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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda English & Hindi 2 April 2023

Swami Vivekananda

लेट मी शेर मी स्क्रीन तू डी लॉर्ड डू मोर पर डी वर्ल्ड सो कोल्ड वर्कर्स वन मां हूं हेस प्यूरीफायर हिमसेल्फ थारो अकांप्लिशर्स मोर दें एन रेजीमेंट ऑफ प्रीचर्स आउट ऑफ प्योरिटी और साइलेंस कम्स डी वर्ल्ड ऑफ पावर नो दिस इस अबाउट रिलिजियस प्रीचिंग और वे नो डेट अन्य टाइप ऑफ क रिलिजियस प्रीचिंग और मेड बी से स्टडी और मेट बी योर जब और एनीथिंग अन्य एक्टिविटी अंदर टेक इन दिस वर्ल्ड आईटी इन ऑर्डर तू बी सक्सेसफुल यू नीड तू हेल्प तू थिंग्स एकदम गॉड्स क सपोज आई एम जस्टिस हाउसहोल्डर और जस्ट लिविंग पर मनी और सोशल हैप्पीनेस और फैमिली ईटीसीईटी राइट सेट अप पर डी सेक ऑफ मी सेंशुअल एंजॉयमेंट और पर डी सके मी फैमिली लाइफ दें प्रेजेंट मटर व्हाट आई डू और व्हाट आई थिंक बट डी मोमेंट आई विकम ए सड़क का डी मोमेंट आई विकम में भगत डी मोमेंट आई बी कॉमिक देवोटी एवरीथिंग आई डू बीकमस एन साधना दें आई वाले अप वाकिंग अप इसे साधना गोइंग तू स्लीप इसे साधना ईटिंग इस ए साधना टॉकिंग हेविंग डिस्कशन विद योर फ्रेंड्स इस ए साधना इन डी कर्मठ आई डू डेट अलसो बीकमस साधना सो पर अन्य साधना तू बी सक्सेसफुल हर व्हाट स्वामी जी से डेट एन परसों हूं गिव सम हिमसेल्फ तू डी लॉर्ड डी परसों हूं हेस प्यूरीफायर हिमसेल्फ थ्रू मेंस टेकन जो प्लीज सेंशुअल डिजायर्स जो है भोगम ओल्ड हज वसंस एट सिटेरा अंदर है कंट्रोल दिस किड ऑफ परसों एस वे नो डेट एवरी कर्मठ वे डू आईटी क्रिएटिव कर्म और सात्विक कर्म एस वे शो इस श्री रामकृष्ण सैड यस्टरडे तू विद्यासागर दत विद्यासागर वास डूइंग एन कर्म आउट ऑफ कंपैशन सो कर्म टर्न आउट ऑफ कंपैशन आईटी इस कॉल्ड सात्विक कर्म डेट इस कर्म दान पर डी लोक कल्याण कर्म दान पर डी बेनिफिट ऑफ आदर्श नो दिस टाइप ऑफ कर्म हज ग्रेट एडवांटेज था आईटी बिंदास आईटी देश नोट फाइंडर्स इन डी फाइटर ऑफ बॉन्टेज आईटी दस नोट बाइंडर्स इन डी बॉन्डेज ऑफ दिस कर्मफल इन गीता डिलीवरी कर्म हस ए कर्मफल सो अन्य कर्मठ इस गाइड बाय अवर अन्य कर्म विच इस से प्रमोटेड में अवर ऑन धीरे पर अन्य इदर मनी और नाम इन फोन और प्रेस्टीज कर्मों बाइंडिजर्स भेंट कर्म क्रिएट सॉर्ट ऑफ कर्म बिल नोट मेक उस एनीथिंग आईटी जो दिस टाइप ऑफ कर्म बिल नोट बी हेल्पफुल इन ओवर साधना बट एस स्वामी जी से हर आईटी अन्य टाइप ऑफ कर्म डेट इस बाय एन प्यूरीफायर ओवर अन्य दत इसे सात्विक कर्म आगे एन वे डिस्कस यस्टरडे विद दिस अगर दिस सात्विक कर्म सात्विक कर्म प्यूरीफायर और विथ प्यूरीफायर कर्म एनीथिंग विथ वे डू आईटी बिल विकम सक्सेसफुल नो हर और स्पेशली इन डी कैसे ऑफ टीचर्स लाइक रिलिजियस टीचर्स लाइक डायरेक्ट डिसाइड वीडियो लाइक स्वामी रेजीमेंट ऑफ रिचर्ड्स नव यू नो डेट व्हाट हैपेंड विथ स्वामीजी हिमसेल्फ व्हेन स्वामी जी वेट तू डी यू एस और यू नो डेट वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन आईटी वज कोल्ड इन ऑर्डर तू इस्टैबलिश्ड डी सुपीरियर ऑफ क्रिश्चियनिटी देवर सो डेट नो वे हैव डिस्कवर्ड इलेक्ट्रिसिटी डेट वे हैव डिस्कवर्ड यू नो स्टीम इंजंस नेवी हैव डिस्कवर्ड दिस टीम बोर्ड्स और वे हैव कंकर मोस्ट ऑफ डी अर्थ आईटी व सैड डेट सन नेवर सेट्स अपन ब्रिटिश अंपायर और डी से थिंक इस ट्रू अबाउट दिस वेस्टर्न सिविलाइजेशन इन जनरल दे हेड कॉलोनी पार्ट ऑफ डी ग्लोब सो वेस्टर्न परसों यूरोपीय और एन अमेरिकन बिल को यू बिल बी ऑटोमेटिक रिस्पेक्ट ऑटोमेटेकली फेयर बिकॉज़ दिस व्हाइट ग्रीन पीपल दे हैव गो सो मच स्ट्रांग मिलिट्री साक्स स्ट्रांग नेवी सच स्ट्रांग आर्मी डिड दे कैन डू एनीथिंग दे कैन कंकर आनेवन दे कैन बीट अप अन्य वन दे कैन डिफीट एन्यूएबल सो दिस क्रिश्चियन थर्ड दे लेटेस्ट कोल्ड नो ओनली वन फील्ड है रेमंड दत इसे वर्ल्ड ऑफ रिलिजन और यू नो डेट रिसेंटली एन सेवरल इयर्स एगो आई थिंक 10 तू 15 इयर्स एगो डेट कैथोलिक पॉप ही सेड डेट इन डी फर्स्ट मिलेनियम डी फील्ड वज यूरोप इन डी सेकंड मिलेनियम डी फील्ड वज डी न्यू वर्ल्ड डेट इस अमेरिका और डी थर्ड और थर्ड मिलेनियम डी फील्ड बिल बी एशिया व्हाट यू मीन बाय डेट डेट इन डी फर्स्ट मिलेनियम आफ्टर जीसस डेट इस दी वन तू एडवरटेंट एंटीरे यूरोप तू क्रिश्चियनिटी और डी सेकंड मिलेनियम डेट इस फ्रॉम डी एड्स एड तू थाउजेंड दे कन्वर्टेड दे पापुलेटेड अगर न्यू वर्ल्ड न्यू वर्ल्ड इस नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका और दें ऑस्ट्रेलिया दिसार डी न्यू वर्ल्ड डेट दे हैव डिस्कवर्ड इन डेन ही सेड डी थर्ड मिलेनियम था इस 2000 तू 3000 दिस थ्री वन थाउजेंड इयर्स दे बिल कन्वर्ट एंटीरे एशिया सो डेट इस डी ड्रीम डेट वे बिल कन्वर्ट ओन्ली डी एशिया रेमैन एशिया हेज हिंदुइज्म एशिया इस इस्लाम एशिया इस अब बुद्धिस्म सो आईटी इस डिफिकल्ट पर क्रिश्चियनिटी तू इंटर बट थे बिल ट्राई दें हार्ट बिकॉज़ एडवांस और टेक्नोलॉजी सो थिंकिंग डेट दे कोल्ड वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन इमेजिंग डेट टेबल शो ऑफ डी इदरीस दे डेट इस व्हाट डी उसे तू पुलिस इदर इदरीस मेंस डी पीपल हूं आर वेरी बैकवर्ड वेरी प्रिमिटिव कल्चरली और सिविलाइजेशन अली सो दे पट अप एन शो और दे वांटेड तू शो डेट हो डी अदर दिस क्रिश्चियन पिक्चर्स हो इंटेलेक्चुअल देवर हो यू कैन से डेट स्कॉलरली दे आर हो क्यों अंत दे आर हो इजीली दे कैन यू नो कन्वेंस यू तू एक्सेप्ट जीसस हो इजीली दे कैन हॉल एन कन्वर्सेशन विथ यू सो जो ऑफ डेट दे वांटेड तू डिस्प्ले तू डी एंटीरे वर्ल्ड तू स्पेशली अमेरिकन पब्लिक और व्हाट हैपेंड अल्टीमेटली डेट स्वामी विवेक आनंद वन ही स्टार्टड स्पीकिंग दिस क्वेश्चन प्रीचर्स विकम अमेजिंग पॉसिबल डेट फ्रॉम सच एन हिंद सच एन लैंड विच इस कंपलीटली सक इन दी मेयर ऑफ पावर्टी और दिस इसे और फैमिन और देवर आर सो इट्स एन स्लेव रेस्ट इस आईटी पॉसिबल डेट फ्रॉम सच स स्लेव रेस सो चिप पावरफुल पिक्चर राइस परसों विथ सो मैच होली है एंटर्ड इन डी होम सो डेट इस हो स्वामी जी डिस्क्राइब हिमसेल्फ स्वामी जी इस लाइक ए टाइगर और दिस जो दिस क्रिश्चियन क्रिएचर्स डियर लाइक यू नो देवर लाइक एन इदर गेट और माउस और चिकन लाइक दे दत इसे हो मैच देवर अफ्रेड ऑफ स्वामी विवेकानंद सो डेट इस वही स्वामी जी से व्हेन एन परसों प्यूरीफायर हिमसेल्फ वन परसों विद गोल्डन हार्ट ही कैन क वंडर्स ही कैन क बटर एंटीरे आर्मी ऑफ पिक्चर्स सो में पीपल सो में क्रिश्चियन प्रीचर्स कम तू इंडिया वे नो डेट इंटर इंडिया वास रुड बाय ब्रिटिशर्स इन स्पाइट ऑफ डेट इन स्पाइट ऑफ एन लोट ऑफ एफर्ट बाय क्रिश्चियन मिशनरीज दे हैव बिन एबल तू कन्वर्ट ओन्ली वेरी सम परफेक्ट आई थिंक फोर तू फाइव परसेंट पापुलेशन इस क्रिश्चियन और हर क्रिश्चियन हेयर पीपल हूं आर अबंदोनेद बाय हिंदू सोसाइटी वे हैव एबंद ऑन दिस ट्राईबल पीपल वे हैव एबंडेंट इस लोअर कास्ट पीपल वे हैव पट थे आउट ऑफ दिस सोसाइटी और डेट इस वही इन ऑर्डर तू जेन सम डिग्निटी दे हैव कन्वर्टेड तू क्रिश्चियनिटी नो व्हाट वे हिंदू नीड तू डू ऑफ कोर्स वे आर सेंडिंग पिक्चर्स पर अमेरिका और यूरोप आईटी सत्र बट वे अलसो नीड तू सेंड पिक्चर्स इन दिस क्रिश्चियन तू दिस मुस्लिम सी जो ऑफ डेम और बेसिकली हिंदू और बिकॉज़ वे नेगलेक्टेड डेम दे हैव कन्वर्टेड तू अदर रिलिजियस डी मोमेंट दिस इंटरनल फाउंटेन ऑफ अवर इंडियन हेरिटेज कलर इंडियन रिलिजन ओवर डी स्टोरी ऑफ अवर पुराना सी यू वन एन परसों हूं इस एन क्रिश्चियन एवं एन परसों हूं इसे डी ट्राईबल एवं परसों हूं इसे हूं कंसीडर हिमसेल्फ पर एन से डेट अंबेडकरवादी यू जस्ट को और तेल डेम डी स्टोरी फ्रॉम रामायण स्टोरी ऑफ मां सीता स्टोरी ऑफ ओवर सेंट इन महापुरुष इम्मीडिएटली हज हार्ट बिल रेस्पॉन्ड वही दिस रामचरितमानस वही इस आईटी सो पॉपुलर इन नॉर्थ इंडिया गेट बिकॉज़ डी स्टोरी ऑफ राम स्टोरी ऑफ सीता और डी स्टोरी ऑफ महाभारत जो ऑफ दिस रोवान सो दीपाली इन ओवर डीएनए डी मोमेंट डी लिसन तू दिस स्टोरी दे बिल फॉरगेट जो अबाउट दिस क्रिश्चियनिटी और जो अबाउट दिस अदर रिलिजियस बट प्रॉब्लम हिंदुइज्म ओरिजनली दिस आर्यन रिलिजन और सनातन धर्म आईटी ओरिजनली डेवलप ऑन डी बैंक ऑफ गंगा बट फ्रॉम देवर इट्स स्प्रेड थ्रू आउट इंडिया बिकॉज़ दिस ऋषि मनी दे बिल को तू अदर कंट्रीज दे बिल को तू अदर पार्ट्स ऑफ इंडिया तू डी साउथ इंडिया तू डी ईस्ट इंडिया तू डी वेस्ट इंडिया और विथ डेम दे बिल टेक दिस टीचिंग्स ऑफ अवर सनातन धर्म दे बिल टेक डी स्टोरी ऑफ ओवर राजा ओवर किंग ओवर अवतार अवर महापुरुष जो ऑफ दिस स्टोरी और टीचिंग्स ऑफ वेद और उपनिषद दिस ऋषि मोनी दे उसे तू टेक इन एवरी पार्ट ऑफ इंडिया और डेट इस हो इंटर इंडिया वास स्लोली इन ग्रैजुअली कन्वर्टेड इन नोट कन्वर्ट इंडिया एक्सेप्टेड दिस वैदिक टीचिंग्स और डी से रश और सम मोनी और डी से पिक्चर्स दे वेट तू साउथ स्टेशन कंट्री मेड बी थाईलैंड सिंगापुर नाम अलसो रिफ्लेक्ट ओवर हिंदू ट्रेडीशंस दिस संस्कृतज नेम्स डी उसे दे अलसो रिफ्लेक्टर ओवर हिंदू ट्रेडीशन तो और ऑफ कोर्स बुद्धिस्म इस नथिंग बट फरदर डेवलपमेंट और पर थर्ड डेवलपमेंट ऑफ हिंदुइज्म इट्स सेल्फ सो दिस सी हो धी बुद्धिस्म डेवलप हो दिस हिंदुइज्म स्प्रेड सो बिफोर टाइम टुडे वे डोंट वांट तू शेर डी स्टोरी और टीचिंग सो पर सनातन धर्म वे फूल डेट ओके आई हैव लर्नटी दिस मैच सो आई एम हैप्पी नो नीड तू तेल अबाउट दिस स्टोरी और अबाउट दिस टीचिंग्स तू अन्य वन एल्स जस्ट टेक डी एग्जांपल ऑफ रामकृष्ण विवेक आनंद लिटरेचर हो यू आर लिटरेचर इस एन फास्ट ओसियन ऑफ इंस्पायरिंग स्टोरी इंस्पायरिंग इंसीडेंट इंस्पायरिंग टीचिंग्स हर पिक्चर ऑफ स्वामी अखंडानंद जी महाराज ये

स्वामी विवेकानन्द

जो अखंडानंद जी महाराज थे जिनका पिक्चर है इस कोटेशन के ऊपर में ठाकुर के डायरेक्ट डिसएबल थे स्वामी विवेकानंद के सन्यासी गुरु भाई थे तो उन्होंने जब स्वामी विवेकानंद के साथ में उन्होंने भी प्रॉब्लज्जत करना शुरू किया तो स्वामी जी जहां पर भी जाते थे कुछ दोनों के बाद में वो भी पीछे-पीछे चले जाते थे तो गुजरात ने उनसे कहा मुलाकात हुई फिर स्वामी जी ने नाराज होकर का दिया की तुम क्यों मेरा पीछा करते हो यदि तुम को सही-सही कुछ करना है तो जो तुम लोग कल्याण के कार्य करो तो फिर इन्होंने जो है वह जो बंगाल में उसे समय जो है वह फैमिन आया हुआ था अकाल पड़ा हुआ था तो वहां पर जाकर के वह क्या करते थे उन्होंने एक अनाथ आश्रम स्टार्ट किया अभी आप सोच लीजिए जब अगर दुष्कल पड़ता है फेम आता है तो कितने बच्चों की जो अवस्था होती है सबसे बुरी हो जाति है क्योंकि माताजी या पिताजी का निधन हो गया तो अभी वैसे ही अपने परिवारजनों के अपने ही खुद के बच्चों के लिए खाने का नहीं है तो आपके पड़ोसी के बच्चों को या तो अपने चाचा चाचा के बच्चों को कौन खिलौने वाला है तो उसे समय क्या है ना की मनुष्य का हृदय संकुचित हो जाता है जब भूख लगती है तब खाना नहीं मिलता है तब यह जो हमारी जो दान देने की प्रवृत्ति है यह जो दूसरों की केयर करने की प्रवृत्ति है करुणा है यह सब चीज जो है वह समय नहीं रहती है तो यह अनाथ बच्चे उनके माता जी पिताजी नहीं है तो बेचारे को कौन खिलाएगा तो अखंडानंद जी महाराज ने वहां पर जाकर के अनाथ आश्रम शुरू किया था आज आप देखेंगे की यह जो पुरुलिया जहां पे ये जो अपना आश्रम है इतना सुंदर आश्रम है इतनी बाढ़ अच्छी सी एक्टिविटी हो रही है तो सबका वह जो फाउंडेशन है वो अखंडानंद जी महाराज ने डाला था तो इतने हृदय से मां प्राण से उन्होंने अनाथ बच्चों की सेवा की थी जैसे की वो हम शिवलिंग के ऊपर में मंत्र का जाप करते हुए जब हम पानी का ये जो ये करते हैं ये पानी डालते हैं या तो फिर ये जो दूर-दून के ऊपर में डालते हैं अभिषेक जो करते हैं तो वैसे ही वो बच्चों को नहलाते थे वो मंत्र पुरुष पुरुष सुक्तम का जाप करते हैं पुरुष सुक्तम का पाठ करते-करते जैसे वो अभिषेक करते हैं इस तरह से वो बच्चों को नहलाते थे अपने हाथ से उनको जो है कपड़े पहनते थे वो खाना बना के खिलाने थे इतनी उन्होंने सेवा की और ये लड़कों में भी देखेंगे बाद में की इतने अच्छे कुछ-कुछ के पीटर इतने अच्छे संस्कार ए गए की देखिए इस तरह से तो सिविलाइजेशन की प्राण की रक्षा होती है यदि कोई आपके ऊपर में दया करुणा दिखाने वाला नहीं है तो यह बच्चे तो क्रिमिनल हो जाते हैं फिर बाद में यही लोग मुस्लिम हो जाते यही क्रिश्चियन हो जाते हैं और यही लोग हम हिंदुओं को गली देते आज बहुत सारे जो है वेस्ट बंगाल है केरल है केरला है या तो फिर ये जो झारखंड है या तो फिर आंध्र प्रदेश है यहां पे जो कन्वर्जन की प्रवृत्ति इतनी ज्यादा बाढ़ क्यों गई है क्योंकि हम हिंदुओं का हृदय जो है संकुचित हो गया है हम लोगों के हृदय में ये जो अपने भाइयों के प्रति एक प्रेम करुणा ये जो एक भावना रहनी चाहिए वो जैसे धीरे-धीरे करके सुख गई है इसलिए फिर ये लोग बेचारों को तो डिग्निटी चाहिए ना तो अभी वो क्रिश्चियन क्रीचर आकर के वो कोई भी तरह का वो अब देखते हैं वो युटुब पे कभी-कभी वीडियो आता है वो इस तरह के पगले जैसे वीडियो होते हैं वो कोई पादरी है वो कोई कोई मंत्र पाठ करता है और वो जो औरत या कोई पुरुष जो है वो पागल की तरह नाचना शुरू करता है कहता है इससे उनकी सब बीमारी चली जाएगी अभी ये तो कंप्लीट ये तो मतलब क्या कहेंगे की यह तो फ्रॉड है किंतु फिर उनके समाज में चलते हैं क्रिश्चियन लोगों के भीतर में क्योंकि उनके मां में ये ठीक हो है की यह जितना भी चाहे फ्रॉड हो एन की कुछ भी हो किंतु एटलिस्ट वे लोग का हमारा तो कोई वैल्यू तो है वह हमको तो थोड़ा सा भी तो सलमान देते हैं हिंदू धर्म में ना ही हमारा वैल्यू है ना ही हमारा सम्मान है हम लोग वहां पे जाके क्या करेंगे तो हमको ये अपने हृदय की उदारता हिंदू धर्म को बड़ा नहीं होगी वैसे है प्रश्न ही नहीं है एडरवाइज तो जैसे जहां-जहां इस्लाम गया जहां जहां क्रिश्चियनिटी गई वहां वहां पे पूरे देश के देश कन्वर्ट हो गए हैं अरबी हमें इस्लाम शुरू हुआ तो इजिप्शियन संस्कृति इतनी पुरानी थी जो फिरोज केयर जो रिलिजन थे इतने बड़े-बड़े पिरामिड बना दिए पूरे को कन्वर्ट कर दिया यह जो उफोरेट इस टाइगर्स का जो रीजन है उसको तो मदर ऑफ सिविलाइजेशन कहा जाता है और इंडिया इसे अलसो मदर ऑफ सिविलाइजेशन किंतु फिर भी वहां पर जो यूनिफॉर्म टैबलेट्स वगैरा जो है वो सबसे पहले वहां पर मिली है तो कहते हैं की 10000 साल 20000 साल पुरानी वहां पर कंटीन्यूअस वो जो सिविलाइजेशन शक्ति है तो वहां पर भी उन्होंने अर्थात ईरान और इराक इराक तो वहां पर भी इस्लाम ने जाकर के अपना झंडा गढ़ दिया और पुराने जितने भी रिलिजन हैं उनको खत्म कर दिया तो इंडिया में ही क्यों ऐसा नहीं हुआ इस्लाम ने तो पूरा पर्यटन किया एक के बाद एक आक्रमण किया 1000 साल तक हमको गुलाम बना करके रखा फिर भी जो है हम लोग हिंदू लोग कन्वर्ट नहीं हुए हिंदुइज्म अभी भी जिंदा है तो निश्चय हमारे भीतर में वो अमरूद की धारा जो है हिंदुइज्म के हृदय में बा रही है अपनी भूमि को जो है पूनिया भूमि को सिंचित कर रही है तो इस बात में कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु फिर भी देखिए जैसे एक्सपेंशन इस लाइफ कांट्रेक्शन इस डेड स्वामी विवेकानंद कहते थे हमेशा एक्सपेंशन पर ध्यान रखना है जी दिन हम एक ऐसा सोचकर बैठ गए की बस अभी और ज्यादा एक्सपेंशन की जरूर नहीं है अभी और अभी हम जितने हैं वो इतने ठीक है तो इस क्षण कांट्रेक्शन चालू हो जाएगा इस क्षण जो है की हम लोगों से स्टार्ट हो जाएगा क्योंकि जैसे यह तो मानव सभ्यता जो है ना ह्यूमन सिविलाइजेशन को साइकिल की तरह है साइकिल को या तो आप आगे चला ही है या तो पीछे चल रहा है वो खड़ी रखेंगे तो सीधी गिर जाएगी तो वैसे ही यहां पे है जो धर्माचढ़ी एक्सपेंड नहीं होगा तो धर्म धीरे-धीरे करके टूटना शुरू हो जाएगा तो हमको तो ये एक अपना एक अचीवमेंट रखना है अपना ये एक एम रखना है की हिंदू धर्म की ये जो सनातन संदेश है हमारे महापुरुषों की कहानी है अपने पुराने की कहानी है अपने जो शक्ति साधना के शास्त्र है वो वैष्णव साधना के शास्त्र है जैन शास्त्र है या तो फिर ये जो अपने वेदांत के शास्त्र है उन उनके भीतर में जो ये जो टीचिंग्स है उनको हम पूरे विश्व में फैलाएं भले चाहे अब देखिए कन्वर्जन का कॉन्सेप्ट अपने हिंदुइज्म में नहीं है तो हमको ऐसा नहीं है की हमको सबको जाकर विदेश में जाकर सबको कन्वर्ट करना है किंतु बात है की वो यदि हम अपने टीचिंग्स जो है वो हम उनके साथ में शेर करते हैं तो जैसे स्वामी जी कहते हैं ना की क्रिश्चियन इस नोट तू विकम हिंदू एन बुद्धिस्ट एस तू विकम ए बटर बुद्धिस्ट तो हमारा ए जो है हिंदुइज्म का वेदांत टीचिंग का यदि हमने वेदांत उसको दिया तो क्रिश्चियन जो है वो हिंदुइज्म में कन्वर्ट नहीं होगा क्रिश्चियन एक बटर क्रिश्चियन बनेगा एक बुद्ध को यदि वेदांत का टीचिंग दिया बुद्ध ने यदि वेदांत शिखा तो वो बुद्धिस्म से हिंदुइज्म में कन्वर्ट नहीं होगा किंतु वो बटर बुद्धिस्ट बनेगा तो वो जो है अपने को मटर करने के लिए जो धर्म है इस धर्म का पालनपुर करें हम तो कहते हैं की एक ईश्वर है उसके तो लाखों लाखों स्वरूप है तो जैसे बुद्ध हो ना की जीसस हो ना की अल्लाह हो ना की कोई भी हो तो चाहे तो वो तो एक ही आत्मा के वो तो विभिन्न स्वरूप है जिसे की एक बाद सूरज है उसकी प्रकाश की किरण पृथ्वी पर फैलती है तो वह जो जहां पर भी जाति है तो वहां पर जैसे की पशु के ऊपर में भी पड़ती है मनुष्य के ऊपर में वही प्रकाश की किरण गिरती है जो यह जो पेड़ पौधे हैं उसके ऊपर में भी वही प्रकाश की किरण गिरती है तो वहां पर प्रकाश गिरता है तो वहां पेड़-पौधे दिखाई देते हैं मेरे पे प्रकाश गिरता है तो मैं दिखाई दूंगा आपके ऊपर में प्रकाश गिरेगी तो आप दिखाई देंगे वो आत्म के प्रकाश से ही तो हम लोग सब प्रकाशित है तो वैसे ही जितने ईश्वर है जितने धर्म पाठ है जितनी साधनाएं हैं वो सब तो ये जो सनातन एक जो आत्ममन है ब्राह्मण है इस के तो विभिन्न विभिन्न रूप से प्रकाश है हम क्यों ये कहे की ये जो ब्राह्मण का एक प्रकाशीय उसमें से जोर जबरदस्ती करके दूसरे प्रकाश में उसको कन्वर्ट कर दो और जी से उसको फॉलो करता है करें किंतु विकम में बटर क्रिश्चियन क्योंकि जितने भी धर्म है सबके वो जो फाउंडेशन है दो चीज है त्याग और सत्य और त्याग इसके दोनों के ऊपर में ये जो है जितने भी यह जो धर्म है वो टीके हुए कोई भी धर्म यदि ऐसा कहता है की सत्य वचन का पालनपुर करो या तो कोई कहता है भोग्य के द्वारा यदि आप भोग करते रहे डीओईएसएन'टी मटर वो कोई आपको जरूर नहीं है त्याग करने की तो वो झूठ धर्म है बाकी जितने भी धर्म है जो आपको सत्य वचन का पालनपुर करने को कहते हैं और त्याग करने को कहते हैं उसके बाद में और जितना भी कहते हैं उसके बाद में आपको फर्स्ट करने को कहते रहे फीड होप और चैरिटी जैसे इस्लाम में है या तो ज्ञान भक्ति वैराग्य जिसे हम हिंदुइज्म में है या तो जो अष्टांग मार्ग है जैसे की बुद्धिस्म में है तो फिर वो चाहे उसके ऊपर में कितना ही बड़ा वो पहले से बनाते रहे कितना ही बड़ा महल बनाते रहे किंतु फाउंडेशन है फाउंडेशन है सत्य और त्याग यह फाउंडेशन जब तक ठीक है तब तक उसके ऊपर बना हुआ धर्म भी ठीक है तो जैसे स्वामी जी कहते हैं यहां पर जो पिक्चर है जो इस तरह से शिक्षक है धर्म का वह यदि उसका मां पवित्र है और वह जो फालतू की बातें करता हुआ नहीं घूमता है देखिए साइलेंस बड़ा पावरफुल शब्द है स्वामी जी खुद बहुत ज्यादा करते थे वो बैग दक्षिणेश्वर में जाते थे तो ठाकुर भी कभी-कभी बोलते थे वो इतना बकबक करता है वो पूरा दिन भर रात आने के साथ कोई बात करने की शुरुआत कर देता है तो जो भी है आउट ऑफ प्योरिटी और साइलेंस कॉम डी वर्ल्ड ऑफ पावर अर्थात यदि हम अपना मां पवित्र है और हम जैसे स्वामी जी की तो बात अलग है चलो हम उनके साथ में कंपेयर नहीं करते हैं फालतू की बातें बैंड करके यदि हम अपना मां को एकाग्र करके यदि सब ग्रंथ पार्ट है जितना समय हमको मिलता है अब तो कर्म तो करना ही है कर्म के अलावा साधना का जो समय मिलता है उसके दौरान मंदिर में जाकर आरती अटेंड किया या तो सब ग्रंथ का पाठ किया एक एक एक इंट्रो वर्ल्ड जीवन हमने जिया एकांकी जीवन हमने किया तो इसके ऊपर में से हमारे शब्दों में एक शक्ति आएगी हम जो बोलेंगे लोग सुनेंगे और लोगों को अच्छा भी लगेगा लोग उसमें से ग्रहण भी करेंगे कुछ ना कुछ तो यह जो ऐसा नहीं है की जैसे हम लोग साधु है तो सिर्फ हमारा ही कम है हिंदुइज्म के बड़े में अच्छी बातें करना सबका कम है जो भी हिंदू है सबको हिंदू धर्म के यह जो बेसिक जो सिद्धांत है हिंदू धर्म की जो कहानी है संत महापुरुष की कहानी उसको उसको मां में रखना है और जहां पर भी मौका आता है उसके बड़े में बात करनी है वे जो आर पिक्चर्स हम सभी लोग प्रचारक है जो सड़क है वो ऑटोमेटिक प्रचारक बंता है बात ये है की साधना उसको ठीक ठीक हनी चाहिए अदर वाइस जैसे की जैसे ठाकुर के पास में वो हाजरा महाशय बैठे रहते थे तो बैठे-बैठे वो जब किया करते थे और फिर देखते थे की ठाकुर के दूसरे क्या करते हैं तो जैसे ठाकुर ने कहा ना की नरेंद्र कितना नरेंद्र जा करके ही बातें करना शुरू कर देता था नरेंद्र महाराज जी अखंडानंद जी जिनका पिक्चर यहां पर है यह लोग करते ही जाएंगे इतनी बातें करेंगे इतने जो हंसी मजाक करेंगे इतना हल्ला मचाएंगे तो वो हजार कहता था की इसमें से कोई भी सड़क नहीं है किस किसी को कोई धर्म जीवन के बड़े में कुछ पता नहीं है मुझे देखो मैं पितांबरी पहन के बैठ-बैठ करके जाप कर रहा हूं तो ऐसा जाप करने का कोई लाभ नहीं है क्योंकि उसके मां के भीतर में द्वेष है देखिए ठाकुर ने एक बार बहुत अच्छा कहा था की कलकत्ता में लोग लाखों लाखों का जाप करते हैं वैश्य भी वहां पे जाप कर लेती है क्या उससे लव हुआ अर्थात क्या है की एक घड़ा है उसमें यदि आप पानी भारते हैं यदि खड़े में से नीचे में से यदि यह एक फूटा हुआ है खड़ा नीचे में से खोल है तो आप जितना ही पानी डालेंगे पानी निकाल जाएगा तो वह अर्थात खाने का क्या है ठाकुर का यदि आपके जीवन में पवित्रता या तो साधना नहीं है तो फिर आप जितना ही बातें करते रहे उससे कुछ फर्क नहीं पढ़ने वाला है जितना जाप करके लोगों को पटाने की कोशिश करें उससे फर्क नहीं पढ़ने वाला है किंतु जब जीवन पवित्र होता है और मैं होता है तो हमारे शब्द जो है वो शब्द प्रत्येक शब्द लोग ध्यान से सुनते हैं उसमें से कुछ ना कुछ ग्रहण करते हैं

श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ

अभी कथामृत हमने देखा की किस तरह से यह जो ठाकुर है विद्यासागर को मिलने के लिए गए हैं और विद्यासागर के साथ में किस तरह से बात कर रहा है और दो-तीन चीज हमने विद्यासागर के बड़े में नोट की भले ही चाहे ठाकुर उनको कंप्लीमेंट दे रहे हैं किंतु वह जो है सामने कुछ नहीं बोल रहा है इसका अर्थ है की विद्यासागर को ऐसा लगता है की ये जो ठाकुर या तो फिर इस तरह से आध्यात्मिक धार्मिक जीवन जीना उसमें कोई सर नहीं है ऐसा शायद उनकी ऐसी मान्यता होगी अभी आगे मास्टर महाशय लिखने हैं मास्टर ने विद्यासागर को एक दिन ईश्वर के बड़े में यह कहते हुए सुना था की ईश्वर को कोई जान तो सकता नहीं फिर करना क्या चाहिए जैसे विद्यासागर ने कल कहा था की हमारे ऋषि मनी गण ईश्वर के बड़े में या तो धर्म के बड़े में जो समझने का पर्यटन करने को गए वो समझा नहीं पे क्योंकि हमने देखा वो कहानी की किस तरह से ज्ञान मार्ग साधु है और भक्ति मार्ग साधु है वो सोहन और डास हम बोल करके झगड़ा करते हैं किंतु यह भी देखा की हमारे जो भी अरगुमेंट्स है वो वर्बल आर्गुमेंट होती है इंटेलेक्चुअल स्कॉलास्टिक आर्गुमेंट होती है कभी भी हमारी आर्गुमेंट ब्लू शेड में कन्वर्ट नहीं हो जाति मार फुट में कन्वर्ट नहीं हो जाति तो इस तरह से विद्यासागर का ऐसा एक मानना था की उसके यहां पर इतने सारे कांट्रडिक्शंस हैं हिंदू धर्म को ठीक से समझाया नहीं गया है और एक दिन विद्यासागर कहते हैं ईश्वर को कोई जान तो सकता नहीं फिर करना क्या चाहिए मेरी समझ में हम लोगों को ऐसा होना चाहिए की यदि अब कोई ऐसे हो तो यह पृथ्वी स्वर्ग बन जाए हर एक को ऐसी चेष्टा करनी चाहिए की जिससे जगत का भला हो देखिए ये बात तो उसने टिक टिक पकड़ ली की जैसे वो बाइबल में कहते हैं ना डू वन तू थ्री नी एस यू विद थाई सेल अर्थात तुम अपने पड़ोसी के साथ में इस तरह का व्यवहार करो जो की तुम चाहते हो की पड़ोसी तुम्हारे साथ में करें मैं दूसरों के साथ में उसे तरह का व्यवहार करूंगा की मैं चाहूंगा की वह मेरे साथ करें अभी मैं चुपचाप बैठा हूं मैं किसी के साथ बात नहीं कर रहा मैं किसी को कंप्लीमेंट नहीं दे रहा मैं किसी के साथ मित्रता नहीं कर रहा और फिर मैं सोचता हूं की अरे कोई आकर के मेरे साथ बात नहीं कर रहा कोई मैं अच्छा कम कर रहा हूं तो उसकी प्रशंसा नहीं कर रहा अरे भाई मैं खुद किसी की प्रशंसा नहीं कर रहा हूं तो फिर यह फिर अपेक्षा रख कर बैठना की दूसरे लोग मेरी प्रशंसा नहीं कर रहे यह कहां तक जय जाए किंतु ठाकुर नहीं होते हैं अपना जो बिहेवियर है उसको इस तरह से मॉडरेटर करना चाहिए की जैसे मैं चाहूंगा की ये जो व्यक्ति है मेरे सामने है वो मेरे साथ में जी तरह का बिहेवियर की मैं अपेक्षा रख रहा हूं इस तरह का बिहेवियर में उसके साथ में करूंगा तो विद्यासागर ने ठीक ये तो ठीक ठीक पड़ा है विद्या और आदित्य की चर्चा करते हुए श्री रामकृष्ण ब्रह्मज्ञान की बात कर रहे हैं विद्यासागर बड़े पंडित हैं शायद शरद दर्शन पढ़कर उन्होंने देखा है की ईश्वर के विषय में कुछ भी जानना संभव नहीं श्री रामकृष्ण कहते हैं ब्रह्मा विद्या दोनों के पैर हैं वह मायतित है देखिए कितना बड़ा स्टेटमेंट है ठाकुर का इस जगत में विद्यमय और अविद्या माया दोनों है ज्ञान भक्ति भी है और साथ में कामिनी कंचन भी है सात भी है और असत भी है भला भी है और बड़ा भी परंतु ब्राह्मण निरालिप्त है भला बड़ा जीवन के लिए है सात असत जीवन के लिए वह ब्रह्मा को स्पर्श नहीं कर सकता जैसे दीप के सामने कोई भागवत पढ़ रहा है और कोई दाल बन रहा है दाल रैक रहा है पर दीप निर्लिप्त है सूर्य शिष्ट पर भी प्रकाश डालता है और दुष्ट पर भी किंतु सूर्य जो है वो निरूपित है यदि कहो की दुख पाप शांति यह सब क्यों है तो उसका जवाब यह है की यह सब चीजों के लिए है ब्राह्मण लिपट है साथ में विश्व है वह औरों को डसने से दूसरे लोगों को विश्व लाकर के मा जाते हैं किंतु सांप को इससे कोई हनी नहीं होती है ठाकुर की यह जो सीखने की कुछ स्टाइल है की पहले वो एक स्टेटमेंट देंगे पहले वह एक शिक्षा देंगे फिर उसके बाद में एक के बाद एग्जांपल देकर के उसको समझने का उसको सरल से सरल बनाने का पर्यटन करेंगे यहां पर क्या कहते हैं की ब्रह्मा जो है वो ज्ञान आज्ञा विज्ञान अविद्या संसरसंन्यास ये ब्रह्म जगत माया सबके पर है अर्थात यदि हम यह कहते हैं की जैसे विद्यासागर जैसे लोग यदि यह कहेंगे जिनके मां में बहुत दया है की जगत में इतना दुख कष्ट है यदि जगत में बिठा जो है अपने बच्चों का मिला नहीं पाती है आए दिन लोग सुसाइड कर लेते हैं आए दिन जब काल पड़ता है तो ऐसी स्थिति भारत में हुई है की मां अपने बच्चे को मार कर ए जाति है यहां तक के केसेस की नींद हुई है तो इसी भाया वह स्थिति अपनी युद्ध होता है जैसे यूक्रेन में युद्ध हो रहा है तो यहां पर वह लाखो लाखो बम जो है एक-एक सिटी पर फेंकते है अभी जो जहां हनी होगी वहां पर वह जो कष्ट होगा वगैरा तो ऐसा जो जगत ईश्वर ने बनाया है तो ईश्वर किस तरह का उसका हृदय है क्या वो रक्षा जैसा है ईश्वर या तो फिर ईश्वर है ही नहीं ऐसा जो मां में जब प्रश्न होता है हमारे खुद के जीवन में हमको सब समय अंधेरा दिखाई देता है सब समय निराशा हताशा दिखाई देती है तो फिर हमको लगता है की अरे भाई मैं तो भगवान के पास में इतना सब कुछ मांग रहा हूं अभी कुछ ही दोनों पहले एक देवोटी के साथ बात हो रही थी मेरी तो उसने कहा की हमको क्या एक ठाकुर के पास से ऐसा कुछ मांगना चाहिए की मैं वो स्टूडेंट है तो मैं परीक्षा में अच्छे से मार का जाए या कंपटीशन एग्जाम की वो तैयारी कर रही है तो वह फिर क्या की जब मैं प्रिपरेशन करते हूं तो फिर वह जो मैं अच्छे मार्क्स से पास हो जाऊं या तो फिर जो है की मुझे वहां पर मेडिकल में एडमिशन चाहिए तो एडमिशन मिल जाए तो क्या मैं ठाकुर से मांगू तो मैंने कहा देखो ठाकुर के पास से तो सिर्फ ज्ञान भक्ति वैराग्य मांगना चाहिए और यह जो कंपटीशन एग्जाम में पास होने के लिए जो परसेंटेज चाहिए तो अपनी मेहनत से करो वरना तो फिर फर्क क्या पड़ता है की तुमने ठाकुर ने जितना दिया जहां तक दिया तब तक रहेगा ठाकुर ले लेंगे वापस तो फिर कुछ नहीं रहेगा ये तो सांसारिक चीज जो है अपनी मेहनत से करनी है तो देखिए हमको ऐसा लगता है की ईश्वर यदि सब कुछ क्रिएट किया है तो मुझे भी ये कुछ दे दे उसमें से मुझे भी थोड़ा सा हिस्सा दे दे किंतु यहां पे कहते हैं ठाकुर की जड़ी ये आध्यात्मिक राज्य है ये जो है इस की सर्वोच्च सीमा पे ईश्वर बैठे हुए हैं या तो फिर ये जो जिसको हम ब्रह्मा कहते हैं वो वहां पे इसके नीचे में जो कुछ भी है वो माया के जगत में हम ही को परिश्रम करके सक्सेसफुल होना है एक चीज और दूसरा की यह ख्याल रखना है की यहां पर हम कितना ही परिश्रम कर ले थोड़ी बहुत सक्सेस मिलेगी किंतु जब भी थोड़ी बहुत सक्सेस मिलेगी साथ-साथ में ही एक ऐसी दुर्घटना या तो फिर ऐसा कुछ खड़ा कर देंगे ठाकुर की अपना मां जो है विरक्त हो जाए संसार के ऊपर से अरे भैया इतना पैसा मिला इतनी अच्छी जब मिली इतना अच्छा फैमिली है या तो फिर सुद्दनली किसी का डेथ हो गया जो की हमको बहुत ही प्रिया था यह जो राम राम बाबू जो थे ठाकुर के शिष्य वो मेडिकल एग्जामिनर थे वो जो कॉलेज में और बहुत अच्छी उनकी उसे समय की पोस्ट थी ब्रिटिश गवर्नमेंट में और बहुत अच्छा पैसा भी कमाते थे ठाकुर के पास आते थे की थोड़ी धर्म भावना थी किंतु क्या है वो हाथ जोड़ के खड़े र के वो प्रणाम वगैरा करना ऐसा वो थोड़ा सा उनका था नेचर की वो कंजूसाई प्रकार का किंतु फिर उनकी जो बच्ची है उसका डेथ हो गया वो जो है वो फिर उसको इतना कष्ट हुआ रामबाबू को की फिर रामबाबू क्या करते हैं की अपना उन्होंने सोचा की मैं जी बच्चों के लिए पैसा इकट्ठा कर रहा हूं वही जगत में नहीं रहेंगे तो फिर पैसा इकट्ठा करने का क्या लाभ है तो फिर उन्होंने क्या है की उत्सव करने की शुरुआत की ठाकुर और ठाकुर के शिष्यों को सब भक्तों को इकट्ठा करके और वह उत्सव के बड़े में कथामृत में देखेंगे बहुत ही सुंदर वर्णन है एक के बाद एक उत्सव होते हैं है वहां पर वह जो गाना बजाने वाले को इकट्ठा करते हैं रामबाबू ठाकुर आते हैं ठाकुर भजन गेट हैं कीर्तन करते हैं उपदेश देते हैं कथामृत में कितने सुंदर-सुंदर यह सब वर्णन है तो यह जो है जब जीवन में ऐसी कोई घटना बनेगी हमारा मां ऑटोमेटिक यह संसार की और से पीछे चला जाएगा संसार की और से वापस आएगा और ईश्वर की और भैत होगा जैसे यहां पे ठाकुर कहते हैं की साहब जो है सांप के भीतर में विश्व है वो सबको दस्त है तो दूसरों को जो है वो जहर लगेगा दूसरे लोग मा जाएंगे किंतु सांप को कुछ नहीं होगा वैसे ही ये ब्राह्मण के भीतर में से ये जगत संसार बना है यह जगत संसार के भीतर में यह जो है हमको वो डांस लगेगा हमको यह जो है सांप का जो विश्व है हमको लगेगा किंतु ईश्वर जो है वो इससे निर्मित है जो सूरज का प्रकाश सूरज के प्रकाश जहां पर उदाहरण दिया है तो दिए के प्रकाश में से कोई विद्या ब्रश कर रहा है कोई जो है शिकारी जो है पशु पक्षियों को पकाने के लिए दाल बन रहा है तो बड़ा कम हो ना की अच्छा कम हो यह ईश्वर जो है निर्लिप्त है तो हमारी यह जो दुर्घटना या तो हमारी यह जो मिसफॉर्चून इसके लिए ईश्वर को दोषी नहीं सा करके हमको जो है धीरे-धीरे इस संसार से पीछे है करने होगी इम्मीडिएटली नहीं होगा किंतु थोड़ा बहुत अपना मां जो है ईश्वर पर लगाना होगा धीरे-धीरे करके देखेंगे अपना पूरा जीवन है वो ईश्वर में आशीर्वाद में हो जाएगा तब यही संसार में जब हम रहेंगे और साहब यदि हमको 10 भी देगा तो हमको विश्व नहीं लगेगा दिए का जो प्रकाश है उसमें हम चने से भी दाल नहीं भूल पाएंगे हमारा जो ठाकुर कहते हैं की बेचल पाप पढ़ने देवी ना बंगाली में कहते हैं यदि ईश्वर की कृपा होती है गलती से भी आप गलती नहीं कर पाएंगे दिए के प्रकाश में से अब चाहेंगे फिर भी दाल नहीं भूल पाएंगे आपके सब में खड़े रहेंगे जाकर के साथ दशहरा फिर भी नहीं लगेगा तो इस तरह का आशीर्वाद मैं जीवन हमारा हो जाएगा जब जब जैसे-जैसे हमारी साधना बढ़नी जाएगी तो आज यही तक कल फिर से मिलता है ओम शांति शांति