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Sri Ramakrishna's Stories ·

स्वामी अद्भुतानन्द : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा 18 Nov 2022

swami Adbhutananda : Sri Ramakrishna as we saw him

जय राम कृष्ण सो इस आई हैव डिसाइडेड था वे विल फर्स्ट टेक इंग्लिश एंड लेटर ऑन सी विल टेक हिंदी सो था अन्योन हो वांट्स तू लिसन तू ओनली हिंदी ही कैन ज्वाइन इट हिंदी टाइम्स सो यू कैन अटेंड बोथ नो प्रॉब्लम इसे डेट टॉकिंग अबाउट adbhutanand जी एंड हिज remination सर ऑन श्री रामकृष्ण आई विल बी रीडिंग फ्रॉम अन इंग्लिश बुक दिस प्रेजेंट हाव कवर अनफॉर्चूनेटली सो राम कृष्ण इन इंग्लिश नव लाती महाराज से देंगे दक्षिणेश्वर ऑफ लॉर्ड जगन्नाथ दें यू विल बी अलराइट सच इस डी इफेक्ट ऑफ डी प्रसाद ऑफ जगन्नाथ डट यू पीपल डोंट बिलीव इट डी मास्टर उसे तू से बिफोर यू टेक योर फूड बिफोर यू टेक योर फूड इट वैन और तू पार्टिकल्स ऑफ जगन्नाथ प्रसाद नौ सी हैव तू अंडरस्टैंड टुडे मॉडर्न पीपल वे टेक प्रसाद बट सी डोंट बिलीव इन डी हीलिंग प्रॉपर्टी इन दी स्पिरिचुअल प्रॉपर्टी तू वेज ऑफ लाइफ पुरुषार्थ इस व्हाट अवर सेल्फ एफर्ट एंड परमार्थ वोट डी सरेंडर अवर व्हील तू दी गोद सो अवर लाइफ इसे मेड ऑफ दिस तू इंटर वैन थ्रेड्स एंड एवरीथिंग विल डू इन अवर लाइफ इट हज तू हैव दिस तू थ्रेड adervise सी विल लॉस अवर क्लॉथ सपोज आई एम डिपेंडिंग ओनली ऑन गोद इन ऑर्डर तू हेल्प मी दें पर हेल्प्स आई मिन नॉट बी आई माइंड आई माइट नॉट बाईट सक्सेसफुल एंड इफ आई डिपेंड ओनली ऑन माय ऑन सेल्फ ए फोर्ट विदाउट एवर सेरेंडरिंग माय एगो इट डिफीट ऑफ गोद दें अगेन आई माइट नॉट बी सक्सेसफुल दिस एगो dishankara इसे डी बिगेस्ट ट्रबल डेट इस इन अवर लाइफ इन बंगाली डिस्ट्रॉय सो दिस अहंकार अहंकार हस तू बी रिमूव्ड फॉर रूट एंड ब्रांच एंड दें ओनली सी विल बी एबल तू प्रोग्रेस स्पिरिचुअल एंड मेटियोरली इन दिस वर्ल्ड नौ सी में अलसो थिंक डेट इस अंदर वे ऑफ थिंकिंग डेट सपोज इफ यू वांट तू प्रोग्रेस स्पिरिचुअल इन योर लाइफ दें ओके यू नीड तू डू ऑल दिस थिंग्स आदर वाइस फॉर डी सके ऑफ मटेरियल प्रोग्रेस और डी शॉप ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इकोनॉमिक्स पॉलिटिकल स्टेबिलिटी सोशल ऑफ फ्लुएंस अटेरा फॉर कलेक्टिंग वेल एंड बीकमिंग यू डोंट नीड ऑल दिस स्पिरिचुअल डाइमेंशन इन योर लाइफ इट मे बे ट्रू इन ए हेलो फ्रेंड इंडिविजुअल पर है इंडिविजुअल आई नो फॉर एग्जांपल लेट मी टेक बिल गेट्स बिल गेट्स वैन ऑफ डी वेल डी यश पर्सन इन डी वर्ल्ड और नौ अवर देस अलोन मस्क अलोन मस्ट डी ओनर ऑफ दिस टेस्ला एंड स्पेस ईटीसी वैन ऑफ डी थी विल पर्सन सी डू नॉट सी अन्य स्पिरिचुअलिटी इन हिज लाइफ सो धीस में बी ट्रू पर हेल्प्स इन डी केस ऑफ एन इंडिविजुअल बट इन डी केस ऑफ डी सोसाइटी स्पिरिचुअलिटी इस डी फाउंडेशन ऑफ डी सिविलाइजेशन सपोज सी टेक डी एग्जांपल ऑफ सीन एम्पायर और से अब्बा से एम्पायर रोमन एम्पायर ग्रीक एम्पायर ब्रिटिश एम्पायर सी देयर फ़्लैश सो ब्राइटली फॉर ए मोमेंट इन डी पेज ऑफ हिस्ट्री एंड आफ्टर अन विले दे ऑल डिड मेंस व्हाइट इट इसे नॉट तिल देयर इन फैक्ट इंडियन इकोनॉमी इस नाउ लार्जर दें ब्रिटिश इकोनॉमी इन पर नॉमिनल टर्म्स ऑफ कोर्स पर कैपिटा सी आर स्टील इन डी थर्ड वर्ल्ड कंट्री बिकॉज ऑफ ओवर पापुलेशन 1.4 बिलियन इट्स सिम सो बिग बट इन्वेंट सी हैव अन लॉन्ग वे तू गो बट इंडिया हस तिल सर्वाइव्ड स्वामी विवेकानंद सेस डेट इफ मनु कम्स टुडे ही विल नॉट फाइंड डेट डिफरेंस इन डी वे ओवर सोसाइटी इस फंक्शनिंग वही इस डेट बिकॉज सी हैव मेंटेन स्टेबिलिटी थ्रू आउट दिस मिलेनियम फॉर फ्रेमिंग रिवॉल्यूशंस एंड फॉरेन ऑक्यूपेशन एंड ऑल दिस ट्रबल्स बिहेव मेंटेन दिस सोशल पोजीशन ऑफ अवर सोसाइटी स्टील देयर स्वामी विवेकानंद वैन और अंदर महापुरुष इस नॉट वर्किंग ऑन डी फेस ऑफ डी अर्थ डेट मेंस एवरी ईयर सैम और अंदर महापुरुष टैक्स बर्थ इन इंडिया दे अटेंड ब्रह्मज्ञान आत्मा ज्ञान अटेंड लिबरेशन एंड विद डियर प्रेजेंट्स डी प्लेस दिस पुण्य भूमि व्हेन स्वामी विवेकानंद रिटर्न्स फ्रॉम डी वेस्ट ही सेड इट आई यूज्ड तू बिलीव दिस इसे माय मदरलैंड डी लैंड ऑफ माय कर्म मातृभूमि एंड कर्मभूमि बट नौ आई हैव रिलाइज दिस इस अलसो डी पुण्य भूमि दिस इस डी लैंड वेयर डी धर्म वाज फर्स्ट प्राइस दिस इस डी लैंड वेयर धर्म इस प्रिजर्व्ड प्रोटेक्टेड नरेश एंड दिस इस दी होम ऑफ थर्मा एंड फ्रॉम धीस लैंड एवरी टाइम 4 एंड कन्कर्स बिल्ड ब्रिज एंड रोड्स तू कनेक्ट तू वर्ल्ड इन ऑर्डर तू सेंड देयर सेंटर इंडियन philosofers इंडियन वाइस मैन वीएस स्प्रेड आउट थ्रू डी से रोड्स तू टेक ओवर लाइव किंग अवर सुधीन स्पिरिचुअल नॉलेज ओवर visteam वेदांत योग तू डी से फोर इन लैंड एंड डेट इसे वही सी सी डेट ब्रिटिश ब्रॉड ब्रिटिश कैंप तू इंडिया इन गण बोर्ड एंड डी से मोड स्वामीजी ट्रेवल बाग तू टेक वेदांत तू डी ब्रिटेन सो दिस परमार्थ और रदर लेट मी सेट डिपेंड्स अपॉन डी टोटल बिलीव डेट गॉड्स विल इसे वेरी इंपॉर्टेंट एंड वेरी इफेक्टिव इन अवर लाइफ इट कांस्टीट्यूट्स डी वेरी फाउंडेशन ऑफ हिंदुइज्म ऑन दशहरा सेलिब्रेशन इन ओनर ऑफ डी गंगा डी मास्टर मास्टर gangament ऑफ डी गंगा आई हेडेड आउट इस मदर गंगा एंड सईद वे डिड'टी नो अबाउट सच थिंग्स सी ओनली नो डी गंगा मास्टर रिप्लाई सो व्हेन ही वास वर्किंग ऑन डी बैंक ऑफ गंगा वनडे ही सो डेट वैन बॉय इस कमिंग आउट फ्रॉम डी गंगा एंड ब्लोइंग डी कांच डट इस हेराल्डिंग डी अराइवल ऑफ डीटी वही डू सी ब्लॉक कांच इन इंडियन ट्रेडीशन बिकॉज सी वांट तू harard डेट गो इसे कमिंग डन तू ब्लोइंग ऑफ डी कांच इस अन सिग्नल ऑफ डी अराइवल ऑफ डी गोद डेट इस वही यू विल सी डेट अन पीपल हु हैव अन विज़न इन मेडिटेशन हु पीपल ओवर विज़न ड्यूरिंग डी दे फॉर मेडिटेशन स्टेट दे विल ऑलवेज हर सैम साउंड लाइक ओम और डी साउंड ऑफ कंस समथिंग लाइक डेट डेट मेंस साइन डेट यू आर हेविंग सैम सॉर्ट ऑफ स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस इन योर लाइफ सो डेट इस व्हाट मा श्री राम कृष्ण सो डेट ही सो डेट अन बॉयज कमिंग ब्लोइंग डी कांच एंड बिहाइंड हिम कॉम मदर गंगा हेरसेल्फ सो दिस एक हैक्स वे ऑफ रिमूविंग ऑल डी डाउट सी अगेन साइट डिसकस्ड reliar टुडे इन टुडे नॉट सी सच विजंस ओवरसीज़ नर तू बी मेड सैम पर्सन हु कैन ऑथेंटिकली क्लेम डेट यस आई हैव सीन व्हेन आई कम इन ओवर ऑर्डर फॉर डी फर्स्ट टाइम आई वाज आस्किंग सैम सीनियर मेंस डेट महाराज हैव यू हेड समाधि और डू यू नो अन्य वैन हु हे दिस समाधि महाराष्ट्र स्टार्टेड लाफिंग वही बिकॉज नोबॉडीज सी डोंट एवं टॉक अबाउट समाधि सी डोंट एवं डिस्कस डेट ओके दिस इस डी फिजिकल स्टेट ऑफ अफेयर्स डेट डेट कैन बी रीच जेनुइनली रीच इट एंड ऑफ अवर साधना टुडे आगे ऑफ टुडे सी टेक में थिंग्स फॉर ग्रांटेड डेट ओके इफ आई मेडिट्रेड दें आई मे अटेंड समथिंग लाइक दिस आई मेडिट्रेड जेनुइनली आई मे इट इन समाधि आय में विज़न ऑफ बट सी वांट एक्चुअली हैव दिस विज़न नो डू सी सीरियसली मत पीपल हु हैव दिस आउट ऑफ एक्सपीरियंस बिकॉज दिस पीपल कैन नॉट बी केप्ट हिडन देर पावर देर ओजस देयर आ कंपैशन इट विल फ्लो आउट एंड इट विल अट्रैक्ट पीपल फ्रॉम एवरी वेयर सी डू नॉट सी दिस नौ अवर देस इन जनरल एंड डी पीपल हु क्लेम डेट यस आई हैव सैम सॉर्ट ऑफ एक्सपीरियंस और स्पिरिचुअल ओर से जेनुइन एंटरटेनमेंट मोस्ट ऑफ डी गाइड सी सी डी दिस पीपल आर सैम सॉर्ट ऑफ फ्रॉड डियर यू थिंक पीपल देयर इदर वांट तू अर्न मनी बाय मेकिंग फुल ऑफर्स सैम सॉल्ट ऑफ सैम सच थिंग्स सो टुडे व्हाट स्पिरिचुअलिटी फ्रॉम डी रूल्स डेट यू हैव क्रीटेड फ्रॉम डी कनेक्टेड अराउंड योरसेल्फ टुडे आई एम रेगुलर इन माय फूड एंड माय हैबिट्स आई हैव सरेंडर माय एगो आते डी फीड फीड ऑफ गोद एंड आई ट्रेड तू रिनाउंस सेंशुअल प्लेजर इस मच आगे आई कैन दिस इसे माय क्लेम तू स्पिरिचुअलिटी दिस इस माय क्लेम तू बी सदर का रदर थन सैम विज़न और सैम समाधि और ब्लेसिंग्स ऑफ कोड रदर थन था अन रेगुलर डिसिप्लिन लाइफ बेस्ट ऑन renousion एंड डिवोशन एंड वैल्यूज लाइक सत्य हिंसा परिग्रह ब्रह्मचर्य दिस इसे माय क्लेम तू बी अन स्पिरिचुअल aspiret रदर दें हेविंग सैम वाइल्ड विजंस एंड वाइल्ड प्रोक्लेमेशंस डेट नौ आई एम गोद एंड आई हैव गोद गिवन से राइट तू प्रीच इट्स तो सी हैव तू अंडरस्टैंड हु रियली हेस अन जेनुइन एक्सपीरियंस सी शुड लुक फॉर रेगुलेटरी एंड renocation इन अवर लाइफ एंड इन डी लाइफ ऑफ आदर्श रदर थन डिपेंडिंग ऑन विजंस ओके सो लेटेस्ट एंड ओवर इंग्लिश क्लास लेटेस्ट बेगिन ओवर हिंदी बुक यस हर इट इसे अभी हम हिंदी में लेंगे क्लास

स्वामी अद्भुतानन्द : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा

से चीज को मैं रिपीट करूंगा अभी हिंदी में दक्षिणेश्वर में रहते समय एक बार रखा यानी की स्वामी ब्रह्मानंद बीमार हो गए ठाकुर ने उनसे कहा की भगवान जगन्नाथ का प्रसाद खा लो तब तुम एकदम स्वस्थ हो जाओगे जगन्नाथ के प्रसाद का इतना प्रभाव है तुम लोग तो उसे पर विश्वास नहीं करते ठाकुर कहा करते द भोजन करने के पूर्व जगन्नाथ के प्रसाद का एक या दो दाना अवश्य खा लो देखिए ठाकुर का जो विश्वास है की यह किस तरह से वह जगन्नाथ का प्रसाद है उसे पर वह उसको औषध के समान उसके ऊपर में विश्वास करते हैं अभी देखिए हमारे जीवन में आजकल क्या होता है की हम लोग तो जानते हैं की यदि बीमार कोई हो जाता है तो उसको सबसे पहले डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए और डॉक्टर जो मेडिसिन देता है उसके ऊपर सबसे ज्यादा विश्वास करना चाहिए प्रसाद लेते होंगे किंतु सात से हमारी बीमारी मिट जाएगी इस तरह से हम लोग ज्यादातर आजकल विश्वास नहीं करते इस बारे में एक इंटरेस्टिंग कहानी है स्वामी जी उसे समय बेलूर मठ में द अभी देखिए स्वामी जी का लाइव तो हम सबको पता है की वो शोर है वो कितने लॉजिकल रेशनल साइंस और टेक्नोलॉजी में आ उसकी जो सत्ता है एक इंडिपेंडेंट सत्ता है उसमें विश्वास करने वाले एक फिलोसोफर द उनमें तो जो andhshrad था बोलकर के कोई चीज नहीं थी उन्होंने तो खुद ठाकुर को इतना टेस्ट किया था हमको पता है की ठाकुर जो वो बार-बार ठाकुर को टेस्ट करते द बार-बार ठाकुर को कहते द की आपके दर्शन जो है वो एक्चुअली दर्शन नहीं है वो आपके मैन का भ्रम है ऐसा जो स्वामी जी उनको बार-बार कहते द तो यही स्वामी जी जब एक साधु बीमार हो गया तो उन्होंने दूसरे साधु को बोला अच्छा तुम्हें कम करो ठाकुर का चरण अमृत जा कर के और साधु को खिला दो तो अभी जो दूसरा साधु था वो हमारे जैसे वह एजुकेटेड गा वह सब यह कोलकाता में तो यह ब्रिटिश लोगों की स्कूल कॉलेजेस थी तो उसमें से ग्रेजुएट होके आया था तो वो एकदम कटाक्ष करके वो हंसने लगा यह सोच करके की अरे ये जग विख्यात स्वामी विवेकानंद स्वयं जिन्होंने ये जो है कहा की racenality इन फेथ इन दोनों का ये कांबिनेशन होना चाहिए तभी जो है आप ठीक ठीक धर्म के रास्ते धर्मों को आप समझ पाएंगे तभी आप आध्यात्मिकता को समझ पाएंगे यदि आप किसी भी चीज पे ब्लाइंड्ली विश्वास करते हैं एकदम अंधविश्वास करते हैं तो हो सकता है की आप रास्ता भटक भी सकते हैं तो स्वामी जी का यह जो मैसेज था वही स्वामी जी आज कहते हैं की कोई बीमार हो गया तो उसको चरणामृत खिला दो यह कैसी बात हो गई माने और स्वामी जी जैसे स्वामी जी भी ऐसा करेंगे ऐसा सोचकर उसके मैन में यह भाव आया तो स्वामी जी ने जैसा अभी स्वामी जी भी तो अंतर्यामी द जैसा देखा की उसके मैन में यह भाव है उन्होंने का दिया की ठीक है तुम parinamrit देने की जरूरत नहीं है चरणामृत में खिलाऊंगा उसे बीमार साधु को देखिए यहां पर हमको यह ठाकुर है या स्वामी प्रॉपर्टी विश्वास कर देना ये इन्होंने भी नहीं कहा मैंने खुद ने अपने जीवन में ऐसा कभी नहीं कहा ये जो विश्वास है इससे जर्नी इट्स सी एक यात्रा है जो की एक जो हम यदि हम अपने मैन में सिंसियर होते हैं हमारा स्ट्रांग होता है एक आध्यात्मिक जीवन पर विकास करने की ईश्वर को पाने की या तो फिर आत्म दर्शन करने की हमारी इच्छा दृढ़ होती है तो साल भर साल हमारा यह जो विश्वास है वो धीरे-धीरे दूर होता जाएगा और ये जो हमारा विश्वास था यह जो पौधा है वो धीरे-धीरे ज्यादा खेलेगा और ये विश्वास रूपी अंधकार है वो धीरे-धीरे करके वो वे वो चला वो रिसीवड होता जाएगा वो चलता जाएगा वहां से वो वहां से आपके जीवन से अदृश्य होता जाएगा तो ये जो है विश्वास है विश्वास ग्रो करता है पौधे की तरह इसको की आप वो इस तरह से मैं आंख बंद करके ठीक है चलो मैंने मैन लिया उससे ज्यादा कोई फायदा नहीं होने वाला है ये विश्वास को अपने हृदय में ग्रो होने दीजिए उसको बढ़ाने दीजिए उसको नरेश कीजिए जैसे की पौधा जो होता है तो बड़ा कैसे होता है उसको आप पानी डालते हैं तो यहां पर जो पानी जो डालना है खाद जो डालना है वो क्या है वो हमारी साधना है वो हमारा त्याग है वो हमारे ईश्वर परता है यह सब यह जो नरेश मेंट है यह जो पानी खाद वह यह विश्वास रूपी पौधे की जड़ में अब दिन प्रतिदिन डालिए यह बहुत बड़ा होगा जब यह जीवन विश्वास होगा की हान प्रसाद जो है वो मेरी बीमारी को दूर कर सकता है तभी यह प्रसाद कम मिलेगा किसी ने बोल दिया है या तो सभी लोग मानते हैं की प्रसाद है या तो मंदिर में जाना ईश्वर को प्रार्थना करना इससे मुझे लाभ होगा तो इससे इस तरह से ज्यादा कोई लाभ नहीं होने वाला है पुरुषार्थ और परमत हमारा जीवन पुरुष और शुरू होता है और परमार्थ पर अंत आता है हम अपने swapratna से शुरू करते हैं और ईश्वर के ऊपर में निर्भरता से हम अपना अंत लेट हैं अपने जीवन का यदि मैं अपना जीवन ही ईश्वर के ऊपर में निर्भरता से शुरू करूं तो क्या होगा ना वो एक जुनून वे नहीं होगा किसके मतलब जो लोग करोड़ जन्म जिन्होंने साधना की है जैसे की शंकराचार्य है श्री राम कृष्ण है भगवान बुद्ध है राम है कृष्ण है स्वामी विवेकानंद मैन शारदा देवी जो की या तो जन्म जन्मांतर से मुक्त है या तो फिर जो ठाकुर के जो डिसीप्ल द जिन्होंने करोड़ सालों के साधना करने करोड़ जन्मों के साधना करने के बाद ध्रुव ने जैसे एक पेड़ पर खड़े रह करके कितने जन्म-जन्मांतर तक उसने वह जो सालों हजारों सालों तक जो है कल्प जो हमारे हिंदू धर्म में जो शब्द उसे के कितने kalptak उसने साधना की तो यदि जहां तक हम ऐसा नहीं करेंगे हमारा विश्वास जो है उज्जैन नहीं होगा तो उसको फिर क्या बोलते हैं की सिर्फ किसी चीज को मैन लेना कथामृत में ये एक बात है की ठाकुर एक बार बात कर रहे द कुछ भक्त बैठे द और सामने एक भक्त बार-बार क्वेश्चन कर रहा था ठाकुर को क्योंकि ठाकुर अपने जो कहा महाशय वो ये तो मुझे ठीक नहीं लग रहा है या फिर उसको मुझे फिर से एक्सप्लेन कीजिए या तो इसके बारे में और एक्स्ट्रा एक्सप्लेनेशन दीजिए जो ठाकुर तो विजुअल शिक्षक द तो कोई इस तरह से जेनुइन प्रश्न करता था उनको बड़ी खुशी होती थी और अपना सब कुछ छोड़कर के यहां तक की हमको पता है की कैंसर भी हो गया था ठाकुर को और सामने किसी को बिठाकर के उपदेश दे रहे हैं और यह जो उनके सब डिसीप्ल है उनको जो त्यागी शिष्य युवा शिष्य बड़े नाराज हो जा रहे हैं अरे ये बार-बार ठाकुर बोल भी नहीं का रहे गले खून बा रहा है फिर भी वह बोली जा रहा है उसे लोगों को आना बंद कर देना चाहते द फिर भी ठाकुर जो है वो आखिर तक वो क्योंकि वो शिक्षक है विश्व शिक्षक है उनको उपदेश देना उनका धर्म है तो ठाकुर वो है जो दक्षिणेश्वर का यह प्रसंग की ठाकुर कुछ बता रहे हैं और सामने वाला भक्त बार-बार प्रश्न कर रहा है उससे दूसरे भक्त को जो है उसके साथ में बैठा था वो नाराज हो गया वो उसको बोलता है अरे भाई तुम मैन लो ना वो बोलते हैं वो पता है महापुरुष साधु है उनकी बात पे इतना तुम प्रश्नों को क्या करते हो उनके ऊपर में इतना शक क्यों किया करते हो तो जैसे उसने ऐसा कहा ठाकुर नाराज हो गए वो बोले अरे एटा की सुधु मैंने नहीं किसी भी चीज पर आप इस तरह से आंख बंद करके विश्वास मत किया कीजिए यह जो है हमारे जो आध्यात्मिकता उसे पर जो विश्वास जो है वह साधना और हमारी लगन से धीरे-धीरे करके ग्रो होता है अब वैसे ही आंख बंद करके मैन लेंगे अच्छा ठीक है ये ऐसा है मैंने मैन लिया है तो आपने जिस चीज पर जिस चीज पर विश्वास किया है उसका इस तरह का फल जो है आपको नहीं मिलेगा मैंने मैन लिया की ठीक है चलो प्रसाद खाने से मेरी बीमारी दूर हो जाएगी वो इस तरह से बीमारी दूर नहीं होगी पुरुषार्थ करके साधना करके वे विश्वास रूपी जो पौधा है उसको बड़ा करना पड़ेगा फिर धीरे-धीरे जैसे-जैसे हम अपने जीवन में आगे जाते जाएंगे हम देखेंगे की पुरुषार्थ है उसके ऊपर में हमारा डिपेंड्स धीरे-धीरे कम होता है शरीर है देह है धारण किया है तो हमको तो पुरुषार्थ तो करना ही पड़ेगा करूंगा जो है जब तक devdharan किया है कर्म से हमारा छुटकारा नहीं होने वाला किंतु वह कर्म जो है वो सहज रूप से कर्म हो जाएंगे मुझे कोई प्लान करके या मुझे कुछ ऐसा करके कर्म नहीं करना पड़ेगा कर्मों सहज रूप से होता है अंत प्रेरणा से होता है अंत पूर्ण से होता है और फिर इस कर्म की कोई निंदा करता है या प्रशंसा करता है उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यह जो ईश्वर इसके ऊपर में निर्भरता है यह जो परमार्थ है पुरुषार्थ से परमार्थ की झरने मेरी बहुत एडवांस्ड हो चुकी है विश्वास का पौधा मेरे हृदय में वह खिल चुका है और मैं जो की पुरुषार्थ कर रहा हूं वो सही मतलब वो कर्मणि जन्म गीता में जो कहा है ये कर्म जो है कर्म के फल की अपेक्षा मत रखिए कर्म करते रहिए तो वो जो सहज nishkarm कर्म के जो उसमें है हम चले आएंगे उसके दायरे में हमारा कर्म निष्काम सहज हो जाएगा और ईश्वर के ऊपर में विश्वास है दिन प्रतिदिन बढ़ता रहेगा यानी की अपना जीवन हम पुरुषेर से शुरू करते हैं और परमार्थ में अंत लेट हैं शायद विश्वास से शुरू करें किंतु जब तक हमारा है जो डिजायर तू ठाकुर सीखी या तो आत्म दर्शन की यह जो mumuksh सूत्र है या तो क्यूरियोसिटी जब तक हमारे मैन में स्ट्रांग है अच्छा सिर्फ ये बात नहीं है की मुझे आध्यात्मिक मुमुक्षु द्वारा है क्यूरियोसिटी ऑफ अन्य काइंड मनुष्य ने जब पहली बार बंदर में से मनुष्य हुआ या तो फिर एवं जब हम बंदर द तो हमारे में क्यूरियोसिटी थी ये आकाश में देखते द इतने सारे तारे हैं तो तारों तारे कहां पे रहते हैं लोग ये जो जगत है यह जो ब्रह्मांड है ये ब्रह्मांड में हमारा क्या स्थान है ये सब चीजों के बारे में हम सोचते रहते द वो जो क्यूरियोसिटी आउट ऑफ दिस क्यूरियोसिटी ये जो साइंस टेक्नोलॉजी इस वेरी चीजें रिलिजन इकोनॉमी से सोशल स्ट्रक्चर सिविलाइजेशन ये सब कुछ हमारी करो सिटी में से प्रकट हुआ तो अन्य टाइप ऑफ क्यूरियोसिटी जो है जिज्ञासा वृत्ति जो है वो मुख्य जो है उसका जब तक वो हम में रहेगा और जब तक हम है जो की सिंसर रहेंगे अपनी यह जर्नी में यह जो सिक्किम इसको बोलते हैं ना सिक्किम यानी की चाहता हूं की मैं कुछ खो जाऊं ये एक्सप्लोरेशन ये जब तक हम ये एक्सप्लोर करते रहेंगे अपने माइंड को एक्सटर्नल वर्ल्ड को ये सीकर का एटीट्यूड जब तक रहेगा तब तक जो है की हम लोग सही रास्ते पे हैं भले ही चाहे मैं पहले ही दिन से विश्वास ना कर लूं किंतु जैसे-जैसे मैं अपनी जर्नी में अपनी साधना में अपने पुरुषार्थ में आगे बढ़ता जाऊंगा मैं जो है विश्वास जो है मेरे जीवन में दृढ़ से धड़ाधड़ होता जाएगा गंगा दशहरा के दिन ठाकुर ने मैन गंगा को पूजा चढ़ने के लिए हम लोगों से कहा उन्होंने राखल को बताया मैन गंगा जागृत देवी है और आज उनकी पूजा करनी चाहिए उसे समय राखल गंगा को देवी के रूप में सम्मान नहीं देते द और यह जानते हुए भी ठाकुर ने उनसे कहा एक दिन गंगा के बाजरे पर टहलते समय मेरे मैन में संदेह उठा की क्या मैं गा की क्या मैन गंगा सचमुच ही देवी है उसे क्षण मैंने गंगा नदी के बीच से निकलने वाली शंकर की स्पष्ट ध्वनि सुनी धीरे-धीरे वह आवाज़ nikattar आती गई और मैंने एक बालक को शंकर बजाते हुए गंगा को पार करते हुए चलते देखा तथा एक देवी उसका anuggaman कर रही थी उसे दर्शन से मेरे सभी संदेह चिन्ह भिन्ना हो गए राखल इसे देखकर विस्मित रह गया रखा इसे सुनकर ऐसा होना चाहिए देखकर नहीं इससे सुनकर विस्मित रह गया और बोला हम इन सब चीजों को नहीं जानते हम तो गंगा को एक नदी के रूप में समझते हैं जिससे नाभिक दूषित करते रहते हैं ठाकुर ने तुरंत उत्तर दिया सावधान मैन गंगा को तुम दूषित मत करना उसे दिन से राखल गंगा का बड़ा सम्मान करने लगे अच्छा यहां पर दो तीन चीज है की सबसे पहले तो की ठाकुर का यह जो विश्वास है तो विश्वास कहां से आया जैसे अभी हमने कहा की पुरुषार्थ करते-करते के धीरे-धीरे विश्वास का जो पोता है वो धीरे-धीरे ग्रो करेगा किंतु यह तो हम लोगों के बारे में है जो की हम लोग सामान्य लोग हैं और हमको कितने कोटि कोटि जन्म तक साधना करते-करते धीरे-धीरे विश्वास हमारे मैन में दृढ़ होगा ठाकुर की तो बात ही अलग है वो तो अवतार है ईश्वरीय पुरुष है और वो तो जन्म जन्मांतर से मुक्त है बंधन या तो पाप या तो कर्म जो है जो नेगेटिव क्लेश जिसको बोलते हैं कम क्रोध मैड लोभ मोहमद सर वगैरा उनको तो कभी छुए ही नहीं है तो ठाकुर किसी चीज को कब विश्वास करते हैं जबकि मैन उनको एक्चुअली दिखा देती है जून को उसे प्रत्यक्ष दर्शन देती है तो मैं चाहे गंगा को मैन गंगा के रूप में पूजा करने की शुरुआत कब करूंगा जब मैं बहुत सालों तक जो है मैं साधना करूं आइडियल स्पीकिंग ऐसा होना चाहिए पहले दिन से आप भक्ति कर सकते हैं किंतु भक्ति जो है dradhmund आपके धीरे-धीरे करके होगी जैसे-जैसे यह जो जीवन के जो utharahat है ये जो जीवन जो है वो हमको वो धक्का मार मार कर के सिखा था बहुत कुछ वो हमारा विश्वास दृढ़ से दृढ़ता जाएगा ठाकुर की तो बात ही अलग है उनको तो मैन काली ने स्वयं उनको दर्शन दे के दिया की देखिए आप आप जैसे ही आपके मैन में ये विश्वास आया जैसे ये आपके मैन में प्रश्न आया की मैन गंगा क्या सच में देवी है तो उन्होंने देखा की एक बच्चा जो है वो शंकर बजाता हुआ जा रहा है और उसके पीछे देवी गंगा स्वयं जो है वो उसके पीछे में जा रही है अच्छा ये भी एक बात है की हमको यह जो दर्शन वगैरा होते हैं तो यह जो शंकर ध्वनि है यह ओंकार है वगैरा क्यों सुनाई देते हैं क्योंकि ईश्वर के आगमन का यह प्रतीक है ईश्वर के आगमन किए निशानी है अनुभव मुझे तो नहीं हुआ किसी को हो जाए की मुझे आंख बंद करके मैं बैठा हूं शंकर ध्वनि सुनाई दी तो यह बहुत ही शुभ है अच्छा अभी ये राखल के बारे में भी है देखिए हम लोग समझते हैं की ये लोगों का ये लीला प्रसंग है लीला प्रसंग में यह जो ठाकुर के जो डायरेक्ट विषय पर उसे रामकृष्ण मिशन के ये जो सबसे पहले जनरल सेक्रेटरी स्वामी जी के गुरु भाई शारदानंद जी लिखते हैं की हम किसी की sadhnaon का विवरण क्यों करते हैं इसलिए नहीं की उसकी साधना के समय ये जो डाउट द साधना के मैन में जो सब उसका मैन में यह जो उथल-पुथल हो रही थी यह उतार-चढ़ाव हो रहे द उसको पढ़कर के हमारे मैन में विश्वास को यह इसका अर्थ नहीं है साधना के बारे में लिखने का आध्यात्मिक जीवन में chadhavatar के बारे में लिखने का उसका तो अर्थ यह है की आपको संभल मिले आपको शक्ति मिले आप में यह भरोसा मिले की अच्छा लोगों के मैन में भी विश्वास विश्वास था तो फिर इन लोगों ने इस तरह विश्वास को दूर करके विश्वास की दृढ़ मिट्टी में अपनी आध्यात्मिक जीवन को बनाया तो मेरे मैन में भी यदि विश्वास है तो मैं भी यदि इस तरह से जो साधना करता रहूंगा दिन प्रतिदिन इंद्रिय सुखो से अपने मैन को धीरे-धीरे करके वो पीछे लता रहूंगा तब तक जब तक मैं सिंसियर हूं अपने जीवन में आध्यात्मिक जीवन में जो है यह जो विश्वास जो है यह सब मेरे मैन में भी एक दिन आएगा तो ये सब चीजों से हमको इस तरह से लेना अभी कभी-कभी ऐसा भी होता है ना की बहुत लोगों को दर लगता है यह प्रकट करने से की अरे मेरे मैन में यह समस्या है मेरे मैन में यह समस्या है या तो मेरे जीवन में यह संकट है आध्यात्मिक जीवन में खास करके तुम्हें इसके बारे में डिस्कस करूं की ना करूं मैं अपने खुद की बात कर रहा हूं चलती रहती थी की मैं खुद सोचता था की क्या मैं यहां पर रह पाऊंगा की नहीं क्या मैं यह अपनी दे टूटे साधना जो है उसको मैं कंटिन्यू कर पाऊंगा की नहीं सुबह को उठकर के जो बैठना ही है रात को संध्या के समय में ऑफिस से घर में जाता हूं तो उसे समय आंख बंद करके सब अंधेरा लाइट वगैरा बंद करके मुझे ठाकुर का नाम ले यू वे मैं कर पाऊंगा की नहीं कर पाऊंगा यह जो सब प्रॉब्लम्स के साथ में जूझ रहा हूं क्या वो मुझे ओवर पावर तो नहीं कर देंगे मेरी साधना को नष्ट तो नहीं कर देंगे इस आंधी जड़ तूफान से मैं भी बहुत barbujh रहा हूं किंतु मैं यह जब पढ़ता हूं ठाकुर के जो ठाकुर खुद प्रश्न करते हैं मैन गंगा की सही है की नहीं यह तो राखल खुद राजा महाराज खुद कहते हैं की अरे हम तो सोचते द की मैन गंगा तो सिर्फ एक नदी है एक पानी का प्रवाह है उसमें उसको देवी की तरफ पूजने की क्या जरूरत है तो यह सब पढ़कर मेरे मैन में भरोसा होता है की हान वो टीके रहे जब ध्यान के रास्ते में तो उनको आखिर में विश्वास हो गया तो मैं भी जल्दी मैं करता रहूंगा यहां पर जो हमको कहा जाता है वह उसका मैं हंबली उसको विनम्रता पूर्वक समय आज्ञा पालन करूंगा तो आज नहीं तो कल इस साल नहीं तो अगले साल इस जन्मों में नहीं तो अगले जन्म में मेरे साथ कुछ ना कुछ तो होगा कुछ ना कुछ बेनिफिट होगा स्पिरिचुअल प्रोग्रेस अवश्य होगा 1883 में ही प्रथम बार में ठाकुर के साथ पणिहाती महोत्सव में सम्मिलित हुआ था राखल भावना और अन्य भक्त रामबाबू की गाड़ी से गए द ठाकुर के अनेक भक्त भी उसमें शामिल हुए द नवद्वीप गोस्वामी भी वहां द और ठाकुर अचानक उनके साथ कीर्तन गाने लगे अच्छा मैंने इसके आगे के पैराग्राफ में कहा यह राजा महाराज की बात है सॉरी ये adbhutanand जी की बात है कल हमने चैप्टर चेंज किया लथु महाराज के बारे में अच्छा खाल के बारे में लिखा तब मुझे लाइट हुआ अरे अच्छा राखल bhavnat और अन्य भक्त रामबाबू की गाड़ी से गए द ठाकुर के अनेक अन्य भक्त भी उसमें शामिल हुए द नवोदय गोस्वामी भी वहां द और ठाकुर अचानक उनके साथ कीर्तन गाने लगे ठाकुर को भाव समाधि देखकर सभी लोग चकित हो गए द ठाकुर का विश्वास रुक गया उनका मुख मंडल नेत्र और हाथों की हथेलिया लाल हो गई और उन्हें इस प्रकार भव्य समाधि स्थल अनेक व्यक्ति दौड़कर उनके चरणों की धूल लेने लगे हम सभी दुविधा में द सभी लोग ठाकुर का स्पर्श करना चाहते द और हमारे माना करने पर भी वह हमारी उपेक्षा कर देते द अतः वहां बड़ा कोलाहल हो गया रामबाबू ने मुझसे कहा लेटो उनको रोकने का प्रयास मत करो लोगों को उनका स्पर्श करके धनिया हो किंतु मैंने उनकी बात नहीं मणि क्योंकि मैं जानता था की samadisht अवस्था में यदि कोई ठाकुर कुछ वर्ष करता है तो उन्हें भयंकर पीड़ा हो जाती है अंत में हम तीनों राखल भावना और मैं ठाकुर को उसे स्थान से सुरक्षित बैठक खाने में ले गए किंतु उन भक्तों का प्रतिरोध करना कितना कठिन था हम जब बैठक खाने की ओर जा रहे द तो भी लोग ठाकुर का चरण स्पर्श करते रहे तो क्या तुम जानते हो रामबाबू ने क्या किया वह जमीन से एक मुट्ठी धूल लेकर ठाकुर के चरणों को चरणों से उसका स्पर्श कर कर लोगों में बांटने लगे इस प्रकार लोगों की फिर से ठाकुर को मुक्त कराया गया अच्छा यहां पर देखिए की यह जो प्रसंग है की जो ठाकुर जब समाधि में है तो कोई टच करने से कोई चरण स्पर्श करने से उनको कष्ट होता था यह त्यागी शिष्यों का मानना था यह जो महाराज है राजा महाराज है उन सब लोगों का और यह जो gurhastra शिष्य द रामबाबू वगैरा गिरीश घोष इन लोगों का मानना था की ठाकुर का devdharan जो है वह तो एक बेहद धारण सा दिखाई देता है उनका पृथ्वी पर धरातल पर अवतरण होने का एकमात्र हेतु हम जैसे सब पापी tapiyon को मुक्ति दिलवाना हम लोगों को पाप से मुक्त करवाना यहां तक की हमारे पाप ग्रहण करना कैंसर हुआ है तो कौन सी बड़ी बात है हान ठाकुर की सेवा करेंगे किंतु कैंसर तो उनको पाप ग्रहण करने से हुआ है और यह तो उनका ड्यूटी है हमारे पाप ग्रहण करना adervise तो अवतार किस बात पर वह हमारे जैसे होते हैं की अरे मैं दूसरों का पाप ग्रहण करूंगा मुझे कैंसर हो जाएगा तो फिर मुझे सबका पाप ग्रहण करने की जरूरत नहीं है थोड़ा बहुत करूंगा जब तक मैं अपने को ठीक बचा कर के रख सकता हूं अवतार के जीवन में तो ऐसा होता नहीं है उनका प्रत्येक सांस जो है वो हम लोगों के जैसे पापी पापी जो लोग हैं उन लोगों की और जो हम लोगों के पाप ग्रहण करने के लिए हम लोगों को शिक्षा देने के लिए हम लोगों के भीतर में आध्यात्मिकता का संचार करने के लिए उनका प्रत्येक क्षण जो है वो समर्पित है तो ठाकुर को लोगों से दूर क्यों ले जाना या तो फिर लोगों को ठाकुर के चरण स्पर्श क्यों नहीं करवाने देना ऐसा ही लोगों का मानना था यह जो सब ठाकुर के त्यागी शिष्य द वे लोग मानते द की हान ठाकुर ने अवतार ग्रहण जरूर किया है ईश्वर ने अवतार अवश्य किया है ठाकुर के रूप में हम इस पद से माना नहीं करते किंतु जब तक मनुष्य देव है मनुष्य देव धर्म जो है वह उन पर लागू होते हैं जैसे ठाकुर ने खुद कहा था ना बंगाली में कहते हैं पोंचो mahabute इरफ़ान ब्रह्म पड़े खंडे ये जो भगवान राम जो है वो स्वयं रो द जब सीता का अपहरण हुआ था तो वो जो भगवान शिव की कहानी है ना की वो वराह अवतार लेकर के और दानो पर दमन किया दोनों को विनाश किया उसका संहार किया फिर वो सब बच्चे वगैरा लेकर के रह रहे द वराह अवतार में तो फिर भगवान ईश्वर को सबको चिंता हो गई की अरे अभी तो यह बड़ा अवतार के रूप में रहेंगे तो फिर क्या होगा तो एक दूसरे भगवान ने जाकर के त्रिशूल से उनके जो है देहात को नष्ट कर दिया तो वो जो है फिर से वो जो है ईश्वर बन के वो स्वर्ग लोक में चले गए तो जब तक हम यह पृथ्वी पर आकर के मनुष्य का अवतार लेते हैं भगवान जो है तब तक जो है मनुष्य होते हैं और यह जो रजिस्टर एक छोटा सा अंश उनको लगता है और यह जो देह के सभी धर्म का उनको पालन करना पड़ता है तभी तो हमको यह भरोसा मिलेगा दो चीज है की मैं आध्यात्मिक जीवन में प्रगति कैसे करूंगा तो ईश्वर ने मुझमें पर कृपा की तो मैं प्रगति करूंगा ये जो हो गया परमार किंतु पुरुषार्थ भी तो एक चीज है मैं पुरुषार्थ कब कर पाऊंगा जब मैं देखूंगा की ठाकुर है या तो राम चैतन्य महाप्रभु शंकराचार्य है कृष्ण है इनके जीवन में भी जब हम कोई संघर्ष देखते हैं जब आध्यात्मिक जीवन में या तो फिर इस तरह के हम लोगों को जो चीज स्पर्श हो रही है वो चीज हम उनको देखते हैं उनके जीवन में संघर्ष करते हुए तब मुझे पुरुषार्थ करने की प्रेरणा मिलेगी आदर वाइस मैं सोचूंगा की अजी मुझे hajirmik जीवन पर आगे जाना है इतना पुरुषेर क्यों करूं जब ध्यान ये त्याग तपस्या क्यों करो उन्होंने नहीं किया था उन्होंने तो त्याग तपस्या जब ध्यान करके मेडिटेशन करके कोई आध्यात्मिक सिद्धि नहीं प्राप्त की थी वह तो ईश्वर के अवतार है उससे उनको सिद्धि मिली और मुझे पैसे मिलने वाली है तो उनके आशीर्वाद से मिलने वाले इसके ज्यादा और कुछ मुझे करने की जरूरत नहीं है किंतु यह गलत सोच होगा यदि गलत नहीं है ठीक है यह भक्त लोग मानते द गृहस्थ भक्त किंतु सन्यासी भक्त द उनका दृढ़ रूप से मानना था की पुरुषार्थ साधन भजन तपस्या आध्यात्मिक जीवन के अभिन्न अंग है कृपा का एक रोल अवश्य है किंतु कृपा तभी चरित्र फलीभूत होगी तभी वो इफेक्टिव होगी जबकि इसके पीछे हमारे पुरुषेर का बैकअप है और इसीलिए वो ठाकुर को जो है इस तरह से अति santarpan से अति जतन करके ठाकुर को वो संभाला करते द यह जो वो कहानी है ना गिरीश खोज की और जो एक एक्ट्रेस थी वो गिरफ्तार में कम करती थी तो एक दिन सोचा वह ठाकुर के दर्शन के लिए जाएगी ठाकुर काशीपुर में है कैंसर से ग्रस्त है और किसी को यह जो युवा सन्यासी भक्त है वह संन्यास नहीं लिया था युवा त्यागी भक्त है वह लकड़ी लेकर के तो वहां पर वह लाठी लेकर के पहरा भर रहा है वह सीडी जब ठाकुर के कमरे में ऊपर जाते द तो किसी को जाने नहीं देंगे वह बाहर वाले किसी को ठाकुर के पास में क्योंकि वो ठाकुर के पास जाएंगे गले में से रक्त बा रहा है बोलेंगे कुछ ठाकुर तो अपने को रोक नहीं पाएंगे जेनुइन भगत है तो ठाकुर तो उपदेश देना शुरू कर देंगे उसको chhuyenge भी सही शक्तिशाली संचार भी करेंगे तो फिर उनका क्या हालत होगा तो वह लोग लाठी लेकर पहरा भर रहे हैं तो ये जो काली पढ़ो घोष है ठाकुर का शिष्य वो जो अभिनेत्री को लेकर के आया उसको पता है की अभिनेत्री को नहीं जाने देंगे तो उसको क्या है वो साहब वो जो वो तो वो एक ब्रिटिश किसी ऑफिसर के रूप में उसके कपड़े पहना है और उसके बाल वगैरा जो है वो हते में छुपा दिए वो जो टोपी में वगैरा और को पंत पहन के और बोला ये ब्रिटिश ऑफिसर है वो ठाकुर को मिलना चाहता है तो वह निरंजन महाराज वहां पर खड़े द तो उन्होंने ब्रिटिश लोगों का तो ऐसा कोई भक्ति वगैरा होता नहीं है ठाकुर को chhuyenge नहीं बोलेंगे नहीं की आप मुझे आशीर्वाद दीजिए वगैरा कोई दिक्कत वाली बात नहीं और काली पढ़ो घोष तो ठाकुर का भक्त है कोई बाहर का आदमी तो है नहीं अपना ही आदमी है तो उन्होंने जाने दिया अब जैसे ये काली प्रदोष है अभिनेत्री ऊपर में गए ठाकुर के पास वो अभिनेत्री ने वो हिट वगैरा निकल के वो ठाकुर को कहा की मैं अभिनेत्री हूं आपके दर्शन के लिए आई हूं तो ठाकुर बड़े एकदम जोर से हंस पड़े और देखा देखो मेरे बच्चों को कैसा मूर्ख बनाया और फिर अवतार है उनका तो एक ही कम है लोगों को उपदेश देना लोगों के पाप थरण करना आध्यात्मिकता का संचार करना काफी देर तक उससे बात वगैरा किया अब जब नीचे आए तब कहीं निरंजन जी को पता चला की अरे यह तो मेरे आंखों में धूल चोक करके इसको ले गए ऊपर में वो सब लोग नाराज तो बड़े हो गए हैं किंतु अभी सब बड़े देखिए ग्रस्त भक्तों का यह विश्वास था इतना दृढ़ विश्वास था की ठाकुर जो है यह कैंसर वगैरा सिर्फ दिखावा है और उनका एक मकसद उनका एक उद्देश्य क्या है कोलकाता दक्षिणेश्वर बहुत सारे लोग नहीं जा पाते द dakshines जरूर पड़ता था वह आने-जाने के साधन सुविधा इतना नहीं था तो कैंसर का वह एक भान करके कैंसर का एक दिखावा करके कोलकाता करके रहेंगे जिससे की कलकत्ता के बहुत लोगों को उनकी कृपा का ये जो है लाभ मिल सके तो सी लोग सोचते द दोनों जो विचार है की कृपा ही केवल कृपा से ही मेरा सब कुछ होगा ये जो गृहण भक्तों का मानना था और ये त्यागी संतानों का मानना था की पुरुषार्थ जो है वो जो है आध्यात्मिक जीवन में इतना ही आवश्यक है जितनी की कृपा और जितना ही पुरुषार्थ करते जाएंगे उतना ही कृपा ग्रहण करने के लिए हमारी क्षमता और शक्ति इतनी ही बढ़ती जाएगी तो यह कृपा और पुरुषार्थ इसका एक विवरण तो आज यहीं पर समाप्त करते हैं जैसा आपने देखा टाइमिंग्स में थोड़ा चेंज है 745 से मैं क्लास शुरू कर दूंगा फर्स्ट 15 मिनिट्स इंग्लिश बाकी हिंदी और जिससे की क्या है वो जिसको हिंदी सुनना है वह हिंदी ही सन पाए जिसको इंग्लिश सुनना है वो इंग्लिश ही सन पाए और दोनों सुनना है तो मोस्ट वेलकम ओके कल फिर से मिलेंगे