Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Premananda
तुम फ्यू टेस्ट ओके सो हो बाबूराम महाराज कम दे सुबह हो ग्रेट हो सच यू लविंग हार्ट ठाकुर इस एंड हो क्रुएल और हार्टलेस और दिस नरेंद्र बट आफ्टर अन फ़्यू डेज़ व्हेन दिस रामदेव लोग फॉर मी अलसो डेट ही वॉच तू मीत मी एंड ही इसे कॉलिंग मी ऑन दिस ऑन तू कम एंड के इन आते डी इनेशन सो बाबूराव हमारा जो वाज ग्रेटेस्ट सरप्राइज butasment मेकर ही व्हाट हैपन व्हेन आई वेंट तू दक्षिणेश्वर फायरवुड तू डी पंचवटी को डेट मेंस ठाकुर वांटेड तू हैव हिम सैम वर्क डैन फॉर इन दिस इस अन टाइम ओनर ट्रेडीशन इन हिंदुइज्म डेट व्हेन अन गोज तू गुरुकुल तू सर तू लर्न समथिंग फ्रॉम गुरु गुरु अलसो आस्क समथिंग इन गुरु दक्षिण नौ यूजुअली इट इस नॉट जस्ट मणि पर कॉलेज और कोचिंग क्लासेस इन प्रीवियस दिस इस अलसो इंसीडेंटल वे बी लर्न इन अवर ट्रेडिंग सेंटर एस यू नव डेट इन बेलूर मठ ट्रेनिंग सेंटर सी अलसो हैव एवरी बर्न ऑफर्स है उसे samserted ड्यूटीज लाइक देयर इस अन पंगत ऑफ sadhuz वेयर सी विल सर्व सी विल सर्व फूड तू साधु विल एवर तू क्लीन अवर टॉयलेट्स इन बाथरूम सी विल हैव तू क्लीन varandaaz सी विल हैव तू सर्व ओवर आचार्य महाराज जी लाइक दिस सी एवं ब्रह्मचारी इन ट्रेनिंग सेंटर ऑफ दिस आउट ऑफ ड्यूटीज बिकॉज दिस प्रक्रिया ऑफ लर्निंग इस इट फॉर इट तू बी फ्रूटफुल फॉर दिस प्रक्रिया ऑफ लर्निंग तू बी सक्सेसफुल सर्व गुरु दिस इसे टाइम ओनर ट्रेडीशन सी डोंट जस्ट लाइक इन वेस्टर्न इंस्टीट्यूशंस विच पेटीएम इन कैरक्टर ऑफ डी टीचर अलसो यूज्ड तू बी इंपॉर्टेंट नौ ऑफ कोर्स इन वेस्ट अलसो सी वीं सी सैम ग्रेट पिक्चर्स यूज्ड तू डू सैम फॉर एग्जांपल फेम वाज देर एंड दें आइंस्टीन वाज देयर एंड इन ईस्ट अलसो नौ व्हाट इसे सी सी डेट कमर्शियल एस बी कॉम वेरी रैम बट सो इट इस नॉट जस्ट डी मैटर ऑफ ईस्ट एंड वेस्ट इट इस सिंपली अन मैटर ऑफ ग्रेट टीचर्स एंड डेट टीचिंग मैथर्ड इन असिएंट ग्रेस सीट डी वे सोक्रेटिक उसे तू टीच इस डिसाइडेड सो इन अन्य कल्चर इन अन्य टाइम जस्ट गिव सैम यू नो लर्निंग इन शब्द ओनली लर्निंग डेट आर ओनली डेट दोस्तों इंपोर्ट द कैरेक्टर्स एंड वैल्यूज बट फॉर दिस कैरक्टर एंड वैल्यूज तू टेक √ टीचर अलसो दिस सेवक इस अन वेरी इंपॉर्टेंट मीडियम ऑफ साधना फॉर ए विद्यार्थी फॉरेस्ट स्टूडेंट फॉर साधकस सी साधक हु आर हु वांट तू प्रोग्रेस अलोन डी पथ ऑफ स्पिरिचुअलिटी फॉर अस अलसो डी सेवा फॉर्म्स एंड एसेंशियल इनग्रेडिएंट इन अवर डेली दे टुडे स्वामी विवेकानंद स्टार्टेड दिस कर्मयोग में पीपल थॉट डेट दिस कर्मयोग वैसे नेवर देयर इन डी हिंदुइज्म इट इस समथिंग न्यू डेट्स स्वामी जी हज स्टार्टेड बट यू विल बी इस नॉट लाइक डेट कर्मयोग वैसे ऑलवेज प्रेजेंट राइट फ्रॉम डी डॉन ऑफ वेदिक आगे राइट फ्रॉम डी फर्स्ट ऋषि हु डिक्लेयर्ड डेट आई आर महात्मा ऋषि एस डी से वेरी सोल इस अलसो डी ऑल पावरफुल ऑलमाइटी अल्वी इंटरनल डी ब्रह्मांड ऑफ दिस यूनिवर्स शुद्ध हार्ड ऑफ डी ऋषि इसे कनेक्टेड विद डी कॉस्मिक हार्ट ऑफ डी डी और ईश्वर और ब्रह्मांड तो दिस कॉस्मिक मैन एंड दिस स्वामी विवेकानंद हेड ऑफिस वेरी नाइस स्टोरी ही वाज गोइंग ऑन पथ ऑन हिमालय संवारे इन kapdighat देयर इस प्लेस दे एंड देयर स्वामी विवेकानंद सीटेट थ्री इन सुद्दनली एड एफिशिएंट माइक्रोकॉस्म एंड macrossm व्हाट इस macroposal इस डी कॉस्मिक रियलिटी एंड व्हाट इस microprosome इस अन ह्यूमन एंड दे बोथ आर एसेंशियली कनेक्टेड यूनाइटेड ऋषि हेड दिस विज़न ही स्टार्टेड टीचिंग दिस डिसीप्लस डी कर्म योग वास स्टार्टेड अलांग डी से डेप्थ सो यू हैव तू लर्न विद्या फ्रॉम योर गुरु की सर्वेइंग डोर नॉट इफ यू डोंट सर्च डी गुरु और रडार बी में से इफ टुडे इन टुडेस कॉन्टैक्ट इफ यू डोंट सर्च देवता मूवी आर वरशिप बीइंग तू उसे विज़न सी आर सी वांट इन ओवर लाइफ दें विदाउट दिस हम्बल सर्विस अंबर सेवा डेट विज़न विल नॉट 55 बट टुडे स्वामीजी गिव इट अन न्यू ट्विस्ट सो अमेजिंग गिव इट अन वैल्यू ऐडेड मिनी स्वामीजी गिव इट इन एक्स्ट्रा मिनी सेइंग डेट इफ akording तू डी वेदांत गोद लाइव्स इन डी आर्ट ऑफ एवरी मैन दें हो कैन सी लाइव इलेक्शन सो फॉर ब्रदर्स एंड सिस्टर गोद सी मस्ट सर्व मैन इन होम डी गोद रिजल्ट्स सो दिस इस दी स्वामी vivekanandas कर्म योग डट सर्विंग मैन इसे डी गोल्ड लाइव्स इन डी आर्ट ऑफ मैन बट डी रूट ऑफ दिस कर्म योग ट्रेडीशन गोज फार बैक इन डी vedikesh इन दिस गुरुकुल सिस्टम डेट गुरु सी टीच है डिसाइड प्लस तू सर्वे विल कंफर्म विल मेक है हार्ट स्त्रोंगर इट विल क्रिएट अन फाउंडेशन विच दिस ग्रांड एडिफिस ग्रांड पैलेस सो फ्रॉम डी वेरी फर्स्ट बाबूराम महाराज वेंट दे ठाकुर यूट्यूब ब्रिंग सम फूड वुडन का लॉन्च तू पंचवटी आस्क समवन तू डू समथिंग फॉर हिप डेट मिंस ठाकुर डेट मेंस अन सर्विंग इसे अन साइन ऑफ डिसीप्ल शिप डेट डेट ठाकुर अरेंज अन पिकनिक देर 10 ही ट्रेंड अस byawing अन सैम रिस्पांसिबिलिटीज देर ठाकुर उसे तू अरेंज दिस गेट टुगेदर बाय विच ठाकुर विल नॉट ए अरेंज इट इस नॉट लाइक टुगेदर इट इदर दक्षिणेश्वर और इन डी होम अंदर स्टोरी एन्सेस्ट्राल ऑफ बाबूराम महाराज तो बाबूराव स्टेट माय मदर हु नोट अलाउड तू स्टे वेरी लॉन्ग इट ओवर विलेज बिकॉज बाबर महाराज सी ए ड्यूरिंग डी वेकेशन टाइम बाबूराव मराज विल गो तू इन हिज विलेज सो बट हिज मदर हु इसे नॉट आलो हिम तू स्टे देयर फॉर वेरी लॉन्ग फॉर डी फेयर डेट सी मेड इन कर डी कंपनी ऑफ दिस बेड बॉयज सैम ऑफ डी बॉयज यू आर लिविंग इन गुड कैरक्टर सो बाबूराम महाराज इस मदर डिडेंट वोट इन तू लीव देयर सो डेट इसे माय नोट गदर माय नोट कलेक्ट सब्सक्राइब को आवेश यू वुड आस्क हिम तू लीव तू गो फॉर कोलकाता बट एवरी टाइम बाबूराव मराज वुड लाइव हिज मदर मातंगिनी देवी वैसे और नाम सी वुड क्रि एंड क्रैक बट बाबू राम महाराज अलसो स्टेट व्हेनेवर ही वुड लाइव डी shineswar ठाकुर अलसो फुल वेरी साद ही वुड अलसो वुड ओवरकम विद लव फॉर हिम सो बाबूराव हमारा सेस डेट ऑन वैन हैंड तेरी माय मदर व्हेनेवर आई लाइव पुर सी woodcribe फॉर मी एंड ओनर एंड ऑन डी आदर हैंड देयर इस ठाकुर एवरी टाइम आई लाइव डी shivaneshwar ही वुड क्रीज फॉर मी सो ठाकुर्स लव मदर एंड इन अंदर शॉप ऑफ आत्मन रिलेशनशिप ऑफ गुरु एंड डिक दिस मच फॉर इंग्लिश
श्रीरामकृष्ण कथामृत : द्वितीय दर्शन
में आए और एक के बाद एक ठाकुर के साथ में उन्हें तर्क करना शुरू किया और यह मास्टर महाशय कहते हैं की ठाकुर के साथ में यह मेरा पहला और आखिरी दुर्घटना वो वो सोचने लगे की सरकार और नीरा कर दोनों जल्दी सही है तो फिर तो यह कैसे हो सकता है तो ठाकुर ने कहा की यह बात नहीं है की सागर पे तुम मैन को एक अदरक करते हो मैन की निष्ठा रखने से ही हुआ यदि हमारा मैन शुद्ध पवित्र है तो हम यदि कितना ही प्रिमिटिव यह आदिवासियों का या तो फिर यह जो डकैत कलीम जो वहां पर खत्म होती है जिसके सामने शायद पशु बाली भी देते होंगे किसको पता तो यदि उसकी भी आराधना करें सच्ची मतलब करके यदि आप यदि आपने अशुद्ध मैन से पवित्र मैन से nishthapurvak आराधना करें तो ईश्वर प्राप्ति होना की अब मैन काली का दर्शन होना कोई बड़ी बात नहीं है तो जब मास्टर महाशय ने ये सुना तो उन्होंने का दिया की अरे यह तो फिर लोगों को बता देना चाहिए की आप पत्थर की या मिट्टी की मैन काली की पूजा नहीं करते आप तो सही-सही ईश्वर की पूजा करते तो ठाकुर फिर नाराज हो गए तो तुम कौन हो लोगों को बोलने वाले कोलकाता वालों का यही प्रॉब्लम है यह सब हुआ फिर उनकी बीवी के बारे में भी बुआ की बीवी ज्ञानी है तो मास्टर ने बोल दिया की ज्ञानी तो ये सुनकर के ठाकुर और भी नाराज होते ज्ञान किसको कहते हैं अज्ञान किसको कहते हैं जो की बहुत सागर पार कराए जो की ईश्वर प्राप्ति कारण वही सही ज्ञान है और बाकी सब वैसे ज्ञान ऐसा तो नहीं कहना चाहिए मतलब हम व्यावहारिक दृष्टि से यदि देखें तो हम हमारा एक रिस्पांसिबिलिटी है आश्रम में हमारा एक रिस्पांसिबिलिटी है brihasthon का पिए रिस्पांसिबिलिटी है तो यह व्यवहार है यह सब तो करना ही पड़ेगा किंतु वह सब शून्य की तरह है ये जो ईश्वर प्राप्ति का ज्ञान जो है वो एक की तरह है एक के पीछे आप यदि चित नहीं चाहे शून्य लगाते जाएंगे सांसारिक ज्ञान इकट्ठा करते जाएंगे तो उसकी वैल्यू बढ़ती जाएगी किंतु बिना एक के आप कितने ही ₹1 लाख शून्य भी इकट्ठा कर दे तो 0 0 ही रहेगा अर्थात ईश्वर प्राप्ति का ज्ञान प्राप्त करने के बाद यदि यह सांसारिक ज्ञान प्राप्त किया जाए संसार में रहा जाए तो उससे कोई हनी कुछ नहीं है है तो यह सब बात उनके साथ में हुई उसके बाद में मास्टर महाशय का अहंकार संपूर्ण रूप से चूर्ण हो गया पहली बार एक विद्यार्थी की एक एक शिष्य की तरह ठाकुर को प्रश्न पूछने की शुरुवात तो इसके ईश्वर को ईश्वर में मैन किस तरह से लगे तो ठाकुर ने कहा की सर्वदा नंबरदार संकीर्तन और निर्जन में वास यह जो सतत नाम जप जो है यह जप जो है उसकी बहुत बड़ी प्रभाव है कलयुग में मैन शारदा क्या करती थी की जब पत्र ही जप से कलयुग में जप करना ही एक सर्वश्रेष्ठ साधना है हम जितना ही ज्यादा जप करेंगे उतना ही हमारे कर्मों का जो यह कम होता जाएगा राजा मनोज के बारे में है की राजा महाराज की कहानी जब हम पढ़ेंगे तो इतना उसमें से हमको uthipan मिलता है इतनी प्रेरणा मिलती है जब जैसे स्वामी जी जो सब वह नगर मत्स्य तो सब लोग एक बार निकल गए द उन्होंने सोचा की अभी हम प्रवृत्तियां करेंगे परिव्राजक की तरह दर बदर चाहेंगे पूरे खुले आसमान है नील अंबर है नीचे में माता- ठाकुर का सहारा देकर के निकल पड़ेंगे जो होना है सो हो उसे समय राजा महाराज जो है वो वृंदावन में कुसुम सरोवर की किनारे कुटिया में रहकर के बहुत जप अध्ययन किया करते द वो इतना जप करते द इतना जप करते द की भिक्षा करने के लिए भी नहीं जाते द तो सुबोध जी महाराज उनके साथ में द तो सुबोध जी महाराज भिक्षा करके ले आएंगे और साथ में रख देंगे अभी राजा महाराष्ट्र ऐसा नहीं है की खाने का टाइम हो गया तो चलो जब बंद करके वहां पर खाना शुरू कर दे वो जब कर रहे तो कर ही रहे एकता करो मैन से तो फिर वह दयानंद जी महाराज वह रोटी जो है पास में रख देते द अभी रोटी इतना देरी तब किया की रोटी भी सुख गई और फिर जब धीरे से वह राजा महाराजा प्रकृति स्टार हुए सहज अवस्था प्राप्त हुए तो देखा की रोटी पुरी सुख गई है तो पानी में भीगा दी और इस तरह से भी रोटी खाकर के फिर वो थोड़ा सा रेस्ट किया और उसे समय राजा महाराज कहते द की उसे समय मध्यरात्रि के बाद एक और शारीरिक वैष्णव बाबा जी आते द और राजा महाराज को उठा देते द अरे मुठिया रात्रि हो गई जप करने का समय हो गया वृंदावन में सोने के लिए तुम नहीं आए हो तो इस तरह से राजा महाराजा की बात फिर से फिर से जब करना शुरू कर देते तो यह जो जॉब करते करते ही खास करके हम देखते हैं मैन शारदा और राजा मारा इन दोनों को जीवन में हमको जब का बहुत ही प्रभाव हमको देखने को मिलता है स्वामी जी तो बहुत ध्यान किया करते द और ठाकुर तो क्या नहीं करते द ठाकुर को तो वैसे हाथ में यह जपु माला लेकर एक भी करते तो समाधि में चले जाते द तो उन दोनों की तो बात ही अलग है किंतु हम जैसे सामान्य स्टार के लोगों के लिए यदि कोई प्रेरणा देते हैं तो मतलब किस तरह से साधना करनी चाहिए तो हमको सीखना है मैन से और राजा मस से दोनों के बारे में अब देखिए माफी इस तरह से संसार में रहती थी यह जितने भी वो कच्चे बच्चे वो रात रात मा को ना देनी फिर उनके भी बच्चे पाजी मामी इस तरह से सबको लेकर संसार में रहना राजा महाराज प्रेसिडेंट द उन्होंने पूरे मठ मिशन का वो जो है जो रिस्पांस बाईट लेना है स्वामी जी वैसे वेदांत का उपदेश दिए मिशन की स्थापना की किंतु इस तरह से इंस्टीट्यूशन का रिस्पांसिबिलिटी उन्होंने कभी नहीं लिया वो एक जगह पे रहते भी नहीं द ज्यादा देर जैसे ही कुछ दिन हुए चलो उनके मैन में ऐसा कोई जाता था यह सब छोड़ के निकल जाए और फिर और कहीं जाएंगे और कहीं पे क्लासेस चालू करेंगे और कहीं पे प्रवचन देंगे तो एक जगह पर बैठकर जवाबदारी लेकर के मतलब यह सांसारिक ए गया और राजा मार्ग दोनों इस तरह से जवाबदारी लेकर के एक जगह पर बैठकर के अपने साथ ही लोग आते हैं साधु है ब्रह्मचारी है भक्त है यह सब एक्टिविटीज हो रही है कर्मयोग हो रहा है तो सबकी जवाब दारी लेकर के किस तरह से एक आध्यात्मिक जीवन बनाए रखना है ये हमको राजा महाराष्ट्र और मैन से सीखना है तो इन दोनों के जीवन में देखिए की जब का कितना प्रभाव है सब समय मतों मैन खुद कहती थी की मैन को देखकर कैसा लगेगा नहीं की मैन जब कर रही है की तू एक बार सूर्यनंद जी महाराज ने कहा था की मैन का जो चेतन चेतना अवस्था है वो कांठा से नीचे कभी नहीं आता अर्थात मैन का जो मैन की जो चेतना है सब समय जो चक्र है कल में जो चक्र है उसी के ऊपर में ही वह रहते द मैन की चेतना उससे नीचे कभी आई ही नहीं है फिर तू मैन को देख करके जिस sahasta से सांसारिक सब कार्य किए जा रही है भक्तों भक्त लोग आते तो हमने देखा की जिस तरह से जयरामबाती मेक की बात एक तारे माउंट के लिए खाना भी पकाते द उनका uchhishth भी परिष्कार करती थी उनकी चिंता भी करते द बोलते भी थी अरे तुम इतने नहीं आए तुम्हारे बारे में मैं सोच रही थी और यहां पे राजा महाराजा जो है वो बेलूर मठ में बैठे हैं काशी में बैठे हो ना की भुवनेश्वर में कोटक में बैठे हो जहां पे भी वो सब समय बट मिशन की चिंता साधु ब्रह्मचारी लोग क्या कर रहे वो सब उनके माइंड में रहता था शरद महाराज वहां पे उद्बोधन में रहते द और वहां से वह सेक्रेटरी रामकृष्ण मिशन के जनरल सेक्रेटरी के हिसाब से पूरा sponders रखते द किंतु सब रिपोर्ट राजा महाराजा के पास अवश्य पहुंचता था राजा महाराज को सब पता था मठ मिशन के सभी सेंटर में क्या एक्टिविटी हो रही है कौन से सातों क्या कर रहा है तो इस तरह से चुम्मा लेकर के अपने सर पर फिर भी एक थी रो करके एक ध्यान होकर के सतत जप किए जाना किए जाना वही जो है की हमको इतना प्रेरणा देता है तो chammaster मुंशी ने ठाकुर को पूछा की ईश्वर की प्राप्ति कैसे की जाए ईश्वर पर मैन कैसे लगाया जाए तो यहां पर ठाकुर कहते हैं की निरंतर ईश्वर के नाम अर्थात प्रार्थना पूजा भजन वगैरा किंतु जिस तरह से क्या है पता है की जैसे भोजन है तो भोजन में हम लोग सबसे ज्यादा तो वैसे क्या खाता है रोटी है या तो राइस से और फिर तरकारी है और रोटी डाल तरकारी और ये राइट चावल यह जो है हमारा शुभ भोजन फिर साथ-साथ में आचार्य रहता है पापड़ रहता है कोई मिठाई रहती है वह सब चीज साथ में रहती है तो हम लोगों के लिए यह जो प्रार्थना है यह वचन है या तो ध्यान है वह सब इस तरह से हमारे भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए किंतु हमारा जो में जो आहार है वह होना चाहिए डाल और रोटी की तरह वो है सके करना चाहिए नाम जब से हमारा मैन सब समय पवित्रता से वो भर जाना चाहिए जैसे की हमारा हृदय पूरा जैसे वह आप किसी को वीडियो में देखा था ना रेड ऐसे तब तक करता है फिर वो वहां पे ब्लड सर्कुलेशन होता है मेडिकल वीडियो में सतह इस तरह से हमको भी सीखने हैं की आज हृदय हमारा जैसे धक-धक करता है साथ-साथ में ही ये जप का सर्कुलेशन कंटीन्यूअस होता है और जब हमारे लिए इतना सहज हो जाना चाहिए की जैसे हम सांस लेते हैं सांस के साथ-साथ में ही जब चले इसको बोलते हैं और छुपा जब हम कोई कम भी कर रहे हैं तो हमको पता नहीं है की साथ-साथ में जब चल रहा है फिर हम आगमन कर दो मिनट फिर पता चला रे हमारे मैन में वही ईश्वर का नाम चल रहा है वही ईश्वर के नाम की धोनी को जरा ही है जय श्री राम जय श्री राम जय श्रीराम जय श्री राम जैसे की हम सांस लेते तो हमको पता भी नहीं है की हम सांस ले रहे वो हमारे लिए सांस लेना इतना सहज हो गया तो वैसे ही ईश्वर के नाम का जब चुंबन को गुरु महाराज ने दिया है वो जब जो है इतना सहज हो जाना चाहिए की हमारा जो हमारे जीवन की प्रत्येक क्षण के साथ में वो गुण जहां चाहिए प्रत्येक क्षण में वो हम वो पवित्र से पवित्रम बनाता रहे इस तरह से हमको जप में संपूर्ण रूप से डूब जाना अभी ठाकुर आगे कहते हैं सब कम करना चाहिए परंतु मैन रखना चाहिए ईश्वर में माता-पिता स्त्री पुत्र आदि सबके साथ रहते हुए सब की सेवा करनी चाहिए परंतु मैन में इस ज्ञान को ध्रुव रखना चाहिए की यह हमारे कोई नहीं है अच्छा देखिए फिर तो यह थोड़ा सा सोच समझ के करना है की ये हम माता-पिता भाई-बहन परिवार जैन है बच्चे वगैरा है उनके साथ में हम रहते हैं तो यह हमारे कोई नहीं है यह परिस्थिति किंतु बहुत एडवांस होने से आती वर्ण तो फिर क्या होता है यदि हम यह सोचना स्वरूप शुरू कर दे की अरे इनके साथ में हमारा कोई नाता नहीं है जैसे मास्टर महाशय कहते द की मैं एक भाई के घर गया और उनकी वहां पर मैंने यह कम किया अर्थात उनके खुद के घर में जाते हैं उनके खुद के दरमियां भाई के वहां गया इनडायरेक्टली अपने को रेफर करते हैं किंतु यह सब चीज क्या है ना की स्वाभाविक रूप से इवोल्यूशन होना चाहिए यदि मैं जबरदस्ती ऐसा करना शुरू कर दो की मेरे परिवार जैन है इनके साथ मेरा कोई नाता नहीं है तो क्या होगा की फिर अपने मैन में कुरुक्षेत्र ए जाएगी एक प्रकार का एक कठोर भाव ए जाएगा फिर उनको जब हमारी जरूरत होगी तो फिर हम लोग उनको हेल्प नहीं कर पाएंगे यह सब इवोल्यूशन मतलब रूप से होना चाहिए ये ठाकुर कहता है ना की ईश्वर संसार दया करने का समय कब ए जाता है जब ईश्वर का नाम लेने से आंखों में आंसू ए जाए तो वह जैसे-जैसे हमारी साधना आगे बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे ये जो हमारा त्याग है वो वैराग्य है वो बनता जाएगा जैसे की हम यहां से सूरज की ओर जैसे जैसे नाचेंगे वैसे-वैसे हम पृथ्वी से दूर होते जाएगी ऐसा नहीं है की मैंने जोर करके पृथ्वी से दूर जाना है सूरज की ओर जाना चाहिए पृथ्वी पीछे से पीछे चली जाएगी तो वैसे ये सब चीजों को स्वाभाविक इवोल्यूशन में लेना है जोर जबरदस्ती करके कुछ नहीं करना है किसी धनी के घर अभी मतलब घर में रहना भी है और घरवालों के साथ में जो बहुत ही ज्यादा एक माया का संबंध है वह नहीं रखना है इसके बारे में ठाकुर उदाहरण देते हैं किसी धनी के घर दासी उसके घर का सब कम करती है किंतु उसका मैन अपने गांव के घर पे लगा रहता है मलिक के लड़के को वह अपने लड़कों की तरह ललन पालन करती है उसे मेरा मुन्ना मेरा राजा कहती है पर मैन ही मैन खूब जानती है की यह मेरे कोई नहीं कछुआ रहता तो पानी में है और उसका मैन रहता है की नारे पर झा उसके अंडे रखे संसार का कम करो पर मैन रखो ईश्वर पर तो यह परिस्थिति धीरे-धीरे आएगी जोर जबरदस्ती करके बिना भागवत भक्ति पाए जल्दी संसार में रहोगे तो दिनों तीन उलझन में फास्ट जाओगे और यहां तक फस जाओगे की फिर पिंड छुड़ाना कठिन होगा रोग shopataap आदि से अधीर हो जाओगे विषय चिंतन जितना ही करोगे आसक्ति भी उतनी ही अधिक बढ़ेगी अच्छा अभी ठाकुर क्या कहते हैं की क्यों ईश्वर की आराधना करनी चाहिए जो माया के जगत से मुक्त होना चाहिए क्योंकि जितना हम इस माया के जगत में फास्ट जाते हैं उतना ही जो ये हाथी व्याधि और उपाधि है वो हमारे सर को और ज्यादा से ज्यादा हमारे सर पे आके बैठेगी और ज्यादा से ज्यादा हमारे जीवन को जो बे आसुत asust अश्वत करती जाएगी हमारी यह जो कर्म का जो बाहर है वो इतना ही ज्यादा बढ़ता जाएगा इसके लिए उससे मुक्त तो होना है हमको किंतु वह मुक्तक होने की प्रक्रिया जो है वो सहज रूप से होनी चाहिए जबरदस्ती करके मार्केट वैरागी ए गया एक दिन मैंने बोल दिया मुझे यह सब चीजों की कोई जरूरत नहीं है छोड़ के चला जाता हूं अभी कल मुझे अभी भूख लगा तो और अभी कौन खिलाएगा मेरी में तो खिलाएगी और तो एक संसार में आपको बिठाकर के खिलाने वाला नहीं है तो फिर दौड़कर फिर से रुपया अरे मैन खिला दो हमारे वैराग्य का कोई अर्थ नहीं है ईश्वर की जो नाम जप है एकांत में साधना है प्रार्थना है वो यदि हम निष्ठा के साथ नियमित करते जाएंगे तो ये जो वैराग्य जो है वो अपने आप आता जाएगा फिर ऐसा नहीं है की संसार त्याग करना है या तो जवाब दे का त्याग करना है एक हद से उसको भी पकड़ के रखो और एक हाथ से जब भी करते रहो जैसे की क्या होगा की संसार की जो जवाबदारी है वह हम बहुत ही अच्छे से निभा पाएंगे और हम सत कार्य करना शुरू करेंगे अपने खुद के स्वास्थ्य के लिए पैसा इकट्ठा करना और दूसरा होता है लोग कल्याण के कुछ अच्छे से कम करके जाना जिससे की हम जाए तो 10 लोग रो हमारे लिए भी हान वो जब द तो हमारी चिंता करते द अब हमारे लिए कौन सोचेगा तो इस तरह से यदि हम एक हद से जप करते हैं दूसरे हाथ से कार्य करते हैं उनके जीवन में भी वो शांति और पवित्रता उनके जीवन में भर जाएगी हाथों में तेल लगाकर कटहल काटना चाहिए नहीं तो हाथों में उसका दूध चिपक जाता है भागवत भक्ति रूपी तेल हाथों में लगाकर संसार रूपी कटहल के लिए हाथ बढ़ाओ अर्थात यदि कोई जवाबदारी भी लेते हो एवं यहां पर आश्रम में भी हम लोग जैसी देखते हैं कभी-कभी बहुत रेप केस में ऐसा हो जाता है की किसी को यह बहुत बड़ा दिया गया है कोई साधु को या कोई वक्त हो या कोई वालंटियर हो उसके मैन में ऐसा लग गया की अभी मेरी वजह से ही सब कुछ हो रहा है ठाकुर कहते हैं ना की वो जो आलू पाटन जो है वह उसको उबलने के लिए रखे वह उछाल रहा है किंतु उसको पता नहीं है की नीचे चल रहा है तो ऊपर में आलू पटर उछाल रहा है यह जो saatbaji उछाल रहे तो वैसे ही हमको पता नहीं है की हमको जल्दी कोई बड़ी छीनना बड़ा चम्मा दिया जाता है बड़ी कोई रिस्पांसिबिलिटी दे जाती है आश्रम के बारे में का रहा हूं तो उसमें यदि कोई सिद्धि हमको मिलती है लोग आकर के हमारी बात सुनते हैं तो पीछे तो ठाकुर का आशीर्वाद है ठाकुर मेरी बात सुनते ऐसा नहीं है की मेरा खुद का कोई ऐसा है कोई ये है मेरा खुद का कोई गुण है जिससे की लोग आए जब मैं ये बात भूल जाऊंगा ये सोचना शुरू कर दूंगा की ये जो बहुत बड़ा बिल्डिंग बन रहा है ये बहुत बड़ा है हॉस्पिटल बन रहा है एक बहुत सारी एक्टिविटी वो और एक मेरी वजह से हो रही है तो ये अहंकार के मारे हमारा पता होगा और हम लोग जो है सब जगह पे बदनाम हो जाएंगे तो ये चाहे संसार हो या चाहे हो आश्रम जैसे हाथ में ईश्वर नाम रूपी छाप का वह जो है तेल लगा करके ये हम कटहल को काटेंगे तो कथन वैसे बहुत चिपक जाता है हाथों में जल्दी उसको काटेंगे किंतु यह ईश्वर के नाम का वह जो द काटेंगे तो हमारे हाथ में chipkedar नहीं बड़ा कम करेंगे जब घर के साथ-साथ में तो नाम के साथ में जो प्रतिष्ठा है या तो फिर कभी-कभी तो हताशा और निराशा जब आती है तब हम दूसरों को कोसना शुरू कर दे की हान भाई उसकी वजह से मेरा कम निष्फल हुआ या तो फिर उसकी बुरी नजर से ये यहां पे सब गड़बड़ हो रहा है ऐसा नहीं होगा निराशा भी है तो हम यह सोचेंगे की ठाकुर के प्रति मेरी जो भक्ति है वो या तो कम पद गई है या तो फिर ठाकुर की ही इच्छा नहीं की अभी ये कम हो यहां गुजरात में बार-बार ऐसा होता है की गुजरात का सबसे बड़ा शहर अहमदाबाद में जमीन देने के लिए बहुत बार पहले प्रयत्न हुआ था गवर्नमेंट आकर द उनको कहती है अहमदाबाद तो सबसे बड़ा शहर है गुजरात का आपको ये यहां पे जमीन देकर के आश्रम शुरू करना चाहिए किंतु आश्रम नहीं हो का रहा था क्या पढ़ते द हम माना कर देते क्या हमारे पास अभी इतने साधु नहीं है ब्रह्मचारी नहीं है की वह अहमदाबाद जाकर के रहे या तो फिर ऐसा कुछ एन कुछ हो जाता था तो इतने सालों के बाद फिर कब कहीं जाकर के आज अहमदाबाद में आश्रम शुरू हुआ है तो ऐसा नहीं है की इससे पहले जिन लोगों ने प्रयत्न किया होगा तो वह अपनी खुद की किसी कमी के वजह से निष्फल पोयम वही बात है की ठाकुर की इच्छा थी की उसे समय ना हो और ठाकुर की इच्छा है की इस समय को तो ये सफलता है या nishfalta है ये चाहे आश्रम में हो एन की संसार में हो एक जो है ठाकुर का हाथ सब समय हमारे पीछे रहता है वो चाहते हैं तो होगा नहीं चाहते तो नहीं होगा अभी नॉट आउट हम जो आध्यात्मिक रास्ते पे जो आगे बढ़ते हैं हम लोग सोचते हैं ये बाकी लोगों को हम जो देखते हैं जो की ईश्वर में ठाकुर तो छोड़ दी इस शो में भी विश्वास नहीं करते तो वह किस तरह से इतने सक्सेसफुल होते हैं तो बात ये नहीं है की आप भगवान ने माने ना या ना माने यह जो संपूर्ण मानव जाट जो है यह जो ह्यूमन सिविलाइजेशन जो है यह जो पृथ्वी है ये जो पूरा विश्व ब्रह्मांड जो है वो समग्र ईश्वर के इशारे पे ही चलता है जल्दी मैं कहता हूं की मुझे ईश्वर से विश्वास नहीं है किंतु में कोई अच्छा कार्य कर रहा हूं या तो फिर एवं कोई बुरा कार्य daboge यह ऐसा कोई बहुत ही बड़ी महामारी ए गई तो इसके पीछे भी ठाकुर का संकेत रहता है इसके पीछे भी यह रहता है की चलो इस समाज में अभी इस तरह से ये सब सड़क बना हुआ है की इस तरह से महामारी या विश्व युद्ध है उसको लाकर के इस जैसे सर्जरी करनी पड़ती है ना हमको कभी कभी कैंसर हो जाता है या तो फिर ये अपेंडिक्स हो जाता है तो सर्जरी करके उसको रिमूव करना पड़ता है सर्जिकल प्रक्रिया करके तो वैसे ही समाज में यदि इस तरह का कोई कैंसर में वो ए जाता है तो फिर यह जो बहुत बड़ी ये जो दुर्घटना है एक कोई सर्जिकल प्रोसीजर जैसा है जिससे की उसको दूर किया जाता है तो ये कोई एवं मेरे व्यक्तिगत जीवन में ही नहीं यह संपूर्ण पृथ्वी के साथ में संपूर्ण ह्यूमन सिविलाइजेशन के साथ यह अच्छा होता है या बुरा होता है इवोल्यूशन होता है या तो वर्ल्ड वॉर होती है इस सबके पीछे कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं तो क्या ऐसे शब्द करने चाहिए सबके पीछे 100% ठाकुर ही हाथ है अच्छा तो आज ही तक श्री राम विष्णु