Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Adbhutananda
असिनो adbhutanand जी महाराज इस नॉरेटिंग डी लास्ट दे ऑफ ठाकुर ऑन अर्थ एंड ही सेड इट हो ठाकुर अटेंड महासमुंद आफ्टर मिडनाइट अन एंड द कोल्ड रामलाल दादा एंड रामलाल दादा ऑफ ठाकुर उपाध्याय हिज नाम वाज सो दे बोथ कैप्टन यू शुड डू सैम मसाज बट व्हेन डी इन डी मॉर्निंग व्हेन डॉक्टर महेंद्र नाथ सरकार के ही फाउंड ठाकुर ऑलरेडी लेफ्ट है बॉटल बॉडी बिहाइंड एंड आफ्टरवार्ड्स व्हेन मदर कम तू नो मैन शारदा देवी मैन कम तू नो सी कम इन ठाकुर्स रूम डेट महाकाली वही डिड यू लेफ्ट मी अलोन लेटर ऑन लेटर मस से स्थिर मैन शारदा मांस रेसिलियंस स्ट्रेंथ ऑफ कैरक्टर एंड एबिलिटी तू कंट्रोल हर इमोशंस विथ डी ओनली टाइम सी किड इंफ्रंट ऑफ डी devottings व्हेन सी फर्स्ट मेक डेम तू मेक ठाकुर आफ्टरवार्ड्स सी बी कम कंपलीटली साइलेंट सो दिस मच सी शो यस्टरडे लेटर इन काशीपुर kramatorium सिमेट्री एंड एस आई सेड डेट फ्रॉम बेलूर मठ सी मेक प्रणाम तू दक्षिणेश्वर एंड काशीपुर क्रीमेशन ग्राउंड बोथ प्लेसिस बिकॉज डेट नाइट आई वेंट तू क्रीमेशन ग्राउंड वाज नॉट एबल तू गो तू क्रीमेशन बिकॉज रामबाबू टोल्ड हिम डट समवन विल हैव तू स्टेट डी गार्डन हाउस सो यू स्टे ही सेड तू लेटर एंड लेटर ऑन वीं अक्षय बाबू कॉम तू रिलीव यू कैन कम तू क्रीमेशन ग्राउंड सो लातूर टेड ऑन एंड लेटर ऑन डी नाइट एबल तू विजिट क्रीमेशन ग्राउंड व्हाट डिड यू फाउंड ही सो डेट शशि वाज नियर डी फ्यूनरल पायल विद अन फैन इन हिज हैंड शशि महाराज वैन ऑफ डी टाउन चेस्ट सेवक ऑफ ठाकुर सी नो डेट शशि महाराज गिवन डी नाम राम कृष्णानंद भाई स्वामी विवेकानंद बिकॉज इट 1.7 विवेकानंद कृष्ण राम कृष्ण नंदन नाम फॉर मैसेल्फ बट दीपाली देवोटेड ठाकुर ठाकुर वाज क्रीटेड ही सो डेट शशि महाराज विथ फेम वो सिटेड नियर डी फ्यूनरल पाया एंड शरारत शरत महाराज वास विथ हिम बोथ शरद एंड लॉरेन डेट इसे लव तू महाराज इस वे ऑफ सेइंग डी नाम नरेंद्र स्वामी विवेकानंद बोथ शरद एंड लोरेन सो तू कंसोल शशि आई तोक हिम बाय डी हैंड एंड ट्रेड तू लिफ्ट ही स्पिरिट्स ए लिटिल बट ही रेमैन मोशनलेस विद ग्रेट सी ऑल डी बॉयज वेयर दीपाली अफेक्टेड की ठाकुर आईडेंटिफिकेशन विथ आदर बॉयज बट ही रिमाइंड मोशनलेस विद ग्रेट दें शशि कलेक्टेड एशेज एंड बोनस ऑफ ठाकुर एंड पुट दें इन्हें न डी वे इट इस डी ट्रेडीशन विथ हिंदू स्टेट वन सी crematum कलेक्ट्रेट बोनस डेट रीमेंस एंड दें सी प्रिजर्व डेम इन ऑर्डर सो डेट सी कैन प्रिजर्व मेज दिस इस इन डी केस ऑफ आदर पीपल एंड इन डी केस ऑफ ठाकुर सी प्रिजर्व हिज रेमैन सो डेट सी कैन वरशिप इन देयर इस वैन इंटरेस्टिंग फैक्ट लेटर ऑन इट वैन पॉइंट स्वामीजी सेल्स डेट क्रिएटिंग ठाकुर वास अन ग्रेट क्राइब है आई डोंट नो वही ही एक्जेक्टली सेस थी बट ही सेस डेट माय इंटरप्रिटेशन इस डेट ही मिटे हैव वांटेड तू कीप ठाकुर इन अन मम्मी साइड फॉर्म सो डेट पीपल कैन एक्चुअली सी ही इस बोर्ड एंड दे कैन मेक प्रोनाउंस तू हिम आई थिंक दिस माय दिस आइडिया हु नो बट इट वैन पॉइंट ही इट्स सेड दिस हो व्हाट गोज ऑन इन डी माइंड ऑफ रेल एंड दिस पीपल डिफिकल्ट तू नो बट दिस इस माय इंटरप्रिटेशन सो एनीव्हेयर देख कलेक्टेड हिज असीस एंड मोस्ट एंड पुट थे इन ऑन एक कलश कलश के भीतर में उनको रखा ही प्लेस ऑन ऑन हिज हेड तू डी गार्डन हाउस वेयर इट वास्ता ऑन ठाकुर्स बेड दिस कलर्स इन विच thakursst देयर विल गेट तू गेट तू काशीपुर गार्डन हाउस एंड पुट इट ऑन डी विच वाज यूज्ड की ठाकुर एस डेट ठाकुर हेड अपर तू मैन इन अन विज़न एंड इट्स forebin फर्स्ट फॉर बी डैन हर तू रिमूव हर ब्रेसलेट सी सच ए मिरर फास्ट आवे एवरीवन वेयर दीपाली सेडान डेट युग होता है एंड ही फैंटम ही डिड हिज लीला ही गैदर्ड अस ऑल टुगेदर एंड दें ही वेट आवे व्हाट विल हैपन तू अस सो डेट नेक्स्ट दे वर सो डिप्रेस्ड सईद एंड यू नो मॉर्निंग स्पिरिट ए टाइम दिस कोलम गेम एंड इन्फॉर्म डी देवोतीस इंसीडेंट ऑफ फ्रीडम मोर राइट तू हैव अन्य गुड थिंग्स इन हर लाइफ सी विल हैव तू वेयर व्हाइट सदी सी विल हैव तू वेयर नो ज्वैलरी ऑल दिस हर्ष रूल्स राइडर्स इन ओवर हिंदू सोसाइटी इट demdev सो अकॉर्डिंग्ली इस सी हैव डिसकस्ड दिस बिफोर अलसो डेट मदर एंड ठाकुर ओल्ड हिंदुइज्म एंड स्टार्ट ए न्यू इन्वेस्टर नो दे गेम तू सो डेट देयर इन recindel डी स्पिरिट ऑफ असिएंट हिंदुइज्म सो डेट डी वे व्हेन सी सी व्हेन यू ऑफ अन लिटिल फायर अमोंग डी कॉल्स और वुड व्हाट हैपेंस आफ्टर अन विले इन यागना इफ यू गो तू टेंपल रामकृष्ण आश्रम एंड यू मैं परफॉर्मेंस ऑफ होम वेयर सी गेट डी लॉर्ड वुड्स एंड फायर व्हाट हैपेंस एशेज कवर डी फायर आफ्टर अन फाइल अंत टेंपल्स डी फायर बट यू जस्ट रिमूव डी इस इन डी फायर विल recindles सो दिस वाज व्हाट एड हैपन विद इंडियाज अप डेट असिएंट स्पार्क डेट असिएंट लैंग्वेज तिल देयर बट कवर्ड की दिस midivalis विच कॉज्ड बाय दी अराइवल ऑफ इस्लामी इनवेडर्स सो यू जस्ट रिमूव डी इस एंड डी फायर विल recinder यू डोंट हैव तू जस्ट ब्रेकडाउन एंटर्ड यज्ञशाला एंड रिबिल्ड एंड न्यू यंग माशाल्लाह यू डोंट हैव तू डू डेट सो डेट वाज ठाकुर्स एंड मदर एंड स्वामीजी'एस एप्रोच सो फॉलोइंग डियर मदर डिड'टी से था आई विल नॉट फॉलो अन्य हिंदू ट्रेडीशंस सी आय विल फॉलो इट तू डी लेटर सो इन ऑर्डर तू परफॉर्म ऑल डी थिंग्स सी वाज गोइंग तू रिमूव ठाकुर अपर एंड सेठ आई डोंट नो बीदर इट इसे यस यस ठाकुर स्टेज आई हैव गान तू अंदर प्लेस हर आई एम आई हैव जस्ट पास फ्रॉम वैन रूम आई सी गेट शिप रूम के आर एक रूम में दिस इस व्हाट सेज इन बंगाली वेयर हैव गान आई हैव गान सिंपली फॉर वैन रूम तू अंदर रूम इट इस नॉट लाइक डेट आई हैव गान फ्रॉम अन तू स्वर्ग और सैम अंदर लोकल आई एम स्टील हर अमोंग विद यू बट आई हैव गान फ्रॉम डी रूम इन विच यू आर लिविंग आई एम गोइंग तू अंदर रूम फ्रॉम वेयर यू कैन नॉट सिमी फिजिकल बट यू कैन ऑलवेज फुल माय प्रेजेंट्स यू कैन ऑलवेज फुल माय ब्लेसिंग सो बेंट आपको अपीयर्ड ही 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स्वामी सारदेशानंद : माँ की मधुर स्मृतियाँ
ओके नौ टाइम फॉर हिंदी महाराज की स्मृति कथा पढ़ रहे द हमने देखा की कैसे उन्होंने एक बार मैन के पास जाने का प्रयत्न किया सफल नहीं हुए 2 साल का व्यवधान आया बीच में फिर आखिर में जय राम भाटी जाकर के मैन का दर्शन करने का मौका मिला संपूर्ण वर्णन करते हैं और फिर कहते हैं की उनके साथ में जो मित्र आया था उसकी वजह से उनको मैन का दर्शन करने का सौभाग्य मिला और मित्र ने कहा की सर्वप्रथम ठाकुर के बारे में उन्होंने जो सुना था वो सारे-शान जी महाराज से सुना था अर्थात दोनों ने दूसरे के ऊपर में उपकार किया मैन भी यह बात सुनकर अभी महाराज कहते हैं मैन की हथेलिया लालिमा लिए हुई थी बहुत से लोगों ने इस बहुत से लोगों को इसे देखने का सौभाग्य मिला है मैन के हाथ जोड़े वो आलता पहनते हैं ना बंगाल में तो अलता पहनने से कैसे वो ratabh हो जाता है माने लाल हो जाता है तो मैन का जो होस्टेस द हथेलिया उन नेचुरल रूप से वो लाल थी जैसे की देवी मैन दुर्गा की होती है पांव के तलवे भी ठीक कमल की भांति लालिमा युक्त द पांव में भी जैसे अलता पहनते हैं तो कैसा दिखता है वैसे सर में लंबे गाने काले केस द महिमा रेशम की भांति चमकीले सन्यासी तथा गुरु ही सभी संतानों पर मैन का सम्मान रूप से स्नेह था गृहस्थ भी जब मैन के पास आते तो कभी उन्हें यह नहीं लगता की उनके प्रति मैन का आचरण सन्यासियों की तुलना में भिन्न प्रकार का है यह उनकी स्नेह ममता में किसी प्रकार की कोई कमी है करती थी उनके सुख दुख की संसार यात्रा में मैन की सहानुभूति और संवेदना उनके कासन में कमी लाती और उनके आनंद और उत्साह में वृद्धि कर दी गृह से यह जो चैलेंज है जीवन में आते रहते हैं मैन के पास में जाकर के बैठेंगे सुकून भारी दो बातें सुनेंगे तो मैन का जो कष्ट है राघव होगा मैन में शांति प्राप्त होती देखिए कितना सुंदर लिखा है सुख दुख की संसार यात्रा में मैन की सहानुभूति और संवेदना उनके कासन में कमी आती और उनके आनंद और उत्साह में वृद्धि कर दी मैन सबके घर परिवार सेज संबंधी नौकरी चकरी और सांसारिक अवस्था की खोज खबर रखती है किसी भी समस्या का समाधान पूछने पर मैन बड़े ध्यान पूर्वक सब सुनकर ठीक-ठीक कर्तव्य बताती और उपदेश देती की क्या करना उचित होगा मैन की दृष्टि कितनी tyakshan थी यह सोचकर आवक रह जाता हूं जय राम बाती में विभिन्न स्थान से भक्त आते और मैन मौसी जो रसोइया होता है वो जो शब्द भी पता नहीं किस तरह का ट्रांसलेट किया है जो randhuni बोलते हैं ना वो मंगल में और रसोई करने के लिए एक महिला को रखा था तो वह जो महिला थी रसोई वाली को बता देती थी ये कहां से भी जो भक्त आएंगे वहां टिक टिक बता देती की को कौन क्या खाएगा कौन कितना खाएगा की कौन क्या तथा कितना खाएगा यहां तक की रोते की गिनती तक बता देती पता नहीं कहां से आए हैं मैन को पहचानते भी नहीं पहली बार मिलना मैं मिलना हुआ है फिर भी मैन को पता है कोई और कितना खाएगा और आश्चर्य की बात है ठाकुर दूसरों के संस्कार बता देते द की पिछले जन्मों में उसने क्या किया है उसके आगे के जन्मों में क्या किया है उसके आगे के जन्मों में क्या करने वाला है और माही बता देती की कौन कितना रोटी खाएगा देखिए दोनों के दोनों में क्या डिफरेंस है और क्या सामान्य क्या मतलब दोनों में समानता भी है और वो जो है की एक तरह का एक ये भी है डिफरेंस भी है इसलिए मैन के घर में मैन का खाना खाकर उनकी संताने इतनी तृप्त होती ठाकुर की उक्ति थी मा ठीक जानती है की किस संतान के पेट में क्या सहेगा ठाकुर ने भी बोल दिया है वैसे वैसे ठाकुर को सब पता है किसका आगे का क्या है पीछे का क्या है तो मैन के भरे में भी उनको पता है की मैन की यह सिद्धि है ठाकुर के थी की स्पर्श करके आपको वो क्या वो समाधि दिलवा देंगे ऐश्वर्या दर्शन दिलवा देंगे ये ठाकुर की सिद्धि थी मैन की सिद्धि थी आप क्या खाते हैं किस तरह से खाते हैं एक्जेक्टली वही खाना आपके लिए बनाएगी जयरामबाती में देखा की मैन सब पुरुष भक्तों को खिलाने के बाद निश्चिंत होकर स्त्री भक्तों के साथ भोजन करने बैठते किसी संतान के किसी karyavash सफलता बाहर चले जाने पर उसके लौटने में चाहे जितनी भी देर होती मैन प्रतीक्षा करती रास्ते की ओर देखती रहती आगे बढ़कर खड़ी रहती और कहती बच्चे ने अब तक खाया नहीं भूख से कष्ट का रहा होगा टीम में मैन का विद्या का संसार भक्त भी आते हैं सन्यासी संतान भी रहते हैं उनकी वह जो पगली मामी यह जो रात हो उनके संसार की यह लोग सब रहते हैं संसारी मैन के जो रिलेटिव्स द उनका कम था मैन को कष्ट देना और यह जो भक्त संतान आते हैं उनका कम था डिमांड करना की यह सुबह को हम उठ गए हैं और हमको चाय नहीं मिला है यह सब बाद में आएगा की वह कोलकाता के भक्त हैं ए गए सुबह को मैन को बोला मैन हमको चाय नहीं मिली ये वो सब मैंने दुनिया भर का अभी जयराम भाटी में दूध मिलना नाश्ता मिलना सुबह का ये सब कितना काश्तकार बात है फिर भी इस तरह की डिमांड करेंगे और ये जो सन्यासी संतान है उनका भी कुछ ना कुछ पागलपन रहता था किंतु सब मिलकर के मैन की सेवा करते द मैन के साथ में रहते द अभी कोई जाग गया है बाहर कम के लिए आने में देरी हो जा रही है खाना रखा हुआ है मैन बेचारी परेशान की खाना ठंडा हो रहा है बच्चा क्यों नहीं हो रहा वापस माफी नहीं खा पाएगी मैन रह देखेगी उसका वेट करेगी और जाकर के खड़े रहेगी घर के सामने रास्ते की ओर देखती रहेगी वो कहां गया क्या हुआ क्यों अभी तक वापस नहीं आया क्या कहती है बच्चे ने अब तक खाया नहीं भूख से कष्ट का रहा होगा इस तरह से वह बोलती रहती परंतु उद्बोधन में बड़ी कठिन समस्या थी लड़कों को बिना खिलाए मा खाती ही एन थी और फिर gurugat प्राण निष्ठावान भक्त शारदानंद जी महाराज इष्ट देवी के खाने के पूर्व स्वयं भला कैसे खाते जयरामबाती में था की बच्चों को खिलाकर की ये जो सन्यासी संतान है दूसरे पुरुष पत्ते हैं सबको मैन खिला देगी फिर महिला भक्तों को महिला जो परिवार जैन है सबको साथ में लेकर मैन खाना खाती उद्बोधन में क्या प्रॉब्लम होता अभी जो उनके जो द्वारी है रामकृष्ण मठ मिशन के जनरल सेक्रेटरी महाराष्ट्र हुई एक ही समय मैन एक कमरे में महिला भक्तों को लेकर भोजन करने को बैठेंगे और शरद महाराज दूसरे कमरे में पुरुष भक्तों के साथ बैठेंगे दोनों साथ में बैठेंगे इस कमरे में मा महिला भक्तों के साथ दूसरे कमरे में शरद महाराज अपने पुरुष भक्तों के साथ अभी थोड़ा सा बैकग्राउंड जल्दी जिसको नहीं पता है की जय राम बाती में मैन का पेट रूप निवास स्थान था और उद्बोधन का मेरा बड़ी वो कोलकाता में एक भवन का निर्माण किया था शरद महाराज स्वयं शरद महाराज जो द रामकृष्ण मिशन के जनरल सेक्रेटरी द स्वामी विवेकानंद के गुरु भाई श्री राम कृष्ण देव के सन्यासी संतान और शरद महाराज ने शारदानंद उनका dakanam शरद महाराज अर्थात घर से शरद नाम दिया था तो सब लोग शरद महाराज का के बुलाते द सन्यास नाम था स्वामी शारदानंद देखिए यह भी स्वामी जी ने सोच समझ के दिया था शशि माफी हमने डिस्कस किया एक बार सोचा होगा की मैं राम कृष्ण महाराज की भक्ति सेवा और निष्ठा देखकर के राम कृष्णानंद नाम उन्होंने जी महाराज को दिया अभी मैन शारदा की शरद महाराज इतनी सेवा करेंगे किसको पता था और शरद महाराज को तो स्वामी जी ने अमेरिका भेज दिया था सिक्योरिटी बनाया था जनरल सेक्रेटरी रामकृष्ण मिशन का सेक्रेटरी के पास क्या समझता है किसी के साथ बात करने का इतना सब दुनिया भर का सब जितनी भी उलझन है उनके सामने आकर के कटी रहती है जितने साधु संज्ञा सी है उनकी जितनी भी समस्या है उनके पास आती है किंतु पता नहीं स्वामी जी को किस तरह से अंदाज़ हो गया की उन्होंने शरद महाराज को स्वामी शारदानंद नाम दिया मैन के नाम से बाद में यही श्रद्धांजलि महाराज उन्होंने देखा की मैन जब जय रामबाती से अपने गांव से कोलकाता आती है तो भक्तों की यहां पे ठहरती है बड़ा कष्ट होता है तो इसके लिए कोलकाता में उद्बोधन नामक भवन का निर्माण किया नाम दिया तो व्यवस्था क्या हुई खाने के लिए एक कलकत्ता में mayabadi में की मैन एक कमरे में स्त्री भक्तों के साथ खागा और शरद महाराज जो है दूसरे कमरे में पुरुष भक्तों के साथ खाएंगे मैन गांव में बड़ी हुई थी अतः उन्हें देर से खाने की आदत थी और शरद महाराज को भी हाथ का कार्य समाप्त करते करते देर हो जाती ठाकुर का प्रसाद पहले मैन की थाली में परोसा जाता मैन शीघ्रता से उसे मुंह में डालकर उसे महाप्रसाद बना देते गोलापी मैन उसे लाकर महाराज को देती भाग्यवान भक्त लोग भी उसे प्रसाद से वंचित नहीं रहते अर्थात मार्ग सबसे पहले स्पर्श करके महाप्रसाद कर देती फिर वह जो महाप्रसाद है शरद महाराज वगैरा सब को मिलता जयरामबाती में एक बार मैन के जन्मदिन पर भक्तों अच्छा जय राम बाती अर्थात मैन का putralay मैन का गांव वहां पे मैन कहेगी वो होगा वहां पर शरत महाराज का नहीं चलेगा शरद महाराज यह नहीं का सकते की पहले खागा बाद में मैं खाऊंगा वो मैन का घर है तो जय राम बाती में एक बार मैन के जन्म दिन पर भक्तों की इच्छा हुई की मैन आज पहले खागा और shishyagan बाद में प्रसाद पाएंगे उनमें एक व्यक्ति में अर्थात यह जो जिसका यह उत्साह था की मैन सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करें खाना खागा क्योंकि सब समय ऐसा होता है लड़कों को खिलाने के बाद में आती है आज मैन का शुभ जन्म तिथि पूजा है भक्त लोग तो उसे दिन उत्सव करेंगे श्री चरण की पूजा भी करेंगे और यह लिखा है की ठीक है आज मैन को पहले भोजन करवाएंगे बाद में हम लोग करेंगे उनका यह बहुत बड़ा यह उसे दिन उत्साह था तो उत्साह की मात्रा अधिक थी उन्होंने आगे जाकर मैन के सन्मुख अपनी इच्छाएं कहां मैन आज तुम पहले भोजन कर लो हम लोग बाद में खाएंगे आज आपकी तिथि पूजा है आज आपका जन्मदिन है मैन ने भी आज किसी प्रकार की आपत्ति ना जताते हुए अपनी मौन सहमति दे दी ठाकुर को भोग देने के पक्ष समस्त प्रसादी खाद्य पदार्थ को थाली में सजाने के बाद आसान के सन्मुख रखकर जब मैन को बुलाया गया तो वे धीरे-धीरे यंत्र चलित सी आकर आसान पर बैठ गए ठाकुर को बहुत अच्छे से भूख चढ़ाया गया बहुत सारे विभिन्न तरह के मिष्ठान pakvaniya बनाई गई फिर उसको बहुत तरह से अच्छे से थल में सजा करके रखा गया और मैन को कहा की मैन भोजन करें मैन आकर के बैठी उन्होंने करुणा पूर्ण दृष्टि से पुरी सामग्री को देखा सब में से थोड़ा-थोड़ा लेकर के मुंह में लगाया इसके बाद उनके सामने जो संतान खड़ा था ये सारे देश आनंद जी महाराज स्वयं उसकी ओर देखकर के बड़े कतर भाव से बोली बच्चों को खिलाए बिना गले के नीचे नहीं उतर रहा है तुम लोग जल्दी से अपने खाने की व्यवस्था करो देखिए मैन को कहा गया मैन सबसे पहले खाओ सब संतान खड़े हैं मैन माने किंतु देखिए बच्चों को खिलाए बिना मैन के पेट में जागेगा भी नहीं थोड़ा-थोड़ा मुंह से स्पर्श किया और कहा अब मेरे से नहीं होगा सबसे पहले आप खा लो इतना कहकर वे हाथ मुंह धोकर उठ गई और अपने कमरे में आकर दरवाजे की चौखट पर लड़कों को भोजन करते देखने बैठी वो मैन खड़ी हो गई अपने घर दरवाजे पे जाके बैठी वहां वरांडा में सब लड़के लोग खाना खा रहे द तो लड़कों को खाना साया जा रहा था तो मैन जाकर के बैठ करके वो देखने लगी पहले से ही सारी व्यवस्था हो चुकी थी अतः क्षणभर में ही लड़के खाने के लिए बैठ गए मैन के प्राण शीतल हुए जिस मूर्ख संतान ने अग्रणी होकर आज मैन को खाने के लिए राजी किया था और विशेष आनंदित था अच्छा देश आनंद जी महाराज लेखक स्वयं वह आज उसको क्षणभर में ही होश आया की हे यह मैंने क्या कर डाला आज मैन का भोजन नष्ट कर दिया मैन जब लड़कों को पहले खिलाती है बाद में खाती है तो तृप्ति से मैन भर के खाती है किंतु आज पहले खाना खाने के लिए उनको फोर्स किया गया मजबूर किया गया की हे यह मैंने आज कर दिया प्रतिदिन की भांति पुरुष भक्तों को खिलाने के बाद में महिला भक्तों के साथ ही यदि उनका खाना होता तो माफी तृप्ति से खा पाती तभी वह निश्चिंत हो पाती हे महाराज कहते हैं हम लोग तो ऐश्वर्या के दास हैं इस मधुर लीला को भला कैसे समझेंगे हम उन्हें देवी के रूप में सजाकर पूजा रात की व्यवस्था करके अपने ऐश्वर्या लीला का आस्वादन करते हैं लेकिन जिन्होंने समस्त ऐश्वर्या का आवरण भेद कर शुद्ध माधुरी धारण की है अपना स्नेहा mrutpann करने के लिए हम लोगों की मैन के रूप में आई है हम भला इस बात पर विश्वास करना तो दूर इसे समझ भी कहां पाते हैं हम लोगों के मैन में होगा की मैन लक्ष्मी की तरह कोई भव्य सिन्हा यह सब लेकर के मां-बेटेगी हम उनकी पूजा करेंगे हम उनकी यह जो है आराधना करेंगे किंतु यह जो देवी स्वरूप है उसको त्याग उसका त्याग करके ठीक अपनी मैन की तरह हमको अपना स्नेहा देने के लिए आशीर्वाद देने के लिए मनुष्य देव धारण करके मैन हमारे बीच आई है तो हम भी ऐसे मूर्ख है की इस मैन के भीतर में हम किसी देवी को खोज रहे हैं सर्व देवी देवी स्वरूपाय मैन के बारे में ठाकुर के बारे में जैसे कहा गया है मैन के बारे में भी सर्वदेव देवी स्वरूपय मैन स्वयं जब अपनी नजरों के सामने हाजिर है तो फिर उनके ऊपर में दैवत वी क्या जो आवरण है वो बहराइनी की क्या जरूरत है संतानों की सुख सुविधा की ओर मैन की टिकना दृष्टि थी लड़कों का सूखा चेहरा दिन वेश क्षण शरीर मैन देख नहीं पाती थी भोजन के बाद सभी पैन खाएंगे इसलिए मैन स्वयं पैन बना कर रख देती और जो लोग पैन ज्यादा पसंद करते उन्हें ज्यादा पानी मिलता के लिए रह रहे हैं वो लड़के जो लोग पहनते हैं उनको पता है की ज्योति की जो किनारी होती है वह कभी-कभी जो महंगी धोती होती है बहुत अच्छे से डेकोरेटेड किनारी वाली होती है और जो धोती शक्तियों की वो किनारी बनाने में वो उसको सिलाई करने में शायद ज्यादा रुपया जाता होगा तो जब सस्ती धोती पहनते हैं तो कपड़ा भी थोड़ा सा मोटा होता है और वह जो किनारे जो होती है धोती की वो होती ही नहीं है या तो बहुत ही शादी होती है बहुत ही सिंपल होती है है तो लड़कों का बिना किनारी की शादी धोती पहनना मैन को बिल्कुल पसंद ना था भक्त लोग उन्हें महीन किनारी वाली अनेक dhutiyan देते अभी लोग क्यों देते क्योंकि उसी धोती का सदी करके सदी की तरफ ही शायद पहन सकते हैं तो बहुत लोग मैन को धोती मतलब वस्त्र तो एक ही है आपकी तरह से पहने तो बहुत सारे लोग मैन को जब मैन तो गुरु थी मैन dakshinan देती थी मैन जगत स्वयं थी बहुत सारे भक्त आते फल फूल प्रसाद बहुत कुछ मैन को देते तो धोती भी वस्त्र भी देते तो मैन के पास में अच्छे से वस्त्र रहते द तो जैसे-जैसे उनके पास में अच्छे वस्त्र आएंगे मैन जो है सब anandpurvak लड़कों में वो वितरण कर देती सन्यासी संतानों को दे दे मैन जानती थी की लड़कों में से कोई शौकीन है बहाने की कोई कोई सन्यासी तो हुआ है किंतु वह जो छोटे-मोटे यह जो vasnayen हैं उसका रहना कोई बहुत गलत बात नहीं है ठाकुर खुद हुक्का पीते द ठाकुर खुद एक वो अपने पास में एक छोटा सा डिब्बा रखते द उसमें डाल कबाब चीनी वगैरा रहता था और बीच-बीच में डिब्बा खोल के उसमें से खाते द पैन खाते द तो ये सब जो छोटी-मोटी चीज हैं उसको विलासिता नहीं कहते हैं उसको कहते हैं की त्याग का एक माधुर्य है त्याग किया है तो किंतु साथ-साथ में छोटी-छोटी चीज भी रख दी है तो जिससे की पता चले की हम अभी भी संसार में है संसार के प्रति थोड़ा सा दायित्व है ये मेरा इंटरप्रिटेशन मिलता है तो लड़कों में अर्थात सन्यासी संतानों में कोई कोई थोड़ा बहुत किसी चीज का शौक रहता है तो उनको वे मैन स्वयं उसी तरह के वस्त्र देती अर्थात अच्छी किनारी वाले किसी के वस्त्र जल्दी फटते द अर्थात वो जो बहुत शारीरिक श्रम करना पड़ता मैन के खेत में कम करना पड़ता मैन के घर में कम करना पड़ता है सब तो यह सन्यासी संतान ही करते तो किसी किसी के वस्त्र जल्दी फट्टे द तो मैन उन्हें ज्यादा कपड़े देती और खाने पीने आदि सभी मामलों में जो जैसा चाहता जिसके पेट में जो सहायता था मैन उन्हें ठीक वैसा ही दे दी थी उद्बोधन भवन में विभिन्न स्वभाव के सन्यासी तथा ब्रह्मचारी द पर सभी मैन की संतान द अच्छा पहले जयरामबाती का वर्णन किया अर्थात अपने गांव का अभी उद्बोधन अर्थात कोलकाता में जहां पर मैन का घर का निर्माण किया था वो उद्बोधन अर्थात mahervadi का वर्णन उद्बोधन भवन में विभिन्न स्वभाव के सन्यासी तथा ब्रह्मचारी द पर सभी मैन की संतान द मातृ स्नेहा के समान अधिकारी द उन सभी के खाने पीने सुख-सुविता के बारे में मैन विशेष रूप से चिंता करती अच्छा इस प्रश्न में महाराज एक घटना बता रहे हैं उसे घटना को हम कल देखेंगे