Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Swami Vivekananda' Complete Life ·

Swami Vivekananda: Life and Teachings 12 Mar 2026

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः

Advancement in AI and its dangers

मैं एक आर्टिकल पढ़ रहा था इकोनॉमिस्ट एक मैगजीन है उसमें किस तरह तरह से यह अमेरिका और इजराइल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यूज करके यह ईरान पे बमबार्डिंग कर रहे हैं। सो इट वाज़ वेरी इंटरेस्टिंग रीड एज वेल एज वेरी डिप्रेसिंग आल्सो। इंटरेस्टिंग है कि देखिए कि जितना रैपिडली एआई टेक्नोलॉजी डेवलप हो रहा है। बहुत लोगों को अभी पता ही नहीं है कि जगत में कितना बड़ा परिवर्तन आ रहा है। यह एक चीज हो गया और दूसरा कि देखिए मनुष्य जाति का हमेशा से यह एक है कि कोई भी टेक्नोलॉजी हम डेवलप करेंगे उसको युद्ध में इस्तेमाल करना है और युद्ध में इस्तेमाल हो यह आपकी टेक्नोलॉजी माने वॉर एंड टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट यह दोनों एक दूसरे को फीडबैक लूप की तरह काम करता है। जैसे ही वॉर होगी वो एक इंसेंटिव होगा कि टेक्नोलॉजी को डेवलप करना है जैसे कि हम जीत जाए। जैसे कि रेडार टेक्नोलॉजी वो सेकंड वर्ल्ड वॉर में खोजी गई थी कि जर्मनी के बमबर आते हैं ब्रिटेन पे रेड करने के लिए तो वह पहले से ही पकड़ करके उनको टारगेट किया जा सके। तो टेक्नोल वॉर के वॉर जीतने के लिए टेक्नोलॉजी आवश्यक है और इन जनरल टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस है। हम लोग इसका इस्तेमाल युद्ध में करते ही करते हैं। नहीं तो यह जो फीडबैक लूप है पिछले कुछ समय से खास करके यह दो-ती साल से एआई इतना रेपिडली आगे बढ़ रहा है। इतना रैपिडली आगे बढ़ रहा है कि बहुत जो लोग इवन टेक्निकल पर्सन भी है वे लोग भी कभी-कभी सरप्राइज हो जाते हैं और मेरे जैसे जो ले पर्सन है जो कि मैं इन जनरल ट्रैक रखता रहता हूं कि क्या हो रहा है। इवन हम लोग भी सरप्राइज हो जाते हैं। चारप साल पहले जब एआई का नाम सुनते थे तो हमको लगता था यह सब साइंस फिक्शन है और जो लोग एआई पे रिसर्च कर रहे हैं वे लोग बस वही एक गोलगोल घूमते रहेंगे अपने एक छोटे से दायरे में और कभी इसका कुछ होने वाला नहीं है और एकाएक 23 ना 22 में वो जो चैट जेबीटी रिलीज हुआ वहां से लेकर के कितने साल हुए हैं मुश्किल से यह तीन चार साल का यह सफर है। कितना रेपिडली इतने सारे एडवांसमेंट हो चुके हैं। वि इज रियली सरप्राइजिंग और जो कि होना है जो ह्यूमन सिविलाइजेशन का जो एक स्टैंडर्ड रूल है कि नई टेक्नोलॉजी को युद्ध में इस्तेमाल होना ही है। तो आज यह ईरान वॉर आप कह सकते हैं कि फर्स्ट लार्ज वॉर बेस्ड ऑन एआई। वैसे तो रशिया यूक्रेन वॉर चल रहा है। इसको आप ड्रोन वॉर कह सकते हैं। वह एक नया टेक्नोलॉजी है। किंतु खैर ड्रोन इतना कोई मतलब रेवोल्यूशनरी नहीं है। जितना रेवोल्यूशनरी ये एआई है। और आई थिंक दिस ईरान वॉर इज द फर्स्ट एआई वॉर। जो किस तरह से यह लोग यूज़ कर रहे हैं? तो टारगेटिंग के लिए दिन में जो ह्यूमन एनालिस्ट होते हैं तो मुश्किल से 10-15 टारगेट को आइडेंटिफाई करके बमबर्स को वहां पे भेजेंगे कि वहां पे जाके रेड कीजिए। किंतु अभी एआई के भीतर में आपने सब डाटा इस तरह से फीड कर दिया है कि एआई आपको डेली डेली 1000 थाउजेंड प्लस टारगेट्स देगा और वहां पे आप प्लेन ले जाकर के बमबार्डिंग कीजिए। फिर यह डैमेज असेसमेंट वह करेगा और फिर फॉलो अप टारगेटिंग कहां करना है वह करेगा। सो दिस वॉरफेयर इज इवॉल्विंग एट सच अ रैपिड पेस। और यह परिणाम क्या है? पता है इसका देखिए भारत के साथ में हुआ क्या? 1000 साल पहले हम लोग एक इस तरह के अंध कुएं में अपने को बंद करके रखा था कि जैसे कि बाहर के जगत में जो हो रहा है उसका हमारे से कोई रिलेशन नहीं है। हम लोगों को बस ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करना है। आत्मज्ञान प्राप्त करना है वगैरह। अभी आप ब्रह्म ज्ञान या आत्मज्ञान प्राप्त करेंगे। व्हाटएवर आपकी जो फिलॉसोफी है ईश्वर दर्शन ब्रह्म ज्ञान आत्मज्ञान निर्वाण व्हाटएवर जिस फिलॉसोफी को फॉलो करते हैं उस फिलॉसोफी का जो हायर स्टेजेस है स्पिरिचुअल लाइफ के वहां तक हम जाते हैं तो होता क्या है कि यह मेधा शक्ति प्रस्फुटित हो जाती है। अपनी यह क्रिएटिविटी है। अपनी यह इंटेलिजेंस है। यह भविष्य देखने की क्षमता है। यह सब ओपन हो जाता है। ठाकुर और स्वामी जी को हम देखिए कि कितना रेडिकल थे अपने थिंकिंग में। हालांकि रह रहे थे ऐसी एक छोटी जगह पे और थोड़ा ये ब्राह्मण परिवार से ठाकुर और मां दोनों आते हैं। स्वामी जी तो चलो फिर भी यह ब्रिटिश यूनिवर्सिटी सिस्टम में एजुकेटेड थे। मां और ठाकुर को आप देखिए छोटे से गांव से आते हैं ऑर्थोडॉक्स ब्राह्मण फैमिली से इंस्पाइट ऑफ दैट स्पिरिचुअलिटी ने उनकी जैसे कि तृतीय नेत्र है उसको ओपन कर दिया है और इसके माध्यम से सब कुछ देख सकते हैं। किंतु वो तभी होगा जब कि आप स्पिरिचुअलिटी में सही-सही प्रोग्रेस करते हो। हमारे साथ में एक समय ऐसा हो गया था कि रिलीजन का नाम तो लेना है और दुनिया भर का तमस में डूबे रहना है और इसका परिणाम क्या आया माया मिली राम दोनों ओर से गए यहां पर तमस में डूबे हैं बोलकर के ना ही हमारा स्पिरिचुअल डेवलपमेंट हो रहा है और तमस में है डूबे हैं बोल के यह जो कैनन फिर यह गन पाउडर यह गन ये ये जो सब जो भी मॉडर्न वॉरफेयर टेक्नोलॉजी वो डेवलप हो रही थी। ये इस्लामिक कंट्रीज में फिर ये वेस्टर्न कंट्रीज में हम वो जब हमारे सामने आए हमारे पास में अपने को डिफेंड करने के लिए कुछ नहीं बचा। सो माया मिलीन राम हम लोग दोनों ओर से जैसे कि हार गए थे उस समय पूरा 1000 साल तक हमारा चला। तो क्या है कि अभी देखिए जब हम ईरान को देखते हैं तो सेम चीज मुझे लगता है भारत ने ऐसा ही एक गलती कर दिया था। एक तरह का ओवर्टली रिलीजियस बंधन में अपने को बांध करके जगत के साथ में अपना नाता तोड़ दिया है। और फिर यह बाहर के शत्रु सुपीरियर टेक्नोलॉजी के साथ में आप पर अटैक करने को आते हैं। आप किसी को बचा नहीं पाएंगे। ना ही आपके लीडर को बचा पाएंगे। ना ही आपकी मिलिट्री को बचा पाएंगे। आप डे आफ्टर डे सैकड़ों लोगों की हत्या होती रहेगी। फिर यह गाल पे तमाचा मार के मुंह लाल रखना ये कहावत है। कोई आदमी खादे पीधे सुखी गुजराती में कहते हैं तो कोई आदमी है अच्छा खाना खाता है। सुखी है तो उसका चेहरा है ना लाल रहता है। वो हेल्थ का प्रतीक है। लाल माने वो पिंकिश एक ह्यू रहता है। तो तो फुल गुलाबी चेहरा जिसको हम कहते हैं। अच्छा खाना खाने से चेहरा इस तरह से गुलाब की तरह खिला हुआ दिखेगा। किंतु जो गरीब है उसका चेहरा जैसे कि ऐसा लगेगा कि जैसे कि सिकुड़ गया है, काला पड़ गया है। तो इस तरह का आदमी क्या करेगा? अपने चेहरे पर जोर से तमाचा मारेगा और तमाचा मारने से थोड़ा सा तो लाल होगा। तो वो अपने चेहरे पर लालिमा इस तरह से दिखाएगा। चेहरे पर तमाचा मार के लालिमा दिखाएगा। तो यह ईरान की यही हालत है। वो ब्रवाडो तो बहुत दिखाते हैं कि हम लोग कभी भी हारेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं। यह वो किंतु जिस तरह की पिटाई उनकी हो रही है वो कौन सा देश है कि इस तरह से अपने साथ में चाहेगा कौन सा देश है जो कि इस तरह से बदना ह्यूमिलिएट होना चाहेगा किस कौन सा देश है कि इस तरह से डिफेंस हो जाना चाहेगा तो देखिए कि ईरान को देखकर के मुझे बार-बार यही बात याद आती है। बहुत बार हम सोचते हैं ना कि भारत की 1000 साल की गुलामी क्यों आ पड़ी? क्यों आ पड़ी? तो यह देखिए कि यह अपनी नजर के सामने है। एक ऐसा देश है जो कि एक थियोक्रेटिक देश है। अपने को जगत से उसने नाता तोड़ दिया है। बोलकर के बाहर के जगत में जो टेक्नोलॉजिकल पेस है उसके साथ में वह कदम नहीं मिला पाया। तो अभी वही टेक्नोलॉजी को वेपनाइज करके दुश्मन जब आ जाएंगे तो बिल्कुल जैसे कि वो यह हो जाता है, लाचार हो जाता है उसके सामने। वो सेम तो हमारे साथ में हुआ। और फिर देखिए व्हाट इज द लेसन आउट ऑफ ऑल दिस थिंग। अभी ईरान का तो जो होना है सो होगा। हमारे लिए यह लेसन क्या है? देखिए ये जो रामकृष्ण संघ का जो 100 साल का इतिहास है जो कि मैं स्टडी करता हूं। 1836 से लेकर के 1936 ठाकुर की महासमा ठाकुर के प्रादुर्भाव से अवतरण से ठाकुर के जन्म से प्रारंभ करके यह जो बेलूर मठ में ठाकुर का मेन टेंपल क्सक्रेशन हुआ वो जो 100 साल की हमारी जर्नी है देखिए कि भारत में किस तरह से एक रेनेसा का एक यह आया था वेव आया था हमारे जो नव युवान थे उनका उनका यह जो एक विज़ जो था उनके भीतर में यह आध्यात्मिकता को प्राप्त करने की एक जो एक तमन्ना थी वो इतनी स्ट्रांग थी माने स्वामी जी ने जो कहा बेस्ट फ्रॉम द ईस्ट एंड बेस्ट फ्रॉम द वेस्ट वेस्ट का यह जो साइंस एंड टेक्नोलॉजी है और हमारे भारत का यह जो वेदांत है इन दोनों का संगम करने से भविष्य की सर्वश्रेष्ठ सिविलाइजेशन डेवलप होगी। आज आपको पता है यह जो स्वामी जी का विज़ जो है कि कंबाइन बेस्ट फ्रॉम द ईस्ट एंड बेस्ट फ्रॉम द वेस्ट यह कहां पर रियलाइज हो रहा है वो अमेरिका में हो रहा है। अमेरिका में देखिए कि खास करके जो हमारे इंडियन वहां पर इमीग्रेट करके गए हैं वे लोग अपनी संस्कृति को भी पकड़ के रखे हैं। एट द सेम टाइम वे लोग म कटिंग एज जो टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट है उसमें अपना कंट्रीब्यूशन दे रहे हैं। वैसे मैंने पहले भी कहा था इट्स अ वेल नोन नाउ डज़ कि यह जो एआई का फाउंडेशनल पेपर है अटेंशन इज ऑल यू नीड उसमें दो इंडियन को ऑथर है। तो आई डोंट नो कि यह जो अपना एआई समिट हुआ था उसमें यह दो इंडियन को इनवाइट किया गया था कि नहीं। मैंने इतना ध्यान से पढ़ा नहीं क्योंकि इंडिया का कोई भी न्यूज़ पढ़ने से मैं थोड़ा डिप्रेस ही हो जाता हूं। तो फिर उसमें वो जो सब हुआ नाटक वो पढ़कर और मैं डिप्रेस हो गया। मैंने सोचा छोड़ो इसको नहीं पढ़ना है। सो आई डोंट नो कि उनको इनवाइट किया गया था कि नहीं। बट वी शुड हैव ये जो इंडस्ट्रियलिस्ट जितना डेवलपमेंट करते हैं उससे कहीं गुना ज्यादा यह जो कटिंग एज रिसर्च जो होता है उसका कंट्रीब्यूशन है। सो एनीवे यह जो इंडियन अमेरिका जाकर बसते हैं दे आर द वन कि ये बेस्ट ऑफ ईस्ट एंड बेस्ट ऑफ द वेस्ट का कॉम्बिनेशन करते हैं। इंडिया में मैं आजकल देखता हूं यह जो आइडेंटिटी को लेकर के हम लोग इतने व्यस्त हो पड़े हैं। ये तो लगता है कि जैसे कि हम अपनी घड़ी को फिर से 1000 साल पीछे की ओर ले जाना चाहते हैं। ये मनुष्य मनुष्य नहीं है। इसकी आइडेंटिटी क्या है? क्या उसका कौन से घर से आया है? कौन से फैमिली से आया है? कौन से रीजन से आया है? कौन सी लैंग्वेज बोलता है? क्या खाना खाता है? क्या पहनता है? वह किसके साथ में रिलेशन रखता है। इस तरह से हम मनुष्य की कीमत करते हैं। नहीं कि बेस्ड ऑन ह प्योर टैलेंट। यह तो एक बहुत ही डिप्रेसिंग दिख रहा है भारतीय समाज में। दूसरा है कि जो यहां के नवयुवकों को एक अपॉर्चुनिटी मिलनी चाहिए। अपनी टैलेंट को डेवलप करने की वो अपॉर्चुनिटी ही जैसे कि गायब हो गई है। हमारे यहां एक रीडिंग रूम है तो सब लड़के आते हैं स्टूडेंट पढ़ाई करने के लिए तो मैं उनको पूछता हूं कि क्या पढ़ रहे हो? किस चीज के लिए प्रिपरेशन कर रहे हो? किसी ने एज ऑफ नाउ मुझे डेढ़ साल हो गया। किसी ने ऐसा नहीं कहा कि आईआईटी जी है या उसके लिए प्रिपेयर कर रहे हैं। सब के सब गवर्नमेंट एग्जाम की प्रिपरेशन कर रहे हैं। फिर यहां पे लाइब्रेरी में हमारे एक वॉलंटियर बैठते हैं। तो मुझे कभी-कभी आकर कहेंगे देखिए महाराज ये लोग बेचारे लड़कों को तो इतना मेहनत करते हैं। कोई जॉब नहीं दे रहा है। मैंने कहा क्यों? गवर्नमेंट एग्जाम का प्रिपरेशन करते हैं। कौन सा इनका बैकग्राउंड है? कौन सी कास्ट के हैं? वो मूर्ख लोग यदि होंगे अपर कास्ट वाले तो प्रिपेयर करेंगे। उनका चांस नहीं है। मैं समझ सकता हूं। बाकी वो यदि वो स्पेशल कैटेगरी में आते हैं तो मिल जाएगा जॉब। तो मुझे बोलता है नहीं नहीं महाराज ऐसा नहीं है। गवर्नमेंट ने अभी भर्ती करना ही काफी समय से ऑलमोस्ट बंद कर दिया है। रेलवे में नहीं मिल रहा है नौकरी। यह पुलिस में नहीं मिल रहा है। यह क्लार्क की नौकरी नहीं मिल रही। गवर्नमेंट ऑफिस में ऑलमोस्ट बंद है। मुश्किल से 101 101 लेते हैं।000 10 10 2000 परीक्षा देंगे हो सकता है 10 20 लोग नौकरी मिले तो देखिए ऐसी बुरी परिस्थिति है तो मैंने उसको कहा कि मैंने देखिए कि यदि गवर्नमेंट एग्जाम की परीक्षा की तैयारी नहीं करके कुछ एंटरप्रेन्योरशिप के बारे में सोचे यह तो सी शशोर है कुछ शिपिंग के बारे में सोचे कुछ इंपोर्ट एक्सपोर्ट के बारे में सोचे तो ठीक नहीं रहेगा क्या तो मेरे सामने इस तरह से देखने लगा जैसे कि वह भूत को देख रहा है माने यह कॉन्सेप्ट कि अदर देन गवर्नमेंट जॉब कुछ हो सकता है लाइफ के साथ में उसके माइंड में पूरा एब्सेंट है एंड ही हिमसेल्फ इज अ गवर्नमेंट एंप्लई रिटायर्ड गवर्नमेंट एंप्लई तो समझ सकता हूं कि उसका माइंडसेट क्या होगा किंतु ये जो पूरा जो अपना चल रहा है आजकल और मैं लड़कों को भी ब्लेम कैसे करेंगे पढ़ाई लिखाई करके कहां से उनको एक एंटरप्रेन्योरशिप का जो चाहिए आपको वेंचर कैपिटल चाहिए, गवर्नमेंट पॉलिसीज चाहिए, थोड़ा सा रिस्ट्रिक्शन थोड़ा ई हो ऐसा चाहिए। अपना पॉलिसी ही चारों ओर रिस्ट्रिक्शन चारों ओर ये रूल ये रेगुलेशन ये लाइसेंस ये वो किसी भी तरह का लिबरलिज्म लाने का प्रयास तो कर रहे हैं। ज्यादातर तो कुछ होता ही नहीं है। तो और फिर यदि बहुत मेहनत करके यदि आपने थोड़ा बहुत स्टार्ट कर भी दिया तो ये जो बड़े-बड़े कॉरपोरेशन है इंडिया के नेपोटिज्म ये जितने भी बड़े कॉरपोरेशन है सब फैमिली बेस्ड कॉरपोरेशन है और सबका मोनोपोली है पॉलिटिकल पावर के साथ में मिलकर के मोनोपोली बनाया है। तो ये जो एनवायरमेंट है पूरा भारत का ये यंग टैलेंट को डेवलप होने का स्कोप इतना कम हो गया है। तो बेचारे अभी और क्या करेंगे? सो ऑल इन ऑल मैं देख रहा था कि देखिए यह जो लग्जरी है ना आइडेंटिटी पॉलिटिक्स की वो कुछ दिनों तक तो ठीक है किंतु अभी देखिए कि जब यह टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट इस हद तक चला गया है कि आपका जो एक साइड जो है वह कंप्लीटली हेल्पलेस है और दूसरा साइड जो है उनके पास में जैसे कि सुपर पावर है और यह दो साइड जब फाइट करेगा तो देखिए किसके साथ में क्या होगा। आज अमेरिका के सामने खड़ा रहने वाला यदि कोई साहस भी कर सकता है तो एक और एकमात्र कंट्री है वह है चाइना और चाइना भी बड़ा डर डर करके देखिए इतना सब कुछ ये वेनेजुएला वेनेजुएला जो है ईरान है यह दोनों चाइना के फ्रेंड है किंतु ट्रंप ने जो किया इसके बाद में चाइना ने अपने मुंह से एक शब्द नहीं निकाला थोड़ा थोड़ा बहुत प्रोटेस्ट करते होंगे जो कि एक नॉर्म ल होता है किंतु बियों्ड दैट कुछ नहीं किया। सबको पता है कि अमेरिका आज इस समिट पर बैठा है कि वहां पे उसको चैलेंज करना बड़ा मुश्किल है। क्योंकि ये ओपन सोसाइटी जो होती है ना ओपन सोसाइटी वहां जहां पे ये लिबरलिज्म होता है। जहां पे यह फ्रीडम ऑफ थॉट होता है। यह फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन होता है। वहां पे दुनिया भर की टैलेंट अट्रैक्ट होती है। ईरान से ही देखिए कितने सारे ईरानियन एआई इंजीनियर्स हैं जो कि अमेरिका चले गए हैं। बीच में ट्रंप ने ऐसा सोचा कि यहां ईरान से इमीग्रेशन बंद कर देंगे। तो सब टेक कंपनियों ने जाके प्रोटेस्ट किया कि दे प्रोड्यूस सम ऑफ द बेस्ट एआई इंजीनियर्स। तो इट्स अ वेरी सरप्राइजिंग कि जहां पे बेस्ट एआई इंजीनियर प्रोड्यूस होते हैं उसी देश में उसका कोई ज्यादा वैल्यू नहीं। तो इंडिया का तो और भी क्या कहेंगे? एटलीस्ट ईरान को तो पता है युद्ध करना है तो एटलीस्ट मिलिट्री टेक्नोलॉजी को एडवांस करके रखना होगा। हम लोग भारत में चारों ओर से एक इस तरह के नेगेटिव माइंडसेट में फंस गए हैं कि यदि वी आर वेरी लकी कि हमारा कोई सीरियस एनिमी एज ऑफ नाउ नहीं है। चाइना एनिमी नहीं है। एडवर्सरी है। थोड़ा बहुत पिन प्रक करके छोड़ देता है। अमेरिका फिर भी कितना ही पागलपन करे दुश्मन नहीं है। दुश्मन के नाम पे हमारे से भी गया गुजरा पाकिस्तान है। तो वी फील वेरी सुपीरियर कि वी आर बेटर देन पाकिस्तान। वी आर बेटर देन बांग्लादेश बट दिस सुपीरियरिटी जबकि यह चाइना या अमेरिका के साथ में सीरियस युद्ध लग जाएगा तो पता चल जाएगा कि हम लोग कहां पे हैं व्हिच विल बी वेरी बैड ये सो क्या है कि ठाकुर मां स्वामी जी को जब हम पढ़ते हैं ना दिस आर द प्रैक्टिकल एस्पेक्ट्स कि वी शुड अंडरस्टैंड ठाकुर मां स्वामी जी खास करके जो अपना फ्रेमवर्क है ठाकुर है कि स्पिरिचुअल लाइफ मां का है कम्युनिटी इंस्टीट्यूशनल लाइफ और स्वामी जी का है सिविलाइजेशनल अंडरस्टैंडिंग राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन। तो दिस होल स्पेक्ट्रम इज टू बी कंसीडर्ड विद इन द स्टडी ऑफ रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर। यदि मैं सिर्फ यह कहता हूं कि उपनिषद के सहारे ही रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य को समझ सकते हैं। या तो फिर यह जो ट्रेडिशनल भाव साधना है उसको थोड़ा सा ले लो। फिर यह ट्रेडिशनल शक्ति साधना है उसको थोड़ा सा ले लो। तो तो मोर और लेस आपका अंडरस्टैंडिंग हो जाएगा। दिस विल बी डूइंग इनजस्टिस टू द रिचनेस एंड डेप्थ ऑफ रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर। खास करके स्वामी जी को जब हम पढ़ते हैं तो ये जो जगत के जो सिविलाइजेशनल स्केल क्वेश्चंस है कि हाउ द सिविलाइजेशंस राइज एंड फॉल राइज होने में कौन से फैक्टर है? डेवलप होने में कौन से फैक्टर है? फिर यह स्टंट हो जाती है सिविलाइजेशन उसका डिग्रेडेशन प्रारंभ होता है तो क्यों हुआ और फिर अल्टीमेट विनाश होता है तो वो क्यों होता है भारत में तो एटलीस्ट राइज एंड फॉल राइज एंड फॉल हुआ है किंतु हमारी सिविलाइजेशन का संपूर्ण विनाश नहीं हुआ एटलीस्ट किंतु बाकी सब सिविलाइजेशंस को आप देखिए भारत के साथ में उस समय थी ये मेसोपोटेमिया यही ईरान ये ईरान जो वो ईरान, इराक ये जो मेसोपोटेमिया की जो मिडिल ईस्ट सिविलाइजेशन थी वो अपनी वैदिक सिविलाइजेशन के साथ में उसका भी वो भी इतनी ही पुरानी है। वो जो अपनी वैदिक सिविलाइजेशन के साथ में और तीन सिविलाइजेशन थी। यहां पे हवांगहू वैली रिवर वैली सिविलाइजेशन चाइना की ये यूफ्रेटिस टाइगरिस रिवर वैली सिविलाइजेशन ये मिडिल ईस्ट की खास करके इराक और ईरान ये मेसोपोटेमियन सिविलाइजेशन और ये नाइल रिवर वैली सिविलाइजेशन इजिप्ट की तो देखिए कि आज इतने हजार साल के बाद में वैदिक सभ्यता एक है कि मोर और लेस सिमिलर फॉर्म में रही है। जबकि यह ह्वांगो रिवर वैली सिविलाइजेशन उन्होंने कितना सारा ट्रांसफॉर्मेशन हुआ। इतना 100% ट्रांसफॉर्मेशन भी नहीं हुआ जितना कि मेसोपोटेमिया और इजिप्ट का हुआ है। किंतु फिर भी काफी ट्रांसफॉर्मेशन हुआ। भारत से बुद्धिज्म गया। दैट वाज़ वन मेजर ट्रांसफॉर्मेशन और फिर यूरोप से कम्युनिज्म को इंपोर्ट किया। दैट वाज़ सेकंड मेजर ट्रांसफॉर्मेशन। तो यह दो मेजर ट्रांसफॉर्मेशन हमको हुवांगहो रिवर वैली सिविलाइजेशन में दिखते हैं। चाइनीस सिविलाइजेशन में जबकि मेसोपोटेमियन सिविलाइजेशन और ये इजिपशियन सिविलाइजेशन नाइल रिवर वैली सिविलाइजेशन ऑलमोस्ट कंप्लीटली चेंज। जैसे ही इस्लाम आया उसका पुराना जो कुछ भी है संपूर्ण रूप से उन्होंने रिजेक्ट कर दिया है। 180 डिग्री ट्रांसफॉर्मेशन वहां पे हुआ है। तो देखिए कि वी आर सच एन ओल्ड सिविलाइजेशन वी हैव रोज़ एंड फॉल। रोज़ एंड फॉल अगेन एंड अगेन। प्रगति भी हुई है, डिक्लाइन भी हुआ है, एडवांसमेंट भी हुआ है, डिक्लाइन भी हुआ है। किंतु हमारा संपूर्ण निकंदन, संपूर्ण विनाश, संपूर्ण प्रलय नहीं हो गया। जैसा कि यह बाकी दो सिविलाइजेशन के साथ में हुआ है। चाइना में मेजर चेंजेस आए हैं। बट फिर भी वो कह सकते हैं कि वो जो कन्फशियस आइडियल है वो प्री उनका बुद्धिस्ट कन्फशियस ताऊस्ट आइडियल वो अभी भी थोड़ा बहुत चल रहा है। तो चलो कह सकते हैं कि ऑलमोस्ट 70% ट्रांसफॉर्मेशन हुआ है चाइनीस सिविलाइजेशन का। जबकि अवांग हो मेसोपोटेमियन और ये इजिपशियन सिविलाइजेशन का 100% ट्रांसफॉर्मेशन हो चुका है। सो दिस वी आर फ़ॉर्चूनेट इनफ कि हमारे भीतर में ऐसा जो कुछ है जो कि हस्ती मिटती नहीं हमारी वो जो केशव सेन ने ठाकुर के बारे में कहा है ना कि फॉर अ रिलीजन फॉर हिंदूइज़्म टू प्रोड्यूस समवन ऑन समवन सच एस दिस ठाकुर को देखकर के वह कहता है कि ठाकुर के जैसे किसी को प्रोड्यूस करता है जो धर्म वो हिंदू धर्म के भीतर में किस तरह की शांति अमृत और यह शाश्वत उसके भीतर में आध्यात्मिक झरना बह रहा होगा कि आज श्री रामकृष्ण जैसे महापुरुष को हिंदू धर्म ने प्रोड्यूस किया है। केशवसेन ही वाज़ वेस्टर्नाइज्ड पर्सन और यह ब्राह्म धर्म बोलकर के एक नया एक तू वो स्टार्ट का किया था। उसने नहीं किया था। बट ही वाज़ वन ऑफ द लीडर। सो उस केशवसेन को भी यह स्वीकार करना पड़ा। सो क्या है कि ठाकुर मां स्वामी जी के आगमन से हमारे पास में एक नया ज्योति हमको मिला है। किंतु यह ज्योति जो है यह जो पावर है ठाकुर मां स्वामी जी का यह कोई रिलीजियस लेवल पर कहीं सिमिट होकर ना रह जाए। ठाकुर को मैं ठाकुर का नाम मैंने गुरु महाराज से लिया है। प्राप्त किया है। मैं जप कर रहा हूं। बस जप करने तक ही ठाकुर सीमित ना रह जाए। यह जो कहानियां सुनकर के अपना इनर लाइफ ट्रांसफॉर्म करना है यहां तक यह लोग सीमित ना रह जाए। अपना यह जो लार्जर नेशनल क्वेश्चंस है वहां पे ठाकुर मां स्वामी जी को किस किस तरह से हम अप्लाई कर सकते हैं। खास करके स्वामी जी के टीचिंग्स को। हाउ वी कैन कंप्लीटली ट्रांसफॉर्म आवर नेशन इन सच ए वे कि कितना भी टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट चलता रहे पूरी दुनिया में और कितना ही वह आर्मी लेकर के हमारे सामने आते रहे हमको हराने के लिए हम लोग फिर उनके सामने हाथ जोड़ के बैठ ना जाए जैसा कि वह कल बात हुआ था ना कि यह जो अपना इंडियन एक क्रेवन मेंटालिटी है कि लोगों के सामने हाथ जोड़ के भाई आप तो हमारे ईश्वर हैं। आप हमारे देवता हैं। हम आपकी गरीब प्रजा है। आपके आशीर्वाद पे जीते हैं। ऐसा कोई नाटक मत लिखना। तुम लोग जो मानपत्र देते हो जो रॉयल फैमिली का कोई आ रहा था इंडिया में विजिट पे तो इस तरह का वो जो टिपिकल हिंदू मेंटालिटी है उस तरह से उसमें मत लिखना। स्वामी जी ब्रिटेन में गए थे। स्वामी जी को सम्मान मिला था। तो चलो ऐसा अ पोलाइट वे कि वी रेसिप्रोकेट द सेम रिस्पेक्ट टू जो रॉयल फैमिली का एक मेंबर इंडिया आ रहा है स्वामी जी का स्वामी जी का दर्शन करने के लिए स्वामी जी की बात सुनने के लिए रॉयल मेंबर रॉयल फैमिली की एक लेडी आती थी अ न्यू डिस्कवरी में लिखा है कि देयर वाज़ वन लेडी फ्रॉम रॉयल फैमिली शी यूज्ड टू कम एंड हैव रेगुलर विजिट टू स्वामी विवेकानंद दस क्लासेस किंतु उसका नामोल्लेख जो है कोई करता नहीं है। अभी यह हिंट मिलता है किंतु एग्जजेक्टली हु शी वाज़ आई थिंक दैट इज अ लिटिल ऑफ मिस्ट्री। तो चलो कि स्वामी जी को ब्रिटेन में इतना सम्मान मिलता है। ब्रिटिश लोग स्वामी जी को क्लास अटेंड करने के लिए आते हैं। इवन रॉयल फैमिली के जो मेंबर्स हैं वे लोग भी स्वामी जी को इतनी श्रद्धा भक्ति करते हैं। तो वो रॉयल फैमिली का एक मेंबर इंडिया जाता है। तो इट्स अ पोलाइट वे टू से थैंक यू कि चलो अभी रामकृष्ण मिशन की ओर से आपको एक मानपत्र देते हैं कि आप लोगों का जो राज्य है वी फील सेफ विद इन दैट। सो ऐसा कुछ करके एक जो पोलाइट जो होता है व्यवहार करना ऐसा व्यवहार हम लोग करेंगे बट जो एक टिपिकल हिंदू मेंटालिटी है सीधा चरण में गिर जाना आप ब्रह्मा विष्णु महेश्वर है हम आपके बिना कुछ नहीं है ऐसा सब नौटंकी मत करना सो दैट इज वेरी इंटरेस्टिंग वे कि स्वामी जी अपने लेटर में लिखते हैं सो क्या है कि समाज जो है सोसाइटी है नेशन है सिविलाइजेशन है वी हैव टू ट्रांसफॉर्म इट बेस्ड ऑन स्वामी विवेकानंदास आइडियल्स। यह जो हम स्वामी जी का लाइव स्टडी कर रहे हैं। दिस इज नॉट मियरली फॉर आवर इनर ट्रांसफॉर्मेशन। देखिए ठाकुर मां स्वामी जी तीन है तो हमारे तीनों को हम एक पैरेलली स्टडी कर रहे हैं। ठाकुर का कथामृत और लीला प्रसंग टू ऑफ दी मोस्टेंट बुक रिगार्डिंग ठाकुर दोनों हम स्टडी कर रहे हैं। उसमें से जो मेन चीज सीखना है कि अपना इनर लाइफ कैसे ट्रांसफॉर्म हो। मां को हम स्टडी कर रहे हैं। अभी तो मां का सिर्फ लाइफ ही पढ़ रहे हैं। किंतु बाद में जैसे-जैसे अभी मां लेटर लिखना शुरू करेगी, मां के जो डिसाइपल है, मां के ऊपर में रेमिनेशंस लिखना शुरू करेंगे। तो जैसे-जैसे क्रोनोलॉजिकली आता जाएगा, हम सब कुछ देखते जाएंगे। इतना बड़ा सा वो बंडल है मेरे पास में मां की लाइफ का। तो सभी किताबों में से क्रोनोलॉजिकली जहां पे जो आता है सब देखेंगे। सो दैट इज मां का लाइफ है और मां का लाइफ पढ़कर के जो एक मेन शिक्षा हमको मिलती है कि दूसरों के प्रति किस तरह से मातृभाव रखा जाए। देखिए बात यह नहीं मैं पुरुष हूं मैं क्यों मातृभाव रखूं। राइट? ऐसा कभी-कभी हो सकता है। वो दूसरा ठाकुर का संतान भाव था। तो संतान भाव तो फिर भी चलो समझ में आता है। मातृभाव कैसे वो किंतु देखिए कि यह जो लोगों के प्रति करुणा है, सहानुभूति है। एक सिंपथी है, कंपैजन है। दैट इज व्हाट मेक्स अस ह्यूमन। अदरवाइज बाहर से हम झगड़ा कर रहे हैं लोगों के साथ में और भीतर में हम जब ध्यान करने का प्रयास करेंगे तो यह कभी भी सफल नहीं होगा। यह जो देखिए कि ऐसा क्यों नहीं हुआ? ठाकुर की महासमाधि के इमीडिएटली बाद में कि स्वामी जी ने प्रवरज्या प्रारंभ कर दी। यह अखंडानंद जी ने तो ऐसा ही किया था। अखंड जैसे ही ठाकुर का महासमाधि हुआ कुछ ही दिनों के बाद में अखंडानंद जी वहां से निकल गए। यह तिबेट है, यह हिमालय है। पूरा भ्रमण करके फिर आखिर में स्वामी जी ने जब लेटर लिखना शुरू किया उनको कि भाई गंगाधर तुम गंजेश ठाकुर स्वामी जी जो गंगाधर महाराज को कहते थे गंजेश तुम वापस आओ। मैं हिमालय जाना चाहता हूं। तुमने हिमालय में बहुत सारा भ्रमण किया है। सो बी माय गाइड। मुझे गाइड करो कि तुम मुझे वहां पे अच्छी-अच्छी एकांत जगहों पर तपस्या करने के लिए ले जाओ। तो जब स्वामी जी ने इतने लेटर लिखे तब कहीं गंगाधर महाराज वापस आए थे अखंडानंद जी और वो फेमस कहानी कि स्वामी जी और अखंडानंद जी दोनों मां को प्रणाम करने के लिए जाते हैं प्रवरज्या प्रारंभ करने से पहले तो मां उस समय कोलकाता में थी तो मां को प्रणाम किया तो मां ने गंगाधर महाराज को कहा कि देखो मैं अपना सर्वस्व तुम्हारे हाथों सुपुत कर रही हूं। तुम स्वामी जी का नारायण का जतन करना देखो कि उसको थोड़ा सा भी खानेपीने का कष्ट ना हो। तो ऐसा करके मां ने दोनों को विदाई दी थी। उस समय स्वामी जी ने एक भजन भी गाया था। मां को बहुत अच्छा लगा था। और यह भी सेकंड फेमस कहानी कि स्वामी जी ने कहा तो कि हम सीधा चलते हैं हिमालय। ये काशी गए थे। काशी से चलते हैं सीधा हिमालय। तो अखंडानंद जी कहते हैं नहीं नहीं यहां पे मथुरा ना कि कहां पे एक आश्रम है वहां के एक महंत थे जानकी बलशरण उनका जो प्रेम भक्ति वैराग्य अनुराग ऐसा है कि आपको बहुत अच्छा लगेगा उनके साथ में बात करके तो वहां चलते हैं तो स्वामी जी इतने नाराज हो गए थे कहा कि मैंने तुमको बुलाया है हिमालय में भ्रमण करने को और तुम मुझे कहां ये साधु बाबा दिखाने को ले जाते हो और स्वामी जी कहते हैं बाबूराम महाराज को भी बीच में ले लिया। गंगाधर महाराज को तो गाली दी ही दी। और साथ में यह भी कहते हैं ये बाबूराम जो है स्वामी प्रेमानंद उसका भी ऐसा ही नेचर है। रास्ते में चलते-चलते जितने मंदिर दिखे जितने ये साधु बाबा जी दिखे जहां पे एक पत्थर दिखा जिसकी पूजा करता है कोई भी वहां जाकर के सीधा साष्टांग करेगा। तो यह बाबूराम का नेचर है। तुम भी ऐसा कर रहे हो क्या? निराकार निर्विकल्प साधना करनी है। निराकार निर्गुण साधना करनी है। उसके लिए हिमालय में जाना है। कहां मुझे तुम एक बाबा जी के पास ले जा रहे हो? तो स्वामी जी नाराज तो बहुत हो गए। किंतु फिर भी गंगाधर महाराज ने कैसे भी करके टिकट निकलवा दी। गए दोनों वहां पे यह महंत के वहां पे पूरा रास्ते में ट्रेन जर्नी में स्वामी जी एक शब्द नहीं बोलते हैं। इतने नाराज थे वह गंगाधर महाराज से। उनके साथ में वार्तालाप बिल्कुल बंद। और यहां तक कि जब स्टेशन पर उतरे और वह जो आश्रम में जा रहे हैं तो रास्ते में वह जो गंगाधर महाराज ने एक हुक्का लिया परचेस किया स्वामी जी तो वो स्मोकिंग के तंबाकू सेवन के शौकीन थे तो तो स्वामी जी को प्लेकेट करने के लिए कि थोड़ा सा ठंडा हो उनका गुस्सा एक हुक्का लिया और स्वामी जी को दिया तो स्वामी जी इतने नाराज थे कि हुक्का को लेकर के जोर से जमीन पर पटका कि नहीं चाहिए हुक्का तो जब गंगाधर महाराज कैसे भी करके उनको ले आए आश्रम में। उस दिन रात को तो कुछ बात हुआ नहीं। किंतु दूसरे दिन सुबह को महंत महाराज के साथ वार्तालाप हुआ स्वामी जी का और स्वामी जी को इतने अच्छे लगे यह महंत कि संपूर्ण रूप से उनका स्वभाव म उनका जो गुस्सा है कहां अदृश्य हो गया। संपूर्ण रूप से इतना आनंद से इतना इंटरेस्ट से वह महंत महाराज के साथ बात किया और फिर गंगाधर महाराज को बड़े ही म खुश होकर के उन्होंने कहा आभार व्यक्त किया कि भाई अच्छा हुआ तुम मुझे यहां पे ले आए। सो एनीवे बाद में गए हिमालय। सो देखिए कि ये जो स्वामी जी का जो लाइफ है ये जो कम्युनिटी लाइफ खास करके वराह नगर मठ में क्यों स्वामी जी रहे थे क्यों एक इंस्टीट्यूशनल लाइफ स्टार्ट करके गए थे गंगाधर महाराज की तरह ठाकुर की महासमाधि के इमीडिएटली बात स्वामी जी भी निकल जा सकते थे किंतु नहीं ठाकुर ने कहा है कि तुम लोगों को इकट्ठा होकर के रहना है एक इनर और स्पिरिचुअल डेवलपमेंट जो आपने किया है उसके बाद में यह इंस्टीट्यूशनल फैमिली लेवल एक जो कम्युनिटी लेवल का जो एक डेवलपमेंट है ये अपस्केल जिसको कहते हैं आजकल ऐसा यू हैव टू अपस्केल योरसेल्फ अपग्रेड नहीं टू अपस्केल योरसेल्फ तो इनर स्पिरिचुअल लाइफ यू हैव टू एक्सपैंड इट आउटसाइड इंटू इंस्टीट्यूशनल कम्युनिटी लाइफ एंड देन यू हैव टू अगेन एक्सपैंड इट आउटसाइड ऑन अ सिविलाइजेशनल स्केल जो कि फिर स्वामी जी अल्टीमेटली हिमालय से नीचे उतरे और फिर यह नॉर्थ इंडिया है, वेस्ट इंडिया है, साउथ इंडिया है, फिर वेस्टर्न कंट्रीज है। यह भ्रमण जब किया तो और फिर स्वामी जी का हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग तो बहुत पक्का था। हमको पता है कि ये वेस्टर्न डिसाइपल्स को लेकर के स्वामी जी वेटिकन भ्रमण करते हैं इटाली में। तो प्रत्येक जगह पर क्या हुआ उसका इतिहास स्वामी जी वेटिकन इज अ वन ऑफ द स्टोरीड प्लेस कि प्रत्येक लोकेशन का एक हिस्ट्री है प्रत्येक चर्च का एक हिस्ट्री है प्रत्येक आर्किटेक्चर का एक हिस्ट्री है हजार 2000 साल पुराना जीसस के टाइम का जीसस तो खैर वहां पे नहीं गए थे किंतु सेंट पॉल से लेकर के जो बाकी जितने भी थे जो एक पूरा ट्रेडिशन लोगों का वहां पे ही स्टार्ट हुआ है तो प्रत्येक प्लेस का हिस्ट्री स्वामी जी अपने वेस्टर्न डिसाइपल्स को बता रहे हैं। और वे लोग यह सुनकर के आश्चर्यचकित हो रहे हैं कि स्वामी जी नोस मोर अबाउट द हिस्ट्री ऑफ़ वेटिकन चर्च, दिस प्लेस, दैट प्लेस देन क्रिश्चियंस देमसेल्व्स। सो स्वामी जी का एक डेप्थ ऑफ हिस्ट्री तो था ही था। एंड कपल विद दैट कि यह प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस उनको हुआ पूरे विश्व में भ्रमण करने का। और देखिए एक इंटरेस्टिंग बात है कि उस समय भ्रमण कैसे होता था आज भ्रमण कैसे होता है आजकल यह जो मींस ऑफ ट्रांसपोर्टेशन है ये इलेक्ट्रिकल डिजिटल ये कम्युनिकेशन के साधन है उसने ना हमको इंसुलर करके रख दिया है। अब जैसे गुजराती है तो गुजराती अमेरिका जाता है तो क्या है सब कुछ एक इंसुलेटेड एनवायरमेंट में जाता है वो वहां से उम्र ज्यादा है तो एक व्हीलचेयर में बैठ जाना है एयरपोर्ट में फिर वह व्हीलचेयर में सीधा आपको प्लेन में उठा देंगे वो प्लेन में से सीधा 24 आवर्स में पहुंच जाएंगे वहां पे आपके रिलेटिव्स आपको लेने को आ जाएंगे फिर उनके आप घर में चले जाइए और फिर बस जो कुछ आपके रिलेटिव्स हैं उनको मिलिए और जब आने का समय हुआ सेम वे कि आप प्लेन में बैठकर के 24 आवर्स में आ गए एंड मीनवाइल यू आर ऑलवेज इन टच विद योर गुजराती रिलेटिव्स बाय दिस मोबाइल तो क्या है कि आपको जगत के साथ में ऐसा कोई इंटरेक्शन करने की जरूरत नहीं है। अब पूरा एक इंसुलर वे में आप ट्रैवल कर सकते हैं। किंतु स्वामी जी के समय तो ऐसा नहीं था। आप जहाज यात्रा कर रहे हैं। 15 20 दिन 1 महीने की जहाज यात्रा है। सबके साथ में इंटरेक्शन करना है। और फिर यह मोबाइल वगैरह तो है नहीं कि पहुंच गए वहां पे तो फोन करके बता पहले ही तो फोन करके बता दिया है कि इस टाइम पे आ रहा है तो वे लोग आपको रिसीव करने को आ जाएंगे। और नहीं आए तो फोन करके बता देना है। वह कुछ ना कुछ हो जाएगा। ऐसा तो नहीं है। आपको यात्रा के दौरान सबके साथ इंटरेक्ट करना है। वहां पर पहुंचने के बाद में लोकल लोगों के साथ में इंटरेक्ट करना है। अभेदानंद जी लंदन गए तो बात ऐसा था ईटी स्टडी उनको सी पोर्ट पर लेने को आएंगे। आजकल एयरपोर्ट है वहां पे उस समय सी पोर्ट था कि जहाज जहां पर लैंड करता है तो ईटी स्टडी लेने को आएगा। अभी पता नहीं किस तरह का मिसकम्युनिकेशन हो गया। ईटी स्टडी को पता नहीं कौन से टाइम यह आ रहे हैं। यह अभदानंद जी पहुंच गए लंदन और फिर लंदन जाकर अभी करें क्या यदि कोई लेने को नहीं आए। मोबाइल वगैरह तो है नहीं फट करके नंबर निकाल के डायल किया तो खोजतेखोजते एड्रेस था उनका ईटी स्टडी का तो खोजते खोजते कहां से भी यह ट्रांसपोर्ट लेके यह वो करके उसके घर पहुंच गए। इट स्टडी वास सरप्राइज कि स्वामी जी हाउ डिड यू कम हियर? तो देखिए कि यात्रा करना मतलब जगत के साथ में इंटरेक्ट करना। उन लोग लोकल लोगों की लैंग्वेज समझना, लोकल कस्टम्स समझना, लोकल लोगों के साथ में फ्रेंडशिप रखना। यह आजकल की तरह इंसुलेटेड नहीं कि आप अपने रिलेटिव्स वगैरह के ही साथ में इंटैक्ट करते हैं। यू डोंट नीड टू इंटैक्ट विद एनी लोकल पीपल। सो, दैट इज़ नॉट हाउ स्वामी जी ट्रेवल्ड। पता ही है फेमस स्टोरीज है कि वो वहां पर वह बॉक्स कार में सो रहे हैं और फिर वह दूसरे दिन इधर-उधर भटक रहे हैं। वह जो मिसेज मेरी हेल ने देखा कि अरे यह एक आदमी है देखने में तो बड़ा हैंडसम है। पता नहीं रास्ते पर क्यों बैठा है तो उसको इनवाइट किया अपने घर में और अपने घर में फिर वह रहने को जगह दी। आज हम सोच भी नहीं सकते अमेरिका जल्दी जाते हैं तो रास्ते में भटकेंगे इस आशा के साथ में कि कोई अमेरिकन अपने घर में हमको रहने को दे देगा। ना ही हम यह आशा रखेंगे ना ही मुझे लगता है अमेरिकन लोग इस तरह से किसी को रखेंगे। सो एनीवे दैट डे उस समय में जब हम ट्रैवल करते थे वी हैड टू रियली कम इन टच विद दिस लोकल पपुलेशन लोकल कल्चर लोकल ट्रेडिशन लोकल पीपल। तो वो जो स्वामी जी का जो एक्सपंड हुआ वर्ल्ड व्यू एंड ऑलरेडी हिज अंडरस्टैंडिंग ऑफ हिस्ट्री दोनों मिलाकर के इट गव हिम ए डेप्थ द सच अ डेप्थ कि आज जो हमारी नेशनल सिस्टम्स जो भी है चाहे वो जुडिशियल सिस्टम है चाहे वो गवर्निंग सिस्टम्स है चाहे वो एजुकेशन हायर प्राइमरी एजुकेशन कहो ना कि हायर एजुकेशन सिस्टम कहो तो सब सब जगह पे स्वामी जी के आइडियाज जो है वी कैन इंजेक्ट देम वी कैन अप्लाई देम एंड वी कैन मेक श्योर कि फिर से ऐसा कोई सरप्राइज में हम नहीं पड़ जाएंगे कि हमारे से फार सुपीरियर एनी एनिमी एक इस तरह का वेपन ले खड़ा होगा हमारे सामने कि जिसका फिर हमारे सामने हमारे पास में कोई उपाय नहीं है। कोई डिफेंस नहीं है। बिल्कुल ही हम उसके सामने हेल्पलेस है। जैसे ईरान है अभी इन लोगों के सामने हेल्पलेस। यह पूरा स्काई डोमिनेट करके रखा है। अमेरिका और इजराइल ने। जब चाहे एरोप्लेन बेचते हैं। जो चाहे जहां पे चाहे बमबार्डिंग करते हैं। ये लोग 10-15 ड्रोन इधर-उधर बेच करके लोगों के मन में भय खड़ा करा सकते हैं। किंतु मिलिटरीली ईरान अभी कुछ नहीं कर पाएगा। इट्स अ डिफिटेड कंट्री बेसिकली प्रैक्टिकली वो मुंह पे तमाचा मार के मुंह लाल रखने वाली बात है। बस इतना ही अदरवाइज भीतर में से सॉलिड मार खा रहा है। तो हमारा कहीं ऐसा ना हो जाए फिर से ऑलरेडी 1000 साल तो हमने भुगत लिया। फिर ठाकुर की कृपा से यह फ्रीडम मूवमेंट हुआ हमारा स्टार्ट और हमको आजादी मिला और फिर यह जो आजकल जिस तरह से चल रहा है मुझे हम हमेशा यह डर लगता है कि कितने दिन तक यह आजादी जो है हम उसको एंजॉय कर पाएंगे। बहुत बार ऐसा होता है ना कि बाहर से दुश्मनों को आकर के आपको कंट्रोल करने की जरूरत नहीं है। आपका जो रूलिंग क्लास है उसको इस हद तक करप्ट कर दें कि वह अपने देश के हित के बारे में सोचे ही नहीं। अपने दुश्मनों के साथ में मिलकर के उनके बेनिफिट के लिए काम करें और देश का अहित करें। जैसे कि यह अपने पड़ोस देशों में हो रहा है। अपने पड़ोसी देश को देखकर के ही पता चलता है कि वहां के जो रूलिंग क्लास है टॉप टू बॉटम 100% करप्ट वो देश का किसी को कुछ पड़ा नहीं है। वो सब अपना पर्सनल प्रॉफिट मेकिंग में लगे हैं। सो वो कहीं ना हो जाए। दैट इज बिगर डेंजर। माने बाहर से शत्रु आता है तो फिर भी सब लोगों की आंखें खुल जाती है। चलो कुछ करते हैं। चलो अपने को डिफेंड करते हैं। किंतु भीतर से ही वायरस की तरह अपनी सिस्टम को रोट कर दे। भीतर से खा जाए और हमको पता ही ना चले आखिर में जब एक धक्का लगा तो पूरा पत्ते के महल की तरह पूरा देश डूब गया। दैट सिचुएशन शुड नॉट अराइज। यह स्वामी जी को हमको पढ़कर के यह जो इन डेप्थ प्रत्येक सब्जेक्ट के बारे में जो पता चलता है इंटरेस्टिंग स्टोरी स्वामी जी उस समय कहीं साउथ इंडिया में थे एक राजा के महल में उन्होंने देखा कि उसके जो राजा के रिलेटिव्स है वो बहुत ही करप्ट है और राजा का जो राज्य का खजाना है लूट रहे हैं। यह जो पब्लिक वक्स होता है उसमें वह लूट रहे हैं। वो ज्यादा वो अमाउंट दिखा के कम अमाउंट का काम करेंगे जो कि आजकल हर जगह पर देखने को मिलता है। तो स्वामी जी ने यह करप्शन देख के वहां का जो दीवान होगा शायद राजा का ने कि ऐसे दो-तीन लोगों के सामने अपना कंसर्न खड़ा किया कि देखिए इस तरह से करप्शन चल रहा है। और इवेंचुअली ये बात राजा के कान में गई तो राजा ने स्वामी जी को बुलाया अपने चेंबर में और जैसे हिंदी फिल्म का डायलॉग होता है ना वैसे ही इट्स वेरी इंटरेस्टिंग राजा स्वामी जी को कहता है कि स्वामी जी देखिए आपके सामने तो एक बहुत बड़ा मिशन है। आपके सामने तो एक बहुत बड़ा टारगेट है। पूरे भारत को आपको रिजुनेट करना है। आपको तो विदेश में भारतीय संस्कृति का भारतीय आध्यात्मिकता का प्रचार करना है। स्वामी जी ऑलरेडी ये साउथ इंडिया की बात है। स्वामी जी के माइंड में बहुत कुछ ऑलरेडी फिक्स हो गया था कि अभी भविष्य में क्या है और राजा के साथ में डिस्कस भी किया होगा। तो अब मैं भूल गया कौन सा राजा। सो एनीवे सो यह राजा बिल्कुल हिंदी फिल्म के डायलॉग की तरह स्वामी जी के साथ बात करता है कि आपको तो इतने बड़े-बड़े काम करने हैं देश के। सोचिए क्या होगा यदि आपके साथ में एक एक्सीडेंट हो जाए और आपका यहीं पर मृत्यु हो जाए तो स्वामी जी कहते हैं यह क्या कह रहा है तो राजा कहता है देखिए आप यह जो लोगों को बोल रहे हैं ना प्रचार कर रहे हैं कि यह मेरे रिलेटिव्स करप्ट है करप्ट है वो याद रखिएगा कि मैं तो आपको कुछ नुकसान नहीं करने वाला किंतु यह जो रिलेटिव्स हैं मेरे वह कहीं आपके साथ में एक ऐसा एक्सीडेंट ना खड़ा कर दे कि आपकी मौत हो जाए और वे लोग फिर यह जो आप उनको हानि पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उससे वे लोग बच जाए। सो बी वेरी केयरफुल। ऑफिशियली तो वे लोग आपको कुछ नहीं कर पाएंगे। ऑफिशियली तो कैद करने की सजा देने की क्षमता मेरे पास है। किंतु यह अनऑफिशियली जो है बहुत कुछ कर सकते हैं। एक्सीडेंट करवा सकते हैं आपका। ऐसा करके राजा ने स्वामी जी को कहा। देखिए इवन स्वामी जी ही अंडरस्टुड कि करप्शन इज सच ए प्रॉब्लम कि वन पर्सन कैन नॉट फाइट इट। सो नाउ ऐसा नहीं है कि यू नो हाउ मेनी वेज़ वी कैन एनालाइज दिस? आई एम स्टिल नॉट श्योर कि व्हाट इन व्हिच वे वी शुड टेक इट। यू कैन एनालाइज यू कैन डिसेक्ट यू कैन थिंक अबाउट इट डिबेट अबाउट इट टू टू द डेथ। माने इतना आप इसके बारे में डिबेट कर सकते हैं। आर्गुममेंट कर सकते हैं। टू एंड फ्रॉ उत्तर पक्ष पूर्व पक्ष। वो मुझे ऐसा लगता है बहुत ही सहज भाषा में कहे कि सी इवन स्वामी जी अंडरस्टुड कि करप्शन इज सच अ प्रॉब्लम कि वो कोई एक इंडिविजुअल व्यक्ति के कहने से या इंडिविजुअल व्यक्ति के फाइट करने से नहीं जाने वाला। इट हैज़ टू बी अ सोसाइटल एफर्ट। करप्शन कहां से स्टार्ट होता है? कि आपका जो मोरल और एथिकल स्टैंडर्ड जो है वह तो डूब ही गया है। पैसों के प्रति लोभ जो है आपका वह बहुत ज्यादा बढ़ गया है। एट द सेम टाइम इस पूरा सोसाइटी यह इनेबल करती है। आपकी टैलेंट को एक्सप्रेस होने के लिए कोई आउटलेट नहीं है तो फिर यह टैलेंट जो है वह डिस्ट्रक्टिव माध्यम से प्रकट होगी। यदि वही रिलेटिव्स को एक लेजिटमेट वे मिलता कि चलो मेरे पास में यह टैलेंट है। आई कैन एक्सप्रेस इट सम हाउ आई कैन अचीव सम ग्रेटनेस इन माय लाइफ देन इट विल बी ओके। अदरवाइज फिर यह जो टैलेंट है वह पड़ीपड़ी रस्ट हो जाएगी या तो फिर वो डिस्ट्रक्टिव यूज़ होगा। सो अल्टीमेट टेक अवे फ्रॉम दिस इज कि प्रत्येक यंग पर्सन को अपनी टैलेंट डेवलप करने के लिए स्कोप देना चाहिए अपनी सिविलाइजेशन को। अंटिल एंड अनलेस दैट स्कोप इज गिवन द टैलेंट विल आइदर रस्ट और इट विल गो आउट एज अ डिस्ट्रक्टिव मींस। सो सम ऑफ द थॉट्स आई थॉट दैट आई विल शेयर विद यू। इसका भी नेक्स्ट क्लास में और ज्यादा स्वामी जी का लाइफ डिस्कस करेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु

प्रश्न: एक ओर भक्त की भगवान के प्रति शरणागति है, और दूसरी ओर किसी राष्ट्र का अपने शत्रुओं के सामने आत्मसमर्पण। दोनों देखने में समान लगते हैं, परन्तु वास्तव में दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। यह अंतर क्या है?

देखिए ठाकुर का जो भक्ति था वो उल्लसित भक्ति था ना भाबे हासे कांधे नाचे गाए वो जो ये संसार धोकार टाटी ऐसा जब वो राम प्रसाद कहता है तो वह आजू गोसाई उसका उत्तर देता है संसार है मजा की कुटिया मैं खाता हूं पीता हूं और मजे से रहता हूं। सो दैट वाज़ ठाकुरस भक्ति वो दीनहीन भक्ति नहीं रासमणि को चांटा मार दिया है ना तो दैट इज़ श्री रामकृष्णा कि ईश्वर दैट इज व्हाई आवर फ्रेमवर्क ना कि एक ईश्वर की ओर है दैट इज वन फ्रेमवर्क दैट इज अ कम्युनिटी लाइफ दैट इज अ सेकंड फ्रेमवर्क एस सिविलाइजेशनल लाइफ दैट इज अ थर्ड फ्रेमवर्क डोंट मिक्स एंड मैच ये जो ईश्वर की ओर जो भक्ति है उसको सिविलाइजेशनल स्केल पर ले आएंगे तो हमारा ही तो नुकसान है अपना अपना धर्म शास्त्र ही लिखा गया है युद्ध के मैदान पे। अपना धर्म शास्त्र ही लिखा गया है श्रीमद्भगवत गीता कि अर्जुन वो कायर होकर भाग जा रहा है तो भगवान कृष्ण उसको उपदेश देते हैं कि नहीं सामना करो शत्रुओं का। सो दैट फ्रेमवर्क वी हैव वही है कि वी नीड टू उसको इंटरनलाइज करने की जरूरत है। इंटेलेक्चुअल लेवल पे जो है यह फ्रेमवर्क वी नीड टू इंटरनलाइज इट। अदरवाइज आप देखिए कि ठाकुर के भीतर में इतना डिवोशन था। ठाकुर कहते हैं कि शबाई के हक कथा बोल दो। सबको मैं ठीक-ठीक बात कहता। हक कथा का क्या अर्थ है कि यदि नजर के सामने अन्याय दिखता है तो वह अन्याय का प्रतिवाद करना आपका धर्म है। ठाकुर कहते थे कि जब भी कहां पर कुछ भी गलत दिख रहा है तो फट करके वह जाकर के बोल दे म रामणि को चांटा मारना दैट इज वन एक्सप्रेशन ऑफ दैट। किंतु ऐसा तो वो जो तो भगवान दास बाबा जी का दर्शन करने को गए थे। तो भगवान दास बाबा जी उस समय के वैष्णव लोगों के बहुत बड़े आचार्य तो आशा रखे थे कि वह बैठकर के जब ध्यान करते होंगे वगैरह तो वो नहीं एक साधु था उसने कोई पाप कर्म किया था तो उसका किस तरह से बहिष्कार किया जाए वह सब चर्चा चल रही थी। फिर वह जप कर रहे हैं तो माला लेकर के तो हृदय ना कि किसी ने पूछा कि आप इतना एडवांस हो गए हैं फिर भी माला लेकर जप कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मैं यदि नहीं जप करूंगा माला ले तो लोग मेरे से क्या सीखेंगे तो ऐसा इसको बहिष्कार कर देना मैं लोगों को सिखा रहा हूं तो ठाकुर अब तक तो एक चादर ओढ़ के एकदम शर्मा करके खड़े थे किंतु फिर वह जो सिंह विक्रम प्रकट हुआ और फिर उसको जो डांटा कि यह क्या नाटक लगा के रखा है उस साधु का बहिष् कर दोगे। मैं माला ले जप करता हूं। मुझे लोगों को दिखाना है। क्या है यह सब नाटक? तो क्या है कि ठाकुर का वो दूसरा स्वरूप प्रकट होता था। ईश्वर के सामने जो शरणागति है वो सेम ही विल नेवर कैरी फॉरवर्ड इनू दिस सोशल लाइफ। ठाकुर का कांसेप्ट क्लियर था, स्वामी जी का क्लियर था, मां का क्लियर था। वी नीड टू इंटरनलाइज दिस। कि हमारे सामने जैसे मैंने कहा मैं भारत को इंडिया को देखता हूं। हमारे न्यूज़ पढ़ता हूं। एट द एंड मुझे डिसअपॉइंटमेंट ही दिखता है। क्योंकि हमारे माइंड में ना यह रिलीजियस लाइफ और यह प्रैक्टिकल लाइफ या पॉलिटिकल कम्युनिटी लाइफ बहुत ही ज्यादा यह मिक्स हो गया है एक दूसरे के साथ में। वी नीड टू सेपरेट दिस। यदि आपको पॉलिटिकल लेवल पे ही धर्म लाना है तो गीता का धर्म लाइए। सूरदास के धर्म को आप इंडिविजुअल लेवल तक रखे रहिए। डोंट ब्रिंग सूरदास धर्म टू पॉलिटिकल सिविलाइजेशनल लेवल एंड डोंट टेक गीता महाभारत टू योर होम माने वो अपने इंटरनल लाइफ में सो दैट सेपरेशन दैट फ्रेमवर्क वी नीड टू एक्सप्रेस एंड इंटरनलाइज

प्रश्न: एक ओर विवेकानन्द हैं, जो ठाकुर से निरंतर प्रश्न करते हैं; दूसरी ओर लाटू महाराज हैं, जो बिना किसी तर्क-वितर्क के सब कुछ स्वीकार कर लेते हैं। हमें किस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए—जिज्ञासा और प्रश्न का, या निष्कपट स्वीकृति का?

देखिए जहां तक इंडिविजुअल स्पिरिचुअलिटी का बात है माने लाटू महाराज और स्वामी जी का एग्जांपल में इंडिविजुअल के लेवल पे ही लूंगा पर्सनल स्पिरिचुअलिटी के बेस पे। तो देखिए कि दो चीजें अब जैसे मैं अपना खुद का बताता हूं। आई वास एक्सट्रीमली स्केप्टिकल ऑफ एवरीथिंग रिलीजियस। किंतु मेरा स्केप्टिसिज्म जो है उसने मेरे मुमुक्षत्व को मार नहीं दिया था। मैंने आपको बीच में कहा था ना कि एक लड़का आया था वो उसकी मां लेके आई थी। कहता है बहुत ही ज्यादा वेस्टर्नाइज हो गया है। तो आप अभी इसके साथ में बात कीजिए। तो मैं राह देख रहा हूं कि लड़का एक क्वेश्चन करेगा। अब आई आई कैन आइडेंटिफाई मसेल्फ विद दैट बॉय। नो नाइंथ ना कि ऐसा स्टैंडर्ड का लड़का है। 15 के आसपास उम्र होगी। आई कैन परफेक्टली आइडेंटिफाई मसेल्फ विद हिम। उस उम्र का जब मैं था मेरे मन में एकदम पक्का बैठा हुआ था। जितने साधु बाबा जी है सब के सब फ्रॉड है। धर्म इज नथिंग बट लोगों को। ओपियम ऑफ रिलीजन इज़ ओपियम ऑफ पीपल जो कि कार्ल मार्क्स कहता है। आई कैन परफेक्टली आइडेंटिफाई विद दैट। किंतु एट द सेम टाइम मेरे में मुमुक्षुत्व था। टू सर्च दैट व्हाट इज द अल्टीमेट ट्रुथ। यदि मैं जो नजर के सामने दिखता है वो यदि गलत है देन व्हाट इज दैट दैट आई नीड टू अचीव। स्केप्टिसिज्म एंड मुमुक्षुत्व बोथ था मेरे में। अब कि जबकि यह लड़का आया मैं देख रहा हूं स्केप्टिसिज्म तो पूरा भरा है किंतु उसमें मुमुक्षु तो बिल्कुल नहीं है। यह जो एक उठपटांग चीजें कुछ उसके मन में फिट तो बैठ गई है किंतु ही इज नॉट मेकिंग एनी एफर्ट टू गेट आउट ऑफ दैट। ही थिंक्स दैट आई वांट टू बिकम अ कूल कूल पर्सन। आजकल जो होता है ना कि यू आर अ कूल पर्सन। तो ऐसा कुछ वो अपना एक स्टाइलिश कूल पर्सन दिखाना चाहता है। बोलकर के उसने ये सब उटपटांग आईडिया अपने भीतर में भर दिए हैं। ही हैज़ नो मुमुक्षुत्व। सो व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन हिम एंड मी। ऑन सरफेस लेवल बी वी वेर बोथ इक्वल व्हेन मैं उसके उम्र का था। बट आई हैड दैट मुमुक्षुत्व जो कि मुझे उस केप्टिसिज्म से अथेज़्म से बाहर लेके आया। सो दैट मुमुक्षुत्व शुड बी देयर। दैट इज़ अ ऑपरेटिव वर्ड। कि अल्टीमेटली लाटू महाराज को और स्वामी जी को देखिए सरफेस पर तो इतने ऑोजिट लगते हैं। किंतु लाटू महाराज में जो मुमुक्षुत्व होगा उससे रत्ती भार कम भी स्वामी जी में नहीं होगा शायद ज्यादा होगा। दैट इज व्हाई लाटू महाराज को तो एक शॉर्ट डिस्टेंस पास करना था कि ऑलरेडी भीतर में श्रद्धा भक्ति है। ऑलरेडी ठाकुर मिल गए हैं। तो एक शॉर्ट लिप ही उनको लेना था। जबकि स्वामी जी हैड टू टेक अ लॉन्ग लिप। कहां वो एक वेस्टर्न स्केप्टिक अथेस्ट माइंडसेट था। वहां से ठाकुर की शरण में आए। सो दैट मुमुक्षुत्व वास एक्सट्रीमली स्ट्रांग। सो दैट इज व्हाट मैटर्स के रेदर देन शरणागति मुमुक्षुत्व। शरणागति नहीं है तो भी चल जाएगा। जब तक मुमुक्षुत्व है। और यदि सिर्फ शरणागति है, मुमुक्षुत्व नहीं है तो प्रॉब्लम क्या होगा? जितने यह फ्रॉड लोग हैं, सबके चक्कर में हम फंसते जाएंगे। सो शरणागति विदाउट मुमुक्षुत्व वेरी डेंजरस। मुमुक्षुत्व इज द की हां माने होगा क्या? मुमुक्षुत्व हमको एक एक इंटेलेक्चुअल विज़डम प्रदान करता है। ये सामने वाला जेनुइन है कि फ्रॉड है यह देखने का। यदि मेरे में मुमुक्षुत्व नहीं है तो बहुत आसानी से मुझे लोग ठग लेंगे। सो एक बार एक दो बार इस तरह से मैं ठगा जाऊंगा तो फिर सबके ऊपर में मेरा डाउट बन जाएगा। सो शरणागति विदाउट मुमुक्षुत्व इज नॉट गुड। देखिए बहुत सारे लोग कहते हैं हम लोग न्यूज़ पेपर में पढ़ के अभी धर्म के प्रति हमारा कोई यही नहीं रहा। सो दैट इज योर लॉस ना। राइट? धर्म को कोई लॉस नहीं है। तुम ये राम मंदिर में जाते हो, सोमनाथ के मंदिर में जाते हो, नहीं जाते हो, मंदिर को कोई फर्क नहीं पड़ता। हिंदू सनातन धर्म को कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप उसको फॉलो करते हैं कि नहीं करते। लॉस इज यर्स। तो यदि यह कहना कि मैं इस इस तरह से दो-तीन बार ठगा गया हूं। लोगों को देखकर के ऐसा मुझे हो गया है कि यह सब कुछ गलत है। हु इज लॉस दैट? मुमुक्षुत्व क्यों नहीं है आप में? व्हाई कैन नॉट यू रिकॉग्नाइज कि ये सामने वाला फ्रॉड है कि जेनुइन है। इतना तो आप में क्षमता होनी चाहिए ना। स्वामी जी ठाकुर के सामने शरणागत हुए हैं और किसी धुतारे के सामने तो शरणागत नहीं हुए हैं। सो मुमुक्षत्व गिव्स यू दैट अंडरस्टैंडिंग कि सामने वाला कौन से लेवल का है और फिर शरणागत होना चाहिए संघर्ष का दैट इज व्हाट मुमुक्षत्व मींस मुमुक्षत्व एब्स्ट्रैक्ट कांसेप्ट हो जाता है। देखिए मैं अपनी बात बताता हूं। मैं जब यहां पर आया था जॉइ करने के लिए देयर इज नथिंग कैन आई कैन एक्सेप्ट समथिंग दैट इज रिलेवेंट टू मी। बेलूर मठ में मैं गया ज्वाइन करने के लिए आपको रूटीन फॉलो करना है। मैंने कहा यह रूटीन फॉलो करने से क्या लाभ है मुझे? मुझे तो गांव में जाकर काम करना है। मैं तो स्वामी जी को इस तरह से पढ़ के आया हूं। तो मैंने जाकर बोला कि मैं गांव में काम करूंगा। मुझे ये सब रूटीन फ्रूटीन फॉलो करना ये ट्रेनिंग सेंटर में मुझे अच्छा नहीं लगता। तो बोला कि अच्छा ठीक है तुम गांव में जाकर काम करो। गांव में जाकर काम किया और साथ में ही ठाकुर मां स्वामी जी को बहुत अच्छे से पढ़ना स्टार्ट किया। बेंगली लैंग्वेज आई वाज वेरी लकी टू टेक दिस डिसीजन। पहली ही बार जब मैं बेलूर मठ में था बेंगली सीखना मैंने शुरू कर दिया था। तो मैं रांची में था तो अपना पूरा लिटरेचर मैं बेंगली में पढ़ना शुरू कर दिया था। लीला प्रसंग बेंगली में पढ़ा। ठाकुर स्वामी जी को तो इंग्लिश में ही पढ़ना है। सो दैट वाज़ नॉट अ बिग डील। सो वहां पे मैं काम भी कर रहा हूं और मैं स्टडी भी कर रहा हूं। ये जो चला समुद्र मंथन इन योर वर्ल्ड तो दैट इज व्हाट ब्रॉट आउट दिस अंडरस्टैंडिंग के नहीं बेलूर मठ के जो सीनियर साधु जो कि हमारे ट्रेनिंग सेंटर के इंचार्ज थे उनका एक पॉइंट ऑफ व्यू है दैट इज ओके बट रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर इज़ नॉट लिमिटेड टू हिज पॉइंट ऑफ व्यू रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य अब ठाकुर मास्वामी जी कौन है वी डू नॉट नो बट एटलीस्ट वी नो देयर लिटरेचर सो दैट इज़ व्हाई आई यूज़ दैट पर्टिकुलर वर्ड राम राम कृष्ण विवेकानंद लिटरेचर रेदर देन सेइंग ठाकुर मास्वामी जी। सो रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर इज़ वास्ट इनफ फॉर ऑल ऑफ माय जो मेरी नीड्स एंड नेसेसिटीज है टू फुलफिल ऑल ऑफ़ दैट। दैट इज़ व्हाई आई रिटर्न अल्टीमेटली। अदरवाइज़ यदि मैंने यह मान लिया होता कि हां वे लोग जो बोलते हैं दैट इज द बिगिनिंग एंड एंड ऑफ़ रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर। और तो फिर क्या है मैं कभी वापस नहीं आ पाता। सो दैट इज़ वन थिंग एंड सेकंड देखिए कि द डेप्थ इज देयर और कहीं पर मैं यदि जाता ओशोपशो में तो मुझे वह डेप्थ कभी मिलता ही नहीं। विद इन अ वेरी शॉर्ट पीरियड ऑफ़ टाइम आई वुड हैव फेस अ ब्रक फॉल कि बस यहीं तक है इनका अंडरस्टैंडिंग इससे ज्यादा नहीं है। रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर हैज़ दैट डेप्थ। और दोनों ओर से हुआ ना मेरा एक तो संघर्ष था कि डीप में जाने का और यहां पे डेप्थ अवेलेबल था। सो आई वेंट ऑन वेंट ऑन वेंट ऑन और यह जितना भी आगे जाता हूं दूर-दूर तक नई-नई मंजिलें खुलती जाती है। अल्टीमेटली मुझे लगा कि नहीं मैं एक छोटा सा तो एक बुद्धि है अपना किंतु यह छोटा सा बुद्धि भी तो यूज़ कर रहे हैं और यूज़ करके मैं जितना डीप में जाता हूं उससे कहीं दूर-दूर की मंजिलें ओपन होती जा रही है। उसी टाइम से मैं सिविलाइजेशन जो राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन ये क्वेश्चन था मेरा। उसी टाइम से एक डीप इनर एथिकल मोरल क्वेश्चंस थे। उसी टाइम से यह जो मोरालिटी इंटरपर्सनल रिलेशन वह मेरे क्वेश्चन थे। मैंने देखा दे आर एडिक्वेटली एड्रेस्ड बाय ठाकुर मास्वामी जी। सो मेरा जो था व्हाट आई नीडेड इट इज़ ऑल प्रेजेंट। सो दैट इज़ व्हाई आई रिटर्न। सो दोनों ओर से हुआ ना एक तो मेरा संघर्ष था डीप में जाने का और दूसरा था कि डेप्थ वाज़ अवेलेबल। मैंने कभी किसी की बात को एक्सेप्ट नहीं किया। ना ही बेलूर मठ में जो सीनियर स्वामी थे उनकी बात को एक्सेप्ट किया। ना ही वह शशांकंद जी थे रांची में उनको एक्सेप्ट किया। मुझे हमेशा ऐसा लगता था कि उन लोगों की अंडरस्टैंडिंग इज वेरी लिमिटेड। बट माय आईडिया वाज़ वेरी क्लियर दैट लेट मी ट्राई टू एक्सप्लोर मायसेल्फ। इफ आई एम सेटिस्फाइड ओनली देन आई विल रिटर्न। सो दैट वाज़ व्हाट फुलफिल ना। अभी जैसे देखिए मैंने बताया था ना कि मेरे कम बगल वाले ही कमरे में एक सुधीर जी रहा करते थे रांची में एंड वो जैसे आप ज़ू में जाते हैं ना कि वो कोई विचित्र प्राणी को देखने के लिए वैसा मैं उसको मिलने के लिए जाता था एंड आई यूज्ड टू वंडर कि ऐसा आदमी भी हो सकता है वो महामसिक महासात्विक एट द सेम टाइम महामसिक वो आदमी पे मुझे पक्का भरोसा है वो झूठ नहीं बोलेगा माने मुझे यदि कुछ वेरीफाई करना है तो मैं सुधीर जी के पूछूं पूंगा ये सुधीर जी ये बात सही है यदि वो कहता है वो जो महाभारत के ना युधिष्ठिर को पूछा कि वो कौन मर गया तो उसने कहा ना कि वो वो वही मर गया फिर नरोवा कुंजरोवा उसने वो वो विस्पर में बोल दिया किंतु दैट सी कि इवन द्रोणाचार्य को पता है किसको पूजना सो रांची में मुझे पता है यदि सच मुझे पता करना है तो सुधीर जी को जाकर पता करना है एट द सेम टाइम वो काम खत्म होने के आकर के अपने कमरे में बैठेगा तो जो बैठा है पत्थर की तरह बैठा रहेगा महा तामसिक महा आलसी किस तरह का ये सो आई यूज्ड टू गो टू वाच हिम कि इस तरह का भी कोई हो सकता है सो डायमेट्रिकली ऑोजिट टू मसेल्फ मुमुक्षुत्व जैसा कोई कहां पे नामोनिशान नहीं है वो अपने गांव में अपने घर में बैठा था कुछ नहीं कर रहा था तो उसके पेरेंट्स ने भेज दिया जाओ किसी आश्रम में जाकर रहो एटलीस्ट मुफ्त में खाना मिलेगा यहां पर बैठकर के खाना खा रहे हो तो कहां से उसको संधान मिला तो आश्रम में आ गया तो शशांकानंद जी ने उसको रख दिया सो सी दैट कि रिलीजियस लाइफ में प्रवेश करना विदाउट एनी मुमुक्षुत्व नाउ ही इज़ लकी के रामकृष्ण मिशन में आया है उसका लाइफ जो है साधु तो नहीं हो पाएगा एज अ वालंटियर रहेगा बट उसका लाइफ बन जाएगा और कहीं वो जो जहां पे चरस गांजा चलता है वहां पे जाकर फंस गया होता तो बेचारा बहुत भोलाभाला है क्या हो जाता उसके साथ में सो मुमुक्षत टू हैव धर्म विदाउट मुमुक्षत्व इट इज़ नथिंग बट बट गैंबली आप लकी है। अच्छी जगह पर आ गए तो अच्छा है। यदि अच्छी जगह पर नहीं आए हैं तो पता नहीं लाइफ के साथ में क्या होगा। मैं खुद यह जो भ्रमण कर रहा था मैं कन्याकुमारी से जो निकला वो वॉकिंग करते-करते मेरा खुद का प्रवरज्या के दिन तो मैं कितनी जगह पर गया हूं। वो एक तांत्रिक लोगों के मठ में मैं रहा था कुछ दिन। तो वे लोग उन लोगों का एक जनरल सेक्रेटरी आया था वहां पे वो हेड क्वार्टर कोलकाता में। बहुत बड़ा तांत्रिक लोगों का ऑर्गेनाइजेशन है। तो वो उन लोगों का वहां पर आश्रम था तो उन लोगों का एक जनरल सेक्रेटरी वहां पर आया था। सो मुझे कहता है कि चलो एक डिवोटी के वहां चलते हैं। बैठ के जप करेंगे मेडिटेशन करेंगे। तो मैंने कहा चलो तो जाकर उसके वहां बैठे तो मुझे सबसे पहले बिठाया। मेरे पीछे वो बैठे हैं। तो मैं सीधा बैठकर के ऑलमोस्ट डेढ़ घंटे तक में बैठकर के एकदम ऐसा नहीं है कि ध्यान कर रहा हूं। बट एटलीस्ट फिजिकल कैपेसिटी थी स्थिर हो के बैठने की। तो मुझे देख रहा है पीछे से। फिर वह वापस आए वह मठ में तो मुझे बोलता है तुम चलो मेरे साथ में हेड क्वार्टर मैं तुमको एक बहुत बड़ा पोजीशन दूंगा यू हैव अ ब्राइट फ्यूचर विथ अस मैंने कहा देखिए आपकी फिलॉसोफी आपका जो जो कुछ भी है उसमें कहीं पे भी मुझे इंटरेस्ट नहीं है आई एम नॉट गोइंग एनीवेयर विथ यू सो अभी देखिए यदि मेरे में मुमुक्षत्व नहीं होता सेड आई वुड हैव इजीली वेंट इंटू देयर है ना हो सके मेरा फ्यूचर भी बन जाता नथिंग लाइक दैट दे आर आल्सो सक्सेसफुल ऑर्गेनाइजेशन आजकल इंडिया में धर्म के नाम पे कोई भी ऑर्गेनाइजेशन सक्सेसफुल हो सकता है। आपको कोई बहुत बड़ा गड़बड़ नहीं करना है। बस इतना ही है। सो आई कुड हैव अ गुड करियर आल्सो। बट आई नेवर आई वुड नेवर हैव दैट स्पिरिचुअल डेवलपमेंट व्हिच आई विल मुमुक्षत्व इज द हार्ट। मुमुक्षुत्व इज द हार्ट। विदाउट मुमुक्षत्व यदि आप ठाकुर के पास आ गए वेरी लकी। फिर तो फिर हो ही जाएगा और कोई टेंशन लेने की बात नहीं। किंतु जैसे मेरे साथ में हुआ मुझे पूरा दुनिया घूम कर के एक्सपीरियंस ले यहां पर आना पड़ा था। यदि मेरे पास मुमुक्षु तो नहीं होता मैं कहां पर अटक गया होता। हु नो रांची में ही रांची में मैंने बहुत हद तक ठीक कर लिया था कि अभी तो यह लोग मुझे वापस लेंगे नहीं। मैं गांव में जाकर के रहूंगा। एक छोटी सी कुटिया बनाऊंगा। दिन के दौरान मैं वही करूंगा जो कि मैं ऑलरेडी कर रहा था। गांव का काम करूंगा और रात के समय में मेडिटेशन करूंगा। यह सब करूंगा। सो एट दैट टाइम मुझे बहुत अच्छा आईडिया लग रहा था। आज मुझे लग रहा है किस तरह का मूर्खामी मैं करता यदि ऐसा करता तो सो ऑल ऑफ दिस फेसेस मेरे जीवन से गए हैं। एट एवरी टाइम आई हैव मेड दिस बेटर चॉइस इन दैट सेंस के आई हैव रिटन टू रामकृष्ण मिशन। सो हाउ वाज़ आई एबल टू मेक दिस बेटर चॉइस। बिकॉज़ आई मंथन करके मुझे पता चला है कि ठाकुर मां स्वामी जी आर उनको जीवन समर्पित करना है और कहीं पे मुझे वो स्पिरिचुअल सेटिस्फेक्शन नहीं मिला। अभी आई आई डाउट कि इवन टुडे आई हैव दैट मच डिवोशन। [हंसी] बट आई आई ऑलवेज वैल्यू माय मुमुक्षुत्व इन दैट सेंस दैट आई एम ऑलवेज थिंकिंग। आई एम ऑलवेज ट्राइंग टू वर्कउ व्हाट इज द जैसे कि अभी मैंने कल ही कहा ना मुझे एक फ्रेमवर्क वर्क आउट करना है। व्हाई कि मैं और कुछ नहीं करना चाहता। अभी मुझे एक फ्रेमवर्क वर्कआउट करना है। एक वर्ल्ड व्यू एक वर्ल्ड मॉडल मुझे डिवाइड डिज़ म डिवाइस करना है कि ब्रह्मशक्ति अभेद दैट इज़ कोर प्रिंसिपल हो गया। बेस्ड ऑन दैट डिराइवेटिव प्रिंसिपल है ठाकुर मास्वामी जी अभेद 1 तीन तीन एक एंड बेस्ड ऑन दैट आजकल जितने भी जैसे आपने कहा हाउ टू अंडरस्टैंड दिस के एक ओर है शरणागति दूसरी ओर है ये धर्म युद्ध हाउ टू रिकंसाइल दिस बोथ सो विद इन दैट फ्रेमवर्क ईच एंड एव्री क्वेश्चन आर टू बी रिकंसाइल्ड आपके इंडिविजुअल स्पिरिचुअलिटी के लेवल पे जो क्वेश्चन है, कम्युनिटी लाइफ के रिलेटेड जो क्वेश्चन है, सिविलाइजेशनल स्केल पे जो क्वेश्चन है, आई नीड टू रिकंसाइल एवरीथिंग विद इन वन फ्रेमवर्क। सो, दैट इज़ माय ड्राइविंग फ़। उसमें मुझे ये सोचने को टाइम ही नहीं है कि ठाकुर स्वामी जी के प्रति मेरा भक्ति है कि नहीं। है तो बहुत अच्छा है। नहीं है तो मैं टेंशन नहीं ले रहा हूं। करना चाहिए। यस यस यस दैट इज व्हाट दिस क्लासेस आर यदि आपको सिर्फ सुन ही लेना है तो आई डोंट नो कि मैं रेगुलरली ये क्लासेस कर पाता। यदि आप सिर्फ सुनते ही होते तो आई ऑलवेज रिलीज के इसके बाद में अपना एक हेल्दी डिस्कशन होता है। दैट कीप्स मी ऑन माय टो। नेक्स्ट डे जब मैं क्लास लूंगा, आई विल इनकर्पोरेट सम ऑफ दोज़ पॉइंट्स। मैं अपने फ्रेमवर्क में आई विल इनकॉर्पोरेट दोज़ पॉइंट्स। क्योंकि अल्टीमेटली तो लोगों के पास ले जाना है यह फ्रेमवर्क। सिर्फ मुझे सेटिस्फाई करे वो दैट इटसेल्फ दैट इज नॉट इनफ। देखिए मुमुक्षत्व का अर्थ मुक्ति की इच्छा आपने ठीक ही कहा। किंतु आप यह क्यों सोचते हैं कि यह जो भक्ति है या तो जो ट्रेडिशनल जो साधनाएं हैं वही मुक्ति का मार्ग है। ऐसा आप क्यों सोचते हैं? अब जैसे म्यूजिक की ही आपने बात की। ठाकुर ने खुद ने कहा है कोई भी व्यक्ति कोई एक कला में पारंगत है और फिर एज एग्जांपल ठाकुर संगीत का उदाहरण देते हैं। यदि कोई संगीत विद्या में पारंगत है तो वह ईजीली ईश्वर के पास पहुंच जाएगा। यानी कि विद्या कोई भी हो इवन चाहे संगीत विद्या हो या तो फिर विज्ञान विद्या हो कोई भी हो यदि आप उसमें एक्सपर्टाइज ग्रहण करते हैं तो क्या है कि आपके भीतर का वो जो मेधा शक्ति है वह ओपन हो जाएगा फिर इस मेधा शक्ति को आपको थोड़ा सा रीडायरेक्ट ही तो करना है ना थोड़ा सा ईश्वर के साथ में ही तो घुमा देना है ना बड़ा इजीली आप बाकी का रास्ता पार कर लेंगे सो मुमुषत्व यानी कि मुक्ति की इच्छा किंतु मुक्ति की कामना सिर्फ ट्रेड ट्रेडिशनल साधनाओं तक लिमिट नहीं है। कोई भी साधना आप कीजिए। इवन क्रिकेट है, इवन चेस है, यह तीरंदाजी जैसे वो नीरज चोपड़ा है। मास्टर एनी ऑफ द स्किल। इवेंचुअली यू विल बी एबल टू यूटिलाइज दिस स्किल फॉर गॉड रियलाइजेशन। ओम