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स्थापक यज धर्मस्य सर्व मा अवतार वष कष्णा स्वामी विवेकानंद रिजली मेनर में जो पीरियड रहे जिसको कि ग्रेट समर कहा जाता है इसका हम लोग पाठ कर रहे थे हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी रिजली आ कर के रहे अपने घनिष्ठ मित्रों और अनुयायियों से घिर करके और उनका जो नया मैसेज था जगत को देने के लिए वह तैयार था उस नए मैसेज के बारे में हम बात कर रहे थे स्वामी जी ने क्या कहा व्ट डू आई केयर इफ मोहम्मद वास गुड मैन और बुद्धा ट ल्टर माय ओन गुडनेस और इवल लेट अस बी गुड फॉर अवर ओन सेक ऑन अवर ओन रिस्पांसिबिलिटी नॉट बिकॉज सम बडी वे बैक देर वाज गुड स्वामी जी कहते हैं कि कोई भी अवतार भगवान राम हो ना कि भगवान कृष्ण हो ना कि भगवान बुद्ध हो वो भूतकाल में जिनका जन्म हुआ वो बहुत अच्छे थे महान थे सिद्ध थे बहुत तपस्या की थी इन सब से मुझे क्या लेना देना है उनकी अच्छाई से उनकी सिद्धि से या तो उनकी महानता से क्या मेरे चरित्र में कोई परिवर्तन आएगा नहीं आएगा हम लोग बहुत बार देखते हैं कि लोग मंदिर में जाते हैं भगवान का नाम लेते हैं भजन कीर्तन भी करते हैं किंतु उनका चरित्र देखिए जैसे का वैसा ही रहेगा और बुरे लोग तो और भी ज्यादा बढ़ चढ़ कर के भगवान का नाम करेंगे दिखावा करने के लिए कि हां हम लोग कितने बड़े भक्त है तो यह भगवान का नाम करने से या कोई भगवान हे भूतकाल में उनकी महानता से मेरे चरित्र पर तो कोई भी असर नहीं होने वाला है स्वामी जी कहते हैं हम अपनी जवाबदारी पर हम अपने बलबूते पर महान बने अच्छे बने दिस बिल्डिंग ऑफ माय ओन कैरेक्टर फॉर द सेक ऑफ माय ओन गुड ऑन माय ओन रिस्पांसिबिलिटी मेरे खुद की भलाई के लिए मेरे खुद के जिम्मे पे मैं अपना अच्छा कैरेक्टर का घडतर करूं यही मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ है तो यह था स्वामी जी का नया मैसेज ने जितने भी अवतार आए एक तरह से स्वामी जी कहते हैं मतलब इस तरह का कभी-कभी वो जो स्टेटमेंट मारते हैं ना स्वामी जी इस तरह के मतलब सिक्सर वो जो क्रिकेट खेलते हैं तो उसमें कैसे बैट्समैन बीच बीच में सिक्सर मारते हैं बाउंड्री पार हो जाता है बॉल वैसे ही स्वामी जी बीच-बीच में सिक्सर लगाते हैं सो वन ऑफ हि सिक्सर्स इज लाइक दिस कि अवतार ने अवतार ने पृथ्वी पर जन्म ग्रहण करके मानव जात के लिए बुरा ही किया है अच्छा नहीं किया क्यों क्योंकि जभी अवतार आते हैं तो हम अपने से मेहनत करना छोड़ कर के साधन भजन ध्यान धारणा करना छोड़ कर के अवतार के सामने देख कर के शांति से बैठे रहते हैं कि हां उन्होंने आकर के जगत के पाप ले लिए ठाकुर को कैंसर क्यों हुआ तो ठाकुर ने जगत के पाप ले लिए इसलिए ठाकुर को कैंसर हुआ तो अ ठाकुर को कैंसर होने दो हम लोग बढ़िया मजे से बैठे हैं मुझे मेरा लाइफ स्टाइल मेरी जीवन शैली मेरा चरित्र मेरा बिहेवियर मेरा कर्म यह जो प्रेय और श्रेय ये दो जो चॉइस आती है हमारे सामने यह सब अच्छी श्रेय चॉइस करना यह सब कुछ भी करने की मुझे जरूरत नहीं क्योंकि मेरे पाप तो ठाकुर ने ले लिए हैं अभी मैं जो चाहे वो करूं गिरीश घोष का जो कहना था कि मुझे यदि पता होता कि पाप ग्रहण करने के लिए इतना बड़ा गड्ढा है जिसमें मैं अपना पाप सकता हूं तो मैं और भी कितने ज्यादा पाप कुकर्म कर लिए होते तो हालांकि गिरीश की बात अलग है पावर ऑफ एटर्नी दे दिया अर्थात कि शरणागति जब हो दे दी तो शरणागत होने के बाद में कुछ भी अपना खुद का नहीं रहता एक भी चॉइस अपनी स्वयं की नहीं रहती तो वो एक पूरा सेपरेट केस है देखिए शरणागति जद प्रॉपर्ली की जाए तो वो भी अच्छी है हमको लगता है कि यहां पर स्वामी जी भक्ति योग की निंदा कर रहे हैं या तो यह जो भक्ति मार्ग है उसके विरुद्ध में कुछ कह रहे हैं नहीं यदि ठीक ठीक शरणागति भी की जाए तो गिरीश घोष का उदाहरण है गिरीश कहता है कि मेरे परिवार में मृत्यु हो गया मेरे पास में रोने का भी अथॉरिटी नहीं है रोने का भी मेरे पास में मैं रो भी नहीं सकता हूं ठाकुर की परमिशन के बिना तो वो जो अपनी चोइज संपूर्ण रूप से ठाकुर को दे देनी संपूर्ण रूप से ठाकुर की कठपुतली हो जाना पपेट हो जाना वह भी एक भयानक साधना है हम लोग क्या करते हैं ज्यादातर लोग कि मुंह से तो बोलेंगे कि हां भगवान है भगवान पर विश्वास है और भगवान पर भरोसा करके हम बैठे हैं यह सब कुछ बोलेंगे सही किंतु अपने जीवन की धारा जो है जैसी की है वैसी की वैसी ही चलती रहेगी मेरा बैंक बैलेंस कितना है मेरा प्रमोशन कब होने वाला है अभी मेरे पास में टू व्हीलर है तो फोर व्हीलर कब होगा अभी ये अपार्टमेंट है तो टर्नामेंट कब होगा यह जो सब हमारे डिजायर्स है वो डिजायर भीतर में से वही के वैसे के वैसे ही रहते हैं हम वैसे के वैसे ही इन सबके पीछे में छूटेंगे इसके ज्यादा कम हमारी लाइफ में कोई भी परिवर्तन नहीं आता तो जीवन में जब तक परिवर्तन नहीं आएगा तब तक हम आध्यात्मिकता के रास्ते पर चलने के लिए प्रथम पेर भी प्रथम फुट स्टेप भी आगे हमने नहीं बढ़ाया है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि जब एक लिप सर्विस देना भगवान को कि हां भगवान है मैं ऐसे लोगों को देखता था जब मैं छोटा था तो कोई कोई लोग है रोज सुबह को बाइक पर बैठ कर के वो मंदिर में जाएंगे मंदिर में वो थोड़ा सा प्रणाम वगैरह करके वह घर चले आएंगे फिर वह बिजनेस करने के लिए जाएंगे और बिजनेस में वही सब दो नंबरी काम करेंगे जो कि वो हमेशा से करते आए हैं तो भगवान के पास जाकर के मंदिर में प्रार्थना करके भगवान को प्रणाम करके आपने क्या इतना भी नहीं सीखा कि एक मैंने सत्य निष्ठा को पकड़ करके एक जो एथिक्स और मोरालिटी जिसको कहते हैं उसके आधार पर जीवन जीना चाहिए भले ही चाहे अपने बिजनेस में कुछ कमी हो जाए भले ही चाहे मुझे इतना प्रॉफिट ना हो जितना कि मुझे होने वाला था असत्य कथा बोल कर के इतना भी सेंस नहीं है तो नहीं है लोग ज्यादातर लोग क्या करते हैं कंपार्टमेंटलाइज कर देते हैं अपने जीवन को यह मैं जो मेरा जो जीवन है जिसमें मैं कितना ही सत्य का सहारा लूं कितना ही मैं मिथ्या वाद का सहारा लूं कितना ही चाहे मैं दो नंबर काम करूं वो सब ठीक है वो एक पैरेलल ट्रैक प चलेगा और यह मंदिर वाला एक ट्रैक है कि मंदिर में नियमित जाएंगे वहां पर वो जो लिप सर्विस देनी है वो देंगे वो जितने भी सेरेमनीज फेस्टिवल है उसमें पार्टिसिपेट करेंगे ये दो अपनी लाइफ में विभाजन कर देते हैं और एक दूसरे को कभी भी एक दूसरे के पास में नहीं आने देंगे यदि आप सही सही ईश्वर को मंदिर में से उठा कर के अपने घर में लाकर के बिठाए ईश्वर को सही सही हम जहां पर नौकरी करते हैं बिजनेस करते हैं वहां पर जाकर के बिठाए तो हमारा जीवन किस हद तक परिवर्तित हो जाएगा और ये उनको पता है कि परिवर्तित होगा और यह परिवर्तन का डर लगता है क्यों क्योंकि हम लोग एक कंफर्ट जोन में रहने के लिए हैबिटेड है अभी इस कंफर्ट जोन में इतना अमाउंट ऑफ सैलरी या तो इतना अमाउंट ऑफ प्रॉफिट तो होना ही चाहिए अदर वाइज हम रहेंगे कैसे यह अपना सब कुछ उठा कर के ईश्वर के चरणों में दे देना संपूर्ण रूप से शरणागत हो जाना वो भी तो एक भयानक तपस्या मांग लेता है तो वो भी करने का साहस नहीं होता इसीलिए स्वामी जी यहां पर कहते हैं कि अवतारों ने आकर के हमारे लिए बुरा ही किया है हम लोगों को एक एक्सक्यूज दे दिया है जो भी झूठ मूठ का काम करना है वो करने के लिए हम लोग यह सब करते ही रहेंगे और सामने भगवान का नाम लेकर के बैठे ही रहेंगे अपने मन को सध्या देने के लिए मिडिल एजेस में ऐसा होता था जो भी चर्च होता था चर्च के जो पोप होते थे वे लोग क्या करते थे इंडल जेंस बांटते थे इंडल जेंस यानी कि क्या है कि आपको आपके पाप से मुक्ति आपने दुनिया भर का पाप कर लिया दुनिया भर के यदि आप वहां पर जमींदार है तो आपके वो जितने भी वो सर्फ जिसको कहा जाता है वो जो कि एक तरह का स्लेव लेबर ही होता है वहां पर जो काम करते हैं आपकी जमींदारी में जो मजदूर लोग हैं उनका जितना चाहे शोषण कर लीजिए आप पोप के पास में या चर्च में जाकर के कहिए कि अभी आप मैंने इतने पाप किए हैं कन्फेस कर लीजिए और कहिए मैं इतना डोनेशन देता हूं इतना जमीन आपको लिख दिया इतना रुपया सोना मोहर आपको दे दिया तो इमीडिएट आपको इंडल जेंस मिल जाएगा अभी आपको स्वर्ग में ही जाना होगा अभी नर्क में जाना नहीं होगा क्यों क्योंकि आपके पाप न चर्च ने धो दिए तो यह पाप धोने का यह कांसेप्ट है वह कांसेप्ट ने हमारे साथ में कितना अन्याय किया है मानव जात के साथ में यह बात स्वामी जी यहां पर कहते हैं इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि हमारे खुद के जिम्मे पर हमारी खुद की जवाबदारी पर अपनी खुद की रिस्पांसिबिलिटी पर हम अच्छा बने हम अच्छे बने चरित्र का निर्माण करें अभी थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं मिस ल्डो एक पत्र में लिखती है द फ्यू चोजन वंस हु हैव हर्ड द स्वामी इन इजी होम टॉक सिंस हिज अराइवल आर डीप इंप्रेस्ड विद द ग्रेट मैसेज ऑफ ट्रुथ ही बियर्स जो कुछ मित्रों ने घर घरेलू बातों बातों में स्वामी जी को जो सुना है और स्वामी जी के नए मैसेज को सुना है ग्रहण किया है वे लोग अति व प्रभावित हो गए हैं और देखिए कि उन्होंने वाक्य रचना किस तरह से की है इस तरह से नहीं कहा कि स्वामी जी रिजली मेनर में जाकर के अपने मित्रों के साथ में रह रहे हैं इस तरह से लिखा है कि कुछ घरेलू संवाद यानी कि घर में बैठ कर के आप जो वार्तालाप करते हैं दो तीन तरह से मैसेज दे दिया जा सकता है एक तो है कि एक फॉर्मल लेक्चर के रूप में एक तो है कि कंटीन्यूअस क्लास के रूप में और एक होता फिर की वार्तालाप के रूप में रेमसंस जितने भी है ना यह शरद चंद्र चक्रवर्ती या निवेदिता ने लिखे हैं जो मास्टर एज आई सो हिम उस सब में ज्यादातर क्या है स्वामी जी ने उनके साथ में वार्तालाप करते करते बहुत कुछ कहा है तो यह घरेलू वातावरण में घरेलू सेटिंग में बैठ कर के स्वामी जी ने वार्तालाप के रूप में अपने जो कुछ घनिष्ठ मित्रों को नए मैसेज के बारे में बताया है वे लोग बड़े ही इंप्रेस हो गए हैं अ लार्जर एंड फुलर प्रोफेसी एंड विजन न एनी ही हैज यट गिवन टू द ईस्ट और वेस्ट उनका जो विजन है उनकी जो प्रोफेसी है भविष्यवाणी या तो फिर उनका दर्शन उसका संपूर्ण रूप वह अभी प्रकाशित कर रहे हैं उनका दर्शन या तो फिर उनकी भविष्यवाणी के कुछ कुछ अंश उन्होंने प्रथम विजिट के दौरान अमेरिका में वर्णित किए हैं इंडिया में जाकर के भी भारत में जाकर के भी उन्होंने कुछ कुछ अंशों का वर्णन किया है किंतु प्रोफेसी या तो फिर यह विजन अपने संपूर्ण रूप में सर्वप्रथम स्वामी जी हमारे सामने उत् घोषित कर रहे हैं बट अभी मेरी लुईस आगे लिखती है बट द फुलर डेवलपमेंट एंड प्रोनाउंसमेंट ऑफ स्वामी जी न्यू हेड टू वेट इट्स सीजन किंतु स्वामी जी का यह जो नया मैसेज है उसका संपूर्ण प्रतिभूति उसका संपूर्ण मेनिफेस्टेशन होने में अभी भी थोड़ी सी देरी है फिलहाल स्वामी जी रिजली मैनर में है ग्रेट समर अपने मित्रों के साथ में बाद में जब स्वामी जी कैलिफोर्निया जाएंगे तब कहीं जाकर के अपना यह नया मैसेज उसके संपूर्ण रूप में देंगे इन द मीन वाइल ही कॉन्शियसली पर्पसफुली रिलैक्स होपिटल इन फिजिकल स्ट्रेंथ मीन वाइल रिजली मैनर में स्वामी जी विश्राम ले रहे हैं जितना विश्राम हो सकता है उतना ले रहे हैं और अपनी शक्ति को रिस्टोर कर रहे हैं क्यों क्योंकि कैलिफोर्निया जाकर के उनको अपनी शक्तियों का संपूर्ण प्रदर्शन करना होगा फुल मेनिफेस्टेशन दिखाना होगा इसलिए अभी थोड़ा सा विश्राम ले रहे हैं एक दिन उन्होंने मेरी हेल को पत्र में लिखा डू यू नो व्हाट आई एम ट्राइट डू नाउ तुमको पता है कि मैं अभी क्या करने का प्रयास कर रहा हूं राइटिंग अ बुक ऑन इंडिया एंड हर पीपल भारत और भारतवासियों के ऊपर में एक एक किताब लिख रहा हूं अ शॉर्ट चेटी सिंपल समथिंग छोटी सी वार्तालाप और कहानियों के माध्यम से बनी हुई एक किताब किताब लिखने के बहुत सारे तरीके हैं एक तो मने एक तो एक भारे खम तरीका है फिलोसॉफिकल इतना सब आप लिख दे कि कोई भी उस किताब को छुए ही नहीं बहुत सारे बहुत सारी किताबें ऐसी होती है ये जो खास करके विदेश में जाएंगे तो यह विदेशी फिलोसोफर होते हैं जो कां है ना कि हेजल है ना कि ये शोफ एनवर है कितने ही लोग हैं उन सबके ये बड़े-बड़े नाम है तो तो ये जैसे कि स्टीफन हॉकिंग है उसने वो लिखी है किताब ऑफ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम तो ये सब वर्ल्ड फेमस किताबें हैं तो लोग क्या करेंगे कि ये सब किताबों को अपने घर में रख देंगे जैसे कि जब कोई विजिटर आता है घर में तो देखेगा अरे वाह ये ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम स्टीफन हॉकिंग की बढ़िया सी सुंदर किताब है यह किताब जो है स्टीफन हॉकिंग बोलकर के एक ब्रिटिश एस्ट्रोनॉमिकली विशिष्ट था कि जिसने कि ब्रह्मांड के इवोल्यूशन के ऊपर में यह ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम बोलकर के किताब लिखी है यह किताब की मिलियंस ऑफ कॉपीज लाखों लाखों कॉपी सोल्ड हो गई है बिक गई है किताबें किंतु इस किताब के बारे में ऐसा कहा जाता है कि मोस्ट अनरेग बुक इन द हिस्ट्री यानी कि एक ऐसी किताब है जो कि सबसे ज्यादा कम पढ़ी गई है सबसे ज्यादा कम पढ़ी गई है इसका अर्थ कि बहुत सारे लोगों ने इसको परचेस तो किया है किंतु बहुत सारे कम लोगों ने इसको पढ़ा है यानी कि जनरली लोग किताब परचेस करते हैं अपने पैसों से तो वे लोग उसको पढ़ेंगे भी सही यह तो एक नॉर्मल एक एक्सपेक्टेशन है नॉर्मल लॉजिक है किंतु ये ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम की जो प्रेस्टीज इतनी है कि लोग परचेस तो कर लेते हैं यह दिखाने के लिए कि हां मेरे पास में ये किताब है किंतु बहुत कम लोग इसको पढ़ते हैं इसलिए इस किताब के बारे में कहा जाता है मोस्ट अन रेड बुक सबसे ज्यादा कम पढ़ी हुई किताब तो यह स्वामी जी यदि फिलोसॉफिकल कुछ लिखते तो स्वामी जी के नाम पर हम लोग आजकल राजयोग है ज्ञान योग है राजयोग खास करके एक ऐसा एक नाम है एक ऐसा उसके साथ में एक एक प्रभाव जुड़ा हुआ है कि बहुत सारे लोग मैंने देखा है बुक स्टोल में जब बैठता था स्वामी जी का राजयोग चाहिए कहीं से सुन लिया है या तो फिर जब वो ब्राउज करते हैं ना किताबें जो शेल्फ में रखी होती होती है घोड़े में जब किताबें रखी है तो वो जाकर के देखते हैं एक के बाद एक तो राजयोग का जो वो जो टाइटल पेज का डिजाइन ही इतना सुंदर है कुंडलिनी वगैरह का वो देख कर के ही लोग ले लेते हैं कि हां मुझे राजयोग चाहिए किंतु राजयोग किताब समझने के लिए आपको मने एक प्रॉपर ट्रेनिंग चाहिए वैसे ही पढ़ के इतना अच्छे से समझ में नहीं आएगा तो वो देख कर के टाइटल देख कर के नाम से प्रभावित होकर के लेली अभी घर में पड़ी हुई है तो स्वामी जी यहां पर कहते हैं कि मैं भारत के ऊपर में किताब लिख रहा हूं किंतु सिंपल चैटी एंड स्मॉल यानी कि छोटी सी बहुत बड़ी नहीं कहानियां और वार्तालाप के माध्यम से भारत के बारे में बताना चाहता हूं जिससे कि क्या हो एक स्वामी शिष्य संवाद जैसा जद कंप्लीट वर्क्स में खास करके मैं बंगोल की बात करता हूं कंप्लीट वर्क्स में जद सबसे उन्हे इंटेलेक्चुअली और सिकली एकदम पावरफुल किताबें होगी तो वह है यह राजयोग और यह ज्ञान योग किंतु सबसे ज्यादा पढ़ी हुई जो पोर्शन है कंप्लीट वर्क्स में वो है स्वामी शिष्य संवाद क्यों क्योंकि वो शिष्य और गुरु के बीच में वार्तालाप है अभी देखिए कि बहुत सारे कांसेप्ट स्वामी जी ने वही राजयुग में जो कांसेप्ट है उसी में से बहुत सारे कांसेप्ट उन्होंने इसी किताब में अपने शिष्य के साथ में बातों बातों में वर्णित किए हैं किंतु जब मीडियम चेंज होता हो जाता है एक फॉर्मल प्रवचन के माध्यम से या तो फिर एक फॉर्मल क्लास के माध्यम से हम जो कहते हैं उससे कहीं ज्यादा यह वार्तालाप के माध्यम से कांसेप्ट को समझना आसान होता है क्यों कहानी और वार्तालाप कहानी में बहुत ही सरल रूप से आप समझ सकते हैं कोई भी चीज और वार्तालाप में क्या होता है कि आपके संदेह संशय है वो आप व्यक्त करते हैं और उसी के जितना ही उत्तर मिलता है ऐसा नहीं कि पूरा कॉस्मोलॉजिकल इवोल्यूशन हिस्ट्री और फिलोसोफी आपको समझा दिया मैंने मेरा इतना प्रश्न है तो मैंने इतना ही प्रश्न आपको किया और मुझे इतना ही उत्तर मिला तो मुझे उस पार्टिकुलर समय जो चाहिए था वह मुझे मिल गया बाकी लार्जर फिलोसोफी बाद में देखी जाएगी तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि भारत में मैं किताब तो लिख रहा हूं किंतु सिंपल चेटी शॉर्ट समथिंग किस तरह से स्वामी जी वर्णित करते हैं अगेन आई एम गोइंग टू लर्न फ्रेंच और फ्रेंच सीखने वाला हूं स्वामी जी का प्लान था कि बाद में वह फ्रांस में जाकर के रहेंगे यहां पर पत्र समाप्त होता है फिर मेरी लस कहती है ही आल्सो ट्राइड हिज हैंड एट गोल्फ ऑन थ्री और फोर होल्स स्वामी जी ने गोल्फ सीखने का भी प्रयास किया अभी ये चित्र सही में व बीच बीच में वो आता है ना कि स्वामी जी क्रिकेट खेलते थे भारत में तो वो एक वेदांत केसरी का एक स्पेशल इशू आया था तो स्वामी जी प्ले स्पोर्ट यानी कि विभिन्न तरह के खेल खेलते हुए स्वामी जी तो उसमें वह आम चक्रवर्ती ना कि ऐसा असीम चौधरी असीम चौधरी बोल कर के एक रिसर्चर है उसने यह सब रिसर्च करके सब इकट्ठा किया कंपाइल किया है रिसर्च माने क्या बेसिकली कंपाइल किया है विभिन्न सोर्स से कि डिफरेंट डिफरेंट स्पोर्ट डिफरेंट डिफरेंट खेल स्वामी जी कहां पर कैसे खेले तो उसमें ये बहुत सारे हैं वो आर्टिकल उसको ट्रांसलेट करने वाला था मैं किंतु खैर हुआ नहीं आखिर में किंतु बड़ा ही सुंदर आर्टिकल है तो इसमें देखिए कि उसमें था कि स्वामी जी क्रिकेट खेलते हैं तो अभी क्रिकेट कहां पे खेले कहां पे वर्णन है क्या रेफरेंस है वो सब वो फिर मेन बात यह है कि एक अच्छे अ आर्टिस्ट को उन्होंने लगाया था वेदांत केसरी के एडिटर महाराज ने कि जितने भी स्पोर्ट है उन सबका एक चित्र बना कर के दो कि स्वामी जी ये स्पोर्ट खेल रहे हैं तो व चित्र देख कर के मुझे बड़ा अच्छा लगा था कि वो हैंड रिटन ड्राइंग है और स्वामी जी का चेहरा है और स्वामी जी यह खेल रहे हैं वो खेल रहे हैं सब वो बड़ा ही सुंदर था वो तो ऐसे ही ये स्वामी जी गोल्फ खेल रहे हैं तो मुझे अभी याद नहीं है कि उसमें गोल्फ का वर्णन था कि नहीं किंतु वो चित्र देखने के लिए बड़ा ही सुंदर लगेगा आजकल हम जबी देखते हैं गोल्फ कौन खेलता है तो यह बड़े धनी लोग होते हैं जिनके पास में समय होता है व्यतीत करने के लिए शांति से प्रकृति के भीतर में रह कर के वे लोग बड़े-बड़े गोल्फ कोर्स में अपना मेंबरशिप लेते हैं यह जैसे कि ये फाइव स्टार जिम होते हैं ना उसमें मेंबरशिप लेना एक बड़ी प्रेस्टीज की बात है कि मैं उस जिम में जा रहा हूं मैं उस क्लब का मेंबर हूं तो वैसे ही यह गोल्फ कोर्स में मेंबरशिप लेना यह भी एक आजकल बड़ी प्रेस्टीज की बात है कि मैं उस गोल्फ क्लब में मेंबर हूं उस गोल्फ कोर्स में मेरा यह सब्सक्रिप्शन है वो भी पैसे भी बड़ा हेवी ले लेते हैं तो लोग वहां पर जाते हैं ज्यादातर दिखावा करने के लिए कि हां वो थोड़ा सा सोशल नेटवर्किंग हो जाए क्योंकि अब महंगी जगह प जा रहे हैं तो सब धनपति ही आएंगे तो वहां जाकर बिजनेस की बातें करेंगे वो जोसे ठाकुर मथुर बाबू ठाकुर को लेकर के नॉर्थ इंडिया का पिलग्रिम मैज करने के लिए निकले उत्तर भारत की यात्रा करने के लिए तो उसमें वो वहां पे राजा बाबू बोलकर के कहीं वाराणसी में काशी में कहीं प बैठे थे काशी या वृंदावन में राजा बाबू बोलकर के कोई होस्ट होंगे तो मथुर बाबू और ये लोग सब अपने बिजनेस की बातें कर रहे हैं मथुर बाबू तो बिजनेसमैन थे ना य सोशल नेटवर्किंग का एक नेटवर्किंग का एक भी मौका नहीं छोड़ेंगे तीर्थ यात्रा प भी आए हैं तो पहले तो बिजनेस के बारे में कर देना कि हां मुझे तो ठाकुर इन लोगों के साथ में बैठे थे तो बड़े ही परेशान हो गए बाद में दक्षिणेश्वर में अपने भक्तों को क्या कहते हैं कि वो खाने शही कथा वहां पर भी वही बात मुझे इतना नुकसान हुआ इतना लाभ हुआ हुआ ठाकुर कहते हैं मैं तो रोने लगा मां को बोलने लगा मां तुम यह सब मुझे क्या कहां पर ले आई हो दक्षिणेश्वर में तो मुझे यह सब नहीं सुनना पड़ता था यहां पे यह सब मुझे सुनना पड़ता है तो ये धनी लोग होते हैं जहां प भी जाएंगे सोशल नेटवर्किंग का वो कभी भी वो मिस नहीं करेंगे मौका तो ये आजकल गोल्फ का एक ये है माने गोल्फ बोलकर के ही एक इमेज एक पिक्चर खड़ा होता है कि धनी लोग जाते हैं और बेसिकली वो एक अपना बिजनेस वहां पर ज्यादा होता है तो यहां पर स्वामी जी गोल्फ खेल रहे हैं तो नेचरली देखिए कि आज का गोल्फ और उ समय का स्वामी जी का गोल्फ इसमें कितना आसमान जमीन का फर्क है जैसे कि ये ठाकुर वो उदाहरण देते हैं ना एक आदमी मछली पकड़ रहा है तो उसका पूरा ध्यान जो मछली पकड़ने के लिए वो जो डाला है वो जो बेट जिसको कहते हैं ना कि एक हुक के ऊपर में एक छोटा सा कीड़ा लगा कर के पानी में डाल देते हैं एक एक लकड़ी के सहारे बांध करके अभी वो जब वो मछली वो कीड़े को खाएगी तो फट करके वह जो मछली पकड़ने वाला है रस्सी को बाहर खींच लेगा तो एक आदमी इस तरह से पानी में यह बेट डाल करके कीड़े को हुक के ऊपर में बांध कर के डाल कर के बैठा है अभी उसका पूरा ध्यान उसी के ऊपर में है कि कब मछली आएगी कब मैं उसको पकड़ू बीच पीछे में से एक यात्रालू जा रहा है एक यात्री वहां से जा रहा है वो इस इसको पूछ रहा है कि अरे महाशय आप बता सकते हैं कि वो अमुक आदमी का घर कहां पर होगा ये जो मछली पकड़ रहा है वो सुन ही नहीं रहा है उसका फुल अटेंशन उसके ऊपर है कि कब मछली ये हुक में फंसेगी और कब मैं उसको पकड़ लूं तो ये आदमी यात्री उसने चार पांच बार पूछा देखा कि वो रिस्पांस ही नहीं दे रहा है तो वो नाराज होकर के आगे जाने लगा अभी यहां पे जो आदमी मछली पकड़ रहा था जैसे ही मछली पकड़ में आ गई फट करके उसने मछली निकाली और फिर वह जो यात्री है उसको चिल्ला चिल्ला करके बोलने लगा अरे भाई यहां पर आओ यहां पर आओ मैं बताता हूं कहां पर जाना है तुमको तो वो यात्री नाराज होकर के वापस आया बोला महाशय मैं इतना चिल्ला रहा था बता नहीं रहे कि कहां पर जाना है और अभी आप मुझे पीछे फिर सामने से बुला रहे हैं क्या बात है तो वह जो मछली पकड़ रहा था वह कह रहा है कि मेरा पूरा ध्यान मछली पकड़ने में था इसलिए आपके साथ में बात नहीं कर पाया तो यह जो टोटल अटेंशन जिस कार्य हम कर र हैं उसमें आ जाना इसी को तो कहते हैं कि कंसंट्रेशन इसी यही तो है राजयोग का सीक्रेट तो स्वामी जी जब गोल्फ भी खेलते होंगे तो उनका फुल अटेंशन उस ये जो वो जो गोल्फ क्लब जिसको कहते हैं ना गोल्फ क्लब को कैसे स्विंग करना वो जो बॉल होता है उसको कैसे लगे और बॉल का जो ट्रेजक्ड है वो कैसे एगजैक्टली वो होल में जाकर के गिरे यह सब उसके ऊपर में इतना आ जाता होगा कि इस इसको छोड़ कर के और कुछ भी उनको दिखता नहीं होगा वो अर्जुन की कहानी की तरह वो सभी को पूछा गया गुरु ने सबको पूछा कि पेड़ पर क्या दिख रहा है तो पेड़ पर यह दिख रहा है वो दिख रहा है 10 चीजें दिख रही है अर्जुन को जब पूछा गया कि पेड़ पर क्या दिख रहा है तो पंखी की आंख ही दिख रही है क्यों क्योंकि पंखी की आंख पे तीर लगाना है जो टारगेट है वही दिखता है बाकी और कुछ भी नहीं दिखता तो स्वामी जी जब गोल्फ खेलते होंगे का कंसंट्रेशन कैसा होगा यह अभी हम कल्पना ही कर सकते हैं तो मेरी लुई लिखती है ही आल्सो ट्राइड हिज हैंड एट गोल्फ ऑन द थ्री और फोर होल्स व्हिच वेर लेड आउट ऑन रिजली एक्सटेंसिव लोंस रिजली मेनर की जो बहुत बड़ी लोन थी उसमें एक गोल्फ कोर्स भी बनाया गया था जिसमें कुछ होल भी बने थे बोल को जाने के लिए और उसमें स्वामी जी गोल्फ की प्रैक्टिस भी की किया करते थे आई डू नॉट थिंक इट डिफिकल्ट एट ऑल स्वामी जी लिखते हैं कि मुझे नहीं लगता कि गोल्फ थोड़ा सा भी कठिन है ओनली इट रिक्वायर्स गुड प्रैक्टिस बस यही है कि थोड़ा सा अच्छा प्रैक्टिस चाहिए और यहां पर उन्होंने कंसंट्रेशन की बात नहीं की किंतु हम इसको बाय डिफॉल्ट जोड़ देते हैं क्योंकि जो कुछ भी करते हैं स्वामी जी कंसंट्रेट करके ही करते हैं तो अच्छा प्रैक्टिस भी चाहिए और फुल कंस भी चाहिए वो जो एक कहानी है ना वो कहानी यहां पर आएगी वो शूटिंग करने की उसके बारे में जब आएगी बात करेंगे मेरी लुईस आगे लिखती है देयर वुड हैव बीन रिच अवर्स ऑफ टॉक और ऑफ रीडिंग इन द लगिया अ वाइड ओपन पोर्च ऑन द लेफ्ट साइड ऑफ द हाउस एज वन फेड फ्रॉम द बैक लोन ऐसा सबने अभी दिनचर्या के बारे में स्वामी जी की दिनचर्या के बारे में बता द है से घंटों के घंटों जाते थे तब वराम दे में वराम दे में बैठ कर के स्वामी जी अपने मित्रों के साथ में बातें करते ही जाएंगे करते ही जाएंगे और स्वामी जी की बातें एक बार प्रारंभ होगी तो उसका अंत ही नहीं आएगा लोग मंत्र मुग्ध होकर के स्वामी जी को सुनते ही रहेंगे ये जैसे थाउज आइलैंड पार्क में जब वो स्वामी जी उस कॉटेज में बैठ कर के मिस डचर की कॉटेज में बैठ कर के जो गप लगाते ही जाते थे बातें करते ही जाते थे तो यह सिस्टर क्रिस्टिन है उसने जो सब वर्णन किया है मन भर जाता था ऐसा लगता था कि यह समय जो कि कभी समाप्त ही ना हो ऐसा लगता था कि जैसे घड़ी का कांटा रुक जाए और स्वामी जी के साथ में हम बैठे ही रहे अनंत काल तक अनंत काल तक स्वामी जी य ईश्वरीय कहानी ईश्वरीय वार्तालाप करते ही जाए ऐसा लगता था मन में ऐसा लगता था कि यहां से फिर से कभी खड़े ही ना हो ये डे टू डे लाइफ है उसके जो टेंशन है उसका ये जो सब है स्ट्रेस है उस सब में हम कभी वापस जाए ही नहीं मंत्र मुग्ध होकर के हमेशा हमेशा के लिए स्वामी जी की वाणी को जैसे हम सुनते ही जाए तो यहां पे भी वैसे ही थाउजेंड आइलैंड पार्क की तरह ही स्वामी जी घनिष्ठ मित्रों से घेरे हुए थे और बरामदे में बैठ कर के जब बातें शुरू करते थे तो घंटों के घंटों कहां चले जाते थे पलक झपकते ही वह पता ही नहीं चलता था और ऑफ अन डिस्टर्ब नेप्स इन द क्वाइट आफ्टरनून अन डिस्टर्ब नेप नेप यानी कि निद्रा बिना किसी डिस्टरबेंस की नींद स्वामी जी आफ्टरनून में दोपहर में लिया करते थे और यहां पर देखिए कि स्वामी जी के जीवन में निद्रा की समस्या हमेशा से जुड़ी हुई थी रात को बड़ा ही कम सोते थे दिन में तो विश्राम लेटते थे नींद नहीं आती थी सब समय यह मन में चक्रवात की तरह चलता ही रहता था कि कैसे उनका यह मिशन है वो सक्सेसफुल हो तो ये पूरे चक्रवात स्वामी जी का छोटा सा तो जीवन 39 इयर्स उसमें यह सब कुछ करके जाना मन के भीतर में वो जो बड़ा तूफान जो उठ रहा है उसकी तो हम कल्पना भी कैसे करेंगे तो नींद तो स्वामी जी के जीवन में थी नहीं किंतु यह रिजली मैनर के जो कुछ दिन थे उसमें स्वामी जी चैन की नींद सोए थे तो यहां पर मेरी लुईस लिखती है कि घंटों के घंटों जाएंगे रामदे में स्वामी जी बातें करते रहेंगे या तो फिर दोपहर के बाद में दोपहर जाती रहेगी कि स्वामी जी चैन की नींद सोए है स्मी जी लाइंग एट फुल लेंथ ऑन द ग्रीन काउच इन द होल साउंड अस्लीप लाइक ए टायर्ड चाइल्ड मोड स्टम ये जो स्वामी जी की डिसाइल थी जो कि आर्टिस्ट थी जिसके बारे में हमने देखा कि स्वामी जी को जहाज पर रिसीव करने के लिए सबसे पहले वही गई थी और जिसके पास में से स्वामी जी पेंटिंग सीखने वाले थे तो ये मोड स्टम लिखती है कि छोटे बच्चे एक छोटा सा बच्चा जब खेल कर के आ कर के थक जाता है और अपने घर में बेडरूम तक जाने का भी उसको समय नहीं है वो जो सोफा होता है बे ड्रॉइंग रूम में बैठक कक्ष में सोफा होता है उसी के ऊपर में कैसा सो जाता है वैसे ही मैंने स्वामी जी को एक थके हुए छोटे बच्चे की तरह एक इनोसेंट बच्चा जिसके मन में कुछ भी पाप नहीं है कुछ भी अंकट पंक नहीं है कुछ भी विकार नहीं है ऐसा एक इनोस थके हुए छोटे बच्चे की तरह चैन की नींद सोते हुए सोफा के ऊपर में मैंने देखा है यह मोड टूम लिखती है देर वेर सॉलिटर अर्ली अर्ली मॉर्निंग वक्स अराउंड द एक्सपेंसिव ग्राउंड ऑफ रिजली जनरली अलोंग अ पाथ ट लेड फ्रॉम द लिटल कोटेज पास्ट द कैसिनो एंड मेड अ रोड ट लेड अक्रॉस एंड ओपन फेड स्वामी जी की दिनचर्या के वर्णन में आगे आता है कि सुबह को स्वामी जी अकेले से मॉर्निंग वॉक करने के लिए जाते थे प्रातः भ्रमण के लिए जाते थे लिटिल कॉटेज अभी ये रिजली मैनर तो एक बड़ा सा कैंपस जैसा था जिसमें कि कैसीनो बोलकर के एक बिल्डिंग था वहां पर कैसीनो नहीं थे किंतु खेलकूद के बाकी सब सामान रखे हुए थे और स्वामी जी जहां पर रहते थे उस ब का नाम था लिटिल कॉटेज स्वामी जी और रयान जी जहां पर रहते थे वहां का तो यह लिटल कॉटेज से प्रारंभ करके स्वामी जी कैसीनो से पसार होकर के प्रातः भ्रमण के लिए जो चलते थे तो वोह जो गांव में जाने के लिए खेत की ओर जाने के लिए जो एक रास्ता था सुमधुर सुंदर रास्ता प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन तो हमने देखा कि कितना सुंदर जगह है तो सुबह को कितना शांत होता होगा सूर्य प्रकाश भी कितना सॉफ्ट और अच्छा मने एक शीतल वातावरण होगा फिर पंखियो का कलरव चलता होगा तो इस तरह के सुंदर वातावरण में स्वामी जी प्रातः भ्रमण के लिए जाया करते थे एट द एंड ऑफ दिस रोड वास ह्यूज स्प्रेडिंग ओक एंड र स्वामी जी वुड मेडिटेटर ट द ट्री केम टू बी नोन स्वामी ओ यह जो प्रातः भ्रमण के जो रास्ता है उसके अंत में एक सु विशाल सु विस्तृत ओक का वृक्ष था ओक यानी कि हमारा सीसम न की ऐसा कुछ एकट नाम देखना पड़ेगा ओक इंग्लिश वर्ड है तो यह ओक का एक वृक्ष था और जिसके नीचे में बैठ कर के फिर स्वामी जी प्रातः भ्रमण के अंत में ध्यान करने के लिए विराजित होते थे और इतना नियमित रूप से इस पेड़ के नीचे में बैठते थे कि यह पेड़ को सभी लोग स्वामी जी का स्वामी जी ओक यानी कि स्वामी जी का पेड़ ऐसा करके बुलाना लोगों ने शुरू कर दिया था ही वुड देन टेक अ पाथ टू द राइट एंड केम टू द इन स्टॉपिंग इन द अर्ली डेज ऑफ सिंबर बिफोर द विट मार्शल्स लेफ्ट टू प्ले विद द थ्री चिल्ड्रन हु रेंड इन एज फ्रॉम बेरली ट टू सि एंड टू गिव देम पेनीज एज कैथराइन विट मार्स द यंगेस्ट ऑफ द बूड लर्न फ्रॉम हर मदर यह ध्यान समाप्त करने के बाद में स्वामी जी फिर से टहलते टहलते इन बोल कर के एक जगह पर जाते थे इन अर्थात की एक छोटा सा होटल जैसा रेसिडेंशियल होटल जैसा जहां पर की लोग रहने के लिए जाते हैं आजकल ये इन शब्द बड़ा फेमस हो गया है पहले भारत में इतना नहीं था अभी तो सब जगह पर इन ये इन वो इन ऐसा सब चलता है तो ये इन बोलकर के एक जगह थी होटल जैसा जहां पे कि विट मार्श बोलकर के एक फैमिली एक मित्र उनके कुछ रहते थे रिजली मैनर का कैंपस वैसे बहुत बड़ा था किंतु स्वामी जी के आगमन से मिस्टर और मिसेस लगेट के इतने सारे मित्र वहां पर इकट्ठा हो गए थे स्वामी जी के मित्र इतने इकट्ठा हो गए थे कि वहां पे सबके लिए कैंपस में सभी के लिए रहने की जगह नहीं थी तो यह इन बोलक के जो जगह थी होटल जैसा वहां पे कुछ-कुछ लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी इसमें यह विट मार्श फैमिली भी था जहां पे स्वामी जी जाते थे और उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे एक की उम्र थी दो सबसे छोटे की उम्र थी कैथरिन कैथराइन जिसका नाम है उसकी उम्र थी 2 साल और सबसे बड़ी सबसे बड़ा बच्चा था उसकी उम्र थी 6 साल तो यह दो साल से लेकर के 6 साल के जो तीन बच्चे थे उनके साथ में स्वामी जी खेलते थे और उनको पेनिस पेनिस यानी कि पैसा पैसे के सिक्के ऐसा कुछ देते थे यानी कि बच्चों को अच्छा लगे देन बैक फुल सर्कल टू द लिटल कॉटेज और वहां से लिटिल कॉटेज में वापस फिरते थे हमने देखा कि लिटिल कॉटेज अर्थात की स्वामी जी का निवास स्थान कोटेज से स्वामी जी ने प्रारंभ किया प्रातः भ्रमण मॉर्निंग वॉक और आखिर में लिटल कोटेज तक आक के स्वामी जी रुक गए अगेन देर वुड हैव बीन गेम्स ऑफ क्रोकेड ऑफ जेंटल टेनिस कैरेज ड्राइव्स थ्रू द लवली कंट्री साइड और अप माउंट मो होंग अ फेवरेट जंट एंड इन द कूल लुमिनस एयर ऑफ सन डाउन देयर वुड हैव बीन स्ट्रोल्स ऑन द वाइड लॉस कभी-कभी क्रोकेड कर के एक गेम है वो खेला करते थे स्वामी जी अपने मित्रों के साथ में कभी-कभी टेनिस खेलते थे कभी-कभी यह हॉर्स कैरेज में घोड़ा गाड़ी में बैठ कर के लंबे ड्राइव के लिए जाते थे कभी जाते थे यह गार्डन पाथ के ऊपर में गांव से जो गांव और खेत में से जो रास्ता जा रहा है उस रास्ते से या तो कभी-कभी मोहक बोल कर के जो पहाड़ है पास में उसके ऊपर में कैरेज में बैठ कर के ड्राइव के लिए जाते थे स्वामी जी मेकिंग अ पिक्चर ट द एन रेटर्ड मिस टूम लंग रिमेंबर और स्वामी जी का उस समय जो दृश्य था भव्य दृश्य स्वामी जी का कैरेज स्वामी जी के चेहरे के हाव भाव स्वामी जी के कपड़े वो सबने मोड टूम के ऊपर में इतना गहरा असर डाला कि वो लिखती है विथ हिज वाइट विथ हिज फ्लेम कलर्ड रोब्स ड्रेप्ड अराउंड हिम व्हाट ए फिगर ही वाज एज ही स्ट्रड द लोंस ऑफ रिजली जो अपने पीले और लाल कलर के कपड़े वस्त्र पहन कर के स्वामी जी जिस कॉन्फिडेंस के साथ में रिजली की लोन प घुमा करते थे तो उनको देख कर के कैसा आश्चर्य होता था कैसे भव्य वो दिखते थे हिज ट्राइड केम नियरर टू द पोएट्स डिस्क्रिप्शन ऑफ अ स्टेप दैट स्पन द अर्थ देन एनीथिंग आई एवर एक्सपेक्ट टू सी अगेन यह पोएट का जो डिस्क्रिप्शन है इस तरह के पद शेप जो कि पृथ्वी को भी माने पृथ्वी को भी अवगणना करें उस तरह की उनकी चाल यह जो पोएट के डिस्क्रिप्शन की चाल यह पहली बार मैंने देखी अब यह कौन सा पोएट है और यह कौन सी पोयम है वो थोड़ा सा देखना पड़ेगा किंतु ये इंग्लिश में बहुत ग्रेट पोएट्स होते हैं और ये पोयम की जो लाइन है इस तरह की चाल इस तरह के पद शेप इस तरह की ये जो वॉक जिससे कि आप पृथ्वी को तुच्छ कर दे इतना गुरुर वो एक एक जोक है ना कि एक मुगल एक मुगल एक था वो जा रहा था अपनी मुगल चाल में ये मुगल लोगों की चाल भी होती है ना वो बड़े ही शांत और धीर गंभीर और डिग्निफाइड ऐसा करके चल रहा था तो किसी ने एकाएक उसके एक नौकर ने आकर के दौड़ कर के खबर दिया कि अरे चलिए चलिए जल्दी से आइए आपका घर में आग ल गई है आपके महल में तो दौड़ कर के आइए अभी क्या बचाना है क्या नहीं बचाना है वगैरह वगैरह देखना पड़ेगा अभी और कोई भी होगा ऐसा हम रास्ते से जा रहे हैं धीरे-धीरे आराम से चलते चलते कोई आकर के कहेगा कि अरे चलो तुम्हारे घर में आग लग गई है तो हम तो आंख बंद करके दौड़ेंगे क्या बचाना है क्या नहीं बचाना वो सब देखने के लिए यह जो मुगल था वो राजा वो तो आराम से मुगली मुगलाई चाल में चल रहा था और वो क्या कहा पता है अपने नौकर को जद महल में आग लग गई है तो लग गई है क्या उसके आग के लिए क्या मैं अपनी मुगलाई चाल छोड़ दूंगा यानी कि मैं अपनी मुगलाई चाल में चलना छोड़ कर के वो जैसे आम आदमी की तरह दौड़ना शुरू कर दूंगा कभी नहीं होगा तो मुगलाई चाल के लिए वो महल जल गया वो जलने दो किंतु अपनी चाल कभी नहीं छोड़ेंगे स्वामी जी जब ऐसे ही चलते थे और यहां पर तो एक डिस्क्रिप्शन है कि हां वो जब रिजली मेनर की लोन में चलते थे तो वही राजाशाही मुगला चाल किंतु उसका एक दूसरा भी एक सुंदर डिस्क्रिप्शन कैलिफोर्निया में है जब लोग ये जहाज पकड़ने के लिए या तो फिर ट्रेन पकड़ने के लिए सब लोग जोर-जोर से दौड़ रहे हैं चलिए चलिए समय हो गया है ट्राम छूट जाएगी या जहाज छूट जाएगा तो स्वामी जी अपनी वो जो धीर गंभीर डिग्निफाइड चाल है उसी में चलते जाएंगे कहेंगे कि हम हम भारतीय लोग हम लोगों समय हमारा गुलाम है जबकि वेस्टर्न लोग तुम लोग समय के गुलाम समय भारतीय लोगों का गुलाम है किंतु वेस्टर्न लोग समय के गुलाम है कहते हैं कि एक ट्रेन जद चली जाएगी या तो फिर एक जहाज चला जाएगा तो क्या दूसरा नहीं आएगा हम राह देखेंगे नए जहाज में जाएंगे किंतु यह जो धीर गंभीर चाल है वो तो मैं नहीं छोड़ने वाला हूं कैंप टेलर बोल कर के एक जगह पर स्वामी जी रुके थे ये इसका वर्णन जब हम कैलिफोर्निया का प्रसंग जब करेंगे उस समय आएगा बहुत ही सुंदर प्रसन्न स्वामी जी के जो जीवन में जो रिट्रीट जैसे जो थे घटनाएं उसमें से ये थाउज आइलैंड पार्क ये रिजली मेनर ग्रेट समर तो वैसे ही कैंप टेलर में स्वामी जी घनिष्ठ मित्रों के साथ में रुके थे कैलिफोर्निया मिशन समाप्त होने के बाद में तो वहां पर आइड अनसेल थी अभी आडा अनसेल को सिटी में वापस जाना था उसका समय वहां पर समाप्त हो गया था तो वहां पे पास में से ही ट्रेन जाती थी तो ऐसा होता था कि ट्रेन वहां प रुकेगी नहीं आपको ऐसा सिग्नल देना पड़ेगा कि रुको करके तो ट्रेन रुकेगी आपके लिए अदर वाइज ट्रेन चली जाएगी तो वो आईड अनसेल जा रही है स्वामी जी ने कहा चलो मैं तुम्हारे साथ में जाता हूं मैं ट्रेन को सिग्नल देक के रोकूंगा तुम्हारे लिए तो ठीक है ये दोनों लोग जाकर के वो पटरी के सामने जाकर के खड़े हो गए जैसे ही वो ट्रेन आ रही है तो ड्राइवर जो ड्राइवर तो इंजन में बैठा है इंजन जैसे ही पास में आया स्वामी जी ने ऐसा इशारा वगैरह कुछ किया होगा रुकने के लिए तो अभी जैसे ही ड्राइवर ने स्वामी जी को देखा वो कहता है हु इज दिस स्काई पायलट तो आइड अंसेल लिखती है कि ये जो एक्सप्रेशन है स्काई पायलट ये एक्सप्रेशन मैंने बिल्कुल पहली बार सुना ये और मैं एकदम प्रभावित हो गई स्वामी जी स्काई पायलट जैसे ही दिखते थे जैसे कि उनकी नजर हमेशा स्काई की ओर है आकाश की ओर है गगन की ओर है जमीन की ओर वो देखते ही नहीं है ये जमीन यह पृथ्वी यह संसार ये संसार के छोटे-मोटे किस्से यह सबके सामने स्वामी जी जैसे ही देखते ही नहीं है हमेशा आकाश की ओर गगन की ओर देखते रहते हैं और वो ड्राइवर उसने दो-तीन सेकंड के लिए स्वामी जी को देखा होगा और दो-तीन सेकंड में ही स्वामी जी को वो पहचान लिया कहां वो कैलिफोर्निया की ट्रेन का ड्राइवर जिसको वेदांत और उसके साथ में कोई लेना देना नहीं स्वामी जी का कभी नाम भी नहीं सुना ये काले और ये जो लोग होते हैं उनके प्रति वो रेसिजम का था ना यह सब ये गोरे लोग जो होते हैं काले लोगों को वैसे ही घृणा करते हैं अभी आजकल बहुत चेंज हो गया है और सभी लोग नहीं करते कुछ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो भी है किंतु ये ड्राइवर ने ट्रेन के ड्राइवर ने अल्प क्ण के लिए स्वामी जी को देखा और उसी में वो आश्चर्य चकित हो कर के बोल रहा है हु इज दिस स्काई पायलट ये स्वामी जी का वो जो डिग्निटी थी कि वो जब और ये जो मोड स्टम उसका वर्णन करती है कि रिजली की लोन में जब स्वामी जी अपनी राजाशाही चाल में जब चलते थे तो ऐसा लगता था जैसे पूरी पृथ्वी के भोगों को तुच्छ का कर दे रहे हैं एंड देयर वाज अ कंपेन मेजेस्टी इन हिस प्रेजेंस एंड कैरेज ट कुड नॉट बी इमिटेटेड और डिस्क्राइब्ड और उनका वह जो पोज था उनका यह जो स्टेचर था उनका यह जो व्यक्तित्व था उसमें इस तरह की आभा थी एक तरह की डिग्निटी थी एक तरह की गरिमा थी कि जिसको कि हम शब्दों में वर्णन नहीं कर सकते पहली बार जब स्वामी जी शिकागो में गए थे तो वहां के न्यूजपेपर ने ऐसा लिखना शुरू कर दिया कि भारत से एक राजा आए क्योंकि राजा की तरह ही स्वामी जी का यह प्रभावशाली व्यक्तित्व इसके बाद में यह जो दिनचर्या के बारे में जो वर्णन है उसके बारे में मेरी लुईस आगे लिखती है डिनर सर्व्ड इन द डाइनिंग रूम अ रूम नॉट लार्ज बट एलिगेंट विथ ब्लैक मार्बल मेंटल पीस रिच वॉलपेपर एंड स्टेटली कार्ड साइड बोर्ड्स वाज जनरली मोर और लेस इनफॉर्मल एक बड़े ही सुंदर भोजन कक्ष में भोजन परोसा जाता था और इसका वर्णन भी किया है कि काले कलर के मार्बल का मेंटल पीस था मेंटल पीस अर्थात कि वहां पर तो गर्म ठंडी बहुत पड़ती है तो घर के भीतर में आग जलानी पड़ती है तो आग जलाने के लिए वो फायर प्लेस होता है उसके ऊपर में एक प्लेटफॉर्म जैसा होता है छोटा सा जिसको कि मेंटल पीस कहते हैं और यह मेंटल पीस जिस जिस घरों में होता है बड़ा ही डेकोरेटिव होता है वो एक आपका वो लोग मेंटल पीस देख कर के कहेंगे कि घर मालिक जो है उसके पास में कितना रुपया है तो ये बड़ा ही ब्लैक मार्बल का जाया हुआ मेंटल पीस था रिच वॉलपेपर थे और स्टेटली बड़े ही सुंदर साइड बोर्ड थे अभी साइड बोर्ड का अर्थ मुझे नहीं पता तो जो भी है यह डाइनिंग हॉल यानी कि भोजन कक्ष में जो भोजन परोसा जाता था वह इनफॉर्मल यह पूरा एक रहता था जैसे कि जनरली धनी व्यक्तियों के घर में भोजन परोसा जाता है और जब मेहमान होते हैं तो एक फॉर्मल एक एक रहता है पूरा एक चीज पूरा मामला लोग डिनर जैकेट वगैरह पहन कर के आते हैं जो स्त्रियां होती है वो डिनर गाउन पहनती है और बड़े ही अच्छे कपड़े पहन कर के और वो जो नौकर लोग जो होते हैं परोसने वाले वे लोग भी बड़ा ही वो अपना ड्रेस पहन कर के वो परोस हैं खाना वगैरह तो एक बड़ा ही फॉर्मल रहता है सबको एक घंटी लगती है सबको एक साथ में इकट्ठा होना है एक के बाद एक डिनर के जो कोर्सेस है वो परोसे जाएंगे आपको खाना है वो बातचीत भी उसी समय कौन किसके साथ में बैठ गा वो वो जो होस्टेस होती है जो लेडी घर की मालकिन जो होती है गृहिणी घर की वो सब ठीक करेगी कि कौन किसके साथ में बैठेगा कौन किसके साथ में अच्छे से बात कर सकता है तो जनरली एक बड़ा ही फॉर्मल एक रहता है वो पूरा अफेयर किंतु यहां पे पूरा इनफॉर्मल था क्यों क्योंकि स्वामी जी थे पूरे इनफॉर्मल स्वामी जी सिटिंग ऑलवेज ऑन मिसेस लगेट राइट वास परफेक्टली एट लिबर्टी टू एक्सक्यूज हिमसेल्फ फॉर ए वॉक और ए स्मोक स्वामी जी हमेशा मिसेस लगेट के दाई साइड पे राइट हैंड साइड प बैठते थे मिसेस लगेट थी होस्टेस यानी कि उसका जो बैठने की सीट थी वह सबसे प्रोमिन होती थी और उनके राइट साइड पे जो गेस्ट बैठेंगे वह सबसे ज्यादा सम्माननीय गेस्ट होंगे तो जो सबसे ज्यादा सम्माननीय गेस्ट की जो चेयर थी उसके ऊपर में स्वामी जी को बिठाया जाता था और इसके बाद में इस डिनर में क्या होता था फनी स्टोरी वो हम अभी कल देखेंगे ह त श्री राम कृष्ण स्वामी जी कहते हैं कि मनुष्य के जीवन में होता है डू और डू नॉट और जब ये डू नॉट प्रारंभ होता है वहीं से धर्म का प्रारंभ होता है जो अपने जो सनातन धर्म में जो है कि श्रेय और प्रेय दो चॉइस मनुष्य के सामने आती है प्रेय है जो कि हमको प्रिय है जिसको करने से हमको आनंद आता है इंद्रियों को शांति सुख मिलता है और श्रेय है जो कि हो सकता है कि करना कठिन हो हमारे लिए किंतु भविष्य के लिए हमारे लिए बहुत अच्छा है अभी जैसे कि स्वामी जी स्विट्जरलैंड में कहीं पर गए थे यूरोप में और देखा कि एक मोनेस्ट्री है अभी मोनेस्ट्री में सॉलिटर कन्फाइनमेंट के लिए कुछ-कुछ जगह थी जो ऐसे कैदी होते हैं जो कि बड़े ही भयानक होते हैं उनको एकांतवास में बंद कर दिया जाता है और यह एकांतवास कहते हैं बड़ी ही भयानक वह सजा है क्योंकि एक कैदी को जद आप अकेले में एक एकांतवास में बंद कर दे कमरे में जहां पर उसको किसी के साथ में बात करने का मौका ना मिले तो वह आदमी कुछी क्षणों में पागल हो जाएगा तो यह सॉलिटर कन्फाइनमेंट या तो फिर एकांतवास की सजा मनुष्य के लिए कैदी के लिए बड़ी ही भयानक होती है और जो सबसे भयानक कैदी होते हैं वो क्रिमिनल होते हैं उन्हीं को उसमें भेजा जाता है तो स्वामी जी ने ऐसे सब कमरे देखे ऐसे जब कोटरी देखी जहां पर कैदियों को एकांतवास में बंद कर दिया जाता है तो स्वामी जी ने उसको देख कर के ही कहा कि देखिए कि मेडिटेशन करने के लिए कितनी सुंदर जगह है अभी जो आम आदमी होगा उसको यदि एकांतवास में भेजा जाएगा तो कुछ ही दिनों में पागल हो जाएगा वो कभी वहां पर जा नहीं चाहेगा किंतु स्वामी जी है कहते हैं कि ये एकांतवास एक मौका है ध्यान भजन साधन करने का अपने मन को अंतर्मुखी का करने का तो जनरली कोई भी मनुष्य चाहेगा प्रेय क्या है कि मुझे सुख चाहिए कंफर्ट चाहिए मैं ऐसे सुंदर कमरे में रहूं जहां पर की सब तरह की सुख सुविधा हो और श्रेय क्या है कि मैं तपस्या करूं जिससे कि मेरा भी जीवन अच्छा हो तो यह दोनों मेरे सामने आते हैं मैं सुख और कंफर्ट चाहता हूं कि फिर मैं तपस्या करना चाहता हूं ये सुख और कंफर्ट है डू कि मैं यह करना चाहता हूं मैं यह करना चाहता हूं और यह तपस्या मय जीवन है डू नॉट नेति नेति मैं यह नहीं करूंगा यह वो नहीं करूंगा कुछ नहीं करूंगा सिर्फ तपस्या पे अपने मन को केंद्रित करूंगा और जितनी तपस्या करेंगे उतना ही हमारा पुण्य का यह जो बैंक बैलेंस है व बढ़ता जाएगा प्रवृति और निवृत्ति जैसे ही निवृत्ति प्रारंभ होगी यह इनवर्ट स्टार्ट इंट्रोवर्टनेस प्रारंभ होगी