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Sri Ramakrishna's Disciples ·

Swami Akhandananda 24 June 2023 स्मृति कथा : स्वामी अखण्डानन्द लिखित

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क्या हाल है स्वामी अखंडानंद जी स्मृति कथा में से हम थोड़ा सा पाठ कर रहे थे और थोड़ा सा चिंतन कर रहे थे पिछली बार देखा की किस तरह से जैसे तपस्या का एक कभी कभी एक सूक्ष्म अहंकार हो जाता है तो वैसे ही अखंडानंद जी को था अहंकार तो नहीं कहेंगे किंतु इस तरह की एक लाइफस्टाइल के ऊपर में की वो हमेशा भेज ही खाएंगे मुख्य शुद्ध जो है वो सब समय खाता रहेंगे जिसको हार्ड कहते हैं ना वो हार्ड वह मुख्य शुद्ध सब समय खाता रहते थे वह अपने हाथों से पकाया हुआ खाना खाएंगे कोई ब्राह्मण यदि उनको अपने घर पे बुलाएगी की आप हमारे यहां पर आई जल्दी देवता का कोई यदि पूजा है या ऐसा कोई शुभ प्रसंग है तो आप आई सब ब्राह्मण को निमंत्रण दिया है आप भी आहार ग्रहण कीजिए तो अखंडानंद जी यह सब में जाते नहीं थे अपने को एकदम ही एक बाल ब्रह्मचारी के रूप में एक निशीथ शास्त्र जी शास्त्र हमको सीखने हैं की एक पवित्र और निष्ठावान जीवन कैसे जीना इस तरह का पर्यटन अखंडानंद जी कर रहे थे तो ठाकुर को उनके मां की बात समझ में ए गई और उन्होंने कहा की जो कालीबाड़ी में मां काली का प्रसाद है वहां पे मछली भी होगी जाकर के थोड़ा सा ग्रहण कर लो अभी अखंडानंद जी सोच रहे हैं की ठाकुर ने मुझे काली घर में जान को क्यों कहा काली मंदिर में मैं तो विष्णु मंदिर जो है वहां भगवान विष्णु का प्रसाद जो है वो तो वेज प्रसाद तो मिलता है तो वहां पर तो मुझे नहीं जान को कहां वहां जान को का सकते थे उनको पता है की मैं तो जो है मांसाहार नहीं करता हूं तो अभी वो जा रहे हैं और पीछे मुड़कर के देख रहे हैं की ठाकुर खड़े हैं और देख रहे हैं की वो कहां जा रहे हैं काली मंदिर की और ना की विष्णु मंदिर की और तो आखिर में वो काली मंदिर में ही गए महाकाली का ही प्रसाद जो है उन्होंने ग्रहण किया तो इस तरह से ठाकुर हमारे मां के जो सूक्ष्म भाव जो है वो समझ कर हमको किस तरह से मार्गदर्शन करते थे इसका बहुत ही सुंदर उदाहरण देखा हमने पिछली बार अभी इस बार ठाकुर कहते हैं जैसे ठाकुर और भी एक करते थे की जो की समाज उनके जो विचारधारा है समाज मनोलन है जिसका समाज एक टाइप का एक थिंकिंग प्रोसेस से समाज संस्कार है ऐसे लोगों को ठाकुर मिला देते थे तो जैसे की ये त्याग जैसा अखंडानंद जी को देखकर के ही समझ में ए गया की ये इनमें ब्रह्मचर्य का जो प्रकाश है तपस्या और त्याग का जो प्रकाश है वह जल हाल कर रहा है वो पूरा मैन प्रकाश उनकी ये जो त्याग और तपस्या उनमें से निकालकर चारों और बिखर रही है तो ये देख करके ठाकुर ने सोचा की इनको फिर दूसरे त्यागी संतान है उनके साथ में मिला दिया जाए और सबसे पहले तो त्यागी संतानों के जो नेता थे होने वाले थे वह थे नरेंद्र ठाकुर ने नरेंद्र के बड़े में अखंडानंद जी को क्या बताया अखंडानंद जी का नरेंद्र के साथ में सर्वप्रथम जो मुलाकात हुई वो वर्णन अभी यहां पर ए रहा है तो अखंडानंद जी कहते हैं जब वह वहां से काली घर में से प्रसाद ग्रहण करके वापस ए गए तब ठाकुर तब लिखने हैं उसके बाद में क्या हुआ खेल फिर ऐसे अच्छी ठाकुर अमर जानो 80 अपने मिली खाता कोर तार गोरे कुर्बानी के 2014 ग्रहण करके ए करके देखा तो जहां पे वो ठाकुर के जो जी कमरे में ठाकुर रहते थे वहां दरवाजे के पास में हाथ में एक पान लेकर के ठाकुर खड़े हैं और फिर क्या कहते हैं जैसे ही मैं आया ठाकुर ने कहा पान लेकर के खड़े हैं तो ठाकुर ने क्या कहा कावर पैर दूतों एकता खैतो| ठाकुर ने पान देकर के कहा खाओ इसको खाने के बाद में आहार ग्रहण करने के बाद में भजन करने के बाद में एक दो पान खाना चाहिए वरना तो फिर मुंह से गढ़ आई है अच्छा अभी उसे समय तो पान खाने की बात थी आज तो हम लोग ब्रश करते हैं खाने के बाद में और ये जो फ्लॉस होता है वो भी है फिर ये जो माउथ वॉश है वो भी है उसे समय में तो ये जो फिलोस तो हो उनकी माउथ वॉश कहो ना की ये टूथपेस्ट कहो ना की ब्रश कहो ये पान था और वो जो नेम का जो पेड़ आता है उसकी वह डालियन होती थी जिसको हम दातुन कहते हैं गुजराती में कहते हैं अभी वो हिंदी में कहते हैं मुझे पता नहीं बंगाली शब्द क्या है तो वह के पेड़ की एक पतली सी डाली कैट करके उसको अच्छी बातें थे तो नेम का रस जैसे अपने दांतों में जाता है अपने ये जो गम है पेठे उसमें जाता है तब जाकर मैं उसमें वो जो बैक्टीरिया वगैरा जो जमा हो जाते हैं तो नेम के रस में वो इस तरह से वो ये राहत है सैनिटाइजिंग इफेक्ट की वो बैक्टीरिया वगैरा को मार देता है तो इसलिए वो नेम का दातुन चबाते थे और पान खाता थे वो उसे समय का मौत हुआ उसका और आज हम जो है पान बहुत सारे लोग पान खाना है वो एड करते हैं कहते हैं की यह सब बेड हैबिट है पुरानी सब मान्यताएं हैं और इसमें रीजन भी है अभी हमारे यहां ही एक भाई आते हैं वो प्रतिदिन पान खाता हैं पान में बहुत सर तंबाकू डालेंगे अभी तंबाकू दाल करके पान खाने से क्या होता है धीरे-धीरे करके आपकी डाइजेशन सिस्टम जो है उसको वह वीक कर देता है तंबाकू के अलावा आप कुछ डाइजेशन नहीं कर पाएंगे तो अभी आहार किया है भारत खाया है या तो फिर रोटी खाई है या तरकारी खाई है भीतर में जाकर के डाइजेस्ट नहीं होगी तो क्या होगा वो गैस करेगा और फिर वो अपना वो इनडाइजेशन की वजह से जितना भी प्रॉब्लम है हमारा वो फिर वो ओबीसी है फिर हाइपरटेंशन है फिर ये जो ब्लू शुगर है वो सब उसकी वजह से होता है वो चेस्ट में पेन होना शुरू हो जाता है वो वीकनेस जैसा लगे लगता है क्योंकि आहार जो है प्रॉपर्ली डाइजेस्ट नहीं हुआ है तो आजकल की जो की स्टेज है जो लोग बड़े सावधान रहते हैं की ये सब चीजों को बिल्कुल अवॉइड करना है मैं भी उनमें से हूं यहां पे ठाकुरमार स्वामी जी की तिथि पूजा के समय वैसे तो पान जनरली ऑफर करते होंगे किंतु ठाकुर महा स्वामी जी की तिथि पूजा के दिन विशेष रूप से पान दिया जाता है तो उसे दिन 3 दिन मैं कभी वो एक पान शायद का लेट हूं उसके अलावा मैं नहीं खाता और उसमें क्या है की वो चुनाव दाल देते हैं तंबाकू दाल देते हैं हालांकि ठाकुर को तो जो ऑफर करते हैं उसमें तंबाकू नहीं डालते हैं किंतु क्या डाला है किसको पता भी हमको तो जो लोग नियमित खाता हैं पान उनको पता चल जाता है टेस्ट करके ही की इसमें क्या-क्या इनग्रेडिएंट है हमको तो पता नहीं चला इसलिए खाने के बाद पछताने की बजे नहीं खाना ही उचित है तो जो भी है ये उसे समय की बात है ठाकुर भी पान खाता थे और कौन खाता था पान आपको आगे कहता है ऐसा मुझे कहा जब वो अखंडानंद जी आहार ग्रहण करके प्रसाद ग्रहण करके ठाकुर के कमरे की और आए ठाकुर वहां पे वो दरवाजे के पास खड़े हैं पान लेकर के पान दिया और कहां पान खाओ खाने के बाद में आहार करने के बाद में खाना चाहिए पान जिससे की मुंह में से गढ़ नहीं आएगी ऐसा खाने के बाद ठाकुर आगे कहते हैं देख नरेंद्र छोटा पान खाए देखो सुनो नरेंद्र जो है 100 पान खाता है जपी ताई खाए जो उसको मिलता है वही वो का लेट है खाद्य खाद्य का विचार नहीं करता यह तो बढ़ो बढ़ो चौक बेहतर दिखे तन उसकी इतनी बड़ी आंखें हैं किंतु जो उसकी दृष्टि है वो अंतर्मुखी है जैसे की ठाकुर ने वो मास्टर महाशय को कहा था ना कथामृत में है की मुझे इस तरह का छबीला के दो की एक पंछी बेटा है अपने अंडो के ऊपर में और पांडवों को से रहा है अभी वो आंखें खली है ग रहा है की दृष्टि आ वो बाहर में देख रहा है किंतु सही में देखेंगे तो पता चलेगा उसकी नजर जो है वो अंतर्मुख है जहां पे वो अंडे से रहा है तो इस तरह से जो योगी रहते हैं आंखें खली है दिखे रहा है सब कुछ जगत का किंतु जो उनका जो मां है उनका जो ध्यान है उनकी जो एकाग्रता है वो ईश्वर पे होगी कोई उच्च चिंतन में होगी इसीलिए ठाकुर कहते हैं जूते बड़ो बड़ो चौक बेहतर दी केतन भीतर में किंतु जो उनका जो आकर्षण है दृष्टि का उनके जो ध्यान है वो भीतर में टांग यानी की आकर्षण दृष्टि जो है भीतर की और आकर्षित हुई है कोलकाता रास्ता दिए जाए और बड़ी घर दो और घोड़ा गाड़ी शॉप नारायण माही देखें कोलकाता के रास्ते से जब जाता है तो रास्ता है घोड़ा गाड़ी है उधर वो बिल्डिंग है सब कुछ लोग हैं जो रास्ते पर चल रहा है सब कुछ नारायण मैं देखा है तू ही तार का 6 यस शिमेल बड़ी ठाकुर ने कहा तुम उसके पास जाना शिमला में उसका घर है सिमुल्य बोलकर के जो जगह है कोलकाता में वहां स्वामी जी का घर था आज भी वो इंसेस्ट्रेल हाउस जिसको स्वामी जी का कहते हैं वो आज भी है और उसको इतना सुंदर तरीके से सजय हुआ है मैंने जैसे वो स्वामी जी के पिताजी के समय विश्वनाथ डेट के समय जितना होता था इस तरह का चाहे जली तो नहीं कहेंगे किंतु इस तरह से सुंदर रूप से सजय हुआ स्वामी जी का घर आज फिर से हो गया है हम लोगों को हम लोग जब जॉइन करने के लिए बेलूर मठ गए थे तब कोलकाता की टूर पे एक बार हमको लीजिए ले लिया जाता है हमको वो ले जाते हैं कभी-कभी एक बार दो बार साल में तो इस तरह से गए थे तो देखा की अभी पहले ही वो गाड़ी में वो मटका गाड़ी राहत है हम सब ब्रह्मचारी लोग रहते हैं साथ में एक दो सीनरी साधु रहेंगे हमारे आचार्य हमारा तो जैसे ही हम जहां पर जान वाले हैं एक के बाद एक हम हम तो जो ब्रह्मचारी नए आए हैं उन्होंने तो सब कुछ पहले बार देखा है और खासकर के मैं तो कोलकाता का या बंगाल में तो पहले बार गया हूं तो हम लोग तो सब पहले बार देखते हैं तो वो आचार्य महाराज जहां-जहां पर नेक्स्ट डेस्टिनेशन होता है उसके बड़े में का देते हैं की चलो अभी उद्बोधन मारवाड़ी जाएंगे उसकी यह महिमा है अभी गिरीश घोष के घर जाएंगे अभी बलराम मंदिर जाएंगे अभी ये काशीपुर काशीपुर उद्यान है वहां जाएंगे काशीपुर महाश्माशन है वहां जाएंगे ऐसा करके पहले से ही बता देते तो अभी वो स्वामी जी के घर जान वाले हैं तो अभी वो नया नया बना था उसे समय बिल्कुल नया बना था आई थिंक उसका वो जो ये जो हुआ था कौनसी क्रिएशन उसके शायद तीन-चार महीने बाद की ही बात होगी है तो रास्ते में आचार्य महाराज ने का दिया की स्वामी जी के और सिस्टर हाउस आप लोगों ने सभी ने किताब में पढ़ा ही होगा स्वामी जी के जो बायोग्राफी है युग नायक में उसमें पड़ा ही करूंगा तो इस वहां पर हम जा रहे हैं बहुत मेहनत करके यह घर हमको मिला है स्वामी जी को खुद को उसे घर में से निकाल दिया गया था तो अभी इतने सालों के बाद में आखिर में स्वामी जी के पास ये घर आया है तो अभी इसको बहुत अच्छे से रिनोवेट किया गया है हम जाएंगे दर्शन करेंगे तो अच्छा ठीक है रास्ते में वो सुन लिया अभी वो गाड़ी खड़ी की गई और हम लोग ब्रह्मचारी लोग सब उतार करके रास्ते से जा रहे हैं अभी किसी करण वह शायद हमारे आचार्य महाराष्ट्र थोड़े पीछे र गए और मैं सबसे आगे था चलने में तो मैं चला जा रहा हूं चला जा रहा हूं और अभी क्या है कोलकाता में तो बहुत सारे मतलब भाव मकान वगैरा कितना ही कुछ होता है कौन इन सब चीजों के ऊपर में ध्यान देगा हम लोग तो साधु होने को आए हैं हमको तो आश्रम का दर्शन करना है ठाकुर का दर्शन करना है वो वैभव देख कर के हमको क्या लाभ है ऐसा करके मैं सीधा सीधा जा रहा हूं तो सडनली मेरे पीछे वाले ब्रह्मचारी ने बुलाया अरे चलो स्वामी जी का बॉडी तो यहां पीछे में चला गया तुम आगे कहां जा रहे हो मैंने कहा क्या बात कर रहे हो यार वो जो दिखा रहा था वो बिल्ली क्या ये स्वामी जी के वाणी थोड़ी ना हो सकता है उन्हें इतना सुंदर तरीके से उसको बनाया गया है बोला नहीं नहीं रे देखो यहां पे लिखा भी है वो स्वामी जी का स्टैचू है दिखता नहीं तुमको वो मैंने ध्यान से देखा सही बात है स्वामी जी का स्टैचू भी है लिखा भी है स्वामी विवेकानंद और सिस्टर हाउस फिर आचार्य महाराज वहां पे खड़े बोले अरे चलो तुम आगे कहां चले गए अभी वापस आओ यही तो हमको जाना है तो अब मैं तो इतना आश्चर्य चकित हो गया की इतना सुंदर तरीके से हमारे आश्रम के जो ये सब क्या है मोनीमेंट्स हैं उसे समय मुझे थोड़ा सा ऐसा लगा था की इतना पैसा खर्च करने की क्या जरूर है हमारा यदि पैसा हमारे पास में जो धन आता है वो तो गरीब की सेवा के लिए है उसे तरह से मेरे उसे समय बहुत सारे ऐसे विचार थे की जितना भी धन आता है वो गरीबों की सेवा के लिए दो या तो गरीब बच्चों की पढ़ाई लिखी के लिए दो ये सब हमको आश्रम में इस तरह से जो जली खड़ा करके क्या लाभ है किंतु अभी मैं बुध हुआ हूं उसे समय बच्चा था तो कंपेरटिवली गुड हमारे ऑर्डर में 60 होते हैं 60 से पहले ऐसा ही कहा भाई कभी बच्चा है अभी उसको कुछ समझ में नहीं आएगा 60 होता है तो कहते हैं की अच्छा ठीक है अभी थोड़ा बहुत सीनरी हुआ है अभी उसको थोड़ा सा रिस्पांसिबिलिटी दे सकते हैं तो इस दृष्टि से तो मैं अभी यंग ही हूं किंतु जब जॉइन करने को आया था उसकी मैंने कंपेयर्ड तू डेट अभी मेरी उम्र बहुत साड़ी हो गई है तो अभी मुझे ऐसा लगता है की नहीं ये बात सिर्फ ये नहीं है की हम लोग गरीब लोगों की सेवा के लिए सर्वस्व हम जो है अपना व्य करें वो तो एक ही है किंतु साथ में ही ये जो मिडिल क्लास है वो फिर ऐसे लोग जो है जिनके पास धन तो है किंतु मां की शांति नहीं है वे लोग भी यहां पे ठाकुर के पास आकर के कुछ प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे ये दो अलग तरह के मिशन है जिनको की पहले तो अन्ना दाल वो चाहिए और दो दूसरे हैं जिनको की ज्ञान दान चाहिए तो यह दोनों हमारे मिशन है और दोनों इक्वली इंपॉर्टेंट है पहले मैं ऐसा तथा हमारे पास जितना भी पैसा है सब कुछ मैन एक-एक लड़कों को एक गरीब बच्चों को स्पॉन्सर करते जो उसका एजुकेशन का वो निकाल गया तो वो बड़ा होकर के वो अपना एक रिस्पांसिबल सिटिजन होगा अपने पूरे फैमिली को गरीबी में से वो निकलेगा वो कितनी बड़ी बात हुई किंतु बाद में मैंने देखा की देखिए आप किसी भी व्यक्ति के पीछे कितना ही पैसा खर्च करें मैं रांची में था मोराबादी में वहां पे हमारा ट्राईबल डेवलपमेंट का कम चल रहा था तो वहां पे हमको गवर्नमेंट से ग्रांट मिलती थी और वो ग्रांट लेकर के गांव में हम विभिन्न तरह के प्रोजेक्ट जो है वो उसका इंप्लीमेंटेशन करते थे जैसे की वो हाइब्रिड तरह की कोई नल ए गई किसी वो मैन कोई लाइव स्टॉक की तो उसको जैसे मुर्गी है या बकरा है वह लोग तो यह सब खाता हैं तो उनको इस तरह से लाइव स्टॉक किस तरह से मैनेज करना है उनको वैक्सीनेशन कैसे देना है हेल्थ और हाइजीन का कैसे ख्याल रखना है वह सब हम उनको शिखा देते हैं फ्लोरीकल्चर है आजकल की बहुत डिमांड है तो कैसे मूल उगना है शहर में जाकर बेचना है जो की यह डेकोरेशन वाले सब समय वो फूल की खोज में रहते हैं अच्छे बड़े फ्रेश फूल होते हैं क्योंकि इतनी शादी है इतने सारे समारोह है सब जगह पे फूल तो चलते हैं आजकल तो फ्लोरीकल्चर सीखने थे फिर वो जो बी कीपिंग इतना वो जो बॉक्स में बी रखते हैं वो मधुमक्खी तो इतने सारे वो तो वहां पे खेत वगैरा है गार्डन वगैरा है तो मधुमक्खी क्या करती है जैसे लीची का मधु कलेक्ट करती है आम का मधु कलेक्ट करती है अर्जुन का मधु कलेक्ट करती है तो यह सब मर्द जो है हनी वो कलेक्ट करके वो बीच सकते हैं ऐसा करके वह दिव्यांग के भी कहे कृषि विज्ञान केंद्र बहुत साड़ी चीज हम लोग सीखने रहे तो मैं गांव में जाता था यह सब गवर्नमेंट प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट करवाता था वो गांव वालों के पास में ट्रबल लोगों के पास में किंतु उसे समय मैंने मेरी यह जो मान्यता है की हमारे पास में जितना भी पैसा है सब कुछ उनकी एजुकेशन के पीछे उनकी ट्रेनिंग के पीछे खर्च करना चाहिए और भाई मंदिर में जो हो रहा है उसको मिनी कम रखना चाहिए वह स्वामी तोर ठाकुर मुझे डर लगता है की तुम्हारा वही मुझे इस का मुझे सबसे ज्यादा डर लगता है की बाबा जी का अखाड़ा ना हो जाए हम लोग अपनी पुरी जो एनर्जी है पुरी प्राणशक्ति है वो जैसे वो वृंदावन में होता है ना वैसे किसी ईश्वर की निंदा करने का स्वामी जी का है तो नहीं है किंतु वो कहता है की कभी-कभी ऐसा होता है ना की वो आप पूजा कर ही रहे हैं तो वो सब अपने वो इतना जो खर्च किया धन खर्च करके पैसा खर्च करके सब पूजा में लगा दिया और बाहर में लोग भूखे नंगे खड़े हैं भारत की यही तो 1000 साल से स्थिति है जिनके पास पैसा है वो बस जो जली में मैग्ना रहते हैं और जिनके पास कुछ नहीं हो बेचारे मरते जाता है इसी वजह से तो हमारा जो सोसाइटी है वो दो टुकड़ों में बैठ गया और बाहर से जब आक्रमणकारी आए तो उन्होंने क्या किया ये जो गरीब लोग हैं जो की पश्चात लोग हैं पिछले लोग हैं पादरी लोग हैं उनको अपने साथ में कर लिया और बोला की जो हिंदू लोग जो अपार कास्ट लोग जो धनी लोग आपका शोषण करते हैं अब वो हम सब मिलकर के उनको मार दे उनके ऊपर में राज्य कर दे तो बोल कर के ही तो मुट्ठी भर आ आक्रमणकारी इतने बड़े भारत देश पर राज कर पे तो वो फिर से नहीं होने देना है जो गरीब थे उनके पीछे हमारी जो जितनी भी धन संपद वैभव हम खर्च कर सके करना है उनको गरीबी में से निकालना है ऐसा मैं सोचता था किंतु रांची में जाकर के मेरी ये मान्यता में बहुत सर परिवर्तन हुआ देखा की हम कितना ही पैसा दाल दें यदि किसी ने संस्कार नहीं है तो वो पैसा प्रकार के और ज्यादा स्वार्थी हो जाएगा अब मैं यदि किसी को कहूंगा की अरे हमने तो ये तुमको अच्छा सा ट्रेनिंग दिया बी कीपिंग का तो अभी एक कम करो तुम्हारी ये जो आसपास के पड़ोसी है उनको तो थोड़ा सा शिखा दो तुमको तो सब फ्री में मिल रहा है तुम हम साधुओं को देखते हो की हम लोग किस तरह से घर वगैरा त्याग कर करके यहां पे ए करके ठाकुर के लिए ये सब कार्य कर रहा है तो हमारे पास से ये जो थोड़ा सा श्रद्धा भक्ति थोड़ी सी देश प्रेम थोड़ा सा यह सेवा भाव हमसे थोड़ा सा सीखो अपने पड़ोसियों को थोड़ा सा मदद करो किंतु देखा की यदि हम उसको यह जितने प्रोजेक्ट चल रहा है हम उसको यह जो सब ट्रेनिंग दे रहे हैं हम लोग उनको जो सब फ्री रा मटेरियल दे रहे हैं उसके साथ में यदि संस्कार नहीं देंगे तो वो इतना स्वार्थ ही हो जाएगा की फिर ये सोचना शुरू कर देगा की हम लोग जो उसको देते हैं वो उसका तो प्रताप है वो उसका तो उसका राइट है वो प्राप्त करने का यदि हम उसको सतत रा मटेरियल फ्री में नहीं देते रहेंगे 70 ट्रेनिंग नहीं देते रहेंगे उसका जो प्रोड्यूस है जो उसका जो मर्द है या कुछ भी वो बनाता है उसको हम सेल नहीं करेंगे प्रॉफिट के साथ में तो हम जो है पाप कर रहे हैं हम जो उसके साथ में कर रहे हैं इस तरह का एक उल्टा माइंडसेट को डेवलप कर लगा इसीलिए जब हम किसी को कुछ सीखने हैं मदद करते हैं तो साथ-साथ में हमको संस्कार भी देने हैं तो यह स्वामी जी की वाणी की बात कर रहा था स्वामी जी के घर की इतना सुंदर करके सजय हुआ है तो उसका यही एक है की वहां पे सभी लोग इकट्ठा हुए अब उसे संस्कार ग्रहण करें स्वामी जी के प्रति ठाकुर और मां के प्रति श्रद्धा भक्ति ग्रहण करें यदि श्रद्धा भक्ति और संस्कार नहीं रहेगा तो हम कितने ही धनी हो जाएंगे हम लोग रक्षा ही होंगे मैन ये देखिए की रावण के पास में इतना धन वैभव सब कुछ था इतनी शक्ति थी इतनी बड़ी आर्मी थी वो चाहे तो पूरे भारतवर्ष को पूरे विश्व में वह लोगों का कितना कल्याण कर सकता था वो नहीं करके अपनी खुद के भोग के लिए मां सीता का अपहरण कर लिया और पूरे लंका का वह जो राज्य है लंका का शहर है उसको उसने वो अग्नि दाग में डूबा दिया मैंने सीता को हरण करके लाया है मां सीता को तो हनुमान जी बच्चा करके लंका को डा कर दिया अभी वह रावण के साथ में कितने ही वो लंका के ऐसे लोग होंगे जिनका की इस कुकर्म में ये क कार्य में कोई अपना हाथ नहीं था फिर भी इनको भुगतना पड़ा तो ऐसे जो जिनके पास में धन वैभव हो जाता है किंतु संस्कार नहीं आते वो अपने को तो डूबते हैं साथ में हजार लोगों को लेकर के डूबते हैं तो ये जो है संस्कार और संस्कार हमेशा ये जितना भी हमारा सेवा कार्य है उसके साथ-साथ में चलना चाहिए तो वो जो स्वामी जी का जो घर है वो ठीक से सजय हुआ है अभी मुझे लगता है की ऐसा करने की हमको जरूर राम कहिए राजपूत आश्रम में देखेंगे इतने सारे कार्यक्रम के बाद कार्यक्रम चल रहे हैं मंदिर में जब भी जाएंगे देखेंगे की 10-15 भक्ति जो है वो बैठ करके एकदम शांत चित्र से जब ध्यान करते रहते हैं और अभी हम लोग एक मेडिटेशन होल एक सेपरेट करने वाले हैं जहां पर पुराना मंदिर था अभी तो नया मंदिर जब 1978 में बहुत मस्त तंजी ने नए मंदिर की स्थापना मंदिर में पूजा वगैरा उनके वो जब थे उसे पुराने मंदिर में सब होता था तो पुराने मंदिर में अभी तो क्या है की ऑफिस है तो ऑफिस के लिए नया बिल्डिंग बन रहा है और पुराने मंदिर में अभी वो श्री तो वैसे का वैसे सजय हुआ है किंतु वो जो नाती हम जो जहां पे भक्ति लोग जो बैठने हैं नाक के ग्रुप आ नाट्य मंदिर जिसको कहते हैं वहां पे ऑफिस है तो वो ऑफिस को नए बिल्डिंग में ले आएंगे और जैसे ही पहले वो भूतेष आनंद जी के टाइम में था इस तरह से मंदिर को परिष्कृत परिशुद्ध करके उन मेडिटेशन हाल बनाएंगे तो ये सब करने की खूब जरूर है खास करके आज के युग में जबकि गरीबी जो है वो पहले की तरफ भाया हुआ उसे गरीबी नहीं र गई गरीबी का प्रमाण बहुत कम हुआ है नहीं चला गया है ऐसा नहीं है बहुत कम हुआ है किंतु अभी इसी लिए साथ-साथ में अभी जो ये लोग कल्याण के लिए जो कार्य कर रहे हैं साथ-साथ में अभी हमको ये कार्य करने की खूब जरूर है लोगों को संस्कार देने की ज्ञान और भक्ति देने की तो अभी ठाकुर कहते हैं की नरेंद्र के बड़े में देख नरेंद्र देखो नरेंद्र सोपान खाता है जो मिलता है वही का लेट है इतने बड़ी-बड़ी उसकी आंखें हैं किंतु आंखों का आकर्षण आंख सब समय भीतर की और आकर्षित हुई है बेहतर दी केतन कोलकाता के रास्ते से जाता है किंतु यह जो गाड़ी है घोड़ा गाड़ी है मकान है लोग उसके प्रति उसकी जरा सी भी वो दृष्टि नहीं रहती सोमनाथ में देखें सब कुछ नारायण मैं देखा है तू उसके पास में जाना और उसका सॉन्ग करना उसके साथ में मित्रता करना अभी अभी महाराज कहते हैं शैदीन दक्षिणेश्वर रायला महाराज कहते हैं उसे दिन में दक्षिणेश्वर रहा था अभी बाद में ठाकुर और मुख्य एक कोठा सुन अमिताभ और विनय स्वामीजी आदि बड़ी शिमेल किया हाजिर होलम ठाकुर के मुंह से जब नरेंद्र की इतनी प्रशंसा सुन ली तब अखंडानंद जी ने ठीक किया की चलो जाकर के स्वामी जी को मिलते हैं और यहां लिखा है आदिवासी यानी की उनका एन्सेस्ट्राल हाउस जहां पे वो पहले रहते थे फिर वहां से उनको उनके पिताजी का देहांत होने के बाद ये जो डिस्प्यूट हुआ ये जो सब उनके आपस में झगड़ा हुआ भाइयों में उसमें से उनको निकाल दिया गया इसलिए लिखा है आदिवासी स्वामी जी के देख रहा हूं स्वामी जी को देख खाना घोड़े बिछाना ऊपर डॉक्टर राजेंद्र लाल मित्र जो मकान जो है जो घर है उसके बाहर वाले एक कमरे में बैठकर के राजेंद्र लाल मित्रों राजेंद्र लाल मित्र ने लिखा हुआ बोधगया नमक पुस्तक खोल करके पढ़ रहे हैं अभी देखिए स्वामी जी का ये सब कितना था की वो सिर्फ ऐसा नहीं है की धर्म या फिलासफी ही पढ़ने हैं ये जो मतलब हिस्ट्री जो है फ्री अपना जो कलर जो है सब कुछ के ऊपर में उनकी नजर थी इसलिए जब अमेरिका गए थे जब छोटे बच्चे उनको मिलते थे तो बिल्कुल उनके साथ में छोटे बच्चे जैसे हो जाते थे और पूछते थे अच्छा बताओ की तुमने स्कूल में क्या शिखा स्कूल में टीचर किस तरह से सीखने हैं किस तरह की ये जो खेल रमत वगैरा जो आप लोगों के साथ करवाते हैं स्कूल में किस तरह से आपको पढ़ाई भी पढ़ाई लिखी दी जाति है सब चीजों के ऊपर में स्वामी जी की थी की यह जो संस्कृति है कलर है फिर यह जो हमारा दर्शन है फिर ये हमारी पॉलीटिकल सिस्टम है हालांकि स्वामी जी ने पॉलिटिक्स के बड़े में वैसे कुछ बोला नहीं है पॉलिटिक्स को रामकृष्ण संग्रह से बिल्कुल अलग ही रहने का उन्होंने प्रावधान रखा है और ऐसा ही होना चाहिए किंतु पॉलिटिक्स क्या है वो तो स्वामी जी बखूबी समझते थे अच्छे से समझते थे इसीलिए सभी चीजों के ऊपर में स्वामी जी के नजर रहती थी तो अखंडानंद जी ने जाकर के देखा की बुद्ध गया नाम की पुस्तक खोल करके बैठ करके पढ़ रहे हैं वही खानी प्राय वेबस्टर अभिधाने वेबस्टर की जो डिक्शनरी है वो इतनी बड़ी होती है इतनी बड़ी यह बोधगया पुस्तक थी अभी लोगों को आश्चर्य होता है की लोग जब भी लोग ऐसी बड़ी-बड़ी पुस्तक पढ़ने हैं ना तो दूसरे लोग ऐसा सोचना शुरू कर देते हैं की या कोई परीक्षा की तैयारी कर रहा है या तो फिर मतलब इसीलिए वो कर रहा होगा वैसे अपने इंटरेस्ट के लिए कोई करता है ऐसा कोई सोचेगा भी नहीं मैं एक बार मेरे एक रिलेटिव है तो उनको एक बार हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा था तो मैं स्कूल में पढ़ना था तो मुझे बोला गया जाकर के तुम उनके पास में रहना दिन में दो-तीन घंटा हम हम सभी लोग हमारे रिलेटिव थे बोल करके हम सभी लोग बारी-बारी वो उनके साथ में हॉस्पिटल में रहते थे तो मेरा वो दो-तीन घंटे का वो मुझे दिया गया था डेली कितना टाइम तुमको रहना है तो मैं वो जो जवाहरलाल नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया उसे समय पद रहा था स्कूल में था तो वो पढ़ना था तो बोल करके वो मैं किताब अपने पास में राखी थी तो अभी एक दिन क्या हुआ की वो जो डॉक्टर जैसे राउंड पे आते हैं ना तो आए और मैं वह किताब पढ़ रखा हो तो वो आए तो मैंने किताब रख करके मैंने फिर उनके साथ में बात करना शुरू कर दिया की किस तरह से है उनका उन्हें रिकवरी क्या है ऐसा वगैरा बात कर रहा था तो अभी बात करते-करते डॉक्टर ने देखा की वो इतनी मोती किताब पड़ी हुई है टेबल के ऊपर में तो मुझे पूछते हैं की क्या तुम इस की तैयारी कर रहे हो मैंने कहा नहीं मैंने ऐसा क्यों पूछ लिया आपने अभी तो मैं स्कूल में हूं बोला ना इतनी बड़ी किताब पढ़ रहे हो इसलिए मैं पूछ रहा हूं अब ये देखिए लोगों का यही एक मन सेट राहत है या तो परीक्षा की तैयारी कर रहे हो या तो अपने पार्टी के पुस्तक के बोल कर के ऐसी मोटी-मोटी पुस्तक पढ़ोगे अपने इंटरेस्ट के लिए कुछ नया जन के लिए अपना जो विषय वास्तु है उससे बाहर निकाल कर के ये जो विस्तृत जगत है उसके बड़े में जन की ये जो अपने भीतर में कुंता उत्कंठा होती है एक मोक्ष को होता है वो बहुत कम लोग समझते हैं और यदि समझते भी होंगे ना तो आजकल खास करके ऐसा है की व्हाट्सएप है ना की ये युटुब के वीडियो है छोटे-छोटे पांच मिनट के ऐसा सब देख लो उसमें से जो कुछ मिलता है उसको ग्रहण कर लो उसको आंख बैंड करके स्वीकार कर लो एक्चुअली क्या है की यदि कोई भी विषय के बड़े में सही सही जानकारी आपको प्राप्त करनी है किसी भी सही सही दीप में आपको यदि नॉलेज चाहिए तो उसे विषय वास्तु में आपको बहुत ही दीप में जाना होगा बड़ी-बड़ी किताबें पढ़नी होगी एडरवाइज क्या होगा व्हाट्सएप फॉरवर्ड पढ़कर के या फेसबुक पे वो जो पोस्ट है वगैरा पढ़कर के या छोटे-छोटे वीडियो देखकर के प्रेज्यूडिश माइंडसेट बन जाता है वो एक पर्टिकुलर पॉइंट ऑफ व्यू से कहीं हुई बात को हम ब्रह्मा सत्य मां लेते हैं फिर इसी के अनुसार हम सब कुछ ठीक करते हैं की हां यही सही यही गलत है इसलिए विद्या जो है उसमें सही-सही सीखनी है तो बड़ी-बड़ी किताब पढ़ने की आवश्यकता है हालांकि सबके लिए नहीं है जिसको इंटरेस्ट है उन्हें लोगों के लिए क्या बात हुई आगे वो अभी हम सोमवार को देखेंगे मंडे को देखेंगे कल तो छुट्टी है कल संडे है तो अभी मिलेंगे सोमवार को हरि ओम तत्सत श्री राम श्री श्याम