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ओम स्थापा का यॉट धर्म स्वरूप नहीं अवतार वरिष्ठ आओ रामकृष्ण देव नमो तो हम लोग ठाकुर का कथामृत और मां का जीवन गंभीर नदी का इन दोनों में से पाठ कर रहे थे स्वामी जी का हम करते थे बहुत दोनों पहले किंतु फिर काफी दिन से छठ गया है तो मैं सोचता हूं बीच-बीच में फिर स्वामी जी को भी ले ले कंप्लीट क ऑफ स्वामी विवेकानंद पहले हम कोटेशन में से पढ़ने थे किंतु अभी स्वामी जी के सीरीज ऑफ लेक्चर है उसका नाम है ज्ञान योग और ज्ञान योग में स्वामी जी का एक बहुत ही सुंदर बहुत ही रेलीवेंट दो लेक्चरर्स से उसका नाम है कॉसमॉस्प माइक्रोकॉस्म और कॉसमॉस दी मैक्रोपोजल अभी इन दोनों के पीछे की कहानी भी हमको पता है की स्वामी जी जब हिमालय में भ्रमण कर रहे थे परिवार जग के रूप में उसे समय उनको कड़ी घाट जाते हुए अल्मोड़ा जाते हुए कड़ी घाट बोलके एक जगह है वहां पे एक उनको एक अनुभूति हुई थी एक अनुभव हुआ था तो उसे अनुभव के आधार पे उसे अनुभव को उन्होंने अपने पास में एक नोटबुक थी उसमें नोट डॉ कर लिया कर और उसके आधार पर उन्होंने यह माइक्रोसोम और मैक्रोपोज्म यह दो लेक्चर डिलीवर किया थे माइक्रोफोन अर्थात की हमारे भीतर में जो जीवात्मा है वह हमारे भीतर में जो चैतन्य है वह हमको क्या एक डेड बॉडी और एक जीवंत व्यक्ति इन दोनों के बीच में क्या फर्क है डेड बॉडी के भीतर में चैतन्य नहीं है जीवंत व्यक्ति के भीतर में है तो ये चैतन्य जो की हमारे भीतर में है और दूसरा है की विश्व ब्रह्मांड के भीतर में जो विराट रूप से ये ब्राह्मण विराजित है वो तो हमारे भीतर का चैतन्य और विश्व ब्रह्मांड के भीतर में छुपा हुआ चैतन्य ये माइक्रोकॉस्म और वो मैक्रोपोज्म इन दोनों का यूनिटी ये दोनों एक ही है अभी यह आइडिया तो कोई नया नहीं है हमारा उपनिषद जो है हमारे उपनिषद हमारे शास्त्र इन सबका फंडामेंटल आइडिया यही है और हम ब्राह्मणी जिसको की महावत क्या कहते हैं प्रज्ञानंम मां मेरे भीतर में जो आत्मा है या तो जो चैतन्य है और जो विश्व ब्रह्मांड का जो चलित करने वाला चैतन्य वो दोनों एक ही है ये तो हमारे हिंदू शास्त्र का फंडामेंटल कॉन्सेप्ट है तो इस कॉन्सेप्ट को स्वामी जी ने वहां पर उसे दिन विजुलाइज किया था और इस विजुलाइजेशन के आधार पे की उनके भीतर का चैतन्य यानी की हमारे भीतर का और विश्व ब्रह्मांड के भीतर का यह दो एक ही है उसके बेस पर उन्होंने अमेरिका जाकर के दो लेक्चर दिए थे माइक्रोपॉज़्म और मैक्रोपोजल तो हम यह जो कंप्लीट वर्ष का सेकंड वॉल्यूम है उसमें ज्ञान योग नमक जो सीरीज ऑफ लेक्चर है उसमें से कॉस्मो माइक्रोकॉस्म ऑस्मोस दी माइक्रोपॉज़्म इसका आज से पाठ करेंगे पढ़ने जाएंगे ओरिजिनल इंग्लिश में है एक-एक दो दो सेंटेंस पढ़ेंगे उसका अर्थ विस्तार करेंगे मैं जनरली क्या करता हूं की जो भी पुस्तक जी और ओरिजिनल लैंग्वेज में है उसको पढ़ने का पर्यटन करता हूं जिससे क्या होता है की मुझे पता है पब्लिकेशन में हूं तो ट्रांसलेशन में बहुत कुछ मिस हो जाता है इसलिए हमने कथमरोध और मां का जीवन हमने बंगाली में देखा तो इसको हम इंग्लिश में देखेंगे क्योंकि ये ओरिजनली इंग्लिश में डिलीवर किया गया था और इंग्लिश में लिखा गया था तो कॉसमॉस भी मैक्रोसोम लिखा है की डिलीवर इन न्यूयाॅर ऑन 19th जनवरी 1896 19 जनवरी 1896 के दीनूरेक में इस लेक्चर को दिया गया है स्वामी जी क्या कहते हैं डी फ्लावर्स डेट वे सी अराउंड स आर ब्यूटीफुल हम अपने चारों और जो फूल देखते हैं वो कितने सुंदर है ब्यूटीफुल इस डी राइजिंग ऑफ डी मॉर्निंग सन ये जो सुबह को जो ये सूरज उगता है वो दिखने में कितना सुंदर है ब्यूटीफुल आर डी वेरी गेटेड ह्यूज ऑफ नेचर और यह जो प्रकृति के विभिन्न रंग रोगन है ये अलग अलग तरह के कलर ये प्रकृति धरण करती है वह भी कितने खूबसूरत है प्रकृति जैसे की सुबह को देखेंगे की सुबह को आकाश में लालिमा हुई है फिर यदि यह वसंत की रूट होगी तो चारों और ग्रीनरी हो जाएगी फिर यदि समर सीजन होगा तो धीरे-धीरे करके ये ग्रीनरी और भी हमको दिखाई देगी फिर ये पतझड़ का मौसम होता है तो पेट वगैरा येलो या तो ऑरेंज होना शुरू हो जाते हैं तो सीजन के अनुसार दिन के अनुसार आकाश का कलर पत्तों का कलर फूल का कलर ये फूलों के कितने सारे कलर के सब कुछ हमको इतने सारे कलर पूरे जैसे मेघ धनुष साथ रंग के मेघ धनुष प्रकृति हमारे सामने प्रकट करती है उसे ऑफ नेचर प्रकृति के विभिन्न ये हो सकता रंग के कलर भी कितने खूबसूरत है और में है बिन एंजॉयिंग इट्स अपीरियंस ऑन अर्थ और जब से हम पृथ्वी पर हमारा प्रगातीय हुआ अभी पृथ्वी पर प्रगति हम किस तरह से हुए उसमें बहुत साड़ी थिअरीज है कोई कोई लोग इवोल्यूशन को एक्सेप्ट करते हैं कोई इवोल्यूशन को एक्सेप्ट नहीं करता तो जो भी है स्वामी जी कहते हैं जी दिन से हम लोग पृथ्वी पर प्रकट हुए हैं तभी से हम प्रकृति के इस समदर्यों का प्रकृति के इस सौंदर्य का उपभोग करते हैं हम प्रकृति के इस सौंदर्य को एंजॉय करते ए रहे हैं सब लाइन और ओ इंस्पायरिंग आर डी माउंटेंस सुंदर और भाव है यह पहाड़ तो गिगैनटिक रशिंग रिवर्स रोलिंग टुवर्ड्स दी सी विशाल नदियां जो की समुद्र की और बाटी चली जा रही है डी ट्रैकलिस्ट डिजर्ट्स मरुभूमि जहां पे किसी भी तरह का रास्ता नहीं है तो इनफाईनाइट ओसियन अनंत समुद्र डस्टर हैवान तारों से मुंडा हुआ ये रात्रि का आकाश जो दिस आर ओ इंस्पायरिंग सब लाइंस और ब्यूटीफुल इंडिविजुअल यस सब ओ इंस्पायरिंग यानी की हमारे मां में एक एक इस तरह का भाव उत्पन्न करता है जिससे की हम लोग इससे आश्चर्य चकित हो जाते हैं एक ओ इंस्पायरिंग सब लाइन यानी की सूक्ष्म सब्लाइम और ब्यूटीफुल इंडी सुंदर भी है देखिए स्वामी जी ने पहले तो प्रकृति का वर्णन कर दिया प्रकृति देखिए की स्वामी जी ने खुद ने लेक्चर फ्रॉम कोलंबो तू अल्मोड़ा में कहां है की दो तरह के प्रजातिहास में एक तो ग्रीक प्रजा जो की बहुत पुराना इतिहास यदि खोल के देखते हैं तो एक तो यूरोप की ग्रिप यूरोप के ग्रीक और भारत के ये हमारे हिंदू या तो फिर कहेंगे की वैदिक सिविलाइजेशन इन दोनों में देखिए की बाद में इतना डिफरेंस क्यों हुआ ग्रीक प्रजा जो है या तो फिर यूरोपियन जो है उनका पूरा नेचर एक्सटर्नल हो गया बाहर की आज देखिए की साइंस टेक्नोलॉजी इकोनॉमिक्स ऑनर्स वाॅरफेयर आर्मी वेपन डेवलपमेंट ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से क्वांटम डायनामिक ये जेनेटिक्स जो भी कहे या जी साइंस टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग सब कुछ यूरोप में डेवलप हुआ और ये फिलोस ही दर्शन शास्त्र आध्यात्मिकता अवतार का बार-बार जन्म धरण करना पृथ्वी पर आना संत महापुरुष की एक अनंत परंपरा मनुष्य के भीतर में दया करुणा यह सब सदगुण राशि का प्रकट होना ये सब भारत में हुआ तो देखिए की इस तरह से क्यों हुआ इतिहास में दो तरह की प्रजा एक यूरोपियन को देखिए की उन्होंने पूरा एक्सटर्नल साइंस डेवलप किया और हमने यह पूरा इंटरनल mp3 डेवलप किया हमने अपने हृदय को विकसित किया और उन्होंने अपने हाथ को डेवलप किया हाथों से ही तो साइंस और टेक्नोलॉजी आप उसके ऊपर में कम कर सकते हैं और हृदय से ही तो ईश्वर को समझ सकते हैं मैन कहा था किसी किसी ने मां को पूछा की जाप करने का सर्वश्रेष्ठ जगह कहां पे है क्या अपने जो कल में जो चक्र है वहां पर हम जाप करें क्या तो मां ने कहा अरे ऐसा मत मित्रों ऐसा कभी मत करो अपने मस्तिष्क पर मां एकाग्र मत करो इससे तो तुम ये जी जिसने पूछा था जी साधु ने उसको सर दर्द बड़ा ही जोर से बड़ा ही सीवर हो रहा था तो फिर मानव मां को पूछा की मैं अपने मस्तिष्क के ऊपर में ध्यान करता हूं जाप करता हूं मैन कहा ऐसा कभी मत करो जब ध्यान करना है हमेशा अपने हृदय में तो देखिए की हम हिंदुओं ने हृदय को डेवलप किया और ये यूरोपियंस ने अपने हाथों को डेवलप किया हाथ पर जो भी बोलो उन्होंने पूरे विश्व में भ्रमण करके सभी प्राजों के ऊपर में विजय प्राप्त किया किंतु हमारे जितना प्रेम भालोबासा करुणा श्रद्धा निष्ठा सहानुभूति यह ईश्वर के प्रति ईश्वर को समझना की यह सूक्ष्म दृष्टि यह प्रकृति के जो दृश्य को देखने की यह हम भारत में डेवलप हुए तो ऐसा क्यों हुआ स्वामी जी कहते हैं क्योंकि भारत की जो ग्राफ है भारत जो भूगोल है वो कैसी है की एक साइड में हिमालय है दूसरी साइड में ये हिंदू पुष्प पर्वतमाला है भाई और दूसरी और ये अरब ओसियन है बी ऑफ बंगाल है और इंडियन ओसियन है तो ये चारों और से भारत इतना सेफ है की बहुत रेयरली भारत में आक्रमण होते थे और यहां की जो जमीन है यह गंगा का जो पूरा तट वो इतना फलाद रूप है इतना फर्टाइल है की थोड़ा सा ही मेहनत करने से किसान को आराम से अपने को खाने के लिए और अपना परिवार का जीवन निर्वाह करने के लिए सब कुछ मिल जाता था तो ये पूरे सेल्स और सीकर एनवायरनमेंट में रहकर के हिंदू का हृदय ये प्रकृति के जो इतना सौंदर्य है उसको देखकर के धीरे-धीरे उसका मां अंतर्मुख होना शुरू हुआ और यह ग्रीस रोम है या तो फिर यह फिलिस्तीन है जहां पर जुड़ाइएसएम का और प्रगति हुआ या तो फिर इजी है जहां पर यह फेरो का धर्म जो है वह डेवलप हुआ या तो फिर यूफ्रेट इस टाइगर से वहां पर क्या हुआ की प्रकृति के साथ में सतत इस तरह से उनको संघर्ष करना था की बाय डिफॉल्टर मैन नेचुरल उनका डेवलपमेंट एक्सटर्नल वर्ल्ड की और ज्यादा हुआ उन्होंने इस जगत को समझ करके किस तरह से उसके ऊपर में विजय प्राप्त की जाए ये सोचना शुरू किया और हम हिंदुओं ने हम इतने सुंदर एटमॉस्फेयर में रहते थे भारत वर्ष हमारा इतना सेफ सीकर और ब्यूटीफुल था की हमने हमारे प्रकृति के साथ में हार्मोनाइजेशन में रहने की शुरुआत की तो इस हार्मोनाइजेशन की वजह से हम ऑटोमेटिक होना शुरू हुए अंतर्मुख होना शुरू हुए और हमने आध्यात्मिक विज्ञान का डेवलपमेंट किया और उनका अर्श एनवायरनमेंट था एक्सटर्नल केवल ज्यादा थी यूरोप में मिडिल ईस्ट में नॉर्थ अफ्रीका में इसलिए उन्होंने ये एक्सटर्नल साइंस को डेवलप किया स्वामी जी ऐसा कहते हैं तो इसीलिए देखिए की ये मैंने माइक्रोकोजन यानी की आत्मा का सही स्वरूप क्या है वो दर्शाने वाला ये जो ज्ञान योग लेक्चर है उन्होंने पहले से ही शुरू किया की प्रकृति का सौंदर्य कितना सुंदर अद्भुत है कितना भाव है मां को कितना मोहित करता है और किस तरह से हम उसमें अपने को को दे सकते हैं अपने को उसमें डूबो दे सकते हैं जिससे की हमारे मां के जो जितने भी विकार संकल्प विकल्प वगैरा हो धीरे-धीरे करके इस भव्यता में खोज करके शांत हो जाए एक बार हिमालय की बात है की पता नहीं एक्जेक्टली प्रश्न मुझे याद नहीं ए रहा है की ईश्वर के ऊपर में चर्चा हो रही थी तो ईश्वर का स्वरूप क्या है ये वो सब बहुत सर कुछ डिस्कशन हो रहा था तो स्वामी जी कहते हैं आए हैं उसे सिंह हिमालय अर्थात की मैंने हिमालय को देखा है अर्थात की जो हिमालय का भाव सौंदर्य है वो देखकर के ही कोई बोलना है ना की ईश्वर है उसका प्रूफ क्या है तो ईश्वर अब जैसे पता है ना ठाकुर के साथ में ऐसा हुआ था ठाकुर को बार-बार उनके मां में ठाकुर तो बार-बार भाव में मगन हो जाते थे तो ये लोग बोलना शुरू कर दिए की ठाकुर क्या पागल तो नहीं हो गए तो एक बार ठाकुर ने सोचा था की यह पेड़ की दाल गिर जाए तो सही सही में मानूंगा की मैं पागल नहीं हूं मुझे ईश्वर का दर्शन हुआ है तो सही में वो मंदिर के टूट करके गिरते तो यह साइन है यह एक आपका प्रूफ है की हां जो आप सोच रहे हैं वो सही है तो ईश्वर का प्रूफ क्या है ईश्वर है उसका प्रमाण क्या है स्वामी जी कहते हैं मैंने हिमालय को देखा है आई हैव सीन डी हिमालय स हिमालय के जितना सौंदर्य ब्यूटी भव्यता इस जगत में हो सकता है वही प्रूफ करता है की ईश्वर का अस्तित्व है वही प्रयोग करता है की ईश्वर की मनुष्य के ऊपर में इतनी कृपा है की उसने इतना सौंदर्य भारत दृश्य हमारे लिए खड़ा किया है की जहां पे जाकर के हम जब ध्यान साधन वजन कर सकते हैं तो ये सौंदर्य का वर्णन इसलिए क्योंकि मनुष्य का मां यह सौंदर्य को देख करके धीरे-धीरे इंट्रोवर्ट होता है क्यों हमारे जितने भी तीर्थ स्थान है प्रकृति के बहुत ही सुंदर जगह पर है रमणीय प्रकृति जहां पर है वहीं पर ज्यादातर बनते हैं वहीं पर तीर्थ स्थान है वहीं पर साधु सन्यासी संत महात्मा जाकर के तपस्या करते हैं स्वामी जी ने खुद कोलकाता का जो कंफर्ट है वो सब छोड़ कर के हिमालय में जाकर के वो गुफा में बैठ करके तपस्या करने का संकल्प किया क्योंकि ये प्राकृतिक सौंदर्य हमारे मां को धीरे-धीरे करके इंट्रोवर्ट बनाता है अंतर्मुख बनाता है इसलिए स्वामी जी ने इतना सुंदर वर्णन किया है की यह जो हमारे आस-पास हम फूल देख रहे हैं वो भी सुंदर है ये जो सुबह का जो सूर्योदय होता है वो भी कितना खूबसूरत है ये चारों और प्रकृति के इतने सारे कलर है वो भी कितने सुंदर है पूरा विश्व ब्रह्मांड है उसकी खूबसूरती का तो कहना ही क्या और जब से मनुष्य का पृथ्वी पर आगमन हुआ है प्रादुर्भाव हुआ है तब से हम प्रकृति के सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं प्रकृति के सौंदर्य का उपभोग कर रहे हैं यह सुंदर और खूबसूरत माउंटेंस यानी की पहाड़ यह बड़ी नदियां जो की समुद्र की और बा रही है इस तरह का विराट मरुभूमि की जहां पे किसी भी तरह का रास्ता खोजना मुश्किल है विराट ओशांत समुद्र अंधेवांस पूरे तारों से भारत हुआ ये रात्रि का आकाश जो दिस आर ओ इंस्पायरिंग सब्लाइम इन ब्यूटीफुल का अभी एग्जैक्ट हिंदी मुझे याद नहीं ए रहा है किंतु इसका एक्जेक्टली क्या अर्थ होगा की इसको देखकर के हम लोग बड़े ही अभी भूत हो जाते हैं अभी बुद्ध को जाना ये इसका अर्थ होगा आगे स्वामी जी कहते हैं एक्जिस्टेंस विच वे कॉल नेचर हेस बिन एक्टिंग ऑन डी ह्यूमन मन साइंस टाइम इन मेमोरियल ये प्रकृति का जो दृश्य है प्रकृति का सौंदर्य है जब से हमारे मां के ऊपर में तब से असर कर रहा है हमारे मां को ये तब से प्रभावित कर रहा है की जब से टाइम इन मेमोरियल हमको पता भी नहीं है की कब से जब से समय की शुरुआत हुई जब से पृथ्वी पर मनुष्य का अवतारण हुआ तब से लेकर के आज तक प्रकृति का यह नजर हमारे मां को प्रभावी करता ए रहा है देखिए ये ज्ञानियों के लेक्चर के बड़े में लोग कहते हैं की ये समझना बड़े डिफिकल्ट है किंतु मैंने खुद ने देखा है की आप धीरे-धीरे करके सेंटेंस बाय सेंटेंस शब्द में शब्द इसको समझना का पर्यटन करेंगे तो इसमें डिफिकल्ट कुछ नहीं है मां की बातें जितनी समझना में आसन है ठाकुर का कथमुर्ग जितना समझना में आसन है उतना ही मैंने ज्ञान योग ज्ञान कुछ करके पसंद किया है क्योंकि स्वामी जी का यदि सबसे डिफिकल्ट कोई लेक्चरर्स होगा समझना में तो दो है कर्मयोग है और सॉरी राज्यों में और ज्ञान योग है तो राजयोग हम इसके बाद में इसके बाद एक लेंगे उसमें भी आकाश और प्राण का स्वामी जी का कॉन्सेप्ट है वो यूनिक है पतंजलि की योगसूत्र तो है ही है किंतु इससे भी ज्यादा अभी पतंजलि के सूत्र तो ऋषि पतंजलि ने हजारों साल पहले डेवलप करके गए हैं स्वामी जी उसकी व्याख्या करते हैं किंतु स्वामी जी का जो एक यूनिक कंट्रीब्यूशन है आकाश और प्राण सही में हमको समझना की जरूर है राज्यों का वह भाग है निकला टेस्ला वो एक बड़ा ही साइंटिस्ट था आजकल तो टेस्ला का नाम सब लोग जानते हैं क्योंकि वो टेस्ला बोल करके एक बहुत बड़ी कंपनी है पहले तो क्या था की एडिशन थॉमस अलावा एडिसन और निकला टेस्ला ये दोनों लोगों ने इंडस्ट्रियल अमेरिका को डेवलप करने में बहुत बड़ा इन दोनों का योगदान है किंतु यह एडिशन का नाम लोगों को याद है टेस्ला को लोग भूल गए हैं हालांकि जिसको एक करंट कहते हैं डीसी करंट और एक करंट दो डर के होते हैं डीसी करंट आपको पता होगा की शॉर्ट रेंज ही होता है किंतु ऐसी करंट जो होता है वो बहुत ही पावरफुल होता है लंबे लंबी दूरी तक जा सकता है तो ये एक करंट को डेवलप करने का कम ये टेस्ला ने किया था एक समय था टेस्ला ही वो उसे वन ऑफ डी ग्रेटेस्ट साइंटिस्ट न्यू यॉर्क में राहत था और उसका इंटरव्यू लेने के लिए उसके साथ में बात करने के लिए सोसाइटी के जो बड़े-बड़े आत्मा धनी लोग वे लोग लालायित रहते थे और यही टेस्ला अपनी लैबोरेट्री छोड़कर कहानी नहीं जाता था किंतु स्वामी जी की यह जो सब लेक्चरर्स है आकाश और प्राण वगैरा पे दिए गए ज्ञान योग राज्यों के ऊपर में वो स्वामी जी के क्लास में जाकर के खड़े खड़े सुनता था क्योंकि वहां पे ऐसा था की स्वामी जी का क्लास इतना भर जाता था लोगों से की यदि आप थोड़ा सा भी डेरी से आएंगे तो आपको बैठने की जगह नहीं मिलेगी पीछे में खड़ा रहना पड़ेगा तो टेस्ला तो लैबोरेट्री में कम आता है आते-आते थोड़ा डेरी हो जाता था तो खड़े-खड़े भी किंतु वो ये सब लेक्चर सुनता था उसने स्वामी जी के साथ में मीटिंग भी किया था और आज के जो मॉडर्न कॉन्सेप्ट है मटर और एनर्जी या तो फिर फोर्स ये सबके रिलेटेड उसने स्वामी जी के साथ में डिस्कस भी किया था और इसने कहा था टेस्ला ने की आज का जो मॉडल साइंस है उसके लिए बाइबिल में से सीखने के लिए कुछ भी नहीं है किंतु यह हिंदू उन लोगों की जो तैयारी है आकाश और प्राण की यह हमारे साइंस और टेक्नोलॉजी के साथ में बिल्कुल फिट बैठ जाति है अंदर डिफिकल्ट सीरीज ऑफ लेक्चरर्स ऑन राजयोग और यह ज्ञान योग के ऊपर में जो लेक्चर है वह लेडिस अंदर डिफिकल्ट सीरीज की महावाक्य का प्रतिपादन स्वामीजी किस तरह से करते हैं स्वामी जी का मैंने दो तरह से देखेंगे की स्वामी जी को उन्होंने फंडामेंटल इतिहास जो है स्वामी जी ने क्या दी है सबसे पहले तो है की आत्मकथम जगत पिता है ये दो फंडामेंटल इतिहास है किंतु इन दोनों इतिहास को स्वामी जी ने किस तरह से एक्सप्रेस किया हैं तो ये जगत हिताएं जो कॉन्सेप्ट है वो पूरा लेक्चर फ्रॉम कोलंबो तू अल्मोड़ा या तो फिर भारत में दिए गए व्याख्यान की जो सीरीज है उसमें स्वामी जी ने डेवलप किया है और ये आत्मा का आत्ममन के मोक्ष के लिए महावतया का प्रतिपादन करने के लिए स्वामी जी ने जो सीरीज ऑफ लेक्चर दिए उसमें से सबसे इंपॉर्टेंट सीरीज है ये दो राज्यों और ज्ञानियों तो इसीलिए मैंने सबसे पहले लेक्चर फ्रॉम कोलंबो तू अल्मोड़ा पढ़े थे जब बिल्कुल शुरुआत की बात कर रहा हूं तो उसे समय क्या था की मुझे ये तो समझ में ए गया ये सेल्फलेस लेंस जो है निस्वार्थता अपने जीवन को लोगों के कल्याण के लिए उत्सर्जित कर देना ये मेरे जीवन का देय है तब तो मैं मां लिया था किंतु फिर यहां पे आने के बाद में सेवा कार्य या तो फिर एक निस्वार्थ जीवन लोग कल्याण के लिए उत्सर्जित जीवन यह जीने की शुरुआत करने के बाद में किंतु दिस इस नोट इनफ वे नीड समथिंग डिपर जो भीतर से एक हमको आहार चाहिए इंद्रियों का आहार तो हमने त्याग कर दिया है तो हृदय का आहार तो हमको मिलन चाहिए तो वो समझ बचाने के लिए स्वामी जी के यह जो सीरीज ऑफ लेक्चर है राजयोग ज्ञानयोग डेट हेल्प मी एन लोट तो इसके भीतर के जो फंडामेंटल आइडिया है महावाक्य मेरे भीतर में जो आत्मा है विश्व ब्रह्मांड का जो ब्राह्मण है वो दोनों एक ही है ये सीरीज ऑफ लेक्चर में प्रतिपादित होता है तो कभी-कभी जिन लोगों ने सिर्फ सुना है की हां राजयोग है या ज्ञान योग है उनको ऐसा लगेगा की अरे ये इतने डिफिकल्ट लेक्चरर्स से हम इनको सोचना समझना पढ़ने का शुरुआत करेंगे तो हमको कितना डिफिकल्ट लगेगा किंतु मैंने देखा है की आप धीरे-धीरे एक के बाद एक लाइन पढ़ने जाइए और साथ-साथ में कपूर और मैन जो कहा है उनके जीवन और उद्देश्य वो यदि हमको पता है तो ये दो सीरीज ऑफ लेक्चर समझना इतना डिफिकल्ट नहीं है बड़े आसानी से समझ जा सकते हैं क्योंकि यदि कोई भी चीज हमको यहां पर नहीं समझ में आई है तो उसकी उपमा हमको सीधी ठाकुर मां और अन्य डायरेक्ट डिसाइड है राजा महाराज बाबूराम महाराज महापुरुष महाराज शशि महाराज इन लोगों के जीवन और उपदेश में से हमको आसानी से मिल जा शक्ति है तो यह पूरा प्रकृति का सौंदर्य है वह हमारे मां को प्रभावित करता ए रहा है कब से जब से हमारा प्रादुर्भाव हुआ पृथ्वी के ऊपर में आईटी हेस बिन एक्टिंग ऑन डी थॉट ऑफ मां और इसे इट्स रिएक्शन इस कम आउट डी क्वेश्चन व्हाट आर डीज वंस आर थे ये प्रकृति का सौंदर्य हमारे विचारों के ऊपर में भी प्रभाव डालता रहा है और इस प्रभाव की वजह से हमारे मां में एक प्रश्न उठो हुआ ये प्रकृति का सौंदर्य क्या है और ये कहां से आया व्हाट आर दिस वंस आर थे का क्या है और कहां से आया इस फॉर बैक इसे डी टाइम ऑफ डी ओल्डेस्ट पोर्शन ऑफ हिट मोस्ट असिएंट ह्यूमन कंपोजिशन डी वेद वे फाइंड सम क्वेश्चन एस्क्ड यह मनुष्य इतिहास का सबसे पुराना लिखा हुआ रिकॉर्ड वेद वहां पर हम लोग इस प्रश्न को देख रहे हैं वंस इस व्हेन देवर वज नीदर वोट नो वोट और डार्कनेस वो स्वीडन इन डार्कनेस हो प्रोजेक्ट दिस यूनिवर्स नासदीय सट्टा क्या वह कोई समय था जहां पर कुछ था भी नहीं और कुछ नहीं भी था जबकि अंधकार अंधकार से ढाका हुआ था कल मैं यह नासदीय सुक्तम अपने पास में रखूंगा इसको थोड़ा सा पढ़ेंगे वेद की सबसे सुंदर सबसे डिपलाई फिलोसॉफिकल रचना यह सुक्तम है तो स्वामी जी यहां पर उसका उल्लेख करते हैं हूं प्रोजेक्ट दिस यूनिवर्स किसने इस विश्व ब्रह्मांड को प्रोजेक्ट किया देखिए प्रोजेक्शन और क्रिएशन दो तरह की थ्योरी है ब्रह्मांड कहां से आया तो क्रिश्चियन लोग या तो फिर ये यूरोपियन लोग का जो कहना है की ब्रह्मांड का ब्रह्मांड की सृष्टि हुई ये जो क्रिश्चियनिटी है या तो फिर और अब्राहम एक रिलिजन है दो तरह के रिलिजन है अब्राहम एक रिलिजन और आर्यन रिलिजन तो अब्राहम एक रिलिजन हो गए आपके जुड़ैजाम क्रिश्चियनिटी और इस्लाम और आर्यन रिलिजन हो गए हिंदुइज्म बुद्धिस्म जैनिज्म और ये पारसी धर्म जोश प्रिया ने सब जो की ईरान में जिसका प्रादुर्भाव हुआ था तो यह जो अब्राह्मिक रिलिजन है वो लोग कहते हैं की सृष्टि की रचना शून्य में से हुई है और यह आर्यन रिलिजन है वो कहते हैं की शून्य में से शून्य किसी की सृष्टि नहीं हो शक्ति अंधकार में से प्रकाश कैसे आएगा वो प्रकाश की एक सोर्स तो होगा ही होगा जिसमें से ये दूसरा प्रकाश जो प्रकट की दुआएं अर्थात की ब्राह्मण था ब्राह्मण में से इस पुरुषों ब्रह्मांड का ये प्रादुर्भाव हुआ है किंतु प्रोजेक्शन का क्या अर्थ है जैसे की आप सिनेमा के स्क्रीन पे प्रोजेक्शन देखते हैं जब भी वो प्रोजेक्शन मशीन बैंड हो जाएगा आप देखेंगे सिर्फ एक ब्लैक सिनेमा का स्क्रीन है किंतु जैसे ये प्रोजेक्शन मशीन स्टार्ट होगा आपको सब कुछ दिखाई देगा वो गाड़ी भी दिखाई देगी ये समुद्र भी दिखाई देगा यह आकाश भी दिखाई देंगे चंद तारे भी दिखाई देंगे पहाड़ भी दिखाई देंगे सब कुछ दिखाई देगा किंतु हमको पता है की ये स्क्रीन के ऊपर में सिर्फ ये प्रोजेक्शन है वो पीछे में ये जो है इसका कोई अस्तित्व नहीं है यह सिर्फ प्रोजेक्ट होता है तो ब्रह्मांड जो है यह कॉसमॉस यह एक्चुअली है जी तरह से की अब्राहम कहते हैं की यह ब्राह्मण के मां की ये कल्पना है जिसके भीतर में हम भी एक कल्पना के रूप में र रहे ये स्वप्नवत जीवन है जब स्वप्न भांग हो जाएगा तो हम अपने सही स्वरूप में फिर से चले जाएंगे ये सही है ना की सृष्टि की रचना हुई वो सही है तो ऑफ कोर्स हिंदू धर्म की हम तो हिंदू थे इसलिए हम तो मानते हैं की ब्राह्मण यह सब स्वप्न देख रहे हैं माया के रूप में हम लोग भी ये सपना देख रहे हैं जी दिन सपना भांग हो जाएगा हम अपने सही स्वरूप को प्राप्त कर लेंगे वो जो ठाकुर की वो कहानी की एक किसान जिसके की एक लड़का मा गया वह एक ना थी दो जितने भी थे वो सुबह उठा उसकी बीबी उसको बताती है की आपके पुत्र का देहांत हो गया वो किसान कुछ बोलना नहीं है वो तो वो बीबी चिल्लाना शुरू कर देती है अरे आपका बेटा मा गया और आपको कोई दुख नहीं है तो किसान क्या कहता है की मैं सपना में राजा हुआ था मेरे कितने ही राजकुमार थे वो भी वो स्वप्न भांग हो गया तो मैं सोच रहा हूं की मेरा जो मैं किसान हूं और किसान का लड़का मा गया वो सही है ना की मैं सपना में राजा था और राजा के राजकुमार मा गए वो सही है फिर जीवन स्वप्नवत है जो कुछ भी हम देखते हैं इस सबको इस आत्मा के भीतर में प्रवेश करके उसको अदृश्य हो जाना है इसीलिए यहां पे ये प्रकृति का जो सौंदर्य है प्रकृति की भव्यता है ये प्रकृति का यह अद्भुत नजर जो है उसको देखकर के हमारे मां में ये प्रश्न होता है की इतनी भाव प्रकृति ये बिजली का गड़गड़ाहट जो हम सुनते हैं अनंत समुद्र देखते हैं विशाल हिमालय को देखते हैं ये सीजन ये ऋतुओं के जो बदलते हुए स्वरूप देखते हैं पशु पक्षियों को देखते हैं मनुष्य को देखते हैं तब हमारे मां में यह प्रश्न होता है की यह सृष्टि की शुरुआत कब हुई किसने की क्या ऐसा भी कोई समय था जब कुछ नहीं था जब अंधकार से अंधकार छुपा हुआ था जब अंधकार ने अंधकार को ग्रस्त कर लिया था क्या ऐसा भी कोई समय था जबकि यह सस्ती नहीं थी और सस्ती का करता आराम से वो छीर सागर में वो शेरशाहिया के ऊपर में वो विश्राम कर रहा था क्या ऐसा भी कोई समय था की नहीं था ये प्रकृति को देखकर के मनुष्य के मां में इस तरह के विचार अनाड़ी कल से उत्पन्न हो रहे हैं और मनुष्य अनाड़ी कल से विभिन्न उत्तर इसके एक के बाद एक देता रहा है अलग-अलग उत्तर एक एक फिलासफी एक एक दर्शन शास्त्र को जन्म देते हैं इसीलिए इस विषय में इतने सारे दर्शन शास्त्र है इसलिए ईश्वर की भी कल्पना की गई है ईश्वर नहीं है बुद्धिस्म कहता है इसकी भी कल्पना की गई है ईश्वर का स्वरूप क्या है इसको लेकर के क्रिश्चियनिटी या जितने भी धर्म आए सभी ने अपनी अपनी अलग-अलग कल्पनाएं की है किंतु इस सब का मूल क्या है यह प्रकृति की भव्यता जो की हमको अभिभूत कर देती है यह है इस इंक्वारी का रूट यह प्रश्न जो हम करते हैं प्रश्न का मूल है यह तो आज यही तक कल फिर चले जाएंगे ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा और परमेश्वर