रखना चाहते हैं किंतु वो प्रूव करने के लिए आज का मॉडर्न मैन जो है इसकी बुद्धि में यह सब प्रवेश करें इसके लिए स्वामी जी यह मॉडर्न साइंस टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग और मॉडर्न थिंकिंग का आश्र लेते हैं और उसका आश्रय लेकर के हमको यह सब समझाते हैं तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा मतु