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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद वॉल्यूम ट पेज नंबर 209 ज्ञान योग सीरीज का कॉस्मस द मैक्रो कजम लेक्चर स्वामी जी ने जो एक स्वामी जी जो वेरी इंपोर्टेंट कंक्लूजन तक पहुंचे हैं अभी हमारे सामने में वह है कि जैसे मैं पढ़ता हूं ट द परफेक्ट मैन द फ्री मैन द गॉड मैन हु हैज गन बियोंड द लज ऑफ नेचर एंड लशन थ्रू बर्थ एंड डेथ दैट मैन कॉल्ड क्राइस्ट मैन बाय द क्रिश्चियंस द बुद्धा मैन बाय द बुद्धिस्ट एंड द फ्री बाय द योगी दैट परफेक्ट मैन हु इज एट वन एंड ऑफ द चेन ऑफ इवोल्यूशन वाज इवॉल्वड इन द सेल ऑफ द प्रोटोप्लास्मिक भगवान राम कृष्ण जो हमको आज दिखते हैं इवोल्यूशन के इस छोर पर वही भगवान राम कृष्ण इवोल्यूशन के प्रारंभ में भी वो उपस्थित हो रहने र रहे थे तो व उन्हीं में से इस ब्रह्मांड का प्रारंभ हुआ और वही ब्रह्मांड आज इवोल्व होकर के भगवान रामकृष्ण में परिणत हुआ है तो बिगिनिंग एंड एंड बोथ आर सेम बीच में पूरा वटवृक्ष है तो यह स्वामी जी ने पूरा हमारे सामने रखा इसको हमने आई थिंक दो सप्ताह से बड़ा ही डिटेल में डिस्कस किया है आगे स्वामी जी क्या कहते हैं अप्लाइज टू द होल ऑफ द यूनिवर्स यही रीजन यदि हम पूरे विश्व ब्रह्मांड को अप्लाई करें वी सी ट इंटेलिजेंस मस्ट बी द लॉर्ड ऑफ क्रिएशन वेरी इंपोर्टेंट स्टेटमेंट द कॉज यदि हम यही चीज पूरे विश्व ब्रह्मांड को अप्लाई करते हैं तो भगवान ईश्वर जो है वही इस विश्व ब्रह्मांड के बिगिनिंग पॉइंट है कोज सर्वप्रथम रीजन है जिसमें से यह विश्व ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है और इसको लेकर के यहां पर हमारे मन में एक प्रश्न जो हमने कल डिस्कस किया था कि ऑन वन हैंड स्वामी जी जब कह रहे हैं कि यह पूरा जो इवोल्यूशन का चेन है उसको टेक इट एज वन वन कॉन्शसनेस टेक इट एज वन लाइफ और यहां वो एक अद्वैद कांसेप्ट हो गया और यहां पर स्वामी जी कह रहे हैं कि लॉर्ड ऑफ द क्रिएशन इज द बिगिनिंग पॉइंट ऑफ दिस इवोल्यूशन यानी कि यह विश्व ब्रह्मांड के नियंत्र है विश्व ब्रह्मांड के जो श्री जक है वह है ईश्वर या तो ब्रह भगवान अभी यह हो गया धवक कांसेप्ट और यह हमारे मन में प्रश्न होगा जनरली डिवोटा हों को या तो इवन जो लोग साधक है वे लोग इतना यह सब चीजों में नहीं जाते वे लोग सोचेंगे कि अरे व्हाट डज इट मैटर कि हम लोग स्वामी जी आधे प कुछ समय पहले अद्वैत के बारे में बोल रहे हैं और अभी द्वेत के बारे में व्हाट डज इट मैटर क्या कोई फर्क थोड़ी ना पड़ने वाला है हमारी जो साधना है हमारी ईश्वर निष्ठा है हमारी सत्य अहिंसा वगैरे जो सदगुण है वह अपने जीवन में प्रैक्टिकल करने की अपनी जो निष्ठा है दूसरों के प्रति सहानुभूति से वर्तन करने की सुबह को जल्दी से उठ कर के जदी संभव है थोड़ा सा जब ध्यान करने की थोड़ा सा धार्मिक शास्त्रों का पाठ करने की यह जो हमारी साधना जो चल रही है उसमें इस तरह के फिलोसॉफिकल डिस्कशन से क्या आता जाता है कि स्वामी जी ने अभी अद्वैत के बारे में बोला तो अभी द्वैत के बारे में बोला तो वैसे ज्यादा कोई डिफरेंस सही में नहीं पड़ता मैं खुद य सब फिलोसॉफिकल जिम्नास्टिक में बहुत ज्यादा डिटेल में नहीं जाता किंतु बिकॉज कि हम लोग ज्ञान योग के बारे में पढ़ रहे हैं हमको यह एक क्लियर करने की जरूरत है कि अल्टीमेटली अद्वैत और ध्व में डिफरेंस क्या है अद्वैत और ध्व में जद बहुत ही क्रूड लेवल पर कहा जाए तो वह है कि अद्वैद की दृष्टि के अनुसार यह हमारा इंडिविजुअल कॉन्शसनेस है उसका एक इंडिविजुअलिटी एक भ्रम मात्र है जैसे कि सूरज का प्रकाश किसी घड़े के ऊपर में पड़ता है घड़े के भीतर में पानी भरा हुआ है तो पानी में सूरज का प्रकाश गिरेगा तो उसका सूर्य का प्रतिबिंब हमको दिखाई देगा किंतु द मोमेंट घट टूट गया या तो फिर पानी बिखर गया तो सूर्य का प्रतिबिंब अदृश्य हो जाएगा अभी आपको लगेगा कि अरे यह प्रतिबिंबित सूर्य तो था वह कहां चला गया प्रतिबिंबित सूर्य सिर्फ एक परछाई थी उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं था जैसे ही घ तुट गया वह असली सूर्य जो है वैसा ही रहा तो यह हो गया अद्वैत और द्वैत क्या है यदि हम अगेन बहुत ही स्थूल भाषा में कहे तो पिता और पुत्र का जो संबंध है पुत्र जदी बहुत ही गुणवान होगा तो वह अपने पिता से भी शायद ज्यादा वह टैलेंटेड हो पाए किंतु वह अपने पिता कभी नहीं हो पाएगा अ सन वुड नेवर बी द फादर फादर और सन दोनों हमेशा सेपरेट रहेंगे पुत्र है उसके सद्गुण उसका धन वैभव सक्सेस जीवन में शायद पिताजी से बढ़ जाए किंतु वो अपने पिताजी तो कभी नहीं होने वाला है तो दिस इज द बेसिक डिफरेंस और इसको लेकर के कल हमने देखा था कि किस तरह से रामकृष्ण मिशन इस द्वैत और अद्वैत को ट्रीट कर रहा है और ये थोड़ा सा एक वाइडर डिस्कशन है सिर्फ द्वैत अद्वैत विशिष्ट द्वैत द्वैता द्वैत ना कि अजात वाद ना किय जैन फिलोसोफी ना बौद्धिक अ बुद्धिस्ट फिलोसोफी व्हाट एवर यू नेम इट इतनी सारी फिलोसोफी इतने सारे साधन पथ है इस जगत में तो हम लोग इसको किस दृष्टि से देखते हैं तो मैंने कहा था कल हमने जैसे डिस्कस किया कि दो रास्ते हैं एक तो है कि अधिकारी वाद अधिकारी वाद अर्थात कि मेरी कैपेसिटी क्या है किस तरह के रास्ते पर चलने की उसके अनुसार मैं वह रास्ता फॉलो करूंगा दूसरा है कि सर्व धर्म समन्वय भाव अभी यहां पर समन्वय का अर्थ यह नहीं है कि सभी धर्मों को एक कर दिया जाए समन्वय का बेसिक जो मैं अर्थ करता हूं इक्वलिटी और या तो फिर कहेंगे कि इक्वल इंपॉर्टेंस जद मैं कर्म के माध्यम से यदि मैं कर्म करने में बड़ा ही सिंसियर हूं तो मैं कर्म के माध्यम से ही से भी वही ब्रह्मण को प्राप्त कर पाऊंगा जो ब्रह्मण ज्ञान योग का साधक प्राप्त करता है अभी यहां पर आप पूछेंगे कि इन दोनों व्यू पॉइंट में डिफरेंस क्या है अधिकारी वाद में और यह सर्वधर्म को सभी धर्मों को या तो सभी पथ को इक्वल इंपॉर्टेंस या तो इक्वल वैलिडिटी देने के पीछे में डिफरेंस क्या है तो डिफरेंस यह है कि मान लीजिए मुझे यहां से दिल्ली जाना है तो अधिकारी बाद क्या कहता है कि मैं जद पैदल जाऊं या तो बेलगाड़ी में जाऊं या बस में बैठ बैठ करके जाऊ तो मैं यहां से कानपुर तक ही पहुंच पाऊंगा यह बेलगाड़ी या तो बस कानपुर से आगे नहीं जाएगी कानपुर के बाद में मुझे विमान में बैठ कर के एरोप्लेन में बैठ कर के मुझे वहां पर दिल्ली जाना होगा क्योंकि यह बेलगाड़ी या बस की ऑथेंटिक अथॉरिटी जो है व वैलिडिटी जो है वह सिर्फ कानपुर तक जाने की ही है इ अ बेटर पाथ प्लेन में जाना बहुत अच्छा है बेलगा में जाना आपको बहुत दिन लग जाएंगे बस में शायद थोड़े से कम दिन लगे ट्रेन में और कम दिन लगे किंतु प्लेन में जाना सबसे बेस्ट है ऐसा हमको बताया गया है हमको पता है किंतु यह कहना कि ट्रेन में या तो बस में या तो बेलगाड़ी में या तो पैदल ना कि कार में ना कि साइकिल पर बैठ के यहां से कानपुर तक ही जा पाएंगे उससे आगे मुझे प्लेन पकड़ना होगा फ्लाइट लेनी होगी अदर वाइज मैं दिल्ली नहीं पहुंच पाऊंगा यह हो गया अधिकारी वाद कि आप जो भी साधना करें इस जगत में बहुत अच्छी है किंतु आपको अप टू अ सर्टेन पॉइंट लेकर के जाएगी बियोंड दैट पॉइंट आपको अद्वैद का रास्ता एक्सेप्ट करना होगा जो कि आपको अल्टीमेट डेस्टिनेशन तक पहुंचाएगा जबकि जो इक्वलिटी ऑफ पाथ की जो थिरी है वो क्या कहती है कि हां फ्लाइट में जाना राजकोट से दिल्ली वह परफेक्ट बेटर है आपको शायद तीन-चार घंटों में ही ले जाए और यदि मैं साइकिल पर बैठ के यहां से दिल्ली जाऊंगा तो पता नहीं कितने महीने हो जाएंगे यदि मैं बस में जाऊंगा तो पता नहीं कितने सप्ताह शायद चला जाएगा ट्रेन में यदि जाऊंगा तो शायद हो सकता है कि पूरी रात मुझे ट्रेन में बितानी पड़े तो वह सब रास्ते जो है वोह हो सकते हैं कि कमजोर कमजोर तो नहीं कहेंगे स्लो मूविंग रास्ते हैं कि और यह जो फ्लाइट वाला जो मीडियम है इज द फास्टेस्ट किंतु जो इक्वलिटी ऑफ पाथ की जो थिरी है वह कहती है कि आप कोई भी मीडियम कोई भी ट्रांसपोर्ट व्हीकल में बैठिए आप दिल्ली जाएंगे ही जाएंगे आपको यदि ट्रेन में जा रहे हैं तो कानपुर से आपको फ्लाइट पकड़नी होगी ऐसा कोई जरूरत नहीं ट्रेन में ही आप दिल्ली जा सकते हैं आपको कोई आपका ट्रांसपोर्ट चेंज करने की जरूरत नहीं दिस इज द मेजर डिफरेंस बिटवीन द थिरी ऑफ इक्वलिटी एंड थिरी ऑफ एलिजिबिलिटी एलिजिबिलिटी हमेशा कहेगा कि जो प्लेन में जाना है वह सर्वश्रेष्ठ है साइकिल प जाना ना कि बेलगाड़ी में बैठ के जाना वो आप जद आपकी प्लेन की टिकट खरीदने की कैपेसिटी नहीं है तो भले आप उसमें जाएं आप बहुत दूर तक चले भी जाएंगे किंतु अल्टीमेटली जो ब्रह्म साक्षात्कार होना है वह अद्वैद के माध्यम से ही होगा आपके बाकी जितनी भी थियस जितने भी पाथ है कर्म का पाथ है भक्ति का का पात है राजयोग का पात है बुद्धिस्ट जितने भी साधनाएं हैं जैन साधनाएं हैं वो आपको अल्टीमेटली एक पॉइंट तक ले जाएगी बियोंड दैट पॉइंट आपको नहीं ले जाएगी क्योंकि उसके लिए आपको आपकी एलिजिबिलिटी बनानी होगी प्लेन की टिकट खरीदने के लिए आपके पास में पैसा चाहिए तभी आप प्लेन में बैठ पाएंगे तो दिस इज द बेसिक डिफरेंस बिटवीन दिस टू एप्रोचे मेरा पर्सनल मानना है कल मैंने कहा था मेरी पर्सनल जो प्रेफरेंस कहो ना कि वह इवोल्व हुआ है ओवर ए पीरियड ऑफ टाइम मैं पहले ऐसा सोचता था कि नहीं अद्वैत इज द बेस्ट और अद्वैत ही अद्वैत फिलोसोफी या तो अद्वैत साधना जिसको स्मरण मनन निदिद्यासन कहते हैं उसी के माध्यम से ही ब्रह्म साक्षात्कार होगा क्योंकि द्वैत और अद्वैत में देयर इज अ वेरी फंडामेंटल डिफरेंस जितनी भी अतिक साधनाएं है उसको ले लीजिए और अद्वैत की साधना को देखिए या तो अद्वैत फिलोसोफी को देखिए दे वेरी वेरी मेजर डिफरेंस अभी जैसे कि मान लीजिए डिफरेंस कहां पर है मैं मेरी पेन खो गई है मैं आजकल तो कोई पेन से लिखता नहीं है मोबाइल से ही ज्यादातर काम चलता है किंतु बिकॉज कि हम ट्रेडिशनल फिलोसोफी के बारे में बात कर रहे हैं मैं उदाहरण पेन का दूंगा मेरी पेन खो है अभी मैं लिखता हूं पेन से लिखता भी हूं प्रूफ रीडिंग ज्यादा करता हूं और इसके लिए मैंने बहुत अच्छी तीन चार पेन मेरे पास में रखी ई है यदि वह खो जाती है तो मुझे इस कुर्सी पर से उठ कर के मेरी जो ऑफिस है उसमें जितने भी ड्रॉवर्स है यह कप बोर्ड है वह सब खोल करके मुझे पेन को खोजना होगा ऐसा भी हो सकता है कि थोड़ा सा झुक कर के टेबल के नीचे भी देखना पड़े कि क्या पेन वहां पर तो नहीं गिर गई तो वह पेन प्राप्त करने के लिए मुझे कर्म करना पड़ेगा किंतु मान लीजिए ऑल दिस टाइम यह मैं खोज रहा था खोज रहा था पेन मेरे पॉकेट में ही है मुझे पता नहीं या मैं भूल गया हूं या तो एक ओवर साइट हो गई है अभी मैंने किसी को बुलाया मेरे यहां जो स्टाफ है वो लड़के को अरे भाई अभी मैं तो झुक नहीं पाऊंगा अभी उम्र भी हो गई है पेट भी बढ़ गया है क्या करें तुम ये टेबल के नीचे झुक कर के देखो तो पेन वहां पर गिरी है कि नहीं तो उस वो आकर के कहेगा अरे महाराज जी पेन तो आपके पॉकेट में ही है कहां टेबल के नीचे खोज रहे हैं तो मैंने कहा अरे अच्छा पेन तो पॉकेट में ही है जैसे ही उसने कहा वैसे ही मुझे ज्ञान हो गया मुझे पेन प्राप्त हो गई पेन खोई नहीं थी मुझे पता नहीं था कि पेन मेरे ही पास में है जैसे ही लड़के ने कहा कि पेन तो आपके पॉकेट में ही है तो मुझे पेन प्राप्त हो गई तो देखिए कि बिना कर्म के पेन प्राप्त हुई है पेन प्राप्त हुई है ज्ञान के माध्यम से और यह ज्ञान और कर्म का डिफरेंशिएबल ही शार्पली बताया गया है और कोई भी थिरी ले लीजिए जैसे कि आप कोई भी पाथ ले लीजिए मेडिटेशन है योगा है यह फास्टिंग है यह प्रार्थना है यह आपके धर्म ग्रंथों का पाठ है तीर्थ यात्रा है आप जो भी कुछ करेंगे सद्गुणों का आपके जीवन में जो प्रभाव है जीवन में आपको इंप्लीमेंट करने हैं मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह ब्रह्मचर्य तब शोच संतोष स्वाध्याय ईश्वर परिधान ये जितने भी सद्गुण राशि है जिसको कि आपको अपने जीवन में इंप्लीमेंट करना है जीवन में उसको प्रैक्टिकल करके बताना है यह सब कर्म के क्षेत्र में है अर्थात कि ईश्वर कहीं आकाश में विराजमान है या तो फिर ब्रह्म साक्षात्कार या तो आत्मा साक्षात्कार कहीं बाहर में या ब्रह्मण या आत्मन कहीं बाहर में विराजित है मुझे कर्म करके इनको पाना है जबकि अद्वैत वेदांत क्या कहता है मैं ही ब्रह्मण हूं जैसे ही एक सद्गुरु के पास में गए और उन्होंने कह दिया तत्व मसी स्वेत के तो या तो फिर अहम ब्रह्मास्मि इस तरह का हमको यह अद्वैत का यह महावाक्य हमको सुनाया वैसे ही हमको ज्ञान हो गया कि हां कि मैं ही तो हूं ब्रह्मण और अद्वैत वेदांत क्या कहता है कि आप ऐसे सद्गुरु जैसे अपने रामकृष्ण मिशन के प्रेसिडेंट महाराज रिविर प्रेसिडेंट महाराज या तो परम पूजनीय वाइस प्रेसिडेंट महाराज जितने भी है वे लोग तो इतने लोगों को दीक्षा देते हैं तो दीक्षा देने के साथ-साथ में ही ब्रह्म साक्षात्कार ठाकुर का दर्शन क्यों नहीं होता जो ठाकुर का मंत्र है वो तो कोई महामंत्र से क महावाक्य वेदांत के महावाक्य से कम नहीं है यदि मैं वेदांत का महावाक्य कोई सद्गुरु अपने शिष्य को बताएगा और उच्चारण करने के साथ में ही ट्रेडिशनल जैसा कहा गया है कि शिष्य को ब्रह्म साक्षात्कार हो जाएगा तो वैसे ही परम पूजनीय वाइस प्रेसिडेंट महाराज के प्रेसिडेंट महाराज जो भक्तों को दीक्षा देते हैं ठाकुर का नाम मंत्र महामंत्र सुनाते हैं तो सुनकर के ही क्यों नहीं हमको ठाकुर का दर्शन हो जाता तो उसके लिए रीजन है कि अपने चित्त की शुद्धि करनी पड़ेगी कर्मा करके चित्त शुद्धि करो और उसके बाद में जब महावाक्य सुनोगे तो इमीडिएट ब्रह्म साक्षात्कार होगा यह है अद्वैत वेदांत की थिरी और यह जो चित्त शुद्धि करने के लिए कर्म है वो इसके लिए बाकी सब तरह की साधनाएं है ये आप राज योग कहे ना कि कर्म योग कहे ना कि भक्ति योग कहे प्रार्थना करें या तो फिर ध्यान करें ना कि योगासन करें ना कि जप करें आप जो भी करें यह सब आपको चित्त शुद्धि के लेवल तक पहुंचाएगा इसके आगे नहीं इसके आगे यदि ब्रह्म साक्षात्कार करना है तो अद्वैत वेदांत में कही हुई स्मरण मनन निदिद्यासन की पद्धति से सद्गुरु से यह महावाक्य सुनना है और तब कहीं जाकर के यह ब्रह्म साक्षात्कार होगा दिस इज अद्वैत वेदांत और यह अद्वैत वेदांत का अधिकारिक वाद है चित्त शुद्धि करो चित्त शुद्धि के बाद में अद्वैत वेदांत में प्रवेश करो और यह जो इक्वलिटी ऑफ पाथ का जो रास्ता वह कहता है कि कर्म योग या तो भक्ति योग या तो जब ध्यान आपको सिर्फ चित्त शुद्धि ही नहीं करवाता आपको ब्रह्म साक्षात्कार भी करवाता है उसके लिए आपको एक लेवल पर जाकर के आपका पाथ बदलने की जरूरत नहीं है यह है बेसिक डिफरेंस बिटवीन दिस थिरी ऑफ इक्विवेलेंस एंड थरी ऑफ एलिजिबिलिटी तो मेरा खुद का जो इवोल्यूशन है फिलोसॉफिकल इवोल्यूशन तो कोई भी आएगा तो उसको क्या है कि अद्वैत वेदांत बड़ा ही एलिट और बड़ा ही प्रैक्टिकल लगता है हम लोग जैसे कि स्कूल कॉलेज में एडमिशन लेते हैं तो हमको पता है कि किस तरह से आपको जद एक सर्टेन परसेंटेज नहीं मिले तो अच्छे इंस्टिट्यूट में आपको एडमिशन नहीं मिलेगा तो वो एलिजिबिलिटी वाला क्राइटेरिया हमको इमीडीएटली समझ में आ जाता है और यह कहना कि मेरा जो क्लासमेट है ना ही पढ़ाई लिखाई करता है नहीं कुछ करता है वह आज नहीं ना कल उसको आईआईटी में एडमिशन मिल ही जाएगा तो यह तो भाई मुझे कहीं पर भी किसी भी तरह से मुझे यह प्रैक्टिकल नहीं लग रहा है मैंने बहुत मेहनत करके 12थ में बहुत अच्छे परसेंटेज पाए जी आईआईटी क्रैक कर दिया तब कहीं जाकर के मुझे आईआईटी में एडमिशन मिला है और आप क्या कहते हैं कि यह जो मेरा मित्र वीडियो गेम यह वो सब में वो लगा रहता है आज को 10 साल आज नहीं तो कल 10 साल के बाद उसको आईआईटी में एडमिशन मिल जाएगा यह क्या पागल जैसी बात है ये तो कभी हमने प्रैक्टिकल लाइफ में नहीं देखा तो ये जो थिरी ऑफ एलिजिबिलिटी है हमको हमारे मन को इमीडिएट भा जाती है हां वो हमने रियल लाइफ में ऐसा देखा है तो ऐसा ही होना चाहिए किंतु जैसे मैंने कहा ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम रीडिंग रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर एंड सीइंग माय ओन इवोल्यूशन आई हैव फाउंड दैट द थिरी ऑफ इक्विवेलेंस जो है वो इट इज मोर वैलिड मोर वैलिड अर्थात ये नहीं है कि आपको अद्वैत वेदांत काम नहीं करता है और या तो फिर ये चित्त शुद्धि वाली थी गलत है वह तो सही है ही है अपनी जगह पर मैं कर्म का निष्काम कर्म करते-करते मेरी चित्त शुद्धि हुई और मैं अद्वैत वेदांत में प्रवेश करूं दैट इज अ वेरी परफेक्ट वे ऑफ डेवलपमेंट मैं आज 12थ में मेहनत करके बहुत अच्छे परसेंटेज लाऊंगा जीआईआईटी में पास हो जाऊंगा आईआईटी में एडमिशन पाऊंगा दैट इज अ परफेक्टली लेजिबल पाथ किंतु साथ-साथ में ही जो कि लेस प्रैक्टिकल या तो लेस हमको समझ में आने वाला जो है कि मेरा मित्र 10 साल के बाद में कुछ नहीं करके भी धीरे-धीरे चलके भी आईआईटी में एडमिशन पाएगा अर्थात कि मैं कर्म करते-करते यहां पर पब्लिकेशन में बैठ कर के चुपचाप अपना प्रूफ रीडिंग करते-करते भले मैं मंदिर में भी ना जाऊं भले मैं स्मरण मनन निदिद्यासन भी ना करूं भले मैं प्रार्थना भी ना करूं बस यहां पे जद आई एम वेरी सिंसियर इन माय प्रूफ रीडिंग जदी अकाउंटेंट महाराज इज वेरी सिंसियर इन हिज काउंट कीपिंग जदी पुजारी महाराज इज वेरी सिंसियर इन हिज वरशिप ऑफ ठाकुर जदी भंडारी महाराज इज वेरी सिंसियर इन सर्विंग द साधु साधु सेवा देन दे विल आल्सो अटन द सेम ब्राह्मण ट दोज हु हैव रिच ब्रह्मण थ्रू अद्वैत वेदांत तो यह मेरा ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम यह इवोल्यूशन है सभी का अपना अपना मत होता है और सभी को अपना मत फॉलो करने का जो फ्रीडम है व रामकृष्ण मिशन में व एक अद्भुत है बाकी सब जगहों पर आप देखेंगे थोड़ा बहुत भी एस्टेब्लिश ओपिनियन के अगेंस्ट में जाएंगे तो लोग आपको क्रिटिसाइज करना शुरू कर देंगे रामकृष्ण मिशन में ऐसा नहीं है तो इस फ्रीडम का फायदा कहो ना कि गैर फायदा कहो उठा करके मैंने अपना यह फिलोसॉफिकल इवोल्यूशन यहां पर मैंने प्राप्त किया है तो दिस इज द ग्राउंड रूल अभी तक राम कृष्ण विवेकानंद लिटरेचर जो मैंने पढ़ा इसको मैंने इस तरह से समझा है ओके थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं अप्लाइज टू द होल ऑफ द यूनिवर्स यह बिगिनिंग और अंत सेम है यह रीजन पूरे विश्व ब्रह्मांड को जद अप्लाई करते हैं वी सी दैट द इंटेलिजेंस मस्ट बी द लर्ड ऑफ द क्रिएशन जो वही हायर कॉन्शसनेस मुझे आज भगवान श्री राम कृष्ण में देखने को मिल रही है वही हायर कॉन्शसनेस इस सृष्टि का सृजन करता है व्हाट इज द मोस्ट इवॉल्वड नोशन दैट अ मैन हैज ऑफ दिस यूनिवर्स अच्छा साथ में ही हमने वह भगवत गीता का वह श्लोक भी देखा था अहम आत्मा गुणा केश सर्व भूता शय स्थित अहमद च मध्यम च भूता नाम अंत ए वच अर्थात हे अर्जुन में सर्व भूतों के हृदय में विराजमान हूं मैं ही आदि हूं मैं ही मध्य हूं और मैं ही अंत हूं तो किस तरह से यहां पर द्वैत भी मैच हो रहा है और शुरुआत में स्वामी जी की जो थिरी थी उसके साथ में अद्वैत भी मैच हो रहा है य ध्व अद्वैत का कांस्टेंट शफलिंग य कांस्टेंट स्विचिंग ओवर विदन द सेम टेक्स्ट दिस इज द ब्यूटी ऑफ रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर व्हाट इज द मोस्ट इवोल्व नोशन दैट मैन हैज ऑफ दिस यूनिवर्स इस विश्व ब्रह्मांड के बारे में हमारी हाईएस्ट थिरी क्या है हमारी हाईएस्ट अंडरस्टैंडिंग क्या है इट इज इंटेलिजेंस द एडजस्टमेंट ऑफ पार्ट टू पार्ट द डिस्प्ले ऑफ इंटेलिजेंस ऑफ व्हिच द एंसेट डिजइन थिरी वाज एन अटेंप्ट एट एक्सप्रेशन हम सोचते हैं कि यह विश्व ब्रह्मांड वह जीवंत है और वह धीरे-धीरे करके अपनी खुद की कॉन्शसनेस का सहारा लेकर के अपने को डेवलप कर रहा है जैसे कि ठंड लगती है तो हम लोग क्या करते हैं स्वेटर पहन लेते हैं या तो फिर अच्छा सा ब्लैंकेट लगा कर के वो अदरक वाली चाय पीते हैं अभी पत्थर जो है वोह पत्थर ऐसा नहीं कर पाएगा पत्थर को यह सेंस ही नहीं है कि उसको ठंडी लग रही है ना कि गर्मी लग रही है पत्थर के बीच में और हमारे बीच में यह डिफरेंस है कि मैं अपने एनवायरमेंट को एडजस्ट करने का प्रयत्न करता हूं तो यह जो अपने को खुद को एडजस्ट करने का प्रयत्न है यह है जीवन की निशानी तो यह पूरा विश्व ब्रह्मांड अपने को एडजस्ट करने का अपने को टू हैव अ बेटर पोजीशन फॉर इट सेल्फ यह प्रयत्न कर रहा है और यह है ये डिजाइन थिरी क्या है डिजाइन थिरी बेसिकली क्या कहता है कि यह विश्व ब्रह्मांड है वो कोई एक इंटेलिजेंस डिजाइन का सहारा लेकर के इवॉल्व हो रहा है यदि कोई इंटेलिजेंट डिजाइन नहीं होती मेरे भीतर में इंटेलिजेंस नहीं होती तो मैं अदरक वाली चाय पीने के बारे में सोचता भी नहीं पत्थर की तरह वहां पर जड़ होक के बैठा रहता किंतु मेरे भीतर में इंटेलिजेंस है मुझे पता है कि यदि मुझे पहले तो सर्वप्रथम तो मुझे यह पता है कि मुझे कष्ट हो रहा है फिर मेरे में यह सेंस है कि यदि कष्ट हो रहा है तो इसका कोई सलूशन खोजा जाए पत्थर में यह सेंस ही नहीं है उसको आप हथोड़े से तोड़ दो उसको आप काट पट करके किसी मंदिर में लगा दो ना कि आप उसको फिर कहीं पानी में फेंक दो वो पानी नदी के तल तल में जाकर के बैठा रहेगा उसको यह सेंस नहीं है कि मुझे कुछ चाहिए उसको यह कोई अटेंड मेंट की कोई उसका कोई एंबिशन नहीं है जबकि अपना एक एंबिशन है अपना एक गोल है मुझे सुख प्राप्ति करनी है और दुख का निवारण करना है शास्त्र कहते हैं कोई भी मनुष्य को कोई भी जीवंत पदार्थ है तो उसका यह एक लक्षण है सुख प्राप्ति और दुख का निवारण यदि यह है तो वह जीवंत है और यदि यह नहीं है तो वह जीवंत नहीं मृत नहीं कह सकते मृत तो वह होता है जो जीवंत होने के बाद में वो मृता अवस्था प्राप्त करता है उसको जड़ कहते हैं जड़ और चेतन का ये डिफरेंस है तो स्वामी जी कहते हैं कि विश्व ब्रह्मांड के बारे में हमारा हाईएस्ट अंडरस्टैंडिंग क्या है विश्व ब्रह्मांड के बारे में अपना हाईएस्ट अंडर स्टैंडिंग यह है कि यह चेतन है उसका एक एक एम है अभी यह एम हमारा जो एम है कि सुख प्राप्ति और दुख का निवारण क्या विश्व ब्रह्मांड का यही एम है हम बता नहीं सकते उसका यह होगा शायद कुछ भी एम वो हमारे हो सकता है कि उसका भी कोई एम हो किंतु एम क्या है वो नहीं देख कर के एटलीस्ट हमको ये तो पता है कि हां वो चेतन है वो जड़ नहीं है प या तो फिर ऐसा कह सकते हैं कि विथ इन दिस फ्रेमवर्क ऑफ दिस एंटायस मोस इवन दिस स्टोन इज चेतन विश्व ब्रह्मांड की परिधि के भीतर में यदि देखा जाए तो पत्थर भी जीवंत है पत्थर की इंडिविजुअल कॉन्शसनेस नहीं होगी किंतु विश्व ब्रह्मांड की कलेक्टिव कॉन्शसनेस है हमारी जैसे इंडिविजुअल कॉन्शसनेस है पत्थर की नहीं है किंतु पत्थर क्योंकि विश्व ब्रह्मांड का पार्ट है और यदि यूनिवर्स को ऐसा लगता है कॉस्मो को ऐसा लगता है कि यह मेरा एम है और यह मुझे अप्लाई करना है यह मुझे वर्कआउट करना है तो पत्थर से वह काम करवाएगा छोटे-छोटे पत्थर से ग्रहों का निर्माण करवाएगा वहां का टेंपरेचर वहां का एटमॉस्फियर कंपोजीशन वहां का वोटर एंड कॉन्टिनेंटल जो स्ट्रक्चर है उसको इस तरह से करेगा कि वहां पे जीवन पनपे वहां पे लाइफ डेवलप हो जद यह कॉस्मो का इरा है यह कॉस्मो का एम है तो कॉस्मो इस पत्थर के पास से काम करवाएगा पत्थर द स्टोन इज बहोल्डन टू द हायर कॉन्शसनेस वच इज द कॉस्मस तो स्वामी जी कहते हैं कि विश्व ब्रह्मांड के बारे में हमारा हाईएस्ट अंडरस्टैंडिंग क्या है वह चेतन है वह जड़ नहीं है द बिगिनिंग वास देर फॉर इंटेलिजेंस शुरुआत में चेतन था शुरुआत में कॉन्शसनेस थी एट द बिगिनिंग दैट इंटेलिजेंस बिकम बिकम इवॉल्वड एंड इन द एंड दैट इंटेलिजेंस गेट्स इवॉल्वड वही चेतन एक बीज के स्वरूप में उसने अपने को डाउन साइज किया रिफाइन किया एक बीज के स्वरूप में उसने अपने का अपना एक नया एक डीएनए या तो ब्लूप्रिंट तैयार किया और उसी चेतन की ब्लूप्रिंट या तो डीएनए में से यह विश्व ब्रह्मांड का इवोल्यूशन हुआ चेतन में से बीज हुआ बीज में से चेतन विश्व ब्रह्मांड का इवोल्यूशन हुआ द सम टोटल ऑफ द इंटेलिजेंस डिस्प्ले इन द यूनिवर्स मस्ट देर फोर बी द इवॉल्वड यूनिवर्सल इंटेलिजेंस अनफोल्डिंग इट सेल्फ बड़ा ही इंपोर्टेंट स्टेटमेंट है थोड़ा सा कॉम्प्लिकेटेड भी है तो इसके बारे में हम कल चर्चा करेंगे आज ही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम त श्री राम कृष्ण