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रघुवीर करे सो होइ: अनिश्चितता और शरणागति 22 Jan 2024

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ओ स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम आज बड़ा ही शुभ दिन है अयोध्या में भगवान श्री राम 500 साल के वनवास के बाद में पुनः पधार रहे हैं तो यहां पर भी राजकोट मंदिर में भी वो आरती दिया वगैरा होगा पूजा भी होने वाली है और सुंदर कांड का पाठ होने वाला है तो एक बड़ा ही शुभ दिन है आज हम हिंदुओं के लिए ठाकुर के पिताजी खुदीराम इस बार का जो मैंने एडिटोरियल लिखा है हमारे गुजराती मैगजीन में वो खुदीराम के ऊपर में लिखा है अ पता होगा कि खुदीराम के कुल देवता रघुवीर थे तो रघुवीर शीला की उनको प्राप्ति हुई थी और रघुवीर पर इतनी शरणागति थी उनकी कि बीच-बीच में अब क्या है कि गरीब ब्राह्मण है खाने पीने का कब कहां से आएगा फिर व्रत इतना उनके जो कठोर नियम होते हैं वह इतना पालन करते हैं किससे भिक्षा लेनी किससे नहीं लेनी उसके भी नियम उनके तो फिर खाना बच्चों को मिलेगा कि नहीं मिलेगा अभी खेती है छोटी सी तो उसमें भी पता नहीं क्या होगा तो यह सब चीजें देख कर के दन पूरे अनिश्चित थे अनिश्चितता उनके जीवन के साथ में संलग्न थी देरे ग्राम में व जमींदार ने कहा कि झुठ मुठ की जुबानी दो मेरे पक्ष में तो अभी सत्यवादी व तो है खुद ही राम क्यों जुबानी देंगे इस तरह से झूठ मूठ की गवाही क्यों देंगे कोर्ट में जमींदार के पक्ष में तो उन्होंने मना कर दिया अभी जमींदार के पास में तो पा है वह किसी को भी हेरेस कर सकता है तो अपने पुरखों की जमीन अपने पुरखों का घर सब छोड़ कर के कामर पुकुर चले आए तो एक तो सत्य निष्ठा एक नियमों के भीतर में रह कर के जीना और फिर एक पूरा जीवन मने इतना शरणागत होकर रहना रघुवीर के ऊपर में इतना डिपेंड होकर रहना तो बीच-बीच में कहा करते थे जद कोई पूछता था चंद्रा मणि देवी पूछेगी कोई पूछेगा अरे इसका क्या होगा यह कुछ है तो हमारे लिए मैंने बच्चों का क्या भविष्य खाने पीने का क्या सेफ्टी एंड सिक्योरिटी तो बीच-बीच में कहा करते थे जहा कोरेन रघुवीर जो रघुवीर करे वह सही तो यह मैंने जब पहली बार लीला प्रसंग में पढ़ा मुझे बड़ा अच्छा लगा था जहा कुरेन रघुवीर यह अनसर्टेनटीज ये दोनों एक दूसरे के साथ में इतना जुड़े हुए हैं हमारी भारतीय आध्यात्मिक धरोहर के साथ में कि जद आपको अनसर्टेनटीज साथ में ही शरणागति आएगी अनसर्टेनटीज लाता है अनसर्टेनटीज इसीलिए हम लोग हमेशा सेफ्टी एंड सिक्योरिटी चाहते हैं सिविलाइजेशन क्या है सिविलाइजेशन इज अ जर्नी टुवर्ड्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी कोई भी एक हम एक फेल्ड स्टेट को लीजिए जैसे कि अफगानिस्तान है और एक सक्सेसफुल स्टेट को लीजिए जैसे कि अमेरिका है तो हम में से कोई भी आज अफगानिस्तान की एंबेसी के सामने जाकर के लाइन लगा करके नहीं खड़ा रहेगा कि हमको अफगानिस्तान माइग्रेट करना है वहां का वीजा चाहिए हम सब लोग अमेरिका की एंबेसी के सामने लाइन लगा कर के खड़े रहेंगे कि हां अमेरिका का वीजा चाहिए वहां पर सेफ्टी है सिक्योरिटी है जॉब गारंटी है सब कुछ है वहां पे और वहां पर वहां से जो लोग आते हैं एनआरआई तो उनको देख कर के हम लोग बड़े ही प्रभावित हो जाते हैं कि अरे वाह येय वो वे लोग कहते हैं कि हमारा लड़का यहां पे इतना मेहनत करता था और इतने अच्छे मार्क्स आते थे किंतु फिर भी उसका कोई एकेडमिक फ्यूचर नहीं था क्योंकि इंडिया में कंपटीशन ही इतनी है बड़ी अच्छी-अच्छी कॉलेजों में देखिए कि कट ऑफ परसेंटेज एडमिशन के लिए 95 90 प्लस होते हैं और वहां पर अमेरिका में ऐसा है कि 60 70 पर यदि आ जाए तो आपको अच्छी-अच्छी जगहों पर एडमिशन मिल जाते हैं तो एक फ्यूचर की दृष्टि से सब तरह से एक अनुकूल वातावरण है अमेरिका में तो यह लोग सब अमेरिका जाने को माइग्रेट करते हैं किंतु यह जो हमारी सर्च फॉर सिक्योरिटी है ये सर्च फॉर सर्टेनटीज हैज टेकन अस अवे फ्रॉम गॉड ईश्वर से हमको धीरे-धीरे करके दूर ले जाता है है यह पैराडॉक्स है हमारे जीवन में जितना ही हम कहेंगे कि मैं मेरा भविष्य मेरे बच्चों का भविष्य सब कुछ ठीक-ठाक करके रखू वैसे ही देखेंगे कि वह भविष्य ठीक करने की चिंता में हम ऐसे डूब जाते हैं कि फिर ईश्वर के ऊपर की शरणागति जो आनी चाहिए वह नहीं आती और ऑन दी अदर हैंड यदि सही सही एक अनसर्टेन जीवन हो तो वह कितना स्ट्रेसफुल होता है वह हम दूसरे लोगों को देख कर के समझ पाते हैं यह एनआरआई को देख कर के लगता है कि हां अमेरिका जाना चाहिए एक समय था अमेरिका का बड़ा मोह था अभी इतना नहीं है लेकिन तो एक समय था तो एट द सेम टाइम हमारे जो गरीब रिलेटिव्स होते हैं उनको देख कर के लगता है कि अरे बाप रे तो बड़ा ही डेंजरस लाइफ है कब कब कहां से क्या हो जाए कुछ ठीक नहीं है बेटर टू हैव सम बैंक बैलेंस सम इन्वेस्टमेंट एटस एटस तो ये दोनों एग्जांपल हम देखते हैं इसीलिए वी लवेज गो इन सर्च फॉर सिक्योरिटी किंतु जितना हम सिक्योरिटी की ओर जाएंगे जितना एक प्रैक्टिकल थिंकिंग करेंगे जितना एक मित्र मंडल बनाएंगे कि हां जब भी कुछ हो जाए तो 10 लोग आकर के खड़े हो जाएंगे ऐसे लोग हैं मेरे कुछ कुछ रिलेटिव्स ऐसा बोला करते थे कि देखो हमारा तो बहुत अच्छा फ्रेंड सर्कल है मेरे घर में जद कोई भी प्रॉब्लम हो जाएगा तो मैं एक फोन करूंगा तो चार पांच लोग आकर के मुझे हेल्प करने के लिए आ जाएंगे तो दिस इज वेरी गुड किंतु वही है कि जब प्रॉब्लम होगा तो हम अपने मित्रों को फोन करेंगे ठाकुर को फोन नहीं करेंगे ऐसा नहीं है कि वह गलत है बिल्कुल नहीं कोई भी नहीं चाहता कि ऐसे अन सिविलाइज स्टेट में हम वापस जाए सभी लोग चाहते हैं कि हम लोग अमेरिका जैसे बने नहीं कि अफगानिस्तान जैसे तो उसमें तो कोई प्रश्न ही नहीं है रामकृष्ण मिशन को ही देखिए मां को ही देखिए यह बच्चे ठाकुर की महा समाधि के बाद में त्यागी संतान इधर-उधर भिक्षा माग करके घूम रहे थे मां ने ही ठाकुर को प्रार्थना किया था कि ठाकुर देखो कि वो जब मां वहां गया धाम में गई थी कि वो देखा कि बौद्ध भिख का रहने के लिए कितना अच्छा रहने के लिए खाने के लिए कितनी अच्छी सुविधा है मां ने ही ठाकुर को प्रार्थना किया था कि देखो तुम्हारे लड़कों का रहने खाने के लिए पहनने के लिए वस्त्र और अन्न का अभाव ना हो सामान्य वस्त्र और सामान्य अन्न का अभाव ना हो प्रार्थना माने ही की थी तो रामकृष्ण संघ में आज देखिए दोनों तरह से एक तो एक हमारे बीच में जो बंड ऑफ लव है एक साधु को यदि बीमार हो जाए एक साधु तो दूसरे साधु उनकी सेवा करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं सीनियर साधुओं को देखें कि हमारे आश्रमों में जो सीनियर साधु होते हैं उनकी सेवा करने के लिए ब्रह्मचार्य को दिया जाता है और ब्रह्मचारी भी बड़े खुशी-खुशी सेवा करते हैं क्योंकि मैंने ने खुद ने मैं जब बेलूर मठ में था तो हमारे एक आचार्य थे ट्रेनिंग सेंटर के तो अभी तो उनका आखिरी समय था 90 प्लस उनकी एज थी तो उनकी सेवा करने का मुझे मौका मिला था मुझे भी बड़ा अच्छा लगा था तो यह सेवा भाव तो रामकृष्ण संघ में है ही और आज मने मां के समय में सामान्य वस्त्र और अन्न की बात थी आज तो वस्त्र और अनन यहां रामकृष्ण संघ में कोई अभाव नहीं है माने इवन रामकृष्ण संघ भी अं सर्टेनटीज निटी की ओर सेफ्टी और सिक्योरिटी की ओर जा रहा है पूरा समाज जा रहा है हमारा संघ भी जा रहा है तो उसमें गलत कुछ नहीं है किंतु एट द बैक ऑफ अवर माइंड हमेशा अपने मन में जो साधक है उसको यह बात खास ख्याल रखना है कि यदि हमको शरणागति डेवलप करनी होगी हमको यदि ईश्वर के ऊपर में डिपेंडेंस लाना होगा तो धीरे-धीरे करके अपना पूरा लाइफ जो है हमको ईश्वर के चरणों में देना होगा कोई भी डिसीजन होना है तो मैं कोई सीनियर साधु को पूछूंगा कि महाराज जी मैं ऐसा कर रहा हूं सही है कि नहीं है तो यदि जिस तरह से मार्गदर्शन मिलेगा मेरे जो मेरी उम्र के जो बाकी सब साधु है जो कि मेरी ही परिस्थिति में से गुजर रहे हैं उनको भी मैं कंसल्ट करूंगा अरे भाई एक डिसीजन लेने का टाइम आ गया है मैं क्या करूं किंतु यह सब तो करना ही है हम लोग करते ही हैं किंतु साथ-साथ में हमेशा एक यह रहता है कि आखिर में तो जो ठाकुर कहे वह सही जहा कोरेन रघुवीर जहा कोरेन श्री राम कृष्ण ये डिपेंडेंस हमको आज कल्टटर पड़ता है एक समय था कि डिपेंडेंस ऑटोमेटिक आ जाता था ठाकुर स्वामी जी की गुरु भाइयों की बात है एक बार स्वामी जी जंगल में से जा रहे हैं खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं हो रहा है तो उनको थोड़ा सा अभिमान आ गया कि ठाकुर का नाम लेकर घर छोड़ा है और अभी मुझे भिक्षा मांगने के लिए इधर उधर दर दर भटकना पड़ता है नहीं मांगनी भिक्षा यहीं पर मैं बैठता हूं प्राण त्याग दूंगा किंतु कि किसी के घर जाके भिक्षा नहीं मांगने वाला हूं वो बैठे हैं ऐसे और देखा कि एक सेठ आकर के उनको वोह लची मने पूरी वो मिठाई वगैरह सब्जी वगैरह आ करके उनको दे कर के गया तो ये लोग ठाकुर की इस तरह से परीक्षा करते थे कि ठाकुर के ऊपर में डिपेंडेंट रहने की तो हमारे भी जीवन में मान लीजिए कि प्रति क्ण इस तरह से अनसर्टेन अनसर्टेनटीज इस तरह की अनिश्चितता ना भी हो किंतु जीवन के जो बड़े-बड़े डिसीजन है वह थोड़ा सा ठाकुर के ऊपर में निर्भर करके करने चाहिए तभी हम माने प्रतिदिन जद ना हो पाए तो एटलीस्ट जीवन के बड़े-बड़े डिसीजन में तो ऐसा हो कि मैं किस तरह से ठाकुर के ऊपर में निर्भर हो सकता हूं जैसे मैं एक साधु का उदाहरण देता हूं कि उन्होंने क्या किया कि सन्यास से पहले उन्होंने अभी संन्यास तो हमारे जीवन में बहुत बड़ा एक पर्व है बहुत बड़ा एक इवेंट है सन्यास विधि ठाकुर की तिथि पूजा के दिन रात को होती है और अर्ली मॉर्निंग 2 बजे के बाद में होती है और प्रेसिडेंट महाराज स्वयं हमको गेरुआ वस्त्र प्रदान करते हैं तो वह कोई भी साधु रामकृष्ण संघ का है उसके लिए तो महत क्षण है तो यह साधु ने सोचा कि मैं सन्यास के लिए उपयुक्त हूं कि नहीं पता नहीं मन में अभी ठाकुर की तिथि पूजा जनरली मार्च में होती है फेब्रुअरी एंड मार्च में तो इस साधु ने क्या किया कि नवंबर महीने में अपना सेंटर छोड़ कर के चला गया और बोला कि मैं नर्मदा की परिक्रमा करूंगा और मैं देखता हूं कि मेरे पैर मुझे कहां पर ले जाते हैं ठाकुर की ओर ले जाते हैं कि कहां ले जाते हैं तो वह परिक्रमा करते करते एक दिन फिर आखिर में बैठ कर के सोचा कि नहीं भीतर से ही ऐसी आ आवाज आ रही है कि तुम बेलूरमठ जाओ समय हो गया है और अभी सन्यास लेने के लिए तुम उपयुक्त हो तो भीतर से आवाज आई ये भीतर से एकदम स्ट्रांग कन्विसिटी थी तो वह सीनियर साधु को कंसल्ट कर सकता था अपने मित्रों को भी कर सकता था उसने किया भी होगा किंतु यह जो ठाकुर के ऊपर में इतना बड़ा डिसीजन छोड़ देना कि सन्यास आप देंगे कि नहीं देंगे तो वो देखिए कि दिस इज हिस वे ऑफ उसका एक तरीका था कि जीवन में किस तरह से अनसर्टेनटीज छोड़े ठाकुर के ऊपर में शरणागति हमारी बढ़े तो ये तो एक सामान्य उदाहरण है किंतु यह शरणागति डेवलप करना अनसर्टेनटीज के साधु आज के साधकों के लिए बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है यदि हम सब कुछ कुछ हमारा ठीक होगा सब कुछ सिक्योर होगा सब कुछ सेफ होगा तो क्या है ना कि भीतर में से एक यह भी आ जाएगा कि ठाकुर की क्या जरूरत है हम मुंह से नहीं बोलेंगे और कॉन्शियसली सोचेंगे भी नहीं किंतु सबकॉन्शियस लेवल पे यह चलता रहेगा जैसे मेरा है मेरा यहां पर इतना एक अच्छा सेटअप हो गया है सुबह को उठता हूं सीधा ऑफिस में आ जाता हूं क्लास होता है क्लास के बाद में बैठ के थोड़ा सा कॉफी पीता हूं काम चालू हो जाता है और शाम को काम खत्म करके में चला जाता हूं यही रूटीन मेरा आखिरी पा साल से चल रहा है क्लास अभी स्टार्ट हुए किंतु बाकी का रूटीन आखिरी पाच साल से चल रहा है तो मुझे पता है कि आज जो हुआ है तो कल भी वही होने वाला है व परसों भी वही होने वाला है देर इज नेवर गोइंग टू बी एनी चेंज इन माय लाइफ तो मुझे तो ऐसी परिस्थिति खड़ी करनी पड़ेगी जिससे कि थोड़ा सा डिपेंडेंस आए थोड़ा सा अनसर्टेनटीज गति आए जद नहीं होगा तो फिर फिर हम लोग एक जड़ थिंकिंग में एक रूटीन में एक ऐसे बंद जाएंगे कि फिर हमारा डेवलपमेंट स्पिरिचुअल डेवलपमेंट अटक जाएगा यहां पे बहुत सारा काम हो रहा है यदि मैं कर्म की बात करूं तो आश्रम में मेरा जो कंट्रीब्यूशन है इट इज वेरी गुड आई एम सेटिस्फाइड विद ट किंतु मेरा जो इनर लाइफ है इनर डेवलपमेंट है वो शायद एक जगह पर स्टक हो जाएगा कि अच्छा मैं यहां तक आया हूं अभी इससे आगे शायद ना जा पाऊं भी होता है तो यह साधक जीवन जो है वह कैसा कॉम्प्लिकेटेड है देखिए कि हमने ईश्वर की आराधना करने के लिए सब कुछ जुगाड़ किया है यहां पर एक साधु को कहीं पर भी आज भिक्षा मांगने की जरूरत नहीं है साधु को कर्म योग करना है तो सब फैसिलिटी यहां पर दी गई है साधु को जद ईश्वर की आराधना करनी है इतना सुंदर मंदिर बना दिया गया है साधु को पेट भर के दो मुट्ठी अन्न वगैरह मिल जाए जाए इतना सुंदर भंडार गृह है दो बार तीन बार घंटी लगती है वहां जाकर के आराम से अन्न ग्रहण करके हम अन्न की चिंता को त्याग करके ठाकुर के कार्य के ऊपर में साधना के ऊपर में अपना मन दे सकते हैं किंतु इतना सब कुछ किया फिर यही जैसे कि हमारे गले में बंधन की तरह हो गया कि शरणागति चली गई मैं ठाकुर को वैसे तो पुकारता हूं सुबह शाम किंतु भीतर से जो डिपेंडेंस आना चाहिए जहा कोरेन रघुवीर वो देरे ग्राम छोड़ कर के खुदीराम जब निकले होंगे उनके मन की परिस्थिति को सोच कर के देखिए कि जितना सेफ्टी था सिक्योरिटी था लव था एक परिवार अपने मित्रों का परिवार जनों का जो बंधन था जो एक एक बंड था वह सब छोड़ कर के एक संपूर्ण अनिश्चित जगत में एक संपूर्ण अनिश्चित जीवन में उन्होंने पैर रखा है तो उस समय की जो परिस्थिति जब एक इतनी बड़ी अनसर्टेन जब आती है तो मनुष्य के भीतर में या तो एक प्रचंड डर प्रकट होता है या तो फिर संपूर्ण शरणागति आती है कि हां जहा कोरेन रघुवीर जो रघुवीर करेंगे व सही तो यह हम यहां पे कैसा ये पैराडॉक्स है मुझे इस तरह से पैराडॉक्स इस तरह से विरोधाभास खोजने में अच्छा लगता है कि हमने सब कुछ किया ईश्वर को पुकारने के लिए यहां पर इतना परफेक्ट आश्रम बनाया है रामकृष्ण आश्रम राजकोट इज वन ऑफ द बेस्ट आश्रम इन द वर्ल्ड किंतु यहां पर रह कर के आज मुझे कभी-कभी ऐसा लगता है कि मेरा लाइफ इतना सिक्योर है इतना मतलब सर्टेन है और मैं आज से 10 दिन के बाद मैं क्या करने वाला हूं मैं मिनट टू मिनट बता दे सकता हूं क्योंकि एक ही रूटीन में सब कुछ चलता है तब कहीं जाकर के ये प्रश्न होता है कि हमारी ठाकुर के प्रति जो शरणागति है उसमें तो कहीं कमी नहीं आ गई ठाकुर को टेकन फॉर ग्रांटेड ऐसा होता है कि अरे ठाकुर तो है ही है अरे मां तो है ही है हम तो दो बार तो पुकारते ही है कौन सी बड़ी बात है तो उनकी तो कृपा उनके आशीर्वाद तो होने ही वाले हैं किंतु जब अनसर्टेनटीज वन हमारा उथल पाथल हो जाता है यहां पर डॉक्टर महाराज है हमारे इतना सुंदर काम करते हैं उनका डिस्पेंसरी 1000 पेशेंट का ओपीडी होता है एव्री डे माने इट इज वेरी गुड जो लोग डिस्पेंसरी वगैरह देखते हैं किंतु एक दिन सडन उन को डायग्नोज हुआ कि कैंसर हो गया है तो अभी देखिए कि जितना आखिरी 1015 साल से वो डिस्पेंसरी संभाल रहे हैं यहां राजकोट आश्रम में दूसरे सेंटर में एक एकदम उनका एक रूट उनका एक जिसको कहते हैं ना कर्म दक्ष हो गए हैं स्पेशलिटी हो गई है डिस्पेंसरी मैनेज करने की हॉस्पिटल मैनेज एडमिन करने की और जहां पर भी गए हैं उन्होंने परफेक्टली डिस्पेंसरी हॉस्पिटल चलाया है तो एकदम परफेक्ट उनका लाइफ था और सडन कैंसर डायग्नोज हुआ तो सोच करके देखिए कि उनके जीवन में क्या उथल पाथल किंतु फिर भी मैं उनके साथ में जितनी बार बात करता हूं ना चेहरे पर जो मुस्कान है मैंने बिफोर कैंसर और आफ्टर कैंसर उनके बिहेवियर में मैंने रत्ती बार कोई डिफरेंस नहीं देखा कभी उनको नाराज होते हुए कुछ मैंने क्या है ना कि इतना बड़ा पता है कि अभी जीवन अनिश्चित हो गया है डॉक्टर ने भी कहा है कि अभी जितने दिन हो ठाकुर की कृपा से उतने दिन है कुछ भी बता नहीं सकते तो कहां एक परफेक्टली सेफ सिक्योर एक फुलफिलिंग लाइफ था उनको खुद को सेटिस्फेक्शन था कि मैं जो ठाकुर की सेवा कर रहा हूं मैं अच्छे से कर रहा हूं मेरी जो एबिलिटी है टू द फुलेस्ट एक्सटेंट मैं अपनी क्षमता का संपूर्ण रूप से इस्तेमाल कर रहा हूं आई नेवर हेल्ड एनीथिंग बैक मैंने जानबूझ कर के अपने कार्य में कोई गड़बड़ की है या तो फिर मेरे से ऐसा कोई बड़ा गलती हुआ ऐसा कभी नहीं हुआ तो कितना एक फुलफिलिंग लाइफ था और अभी देखिए कि कितना बड़ा एक अनसर्टेनटीज मैं उनको इतने साल से जानता हूं बिफोर कैंसर आफ्टर कैंसर उनके जीवन में एक रति भार मैंने फर्क नहीं देखा कभी ऐसा नहीं लगा कि यह नए महाराज है छोटी-छोटी बातों में चिड़चिड़ा हैं नाराज हो जाते हैं या तो फिर डर जाते हैं ऐसा मैंने उनका बायोप्सी यानी कि ऑपरेशन हुआ था ऑपरेशन के अगले दिन ऑपरेशन के बाद वाले दिन ऑपरेशन के दिन ऐसा चेहरे से लगता नहीं था कि मैंने कितनी बड़ी प्रोसीजर उनके ऊपर में होने वाली है मैं तो मुझे नहीं लगता कि मैं अपनी ये जो इक्वनिल हैं मन की स्थिरता है उसको मैं मेंटेन कर पाऊंगा तो जब उनको देखता हूं तब लगता है कि हां कि सही सही ठाकुर के ऊपर में शरणागति आई है जहा कोरेन रघुवीर तो सही सही में रघुवीर जो करें वह सही यह बात उन्होंने आत्मसात की है बोलक के उनका जीवन इतना सुमधुर अब मुझे जद प्रेरणा चाहते चाहिए यदि मैं कभी कभी छोटी छोटी कोई बातों से डिप्रेसो जाऊंगा मैं उनके पास में जाऊंगा प्रेरणा पाने के लिए तो देखिए कि जितना सेफ्टी एंड सिक्योरिटी हम अपने जीवन में गृहस्थ जीवन में बनाते हैं और इवन हमारे अध्यात्मिक जीवन में बनाना बनाने का प्रयास करते हैं उतना ही देखें कि पैराडॉक्स हमारे सामने खड़ा होता है इतना ही यह अनसर्टेनटीज धीरे-धीरे करके प्राप्त करना थोड़ा सा कठिन हो जाएगा और जैसे ही एक बहुत बड़ा भय हमारे सामने आया तो एकदम भीतर का पूरा हिल जाता है पूरा फाउंडेशन हमारा पूरा जीवन का जो आधार है वही क्वेश्चन उसके ऊपर में हो जाता है तो यह कौन इस तरह से मुसीबत चाहेगा अपने जीवन में आ बेल मुझे मार ऐसा कौन कहेगा कौन कहेगा कि मेरे जीवन में इतनी बड़ी विपत दे दो जिस तरह से देरे ग्राम से खुदीराम को जाना पड़ा था ऐसी कोई बड़ी विपत दे दो कि जिससे मेरा ठाकुर के ऊपर में वो शरणागति आए ऐसा कौन मांगेगा कौन पागल मांगेगा इवन हम लोग जब सन्यास लेने के घर छोड़ कर के जब निकलते हैं तो एक थोड़ा सा कुछ दिनों का अंसर सनि होता है कभी-कभी कोई ठीक करके निकलता है कि मुझे किस आश्रम में जाकर के जॉइन करना है मैंने वैसे ही घर छोड़ दिया था जॉइन करूंगा कि नहीं करूंगा कोई कल्पना नहीं थी बहुत दिनों तक मैं इधर-उधर भटका था तब कहीं आकर के जवाइन किया था तो कोई भी केस हो कि आपने ठीक करके छोड़ा है घर कि मैं इस आश्रम में जॉइन करने वाला हूं या तो फिर आपने एक बार घर तो छोड़ ही दिया क्योंकि वैराग्य इतना हो गया था बाद में फिर जहा कोरे रघुवीर ज खाने नहीं जाए रघुवीर रघुवीर जहां प ले जाए तो ऐसा एक दूसरा एक्सट्रीम किंतु वो एक अनसर्टेनटीज अपने माताजी और पिताजी को छोड़ कर के एक एक जिस डायरेक्शन में सभी का जीवन जा रहा है एक प्रवाह के विरुद्ध में आप तैरने वाले हैं तो उस समय तो डर होता ही होता है किंतु जैसे ही आश्रम में आए एक रूटीन में बैठ गए बड़े महाराज के साथ बात किया उन्होंने आपको सफेद कपड़े ब्रह्मचारी के दे दिए डिपार्टमेंट दे दिया मंदिर में के काम करना साधु सेवा करना उन सीनियर साधुओं की सेवा करना भंडार ग्रुप में काम करना जैसा यह सब रूटीन फिक्स हो गया आपके मन से वो अनसर्टेनटीज वाला है तो ये कुछ दिनों का अनसर्टेनटीज सेफ एंड सिक्योर अपना लाइफ हो गया है तो इस तरह से देखिए कि कैसे पैराडॉक्स खड़ा होता है कि जिस कार्य को करने के लिए सांसारिक सेफ्टी ना कि यहां पर आश्रम में सेफ्टी जिस कार्य करने के लिए हमने घर छोड़ा है या तो हम साधना करते हैं ईश्वर के ऊपर शरणागति वही धीरे-धीरे करके जितना हम आगे बढ़ते हैं वह दूर होती जाती है तो साधक जीवन कैसा कठिन है मने हम लोगों को कैसे सब समय एक अलर्ट रहना पड़ता है कि मैं जो कर रहा हूं वह सही है कि नहीं है बहुत बार लोग भी हमारी प्रशंसा करेंगे देख कर के अरे वाह यह महाराज का लाइफ बड़ा अच्छा है एकदम टू द पॉइंट वो टाइम पे मंदिर में चले जाते हैं ट द पॉइंट वो एकदम टाइम टू टाइम वो खाने के लिए आ जाते हैं भंडार में आ जाते हैं एकदम परफेक्ट काम करते हैं एकदम टू मने घड़ी के कांटे की तरह उनका जीवन चलता है ऐसा कोई बोलेगा बड़ा हमको सुन कर के अच्छा लगेगा किंतु फिर ऐसा होगा कि हम इवन चाहे घंटा भर दो घंटा भर भी यदि स्मरण मनन करें एक जो रियल शरणागति ट्रू सरेंडर वो अपने हृदय के भीतर में से आने वाला था वो धीरे-धीरे करके उसके ऊपर में मिट्टी लग जाएगी जैसे हम किसी चीज को जमीन में गाड़ हैं जैसे बीज को गाड़े हैं तो कैसे उसके ऊपर में मिट्टी डाल देते हैं हां हालांकि बीज एक दिन वट वृक्ष में परिणत होगा किंतु एक सामयिक रूप से तो उसके ऊपर में मिट्टी लग गई तो ऐसा कहीं ना हो जाए कि मैं साधना करता हूं जप करता हूं ध्यान करता हूं स्वाध्याय करता हूं मंदिर में जाता हूं जो जो करने योग्य है सब करता हूं किंतु भीतर में से रियल सरेंडर सही सही शरणागति वो नहीं आ रही तो यदि ऐसा हो तो हमको ये अलर्ट हो जाना हैने फिर वो वोने काउंटर इंटूटिव जिसको कहते हैं आ बेल मुझे मार ऐसा आपको करना है उस समय और जद ठाकुर उस समय यदि बेल को भेज दे तो ठाकुर की कृपा है माने जितनी भी बाधा विपत्ति आए उसको ठाकुर के आशीर्वाद ईश्वर के आशीर्वाद रूप ग्रहण करना हमारे शास्त्र में इसीलिए लिखा गया है तभी हमारी ईश्वर के ऊपर में शरणागति आएगी अच्छा तो आज फिर से इस सप्ताह हम ज्ञान योग का पाठ करेंगे कॉस्मस माइक्रो कजम कॉस्मस मैक्रो कजम में हमने देखा कि पूरा विश्व ब्रह्मांड किस तरह से उसके साथ में डिविली जुड़ी हुई है माने ईश्वर ही विश्व ब्रह्मांड के प्रारंभ आदि और अंत है माने सृष्टि स्थिति प्रलय तीनों के कर्ता ईश्वर ही है इवोल्यूशन और इवोल्यूशन स्वामी जी दो मॉडर्न आइडियाज को लेते हैं एक तो है इवोल्यूशन जो कि डार्विन ने कहा कि ये एक के बाद एक सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट सम में से मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म अर्थात कि एक कोशी जीव में से बहु कोशी जीव उसमें से फिर मछली उसमें से फिर यह पृथ्वी पे जलचर और थलचर ऐसा हमको गुजराती में वो बताते थे कि मैंने ज पानी में नदी में या तो समुंदर में में रहने वाले जीव और फिर जमीन के ऊपर रहने वाले जीव इस तरह से इनका इवोल्यूशन हुआ जमीन पर आने के बाद में किस तरह से एक के बाद एक स्टेप लेकर के फिर ए ए में से होमो इरेक्टस और होमो इरेक्टस में से होमोसेपियंस ये पूरा हमारा इवोल्यूशन का चक्र चला तो यह क्रिश्चियन चर्च के ऊपर में इस बात ने कैसा आघात किया था दूसरा है कि कॉस्मोलॉजी ये कैथोलिक चर्च के बाइबल आप पढ़ेंगे तो बोलेंगे कि 4000 साल पहले ब्रह्मांड की रचना हुई है ईश्वर ने एक ही साथ में यह दोदो पेर बना कर के शेर और शेरनी और फिर पुरुष और स्त्री और ये पंखी और ये मादा और नर ये मेल फीमेल पेर ईश्वर ने एक ही साथ में जादुई छड़ी घुमा कर के पूरे जितने भी पशु पक्षी है वगैरह सबकी उन्होंने रचना कर दी जबकि यह कॉस्मोलॉजी या तो फिर आर्कियोलॉजी वगैरह क्या कहता है कि ये इतने करोड़ों कोटि कोटि सालों से यह ब्रह्मांड इवोल्व हो रहा है पृथ्वी भी नहीं थी वो गैस का क्लाउड था जो कि गोलगोल घूमते घूमते ग्रेविटी की वजह से क्लैप्स हुआ और उसमें से पृथ्वी बनी चांद बनी चांद बना सोलर सिस्टम बनी और आजकल तो फिर यह न्यूटन वगैरह ने यह जो रिफ्लेक्टिव टेलिस्कोप खोजे थे उसकी वजह से हम जब इतना सुदूर देखने का प्रारंभ किया तब पता चला कि पृथ्वी जो ब्रह्मांड का केंद्र है जैसे बाइबल में या तो फिर इस तरह से एरिस्टोटल अन थियोलॉजी है वो नहीं पृथ्वी तो एक छोटा सा एक ग्रह है इतने बड़े विश्व ब्रह्मांड में तो यह दोनों एस्ट्रोनॉमी और इवोल्यूशन पूरा क्रिश्चियन थियोलॉजी के ऊपर में आघात कर रहा था उस समय स्वामी जी ने कहा कि वेदांत जो है वह क्रिश्चियनिटी की तरह उसका सोच उसका विजन लिमिटेड नहीं है हां हम लोग भी यह इवोल्यूशन को स्वीकार कर लेंगे हम लोग तो एंटी साइंस नहीं है हम लोग तो जो नजर से दिखता है उसका आंख बंद करके विरोध करने वाले पागल लोगों में से नहीं है वी एक्सेप्ट कि ब्रह्मांड का भी इवोल्यूशन हुआ है बिग बैंग में से और यह मनुष्य का भी इवोल्यूशन हुआ है वो सिंगल सेल्यूलर मल्टी सेल्यूलर वगैरह वगैरह प्रजातियों में से तो हां यह सब स्वीकार करते हैं यदि आप लोग एक दूसरी थिरी स्वीकार करें इवोल्यूशन की ईश्वर बीज के रूप में इवोल्व हुए बीच के भीतर में इवॉल्व हुए ये कॉस्मिक बीज में से पूरा विश्व ब्रह्मांड फिर विस्फोट हो कर के धीरे-धीरे करके इवोल्व हुआ अर्थात कि हमारा जो ब्लूप्रिंट है हमारा डीएनए है उसमें ईश्वर निहित है डिवितरा भीतर में जागृत है ईश्वर ही बीज में बीज में इवॉल्व हुए और ये बीज में से ही इवोल्यूशन हुआ यदि आप लोग ये इवोल्यूशन वाला पार्ट स्वीकार कर लेते हैं तो हम इवोल्यूशन वाला इजली स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि जो नजर से दिखता है इसका विरोध हमको नहीं करना है ऐसे पागल हम नहीं है तो वह हो गया कॉस्मो मैक्रो कजम कि डिविली को पूरे यूनिवर्सल स्केल पर किस तरह से हम लोग देखेंगे और यह है कॉस्मो माइक्रो कजम स्वामी जी ने यह समझाने का प्रयास किया कि आंखें भले ही चाहे दिखती हो देखती हो कान भले ही चाहे सुनते हो यह त्वचा भले ही चाहे किसी चीज को स्पर्श करती हो किंतु जब तक इसके भीतर में मन नहीं है मन मन जद प्रेजेंस नहीं है प्रेजेंस ऑफ माइंड जिसको कहते हैं ना कोई हम लोग कहते हैं कि अरे यह तो ये उसका क्या है ना अटेंशन स्पान बड़ा ही कम है आजकल एक चला है या वो अटेंशन डिफिशिएंसी डिसऑर्डर ऐसा कहते हैं आजकल के बच्चों में ऐसा होता है कि चार पाच मिनट से ज्यादा किसी एक टास्क के ऊपर में वे लोग फोकस नहीं कर सकते यदि उनको कहा जाए कि स्टडी करो तो चार पाच मिनट स्टडी किया फिर इतना हल्लागुल्ला मचाना शुरू करेंगे कि आप परेशान हो जाएंगे कि कैसे उनको स्थिर करके बिठाए एक जगह पे तो ऐसा नहीं है कि अभी उनकी आंखें वो नोटबुक देखना बंद कर देती है या तो फिर हाथ जो है पेन पेंसिल पकड़ना बंद कर देते हैं कर्मेंद्रिय और ज्ञानेंद्रिय पांच जो है पांच पांच वो अपना कार्य करती ही है किंतु इसके पीछे मन जो है वो अभी प्रेजेंस नहीं है मन ने 10 जगह पर जाकर के घूमना शुरुआत कर दिया है तो स्वामी जी कहते हैं कि ये जो इंस्ट्रू ट ऑफ परसेप्शन और इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्शन ज्ञानेंद्रिय या तो फिर कर्मेंद्रिय दोनों अपने सिग्नल्स मन के पास भेजते हैं ब्रेन के पास भेजते हैं ब्रेन में से यह इंटेलेक्ट के पास जाएगा इंटेलेक्ट में से फिर आखिर में वह जो हृदय में सिंहासन के ऊपर में जो राजा विराजमान है द किंग अपॉन द थ्रोन इन अवर हार्ट स्वामी जी ने यह शब्द प्रयोग किया है अपने हृदय में सिंहासन के ऊपर में रघुवीर जो विराजमान है उनके पास जाएगा देन ही विल मेक सेंस ऑफ एवरीथिंग जद यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह रोबोट यह सब हमने डेवलप कर दिया रोबोट भी पर्सीव करता है रोबोट भी एक्शन ले सकता है रोबोट के भीतर में भी ये सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है माइक्रोप्रोसेसर से सब कुछ है किंतु जो करता है उसके पीछे कोई मोटिव पावर नहीं है मनुष्य उसको मोटिव पावर देता है मनुष्य उसको एम देता है एम एंड ऑब्जेक्टिव देता है मनुष्य उसको अर्थ प्रदान करता है यदि हम अर्थ प्रदान नहीं करेंगे तो रोबोट का जीवन अर्थहीन हो जाएगा कई बार हम लोग साइंस फिक्शन में पढ़ते हैं कि एक रोबोट के भीतर में इतना अकला गया कि उसने सोचा कि मैं सभी मनुष्य को मार कर के पृथ्वी पर मैं ही राज करूंगा क्योंकि हम लोग तो ज्यादा इफेक्टिव है हम लोग ज्यादा एफिशिएंट है मनुष्य को देखो क्या ये क्लाइमेट डिजास्टर लेके आ गए हैं क्या ओशन में ये समुंदर में पोल्यूशन फैला करके रखा है कहां आकाश में ऐसा हवा में इतना पोल्यूशन है कि हम लोग यह जो सितारे भी चांद तारे भी ठीक से नहीं देख पाते तो मनुष्य को हटा दो हम लोग रोबोट है बड़ा ही अच्छे से पृथ्वी को चलाएंगे चला पाएंगे किंतु उस जीवन का अर्थ क्या रहेगा आप पृथ्वी को इतना सुंदर स्वर्ग करके रखेंगे ओशन समुंदर एकदम विदाउट पोल्यूशन होंगे एकदम क्लीन होंगे नदी आकाश जमीन पशु पक्षी सब एकदम शांति से मजे से जिएंगे एक इडन एक स्वर्ग बना कर के रखेंगे किंतु ऐसी पृथ्वी का ऐसे जीवन का अर्थ ही नहीं रहेगा अर्थ हीन जीवन है वो कोटि कोटि साल तक इस तरह से परफेक्ट अर्थ वो अपनी सूरज की ओर घूमती जाएगी घूमती जाएगी उसका कोई अर्थ नहीं उसका कोई प्रयोजन नहीं उसका कोई एक एम एंड ऑब्जेक्टिव नहीं एंड और एम और ऑब्जेक्टिव अर्थ हम हम प्रदान कर करते हैं मनुष्य की आत्मन प्रदान करती है मनुष्य की आत्मन हमारे भीतर में जो ईश्वर है वह मेनिफेस्ट होना चाहते हैं यह मेनिफेस्टेशन है वह हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करते हैं तो यह हमारे भीतर में जो आत्मन है यह आत्मा मेनिफेस्ट अपने को जो करना चाहती है यह मनुष्य जीवन का सही सही अर्थ है तो वह डिवीने ऑन द कॉस्मिक स्केल और यह डिविटो स्केल या तो फिर कहेंगे डिविली ऑन द ह्यूमन स्केल किस तरह से डिविली को हम देखें यह स्वामी जी और फिर कहेंगे आखिर में कि जो वो कॉस्मिक स्केल प जो डिविली डिविली जो ह्यूमन स्केल पर हमको दिखती है तो बोथ आर वन अहम ब्रह्मास्मि इसके भीतर का दिव्यत्वाची स्वामी जी ने किंतु ये मॉडर्न साइंस अपने शास्त्र सबको जैसे कि उसका एसेंस सार पदार्थ हमको इन दो लेक्चर में दिया है तो कल से फिर इस लेक्चर को हम आगे पढ़ेंगे और फिर सेंटेंस बाय सेंटेंस इसकी व्याख्या करेंगे तो आज ही त ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु h