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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ या राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का ज्ञान योग ज्ञान योग में भी दो विशेष प्रव चन कॉस्मो मैक्रो कजम एंड कॉस्मो माइक्रो कजम इसका हम अभी अध्ययन कर रहे हैं अभी तक कल एक बहुत लंबे अरसे के बाद में हमने इस सीरीज को फिर से स्टार्ट किया था तो अभी तक जो पढ़ा था उसकी पुनरावृत्ति हमने कल कर दी है आज हम कॉस्मो माइक्रो कजम जो कि अधूरा छूटा था हमारा उसको फिर से उसका पाठ प्रारंभ करेंगे किंतु प्रारंभ करने से पहले पहले ही एक टॉपिक हमने स्टार्ट किया था जो कि हम कंप्लीट नहीं कर पाए थे उसके बारे में थोड़ा सा डिस्कशन कर लेते हैं अभी हमने देखा कि स्वामी जी कहते हैं कि आत्मन जद अजर अमर बिना किसी विकार का है इनफा है समय और अवकाश इट सेल्फ आर द मेनिफेस्टेशन आउट ऑफ द आत्मन रदर देन आत्मन बीइंग पार्ट ऑफ स्पेस एंड टाइम तो क्या होगा कि आत्मन का तो मृत्यु भी नहीं है जन्म भी नहीं है किंतु मेरा तो मृत्यु और जन्म है तो फिर यह देह है और यह आत्मन यह एक एक समय के परे हैं एक समय की जेल में पूरा बंधा हुआ है यह जो समय रूपी य स्पेस टाइम मैटर और एनर्जी यह यह जो एक पिंजरा है यह एक जेल है उसमें बंधा हुआ यह पंचमहाभूत का शरीर है तो यह समय के अरे आत्मन जो है और समय के बंधन में यह देह है इन दोनों का रिलेशन क्या है देह तो चला जाएगा तो फिर आत्मन क्या चली जाएगी यहां पर जैसे हमने कल एक उदाहरण देखा था कि जनरेटर में से इलेक्ट्रिसिटी यहां पंखे में आती है या तो फिर लाइट में आती है अभी लाइट ऑन है तो पता चलता है कि जनरेटर चल रहा है किंतु लाइट ऑफ है इसका अर्थ क्या यह हुआ कि जनरेटर बंद हो गया नहीं जनरेट तो चल ही रहा है अच्छा अभी मान लीजिए कि लाइट एक एक लाइट का बल्ब जो है उसकी एक निश्चित आयु है मान लीजिए 1 साल दो साल वह काम करेगा उसके बाद में यह तो एक इलेक्ट्रिकल डिवाइस है उसका लाइफ समाप्त हो जाएगा नया लाइट का बल्ब डालना पड़ेगा तो अभी मान लीजिए फॉर द सेक ऑफ एग्जांपल कि जनरेटर हमेशा वही का वही रहने वाला है तो क्या नया लाइट का बल्ब डाल दिया तो जनरेटर हमको चेंज करने की जरूरत पड़ी नहीं जनरेटर तो वही है वो नए लाइट के बल्ब को वो इलेक्ट्रिसिटी देगा फिर यह लाइट का बल्ब चला जाएगा दूसरा आएगा तो उसको भी इलेक्ट्रिसिटी देगा अर्थात कि आत्मन है वह हमेशा एक ही रहने वाली है किंतु यह शरीर एक के बाद एक हम बदलते जाएंगे जन्म मृत्यु जरा व्याधि के इस काल चक्र में पड़ करर के इस संसार चक्र में पड़कर के शरीर आएंगे जाएंगे देह आएंगे जाएंगे आत्मन इसके पीछे वैसे का वैसा ही रहने वाला किंतु यहां पर एक प्रश्न होता है जो अपनी मेमोरीज है अपने संस्कार है क्योंकि यह वेदांत तो साधना का विज्ञान है तो वेदांत कहता है कि जन्म जन्मांतर की साधना है साधना के आखिर में एक समय ऐसा आएगा जैसे कि भगवान बुद्ध बोधि वृक्ष के नीचे बैठे थे और आखिरी जब आखिरी प्रहर आया निर्वाण प्राप्त करने का तो फिर एक के बाद उनके पूर्व जन्म के सभी संस्कार सभी बातें उनकी आंखों के सामने से चलते रहे जैसे चलचित्र की तरह और सभी संस्कार धीरे-धीरे करके कटते रहे तो यह तो हमको पता है कि आखिरी जन्म में सब संस्कार कट जाएंगे तो यदि देह आ कर के जाता है तो ये संस्कार की रिपोजिटरी कहां है संस्कार कहां पर स्टोर होते हैं इसकी मेमोरी कहां पर रहती है आत्मन के भीतर में तो कोई भी विकार नहीं हो सकता प्लस आत्मन तो एक ही है जबकि पृथ्वी की पॉपुलेशन अभी 700 करोड़ के 750 करोड़ की है फिर यह आत्मन तो सभी को इले एक ही जनरेटर में से पूरे मने सिर्फ मनुष्य को ही नहीं जितने भी पशु है पक्षी है पेड़ है पौधे हैं तारे हैं ग्रह है गैलेक्सी है सबको इलेक्ट्रिसिटी एक ही जनरेटर में से वो दी जाती है तो सभी लोग अपनी मेमोरी एक ही जनरेटर में तो नहीं स्टोर कर सकते अपनी लोकल स्टोरेज जिसको कहते हैं वो लोकल स्टोरेज तो कहीं पर होना ही चाहिए तो उसको कहते हैं सूक्ष्म शरीर जो कि हमारे मन बुद्धि चित्त और अहंकार का बना हुआ है यह जड़ देह चला जाएगा किंतु सूक्ष्म देह रहेगा सूक्ष्म देह एक के बाद एक नए देह धारण करता जाएगा यह अपनी वेदांत की थिरी है और इसको पुनर्जन्म पाद कहते हैं अच्छा तो अभी स्वामी जी इस पुनर्जन्म की थिरी को उठाते हैं जैसे कि हमने देखा कि स्वामी जी यह दो प्रवचन है इसमें क्या करते हैं कि आज का जो मॉडर्न साइंस है उसमें से कुछ कुछ आर्गुमेंट को लेकर के लॉजिक देने की लॉजिकल एक एड के रूप में मैंने एक तरह की एक तर्क उपमा के रूप में आज के मॉडर्न साइंस के कुछ कुछ प्रिंसिपल्स का यूज करके हमको वेदांत समझाते हैं तो यह जो है एक प्रश्न एक बहुत बड़ा खड़ा होता है जैसे ही हम यह कहेंगे कि आत्मन अमर है और एक के बाद एक देह धारण करता है तो पुनर जन्म का प्रश्न तो खड़ा होगा ही होगा और आजकल वेस्ट में पश्चिमी दुनिया में पता है कि साइंस तो किसी भी तरह से पुनर्जन्म को स्वीकृत नहीं करता तो इसके लिए स्वामी जी इसके बारे में क्या आर्गुमेंट देते हैं वह अभी यह टॉपिक स्टार्ट हो रहा है यह टॉपिक हमने थोड़ा सा कवर किया था बाद में हमने इसको बीच में जो छो दिया था तो अभी मैं इस टॉपिक को पूरा ही पढ़ लेता हूं डिस्कशन इसके बाद में जहां से हमने छोड़ा था वहां से करेंगे अच्छा स्वामी जी क्या कहते हैं हियर कम्स ए वेरी इंटरेस्टिंग क्वेश्चन यहां पर एक बड़ा ही रसपे ऑफ द सोल इस प्रश्न को कहा जाता है आत्मन का पुनर्जन्म वाद ऑफकोर्स आत्मन का पुनर्जन्म नहीं होता यहां पर आत्मन को हमको जीवात्मा के रूप में या तो सुक्ष्म शरीर के रूप में गिनना है सम टाइम्स पीपल गेट फ्राइटें एट द आइडिया एंड सुपरस्टिशन इ सो स्ट्रांग दैट थिंकिंग मेन इवन बिलीव दैट दे आर द आउटकम ऑफ नथिंग एंड देन विद द ग्रांडेस्ट लॉजिक ट्राई टू डिड्यूस द थिरी दैट लद दे हैव कम आउट ऑफ जीरो दे विल बी इटरनल इवर आफ्टर वर्ड्स और इस पुनर्जन्म वाद की थियर से लोग इतने डर जाते हैं कि अपना दिमाग चला कर के ऐसी चित्र विचित्र थिरी खड़ी करेंगे क्या प्रतिपादित करने के लिए अच्छा यहां पर जिन लोगों का उदाहरण स्वामी जी ने दिया है वह पश्चिमी जगत के बारे में पूर्व का जो जगत है हिंदुइज्म बुद्धिज्म और जैनिज्म हमारे यहां पर बहु जन्मवा तो बहुत ही सर्व स्वीकृत है इसलिए हम लोगों को इस तरह का डर नहीं लगता कि तो विदेश में जहां प ये सेमिटिक रिलीजस है वहां पर यह बहु जन्म वाद को लेकर के उनका एक बहुत बड़ा डर रहता है तो यह लोग क्या किस तरह का लॉजिक हमको देते हैं कि आत्मा तो सोल इज डिवाइन तो हमारा हम लोग शून्य में से प्रकट हुए हैं किंतु हमेशा के लिए जिएंगे यह किस तरह से हो सकता है आपका पूर्व जन्म नहीं था एक ही जन्म है कि एक जन्म जब समाप्त हो गया आपकी जो सोल है आपकी जो जो यह शब्द सोल शब्द य क्रिश्चन थियोलॉजी के कांटेक्ट में यूज किया है यहां पर जो सोल है अर्थात कि आपकी जो आत्मा है या तो फिर आपकी प्रेतात्मा है थोड़ा सा शब्द को डिफर करने के लिए मान लीजिए मैं टेंपरेरिली इसको प्रेतात्मा शब्द देता हूं तो व हमेशा के लिए जिएगा वो माने हेवन में जाएगा या तो हेल में जाएगा कर्म के अनुसार और जद जद खुशनसीब है मनब फॉर्चूनेटली हमको हेवन मिल गया स्वर्ग मिल गया तो हमेशा के लिए सुख उपभोग करेंगे तो स्वामी जी पूछते हैं तुम शून्य से आए हो तुम्हारा पहले कोई जन्म नहीं था यह पहला ही जन्म है और पहले जब देह चला गया तुम्हारी यह जो सोल है या तो प्रेतात्मा है वो स्वर्ग में जाएगी या तो नरक में जाएगी फिर वहां पर हमेशा रहेगी जीवित ये कैसे हो सकता है शून्य में से क्या इटर निटी प्रकट हो सकती है इटर निटी का तो अर्थ ही हुआ कि जिसका अंत नहीं है इसका तो प्रारंभ भी नहीं होना चाहिए जिसका अंत है तो उसका तो प्रारंभ यदि आप कहेंगे जिसका प्रारंभ नहीं है तो फिर उसका तो अंत होना ही चाहिए प्रारंभ नहीं है तो अंत तो होना ही चाहिए तो ऐसा करके प्रारंभ है तो अंत है प्रारंभ नहीं है तो अंत भी नहीं है तो स्वामी जी कहते हैं कि आपका यह जो लॉजिक है कि पहले का कोई जन्म नहीं था किंतु यह जन्म है और यह जन्म के बाद देह जाने के बाद स्वर्ग या नर्क में आपकी प्रेतात्मा हमेशा वो आनंद करेगी या तो फिर पनिशमेंट भग करेगी जो भी हो जैसे भी आपने कर्म किए हो तो यह तो लॉजिक के उसके ऊपर में लॉजिक का यह जो यह मानदंड है उसके ऊपर में यह टिकता नहीं है दोज ट कम आउट ऑफ जीरो विल सर्टेनली हैव टू ट गो बैक टू जीरो जो शून्य में से प्रकट हुए हैं वह हमेशा शून्य में विलीन हो जाएंगे जिसका यदि पहला कोई जन्म नहीं था तो इसके बाद में उनके देह जाने के बाद में कुछ भी बचेगा नहीं यदि पहले जन्म होती होते जाने के बाद में यह आत्मन वह स्वर्ग या नर्क में जाएगा किंतु यदि आप यह कहते हैं कि मेरे जन्म के साथ में ही आत्मन का जन्म हुआ है सोल का जन्म हुआ है तो जिसका जन्म हुआ है उसका मृत्यु अवश्यंभावी है जिसका मृत्यु नहीं है उसका जन्म भी नहीं हो सकता जो कि जन्म और मृत्यु के परे है वह एक कैटेगरी हो गई और जन्म और मृत्यु के भीतर में है वो दूसरी कैटेगरी हो गई इन दोनों के बीच में कोई मिडल ग्राउंड नहीं है ऐसा नहीं है कि जन्म है किंतु मृत्यु नहीं है ऐसा मिडल ग्राउंड नहीं है या तो आप आत्मन जन्म और मृत्यु के परे है या तो फिर देह की तरह ही आत्मन भी जन्म मृत्यु जरा व्याधि के चक्र में वो अच्छा यह लोग चक्र को भी स्वीकार नहीं करेंगे जन्म मृत्यु बस यह दो ही स्टार्टिंग पॉइंट एंड एंड पॉइंट तो यदि आप यह स्वीकृत करेंगे कि उसका स्टार्टिंग एक जगह पर था तो यह भी स्वीकार करना पड़ेगा कि उसका अंत एक जगह पे था नाइ दर यू नोर आई नोर एनी वन प्रेजेंट हैज कम आउट ऑफ जीरो नोर विल गो बैक टू जीरो आप या मैं या और कोई भी शून्य में से प्रकट नहीं हुए और शून्य में विलीन भी नहीं होंगे हम लोगों का अस्तित्व हमेशा से था या तो कहे कि हम लोगों का अस्तित्व है यह दो जगत में है एक जगत को जो वो कि एक जगत है स्पेस टाइम मैटर एंड एनर्जी के यूनिवर्स के भीतर में आता है और हमारा आधा एजिस्ट हैंस ये बियोंड स्पेस टाइम मैटर एंड एनर्जी के है ये दो एसिस्टेंसिया तो फिर कहेंगे दो फैसेट है या तो फिर यह जो मनुष्य देह बनाता है इसके भीतर में दो एलिमेंट है एक एलिमेंट पंचमहाभूत का बना हुआ यह क्षय और व्याधि से ग्रस्त जन्म मृत्यु जरा व्याधि के इलाके में पड़ता है इस यूनिवर्स में पड़ता है और एक एलिमेंट अनंत एलिमेंट जो कि हमेशा इस पूरा जो विश्व है उसके उर्ध्व विराजमान है हां आप कहेंगे कि यह जो जीवात्मा है यह हमने जिस तरह से कहा कि अच्छा यह एक इंटरेस्टिंग टॉपिक हो जाएगा कि यह लोग कहते हैं कि आपका एक जगह पर जन्म था आपकी आत्मन का और किंतु जन्म होने के बाद में देह जाएगा आत्मन नहीं जाएगी आत्मन स्वर्ग या नर्क में जाएगी हम लोग यदि कंपेयर करेंगे तो अपने यहां प ये जीवात्मा है सूक्ष्म शरीर है जो कि आपके साथ में जन्म लेता है क्योंकि मेरी मेमोरीज है मेरे संस्कार है वह कहीं पर तो रहने वाली है यही तो जीवात्मा एक के बाद एक शरीर धारण कर गा तो यह जीवात्मा और वहां का आत्मन यह दो कंपैरेटिव कांसेप्ट है अपना जो आत्मन है या तो हम जिसको ब्राह्मण कहते हैं वह तो एकदम डिफरेंट ही है यह जो वेस्टर्न थियोलॉजी है या तो फिर यह जूडा इजम क्रिश्चियनिटी और इस्लाम जिनको कि हम सेमिटिक स्कूल ऑफ रिलीजन कहते हैं अपनी जो आत्मन है इसका पैरेलल कांसेप्ट तो नहीं ही है किंतु अपनी जो जीवात्मा है उनका यह जिनको कि यह लोग सोल कहते हैं इसके बीच में कुछ-कुछ सिमिलरिटी हमको देखने को मिलेगी वे लोग कहते हैं कि उनकी सोल जो है देह के साथ में जन्म धारण करती है हम भी कहेंगे कि हां यह स्थूल देह के साथ में सर्वप्रथम एक बार तो मेरे सूक्ष्म देह का प्रारंभ हुआ होगा अभी किंतु यह सूक्ष्म देह है यह उसका प्रारंभ भी है अंत भी है प्रारंभ कब है पता नहीं कि कौन से एक भूतकाल में इसका जन्म हुआ होगा और अंत कब है जब मुझे मुक्ति मिल जाएगी जब मुझे यह आत्मन का ज्ञान हो जाएगा तब यह सूक्ष्म देह सूक्ष्म शरीर विस्फोट होकर के मेरे जितने भी संस्कार वगैरह है वह शून्य में विलीन कर देगा और मैं सही सही मैं अपना सही नेचर है उसमें विलीन हो जाऊंगा तो यह अपना सूक्ष्म शरीर है या तो फिर यह अपनी जीवात्मा है और उनका यह सोल इन दोनों के बीच में कुछ-कुछ पैरेलल खोज सते हैं किंतु जैसे कि वे लोग पुनर्जन्म को स्वीकार नहीं करते उनकी सोल सिर्फ एक ही बार शरीर धारण करती है और बाद में हमेशा के लिए एक ही जीवन के आधार पर हमेशा के लिए स्वर्ग और नरक का भोग करते हैं अपना ऐसा है कि जीना यहां मरना यहां सब कुछ इस पृथ्वी के ऊपर में है यह बार-बार हम या यदि मान लीजिए कि बहुत अच्छे कर्म किए तो शायद कुछ समय के लिए स्वर्ग लोक में जाएंगे किंतु ये क्षीण पुण्य मृत्य लोके विषतिंदुक बहुत ज्यादा पुण्य कर लिए तो फिर वह स्वर्ग में जाकर के पुण्य काट कर के आ गए देखिए अपने यहां पर यह भी एक बड़ा ही इंटरेस्टिंग ये पुण्य और मुक्ति इन दोनों के बीच में यह बड़ा ही डिस्टिंक्शन है आप सत कार्य करेंगे आप पुण्य अर्जन करेंगे किंतु इससे मुक्ति नहीं मिलने वाली है सत कार्य करने से संस्कार की शुद्धि होगी चित्त शुद्धि होगी किंतु मुक्ति तो त्याग करके ही प्राप्त होगी त्यागे नहीं के अमृत मानसू माने त्याग के द्वारा ही मनुष्य अमृत तत्व को प्राप्त होता है उसके अलावा और कोई उपाय नहीं है नान्य पंथा विद्यते य नाय और कोई उपाय इसलिए नहीं है तो त्याग मात्र मोक्ष एकमात्र रास्ता है जो कि हमारे हिंदू धर्म में आपको अल्टीमेट मुक्ति दे सकता है बाकी आप जितने अच्छे कर्म सत्कर्म करते जाइए आपका यह जो बैंक बैलेंस बढ़ता जाएगा जद बहुत बढ़ गया तो फिर स्वर्ग में चले जाएंगे उसका थोड़ा सा भोग करके फिर से पृथ्वी पर आ जाएंगे और वरना तो फिर जैसे यह आपके नेक्स्ट बर्थ में आपको बेटर अपॉर्चुनिटी प्राप्त होगी कि आध्यात्मिक रास्ते पर जाने के लिए जितने भी संत महात्मा है मैं अवतार की बात नहीं कर रहा अवतार के नीचे की एक कैटेगरी कितने सारे ये मीराबाई है यह अपने नर्सी मेहता है यह कितने ही है मने जिनका कि जिन्होंने पृथ्वी पर जन्म लेकर के पृथ्वी को धन्य बना दिया है ऐसे कितने संत महापुरुष है जिन महापुरुष क्यों बने क्योंकि वो हजारों जन्मों की उनकी ये जो यात्रा है उसमें उनके संस्कार धीरे-धीरे शुद्ध होते होते धीरे-धीरे आज वो महापुरुष संत के लेवल पर गए हैं और जिन लोगों को हम पशुव्रूला देखते हैं मढ़ता देखते हैं तमस देखते हैं वे लोग अभी-अभी पशु योनि में से मनुष्य योनि में प्रवेश हुए हैं यानी कि ये इवोल्यूशन जद कहो तो इवोल्यूशन दो तरह से हम लोग समझ सकते हैं एक तो है कि यह सोशल इवोल्यूशन या तो फिर कहेंगे कि इवोल्यूशन ऑफ द या तो फिर यह जनरली एक जनरल इवोल्यूशन अपना साइंस जो एक्सेप्ट करता है वह क्या कहता है कि चलिए मान लीजिए हम लोग जंगल में रह रहे थे फिर बंदर के रूप में फिर या तो जंगल कट गए या तो फिर हमने खुले मैदान में रहना शुरू किया तो हमारी बंदर वाली पूंछ जो है यह बंदर वाले पैर और हाथ की ग्रिप है वह किसी काम की नहीं रही खुले मैदान में रहना है तो सीधे खड़े होकर के चलना पड़ेगा तो पूछ भी चल चली गई और यह बंदर की तरह एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जंप लगाना भी बंद कर दिया सीधे खड़े रह कर के चलने लगे ये इवोल्यूशन ऑफ द स्पीशीज है और ये इवोल्यूशन ऑफ दी ये जीवात्मा क्या है इवोल्यूशन ऑफ दी ये सूक्ष्म शरीर क्या है कि मैं अच्छे अच्छे कर्म जितना करता जाऊंगा उतना ही मेरा नेक्स्ट बर्थ है अगला शरीर है वह अच्छे से अच्छा मिलता जाएगा यदि पहला जन्म मेरा किसी पशु योनि में हुआ है तो इसके बाद में हो सकता है कि पशु योनि में भी हूं किंतु पशु भी तो सत्कर्म करते हैं यह भगवान बुद्ध की जातक कथाएं सुनेंगे तो हाथी के रूप में जन्म लिया था वहां पर कुछ अच्छे सत्कर्म किए थे यानी कि पशु में भी धीरे-धीरे करके उनका वर्तन अच्छे से अच्छा होता जाएगा फिर आखिर में मनुष्य योनि धारण करेंगे मनुष्य योनि में हो सकता है कि शुरू शुरू में थोड़ा सा पशुवैद्यकीय नया शरीर एक के बाद एक आता जाएगा आचरण भी देवत्व से भरपूर पूर्ण होने लगेगा आचरण भी अच्छे से अच्छा होता रहेगा तो यह पूरा एक जीवात्मा कहो ना कि सूक्ष्म शरीर का इवोल्यूशन है सूक्ष्म शरीर की यात्रा है और यह जो वेस्टर्न मॉडर्न साइंस है वह है स्पेसस का इवोल्यूशन है प्रजाति का इवोल्यूशन है आप पूछेंगे कि दोनों में से कौन सा सही है दोनों सही है जैसे कि स्वामी जी ने कहा कि वेदांत क्रिश्चियनिटी नाम देकर के नहीं बोलना चाहिए किसी भी धर्म को कोई कोई धर्म होते हैं जो कि कहते हैं कि ना हमारे धर्म पुस्तक में जो लिखा है वही सही और यह जो विज्ञान बोलो ना कि वैज्ञानिक बोलो ना कि मॉडर्न थिंकिंग बोलो सब गलत वेदांत उस कुल में नहीं आता वेदांत की कैटेगरी अलग है वेदांत कहता है कि आपके जितने भी रेडी मॉडर्न कांसेप्ट है सबको लीजिए एक के बाद एक और उनको इकट्ठा कीजिए वेदांत इज मोर रेडिकल देन द मोस्ट रेडिकल ऑफ योर मॉडर्न आइडियाज यदि आप यह कहते हैं कि यह मैटर और एनर्जी इसका जो आपस में यह मने क्या कहेंगे कि इंटरचेंजेबल है ऐसा जद आप कहेंगे कि हां यह पदार्थ है ये मैंने हाइड्रोजन का एटम है इसका पूर्ण दहन करेंगे तो उसमें से हाइड्रोजन बन जाएगा यदि आप यह कहते हैं तो हम उससे भी एक स्टेप आगे जाते हैं हम कहते हैं कि यह पूरा जगत जो है वही एक वाइब्रेशन का बना हुआ है आत्मन से आत्मन के ऊपर में से यह मेनिफेस्ट होता है और आत्मन के भीतर में यह समाहित हो जाएगा माने आपके जितने भी रेडिकल आइडियाज है उससे भी कहीं ज्यादा रेडिकल यह अपना वेदांत है यदि आज का मॉडर्न फिजिक्स यह कहता है कि यह अंसर सटे निटी प्रिंसिपल क्या कहता है कि यह जो एक सब एटॉमिक पार्टिकल है वो पूरे विश्व में कहीं पर भी हो सकता है जब तक आप उसको ऑब्जर्व ना करो जब तक उसका वेव फंक्शन कोलप्पलुर में पड़ी हुई है जब मैं चला जाऊंगा यहां से कहीं बाहर में तो यह किताब हो सकता है यहां से चांद पर चली जाए हो सकता है मैं वापस आऊंगा जब किताब को ऑब्जर्व करूंगा तब इसका यह जो प्रोबेबिलिटी जो क्लाउड है वह कोलप्पन कलाइज हो जाएगी यदि आप यसा कहते हैं तो वेदांत उससे भी एक स्टेप आगे जाता है वेदांत क्या कहता है शब्द में से ही जगत की सृष्टि हुई है एक गाय शब्द था स्वामी जी के ही मैंने शब्दों में कहे कि वेद में गाय शब्द है तो बोलकर के गाय पृथ्वी पर दिख रही है यदि वेद में यह शब्द नहीं रहता तो वो गाय बोलकर के कोई चीज भी नहीं रहती यह वेद के भीतर में यह किताब बोलकर के किताब बोलकर के तो नहीं किंतु यह मान लीजिए पेड़ पौधे बोलकर के जो शब्द है उसी में से तो ये पेड़ बने और इसी को पेड़ को काट करके प्रोसेस करके आपने ये किताब लिखी है एक केमिकल है इंक रूपी केमिकल वो जो भी केमिकल होंगे आयन झिंक निकल जो भी है ये जो मिनरल्स जो कि पृथ्वी में से जो उसको माइनिंग करके आप निकालते हैं इन सबका शब्द वेद में है बोलकर के इसका पार इस पदार्थ के रूप में अस्तित्व है मैटर के रूप में अस्तित्व है हम लोग और भी ज्यादा रेडिकल होते हैं ऑफकोर्स विज्ञान जो कहता है उसको प्रूव करना उन लोगों के हाथ में है मैथमेटिक्स और प्रैक्टिकल ऑब्जर्वेशन दोनों की मदद से वो लोग जो कहते हैं सब प्रूव हो चुका है आप बोलेंगे कि वेदांत तो सिर्फ योग कहते हैं योग को स्टेप बाय स्टेप आप प्रैक्टिस कीजिए देखिए कि वेदांत में जितने भी स्पेक्युलेटिंग दोनों प्रैक्टिलिटी के ऊपर में बने हुए हैं दोनों यह कहते हैं कि विश्वास के ऊपर में कुछ भी स्वीकार मत करो नथिंग इज बेस्ड अपॉन द फेथ जो कुछ भी है सब प्रैक्टिकल कर सकते हो यदि आपके पास में इतनी क्षमता है इतना नॉलेज है इतना रुपया है पैसा है तो आप यह बड़ा सा ड्रोन ये जो लार्ज हैड्रन कोलाइडर यह जो यूरोप में बना हुआ है तो इस तरह से आप भी एक बहुत बड़ा कोलाइडर बना दीजिए उसमें यह एटम्स को मैंने जिस तरह से स्मैश करते हैं स्मैश करके देख लीजिए कि क्वांटम डायनेमिक्स का क्या यह जो स्टैंडर्ड म मॉडल बोलते हैं जो कि जो भी थिरी है वो किस तरह से प्रूव हो जाती है तो जिस तरह से उनकी मेथड है प्रूव करने की हम भी कहते हैं कि त्याग का रास्ता अपनाए त्याग के रास्ते पे मोक्ष मार्ग पर चलिए तपस्या कीजिए सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह का अवलंबन कीजिए और देखिए कि धीरे-धीरे वेद और वेदांत में बताए गए जितने भी सत्य है सब कोई स्वयंभू स्वयं प्रकाशित होकर के आपकी नजरों के सामने आ जाएंगे तो इस सेंस में वेदांत उतना ही विज्ञान के साथ में चलता है तो स्वामी जी क्या कहते हैं वी हैव बीन एसिस्टिंग इटरनल एंड विल एक्सिस्ट एंड देयर इज नो पावर अंडर द सन और अबाउ द सन च कैन अनडू योर और माय एक्जिस्टेंस और सेंड अस बैक टू जीरो हम लोग हमेशा से अस्तित्व में थे हमारा जीवन हमेशा से था हमेशा से रहेगा और इस जगत में ऐसी कोई शक्ति नहीं कि जो कि हमको फिर से शून्य में विलीन कर दे नाउ सस आइडिया ऑफ रीन कारनेशन इज नॉट ओनली नॉट ए फ्राइटनिंग आइडिया अभी यह पुनर्जन्म का विचार वो सिर्फ डरावना ही नहीं है माने यह डबल ने नेगेटिव सेंटल स्ट्रक्चर देखिए स्वामी जी का बट इज मोस्ट एसेंशियल फॉर द मोरल वेल बीइंग ऑफ द ह्यूमन रेस मनुष्य सभ्यता की यह जो मोरल वेल बीइंग है अर्थात कि नैतिक अपनी सेहत है उस के लिए बड़ा ही आवश्यक है देखिए यहां पर स्वामी जी नैतिकता के बारे में क्यों बात करते हैं जनरली यह स्वर्ग और नर्क का कांसेप्ट ही इसीलिए अ उसका जो कांसेप्ट खैर जो भी कारण से आया हो इसका एक बहुत बड़ा एक नैतिक उसका प्रैक्टिकल एक एप्लीकेशन है आप इस इस समाज में इतने सारे पुलिस आप खड़ा नहीं कर देने वाले हैं कि जो कि इतने सारे पुलिस मिलकर के सबकी जितने भी चोर हैं सबको पकड़ ले यदि मेरे मन में किसी भी तरह का डर नहीं है मैं चोरी करना शुरू करूंगा और जितने भी कायदे कानून है सब मिलकर के मुझे नहीं रोक पाएंगे एक दिव्य कानून चाहिए डिवाइन लॉ चाहिए जो कि हमको कहते हैं कि यदि आप बुरा काम करेंगे तो नर्क में जाएंगे अच्छा काम करेंगे तो स्वर्ग में जाएंगे यह पनिशमेंट एंड रिवर्ड यह जो एक मेथोडोलोग्य जिसको कहता है कि एक मॉडर्न मेथड के अनुसार जो कि अच्छा काम करता है उसको उस को रिवर्ड दो और बुरा काम करता है उसको पनिशमेंट दो जैसे कि कोई भी ऑर्गेनाइजेशन है यह प्रमोशन की मेथड क्यों यह लोग रखते हैं यह जो बड़े-बड़े यह जो सिलिकॉन वैली के यह जो मने आईटी कंपनीज है वहां पे यदि आप अच्छे इंजीनियर है तो आपको कितना बड़ा सैलरी देकर के यह लोग ले जाएंगे आज भारत में यह आईआईटी है मैंने जितनी भी दुनिया की टॉप क्लास यूनिवर्सिटीज है बहुत सारे स्टूडेंट यही सोचेंगे कि चलो सिलिकॉन वैली में जाते हैं वहां पर हमको जो पैकेज मिलेगा ऐसा हमको दुनिया में और कहीं नहीं मिलने वाला है हां फिर कुछ-कुछ लोग है जो कि पैट्रियोटिज्म से अनुप्राणित होकर के अपने अपने देश में रह जाते हैं चाइना में यह सबसे ज्यादा होता है चाइनीज इंजीनियर अपने देश में ही काम करना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं और अपने इंडिया में है कि आधा एआईटी के जितने भी स्टूडेंट होंगे आधे सिलिकॉन वैली में बैठे है तो जो भी है अभी वहां पर रिवर्ड बड़ा है तो मने अभी ये अपना रिवर्ड पैट्रियोटिज्म हो ना कि ये बड़ा सैलरी पैकेज हो जो भी हो मैं जिसको रि ड के रूप में ट्रीट करता हूं मैं जिसको रिवर्ड के रूप में एक्सेप्ट करता हूं वह करने के लिए मैं उस तरह का बिहेव करने को अपने को मैं कोशिश करूंगा मैं उस तरह का बिहेव करने की का मुझे यह रिवर्ड मिले और मैं इस तरह का बिहेव नहीं करूंगा कि जिससे कि मुझे पनिशमेंट मिले तो यह जो विश्व में नैतिकता बनाए रखनी है तो हमको लोगों को कहना होगा कि स्वर्ग है और नर्क है अच्छा कर्म का परिणाम स्वर्ग है और बुरे कर्म का परिणाम है नर्क वरना यदि इस तरह का का कोई एक मने डर नहीं रहेगा ना माने भया एक है वो भया धावत सूर्य माने भय से यह चंद्र और सूर्य भी भय से ही गति करते हैं भय से ही चलते हैं तो माने यह भय जो है यह भय या तो डर एक होना चाहिए जिसकी मदद से लोग यह बुरा काम ना करें तो यह स्वर्ग और नर्क का ये एक प्रैक्टिकल एस्पेक्ट है तो स्वामी जी क्योंकि यदि आप मान लीजिए कि आप हजारों नियम बना नियम कानून बना ले आप हजारों पुलिस वालों को बिठा ले किंतु इससे तो काम नहीं बनेगा पुलिस वाले ही हो सकता है करप्शन करना स्टार्ट कर दे जो कि नियम कानून बनाते हैं वही लोग हो सकता है करप्ट हो जाए राइट तो मैंने सिर्फ नियम कानून और ये जो पुलिस वालों को बिठा कर के समाज ठीक नहीं होगा समाज में नैतिकता नहीं फैले गी एक हायर एक भय या तो एक डिवाइन लॉ होना चाहिए जिससे कि लोग डरे और अपने एक नैतिकता में रहे तो स्वामी जी कहते हैं कि अच्छा उनका यह स्वर्ग और नर्क है अपना यह पुनर्जन्म वाद है पुनर्जन्म वाद एक तरह से देखें तो समाज में नैतिकता स्थापित करने के लिए बड़ा ही आवश्यक है अभी आप कहेंगे कि पुनर्जन्म वाद की नैतिकता स्थापित करने में क्या आवश्यकता है यदि आप सिर्फ एक प्रैक्टिकल दृष्टि से देखें तो स्वर्ग और नरक एक बेटर उदाहरण नहीं है कि आपने बुरा काम किया तो आपको जेल में जाना पड़ेगा अच्छा काम किया तो आपको बहुत ही बड़ा एक पैकेज मिलेगा सिलिकॉन वैली में कहीं पे और फिर आप एवरी ईयर एक बड़ा-बड़ा वेकेशन लेकर के बहुत अच्छी जगह पर जा सकते हैं तो यह स्वर्ग और नरक भी इस तरह से काम नहीं करते क्या आपको यह पुनर्जन्म की क्या जरूरत है तो यहां पे अभी स्वामी जी तो अपना जो आर्गुमेंट देंगे मैं मेरा जो एक आर्गुमेंट है कि देखिए कि मॉडर्न जो आइडियाज है ना वो रिफॉर्मेशन के आइडियाज है स्वामी जी जब अमेरिका गए थे तो एक वीमेंस रिफॉर्मेटरी अर्थात कि स्त्रियों के लिए एक रिफॉर्मेटरी का अर्थ क्या है कि वह सिर्फ जेल नहीं है वहां पर कैदियों के शिक्षण और सुधार की आवश्यकता की जाती वहां पर व्यवस्था की जाती है इस थिरी को ध्यान में रख के कि कोई भी व्यक्ति बुरा काम इसलिए करता है या तो फिर बचपन में उसके साथ में कोई गलत हुआ होगा बचपन से ही उसने गरीबी देखी है वह कोई मजबूरी में आकर के वह बुरा काम कर रहा है तो उसको नैतिक शिक्षण दे तो वह धीरे से वह जब जेल में से निकलेगा तो अच्छा सिटीजन बन कर के निकलेगा तो यह रिफॉर्मेशन की यह सब जगह पर चर्चा स्वामी जी ने खुद ने की थी तो अभी आज के आज की सोसाइटी में यह रिफॉर्मेटरी और जेल के कैदियों को रिफॉर्म करना कहां तक है मुझे पता नहीं य अपने दिव्यानंद जी महाराज थे जो कि जेल में जाकर के कैदियों के सामने प्रवचन करके कैदियों को ठाकुर मा स्वामी जी की शिक्षा देकर के बड़े फेमस हो गए थे तो ये एक प्रयास होता है कि उसको मैंने कंडेम करके कि भाई भाई तुम बुरे हो बोलक के जेल में डाल देना उसकी बजाय इस तरह से देखो कि जेल में से तो उसको कभी ना कभी निकलना ही है वो हमेशा तो उमर के तो सबको फांसी और उम्र के तो सबको होती नहीं है तो उसको सुधारने का प्रयास करें तो जब फिर से बाहर जाएगा तो वो फिर से बुरा काम नहीं करेगा तो देखिए कि रिफॉर्मेशन करने से वो ज्यादा बेटर है या सिर्फ एक जेल खाना बना देने से तो ये अपना पुनर्जन्म वाद भी है ना प्रैक्टिकली देखें तो इस तरह के रिफॉर्मेशन के आइडियाज के ऊपर में है आज यदि मेरे साथ में कुछ बुरा हो रहा है तो इस तरह से यह अर्थ नहीं है कि मैं पूरा बुरा ही करता चलूं मेरे पास में य एक स्कोप है कि मैं अपने को सुधारने का रिफॉर्म करने का प्रयास करूंगा तो मेरा नेक्स्ट बर्थ जो होगा अगला जन्म जो होगा वह बेटर पोजीशन में मैं होऊंगा अपने को एक नैतिक जीवन जीने में ये एक है दूसरा एक प्रैक्टिकल एस्पेक्ट है कि मान लीजिए मैं गरीब परिवार में जन्म लिया है मेरी अवस्था पहले से ही खराब थी तो इसका अर्थ यह नहीं कि मैं मेरे सब कुछ होपलेस है यदि पिछले जन्म में मैंने ऐसे कोई कर्म किए होंगे जिसका फल मुझे इस जन्म में भुगतना पड़ रहा है तो इस जन्म में अच्छे कर्म करूं तो अगले जन्म में मुझे अच्छा एक परिवार एक अच्छा फैमिली एक अच्छी आर्थिक अवस्था मेरी हो अर्थात कि मेरी जो डेस्टिनी है वो मेरे हाथ में है अभी मैंने एक बार बुरा काम किया और हमेशा के लिए टर्निग या मैं नर्क में चला गया तो मैं तो डिस एंपावर हो जाऊंगा कि एक गलती की सजा मुझे हमेशा के लिए भुगतनी पड़ती है यह तो बड़ा ही डेंजरस आईडिया है जबकि अपने हिंदू धर्म में एक गलती कर दी उसकी सजा आपने भुगत ली तो आपके पास में फिर से एक मने एक ब्लैंक स्लेट मिलती है टेबुला राजा एक ब्लैंक स्लेट जिसके ऊपर में आप अपने संस्कारों को फिर से अंकित कर सकते हैं यानी कि यह अपना हिंदू धर्म अपने को यह भरोसा दिलवा है कि गलती कर दी तो कर दी चलो आप टुमारो इज अनदर डे जैसे कि इंग्लिश में कहते हैं कि कल और एक नई सुबह होगी कल हम फिर से एक नया जीवन जीने की अपना एक नया जीवन शुरुआत करने की प्रयास करेंगे तो यह होप है वह हमेशा हिंदू धर्म के भीतर में है या तो फिर यह इटरनल साल्वेशन या तो यह इटरनल डेमन जो कि वहां पे है एक गलती कर दी तो आप हमेशा के लिए डूब गए यह एक बड़ा ही डेंजरस डिफरेंस उनके भीतर में और हमारे भीतर में है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि एक मोरल एक प्रैक्टिकल एस्पेक्ट है यह अपने वेदांत के पुनर्जन्म वाद का तो अभी तो मैंने अपने दृष्टि से बताया कि क्या प्रैक्टिकल है अभी देखते हैं कि स्वामी जी क्या कहते हैं स्वामी जी कहते हैं इट इज द ओनली लॉजिकल कंक्लूजन दैट थॉटफुल मैन कैन अराइव एट माने कोई भी एक विचार वान पुरुष है जो कि एक फिलोसोफर है उसको यदि कोई एक लॉजिकल कंक्लूजन तक पहुंचना होगा यदि किसी एक समाधान तक पहुंचना होगा तो यही एकमात्र समाधान है इफ यू आर गोइंग टू एजिस्ट इन मस्ट बी ट यू हैव एसिस्टेड थ्रू टर्निन द पास्ट इट कैन नॉट बी अदर वाइज यदि आप हमेशा के लिए जीवित रहने वाले हैं तो आपको भूतकाल में हमेशा से अस्तित्व में रहना होगा इटरनल लाइफ जद चाहिए तो इटरनल बिगिनिंग भी चाहिए या तो बिगिनिंग लेस एक्जिस्टेंस भी चाहिए आई विल ट्राई टू आंसर अ फ्यू ऑब्जेक्शन ट आर जनरली ब्रोट अगेंस्ट द थिरी अभी इस पुनर्जन्म वाद के विरोध में जो कोई माने कुछ ऑब्जेक्शंस खड़े किए जा रहे हैं मैं उसका उत्तर देने का प्रयास करूंगा अच्छा तो अभी यह ऑब्जेक्शन क्या है और उसके उत्तर क्या है वह हम कल देखेंगे हि ओम शांति शांति शांति हरि ओम दसत श्री राम कृष्णा
Questions & Answers
अर्पण स्वामी जी जो कुछ भी बोलते हैं वह सब कुछ इंटरेस्टिंग है है ना क्योंकि क्योंकि हम लोग स्वामी जी के डिवटी है इसलिए व गिरीश घोष एक बार बोलता है एर गु की गु बोध होयने गिरीश कोष कहते हैं एक बार कि जिनको कि हमने भवसागर के अपने कांडी के रूप में स्वीकृत कर लिया है उनकी विष्ठा जो है क्या विष्ठा के रूप में वो बोध होगी क्या वो भी हमारे लिए अमृत जैसा और इसका मान लीजिए कि हम लोगों का से मने ऐसा कोई प्रैक्टिस ना भी हो तो सुनक के भी अपने मन के ऊपर में इस तरह के सूक्ष्म संस्कार पड़ जाते हैं कि वह आज नहीं ना कल कल नहीं ना परसों वह जो स्वामी जी कहते हैं ना एक बीज खिड़की के ऊपर में रखा हुआ है बहुत सालों के बाद में खिड़की के ऊपर में से जमीन में गिरा और वो थोड़ा हवा पानी वगैरह मिला तो फिर से वो वृक्ष हो गया तो वैसे ही ये बीच के रूप में अके संस्कार भितर में रहेंगे एक समय आएगा जबक एक मौका उसको मिलेगा वो वृक्ष के रूप में परिणत होगा ना ना तो मने देखो परफेक्ट तो म सब कुछ तो कोई याद नहीं रख सकता है सबका मेमोरी लिमिटेड ही है मेरा ठाकुर की कृपा से पब्लिकेशन में काम है तो मुझे किताबों के साथ में काम करने से मैं थोड़ा ज्यादा फैमिलियर किंतु इतना ही मने सब कुछ तो कौन याद रख पाएगा कंटिन्यू टू एक्सरसाइज योर वल एंड इट विल टेक यू हायर स्टिल द विल इज ऑलमाइटी द विल इज ऑलमाइटी इफ इट इज ऑलमाइटी यू मे से व्हाई कैन नॉट आई डू एवरीथिंग बट यू आर थिंकिंग ओनली ऑफ योर लिटिल सेल्फ लुक बैक ऑन योरसेल्फ फ्रॉम द स्टेट ऑफ द अमीबा टू द ह्यूमन बीइंग अरे वाह ू मेड ऑल दैट योर ओन विल कैन यू डिनाइड देन इट इज ऑलमाइटी दैट व्हिच हैज मेड यू कम अप सो हाई कैन मेक यू गो हायर स्टिल व्हाट यू वांट इज कैरेक्टर स्ट्रेंथ निंग ऑफ द विल वाह कितना सुंदर कोटेशन है कि अपने विल पावर से मैं सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म अमीबा से मनुष्य तक आ गया हूं तो यही विल पावर मुझे देवता क्यों नहीं बना देगा वाह वेरी गुड ये जो कार चलती है ना तो जब ड्राइवर होता है या तो हम जब कार परचेस करते हैं तो हमको तो इतना ही देखना है कि ये स्टीयरिंग है यह गियर है यह क्लच है और यह ब्रेक है इतना समझने से हम कार चला देंगे तो कार में जब गड़बड़ होती है या तो फिर यह लोग जिनका इस तरह का दिमाग होता है फिर वे लोग यह जो बोनेट है वह खोल कर के इसके भीतर का इंजन वगैरह देखते हैं तो यह जो पाप और पुण्य उसके ऊपर से नया जन्म हमको मिलता है यह तो एक सिंपल थिरी सबको पता है हिंदू धर्म की किंतु मनुष्य पाप और पुण्य जो करता है उसके पीछे ये जो मैंने आप उसको ओपन करके इसके भीतर का मैकेनिज्म देखेंगे मैकेनिज्म है विल पावर मेरे सामने यह यह जो प्रेयस श्रेयस मनुष्य तम यह जो प्रे और श्रेय मनुष्य के सामने सब समय आता रहता है आज सुबह को उठकर के मैं अपनी पढ़ाई करूं ना कि मित्रों के साथ में बैठ के गप लगाऊं यह दोनों ऑप्शन मेरे पास में है मेरा विल पावर यदि स्ट्रांग है तो मैं स्टडी करूंगा विल पावर वीक है तो मैं भोग के विषयों में डूब जाऊंगा तो जितना स्ट्रांग विल पावर है उतना ही मैं अपनी लाइफ को डिसिप्लिन ज्यादा से ज्यादा करता जाऊंगा इतना ही मैं पुण्य ज्यादा अर्जन कर सकता हूं क्योंकि मेरे पास में विवेक भी आ जाता है विल पावर की मदद से मैं विवेक को डेवलप कर सकता हूं विवेक की मदद से मैं समझ सकता हूं कि यह सही क्या है गलत क्या है तो विल पावर ही है जो कि पाप और पुण्य के पीछे का रियल इंजन जो कि दिखता नहीं है किंतु वह मैंने उसको खोल करके डिसेक्ट करने का एनालाइज करने का देखेंगे तो वही इंजन है जो कि हमको पाप और पुण्य के रास्ते पर अल्टीमेटली ले जाते हैं तो वो तो एक हुआ दूसरा है कि हमने विल पावर को लिवरेज कैसे करें तो वैसे तो हमने ठाकुर के जीवन में देखा ही है स्वामी जी ने कहा कि 10000 साल की हिंदू धर्म की सभ्यता है 10000 साल की अपनी तपस्या है श्री राम कृष्ण देव ने एक ही जीवन में उसको पार कर दिया अर्थात कि ने जितने भी साधन पद्धति साधना के रास्ते हैं ठाकुर को देखिए कि उन्हो का विल पावर इतना स्ट्रांग था माने कि एक के बाद एक जब ये टेंप्टेशन आ जाता है वो गोरा ये जो खलासी और फि वो अपने हाथ में थाला लेकर के जिसके भीतर में संदेश है पैसा है दो स्त्रियां है उसको लेकर के ठाकुर के सामने आकर के प्रलोभन दिखाता है ठाकुर ने चिल्लाना शुरू कर दिया मां मां करके तब कहीं मां ने आकर के उसको भगा दिया फिर एक बार ऐसा हुआ कि वहां पंचवटी के नीचे खड़े थे एकाएक मन में काम वासना का उद्भव हुआ ठाकुर ने कहा मां यदि मेरे मन में यह विचार आता है तो ये छरी में अपने मन गले में मार दूंगा मैं सुसाइड कर लूंगा किंतु इस तरह का विचार अपने मन में नहीं आने दूंगा सो दैट इज हाउ वी लिवरेज विल पावर कि जितने भी बैड थॉट्स आते हैं उसको वहीं पर अटका दो और गुड थॉट्स को नर्चर करो किंतु यहां पे और एक है माने ये जो अपना है ना कि ये मने सूक्ष्म शरीर का इवोल्यूशन और स्पेसस का इवोल्यूशन तो आप कहेंगे कि अरे जब तक स्पेसस का इवोल्यूशन नहीं होगा तब तक तो सूक्ष्म शरीर भी नहीं हो पाएगा जब तक बंदर में से मनुष्य नहीं बनता तब तक वो बंदर कितना ही अच्छा कर्म कर दे वो उसको तो मनुष्य शरीर प्राप्त नहीं होने वाला है तो यहां पे क्या मिसमैच नहीं है तो देखिए आज का जो मॉडर्न क्वांटम डायनेमिक्स है ये जो प्रोबेबिलिटी थिरी जो हमको देता है यह जो मल्टीवर्स वगैरह जो उनका है तो मैं भी अपना यह जो स्पेक्युलेटिव इजेशन है वगैरह जो है ना इट हमने ये पैरेलल यूनिवर्स कहो ना किय प्रोबेबिलिटी एक पूरा एक ये एक प्रोबेबिलिस्टिक एक यूनिवर्स है मैं आज मान लीजिए अच्छे कर्म कर दिए मैंने बंदर में से मनुष्य होने की बारी आ गई तो मैं प्रोबेबिलिटी में उस यूनिवर्स में चला जाऊंगा मल्टीवर्स में कि जहां पर ऑलरेडी बंदर में से मनुष्य हो चुके हैं और मैं यदि बुरे से बुरा कर्म करता रहूंगा बंदर में से यदि डिवोशन होने की बात आई मैं उस यूनिवर्स में चला जाऊंगा जहां पे अभी बंदर में से मनुष्य हुए ही नहीं है माने ये इवन ये जो इवोल्यूशन है नाना ये जो टाइम है ना ये टाइम कोई फिक्स चीज नहीं है टाइम इट सेल्फ इज अ प्रोबेबिलिस्टिक टाइम इट सेल्फ इज मने मने देर आर मेनी टाइमलाइंस उसमें से कौन सी टाइमलाइन हम है वो एक माने यह जो पूरा वेस्टर्न कांसेप्ट है ना टाइम ट्रेवल वगैरह क्या फ्यूचर में भी जा सकते हैं आप पास्ट में भी जा सकते हैं क्यों क्योंकि जितने भी टाइमलाइन है दे ऑल लीव साइड बाय साइड एक टाइमलाइन में यह बंदर में से मनुष्य हो गया है एक टाइमलाइन में अभी मनुष्य में से देवता हो चुके हैं माने यह जो ठाकुर ने तपस्या करके देवत्व धारण कर लिया तो हमको लगता है कहां इस पृथ्वी पर तो देवता नहीं है हो सकता है कि पैरेलल टाइमलाइन प हो जहां पर उन्होंने देवता का शरीर ध कर लिया हो माने मॉडर्न साइंस इट सेल्फ आज हमारे सामने इतनी सारी प्रोबेबिलिटीज देता है सही गलत क्या है जो तो जब दर्शन होगा तब पता चलेगा किंतु स्पेक्युलेटिंग तो इतनी मने इंटरेस्टिंग प्रोबेबिलिटीज खड़ी होगी मने हमको यह सब सोचना चाहिए इसके बारे में मने हम लोग इतने डरे डरे सहमे समय से रहते हैं कि नहीं भाई इसमें क्या लिखा है उसमें क्या लिखा है स्पेक्युलेटिव यू एन आईडिया कि यह अपना कॉन्शसनेस का जो नेचर है वो किस तरह का है माने ये पैरेलल एसिस्टेंसिया हो ही सकती है ठाकुर ने जैसे कि मास्टर महाशय ने देखिए पैरेलल यूनिवर्स की बात और प्रोबेबिलिटी की करते हैं तो पहले ही चैप्टर में है कथामृत के कि जो अपने मास्टर महाशय आकर के ठाकुर को कहते हैं कि य साकार ना कि निराकार यह कैसे हो सकता है जो साकार हो सकते हैं निराकार कैसे हो सकते हैं निराकार हो सकते हैं वो साकार कैसे हो सकते हैं सफेद दूध वो क्या काला हो सकता है काला दूध क्या सफेद हो सकता है ठाकुर ने कहा कि अरे भाई ईश्वर जो है उसकी जो सत्ता है तुम्हारी बुद्धि से परे है वो साकार भी हो सकते हैं निराकार भी हो सकते हैं काले भी हो सकते हैं सफेद भी हो और भी क्या-क्या कुछ हो सकते हैं तुमको तुम्हा काम है साधना करके इसका अनुभव स्वयं करना नहीं कि उसके ऊपर में स्पेक्युलेटिव के पहले ही चैप्टर में आप देखिए कि ये पैरेलल यूनिवर्स ना कि मल्टीवर्स ना कि इस तरह के आइडियाज आते हैं तो मैंने पैरेलल रियलिटीज हो सकती है अपना कॉन्शसनेस इज सच ए फस्ट एंड डीप ओशन ऑफ प्रोबेबिलिटीज कि इसको हम जितना ही एक्सप्लोर करें उतना ही कम है एक जो गुड लाइफ है ना गुड लाइफ और एक बैड लाइफ इन दोनों के बीच में एक डिफरेंस क्या है पता है होप मने कल एक नई सुबह होने वाली है यह होप जब तक अपने सामने है ना टुमारो का मने होप फॉर टुमारो आज जितना ही हमारा स्ट्रगल वाला हो हम उसको सह लेंगे और आज हमारा जितना ही मान लीजिए कि कल की होप नहीं है और आज कितना ही अच्छा है तो हम लोग डिप्रेशन में चले जाएंगे देखिए कल ही मैं एक बड़ा ही इंटरेस्टिंग सर्वे के बारे में पढ़ रहा था हैप्पीनेस सर्वे अभी पृथ्वी के बहुत सारे देश में हैप्पीनेस सर्वे हुआ अभी आप मानेंगे कि जो कि गरीब देश है वहां पर लोग ज्यादा मने अनहैप्पी होंगे और अमीर देश है जैसे कि अमेरिका अमेरिका का पर कैपिटा इनकम 700 है तो वहां पर लोग ज्यादा हैप्पी होंगे ऐसा आप मने इस जनरल कॉमन सेंस कंक्लूजन किंतु नहीं देखिए इसका कंक्लूजन क्या है कंपेरटिवली जो कि पुअर कंट्रीज है कंपेयर टू अमेरिका वहां पर हैप्पीनेस का लेवल खास करके यंग लोगों में ज्यादा है और अमेरिका में इन स्पाइट ऑफ बीइंग सच अ पावरफुल सुपर पावर मने यंग लोगों में डिप्रेशन और यह हताशा का प्रमाण बहुत ज्यादा है तो यह लोग बड़ा आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैसे हो सकता है अमेरिका तो सुपर पावर है एआई रेवोल्यूशन आईटी रेवोल्यूशन यह वो सब वहां पे चलता है तो वहां पे इतना डिप्रेशन यंग लोगों में क्यों तो मैंने जब क्वेश्चन किए तो उनको क्या पता चला कि आज तो उनका अच्छा है किंतु कल के लिए आशा नहीं है तो यह कल की आशा नहीं है बोलकर के व लोग आज जितना भी प्रोस्पेरिटी है सब बोलकर डिप्रेशन में चले गए और यह जो कंपेरटिवली गरीब कंट्रीज है अभी मैं नाम भूल गया मैं थोड़ा इसका ज्यादा डिटेल मैंने पढ़ कर के मैं अपने क्लास में बताऊंगा इसका ज्यादा डिस्कशन करेंगे किंतु मने ये है मैंने आज इनका इतना अच्छा नहीं है आज स्ट्रगल में है किंतु कल की आशा है तो कल की आशा की मदद से आज का स्ट्रगल उनको स्ट्रगल नहीं दिखता सो यह मनुष्य जीवन का बेसिक साइकोलॉजी है कल के बारे में हम लोग हमेशा सोचते हैं आज के बारे में नहीं आज कैसा भी हो कल कैसा है वह बताइए कल अच्छा है तो आज भी अच्छा हो जाएगा कल अच्छा नहीं है तो आज चाहे जितना भी अच्छा हो हम डिप्रेशन में चले जाएंगे सो दैट इज अ ह्यूमन साइकोलॉजी ये मैं पढ़ रहा हूं अभी भी थोड़ा और एक्सप्लोर करना बाकी है जितना पढ़ता हूं उसका मैंने एक इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग कंक्लूजन आता जाता है हम डिस्कस करेंगे इसको थोड़ा डिटेल में ये एक चीज है और दूसरा कि आपने जैसे कहा ना कि ये मैंने ये सब एक्सप्लोरेशन होना चाहिए देखिए मैं ये जो एक स्टोरी लिख रहा हूं मैंने बीच में भी कहा था ये इस तरह का एक स्पेक्युलेटिव के रूप में नहीं उसको डेवलप कर सकते ये तो सब स्पेक्युलेटिव कर रहा हूं काफी दिनों से कर रहा हूं मैं बेलून मठ में था 2015 तभी इसे कर रहा हूं अभी इसका अंत धीरे-धीरे आ रहा है किताब के रूप में यह रेडी हो रहा है तो इसमें ऐसा ही है कि व्हाट हैपेंस व्हेन यू अप्लाई दिस अंडरस्टैंडिंग ऑफ एग्जैक्ट कटिंग एज साइंस कटिंग एज अंडरस्टैंडिंग ऑफ अवर नेचर एंड कटिंग एज अंडरस्टैंडिंग ऑफ कॉन्शसनेस दोनों को मिलाते हैं तो किस तरह का एक बनता है एक आईडिया खड़ा होता है इसके बारे में जो स्पेक्युलेटिव माय पेट प्रोजेक्ट