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तो कल हमने देखा की ठाकुर किस तरह से अद्वैत और समाधि में जान के बाद में क्या होता है और किस तरह से हम उसमें से नीचे आते हैं वो पुरी बात हमको ठाकुर जो है समझते हैं की ठाकुर कहते हैं की छठ पर तो बहुत डर तक लोग ठहर नहीं सकते फिर उतार आते हैं जिन्होंने नीचे उतार करके देखते हैं की वही जीव जगत हुआ है सा रे ग मां का ध की में अर्थात की चारंभ में बहुत डर तक नहीं र सकते इसलिए फिर आ हम नहीं मिटता तब मनुष्य देखा है की ब्रह्मा ही में जीव जगत सब कुछ हुआ है और इसी का नाम है विज्ञान अर्थात की जब हम साधना करते हैं तब मेरा जो हम होता है और जो एक सिद्ध होता है जो की एक विज्ञानी होता है उसका एक दूसरी तरह का हम होता है मैं जब कहता हूं की यह मैं हूं अर्थात की ये मेरी सबसे मेरी फैलियर्स मेरी कलर मेरा कलर मेरी लैंग्वेज वगैरा वो जो छोटा आई जिसको कहते हैं स्मॉल आई इसको मैं अपना हम मानता हूं किंतु जो एक सिद्ध है जिसने समाधि प्राप्त कर ली है या तो फिर जिसने ईश्वर का दर्शन प्राप्त किया है उसका जो मैं है उसका जो हम है वह बहुत ही विराट है वो जो है पूरे विश्व को अपने में सम लेट है जब ठाकुर यह कहते हैं गीता में भी कहा गया है ठाकुर भी कहते हैं की यह जो पूरा जो विश्व है वही ईश्वर का लोग कहेंगे की विश्व जो है क्या वह मेरे से अलग है मेरे भीतर में जो परमात्मा की शक्ति है या तो फिर मेरे भीतर में जो आत्मा की शक्ति है वही शक्ति से तो ये जगत बना है वही शक्ति से अर्थात देख लीजिए की यहां पे ठाकुर ईट और चुने का उदाहरण देते हैं जब हम नेत्री नेत्री करके जगत त्याग करते हैं और फिर जब हमको ईश्वर प्रताप होती है तब हम देखते हैं की जी ईट और जी चुने का इस जगत आ मकान बना है इस ईट और चुने की तो ये सीडी बनी है और इस से वही जो गठन करने वाला जो बेसिक पदार्थ है इस से तो पूरा जगत बना है आज हम इसी उदाहरण को इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का नाम देकर के समझा सकता है समझा सकते हैं की यह जो शरीर है फिर यह जो जितने भी शरीर है दुनिया की पापुलेशन आज समथिंग अराउंड 700 करोड़ होगी तो यह जो 700 करोड़ लोग हैं इन लोगों का शरीर भी वही इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन से गठन हुआ है इन लोगों के भीतर में भी तो वही आत्मा है जो की मेरे भीतर में है तो ये जो मेरा में है वो सबको व्याप्त कर लेट है सबको जो है जो सबको अपने में वो सम लेट है आईटी एक्सेप्ट एवरीवन इस अवर ऑन तो ये जो पूरे जगत को हमको एक्सेप्ट कर लेना ये जो है अपने हृदय को इतना विशाल बनाना की वो सागर की तरह हो जाए इसमें जितने भी नौकर हैं जितने भी मछलियां हैं वो सब इस हमारे हृदय रूपी सागर में टायर पे इस तरह से अपने को उधर बनाना या तो विराट बनाना यही है साधना का लक्ष्य यानी की र भी र है ज्ञान भक्ति की र भी रहा है फिर भक्ति की भी र एक रहा है ज्ञान योग भी सत्य है और भक्ति योग भी सत्य है सभी रास्ते से ईश्वर के समीप जय जा सकता है ईश्वर जब तक जीवन में मैं यानी की हम दिशा रखना है तब तक वह शक्तिपात ही सरल है मुझे लगता है की यार टाइपिंग में कुछ गड़बड़ है जब तक हम लोग अपने में हम दिशा रखते हैं तब तक हमारे लिए भक्तिओन की सरल है कल हमने इस बात को देखा था की भक्ति योग आ जब ज्ञान योग पे चलने के लिए हमारी क्या आवश्यकता है वो है एक बहुत ही स्ट्रांग बिल पावर इतना स्ट्रांग बिल पावर की किसी भी तरह की माया जो है किसी भी तरह का ये जो अप्रलोभन जो है जब हमारे नजर के सामने ए जाए तब हम उसके सामने इस तरह से दत के उसके सामने मुकाबला करेंगे उसका उसको इस तरह से उसका प्रत्यक्ष करेंगे इस तरह से उसके साथ में फाइट करेंगे की यह जो महामाया जो है वो अपना प्रलोभन लेकर के कभी भी अपने सामने ना ए पे ये इतना जो स्ट्रांग बिल पावर है वो है ज्ञान योग पर चलने के लिए सबसे इंपॉर्टेंट आपकी साधना या तो फिर आपकी एक आपका एक गन किंतु बहुत सारे लोग होते हैं जिन लोगों में इतना स्ट्रांग बिल पावर नहीं होता है यदि मां लीजिए की मैंने अभी गुरु महाराज से हम मैंने दीक्षा प्राप्त की आश्रम में आकर के और फिर मैंने ठीक किया महाराष्ट्र सब दीक्षा के समय बोलते हैं आपके गुरु जो है की आपको इतना जब करना है मतलब इतना अभी ये सब तो क्या है की कंपलसरी नहीं है आपकी इच्छा के ऊपर है आपने तो इच्छा करके दीक्षा ली है तो आपने इच्छा करके आपको 1000-8 जब पे शायद मां लीजिए इतना आप करने का अपने को एक प्रॉमिस करते हैं एक संकल्प लेते हैं और फिर आप यह भी ठीक करते हैं की मैं रोज जो है 6:00 बजे उठाता हूं और 6:00 बजे उठकर के जो है मैं 1000 जाप करता हूं 1 8 किंतु क्या हुआ की पहले दिन तो है चलो अभी एक 6:00 बजे उठ गए दूसरे दिन भी उठ गए तीसरी दिन फिर हमको ऐसा लगता है की अरे नहीं रात को बहुत डेरी से सोए हैं अभी तो कल तो ऑफिस में भी बहुत कम था या तो फिर कल तो बहुत गेस्ट ए गए थे बहुत कम किया था आज मैं तक करता हूं चलो आज थोड़ा सा और ज्यादा सो लेते हैं 10 मिनट और ज्यादा सो लेते हैं तो तीसरी दिन ऐसा हुआ की 6:10 पर हमारी नींद खली और हम लोग बिस्तर में से खड़े हुए फिर उसके बाद में जो है और तीन-चार दिन छह 10 चला फिर ऐसा लगा की अरे नहीं अब 6:00 बजे उठकर के क्या जरूर है चलो और थोड़ा सा है की 6:30 को उठाना शुरू कर दें और जो है जब जो है वो 1008 की जगह 108 कर लेंगे क्या फर्क पड़ता है धीरे-धीरे तो करना है ऐसा करके देखेंगे की हमने जो संकल्प लिया है वो संकल्प हमारा पूर्ण करने की बजे हमारा ये जो मां जो है ये जो मां जो है वो हमेशा कंफर्ट चाहता है मां जो है वो हमेशा सुख जाता है जैसे उपनिषद में कहा गया है श्रेया और श्रेया ये दोनों ऑप्शन हमारे मां के सामने सतत आते रहते हैं श्रेया क्या है जो की मेरे मुझे जो करना उत्कृष्ट है मेरे आध्यात्मिक जीवन के लिए वो है थे और परर क्या करने से मुझे सुख मिलता है मेरे शरीर को सुख मिलता है मेरी इंद्रियों को सुख मिलता है वह जो करना है वो हो गया प्रतिक्षण हमारे सामने आते हैं सुबह को कितने बजे उठाना है उसे समय भी श्री और प्राय हमारी नजर के सामने आएंगे मैंने यदि प्रयास सिलेक्ट कर लिया की चलो आज और थोड़ा सा सो लेते हैं तो मेरा मां जो है वो इतना चतुर है की दुनिया भर के बहाने बनाना वो शुरू कर देगा अच्छा सुबह को उठने के लिए तो पहले तो रात को जल्दी से सोना पड़ता है आजकल हमारी लाइफ स्टाइल ऐसी हो गई है की 12 12 बजे तक हम लोग जागते ही रहते हैं डेरी से घर घर आते हैं फिर खाने में डेरी हो जाता है आप 9:00 तो खाएंगे अभी 9:00 बजे खाने के बाद में जो है 10:11 बजे नींद कैसे आएगा तो सोते-सोते तो 12 तो बैक गए अभी 12:00 बजे सोए हैं तो अभी जल्दी से फिर से उठाएंगे तो फिर अपनी पुरी लाइफ स्टाइल को धीरे-धीरे चेंज करना यह सब हम यह सब डिसीजन जब भी लेते हैं तब भी देखेंगे की प्रतीक्षा स्टूडेंट है स्टूडेंट के लिए तो खास की उसको स्टडी करना है ना की चलो उसको अपने मित्रों के साथ में घूमने के लिए जाना है स्टडी करना है अभी मैथमेटिक्स का होमवर्क दिया होगा मैथमेटिक्स का असाइनमेंट है उसको मैं कंप्लीट करूं मैं थोड़ा सा टीवी देख लूं चलो बहुत अच्छा न्यूज़ ए रहा है या तो सीरियल ए रही है या तो ऐसा करके करके देखेंगे की जो लड़के जो व्यक्ति अपने जीवन में ऐसा तो नहीं हो सकता बहुत रेयरली ऐसा होता है की आपने अपने जीवन के जितने भी डिसीजन लिए वो श्रेया करते ऐसा तो बहुत रेयर होता है ज्यादातर लोगों का होता है श्री और प्रेरक कांबिनेशन चला है किंतु यदि अपने मेजॉरिटी ऑफ डिसीजंस जो श्रेया कर लिए हैं अर्थात की आपकी यह जो भविष्य की उन्नति सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति नहीं सामाजिक मानसिक बौद्धिक उन्नति के लिए उसके उसको उन्नत करने के लिए आपने जो अच्छे डिसीजन जो दिए हैं गुड हैबिट्स जिसको हम कहेंगे जो भी अपने गुड हैबिट्स फॉर्म की है यदि वो मेजॉरिटी में है और ये जो बेड हैबिट्स जितनी भी है हमारी वो यदि माइनॉरिटी में है तो है मोर और ली हम लोग जो है की एक आशा रख सकते हैं की इस जन्म में नहीं तो अगले कुछ जन्म में हमको आध्यात्मिक सिद्धि अवश्य प्राप्त होगी किंतु हमारे ज्यादातर डिसीजंस आर पर बेड हैबिट्स जितनी भी बेड हैबिट्स हैं हमने बना करके राखी हुई है कोई-कोई लोग होते बहुत ज्यादा स्मोकिंग करते हैं कोई कोई लोग होता है की उनको फिर घूमने फर्न का बहुत शौक होता है कोई कोई लोग होते हैं की इतनी ज्यादा बातें करते रहते हैं की अपने मां को किसी एक कार्य के ऊपर में एकाग्र नहीं कर सकते और आजकल तो खास करके एक कुछ नया एक जो देखने को मिलता है यहां पर तो हमारी हॉस्टल है तो स्टूडेंट रहते हैं तो हमको देखकर हम लोग देखते हैं इन लोगों को देखकर के की जो अटेंशन डिफिशिएंट ही डिसऑर्डर ए दी दी इसको साइकोलॉजी में कहते हैं उसका अर्थ क्या है की पांच 10 मिनट से ज्यादा कोई भी एक कार्य के ऊपर में मां को एकाग्र करके उसमें सक्सेस पन ये आजकल के लड़कों के लिए सभी तो ऐसा नहीं होते हैं ऑफ कोर्स किंतु बहुत सारे लड़कों के लिए ये असंभव सा हो गया है अब थोड़ा सा कोई भी कम हो फिर वो स्टडी ही छोड़ दीजिए स्टडी तो बहुत दूर की बात है और भी कोई कम यदि आपने उनको दिया हो तो 5-10 मिनट की अब फिर मां जो है वो भटकते लगता है वो इधर-उधर देखने लगता है की कैसे मैं यहां से उठ करके चला जाऊं या तो फिर कैसे और कोई कम करो किसी भी एक कम में उसका जी नहीं लगता किसी भी एक कम में उसका मां नहीं लगता तो इसको जो कहते हैं अटेंशन डिफिशिएंसी डिसऑर्डर ये तब होता है जब आपने ज्यादातर डिसीजंस जो है गलत गलत लेते जा रहे हैं जब भी मेरे सामने यह ऑप्शन आएगा की चलो मुझे अपने मन को डिसिप्लिन करना है की मुझे जो अब मैं अपने मां को यह जो सुखपूर्वक ये जो भोग जो है वो करते देना| जिसे खाने पीने में आजकल देखेंगे की ओबेसिटी जो है ओवरवेट आजकल के लड़कों को देखेंगे की ओबेसिटी उन लोगों में दिखाई देता है उन लोगों में ओवरराइट दिखाई देता है बच्चा है साथ में आठवीं कक्षा में पढ़ रहा है फिर भी ऐसा है क्यों क्योंकि जो खाना जो है वो हम लोग जो है वो शुगर जो है फिर वो तेल है फिर जो साल्ट है इस तरह का वो जो खाना जो हम लोग आते हैं आजकल उनको जल्दी रोटी दाल वगैरा दिया जाएगा भारत वगैरा तो लड़के लोग कहते हैं की नहीं हमको ये सब नहीं खाना हमको तो पिज़्ज़ा खाना है या तो फिर ये सब चीज जो मिलती है बाजार में वो सब फैंसी चीज खानी है अपना जो रूटीन खाना नहीं खाना तो ये क्या हो गया की अपने मां को डिसिप्लिन नहीं करने का अपने मां को यदि आप डिसिप्लिन कर पाएंगे तो अब जो है की मां भी अभी आजकल देखेंगे की पहले के जमाने में मां-बाप जो थी बच्चों को डिसिप्लिन करते थे अच्छा तुम रोटी दाल क्यों नहीं खाओगे यही तो असली खाना है ये जो बाहर की ये जो समोसा ये वो सब फालतू का ये जो कचरा तुम कैसे खाओगे ये जो फास्ट फूड जिसको कहते हैं तो फास्ट फूड खाना वो हेल्थ के लिए बहुत ही खराब है पहले ऐसे जो मां-बाप है वो बच्चों को समझते थे और डिसिप्लिन भी करते थे आजकल क्या हो गया है की एक इस तरह से एक साइकोलॉजी कल एक फ्रेंड चला है की अपने लड़कों को डिसिप्लिन नहीं करना है अपने लड़कों को जो है उनको आपको पनिशमेंट नहीं देना है पनिशमेंट देने से इन लोगों का वह जो है डेवलपमेंट और रुक जाएगा यह बिल्कुल गलत बात है ऑफ कोर्स पनिशमेंट दो तरह से दिया जाता है एक तो है की बिना सोच समझे अब जल्दी पनिश करेंगे अपने बच्चों को मारेंगे पीटेंगे तो ऑफ कोर्स लोगों का मन जो है वह उनके मन में आपके प्रति एक आश्रद्धा उत्पन्न होगी वो तो बात सही है किंतु यदि लड़का देखा है की आपके हृदय में उसके प्रति एक प्रेम है और प्रेम की वजह से ही आप उसको मारते हैं तब कहानी जाकर के देखेंगे की बच्चा जो है वो भी समझना है की इस तरह का डिसिप्लिन जो है उसके खुद के लाभ के लिए है उसके मां में आपके प्रति अशर्धक कभी भी प्रगति नहीं होगी मैं लिंड में था तो वहां पर हमारे वॉलिंटियर थे उनका नाम था बिखूभाई तो भिखूभाई क्या है वो रिटायर टीचर थे तो रिटायर टीचर थे और वहां उनकी पास के ही बहुत अच्छी स्कूल में वो उन्होंने पूरा जीवन जो है वहां पर ऐसे शिक्षक रहे थे अभी वो रिटायर हो गए हैं वह उनका घर जो है वह आश्रम के पास में ही है तो प्रतिदिन वह अपने आश्रम में आते थे अभी वहां पर हमारा एक वहां पर उसे एरिया का एक ईमेल है तो मा और फिर वह जो मोदी की गवर्नमेंट में नरेंद्र मोदी उसे समय कम था मैं जब लिंड में था उसे समय तो मोदी की कैबिनेट में वो कैबिनेट मिनिस्टर भी था अभी वो कैबिनेट मिनिस्टर है तो जब भी वो विधान अपने वो उसे एरिया में आएगा वो क्योंकि उसका घर तो हमारे आश्रम के पास में ही है तो जब भी वो घर आएगा ज्यादातर तो वो गांधीनगर हमारा जो कैपिटल है गुजरात का वहां पे रहना पड़ता है किंतु जब भी घर आएगा तो आश्रम में अवश्य आएगा तो जब भी आश्रम में आएगा तो देखेंगे की भिखूभाई है हमारे साथ में खड़े हैं तो ये जो वॉलिंटियर तो वो बोलना है वो हमको कई बार बोले है की ये भी खूब भाई ने हमको कितनी बार मारा है अभी आज वो स्टेटमेंट है वो भी खूब भाई बेचारे वो रिटायर टीचर है वो उसके अभी वो उसे समय का वो मतलब रिटायर टीचर की वो दूसरे कोई त्रिकोण से पैसा कमाने का उनको पता भी नहीं है जो गवर्नमेंट से जो मिला है वही मिला है तो वो अभी वो सब समय वो स्टेट मिनिस्टर ऐसा बोलना है की ये जो हमारे टीचर है मुझे सब समय मारते थे किंतु देखिए की उन्होंने मुझे जो हमारा तो उसे जो तो फिर उन्होंने जी तरह से मुझे पनिश किया उसे तरह से देखिए की मैं अपने आप को डिसिप्लिन कर पाया हूं और आज इतनी बार बार जो है मैं चुनाव जीत का रहा हूं और फिर जो है मैं स्टेट मिनिस्टर भी बन गया हूं हालांकि हम सबको पता है की चुनाव जितने के लिए डिसिप्लिन के अलावा भी और बहुत कुछ चाहिए किंतु एटलिस्ट सबके सामने ये चीज एक नॉलेज तो करता है की हां पनिशमेंट होने से डिसिप्लिन जो है वो उसके जीवन में आया है तो ये जो पनिशमेंट बाहर से हो एन की हम अपने को पनिश करें यह जो एक नेचुरल ग्रोथ का एक थ्योरी जो आजकल चला है की किसी भी लड़के को आपको उनका जो यह जो है किसी भी तरह से रेजिमेंट यह लोग बोलते हैं आजकल की इनको रेजिमेंट में नहीं डालना है इनको डर नहीं दिखाना है इनको भाई नहीं दिखाना है यह सब बिल्कुल गलत बात है हां बच्चे को आप डर और भाई क्यों दिखाएंगे यदि आपके मां में उसके प्रति प्रेम है तो बच्चा अपने से समझ जाएगा की और उसके साथ में जो पनिशमेंट उसको मिल रही है वह उसके खुद के भले के लिए है तो जी तरह से हम दूसरों को जैसे मां अपने बच्चे को डिसिप्लिन करती है वैसे ही हमारे में वो कैपेसिटी हनी चाहिए हमारे खुद के मां को डिसिप्लिन करने की जिसने अपने जीवन में डिसिप्लिन को अपनाया है जिसने ज्यादातर मजूरीति और फिर डिसीजन जिसने मेजॉरिटी ऑफ दिस यह जो संकल्प लिए हैं उसमें वो पॉजिटिव है तो वो क्या है की बाद में देखेंगे की वो बहुत अच्छा कार्य अपने जीवन में कर पता है वो सामाजिक क्षेत्र में भी सक्सेसफुल राहत है वह आर्थिक क्षेत्र में भी सक्सेसफुल राहत है और यदि वो चाहे आध्यात्मिक क्षेत्र में वो जो आरंभ करें अपनी यात्रा तो उसमें भी वो सक्सेसफुल र सकता है तो यह हो गई एक बात की ज्ञान मार्ग में आगे बढ़ाने के लिए आपको जो है डिसिप्लिन बहुत ही आवश्यक होता है तब उसको पनिश करने की भी जरूर है बहुत सारे लोग इस तरह से मेरे मां में कोई कुविचार आया तो मैं एक दिन खाना नहीं खाऊंगा उपवास करूंगा इस तरह से यह लोग इस तरह से संकल्प लेते हैं जिससे की मां को पता चले की उसके पास में यह लाइसेंस नहीं है जब जो चाहे वो सोचता रहे जब जो चाहे वो करता रहेगा इस तरह का लाइसेंस उसके पास में नहीं है इस तरह से लोग अपने से अपने को डिसिप्लिन करते हैं तो वो हो गया ज्ञान योग का रास्ता किंतु बहुत सारे लोग होते हैं ऐसे की जिनका की अपने मां के ऊपर में संयम नहीं है जब भी प्रलोभन की कोई चीज उसके सामने ए जाति है तो वो उसको ग्रहण कर लेते हैं बाद में पछतावा होता है किंतु अब क्या करें जब चिड़िया चुग गई तो उसे समय इन लोगों के लिए क्या है तो इन लोगों के लिए रास्ता है भक्ति योग अपना जो अहंकार है प्रभु के श्री चरणों में संपूर्ण रूप से आप विसर्जित कर दीजिए जैसे ही आपका अहंकार प्रभु अपने ठाकुर को दे दिया की ठाकुर ठाकुर की मैं गाड़ी हूं और तुम हो इंजीनियर मैं घर हूं और तुम जो हो घर की मालकिन तो इस तरह से आप अपने अहंकार को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देंगे जैसे की गिरीश घोष का है गिरीश होश में से वो नाटक कंपनी का वह मलिक था वो जितने भी दुराचार जितने भी वो जो पाखंड वगैरा जो करना था अनाचार वो सब उसने कर दिया था किंतु जब आखिर में ठाकुर के पास आया तो ठाकुर एक बार बोलते हैं की एक जी पार्टी में लहसुन रखा है गार्लिक रसूल जिसको बांग्ला में कहते हैं जी पार्टी में यह जो गार्लिक रखा है लहसुन उसे बाटी को अब कितना भी चाहे ढोले वह लहसुन की बात जो है जाति नहीं तो यह गिरीश बेचारा बड़ा ही चिंता में पद गया वो बार-बार सोचता है की यदि लहसुन की बात मिल जाएगी अर्थात मैंने जो कुकर्म किया हैं मेरा जो अपनी इंद्रियों के ऊपर में थोड़ा सा भी संयम नहीं तो इस तरह से तो मैं किस तरह से आध्यात्मिक जीवन में जो कोई भी संकल्प में जो सिद्धि प्राप्त कर पाऊंगा किस तरह से मुझे ईश्वर दर्शन हो गए तो ऐसा बैठकर क्यों बड़ी चिंता में बैठा है तभी थोड़ी डर के बाद में बाकी सब भक्ति चले गए ठाकुर अकेले हैं तो गिरीश ठाकुर को पूछते हैं की मस्य यह रोशनी गुरो की एक ही बड़े जावे ना अर्थात की महाशय ठाकुर को वो बोलना है की क्या बाटी में से लहसुन की गंद मिल कभी भी नहीं जाएगी तो ठाकुर ने क्या कहा अगने को डेल जावे अर्थात की आज में जब बाटी फेक देंगे आज में जब गम होगी बाटी तब वो जो है वो गंदे जाएगी उसकी अर्थात की आपको बहुत जो है की डिसिप्लिन तो करना होगा किंतु साथ-साथ में ही अपना जो अहंकार है उसको बिल्कुल ही छोड़ कर देना होगा ठाकुर ने गिरीश को कहा की मुझे वीडियो है पावर ऑफ अटॉर्नी दे दो मुझे पावर ऑफ अटॉर्नी दे दो तुम्हारा जो यह कल और परकाल जो है मैं देख लूंगा तो गिरीश खोसने पहले तो सोचा की अरे बस इसी से हो गया मुझे और कुछ नहीं करना है ठाकुर को मेरे जीवन के जितने भी डिसीजन मेकिंग करने हैं वो ठाकुर को दे दे इतना तो वो तो कभी मेरा बड़ा करेंगे नहीं अच्छा ही करेंगे ऐसा करके उन्होंने पावर ऑफ अटॉर्नी दे दिया किंतु बाद में वही गिरीश होश कहते हैं की ठाकुर को इस तरह से मैंने पावर ऑफ थानी दिया आपको लगता है ये बात बहुत सहज है किंतु यह सच में बहुत ही मुश्किल है गिरीश मुश्किल परिवार में किसी का मृत्यु हो जाता है शायद उसके लड़के का ही किंतु गिरीश कहता है की मेरी आंखों में से एक बूंद भी आंसू नहीं आया क्यों क्योंकि रन का भी रन तक का मुझे अधिकार नहीं जो जितने भी अधिकार थे सब तो मैंने ठाकुर को दे दिया है तो या तो आप अपने मां को डिसिप्लिन करें या तो फिर ईश्वर को यह पावर ऑफ टर्निंग दे दे अपना जो अहंकार है वह ईश्वर ठाकुर को दे दे की हां मैं कभी भी इस तरह का अहंकार नहीं करूंगा जीवन में जो भी सक्सेस आएगी हमेशा में यही सोचूंगा की आपके दया से आपकी कृपा से आई है मेरे जीवन में जो भी फैलियर्स होगी वो मैं यही कहूंगा की आपकी इच्छा थी इसलिए मैं फेल हुआ फेल हो गया तो निरसा नहीं होना है सक्सेस हो गया तो फिर वो घमंड नहीं कर देना है इस तरह से अपने जीवन में बिल्कुल निर्लिप्त होकर के रहना है तो ये हो गया भक्ति योग का रास्ता ये दोनों जो रास्ते हैं वो दोनों रास्ते श्री एवं प्रेरणा की तरह क्या प्रिया है क्या श्रेया है वह तो हम लोग सब समय ठीक नहीं कभी-कभी हमारे मां में कन्फ्यूजन हो जाएगा की हां मुझे क्या करना चाहिए सही बात है क्योंकि जो गीता में कहा है की रहना करमानों गति ही ये जो कर्म की जो गति है बहुत ही सूक्ष्म है जैसे वो जो भीष्म पितामह वो एक बार कहते हैं महाभारत में यह जो क्षत्रिय धर्म है कितना करूर है हमको पता है की पांडव जो है वो धर्म के पक्ष में है और कौरव जो है वो धर्म के पक्ष में है किंतु क्षत्रिय हो करके मेरा धर्म क्या है मेरा धर्म है की मेरा जो राजा जो है उसकी आजा का पालनपुर करना अभी वो भीष्म पितामह के राजा तो थे वो जो की धृतराष्ट्र की आजा पालनपुर करने के लिए उनको धर्म का आचरण करना पड़ा तो धर्म का उत्पन्न करते-करते वह धर्म में जाके फैंस गए तो इस तरह से वह जो माया हमको कभी कभी इस तरह से घूमती है और फिर बच्चों के साथ में भी ऐसा होता है ना की आप अपने बच्चे को कितना डटेंगे मतलब कहां किस किस हद तक आप अपने बच्चे को डटेंगे वो नहीं सुन रहा है आपकी बात तो फिर आप कहां तक जाएंगे और वो भी बात सही है की कल जो अपने लिए श्रेया था वो आज हमारे लिए शायद प्रिया हो जाए जैसे की अभी जैसे पूजा करने का एक यह है की पूजा करना बहुत ही अच्छा है वो आश्चर्य है हमारे लिए किंतु एक समय ऐसा ए जाएगा की एकदम आगे बढ़ते बढ़ते अपने जीवन में की जबकि ये पूजा भी जो है आपके लिए बंधन हो जाएगा ठाकुर ने देखा है ना पूजा का त्याग किया ये जो उपवित है उसका भी त्याग कर दिया ब्राह्मण के जितने भी संस्कार है एक के बाद एक सत्य कर दिए अपने उनके बाल लंबे लंबे हो गए थे तो रसिक महत्व जो था उसके जो उसका जो टॉयलेट था अपने बालों से उसका टॉयलेट साफ किया सूची और सूची का ज्ञान जो है ब्राह्मण में हमेशा राहत है और शुक हाथ से या तो आशुच कपड़े पहन करके कभी भी ईश्वर की सेवा देवी की सेवा नहीं हो शक्ति काली पूजा नहीं हो शक्ति तो सूची अछूछी का ब्राह्मण को बहुत राहत है यह जो नलिनी दीदी को भी सूची वही थी वो मां की जीवनी है उसमें पढ़ेंगे सब चीजों में वो ऐसा करके कोई भी उसको यदि छूटा था तो एकदम वह चिल्लाने लगती थी अरे उसने मुझे ऊ लिया उसने मुझे ऊ लिया फिर वो नदी में जाकर के वो जाकर स्नान करके आएगी कपड़े बादल के आएगी ये जो मां की ये जो सब लड़के थे अमजद वगैरा अमजद तो गुंडा था ऊपर से मुस्लिम था तो वो खाने के लिए बैठा है और नलिनी दीदी क्या करती थी वो उसके तो उसके पास में नहीं जा सकते मुस्लिम है ऊपर से गुंडा है ऊपर से वो तो नीचे जाति का है रियल तो ब्राह्मण है तो दूर-दूर से रोटियां फेंकती है उसको तो ये देख करके मां बड़ी नाराज हो गई अरे फिर क्या करती है क्या इस तरह से परोसा जाता है कभी तुमको नहीं देना है मुझे दे दो करके मैन बड़े प्रेम से अमजद को खिलाया तो ब्राह्मण के ये जो संस्कार होते हैं वो भी कभी-कभी अपने आध्यात्मिक मार्ग में बड़ा बन जाता है अभी संस्कार तो होने चाहिए वरना तो जो है की आप आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत भी नहीं होगी किंतु यदि संस्कार ही बाद में जाकर के अपना एंट्री बन जाए तो फिर संस्था संस्कार का भी दिया करना होगा वो जो हमने स्वर्गारोहण के बड़े में एक बार बात की थी ये पांच पांडव और साथ में द्रोपदी कितना धनिष्ठा इनका जो है संबंध है किंतु फिर भी जब स्वर्ग और उनके बाद आई तो एक के बाद एक नकुल सहदेव पहले तो द्रौपदी उसके बाद में नकुल सहदेव भीम और अर्जुन सभी पीछे में छठ गए और धर्मराज युधिष्ठिर की है जो की वह सर्वोच्च शिखर पर जाकर के खड़े हुए तो अभी महाभारत का पूरा जो कहानी है उसमें हम सोच भी नहीं सकते की युधिष्ठिर जो है द्रो का या तो फिर अर्जुन का या तो भीम का त्याग करें वह तो सब लोग साथ में ही रहे हैं साथ में ही बड़े हुए हैं साथ में ही युद्ध किया है साथ में विजय प्राप्त की है साथ में ही सुशासन किया है साथ में ही भारतवर्ष में एक बहुत ही अच्छी एक प्रणाली राज्य प्रणाली उन्होंने एक की है मैन मेंटेन की है किंतु स्वर्ग और उनके समय में सभी का साथ एक के बाद एक त्याग कर देना होता है तो श्रेया क्या है श्रेया क्या है इसका निर्णय हम कैसे करें वो तो खैर अपनी खुद की बुद्धि पर है हम जैसे जैसे पॉजिटिव निर्णय लेते जाएंगे वैसे-वैसे ही हमारे ही मां में से वो जो अपना मां ही आखिर में गुरु हो जाता है अपना मां में से ही धीरे-धीरे करके आपको सब पता चल जाता है की क्या डिसीजन कब लेना है और कहां पे लेना है कभी-कभी हम लोग हमारा मां हमको इस तरह का शुद्ध बुद्धि से बाकी अशुद्ध मां जो होता है वो तो आपको हमेशा भूख की और खींचेगा किंतु जो शुद्ध मां जो है वो हमेशा जो है आपको योग्य की और खींचना ले जाएगा शुद्ध मां जो है हमेशा आपको सात जो सात मार्ग है सन्मार्ग है उसके ऊपर में आपको ले जाएगा शुद्ध मां जो है वो हमेशा श्रेया लिख करेगा वो प्रेस सिलेक्ट नहीं करेगा तो फिर आपको आ अपना पूरा जीवन यदि अपने अपने को डिसिप्लिन में रखा या तो फिर जैसे यहां पे है की अहंकार को ठाकुर को सोप दिया तो फिर जो मनुष्य शुद्ध होगा वही शुद्ध मां आपको बताता जाएगा एक के बाद एक मेरे लिए प्रेयर क्या है और मेरे लिए श्रेया क्या है और ऑफ कोर्स पर इस तरह का सत्संग वगैरा है पाठ्य जो हमारे धर्म ग्रंथ वगैरा का पार्ट है ये सब भी तो हमको सफाई करते हैं अभी ठाकुर आगे कहते हैं वैज्ञानिक देखा है की ब्रह्मा अटल निष्क्रिय सुमेरुवत है यह संसार उसके सत्व यह संसार उसके सत्व राज और तम इन तीनों गुना से बना है पर वह निर्लिप्त है देखिए ब्रह्म जो है अटल निष्कर्ष सुमेरूवा देखिए शब्द कितना सुंदर उसे किया है सुमेरुवत सुमेरुवत है किंतु यह जो संसार है वह इस ब्रह्मा के सत्व राजा और अच्छा ब्राह्मण का तो गन नहीं होता गन तो प्रकृति के होते हैं इन तीनों गुना का बना है पर वह ही मेरे लिए जैसे की हम और हमारी परछाई तो हम जो है हम सही है परछाई जो है वह सिर्फ एक ब्रह्म मंत्र है एक आभास मंत्र है तो वैसे ही एक सत्य है वही एक फाइनल रियलिटी है अल्टीमेट रियलिटी है किंतु यह त्रिगुणात्मक प्रकृति सत्व रजतम यह जो तीन शब्द ठाकुर ने इस्तेमाल किया ये तीन गन है और तीन गुना से बनी हुई ये जो प्रकृति है वो प्रकृति इस ब्राह्मण के आसपास में खेलती है वो जैसे बच्चा जो है अपनी मां के आसपास खेलते राहत है किंतु जब भी वो उसको भूख लगती है प्यास लगती है तो जोड़कर के आकर के मां की गॉड में बैठ जाता है तो वैसे ही हम हमारा जो हमारा जो नेचर है हमारा जो स्वभाव है इस तरह से ब्राह्मण या तो ईश्वर से दूर जाकर के खेलने जैसा है किंतु जब भी हमारे मां में ईश्वर प्रताप के लिए जो प्रयास जो है ईश्वर प्रताप की जो झांकना जो है ईश्वर प्रताप की जो सुधा जो है वो जब जागृत हो जाति है तब हम जो है खेलने धुलना सब छोड़ करके वो ठाकुर कहते हैं ना वो महामाया लालची दिए भूलिए रेखा है अर्थात वो लॉलीपॉप देकर के महामाया जो है बच्चों को भूल के रखती है किंतु जब वो लॉलीपॉप खाना खत्म हो गया अभी सही-सही में बच्चे को मां चाहिए तो कैसा वो खेलने ढूंढना सब छोड़ कर के दौड़ करके मां के गॉड में जाकर के बैठ जाता है बच्चा तो वैसे ही जब ये ईश्वर प्रताप की सुधा ईश्वर प्रताप की प्यास चम हमारे मां में जागृत होगी तो हम यह जो माया का यह जो जगह थी यह जो खिलौना है जो यहां पर ये सब चीजों से हम इतने सब इसमें है गए हैं इसमें हम मोहित हो गए वो छोड़कर के दौड़ करके ईश्वर के पास में चले जाएंगे किसी भी धार्मिक संस्था के साथ जुड़े हैं उन लोगों यह तो पता चल गया है इंक्लूडिंग माइसेल्फ की हां ये जो बाह्य जगत जो है उसमें तो कोई सर नहीं है ईश्वर ही सर है अभी हमारा जो कर्तव्य है की किस तरह से ये जो हमारा जो हमको जो ये ज्ञान हुआ ज्ञान को आखिरी सिद्धि में कैसे प्रेरित करना है मुझे पता चल गया है की मुझे ठाकुर के दर्शन प्राप्त करने हैं मैं आंख बैंड करके बैठी तो मैं वहीं पे दक्षिणी एशिया में चला जाऊं जहां पे वो छोटे खाट पे ठाकुर बेंडेड थे यहां इस साइड वह जो विष्णु घर है काली मंदिर है फिर इस साइड में पंचवटी है वो वो बेलतला है वो कर उसकी और गंगा बा रही है द्वादश शिवा मंदिर है चांदनी है संध्या का समय है पूरा विश्व जो है एकदम शांत हो गया है पक्षियों का कलर जो है वो वहां पे वो जो सुने दे रहा है पक्षियों का गीत सुने दे रहा है मां लीजिए की गंगा में कोई माझी एक मौका में जा रहा है और गुनगुन करके मां का कोई गंद ग रहा है तो तो इस तरह का सुमधुर परिवेश हो और आंख बैंड करके ही मैं ठाकुर के उसे कमरे में चला जाऊं जहां पर ठाकुर बैठे हैं मां बेटी है और यह जितने भी वो जो गुरु भाई हैं नरेंद्र खाल लातूर बुडोकोपाल विज्ञान महाराज ये जो बाबूराम महाराज योगेंद्र महाराज निरंजन महाराज ये सब लोग भी बैठे हैं तो मैं भी साथ में उनके जाकर के बैठ जो उनके बीच में मैं भी जाके बैठ जो तो इस तरह का जो आध्यात्मिक अनुभूति मुझे कब प्राप्त होगी इस तरह के दर्शन मुहू मुझे मैं चाहूं तो मैं मोहब्बत में चला गया देखा हूं मां रोटी बना रही है और मां के साथ में बैठ करके मैं भी मां को हेल्प कर रहा हूं इस तरह से मुझे दर्शन कब होंगे यही तो हमारी जर्नी है ना अभी वो पता तो चल गया की हां ठाकुर के पास जाना है दक्षिणेश्वर में जाना है किंतु आज मैं है यहां पर राजकोट में बैठा हूं गुजरात में बैठा हूं और कोलकाता की तो बहुत लंबी यात्रा है यहां से वहां तक मुझे दक्षिणेश्वर जाना है तो कैसे जाऊंगा किस कौन-कौन से स्टेप्स से मेरे मेरी जर्नी में मेरी यात्रा में कहां-कहां पर रुकावट ए शक्ति है उसके लिए है उसका मुझे सामना करना होगा यह रास्ता जो है वही तो हमको पर करना है अभी तो यह पर करने के लिए इस तरह का सत्संग और नित्य साधना हमारे लिए अति आवश्यक तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं