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ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद ज्ञान योग के ऊपर में जो लेक्चर है कॉस्मो मैक्रो कजम कंप्लीट वर्क्स का यह सेकंड वॉल्यूम है और इसमें पेज नंबर 205 206 तो हमने देखा कि कल अभी तक हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी एक के बाद एक लॉजिकल स्टेप लगा करके आर्गुमेंट करके दिखाते हैं कि किस तरह से सूक्ष्म स्वरूप में से कोई भी स्थूल वस्तु प्रकट होती है और अपने जीवन के अंत में एट द एंड ऑफ इट्स लाइफ साइकल व उसी सूक्ष्म स्वरूप में विलीन हो जाती है यहां तक हमने देखा आगे हम देखते हैं और साथ में स्वामी जी ने यह भी कहा कि जीवन चक्र का जो कांसेप्ट है वह कपिल मुनि ने भारतवर्ष में सर्वप्रथम उसका आविष्कार किया था क्यों क्योंकि हमने जद हम यह जुडा इजम क्रिश्चियनिटी या इस्लाम या फेरोक रिलीजन जो कि इजिप्त में थे या तो मेसोपोटामिया ना यूफ्रेट्स वैली यह जो सब सिविलाइजेशंस और उनकी सब रिलीजियस और सोशल प्रैक्टिसेस देखते हैं हमको लगता है कि जैसे एक सीधी लाइन में जीवन जा रहा है ईश्वर ने प्रकट किया उसका अंत हुआ ईश्वर के पास जाएगा और ईश्वर अच्छे बुरे कर्म के अनुसार स्वर्ग या नर्क में भेजेंगे ऐसा एक सीधी लाइफ में जा एक सीधी लाइन में जाता है उनका थिंकिंग और उनका फिलोसोफी भारतीय दर्शन हिंदू दर्शन शास्त्र सर्वप्रथम जीवन को एक चक्र के रूप में एक वर्तुल के आकार के रूप में उसकी कल्पना करता है जन्म मृत्यु जरा व्याधि एक के बाद एक आते रहते हैं इस जन्म में किए हुए फल के अनुसार नया जन्म प्राप्त होता है और इस आइडिया को एक्सप्लेन करने के लिए स्वामी जी ने एक के बाद एक हमारे सामने बहुत सारे उदाहरण लख कि चट्टान को चकनाचूर होकर के पानी में मिल जाती है वहां उसके मिट्टी या तो रेत के स्तर बनते बनते फिर से नई चट्टान प्रकट होती है पंखी अंडे में से प्रकट होता है फिर बड़ा होने के बाद में अंडा देता है और फिर जब उसका मृत्यु हो जाता है तो उस अंडे में से फिर से एक नया पंखी जन्म लेता है यह यह जो जैसे कि सोलर सिस्टम है एक बहुत बड़ा गैस क्लाउड था एक मैटर क्लाउड था बादल जिसमें से ये सूरज है अपना पृथ्वी है चांद है यह मंगल ग्रह है जुपिटर है सैटर्न है यह सब ग्रह उस बादल में से बने इसमें विस्फोट होगा तो उसी बादल में में फिर से परिणत हो जाएंगे तो यह पूरा स्वामी जी ने हमको आर्गुमेंट करके बताया अभी वो आगे क्या कहते हैं सो विथ ऑल लाइव्स जिस तरह से यह चक्रा का जीवन है वोह सभी चीजों के लिए एक ही नियम के अनुसार चलता है सो विथ ऑल एक्जिस्टेंस दैट वी कैन सी फील हियर और इमेजिन जिसको हम देख सकते हैं सुन सकते हैं अनुभव कर सकते हैं स्पर्श कर सकते हैं जिसके बारे में हम अनुमान कर सकते हैं ऐसी सब चीजें इस चक्रा का साइकल लाइफ साइकल जिसको कहेंगे चक्रा का गति में ही चलती है एवरीथिंग ट इज विदन द बाउंड्स ऑफ अवर नॉलेज इज प्रोसीडिंग इन द सेम वे जो हमारी ज्ञानेंद्रिय की सीमाओं के भीतर में जो कोई चीज है वो स सभी चीजें एक ही तरह से चलती है लाइक ब्रीदिंग इन एंड ब्रीदिंग आउट इन द ह्यूमन बॉडी जैसे एक दूसरा उदाहरण दिया हम सांस लेते हैं सांस निकालते हैं यह जो है फिनोमिना यह भी इसी तरह से चलता है एवरीथिंग इन क्रिएशन गोज ऑन इन दिस फॉर्म इस सृष्टि के भीतर में जो कुछ भी है सब इसी तरह से चलता है वन वेव अनदर फॉलिंग एक वेव यानी कि एक पानी का एक ज्वार ये उठता है और गिरता है राइजिंग अगेन फॉलिंग अगेन फिर से यह वेव उठता है फिर से यह गिरता है ईच वेव है इट्स ओन होलो होलो हैज इट्स वेव जैसे जो जब भी जवार भाटा होता है तो जवार होता है तब यह पानी ऊपर उठता है और भाटा होता है तो पानी गिरता है दो वेव जो होते हैं उसमें एक डिप्रेशन जैसा होता है गड्ढे जैसा होता है और फिर जैसे वेव उठता है तो एक ऊपर में उठता है तो ये नीचे गिरना ऊपर में उठना यह सभी वेव के साथ में जिस तरह से ट्रू है सही है वैसे ही जीवन मृत्यु और जीवन मृत्यु और पुनर्जन्म यह चलता रहता है द सेम लॉ मस्ट अप्लाई टू द यूनिवर्स टेकन एज अ होल यह सेम नियम जो है पूरे विश्व ब्रह्मांड को एक ही साथ में पूरे विश्व ब्रह्मांड को एज ए होल देखे संपूर्ण रूप से देखे तो उसको भी यही नियम वह अप्लाई होता है बिकॉज ऑफ इट्स यूनिफॉर्म ब्रह्मांड जो है यूनिफॉर्म है यूनिफॉर्म किस अर्थ में यूनिफॉर्म यदि हम टेलिस्कोप लेकर के यदि हम रात को देखेंगे तो हमको तो बहुत ही विभिन्न तरह की नेबुलास गैलेक्सी स्टार्स प्लेनेट कितना कुछ दिख जाएगा यूनिवर्स को हम यूनिफॉर्म कैसे कह सकते हैं तो इस तरह से नहीं कि जो विभिन्न पदार्थ जो ऑब्जेक्ट्स हमको दिखते हैं वह एक जैसे हैं एक जैसे नहीं हो सकते प्रत्येक तारे का अपना एक स्ट्रक्चर होता है उसका साइज होता है उसका ग्रेविटी होता है उसके सोलर फ्लेयर्स किस तरह से उठती है गिरती है उसका एक यूनिक एक एस्पेक्ट होगा यूनिफॉर्म क्या है उसके अंडरलाइन जो रूल्स है फिजिक्स के जो लॉज है नियम है वो सेम है फिजिक्स कहता है कि ग्रेविटी की वजह से सितारे का एक बादल में से सितारा बनता है और इसी ग्रेविटी और टेंपरेचर यह दोनों के बीच में फाइट चलती रहती है और एक दिन आएगा टेंपरेचर ग्रेविटी वीक हो जाएगी टेंपरेचर ज्यादा हो जाएगा तो तारा जो है वो एक्सप्लोड्स क्लाउड में वो मिल जाएगा अभी तारे का साइज कोई भी है उसका ग्रेविटी किसी भी तरह का है उसकी सोलर फ्लेयर्स किसी भी तरह की है किंतु यह जो फिजिक्स के नियम है वो सभी तारों को एक ही तरह से अप्लाई हो होते हैं तो इस अर्थ में विश्व ब्रह्मांड यूनिफॉर्म है दिस यूनिवर्स मस्ट बी रिजॉल्वड इनटू इट्स कॉसेस यह जो ब्रह्मांड है उसको यदि हम उसकी ओरिजिनल परिस्थिति क्या थी ओरिजिनल फॉर्म क्या था वहां तक हम मेंटली उसको ले जाए हम अनुमान करके देखें तो क्या होगा द सन द मून स्टार्स एंड अथ द बॉडी एंड माइंड एंड एवरीथिंग इन दिस यूनिवर्स मस्ट रिटर्न टू देयर फाइनल कोसेस डिसअपीयर्ड एज इट वेर यह चांद सितारे पृथ्वी ग्रह यह शरीर अपना मन जो कुछ भी विश्व ब्रह्मांड में है सबको अपने ओरिजिनल स्वरूप में चले जाना होगा और उसका प्रलय हो जाना होगा यह सृष्टि स्थिति प्रलय की जो साइकल जिसके बारे में हमारे पुराण में बताया गया है स्वामी जी उसी साइकल को आज की मॉडर्न फिजिक्स की लैंग्वेज में बताते हैं कि जो कुछ भी विश्व ब्रह्मांड में देखते हो वह चांद हो सितारे हो मनुष्य का शरीर हो मन बुद्धि चित्त अहंकार रूपी हमारा यह सूक्ष्म शरीर हो जो कुछ भी हो सृष्टि के अंत में सब कुछ को प्रलय में विलीन हो जाना है बट दे विल लीव इन द कोसेस जज फाइन फॉर्म्स किंतु जब प्रलय में विलीन होंगे यह पूरा विश्व ब्रह्मांड तब यह क्या पूरा संपूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा संपूर्ण रूप से ये डिलीट हो जाए कंप्यूटर में हम जब डिलीट करते हैं तो वो ये शिफ्ट डिलीट करते हैं ना कि कंट्रोल डिलीट ऐसा कोई कमांड है जिसको करने से वो कंप्यूटर के ऊपर में से वो परमानेंटली डिलीट हो जाए वरना वो रिसाइकल बिन में पड़ा रहेगा आपका फाइल और यदि आपको भविष्य में चाहिए कभी तो रिसाइकल बिन में से निकालना है उसको रिसरेक्ट करना है या तो रिस्टोर करना है तो ये जब विश्व ब्रह्मांड जब उसका प्रलय होता है तो क्या वो रिसाइकल बिन में पड़ा रहता है कि संपूर्ण रूप से वह समाप्त हो जाता है नई फाइल यदि बनानी है तो फिर से बनानी पड़ेगी आपको वह रिस्टोर करने से नहीं चलेगा तो क्या होता है तो स्वामी जी कहते हैं कि विश्व ब्रह्मांड अपने सूक्ष्म रूप में फिर जाता है संपूर्ण विलन नहीं होता संपूर्ण विलय नहीं होता सूक्ष्म रूप में वापस चला जाता है आउट ऑफ दिस फाइन फॉर्म्स दे विल इमर्ज अगेन एज न्यू अर्थ सनस मस एंड स्टार्स और इसी सूक्ष्म रूप से कल्प जब फिर से आरंभ होगा नए कल्प का कल्प रंभ जब होगा तो उसी सूक्ष्म रूप में से नए तारे नए ग्रह नए चांद नए सितारे फिर से सब कुछ उसी सूक्ष्म रूप में से जन्म ग्रहण करेंगे देयर इज वन फैक्ट मोर टू लर्न अबाउट दिस राइजिंग एंड फॉलिंग ये चढ़ाव और उतार यह जन्म और यह विनाश प्रलय और सृष्टि इसके बारे में में हमको और एक चीज जानने की जरूरत है क्या है द सीड कम्स आउट द ट्री इट डज नॉट इमीडिएट बिकम अ ट्री जब बीज पेड़ में से एक बीज का जन्म होता है तब वह बीज इमीडिएट पेड़ नहीं हो जाता इट डज नॉट इमीडिएट बिकम ए ट्री साथ-साथ में ही वह वृक्ष में परिणत नहीं होता बट हैज अ पीरियड ऑफ इन एक्टिविटी और रदर अ पीरियड ऑफ वेरी फाइन अ अन इस्टेड एक्शन बीज जो होता है उस कुछ समय के लिए बहुत ही सूक्ष्म कार्य करता है या तो फिर बहुत ही सूक्ष्म रूप से वह अवस्थित रहता है कुछ समय के लिए द सीड हैज टू वर्क फॉर सम टाइम बिनीत द सोइल बीज जब मिट्टी में गिरा तो मिट्टी में गिरने से इमीडिएट वटवृक्ष नहीं हो जाता मिट्टी में से उठने के लिए उसको मिट्टी में ही थोड़ा सा कार्य करना पड़ता है कुछ समय पहले मैंने एक वीडियो देखा था मुझे इस गार्डनिंग वगैरह का शौक है तो मैं थोड़ा सा सीखता रहता हूं मेरे यहां पर टेरेस गार्डन है तो वहां पर यह जो कुछ बीज बोए थे और उसको वो टाइम लैप्स वीडियो होता है ना कि हर डेली उसका एक फोटो लेंगे और डेली एक-एक फोटो लेकर के फिर आखिर में वह सभी फोटो का एक वीडियो बनाएंगे इसको टाइम लैप्स वीडियो कहते हैं तो ऐसा एक टाइम लैप्स वीडियो मैंने देखा था हर घंटे लिया होगा फोटो शद कि एक बीज है उसको मिट्टी में डाला अभी वो काच की दीवार है वहां पर हमको दिख रहा है काच की दीवार के लगकर ही यह बीज था और ऊपर में मिट्टी थी तो वह हर घंटे पर एकएक फोटोग्राफ ले रहे हैं तो देखा कि किस तरह से धीरे-धीरे करके बीज वो उसका वो जो ऊपर का आवरण है वो टूटता है और उसमें से ग्रीन शूट्स जो है ये ग्रीन छोटे-छोटे उसके यह मूल वो प्रकट होते हैं और बढ़ते जाते हैं एक मूल जो एक उसकी जो जड़ है वह नीचे की ओर जाती है और छोटी सी एक डाली ग्रीन कलर की वह धीरे-धीरे करके वह ऊपर उठती है आखिर में एक समय ता ऐसा आता है कि उसके ऊपर में एक छोटा सा अ एक पत्ता भी आ जाता है और फिर वह पत्ता धीरे से करके यह मिट्टी में से बाहर निकलता है तो देखिए कि स्वामी जी कहते हैं कि यदि यह बीज मिट्टी में गिरा तो अभी हमको पहले ही दिन वह ग्रीन शूट्स जिसको कहते हैं उसको ग्रीन उसकी ये जो य आई ई पंखुड़िया वो पहले ही दिन हमको नहीं दिखेगी मिट्टी में वोह कुछ समय कार्य करेगी एक समय आएगा उसका वोह साइज या तो उसकी मैच्योरिटी उस लेवल प आ जाएगी कि फिर वो मिट्टी में से बाहर निकलेगी तो उसका हमको दिखाई ना देने वाला एक समय है इस बीच का एक पीरियड है जब जिस समय वो हमको हमारी आंखों से ओझल हो कर के हम हमारी आंखों की दृष्टि से बाहर में वह कार्य करता है पानी मिट्टी के भीतर में वह कार्य करता है द सीड हैज टू वर्क फॉर सम टाइम बिनी द सोइल मिट्टी के भीतर में उसको कुछ समय के लिए कार्य करना पड़ता है इट ब्रेक्स इनटू पीस डिजनरेट्स एज इट वेर एंड रीजेनरेशन कम्स आउट ऑफ दैट न डिजनरेशन बीज जो होता है धीरे-धीरे करके उसकी सतह जो है वो टुकड़े ट हो जाती है उसका वह विनाश की ओर चला जाता है डिजनरेशन यानी कि उसका धीरे-धीरे करके डिजनरेशन का एजेक्ट क्या करेंगे वो धीरे-धीरे करके वो क्षय होता है क्षय एजेक्ट ट्रांसलेशन है बीज का क्षय होता है और जैसे जैसे बीज का क्षय होता जाता है उसके भीतर में वह जो डीएनए और आरएनए जो है नए पेड़ छोटे से आकार में नए पेड़ बनाने की शुरुआत करता है तो यह क् होने की प्रक्रिया है उस बीज का क्षय होने के बाद में ही नए पौधे का जन्म होगा यानी य मृत्यु और जन्म एक दूसरे के साथ में किस तरह से इंटर टवाइथन तरह से मिले हुए हैं यह देखिए स्वामी जी दर्शाते हैं इन द बिगिनिंग द होल ऑफ दिस यूनिवर्स वाज टू वर्क लाइक वाइज फॉर ए पीरियड इन ट माइनोट फॉर्म इसी तरह से इस विश्व ब्रह्मांड को सृष्टि की शुरुआत में एक बीज के रूप में सूक्ष्म रूप में इस तरह से कार्य करना था कि वह कार्य बाहर से नहीं दिखेगा किंतु भीतर भीतर में वह कार्य चलता रहेगा अनसीन एंड अनमैनिफेस्टेड न दिखने वाला और ना प्रकट होने वाला च इज कॉल्ड केस जिसको कहते हैं केस अभी केस का क्या करेंगे ट्रांसलेशन केस यानी कि अव्यवस्था एंड आउट ऑफ ट कम्स अ न्यू प्रोजेक्शन और इस अव्यवस्था में से एक नया विश्व का नए विश्व की सृष्टि होती है द होल पीरियड ऑफ वन मेनिफेस्टेशन ऑफ दिस यूनिवर्स इट्स गोइंग डाउन इनटू द फाइनर फॉर्म रिमेनिंग देयर फॉर सम टाइम एंड कमिंग आउट अगेन इज इन संस्कृत कॉल्ड अ कल्प और अ साइकल यह विश्व ब्रह्मांड का यह पूरा यह जो समय चक्र है यह काल है गोइंग डाउन इन टू द फाइनर फॉर्म यह अपने सूक्ष्म रूप में विनाश होकर के प्रलय होकर के सूक्ष्म रूप में समाहित हो जाना एंड ग्रेजुएट एंड कमिंग आउट अगेन इस सूक्ष्म रूप में कुछ समय तक रहना और फिर उसमें से फिर से प्रकट होना यह पूरा जो समय चक्र है इसको संस्कृत में कहते हैं कल्प या तो फिर यह चक्र जीवन चक्र नेक्स्ट कम्स अ वेरी इंपोर्टेंट क्वेश्चन स्पेशली फॉर मॉडर्न टाइम्स यह समझ लेने के बाद में कि सृष्टि स्थिति प्रलय की यह जो एक साइकल है इसको एक कल्प कहते हैं यह समझने के बाद में एक दूसरा इंपॉर्टेंट पॉइंट हमको समझना है जो कि हमारे आधुनिक समय में यह समझना बड़ा ही आवश्यक है वी सी दैट द फाइनर फॉर्म्स डेवलप स्लोली एंड स्लोली एंड ग्रेजुएट ग्रोसर हम देखते हैं कि सूक्ष्म स्वरूप जो है धीरे-धीरे करके डेवलप होते हैं और स्थूल से स्थूल तर स्वरूप में बनते जाते हैं वी हैव सीन दैट द कॉज इज द सेम एज द इफेक्ट यह जो परिणाम है वह उसके सूक्ष्म स्वरूप से समानांतर है सूक्ष्म स्वरूप के जैसा ही है एंड द इफेक्ट इज ओनली द कॉज इन अनदर फॉर्म यह जो परिणाम है वो उसका जो सूक्ष्म स्वरूप है वृक्ष है वह बीज का ही एक दूसरा स्वरूप है एक ही जैसे हैं दूसरा स्वरूप अलग-अलग है देयर फॉर दिस होल यूनिवर्स कैन नॉट बी प्रोड्यूस आउट ऑफ नथिंग यह लॉजिक लगा कर के हम यह नेक्स्ट स्टेप लेते हैं कि असत में से सत की सृष्टि नहीं हो सकती कुछ नहीं है उसमें से विश्व ब्रह्मांड आया यह संभव ही नहीं होल यूनिवर्स कैन नो देयर फोर दिस होल यूनिवर्स कैन नॉट बी प्रोड्यूस आउट ऑफ नथिंग नथिंग कम्स विदाउट अ कॉज एंड द कॉज इज द इफेक्ट इन अनदर फॉर्म बिना किसी सूक्ष्म स्वरूप के स्थूल स्वरूप प्रकट ही नहीं हो सकता स्थूल स्वरूप सूक्ष्म स्वरूप का ही एक दूसरा स्वरूप है यह क्रिश्चियन थियोलॉजी में जिस तरह से कहते हैं कि पहले कुछ नहीं था फिर भगवान ने सृष्टि की रचना की तो कुछ नहीं होने से सृष्टि नहीं हो सकती वे लोग यह भी नहीं नहीं कहते कि चलो ईश्वर में से सृष्टि प्रकट हुई है ईश्वर का प्रोजेक्शन है यह सृष्टि ऐसा भी नहीं है ईश्वर अलग है सृष्टि अलग है ईश्वर इच्छा होने से शून्य में से सृष्टि का वो उत्पादन करते हैं यह संभव ही नहीं है असत में से सत नहीं आ सकता शून्य में से विश्व नहीं आ सकता देखिए यह सब लॉजिक स्वामी जी इसलिए दे रहे हैं क्योंकि क्रिश्चियन देशों के सामने वो बैठे हैं सब क्रिश्चियन है वहां पर वो बाइबल पढ़ कर के आए हैं तो उनको वेदांत सिखाना है तो पहले बाइबल में जो लिखा है उसका खंडन करेंगे बाद में जो वेदांत में लिखा है उसका प्रतिपादन करेंगे इसलिए स्वामी जी इस तरह से एक के बाद एक स्टेप ले रहे हैं हम लोग इसको इसलिए पढ़ते हैं क्योंकि हमको पता चले कि स्वामी जी की बुद्धि ये उनका जो मेधा शक्ति थी वो इतनी तीव्र थी कि वो किसी भी कल्चर में जाकर के वो बैठते थे तो वहां का जो भाव है वो फट कर के ग्रहण कर पाते थे आज हमारे भारतीयों के साथ में क्या हुआ है कि हम लोग ये लिप सर्विस तो देते हैं हां ये पुराण है या उपनिषद है जिनको हम फॉलो करते हैं किंतु प्रैक्टिकल लाइफ में देखेंगे कि ये विदेशी संस्कृति का आक्रमण जिसके अगेंस्ट में हमने देखा कि किस तरह से गंभीरानंद जी हमको चेतावनी देते हैं कि मां का जब आगमन हुआ था वो उपो घात में जबक मां का जब आगमन हुआ था उस समय यह विदेशी सभ्यता जहां पर स्त्रियों को एक भोग की चीज के रूप में देखा जाता है वहां से और हमारा जो आइडियल है स्त्री को नारी जाति को मां के रूप में देखा जाता है यह आइडियल के बीच में जो क्लश होता है तो व क्लेश जब होगा तब हमको अपना आइडियल विस्मृत नहीं हो जाना है भारत एक कल्चरल क्रॉस रोड के ऊपर में खड़ा है जहां पे कि सिल्क रूट के द्वारा एक चाइना है या तो यह ईस्ट एशिया है वहां से यह सिल्क सिल्क की बनी हुई वस्तुएं वस्त्र यूरोप मिडिल ईस्ट वगैरह जगह प जाते थे और यहां पर स्पाइस रूट है तो यह जावा सुमात्रा इंडोनेशिया थाईलैंड ये जो सब जो ईस्ट एश कंट्रीज है जो द्वीप समूह है इंडोनेशिया मलेशिया वगैरह वहां से स्पाइस यानी कि मसाला यह जहाज के द्वारा भारत को स्पर्श करके वह किस तरह से अरेबिया है अरेबिया से मेडिटरेनियन सी है वहां तक जा अरेबियन सी और मेडिटरेनियन सी यहां पर तक जाते थे तो यह जो पूरा क्रॉस कल्चरल रूट जो है उसके सेंटर में भारत खड़ा है हमेशा था हमेशा रहेगा तो पूरे विश्व विश्व में से अच्छे विचारों को तो हम ग्रहण कर रहे हैं किंतु यह ग्रहण करते करते हमारा जो मूल वेद और उपनिषद के जो आदर्श है उसको विस्मृत नहीं होने देना है तो इसीलिए उस समय जो चेतावनी अभी आज क्या होता है कि उस समय हमारे मन में जो डाउट था हम उसको प्रकट करते थे मुंह से बोलते थे अरे ये जो हमारे हिंदू शास्त्र है या हिंदू हमारी संस्कृति है वो क्या किस काम की है जद हमको 1000 साल तक गुलामी में डाल दे आज हम मुंह से यह डाउट प्रकट नहीं करते किंतु प्रैक्टिस में देखेंगे कि हमारा आचार विचार बहुत हद तक यह वेस्टर्न कल्चर के अनुसार होता जा रहा है तो यह साइलेंट अटैक है जो कि हमको समझ में भी नहीं आता हम सबकॉन्शियसली उसको एक्सेप्ट कर दे रहे हैं तो उस समय हमारे जो विचार है और जो विदेश के जो विचार है किस तरह से डिफर होते हैं स्वामी जी का क्या एनालिस है और उनमें और हम में क्या डिफरेंस है यह दिखाने के लिए हमको यह आर्गुमेंट आज पढ़ने की जरूरत है उनका जीवन चक्र एक सीधी लाइन में जाता है शून्य में से जन्म हुआ और फिर वह जो पदार्थ या कोई भी मनुष्य कोई भी चीज है सृष्टि है वह शून्य में विलीन हो जाएगी स्वामी जी कहते हैं शून्य में से कोई भी सृष्टि कभी नहीं होती शून्य में से सृष्टि हो ही नहीं सकती सूक्ष्म स्वरूप में से स्थूल स्वरूप में आता है स्थूल स्वरूप में से सूक्ष्म में विलीन हो जाते हैं और जब सूक्ष्म स्वरूप में रहते हैं तो भीतर में भीतर में प्रक्रिया होती रहती है जो कि हमको दिखाई नहीं देती तो इसीलिए जब सृष्टि का विलय होता है विनाश होता है प्रलय होता है तो इमीडिएट दूसरी बार इमीडिएट दूसरी सृष्टि रचना नहीं होती कुछ समय सिमिंग इन एक्टिविटी बाहर से इन एक्टिव दिखता है किंतु भीतर में कार्य कर रहा है इस तरह का एक समय जाता है तो ये आर्गुमेंट लॉजिक सब स्वामी जी करते हैं डेवलप थोड़ा सा डिफिकल्ट है समझने में किंतु थोड़ा सा ध्यान दे तो कोई इतना भी डिफिकल्ट नहीं है देखिए हमारे भारत में यह जो गुरु शिष्य परंपरा है एक के बाद एक भगवान शंकराचार्य को व्यास देव का दर्शन हुआ था ठाकुर ने किस तरह से स्वामी जी को अपनी सब विद्या अपनी सब शक्तियां उनमें ट्रांसमिट की स्वामी जी ने किस तरह से यह ठीक किया कि तो मेरे गुरु भाई है उनका विकास नहीं होगा जैसे कि एक वटवृक्ष है उसकी छाव में छोटे-छोटे पेड़ पौधे जो होते हैं वो बड़े नहीं हो पाएंगे क्योंकि वटवृक्ष की छाया में है उसके प्रोटेक्शन में है यदि वटवृक्ष चला जाएगा तो वह छोटे-छोटे उसके इर्दगिर्द जितने भी पौधे हैं वो बड़ा होना शुरू हो जाएंगे क्योंकि उनको सूरज का प्रकाश भी यथेष्ट मिलता है और फिर प्रोटेक्शन चला जाता है तो अपने को खुद को प्रोटेक्ट करना है तो स्वामी जी ने इसीलिए 39 इयर्स की इतनी यंग एज में समाधि ग्रहण कर ली तो जितने भी गुरु अपने शिष्य को एक के बाद एक यह अथॉरिटी पावर अपनी आध्यात्मिक शक्ति उनमें ट्रांसमिट करते जाते हैं तो यह जो साइकल है हमारे पूरे भारतीय जीवन में यह साइकल के ऊपर में सब कुछ है हम लोग कई कई कई बार कोई पूछते हैं कि अरे इतना सुंदर भारत देश था इतनी सर्वोच्च हमारी सभ्यता थी तो फिर से उसमें इस तरह से गिरावट क्यों आई इतना एक डाक र्क एज 1000 साल का एक अंधकारमय समय किस तरह से भारत में प्रसार हुआ तो यह भी एक काल के चक्र के अनुसार ही है काल के चक्र के अनुसार यह समय के नियम के अनुसार कोई भी सभ्यता वो विस्तृत होगी विकसित होगी समृद्ध होगी और धीरे-धीरे क्षय होकर के उसका विनाश हो जाएगा और उसी बीज में से उसी सूक्ष्म रूप से दूसरी सभ्यता पनपे गी दूसरी सभ्यता का अंकुर अंकुरित होगी अंकुरण होगा तो यह साइकल जो है भारतीय सभ्यता में भी है भारतीय हमारे जितने भी यह त्योहार है उत्सव है उसी में भी है गणेश जी का विसर्जन होता है मां दुर्गा का विसर्जन होता है फिर वोह जिस विसर्जन होकर के वह मिट्टी है जो गंगा में मिल गई है वही गंगा की मिट्टी में से दूसरे साल हम फिर से गणेश जी की या तो फिर मां दुर्गा की मूर्ति की की फिर से रचना करते हैं तो ये साइक्लिकल लाइफ ये चक्रा का जीवन ये चक्रा का समय चक्र ये अपने भारतीय परंपरा में उत्सवों में हमारी संस्कृति में पूरा बुन गया है और इसीलिए हमको कभी-कभी समझ में नहीं आता हम ये सब चीजें टेकन फॉर ग्रांटेड कर लेते हैं हम स्वीकार कर लेते हैं कि हां ये ऐसा ही है किंतु जब हम दूसरी सभ्यता के साथ में अपने को कंपेयर करेंगे तब पता चलेगा कि हम कितने यूनिक है इसीलिए देखिए कि जब भारत देश के साथ में दूसरी सभ्यताएं थी वांग हो वैली सिविलाइजेशन जब हमारी सिंधु वैली सिविलाइजेशन थी तो उसके ओरिजिनल फॉर्म में आज एक भी जीवित नहीं है हम ही एक अकेले हैं स्वामी जी ने कहा कि जिस कैपिटोल यानी कि रोम के राजा जहां राज्य करते थे जिस मकान में बैठ कर के वहां सीजर यदि फिर से आ जाएगा तो देखेगा कि कैपिटोल में मकड़ी अपनी जाल बुन रही है किंतु मनु भगवान मनु यदि फिर से वापस आ आ जाएंगे मनु ऋषि तो देखेंगे कि वही भारतीय सभ्यता संस्कृति उनको फिर से देखने को मिलेगी जो उन्होंने अपने खुद के समय के दरमियान देखी थी तो यह साइक्लिकल नेचर उसका कभी-कभी क्षय हुआ है किंतु कभी-कभी विकास भी हुआ है तो साइक्लिकल नेचर है चक्रा का जीवन है बोलकर के हम लोग अभी तक टिके हुए हैं बाकी सब सभ्यता अपने ओरिजिनल फॉर्म में नहीं टिकी उन्होंने एक नया स्वरूप धारण किया है म्यूटेशन हुआ है किंतु हमारी संस्कृति अभी तक इसीलिए टिकी हुई है तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु