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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Macrocosm 24 Nov 2023

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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कल के कल मैं एकटी के साथ बात कर रहा था एक बड़ा ही सुंदर कहानी उन्होंने मुझे बताया एक गुजरात में एक लेडी थी एक एक बहन जी तो उनका क्या था कि पता नहीं जीवन में इतने कष्ट मिले होंगे ना उन्होंने एक बार डिसाइड किया कि अभी मैं आत्महत्या करती हूं तो उन्होंने एक कमरे में अपना अपने को बंद कर दिया दरवाजा खिड़की सब बंद कर दिया आत्महत्या करने के लिए या तो फिर वह फांसी के फंदे पर व ऐसा कुछ करेगी या तो जहर खाने का ऐसा कुछ करने के लिए उन्होंने सब खिड़की दरवाज बंद कर दिया फिर अभी व कुछ करने ही वाली थी देखा कि एक छोटी सी चिड़िया उस रूम में कैद हो गई है उनके साथ में खिड़की दरवाजे बंद कर दिए तो चिड़िया रास्ता खोजने के लिए खुली जगह मिले तो कमरे में से निकलने के लिए चारों ओर वह अपनी चोंच मार रही है जैसे वह चिड़िया करती है व बंद हो जाने से रास्ता खोजने के लिए तो जिस ओर जाती है खिड़की की ओर तो खिड़की बंधन दिखती है दरवाजे की ओर जाती है तो दरवाजा बंद दिखता है जहां पर भी जाएगी वो उसको रास्ता बंद दिखेगा तो वह क्या करेगी बेचारी तो वह इतनी परेशान हो गई चिड़िया कि इस औरत ने सोचा कि अरे मेरा तो मैं तो मरने ही वाली हूं मैं तो सुसाइड करने ही वाली हूं किंतु इस चिड़िया को बेचारी को इतना कष्ट हो रहा है चलो मैं उसके लिए कुछ कर दूं तो खिड़की एक उसने क्या किया चिड़िया को जाने के लिए खिड़की खोल दी तो किंतु देखो कि साथ-साथ में ही उसके मन में यह विचार आया कि यह चिड़िया की जिजी विशा अर्थात की जिंदा रहने की एक इच्छा इतनी स्ट्रांग है छोटी सी चिड़िया है फिर भी वह अपने जीवन को बचाने के लिए किस तरह से रास्ता खोजती है और मैं हूं कि मेरे तो मेरे में तो इतना अकल है मैंने स्टडी किया है मैंने तो थोड़ा बहुत शायद फिलोसोफी भी पढ़ा होगा उन्होंने तो मैं छोटी-छोटी बातों में निराश होकर के यदि आत्महत्या करूंगी तो कैसे चलेगा तो ऐसा एक जो विचार आया उनको इससे वो धीरे-धीरे करके उनके मन में यह आत्महत्या का विचार एक तो कम हो रहा है फिर दूसरा जैसे ही खिड़की खोला देखा कि बगल वाले घर में एक बूढ़ी महिला बैठी थी तो अभी वह बूढ़ी है तो खड़ा होना कुछ काम भी नहीं कर पा रही थी तो उन्होंने जैसे ही देखा वह खिड़की खुली है और वह महिला उसके भीतर में है तो उने बूढ़ी अम्मा ने उनको बुलाया कि अरे आकर के थोड़ा सा मुझे हेल्प करो तो तो देखिए पहले तो उसने देखा कि चिड़िया किस तरह से रास्ता खोजने के लिए इतना जोर से प्रयत्न कर रही है फिर उन्होंने देखा कि नहीं अ यह जो अम्मा है बूढ़ी उनको भी तो हेल्प चाहिए तो वहां पर जाकर के उनको हेल्प करने की शुरुआत की और उसी में उस औरत का जीवन परिवर्तित हो गया और फिर आत्महत्या करने की बजाय वह अलग-अलग संस्थानों में जाकर के वो किसी सेवाभावी संस्थानों में जाकर के वह गरीब लोगों के लिए काम किया तो वो कहानी मैंने सुना तो मुझे बहुत अच्छा लगा मैंने कहा मैं आज शेयर करता हूं आपके साथ एक छोटी सी चिड़िया वह चिड़िया अपना जान बचाने के लिए इतना मेहनत करती है और हम लोग है कि कभी-कभी छोटे मोटे दुख और कष्ट से इतने परेशान हो जाते हैं कि अरे अभी मैं क्या करूं मेरे साथ क्या होगा हालांकि हमारे पास में सब उपाय है चिड़िया को तो ठाकुर मा स्वामी जी या तो कोई भी धार्मिक पुस्तक उसके पास में तो नहीं है यह हायर फिलोसोफी भी उसके पास में नहीं है किंतु भीतर से यह जीवन धारण करने की एक अच्छा जीवन जीने की उसकी जो चाह है वह कितनी स्ट्रांग रहती है तो फिर हम लोग क्यों निराश हो जाए किसी भी चीज में ठाकुर ने हमको तो इंटेलिजेंस दिया है कि हम इस इंटेलिजेंस का यूज करके अपना लाइफ को बेटर कर सके अच्छा अभी मैं थोड़ा सा आगे पढ़ता हूं हमने देखा अभी तक किस तर से स्वामी जी कॉस्मो मैक्रो कजम ये जो प्रवचन उन्होंने दिया न्यूयॉर्क में उसमें वो बताते हैं उनका जो काकड़ी घाट का जो विजन है उस विजन को लक्ष्य में रख कर के उस विजन के बेस पर उन्होंने जो सीखा जो समझा वो बात वो हमको बताते हैं कि ईश्वर जो ईश्वर सृष्टि के प्रारंभ में ईश्वर से ही यह बीज बना सृष्टि का और उसी बीज में से जिस बीज में भगवान का ब्लूप्रिंट या डीएनए है उनकी दिव्य चैतन्य शक्ति जिस बीज में समाहित है वही दिव्य चैतन्य वही ईश्वरीय शक्ति कॉस्मिक इंटेलिजेंस धीरे-धीरे अनफोल्ड होकर के धीरे-धीरे इवॉल्व होकर के आज के युग में भगवान राम भगवान राम कृष्ण के रूप में वो हमारे सामने प्रकट हो रहे हैं यह पूरा साइकल सृष्टि का साइकल स्वामी जी ने हमारे सामने रखा और साथ में ही यह भी कहा कि एक समय आएगा कि भगवान राम कृष्ण की जो दिव्यता है वह एक दूसरे एक वैश्विक बीज में समाहित हो जाएगी और इसी बीज में से दूसरे ब्रह्मांड का प्रारंभ होगा तो यह डिवी निटी या तो दिव्यता या तो फिर कॉस्मिक इंटेलिजेंस यह बीज स्वरूप में अपने को समाहित करता है फिर उसी बीज स्वरूप में से अपने को इवोल्व करता है यह इवोल्यूशन ऑफ कॉस्मिक इंटेलीज एंड इवोल्यूशन ऑफ कॉस्मिक इंटेलिजेंस कॉस्मिक इंटेलिजेंस का दिव्य चैतन्य का दिव्य सत्ता का एक बीज के रूप में समाहित होना एक बीज के रूप में अपने को कंसंट्रेट करना और इसी बीज में से यह संपूर्ण विश्व ब्रह्मांड जो हमको दिख रहा है उसमें इसका प्रवेश होना यह है सृष्टि स्थिति प्रलय की साइकल और अभी हमको प्रश्न होगा कि आज के जो साइंटिस्ट है उन्होंने यह दो बेसिक फंडामेंटल साइंस है जिसके आधार पर हमको समझाया है कि एक्चुअल फिजिक्स या तो फिर एक्चुअल कॉस्मोलॉजी किस तरह से काम करता है तो एक है रिलेटिविटी दूसरा है क्वांटम डायनेमिक्स तो यह दोनों थिरी को कंबाइन करके एक साइंटिस्ट लोगों का आज के साइंटिस्ट लोगों का जो विचार है एक बिग बैंग हुआ एक बहुत बड़ा विस्फोट उस विस्फोट में से यह एनर्जी और मैटर दोनों प्रकट हुए और जैसे आइंस्टाइन कहता है कि एनर्जी और मैटर दोनों एक दूसरे में कन्वर्टिबल है तो सबसे पहले तो प्रचंड एनर्जी प्रकट हुई फिर यही एनर्जी कूल होते-होते ठंडी होते-होते मैटर में परिणत हुई और यह मैटर जो है वह धीरे-धीरे करके यह क्वार्क्स या तो फिर स्ट्रिंग्स जो कि मोस्ट फंडामेंटल रियलिटी जो आज जिसको बताया जाता है वह धीरे-धीरे करके अ इले ॉन न्यूट्रॉन और प्रोटॉन में परिणत हुए फिर यही इलेक्ट्रॉन न्यूट्रॉन प्रोटॉन कंबाइन होकर के एटम बने यही एटम फिर हायर एलिमेंट्स के रूप में डेवलप हुए जैसे कि हीलियम जैसे कि गोल्ड जैसे कि निकल जैसे कि आयरन या तो फिर प्लूटोनियम या तो यूरेनियम या तो ऑक्सीजन यह हायर लेवल एलिमेंट्स जिसमें एक से ज्यादा प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन है और यही हायर एलिमेंट लार्जर एलिमेंट्स जिनको कहा जाता है यही लार्जर एलिमेंट्स कंबाइन होकर के केमिकल्स में डेवलप हुए जिस तरह से h2o इसको केमिकल कहा जाता है h2 यानी कि यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तो सिर्फ एटम्स ही है किंतु दो बड़े एटम्स कंबाइन होते हैं तो केमिकल होता है तो h2 अर्थात की पानी तो केमिकल में डेवलप हुए फिर ये इन ऑर्गेनिक केमिकल में से ऑर्गेनिक केमिकल बने और ऑर्गेनिक केमिकल्स में से धीरे-धीरे करके कॉन्शसनेस का उदय हुआ कॉन्शसनेस का प्रगट हुआ तो यह पूरा चक्र जो हमको आज के मॉडर्न फिजिसिस्ट बता रहे हैं उसी के साथ में स्वामी जी की थिरी मैच हो जा रही है या तो फिर देखिए कि यह मॉडर्न रिलेटिविटी और क्वांटम डायनेमिक्स तो स्वामी जी के समय में नहीं थे किंतु फिर भी स्वामी जी जिस तरह से 19th सेंचुरी के के साइंस को समझे थे और 19th सेंचुरी के साइंस के सामने उन्होंने काकड़ी घाट वाला अपना जो विजन है उसको मैच करने का जो प्रयत्न किया था इट इज ट्रू इवन टुडे आज भी हम देखेंगे कि वोह इतना ही सत्य लगता है इतना ही हमको सही लगता है जितना उस समय 19th सेंचुरी के लोगों को लगता होगा और इसके साथ में हमने यह भी प्रश्न किया कि क्या स्वामी जी हमको वेदांत को शुगर कोट करने के लिए फिजिक्स के साथ मिला रहे हैं ना कि ही सही में एक यूनिवर्सल कॉन्शसनेस एक यूनिवर्सल इंटेलिजेंस या तो यूनिवर्सल डिविली है जिसको कि स्वामी जी ईश्वर या तो भगवान की उपमा देते हैं गॉड करके पु करते हैं वह सही में है और वही ईश्वर या तो वही भगवान इवॉल्व और इवॉल्व होते हैं यह प्रश्न हमको हो सकता है क्योंकि हमेशा हमने देखा है कि जितनी बार हमने धर्म और विज्ञान या तो रेशनल को कंबाइन करने का प्रयत्न किया उतनी बार बहुत बड़े डिजास्टर हमारे सामने हुए हैं तो इस डिजास्टर से भी किस तरह से बचा जाए कि धार्मिक अंधश्रद्धा विज्ञान की प्रगति को ना उसको रूंध दे विज्ञान की प्रगति को वह रोक ना दे एक चीज और दूसरा की साइंटिफिक रेशनल है साइंटिफिक एंपिरियो में प्रवेश करें साइंटिस्ट लोग कहते हैं कि किसी भी चीज को अपने को स्वीकार करने की जरूरत नहीं आपकी लेबोरेटरी में एक्सपेरिमेंट कीजिए उसको आपकी नजर के सामने प्रूव होता देखिए फिर उस चीज को एक्सेप्ट करें तो धर्म में यदि हम ऐसा करने को प्रयत्न करें कि हां ये कॉस्मिक इंटेलिजेंस है या एक आत्मन है हां एक ब्रह्मण है हां ये सत्व जैसा एक गुण है जो कि तमस और रजस से पर है और सत्व से भी पर एक त्रिगुणा त अवस्था है एक सुपरकॉन्शियस स्टेट है यह सब यदि हम योगशास्त्र में वेदांत में पढ़ते हैं यह स्थित प्रज्ञ के लक्षण सब पड़ते हैं इस तरह की एक धार्मिक एक उच्चतर आध्यात्मिक अवस्था कि जिसको प्राप्त करके हमारे जन्म जन्मांतर के कर्म जन्म जन्मांतर के दुर्गुण सब एक साथ में वोह विनाश हो जाएंगे विलीन हो जाएंगे इस तरह की अवस्था के बारे में भगवान बुद्ध को देखिए कि रात्रि के एक के बाद एक चार प्रहर उनकी जिस जैसे-जैसे वह आध्यात्मिक ऊंचाई पर बढ़ते गए वैसे-वैसे ही वो मारा आकर के उनको डर दिखाने लगा पहले तो प्रलोभन दिखाया फिर डर दिखाया किसी चीज से भगवान बुद्ध विचलित नहीं हुए और आखिरी प्रहर में निर्वाण में उन्होंने प्रवेश किया निर्वाण प्राप्ति की तो यह सब हम जब पढ़ते हैं किताबों में तो हमको लगता है कि यह सही होगा कि गलत होगा एक चीज हमारे मन में होती है कभी-कभी और आजकल तो कैसा होता है कि ओके चलो हमको अपने संसार में मने धर्मों को किस हद से अपने अपने जीवन में से निकाल दिया है कि इसकी निंदा करने की भी या तो फिर इसके अगेंस्ट में लॉजिक देने की भी किसी को कोई जरूरत नहीं लगती वो सब इसको वर्बल स्वीकार कर लो यदि शांति से रहना है यदि इसकी कोई भी पॉइंट के बारे में आपने कोई आवाज उठाई या तो फिर कहा कि अरे यह कैसे ठीक हो सकता है या तो फिर यह तो मेरी रेशनल अंडरस्टैंडिंग के अनुसार लॉजिकल नहीं लग रहा है ऐसा कुछ भी बोलने का शुरुआत किया तो कुछ चार पांच लोग चिल्लाना शुरू करेंगे अरे धर्म पर हमला हो रहा है तो ऐसा नहीं करके चुपचाप जो भी बोलते हैं सब स्वीकार कर लो सतु माने मान लेना और कन्विंसेस कर लिया किंतु कन्विसिटी है मेरा फैमिली का जो जो भी प्रोस्पेरिटी है उसमें बढ़ावा मिले इसलिए उस पार्टिकुलर मंदिर में जाकर के थोड़ा बहुत कुछ ऑफि कर दो तो ऐसा कुछ भगवान को लाच दे देने से भगवान को इस तरह से कुछ खुश रखने से वह हमारे परिवार पर कृपा करते रहेंगे तो मने भगवान को हमने अपने जीवन से कितना दूर निकाल दिया है कि इसके बारे में रेशनल थिंकिंग करने का भी कोई समय नहीं रहता या तो एक्सेप्ट कर लो चुपचाप एक्सेप्ट कर लो बिना किसी कंविद हैंड थोड़ा बहुत मंदिर में जाकर के वो पैसे वगैरह कुछ प्रणामी वगैरह देते रहो यानी कि भगवान भी खुश रहे वो ठाकुर कहते हैं ना कि यदि शब् साधना करते हैं तो शब के ऊपर में बैठे हैं और जप कर रहे हैं आधी रात को स्मशान में बीच-बीच में वो जो डेड बॉडी है वो एकदम खड़ा हो जाएगा तो क्या करना है थोड़ा सा वह मुड़ी ममर साथ में रखना है कुछ खाना और जब सब मुंह खोलता है डेड बॉडी तो उसके मुंह में डाल देना है तो वह शांत रहता है तो ऐसा व यह सब चीजों को थोड़ा बहुत प्रणामी वगैरह देकर के शांत रखो जिससे कि अपना सांसारिक जीवन भी अच्छे से बीतता रहे ये एक एक क्या कहेंगे कि एक अनरियलिटी जैसा लगता है यह सब हायर थिंकिंग जब हम करते हैं तो इसीलिए स्वामी जी क्या हमको साइंस के साथ में मिलाकर के हम इसको बेटर एक्सेप्ट करें इसलिए यह सब कर रहे हैं कि नहीं वह भी हमने देखा और जैसे मेरा पर्सनल मानना है कि जिस तरह से आप लेबोरेटरी में एक्सपेरिमेंट करते हैं स्टेप बाय स्टेप और यदि अमेरिका की लेबोरेटरी में जो एक्सपेरिमेंट करके जो रिजल्ट मिला वही इंडिया की लेबोरेटरी में एक हिंदू या एक मुस्लिम ना कि एक क्रिश्चन ना कि एक बौद्ध जो भी वह एक्सपेरिमेंट करेगा उसको सेम रिजल्ट मिलने वाला है दिस इज द प्रॉमिस ऑफ योगा तो इस हद इस अर्थ से इस दृष्टि से देखा जाए तो वेदांत इज एज मच अ साइंस एज फिजिक्स इज एज क्वांटम डायनेमिक्स इज और एज रिलेटिविटी इज जिस तरह से क्वांटम डायनेमिक्स रिलेटिविटी केमिस्ट्री यह एक साइंस है उतना ही साइंस योग और वेदांत है यहां तक हमने कल देखा था इससे थोड़ा सा यदि आगे जाए स्वामी जी क्या कहते हैं इफ आई ट्राई टू एक्सप्रेस ऑल दिस बाय ओनली टेलिंग यू दैट गॉड क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर तो इस बात का आपके मन पर कोई असर नहीं होता देखिए जो हमारा जो डाउट है कि स्वामी जी क्यों साइंस को यूज करते हैं कि क्या लोगों के मन में और ज्यादा गहराई से वेदांत को प्रवेश करवाने के लिए ना कि क्या यट आफ्टर ऑल द स्ट्रगल वी हैव कम बैक टू हिम द एंट एंड सुप्रीम वन स्वामी जी कहते हैं कि इतना लंबा लॉजिकल थिंकिंग करने के बाद में रेशनल आर्गुमेंट करने के के बाद में आखिर में तो किंतु हम वही पुरातन परम पुरुष के ऊपर में वापस आ गए जिनको कि सर्वश्रेष्ठ सुप्रीम गॉड अर्थात की ईश्वर जगत नियंत्र ईश्वर कहा जाता है वी नाउ सी दैट ऑल द वेरियस फॉर्म्स ऑफ कॉस्मिक एनर्जी सच एज मैटर थॉट फोर्स इंटेलिजेंस एंड सो फोर्थ आर सिंपली द मेनिफेस्टेशंस ऑफ ट कॉस्मिक इंटेलिजेंस हम देखते हैं कि यह वैश्विक शक्ति या तो वैश्विक क्रिया का जो मेनिफेस्टेशन है जो प्रकटीकरण है जिसको कि हम बुद्धि के रूप में या तो फिर दया और करुणा के रूप में विचारों के रूप में या तो फिर यह कॉस्मिक विचार एनर्जी बुद्धि और दया और करुणा इसके रूप में जो हम देख रहे हैं इट इज नथिंग बट द मेनिफेस्टेशन ऑफ दैट कॉस्मिक इंटेलिजेंस ये वैश्विक दिव्यता है उसी का एक परिणाम है उसी की एक परिणति है मेनिफेस्टेशन और एज वी शैल कॉल इट हेंस फोर्थ द सुप्रीम लॉर्ड इसको हम आज अभी से एक वैश्विक ईश्वर या तो फिर ईश्वर या तो अभी सुप्रीम लॉर्ड का क्या करेंगे गॉड कहो ना कि सुप्रीम लॉर्ड कहो वेदांत की दृष्टि से एक ईश्वर शब्द है तो हम इसी को ईश्वर ही ट्रांसलेट करेंगे हम इसको ईश्वर के नाम से पुकारेंगे इट इज ही हु इ शाइनिंग ज द सन एंड द स्टार्स वही ईश्वर सूर्य और चंद्र के रूप में प्रकाशित हो रहे हैं देखिए पूरा पोएटिक पैसेज है बहुत सुंदर पोएटिक पैसेज है ही इज द मदर अर्थ यह मातृभूमि अपनी पृथ्वी वही ईश्वर ही है ही इज दी ओशन हिमसेल्फ समुद्र भी वही ईश्वर है ही कम्स एज जेंटल सावर्स ही इज द जेंटल एयर दैट वी ब्रीद इन यह बारिश होती है सुहानी जो हम हमारे मन और शरीर को ठंडक पहुंचाती है पृथ्वी को ठंडक पहुंचाती है वोह बारिश भी वही ईश्वर ही है और यह हवा जो हमको पोषण देती है हमारा जीवन धारण करती है यह हवा भी ईश्वर ही है एंड ही इट इज हु इज वर्किंग एस फोर्स इन द बॉडी शरीर के भीतर में प्राण का जो कार्य कर रहा है वह प्राण भी यही ईश्वर ही है ही इज द स्पीच दैट इज अटर शब्द जो हमारे मुंह से जो प्रकट होते हैं वह शब्द भी वही ईश्वर ही है ही इज द मैन इ टॉकिंग जो मनुष्य जो बात कर रहा है उसकी वाणी वह वाणी भी यही ईश्वर ही है ही इज द ऑडियंस ट इज हियर देखिए यहां पर स्वामी जी एक्चुअली अपने ही बात कर रहे हैं जो बात कर रहे हैं स्वामी जी वह भी ईश्वर है जो सामने श्रोता बैठे हैं जिनकी जो स्वामी जी की बातों को सुन रहे हैं वह श्रोता भी ईश्वर ही है ही इज द प्लेटफॉर्म न व्हिच आई स्टैंड यह प्लेटफार्म जिसके ऊपर मैं खड़ा हूं वह प्लेटफार्म भी ईश्वर है ही इज द लाइट दैट इनेबल्स मी टू सी योर फेसेस उस समय जद यह कैंडल लाइट ना कि ये गैस लाइट जैसा कुछ होता उस होल में वह लाइट भी वही ईश्वर ही है जिसकी मदद से स्वामी जी श्रोताओं का चेहरा देख सकते हैं और आज के कांटेक्ट में कहा जाए कि ये इंटरनेट ये कंप्यूटर भी वही है जिनकी मदद से हम ग मीट पर एक दूसरे को देख पा रहे हैं इट इज ऑल ही सब कुछ ईश्वर ही हुए हैं ही हिमसेल्फ इज बोथ द मटेरियल एंड द एफिशिएंट कॉज ऑफ दिस यूनिवर्स देखिए यह एक थोड़ा सा बड़ा ही स्टेटमेंट है मटेरियल एंड एफिशिएंट कोस इसका क्या अर्थ है सबसे पहले तो यह जो पैसेज स्वामी जी ने जो पोएटिक पैसेज लिखा कहा वो हम लोग इमेजिन करके देख सोच सकते हैं कि हमको पढ़ कर के ही इतना रोमांच होता है स्वामी जी के इस पैसेज को तो स्वामी जी जब यह बात कहते होंगे उस समय जो उनके सामने जो श्रोता बैठे बैठे होते उनको किस तरह का एक अनुभूति होता होगा मुझे तो लगता है कि स्वामी जी जैसे एक सिद्ध गुरु जब कहता है ना कि तत्वम असी यह महामंत्र देकर देने से ही वो शिष्य है उसके मन में अद्वैत भाव का स्फुरण होता होगा वैसे ही स्वामी जी यह तो प्योर अद्वैत है ना सब कुछ ईश्वर है सब कुछ ईश्वर मय है जो श्रोता है वह भी ईश्वर है जो वक्ता है वह भी ईश्वर है प्लेटफॉर्म जिसके ऊपर में से स्वामी जी बात कर रहे हैं वह भी ईश्वर है यह प्रकाश जो सब कुछ प्रकाशित करता है श्रोता और वक्ता का चेहरा वो भी ईश्वर है यह तो प्योर अ हो गया तो जब यह अद्वैत यह महामंत्र जब स्वामी जी इनको सुनाते होंगे तब कितने श्रोताओं को वह अद्वैत की अनुभूति होती होगी किसको पता यह जो फर्स्ट जनवरी को ठाकुर कहते हैं तो मादर चैतन्य होक ऐसा करके सबको स्पर्श करते हैं कल्पतरु दीन को तो वह एक बहुत बड़ी घटना हो गई है अपने ऑर्डर में और मैं कल किसी के साथ बात कर रहा था तो मेरा खुद का जो एक जहां तक मैंने देखा है रामकृष्ण संघ के दो सबसे बड़े फेस्टिवल है जहां पर सबसे ज्यादा भक्त उपस्थित होते हैं भक्तों का आगमन होता है एक है कुमारी पूजा और दूसरा है यह कल्पतरु दीन का उत्सव काशीपुर में कुमारी पूजा बेलूर मठ में और काशीपुर का कल्पतरु उत्सव मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा भक्तों का समागम यह दो उत्सव में होता होगा तो देखिए कि यह कुमारी पूजा तो अपनी ट्रेडिशनल पूजा हजारों सालों से की जा रही है और इसी को स्वामी जी ने पुनर्जीवित किया है तो उसके लिए भक्त इकट्ठा हो वो तो कोई बड़ी बात नहीं है किंतु यह कल्पतरु उत्सव जो कि देखिए कि किस तरह से ठाकुर ने लोगों को स्पर्श किया और चैतन्य प्राप्त किया वो वो हजारों साल पुरानी जो पूजा है उसी के समकक्ष भक्तों के मन में रहे हम लोग चाहे कुछ भी माने ना माने किंतु इतने लोग इतने भक्त जो वहां पर उपस्थित होते हैं उनके मन में यह बात हो कि ना यह सर्वश्रेष्ठ उत्सव है लाखों लाखों लोग वहां पर इकट्ठा हो तो सोचिए कि उस घटना का कितना बड़ा महत्व है तो ठाकुर ने लोगों को चैतन्य दिया ऐसा करके स्वामी जी जब इस तरह की बातें करते होंगे प्योर अद्वैत वेदांत के बारे में तो उनके सामने जो श्रोता बैठे हैं उनके मन पर क्या असर होती होगी वो आज हम मोर देन 100 इयर्स यह सब 18 95 94 96 उन सब सब दिनों की बात है आज मोर देन 100 इयर्स 100 साल से भी ज्यादा सवा साल के आसपास इस बात को हो गए हैं इतने दिनों के बाद में हमको तो सिर्फ अनुमान ही करना रहा कि स्वामी जी के क्लास में जब स्वामी जी बोलना शुरू करते होंगे प्योर अद्वैत प जब आ जाते होंगे तब किस तरह से क्लास का पूरा वातावरण चेंज होता जाता होगा जैसे हवा में करंट फैल गया है एक प्रचंड उल्लास एक हर्ष उत् फूलता हमारे हृदय में प्रकट हो रही है हमारा मन जैसे कि जन्म जन्मांतर के कर्म से मुक्त होकर के कर्म के बंधन को तोड़ता हुआ एक के बाद एक स्टेप चढ़ते चढ़ते कॉशसनेस के कितने उच्च शिखर पर विराजित होता होगा वह तो हम अनुमान करके ही कह सकते हैं स्वामी जी के इस प्रवचनों से कितने लोगों का जीवन ट्रांसफॉर्म होता होगा मने हुआ होगा क्योंकि यह तो प्योर अद्वैत वेदांत के महामंत्र ही स्वामी जी सबको सुना रहे हैं उस समय महामंत्र को फॉर्मुले करने का एक तरीका था उपनिषद में आज के युग में स्वामी जी ने महामंत्र को इस तरह से फॉर्मुले किया है आज की भाषा में जो कि आज हम सहजता से समझ सके तो फिर से मैं पढ़ता हूं कितना सुंदर एक चार पांच लाइन है स्वामी जी की किंतु किसी भी उपनिषद के महामंत्र से कम नहीं है इट इज ही हु इज शाइनिंग एज द सन एंड द स्टार्स सूर्य और तारों के रूप में जो प्रकाशित हो रहा वह वही ईश्वर है ही इज द मदर अर्थ अपनी मातृभूमि पृथ्वी है यह मदर अर्थ है वही ईश्वर ही है ही इज द ओशन हिमसेल्फ यह विराट अनंत समुंदर है वह भी ईश्वर है ही कम्स एस जेंटल सावर्स ही इज द जेंटल एयर ट वी ब्रीद इन यह बारिश जो हमारे मन को ठंडा करती है पृथ्वी को डक पहुंचाती है यह हवा जो हमको जीवन देती है यह हवा और यह बारिश यह भी ईश्वर ही है एंड ही इट इज हु इज वर्किंग एस फोर्स इन द बॉडी हमारे शरीर में जो प्राण कार्यरत है वह प्राण भी यही ईश्वर ही है ही इज द स्पीच दैट इज अटर हमारे मुंह से जो वाणी का प्रवाह चलता है वह वाणी भी यह ईश्वर है ही इज द मैन हु इज टॉकिंग यहां पर स्वामी जी फिर उस क्लास के कांटेक्ट में बोलते हैं ही इज द मैन हु इज टॉकिंग जो वक्ता बात प्रवचन दे रहा है वह वक्ता भी ईश्वर है ही इज द ऑडियंस दैट इज हियर यह श्रोता लोग यह श्रोत गण जो वक्ता को सुन रहे हैं वोह श्रोता भी वह वही ईश्वर है ही इज द प्लेटफॉर्म ऑन व्हिच आई टड यह प्लेटफार्म जिसके ऊपर में मैं खड़ा हूं वह प्लेटफार्म भी वह ईश्वर है ही इज द लाइट दैट इनेबल्स मी टू सी योर फेसेस यह प्रकाश जिसकी मदद से मैं आपके चेहरे को निहाल रहा हूं चेहरों का मैं दर्शन कर पा रहा हूं वह प्रकाश भी वही ईश्वर है इट इज ऑल ही यह सब कुछ ईश्वर मय है ही हिमसेल्फ इज बोथ द मटेरियल एंड एफिशिएंट कॉज ऑफ दिस यूनिवर्स एंड ही इट इज ट गेट्स इवॉल्व इन द माइनोट सेल एंड इवॉल्व एट द अदर एंड एंड बिकम गॉड अगेन यह विश्व का परिणाम ईश्वर है यह विश्वर ही एक बीज के रूप में अपने को समाहित करता है इवॉल्व करता है और इसी बीज में से इवोल्व होकर के पूरा विश्व ब्रह्मांड फिर से प्रकट होता है यहां पे एक पॉइंट जो हमको टेक्निकल डिस्कशन करना है एफिशिएंट एंड मटेरियल कोज यह थोड़ा सा हमको देखना पड़ेगा कि मटेरियल कॉज अर्थात कि क्या हुआ कि जैसे कि दूध में से दही बनता है अभी दूध और दही दोनों पदार्थ अलग है किंतु दूध की परिणति दही में होती है वह एक है और दूसरा है कि मान लीजिए कि कुंभार जो है अ पोट मेकर जो है पोटर जो है वह मिट्टी से एक खड़ा बनाता है तो यह दोनों मटेरियल एंड एफिशिएंट दो तरह के कोज होते हैं मटेरियल कोज यानी कि एक पदार्थ को लेकर के उसको आपने दूसरे पदार्थ में परिणत किया और एफिशिएंट कोज यानी कि एक पदार्थ का स्वरूप आपने चेंज किया स्वरूप को उसको आपने एक नव स्वरूप दिया तो ये द्वैत विशिष्ट अद्वैत और अद्वैत इसके रिलेटेड जो कोई भी फाइट हमारे भीतर में चल रही है वो इसी को लेकर के है सिर्फ मान लीजिए पूरा आपने पढ़ लिया वेदांत शास्त्र फिर एक चीज पर आप अटक गए हैं कि यह मिट्टी में से घड़ा बनता है वह है ना कि दूध में से दही बनता है वह है दूध और दही कंप्लीट डिफरेंट है गुजराती में केवत है कि दूध नो दाज लो दही पण फूकी ने पीवे अर्थात कि जिसने दूध गर्म दूध पिया है वो जिसको गर्म लगा है वो दही भी उसको फूक लगा उसको ठंडा करके पीने का प्रयत्न करेगा हालांकि दही कभी गर्म नहीं होता और दूध गर्म हो सकता है दोनों में बहुत बड़ा डिफरेंस है बहुत बड़ा उनमें केमिकल और मटेरियल दोनों में बड़ा डिफरेंस आ जाता है तो वो उसका मटेरियल कोज है यहां पे किंतु वही मिट्टी से घड़ा बनता है और घड़े को तोड़ दो तो वही मिट्टी में परिणत हो जाएगा किंतु दही को आप फिर से दूध नहीं बना सकने वाले है दही में से मक्खन होगा शायद किंतु दूध नहीं होने वाला है तो ये जो है कि ईश्वर सृष्टि में किस तरह से परिणत हुआ जैसे शंकराचार्य कहते हैं कि आप अंधेरे रास्ते पर जा रहे हैं रस्सी पड़ी है रास्ते में व आपको डर लग गया कि अरे ये तो सर्प है किंतु फिर प्रकाश डाल कर के देखा कि नहीं ये तो सर्प नहीं है ये तो रस्सी ही है मुझे भ्रम हुआ ये सर्प है तो विश्व ब्रह्मांड क्या इस तरह से है कि ब्रह्मण ही है मैं मेरा अज्ञान वसत मुझे पता नहीं है कि ब्रह्मण है तो मैं इसको ये किताब है ना कि ये टेबल है ना कि ये कंप्यूटर है ना कि ये मैं हूं ये मेरा वस्त्र है इस तरह के मैं देखता हूं किंतु जैसे ही ज्ञान हो जाएगा पता चलेगा किताब भी वही ब्रह्मण है यह मेरा वस्त्र भी वही ब्राह्मण है मेरे चश्मे भी वही ब्रह्मण है टेबल भी वही ब्रह्मण है सब कुछ आप में सब कुछ ब्रह्म मय ही है मुझे ज्ञान होने से वो पता चलेगा या तो फिर के दूध में से दही बनने की तरह कि जैसे कि क्रिश्चियनिटी में है कि द गॉड मेड द वर्ल्ड गॉड मेड मैन इन हिज ओन इमेज ईश्वर का भगवान का खुद का जो स्वरूप है उस स्वरूप में भगवान ने मनुष्य को बनाया किंतु मनुष्य को तोड़ देंगे तो उस भगवान में कभी वापस नहीं जाने वाला है मनुष्य के भीतर में ईश्वरीय गुणधर्म प्रकाशित होंगे ईश्वरीय गुण शायद प्रकाशित हो सकता है किंतु मनुष्य कभी ईश्वर स्वयं नहीं हो पाएगा ईश्वर के आशीर्वाद प्राप्त करेगा जैसे पिता और पुत्र पिता की धन संपत्ति ऐश्वर्य का भागीदार हिस्सा पुत्र के हाथ में आएगा पुत्र ऐसा हो सकता है कि अपने पिता के साथ पिता से भी शायद कभी ज्यादा धनवान हो जाए किंतु पुत्र कभी पिता नहीं हो सकता किंतु मिट्टी का घड़ा जो है मिट्टी के घड़े को तोड़ देंगे तो वही मिट्टी में वापस चला जाएगा यह सर्प और रज्जू यह सर्प का जो भ्रम है वह जब चला जाएगा तो वही व रस्सी के भीतर में और वही रस्सी फिर से बन जाएगा तो मैंने यह बात को लेकर के जो भी डिफरेंस है सो है बहुत सारे लोग इस चीज को लेकर के बड़ी ही बड़ा ही रिस सच करते हैं बड़ा ही थिंकिंग करते हैं बड़ा ही स्टडी करते हैं किंतु पर्सनली मुझे नहीं लगता कि इस सब चीजों में इतना जाने की जरूरत है भगवान यह दूध में से दही हुए ना कि मिट्टी में से घड़ा हुए इस सब चीजों से हमको क्या करना है हमको तो जो स्वामी जी ने महामंत्र बताया ठाकुर महा स्वामी जी ने जो साधन का पथ बताया उस साधन के पथ पर चलते चलते ईश्वर का जो स्वय स्वरूप है उसको हमको साक्षात्कार ही तो करना है अननेसेसरी हम फिलोसॉफिकल डिबेट में क्यों जाए तो जो भी है ये एक मेरा पर्सनल ओपिनियन है तो साधना मेरी दृष्टि से ज्यादा इंपॉर्टेंट है रदर देन फिलोसोफी और फिलोसोफी वही पढ़ना है जो कि ठाकुर महा स्वामी जी ने समझाई है क्योंकि मुझे लगता है कि अपने शास्त्र में इतना सब कुछ कहा गया है कि कभी-कभी हम प्योर शास्त्र पढ़ने को जाते हैं तो हमारा मन थोड़ा सा विचलित हो जाता है थोड़ा सा कंफ्यूज हो जाता है बेटर है ठाकुर मा स्वामी जी को पढ़ कर के अपने सब आइडियाज अपने सब डाउट्स क्लियर कर दे फिर वो क्लियर माइंड लेकर शास्त्र को पढ़ना शुरू करें तो हम वही ग्रहण करेंगे जो कि मेरे ग्रहण करने योग्य है एलिजिबिलिटी है तो मैं सब कुछ तो ग्रहण नहीं कर पाऊंगा सब कुछ समझ ही नहीं पाऊंगा तो मेरी जो कैपेसिटी है उसके अनुसार मुझे जो समझना है जो ग्रहण करना है वह शास्त्र में से फिर मैं इजली ग्रहण कर पाऊंगा यदि मेरा माइंड यह ठाकुर महा स्वामी जी के आइडियाज विचार और उनके उपदेश को पढ़ कर के क्लियर हो गया है तब तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु