Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Swami Vivekananda's Kali the Mother ·

Kali the Mother: Readings from Swami Vivekananda's Poem 4 nov 2024

Transcript

ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरू पिणे अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः मां काली और काली तत्व के बारे में हम कर रहे थे चर्चा इसके बारे में अभी और भी थोड़ा सा डिटेल में जाएंगे के किस तरह से स्वामी जी के जीवन में उनका जो पूरा एक ट्रेजक्ड था पहले तो काली को स्वीकार ही नहीं करते थे उसके बाद में किस तरह से धीरे-धीरे करके उन्होंने मां काली को अपनाया मां काली के श्री चरणों में शरणागति उन्होंने ज्ञापन की तो वह पूरा ट्रेजे कटरी उसमें हम आधे तक पहुंचे थे कि स्वामी जी थक गए हैं भूखे प्यासे नौकरी करते-करते और नौकरी खोजते खोजते मिल नहीं रही है और फिर आखिर में एक जगह पर लेट गए बेहोश भी हो गए थे शायद और फिर उनको ऐसी एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति हुई कि जिसकी म वजह से जैसे कि उनके मन में जो द्वंद चल रहा था कि शिव के संसार में अशवंथ गया और वहां से लेकर के फिर जो उनकी यात्रा शुरू हुई अल्मोड़ा की गुफा में गए वहां पर ठाकुर की महासमाधि के के बाद में जब भारत में भ्रमण कर रहे थे अल्मोड़ा की गुफा में ध्यान कर रहे थे वहां पर फिर उनको जो एक एक बड़ा ही अ हृदय विदारक संवाद मिला अपनी बहन के बारे में तो फिर वहां से फिर वह भारत में हिमालय से नीचे आए और फिर भारत में भ्रमण किया जैसे कि आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च देखा कि अशवुड जो चल रहा था द्वंद उसका तो उन्होंने कैसे भी करके समाधान लेकर आए कि चलो मेरे साथ में यह सब चल रहा है मुझे यह कष्ट मिल रहा है मुझे यह पीड़ा मिल रही है उसका तो समाधान मैंने कैसे भी करके खोज लिया कि मुझे त्याग और वैराग्य के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए यह सब घटना चक्र जैसे कि देवी अ एक प्रक्रिया के माध्यम से ही जैसे कि चल रहा होता था तो ठीक है चलो यहां तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि मुझे मेरा जो सही डेस्टिनी है मेरा जो सही धर्म है जगत में जन्म लेने के बाद में मुझे जो करना है वह रास्ता दिखाने के लिए मुझे यह कष्ट दिया गया और कष्ट की वजह से मैंने सही सही वैराग्य का रास्ता अपनाया भी सही तो यह चलो उनको समझ में आया किंतु फिर यह जो करोड़ों करोड़ों लोग हैं भारत में भूखे प्यासे इस तरह से जी रहे हैं तो उनका क्या मतलब सभी के पास साथ में तो यह वैराग्य सबके लिए तो है नहीं धर्म अर्थ काम और मोक्ष यह जो चार पुरुषार्थ या तो फिर यह जो चार आश्रम है ब्रह्मचारी आश्रम वानप्रस्थ आश्रम गृहस्थ आश्रम ये तीन एक जगह पे और संन्यास आश्रम एक तो ये जो दो रास्ते हैं एक रास्ता है जैसे कि आपको धर्म अर्थ और काम अर्थ और काम अर्थात कि पैसे भी बटोरने हैं और मन की जो वासना एं हैं उसकी भी परितृप्ति करनी है किंतु धर्म के आधार पर यह एक गृहस्थ का रास्ता है और दूसरा है मोक्ष मार्ग जो कि सन्यास का रास्ता है तो स्वामी जी को सन्यास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए जैसे कि उनको कष्ट दिया गया वह तो एक चीज समझ में आती है किंतु भारत की यह करोड़ों करोड़ों की जनता को इतना कष्ट क्यों मिल रहा है उनके लिए क्या कोई सॉल्यूशन नहीं है तो जो वह चिंता धारा उनकी प्रारब्ध प्रारंभ हुई तो फिर वह चिंता घरा उनको वहां पर वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में ले गई उन्होंने वहां पर प्रवचन दिए भारत में आकर के प्रवचन दिए और सबको बताया कि शिव ज्ञाने जीव सेवा यदि आध्यात्मिक रास्ते पर आगे बढ़ना है तो सबसे पहले आपको लोगों की सेवा करनी पड़ेगी अपने चित्त को निर्मल करना पड़ेगा जब तक निष्काम कर्म निष्काम सेवा करके चित्त को निर्मल नहीं कर करेंगे तब तक मंदिर में जाकर के आंख बंद करके बैठेंगे तो फिर सीधे तमस में ही डूबेंगे सीधे आलस में ही डूबेंगे जब तक रजस का प्रादुर्भाव नहीं होता है तामसा छन इस भारत देश में तब तक आध्यात्मिक रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए हमारे पास में कोई भी रास्ता नहीं है तो यह यात्रा की परि समाप्ति किंतु कहां पर हुई तो वहां पे खीर भवानी में खीर भवानी में मतलब देखिए कि खीर भवानी की जो घटना है कि वो आइसोलेटेड घटना नहीं है पूरी यात्रा समाप्त करके पूरे कॉन्टेक्स्ट में उस घटना को हमको देखना है स्वामी जी की जो पूरी चिंता धारा जो अल्मोड़ा से प्रारंभ हुई थी वहां से वह अल्मोड़ा रूपी चिंता धारा वो खीर भवानी में समाप्त होती है जब स्वामी जी ने मां का मां को कहा कि तुम्हारा मंदिर इस तरह से भग्न हो गया है मैं यदि होता तो यह नहीं होने देता मां ने दर्शन देकर के कहा कि बच्चा यह मंदिर बना था मेरी इच्छा से टूटा भी है मेरी इच्छा से तुम्हारी रक्षा मैं करूंगी नहीं कि मेरी रक्षा तुम करोगे तो वह फिर से वह सर्कल जैसे कि कंप्लीट हो गया तो देखिए कि स्वामी जी के जीवन में शक्ति या तो फिर मां काली को स्वीकार करने के दो एक एस्पेक्ट है एक तो है पर्सनल एस्पेक्ट दूसरा है कि यह कॉस्मिक या तो फिर यह सोशल एस्पेक्ट पर्सनल उनका जो माहाकाली के साथ साथ में रिलेशन था ठाकुर के पास में प्रथम प्रथम आते थे मां काली के बारे में जो इच्छा बोलते थे ठाकुर के दर्शनों की अ दर्शनों के प्रति कटाक्ष प्रकट किया करते थे वह यात्रा उनकी वो फेमस घटना कि वह मां काली के पास में जाते हैं वरदान मांगते हैं रोटी कपड़ा मकान मांगने के लिए जाते हैं किंतु बाहर बाहर वही ज्ञान भक्ति वैराग्य मांग कर के आते हैं तो व उनकी यात्रा वहां पर समाप्त हुई वहां पर ही नहीं सिर्फ अल्मोड़ा तक वह चली थी क्योंकि भले ही चाहे ठाकुर ने कहा हो कि तुमको निर्विकल्प समाधि मिलने के बाद में यह चावी मेरे पास में है किंतु फिर भी हम देखते हैं कि ठाकुर की महासमाधि के बाद में भी स्वामी जी के मन में यह था कि हां मैं तपस्या करूं हां मैं अपने जप ध्यान साधन भजन में डूब जाऊं और यही चिंता धारा तो उनको अल्मोड़ा लेकर गई थी हिमालय लेकर गई थी अखंडानंद जी के साथ में जब वह वरान मगर मठ त्याग किए थे आखिरी बार फिर जब वो लौटेंगे तो सीधा वो जगत प्रसिद्ध स्वामी विवेकानंद होकर के ही लौटेंगे मां का आशीर्वाद लेकर के मां के पास में गए थे अखंडानंद जी अर्थात कि गंगाधर महाराज और स्वामी जी मां का आशीर्वाद लिया मां ने गंगाधर महाराज को कहा मैंने अपना सर्वस्व तुम्हारे हाथ में दिया है तुम जतन पूर्वक रक्षा करना अर्थात कि सर्वस्व अर्थात कि स्वामी जी स्वामी जी की रक्षा का भार स्वामी जी के जतन का भार मां ने गंगाधर महाराज को दिया था क्यों क्योंकि ठाकुर की महासमाधि के बाद में इमीडिएट गंगाधर महाराज ऑलरेडी हिमालय तिबेट वगैरह भ्रमण करके आए थे तो वह रास्ता पहाड़ में किस तरह से रहना है किस तरह से स्वास्थ्य को ठीक रखना है भिक्षा किस तरह से करनी चाहिए वह सब चीजों का उनको बड़े अच्छे से अनुभव था तो बोलकर के मां ने कहा कि नरेंद्र को दे रही हूं मेरा सर्वस्व तुमको दे रही हूं उनकी उसकी रक्षा करना उसका जतन करना तो यह दोनों निकले वहां से और फिर जब वह वहां पर हिमालय में गए वही स्वामी जी के मन में चल रहा है जब ध्यान करना है साधन भजन करना है किंतु अल्मोड़ा की घटना के बाद में उनको यह ज्ञान हुआ यदि मेरी ही बहन के साथ में ऐसा होता है तो जगत में यह मेरी करोड़ों करोड़ों बहना एं हैं उनके साथ में क्या होता होगा सो दैट वाज द फर्स्ट टर्निंग पॉइंट और द फर्स्ट कंक्लूजन ऑफ द फर्स्ट फेज ऑफ हिज जर्नी फर्स्ट फेज है कि उनको अपना एक व्यक्तिगत क्या स्थान है इस कॉस्मिक स्कीम के भीतर में उनका और महाकाली का क्या रिलेशन है यह उनको खोजना था तो उसकी परि समाप्ति हुई अल्मोड़ा में अल्मोड़ा से सेकंड फेज उनका प्रारंभ होता है और यह सेकंड फेज फिर स्वामी जी को यहां खिर भवानी तक लेके आता है खीर भवानी के बाद में भी देखिए कि स्वामी जी कर्म तो करते हैं बेलूर मठ में आते हैं बेलूरमठ में साधुओं को न नए आए हुए ब्रह्मचार्य को शिक्षा देते हैं सेकंड टाइम विदेश में जाते हैं और सेकंड टाइम विदेश में जाकर के सिर्फ इतना नहीं कि अपने स्वास्थ्य उद्धार के लिए डॉक्टर ने कहा था कि आपका स्वास्थ्य बहुत खराब हो गया है तो आप समुद्र यात्रा कीजिए अपने मित्रों के साथ में जाकर के कुछ दिन रहिए तो आपको थोड़ा सा शांतोना मिलेगी स्वास्थ्य उन्नति होगी शायद समुद्र की स्वच्छ हवा जद आपको मिलेगी तो तो यह तो एक कारण था ही था जो कि हमने यह रिजली मैनर में स्वामी जी जो दो-तीन महीने बिताए वह पीरियड ग्रेट समर उसके बारे में हमने काफी चर्चा की है किंतु स इतना नहीं ही ब्रोक अ न्यू ग्राउंड कैलिफोर्निया जाकर के उन्होंने जो मैसेज दिया व्हिच वास द कल्मिनेशन ऑफ हिज मैसेज टू मैनकाइंड जैसे स्वामी जी ने कहा था ना द वे बुद्धा हैड अ मैसेज फॉर द ईस्ट आई हैव अ मैसेज फॉर द वेस्ट दो तो मैसेज फॉर द वेस्ट था उसका कल्मिनेशन कैलिफोर्निया में आया था कैलिफोर्निया को जोसेफाइन मैक्लाउड कहा करती थी कैलिफोर्निया अर्था काली मा काली के नाम से कैलिफोर्निया नहीं कैलिफोर्निया स्पे होगा के ए एल आई एफ ओ आर एन आई ए दोस्तों क्योंकि उनको भी पता था स्वामी जी के शिष्यों को भी मित्रों को भी पता था कि मां काली ही जैसे कि स्वामी जी को कैलिफोर्निया तक लेकर आई है आज हम देखते हैं अमेरिका की जो टेक्नोलॉजिकल इंडस्ट्रियल उपलब्धियां जो है उसमें कैलिफोर्निया का कितना बड़ा अवदान है स्वामी जी के शिष्य होने के नाते हम लोग बड़े गर्व पूर्वक कह सकते हैं कि जो कैलिफोर्निया का जो फाउंडेशन जो इंटेलेक्चुअल एकेडमिक ल फाउंडेशन वो स्वामी जी ने ही डाला था बोलकर के बाद में इतना डेवलपमेंट हुआ वे लोग चाहे नहीं करेंगे स्वीकार ऑफकोर्स किंतु हम लोग तो ऐसा क्लेम करेंगे ही करेंगे भविष्य फिर बताएगा कि इस क्लेम में सत्यता कितनी है क्योंकि स्वामी जी का नाम जितना ज्यादा फैले उतना ही लोगों को पता चलेगा कि कितना साइलेंटली स्वामी जी ने कहा है ना कि हिंदू धर्म का इन्फ्लुएंस कैसा है बाकी सब धर्म जैसे कि देखिए कि अमेरिका में क्रिश्चियनिटी गया तो क्रिश्चियनिटी ने क्या किया वहां पर जितने भी लोकल लोग थे उन को उनके भीतर में खूना मर की की जोर जबरदस्ती उनको क्रिश्चियन बना दिया वह जो आप कहानियां पढ़ेंगे वह जो नेटिव इंडियंस और ये जो यूरोपियन सेटलर्स तो हमारे हृदय दहल जाएंगे इस तरह की क्रूरता इस तरह की बर्बरता यह यूरोपियन लोगों ने वहां के नेटिव लोगों के साथ में की थी किंतु हिंदू धर्म वहां पर कैसे फैला है न्यू वर्ल्ड में यूरोपियन लोग कहते थे यूरोप इज ओल्ड वर्ल्ड एंड अमेरिका इज अ न्यू वर्ल्ड तो यह न्यू वर्ल्ड में क्रिश्चियनिटी कैसे फैली तो तलवार की धार पर खूना मर्की करके किंतु हिंदू धर्म या तो फिर कहेंगे बेटर वर्ड इज वेदांत वेदांत किस तरह से फैला किसी को पता भी नहीं है कि स्वामी जी ने आकर के इतना गहराई पूर्वक वहां पे वहां की जो जड़ है उन्हों का सिंचन किया है आज आज किसी को पता नहीं होगा एक जो एक योगा बोलकर के एक फेड चला है वहां पर तो यह योगा जो लोग करेंगे उनको शायद यह नमस्ते वगैरह दो पांच संस्कृत शब्द जानते होंगे उन्होंने शायद स्वामी जी का नाम सुना होगा बट नथिंग मोर देन दैट हमको पता है कि स्वामी जी का कंट्रीब्यूशन गोज फार बियोंड पॉपुलर इजिंग योगा इन अमेरिका अमेरिका में योगा को पॉपुलर इज करने के अलावा भी जो डीप स्पिरिचुअल स्वामी जी की अनुभूतियां थी व अनुभूतियां अमेरिका की धरती में सिंचित हुई है बोलकर के आज उनकी इतनी महत्ता है तो यह भविष्य बताएगा कि हमारा य जो क्लेम है बीइंग द डिसाइल्स ऑफ स्वामी विवेकानंद हम यह जो कहते रहते हैं उस क्लेम के पीछे में कितनी सत्यता है कितना सार्थकता है वो तो भविष्य बताएगा एस फॉर टुडे हम तो यह अपने स्वामी जी के बारे में ये कह कर के खुशी आनंद व्यक्त करेंगे तो यह थी स्वामी जी की महाकाली के साथ में पूरी ट्रेजे क्ट्री तो ये ट्रेजक्ड में जो नेक्स्ट हमने पिछली बार देखा कि किस तरह से स्वामी जी अ क्लांत होकर के बेहोश हो गए फिर उनको अनुभूति हुई किंतु उनका दुख तो समाप्त नहीं हुआ है तो उसके बाद में जो घटना हुई उसका हम पाठ करने वाले हैं किंतु उससे पहले और एक टॉपिक मैं थोड़ा सा डिस्कस करता हूं अ जैसे हम सबको पता है कि यह मिडल ईस्ट में अभी यह वर चल रही है वर और टेररिज्म ये कंटीन्यूअस वहां पर चल ही रहा है चल ही रहा है द साइकल ऑफ ब्लड शे यह खूना मर्की की यह जो एक अनंत च विष चक्र जो है वहां पर घूमता ही जा रहा है तो उ मन में होगा कभी कि क्या है इसका सोल्यूशन क्यों ऐसा होता है मुझे पर्सनली मैंने जो हिस्ट्री पढ़ा है मेरा मैंने हिस्ट्री पढ़ने का एक मेरा हैबिट है तो किंतु मैं जनरली किस तरह से हिस्ट्री पढ़ता हूं कि जहां पर ह्यूमन सिविलाइजेशन ने कुछ कंट्रीब्यूशन किया हो वो हिस्टोरिकल पीरियड में अभी जैसे कि यूरोपियन हिस्ट्री है यरो यूरोप में देखिए कि किस तरह से यूरोप का जो ग्रेटेस्ट कंट्रीब्यूशन है साइंस एंड टेक्नोलॉजी राइट और फिलोसोफी यह मॉडर्न पॉलिटिकल सिस्टम यह मॉडर्न इकोनॉमिक्स वगैरह वगैरह तो एक जो पॉजिटिव कंट्रीब्यूशन यह जो अपना एक मानव सभ्यता को इन जनरल जिस सिविलाइजेशन ने जिस समय किया हो वही मैं ज्यादातर पढ़ने का प्रयास करता हूं भारत का जो ग्रेटेस्ट कंट्रीब्यूशन था वोह अपने वैदिक युग में हमने आध्यात्मिक यह वेद फिर यह वेदांत फिर यह योग वगैरह जो ग्रेटेस्ट ऑफ द साइंस है जो उसको हमने कंट्रीब्यूट किया तो वो पढ़ना अच्छा लगता है बाद में यह हमलावर आए और उन्होंने हमारे साथ में यह अत्याचार किए बाद में दूसरा हमलावर आया यह सब क्या पढ़ना जो आदमी या जो सिविलाइजेशन या जो देश जिस समय मार खा रहा है उस समय वो जो एक हताशा जनक चीजें पढ़ने से कोई लाभ नहीं है तो मैंने भारत का हिस्ट्री इस तरह से पढ़ा है वह तो एक वैदिक युग था और उसके बाद में यह न्यू फ्रीडम मूवमेंट स्वामी जी और ठाकुर के आने के बाद का हिस्ट्री तो वैसे ही ये मिडिल ईस्ट का हिस्ट्री पढ़ने की मुझे कभी भी कोई भी इच्छा नहीं हुई वहां पे देखिए कि कुछ कंट्रीब्यूशन पॉजिटिव कुछ नहीं जस्ट साइकल ऑफ पॉइजन अस वायलेंस सब समय वायलेंस चलता ही रहता है चलता ही रहता है और उसका कोई कंक्लूजन भी नहीं आता ना ही सिविलाइजेशन को इन जनरल हुआ हां उनका कंट्रीब्यूशन था मिडल ईस्ट का एग्रीकल्चर बोलो ना कि वो जो ओरिजिनल जो सभ्यताएं थी चार ओरिजिनल सिविलाइजेशन ये गंजे िक सिंधु वैली सिविलाइजेशन ंग हो सिविलाइजेशन नाइल वैली सिविलाइजेशन और साथ में ही यूफ्रेट्स अर्थात कि आज का जो मॉडर्न इराक है वो वो सिविलाइजेशन ये चार ओरिजिनल सिविलाइजेशन कही जाती है उससे पहले भी होगा किंतु अपने पास में ऐसा कोई आर्कियोलॉजिकल रिकॉर्ड नहीं है तो ये ओरिजिनल चार सिविलाइजेशंस में से मिडल ईस्ट की सिविलाइजेशन एक थी उन्होंने एग्रीकल्चर है राइटिंग है फिलोसोफी है एस्ट्रोनॉमी है मैथमेटिक्स है सभी चीजों में काफी कंट्रीब्यूशन किया है किंतु बाद में देखिए कि अरब लोगों का जब से यह उत्थान शुरू हुआ उसके बाद में ज्यादा कुछ एक समय था कि देयर वाज अ रेनेसा ऑफ लर्निंग ये आज का यूरोपियन रेनेसा है वह कहां से आया वो एक्चुअली अरब लोगों ने बचा करके रखा था मिडल ईस्टर्न अ यह इस्लामिक सिविलाइजेशन ने यूरोप का लर्निंग बचा के रखा था यूरोप में एक तो चर्च की स्थापना के बाद में डार्क एजेस प्रारंभ हुए उन्होंने लर्निंग वगैरह सब भूल गए ये लर्निंग वगैरह अरब सिविलाइजेशन ने बचा के रखा था फिर यूरोप में जब रेनेसा प्रारंभ हुआ तो अरब लोगों के पास में से उन्होंने ग्रीक लर्निंग वापस लिया तो दैट मच वाज देयर कंट्रीब्यूशन अभी आजकल का मिडिल ईस्ट का हिस्ट्री पढ़ना किसी काम का नहीं है और हताशा के अलावा और कुछ प्रकट नहीं करता है किंतु बिकॉज कि यह पिछले कुछ समय से यह सब घटनाएं चल रही है तो मैंने सोचा कि कुछ सीरियस पढ़ा जाए तो पिछले तीन-चार दिनों से मैं एक किताब पढ़ रहा हूं उसका नाम है राइज एंड किल फर्स्ट यह एक्चुअली इजराइल का वॉर ऑन टेरर यह इसके बारे में बड़ा ही डिटेल और बड़ा ही ऑथेंटिक यह एक अकाउंट है इस किताब में काफी मोटी किताब है और काफी डिटेल में यह सब डिस्कस किया गया है कि देखिए पहले तो यह यहूदी लोगों की हिस्ट्री हम देखेंगे बड़ी भयावह हिस्ट्री है उन्होंने जीसस को जन्म तो दिया यहूदी प्रजा हों ने फिर पता नहीं उन्होंने जीसस को ही जैसे कि रिजेक्ट कर दिया फिर जीसस को जिन्होंने अपनाया क्रिश्चियन लोगों ने उन्होंने सोचा कि जीसस ने भले ही चाहे यहूदी प्रजा में जन्म लिया हो किंतु ये वही यहूदी है कि जिन्होंने जीसस को बिट्रेजर को दगा दिया था य वही उसी में से ये कुछ लोगों ने जुड़ा जैसे की जुड़ा से उनका जुड़ाई यहूदी डिसाइल जीसस का जिसने जाकर के ये उसका वहां जो गवर्नर था उसको जाकर के बोल दिया था जीसस यहां पर है जाकर के उसको पकड़ लि लीजिए तो वे लोग जाकर के पकड़ के ले आए और उनको क्रूसिफिकेशन भले दिया हो धार्मिक नीति शिक्षा वगैरह भले ही सिखाई हो किंतु उन्होंने ही अल्टीमेटली जीसस को बिट्रेट है जीसस को दगा दिया है ऐसा एक क्रिश्चियन लोगों का एक मत चल रहा है और इसी मत की वजह से यहूदी प्रजा के ऊपर में आखिरी 2000 साल से अत्याचार हो ही रहे हैं जैसे कि उस अत्याचार का कोई थी नहीं और इसका कल्मिनेशन कहां पर हुआ यह हिटलर हिटलर ने सोच लिया जितने भी यहूदी है सबका एक साथ में सफाया कर दिया जाए अभी आपको 1015 लोगों को मारना है हत्या करनी है यह तो ठीक है किंतु आप एक साथ में लाखों लोगों को कैसे मारेंगे युद्ध के मैदान पर आप लाखों लोगों को मारते हैं क्योंकि दो-दो सैन्य सामने खड़े होते हैं यहूदी लोग तो अपने घरों में शहर में गांव में खेत में रह रहे हैं वहां शहर गांव खेत में जाकर के थोड़ी ना गोला बारूद आप बरसाए यहूदियों के अलावा बाकी लोग भी तो मर जाएंगे तो उनको राउंड अप करके जितने भी यहूदी थे हिटलर के कंट्रोल वाले यूरोप में वहां से पकड़ पकड़ करके सबको कंसंट्रेशन कैंप में भेजा गया और फिर वहां पर यह पॉइजन गैस का इस्तेमाल करके उनकी हत्या की गई यह अपने मानव सभ्यता का एक बड़ा ही भयावह चैप्टर है और मनुष्य के यह जो मनुष्य जाति है इसके ऊपर में यह बहुत बड़ा यह दाग है कि यही मनुष्य जो कि जिसमें से ईश्वर प्रकट होते हैं जीसस ना कि कृष्णा ना कि ये श्री राम कृष्ण स्वामी विवेकानंद यह मानव सभ्यता में यह क्षमता है यह शक्ति है कि ऐसे महापुरुषों को जन्म दे तो साथ-साथ में ही मानव सभ्यता ये हिटलर जैसे राक्षसों को भी जन्म देती है ये सेकंड वर्ल्ड वॉर का इतिहास पढ़ेंगे तो एक चीज मैंने बार-बार देखा सिर्फ मैंने नहीं बहुत सारे हिस्टोरियंस ने यह बात नोट की है कि नाजी जो थे जो कंसंट्रेट कैंप के वह जो जेलर थे गार्ड्स थे यहूदियों की हत्या करने वाले जो थे पूरी नदजी पार्टी वो लोग बड़े ही नॉर्मल पीपल लगते थे उनको प्रमोशन चाहिए फिर उनको राइज चाहिए फिर उनको रिस्पेक्ट चाहिए उनका फैमिली लाइफ है उनके बच्चों की चिंता कर रहे हैं उनके कलीग्स के साथ में उनकी क्या कंपटीशन या फ्रेंडशिप है वह सब डिस्कशन चल रहा है किंतु बैकग्राउंड में देखिए कि लाखों यहूदियों की हत्या भी वे लोग बिना सो सो समझे करते हैं तो यह किस तरह की मानव की विष मय अपने भीतर में यह विष मनुष्य के हृदय में किस तरह का यह रह रहा है सही में यह समझना मुश्किल है मनुष्य राक्षस यानी कि भयानक राक्षस हो सकता है साथ में ही मनुष्य देवता भी हो सकता है यह राक्षस होना और यह देवता होना यह दोनों अपने हाथ में है यह दोनों जो एस्पेक्ट है मनुष्य के नेचर के मनुष्य के स्वभाव के कब कौन सा यह एस्पेक्ट स्ट प्रकट होगा कौन सा एस्पेक्ट उसके ऊपर में हावी हो जाएगा कहना मुश्किल है अभी कोई एक आदमी है बहुत अच्छे से व बातें कर रहा है बहुत अच्छे से मैंने और किसी की तो छोड़ ही दीजिए अपने यहां पर कुछ-कुछ जो डिवोटा आते हैं मेरा खुद का जो अनुभव है मैं बताता हूं कि ऐसे डिवोटा आते हैं कि आपको सब तरह से मदद करेंगे सालों से आ रहे हैं सब कुछ है उनके साथ में किंतु यदि किसी चीज को लेकर के नाराज हो गए तो इतना मतलब वो विभ सता पूर्वक हमारे से व्यवहार करेंगे कभी-कभी कि हमको लगेगा कि भाई तुम ठाकुर के पास आते हो इतने दिनों से तो तुमने सीखा कि साधुओं का इस तरह से अपमान करोगे ऐसा भी होता है तो मनुष्य के स्वभाव के दो एस्पेक्ट है तो अभी देखिए कि यह सेकंड वर्ल्ड वॉर में यहूदियों का जो संहार हुआ उसके बाद में जो यहूदी बचे थे उन्होंने सोचा कि यूरोप छोड़ कर के क्योंकि यूरोप में जब तक रहेंगे अभी ये लोग ठीक-ठीक वर्ल्ड सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में बोल तो रहे हैं कि ना ना ये हमारे से गलती हो गई किंतु दूसरी बार यह पागलपन का दौरा कब पड़ेगा कुछ ठीक नहीं चलो मिडल ईस्ट में चले जाते हैं इजराइल बोलकर के अपना जो और ओरिजिनल जो एक देश था उसको पुनर्जीवित करते हैं बोल कर के इजराइल रूपी वसाहत स्थापित की गई और अमेरिका को भी लगा कि चलो यह लोग यूरोप से जाए तो हमारे सर पर कम टेंशन है वे लोग भी बड़े चालाक थे यूरोप में जर्मनी में ही टुकड़ा करके उनको एक देश दे सकते थे किंतु वो नहीं करके मिडल ईस्ट में भेजा यहूदी लोग यहां से जाए तो हमारे सर से ये बलाल है फिर वो अरब लोग लोग सोचेंगे अभी जैसे ही यह लोग इजराइल यहूदी आए इजराइल में और तभी से अरब लोगों के साथ में उनका जो युद्ध चालू हुआ अभी मन में कभी-कभी सोच सकते हैं कि यदि अरब लोगों ने थोड़ा सा एक लार्ज हार्टेड बस दिखा करके उनको वेलकम किया होता कि हां चलो आपके साथ में वहां पर इतना अत्याचार हुआ है तो हमारे साथ में आइए हम आपकी रक्षा करेंगे जैसे कि यह अ पारसी लोगों को हमने जैसे कि पनाह दी थी जब वो इस्लामिक आक्रमण प्रारंभ हुआ ईरान के ऊपर में जो ओरिजिनल जो जरो थियन जो जो लोग थे पारसी लोग जिनको कहते हैं जरथुस्त्र शांति से पल बढ़ रहे हैं तो ऐसा यदि वहां पर होता यहूदियों को यदि उन्होंने पनाह दी होती थोड़ा सा लार्ज हार्ट रख करके तो इतिहास कुछ अलग ही होता किंतु यह नहीं बिल्कुल पहले ही दिनों से इन दोनों के बीच में युद्ध लग गया और यह युद्ध अभी तक चल रहा है तो यह जो किताब है किताब का बेसिकली सारांश मतलब बेसिकली उसका क्या है इसके भीतर में तो इजराइल के फाउंडेशन से लेकर के टेररिज्म के साथ में ये जो युद्ध चल रहा है तो युद्ध किस तरह से उन्होंने किया है मोसाद की स्थापना की फिर मोसाद किस तरह से टारगेटेड किलिंग कर रहा है एक के बाद एक टेररिस्ट का और उनके मन में यह इजराइल वालों के मन में हमेशा एक बात है कि हमा सेना की फतेह है ने कि ये जितने भी यह टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन है हेज़बोल्लाह वगैरह जो भी है यह उसके साथ में युद्ध कर र है तो हम लोग क्या करेंगे कि इनकी लीडरशिप है उनको मार डालेंगे व उनके जितने भी मेन मेन टेररिस्ट है उनकी हत्या करेंगे तो यह हत्यारा जो ऑर्गेनाइजेशन है टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन वो धीरे-धीरे करके कंट्रोल में आ जाएगा यह बोल कर के इजराइल ने कितने ही यह लीडर थे टेररिस्ट लोगों उनकी हत्या की है ओवर या कोटली किंतु इतनी हत्याएं करने के बाद में भी टेररिज्म समाप्त नहीं हुआ और जो फिर हमने मतलब पूरे इसको 18 1947 से यह जो हिस्ट्री स्टार्ट होती है इस किताब में तो यह 47 फिर कितने 50 60 70 साल से यह लोग इस तरह से टारगेटेड किलिंग करते आ रहे हैं इजराइल और उन्होंने सोचा होगा कि यदि इतने हथियारों को मार देने के बाद में इतने टेररिस्ट के वध करने के बाद में यदि इजराइल को शांति मिलेगी तो हमने देखिए कि यह पिछले साल क्या हुआ एक ऐसी घटना हुई कि इजराइल की शांति जैसे कि हमेशा के लिए चली गई और यह मिडल ईस्ट में अभी यह फुल स्केयर वॉर चालू हो गया है तो यह जो मैं पूरा य हिस्ट्री पढ़ रहा हूं इसका य कंक्लूजन मेरे मन में किस तरह से जागृत होता है हम लोग देखिए भारत में यह जो फ्रीडम मूवमेंट है हमारा तो गांधी जी ने जिस तरह से अहिंसा और सत्य के रास्ते पर जाकर के हमको आजादी दिलवाई बहुत सारे लोगों को इस बात के सामने एक तरह का एक विरोध है कि गांधी जी की वजह से ही अपने भारत के टुकड़े हो गए वगैरह वगैरह गांधी जी को गाली देने वाले गांधी जी को क्रिटिसाइज करने वाले लोगों की आज भारत में कमी नहीं है किंतु देखिए कि आपको यदि कोई भी सिविलाइजेशन का फाउंडेशन रखना है तो वह वायलेंस से कभी भी नहीं होगा उसके लिए आपको क्षमा है शांति है धैर्य है उसी के आधार पर यह फाउंडेशन रखा जाएगा आज मैं इजराइल और इंडिया दोनों को मैं कंपेयर करता हूं इजराइल का भी प्रारंभ देखिए कि युद्ध से हुआ भारत का भी प्रारंभ देखिए युद्ध से हुआ जिस दिन हमको यह फ्रीडम मिला था उसके दूसरे ही दिन पाकिस्तान ने हम पर अटैक किया और अटैक करके कैसे भी करके भारत के टुकड़े कर दे वैसे तो पहले ही भारत के टुकड़े हो गए पार्टीशन में पार्टीशन में ही इतना खूना मर्की हुआ उसके बाद में भी इससे भी उनको संतोष नहीं हुआ तो जिस दिन हमको आजादी मिली उसके बाद में इमीडिएट भारत में हमला कर दिया तो किंतु देखिए कि भारत का और इजराइल का रिस्पांस कितना डिफरेंट है भारत पे भी यह कॉलोनाइजेशन की वजह से कॉलोनियलिज्म की वजह से अत्याचार होता रहा था भारत खुद 1000 साल से गुलाम था उसमें भी सेकंड वर्ल्ड वॉर में चर्चिल की जो पॉलिसी थी कि भारत में जितना भी अन्न प्रकट उत्पन्न होता है सब अन्न धान जितना भी चावल वगैरह वगैरह सब है यूरोप में भेज दिए जाए क्योंकि वहां पर युद्ध हो रहा है वहां के लोगों को खाना चाहिए आर्मी को भी चाहिए ब्रिटिश लोगों को भी चाहिए बोल कर के मैं ये चर्चिल की यह पॉलिसी की वजह से भारत में आखिर आखिर में जो अकाल पड़ा है उसमें कितने लाखों लोगों का मृत्यु हो गया तो यह जो यहूदियों प जो अत्याचार हुआ था कंसंट्रेशन कैंप में उससे कतई कम अत्याचार हम हिंदुओं प नहीं हुए हैं उतने ही अत्याचार हम पर हुए हैं उनके ऊपर में अत्याचार करने वाला था हिटलर तो हमारे पर अ करने वाला था यह ब्रिटेन आज ब्रिटेन बड़ा हीरो बन कर के घूमते हैं कि हमने हिटलर को मार दिया किंतु ब्रिटेन की जो भारत के प्रति जो पॉलिसी थी दैट वाज इक्वली डेंजरस तो देखिए कि इजराइल और भारत यह दोनों ही एक ही तरह के ऑलमोस्ट परिस्थितियों में उन दोनों का जन्म हुआ है किंतु इजराइल का ट्रेजक्ड आप देखिए छोटा देश है टेक्नोलॉजिकल वह काफी एडवांस है और यह सब बातों में किसी को ना नहीं कर ना है किंतु यदि आपको शांति है मन की शांति फिर एक आध्यात्मिकता वह यदि उस दृष्टि से देखेंगे तो आज भारत इजराइल से कितना आगे है इजराइल के जितने भी सोल्जर है उनको जैसे ही छुट्टी मिलती है वह उत्तर काशी है हरिद्वार है वहां पर घूमने के लिए जाते हैं क्यों क्योंकि वह वायलेंस रूपी जो वातावरण में रहे हैं उ वहां से उनको मन को शांति कहां मिलेगी तो यह लोग सब भारत में आते हैं मन की शांति खोजने के लिए तो यदि एक सिविलाइज को डेवलप होना है तो युद्ध या खूना मर की कोई उपाय नहीं है कि इसके माध्यम से आप आगे बढ़ेंगे आपके भीतर में क्षमा धैर्य शांति आध्यात्मिकता यह सब गुण होने ही चाहिए अभी यह अंडरस्टैंडिंग अपनी है हिस्ट्री के प्रति अभी इस अंडरस्टैंडिंग के साथ में आप मां काली का यह जो रुद्र तत्व है उसको आप देखिए काफी कई बार जैसे कि कहा जाता है कि भगवान शिव का तांडव नृत्य या तो फिर य मां काली का यह रुद्र स्वरूप हमको अपनाना चाहिए अपने दुश्मनों की हत्या करने के लिए अदर वाइज भारत के ऊपर में दुश्मनों का आक्रमण ओवर्टली या कवर्टली कभी-कभी नजर के सामने युद्ध होता है कभी नजरों से ओझल युद्ध होता है कभी-कभी सांस्कृतिक आक्रमण होता है कभी-कभी देश को बांटने के लिए कोई लोग भीतर में से अपने ही लोग ऐसे कुछ कुछ होते हैं हमको समझ में नहीं आता कि वो भीतर में से सबोटाज कर रहे हैं तो हमको लगता है कि हमको भी वीर भाव अपना करके उनका सामना करना चाहिए किंतु देखिए कि यह जो मृत्यु तत्व है दैट इज डिफरेंट फ्रॉम खूना मर्की डेथ इज डिफरेंट फ्रॉम वायलेंस डेथ और वायलेंस मृत्यु और खूना मर की इन दोनों में डिफरेंस क्या है हम जैसे कि मृत्यु को अपनाते हैं मृत्यु को अपना साथी बनाते हैं मां काली तत्व को यदि हम समझेंगे तो यह हमको पता चलेगा कि मृत्यु के रूप में अपना जो मृत्यु भय है और मृत्यु भय कहां से प्रकट होता है तो राग और द्वेष से मुझे कुछ चीजें बड़ी पसंद है कुछ चीजों के ऊपर में मेरा बड़ा द्वेष है तो जब तक मैं अपनी पसंदीदा चीजों के पीछे में दौड़ता रहूंगा मेरे प्रिय जो जो कुछ भी है उसको पाने की लालसा मेरे मन में बड़ी जड़ जमा करके बैठी है और जो मुझे पसंद नहीं है उसको हानि पहुंचाने के लिए मैं सब समय लालायित रहता हूं तब तक यह राग और द्वेष में से यह अभिनिवेश अर्थात की मृत्यु भई प्रकट हो गई होगा तो प्रश्न है राग और द्वेष कहां से आता है तो यह आता है अस्मिता अर्थात कि मैं यह मैं मेरा शरीर है यह मैं हूं मेरे सब संस्कार है मेरे संस्कार के अनुसार मुझे यह पसंद है यह नहीं पसंद है तो यह मैं अपने को आइडेंटिफिकेशन फाई कर रहा हूं नहीं कि ये जो पूरा कॉस्मिक विश्व जो कि मेरा सही नेचर है किंतु एक छोटा सा शरीर है की छोटी सी इंद्रिया है और छोटी सी कामना वासना है उसके साथ में मैं अपने को आइडेंटिफिकेशन कर के हम बैठे हुए हैं मेरा जो अहंकार है मेरा ये जो शरीर के साथ में ये एक आइडेंट टि फिकेशन है ये आइडेंटिफिकेशन को सत्य मान कर के मैं बैठा हूं बोलकर के यह अस्मिता प्रकट होती है अस्मिता में से राग और द्वेष आते हैं राग और द्वेष में से आता है अभिनिवेश अर्थात कि मृत्यु का डर तो महाकाली की आराधना करना या महाकाली को शरणागत होने का अर्थ क्या है यह मृत्यु भय से मुक्ति पाना यदि मृत्यु आना ही है तो मैं हंसते-हंसते जाऊंगा खुशी होकर के जाऊंगा क्यों क्योंकि जो लोग मृत्यु से डरते हैं और डरने के पीछे जो कारण है वह सब कारणों का तो मैं त्याग कर चुका हूं अभी मृत्यु आए कि जाए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं अमर शांति में स्थिर होकर के जन्म जन्मांतर के लिए विराजित होकर के बैठा हूं मृत्यु मेरे लिए कोई मान्य मायने नहीं रखता यह ज्ञान जब होगा तब हम मां काली के सही सही आराधक या मां काली के सही सही शिष्य साबित होंगे तो ये है काली तत्व काली तत्व को जद आप एक एक्सटर्नल रूप में लेंगे कि हां दुश्मनों का सामना करना है तो इस चीज से इस मिसअंडरस्टैंडिंग से क्या प्रकट होगा तो यह देखिए कि यूरोप और यह मिडिल ईस्ट की यह जो साइकल ऑफ वायलेंस इसने उसकी हत्या की तो उसने इसकी हत्या की उसके रिटन में यह नया सुसाइड अटैक हुआ तो सुसाइड अटैक के अगेंस्ट में टारगेटेड किलिंग किया गया उसके सामने 10 दूसरे अटैक हुए और 10 लोगों का फिर से नाश किया गया यह देखिए जो रक्त बीज की यह जो कहानी है कि एक इस तरह का राक्षस जिसको कि आप जितनी भी बार मारेंगे उतनी बार उसके देह में से खून प्रकट होगा ये खून जितनी भी बार जमीन पर गिरेगा उसमें से एक नया राक्षस खड़ा हो जाएगा तो उसका उपाय क्या है माहाकाली को बुलाया गया माहा काली ने उसका पूरा खून पी लिया और फिर उस राक्षस की हत्या की देखिए ये जो एलेग है एलिगो हमको क्या कहती है भगवान शिव ने ये जो हलाहल विष प्रकट हुआ समुद्र मंथन के बाद में तो विष का पान कर लिया जगत को उन्होंने आशीर्वाद दिया जगत को उन्होंने शांति बखी तो ये हलाहल विष पान करना या तो फिर यह राक्षस का खून पी जाना इसके पीछे का क्या तत्व है बात ये नहीं है कि अभी भगवान शिव भी संहार के देवता है प्रलय के देवता है माहाकाली भी संहार की देवी है तो ये दोनों संहार रूपी देवताओं जो राक्षसों का नाश करते हैं या तो फिर विष पान करते हैं इसका क्या अर्थ है बात यह नहीं है सिर्फ कि एक फिजिकली दुश्मन है हमारे सामने उसकी हत्या की इसके जो हमारे सामने दुश्मन खड़ा होकर के हमारे पर जो क्रोध है या तो हमारे प्रति घृणा है या तो हमारे प्रति वायलेंस या खूना मर की है जो हमारे पर वमन करता है वमन संस्कृत शब्द है उसका अर्थ होता है वो मिट या तो फिर ये हमारे पर फेंकता है तो यह फेंके का या तो फिर हमारे पर वमन करेगा उसको हमको हजम कर लेना है यदि हमारे सामने कोई शत्रुता करेगा उस शत्रुता का हम शत्रु से यदि उसका सामना करेंगे तो साइकल ऑफ वायलेंस कभी भी कतई समाप्त नहीं होगा इसका अर्थ यह नहीं है कि हमको दुश्मनों का सामना नहीं करना है एक गाल पे चाटा मारे तो दूसरा गाल दे देना है नहीं यह तो ये यह कंफ्लेक्स सीम में चले जाओ या तो फिर दूसरे एक्सट्रीम में चले जाओ एक एक्सट्रीम है कि शत्रु या तो हमारे दुश्मन हमारी हानि करना चाहते हैं को जो करना चाहे कर दो क्योंकि मैं आत्मन हूं मैं ब्राह्मण हूं या तो फिर मैं आध्यात्मिक व्यक्ति हूं संत हूं वगैरह वगैरह या तो फिर यदि सामने वाला हमारे साथ में अहित करना चाहता है तो उसका 10 गुना हम चक्रवृद्धि व्याज से उसको रिटर्न करेंगे उसका सामने अहित करेंगे ये दोनों एक्सट्रीम गलत है सही सही एक्चुअली क्या होना चाहिए कि यदि भगवान कृष्ण ने जो गीता में कहा है कि निमित्त मात्रमो सव्य साचीन अपनी कामनाएं वासना एं माहाकाली के चरणों में अर्पित कर देनी है उसके बाद में जो मन में स्थिति एक स्थिरता एक प्रकट होगी एक एक जितने भी तरह के द्वेष है द्वंद है उनसे जो मुक्ति प्राप्त होगी उसके बाद में मन को स्थिर करके शत्रुओं की हत्या करनी है यह यदि स्थिर होकर के हत्या नहीं करेंगे तो फिर यह हत्या का पाप अपने को लगेगा और दूसरा राग द्वेष प्रकट होता ही रहेगा शत्रुओं का यदि दमन करना है तो कै से करना है पहले तो अपने राग द्वेष मृत्यु रूपी भय यह अपनी कामनाएं वासना एं घृणा सबको त्याग करके सबको जैसे कि यह जो होमाग नि है मां काली रूपी उसमें अर्पित करके उसके बाद में अपने मन को परिशुद्ध करके फिर जगत में रहना है जगत में यह विद्वेष का सामना करना है दिस इज द सीक्रेट ऑफ काली तत्व हम लोग यदि इस सीक्रेट को नहीं समझेंगे और अपने शास्त्रों की सहाय लेकर के या तो फिर शास्त्रों का उदाहरण देकर के हम यदि यह कहना शुरू करेंगे कि नहीं नहीं यह जो गांधी जी ने जो किया या तो फिर जिस तरह से भारत में एक बड़ा ही रिस्ट्रेन है देखिए कि इजराइल में जब भी अटैक होता है उन्होंने 10 गुना करके उसका रिस्पांस दिया है भारत में बहुत बार ये रिस्ट्रेंट एक एक रखी जाती है इवन बंबई पर भी यदि हमला हुआ तो देखेंगे कि हमने उसका इजली इतना पावरफुल रिस्पांस नहीं दिया है हमको लगता है गवर्नमेंट कमजोर है या तो फिर गवर्नमेंट कावर्ड है कावर्ड यानी कि यह क्या कहेंगे वो भय उनको भय लगता है डर लगता है तो नो डाउट उस समय की गवर्नमेंट थे भी ऐसी उसका क हमको डिफेंड नहीं करना है गवर्नमेंट की जो पॉलिसी है वह है किंतु आध्यात्मिक साधक के आध्यात्मिक साधना के पथिक होने के नाते हमको अपनी फिलोसोफी बड़ी क्लियर रखनी है कि शत्रु कौन है और शत्रु के विनाश का क्या तात्पर्य है सर्वप्रथम शत्रु है अपनी कामनाएं वास नाए और मां काली की आराधना अर्थात कि मृत्यु को वर्ण करना अर्थात कि मेरा यह जो आइडेंटिफिकेशन है उसको समाप्त करना जैसे कि देखिए कि सन्यास से पहले हम लोग अपना खुद का श्राद्ध करते हैं इस बात का अर्थ क्या है कि हमने हमारी जितनी भी आशाएं थी आशाओं का परित्याग किया है यह आशा ही तो जीवन है जब जब तक आशा है तब तक यह जीवन चलता ही रहेगा मनुष्य सुबह को उठकर के कितना कष्ट करके यह नौकरी करेगा बिजनेस करेगा कितना कष्ट करके पैसा अर्जन करेगा कितना वह टेंशन लेकर के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई करवाएगा बच्चे बड़े होंगे तो यह टेंशन रहता है कि बच्चे उनकी संभाल रखेंगे कि नहीं रखेंगे किस तरह का बिहेव करेंगे यह पूरा जो जीवन चक्र है मनुष्य को जैसे कि र थोड़ी देर के लिए भी उसको शांति नहीं है सब समय संसार रूपी चक्की में वह पिसता ही रहता है पिसता ही रहता है तो यह संसार रूपी चक्की को ड़ना यह आशाओं ये आशाओं का संहार करना यह जो अपनी कामना वासना है उनका प्रलय करना यह है माहाकाली की सही आराधना यह मन स्थिर हो जाने के बाद में यदि आप शासन करते हैं जैसे कि कोई भी एक राजा है वह अच्छा राजा होने का क्या उसका यह मानदंड है कि उसके पास में यह ऋषि मुनि रूपी उसके यह है एडवाइजर है यूरोपियन फिलोसोफर में कांसेप्ट है फिलोसोफर किंग फिलोसोफर किंग का क्या अर्थ है राजा है किंतु साथ-साथ में फिलोसोफर है यानी कि राजा का जद कर्तव्य होगा कि शत्रु जैसे ही आए वैसे ही उनका विनाश करना तो फिलोसोफर किंग है वो 10 बार सोचेगा कि शत्रु आया ही क्यों भीतर में कमजोरी है कि फिर शत्रुओं की जो टेक्नोलॉजी बहुत ज्यादा बढ़ गई है क्या व्हाट इज द फंडामेंटल रीजन बिहाइंड द अटैक और फिर एक एप्रोप्रियेट इंग्लिश में शब्द है टू लेश आउट ब्लाइंड आंख बंद करके जद हम शत्रुओं का संहार करने के लिए दौड़ेंगे हो सकता है कि अपने रास्ते में पैर फिसल जाए और हम अपने सर के मुंह पर गिर जाए सो दिस मॉडरेशन दिस अंडरस्टैंडिंग दिस स्पिरिचुअलिटी दैट कम्स फ्रॉम अंडरस्टैंडिंग प्रॉपर्ली अंडरस्टैंडिंग यह मृत्यु तत्व को ठीक-ठीक समझना उसी से हम अपना व्यक्तिगत और यह आध्यात्मिक और यह सांसारिक तीनों तरह के जीवन को हम ठीक ठीक जी पाएंगे तो यह कहानी है उसको हम फिर कल लेते हैं स्वामी जी की कहानी को हम कल आगे बढ़ाएंगे आज यही ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु यह जो आपने जब कहा कि मेडिटेशन इज द ग्रेटेस्ट सर्विस इसके ऊपर में तो एक्चुअली मेरा बड़ा फेवरेट कोटेशन इसके बारे में मैंने सोचा भी बहुत है किंतु इसके ऊपर में बोलना है मैं मुझे याद नहीं आ रहा है कि मैं कभी इसके बारे में बोला हूं तो बड़ा अच्छा आपने इस टॉपिक को पकड़ लिया वेरी गुड तो देखते हैं कि अभी क्या होता है मैं खुद थोड़ा सा अभी डाउटफुल हूं कि मैं कितना बोल पाऊंगा इसके ऊपर इस इस थीसिस को डेवलप करना वो अभी देखना पड़ेगा कि मैं कैसे मैं जनरली कोई पर बोलता हूं तो पहले से सोचता नहीं कभी मैं सोचता हूं अपने माइंड को पहले बोलने से पहले क्लियर कर देता हूं व जो उसके भीतर में जो प्रक्रिया होने है उसको होने दूंगा फिर जब बोलना शुरू करूंगा तब मैं खुद कभी-कभी सरप्राइज हो जाता हूं कि मैं इस तरह से इसके बारे में सोच रहा हूं डिफरेंट है क्योंकि यदि हम ईश्वर का ध्यान करेंगे तो अपने कर्मों का जाल कटेगा और यदि संसार का कर्म करेंगे तो कर्म की जाल को बढ़ाते जाएंगे बहुत बार लोग उदाहरण देते हैं या वीडियो गेम खेलते खेलते कैसे कं हो जाता है तो वैसे ही आपको ओमकार के ऊपर में कंसंट्रेशन करना है तो सेसे उदाहरण देने के लिए काफी लोग बोलते हैं खास करके आज के यंगर जनरेशन को किंतु दोनों में फंडामेंटल डिफरेंस है वीडियो गेम खेलने के बाद में आप खड़े होंगे आपका पूरा मन जैसे कि एग्जॉस्ट हो गया है ऐसा लगेगा और ध्यान करने के बाद यदि खड़े होंगे मन जैसे कि एक आध्यात्मिक उल्लास से भर जाएगा तो यह बहुत बड़ा डिफरेंस है एक आपके कर्म को काटता है एक आपके कर्म को बढ़ावा देता है देखिए यह उत्तर इसका बड़ा सिंपल है और बड़ा सिंपल है बहुत सहज है किंतु इसका एप्लीकेशन थोड़ा मुश्किल है सहज इसलिए है देखिए कि मेडिटेशन तो छोड़ दीजिए वह तो एक कॉम्प्लेक्टेड वेज है सोशल साइंस है यह बायोलॉजी वगैरह अकाउंटिंग वगैरह इतने कॉम्प्लिकेटेड सब्जेक्ट हम सभी लोग इसमें मास्टर हो सकते हैं किस तरह से क्योंकि हम 6 साल की उम्र में चार पा साल की उम्र में से ही पढ़ाई लिखा शुरू कर देते हैं तो बाय द टाइम हम कॉलेज में जब आते हैं ग्रेजुएशन करते हैं यह जो सब्जेक्ट मैटर के ऊपर में एक बड़ा ही अच्छा अपना एक कंट्रोल आ जाता है और यदि आप में कैपेसिटी है पोस्ट ग्रेजुएशन कीजिए हायर स्टडीज कीजिए देयर इज नो एंड टू लर्निंग तो ये मेडिटेशन योग और वेदांत ऐसे ही है यदि थर्ड फोर्थ हमारी तीन-चार साल की उम्र में ही प्री केजी केजी फर्स्ट स्टैंडर्ड से ही जद ये चालू हो जाए एलिमेंट्री स्कूल से ही तो बाय द टाइम हम ग्रेजुएट होंगे योग और वेदांत में भी अपना इतना ही कंट्रोल आ जाएगा और यह जो बच्चे होते हैं नेचुरली ब्रह्मचर्य का पालन होता है तो वह एक टेंशन नहीं है कि क्या अभी और दूसरा है कि एक एंथू सियास्मॉलटूल होते हैं तो बड़ा आसानी से उसके ऊपर में अपना कंट्रोल आ जाएगा उसके बाद में आप कीजिए गृहस्थाश्रम कीजिए जो करना है कीजिए ठाकुर ने कहा ना कि एक बार एक आपने वह प्राप्त कर लिया उसके बाद में आप जैसे साधु ने बासा पकड़ लिया दो साधु है तो एक साधु दोनों शहर में आए एक साधु ने हमने बड़े ही अभिभूत होकर के शहर में 10 जगह घूमता है दूसरा साधु है सबसे पहले उसने एक अपना धर्मशाला एक घर ठीक कर लिया यहां पर रहना है अपना सामान रख दिया फिर वो शहर में जितना घूमना चाहे वो घूमे तो वैसे ही गृहस्थाश्रम प्रारंभ करने से पहले ग्रेजुएट लेवल तक आते-आते योग और वेदांत में मास्टरी आ जाती है तो फिर गृहस्थ आश्रम भी शांति से जाएगा उसके बाद में गृहस्थाश्रम कंटीन्यूअस करना हो कीजिए वानप्रस्थाश्रम करना कीजिए जो करना हो कीजिए व्हाट एवर यू वांट टू डू योर लाइफ विल बी वेरी पीसफुल किंतु यह जो फैक सेकुलरिज्म बोलकर के जो चालू हुआ है अपनी यह जो पुरानी प्रथा कि गुरुकुल में ही बच्चे यह सब सीखते थे वो नहीं करके यह नंबर्स एंड लेटर्स और यह सब जो हम सीख रहे हैं तो अभी जो ज्ञान होता है ना मैं खुद की बात करता हूं मैं मुझे कब लगता है कि 192 साल में मेरी उम्र होगी तब पहली पहली बार यह सब विचार आना शुरू हुए थे तो बाय दैट टाइम माय एंटायस फॉर्मेटिव पीरियड इज ओवर इवन 1920 साल की ही बात आप कीजिए एंटायस पीरियड इज ओवर अभी तो आप एडल्ट हो चुके हैं आपका माइंड सेट फिक्स हो चुका है और अभी उसको आपको पत्थर के ऊपर में पानी डाल कर के पौधा निकालने की बात है आप यदि खेत में पानी डालेंगे जो जो फर्टाइल लैंड होती है तो फटाफट करके पौधे आना शुरू हो जाएंगे 18 19 20 25 साल की उम्र में तो पत्थर पे पानी डाल के पौधे बढ़ाने की बात है तो नेचुरली वो तो बड़ा ही ये कष्टदायक होगा ही होगा सो सॉल्यूशन वे वेरी इजी वेरी सिंपल कि नेक्स्ट जनरेशन को हम इस तरह से सिस्टम खड़ी करें कि राइट फ्रॉम द प्री केजी दे स्टार्ट लर्निंग योगा एंड वेदांता तो दैट सॉल्यूशन इज वेरी सिंपल वेरी क्लियर अभी प्रश्न है कि अपना क्या बूढ़े हो गए हैं और अभी इस रास्ते पे आए हैं अपना क्या अपना ऐसा है कि देखिए नित्य सत्संग के अलावा और कोई उपाय नहीं है जैसे कि वह मकड़ी अपना जाल बनाती वो जो वो जो यह है ना वो बड़ी फेमस कहानी है एक विद्यार्थी था गुरु के पास में शिक्षा लेता था वो उसके अकल में कुछ जाता नहीं था तो गुरु ने कहा तुम बिल्कुल पत्थर जैसी बुद्धि है तुम्हारी क्या कुछ सीखो ग नहीं तो वो विद्यार्थी बेचारा नाराज होकर चला गया ते से जा रहा है प्यास लगी कुए के पास में गया पानी कोई महिला कोई खड़ी थी उसको वो कुए में से वो बालती में से पानी भर के निकाल के पिलाया तो विद्यार्थी ने क्या ऑब्जर्व किया कुए की जो दीवाल है पत्थर की दीवाल है किंतु प्रतिदिन रस्सी उसके साथ में घिस है बोलकर के उसके भीतर में ये हो गए हैं पूरा चैनल बन गया है तो वो सोचा कि प्रतिदिन रस्सी जद पत्थर के साथ में घिसे गी तो पत्थर जदी उसको तोड़ देती है उसमें इस तरह से यह बना देती है चैनल तो फिर मैं तो इसको पत्थर जितना तो बुद्धू नहीं हूं मैं फिर वो वापस गया और फिर से वो स्टडी करके काफी बड़ा विद्वान हो गया मैं भूल गया क्या था उसका नाम व्हाट एवर तो देखिए कि प्रतिदिन सत्संग कालिदास कालिदास अच्छा अच्छा अच्छा कालिदास अच्छा अच्छा तो देखिए कि यदि ये प्रतिदिन का जो सत्संग है दिस इज आवर ओनली सोल्यूशन इसके अलावा तो ऐसा तो होने वाला नहीं है कि मैं रिट्रीट में जाऊं या मायावती में सप्ताह भर का रिट्रीट के बाद में वापस आऊं तो हमेशा के लिए हिमालय की शांति मेरे साथ बनी रहेगी ऐसा कभी होने वाला नहीं