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स्वामी विवेकानंद नाइट इस सिंगिंग डेट ईटरनल म्यूजिक सच्चे डानाडा सोहन सोहन एक्जिस्टेंस नॉलेज एब्सलूट आईएम ही सो व्हाट स्वामी विवेकानंद तू से हर इसे डेट इसे एब्सलूट नॉलेज विच इस देवर इन से विच वे आर विच वे वांट तू गेम इस इनसाइड अवर ऑन हार्ट और नॉलेज साइंस तू स जो डी टाइम सेइंग सच्चिदानंद सच्चिदानंद सो हम सो हम नो वे हैव तू अंडरस्टैंड यस सर वन थिंक वे मेट है नोटिस अबाउट ठाकुर और स्वामी जी डेट व्हेन वे रीड डेम तू गेट डी बोथ ऑफ देवर टीचिंग कपल एलिमेंट एच ऑथर और दिस इस नोट ओवर इंटेंशन एक्चुअली तू फाइंड सिमिलरिटीज वे आर स्टडाइंग कथामृत इंडिपेंडेंट हर अलसो स्टडाइंग स्वामीजी इंडिपेंडेंट बट एवं दें देवर इस सच आगे सिंक्रोनाइज डेट इस सच्चे यू में से डेट कोआर्डिनेशन इन डी टीचिंग डेट वॅटीवर स्वामीजी सिस यू बिल फाइंड डी एक ऑफ डी इन कथामृत और वॅटीवर कथामृत से यू बिल फाइंड डी से रिफ्लेक्ट इन स्वामीजी टीचिंग्स अल्बर्ट सैड इन डी लिटिल डिफरेंट मैनर सो हर यस्टरडे बिल शो डेट ठाकुर सेस डेट यू डू नोट नीड तू रिमेंबर यू डू नोट रीड तू रीड जो डी स्क्रिप्चर्स यू डू नोट नीड तू रिमेंबर दम बाय हार्ड मेमोरीज थे जो दिस थिंग्स आर नोट नेसेसरी आईएफ आई कैन जस्ट टेक डी यू मैसेज दिस एसेंस ऑफ ओवर स्क्रिप्चर्स नो व्हाट इस डी एसेंस ऑफ ओवर स्क्रिप्चर्स विश्व यस्टरडे ठाकुर एग्जांपल यू से गीता 14 टाइम सो डेट बीकमस गीता नो गीता मिंस त्यागी त्यागी मिंस तू रिनाउंस डी वन हूं इसे डी रिनाउंस डी परसों हूं हज रिनोज डी प्लेजेस ऑफिशियलिस डी प्लीजर्स ऑफ दिस मटेरियल एन थिंग्स मटेरियल आइटम डी परसों हूं रिनोसिस डेट ही इसे कॉल्ड त्यागी सो डी बेसिक आइडिया ऑफ गीता इसे रिनोसिएशन से थिंक वे सो यस्टरडे ठाकुर स्टेज तू हरि महाराज डेट यू नो डी यू आर रीडिंग जो डी स्क्रिप्चर्स और यू आर रीडिंग जो दिस बुक्स वेदांत एट सिटेरा बट तेल मी व्हाट इसे दी एसेंस ऑफ दिस उपनिषद और वेदांत इसंट आईटी ब्रह्मा सत्यम जगत मिथ्या और आईएफ डेट इस सो दें वही आर यू गोइंग ऑन रीडिंग दिस बुक्स ब्रदर्स स्टार्ट प्रैक्टिसिंग दिस ट्रुथ इन योर लाइफ स्टार्ट रिनाउंसिंग स्टार्ट मेडिटेटिंग स्टार्ट फोकसिंग स्टार्ट डेवलपिंग एकाग्रता डी पावर ऑफ कंसंट्रेशन इन बिल पावर स्टार्ट डूइंग जो डेट रदर थान जस्ट गान रीडिंग बुक्स दिस व्हाट ठाकुर सेस तू आ हरि महाराज नो वे सी डेट स्वामीजी सेस डी से थिंक इन एन लिटिल डिफरेंट मैनर स्वामी जिससे बुक इस इनसाइड अवर हार्ट वे डू नोट नीड तू रीड आईटी इस इनसाइड स स्वामी जी से डी बुक इसे जो इन स फूल हर इस नोट हो मिंस कनॉट यू हर दिस बुक यू डू नोट हैव तू को रीडिंग आईटी आउटसाइड डी बुक इस इनसाइड यू और आईटी गज ऑन सिंगिंग तू यू हम ब्राह्मणी हम ब्राह्मणी सच्चे दाना सच्चे दाना अंदर सो हम सो हम इन हार्ट दे और नाइट इस सिंगिंग डेट इंटरनल म्यूजिक गजाननंद सोहन सोहन दिस ईटरनल म्यूजिक ऑफ डी उपनिषास इसे सिंगिंग इन अवर फोन हार्ड दे इन नाइट सी सच पॉलीटिकल लैंग्वेज स्वामीजी यूजेस स्वामीजी डैजल गिव यू नो दिस इस एन वन ब्यूटी ऑफ अवर स्क्रिप्ट्स टेक ओवर स्क्रिप्चर्स आर नोट टेक्स्ट बुक्स देवर यू नो देवर यू नो वे दे आर सॉन्ग बुक्स दे आर शायरी दे आर नोट सोमेटाइम्स यू रीड सम डिफिकल्ट बुक्स से ऑफ साइंस और सम अदर टेक्स्ट बुक स्पेशली अबाउट जैनिज्म आईएफ यू रीड बुक्स ऑन जैनिज्म यू बिल फाइंड देवर वेरी डिफिकल्ट रिटर्न इन एन वेरी डिफिकल्ट लैंग्वेज एवं डी पीपल लाइक मी हूं हैव स्टडीज कॉपरेटिव साइंस सॉरी कॉपरेटिव रिलिजन और कॉपरेटिव स्क्रिप्चर्स और आई नो सम बेसिक फंडामेंटल्स ऑफ जीनियस एवं पर मी रीडिंग तो स्क्रिप्ट्स सम पिक्चर्स नोट जो सम जैनिज्म आई फाइंड रीडिंग थे वेरी डिफिकल्ट बट आईएफ यू रीड अवर हिंदू परिषद दे आर रिटर्न इन पोएटिक फॉर्म्स नोट जो देवर आर डिफिकल्ट टेक्स्ट बुक्स इन वेदांत अलसो नोट एबल इसे डेट वशिष्ठ रामायण योग वशिष्ठ रामायण डी लैंग्वेज इसे वेरी डिफरेंट लैंग्वेज वेरी डिफिकल्ट बट बेसिकली अवर फंडामेंटल बुक्स लाइक उपनिषद और गीता रिटर्न इन शब्द पर देवर रिटर्न इन शायरी फॉर्म सो डेट वे कैन एक्चुअली रीड डेम इन मेमोरीज डेम देवर आर सो में साधु और ब्रह्मचारी और रामकृष्ण ओल्डर और आउटसाइड अलसो हूं हैव मेमोरीज और जो दिस 700 स्लोकास ऑफ गीता सो आईटी इस पॉसिबल तू मेमोरीज डिसलोकास एक्स्ट्रा व्हेन दे आर रिटर्न इन पोएटिक फॉर्म व्हेन देवर रिटर्न इन वर्ण फॉर्म सिमिलरली व्हेन वे सी डेट ओके स्वामी जी हज रिटर्न पोयम्स बट स्वामीजी इस बेसिक टीचिंग इस इन परोस फॉर्म नोट इन वर्ब फॉर्म डेट इस स्वामी जी हज डी रिटर्न टेक्स्ट नोट एवं रिटर्न ही हज एक्चुअली स्पोकन और हज स्पोकन शब्द वेयर रिकॉर्डर और रिटर्न डॉ में हज एस स्टेनोग्राफर लाइक से गुडविल और आंसर पीपल लाइक डेम दो हूं बिल देवोतीस अलसो और ठोस वेयर प्रैक्टिसिंग स्टेनोग्राफी अलसो दे हैव रिटन डॉ नॉटेड डॉ स्वामीजी बर्ड्स बट वे सी इन स्वामी जी शब्द तू शब्द आर सो पोएटिंग डी शब्द हैव एन ब्यूटी ऑफ डी ऑन और आईएफ वे रीड ठोस शब्द दे वो डायरेक्टली इन ओवर हार्ड वे डू नोट हैव तू स्ट्रगल तू मेमोरीज पर इमेज शब्द दे वो डायरेक्टली इन ओवर हार्ट नो यू सी डर इस वन डिफरेंस बिटवीन अमृत और स्वामीजी कंप्लीट वर्क इन देवर आर सो में कर्टंस कर्टंस वजन आफ्टर बजन डेट आईएफ यू रिमूव ठाकुर वांटेड तू से इन कथामृत बट दिस इसे नोट डी कैसे विथ कंप्लीट वर्क बिकॉज़ डी जो डी स्वामी जी हज रिटर्न प्वाइंट्स 50 प्लस पोयम्स आई थिंक आईएफ आई रिमेंबर डी करेक्ट काउंट आई थिंक डी पोयम्स आर 50 प्लस सो धी में पोयम्स स्वामीजी हज रिटर्न बट आईटी डी से टाइम ही स्पीशीज आर एक्स्ट्राऑर्डिनरी और वे कैन नोट मिस्टेक वे कैन जस्ट बाय रीडिंग कवि पोयम्स सो मी दिस पोयम्स वे बिल नोट ग्रेस डी एंटायर फिलोसॉफिकल डेप्थ ऑफ व्हाट स्वामी जी वांटेड तू सेट पर डेट वे हैव तू रीड हज पेचिस और डी वे तू रिमेंबर वे हैव तू अंडरस्टैंड हो पोएटिक शब्द स्वामी जी यूजेस से पर एग्जांपल हर स्वामीजी हो तू से डेट बुक रीडिंग आईटी सेल्फ इसे नोट इनफ वे हैव तू फॉक्स अपन अवर ऑन दिस शब्द वे हैव तू प्रैक्टिस दें दिस शब्द थेम्सेल्वेस शुड कम ए लाइव इन ओवर हार्ट से पर एग्जांपल व्हेन आईटी इसे रिटन इन गीता एवरी क इस तू बी दान विदाउट अन्य एक्सपेक्टेशन ऑफ रिवॉर्ड सो जस्ट बाय रीडिंग इस नोट पॉसिबल डेट मीनिंग हस तू को इनसाइड डी वेरी बोनस इन मेरा ऑफ अवर एक्जिस्ट डी से थिंक हैपेंस विथ स्वामी जी हेयर वे सी डी शब्द ही उसे हज इन डी ऑन हार्ट दे और नाइट इस सिंगिंग डेट इंटरनल म्यूजिक सच्चिदानंद सच्चे दान अंदर सो दिस शब्द थेम्सेल्वेस आईएफ वे फॉक्स अपन डेम देवर लाइक शायरी दे आर लाइक रिटर्न इन वर्ण फॉर्मेट दे आर लाइक रिटर्न स्ट्रेट कमिंग स्ट्रेट आउट ऑफ एन रुचि इसे में मिशन सपोज स्वामीजी इस मेडिटेटिंग और जो दिस शब्द एक्चुअली मेनिफेस्ट इन है मन और व्हेन हज लेक्चररोिंग हज स्पीकिंग कोर्स हज स्पीकिंग डायरेक्टली फ्रॉम हज विजंस डायरेक्टली फ्रॉम हज स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस रदर थान से मेकिंग हम अप जैसे
स्वामी विवेकानन्द
की हम लोग हैं हम लोग यदि कोई स्पीच देंगे या तो फिर कोई आर्टिकल लिखेंगे तो हमको क्या है बेट करके बहुत कुछ सोचना पड़ता है बहुत कुछ चिंतन करना पड़ता है अभी मुझे आर्टिकल लिखना है प्रभ्रुद्ध भारत में अभी उसका डेडलाइन भी चला गया मैं लिख नहीं पाया क्यों ऐसा हुआ क्योंकि वो मेरे पास में बैठकर के सोने का टाइम नहीं था यहां पे इतना सर एक के बाद एक कम चला राहत है तो अभी मेरे लिए या तो फिर सभी आजकल मैं देखा हूं साधुओं के लिए की यदि लिखना है या तो बोलना है तो बैठ करके सोच करके चिंतन करना पड़ेगा की हां अभी कैसे बोलेंगे क्या लिखेंगे किंतु स्वामी जी जो बोलते थे वो क्या करते साथ में क्या होता था ठाकुर की तो बात ही छोड़ दीजिए मतलब ठाकुर ने तो कहा है की मां राष्ट्र हेल दे अर्थात जब वो बात करने की शुरुआत करते हैं तो एक सेंटेंस पूरा नहीं होता मग जो मां काली जो है वो एक के बाद एक सेंटेंस जो है एक के बाद एक शब्द जो है वीणापाणि स्वयं उनकी जिक्र पे अवस्थित हो करके जैसे मां सरस्वती स्वयं जैसा की उपदेश दे रही है वेदांत का हमारी सनातन हिंदू संस्कृति का ठाकुर इस तरह से बोलते थे तो ठाकुर के तो बात ही अलग है किंतु यहां तक की स्वामी जी के साथ में भी हमने देखा है बहुत ही सुंदर एक इंसिडेंट है एक बार स्वामी जी विदेश में अमेरिका में कहानी पे लेक्चर देने वाले थे उनका स्पीच था तो स्पीच देने से पहले पता है ना जैसे बड़े लेक्चर होल होते हैं तो पीछे में बैक स्टेज होता है जहां पर यह जो स्पीकर्स होते हैं या तो यदि स्टेज के ऊपर में कोई कलर इवेंट होने वाली है तो यह आर्टिस्ट वगैरा है वो थोड़ा सा रिलैक्स होते हैं थोड़ा सा बैठ है उनके लिए रिफ्रेशमेंट आता है तो बैकस्टेज में स्वामी जी बैठे थे एक कमरे में अभी क्या हुआ की वह सब लोग स्वामी जी अकेले थे उसे कमरे में और उनके देवोटी वगैरा बाहर में कहानी पे वो सब बीजी रहते हैं ताकि चलो आज तो इतना बड़ा इवेंट है तो ऑर्गेनाइजर करना है वॉलिंटियर्स चाहिए वगैरा सब कुछ चाहिए तो वो सब देवोटी है उनके फॉलोअर्स हैं ये लोग सब बाहर खड़े थे कुछ ना कुछ ऑर्गेनाइज कर रहे होंगे उसे स्वामी जी रूम में अकेले थे अभी एक ड्यूटी में आकर के देखा की स्वामी जी के रूम में से ऐसी आवाज ए रही है की स्वामी जी जैसे किसी के साथ में बात कर रहे हैं या तो फिर और कोई स्वामी जी के साथ बात कर रहा है तो उसने सोचा की कोई देवोटी होगा वो आया होगा और स्वामी जी के साथ बात कर रहा होगा ऐसा सोच कर के वो जो लेडी वो सुन रही थी वो बाहर में खड़े रही थोड़ी डर तक फिर वो जैसे आवाज भीतर में यानी बैंड हो गई यहां विदेश में तो ऐसा है ना एक एटीकेटी जैसा है जैसे दो लोग यदि बात कर चल रहा है और कैमरा बैंड तो तीसरा बिना नो किया भीतर में नहीं जाएगा या तो फिर थोड़ा वेट करेगा की चलो उनकी बात खत्म हो जाए ये हमारे इंडिया में तो जैसे ही आप लोग बात कर रहे हैं कुछ भी फटाफट करके लोग भीतर में ए जाते हैं और यहां तक ये एक बार स्वामी जी ने एक लेटर लिखा अमेरिका में या ऐसा कहानी पे और तुरियाना जी को दिया की जो ये लेटर तुम पोस्ट करके आओ तो तू ही आनंद जी ये लेटर ली या और फिर एक जैसे नेचुरल क्यूरोसिटी होती है ना की देखा की किसको एड्रेस दिया है तो स्वामी जी ने देखा की कोरियानन जी एड्रेस पढ़ रहा है तो उन्होंने बुलाया की देखो ये लेटर तो मेरा लेटर है तो प्राइवेट लेटर है ने किसको लिखना हूं क्या लिखना हूं ये सब क्यूरोसिटी तुमको दिखाने की क्या जरूर है तो ये सुनकर के टूरियनन जी बड़े लज्जित हो गई ये बात हो रही है ना जी खुद बाद में कहते थे की देखो ये प्राइवेसी किसी का मेंटेन करना ये सब थोड़ा बहुत एटिकेट ही हमको सीखने की जरूर है तो एवं तो थोड़ा साइड स्टोरी हो गया यहां पे वो लेडी थोड़ा र देखा भीतर में फिर थोड़ा देखा भीतर में आवाज बैंड हो गई है तो कमरे में अकेले है तो उसने पूछा स्वामी जी को की आप किसके साथ में बात कर रहे थे ऐसे सुनने में ए रहा था कोई जोर जोर से आपको कुछ बता रहे हैं और आप सुन रहे हैं तो स्वामी जी ने कहा देखो मैं जब भी कोई लेक्चर देने को जाता हूं तब पहले मेरे इस तरह से मैं थोड़ा आंख बैंड करके बैठा हूं तो मेरे साथ में ऐसा होता है की मुझे जो-जो कुछ बोलना होता है वो सब कोई आकर के मुझे बोल देता है तो ऐसा मत सोचो की मैं ये शब्द मेरे है ये कोई मुझे आकर के सुना देता है फिर मैं जाकर के वह स्टेज पे वो शब्द कहता हूं अच्छा अभी वो लेडीबॉय टीम को क्या है की इतना वो रेवरेंस नहीं होता या तो फिर हमारे ऑर्डर के जितने भी क्या वो ट्रेडीशन है उतना शायद इतना हो नहीं पता किंतु हमको तो पता है की वो कौन हक करके स्वामी जी को बताता होगा की स्वामी जी को क्या बोलना है अपने से ठाकुर ही बताते होंगे तो यह जो शब्द है या तो वाणी है या तो फिर आध्यात्मिक यह जिसको कहेंगे ना की मंत्र है ये सब ये मंत्र हमारे हृदय के भी में ही है हमको सिर्फ थोड़ा सा शांत होकर के बैठना है ये कार्य चारों और हमारे और हो रहा है हमारा मां जो है सब समय किसी ना किसी चीज में वो इंगेज राहत है तो अपने मां को थोड़ा सा शांत करना है जैसे ही हम अपने मां को शांत करेंगे जैसे ही हम अपने मां को थोड़ा सा ये जो सब समझ दौड़ता राहत है यह करना है वो करना है सोचता राहत है या तो फिर टेंशन में चला जाएगा या तो फिर इस सब उसके मां में जो हम थोड़ा आंख बैंड करके बैठेंगे और देखेंगे ये क्या कर रहा है क्या नहीं कर रहा है थोड़ी डर बाद में जब थोड़ा सा आप मां शांत करके बैठेंगे तो आपको भीतर से ही ये शो हम सोहन का जो मंत्र जो जाप है ये जो मंत्रणाद है आपके मां में होना शुरू हो जाएगा और यही मंत्र का जो नद है उसको सुना उसको अचानक उसको डाइजेस्ट करना अपने हृदय में उसको बिठाना और उसके अनुसार जीवन गठन करना वही आध्यात्मिक जीवन का मूल हेतु है नहीं की हम लोग सब किताबें के पीछे जैसे मेरा एक खास करके मुझे पढ़ाई मतलब रीडिंग का पागल जैसा है मैं बहुत कुछ पड़ता राहत हूं और पढ़ने के बाद में बहुत कुछ भूल भी जाता हूं किंतु ये तो क्या है की मेरा हैबिट है तो मैं पढ़ना हूं मैं एक बार आईआईटी दिल्ली में एक बार कॉन्फ्रेंस था तो मुझे भेजो गया था मैं रांची में था उसे समय तो वहां पे गोसाई करके एक प्रोफेसर्स है अभी आईआईटी का प्रोफेसर मां है तो समझ ही सकते हैं और एक्चुअली टॉपिक क्या था की रांची में तो हमारा और डेवलपमेंट का एक्टिविटी चल रहा है तो आईआईटी डेली ने एक सॉफ्टवेयर डेवलप किया था तो सॉफ्टवेयर में क्या होता था की यह गवर्नमेंट के जो लैंड सेट सैटेलाइट वगैरा है इंडियन गवर्नमेंट के तो क्या होता है की वह खेत है किसान के उसका फोटो खींचते हैं अभी अलग-अलग तरीके से उसका फोटो खींच जाता है एक तो थर्मल इमेजिंग कहते हैं फिर वो डिफरेंट डिफरेंट टाइप का इमेजिंग होता है अभी वो फोटो को आईआईटी डेली ने सॉफ्टवेयर बनाया था की वो फोटो का फोटो को इसमें डालेंगे तो हमको वो बताया की किसान को किस समय वो खेती करें मतलब वो कौन-कौन सा ये जो क्रॉप है वो लगाना चाहिए किस समय ध्यान लगाना चाहिए किस समय आपको ये जो फ्रूट है उगने चाहिए किस समय ये जो उनके वेजिटेबल है वो उगने चाहिए फिर वेजिटेबल की क्या स्थिति है क्योंकि वो सैटेलाइट से तो सब दिखता है की वो पानी ए रहा है की नहीं ए रहा है या तो फिर यदि कोई पेस्ट यानी की ये जो जीवाणु है वो उसमें लगे हैं की नहीं लगे हैं आपका क्रॉप का वो जो हेल्थ कैसा है पूरा पता चलेगा तो आईआईटी दिल्ली ने सोचा की कुछ 10-15 गो को बुलाएंगे उनको ये सॉफ्टवेयर देंगे और उनको ट्रेन करेंगे जैसे की मदद से हम जो है हमारे किसने को बता सकें हमने रांची मोराबादी आश्रम में समथिंग लाइक 75 विलेज अडॉप्ट किया थे और डेवलपमेंट का कार्य करने के लिए तो वहां पे वो वेजिटेबल की भी खेती हो रही है वहां पे पशुपालन भी हो रहा है फ्लोरिंग कलर अर्थात की फ्लावर की की खेती भी हो रही है वो धन वगैरा तो ही है राइस है वाइट है वगैरा तो वो हम वो सैटेलाइट का फोटो तो हमारे सॉफ्टवेयर ऑटोमेटिक ए जाएगा तो हमको पता चलेगा की वो भाई ये यहां पे अभी जो है पानी कम होने वाला है यहां पे पानी ज्यादा होने वाला है तो इस तरह से हम किसान को पहले से ही अलर्ट कर दे तो फिर क्या वो अपना बेचारा मैनेज कर सकता है तो हमको 10 15 गो रिप्रेजेंटती उसको ट्रेनिंग के लिए बुलाया था तो मैं भी गया था तो अभी ये प्रोफेसर गुस्सा है जो जियोलॉजिकल ज्योमेट्री ज्योमेट्री उसको बोलते हैं वो डिपार्मेंट के हेड थे हरी तो वो हमारे क्लास लेते थे तो एक बार उन्होंने बताया था अभी आईआईटी वाले ने तो कितना स्टडी किया होगा सोच लीजिए वो बता रहे थे को किताब जो है सिर्फ पढ़ने के लिए मैं कभी नहीं पढ़ा यदि मुझे जरूर है की उसे किताब में से कुछ मुझे पार्टिकुलर कुछ रेफर करना है या कोई पर्टिकुलर मुझे क्वेश्चन है और मुझे पता है की इस किताब में इसका सॉल्यूशन है तभी मैं उसको पढ़ना हूं एडरवाइज उसे लेवल की जो की उनका फील्ड जो है उनका वो जो अकादमी जी फील्ड में है जो ज्योमेट्री अर्थात की ये जो जियोलॉजी जो है उसको सैटेलाइट के थ्रू मेजरमेंट करना ये पूरा साइंटिफिक फील्ड है उसमें बहुत सर लिटरेचर है बहुत सारे रिसर्च पेपर लिखा ही जाता है बहुत साड़ी कॉन्फ्रेंस होती है और फिर कॉन्फ्रेंस के वो जो फिर मैन्युअल पब्लिश होते हैं तो बहुत खुश हो फिल्म में यदि आप अपने को अपडेट रखना चाहते हैं या तो फिर जस्ट जर्नल स्टडी करना चाहते हैं तो उनके फ्रेम में पढ़ने के लिए बहुत कुछ है इनको वो कहते थे की यदि कुछ चाहिए मुझे तभी मैं उसको पढ़ना हूं हैदर मैंने जस्ट एक पढ़ने का अननेसेसरी पढ़ने का पढ़ने के लिए पढ़ने इस तरह का अभ्यास कभी नहीं किया इससे क्या होता है की मन फ्री राहत है तो फ्री मन राहत है अभी जैसे हम लोगों का है की फ्री मन रहेगा तो चलो थोड़ा घूमने फर्न के लिए जाए या तो फिर थोड़ा सा टीवी देख लेने या तो पर मूवी देख ले या तो फिर चलो मित्रों के साथ में बैठ के गैप लगा है किंतु ये आईआईटी वालों का तो लेवल अलग होता है ना तो वो फ्री मन राहत है तो वो कोई क्रिएटिव थिंकिंग करता है तो क्रिएटिव थिंकिंग क्योंकि डिसिप्लिन राहत है बिल पावर राहत है की मैं अपने मन को इधर-उधर भड़काने नहीं दूंगा तो लाखों लोग जब वो कंपटीशन कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन देते हैं तब कहानी जाकर के कुछ लोग से लेफ्ट होता है तो मतलब हाली डिसिप्लिन मन नहीं है तो कैसे होगा और तो मतलब और बहुत सही है यानी की ब्राह्मण है यानी की रियल ही रियली कंपटीशन में पर करके आए होंगे वो किसी वो कोटा में नहीं आए हैं तो इन लोगों का एक डिसिप्लिन राहत है तो वो कहते हैं की जब मन फ्री राहत है तो वो क्रिएटिव थिंकिंग के लिए उसको एक्सप्रेस मिलता है जब क्रिएटिव थिंकिंग करते हैं तो आपके फील्ड के जो कुछ फ्यूज है बड़े नॉटी इश्यूज होते हैं बड़े ही टिपिकल बड़े ही डिफिकल्ट इश्यूज होते हैं जिसके बड़े में आप कितना ही स्टडी कर लीजिए उसका सॉल्यूशन इजीली नहीं मिलेगा किंतु बैठ करके शांत बैठकर के क्रिएटिव थिंकिंग करने से जो भी आपके वो जो प्रॉब्लम्स है या तो फिर जी इशू के ऊपर में या जी क्वेश्चन के ऊपर में आप सोच रहे हैं भीतर से ही उसका सॉल्यूशन ए जाएगा जैसे की वो सॉल्यूशन भीतर में था ही और सिर्फ रहा देख रहा था की जाकर के हम उसके दरवाजे खटखटा क्या अरे भैया कहां हो बाहर आओ तो उसे दरवाजा खोल करके बाहर ए गया हमारे गले ग गया स्वामी जी ने कहा है की ये जो डॉ ऑफ ग्रेविटेशन जो है वो न्यूटन ने क्या अपने दिमाग से अच्छा कुछ नया बना करके हमको दिया है नहीं ग्रेविटेशन तो जो है सृष्टि का शुरुआत हुई तभी से है और उसके जो नियम है वो तो सिर्फ बैठे हुए हैं र देख रहे हैं की कोई आकर के हमारा संविधान करें हम जाकर के उसको मिलेंगे और हमारे बड़े में बताएंगे ये सब चीज तुम र देख करके बैठी कौन हमारा खोज करने अशोक करता है तो न्यूटन वगैरा क्या करते हैं की एक बार बैठ करके मां को डिसिप्लिन करके बाकी सब 10 चीजों में जो दौड़ता है वहां से वापस खींच कर के किसी एक प्रॉब्लम को इसको फॉक्स करते हैं लेजर की तरह और फिर वो जो प्रॉब्लम है वो अपने से ही उसका सॉल्यूशन देना शुरू करता है तो ये कब होता है वो बाहर से तो कहानी अपना मां सॉल्यूशन नहीं ले आता है हमारे जो भीतर में कॉन्शसनेस के तीन लेवल हैं सब कॉन्शियस कॉन्शियस और सुपर कॉन्शियस अभी आप वेस्टर्न साइकोलॉजिकल लिटरेचर आप पढ़ेंगे तो वहां पर सुपर कॉन्शियस को वे लोग जनरली एक्सेप्ट नहीं करते उनको लगता है की ये पीएसईउदो साइंस है अर्थात की ये मतलब बनाया हुआ है ऐसा कुछ किंतु वे लोग मानते हैं की सब कॉन्शियस है तो सब कॉन्शियस में बहुत सर खजाना पड़ा हुआ है जैसे की हमारे बहुत सारे पुरानी मेमोरीज जैसे की मैंने आज से 7 दिन पहले या कल परसों मैंने क्या खाया था मैं भूल गया पर कुछ स्पेशल कुछ नहीं खाया है उसमें थोड़ा सा वेरिएशन है तो हम लोग भूल जाते हैं की क्या खाया क्या किया था दिन भर छोटी-छोटी चीज हम कितनी बिसमुथ हो जाति है तो वेस्टर्न साइकोलॉजी कहती है की एक्चुअली वो चला नहीं जाता हमारे सबकॉन्शियस में चला जाता है और थोड़ा सा फॉक्स करके हम उसको मतलब रीसार्कट कर सकते हैं रिजरेक्ट कर सकते हैं पुराने नॉलेज को वापस ला सकते हैं तो किंतु हमारा वेदांत कहता है की सब कॉन्शियस तो जो है वो तो डोमेन ऑफ इंस्टिंक्ट डोमेन ऑफ इमोशन हमारे सब कॉन्शियस में इमोशंस रहते हैं स्ट्रांग इंस्टिंक्ट राहत है पशु की तरह जैसे ही कोई हमारे अटैक करते हैं तो फाइट और फ्लाइट ये जो रिफ्लेक्स है यदि जैसे हम लोग रास्ते पर जा रहे हैं सुद्दनली कुत्ते ने जोर-जोर से भौंकना शुरू कर दिया तो हम लोग दो तरह से रिएक्ट करेंगे या तो हम इमीडियाटली दौड़ना शुरू कर देंगे या तो फिर हाथ में कुछ होगा तो उसको लेकर के कुत्ते पर अटैक करेंगे सामने अपने को डिफेंड करें खासकर कोई महिला है या तो कोई बहन है बड़ी वीक है किंतु यदि उसके हाथ में बच्चा है तो वो सब तरह का उसका डर है वो भूल करके अपने बच्चे की रक्षा करने के लिए यदि शेर भी ए जाए तो उसके सामने वो जान को तैयार हो जाएगी उसके साथ में लड़ने को तो ये जो इंस्टेंट है की मैं कब लडूंगा और कब दोनोेंगा अपने को बचाऊंगा कब की इंस्टेंट हार्ड वायर हो करके वो सब कॉन्शियस में रहती है किंतु यह जो हायर इतिहास है आत्मन का अस्तित्व है की नहीं मेरा ट्रू नेचर क्या है ये ब्रह्मांड जो है उसको उसका जो मतलब उसका आदि है उसका अंत कहां है उसका आदि क्या है उसका विस्तार कितना कितना विस्तृत है फिर ये जो हेयर डाइमेंशन कहते हैं ना आजकल 10 डाइमेंशंस है फिर ये मल्टीवर्स करते हैं मल्टीवर्स यानी की बहुत साड़ी डिफरेंट डिफरेंट यूनिवर्स ऐसे प्रोबेबिलिटी इस मतलब सिमुल्टेनियसली एक्जिस्ट करते हैं एक साथ में रहते हैं तो मल्टी डाइमेंशनल वर्ल्ड है की नहीं मल्टीपल लेकिन नहीं यह सब जो हायर थिंकिंग है वह हमारे सुपर कॉन्शियस लेवल पे होता है और हम यदि अपनी कॉन्शियस को डिसिप्लिन करें तो ये सुपरकॉन्शियस के गेट ओपन हो जाते हैं और उसमें से इतने सारे एक के बाद एक जो है की ये आपके रहस्य वो उद्घाटित होते जाएंगे की आपको आश्चर्य चकित हो जाएंगे की अरे ये सब चीज तो मैंने ना ही कभी सोची है यह सब चीजों के बड़े में मैंने ना ही कभी पढ़ा है तो कैसे मेरे मां में ये सब चीज एक के बाद एक ए रही है ये प्रश्न आपको हो जाएंगे तो वो जो है इसीलिए स्वामी जी कहते हैं की जो किताब है अर्थात नॉलेज जो है वो हम सबके भीतर में है हमको सिर्फ अपने मां को डिसिप्लिन करके थोड़ी डर के लिए उसको सुना है और जैसे ही सुना शुरू करेंगे तो ये अनंत संगीत जो है सच्चिदानंद सच्चिदानंद वो सुना हम शुरू कर देंगे हमारा मां जो है इसके साथ में तूने हो जाएगा हमारा मां भी जो है सुपर कॉन्शियस लेवल पर एलीवेट हो जाएगा और हमारा जीवन जो है समृद्ध हो जाएगा हमारा जीवन धन्य हो जाएगा
श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ
अभी कथामृत ठाकुर कहते हैं विश्वास और भक्ति चाहिए विश्वास कितना बलवान है सुनो विद्यासागर के साथ में ही आज मैं रिपीट नहीं कर रहा हूं अगले वाला क्योंकि फिर रिपीट होते होते फिर आगे नहीं बढ़ते हैं हम लोग मैं सीधा आगे से शुरू करता हूं मैन जो हो गया उसके बात का ठाकुर कहते हैं विश्वास और भक्ति चाहिए विश्वास कितना बलवान है सुनो किसी मनुष्य को लंका से समुद्र के पर जाना था तो विभीषण ने उससे कहा इस वास्तु को यह कहानी तो हमको पता है बहुत ही सुंदर कहानी ठाकुर कहते हैं की विश्वास में कितना जोर है सुनो किसी को वो अभी लंका से भारत में आना था तो बीच में समुद्र है तो समुद्र पर करना होगा क्या करेंगे तो वो आदमी जो है विभीषण के पास गया विभीषण राजा है विनती की मुझे वहां पर जाना है तो विभीषण ने उसको एक पत्र पर कुछ लिखकर के दे दिया और कहा की अपने कपड़ा जो है अपना जो वस्त्र है उसमें इसको बांधकर के रखो आदमी था उसको विभीषण पे बड़ा विश्वास था उसने सोचा की हां हमारे राजा जो है राजा ने यदि मुझे कुछ दिया है तो निश्चय उसमें कुछ मंत्र शक्ति होगी तो राजा पर विश्वास है विभीषण पे विश्वास है यह बोलकर के वो जैसे ही नाडोल समुद्र के ऊपर गया तो देखा की वो समुद्र पे चल सकता है तो वो बढ़िया मजे समुद्र पे चलने लगा चलने लगा वो आधे रास्ते तक ए गया तो उसके मां में है की ना मेरे जो राजा है विभीषण उन्होंने तो सही सही में वो बहुत मतलब क्या कहेंगे उनमें बहुत सिद्धि है तो उनके सिद्धि की मदद से मैं चल रहा हूं बड़ा खुशी भी था मां में और सुद्दनली उसके मां में है क्यूरोसिटी है जैसे हमने बात प्रियनंदन जी की बात की ना अभी की स्वामी जी ने किस को लेटर लिखा है देखो की एड्रेस पढ़ लिया तो स्वामी जी उनको झाड़ दिया की ऐसा वो किसी का प्राइवेट है वह देखने की तुमको क्या जरूर है तो यहां पर भी थोड़ा सा अलग रूप से हुआ इसके मां में भी ये क्यूरोसिटी ए गई इंग्लिश में कहावत है क्यूरोसिटी का यह जिज्ञासा वृत्ति हो जाति है तो हर कहानी जाकर के वह प्रवेश किसी छोटी चीज में जाकर के वो प्रवेश करना पर्यटन करती है किंतु क्या है उसकी जान हनी हो शक्ति है वो तो क्यूरोसिटी वैसे ही इस आदमी के साथ में हुआ वो देखा सोने लगा की वो जिज्ञासा ग्रुप की क्या बने राजा ने ऐसा तो क्या लिख दिया है की ऐसा कौन सा मंत्र है जिसकी मदद से मैं समुद्र पर हो रहा हूं फिर यहां पे जैसे वासना भी होती नहीं तो एक मतलब एक ऐसा एक लो बीपी प्रगति होता है की मैं यदि ये मंत्र जहां लूं तुम्हें दुश्मन को यह मंत्र दूंगा तो दूसरे लोग भी तैरना शुरू कर देंगे समुद्र के ऊपर में चलना शुरू कर देंगे तो मेरा भी धीरे-धीरे करके एक नाम होगा की हां ये भी एक बड़ा सिद्ध है तो हो सकता है की भविष्य में यदि विभीषण चले जाए तो मैं राज्य राजा बन जाऊं ऐसा लोग होता है ना हम लोग मुंह से बोलते नहीं है किंतु सब कॉन्शियस लेवल में सब कुछ राहत है हम ठाकुर से कुछ छुपा नहीं सकते यहां पर भी अभी मुझे कौन सा पोस्ट मिलने वाला है मेरा प्रमोशन होने वाला है की नहीं साधु लोग भी ऐसा सोचते हैं हालांकि हम लोग जो है मुंह से शब्दों से इसको व्यक्त कभी नहीं करेंगे किसी को बोलेंगे नहीं किंतु मनुष्य जीवन ही है की आपको इवोल्यूशन करना है ओनली थिंक इसके हम जो आध्यात्मिक इवोल्यूशन है वो समझ नहीं पाते और ये मटेरियल इवोल्यूशन में चले जाते हैं तो मटेरियल इवोल्यूशन में क्या है प्रमोशन मिलेगा ज्यादा सम्मान मिलेगा ज्यादा पैसा मिलेगा धन मिलेगा तो ऐसा वो लोकमान्य होगा तो स्पिरिचुअल को कंफ्यूज करके हम कभी-कभी मटेरियल में चले जाते हैं किंतु इवोल्यूशन की इच्छा वो हमारे हृदय में वो डिजायर है तो इसके मां में भी हुआ क्यूरोसिटी + ओ होगा कुछ की मुझे यदि पता चल जाए तो मैं भी दूसरों को मंत्र दूंगा तो उसने वो वस्त्र के आंचल में जो वो बांध था वो पत्र खोल और उसको खोल करके देखा है की राम नाम लिखा है तो उसने सोचा बस इतना ही सिर्फ राम नाम लिखा है तो यह हमारे राजा की कौन सी सिद्धि है की राम नाम लिखकर के हम मुझे वो समुद्र पे वो चला रहे हैं जैसे ही और उसके मां में यह संदेह प्रकट हुआ विश्वास प्रगति हुआ उसके मां में जैसे ही ये शंका प्रकट हुई वैसे ही वो डब गया क्यों क्योंकि विश्वास जो है वो विश्वास गुजराती में एक बहुत सुंदर कहावत है विश्वास थी वहां तक है अर्थात की विश्वास के बाल पे जो वहां अर्थात ये जो अग्नि है जो जहाज है जो जहाज टायर जाता है विश्वास के बाल पे हम आपको यदि पता होगा गुजराती लोग जो है बहुत ही मतलब वो व्यापारी लोग होते हैं तो हमारा गुजरात का जो बहुत बड़ा तो तीर किनारा है ना ये समुद्र का किनारा तो बहुत सारे गुजराती लोग बहुत पहले के समय से विदेश में जाकर के यह करते थे मतलब मर्चेंडाइज करते थे अर्थात की यहां से चीज वहां पर ले जाएंगे वो सेल करेंगे वहां की चीज यहां पर ले जाएंगे यहां पर उसको सेल करेंगे तो यह सेल्स और परचेज इंटरनेशनल कॉमर्स जो है गुजराती लोग बहुत पहले से करते थे तो आपको जल्दी पता होगा की कैप ऑफ गुड होप जहां पर यह वास्को डा गम वास्कोडिगामा रुक था उसको पता नहीं था की भारत आने का रास्ता कौन सा है तब एक गुजराती एक जो था वो नाविक एक खलासी उसने वो वास्कोडिगामा को वो यहां पे गुजरात में लेकर आया था तो ये गुजरातियों में वो जहाज में जाकर के समुद्र यात्रा करना ये हमारे खून में है तो इसीलिए गुजरात में ऐसी कहावत है की विश्वास थी वहां तरह की विश्वास के जोर पे जांच तैरते हैं तो यहां पे भी ठाकुर कहते हैं की विश्वास यदि होगा तो विभीषण ने जो मंत्र दिया है वो जो एक लिख करके दिया है आपको वो आप राजा पर विश्वास करके आप तीर जाएंगे किंतु जैसे ही विश्वास हुआ वैसे ही आप डब जाएंगे ठाकुर आगे कहते हैं यह कहावत प्रसिद्ध है की राम नाम पर हनुमान का इतना विश्वास था की विश्वास के बल्बे वे समुद्र लॉग गए परंतु स्वयं राम को सेतु बांधना पड़ा था देख लीजिए कैसी बात है राम नाम के बाल पे एक आदमी समुद्र पे चल सकता है राम नाम के बाल पे हनुमान जी उड़ करके समुद्र पर कर सकते हैं किंतु स्वयं राम को जो है वो पत्थर का सेतु बनाना पड़ा था हालांकि राम नाम से पत्थर गिर जाते हैं किंतु राम स्वयं नहीं दे पे देखिए किसी विडंबना है इसका एक दूसरा भी एक गहन अर्थ है देखिए राम तो स्वयं पूर्ण ब्रह्मा नारायण है तो यह तो एक उनके मां में ये ज्ञान है की हां की मैं ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म हूं किंतु भक्ति जो है की जो पूर्ण ब्रह्म है उसको ब्राह्मण के ऊपर में भक्ति कैसे होगी ये तो पैराडॉक्स हो गया शक्ति है किंतु भक्तिों में यदि और कोई सीनरी साधु है उनके ऊपर में होगी अभी जैसे सुइटानंद जी अभी कुछ दोनों पहले यहां पे आए थे वाइस प्रेसिडेंट महाराजा सबको दीक्षा देंगे तो आ आपको यदि पता होगा की दीक्षा के बाद में ठाकुर के अस्थि ये हमारे गुरु के पास में रहते हैं गुरु महाराज के पास तो वो ठाकुर के अस्थि के से जब दीक्षा के बाद आप प्रणाम करेंगे गुरु को तो आपके सर पे उसका स्पर्श करवाते हैं तो ये कितनी धनिया क्षण है स्वयं ठाकुर के स्पर्श में आप आते हैं उन्हें ठाकुर का दर्शन हुआ नहीं हुआ किसको पता किंतु ठाकुर के अस्थियों का स्पर्श करने का इस शरीर को मौका मिला बोलकर के ही हमारा शरीर जो है शुद्ध पवित्र हो गया फिर तो जैसे वो जो ये क्या है ना की जैसे आपने जोर से पत्थर फेंका तो आपने फेक दिया एक बार किंतु ये जो मोमेंटम है वो पत्थर को लेकर जाता है अब तो हर क्षण उसको मारते नहीं है उसको देखते नहीं है की वो इतना दूर तक जाए फेंका भीम एक ही बार होती है फिर वह मोमेंटम की वजह से पत्थर दूर तक जाता है तो हमारे कर्मों का जो मोमेंटम है वही फिर हमको लेक जाएगा फिर इस को हमको वर्कआउट करना है वरना फिर ठाकुर के अस्थि का स्पर्श होने के बाद में नए दुष्कर्म होना संभव ही नहीं ये विश्वास होना चाहिए विश्वास नहीं होने से तो कुछ नहीं होगा जैसे यहां पे वही विश्वास की बात की गई है तो जब हम सदों का ये सद्भाग्य है की जितनी भी बार दीक्षा होती है तो दीक्षार्थियों को वो चीज स्पष्ट करवाने के बाद में हम लोग भी प्रणाम करते हैं प्रेसिडेंट महाराज हो या वाइस प्रेसिडेंट महाराज फिर वो भी हमारे सर पे वो अस्थि किस स्पर्श करवाते हैं तो राजकोट जैसे बड़े सेंटर में तो साल में एक दो बार मिनिमम दो बार दीक्षा होती है यानी की हमको ये हमारा सद्भाग्य है की साल में एटलिस्ट दो बार ऑन एवरेज ठाकुर की अस्थि का स्पर्श करने का हमारे शरीर को वो पवन एक एक क्या बोलेंगे तो ये जो है की हम गुरु के ऊपर में श्रद्धा कर सकते हैं ठाकुर के उसे जब हम प्रणाम करेंगे तब हम एकदम चिरचित होकर के प्रणाम करेंगे पहले तो जैसे सुइटानंद जी पिछली बार आए थे तो सुनितानंद जी को प्रणाम किया फिर एकदम शांत होकर के बैठेंगे विश्वतनंद जी अपने सर पे जो है वो अस्थि का स्पर्श करवाया तो आपको श्रद्धा उसे समय होगी स्वैथानंद जी के ऊपर में या तो फिर ठाकुर के ऊपर में मुझे मेरे पे तो श्रद्धा नहीं हो शक्ति मुझे मेरे पे तो भक्ति नहीं हो शक्ति मुझे मेरे पे जो होगा वो आत्मविश्वास होगा तो भगवान राम का भी वैसा है भगवान राम को भगवान राम के ऊपर में भक्ति कैसे होगी वो आत्मविश्वास हो सकता है ज्ञान हो सकता है भक्ति नहीं हो शक्ति तो पत्थर भक्ति से ही तैरते हैं ज्ञान से नहीं तैरते यह बात जो है इसलिए हमको देखने की जरूर है हम लोग बहुत सारे लोग समझते हैं की ज्ञान जो है भक्ति से ज्यादा श्रेष्ठ है क्योंकि ज्ञान का रास्ता वह है तपस्या का रास्ता ध्यान का रास्ता वह है त्याग का रास्ता सानिया का रास्ता तो सन्यासी जो है वह तो बाय नेचर ऑफ बृहस्थ से श्रेष्ठ है बृहस्थ का जो है रास्ता है भक्ति का रास्ता और सन्यासी का है भक्ति प्लस ज्ञान ऐसा नहीं है की सिर्फ ज्ञान वो तो हो ही संभव ही नहीं है भक्ति भी हनी चाहिए किंतु ज्ञान मिश्रित भक्ति उसे श्रद्धा भक्ति भी ज्ञान मिश्रित भक्ति भी ज्ञान क्यों क्योंकि सन्यासी हो करके यदि मैंने त्याग नहीं किया सिर्फ भक्ति किया तो वो तो चलेगा नहीं ब्रह्मचर्य का पालनपुर करना है इंद्रियों के जो लाभ है उससे मुझे दूर रहना है तो वो तो है ही है मेरे जीवन में किंतु वो ज्ञान का पार्ट है फिर मुझे भक्ति लेकर रहना है तो जो है यहां पे की भगवान राम को भगवान राम है वो पूर्ण ब्रह्म नारायण है वो ज्ञान था किंतु फिर वो जो पूर्ण ब्रह्म नारायण स्वयं को स्वयं के ऊपर में भक्ति कैसे हो शक्ति है तो वो खुद समुद्र नहीं तेरे पे किंतु पत्थर जो था पत्थर को पता था की वो भगवान से राम सिंह के चरण जो है उसको स्पर्श हो रहा है उससे वो धन्य हो गए तो पत्थर टायर गए राम नहीं तेरे पे तो ये भक्ति की महिमा ओम शांति शांति राम कृष्णा