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Swami Vivekananda Great Summer ·

भव्य ग्रीष्म: रिजली मैनर में स्वामी विवेकानन्द 2 sep 2024

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ओ स्काय धर्मास मेरा एक फेवरेट टॉपिक जिसके बारे में मैंने पहले भी बताया था स्वामी विवेकानंद जब सेकंड टाइम अमेरिका में आए तो वह रिजली मैनर में रुके थे और जोसेफाइन मैक्लाउड इस पीरियड को कहती है द ग्रेट समर द भव्य ग्रीष्म समर मींस ग्रीष्म ऋतु तो जो 10 सप्ताह स्वामी जी वहां पर रुके थे और 10 सप्ताह की कहानी बड़ी ही सुंदर है और यह पूरी कहानी मेरी लुईस द्वारा लिपिबद्ध यू डिस्कवरीज स्वामी विवेकानंद इन द वेस्ट बोलकर के जो छह किताबों का वॉल्यूम है छ छह वॉल्यूम में जो किताब है उसके फिफ्थ वॉल्यूम में यह पूरी कहानी नरेट की गई है तो मैं इसमें से थोड़ा-थोड़ा पाठ करूंगा यह पूरा चैप्टर जो है पूरा चैप्टर तो पाठ करना संभव नहीं क्योंकि हम लोगों का जैसे होता है थोड़ा सा पाठ करके फिर उसकी व्याख्या इतनी लंबी चलती है कि फिर इस तरह से जो पूरा चैप्टर करेंगे तो पता नहीं एक साल बीत जाएगा किंतु इसमें से जो कुछ-कुछ पैसेज जो है रिलेवेंट जिसको कि मैंने मार्क करके रखा है तो उस रिलेवेंट पैसेज को थोड़ा सा पढ़ेंगे और और उसके ऊपर में थोड़ा सा देखेंगे स्वामी जी के जीवन में एक साथ में 10 सप्ताह कहीं पर रुकना वो बहुत बड़ी घटना है हमको पता है कि जिस दिन से उन्होंने वराह नगर मठ छोड़ा था मां के आशीर्वाद से अखंडानंद जी को साथ में लेकर के जो निकले थे हिमालय भ्रमण के लिए और सोचा था कि बस मैं गुफा में बैठ कर के वहां पे तपस्या में मग्न हो जाऊंगा और वहीं पर मेरा जीवन का अंत आ जाएगा कहां स्वामी जी ने सोचा था कि वह गुफा में बैठ के ध्यान करेंगे कहां वो भव घूरे बांगला शब्द है कि भव घूरे अर्थात कि एक जिसका जन्म ही हुआ है जिस तरह से कि घूमने फिरने के लिए तो इस तरह से उन्होंने अपना पूरा जीवन भ्रमण करके ही बिताया किंतु यहां पर एक बात है कि इस तरह से भ्रमण करने वाले लोग बहुत है बहुत सारे साधु सन्यासी को भी हम देखेंगे कि एक गांव से दूसरे गांव तीसरे गांव जाएंगे किंतु वे लोग जाते हैं अपने मन की शांति के लिए और यहां पर स्वामी जी का है कि ठाकुर का मैसेज ठाकुर का संदेश प्रसारित करने के लिए सनातन वेदांत धर्म का आदर्श इस भारत की और पृथ्वी पर पूरी सिर्फ भारत की भूमि पर नहीं पूरी पृथ्वी पर वेदांत का यह मैसेज पुनः स्थापित करने के लिए उन्होंने भ्रमण किया है तो स्वामी जी ने जो कुछ भी किया है बिल्कुल निस्वार्थ भाव से किया है ठाकुर के आदेश से किया है तो उसका परिणाम जिस तरह से होता है कि ठ स्वामी जी स्वामी जी के आसपास में जो लोग रहते थे जो लोग उनका जो सानिध्य प्राप्त करने का सौभाग्य जिनको मिला है उन लोगों का जो वक्तव्य है कि हां स्वामी जी के साथ में हम वहां पर रहे स्वामी जी के साथ में यह बात की तो उन लोगों का वक्तव्य सुनकर के उन लोगों के रेमसंस पढ़ कर के हमको लगेगा कि सही में स्वामी जी के आसपास में भले ही चाहे वह खुद अपने मुंह से यहां पे देखेंगे इस चैप्टर में हमको दो कंट्रास्ट दिखाई देंगे एक तो स्वामी जी खुद अपने मित्रों को अपने शिष्यों को पत्र लिखते हैं कि हां अभी ठीक है मैं बीमार स्वामी जी के साथ में बीमारी तो लगी ही रहती थी सेकंड टाइम द्वितीय बार विदेश में आने का यह भी एक कारण था कि डॉक्टर ने कहा था कि आप विदेश यात्रा करेंगे तो आपकी स्वास्थ्य नति होगी आपका स्वास्थ्य धार होगा तो यह भी एक कारण था तो स्वामी जी के खुद के लेटर पढ़ते हैं उस समय के तो स्वामी जी कहेंगे कि हां अभी मेरा स्वास्थ्य ठीक है अभी मैं यह ट्रीटमेंट ले रहा हूं अभी मुझे यह डाइजेशन की यह तकलीफ है या नींद आती है नहीं आती है किंतु उनके साथ में जो रहने वाले हैं कंप्लीट कंट्रास्ट देखिए कि उनके साथ में रहने वाले जो लोग हैं उनको यह बीमार स्वामी जी नहीं दिखाई देते जो कि अपने स्वास्थ्य के लिए यहां पर विदेश में सेकंड टाइम आए हैं उनको दिखाई देते हैं यह जगत जय युग नायक स्वामी विवेकानंद भूतकाल के भूतपूर्व आचार्यों की तरह ऋषि मुनियों की तरह हम जैसे सामान्य लोगों के जीवन में शांति और आनंद का प्रवाह बहाने के लिए उनका जन्म हुआ है और उनका आगमन हुआ है तो उनके साथ में रहने वाले को यह दूसरे स्वामी जी दिखते हैं तो यह जो कंट्रास्ट है कि स्वामी जी के मन की परिस्थिति कभी धुंद चल धंध चल रहा है कभी संग्राम चल रहा है कभी वो में है कि मैं जो सही कर रहा हूं कि गलत कर रहा हूं ठाकुर का आदेश में ठीक-ठीक पालन कर पा रहा हूं कि नहीं यहां पे एक स्वामी जी और उनके साथ में रहने वालों को जो बाहर में जो स्वामी जी दिखते हैं बिल्कुल ही अलग इसका अर्थ क्या है पता है जैसे कि ऐसा होता है ना समुंदर जैसे कि बड़ा गहरा समुंदर है समुंदर के ऊपर में से एक नौका जा रही है तो नौका के जो यह वेव्स जो तरंग फैला फैलेंग नौका के जाने से या जहाज के जाने से तो हमको लगेगा कि देखिए कि समुंद्र के भीतर में किस तरह के तरंग फैल रहे हैं किंतु आप थोड़ा सा ही भीतर में जाइए थोड़ा सा ही डीप में जाएंगे 4 फुट 5 फुट देखेंगे वहां पे कोई भी तरंग नहीं है वहां पे गंभीर प्रशांति है और यह -4 फुट से प्रारंभ करके पूरा एक किलोमीटर ना कि ढ़ किलोमीटर जितना भी यह उसका डेप्थ हो समुंदर का ऊपर से सतह से लेकर के उसकी अंत तक बिल्कुल गंभीर प्रशांति रहती है जो उसके तरंग है बस उसकी सरफेस के ऊपर में क्षण भर के लिए दिखाई देते हैं तो स्वामी जी के पत्रों को पढ़कर के उनके मन के ऊपर में जो सरफेस के ऊपर में सतह के ऊपर में जो टेंपररी क्षण भर के लिए जो तरंग उठते हैं वो स्वामी जी के पत्र में दिखते हैं किंतु उनके हृदय की जो गभीर प्रशांति है सतह से थोड़ा सा ही आप भीतर में चले जाइए जो गभीर प्रशांति अनंत आनंद इटरनल ब्लिस जो प्रारंभ होता है वह बिल्कुल उसके अंत तक वो आपको वही शांति दिखाई देगी स्वामी जी का जो फेमस कोटेशन कि इट इज द नेचर ऑफ ए ब्रूट टू रिमन वेयर इट इज एक पशु का स्वभाव है कि जो जहां पे है वहीं पे रहे इट इज द नेचर ऑफ मैन टू सीक गुड एंड अवॉइड इवल यह मनुष्य का स्वभाव है कि जो अच्छा है उसके पीछे में दौड़े और बुरा है उसको त्याग करें उसको छोड़े एंड इट इज द नेचर ऑफ द गॉड टू गो बियोंड गुड एंड इवल एंड बी एस्टाब्लिशड इन इटरनल ब्लिस देवता का स्वभाव है कि अच्छा और बुरा इष्ट और अनिष्ट इन दोनों के परे जाए और अनंत शांति में वो स्थित हो लेट अस बी गॉड आखिर में स्वामी जी कहते हैं आओ हम देवता बने अच्छे बुरे यह जो हेल्थ देखिए अभी अपना हेल्थ ही एक ऐसा चीज है हमको कभी ऐसा लगेगा कि कहां वो गुड और इवल जो हम क अच्छी किताबों में पढ़ते हैं ना रामायण में पढ़ते हैं महाभारत में पढ़ते हैं कि यह कंस है न कि फिर ये शकुनी है न कि फिर यह रावण है हम तो हम लोगों को तो इस तरह के राक्षसों का सामना नहीं करना है तो हमारे लिए इष्ट अनिष्ट इन दोनों के परे जाने की कौन सी बात है तो हमारे लिए है कि देखिए कि जीवन में जो छोटे-छोटे पा जो लेवल पे जो घटनाएं होती है कभी बीमार हो गए कभी मन खराब हो गया कभी किसी के साथ में झगड़ा हो गया कभी कोई सेट बैक कहीं से मिला तो ये जो छोटी-छोटी घटनाएं भी है वो भी हमारे मन को इस तरह से वो व्यतीत करके रख देती है कि हमको लगता है कि अरे यही जीवन है क्या किंतु उस समय यह देखना है कि यह सब सतह के ऊपर में है हमारा मन इतना गंभीर होना चाहिए साधन करते करते पहले वह एक जमीन के ऊपर में एक जो गड्ढा होता है उसमें कैसा पानी भर जाता है यह कुछ दिनों से बारिश हो रही है तो यहां आश्रम में रास्ते पे सब जगह पर देखेंगे कि वह छोटा सा गड्ढा हुआ है गड्ढे में पानी भर गया है तो जब साधक अपना साधना की प्रारंभ करता है तो यह गड्ढे जैसा उसका मन होता है बस वो आधा फुट ना कि 10 इंच 5 इंच उसका डेप्थ होगा उतना ही अपना डेप्थ है किंतु जैसे-जैसे साधन करते जाएंगे देखेंगे कि ये जल अर्थात कि ये मन की ये जो डेप्थ है वो भी बढ़ती जाएगी पहले गड्ढे जैसा था फिर धीरे-धीरे करके एक तालाब जैसा हुआ एक जलाशय जैसा हुआ जलाशय का जो डेप्थ होता है बड़ा ही गहन होता है इसके बाद में यदि और साधन भजन करेंगे तो एक जैसे कि सागर जैसा होगा उसकी डेप्थ बढ़ती ही जाएगी अपने हृदय के भीतर में ये जो सरफेस है जो उसकी सतह है और उसका अंत है वो प्रारंभ और अंत इन दोनों के बीच का डिस्टेंस बढ़ता ही जाएगा जैसे कि ऊपर में कितना ही डिस्टरबेंस गड्ढा है जैसे कि गड्ढे में आप पत्थर डाले तो उसकी सतह से लेकर के उसके अंतिम छोर तक उसके आखिरी तक देखेंगे कि सब जगह से वो डिस्टर्ब हो जाएगा चारों ओर पानी फैलाना शुरू करेगा कि एक जलाशय हो जलाशय में पत्थर डालेंगे तो काफी गहराई तक उसका डिस्टरबेंस जाएगा किंतु उसका जो आखिरी अंत है वहां तक वो डिस्टरबेंस नहीं जाएगा समुंदर होगा उसमें पत्थर डालेंगे तो उसकी सतह के चार पाच फुट तक ही उसका डिस्टरबेंस रहेगा और जो महासागर है जैसे कि प्रशांत महासागर है जैसे कि भारती हिंद महासागर है इंडियन ओशन है इन सबके भीतर में आप पत्थर तो क्या पूरे पूरे आप घर को उठा कर के भी फेंक दे पूरी पूरी गाड़ी को उठा कर के फेंक दे उसकी जो चार पाच फुट उसके ऊपर में जो डिस्टरबेंस होना है उतना ही होगा फिर उसकी डेप्थ इतनी गहन है कि वहां पर कितना भी आप शांति ही फैली रहेगी तो यह स्वामी जी के जीवन में जो है कि ऊपर ऊपर से डिस्टरबेंस दिखता है किंतु भीतर में कितनी गहन प्रशांति है वह देखने का सबसे सुंदर मौका यह दिस इज द ग्रेट समर तो थोड़ा सा मैं करता हूं इसमें से पाठ स्वामी जी अमेरिका आ चुके हैं जहाज में और जहाज में उनको रिसीव करने के लिए मिस मोड स्टू बोलकर के एक लेडी डिवटी थी वो उनको रिसीव करने के लिए गई है उनके साथ में बाकी दूसरे लोगों को भी आना था मिस मैक्लाउड है वगैरा अ मिस्टर एंड मिसेस लगेट वे लोग रिजली मैनर में रह रहे थे अभी रिजली मेनर न्यूयॉर्क अभी न्यूयॉर्क एक राज्य का भी नाम है न्यूयॉर्क एक सिटी का भी नाम है इसलिए कंफ्यूजन ना हो ये रिचली मैनर न्यूयॉर्क राज्य के भीतर में है न्यूयॉर्क सिटी बंदर के ऊपर में पोर्ट के ऊपर में इनका जहाज आता है ये मिस मोड स्टू उनको रिसीव करती है ये मिस्टर एंड मिसेस लगेट और यह जोसेफाइन मैक्लाउड वे लोग रिजली मैनर से आने वाले थे आते-आते थोड़ा सा देरी हो गया तो स्वामी जी को एक्जैक्ट रिसीव नहीं कर पाए जहाज में से उतरने के समय किंतु थोड़ी ही देर में आ पहुंचे और फिर सभी लोग वो जो उस समय की घोड़ा गाड़ी होती है उसमें बैठ कर के रिजली मेनर जाने के लिए निकले और जो पूरा जो वर्णन है शुरुआत का प्रारंभ का उसको मैं पढ़ता हूं मिस मोड स्टम लिखती है जैसे ही स्वामी जी जहाज में से उतरे वैसे ही उन्होंने इनका दर्शन किया और दर्शन करने के समय क्या दिखा ही वाज टायर्ड एंड इल लुकिंग स्वामी जी थोड़े से थके हुए और थोड़े से अस्वस्थ दिख रहे थे चेहरे से ही वाज रिंग मोस्ट केयरफुली अ बिग बॉटल रेप्ड इन पेपर्स ट वेर टोन एंड रगेट स्वामीजी बड़े ही जतन पूर्वक एक बड़ी बोतल को अपने हाथ में लिए हुए थे यह बोतल पेपर में यह पूरी उसको रेप करके उसको रखा हुआ था दिस प्रेशियस बोटल यह बड़ी ही जतन पूर्वक लाई हुई बोतल व्हिच ही रिफ्यूज टू रिलिश बिफोर रिचिंग बाइन वाटर कंटेन अ वंडरफुल काइंड ऑफ सॉस लाइक करी ब्रॉट दस बाय हैंड फ्रॉम इंडिया फॉर जो ही सेड यह जो बड़े ही जतन पूर्वक स्वामी जी भारत से ये बोतल अपने साथ में लाए थे इसके भीतर में एक खास तरह का सोच था और स्वामी जी अपने हाथ में लेकर के वो जहाज से उतर रहे हैं और किसी ने कहा कि स्वामी जी यह बोतल हमको दे दीजिए तो स्वामी जी ने कहा नहीं इसको तो मैं अपने हाथ में ही रखूंगा जोसेफाइन के जोसेफाइन मैक्लाउड के हाथ में दूंगा इस बोतल में क्या था एक खास तरह का सोच था जो कि स्वामी जी भारत से लेकर आए थे देखिए कि जिस तरह से भक्त भगवान की खातिर करता है भक्त भगवान की अभ्यर्थना करता है आराधना करता है वैसे भगवान भी भक्त का कितना ख्याल रखते हैं जोसेफाइन के लिए पूरे भारत से इतना केयरफुल वक जतन पूर्वक इस बोतल को लेकर के आए हैं अभी इसके बाद में स्वामी जी जहाज से तो उतर गए और यहां से बैठ कर के वह गाड़ी में बैठ कर के विभिन्न तरह से वह रिजली मेनर जाते हैं वो पूरा एक पैराग्राफ है उसको मैं पढ़ता हूं द ट्रेन ट्रिप फ्रॉम न्यूयॉर्क टू रिजली और मोर प्रेसा इजली फ्रॉम वी होकन न्यू जर्सी टू किंगन इन लस्टर काउंटी न्यूयॉर्क 90 माइल्स और सो ऑफ द हडसन वाज अ लवली राइड ये लोग ट्रेन में बैठ कर के य पूरा मैं वर्ड बाय वर्ड ट्रांसलेट नहीं करूंगा क्योंकि डिस्क्रिप्शन बड़ा लंबा है है और इंग्लिश तो आप ज्यादातर लोग समझ ही पाएंगे तो किंतु मैं थोड़ा सा आउटलाइन ट्रांसलेट करता हूं कि जिस ट्रेन में बैठ करके यह लोग रिजली गांव तक गए या तो फिर यह लस्टर काउंटी तक गए वहां से रास्ते में एक जगह पर आते हैं वहां से ट्रेन को चेंज करना था तो यह जो पूरी ट्रेन की जर्नी है बड़ी ही सुंदर जर्नी थी वाज अ लवली राइड बड़ी ही सुंदर जर्नी थी ऑन द राइट लेथ ब्रॉड डी रिवर स्ट्रेट ऑलमोस्ट एज ए कैनल विथ इट्स ट्रैफिक ऑफ शिप्स एंड फेरीज एंड इट्स लाइट हाउसेस इन मिड स्ट्रीम लाइक विक्टोरियन ड्वे सेट अ ड्रिफ्ट उनकी राइट साइड में यानी कि दाई साइड में जब ट्रेन में जा रहे थे तो हडसन रिवर थी और यह रिवर इतनी सुंदर थी रिवर के भीतर में नदी के भीतर में यह सब जहाज वगैरह चल रहे थे बीच-बीच में छो छोटे टापू थे और वहां पर लाइट हाउस भी थी और यह लाइट हाउस आपको पता है ना वो जो होता है वो रात रात के समय में यह जो जहाज चलते हैं तो जमीन के साथ में टकरा ना जाए वहां पे तो अई आज की तरह इलेक्ट्रिसिटी वगैरह नहीं था तो यहां पे जमीन है यह सूचित करने के लिए वो एक बड़ा सा एक स्तंभ जैसा रहता था उसके ऊपर में लाइट रहती थी तो इसको लाइट हाउस कहते हैं तो यह नदी भी इतनी विशाल थी कि उसके भीतर में टापू थे छोटे-छोटे और किनारे भी थे दोनों साइ में तो वहां पे बीच-बीच में लाइट हाउस थे जिसकी मदद से यह लोग समझ पाए जहाज चलाने वाले कि यहां पे जाके टकराना नहीं है विथ इट्स ट्रैफिक ऑफ शिप्स एंड फेरीज एंड लाइट हाउस इन मिड स्ट्रीम ये लाइट हाउस कैसे थे जैसे कि विक्टोरियन घर ये विक्टोरियन घर का जो ये होता है ना स्ट्रक्चर बड़ा ही सुंदर होता है जिन लोगों को ये एस्थेटिक ब्यूटी अच्छी लगती है इन लोगों को यह विक्टोरियन घर अच्छे लगते होंगे तो ये बड़े ही सुंदर विक्टोरियन घर की तरह यह लाइट हाउस बीच-बीच में रखे हुए थे यह तो दाई ओर था अभी बाई ओर क्या कहते हैं ऑन वनस लेफ्ट रोज द टोल हडसन हाइलैंड्स प्रेसिंग क्लोज एट फर्स्ट टू द वाटर्स एज लेटर ऑन फ्लेटनिंग आउट इनटू द वाइड रिवर वैली विथ इट्स फार्म्स एंड पाश्चर्स इट्स ऑर्चर्ड्स इट्स ग्रीन सन स्प्लेश वुड्स इट्स लिटिल टाउंस इट्स स्प्लेंडिड चर्चे एंड इट्स डिस्टेंट माउंटेंस दाई ओर था की हडसन बड़ी ही सुंदर नदी और बाई ओर था लेफ्ट हैंड साइड में देखेंगे कि जो नदी का जो मैदान होता है जिसको कि रिवर प्लेन कहते हैं जि जियोलॉजी की लैंग्वेज में कोई भी नदी होंगी देखेंगे कि नदी के चारों ओर दोनों साइड में खुले मैदान होते हैं इस खुले मैदान में आप नदी में जो भरती और ओट आती है इसकी वजह से जब भी पानी बढ़ेगा तो ये जो रिवर का मैदान होगा उसको फ्लड कर देगा और जैसे पानी कम होगा तो नदी फिर से संकुचित हो जाएगी सिकुड़ जाएगी यह जो बार-बार जो फ्लड होता है इसकी मदद से इसकी वजह से क्या होता है यह जो रिवर प्लेन होते हैं या तो फिर यह नदी के चारों ओर वाले मैदान वो बड़े ही फल द्रुप हो जाते हैं बड़े ही फर्टाइल हो जाते हैं यहां पे आप पेड़ यहां पे आप खेती कर सकते हैं फल पौधे लगा सकते हैं यह फल के बागान लगा सकते हैं र् चड़ अर्थात कि फलों के बागान तो यहां पे यह जो जमीन था बड़ा ही फल द्रुप था छोटे-छोटे गांव थे गांव के चारों ओर बड़े-बड़े मैदान जिसमें कि खेती की जाती थी और फलों के बागान थे तो पूरा एक ग्रीनरी जैसा था और ये ग्रीन जमीन के ऊपर में जब सूरज का प्रकाश आएगा तो ये जैसे कि चमकने लगता है वो जो मैं अभी यहां पे राजकोट से यहां तक जो ट्रेन में आया तो मैंने देखा कि यहां पे भी अपने भारत में तो इस तरह के वो फलदू जो खेत है फर्टाइल जमीन ये तो कितनी सुंदर है और खास करके यह साउथ इंडिया में आंध्र प्रदेश में बहुत ही पानी है और बड़ा ही ग्रीनरी है यहां पे तो जितना जैसे-जैसे ट्रेन जाती है वैसे-वैसे मैं देखता जाता हूं छोटे-छोटे जलाशय है और जलाशय के ऊपर में सूरज की किरण गिरती है और वो इस तरह से चमक रहे हैं जैसे कि जलाशय में आपने वो हीरे मोती बिखेर के रखे हो तो यहां पे भी ये जो एक और तो नदी है नदी के ऊपर में सूरज का प्रकाश गिरता है दूसरी ओर यह हरियाली है खेत है छोटे-छोटे गांव है और ये गांव ये गांवों के चारों ओर यह खेत है यह जो फलों के बागान है और उसके ऊपर में सूरज का प्रकाश गिरेगा तो ऐसा लगेगा कि ये सब सोने के बने हुए हैं जैसे कि हीरे माणिक से जड़े हुए हैं इस तरह से स्पार्कल होंगे और ये जो खेत वगैरह थे ये जो मकान वगैरह थे गांव के इनके दूर थोड़ा सा देखेंगे तो पहाड़ों की श्रृंखला दिखाई देती है तो यह कितना सुंदर नजारा दूर में पहाड़ है थोड़े से पास में ये कम्युनिटी है गांव है खेत है फलों के बागान है और यहां पे एक सुंदर नदी कलकल करती बहती जाती है स्वामी जी के मन का जो थकान होगा जो जो जितना भी कष्ट उन्होंने भारत में किया वह जो हमने देखा था स्वामी जी की लाइफ का आउटलाइन जब देख रहे थे कि ट्रायंफ ऑफ द लॉर्ड ये चैप्टर हमने देखा था कि जैसे ही स्वामी जी भारत में आए कोलंबो में वहां से लेकर के एक साल तक उन्होंने सतत भ्रमण किया है भारत में गांव गांव शहर शहर गए हैं और वह जो किताब हमने पब्लिश की है स्वामी जी ने जो पूरे भारत में घूम के प्रवचन दिए उसका टाइटल भी बड़ा ही एप्ट टाइटल है लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा कोलंबो अर्थात की श्रीलंका से लेकर के अल्मोड़ा अर्थात की हिमालय तो कोलंबो टू अल्मोड़ा यहां पे साउथ इंडिया से प्रारंभ करके हिमालय की वो ऊंचाइयों तक और यहां पर यदि देखेंगे कि नॉर्थ इंडिया वेस्ट इंडिया से पूरे ईस्ट इंडिया तक यहां पे कोलकात्ता से लेकर के ये गुजरात तक उन्होंने पूरे भारत में भ्रमण करके यह प्रवचन दिए थे तो थक गए थे निश्चय थक गए थे तो यह सुंदर ट्रेन राइड यह जो जर्नी है ट्रेन में इतनी सुंदर थी कि उसी से आदा था उनका ये यह ठीक हो जाएगा किंगन वन बोर्डेड अनदर ट्रेन फॉर बाइंग वाटर अ टाइनी स्टेशन सम सेवन माइल्स वेस्ट वहां पर किंगन बोलकर के एक जगह थी गांव था वहां पर उन्होंने ट्रेन बदली और वहां से बाइन वाटर बोलकर के एक दूसरा गांव वहां तक जाने के लिए इस ट्रेन में बैठे हियर द पार्टी वाज नो डाउट मेड बाय अ सरे एंड अ स्पैंकिंग पेयर एंड ड्रिवन द फोर माइल्स टू रिजली अलोंग जेंटली रोलिंग कंट्री रोड जहां पर यह गाड़ी में से उतरे वहां पर यह घोड़ा गाड़ी उनको मिलने के लिए आई इस घोड़ा गाड़ी में बैठ कर के अभी जो जगह है उसको कहते हैं जेंटली रोलिंग जेंटली रोलिंग जगह का क्या अर्थ है कि छोटी-छोटी पहाड़ियां होती है किंतु यह इतनी छोटी होती है कि आप उसके ऊपर में चढ़ रहे हैं तो आपको थकान नहीं लगेगी तो धीरे-धीरे करके आप ऊपर जाते जाएंगे फिर धीरे-धीरे करके नीचे आएंगे इसका वो जो व ज उसकी हाइट ना हो जो धीरे-धीरे करके ऊपर जाना है नीचे आना है इसको जेंटली रोलिंग पहाड़ियां हिल्स कहते हैं तो इस तरह का यह रास्ता था पास्ट एप्पल ऑर्चर्ड्स कॉर्न एंड पंपकिन फील्ड्स वुडेड हिल्स एंड ओकेज फार्म बिल्डिंग्स और जब रास्ते से जा रहे हैं तो यहां पर देखेंगे कि एक साइड में एप्पल के बागान है एप्पल यानी कि सेब गुजराती में कहते हैं सफर्जन तो ये सेब के बागान है फिर यह कौन अर्थात कि ये मक्का मक्के के खेत है पंपकिन पंपकिन बोल कर के एक खास तरह का एक फ्रूट होता है बड़ी साइज का हैलोवीन बोलक के इनका एक त्यौहार है उत्सव है तो हैलोवीन उत्सव में यह पंपकिन को काट करके उसके भीतर में राक्षस जैसा एक चेहरा बना कर के उसके भीतर में एक दिया जैसा रख करके ये लोग अपने फ्रंट यार्ड अर्थात कि ये जो वरांडा होता है उसमें ये लोग रखा करते हैं तो यह पंपकिन फील्ड है यह कॉन फील्ड है एप्पल ऑर्चर्ड है और यह जेंटली रोलिंग हिल है इस तरह के कंट्री रोड से यानी कि गांव के रास्ते से जा रहे हैं मोस्ट ऑफ दिस लास्ट वेयर ऑफ द 19th सेंचुरी नियर रेड बांस एंड वाइट हाउसेस गलप अलोंग द इव्स विथ वुडन रिक रेक कॉल्ड हडसन रिवर ब्रीकेटेड बट हियर एंड देयर अ स्मॉल थर्ड स्टोन हाउस डेटिंग बैक टू प्री रेवोल्यूशन डेज स्टूड हाफ हिडन अमंग प्रोटेक्टिव एल्म्स एंड चेस्टनट वहां के वो मकानों का वर्णन किया गया है बहुत सारे टेक्निकल वर्ड ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं कहता है कि ज्यादातर जो ये घर है वह सब बांबू या तो फिर लकड़े के बने हुए हैं किंतु बीच-बीच में थोड़े से घर पत्थर के भी बने हुए हैं अच्छा तो यहां पर अभी यह जो रास्ता क्रॉस करके वे लोग रिजली में प्रवेश किए रिजली मैनर रिजली बोल कर के वो गांव है उसमें यह मेनर है घर है तो उसको रिजली मेनर कहा जाता है अभी यहां से जो पूरा डिस्क्रिप्शन है पूरे दो पेज का कि रिजली मैनर की किस तरह से कौन सा घर कहां पर है कौन सा बिल्डिंग कहां पर है यह वगैरह इसको मैं पूरा स्किप कर देता हूं सीधे चले आते हैं रिचली मैनर में रहने वा वाले लोग और उनके मन की परिस्थिति के बारे में तो ये मेरी लुईस क्या लिखती है कि इट वाज इट वाज ऑल हार्मनी एंड जॉय एट रिजली ट समर ऑफ 18990 जो 18999 का यह जो ग्रीष्म ऋतु है गर्मी की सीजन है उस समय रिजली मैनर में पूरा शांति और आनंद का वातावरण फैला हुआ था द ग्रेट समर एज इट केम टू बी कॉल्ड इस पूरे पीरियड को 10 सप्ताह को जहां पे स्वामी जी रुके उसके बारे में कहा गया ग्रेट समर यह नाम दिया था जोसेफाइन मैक्लाउड ने एंड अ ग्रेट समर इट वाज और सच में वह भव्य ग्रीष्म था फॉर द ग्रुप ऑफ पीपल दैट सेंटर्ड अराउंड ए सेंट एंड प्रॉफिट ऑफ द हाईएस्ट मैग्निटिया नेवर नोन बिफोर एंड वेरी लाइक विल नॉट नो सून अगेन जिस तरह के गेस्ट जिस तरह के मेहमान वहां पर रह रहे थे और यह मेहमान अपने आप में ग्रेट है किंतु उनके आसपास में जिन लोगों का यह हुआ था इकट्ठे हुए थे जो लोग उनके साथ में रहने को सौभाग्यवाटी सबकी तो इस तरह के मेहमान और इस तरह के यजमान यह स्वामी जी और यह उनके शिष्य यह जो वहां पे इकट्ठा हुए थे लोग यह आध्यात्मिक जीवन में यूनिक है पहले किसी ऐसा कोई एक घर नहीं होगा वहां पे इस तरह के संत और उनके शिष्य इकट्ठा हुए हैं और भविष्य में भी ऐसा कभी नहीं होगा कि इस तरह के संत और उनके इस तरह के शिष्य कहीं पे एक घर में एक फार्म हाउस में इकट्ठा होकर के रह रहे हैं इनडीड दोज 10 वक्स वेर रेयर इवन फॉर स्वामी जी यह जो 10 सप्ताह स्वामी जी रहे एक जगह पे वो स्वामी जी के लिए भी एक बड़ा ही एक रेयर इवेंट है मने स्वामी जी कहां वो 10 सप्ताह 10 दिन कहीं पर रुकेंगे तो बहुत बड़ी बात है तो 10 सप्ताह जो रुके स्वामी जी वह भी एक बड़ी ही रेयर इवेंट है फॉर सेल्डम हैड ही स् पेंट सो लो टाइम वेकेशनिंग इन वन प्लेस एक जगह पर स्वामी जी इतना लंबा रुके हो ऐसा पड़ा ही रेयरली हुआ है अभी जहां पर स्वामी जी को और साथ में रयान जी भी थे तो स्वामी जी और तुर्या जी इन दोनों को रहने के लिए जो जगह दी गई उसके बारे में भी एक बड़ी सुंदर कहानी है यह कहानी मैंने पहले भी कही है यहां पर सुंदर रूप से जो लिखा गया है इसको को देखते हैं इन कनेक्शन विद द स्वामी स्लीपिंग क्वार्टर्स अ चार्मिंग स्टोरी वास टोल्ड इन लेटर इयर्स बाय मिस मैक्लाउड टू स्वामी निखिलानंद हु पास्ड इट ऑन मी स्वामी जी ये दोनों स्वामी जी के जो सोने की जो व्यवस्था थी इसके बारे में एक बड़ी ही सुंदर कहानी मिस मैक्लाउड ने स्वामी निखिलानंद जी को कही थी और स्वामी निखिलानंद जी ने इसकी ऑथर टू मी अर्थात की ऑथर मेरी अ मेरी लुईस को बताई थी तो ये मेरी लुईस क्या कहती है मिसेस लगेट कमिंग टू इंस्पेक्ट द अकोमोडेशंस इन द कॉटेज फाउंड स्वामी रयान अदास मैट्रेस एंड बेडिंग ऑन द फ्लोर ऑफ हिज रूम ये मिस बेटी लगेट जो कि फ्रांसिस लगेट की वाइफ और जोसेफाइन मैक्लाउड की बहन इन तीनों के बारे में हमने काफी डिस्कस किया है कि ये तीनों स्वामी जी को कैसे मिले थे तो यहां पे ये बेटी लगेट तो फ्रांसिस लगेट का पूरा मैनर है पूरा ये फार्म हाउस फ्रांसिस लगेट का है तो यह बेटी लगेट उनकी वाइफ की जवाबदारी होती है कि सबके जो वहां पर जो मेहमान आए हैं उनके रहने की खाने की व्यवस्था ठीक-ठीक हो रही है कि नहीं तो वो इंस्पेक्शन करने के लिए आई स्वामी जी के कमरे में गई सब देखा ठीक है रयान जी के कमरे में आई देखा कि रयान जी ने अपना बिस्तर और यह जो पिलो है वह जमीन पर बिठा करके रखा है व्हाट इज द मैटर स्वामी शी एक्सक्लेमेटरी अरे स्वामी जी क्या बात है आपने इ समथिंग रंग विद द बेड आपका जो यह बेड जो है जो खाट है उसके साथ में क्या कुछ प्रॉब्लम है नो नो ही असर्ड हर र आनंद जी ने भरोसा दिलवा के कहा नहीं नहीं कुछ भी प्रॉब्लम नहीं द बेड इज फाइन जो खाट है वह तो ठीक ही है बट यू सी किंतु देखिए आई कैन नॉट ब्रिंग माय सेल्फ टू स्लीप ऑन द स्लेम लेवल इज स्वामी जी स्वामी जी जिस लेवल प सो गए हैं सोएंगे उस लेवल प सोने को मेरा मेरा साह उस लेवल प सोने की मेरी इच्छा नहीं है उस लेवल प मैं सोना नहीं चाहता यानी कि जो देखिए दोनों एक ही फ्लोर पे थे और एक ही तरह की हाइट के बेड ऊपर थे तो स्वामी जी भले ही अपने कमरे में हो वो जिस हाइट प सोएंगे उसी हाइट प तो रयान जी सोएंगे तो बोलेंगे रयान जी कहते उस हाइट प सोने की मेरी इच्छा नहीं है सो आई हैव पुट द मैट्रेस ऑन द फ्लोर इसलिए मैंने अपना जो बिस्तर है उसको जमीन पर बिठाया है जिससे कि स्वामी जी से नीचे में मैं सोऊ वन माइट एड हियर दैट सो ग्रेट वास द लव एंड रेवरेंस दैट स्वामी दर्यान ऑलवेज शो फॉर स्वामी जी दैट मिसेस लगेट थॉट एट फर्स्ट एटलीस्ट दैट ही वाज स्वामी जी डिसाइल रयान जी और स्वामी जी दोनों एक साथ में रह रहे हैं रिजली मैनर में किंतु रयान जी की स्वामी जी के प्रति जो श्रद्धा भक्ति है उनका जो रिस्पेक्ट है उनके प्रति इतना है कि यह जो बेटी लगड ने शुरू शुरू में तो यही सोच लिया कि तुर्या जी स्वामी जी के शिष्य है हेत स्वामी जी के गुरु भाई थे ठाकुर के साथ में दोनों लोग जाते थे दोनों को ठाकुर के पास में ही ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ है और तुर्या जी का तो हमको पता है कि कितने बड़े शास्त्रज्ञ पंडित थे किंतु फिर भी स्वामी जी के प्रति जो रिस्पेक्ट रखते थे जो श्रद्धा रखते थे तो मिस बेटी लगेट ने यही सोच लिया कि वह स्वामी जी के शिष्य है नहीं कि उनके गुरु भाई है और वह लिखती भी है कि द रेस्ट इ पीस टू स्वामी जी सस रेस्ट इ पीस टू स्वामी जी यह जो स्वामी जी विश्राम ले रहे हैं यहां पर उससे उनको बड़ा ही आराम मिल रहा है ही लव्स बी अवे विथ हिस डिसाइल उनके जो शिष्य है उनके साथ में बातें करने में उनके साथ में रहने में उनको बड़ा ही आनंद आ रहा है उनके शिष्य यानी के तुरना जी हु वस एवरी जेस्चर एंड ज इंटरेस्टिंग इन हिज डिवोशन टू हिज मास्टर य जो कि अ तुर्या अंद जी स्वामी जी के प्रत्येक बातों को प्रत्येक इशारों को प्रत्येक उनकी वर्तन को बड़ा ही ध्यान से निरीक्षण करते हैं उनके कहे अनुसार कार्य करने का प्रयास करते हैं और उनके बड़े ही अनुग है यानी कि एक पत्र में लिखा है मिसेस बुल को लिखते है पत्र में कि ये तुर्या अंद जी उनके कितने ही निष्ठावान डिसाइल है माने ये श्रद्धा इस तरह से व्यक्त करते हैं कि लगेगा कि गुरु भाई नहीं है उनके शिष्य अभी थोड़ा सा और स्किप कर लेता हूं और यहां पर स्वामी जी वहां पर पोयम लिखते हैं उस समय पोयम का नाम है पीस और इस देखिए कि कितनी सुंदर यह है पोयम इसका मैं ट्रांसलेशन नहीं करूंगा व बस मैं इसको पढ़ लेता हूं पीस उसका नाम है स्वामी जी लिखते हैं बहोल्ड इट कम्स इन माइट द पावर दैट इज नॉट पावर द लाइट दैट इज इन डार्कनेस द शेड इन डेजलिंग लाइट इट इज ब्यूटी नेवर सीन एंड लव दैट स्टैंड्स अलोन इट इज इट इज सॉन्ग दैट लीव्स अनसंग एंड नॉलेज नेवर नोन इट इज डेथ बिटवीन टू लाइव्स एंड लल बिटवीन टू स्टॉर्म्स द वॉइड वेंस रोज क्रिएशन एंड ट वेर इट रिटर्न्स ये आखिरी लाइन थोड़ा सा देखते हैं पीस अर्थात कि यह अनंत शांति क्या है इट इज डेथ बिटवीन टू लाइव्स दो जीवन है हमको पता है कि जन्म मृत्यु जरा व्याधि कीय साइकल जो है यह चक्र है हमेशा के लिए चलने वाला है अभी इस बार मृत्यु हुआ तो इस बार जीवन हुआ तो इस बार मृत्यु हुआ तो इस बार जीव जन्म प्राप्त किया तो जन्म मृत्यु जन्म मृत्यु चलता ही जाएगा तो यह अनंत आनंद क्या है इट इज डेथ बिटवीन टू लाइव दो जीवन के बीच का मृत्यु वह है यह अनंत आनंद एंड लल बिटवीन टू स्टोम स्टोम यानी कि यह मने झंझावात य एक तूफान तो दो तूफानों के बीच की जो शांति होती है वह है यह अनंत आनंद द वॉइड वेंस रोज क्रिएशन जो एक वॉइड अर्थात की शून्य वो शून्य जिसमें से कि सृष्टि का प्र होता है सृष्टि का सर्जन होता है एंड ट वेयर इट रिटर्न्स और वही शून्य जिसमें की सृष्टि प्रलय होकर के समाहित हो जाती है तो वो शून्य वो वोइड वो स्पेस जिसमें से कि सृष्टि का प्रारंभ होता है और जिसमें सृष्टि समाहित हो जाती है सृष्टि का अंत होने वाला है वह वट या तो वह शून्य है अनंत प्रशांति कितना सुंदर डेथ बिटवीन टू लाइव लल बिटवीन टू स्टोम वॉइड वेंस रोज क्रिएशन एंड ट वेर इट रिटर्न्स ट इज पीस यानी कि यह यहां पर नाम दिया है पीस किंतु सही सही व्याख्या करें तो यह समाधि ही होगा यदि इसका ट्रांसलेशन करें तो समाधि के लिए ही है यह और यह देखिए पहली लाइन है इसकी यह भी इतनी सुंदर है बहोल्ड इट कम्स इन माइट यानी कि प्रचंड शक्ति से इसका प्रारंभ होता है द पावर ट इज नॉट पावर यह शक्ति है किंतु फिर भी शक्ति नहीं है द लाइट ट इज इन डार्कनेस द शेड इन डेजलिंग लाइट ये प्रकाश है अंधेरे के भीतर में और प्रचंड प्रकाश के भीतर में प्रचंड उजाले के भीतर में यह छाव है कंट्रक्शन देखिए कि अंधेरे में यह प्रकाश है प्रचंड उचा के भीतर में यह छाव है लाइट ट इज इन डार्कनेस द शेड इन डेजलिंग लाइट ये जो कंट्रक्शन है यह समाधि क्या है ये आध्यात्मिकता के उच्च आयाम क्या है इन सबको तो शब्दों में वर्णन करना मुश्किल है तो इसको या तो अ नेती नेती करके वर्णन करेंगे ये एक तरीका हो गया कि समाधि क्या है तो मन की शांति तो यह भी नहीं समाधि क्या है तो यह वृत्तियों की शांति तो यह भी नहीं क्योंकि ये सब शब्दों से हमने बना कर के रखा है सही सही समाधि जब प्राप्त होगी तब पता चलेगा कि यह जो शब्दों के वर्णन है इसके सामने कहां छोटे-मोटे पड़े रहते हैं वे तो उसका असली आनंद तो कुछ अलग ही है तो वो एक तरीका है कि नेति नेति करने का दूसरा एक तरीका है समाधि की स्थिति को वर्णन करने का यह कॉन्ट्रा क्शन के माध्यम से व उजाले में यह अंधकार है और प्रचंड प्रकाश के भीतर में यह छाव है अभी इसका क्या अर्थ है समझ लीजिए यह प्रचंड शक्ति है किंतु फिर भी यह शक्ति नहीं है इट कम्स इन माइट द पावर ट इज नॉट पावर शक्ति है प्रचंड जिससे यह जिसमें से यह प्रचंड शक्ति खड़ी होती है जिसमें से यह प्रचंड शक्ति का अभ्युदय होता है किंतु फिर भी यह शक्ति शक्ति नहीं है इट इज डेथ बिटवीन टू लाइंस अभी देखिए और एक लाइन है यह भी बड़ी सुंदर है इट इज ब्यूटी नेवर सीन एक ऐसा सौंदर्य है जिसको कि आप कभी निरीक्षण नहीं कर सकते कभी भी आप देख नहीं सकते एक्चुअली सौंदर्य का अर्थ ही है कि हमने देख कर के उसको ठीक किया है कि यह सुंदर है जैसे यह ट्रेन राइड थी यह ट्रेन जर्नी यह जो वहां बंदर से लेकर के यहां तक गांव तक आने की रिजली तक आने की तो हमने देखा कि एक सुंदर नदी बह रही है फिर यह नदी के किनारे प बड़ा सुंदर एक मैदान है जिसके भीतर में खेत है फूलों के फलों के बागान है सुंदर-सुंदर घर जैसे कि खिलोने ज जैसे दूर से दिखाई दे रहे हैं उसके पीछे में पहाड़ है सबके ऊपर में सूरज का प्रकाश खेल रहा है जैसे कि छोटे बच्चे की तरह तो देख कर के हमको पता चला कि यहां इसका कितना सुंदर सौंदर्य है और यह सौंदर्य को देख कर के स्वामी जी का मन कितना ही उसको सुकून मिला कितना आनंद मिला किंतु यह कैसा सौंदर्य है समाधि द ब्यूटी नेवर सीन ऐसा सौंदर्य जिसको आप देख नहीं सकते यदि देख नहीं सकते तो किस तरह का सौंदर्य ये तो खिड़की सब बंद करके वो ट्रेन में जर्नी करने जैसा हुआ खिड़की बंद कर दी तो पता कैसे चलेगा कि बाहर में सौंदर्य है एंड लव दैट स्टैंड्स अलोन एक ऐसा प्रेम जो कि अकेला है देखिए कि ये भी एक कंट्रक्शन है यदि आपके हृदय में प्रेम है तो किसी चीज के प्रति होगा किसी व्यक्ति के प्रति होगा जैसे कि ये किताब है तो ये किताब को मैं बड़ा ही प्रेम करता हूं तो दो हो गए ना मैं हूं और यह किताब है और यह किताब और मेरे बीच में प्रेम है दो व्यक्ति आपस में प्रेम करते हैं मां जैसे अपने बच्चे को प्रेम करती है पति और पत्नी का जैसे प्रेम होता है तो यह तो हो गया कि दो चीज चाहिए प्रेम करने के लिए सब्जेक्ट ऑब्जेक्ट एंड रिलेशनशिप तो यहां पर स्वामी जी लिखते हैं लव दैट स्टैंड्स अलोन एक ऐसा प्रेम जो अकेला खड़ा है और स्टैंड्स अलोन क्यों कहा है अद्वैत कि मैं ही हूं आत्मन और मेरा स्वरूप है प्रेम तो आत्मन के भीतर में प्रेम एक भाव है जो कि किसी के प्रति डायरेक्ट नहीं हुआ है प्रेम उसका स्वभाव ही है भालो भाषा उसका स्वभाव ही है तो लव दैट स्टैंड्स अलोन इट इज सॉन्ग दैट लीव्स अनसंग एक ऐसी कविता है जो कभी गाई नहीं जाती अभी यह भी एक कंट्रा इक्स है यदि कविता है जद एक गीत है यदि एक भजन है तो उसको जदी हम गाएंगे तभी तो उसका सौंदर्य उसका प्रभाव उसका जो एक उसका जो ओरा है वह बाहर में आएगा तभी तो लोग उससे सम्मोहित होंगे तभी तो लोगों को व अच्छा लगेगा किंतु एक ऐसा सॉन्ग है जिसको कि कभी गाया नहीं जाता द सॉन्ग दैट इज अनसंग ट लीव्स अनसंग ऐसा एक गीत जो कि बिना गाए हुए रहता है एंड नॉलेज नेवर नोन एक ऐसा ज्ञान जिसको कि आप कभी जान नहीं सकते ऐसा ज्ञान जो कि अनजाना है अभी यह भी कंट्रक्शन कि नॉलेज है जिसको कि व्च कैन नॉट बी नोन तो यह किस तरह का नॉलेज है आपको किसी ने बता दिया कि कहां पर एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी है उस लाइब्रेरी में बहुत सारी किताबें है जो कि बहुत ही जिसके भीतर में बहुत सारा ज्ञान है तो इस बात का सबूत क्या है कि मैं उस लाइब्रेरी में जाऊंगा किताब खोलूंगा किताब खोलकर पढ़ूंगा तो मुझे पता चलेगा कि हां सही में तो बड़ी ही सुंदर किताब है इसमें बहुत कुछ जानने के लिए है किंतु यह लाइब्रेरी सब समय लॉक करके रखते हैं तो फिर मुझे कैसे पता चलेगा किसी ने बता तो दिया कि इसके भीतर में किताब है किंतु किताब है तो देखी नहीं है किताब ना ही इसको खोल करके कभी पढ़ा है सो नॉलेज ट इज नेवर नोन क्यों क्योंकि यह ज्ञान स्वरूप स्वयं है देखिए आपको जानने के लिए दो चीजों की जरूरत है ज्ञाता जय और ज्ञान य दो पहले तो ज्ञाता होता है दस ज्ञ होता है जो जानने वाला है और जिसके बारे में जाना जाता है इन दोनों के बीच का रिलेशनशिप है जिसको कहते हैं ज्ञान ज्ञाता है जय है दोनों के बीच में ज्ञान है किंतु मैं ही ज्ञाता हूं मैं ही जय हूं तो फिर यह ज्ञान कहां से आने वाला है यह नॉलेज है कि हां कि मैं ही मैं हूं किंतु इन दोनों के बीच में रिलेशनशिप नहीं हो सकता ट नॉलेज वि इज अननोन तो यह कंट्रा इक्स करके स्वामी जी यहां पर समाधि के बारे में बताते एक है नेति नेति का रास्ता समाधि को समझने के लिए दूसरा है यह कंट्रा इक्स या तो फिर इंग्लिश में एक बड़ा ही सुंदर शब्द है पैराडॉक्स ये पैराडॉक्स का एक रास्ता है जो कि हमको समाधि के बारे में बताता है क्योंकि यह सामान्य बातों से सामान्य कहानियों से सामान्य गीत से सामान्य कविता से हम लोग समाधि को नहीं समझने वाले हैं इसके लिए समाधि एक ऐसा असामान्य चीज है कि उसको समझने के लिए कुछ असामान्य धन चाहिए तो उसके लिए यह पूरा कंट्रक्शन वाला कविता स्वामी जी ने लिखा है अच्छा तो इसके बारे में आगे अभी हम फिर देखते हैं शा हरि श्री राम कृष्णा