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ॐ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का ज्ञान योग कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी थियोरेटिकल जो संभावनाएं हैं थियोरेटिकल जो पॉसिबिलिटीज है कि पुनर्जन्म है वह हमको समझाते हैं और इसके बाद में अभी एक हायर लेवल पर जाकर के पुनर्जन्म वाद के बेनिफिट्स समझाते हैं शायद मैं बेनिफिट्स तो नहीं कहूंगा ऐसा कहूंगा कि पुनर्जन्म वाद के इंप्लीकेशंस क्या है उसकी संभावनाएं क्या है तो सबसे बड़ी बात है जैसे स्वामी जी ने कल कहा मेन इन जनरल ले ऑल ब्लेम ऑफ लाइफ ऑन देयर फेलो मेन हम अपने जीवन में जो कोई भी दुर्घटनाएं होती है जो कोई भी हमारे जीवन में ट्रॉमा होते हैं उसका जिम्मा हम दूसरों के सर के ऊपर में डालते हैं और फेलिंग ट ऑन गॉड और जद अने जो कि मान लीजिए कि मैं जब छोटा था तो मैं देखता था कि किसी किसी के पड़ोसियों के के साथ में कभी झगड़ा होता है तो अभी मान लीजिए कि आपके पड़ोसी के साथ में आपका गुस्सा है उसके ऊपर में किंतु पड़ोसी को जाकर के उसके साथ में झगड़ा करने से वह नाराज हो जाएगा तो नाराज हो जाएगा तो क्या करेंगे तो बेटर है कि हम ईश्वर के ऊपर में डाल दें तो यदि यदि हम अपने पड़ोसी के सर पर नहीं डाल सकते अपने रिलेटिव्स के ऊपर में नहीं डाल सकते डर लगता है कि वे लोग सामने से झगड़ा करने को आए तो क्या होगा तो भगवान के ऊपर में डाल दिया और यदि भगवान का डर लगता है कि हां अरे भाई भगवान कृष्ण को कुछ बोल दिया और सुदर्शन चक्र भेज दिया अपने पीछे तो हम क्या करेंगे वी कंजर अप अ घोस्ट एक किसी भूत को खड़ा करेंगे और फिर कहेंगे इट इज फेट या तो फिर कहेंगे यह हमारा नसीब था तो हमेशा दूसरों के साथ में ही दूसरों के सर के ऊपर में ही पूरा जिम्मा है जैसे कि मैंने कल नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया का उदाहरण बताया था नॉर्थ कोरिया की जो लीडरशिप है उसका एक काम है कि सब पूरी दुनिया को गाली देते रहना और अपना खुद का एडमिनिस्ट्रेशन या तो अपना खुद का गवर्नेंस उसमें कोई फंडामेंटल प्रॉब्लम है यह एक्सेप्ट ही नहीं करना तो इस तरह से यह तो इंडिविजुअल लेवल पे है कि मैं हमेशा कहता रहूंगा कि अरे भाई देखो कि मैं परीक्षा में फेल हो गया उसका कारण क्या है तो यह पड़ोसी के घर पर बड़े जोर-जोर से वह म्यूजिक बजाते हैं तो मुझे पढ़ाई में वह फोकस नहीं कर पाया इसलिए मैं फेल हो गया तो अच्छा यह एक्सटर्नल सरकमस्टेंसस शायद हो सकते हैं कभी-कभी काम करेंगे किंतु ज्यादातर केसेस में देखिए कि हमारा मन हमेशा एक्सक्यूज खोजने के लिए दौड़ता रहता है जब भी हमने हमारे पास में कोई भी पूछेगा कि अच्छा तुम्हारे परीक्षा में अच्छे मार्क्स क्यों नहीं आए या तो फिर तुम्हारा वहां पर क्यों प्रोग्रेस नहीं हो रहा तो हम लोग हमेशा क्या कहेंगे कि अरे भाई या तो मेरे टीचर है या तो फिर मेरी क कनी में मेरे जो बॉस है उसको मेरे साथ में नहीं पड़ता वो मेरे से नाराज है इसलिए ऐसा होता है जैसे कि हरिपद मित्रों का था हरिपद मित्र बेलगांव में स्वामी जी का डिवोटा स्वामी जी जब प्रव्रज्या कर रहे थे परिवल कांव गए बेलगांव में हरिपद मित्रों के साथ में उनकी मुलाकात हो गई वह बड़ा ही प्रभावित हो गया स्वामी जी से और स्वामी जी को अपने घर पर ले आया और हरिपद मित्रों उस समय फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में ऑफिसर था कोई पोस्ट पे था अच्छी पोस्ट पे था वो और उनकी वाइफ इन दोनों ने स्वामी जी से दीक्षा ली स्वामी जी ने उनको अच्छे-अच्छे लेटर्स भी लिखे उनको भी और उनकी पत्नी को भी तो यही हरिपद मित्र एक बार स्वामी जी को कहता है कि मेरा जो बॉस है गोरा वो ब्रिटिश ऑफिसर वो मेरे से बड़ा ही नाराज रहता है तो अभी मैं इसके बारे में क्या करूं तो स्वामी जी ने उसका उत्तर दिया कि अच्छा देखो उसके प्रति क्या तुम्हारे मन में कोई विद्वेष है कि नहीं पहले तुम यह सोचो तो वो बोलता है हां उसकी बहुत सारी बातें मुझे अच्छी नहीं लगती उसके प्रति मेरे मन में विद्वेष है किंतु उसको कैसे पता चलेगा मैं थोड़ी ना उसको यह सब बोलने को जाता हूं ये अपने एक इंडियन कर्मचारी यह ब्रिटिश ऑफिसर वो भी ब्रिटिश लोगों की सत्ता है उस समय थोड़ी ना उसको बोलने को जाएगा कि भाई आपका यह अच्छा नहीं है वो अच्छा नहीं है मैं तो अपने मुंह से कभी भी ऐसा नहीं बोलता तो स्वामी जी ने क्या कहा कि देखो यह तुम्हारे मन में जो घृणा है वह यदि तुम शब्दों से भी व्यक्त नहीं करोगे ना तो उसकी तन मात्राएं फैले गी और सामने वाला समझ जाएगा सामने वाले के मन में यह बात उक्की बैठ जाएगी कि तुम उसको घृणा करते हो तुम उसके साथ में विद्वेष करते हो और ऑटोमेटिक सबकॉन्शियसली उसके मन में इन टर्न उसके मन में तुम्हारे प्रति गुस्सा खड़ा होगा तो तुम अपने मन में उसके प्रति जो विद्वेष है उसको समाप्त कर दो उसको कंट्रोल करने का प्रयास करो तो हरिपद मित्र ने ऐसा करने का प्रयास किया और सही सही देखा कि वो जो ऑफिसर था उसका उसके साथ में अच्छा रिलेशन एस्टेब्लिश हो गया था तो ऐसा बहुत बार होता है कि हमारे खुद के मन में दूसरों के प्रति विद्वेष होता है और वह हम शायद शब्दों में व्यक्त ना भी करें तो हमारी एक्शंस हमारी यह जो तन मात्रा है यह सब इस तरह का विद्वेष कम्युनिकेट करता ही करता है तो हमेशा अपने मन में झांक कर के देखना चाहिए जिसके साथ में मेरा रिलेशन अच्छा नहीं है तो उसके प्रति मेरे मन में कोई कट कट भाव है कि नहीं पहले उसको दूर कर दो दो चीज होगी मान लीजिए कि मेरे मन में मैं कटु भाव दूर कर देता हूं तो होगा ऐसा कि उसके साथ में मेरा रिलेशन ऑटोमेटिक ओवर ए पीरियड ऑफ टाइम ठीक हो जाएगा और मान लीजिए ठीक ना भी हो उसके उसके मन में मेरे प्रति कटो भाव है तो क्या होगा दूसरा क्या होगा पता है मुझे वो जो चुभता है ना कि अरे वो मेरे साथ में ऐसा बिहेव कर रहा है मेरे साथ में ऐसा कर रहा है तो वो चुभन बंद हो जाएगी यह जो हमारे मन को जो कष्ट होता है भीतर से कि दूसरे लोग मेरे साथ में अप व्यवहार कर रहे हैं दुर्व्यवहार कर रहे हैं व दुख जो है हमारे मन का वह धीरे-धीरे करके शांत हो जाएगा और अपना मन शांति से भर जाएगा यह तो बात बिल्कुल पक्की है कि सभी चीज मेरे हाथ में नहीं होती आज रास्ते से जा रहा हूं सडन एक्सीडेंट हो गया अभी आप कहेंगे पूर्व जन्मों के कर्म का परिणाम है वो भी एक हो सकता है दूसरा है कि ये प्योर स्टेटस्ट पॉसिबिलिटी है कि किसी जो जो आजकल स्टेटिस्टिक्स आते हैं ना कि एक देश में एक साल में इतने एक्सीडेंट होते हैं ऑन एवरेज तो यह स्टेटिस्टिक्स में मान लीजिए इंडिया में एक में फिगर इमेजिन कर लो कि 1000 एक्सीडेंट होते हैं एवरी ईयर तो 1000 में किसी का तो नंबर आना था तो वह बाय चांस मेरा आ गया उसमें फेट या पूर्व जन्म इसका कोई रिलेशन नहीं है ऐसा शायद हम मान भी लेते हैं चलिए किंतु गोइंग बियोंड ट बहुत सारी चीजें होती है कि जो अपने ने कंट्रोल में नहीं है मैं ये पुनर्जन्म वाद के ऊपर में जद मैं ऐसा सोच करके कि मैं यदि अपने को ठीक करूंगा तो पूरा जगत मेरे वश में आ जाएगा ऐसा तो ठाकुर मां स्वामी जी के वश में जगत नहीं था स्वामी जी को जहर पिलाने के लिए लोग तैयार हो गए थे उनकी कॉफी में जहर डाल भी दिया था स्वामी जी जब अमेरिका गए थे और उनकी सक्सेस देख कर के बहुत सारे लोग ये खास करके ये मिशनरी लोग नाराज हो गए कि अरे ये तो हमारा बिजनेस बंद कर देगा हम लोग तो यह मूर्ख धनी अमेरिकन से पैसा बटोर हैं कि ये बोल कर के कि एक क्रिश्चियनिटी का लाइट भारत में देना है भारत पूरा अंधेरे में डूबा हुआ है अभी ये अंधेरे में से डूबे हुए देश में से इस तरह का हम प्रचंड चेतना वन मन है इस तरह का एक प्रोफेट सेंट पेट्रियट जद अमेरिका में आता है तो कौन उनको पैसा देगा कि अरे स्वामी विवेकानंद जैसे लोग यदि भारत में है तो कन्वर्ट करने की कोई जरूरत नहीं तो मिशनरी लोग नाराज हो गए कॉफी में जहर डाल दिया स्वामी जी कॉफी पी ही रहे हैं भीतर कॉफी के कप के भीतर में से ठाकुर एकदम प्रकट हुए बोला नरेन खानी र भीतर बशा छ नरेश यह कॉफी पीना मत इसके भीतर में जहर है तो इमीडिएट स्वामी जी ने कॉफी का कप साइड पर रख दिया अखंडानंद जी को तो एक्चुअली जहर दिया गया था वो झंडू भट के वहां पर रहते थे उस समय एक धनी यहां पर ही गुजरात की ही बात है एक धनी व्यक्ति बार-बार अखंडानंद जी को अपने घर में ले जाता था और कॉफी पिलाता था सेम कॉफी ही वही तो अखंडानंद जी कॉफी पीना अच्छा पसंद करते थे एक बार अभी उनके रिलेटिव्स को लगा कि यह धनी व्यक्ति अपना सब संपत्ति यह साधु बाबा जी को दे देंगे तो अपने हाथ में कुछ नहीं आएगा तो उस कॉफी के भीतर में जहर डाल दिया अभी अखंडानंद जी अपनी स्मृति कथा में लिखते हैं अपने से कहते हैं कि जब मैं कॉफी पी रहा हूं उसका टेस्ट बड़ा ही घिनौना प्रतीत होता है किंतु अभी क्या करहे वह जो अभी तो जिसके घर रह रहे हैं उसने बड़ा जब प्रेम से कॉफी पिला रहे हैं तो अभी उसको रख देना भी उचित नहीं होगा तो वह जोर कर के कॉफी पी गए फिर तो ऐसे बीमार हो गए फिर वो वैद्य ने कहा कि अरे महाराज जी आपको तो जहर दिया गया है तो अखंडानंद जी स्वीकार ही नहीं करेंगे अरे भाई ऐसा कैसे हो सकता है वह तो मेरा बड़ा ही अच्छा भक्त है वो थोड़ी ना मुझे जहर देगा तो वो कहते हैं कि स्वामी जी आपको पता नहीं है उसके घर में जितने भी लोग रहते हैं सब आपके विरोधी है सबको यह डर है कि यह धनी व्यक्ति अपनी संपत्ति आपको दे देंगे इसलिए वह आपको मार देना चाहते हैं तो अखंडानंद जी स्वीकार ही नहीं करेंगे नहीं ऐसा हो ही नहीं सकता अखंडानंद जी का ऐसा सरल स्वभाव है ना तो मनुष्य के ऊपर में उनकी आस्था बड़ी जबरजस्त थ तो फिर से उस धनी व्यक्ति के घर जाते हैं फिर से वह कॉफी पिलाता है फिर से उसके रिलेटिव्स ने उसके भीतर में जहर डाल दिया है फिर से वह अखंडा जी कॉफी पी के झर खा कर के एकदम मने उनके शरीर में झर के लक्षण प्रकट हो गए तो दौड़े दौड़े फिर वो झंडू बट के वहां पर जाते हैं फिर उसका ट्रीटमेंट होता है तब कहीं जाकर के अखंडानंद जी एक्सेप्ट करते हैं कि हां ऐसे से भी लोग हैं जो कि मुझे मार देना चाहते हैं दो-दो बार उन्होंने जहर वाला कॉफी पिया तब कहीं जाकर के उन्होंने यह बात स्वीकार की ऐसा ये मनुष्य स्वभाव के ऊपर में अखंडानंद जी का ट्रस्ट था अभी आप देखिए कि यदि हम लोग कहेंगे कि मैंने जब इंसिडेंट पहली बार पढ़ा था ना तब मुझे तो बड़ा ही भीतर में से एक ऐसा एक मैंने कहा कि अरे आप जब पहली बार कॉफी पी ही रहे हैं और इसका टेस्ट इतना घिनौना आ रहा है इतना खराब आ रहा है अब कॉफी पी ही क्यों रख दीजिए कोई भी एक बहाना करके जैसे स्वामी जी ने रख दिया था कि नहीं पिऊंगा मैं कॉफी कौन है मुझे कॉफी पिलाने पर फोर्स कर सकता है तो पूरा कॉफी एक बार नहीं दोदो बार पी लिया इस तरह का सरलता क्या मने ये जो अपना ये जो सर्वाइवल ऑफ फिटेस्ट का थिरी है ना ये जगत में कौन बचता है जो कि सबसे ज्यादा स्ट्रांग है फिजिकली और मेंटली तो इस तरह की एक सरल आस्था रख कर के मनुष्य जद जिएगा इस भयावह संसार में तो वो तो बेचारा कब का कुछड़ी जाएगा कब का उसका मने लोग उसको नोच दे दे यह जो समाज में इस तरह के विद्वेष लोग है इस तरह के सरल लोगों का तो कबका वो संहार कर देते हैं क्यों आपको इतना सरल होने की जरूरत है ऐसा वो यह इंसिडेंट पढ़ के मुझे बार-बार ऐसा लगता था किंतु जो भी है देखिए स्वामी जी की ये जो थिरी है इसको पढ़कर हमको समझ में आता है कि यह जो सरलता है यह मनुष्य स्वभाव पर यह विश्वास है मनुष्य के प्रति एक हमदर्दी है यह कंपेज है वो कोई एक जन्म का परिणाम नहीं है या तो फिर यह फिलोसोफी पढ़कर ब्रह्म सत्य जगत नित्या पढ़कर के ये सब नहीं आता है यह सब आता है जन्म जन्मांतर की साधना से जन्म जन्मांतर तक मैंने अच्छे कार्य करता रहा ईश्वर के प्रति मेरी शरणागति बढ़ती रही यह त्याग का वैभव मेरे मन में प्रकट होता रहा उससे ये जो बैंक बैलेंस जो जमा होता है इसका परिणाम इस तरह की सरल है ठाकुर ने कहा नाना कि सरलता होने से ही ईश्वर प्राप्ति होते हैं निरंजन के बारे में कहते हैं निरंजन कितना सरल पता है ना तो सरल बोलते बोलते ठाकुर भाव समाधि में चले गए तो यह सरलता देखिए कि ठाकुर की दृष्टि से एक बहुत बड़ा सद्गुण है साधक के लिए सरलता हमारे सर्वाइवल में शायद कभी बाधा हो सकती है लोग आकर के हमारे अधिकारों का हनन कर लेंगे लोग आकर के मैंने अपने खुद के बारे में यह देखा है मेरा नेचर बहुत ही ज्यादा इंट्रोवर्ट है और मैं इजली कोई भी चीज का काउंटर नहीं कर पाता कोई भी आकर के मेरे बारे में कोई भी उल्टा सीधा बोल देगा या ऐसा कुछ कर देगा तो मैं इजली इसको काउंटर नहीं कर सकता हूं मन में मन में दुख बहुत होता है किंतु फिर क्या करें मैं सोचता हूं कि मैं उसके जैसा होने का क्या जरूरत है भले चाहे उसको जद इच्छा है व उसके मन में कि ऐसा कुछ करें तो भले करें है ना व वो तुर आनंद जी महाराज एक एक बार कहते थे कि उनका सेवक उनकी सेवा करता है तो सामने में रयान जी उसके साथ में धर्म की सब बातें करते हैं आध्यात्मिकता की बातें करते हैं तो तुर्या जी कहते हैं कि वह मेरे देह की सेवा करता है मैं उसके मन की सेवा करता हूं अर्थात उसके मन की सेवा आध्यात्मिक चिंतन से उसके मन को परिपट्स है मेरे प्रति वो द्वेष उसको यदि वर्कआउट कर दे तो इस मैं और किसी तरह से तो उसकी सेवा करने का मुझे मौका नहीं मिलने वाला है किंतु अपना गुस्सा मेरे पर निकाल दे तो इस तरह से मैं उसके मन की सेवा करूंगा ऐसा सोच करके मैं छोड़ देता हूं तो ये देखिए कि ये अध्यात्मा और व्यवहार में इस तरह के काउंटर पैराडॉक्सेस हमेशा खड़े होंगे आध्यात्मिक उपदेश सुन कर के हमको लगता है कि अरे यह जो सब आदर्श बताए गए हैं प्रैक्टिकल में कितने संभव है यदि मैं मेरे साथ में जो कुछ भी होता है सब मेरे पूर्व जन्मों का परिणाम है तो क्या फिर मैं इस जन्म में हाथ प हाथ जोड़ कर के बैठा रहूं मेरे साथ में जो कुछ भी अन्याय होता है क्या मैं उसका कभी प्रतिकार ना करूं भारत देश 1000 साल तक गुलाम रहा तो यही सोच कर के तो गुलाम रहा कि मेरे कर्मों का फल है यदि एक बार कोई एक वीर खड़ा होकर के अपने दुश्मनों का सामना कर देता तो क्या हमारा यह हजार साल का यह जो दूषण एक्सप्लोइटेशन है वो तो नहीं हो होता यह कर्म की थिरी का किस तरह का यह इनडाइजेशन है किस तरह का यह वैषम्य वैम यह है इसका पैराडॉक्स है जो कि मेरे जीवन को इस तरह से खराब कर दे रहा है ऐसा विचार होगा और यह विचार जो है यह पैराडॉक्स है ये पैराडॉक्स को रिजॉल्व करना यही है हमारी साधक के रूप में सही जर्नी हम लोग आंख बंद करके सुबह में ध्यान करेंगे जप करेंगे ठाकुर को प्रार्थना करेंगे फिर यह प्राणा करेंगे कोई कोई आसन भी करेंगे कथामृत भी पढ़ लेंगे इस तरह से सत्संग में भी हम लोग भाग ले लेंगे यात्रा तीर्थ यात्रा करेंगे मंदिर में जाएंगे सब कुछ करेंगे जब तक हम यह सब करते रहते हैं हमको लगता है कि चलो बहुत बढ़िया सब कुछ हो रहा है मैं बिल्कुल अच्छे धर्म के रास्ते पर हूं किंतु द मोमेंट मैं मंदिर में से या सत्संग में से बाहर आता हूं और यह वास्तविक जगत के भीतर में मैं प्रवेश करता हूं यह जितनी भी आध्यात्मिकता थी जित ने भी अच्छे विचार थे सब पंखी की तरह उड़ जाते हैं किस तरह के समाज में हम रहते हैं जहां पर सब समय लोग मेरा शोषण करने के लिए आतुर रहते हैं मेरे पास में जो कुछ भी है वह छीनने के लिए मेरे पर आक्रमण करने के लिए मुझे आघात करने के लिए लोग तैयार रहते हैं उस समय मुझे मैं क्या करना चाहिए मेरा क्या कर्तव्य है क्या मैं अपने को डिफेंड ना करूं क्या मेरे अपने परिवार जनों की चिंता उनकी रक्षा के लिए कोई भी प्रयास ना ना करूं जो कुछ होता है चुपचाप सहन कर लू तो ऐसा तो नहीं है ये ऐसा कहना कि आक्रमण का प्रतिकार ना करना यह मेरे पूर्व जन्म का फल है यह पूर्व जन्म की थिरी का यह कर्म के सिद्धांत का इनडाइजेशन है स्वामी जी बाद में जो हमको यह सब चीजें बड़ा ही सुंदर रूप से समझाता है पूरा अपनी धार्मिक आध्यात्मिक थिरी को प्रैक्टिस में कैसे लाना ये ये दो दो पेजेस में स्वामी जी ने बहुत ही सुंदर रूप से बताया है और यह पैसेज भी हमने पढ़ा स्वामी जी कहते हैं कि यह कृपा पवन तो बह ही रहा है हमको अपना सड सिर्फ खोल देना है अपनी जो सेल है उसको खोल देना है इसके भीतर में पवन प्रवेश करेगा और अपनी नौका बहती रहेगी ऐसा कभी नहीं होगा कि स्वामी जी ने जो कहा है ना कि सेंट एंड सीनर अर्थात कि साधु और पापी दोनों के प्रति सेम कृपा है ईश्वर की साधु जो है उसमें इतनी अकल है कि अपना सर्ड खोल दे अपना सेल खोल दे और पापी है वह इसा मूर्ख तो नहीं है आज के जमाने में ऐसा कोई नहीं होगा जिसको यह पता ना हो कि सत्य वचन बोलना चाहिए नहीं बोलना चाहिए या चोरी नहीं करनी चाहिए ऐसा किसी को ना पता हो ऐसा तो इस जगत में कोई नहीं होगा किंतु भीतर में से एक तमस होता है आलस होती है एक एक मढ़ता होती है जो कि हमको सत मार्ग प नहीं जाने देती तो पापी कहो ना कि साधु कहो सबके ऊपर में ईश्वर का कृपा ईश्वर की कृपा समान रूप से उसकी वृष्टि उसकी बारिश हो रही है हमको सिर्फ उसको स्वीकार करना है ग्रहण करना है डू यू मीन टू सी ट डू यू मीन टू से ट क्या आप यह कहना चाहते हैं ही द लॉर्ड ऑफ क्रिएशन वो जो कि इस सट के सर्जक है लुक्स अपॉन द पेटी थिंग्स ऑफ अवर लाइफ इन द सेम लाइट एस वी डू क्या हम अपने जीवन में प्रत्येक छोटी-छोटी घटनाओं से जो विचलित हो जा रहे हैं तो क्या आपका ऐसा मानना है कि ईश्वर भी इस तरह से विचलित हो जाएंगे वह कालीवाड़ा कि वह राधाकांत के मंदिर में जो गहने हैं वह चोरी हो गए तो मथुर बाबू जाकर के राधाकांत के मंदिर में भगवान कृष्ण को कहते हैं कि ठाकुर तुम कैसे हो तुम अपने खुद के गहनों की रक्षा नहीं कर पाए ठाकुर अर्थात ईश्वर को संबोधित करके कहते हैं तो अपने ठाकुर श्री राम कृष्ण वहां पर खड़े थे उन्होंने क्या कहा अरे मूरख ये जो गहने है वो तुम्हारे लिए ही गहने है ईश्वर के लिए तो माटी और पत्थर बराबर है जो कि पूरा विश्व ब्रह्मांड जिनका है मान लीजिए कि एक पृथ्वी में खुदाई करके आपको इतने सारे हीरे सोना और हीरा वगैरह मिलते हैं एक ही पृथ्वी में से तो ऐसा एक नहीं इस विश्व ब्रह्मांड में करोड़ों करोड़ों ग्रह है इस सभी करोड़ों ग्रहों की गर्भ में जितने भी यह प्रेशियस मेटल कहते हैं ना कि ये सोना है फिर ये सिल्वर है गोल्ड है डायमंड है सब कुछ तो ईश्वर की सृष्टि है तो इतने करोड़ों करोड़ों ग्रहों के भीतर में गर्भ में जो कितना लाखों लाखों लाखों टन यह सोना वगैरह जो छुपा हुआ है उस सबके जिनने सृष्टि की है उसके तीन चार गहने चूरी हो ग तो तुमको जितना आघात होता है तुमको लगता है कि भगवान को इतना आघात होगा तो वैसे ही यह स्वामी जी कहते हैं कि हमको जो छोटे-छोटे प्र प्रॉब्लम्स दिखाई देते हैं तुम क्या सोचते हो क्या यह सब प्रॉब्लम ईश्वर को भी दिखाई देते हैं व्ट ए डिजनरेट आइडिया ऑफ गॉड ट वुड बी ईश्वर के बारे में कैसी घिनौनी समझ यह है वी आर द लिटल पपीज वी आर लाइक लिटल पपी मेकिंग लाइफ एंड डेथ स्ट्रगल्स हियर हम लोग छोटे वह कुत्ते के बच्चे की तरह है जो कि जीवन और मृत्यु का संग्राम कर रहे हैं एंड फूलिशली थिंकिंग दैट इवन गॉड हिमसेल्फ विल टेक इट एस सीरियसली एज वी डू और मूर्ख की तरह सोचते हैं कि यह परीक्षा का टेंशन मुझे जितना है मैं भगवान को जाकर के प्रार्थना करूंगा तो भगवान भी उसी टेंशन में आ जाएंगे और दौड़े दौड़े आएंगे चलो चलो इसको बचा दो पर शक्षा के टेंशन से या तो फिर घर में किसी का बीमारी है किसी का ऑपरेशन करना है वो टेंशन है तो ईश्वर को भी ये टेंशन आ जाएगा ऐसा नहीं है देखिए ऐसा नहीं है कि ईश्वर इंडिफेंड है तो वो जो ठाकुर की कहानी है कि शिव और पार्वती बैठे हुए हैं वहां पे कैलाश में और एकाएक भगवान शिव दौड़े चले गए तो पार्वती ने पूछा क्या हुआ क्या हुआ भगवान कहां जा रहा है तो भगवान ने कहा कि देखो मेरा एक शिष्य है मेरा एक भक्त है वो वहां पर किसी घाट से जा रहा है वहां धोबी लोगों ने धोक के कपड़े सूखने के लिए रखे उसके ऊपर में उसका पेर पड़ गया तो ये धोबी लोग उसको मारने के लिए जा रहे हैं इसलिए मैं उसकी रक्षा करने के लिए जा रहा हूं तो मां पार्वती ने कहा ठीक है चलो भगवान का तो कर्तव्य ही है अपने भक्त की रक्षा करने का थोड़ी देर में देखा तो भगवान शिव आकर के वापस बैठ गए तो मां ने कहा कि क्यों भगवान आप क्यों वापस आ गए तो भगवान ने कहा देखो वो जो मेरा भक्त था उसी ने अपना बचाव के लिए पत्थर उठा लिया तो यदि वह अपना बचाव करने के लिए खुद ही तत्पर है तो उसको मेरी जरूरत नहीं हैय विरोधाभास नहीं लगता है कि यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि हमा यदि मैं रास्ते से जा रहा हूं दो तीन लोग मुझे मारने के लिए आए तो मेरे लिए बहुत बड़ी घटना है इससे ईश्वर को क्या है यदि एक और यहां पर ऐसा कहते हैं यहां दूसरी ओर ठाकुर ने खुद कहा है कि भगवान जाएंगे दौड़े-दौड़े हमारी रक्षा करने के लिए जब तक हम अपने को डिफेंड ना करें तो पैराडॉक्स अवर अटेंप्ट टू ले द ब्लेम ऑन हिम मेकिंग हिम द पनिशर एंड द रिवर्ड आर ओनली फलीज हम अपनी समस्याओं अपने ईश्वर के ऊपर में डाल देते हैं और कहते हैं कि वह मुझे शिक्षा दे रहा है या तो फिर वह मुझे रिवर्ड दे रहा है वह मुझे रिवर्ड यानी कि वह इनाम दे रहा है और वही मुझे पनिशमेंट दे रहा है तो यह बिल्कुल गलत है ही नादर पनिश नोर रिवार्ड्स एनी वो किसी को भी पनिश नहीं करते और किसी को भी वह रिवर्ड नहीं देते हिज इनफाइनों में अनफेडिंग अन स्वर्व अन फेलिंग अर्थात की बिना किसी चुक के अन स्वर्व अर्थात की बिना किसी विधा के अपॉन अस डिपेंड्स हाउ वी यूज इट हमारे पर डिपेंड करता है कि ईश्वर की कृपा से हम क्या करें ईश्वर की कृपा का हम कहां पर इस्तेमाल करें इससे कैसे बेनिफिट प्राप्त करें अपॉन अस ब्लेम नादर मैन नोर गॉड ना ही मनुष्य को दोष दो ना ही ईश्वर को दो दोष दो नोर एनी वन इन द वर्ल्ड ना ही इस जगत में और किसी को दोष दो व्हेन यू फाइंड योरसेल्फ सफरिंग ब्लेम योरसेल्फ एंड ट्राई टू डू बेटर जब आप किसी संघर्ष कर रहे हैं जब आप किसी मुसीबत में फंसे हुए हैं अपने को खुद को दोष दो और अपनी ही परिस्थिति को सुधारने का अपने को खुद को संभालने का सुधारने का प्रयास करो जैसे कि उपदेश लगता ही बड़ा ही सुंदर किंतु जैसे ही हम प्रैक्टिस में जाएंगे कितने ही पैराडॉक्स एक के बाद एक हमारे सामने खड़े होंगे इस पैराडॉक्स का क्या कोई सोल्यूशन है कि ऐसा एक एब्सलूट थिरी है कि मेरे साथ में जो कुछ भी हो रहा है उसके मैं ही जिम्मेदार हूं और इसके पीछे में देखिए कि अद्वैत वेदांत भी तो इसी बात की पुष्टि करता है अद्वैत तो ता है कि जगत में जिस चीज को भी आप देख रहे हो जो कोई भी घटना है जो कोई भी मनुष्य है वह तो सिर्फ वही माया का विभिन्न विभिन्न रूप से एक रूपांतरण मात्र है सही में क्या है तो सही में ब्रह्मण ही है ब्रह्मण को छोड़ कर के बाकी सब भ्रम समान है बाकी सब अनित्य है अस्थाई है तो इस दृष्टि से भी यदि देखे तो भी देखा जाएगा कि मैं ही एक एब्सलूट सकता हूं मेरा ही एक सेंट्रल एसिस्टेंसिया मुझे साधन पथ पर आगे ले जाने के लिए तो जदिया है कि ये पुनर्जन्म वाद है वो पढ़ कर के जब मैं संसार में प्रवेश करता हूं तो पता है क्या होता है सब कंट्रा क्शन से सब तरह की समस्याओं से मैं घिर जाता हूं तो इसका सॉल्यूशन क्या है आध्यात्म विज्ञान क्या कहता है कि ऐसा पैराडॉक्स क्यों खड़ा होता है तो क्या है पता है ये वीडियो गेम की तरह है कि आप फर्स्ट लेवल पे है तो बहुत सारे आपके सामने वोह राक्षस क हो ना कि जो कुछ भी है आपको मारने के लिए आएंगे फिर जैसे ही आपने सबका संहार कर दिया आप सेकंड लेवल प जाएंगे सेकंड लेवल पे और ज्यादा आपको कठिनाई होगी और ज्यादा कॉम्प्लेक्शन कर लिया अब थर्ड लेवल प जाएंगे तो वैसे ही जगत में जब रहते हैं और सामने समस्या आती है तो मेरा मन विष से यदि भर जाए विद्वेष से यदि भर जाए कि अरे ये ऐसा है वो ऐसा है अर्थात कि मैं हारता ही जाऊंगा हारता ही जाऊंगा और संसार रूपी दलदल में और ज्यादा गहरा फसता जाऊंगा जदी मैं यह सोचता हूं कि हां जो कुछ भी है चलता है चलने दो यह तो माया का जगत है माया के जगत में कुछ भी स्थाई नहीं है कुछ भी नित्य नहीं है एक चीज और दूसरा यदि कुछ होता भी है मेरे साथ तो पूर्व जन्म के पूर्व कर्मों का परिणाम है मैं इस जन्म में अपने को बेटर करने का प्रयास करूं ऐसा करके यदि मैं एक पॉजिट आउटलुक रखता हूं जितनी भी समस्या आती है उसको मैं पॉजिटिवली काउंटर करता हूं तो फिर देखिए कि धीरे-धीरे करके मैं वीडियो गेम के एक के बाद एक लेवल में पास होता जाऊंगा हायर और हायर लेवल में जाता जाऊंगा मैं अपना खुद का ही उदाहरण देता हूं मेरे साथ में ऐसा बहुत होता है कि कोई भी मुझे कुछ कह देता है तो मैं सामने काउंटर नहीं कर सकता और मन में ही मन में बड़ा ही वो व्यथित होता रहता हूं तो किंतु इसका सॉल्यूशन क्या है मैं सामने वालों को ऊपर से गाली देना शुरू कर दूं क्या मैं उसी के लेवल का हो जाऊं क्या कि अपनी जो या तो एक है या तो दूसरा है कि मैं व्यथा में ही मैं अपने मन की यह जो सफरिंग है उसमें ही ऐसा डूब जाऊंगा कि मैं पूरा डिप्रेसो जाऊंगा लोग कहते हैं ना कि तुम काउंटर नहीं कर पाओगे तो तुम मर जाओगे जो डर गया सो मर गया तो या तो मुझे काउंटर करना है या तो फिर मैं डिप्रेशन में चला जाऊंगा किंतु देर इज अ थर्ड वे देखो काउंटर करना है वो किसी का पता है वो सोश वो नेशनल पे नेशनल लेवल पे यह नहीं सोचना है कि मेरे दुष्कर्म का परिणाम है कि विदेशी आक्रमणकारी आ रहे हैं नेशनल लेवल पे कम्युनिटी लेवल पे हमेशा काउंटर करना है किंतु इंडिविजुअल लेवल पे हमको ट्रांसडर्म में फंसते रहेंगे मान लीजिए कि मैं कोई मेरा बुरा मेरे बारे में बुरा भला कहता है या तो मेरा अहित करने के लिए आता है मैं अहित का काउंटर तो करूंगा मान लीजिए किंतु मेरे मन में यदि विष प्रकट हो गया कि हां विद्वेष प्रकट हो गया तो मैं उसी के लेवल का हो जाऊंगा काउंटर भी जद करना है तो मन के भीतर में विद्वेष प्रकट नहीं होना चाहिए अपना मन जो है इट शुड ट्रांसडर्म एंड काउंटर एक्शन एक्शन एंड रिएक्शन इसके ऊपर में मन को जाना चाहिए यह है प्रैक्टिकल होना यदि कोई ऐसा कहेगा कि हां यदि मैं सन हूं और मेरे देश पर आक्रमण हो रहा है तो क्षत्रिय के रूप में मेरा धर्म है कि मैं अपने देश की रक्षा करूं किंतु जो मेरे दुश्मन है उसके मैं जद हत्या भी कर रहा हूं किंतु उसके प्रति मेरे मन में कोई वेर भाव नहीं होना चाहिए मैं यह कर रहा हूं क्योंकि यह मेरा ड्यूटी है यह मेरा धर्म है इसलिए नहीं कि मैं सामने वाले को धिक्कार आता हूं मेरे दुश्मनों को धिक्कार आता हूं इसलिए नहीं मैं धर्म से प्रेरित होकर के यह कर रहा हूं इस तरह से एक पॉजिटिव आउटलुक हमको हमेशा जीवन में डेवलप करना है यदि मैं इंडिविजुअल लेवल पर कोई मेरे साथ में अहित करने को आए और मैं अहित का कोई काउंटर ना करूं तो ऐसे नहीं होगा व तो मेरा जीवन ही बर्बाद हो जाएगा किंतु धर्म के आधार पर करना है मन को यह समझाना है कि यह संसार में रह रहे हैं संसार का जो धर्म है मैं उसका पालन कर रहा हूं सामने वाले के प्रति मेरे मन में थोड़ा सा भी विद्वेष नहीं है इस तरह से करना है मन में जद विद्वेष भर गया देखिए डिफीट क्या है डिफीट है मन को विद्वेष से भर जाना जैसे ही मैं मेरे साथ में जो कुछ भी हो रहा है यह पूरा संसार मेरे सर के ऊपर में जो कुछ भी डाल रहा है इसका परिणाम विद्वेष हुआ मेरे मन में तो मैं हार गया और इसका परिणाम जद पॉजिटिविटी हुआ तो मैं जीत गया अभी मैं एक्चुअली दूसरों का सामना करूं ना करूं वह साइड पर है फर्स्ट है कि मेरे मन के साथ में क्या हो रहा है यदि मेरे साथ में कोई यहां पे मैं बैठा हूं कोई मैं सुना कि कोई मेरे बारे में उल्टा-पुल्टा कुछ बोल रहा है अच्छा इस इसका अभी मैं उसके सामने जाकर के उसका प्रतिवाद करूं कि ना करूं वह बात की बात है व सुन कर के ऐसा कोई रिपोर्ट सुन कर के यदि मेरे मन में उसके प्रति विद्वेष अड़ा नहीं होता है तो मैं जीत गया और यदि उसके प्रति मेरा विद्वेष मेरे मन में विद्वेष खड़ा होता है तो मैं हार गया अभी यही है सही हार और जीत मैं जाकर के उसको काउंटर करूं ना करूं जैसे स्वामी जी का है स्वामी जी के जीवन में देखिए कितना काउंटर टव जीवन है वो गाड़ी में जा रहे हैं वो टिकट चेकर आकर के स्वामी जी के साथ में झगड़ा कर रहा है कि अरे तुम इस डब्बे में से चले जाओ तुम तो फकीर हो ये सेकंड क्लास या फर्स्ट क्लास में क्यों बैठे हो तो स्वामी जी ने ऐसा उसको डांट दिया बेचारा दुम दबा के भाग गया किंतु क्या इसके प्रति स्वामी जी के मन में विद्वेष था इसके प्रति स्वामी जी के मन में क्रोध था नहीं था मोमेंट अरली शायद क्रोध प्रकट हो सकता है मोमेंट कभी वीर भाव दिखाने की जरूरत पड़ सकती है मन स्वामी जी का पूरा ब्रह्म में लीन था मन में कभी भी दूसरों के प्रति कटु भाव प्रकट नहीं होगा यह जो मिशनरी लोग जो कि स्वामी जी को सब समय उनके पीछे में लगते थे स्वामी जी जिनके जिनके घर जाते थे अमेरिका में उनको यह लोग फोन करके कहते थे कि अरे भाई आपके घरों में जो युवान स्त्रियां है इसके जो ये जो आता है भारत से एक फकीर आया है उसकी नजर इनके ऊपर में पड़ेगी और इनका चरित्र हनन करेगा इसको आप अपने घर में क्यों रखते हैं तो यह स्वामी जी के जो एडमाइन कर के बड़ा हंसते हंसते स्वामी जी को कहते हैं देखिए आपके बारे में लोग ऐसा कह रहे हैं और लोग सब बैठ कर के हंसते थे इतना उन लोगों का स्वामी जी के प्रति डेडिकेशन था कोई कोई लोग थे स्वामी जी को नहीं आने देते थे स्वामी जी समझ जाते थे कि अच्छा ये उनका वो जो प्रोपेगेंडा है मेरे अगेंस्ट में ये यहां पर काम कर रहा है तो क्या स्वामी जी उनको गाली देंगे क्या अपने मन से उनको क्या उनके प्रति विद्वेष करेंगे नहीं करेंगे उनको काउंटर करेंगे किंतु काउंटर करना ना करना वो साइड मने वो बाय प्रोडक्ट है मेन है अपना मन मन के साथ में क्या होता है यदि मेरा मन मायूस हो जाता है इस तरह की चैलेंज से तो मैं हार गया बाहर में चाहे मैं कितना ही जाकर के जीतूं यहां पे कोई आकर के मेरे बारे में कुछ कह गया मैं सामने से जाकर के उसके साथ में ऐसा झगड़ा किया कि वह डर के मारे मेरे साथ में कभी वह ऐसी बातें नहीं करेगा किंतु ऐसा करने से मेरा मन जो उस मेरे मन के भीतर में जो विष प्रकट हुआ तो बाहर में तो तो शायद मैं जीत गया भीतर में मैं हार गया और यदि मान लीजिए कि मेरे बारे में कोई ऐसा कुछ कहता है मैं कहता हूं इसको क्षमा कर दो जाने दो डजन मैटर मेरे अपने मन को संभाल के रखा तो मैं भीतर में जीत गया बाहर में शायद हार गया और थर्ड है जैसा स्वामी जी का वे है कि बाहर में भी जाकर के उसको सुना कर के आना है और मन में भी अपने मन को भी ठीक रखना है बाहर में भी जीत और भीतर में भी जीत दिस इज द वे ऑफ विवेका नंद स्वामी जी कहते हैं कि यदि सामने कोई आकर के हमको कुछ बोल दे गाली दे दे तो चुपचाप थोड़ी ना सुन लेंगे ठाकुर को यदि कोई ऐसा कुछ बोल दे ठाकुर ने खुद अपने योगानंद जी को कहा था कि अरे भाई योगानंद जी के कोई तुम्हारे गुरु के बारे में कोई उल्टी पुल्टी बात करता है तुम चुपचाप सुन के आ गए क्यों तुमने कुछ काउंटर नहीं किया तो खैर वो तो स्वभाव देख कर के कहते थे निरंजनानंद देखिए कि यही थिरी है निरंजनानंद जी जब वह नौका में आ रहे थे दक्षिणेश्वर में तो कुछ कुछ लोगों ने निरंजनानंद जी के सामने ही ठाकुर का ठाकुर की निंदा की तो निरंजनानंद जी निरंजन उस समय जो तो कॉलेज के पढ़ते हुए लड़के थे तो निरंजन तो निरंजन बड़ा ही नाराज हो गया और ऐसा बोला गुस्से से मिस नौका को डुबा दूंगा तो वे लोग तो बड़े डर गए और बोला ठीक है ठीक है हम लोग नहीं करेंगे ठाकुर की निंदा फिर जब निरंजन आक के ठाकुर को बोलता है महाशय लोग आपकी निंदा कर रहे थे मैंने कगा कि नौका को डुबा दूंगा तो ठाकुर कहते हैं अरे क्रोध चंडाल है क्रोध के भीतर में फसो ग तो सब तुम्हारा जीवन जाएगा निरंजन को ऐसा कहा और योगेंद्र महाराज को योगेंद्र महाराज के सामने किसी ने ठाकुर की निंदा की बिना किसी प्रतिवाद के चले आए तो ठाकुर ने क्या कहा अरे गुरु निंदा सुनकर के तुम्हारे मन में कोई प्रकट नहीं हुआ को वीर भाव चुपचाप सुन के कायर की तरह आ गए ये कैसा है तुम्हारा तो हमको लगेगा कि अरे ठाकुर दोनों को विरोधाभासी क्यों कहता है किंतु विरोधा वासी जो कहते हैं इसके पीछे में यह थिरी है बाहर में आप काउंटर करे ना करें आपके मन को आपको ठीक रखना है बाहर में कुछ गलत होने से मेरे मन में मायूसी द्वेष जहर या गुस्सा यह यदि कुछ प्रकट होगा तो मैं हार गया बाहर में चाहे मैं जीत भी जाऊं डंट मैटर और बाहर में चाहे कुछ भी हो जाए हार जाऊं ना कि जीत जाऊं किंतु मेरा मन दृढ़ रहता है मेरा मन किसे सभी को क्षमा कर देता है जितना भी जहर मेरे प्रति निकाला गया है उसको चुपचाप सहन कर लेता है तो मैं जीत गया ही चाहे बाहर में कुछ भी हो जाए एंड थर्ड इज विवेकानंद वे बाहर में भी जीतो भीतर में भी जीतो किंतु यह धीरे-धीरे करके होगा एक दिन में होने वाला नहीं थिरी धीरे-धीरे करके हमारे मन में जाएगी हमारे मन पर धीरे-धीरे करके इसका असर होगा और हम अपना जीवन इस विवेकानंद वे के ऊपर में ढालना शुरू करेंगे तो आज ही तक कल फिर सुनते ओम शांति शा शांति शांति हरि तसत श्री राम कृष्णर्पण
Questions & Answers
मस्तु य ये साधना जिसको कहते हैं ना कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग और राज योग यह साधना ही है अपने पुराने कर्मों को काटने का एकमात्र उपाय अभी जैसे मान लीजिए कि इस जन्म में मैंने मान लीजिए कि किसी के साथ कोई दुष्कर्म किया तो उसका सलूशन यह होगा कि मैं उसको जाकर के उसके सामने पश्चाताप करूं माफी मांग लू और उसके साथ में सुलह कर दूं तो वो उस जन्म में कट जाएगा किंतु नेक्स्ट जन्म में जद दुष्कर्म जाएगा ना तो नेक्स्ट जन्म में तो मैं उस मुझे पता ही नहीं है कि मेरे साथ में क्या प्रॉब्लम है राइट तो नेक्स्ट जन्म में तो उसको काटने के लिए साधना ही है यानी कर्म दो तरह के हैं जिसको कि हमको काटना है इस जन्म में जो हम दुष्कर्म करते हैं हमको पता है कि मैंने क्या-क्या किया है उसको रूट के जाकर के मैं उसको कर सकता हूं पूर्व जन्म के तो मुझे पता ही नहीं है कि मैंने क्या किया है तो उसके लिए साधना के अलावा कोई उपाय ही नहीं है ये साधना का अर्थ ही यही है एक्चुअली मुझे ब्रह्म ज्ञान क्यों नहीं हो रहा है ये माया का आवरण है माया का आवरण क्यों है क्योंकि यह कर्मों का परिणाम है तो यही मने कर्मों को काटना ही एक साधना है साधना का अर्थ यही है कि कर्मों को काटना साधना इसलिए नहीं करते ईश्वर को प्राप्त करने के लिए ईश्वर तो मैं हूं ही हूं ऐसा तो नहीं है कि मुझे बैंक में जाकर के मेरे अकाउंट में से पैसा लेना है पैसा मेरी पॉकेट पकेट में ही है मुझे पता नहीं है कि कौन से पॉकेट में है वो बेसिक समझ लेना है कि मेरा मन शांत रहना चाहिए मैं कोई भी कोर्स पसंद करूं मेरे मन में विष प्रकट नहीं होना चाहिए यह है आपका मुझे ऐसा लगता है जैसे निरंजन महाराज और योगेंद्र महाराज यदि मैं काउंटर करता हूं और मेरे मन में क्रोध आता है तो वो काउंटर मेरे लिए नहीं है यदि मैं काउंटर करता हूं और मेरा मन फिर भी मैं उसको वश में करके रहता हूं कि हां दूसरों के प्रति मैं लॉन्ग टर्म विद्वेष तो नहीं ही खड़ा होने दूंगा तो मैं काउंटर कर सकता मेरा राइट है मैं एलिजिबल हूं काउंटर करने के लिए अब आप एलिजिबल है कि नहीं काउंटर करने के लिए डिपेंड्स के आपका माइंड कैसे काम करता है साधना मन का जो भ्रम है उसको दूर करता है धीरे-धीरे साधना का कार्य ही यही है भ्रम को दूर करना राइट वही उसका मेन कार्य है और साधना बहुत तरह की जैसे कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान सभी तो साधनाएं हैं अपना ऑर्डर इतना लिबरल है कि हमको सब अपॉर्चुनिटी देता है आपको यदि आश्रम में आकर के सेवा देनी है दैट इज अ साधना जब सद ग्रंथ का पाठ कर सकते हैं दैट इज साधना एनीथिंग इ साधना साधना विल ब्रिंग क्रिस्टल क्लेरिटी टू अवर विवेक जिसको हम यह जो सार असार चिंत उसको कहते हैं विवेक यह विवेक प्रकट कब होगा कि कौन सी परिस्थिति में मुझे कैसे बिहेव करना है वो विवेक कब प्रकट होगा तो साधना करके यह एक सुंदर उदाहरण है मां का वो जो मां के पिताजी का भाई उनका नाम था नील माधव तो वह बूढ़े हो गए थे और मां के साथ में ही उद्बोधन में रहते थे अभी वो बूढ़े हैं और रसोइए के रूप में काम किया था किसी राजा के पर्यंत घर में महल में तो अभी ठीक है बूढ़े हो गए हैं तो नेचर थोड़ा सा खिट पीट वाला हो जाता है तो अभी उद्बोधन तो बना ही है मां की सेवा करने के लिए अभी उसमें ऐसा एक किसी व्यक्ति को लाकर रख दे मां जिसको खुद को बड़ा रिस्पेक्ट देती है तो बाकी सब लोगों के प्रति तो एक कंफ्लेक्स नेचर ऐसा है कि किसी को उसके प्रति थोड़ा सा भी सहानुभूति रिस्पेक्ट नहीं है किंतु मां सब समय उसको रिस्पेक्ट करती है तो अभी मैं कैसी परिस्थिति में फंस जाऊंगा मां के लिए बहुत अच्छे-अच्छे आम वगैरह आते हैं तो मां क्या कहेगी कि जाकर के पहले उनको खिला देगी तो अभी मां के सेवक बड़े ही नाराज होता ते मां मां आपके लिए सब लोग हला रहे हैं आप नहीं खा कर के उनको क्यों खिला रही है तो मां ने कहा देखो वो बूढ़े हैं कितने दिन जिएंगे उनको उनकी मन की वासना पूरी हो जाने दो हम तो पूरा जीवन भर यह सब खाते रहेंगे तो अ ये सेवक लोग ऐसा बड़े छिड़ जाते थे भीतर भीतर मां जो भी है सबसे पहले उनके लिए जो अच्छी अच्छी चीज आएगी जा करर के उनको देंगे तो इस परिस्थिति में मेरा विवेक क्या कहता है मैं मां की सेवा करने के लिए यहां आया हूं जगदंबा स्वयं और वही जगदंबा जाकर के ऐसे पागले बूढ़े के ऊपर में इतने राइट वो जो क्रोध प्रकट होगा य आई लिटरली एक्सपीरियंस मैं पढ़ रहा था मैं भी बड़ा गुस्सा हो गया था आई कैन आइडेंटिफिकेशन किंतु विवेक तो यही कहता है ना कि मदर नोज बेस्ट वो विवेक जागृत करने के लिए आपको मां की कितनी मां को कितना समझना पड़ेगा कि