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Ma Sarada Life ·

Ma Sarada devi 21 June 2023 मातृसान्निध्ये : स्वामी ईशानानन्द लिखित

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कोलकाता मद्रास रामेश्वर प्रभृति तीर्थ दर्शन कोरिया राधा रानी अर्थात वह अब जैसे पिछली बार हमने देखा था कल की 1910 में 1910 की साल में मां शारदा देवी वहां पर दक्षिण भारत में वह उसके लिए गई थी तीर्थ यात्रा के लिए शशि महाराज ने स्वामी रामकृष्ण आनंद जी ने मां को निमंत्रण दिया था मां को कहा था की आप दक्षिण भारत में आई दक्षिण भारत के तीर्थ दर्शन करेंगे अभी मां तो स्वयं जगत जगदंबा स्वयं मां को तो कोई तीर्थ दर्शन करने की जरूर नहीं है मां स्वयं करने के लिए मां को दक्षिण भारत में बुलाना वो एक बहन है अपने दक्षिण भारत के जितने भी वक्त है स्वामी विवेकानंद ने जब भारत भ्रमण किया था तो दक्षिण भारत में भी गए थे मद्रास रामेश्वर एक कोलंबो वगैरा जगह पर जाकर के उन्होंने जो प्रवचन दिए फिर वो वहां पे उनकी इतने सारे जो रामकृष्ण भावदार के सम्मिलित इतने वो एडमिरे थे इतने फ्रेंड्स थे इतने देवोतिस्ट थे इतने सारे साधु ब्रह्मचारी थे वो सब मां के आशीर्वाद ग्रहण करें और दक्षिण भारत की भूमि जी तरह से भगवान राम मां सीता और लक्ष्मण स्वयं जो भारत उत्तर भारत से दक्षिण भारत गए तो क्या है की नॉर्थ और साउथ इंडिया के बीच में एक ब्रिज बना है ये भारत की भूमि को जोड़ने के लिए ये तीर्थ यात्रा की जाति है तीर्थ यात्रा सिर्फ इसीलिए नहीं होती की उसे पर्टिकुलर स्थान का महिमा है वहां पर जाकर के हम उनके दर्शन करेंगे शंकराचार्य को देखिए यह जो उन्होंने मठ की स्थापना की एक हिमालय में एक गुजरात में श्री दक्षिण भारत में इसका क्या अर्थ है की भारत की यह जो पवित्र भूमि है इसको पूरा इसके भीतर में ये जो चैनल ऑफ कम्युनिकेशन जो है ये पवित्रता का एक रास्ता जो है आलू और रास्ता ठाकुर बोले जब वो उनको कैंसर हो गया था गले का रोग हो गया था और चिकित्सा के लिए काशीपुर ले गए थे उसे समय क्या था की सुरेश मित्र ये बात हमने पहले भी कहीं है सुरेश मित्रों हर साल दुर्गा पूजा का आयोजन करता था ठाकुर को निमंत्रण करता था ठाकुर भक्ति लोगों के साथ में जाकर के वह नृत्य कीर्तन करते थे मां के भजन गेट थे पदावली संकेत तन सुनते थे वो वगेरा एक बहुत ही सुंदर आनंद का भक्ति का अध्यात्म का प्रवाह बेहतर था अभी इस साल सुरेंद्र ने वो दुर्गा पूजा का आयोजन किया है किंतु ठाकुर जो है वो उपस्थित नहीं हो का रहे हैं गले में कैंसर है काशीपुर में उद्यान ग्रुप में वह चिकित्सा ले रहे हैं विश्राम कर रहे तो अभी जैसे ही संदीप पूजा समय आया वैसे ही ठाकुर देखिए की यहां पर काशीपुर में समाधि में चले गए कुछ डर के बाद में समाधि में से बाहर में आकर करके बाकियों ज्ञान लाभ करके उन्होंने भक्तों को कहा की देखो यहां से लेकर के सुरेश के घर तक एक आलू और रास्ता बने गए थे आलू और रास्ता यानी की एक प्रकाश का रास्ता बन गया है इस प्रकाश के रास्ते से ठाकुर ने उसे सुरेश के घर पे जाकर के मां दुर्गा का दर्शन किया और देखा की सुरेश जो है मां की प्रतिमा के सामने बैठ करके रो रहा है अच्छा अभी ये घटना क्या दक्षिणेश्वर में हुई थी की काशीपुर में यह थोड़ा सा मुझे क्लियर करना होगा शायद ठाकुर दक्षिणेश्वर में भी हो सकते थे किंतु जो भी है वह एक आलू का रास्ता हो गया एक प्रकाश का रास्ता हो गया उसे प्रकाश के रास्ते से ठाकुर सुरेश मित्र के घर गए और देखा सही सही किस तरह से सब सजय हुआ है यह देख करके ठाकुर जब वापस आए समाधि में से उन्होंने बा लोगों को कहा की जो सुरेश जो है वो रो रहा है वहां पर जाकर के तुम लोग मां का दर्शन करो और वहां पर थोड़ा सा भजन कीर्तन करके आओ जिससे की सुरेश को भी संध्या मिले तो जब भक्ति लोग गए वहां पर तो देखा की वैसे ही है जैसे की ठाकुर ने डिस्क्राइब किया है की वह मां की प्रतिमा है वो सब प्रदीप जो है वो टीम टीम ए रहे हैं चाहे और उसे सुरेश जो है मां के पास में बैठकर के रो रहा है तो सब लोग आश्चर्य में पद गए की सही में ठाकुर को ये दूरदर्शन हुआ है सही में ठाकुर समाधि में यहां पे उपस्थित हुए थे और सुरेश को आशीर्वाद करके गए हैं मां दुर्गा का आशीर्वाद ग्रहण करके गए तो यह आलोक रास्ता भारत की ये जो भूमि है यह प्रकाश के रास्ते से कनेक्ट है हमारे जितने भी ये जो महापुरुष है संत है अवतार है प्रॉफिट से भगवान राम से शुरू करें तो शंकराचार्य है वशिष्ठ है सबको देखिए की उन्होंने भारत की इस दुनिया भूमि का भारत की इस पवित्र भूमिका भ्रमण किया है उसे सभी तीर्थ क्षेत्र का भ्रमण करके अभी तीर्थन क्षेत्र का भ्रमण एक बहन है वहां पर जाकर के संत के चरण राज जहां पे गिरती है वो जगह अपने से ही तीर्थ हो जाति है तो जैसे राजा महाराजा वहां पे वो गए रामेश्वर मंदिर में कन्याकुमारी के मंदिर में कन्याकुमारी के मंदिर में राजा महाराजा कर रहा है तो एकदम जैसे की मां के सामने ले मारतीर हो गए और एकदम जैसे की मां कन्याकुमारी का उनके ऊपर में आवेश हुआ हो इस तरह से वो हो गए वो समाधि में चले गए थे तो अभी मां जब गई थी तो मां तो पता है आपको की जैसे ठाकुर है और राजा महाराज है और यूपीटीयू और एक्सेंट स्वामी जी है राजा महाराजा ठाकुर में समाधि के लक्षण मुहू बार-बार दिखाई देते थे किंतु स्वामी जी ने बहुत कम दिखते थे बहुत कम रेफरेंस हमारे पास में है की स्वामी जी समाधि में जा रहे हैं या तो फिर स्वामी जी समाधि में मैग्ना है प्रेफरेंस है की काशीपुर गार्डन में जब स्वामी जी बहुत जीत कर रहे थे की महाशय आपके जान से पहले आपकी महासमाधि से पहले आपको मुझे कुछ डीके जाना होगा तो उसे समय ठाकुर ने कहा था की अच्छा जा तुम को कुछ मिल जाएगा तो फिर उसे समय वहां काशीपुर में स्वामी जी जो है समाधि में चले गए निर्विकार्ट समाधि में तो दो-तीन लोग जो देवोटी है ये त्यागी लड़के जब बाकी उनके गुरु भाई वो ठाकुर का कैमरा पहले फर्स्ट फ्लोर पे था और ये सब इनका बैठक करना था सबका वो ग्राउंड फ्लोर पे है तो ये दो तीन गुरु भाई जाकर के ठाकुर को बोलते हैं की महाशय नरेंद्र जो है वो समाधि में चला गया है तो ठाकुर कहते हैं की अच्छा वो रहे वो समाधि में ही रहे मुझे बड़ा परेशान करता था समाधि के लिए अभी वो समाधि में चला गया है किंतु जब स्वामी जी समाधि से बाहर आए तब ठाकुर ने क्या कहा था की अभी चाबी मेरे पास में है अर्थात की ये जो समाधि के जो महल है समाधि रूपी ये पहले जो है उसका दरवाजा बैंड लेकर के ठाकुर ने चाबी अपने पास रख दी है और ठाकुर क्या कहते हैं पहले तुमको मां का कम करना होगा बाद में ये जो है समाधि का रास्ता तुम्हारे लिए फिर से खुलेगा तो स्वामी जी के जीवन में जब भी देखिए की समाधि में जान के लिए वैसे तो उनका मां जो है उद्योग की है किंतु ये जगत कल्याण के लिए दो लोगों का दुख कष्ट देखकर के उनका हृदय जो द्रवित हो जाता था उसकी वजह से स्वामी जी समाधि में नहीं जा का रहे थे और जो कुछ हमारे पास में रेफरेंस हैवी सही जैसे की अल्मोड़ा में अल्मोड़ा में स्वामी जी ने पर्यटन किया की वो समाधि में जाकर के अपना जीवन जो है समाधि में ही बीता है और समाधि में ही देहात त्याग कर जाए तब क्या हुआ उनकी बहन के वो जो आत्महत्या का समाचार उनको मिला और वो समाचार जो है वह उनकी बहन का वो जो पूरे भारत की बहनों का कष्ट जो है उनको हिमालय से समाधि से नीचे खींच कर के ले आया उसके बाद में अमेरिका में देखिए की लेख मिशीगन के किनारे बैठ करके एक बार वह उनका मां समाधि में जान के लिए उत्सुक हो रहा था उसे समय भी जैसे की ठाकुर का कार्य उनको खींचकर के नीचे ले आया था तो जब भी उनका मां समाधि में जान को पर्यटन करता था ठाकुर उनको लेकर आते थे इस धरातल पे और आखिर में जब 1902 में 4th जुलाई को जब आखिर में उनका संपूर्ण कार्य समाप्त हो गया पृथ्वी पे तब कहानी जाकर के उन्होंने समाधि ग्रहण की तो वो समाधि आखिर में महासमाधि में प्रेरित हो गई महासमाधि में वो वो समाधि में से ही महादी में प्रवेश कर गए तो स्वामी जी जो है उनके समाधि के लक्षण वगैरा नहीं दिखते थे किंतु राजा महाराज जो है बार-बार ऐसा दिखाई देता था की वो हुक्का पी रहे हैं उनका एक बड़ा फेमस चित्र है वह अपने आराम कुर्सी पर बैठे हैं और वो उसे कुर्सी पर बैठे बैठे हुक्का पी रहे हैं और उनकी जो आंखें हैं उनका मां जो है ऐसा वो जैसे फोटो देख कर के ही लगता है इतना कितना सुंदर खूबसूरत फोटो है वह फोटो देखकर की लगता है की महाराज का वह जैसे लगता है की वो हुक्का पी रहे हैं वो बाकी है उनकी इंद्रियों के द्वारा किंतु उनका जो अंतर मां है वो कहां वो भागवत राज्य में ईश्वर के श्रीपाद पड़ा में वो विलेन हो गया है अभी यहां पर सुंदर एक बात है की हम लोग जब बेलूर मठ में ट्रेनिंग सेंटर में होते हैं तो हम सबको ड्यूटी दी जाति है की ये ठाकुर के गर्भगृह में वो क्लीनिंग करना है या तो फिर राजा महाराज का वो जो समाधि मंदिर के फर्स्ट फ्लोर पे नीचे में तो समाधि मंदिर है आप यदि बेलूर मठ गए होंगे तो किंतु फर्स्ट फ्लोर पे उनकी उनका बेडरूम के लिए लिया जाता है और वहीं पर जो कुर्सी का ये जो चित्र में बता रहा हूं छवि जो है फोटोग्राफ की जिसमें बैठकर के राजा महाराज समाधि में चले गए वो कुर्सी अभी भी वहां पे वो बड़े ही यातनापूर्वक राखी गई है और मेरा ड्यूटी था की वह रोज उसे कुर्सी को पूरा क्लीन करें तो देखिए मैं जब पहले बार वो कुर्सी को देखा मैं इतना अभिभूत हो गया की इसी कुर्सी पर बैठकर के राजा महाराज एन जान कितनी बार वो समाधि में वो प्रवेश कर चुके होंगे और जैसे वो दक्षिणेश्वर में ठाकुर का वो बड़ा खाट और छोटा खाट जो है ना जी पर बैठकर के वो बार-बार समाधि में प्रविष्टि होते थे अभी वहां पे तो हमको जान की वहां पे तो सेवा करने की हमको इजाजत नहीं है रामकृष्ण मिशन के साधुओं को दक्षिणेश्वर तो अपना ही नहीं किंतु यह राजा हमारा की कुर्सी तो अपने ही बेलूर मठ के मंदिर में है तो रोज मैं प्रतिदिन जो मेरी ड्यूटी थी वह एक कपड़े होता है और कपड़े की मदद से वो पूरा हमको जो हमारे सीनरी महाराज जो है वो हमको बता देते हैं की किस तरह से कुर्सी को क्लीन करना है बड़े ही इतना पूर्वक पहले यहां से यहां क्लीन करना है फिर यहां से यहां क्लीन करना है और करने के समय मां में जब होना चाहिए जब अपना मां जो है वो सटा जब करते रहना चाहिए जिससे की उसे वातावरण जो है वो कैमरा जो है उसकी पवित्रता का पवित्रता के रक्षा हो सके तो था वास मी ग्रेट गुड फॉर्चून की उसे कुर्सी के वो क्लीन करने का मुझे मौका मिला था तो अभी मां का जो है किंतु मां बड़े ही रेयरली ऐसा होता है की वो समाधि में वो प्रवेश करती थी या तो बाहर में वो समाधि के कोई लक्षण दिखाई देते थे एक बार क्या हुआ मैं कल पड़ा की ही बात है कल पड़ा में देखा की उसे दिन बहुत गम था और मां जो है वहां पे वरांडा में बैठी हुई थी और अभी मां का आखिरी समय चल रहा था यह 1918 के बाद की बात है मां की महासमाधि 1920 की साल में हुई थी तो 1918 के आसपास की ही समय है मां बहुत ही वो बीमा थी वो बार-बार एक के बाद एक जो डिजीज है मां के शरीर को संपूर्ण रूप से तहस-नहस कर दे रहे थे और वैसे भी मां के वह अभी इस धरातल पे उनके दिन जो है अभी वो दिन ही रहे थे दोस्तों अभी वह उनका जान का समय हो चुका था तो उसे समय कुछ दोनों के लिए विश्राम करने के लिए वो वहां पर कल पड़ा में जगदंबा आश्रम में र रही थी वो वहां पे वो वरांडा में बैठी है गर्मी का समय था और ये राजू मां को नलिनी ये सब वहां आसपास में कहानी पे बैठ के वो गैप लगा रहे थे वो वार्तालाप कर रहे थे वो हंसी मजाक ऐसा कुछ कर रहे होंगे सडनली क्या हुआ की मां को समझती हो गई लोगों को सबको पता चल गया की ये मां का जो मतलब आंखें जैसे की वो उद्योग चली जाति है वो चेहरे पर से एक दिव्या एक आभा जो है एक दिव्या आनंद जो है वो प्रगति होने लगता है उसके चारों और का वातावरण जो है इतना पवित्र हो जाता है की वो पेड़ पौधे पशु पक्षी मनुष्य जो भी है जानवर इंसान सब लोगों के मां में एक अद्भुत ईश्वरीय आनंद का ईश्वरीय शरणागति का ऐश्वर्या भक्ति का एक उदय होता है वो समाधि का लक्षण है समाधि को आप छुपाने से तब वहां पर बैठी है और एकदम अचानक समाधि में चली गई सबको पता चल गया की अरे मां समाधि मां समाधि में चली गई है मां को समाधि हुई है सब लोग इकट्ठा हो गए गर्मी का समय था तो मां को फिर धीरे से उसे बहुत ही जतानपूर्वक उनके कमरे में ले जय गया कोई उनको पंखा दाल रहा है कोई हवा कर रहा है एकदम चारों और जैसे की वो जंगल में आज लगती है तो किसी वो किल जाति है तो ऐसे जंगल में आज जैसे फैलती है इस तरह से बात पुरी फेल गई की मां को समाधि हो गई है मां को समाधि हो गई अभी ये वर्धा महाराज ही वो उसे समय बाटी में थे तो और रात को मैन कहा था दिन में जयरामबाती में रहना किंतु रात को कल पड़ा है ना मेरे साथ में रहना क्योंकि वो जगदंबा आश्रम जो है वो तो गांव से थोड़ा सा बाहर था तो कोई एक इस तरह से कोई लड़का राहत है तो कोई थोड़ा राहत है क्योंकि मां के साथ में तो ज्यादातर उनकी सेविका है या तो फिर ये जो उनके ये लेडी सब रिलेटिव से वही लोग रहते थे कोई लड़का राहत है तो एक अच्छा एक प्रोटेक्शन राहत है तो मानव वर्धा महाराज को का दिया था की दिन में तुम भले चाहे जयरामबाती में रहो रात को कल पड़ा आना तो उसे दिन जब शाम को वर्धमारा जगदंबा आश्रम में देखा की सभी उनके आसपास की उनकी सेविका है वह बड़ी चंचल है बात कर रही है आपस में अरे मां को तो कभी समाधि में देखना नहीं आज मां को समाधि हो गई तो उसे दिन वर्धा महाराज ने पूछा मां को की अरे मां आपको सही में सहमत समाधि हुई है तो मां बोलती है अरे नहीं नहीं ये लोग तो बिना मतलब बटन का बंदगार बना रहे हैं मैंने बड़ा चड्ढा करके बात कर रहे हैं वो तो धूप में थोड़ा सा मुझे चक्कर जैसा ए गया वो जैसे की वो मां स्विच ऑफ होती है उसमें धागा दाल रही थी तो सी में धागा डालते डालते अभी ग्राम था और वह एकाग्र करना पड़ता है ना वो सी का वो तो इतना छोटा सा सूक्ष्म राहत है जिसके पिता में वो धागा जाता है तो वो एकाग्र मां करके वो धागा दाल रही थी और गर्मी का समय था तो मां को थोड़ा चक्कर जैसा ए गया इसलिए यही हुआ है सिर्फ और कुछ नहीं हुआ ऐसा बोलकर के मैन उसे समय यह बात दाल दी किंतु क्या हुआ जब मां का अंतिम समय था मां उद्बोधन में थी और वह सेव अवश्य थी मैंने पथरी में लेती हुई थी अभी तो कुछ ही दिन बच्चे हैं कुछ ही चंद घंटे बच्चे हैं मां का शरीर जान की तैयारी है उसे समय मां किंतु वर्धा महाराज को कहती है की देखो उसे समय ये लोग हल्ला गला ना करें बोल करके मैंने सही बात किसी को कहानी नहीं किंतु आज तुमको बताती हूं की मैं जैसे वो सी के भीतर में धागा दाल रही थी इस समय देखा की ठाकुर आकर के बेटे हैं वो वरांडा में और बोलते हैं बहुत धूप है मेरे लिए खिचड़ी बना की ऐसा कुछ ठाकुर बोले तो जैसे ही ठाकुर ऐसा कुछ बोले तो वैसे ही मैं खड़ी होकर के मेरा आंचल जो है वह बचाने के लिए गई जिसके ऊपर ठाकुर बैठ सके ठाकुर विश्राम कर सके ठाकुर को मैं हवा कर सुकून यह बात जो है ऐसा हुआ था तो अभी अब देखिए की मां को इस तरह से ठाकुर का दर्शन समाधि में चले जाना कितना बड़ा वह मतलब जैसे टूरियनंद जी बोलते थे की मां का जो मां जो है वो हमेशा कंटाप प्रदेश में राहत है उससे नीचे कभी आता ही नहीं है यानी की मां जो है ये जो शेड चक्र जो है वो मूलाधार वगैरा जो एक के बाद एक उसमें से कंठ जो चक्र जो है उसके बाद में ये कल पर चक्र है फिर वो जो सहस्रार है वो अपने सर के ऊपर में तो इस तरह से कंठ का जो चक्र है उससे नीचे मां का मां जो है कभी आता ही नहीं है अर्थात मां हमेशा ये जो समाधि और जागृत अवस्था के बीच में हमेशा अवस्थाएं करती है मां जब चाहे क्षणभर में समाधि में चली जा शक्ति है और जब चाहे क्षण भर में एक जागृत अवस्था में हमारे साथ में वार्तालाप कर शक्ति हैं हमको आशीर्वाद दे शक्ति है उपदेश दे शक्ति है तो जैसे की वो ठाकुर जब नेवी कल का समाधि में थे तो वो जगदंबा ने मां को कहा था मां काली ने तू ही भागो मुख्य अर्थात भाव मुख अवस्था में तुम रहो तो यह सुपर कॉन्शियस और कॉन्शियस की बॉर्डर लाइन पर ठाकुर रहते थे किंतु ठाकुर का क्या था जब भी वो सुपर कॉन्शियस लेवल पे चले जाते थे तो इस तरह से वो आनंद का प्रवाह उनकी चारों और बेहतर होता था प्रति दिन कितनी बार ऐसा होगा जबकि मां मां भी वही सुपर कॉन्शियस और कॉन्शियस की बॉर्डर लाइन पे रहती थी किंतु वह मां की वो जो अपनी भाव जो है भाव और समाधि उसको छुपाने की क्षमता इतनी प्रचंड थी की कभी किसी को पता नहीं चला था की वो मां अभी समाधि में है या तो मां ईश्वर के पास में है सिर्फ शरीर ही हमारे सामने पड़ा है जैसे ठाकुर कहते हैं ना की छोटा सा तालाब हो उसमें यदि पत्थर भी फेक दे तो बड़ा ही वो उसके ऊपर में जो तरंगे जो है बहुत साड़ी तरंगे उठाती है किंतु विराट समुद्र हो या बहुत विशाल तनाव हो उसके भीतर में तो दिखाई भी प्रवेश कर जाए तो उसकी पार्टी के ऊपर में ऊपर में तरंग इतनी बेहतरीन है पता नहीं चला तो मां की ये जो भाव और समाधि को छुपाने की क्षमता आई विराट समुद्र जैसी थी पूरा हाथी भी उसमें प्रवेश कर जाए ऊपर में से कुछ पता नहीं चलेगा तो इस तरह से मां जब ये पूरा भारत का भ्रमण करके या तो फिर ये दक्षिण भारत के तीर्थ यात्रा जो की है इसका ये जो हमारा सनातन ये हमारे ऋषि मनी हमारे अवतार ये जो परंपरा है वो मैन जागृत राखी है स्वामी जी गए थे दक्षिण भारत में अभी मां गए अभी ठाकुर नहीं गए थे ठाकुर जैसे की ठाकुर ने कहा की ये शरीर जो है वो पुरी से आया है वो जगन्नाथ पुरी से है वो तो वहां पर जाएगा तो फिर जब है उसकी रक्षा नहीं होगी तो इसलिए ठाकुर जो है वहां दक्षिण भारत में नहीं गए थे तो इसलिए मां को जाना पड़ा और वहां पर देखिए की वैसे जहां पे भगवान राम ने जहां पर वो रामेश्वर के नदी के किनारे मां सीता ने शिवलिंग बनाकर के रखा था तो वही शिवलिंग का दर्शन करके फिर वो किसी ने पूछा की वो मां अपने शिवलिंग के साथ देखा दर्शन कैसे किया आप किस तरह से आपको अनुभूति हुई तो मैन क्या का दिया बात-बात में एकदम छोटी सी बात है वैसे नहीं सुनते नहीं समझते तो निकाल ही जाति है मां से ऐसे किंतु जब वो ध्यान से सुनते हैं तब पता चला है की मैन क्या का दिया है मैंने क्या कहा जर्मन रेखिला दिमनी देखें चिलम चिमनी ही अच्छे मैन सीता रूप में मैन जी तरह से शिवलिंग की रचना की थी शिवलिंग को वहां पे पूजा की थी इस रूप में इस स्वरूप में वह शिवलिंग अभी भी वहां पे अवस्थित है मां के मुंह से ये बात निकाल गई थी तो मां का यह जो दक्षिण भारत में घमंड करना यह हमारी पुण्य भूमि को प्रकाश के रास्ते से एक झूठ करके रखना की जो हमारी परंपरा है इस को मां फॉलो कर रही थी तो इस को फिर वहां दक्षिण भारत का भ्रमण करके मार्च जब फिर से कल जयरामबाती प्रस्थान करती है तब फिर से रास्ते में फल पड़ा में विश्राम करती है तो जब मैं कल पड़ती है मैं प्रवेश करती है उसे दिन का वर्णन उसे घटना का वर्णन बड़ा ही सुंदर रूप से वर्धा महाराज ने यहां पे किया है महाराज लिखने हैं अमर पूर्व दिन हुए आश्रम में पैसे भंडूज्य कुकुर घाटे सृष्टि महेश नांदेड़ जानो लाल पर लाल पता और बेड़ा बंदिलम अर्थात मां जब वो वहां पे वो जो बंधु जयपुर नाम क्या एक तालाब है वहां पे मास नान करेगी तो वहां पर पहले से ही लाल पता अर्थात वो जो मक्कल का पेड़ हो जो होता है उससे उन्होंने ये जो है एक बैरियर बना दी जिससे की मां मां को एक प्राइवेसी मिले मां को जो है थोड़ा सा एक सिक्योरिटी मिले जिसके भीतर में मां जो है वो स्नान कर सके वहां पे जाकर के वो तालाब के किनारे रास्ता घाट परिष्कार कोरिया नूतन ठाकुर वहां पर वह जो यह झाड़ू लगा कर के और वो जो ठाकुर घर है और उसके बगल में मां के विश्राम का जो घर है कैमरा जो है उसको बड़ा ही सुंदर रूप से सजय गया कपड़ दिया बरांडा ढकिया आश्रम में भीतर आमद आते बनग नूतन टेट कपड़ बिछाइयां तहर ऊपर पड़ा फूल दिया रास्ता साजिया राखी मैंने जो वरांडा जो है उसमें कपड़े से धक दिया जैसे की मां को प्राइवेसी मिली है फिर जो वहां में रास्ते से वहां आश्रम में जान का जो रास्ता है उसके ऊपर में ये लोग तो स्वदेशी ये जो चरखा जो है चढ़े पे वो कपड़े बनाते थे तो उन्होंने अपने हाथों से बनाया हुआ वस्त्र रास्ते पे बढ़ा दिया और बगल वाला जो ये है वो कुकर जो पॉन्ड जो है तालाब जो है वहां से पदमा फूल जो है कमल के फूल उसको चुन करके वो रास्ते पे भी वो जो वस्त्र जो बिछाया था रास्ते पर उसे पर फैला दिया मैन कितना सुंदर वो दृश्य हुआ होगा अभी जैसे हम कभी-कभी देखते हैं ना अभी वो हमारे प्राइम मिनिस्टर मोदी अमेरिका गए हैं तो उनको जब वो विमान में से निकलते तो रेड कारपेट उनको लिए बिछी जाति है और कारपेट मतलब एक वह बड़ा एक सम्मान का प्रतीक है जब कोई डिग्निटेरी आते हैं तो रेड कारपेट बढ़ा करके उनको भीतर में ले लिया जाता है आमंत्रण दिया जाता है तो यहां पे इन लोगों ने क्या किया की उनके किस तरह से रेड कारपेट बनाई देखिए पुरी भारतीय पद्धति से रेड कारपेट पहले तो चढ़े से अपने हाथों से बना हुआ वस्त्र अभी वो तो सफेद होगा वस्त्र बढ़ा दिया फिर पदमा फूल जो है कमल के फूल पूरे इसके ऊपर में बढ़ा दिए अब सोच के देखिए की कितना सुंदर दृश्य वह हुआ होगा मां जब वो पाखी में से या तो वो जो बैलगाड़ी में से जब वो नीचे उतार टी होगी फिर ये रास्ता देखा होगा सफेद रास्ता है वो वस्त्र से बिछाया हुआ सफेद रास्ता उसके ऊपर में गुलाबी कमल बिछाए हुए सफेद और गुलाबी कलर मिलकर के कितना सुंदर एक बना होगा मां के वो आमंत्रण के लिए मां के स्वागत के लिए वो हम कल्पना कर सकते हैं मां का हृदय भी कितना वो मतलब उनके लिए आशीर्वाद से भर गया होगा की हां मेरे बच्चे जो है मेरे बेटे जो है मुझे कितना सम्मान देते हैं और इसीलिए मां का आशीर्वाद हमेशा अभी भी कल पड़ा आपके ऊपर में हमेशा बना रहा है बाद में मां बोलती हूं की ठाकुर यहां पे बैठे हुए हैं मां खुद बाद में बोलते हैं श्री श्री मां गाड़ी हुई ते नामियां ज फुलटिरू पर का दिया हाथी ते चिले शही-सही फूलती पिछन हुई ते तू लिया कुड़ी ते राखेला अर्थात मां जब वह उसमें से वह प्रस्थान करना चलना शुरू किया तो मां के जो शरीफ पदम है जी फूल के ऊपर में पड़े वो वही फूल जो है वर्धा महाराज ने पीछे से वो ले लिए संग्रहित कर लिया मां के श्री चरण जी फूल को लगे देखिए की उसे फूल की पवित्रता भी कितनी है आज हम हमारे आपको पता पता होगा की देखा होगा मां के वो अलाटापारा वो पर छाप जा के बोले मां के पैरों में अलता लगा करके वो लाल कुमकुम का वो जैसा लगा करके वो सफेद वस्त्र में मां के पैरों की छाप ली गई है वो जो है वो मां के पैरों की छाप अपने मंदिरों में वगैरा राखी जाति है फिर जिनकी पूजा होती है तो मां के पैरों की छाप किस तरह से वस्त्र में लेकर के इतने सालों के बाद में जिसकी हम पूजा वगैरा करते हैं वो अभी भी जो होता है तो अभी सत्य इस समय जी फूल को जी पद्मफुल को मां का चरण स्पर्श हुआ होगा वो कितना पवित्र होगा वो इमेजिन करके देखिए अभी वर्धा महाराज ने लिखा नहीं है यहां पे की उन्होंने फुल्का क्या किया होगा किंतु हम अनुमान करके का सकते हैं की मां के जो एक निशीथ भक्ति थे उसे समय उन्होंने शायद आपस में ये फूल बांट दिए होंगे और फिर उन्होंने अपने घर में जितने दिन हो सके उसको रखा होगा पूजा की होगी कभी-कभी तो इस तरह के फूल सुख भी जाते हैं तो वो एक जो एक ये होता है वो होता जा के बांग्ला से बोले एक मेटल के एक बॉक्स में रख करके उसको सालों तक रखा जाता है अभी मैंने कभी सुना नहीं है इस तरह से मां के चरण स्पर्श हुए फूल कहानी पे प्रिजर्व है की नहीं किंतु उन्होंने ऐसा किसी ने ऐसा किया होगा ऐसा हम अनुमान कर सकते हैं मतलब उतवाल में थी भांडुप जयपुर स्नान कोरिया श्री श्री ठाकुर पूजा राम कोरिया राधु के लाइयां मां इति पालकी ते जयरामबाती रघुनाथ मांडू जयपुर नमक तालाब है उसमें मनस्नान किया उसके बाद में ठाकुर घर में जाकर के वह पूजा किया फिर थोड़ा एन ग्रहण किया फिर विश्राम किया और फिर सीधा ही रेडो को लेकर के पालकी में बैठ करके जयरामबाती जान के लिए मैन प्रस्थान किया बाकी शो कर ले हटिया गैलन बाकी सब जो है वह मां के साथ में जो आए थे वो चल करके पैरों से चलकर उनके साथ में गए श्री मां के अमर 11 प्रणाम परिवार और तीन आम आदमी शक्ल के बोली लेने एक खाने एक खून कमरे अपना जॉन जैसे एक खून तुम डर भरोसा ही भरोसा मां जब बैठी है जान से पहले सब लोग मां को प्रणाम कर रहे हैं एक के बाद एक भक्ति लोग तब मैन क्या कहा इस गांव में इस आंचल में इस विस्तार में देखते हूं की तुम ही लोग मेरे अपने हो तुम्हीं लोग मेरे भरोसे के मतलब तुम ही लोगों पे भरोसा करके मैं र शक्ति देखिए बंगाली में जो मां कहती है कितना सुंदर एक खाने एक खून तुमरे अमर अपना अर्जुन अपना अर्जुन मैन कहा की आप लोग मेरे अपने हैं इस जगह पर अभी इस विस्तार में इस गांव में देखते हूं आप लोग मेरे अपने मां के मुंह से जब ऐसी बाहर निकलते है मां खुद हमको कहती है की आप मेरे अपने हैं तो जिन्होंने ये बात सनी होगी जो लोग मां के अपॉन्जों मां के अपने लोगों में जो सम्मिलित होंगे मतलब देखिए की उनके मां में वो कितना वो मतलब आनंद का प्रवाह वो प्रगति हुआ होगा हम अनुमान करके का सकते हैं और हमको ये भी याद में रखना है की हम लोग रामकृष्ण मिशन के सन्यासी रामकृष्ण मिशन के भक्ति और सिर्फ हमारे भक्ति वगैरा ही नहीं रामकृष्ण मिशन के साथ जुड़े हुए ही नहीं पूरे विश्व में जो जो मां की पूजा करता है मां के ऊपर में श्रद्धा है महत्व की किताबें का श्रवण करता है वो नाराज हो भाई मेयर नीचे अर्जुन वो सब जो है मां के अपने हैं देशे एक खून तुम्हारे भरोसाई भरोसा इस देश में मैन इस गांव में आप लोगों के भरोसे पे ही मैं रहे रही हूं तुम डर भरोसा ही भरोसा तुम्हारा जो भरोसा है वही असली भरोसा है बाकी लोग मुंह से बातें करते हैं आते हैं जाते हैं उनकी खाने पर मैं कुछ नहीं शक्ति मैन तुम लोग जो हो वही ठीक ठीक कम करोगे मेरा एक खाने अच्छी ठाकुर का होली तब देखते हूं की ठाकुर यहां पर बैठे हैं ठाकुर यहां पर विराजमान है ठाकुर यहां पर उपस्थित है आमद और विश्राम सरकार रास्ते में विश्राम करने के लिए एक जगह बनी हम सबके लिए आशीर्वाद किया कहा की बीच-बीच में विशेष करें राठौर दिए थे तुम आदेश हो रहा है उसमें तो आप सबको आना ही पड़ेगा शेख ने अमर शॉप काई कर्मों टोम डर देखते हो गए वहां पर मेरा जितना भी कम है सब तुम ही लोगों को करना होगा वो एक दिन और मुद्दे ही शोहरत प्रति होने के कुछ ही दिन में शरद वगैरा शरद महाराज यानी की शारदानंद जी महाराज मां के सेवक भगवान राम कृष्णा के सन्यासी शिष्य स्वामी विवेकानंद के गुरु भाई तो स्वामी शारदानंद जी महाराज वो तो मां के शिष्य है मां के संतान है इसलिए मां कहती है शरद उनको शरद करके पुकारती है शरद वगैरा बहुत सारे साधु सन्यासी भक्ति जो है वो कोलकाता से आएंगे इस विवाह में भाग लेने के लिए सब कम करने के लिए मां पाल की तरह समाज वगैरा जितना भी था वह कुली के सर पर दाल करके वहां से वो ले जाएगा