Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Swami Vivekananda Life ·

An Insight into Swami Vivekananda's Life 15 Aug 2024

Transcript

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते न तो आज स्वामी जी के आखिरी दिन के बारे में हम डिस्कस करेंगे हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी यूरोप में अमेरिका में अपनी सेकंड यात्रा को समाप्त करके भारत की ओर आ रहे हैं भारत में आकर के हमने देखा कि पहली विजिट की पहली विजिट और सेकंड विजिट इन दोनों के बीच में कंट्रास्ट देखिए कि पहली बार जब भारत वापस आए थे तो पूरा भारत जैसे कि उत्सुकता से उनकी राह देख रहा था उनको वेलकम करने के लिए आतुरता पूर्वक राह देख रहा था सेकंड टाइम जब स्वामी जी भारत आए तो पता चला कि किसी को कुछ भी पता नहीं है और यहां तक कि बेलूरमठ में भी पता नहीं के स्वामी जी भारत आ रहे हैं स्वामी जी जब वो डाइनिंग हॉल में प्रवेश किए तो सभी लोग बड़े ही आश्चर्य चकित हो गए थे तो वह हुआ स्वामी जी का सेकंड टाइम भारत में आगमन और फिर वहां से इमीडिएट स्वामी जी मायावती जाने के लिए निकल गए क्योंकि कैप्टन सेवियर का उस समय मृत्यु हो चुका था और मिसेस सेवियर वहां पर अकेली थी तो उनको सांत्वना देने के लिए कि यह दोनों ब्रिटिश दंपति जिस तरह से अपना सर्वस्व त्याग करके भारत में स्वा स्वामी जी के कार्य के लिए हिमालय में मठ स्थापन करने के लिए जो अपना सर्वस्व त्याग करके भारत आए थे तो वो उनका एक जो स्वामी जी के प्रति इतनी निष्ठा थी इतना एक डेडिकेशन था तो उनके मृत्यु के समय जद स्वामी जी न जाए तो फिर वह कैसा लगेगा इसलिए स्वामी जी वहां पर गए और वह जो जर्नी का विवरण है कि किस तरह से वह पूरा वो उस दिन बर्फ का तूफान था रात को उनको एक कुटिया में आश्रय लेना पड़ा था फिर वो किस तरह से घोड़े पर सवार होकर के गए थे विरजानंद जी ने बहुत ही सुंदर उस दिन का वर्णन किया है तो और फिर जब मायावती में रहे वह कुछ दिन वह भी बड़े ही सुंदर दिन थे वो विरजानंद जी की स्टोरी ऑफ एन इपोक पुस्तक है बहुत ही सुंदर पुस्तक है उसमें यह पूरा विजिट का वर्णन है उसके बाद में स्वामी जी मठ वापस लौट आए धीरे-धीरे करके उनकी सेहत और खराब हो रही है उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे करके ज्यादा से ज्यादा जैसे कहेंगे कि एक मृत्यु का एक फिर भी किसी को ऐसा नहीं लग रहा था कि स्वामी जी एक्चुअली मृत्यु को प्राप्त करेंगे स्वामी जी महासमाधि प्राप्त करेंगे क्योंकि उनकी उम्र तो अभी कुछ भी नहीं थी 39 इयर्स ऑलमोस्ट हुए थे तो इतनी छोटी उम्र में स्वामी जी चले जाएंगे उनके गुरु भाइयों को यह आशा कभी भी नहीं थी उनके गुरु भाइयों को यह अंदाजा कभी नहीं था तो स्वामी जी भले ही चाहे उनकी तबीयत उनकी हेल्थ बिगड़ती रहे किंतु वो हमारे बीच में ही रहेंगे ऐसा उनको था तो उसी दौरान स्वामी जी ने ईस्ट बंगोल के की यात्रा की जहां पे वो कामाख्या वगैरह अपनी मां को लेकर के गए वहां पे ढाका में उन्होंने प्रवचन भी दिए नाग महाशय के वहां पे भी गए नाग महाशय के वहां की घटना बड़ी सुंदर है नाग महाशय का तो देहांत हो चुका था उस समय किंतु उनकी जो धर्मपत्नी थी वह वहां पर थी और उन्होंने स्वामी जी के लिए बड़े ही सुंदर पकवान बना करर के उनको खिलाए थे स्वामी जी कहते हैं कि वहां पर एक जलाशय था वहां पर मैंने स्नान किया और स्नान करने के बाद में मैं सो गया तो मेरे पूरे जीवन में इतनी सुंदर निद्रा जो हुई है ऐसी बहुत कम घटनाएं हैं स्वामी जी को जनरली नींद नहीं आती थी रात को अभी जो भी कहे ये काम का टेंशन कहो की एक आध्यात्मिक चिंतन धारा बह रही है उनके मन में वो कहो तो जो भी रीजन है स्वामी जी कभी भी ठीक से सोए नहीं है तो किंतु जो उनको जो बहुत अच्छी ंदर आई है स्वामी जी के जीवन में ऐसे जो कुछ दिन है चंद दिन जो है उसमें से यह एक दिन था नाग महाशय के वहां पे कि उनकी पत्नी ने नाग महाशय की पत्नी ने इतना स्वामी जी को श्रद्धापूर्वक आदर सत्कार किया इतना सुंदर खाना खिलाया कि स्वामी जी कहते हैं स्नान करने के बाद में मैंने जोर से इतना सुंदर मुझे इतनी लंबी नींद आई जैसे कि पूरे जन्म की थकावट जैसे कि वो वहां पर समाप्त हो गई हो उनको विश्राम मिला तो वहां से फिर वापस आए बेलूरमठ और बेलूरमठ से बेलूरमठ वापस आने के बाद में वह जापानीज जो थे ओकाकुरा वगैरह एक दो लोग आए थे तो उनको लेकर के स्वामी जी बोध गया और वाराणसी गए थे स्वामी जी ने कहा था जब लास्ट टाइम वाराणसी आए थे तो अभी मैं यहां पर तभी वापस आऊंगा जबकि मैं अ एक बम की तरह एक विस्फोट करके पूरे सिटी पर छा जाऊं ऐसी मेरे पर जदी शक्ति होगी ताकत होगी तभी मैं वाराणसी वापस आऊंगा ऐसा स्वामी जी ने कहा था तो नेचरली स्वामी जी जब इस समय वाराणसी गए तो विश्व विजय स्वामी जी कितने लोगों ने उनका स्वागत किया महाराजा ऑफ भंगा बोलकर के एक थे उन्होंने स्वामी जी को कहा भी सही कि आप यहां पे मठ स्थापित कीजिए मैं आपको आर्थिक सहाय करूंगा तो स्वामी जी ने फिर शिवानंद जी महाराज को काशी में भेज दिया था कि आप जाइए मठ की स्थापना कीजिए तो फिर वहां पर ही धीरे-धीरे करके स्वामी जी के आदर्श के अनुसार कुछ बंगाली युवक वो रामकृष्ण सेवाश्रम की उन्होंने स्थापना की और यह रोगियों के लिए अस्पताल शुरू किया उन्होंने उनको चिकित्सा देने के लिए कुछ व्यवस्था की तो वह काशी सेवाश्रम का प्रारंभ काशी अद्वैता आश्रम का प्रारंभ इस तरह से हुआ था तो वो हो गया वही आखिरी स्वामी जी की सफर वहां से जो स्वामी जी बेलूरमठ लौटे तो फिर वह वहां से फिर कभी उन्होंने यात्रा नहीं की और फिर बेलूरमठ लौट कर के भी ऐसा तो नहीं है कि स्वामी जी चुपचाप बैठे रहेंगे वही सभी ब्रह्मचार्य साधुओं को लेकर के हंसी मजाक पुराने दिनों की बातें स्वामी जी संस्कृत का क्लास लेते थे ब्रह्मचार्य का वेदांत उपनिषद का क्लास लेते थे अपने गुरु भाइयों को समझाते थे कि किस तरह से मठ को चलाना है नियमावली का पालन किस तरह से करना है कुछ-कुछ घटनाएं अभी यह घटना इस समय की है कि बात की है मुझे एगजैक्टली ख्याल नहीं किंतु मैं अनुमान कर लेता हूं कि यही आखिरी दिनों की ही स्वामी जी की जीवन की ये घटना होगी कि जबकि स्वामी जी ने विज्ञान महाराज को कहा कि गंगा के किनारे घाट बनाना है तो विज्ञान महाराज को कहा कि तुम एक एस्टीमेट दो फिर मैं एस्टीमेट शरू करूंगा तुम घाट बनाने का प्रारंभ कर देना तो विज्ञान महाराज ने एस्टीमेट दिया फिर घाट बनाने का काम प्रारंभ हुआ उस समय की एक सुंदर घटना कि एक बार बड़ी कड़ी धूप में वहां पर विज्ञान महाराज खड़े थे और जो मजदूर लोग कार्य कर रहे थे तो सुपरविजन कर रहे थे गाइड कर रहे थे उस समय स्वामी जी अपने कमरे की बरामदे में खड़े थे देख रहे थे विज्ञान महाराज को तो किसी ने लाकर के उनको शरबत दिया तो स्वामी जी ने पूरा शरबत पिया फिर फिर ये ग्लास जो था वो ब्रह्मचारी को कहा कि जा कर के महाराज को देके आओ विज्ञान महाराज को तो विज्ञानानंद जी महाराज अर्थात कि ठाकुर के सन्यासी शिष्य स्वामी जी के गुरु भाई तो विज्ञान महाराज को देने के लिए गया ये ब्रह्मचारी तो विज्ञान महाराज ने देखा अरे उसमें तो सिर्फ एक थोड़ा सा एक बूंद जितना ही शरबत बचा है तो उन्होंने सोचा स्वामी जी क्या मेरे साथ में ये मजाक कर रहा है मेरी मेरे ऊपर में कटाक्ष कर रहा है मैं यहां पर धूप में पसीने में खड़ा हूं और मेरे लिए बस इतना बूंद भर शरबत भेजा कि तो ठीक है चलिए स्वामी जी का प्रसाद है तो मैं पी जाता हूं ऐसा करके एक बूंद जो शरबत बचा था वह पिया उसी में ही उनके पूरे शरीर में शीतलता फैल गई उनकी प्यास उनकी थकावट संपूर्ण रूप से दूर हो गई उसी समय की एक दूसरी भी घटना है कि एक सन्यासी वहां पर बीमार था निर्भयानंद मोस्ट प्रोबेबली तो उस समय डॉक्टर लोग उनकी चिकित्सा तो कर रहे थे किंतु लग रहा था कि कोई परिणाम चिकित्सा नहीं आने वाला तो उस समय जाकर के स्वामी जी ने ठाकुर के पास में प्रार्थना की ठाकुर का चरणामृत उनको दिया उसमें भी एक अभी यह दो डिफरेंट घटनाएं है कि एक ही घटना उसका मुझे पता नहीं किंतु ऐसी ही दो घटनाएं हैं मैं साथ में मिला कर के कह रहा हूं शायद एक ही घटना ही हो सकती है मुझे पता नहीं कि स्वामी जी ने उस समय एक दूसरे महाराज को कहा वो दूसरे महाराज थे ज्ञान महाराज वो काफी मने उनके काफी फिजिकली बड़े स्ट्रांग थे मेंटली भी बड़े स्ट्रांग थे तो स्वामी जी ने उनको कहा कि जाओ ठाकुर का चरणामृत लेकर के आओ रोगी के लिए तो चरणामृत पिएगा तो वो स ठीक हो जाएगा तो ऐसा अभी ज्ञान महाराज ये बात सुनकर के हंस दिए क्योंकि स्वामी जी ऑन वन हैंड विदेश से वापस आए हैं इतना मॉडर्न टेक्नोलॉजी मॉडर्न मेडिसिन इस सब की बातें कर रहे हैं मठ में फिल्टर बिठाया है सबको ये सैनिटेशन और हाइजीन के बारे में उपदेश दे रहे हैं निवेदिता आकर के साइंस के बारे में साधु ब्रह्मचार्य का क्लास ले रही है और यहां पर स्वामी जी है कि कोई बीमार हुआ तो ठाकुर का चरणामृत पिलाओ यह सब क्या पुराने जमाने में वापस चले जाना ऐसा कुछ सोच कर के मुंह से तो बोलेंगे नहीं सोच कर के उनको थोड़ी सी हंसी आ गई कि स्वामी जी भी ऐसा कर रहे हैं तो ऐसा देख कर के स्वामी जी ने इमीडिएट कहा कि तुम तुमको जाने की जरूरत नहीं है मैं ही चरणामृत लेकर के आता हूं क्योंकि यह जो सब लगता है पुरानी चीजें किंतु भाव भक्ति और विश्वास यदि इसमें डाले जाए तो इसके भीतर में भी आश्चर्यजनक परिणाम लाने की संभावनाएं हैं आज हम यह कुछ ऐसा कुछ करेंगे मंदिर में जाकर के प्रार्थना करेंगे कि हां मेरी बीमारी वगैरह दूर हो जाए तो शायद नहीं होगी क्यों नहीं होगी क्योंकि हमारा ईश्वर के ऊपर में इतनी श्रद्धा नहीं है यहां पे स्वामी जी की ठाकुर के ऊपर में इतनी श्रद्धा थी कि वो सन्यासी जो था जो बीमार था वो आखिर में सही सही ठीक हो गया उसका स्वास्थ्य धार हो गया तो अभी जैसे मैंने कहा कि ये दोनों एक ही घटनाएं है कि अलग है मुझे पता नहीं किंतु दोनों का एक साथ में वर्णन कर दिया अच्छा और एक घटना थी उस समय वहां पर एक कोई महाराजा बेलूर कलकाता की मुलाकात के लिए आए थे तो अभी क्या है कि स्वामी जी आखिरी घड़ी तक जैसे हमने देखा ना कल की निवेदिता आखिरी घड़ी तक ब्रिटनी में जहां पर स्वामी जी के साथ में मुलाकात हुई थी वहां पर भी निवेदिता स्वामी जी को प्रश्न कर रही थी तो स्वामी जी ने यहां तक कि ठाकुर के आखिरी घड़ी में प्रश्न किया था मुंह से तो नहीं मन में सोच करके कि ठाकुर यदि इस समय कहे कि वह अवतार है तो मैं मानूं तो यह प्रश्नों की सिलसिला किंतु यहां तक मैंने ठाकुर की महासमाधि तक नहीं उनकी खुद की महासमाधि तक बना रहा यहां तक कि ठाकुर ने मंदिर में जाकर के स्वामी जी ने मंदिर में जाकर के ठाकुर को पूछा ठाकुर के सामने जैसे कि टेस्ट किया कि तुम यदि सही सही ठीक हो आप यदि सही सही अवतार है तो मैं तभी विश्वास करूंगा जबकि यह महाराजा मठ की मुलाकात लेते हैं और स्वामी जी को पता था कि ये जो महाराजा है वो मठ में आने वाले नहीं है वो बड़े अपने को इंपोर्टेंट समझते हैं तो अभी स्वामी जी ने मन में यह संकल्प लिया किंतु मठ में किसी को बताया नहीं सब संकल्प सिर्फ अपने मन में ही रखा अभी कुछ दिनों के बाद ऐसा हुआ कि जब यह महाराजा वो कहीं पे जा रहे थे तो मठ के पास में आकर के उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और किसी को भेजा मठ में ये इंक्वायरी करने के लिए कि जाओ जाकर के देख के आओ कि स्वामी जी मठ में है कि नहीं तो जब वो यह व्यक्ति जब मठ में पूछने के लिए आया उस समय स्वामी जी कलकत्ता किसी काम के लिए गए थे तो उन्होंने वापस आकर के कहा कि नहीं स्वामी जी मठ में नहीं है तो महाराजा ने कहा अच्छा ठीक है और वो वापस चले गए मेनली वो स्वामी जी को मिलना चाहते थे मठ के प्रति हो सकता है कि उनका इतना यह ना हो मन श्रद्धा जो भी है अभी स्वामी जी कलकाता से वापस आए मठ में बेलूर मठ में तब उनके किसी ने साधु ने कहा कि वो महाराजा आए थे वो आपसे आपके साथ में मुलाकात करना चाहते थे उनके किसी को भेजा था इंक्वायरी करने के लिए आप नहीं थे तो वो वापस चले गए तब कहीं जाकर ने स्वामी जी ने अपनी यह बात कि यह जो ठाकुर की परीक्षा करने के लिए ऐसा जो उन्होंने कहा था कि जदी वह महाराजा मठ में आएंगे तो मैं स्वीकार करूंगा कि आप सही सही अवतार है तो स्वामी जी ने यह बात अपने गुरु भाइयों को बताई और वे लोग भी बड़े आश्चर्य चकित हो गए कि देखिए कि किस तरह से ठाकुर उनके मन की इच्छा को समझ करके उसको पूर्ण करते हैं अभी किस तरह से आप इसको इंटरप्रेट करेंगे कि ठाकुर अपना अवतार क्व प्रूव करना चाहते हैं इसलिए उन्होंने ऐसा किया नहीं कि अपने भक्त का अपने संतान के मन की बात रखने के लिए उन्होंने ऐसा कहा इंटरप्रिटेशन बहुत सारे हो सकते हैं किंतु ये घटना यह यहां तक हमको पता है कि यह सही है और फिर इसके बाद में वही आखिरी दिन धीरे-धीरे और और फिर उस समय की जो विवरण है स्वामी जी के आखिरी दिनों का उसमें यह भी है कि स्वामी जी यह सब पशु पक्षियों को पाल करके रखे थे एक हंस था एक कुत्ता था फिर ये एक गाय थी और फिर ये उसमें भी क्या था राजा महाराज का एक बगीचा था व राजा महाराज को ये फूल वगैरह वो सब वो बड़ा अच्छा लगता था वो एक गार्डन बनाते थे गार्डन में खुद में हो सकता है कभी-कभी कुछ ना कुछ काम करेंगे तो वो राजा महाराज का था और स्वामी जी के ये सब पशु पक्षी थे तो अभी दोनों के बीच में झगड़ा भी होता था कि ये राजा महाराज कहते थे आपकी ये जो बकरी है ये आपका ये जो गाय है वो मेरे गार्डन में आकर के फूल खा जाता है और वो सब पौधों को नष्ट कर देता है तो स्वामी जी भी नाराज होकर बोलते थे जैसे वो एक झगड़ा होता है ना भाई भाई का आपस में मीठा झगड़ा प्रेम भरा झगड़ा तो स्वामी जी नाराज हो कर के बोलते अच्छा ठीक है यहां पे एक बाउंड्री लाइन खींच दो यहां के इस बाउंड्री के बाद में तुम्हारा गार्डन और इस बाउंड्री के इस पार में मेरे पशु पक्षी रहेंगे और यह एक दोनों को यहां पर नहीं आना है इस बाउंड्री के इस और तुम अपने पौधे मत लगाना और इस बाउंड्री के इसर में अपने पशुओं को नहीं आने दूंगा और फिर अभी यह तो क्या है कि बेचारे पशु पक्षियों को तो पता नहीं इस तरह की बाउंड्री है तो वो बीच-बीच में जाकर के कुछ ना कुछ गड़बड़ करके आते थे और फिर दोनों में झगड़ा तो देखिए कि ठाकुर ने जो कहा है ना कि भगवान दो तीन बार हंसते हैं उसमें एक बार जब डॉक्टर कहता है कि चिंता मत करो मैं आपके लड़के को ठीक कर दूंगा फिर एक बार वो जब दो भाई आपस में एक रेखा खींच करके कहते हैं एक लाइन खींच करके कि इस र की जमीन तुम्हारी इस और की मेरी और वो और ये देखिए कि कैसा एक कंट्रास्ट है वो एक है कि आप माया में डूब कर के मोह से अंध हो कर के आप यह सब करते हैं और यहां पे यह दोनों का मन इतना उच्च आध्यात्मिक शिखर पर विराजमान है कि जमीन पर रखने के लिए उनको यह सब माया मोह का आवरण एक पहनना पड़ता है राजा महाराज वो कभी वो किसी इसके किनारे तालाब के किनारे बैठ कर के मछली पकड़ेंगे तो अभी यह बात नहीं है कि मछली खानी है पैसा कमाने का लोभ है नहीं अपने मन को कैसे भी करके खींच के जमीन पर रखना है और जैसे ठाकुर कहते थे ना समाधि में चले जाते थे भाव में चले जाते थे फिर भक्तों के साथ बात करनी है तो कोई एक संकल्प लेंगे कि मैं तमाकू खाऊंगा फिर मैं हुका पिऊंगा मैं बाह्य शोच के लिए जाऊंगा यह कुछ पूरी या मिठाई खाऊंगा ऐसा कुछ संकल्प लेते थे तब कहीं जाकर के उनका मन सामान्य भूमि पर आता था हम लोगों का उल्टा है हमको माया मोह से दूर होकर के माया मोह का त्याग करके आध्यात्मिक जगत में उच्च गति प्राप्त करनी है इन लोगों को जगत में कल्याण करने के लिए हम लोगों का जगत में वापस आकर के उस ऊंचाई से वापस आकर के रहना है हम लोगों के बीच में इसलिए वो माया मोह का एक मुखो पहनते थे एक मास्क पहनते थे तो वो आखिरी और वो स्वामी जी का एक कुत्ता था बाघा बोल कर के तो बाघा को स्वामी जी बड़ा प्रेम करते थे साधु लोग बीच-बीच में उसको भगा भी देते थे तो कैसे भी करके स्वामी जी के कमरे के सामने आकर के वो लेट जाता था क्योंकि उसको पता था कि यदि स्वामी जी की शरण प्राप्त हो गई तो कोई भी उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा तो स्वामी जी की महासमाधि के बाद में बाघा भी उसका भी मृत्यु हो गया तो इन लोगों ने साधुओं ने क्या किया उसकी डेट बॉडी को गंगा में फेंक दिया अभी भरती आई तो देखा कि वही डेड बॉडी आकर के फिर से मठ के किनारे आकर के लग गई है तो मैंने मृत्यु के समय में भी जैसे कि वह मठ को नहीं छोड़ना चाहता तब कहीं ब्रह्मचारी ने किसी ने कहा साधु ने कि आप बड़े सीनियर साधु जो होंगे उनको कहा कि आप अनुमति दीजिए तो मठ में ही इसको दफन कर देते हैं तो उसको मठ में ही दफनाया गया और वहां पर कुछ ईंट वगैरह रखा गया जगह को मार्क करने के लिए तो ये वो बा की कहानी ऐसी ही एक केस्टो बोल कर के एक था व जैसे वहां पे वो जो कंस्ट्रक्शन वर्क उस समय मठ में चल रहा था तो कुछ जो सांता वगैरह जो लेबरर्स वहां पर काम करते थे तो स्वामी जी की इनके प्रति श्रद्धा इनके प्रति करुणा जो थी इनका जीवन उतना कष्टम जीवन तो सब समय स्वामी जी क्या करते थे इन लोगों के पास में जाकर के उनके जीवन के बारे में उनके बचपन के बारे में यह लोग कैसे र रहते हैं क्या खाते हैं यह सब पूछते रहते थे तो केस्टो बोलक के एक लेबरर था वहां पे उसके साथ में स्वामी जी को बात करना बड़ा अच्छा लगता था यहां तक कि एक दिन उसके साथ में बात कर रहे हैं और कलकाता से कोई वीआईपी उनको मिलने के लिए आया तो स्वामी जी ने मना कर दिया बोलो कि अभी मैं मुलाकात नहीं कर पाऊंगा अभी मैं बिजी हूं बिजी थे तो क्या कर रहे थे तो केस्टो के साथ में गप लगा रहे थे तो अभी केस्टो की दर्द अपनी जो दुख भरी कहानी सुनकर के स्वामी जी की आंखों में आंसू आ जाते थे क्योंकि ये छोटे-छोटे गांव है उसमें रहना भी किस तरह से अकाल पड़ता था इकोनॉमिक अपॉर्चुनिटी तो कुछ था नहीं अखंडानंद जी की एक कहानी है मुझे हमेशा के लिए जैसे कि याद रह जाएगी कि वो अकाल हुआ था वहां पे तो गांव-गांव जा रहे थे टिकट बांटने के लिए तो इस तरह से था कि जो इन जिनको टिकट घर का सर्वे करके टिकट देंगे और फिर कहेंगे इस दिन आकर के यहां पर टिकट लेकर के आइएगा आपको अनाज वगैरह मिल जाएगा टिकट में लिखा होगा आपके घर में इतने लोग हैं और इतना आना चाहिए तो घर-घर सर्वे करके टिकट देते थे तो एक दिन कहीं से जा रहे थे तो किसी ने कहा यहां पे एक गांव है तो अखंडानंद जी कहते कहां ये तो गांव तो दिख नहीं रहा है पूरा अंधेरा है तो वो कहा नहीं नहीं ये लोग के पास में तो दिया जलाने के लिए भी पैसा नहीं है कोई साधन नहीं है इसलिए ये लोग अंधेरे में रहते हैं तो अखंडानंद जी कहते हैं कि वोह गांव में जाकर के देखा जैसे लगा कि जैसे भूत रहते हैं यहां पर संपूर्ण अंधकार आप पास में से जाएंगे किसी को पता भी नहीं चलेगा कि यहां पर गांव है अंधेरा घर इस पूरे अंधेरे में बच्चे बच्चियां माताजी पिताजी यह सब रहते हैं तो अखंडानंद जी कहते हैं कि इस तरह से रहना एक किसा मने कष्टम कैसा एक भयावह जीवन है ठाकुर किसी के घर एक भक्त के घर गए थे तो वैसे तो घर में पूरा दिया जलाया हुआ था आलोक से प्रकाशित था पूरा घर किंतु फिर भी ठाकुर ने कहा कि इस कमरे में उजाला नहीं है इस कमरे में भी उजाला लगाओ इस कमरे में भी दिया लगाओ व जहां पर अंधेरा होगा वहां से लक्ष्मी जो है श्री जो है वहां से चली जाती है तो मैंने उजाले से भरा हुआ घर है उसमें भी ठाकुर को संतोष नहीं हुआ कि इस घर में क्यों नहीं है और यहां पे पूरा गांव अंधेरा में एक घर में भी एक भी दिया नहीं जैसे लोग भूत की तरह रहते हो तो वो उस समय के बंगाल के गांव की परिस्थिति थी तो यह केस्टो जब स्वामी जी को अपनी सब दुख की कहानी बताता था तो स्वामी जी की आंखों में आंसू आ जाते थे और केस्टो कहता था कि एक काम कीजिए अभी मैं आपको ना मेरे कोई कोई भी कहानी मैं आपको नहीं बताऊंगा क्यों क्योंकि मेरी बातें सुनकर के आपको रोना आ जाता है तो मुझे नहीं अच्छा लगता देखिए कि केस्टो का हृदय कैसा मतलब यह बड़ा है कि अपनी दुख की बातें सुनकर के स्वामी जी को कष्ट होता है तो स्वामी जी का कष्ट नहीं देख पाता अभी स्वामी जी को तो सिर्फ सुन कर के कष्ट होता है इसको तो बेचारे को जीना है उस जीवन में तो किंतु फिर भी स्वामी जी को कष्ट ना हो इसलिए वह अपना कष्ट छुपा करके रखता है फिर अभी ऐसा होता था कि अद्वैतानंद जी महाराज उस समय ये थोड़ा सा सुपरविजन किया करते थे कि ये लेबर लोग किस तरह से काम करते हैं तो स्वामी जी जब इन लोगों के साथ में गप लगाने को जाते थे तो केस्टो कहता था कि अरे बाबा जी आप एक काम कीजिए आप यहां से चले जाइए क्योंकि आप हमारे साथ में गप लगा कर के जो टाइम वेस्ट करवाते हैं हमारा फिर वो बूढ़े बाबा है वो आकर के हमारे पर नाराज हो जाते हैं कहते हैं तुम लोगों ने काम नहीं किया ये नहीं किया तो स्वामी जी बड़े ही करुणा पूर्वक कहते थे नहीं नहीं मैं बूढ़े बाबा को कह दूंगा कि आपको डांट नहीं आप मेरे साथ बात कीजिए तो यह था स्वामी जी का पृथ्वी पर जो आखिरी आखिरी दिन उसके बाद में निवेदिता का बड़ा ही सुंदर वर्णन है उस दिन का मैं थोड़ा सा इस किताब में से थोड़ा सा पाठ करता हूं निवेदिता स्वामी जी के आखिरी समय में भारत आई थी अच्छा स्वामी जी ने उस समय अपने सभी डिसाइल को पत्र लिखना शुरू किया था कि आप आइए और मेरे साथ में मुलाकात कीजिए मेरे साथ में बात कीजिए तो जो लोग आप पाए स्वामी जी को मिलने के लिए वे लोग धन्य हो गए क्योंकि पता चला कि बाद में पता चला कि ये तो स्वामी जी का अंतिम समय है और जो नहीं आ पाए थे वोह हमेशा के लिए एक रिग्रेट करके रह गए कि स्वामी जी ने लेटर लिखा और हम किसी कार्य की वजह से नहीं जा पाए तो यह स्वामी जी का आखिरी समय उस समय निवेदिता भी वहां पे आई थी और निवेदिता की स्वामी जी के साथ में आखिरी मुलाकात आई थिंक सेकंड जुलाई को हुई थी तो निवेदिता का जो वर्णन है उस समय का वो थोड़ा सा मैं पढ़ता हूं निवेदिता लिखती है व्हेन जून क्लोज्ड हाउ एवर ही न्यू वेल इनफ दैट द एंड वाज नियर जब जून का अंत हुआ जून महीने का हमको पता है कि जुलाई फर्थ को स्वामी जी की महासमाधि हुई थी उस महासमाधि से कुछ दिन पहले स्वामी जी ने वह पंचांग मंगा करके पूछा था किसी को कहा था कि पंचांग लेकर के आओ तो यह पंचांग लाया गया और स्वामी जी उसमें डेट खोज रहे हैं तो लोगों को लगा कि यह काली पूजा के बारे में शायद देख रहे होंगे क्योंकि स्वामी जी की इच्छा थी कि शनिवार को काली पूजा की जाए तो वो शायद आई थिंक उनकी महासमाधि के बाद का ही दूसरे दिन का दिन था तो सभी लोग शायद ऐसा सोच रहे हैं कि स्वामी जी काली पूजा के बारे में बात कर रहे हैं किंतु असली बात यह थी कि स्वामी जी अपने खुद के मृत्यु का दिन वो चयन कर रहे थे सिलेक्ट कर रहे थे और जो दिन उन्होंने सिलेक्ट किया था दैट वाज दी अमेरिकन इंडिपेंडेंस डे और देखिए आज हमारा इंडियन इंडिपेंडेंस डे है तो ये कैसा कोइंसिडेंस तो वो स्वामी जी ने दिन जो सिलेक्ट किया था दैट वाज अमेरिकन इंडिपेंडेंस डे तो यहां पे निवेदिता लिखती है कि जून के अंत तक स्वामी जी को पता था कि अभी उनका आखिरी समय आ चुका है या तो फिर कहेंगे कि उन्होंने ठीक कर लिया था कि अभी पृथ्वी पर मेरा कार्यकाल समाप्त हो चुका है स्वामी जी ने ने कहा एक सप्ताह पहले कहा था अ ग्रेट तपस्या एंड मेडिटेशन हैज कम अपॉन मी एंड आई एम मेकिंग रेडी फॉर डेथ एक महा तपस्या और ध्यानम शांति मेरे पर सवार हो चुके हैं और मैं मृत्यु के लिए तैयार हो रहा हूं ऐसा स्वामी जी ने एक सप्ताह पहले कहा था उसके बाद में निजा कहती है एंड वी हु डिड नॉट ड्रीम ट ही वुड लीव अस टिल एटलीस्ट सम थ्री और फोर इयर्स हैड पाड न्यू नेवर द लेस ट द वर्ड्स वेर ट्रू हम जो कि उनके डिसाइल थे भले ही स्वामी जी यह कहे कि हां महा शांति मेरे सर पे सवार हो गई है और मैं मृत्यु के लिए तैयारी कर रहा हूं तो हम लोग सोच रहे हैं कि अरे यह तो हां ठीक है भविष्य में और तीन चार साल के बाद की बात होगी और भी तो तीन चार साल स्वामी जी के पास में हमारे साथ में रहेंगे तो मन से तो ऐसा सोच रहे हैं किंतु हृदय में उनको पता है कि नहीं स्वामी जी ने आखिर में महाप्रयाण करने के लिए उन्होंने निश्चय कर लिया है देखिए कि मन और हृदय मन से तो हम बहुत कुछ सोचते हैं हृदय को सब कुछ सच सच पता होता है किंतु हृदय की बात को हम स्वीकार करना नहीं चाहते क्योंकि उससे जो कष्ट होगा वह हम सहन नहीं कर पाएंगे न्यूज ऑफ द व वर्ल्ड मेट बट अ फार अवे रिजोर फ्रॉम हिम एट दिस टाइम जब जगत की कोई घटनाएं उनके पास में आती थी वर्णन की जाती थी तो उसको वह ज्यादा ध्यान नहीं देते थे इवन अ वर्ड ऑफ एंजाइटी एज टू द स्कार्सिटी ऑफ द रेन सीम ऑलमोस्ट टू पास हिम बाय जज इन ए ड्रीम बारिश नहीं हो रही है यह समाचार उनको सुनाया गया माने ये जो सब डिस्कशन होता है इन जनरली तो स्वामी जी ने इस कोई भी प्रतिवाद प्रतिभावन दिया इट वाज यूजलेस टू आस्क हिम नाउ फॉर एन ओपिनियन ऑन द क्वेश्चंस ऑफ द डे उस समय के जो सब प्रश्न थे उस समय की जो सब समस्या थी स्वामी जी के सामने जाकर के वर्णन करने से किसी भी तरह का प्रतिभा उसका उसका उत्तर मिलना मुश्किल था यू मे बी राइट ही सेड क्वाइट बट आई कैन नॉट एंटर एनी मोर इनटू दिस मैटर्स आई एम गो डाउन इनटू डेथ स्वामी जी जद किसी भी तरह की समस्या लाएगी उनके सामने तो फिर वह कहेंगे कि मैं अभी इसके बारे में ज्यादा विचार नहीं कर पाऊंगा क्योंकि मैं महाप्रयाण की ओर अग्रसर हो रहा हूं वंस इन काश्मीर आफ्टर एन अटैक ऑफ इलनेस आई हैड सीन हिम लिफ्ट अ कपल ऑफ पेबल्स सेइंग येय यहां पर निवेदिता कश्मीर की घटना का वर्णन करती है कहती है कि उस समय एक भयानक बीमारी का एक दौर उनके ऊपर में से पसार हो गया था उस समय स्वामी जी ने दो पत्थर अपने हाथ में लिए और कहा व्हेन एवर डेथ एप्रोचे मी ऑल वीकनेस वेनिश जब भी मृत्यु मुझे मेरे समीप आता है तभी मेरी सभी दुर्बलता एं नष्ट हो जाती है आई हैव नाइ दर फियर नोर डाउट नोर थॉट ऑफ द एक्सटर्नल मेरे भीतर में भय नहीं है संदेह नहीं है बाहर की किसी भी चीज की कोई भी चिंता नहीं है आई सिंपली बिजी माइसेल्फ मेकिंग रेडी टू डाई मैं सिर्फ मृत्यु के लिए तैयारी करता जाता हूं आई एम एज हार्ड एज थट एंड द स्टोन ट्रक वन अनदर इन हिज हैंड अपने हाथ में जो पत्थर लिए थे उसको एक दूसरे के साथ में टकरा करके स्वामी जी ने कहा मैं इस पत्थर की तरह शक्त हूं फॉर आई हैव टच द फीट ऑफ गॉड क्यों क्योंकि मैंने ईश्वर के पाद पद्म स्पर्श किए हैं श्री राम कृष्ण देव के समीप रहा हूं श्री राम कृष्ण देव के आशीर्वाद प्राप्त किए हैं मृत्यु का तनिक भी मुझे डर नहीं है भय नहीं है यह पत्थर की तरह में स्ट्रांग हूं अभी यहां पर जैसे कहते हैं ना वजरा वो एक एक संस्कृत एक है सेंटर मुहावरा मैं भूल गया फूल की तरह कोमल और वज्र की तरह सशक्त अर्थात कि वज्र की तरह सशक्त अर्थात कि माया मोह मृत्यु भय इन सबके सामने एकदम डट कर के खड़ा रहना और लोगों के प्रति जो अपनी भावनाएं हैं अपना भाव है प्रेम है उसके बारे में फूल की तरह कोमल होना तो यहां पर स्वामी जी जब ये कहते हैं कि मैं पत्थर की तरह सशक्त हूं अर्थात यह नहीं है कि वह निष्ठुर है उनको मृत्यु भय नहीं है अदर वाइज तो जहां तक प्रेम का प्रश्न है प्रेम की बात है फूल की तरह कोमल है ये केस्टो की जो बात कही कि केस्टो की बात सुनक के ही उनकी आंखों में आंसू आ जाता था यहां तक कि बेचारा केस्टो जो इतना कठिन जीवन जी रहा है वो नहीं सहन कर पाता था स्वामी जी के आंसू तो जहां तक लोगों के प्रति प्रेम की बात है फूल की तरह कोमल किंतु मृत्यु भय है वहां पर पत्थर की तरह सशक्त और क्यों क्योंकि ईश्वर के पाद पद्म स्पर्श किए हैं ईश्वर का आशीर्वाद मिला है पर्सनल रेवलेशन वास सो रेयर विद हिम दैट दिस वर्ड्स कुड नेवर बी फॉरगॉटेन अपने बारे में स्वामी जी इतनी कम बातें करते थे कि यह जो एक बात स्वामी जी ने कही यह से ही हमको एक बड़ा आश्चर्य होता है कि स्वामी जी ने अपनी पर्सनल इतनी गहन बात कही वो मेरे साथ में शेयर की अभी जैसे देखिए कि जिसके साथ में स्वामी जी यह सब शेयर करते हैं वो भी तो बड़े भाग्यवान है ना हमारे साथ में ऐसा कब होता है कि ऐसा कोई मने एक अवतार या तो एक प्रोफेट आ कर के अपने मन की बात हमारे से शेयर करेगा सो वो भी तो कितने भाग्यवान है दैट दिस वर्ड्स कुड नेवर बी फॉरगॉटेन स्वामी जी अपने खुद के बारे में इतना रेयरली बातें करते थे कि यह जो उन्होंने कहा वो हम कभी भी भूल नहीं पाएंगे इसके बाद में काफी कुछ वर्णन है बड़ा ही सुंदर वर्णन मैं सब कुछ स्किप करके निवेदिता के आखिरी दिन तक मैं चला जाता हूं हाउ स्ट्रेंज इट सीम्स नाउ लुकिंग बैक ऑन द टाइम टू रियलाइक्स पेक्टेनीअस है यह इशारा दिया है कि उनका आखिरी समय नजदीक आता जा रहा है यह मृत्यु के बाद में निवेदिता लिखती है महासमाधि के बाद में किंतु हृदय तो स्वीकार करना नहीं चाहेगा मन यह सब बहाना बनाएगा कि ये चलो अभी स्वामी जी भले चाहे मृत्यु के बारे में बोल रहे हो मृत्यु तो सबका आने वाला है जन्म मृत्यु जरा भी अति की साइकिल से तो कोई भी बचने वाला नहीं है उनका भी मृत्यु होने वाला है मेरा भी होने वाला है ठाकुर का भी हुआ था तो वो मृत्यु तो भी पता नहीं कितने साल भविष्य में है तो तो ऐसा करके हम अपने मन को मना रहे हैं किंतु जब सही सही स्वामी जी की महासमाधि हुई उसके बाद में जो घटना वली थी इस महासमाधि तक जाने के लिए उस घटना वली को आप थोड़ा सा ध्यान से फिर से निरीक्षण करते हैं उसके बारे में सोचते हैं तो पता चलेगा कि स्वामी जी ने कितनी ही हिंट दे दी थी कि हां अभी री आखिरी समय नजदीक आ रहा है इट वुड सीम इनडीड ट इन हिज विड्रोल फ्रॉम ऑल वीकनेस एंड अटैचमेंट देर वाज वन एक्सेप्शन यह जो विड्रोल स्वामी जी कर रहे थे जगत से उसमें किंतु एक एक्सेप्शन था एक बात थी जिससे कि वह शायद विड्रो नहीं कर रहे थे क्या ट विच हैड एवर बीन डियर टू हिम देन लाइफ केप्ट स्टिल इट्स पावर टू मूव हिम एक ऐसी बात जिसको कि स्वामी जी मृत्यु तक टाल नहीं पाए इट वाज ऑन द लास्ट संडे बिफोर द एंड दैट ही सेड टू वन ऑफ हिज डिसाइल्स मृत्यु के महासमाधि के पहले के रविवार को स्वामी जी ने अपने एक शिष्य को कहा यू नो तुमको पता है द वर्क इज ऑलवेज माय वक पॉइंट कार्य ठाकुर का कार्य हमेशा से मेरा एक वीक पॉइंट रहा है व्हेन आई थिंक दैट माइट कम टू एन एंड आई एम ऑल अनन जब मैं यह सोचता हूं कि पृथ्वी पे मुझे ठाकुर का जो कार्य करना है वो अभी समाप्त हो रहा है तब मैं पूरा व्हेन आई एम अनन अर्थात कि मैं पूरा निराश हो जाता हूं कि अरे मैं ठाकुर का तो इतना सारा कार्य करना है क्यों मैं पूरा नहीं कर पाया ऐसा सोच कर के थोड़ी सी एक हताशा आ जाती है तो सिर्फ कर्म के लिए किंतु किंतु एक बार स्वामी जी ने कहा था कि जब वो बहुत ही बीमार थे तो उनके मुंह से निकल गया था कि भी और कितना कार्य करेंगे मैंने इनको इतना कार्य इतना जो रूपरेखा कार्य की देक के गया हूं इतना भविष्य का आयोजन करके गया हूं कि इन लोगों को हजारों सालों तक चलेगा और अभी मुझे कितना करना है तो ये कार्य ठाकुर का कार्य अपना खुद का देह जाए अपने प्रियजनों से बिछड़ ना पड़े यह बात का ठाक स्वामी जी को गम नहीं है किंतु ठाकुर का जो कार्य है वो अधूरा छोड़ कर के जाएंगे यह उनके हृदय को व्यतीत कर रहा था ऑन वेनसडे ट इज जुलाई सेकंड महासमाधि के दो दिन पहले की बात ऑफ द सेम वीक द डे बीइंग एकादशी एंड हिमसेल्फ कीपिंग द फास्ट इन ऑल स्ट्रिक्टनेस ही इंसिस्टेड ऑन सर्विंग द मॉर्निंग मिल टू द सेम डिसाइल एकादशी का दिन था महासमाधि के दो दिन पहले की बात थी स्वामी जी अपने से तो उपवास रखे थे किंतु निवेदिता मठ में आई थी तो अपने हाथों से उन्होंने निवेदिता को खाना परोसा इच डिश एज इट वाज ऑफर्ड बॉयल्ड सीड्स ऑफ द जैक फ्रूट बॉयल्ड पोटेटो प्लेन राइस एंड आइस कोल्ड मिल्क फॉर्म द सब्जेक्ट ऑफ प्लेफुल चैट जैसे जैसे स्वामी जी एक के बाद एक पकवान देते गए ठंडा दूध था फिर यह भात था राइस था फिर यह जेक फ्रूट होता है उसके उबले हुए उसके जो सीड्स थे फिर ये बॉयल्ड पोटेटो थे एक के बाद एक जैसे स्वामी जी देते गए कुछ ना कुछ हंसी मजाक भरी बात स्वामी जी साथ-साथ में करते गए एंड फाइनली आखिर में टू द एंड ऑफ द मील ही हिमसेल्फ पोर्ड द वाटर ओवर द हैंड्स अपने हाथों से पानी डाल कर के निवेदिता के हाथ धोए एंड ड्राइड देम विथ ए टवेल और टवेल से उनको ड्राई उनको साफ किया इट इज आई हु शुड डू दिस थिंग्स फॉर यू स्वामी जी निवेदिता ने प्रोटेस्ट किया निवेदिता कहती है स्वामी जी आपकी सेवा तो मुझे करनी चाहिए आपके हाथ धो कर के हाथ साफ करने का सौभाग्य तो मुझे मिलना चाहिए आप मेरे हाथ क्यों धो रहे हैं नॉट यू फॉर मी आपको तो मेरे लिए यह सब करना नहीं है मुझे तो करना है यह सब वास द प्रोटेस्ट नेचरली ऑफर्ड निवेदिता ने इस तरह से प्रोटेस्ट किया बट हिज आंसर वाज टर्टलिंग इन इट्स सोलमनिटी स्वामी जी ने जो उत्तर दिया उसका गंभीर उत्तर की यह जो गरिमा उससे निवेदिता भी आश्चर्य चकित हो गई क्या कहा स्वामी जी ने जीसस वश द फीट ऑफ हिज डिसाइल्स जीसस ने भी तो अपने शिष्यों के पैर धोए थे इतना गंभीरता और गरिमा पूर्वक स्वामी जी ने कहा कि निवता का मुंह बंद हो गया एकदम आश्चर्य चकित हो गई स्वामी जी की इस बात के सामने व क्या कहेगी स्वामी जी स्वयं जीसस के ही तो समकक्ष है किंतु वह खुद जीसस के डिसाइल की समकक्ष है कि नहीं यह बात वो कैसे स्वीकार कर ले स्वामी जी को जीसस के लेवल पर रख दे तो हम सभी लोग रख सकते हैं हमको कोई डाउट नहीं है किंतु क्या हम अपने को कभी जीसस के डिसाइल के लेवल पर रख पाएंगे मुझे नहीं लगता कि कोई इस तरह से सोचेगा तो बेचारे निवेदिता का आश्चर्य से मुंह बंद हो गया रव समथिंग चेक द आंसर उसके मुंह में एक उत्तर तो वैसे आ गया किंतु वह उत्तर मुंह से निकल नहीं पाया क्या उत्तर था बट दैट वाज द लास्ट टाइम यह जीसस ने अपने शिष्यों के पैर कब हुए थे वो तो आखिरी समय में क्रूसिफिकेशन क्या चल रहा है किंतु निविता के मन में यह बात आ गई किंतु वह मुह से यह बात कह नहीं पाई एज इट रोज टू द लिप्स एंड द वर्ड्स रिम अन अटर यह शब्द जैसे कि मुह में ही रह गए शब्द कभी भी उच्चारित नहीं हुए दिस वाज वेल फॉर हियर आल्सो द लास्ट टाइम हैड कम जो ठीक ही किया कि उसने कहा नहीं क्योंकि यहां पर भी स्वामी जी का अंतिम समय आ चुका था देयर वाज नथिंग सेड और ग्रेव अबाउट द स्वामी ड्यूरिंग दिस डे स्वामी जी के जीवन में गंभीर या तो उदासी पूर्ण कुछ नहीं था इस समय में इन द मिडस्ट ऑफ एंजाइटी अबाउट ओवर फेट गूंग हिम इन स्पाइट ऑफ कन्वर्सेशन डेलिबल केप्ट एज लाइट एज पॉसिबल टचिंग ओनली अपॉन द एनिमल्स दैट सराउंडेड हिम हिज गार्डन एक्सपेरिमेंट्स बुक्स एंड एब्सेंट फ्रेंड्स ओवर एंड बियोंड ऑल दिस वन वाज द कॉन्शियस द वाइल ऑफ अ लुमिनस प्रेजेंस ऑफ व्हिच हिज बॉडी फॉर्म सीम ओनली एज अ शैडो और ए सिंबल स्वामी जी के आसपास में गुरु भाई उनके शिष्य सन्यासी गण सभी लोगों को पता था कि स्वामी जी के सामने कोई भी गंभीर बातें नहीं करनी कार्य के बारे में कुछ भी बात नहीं करनी मित्रों के बारे में बात करेंगे हंसी मजाक करेंगे स्वामी जी का यह जो कुत्ता है बाग या तो फिर यह हरण है फिर यह राजा महाराज के गार्डन में जाकर के क्या सब गड़बड़ कर दे रहे हैं ऐसी सब लाइट टॉपिक लेकर के स्वामी जी के साथ में बात करनी है किंतु किसी भी महत्त्वपूर्ण सब्जेक्ट के बारे में स्वामी जी के साथ में किसी भी तरह की बात नहीं होनी चाहिए स्वामी जी यदि उस डायरेक्शन में जाते हैं तो सब लोग मिलकर के उसी बात को दूसरी ओर ले आएंगे किसी भी तरह का स्ट्रेन स्वामी जी के ऊपर में नहीं आना चाहिए उस समय ऐसा लगता था कि जैसे कि स्वामी जी के भीतर में एक प्रकाश पुंज वह प्रकाशित हो रहा है उज्जवल मान हो रहा है और यह जो बाह्य आवरण है वह सिर्फ एक छोटा सा एक आवरण ही रह गया है भीतर में से आत्मन का प्रकाश इतना बढ़ता जा रहा है कि यह पंच महाभूत का देह एक आवरण जैसे है या नहीं है अभी यह आत्मन जैसे कि विस्फोट होक के बाहर निकल आएगा ऐसा लग रहा था वन वाज कॉन्शियस द वाइल ऑफ अ लुमिनस प्रेजेंस हम लोग सभी समय एक देदीप्यमान एक उपस्थिति के बारे में सब समय अनुभूति करते थे ऑफ वहि हिज बॉडी फॉर्म और सीम ओनली अ शैडो उनका बाह्य शरीर सिर्फ एक प्रति छाया की तरह लग रहा था भीतर का प्रकाश ही जैसे कि सही सही लग रहा था नेवर हेड वन फेल्ड सो स्ट्रंग एज नाउ कभी भी हमने इस तरह से सोचा नहीं बिफोर हिम दैट वन स्टूड ऑन द थ्रश होल्ड ऑफ एन इनफाइनों के चौखट पे खड़े हैं ऐसा हमको लग रहा था स्वामी जी को मिलने को जाएंगे तो लगेगा जैसे कि एक पोर्टल है जैसे कि एक गेटवे है इसको जैसे ही क्रॉस करेंगे जैसे ही उस पार जाएंगे वैसे ही अनंत प्रकाश पुंज अनंत आत्मा का दर्शन होगा स्वामी जी के भीतर में जो आत्मन था वही प्रकाश रूप होकर के दिख रहा है पंचमहाभूत का देह अभी सिर्फ एक नाम मात्र का छाया मात्र होक के रह गया है यट नन वाज प्रिपेयर्ड फिर भी कोई भी तैयार नहीं था लिस्ट ऑफ ऑल ऑन दैट लास्ट हैप्पी फ्राइडे जुलाई द फोर्थ ऑन वच ही अपीयर्ड सो मच स्ट्रांग एंड बेटर देन ही हैड बीन फॉर यर्स टू सी द एंड सो सून कोई भी तैयार नहीं था और 4 जुलाई को फ्राइडे था उस दिन तो बिल्कुल ही नहीं उस दिन स्वामी जी की शक्ति जैसे कि द्विगुण दो गुना ज्यादा बढ़ गई हो स्वामी जी के भीतर में जीवन की यह रेखा और भी ज्यादा उज्जवल होकर के दिखाई दे रही हो इस तरह से सुबह से ही लग रहा था और किसी ने यह सोचा नहीं था कि जुलाई का फोर्थ जुलाई का दिन फ्राइडे का दिन उनका आखिरी दिन है किसी ने सोचा नहीं था किंतु फिर भी यह हो ही गया उस दिन दो उस दिन सुबह को स्वामी जी ने बड़े लंबे समय तक मंदिर में जाकर के ध्यान किया था उसके बाद में दोपहर को अपने सब ब्रह्मचारी शिष्यों को बुला कर के तीन घंटे तक संस्कृत का क्लास लिया था और संस्कृत का क्लास वैसे तो होता है बड़ा ही बोरिंग किंतु जो लोग क्लास में प्रेजेंट थे वे लोग लिख रहे हैं कि इस तरह से स्वामी जी बीच-बीच में पौराणिक उपनिषद कहानियों को गूंथ लेते थे बुंद देते थे कि जैसे कि संस्कृत भी हमको बोरिंग नहीं लगा उसमें भी हमको बड़ा आनंद आता था उसके बाद में संध्या समय जैसे कि सभी लोग मंदिर की आरती का घंटा बजने लगा तो सभी लोग मंदिर में गए श्राइन में गए स्वामी जी आए अपने कमरे में कमरे में जाकर के लंबे समय तक ध्यान किया उसके बाद में अपने एक शिष्य को बुलाया कहा कि पंखा दो मुझे थोड़ा सा हवा करो मेरे ऊपर में उसके ऐसा कह के स्वामी जी लेट गए तो यह शिष्य उनका ब्रह्मचारी हवा कर रहा है उसी समय उसने देखा कि स्वामी जी ने दो बार गहरी सांस ली फिर उनका शरीर एकदम स्थिर हो गया तो उसने सोचा कि शायद हो सकता है स्वामी जी समाधि में चले गए हो किंतु उसके मन में कुछ ना कुछ तो आशंका हुई वो इमीडिएट दौड़ कर के सीनियर साधुओं को बुला कर के ले आया अभी सीनियर साधु य अद्वैतानंद जी भी थे उन्होंने आकर के परीक्षा की लगा कि स शरीर इस तरह से समाधि में चला गया है कि पूरा जड़ हो गया है तो उनको भी कुछ आशंका हुई उन्होंने कहा कि जाओ रात को ही जाकर के उस समय शरद महाराज और राजा महाराज कलकाता में थे तो जाकर के उनको बुला कर के ले आओ साथ में ही डॉक्टर को ले आओ तो फिर रात को ही चिकित्सक को बुलाया गया शरद महाराज राजा महाराज 10 बजे तक सभी लोग इकट्ठा हो गए यहां पर भगवान का नाम सतत कीर्तन हो रहा है भगवान के नाम का उच्चारण हो रहा है चिकित्सक स्वामी जी की परीक्षा कर रहे हैं किंतु कुछ भी पता नहीं चलता है ये महासमाधि है ना कि फिर ये सिर्फ समाधि है क्या है पता नहीं दूसरे दिन बड़ी देर तक स्वामी जी का देह वैसे ही उनके बिस्तर पर रखा गया ऐसी आशा के साथ में कि स्वामी जी फिर से उठ खड़े होंगे ये हो सकता है कि बहुत ही गहन उच्च तरह की समाधि है जिसमें कि देह मृत देह जैसा ही लगता है अभी स्वामी जी खड़े हो जाएंगे किंतु वह उस समाधि से स्वामी जी फिर से कभी खड़े नहीं हुए उस दिन दूसरे दिन शाम तक पता चलने लगा कि नहीं अभी देह संपूर्ण रूप से ठंडा हो गया है उसमें जीवन की आशा का संचार होना अभी मिथ्या है अभी कोई आशा नहीं है फिर जाकर के सभी जगह पर टेलीग्राम भेजा गया चंदन के काष्ट की व्यवस्था की गई सब जग जगह प भजन कीर्तन चल रहे हैं उसरे दूसरे दिन मठ में फिर ये जिस तरह से होंग होता है ठाकुर की पूजा होती है स्वामी जी के देह की आरती हुई और फिर चंदन के काष्ट पे उनकी चीता को जलाया गया उनके नश्वर देह को होमा अग्नि अर्पित की गई अग्नि में अर्पित किया गया और महासमाधि के कुछ दिन पहले स्वामी जी ने अपने एक गुरु भाई को कहा था गंगा के किनारे टहलते टहलते कि यहां पे मेरा जब देह जाए तो यहां पर मुझे अग्नि दाह देना तो ऐसा स्वामी जी जगह चिन्हित करके गए थे तो उसी जगह पे स्वामी जी को आखिरी अग्नि दह दिया गया था और उसी जगह पे आज हम देखते हैं कि स्वामी जी का महासमाधि मंदिर वहां पे उपस्थित है तो इस तरह से स्वामी जी का देह उन्होंने त्याग किया तो देखिए कि ये 39 इयर्स और कुछ महीने इतने दिन वो पृथ्वी पर रहे उन्होंने एक बार कहा था कि मैं 40 साल देखने वाला नहीं हूं तो वही में अपनी जो वाणी है उसकी सत्यता उन्होंने इस तरह से पुरवार की किस तरह से उनके इतने छोटे से जीवन में उन्होंने क्या-क्या उपलब्धियां की उन्होंने क्या कार्य किया ठाकुर का नाम प्रचार तो किया ही किया किंतु भारत के कल्याण के लिए जो उन्होंने करके गए इसका हम जितना चिंतन करें जितना ही इसके बारे में सोचे एक जन्म हमारे लिए कम पड़ जाएगा कितने ही जन्म कम पड़ जाएंगे स्वामी जी ने एक जगह पर कहा है एक ऐसा समय आएगा जबकि लाखों विवेकानंद प्रकट होंगे तो वो दिन भी आने वाला है कि विवेकानंद जैसी भीतर में से आध्यात्मिक शक्ति लेकर के महापुरुष महामानव एक के बाद पृथ्वी पर जन्म ग्रहण करेंगे वह समय देखने का सौभाग्य हमको इस जन्म में मिलेगा कि नहीं वह तो अभी ठाकुर ही जाने किंतु स्वामी जी के जीवन का उनकी घटना वली का उनके वार्तालाप का उनकी वाणी का तन मनन करके हम अपने जीवन को धन्य कर सकते हैं तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओ शांति शांति शांति हरि तसत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु देखिए कि हमारे थ्रू तो कार्य कर रहे हैं ना ठाकुर को कहा था स्वामी जी ने ठाकुर को कहा कि आप खा नहीं पा रहे हैं मां को बोलिए कि थोड़ा सा आहार करें इतना तो ठीक कर दे तो ठाकुर ने क्या कहा कि इतने मुंह से तो मैं खा रहा हूं इतने हाथों से तो स्वामी जी काम कर रहे हैं और फिर दूसरा भी एक बात था स्वामी जी ने कहा था यदि एक महामानव एक गुफा में बैठ कर के पांच एक अच्छे विचार जद सोच कर के जाए तो वो पांच विचार गुफा की दीवाल को भेद करके पूरे समाज में विस्तारित होकर के समाज में प्रवेश करके अपना कार्य करेंगे तो स्वामी जी अपने विचार के माध्यम से भी कार्य कर रहे हैं और हमारे माध्यम से भी कार्य कर रहे हैं वो सिफ भारत का नहीं यूरोप में जाकर के कहा ना कि बारूद के ढेर के ऊपर में ये लोग खड़े हैं विस्फोट 50 साल में होने ही वाला है तो जो फर्स्ट एंड सेकंड वर्ल्ड वॉर भी स्वामी जी प्रिडिक्ट करके गए थे और फिर चाइना के बारे में कि येलो पेरिल इज कमिंग वो ये लोग चाइना को एक कुली लोगों का देश जो समझते थे तो बाद बाद में ऐसा लगा कि सोवियत यूनियन है जो कि बड़ा ही पावरफुल है कहां चाइना वो तो एकदम भारत से भी गई गुजरी हालत है तो चाइना का भी राइज प्रिडिक्ट करके गए थे और चाइना का ट्रेजक्ड भी भारत का राइज हुआ किंतु भारत वैसे पश्चिम का दुश्मन नहीं है किंतु चाइना के साथ में तो राइवल होने वाली थी तो मैंने कितना कुछ यूरोप के बारे में प्रिडिक्ट किया भारत की भविष्य की ट्रेजक्ड प्रिडिक्ट की चाइना के बारे में कि उसका राइज भी होगा और वेस्ट के साथ में उसका एमिटी भी होगा यह सब काफी कुछ प्रिडिक्ट करके और देखिए किय जो विदेश भ्रमण किया ना ये भारत भ्रमण किया विदेश भ्रमण किया यानी कि उनका एक प्रैक्टिकल सेंस भी था सिर्फ ये नहीं कि योग दृष्टि से देखते थे एक प्रैक्टिकल सेंस भी बड़ा क्लियर था एक सेंस ऑफ हिस्ट्री था हिस्ट्री स्टडी करते थे मैं भी जब हिस्ट्री स्टडी करता था तो मुझे लगता था कि ये चाइना का इतना यह मैं आज से 15 साल पहले की बात बता रहा हूं जबकि चाइना का इतना मतलब ये नहीं हुआ था डेवलपमेंट तो उस समय मुझे भी लगता था कि चाइना और इंडिया दो ऐसी सिविलाइजेशन है कि जो कि इतनी पुरानी है और इतनी वाट है अपने आप में एक विश्व है चाइना भी और भारत भी तो इन दोनों का तो राइज होने ही वाला है तो एक हिस्ट्री पढ़ के भी एक सेंस डेवलप हो जाती है कि हां इसका भविष्य का ट्रेजे क्ट्री क्या होता है तो स्वामी जी के पास में दोनों था सेंस ऑफ हिस्ट्री भी थी और योग दृष्टि भी थी ये जो वहां पे वेटिकन गए थे अपने मिस्टर एंड मिसेस सेवियर के साथ में तो वहां पे स्वामी जी क्रिश्चियनिटी के प्रत्येक जो मॉन्यूमेंट है ये चर्च है सिस्टाइन चपल है फिर ये सेंट पीटर्स बेसिलिका है जहां-जहां पे भी जाएगी उसकी जो हिस्ट्री है स्वामी जी को क्रिश्चन लोगों से ज्यादा अच्छे से पता थी और सभी मॉन्यूमेंट्स की हिस्ट्री का इतना सुंदर वर्णन कर पाते थे देन हिज इनक्रेडिबल सेंसस ऑफ अंडरस्टैंडिंग ऑफ ह्यूमन अफेयर्स स्वामी जी खुद कहते थे ना कि यदि मेरा एजुकेशन मेरे हाथ में होता तो सबसे पहले मैं कंसंट्रेशन सीखता फिर विद द पावर ऑफ कंसंट्रेशन एनीथिंग आई वांट टू लर्न आई विल सिंपली फोकस माय माइंड एंड आई विल लर्न एवरीथिंग ये शरद चंद्र चक्रवर्ती के साथ में सुंदर प्रसंग है वो जो एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के वो 50 वॉल्यूम कुछ लाए गए उस समय मठ के लिए परचेस किए गए थे तो स्वामी जी के कमरे में इतने सारे वॉल्यूम देख कर के वो सोचता है कि कितना जन्म चाहिए यह सब समझने के लिए तो उसको यह पता नहीं था स्वामी जी ऑलरेडी 10 वॉल्यूम 15 वॉल्यूम पढ़ चुके थे और पूरा समझ चुके थे तो स्वामी जी ने कहा क्या बोलता है रे तू कितने जन्म चाहिए ये 10 वॉल्यूम में से कुछ भी पूछ मैं अभी उत्तर देता हूं तो सही में उसने वो वॉल्यूम खोलकर करके रैंडम प्रश्न करना शुरू किया वह चाहे वह गन बोल्ट बनाने का सिस्टम हो ना कि स्टीम इंजन हो ना कि एस्ट्रोनॉमी हो कोई भी सब्जेक्ट स्वामी जी इमीडिएट उसके ऊपर में बा बता बात बता देंगे और इतना ही नहीं वहां जो लैंग्वेज की दी गई है उसी को एगजैक्टली कोट करेंगे वोह बोलता है मनुष्य से यह संभव ही नहीं है तो स्वामी जी ने क्या कहा अरे भाई तुमको पता नहीं कि ब्रह्मचर्य की क्या शक्ति है उसका पालन करके देखो तब पता चलेगा यह तो एक बात है दूसरी बात है कि क्या फिजिकल कैपेसिटी है कि नहीं अपने में यह नॉलेज को एब्जॉर्ब करने की तो देखिए कि ये जो ब्रेन साइंस है यह लोग कहते हैं कि अपने ब्रेन के भीतर में बिलियंस ऑफ न्यूरॉन्स न्यूरॉन अर्थात की एक ब्रेन सेल और नॉलेज जब जनरेट होता है तो दो न्यूरॉन के बीच में एक ब्रिज बनता है एक कनेक्शन बनता है तो देयर आर ट्रिलियंस अपॉन ट्रिलियंस ऑफ न्यूरल कनेक्शंस इन अवर ब्रेन यहां तक कि विश्व ब्रह्मांड में जितने सितारे नहीं है उससे ज्यादा तो य न्यूरल कनेक्शन अपने ब्रेन के भीतर में है आज के बड़े से बड़े न्यूरल एआई कंप्यूटर ये बड़े-बड़े सुपर कंप्यूटर सबको इकट्ठा कर दो फिर भी उसकी जो कैपेसिटी है वो जो ट्रांजिस्टर की अपने ब्रेन का एक फ्रैक्शन मात्र है तो फिजिकल कैपेसिटी हमने ऑलरेडी है कि ट्रिलियंस अपॉन ट्रिलियंस ऑफ न्यूरल कनेक्शंस आर देयर विच वी कैन यूटिलाइज अभी देखिए कि प्रश्न एक ऐसा होता है जब यह बात पढ़ेंगे कि इवोल्यूशन क्या कहता है जब आपको जिस चीज की आवश्यकता है तब वह चीज डेवलप होती है जैसे कि बंदर की पूंछ जब पेड़ पर रहते थे तो पूछ की जरूर थी क्योंकि एक डाल से दूसरे डाल में जंप लगाने के लिए वह बैलेंसिंग मैकेनिज्म के रूप में काम करेगी अब जब जमीन पर चलने लगे तो पूछ नहीं रही तो पूछ चली गई इवोल्यूशन हमको वह देता है जो कि हमको आवश्यकता होती है वह ले लेता है जिसकी आवश्यकता नहीं है तो ये ट्रिलियंस ऑफ न्यूरल कनेक्शन जो बने किस आवश्यकता से हमारे पास में आए होंगे यानी कि सोच लीजिए ऐसे भूतकाल में ऐसे लोग होंगे जो कि ब्रेन कैपेसिटी का 100% यूटिलाइज करते होंगे ये बाउंड्रीज को पुश करते होंगे जैसे कि आपके हमारे एंसेट है तो इतना छोटा सा ब्रेन था फिर ब्रेन की साइज बढ़ती गई तो बढ़ी क्यों क्योंकि उसको यूटिलाइज करते थे तब तो बढ़ी तो आज सोच लीजिए कि हम अपने ब्रेन का 10 पर 20 पर न्यूरल नेटवर्क ही यूज करते हैं तो एक समय होगा जबकि ये नेटवर्क डेवलप हो रहा होगा ट्रिलियंस ऑफ कनेक्शन बन रहे होंगे तो कौन लोग होंगे वो जिन्होंने यह कनेक्शन बनाया है और क्या किया होगा कि जिससे कि ये कनेक्शन बना है इतिहास अपना बड़ा ही कॉम्प्लिकेटेड है हम लोग सोचते हैं कि बंदर थे बंदर में से ए हुए ए में से धीरे इवोल्व हो कर के ह्यूमन हुए किंतु इसके भीतर में जो अनकही कहानियां है ये जो रामायण महाभारत युग में कभी-कभी हमको लगता है कि सि माइथोलॉजी ही है ये ऋषि मुनि हजारों साल तपस्या करते थे ये जो ध्रुव ने एक पैर खड़े रह के हजारों कोट कोटी साल तक तपस्या की तो यह सब कहानी है किंतु ये जब ब्रेन डेवलपमेंट के बारे में पढ़ते हैं तो लगता है कि ये ट्रिलियंस ऑफ कनेक्शन जिसने बनाए होंगे क्योंकि किसी ने तो इसको यूटिलाइज किया होगा तभी ये है बिना यूटिलाइज किए तो डेवलप ही नहीं होगा अभी मेरे चार हाथ नहीं है क्यों नहीं है क्योंकि मैंने कभी उसको यूटिलाइज ही नहीं किया तो होने नहीं वाले अभी किसी के चार हाथ होंगे किसी प्रजाति के जैसे कि ऑक्टोपस के इतने सारे ये टेंटाकल्स है दैट मींस यूटिलाइज है बोलकर के टेंटाकल्स है कैसे लोग वो होंगे जिन्होंने ट्रिलियंस कनेक्शन यूटिलाइज किए होंगे ये जो भारत में गुरुकुल प्रथा को जो खत्म कर दिया गया ना वो एक बड़ा ही हमको जैसे कि धक्का लगा वो जो ब्रिटिश लोगों ने सोचा कि ये हम वेस्टर्न स्टाइल एजुकेशन लेके आएंगे तो यह पाठशाला थी ये टोल थी जो कि ठाकुर के बड़े भाई खुद टोल चलाते थे तो वो जो सब खत्म हो गई ना यह हमको बड़ा ही नुकसान हुआ अपनी भारतीय संस्कृति को वो यदि गुरुकुल प्रथा वापस आए ये गुरु के ग्रह जाकर के ब्रह्मचर्य का पालन करके फिर से वह जीवन प्रारंभ करें तब कहीं जाकर के यह सब होगा ना क्योंकि ब्रह्मचर्य इज द की बिना ब्रह्मचर्य के आपकी शक्ति का कुछ भी यूटिलाइजेशन नहीं होने वाला हम लोग कहते हैं लोग गरीब है गरीब कैसे हैं आप ब्रह्मचर्य का पालन करना शुरू कर दीजिए आप मैंने ब्रह्मचर्य का पालन का अर्थ क्या है बेसिकली डेवलप योर विल पावर विल पावर इज द की यदि सही में देखा जाए तो विल पावर से लोग क्या से क्या नहीं कर पाते सिर्फ सिर्फ आप आध्यात्मिक जीवन की बात की छोड़ दीजिए यह जो बड़े-बड़े इंजीनियर है अभी डेमस हबीस बोल कर के डीप माइंड एक कंपनी है उसका फाउंडर है तो उन लोगों ने अल्फा फोल्ड बोल कर के एक एआई कंप्यूटर डेवलप किया है अभी ये अल्फा फोल्ड क्या करता है प्रोटीन फोल्डिंग जो है उसको प्रिडिक्ट करता है कहा जाता है कि 200 मिलियन प्रोटीन है इस प्राणी जगत में सब मिला कर के ये 200 मिलियन प्रोटीन किस तरह से फोल्ड होते हैं उसी के ऊपर में यह पूरा ऑर्गेनिक वर्ल्ड चलता है मनुष्य जीवन सभी तरह का जीवन तो अभी एक प्रोटीन फोल्ड किस तरह से होता है उसको समझने के लिए आपको एक पीएचडी का थीसिस चाहिए अर्थात एक स्टूडेंट चार साल पीएचडी पाच साल करेगा वो पूरा थीसिस चाहिए सिर्फ एक प्रोटीन फोल्ड समझने के लिए एक पीएचडी थीसिस चाहिए आपको एक प्रोटीन फोल्ड समझने के लिए अभी इन लोगों ने अल्फा फोल्ड एआई सिस्टम बनाया उसने एक साल में 200 मिलियन प्रोटीन कैसे फोल्ड होते हैं वो प्रिडिक्ट कर दिया इसका अर्थ है कि 1 बिलियन ईयर ऑफ पीएचडी थीसिस का काम एक साल में हुआ है तो अभी ये जो डेनिस हेबिस है उसका एक इंटरव्यू में सुन रहा था मैंने सोचा कि देखिए कि किस लेवल का आपका इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी चाहिए कि आप यह सब सोच सकते हैं यानी कि यह जो विल पावर है अपने माइंड को रेगुलेट करने की कैपेसिटी उससे आप कोई भी फील्ड में जाए यू विल बी सुपर सक्सेसफुल ये उपनिषद का श्लोक है ऐसा क्या है जिसको जानने से सब कुछ जाना जा सकता है तो ऑफकोर्स उत्तर है आत्मन या तो फिर ब्रह्मज्ञान ब्रह्म ज्ञान प्राप्त होने से व ब्रह्म के विकार से जो कुछ भी बना है सब कुछ जान पाएंगे तो एक्चुअली स्वामी जी ने एक्चुअली यही तो कहा कि पहले मैं कंसंट्रेशन सीखू फिर ये कंसंट्रेशन रूपी टोर्च लाइट में जिस सब्जेक्ट के ऊपर मैं फेंकू वो सब्जेक्ट विल रिवेल इट्स सीक्रेट्स टू मी तो ये ब्रह्मज्ञान कहो की कोई भी सीक्रेट है वो कंसंट्रेशन डेवलप करके विल पावर को डेवलप करके ही आएगा