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Swami Vivekananda Great Summer ·

भव्य ग्रीष्म: रिजली मैनर में स्वामी विवेकानन्द 9 sep 2024

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ओ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार षय कृष्णा यते रिजली मैनर में स्वामी विवेकानंद इस टॉपिक पर हम मेरी लुई बोलक के सिस्टर गार्गी जिसने कि सन्यास लिया था बाद में स्वामी अशोकानंद जी के पास में कैलिफोर्निया में उसकी लिखी हुई किताब स्वामी विवेकानंद इन द वेस्ट न्यू डिस्कवरीज का फिफ्थ वॉल्यूम इसमें यह चैप्टर है द ग्रेट समर तो उसका पाठ कर रहे हैं उसमें से कुछ इंसिडेंट हम लोग देख रहे हैं स्वामी जी के जीवन में किसी एक जगह पर सुकून से ठहरने का समय कम ही आया है तो जो कुछ चुनिंदा वह किस्से हैं जो चुनिंदा समय है कुछ हम उंगली पर गिन सकते हैं उस कुछ दिनों में यह एक रिचली मेनर वाला पीरियड भी शामिल है उसके अलावा यदि स्वामी जी के जीवन में देखेंगे तो थाउजेंड आइलैंड पार्क जहां पर स्वामी जी ने इंस्पायर्ड टॉक स्वामी जी जो बोल रहे थे स्वामी जी की जो वार्ता स्वामी जी का जो वार्तालाप था तो वह उनकी डिसाइल उनके जो डिसाइल उन्होंने लिपिबद्ध किया जो कि आज हमारे पास में इंस्पायर्ड टॉक नामक किताब में हमारे हमारे पास में उपलब्ध है बंगोली नाम है देववाणी बड़ी ही सुंदर किताब तो उस दिनों का जो महत्व था थाउ आइलैंड पार्क वाला इतना ही इंपॉर्टेंस इस ग्रेट समर का भी है थाउ आइलैंड पार्क बड़ा ही फेमस है अपने डिसा अपने डिवटी में क्योंकि उसके बारे में बड़ी ही सुंदर एक किताब है इंस्पायर्ड टॉक जबकि यह रिचली मैनर वाला पीरियड द ग्रेट समर ये एक बहुत बड़ी किताब का एक चैप्टर है और यह तो फिफ्थ वॉल्यूम है टोटल छह वॉल्यूम में इसलिए इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं तो जो भी है हमने देखा कि स्वामी जी किस तरह से लिटल कॉटेज नामक एक कुटिया में एक बड़ा ही सुंदर एक मकान था वहां पर रह रहे हैं रिजली में और फिर सुबह उनकी पूरी दिनचर्या देखी सुबह को मॉर्निंग वॉक के लिए जाते हैं उसके बाद में व भोजन के बारे में देखा श्याम के बारे में देखा कि किस तरह से एक के बाद एक स्वामी जी बातें करते जाते हैं प्रसंग और कहानियां कहते ही जाते हैं और उनके डिसाइल उनके मित्र उनके अनुयाई मंत्र मुग्ध होकर के उनको सुनते ही जाते हैं तो यह सब हमने देखा अभी थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं मेरी लई क्या लिखती है अमंग स्वामी जी ऑक्यूपेशंस एट रिचली वास परस्यूट ऑफ द आर्ट ऑफ ड्राइंग च ही अंडर टूक विथ ल द रने एंड कंसंट्रेशन ऑफ एन एस्पायरिंग यंग स्टूडेंट टोलिंग ओवर हिज क्रेन एज हिज टीचर रोट विथ एज सिंगल माइंड एंड हार्ट एज इफ ट वेर हिज वोकेशन स्वामी जी ने रिजली मैनर में जो कुछ करना चाहा था कुछ कुछ हमने देखा कि जैसे कि वह गोल्फ खेलते हैं जैसे कि वह क्रोकेड इंग सीखता हूं पेंटिंग सीखता हूं और यह मोड टूम वहां पर थी वो भी आर्टिस्ट स्वामी जी की अनुयाई थी तो स्वामी जी ने उनको कहा कि आप मुझे पेंटिंग सिखाइए ड्राइंग सिखाइए और स्वामी जी अभी ऐसा नहीं कि एक्चुअली स्वामी जी सीखना क्यों चाहते थे यह सब क्योंकि एक सिंपल थिरी है एक सिंपल साइकोलॉजी है कि जब आपके ऊपर में बहुत सारा स्ट्रेस हो आपके आप बहुत सारी चिंता में हो तो आप ऐसा कुछ कार्य करें अपने हाथों से जो कि आपके मन को वो जो आपके भीतर की जो चिंता है उससे मुक्त करके किसी और चीज में लगाए यह जो लोग एडिक्शन जो होता लोग ये करते हैं ना शराब पीते हैं ना कि स्मोकिंग करते हैं ना कि फिर दुष्चिंता कोई ऐसा एक दुर्घटना घट गई ऐसा कुछ हो गया कि जिसको वो भुला ही नहीं पा रहे हैं बार-बार व अपने मन में वो घूमता ही रहता है वही यादें वही बातें तो उससे मुक्त होने के लिए लोग एडिक्शन पसंद करते हैं जब तक वो एडिक्शन होगा या तो कोई ड्रग्स होगी ना कि यह शराब होगा ना कि यह स्मोकिंग होगा जब तक व लोग करते रहेंगे तब तक अपने वोह गम है उसको वो भूलते रहेंगे तो अपने गम को भुलाने के लिए लोग एडिक्शन में जाते हैं किंतु देर इज अ बेटर वे एडिक्शन तो आपके शरीर और मन दोनों को तोड़ देगा देर इज अ बेटर वे और वो बेटर वे क्या है अपने हाथों से कुछ कार्य करें जैसे कि कार्पेंट्री है जैसे कि यह गार्डनिंग है मैं जब जब मैंने जवाइन किया था बेलूरमठ में मैंने जवाइन किया था उस समय मेरा पोस्टिंग हुआ था एक सेंटर में अभी वहां पे अभी जैसे आप जॉइन करते हैं तो क्या होता है कि पता है ना बहुत सारी चीजें होती है जो जिसके साथ में आपको एडजस्ट करना पड़ता है बाहर का जीवन और यहां का जीवन उसमें आसमान जमीन का अंतर है तफावत है यहां पर आपको सतत एक डिसिप्लिन में रहना है यहां पे आपको सतत एक रूटीन को फॉलो करना है यहां पे बहुत सारे नीति नियमों को मान कर के चलना है तो शुरू शुरू में यह सब थोड़ा सा डिफिकल्ट रहता है तो मैंने जब बेलूर मठ में जवाइन किया था जिन सीनियर स्वामी जी हमारे इंचार्ज थे तो उन्होंने कहा था तुमको कुछ भी तकलीफ हो तो मुझे लेटर लिखना मैं तुम तुम्हारे से बात करूंगा जो कंसल्टेशन होता है जो सीनियर साधु जूनियर साधु को जो समझाते हैं तो मैंने एक बार उनको लेटर लिखा था कि महाराज मैं थोड़ा सा मन से थोड़ा सा चंचल हो रहा हूं पता नहीं यहां पर मेरा रहना शक्य हो पाएगा कि नहीं मुमकिन तो उन्होंने सामने में मुझे लेटर लिखा मुझे कहा कि देखो तुम एक काम करो तुम गार्डनिंग करो और अपने हाथों से गार्डनिंग करना जैसे कि मिट्टी की मिट्टी को ये करना है रेशन बोलते हैं ना वो खुरपी होती है खुरपी लेकर के मिट्टी में आप बार-बार इसको मिट्टी को ऊपर नीचे करते हैं जिससे कि क्या होता है मिट्टी के भीतर में नाइट्रोजन ऑक्सीजन वगैरह ब जाती है तो पेड़ों के जड़ को उसको मजबूती मिलती है तो वह उस रपे से काम करो पौधों को पानी दो ये मने तुम गार्डन में काम करो तुम गार्डन में एक घंटा काम करोगे देखना कि तुम्हारा मन एकदम स्वस्थ हो जाएगा तो मैंने उस सलाह का सही सही वो पालन किया वैसे तो मेरा ड्यूटी मंदिर में था मंदिर में चंदन घिसना है ठाकुर के जो भोग के जो बर्तन होते हैं उनको धोना है झाड़ू पोछा लगाना है गर्भगृह में वगैरह मेरा चंदन घिसना है वो फ्लावर वास सजाने है गर्भ ग्रह का जो भी कार्य है वो कार्य में करता था किंतु जैसे ही वह कार्य समाप्त हो जाएगा वैसे ही मैं गार्डन में जाऊंगा गार्डन में अपने हाथों से पौधों को लगाऊंगा पौधों की मावजा करूंगा उनकी रख ये करूंगा उनकी केयर करूंगा पानी डालूंगा तो मैंने देखा कि ये जो आप फिजिकली कोई भी कार्य एक घंटा दो घंटा करते हैं आपकी जो चिंताएं हैं आपके मन की जो चंचलता है आपके मन के जो सब यह जो चल रहा है द्वंद उसको आप कहां पर भूल जाएंगे और फिजिकल वर्क करने के दो बेनिफिट है एक तो आपका फिटनेस भी इंप्रूव होता है मने एक मेंटली तो आप फ्री हो ही जाते हैं मेंटल आपको रिलैक्सेशन मिलता है मेंटली सुकून मिलता है और फिजिकल फिटनेस भी मिलती है तो ये फिजिकल वर्क करने के बहुत सारे बेनिफिट है स्वामी जी जब भारत में थे इंडिया में जब बेलूरमठ में रह रहे थे उनकी तबीयत बार-बार बिगड़ती जाती थी तो डॉक्टर ने क्या सलाह दी थी आप एक काम कीजिए नौका में सवार होकर के गंगा में भ्रमण कीजिए तो ये गंगा का ये जो जेंटल वेव्स जो होते हैं ना पानी की जो तरंगे सुमधुर तरंग है और नौका जैसे हल्के से हिलती डुल है और एकदम सुंदर वातावरण है खुशनुमा आकाश है और हवा बह रही है फ्रेश एक आपको अनुभव होता है ये जो आउटडोर एक्सपीरियंस है और जो थोड़ा सा फिजिकल एक्सर्शन आपको लगता है उसकी वजह से आप अपने रोग को कहां पर भूल जाएंगे और सही में स्वामी जी प्रतिदिन इवनिंग को इस तरह से नौका भ्रमण में जाते थे और एक बार तो निवेदिता भी उनके साथ में गई थी और फिर वो दक्षिणेश्वर वगैरह दर्शन भी करवाया था निवेदिता को और निवेदिता ने स्वामी जी का इस तरह से गंगा पर नौका में भ्रमण करते-करते इंटरव्यू भी लिया था तो यह बड़ी ही सुंदर यादें हैं जब अल्मोड़ा में थे स्वामी जी तो घोड़े पर सवार होकर के भ्रमण के लिए जाते थे अभी घोड़े पर सवार होना यानी कि बड़ा ही एजर्स लगता है हमको लगता है कि अरे आप तो ऐसे उसकी उसी के ऊपर में बैठ कर के जा रहे हैं किंतु घोड़ा जिस तरह से चलता है पूरे शरीर को उससे वो म आज मिल जाता है तो यहां पर भी स्वामी जी ने सोचा कि मैं अपने हाथों से कुछ कार्य करता हूं जिससे कि मेरा मन इस कार्य में लगे और जो बेलूरमठ की चिंता है अभी बात ऐसी नहीं है कि बेलूरमठ में कोई प्रॉब्लम है बात यह है कि स्वामी जी की एक्सपेक्टेशन बहुत ज्यादा है कि ठाकुर आए तो ठाकुर को अभी पूरे वर्ल्ड में ठाकुर का मैसेज फैला देना है भारत में जो गरीबी है जो अराजकता है जो अव्यवस्था है माने किस तरह से लोग रहते हैं स्वामी जी ने तो अपनी नजरों से देखा है तो भारत की पॉपुलेशन है 30 करोड़ और यह स्वामी जी के पास में सब साधु मिला कर के शायद 30 भी नहीं होंगे तो इतना छोटा सा बेलूरमठ है कि किस तरह से पूरे 30 करोड़ लोगों को वह अपनी सेवाएं दे पाए मैंने वो स्वामी जी का वो एकदम वर्ल्ड स्केल प ही सोचते थे वो छोटे मोटे स्केल पर सोचते ही नहीं थे तो यह जो उनकी ये इच्छा थी कि ब मट जितना हो सके रामकृष्ण संघ जितना हो सके विश्व के सभी कोने में फैल जाए सब तरह के नेचुरल डिजास्टर जहां पर पोव है जहां पे लोगों का शोषण हो रहा है वहां जाकर के लोगों को सहायता करें ये एक्सपेक्टेशन इतना स्पीडली इतना जल्दी से फुलफिल नहीं हो रहा था यही स्वामी जी को थोड़ा सा यह था और वो भी था कि स्वामी जी को पता चल गया था कि अभी मेरा अंतिम समय आ चुका है तो मेरे जाने के बाद में का क्या होगा वो अपने गुरु भाइयों को एक इस तरह से तैयार करके जाना चाहते थे कि उनके जाने के बाद में वे लोग हतोत्साहित था कि जो नरेण यह सब कर रहा है वो सब ठीक है कि नहीं यह सब लंबा चलेगा कि भी नहीं या तो फिर नर नहीं होगा तो यह कार्य का क्या होगा यह भी एक संशय कुछ भक्तों के मन में भी था कोलकात्ता के कुछ भक्त है अमेरिका के कुछ डिवोटा है वे लोग भी सोचते थे कि स्वामी जी के वजह से तो हम लोग यहां पे आए हैं अभी स्वामी जी चले जाएंगे तो फिर क्या यह लोग रामकृष्ण मिशन के साथ में एसोसिएटेड होकर के रह पाएंगे यह जो पश्चिम में जो वेदांत सोसाइटी की जो स्थापना हुई है उसके साथ में वे लोग रह पाएंगे कि भी नहीं अभी जैसे देखिए कि प्रथम बार अमेरिका में कार्य समाप्त करके स्वामी जी भारत लौटे दूसरी बार आ कर के देखा तो आधा कार्य खत्म हो चुका था आधे लोग बिखर गए थे लंडन में भी वही चीज हुआ स्वामी जी ने इतना प्रवचन दिया लंडन में दो बार फर्स्ट विजिट के दौरान अभी सेकंड विजिट में आए तो कोई भी नहीं बचा है वहां पे ट स्टडी मिस मलर यही लोग उनका विरोध करना शुरू कर दिए थे अमेरिका में सेम चीज ये स्वामी अभयानंद ये स्वामी कृपानंद लियोन लैंडसबर्ग ये लोग भी स्वामी जी का विरोध कर रहे थे तो अभी इस विरोध स्वामी जी के जाने से ही कुछ ही दिनों में ऐसा हो गया तो स्वामी जी की जब महासमाधि होगी तो कार्य का क्या होगा यह जो भविष्य की चिंता है वो स्वामी जी को सता रही थी और इसके लिए उन्होंने सोचा कि थोड़ा सा डायवर्जन चाहिए तो डायवर्जन इस तरह से ड्राइंग के लेसन में इस तरह से चित्र दोर करके उन्होंने पाया मड स्टम को कहा मुझे सिखाओ और वह लिखती है कि स्वामी जी जैसे कि एक स्कूल का बच्चा होता है ना जैसे स्कूल का बच्चा जबी हम बड़े हो जाते हैं बड़े होकर के भी हम बहुत सारे क्लासेस करते हैं जैसे यहां पर कंप्यूटर क्लासेस चल रहे हैं राम यहां प आश्रम में ही चल रहा है किंतु जो लड़के ते हैं यहां पे वो सब बेसिकली कॉलेज के स्टूडेंट होते हैं या तो फिर यह पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट होते हैं कि थोड़ा बहुत आज किसी ने बीए का कोर्स किया है किसी ने बीकॉम किया है तो जहां प भी जाएंगे आपको तो कंप्यूटर चाहिए ही चाहिए थोड़ा सा तो वे लोग आ कर के यहां पे थोड़ा सा कंप्यूटर सीखते हैं किंतु ये जो बड़े लोग जो पुरुष लोग यहां पे सीखने के लिए आएंगे उनका क्या एक रिलैक्स एटीट्यूड रहेगा किसी भी चीज को सीरियसली नहीं रहेंगे लेंगे क्यों क्योंकि उन्होंने जगत देख लिया है किसी को बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट नहीं देंगे किसी भी चीज को इतना सीरियसली या इतना डिसिप्लिन मैनर में नहीं लेंगे किंतु जो एक छोटा बच्चा स्कूल में पढ़ता है उसको जद उसके टीचर कहते हैं कि अच्छा तुमको यह असाइनमेंट करना है या तो फिर तुमको यहां पर बैठ कर के ड्राइंग करना है तो छोटा बच्चा ऐसा निर्दोष नादान और सहज सरल होता है कि अपने टीचर की जो बात है प्राय वो संपूर्ण रूप से ग्रहण करेगा डिसिप्लिन में रहेगा बड़ा ही सिंसियर पूरा जी जान लगा कर के वह अपना कार्य करेगा तो ये सिंसियर छोटे बच्चों में होती है स्कूल के स्टूडेंट में होती है कॉलेज के बाद में वो सिंसटीवी एटीट्यूड कि हां यह लोग हमको बता तो रहे हैं कि तुम यह करो तुम वो करो तुम इस तरह से नियमों का पालन करो किंतु टीचर लोग खुद तो कुछ उनलोगों का चरित्र का कोई ठीक नहीं है हमको क्या सिखाने वाले ऐसा एक नेगेटिव एटीट्यूड हो जाता है तो यहां पर इन स्पाइट ऑफ स्वामी जी उम्र में इतने बड़े थे 30 प्लस उनकी एज थी उस समय 35 प्लस के आसपास तो ये लिखते हैं जो रेमसंस लिखने वाले कि स्वामी जी एकदम एक छोटे स्टूडेंट बच्चे की तरह नादान और इनोसेंटली आकर के बड़ा ही जैसे कि एक सिंसियर पेंटिंग या ड्राइंग सीखना उन्होंने शुरू किया अभी यह मोड स्टम है वह पूरा लिखती है मोड स्टम के बारे में हमने पहले भी देखा कि स्वामी जी जब अमेरिका आए थे तो सर्वप्रथम उनको जहाज पर रिसीव करने वाली थी यह मोड टूम वही थी स्वामी जी की पेंटिंग की टीचर वह क्या लिखती है वन डे स्वामी जी टोल्ड मी दैट ही वांटेड टू अ अंडरटेक सम सॉर्ट ऑफ वर्क दैट वुड कीप हिज हैंड्स बिजी एंड प्रिवेंट हिम फ्रॉम थिंकिंग ऑफ थिंग्स ट फेटर्ड हिम एट दैट टाइम एक दिन स्वामी जी ने मुझे कहा कि वह अपने हाथों को बिजी रखना चाहते हैं जिससे कि जो चिंताएं उनको सता रही है उस चिंताओं से उस अल्प समय तक वो मुक्त हो पाए एंड वुड आई गिव हिम ड्राइंग लेसंस तो क्या मैं उनको ड्राइंग लेसंस दूंगी क्या उनको ड्राइंग सिखाऊंगा मटेरियल वेर प्रोड्यूस्ड एंड एट एन अपॉइंटेड ववर ही केम प्रोमलीन टू मी विथ अ क्यूरियस लिटल एयर ऑफ सबमिशन अ ह्यूज रेड एप्पल व्च ही लेड इन माय हैंड्स बोविंग ग्रेवली जैसे ही वो क्लास का समय आया ड्रॉइंग क्लास प्रारंभ होने वाला था स्वामी जी बिल्कुल एक सीरियस एक सिंसियर स्टूडेंट की तरह वहां पर उपस्थित हुए ऐसा नहीं कि वह मेरी डिसाइल है और मैं उनका गुरु हूं जहा जब तक यह ड्राइंग लेसन चलेगा तब गुरु डिसाइल है और डिसाइल गुरु है जिस चीज का आप लेसन ले रहे हैं जिससे ले रहे हैं उस समय पर्यंत वह तो आपका गुरु है तो गुरु के रूप में नहीं एक सिंसियर स्टूडेंट के रूप में वहां पर उपस्थित हुए एक बड़ा सा लाल सेब एप्पल लेकर के उन्होंने मोड स्टोम के हाथों में दिया आई आस्क हिम द सिग्निफिकेंट एंड ही सेड इन टोकन दैट द लेसन मे बी फ्रूटफुल एंड सच पपल एस ही प्र टू मैंने पूछा कि मोटम कहती है कि मैंने पूछा स्वामी जी को यह जो आपने सेब दी मुझे ये एप्पल दिया उसका सिग्निफिकेंट क्या है उसका तात्पर्य क्या है तो स्वामी जी ने कहा इस आशा में यह एप्पल दिया कि जिस तरह से जिस आशा से हमारे लेसंस फ्रूटफुल हो हमारे लेसंस या तो हमारे क्लास फल प्रसुमा हो इस आशा में मैंने ये सेब आपको दिया है देखिए यहां पर तो स्वामी जी ने इस तरह से कहा कि इस मने एक शब्दों का एक रमत करके ट अवर लेसंस मे बी फ्रूटफुल और ऐसा करके फ्रूट उनके हाथ में दिया य यहां प तो स्वामी जी शब्दों की रमत कर रहे हैं किंतु भारतीय परंपरा में हमको पता है कि जब भी आप गुरु के पास में जाएंगे शिक्षा प्राप्त करने के लिए तो समित पाणी ही अर्थात की पाणी अर्थात हाथ और समित अर्थात की यज्ञ या तो यज्ञ में व्यव हृत होने वाली लकड़ियां तो वो कुछ गिफ्ट लेकर के गुरु के पास में जाएंगे गुरु के चरणों में वह गिफ्ट ऑफर करेंगे और फिर विनती करेंगे कि आप हमको सिखाइए यह तो यह भारतीय परंपरा है तो एक और यहां पर स्वामी जी शब्दों की रमत कर रहा है मने वो राइमिंग कर रहे हैं वर्लिंग का और दूसरी और वो भारतीय परंपरा भी फॉलो कर रहे हैं भले ही चाहे मोषम के गुरु है किंतु एज लो ए दिस टीचिंग लेसन कंसर्न मोर स्टम इज हिस टीचर तो व टीचर के हाथ में यह सेब देकर के उन्होंने अपने लेसंस का प्रारंभ किया वंस ओनली डिड आई हैव टू टेल हिम एनीथिंग हिज मेमोरी एंड कंसंट्रेशन वेर मार्वेल अस एंड हिस ड्राइंग स्ट्रेंजली परफेक्ट एंड इंटेलिजेंट फॉर ए बिगिनिंग बिगनर मुझे अब मोम कहती है कि मुझे स्वामी जी को कोई भी चीज एक ही बार बतानी होती थी इस तरह से ड्राइंग कीजिए इस तरह से शेडिंग दीजिए इस तरह से आपको पेंसिल या पेन यूज करना है इस तरह से पेपर यूज करना है इस तरह से आपको पर्सपेक्टिव बनाना है ना इस तरह से प्रोपोर्शन मेंटेन करने हैं यह सब मैं अनुमान करके कह रहा हूं कि यह सब चीजें ड्राइंग के लेसन में आएगी क्योंकि हम भी स्कूल में यह सब सीखे हैं तो मोड टू कहती है कि मुझे सिर्फ एक ही बार स्वामी जी को कोई भी चीज बतानी थी स्वामी जी का कंसंट्रेशन एंड लर्निंग एबिलिटी उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता ऐसी अद्भुत थी कि एक बार सुन कर के ही वह उसको आत्मसात कर लेते थे और फिर जो वो ड्राइंग करते थे जो पेंटिंग करते थे वोह नौ सखिए के लिए एक अद्भुत रूप से वो आश्चर्यजनक रूप से वो सुंदर होते थे इंटेलिजेंट यानी कि बड़े ही वो मने जो चीज दौड़ रहे हैं उसको एकदम वफादार रूप से हो करके वो चीज को दोर रहे थे मने स्ट्रेंजली इंटेलिजेंट फॉर ए बिगनर कोई एक नो सिख्या होता है तो उसको अब जैसे कि आप उसको कुछ भी दौड़ने को दीजिए कि चलो यहां पे एक पेड़ है पेड़ को दौड़ो तो ड्राइंग करते अभी नो सिख्या है तो ड्राइंग तो क्या करेगा वो कुछ उल्टा पुल्टा कुछ करके देगा क्योंकि उसको तो अभी आता नहीं है धीरे-धीरे करके प्रैक्टिस करके तो वो परफेक्ट होगा किंतु फॉर ए बिगनर स्वामी जी के ड्रॉइंग इतने सुंदर थे कि वो आश्चर्य चकित हो गई अभी यहां पे ये भी एक बात है कि क्या स्वामी जी सर्वप्रथम बार पेंटिंग कर रहे थे ना कि उन्होंने स्कूल में भी कभी सीखा था क्योंकि मुझे तो याद है कि हमको स्कूल में ड्राइंग के लेसंस मिले थे तो हो सकता है कि स्वामी जी ने स्कूल में कहीं पर सीखा भी हो जो भी है किंतु और यहां पर यह भी हो सकता है कि पहली ही बार कर रहे हैं यह भी हो सकता है कि उने स्कूल में सीखा हो तो जो भी है जब यह फॉर ए बिगनर भले ही चाहे स्कूल में सीखा होगा जैसे मैं भी स्कूल में सीखा हूं किंतु आज मैं कुछ ड्राइंग करने को जाऊंगा तो वह चित्र विचित्र ही कुछ दिखाई देगा क्योंकि सालों से मैंने प्रैक्टिस छोड़ दी है तो फॉर ए बिगनर स्वामी जी के चित्र बड़े ही सुंदर थे और उनकी सीखने की क्षमता उनकी कंसंट्रेशन कैपेसिटी भी इतनी ही अद्भुत थी बाय द टाइम ही हैड टेकन हिज फोर्थ लेसन ही फेल्ट क्वाइट इक्वल टू ए पोर्ट्रेट जब जब बाय द टाइम जिस समय से जिस समय तक उन्होंने चतुर्थ लेसन चौथा क्लास किया तब तक वो इतने कॉन्फिडेंट हो गए थे कि किसी व्यक्ति को वो दोर पाए जनरली ऐसा होता है ना ड्राइंग सीखने के लिए पहले तो कोई आपको पेड़ है पौधा है या फूल है ऐसा कुछ सिखाएंगे क्यों क्योंकि मनुष्य को दौड़ना मनुष्य को ड्राइंग करना किसी व्यक्ति को बड़ा ही डिफिकल्ट रहता है एक्युरेटली चेहरे का भाव लाना आंख लाना चेहरी की मुस्कान वगैरह व जैसे कि ठाकुर है ठाकुर इतने सुंदर पेंटर थे ठाकुर का आर्ट था वह नेचुरल था किसी टीचर से ऐसा कुछ सीखे नहीं थे तो एक बार वह रास्ते से जा रहे हैं देखा कि दुर्गा पूजा की मूर्तियां बन रही है और जो मूर्तिकार होता है वह मां दुर्गा की आंखें चित्रित कर रहा है तो ठाकुर ने कहा अरे ऐसे नहीं इस तरह से तो आंखों में कोई जीवन नहीं दिखता है ऐसा करके उन्होंने इस मूर्तिकार से वो जो ड्राइंग का पेन या पीछ वो जो ब्रश लेकर के मां दुर्गा की आंखों को इतना सुंदर रूप से उन्होंने ड्र किया पेंट किया कि जैसे कि आंखें सजीव हो गई है मां दुर्गा की मूर्ति सजीव हो गई है ऐसा लग रहा था तो किंतु यह सब कब होता है जबकि आप या तो फिर ठाकुर की तरह सुप्रीम नेचुरल टैलेंट है वो तो एक चीज हो गया या तो फिर आप बहुत लंबे समय तक ड्राइंग कर जैसे कि ये मोनालिसा वगैरह पेंटिंग हम देखते हैं तो लियोनार्डो दविंची जिसने ये पेंटिंग किया है उसने सालों सालों भर तक तपस्या करके इस विद्या में महारत हासिल की तब तो कहीं जाकर के उसने इतना सुंदर पोर्ट्रेट बनाया तो यहां पे स्वामी जी है चारही क्लास हुए हैं और फिर कहा चलो अभी मैं किसी व्यक्ति को रता हूं किसी का मैं पोर्ट्रेट बनाता हूं तो अब ये तो ऐसा हो गया ना कि आप वो पहले आप वो तीरंदाजी सीखते हैं तो पहले तो आप पेड़ को मारेंगे पेड़ एक थोड़ा सा बड़ा निशान होता है उसके बाद में आप मान लीजिए कि पहले तो स्टेशनरी टारगेट को आप शूट करेंगे फिर मोबाइल टारगेट है उसको शूट करेंगे फिर आखिर में तो वो पंखी की आंख को मारेंगे यहां पर तो चार ही लेसन हुए स्वामी जी कहते हैं अभी मैं सीधा पंखी की आंख प ही तीर चलाता हूं इसके जैसा हो गया सो तुर्या अंद पोस्ट लाइक एनी ब्र न इमेज एंड वास ड्रॉन कैपिट ऑल इन द स्टडी ऑफ मिस्टर लगेट विथ इट्स दीवान फॉर अवर सीट एंड इट्स फाइन लाइट टू एड अस स्वामी जी ने कहा कि किसी व्यक्ति का मैं पोर्ट्रेट बनाता हूं तो भी इस तरह से अभी यह तो फोटोग्राफी तो है नहीं कि आपने जैसे कि फोटो क्लिक किया एक ही सेकंड में फोटो खींच गया एक सेकंड के लिए आपको पोज करना होता है फोटो खींच लिया उसके बाद में आप अपने अपने घर चले जाइए किंतु जब आपको पेंटिंग करना है किसी व्यक्ति का तो उस व्यक्ति को स्थिर होकर के एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहना पड़ेगा जैसे कि यह जो पेंटर होता है वह उस व्यक्ति के सामने देख देख करके उसके बाल कैसे हैं आंखें कैसी है चेहरे का एक्सप्रेशन कैसा है कंधे किस तरह से उसने रखे हैं शरीर का प्रोपोर्शन क्या है व सब एक्युरेटली वो ड्र कर पाए इसके लिए तो जिसका पेंटिंग चल रहा है उसको तो लंबे समय तक स्थिर हो कर के बैठना होगा और स्वामी जी तो है ऊपर से नौ सखिए तो कौन उनका शिकार बनेगा तो उनके गुरु भाई है रयान जी रयान जी बड़े ही शांति से धीर स्थिर होकर के एक स्टेचू की तरह काले कलर के थे तो उनका शरीर का वर्ण थोड़ा सा श्याम वर्ण था तो यहां पे वो मोड़ स्टम लिखती है लाइक ए ब्रोंज स्टेचू एकदम स्थिर होकर के बैठे और स्वामी जी उनको ड्रॉ कर रहे हैं और यह सब कहां पर हो रहा है तो ये वो मिस्टर फ्रांसिस लगेट जो है उनके वो स्टडी रूम में ये उनके ड्राइंग रूम में यह सब हो रहा है और स्वामी जी ने उनको दोरा भी सही पेंटिंग भी बड़ा सुंदर रूप से किया अभी आज यह स्वामी जी के पेंटिंग अवेलेबल नहीं है अवेलेबल होते तो उनको देखने का बड़ा आनंद हमको आता अच्छा यहां पर मोन स्टम का रेम निशन समाप्त होता है अभी मेरी लुईस क्या लिखती है हॉट समर डे मिस टूम एंड अदर्स आस्ड स्वामी जीी टू शो हाउ ही वंड हिज टर्बन अ डेमोंस्ट्रेट ही हैड गिवन परहे पस काउंटलेस टाइम्स इन द वेस्ट फॉर फैसटेक्स्ट मोर्स टूम और जो बाकी लोग सब उपस्थित थे उन्होंने स्वामी जी को कहा पूछा कि आप पगड़ी कैसे बांधते हैं वह हमको दिखाइए क्योंकि स्वामी जी की पगड़ी भी जैसे राजा शाही थी यूरोप के जो राजा रानी वगैरह होते हैं वह तो वोह जो डायमंड और गोल्ड का बना हुआ एक क्राउन पहनते हैं तो वो क्राउन पहनना तो सर के ऊपर में रख देना है उसमें तो ज्यादा कोई बड़ी बात है नहीं किंतु भारत के जो राजा महाराजा होते हैं वे लोग पगड़ी बांधते हैं और यह पगड़ी इतनी सुंदर शानदार दिखती है कि यह पगड़ी किस तरह से बांधी जाती है यह भी लोगों हमने लोग पहले तो यही अनुमान कर देंगे कि ये रेडीमेड हेड गियर है सर के ऊपर में रख दिया है जैसे कि राजा का वो क्राउन है रेडीमेड होता है सर के ऊपर में रख ही देना होता है किंतु स्वामी जी जब पगड़ी को छोड़ेंगे तब पता चलेगा यह पूरा एक वस्त्र ही है उसी को बड़ा ही स्टाइलिशली बड़ी ही मेहनत करके बड़ा ही सुंदर रूप से इस तरह से पगड़ी के रूप में बांधा जाता है तो देख कर के ये लोग देखना बड़ा उत्सुक होते थे कि स्वामी जी पगड़ी किस एक मने एक वस्त्र है सिंपल एक वस्त्र है उसको इतनी सुंदर रूप से पगड़ी के रूप में किस तरह से बाते हैं तो पहले भी स्वामी जी ने पश्चिम के देशों में बच्चों के लिए अपने अनुयायियों के लिए पगड़ी बांधने का डेमोंस्ट्रेट किया था यहां पर भी उन्होंने करके दिखा दिया नाउ एट रिजली मैनर ही वंड एंड अनवाउंड द लेंथ ऑफ सिल्क डिस्क्लोजिंग द मिस्ट्रीज नॉट ओनली ऑफ हिज ओन टर्बन बट ऑफ अदर काइंड एज वेल वहां पे रिजली मैनर में स्वामी जी ने पगड़ी को एक के बाद एक डिफरेंट तरीके से बांधने का उनको डेमोंस्ट्रेट दिखाया और सिर्फ इंडिया में ही विभिन्न तरह से पग बांधी किस तरह से जाती है वही नहीं दूसरे देशों में किस तरह से पगड़ी बांधी जाती है उसका भी डेमोंस्ट्रेट उन्होंने किया वन ही अरेंज इट एस द डेजर्ट पीपल डू टू कीप द नेक फ्रॉम द ग्रेट हीट मिस टूम रिकाउंटेड रिकाउंटेड आई आस्क हिम टू पोज एंड ही डिड टॉकिंग ऑल द टाइम ट वास द डे ही टॉक टू अस ऑफ प्योरिटी एंड ट्रुथ एक ने डिफरेंट डिफरेंट तरह की पगड़ियन स्वामी जी ने डेमोंस्ट्रेट करके दिखाया और फिर एक बार उन्होंने डेमोंस्ट्रेट किया कि आरब लोग किस तरह से पगड़ी बांधते हैं एक्चुअली अरब लोग पगड़ी तो नहीं बाते वो जो सफेद कपड़ा होता है ना वो ऐसा करके लंबा करके वो रखते हैं उसको पगड़ी कहेंगे कि क्या कहेंगे जो भी है तो उस अरब लोगों की तरह स्वामी जी ने अपनी पगड़ी बांधी तो उसको देख कर के मोड स्टम बड़ी ही उसको बड़ा ही खुशी हुई और उसने कहा स्वामी जी आप इस तरह से पोस्ट कीजिए मैं आपका ड्राइंग करती हूं तो उसी पोज में मोड स् टूम ने स्वामी जी को ड्रॉ किया है और यह ड्राइंग अभी हमारे पास में अवेलेबल है बाद में मैं इसको ग्रुप में शेयर करूंगा तो बड़ा ही सुंदर ड्राइंग है और मोर स्टम लिखती है कि स्वामी जी बैठे हैं वो अरब लोगों की पगड़ी पहन के और वो सतत बातें किए जा रहे हैं मने स्वामी जी की बातें तो सब समय ईश्वरीय बातें ही होंगी उस दिन उन्होंने पार्टिकुलरली पवित्रता के बारे में बातें की बैठे हैं अरब लोगों की पगड़ी पहन के और बातें कर रहे हैं हिंदू संस्कृति की यह भी एक देखने वाला सीन होगा तो एटलीस्ट हमको यह तो पता है कि किस तरह के स्वामी जी दिखते हैं उस ड्राइंग में वो ड्राइंग दिखाऊंगा बाद में शेयर करूंगा तो उस दिन किंतु बात जो कर रहे थे प्योरिटी एंड ट्रुथ पवित्रता और सत्य इन दोनों विषयों पर बात करते करते स्वामी जी पोज किए स्वामी जी ने पोज दिया और उसी तरह का पोज मोर्सुम ने ड्र किया मोर् स्टम लिखती है कि स्वामी जी को ड्रॉ करने के समय उसका क्या अनुभव रहा द लाइंस ऑफ द माउथ वेर सो सिंपल एंड लवली यट सो वेरी डिफिकल्ट उनके चेहरे की जो रेखाएं हैं वे वैसे तो बड़ी ही सिंपल दिखती है बड़ी लवली यानी कि बड़ी सुंदर दिखती है किंतु एक्युरेटली ड्राइंग करने को जाएंगे तब बड़ी ही तकलीफ देय होती है तब बड़ा ही श्रम साध्य उनको दौड़ना पड़ता है यानी कि किसी का चेहरा थोड़ा सा कॉम्प्लिकेटेड होगा किसी का चेहरा सिंपल होगा तो स्वामी जी के चेहरे की लाइन तो थी बड़ी सरल किंतु जब ड्राइंग करने को जाएंगे तो एगजैक्टली उस तरह की लाइन लेके आना पेपर के ऊपर में वह बड़ा ही डिफिकल्ट था जिसने बहुत मेहनत करके यह पोर्ट्रेट पेंटिंग सीखा है वही यह सब कर पाएगा अनफॉर्चूनेटली स्वामी जी ओन ड्रॉइंग्स ऑफ स्वामी रयान निवेदिता एंड अदर्स नो लंगर एक्सिस्ट और आर एट प्रेजेंट लॉस्ट टू अस ही हिमसेल्फ वन इमेजिन वुड नॉट हैव डिस्ट्रॉयड देम फॉर ही टूक इमेंस प्राइड इन हिज न्यू फाउंड टैलेंट स्वामी जी ने तुर्या अंद जी को तो ड्रॉ किया ही था साथ में निवेदिता को भी ड्रॉ किया था अनफॉर्चूनेटली वह ड्राइंग आज हमारे पास में अवेलेबल नहीं है हो सकता है कि किसी दिन भविष्य में में किसी कोने में संग्रहित करके रखे होंगे और शायद हमको फिर से मिले द द डे स्लिप्ड बाय ऑल ऑफ देम ब्यूटीफुल ईच मार्क्ड बाय सम स्पेशल अनफॉरगेटेबल कन्वर्सेशन और इंसिडेंट अ लंग स्पेल बाइंडिंग टॉक ऑन ए बाल्मी इवनिंग और सो स्मॉल अ थिंग एज द साइट ऑफ अ फ्लेमिंग रोब फ्लशिंग इन एंड आउट ऑफ द शेड ऑफ द ओल्ड चेस्टनट ट्रीज और ऑफ ए डार्क हेड बेंट ओवर ए स्केचबुक इट्स ऑनर लॉस्ट टू द वर्ल्ड और इस तरह से यह सुंदर दिन एक के बाद एक बीतते गए स्वामी जी के अनुयाई जैसे कि उनका हृदय धरा मने उनका हृदय संतुष्ट नहीं हो पा रहा है स्वामी जी को प्रतिदिन देखते हैं किंतु फिर भी ऐसा लगता है और देखे स्वामी जी को और उनकी बातें श्रवण करें प्रत्येक दिन एक नया अनुभव लाता है या तो स्वामी जी कोई एक अद्भुत आश्चर्यजनक कहानी बताएंगे या तो फिर अपना एक बिल्कुल ही नया पर्सपेक्टिव एक पॉइंट ऑफ व्यू एक नया ही आईडिया उनके समक्ष प्रस्तुत करेंगे जिससे कि वह आश्चर्य चकित हो जाए और सिर्फ स्वामी जी की वाणी ही नहीं स्वामी जी के दर्शन भी इस तरह से थे कि जैसे कि हमेशा के लिए अपने हृदय में वह अंकित होकर के रह जाए जैसे कि उनके कपड़े थे वस्त्र थे लाल कलर के येलो कलर के ऑरेंज कलर के उस तरह के सुंदर वस्त्र पहन कर के स्वामी जी पेड़ों के बीच में वॉकिंग कर रहे हैं वो भ्रमण कर रहे हैं या तो फिर अपनी स्केचबुक में वो धीरे-धीरे करके बैठ कर के ड्रॉ कर रहे हैं यह जो स्वामी जी के जो विभिन्न दर्शन थे एक-एक दर्शन वो भी जैसे कि उनके अनुयायियों के हृदय पे हमेशा के लिए अंकित हो गए थे स्वामी जी के दर्शन और स्वामी जी की यह वाणी जो लोग वो 10 सप्ताह रिजली मैनर में रुके हैं वे लोग इसमें से किसी को भी कभी भी भूलेंगे नहीं इन हिज लेटर टू मेरी हेल स्वामी जी मेंशन दैट ही इंटेंडेड टू गो टू न्यूयॉर्क टू टू सी अ प्रोसेशन दिस वाज अ रेफरेंस अभी यहां पे एक प्रोसेशन निकलने वाला था कहीं पे पास में न्यूयॉर्क में और स्वामी जी ने सोचा मैं वह प्रोसेशन देखने के लिए जाऊंगा अभी वह स्वामी जी गए कि नहीं वो पता नहीं किंतु मुझे नहीं लगता कि यह जो सुंदर दिनों की यह जो हार माला है उसको विक्षिप्त करके न्यूयॉर्क जैसे वो मने वो नोइजी सिटी में जाएंगे जहां प सब जगह पे हल्लागुल्ला है वो देखने के लिए मुझे नहीं लगता स्वामी जी जाएंगे अच्छा अभी मेरी लुईस लिखती है आगे अक्टूबर ब्रॉट चेंजेज टू द हाउसहोल्ड जैसे ही अक्टूबर महीना आया उनके घर में थोड़ा सा परिवर्तन आया घर में यानी कि जो गेस्ट रहने वाले थे उन लोगों में थोड़ा सा परिवर्तन आया मिसेस बूल फाइनली अराइव्ड ऑन सैटरडे फॉलो सेवरल डेज लेटर बाय ओलिया बट एज थिंग्स टर्न आउट मिस मैक्लाउड प्लांस अगेन मिसकैरी टू डेज लेटर द ग्रेट समर केम फॉर हर टू एन अन एक्सपेक्टेड एंड अ लेटर केम टू रिजली फ्रॉम मिसेस ब्लोजेब अ विडो हु वाज देन अननोन टू जो एंड सेइंग दैट देयर एल्डर ब्रदर टेलर मैक्लाउड ले सीरियसली इल परहे पस डाइंग इन हर होम इन लॉस एंजलिस वेयर शी वाज नर्सिंग हिम जैसे ही अक्टूबर महीना प्रारंभ हुआ वहां पर रहने वालों में परिवर्तन आया अभी तक हमने देखा कि तीन सहेलियां जैसे कि यह जोसेफाइन मैक्लाउड उनकी बहन बेटी लगेट और यह तीसरी थी मिसेस ओली बुल यह तीनों स्वामी जी की सबसे घनिष्ठ अनु या थी अमेरिका में तो अभी यह तीनों में ऐसा था कि जो स्वामी जी के साथ में रहेगा वह स्वामी जी की दिनचर्या के बारे में स्वामी जी के वाणी और वर्तन के बारे में जो वहां पर उपस्थित नहीं है उनको लंबा लेटर लिखें तो वहां पे जोसेफाइन मैक्लाउड और बेटी लगेट स्वामी जी के साथ में रिजली मैनर में उपस्थित थे मिसेस ओली बुल नहीं आ पाई थी क्योंकि उनकी लड़की उनकी बेटी बीमार थी अभी किंतु उनकी बिटिया उनकी जो बीमारी थी वह ठीक हो गई थी तो मिसेस ओली बुल रिजली मेनर आई किंतु उसी समय कैलिफोर्निया के लॉस एंजेलिस शहर में से एक पत्र आया मिसेस ब्लॉजेट लिखती है अभी वो ब्लो जट कौन है इन दोनों को नहीं पता था जोसेफाइन को किंतु उस पत्र में ऐसा लिखा था कि उनके बड़े भाई बड़े ही सीरियसली बीमार है और वह मेरे घर में सारवान ले रहे हैं मैं उनकी केयर कर रही हूं तो जैसे ही यह समाचार आया जोसेफाइन मैक्लाउड को तो वहां पर जाना ही पड़ेगा अपना बड़ा भाई बीमार है तो क्या करेंगे तो किंतु अभी जोसेफाइन मैक्लाउड के लिए जो कि स्वामी जी के यहां पर अमेरिका बुलाने में रिजली मैनर में उनको आमंत्रण करने में उसकी जो सबसे बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी उस जोसेफाइन को स्वामी जी को छोड़ कर के अभी जाना पड़ रहा है तो उसके हृदय पर क्या बीतेगी क्या बीती होगी उसका तो हम अनुमान कर रहे हैं कर पाए कर पा रहे हैं किंतु उसका जो मिसफॉर्चून था हमारा गुड फॉर्चून यह है कि अभी मिसेस ओली बुल जोसेफाइन को लेटर लिखे गी अब तक जोसेफाइन मिसेस ओली बुल को लेटर लिखती थी स्वामी जी के बारे में स्वामी जी क्या किया आज किस तरह से उनकी दीर्घ चर्या रही अभी मिसेस ओली बुल जोसेफाइन मैक्लाउड को लेटर लिखें यानी कि ये पत्र परंपरा है जिसके माध्यम से हमारे पास में स्वामी जी के उस दिनों का चितार संपूर्ण रूप से मिल रहा है वह पत्र परंपरा वैसे अकब बनी रहेगी वह सातत्य बनी बना रहेगा उस पत्र परंपरा में अभी मिस मैक्लाउड कहती है विथ इन टू आवर्स आई वास पैक्ड द हॉर्सेज आई वेंट आउट स्वामी पुट आउट हिज हैंड एंड सेड सम संस्कृत ब्लेसिंग एंड देन ही कॉल्ड आउट गेट अप सम क्लासेस एंड आई विल कम जैसे ही पत्र मिला उसके दो घंटे में ही मैक्लाउड जोसेफाइन मैक्लाउड वहां से प्रस्थान करने के लिए तैयार हो गई कैलिफोर्निया जाएगी जैसे ही वह वहां पर वह घोड़ा गाड़ी भी तैयार थी और जैसे ही वह घोड़ा गाड़ी में जाने के लिए वह वहां पर खड़ी होती है स्वामी जी आए उन्होंने संस्कृत में कुछ ब्लेसिंग्स दिए कुछ आशीर्वाद दिए और फिर क्या कहा प्रोफेटिक वर्ड्स भविष्य पूरा इससे परिवर्तन हो जाने वाला इन शब्दों से स्वामी जी ने कहा केली फोर्निया में कुछ क्लासेस का आयोजन करो तो मैं भी वहां पर आऊंगा और यह स्वामी जी की कैलिफोर्निया यात्रा का इस तरह से सूत्रपात हुआ इस तरह से उसका जर्मिनेशन हुआ और जब स्वामी जी कैलिफोर्निया जाएंगे व दैट इज अ कंपलीटली न्यू वर्ल्ड ये जैसे कि भारत और यह न्यूयॉर्क य बम्बे और न्यूयॉर्क में जो डिफरेंस है ऐसा ही एक बहुत बड़ा डिफरेंस न्यूयॉर्क और यह कैलिफोर्निया के जो बड़े-बड़े सिटी है लॉस एंजलिस फ्रांसिस्को उसमें है क्योंकि अमेरिका का जो वेस्ट कोस्ट है वोह बड़े ही साहसिक वीर्य वान लोगों ने उन्होंने उसको बसाया है जो कि एडवेंचरस थे और किसी एडवेंचर की आशा में वहां पर आए थे तो उनका हार्ट भी बड़ा लिबरल था और मल्टीकल्चरल वहां पे एटमॉस्फियर था क्योंकि स्पेनिश लोगों की वस्ती भी वहां पर ज्यादा थी जबकि यह जो बोस्टन न्यूयॉर्क वगैरह वहां पे ज्यादातर ब्रिटिश लोग रहते थे तो वहां पर उनका एक थोड़ा सा ब्रिटिश स्नोबरी जिसको कहते हैं ना एक संकुचित मन थोड़ा सा तो वहां पे था किंतु कैलिफोर्निया था वहां पर काफी ब्रिटिश पॉपुलेशन भी थी और चाइना से भी बहुत सारे लोग माइग्रेट करके गए थे माइग्रेट नहीं वैसे तो उनको लेबरर्स के रूप में लाया गया था किंतु थे उनकी वस्ती भी काफी थी और इंडियन लोगों की भी काफी वस्ती थी ये जो कुली के रूप में ब्रिटिश लोग जहां प ले जाते थे उनको तो रेल रोड लगाने के लिए या तो फिर वो माइनिंग वगैरह करने के लिए वो कैलिफोर्निया में काफी लोग इस तरह से रह रहे थे थोड़ा सा मल्टीकल्चरल एटमॉस्फियर था लोग बड़े ही एडवेंचरस थे बड़े ही उदार हृदय के थे और मने मन में भी साहस था कॉन्फिडेंस था और अद्वैत विधांत का संदेश ग्रहण करने के लिए कैलिफोर्निया जैसा उपयुक्त राज्य उपयुक्त जगह और कोई भी नहीं थी पृथ्वी के ऊपर में उस समय तो इस तरह से स्वामी जी का कैलिफोर्निया जाना वो प्रारंभ हुआ जोसेफाइन मैक्लाउड जा रही है स्वामी जी ने कहा कि कैलिफोर्निया में कुछ क्लासेस का आयोजन करो तो मैं भी वहां वहां पे आऊंगा शी कुड नॉट हैव लेफ्ट रिजली विदाउट ए पेनफुल रेंज एट हर हार्ट यट शी ड्रो ऑफ विथ अ कैरेक्टरिस्टिक रेसिलियंस एंड लियंस एंड एक्सेप्टेंस ऑफ एवरीथिंग दैट केम हर वे व्हिच वाज इनडीड वन ऑफ द ट्रेट्स फॉर व्हिच स्वामी जी लव्ड हर जोसेफाइन वहां से जा रही है स्वामी जी को छोड़ कर के तो हृदय प क्या बीती होगी हृदय में कितना कष्ट हुआ होगा उसका तो हम अनुमान कर ही रहे हैं किंतु साथ में में जोसेफाइन मैक्लाउड में जो रेसिलियंस था जो स्ट्रेंथ था जो स्ट्रेंथ ऑफ कैरेक्टर थी जो स्ट्रेंथ ऑफ विल पावर था वो भी इतना था कि अपने जो प्रियजन अपनी जो ड्यूटी है ड्यूटी के लिए तो जा रही है ना स्वामी जी को छोड़ कर के वैसे ही तो नहीं जा रही बड़ा भाई बीमार है तो उसकी सेवा के लिए जा रही है तो उसकी ड्यूटी है तो ड्यूटी या तो फिर धर्म का पालन करने के लिए अपने प्रियजनों का त्याग करना यह तो अपने शास्त्रों में इसके बारे में बहुत कुछ कहा गया है इसको तो बड़ी ही सराहना की गई है इस पॉलिटी की तो यहां पर भी धर्म का पालन करने के लिए अपने प्रियजन स्वामी विवेकानंद को छोड़ कर के जा रही है चेहरे पर बिल्कुल किसी भी तरह का यह मायूसी नहीं है उदासीनता नहीं है उसका ये जो रेसिलियंस स्ट्रेंथ ऑफ कैरेक्टर था इसी के लिए स्वामी जी की वो बड़ी प्रिय पात्र थी इसलिए स्वामी जी उसको इतना चाहते थे कि हां उसका स्ट्रांग हार्ट है जैसे कि वो कैंप र की वो बड़ी ही सुंदर कहानी कि वह स्वामी जी मेडिटेशन कर रहे हैं आडा अनसेल वगैरह स्वामी जी के साथ में बैठे हुए हैं एलिस हेंस ब्रो वगैरह और स्वामी जी कहते हैं उनको कि आपको जिस चीज के ऊपर में जिस ऑब्जेक्ट के ऊपर में जिस देवी देवता के ऊपर में कंसंट्रेशन करना हो कीजिए आई विल कंसंट्रेट अपॉन द हार्ट ऑफ द लायन ट गिव्स अस इन फाइना इट स्ट्रेंथ आप जिस देवी देवताओं पर कंसंट्रेशन करना हो की मैं सिंह के हृदय पर ध्यान करूंगा जिससे कि हमको अपार शक्ति प्राप्त होती है तो स्वामी जी तो शक्ति के उपासक थे स्वामी जी तो शक्ति को सबसे ज्यादा एप्रिशिया जोसेफाइन मैकल का ये जो कैरेक्टर था कि धर्म के पालन के लिए बिना मायूस होए आगे कदम करना युद्ध के मैदान में प्रार मने आगे कुछ करना यह स्वामी जी को उसका यह कैरेक्टर यह नेचर बड़ा ही पसंद था सम टू वीक्स लेटर ही वाज टू पे हर ए ट्रिब्यूट ड्यूरिंग द कोर्स ऑफ ए कन्वर्सेशन शी वाज द ओनली वन अमंग द ग्रुप एट रिजली हु हैड अटेंड फ्रीडम ही सेड एंड इन दिस ही इंक्लूडेड हिमसेल्फ जोसेफाइन के जाने के कुछ दिनों के बाद में स्वामी जी ने उसके बारे में क्या कहा स्वामी जी कहते हैं कि रिजली में यह जो जितने लोग हम लोग रह रहे हैं उसमें सिर्फ जोसेफाइन को ही मुक्ति प्राप्त हुई है और जो जितने लोग रह रहे हैं उसमें स्वामी जी अपने को भी इंक्लूड करते वो कहते हैं कि और किसी को मुक्ति प्राप्त नहीं हुई जो मुक्ति प्राप्त हुई है जोसेफाइन को अभी स्वामी जी ऐसा क्यों कहते हैं अभी यदि ऐसा कहे कि हां बाकी जो फॉरेन डिसाइल है उसमें से जोसेफाइन अकेली को मुक्ति प्राप्त हुई है तो वो तो चलो एक अंडरस्टैंडेबल है किंतु उनको खुद को नहीं प्राप्त हुई मुक्ति किंतु जोसेफाइन को प्राप्त हुई ऐसा स्वामी जी क्यों कहेंगे इस बात का किस लेवल पर ये कहेंगे वोह हमारे लिए समझना मुश्किल है क्योंकि हमको तो पता है कि वो निर्विकल्प समाधि स्वामी जी को प्राप्त हुई थी किंतु यह भी एक बात है कि स्वामी जी ने इस पृथ्वी पर कार्य करने के लिए अपने मन को बांध करके रखा था बा बहुत बाद में स्वामी जी जोसेफाइन को एक बड़ा ही सुंदर पत्र लिखते हैं कैलिफोर्निया से जब उनका मिशन समाप्त होने को आया है उस समय स्वामी जी लिखते हैं कि मेरे मन की ये जो सब एंबिशन थी कि हां मैं ठाकुर का मैसेज पृथ्वी पर फैला हंगा मैं चाहता हूं कि गरीब लोगों का उद्धार हो मैं चाहता हूं कि पद दलित लोगों को मैं सहाय कर पाऊं यह जो पूरे पृथ्वी का ये जो धार्मिक उत्थान हो यह जो सब मेरे मन की इच्छाएं थी वो इच्छाएं धीरे-धीरे करके एक के बाद एक अभी अप्रसार है अदृश्य होती जा रही है फिर से मैं वही लड़का नरेण बन गया हूं जो कि दक्षिणेश्वर में आकर के ठाकुर के पैरों के पास में बैठ कर के वही पंचवटी तले में ठ मंत्र मुग्ध होकर के ठाकुर की बातें सुना करता हूं सुना करता था मैं फिर से वही नरेण हो गया हूं जो कि भारत के मैदानों में खेतों में वन पर्वत नदी और जंगल पार करके मैं अकेला निसंग भ्रमण किया करता था ईश्वर पर संपूर्ण रूप से अवलंबन करके फिर से मैं वही नरेण बन गया हूं ऐसा एक सुंदर पत्र स्वामी जी जोसेफाइन मैक्लाउड को लिखते हैं तो यहां पर स्वामी जी के मन में शायद अभी भी वो एक है डिजायर कि अब उनका जो नया मैसेज है तो पृथ्वी पर ऐसी कौन सी जगह है वो नया मैसेज ग्रहण करेगी तो कैलिफोर्निया कैलिफोर्निया जाकर के विधान का प्रचार करना है यह इच्छा ये डिजायर जब तक उनके मन में रहेगा तब तक उनको संपूर्ण मुक्ति प्राप्त नहीं हुई यह स्वामी जी हो सकता है कि यहां पर इस बात को रेफर कर रहे हैं किंतु यह सब अनुमान है स्वामी जी किस लेवल पर जाकर के यह सब बातें कहते हैं हमारे लिए उसका इमेजिन कर इमेजिनेशन करना भी बड़ी ही मुश्किल बात है शी कुड लीव एवरीथिंग एंड एवरीबॉडी वन ओनली थ्रू थाउजेंड्स ऑफ लाइफ टाइम स्वामी जी कहता है कि जोसेफाइन जब भी चाहे अपने धर्म का पालन करने के लिए अपने प्रियजनों का त्याग करके बिना एक नजर पीछे मुड़े वह जा सकती है और यह क्वालिटी जो है यह जो गुण है व लाखों लाखों जन्म की तपस्या के बाद में आता है वरना यह प्रेय और श्रेय जैसे कि कहते हैं कि हमको हमेशा प्रेय ही चाहिए प्रियजन जहां पे है उसको छोड़ कर के धर्म का पालन करना जो कि बड़ा ही कष्ट काक है वो कौन करने वाला है तो यह क्वालिटी कि धर्म के पालन के लिए अपनी प्रिय जगह प्रियजन को त्याग करना जन्मो जन्म की तपस्या के बाद में आता है एंड इनडीड मिस मैक्लाउड हैड द बोय स एंड वाइड हार्टेड नेस दैट कम्स फ्रॉम एन इनेट एंड ट्रू डिटैचमेंट और यह बात सही थी कि मिस मैक्लाउड के भीतर में एक उत्साह और त्याग का संयम था एक यह था जिसको कहते हैं कॉमिनेशन या तो फिर हार्मोनी जो कि बड़ा ही रेयरली देखने को मिलता है एक उत्साह भी है और त्याग भी है जनरली जो लोग सेंटीमेंटल होते हैं वो उत्साही तो बड़े होते हैं किंतु उनको कोई भी चीज छोड़ने को बोलेंगे तो बड़ा ही अपसेट हो जाएंगे और जो लोग चीजों का त्याग करते हैं जनरली वे लोग बड़े ही रुख सुखे होते हैं उनके भीतर में सेंटीमेंटालिटी होती नहीं है यहां पर उसके भीतर में जोसेफाइन के भीतर में दोनों रेयर क्वालिटीज थी माने वो उत्साह से भी भरी हुई थी और त्याग के भी उसके भीतर में गुण थे वेरी रेयर क्वालिटीज का कॉमिनेशन संगम उनमें था जोजो इज द सेम एज यूजुअल शी रोट ऑफ हल से ट समर एट रिजली आई एम रेडियंट एंड हैप्पी एंड डोंट वांट एनीथिंग ऑन अर्थ बट अ फ्यू मोर पीपल टू ल अपके अपने खुद के बारे में जोसेफाइन लिखती है कि मैं जैसी थी वैसी ही हूं खुशी और आनंद से भरी हुई और मैं क्या चाहती हूं सिर्फ इतना ही चाहती हूं कि और कुछ लोगों को मिलूं जिनको मैं यह आध्यात्मिक आनंद वितरण कर सकूं स्वामी जी से जो आध्यात्मिक आनंद मिला है उनको मैं इन लोगों में वितरण कर सकूं स्वामी जी का जो अमर अजर संदेश है श्री रामकृष्ण देव और वेदांत का और कुछ लोगों को वह दे पाऊ यही मेरी इच्छा है तो यह थी जोसेफ आगे इसको कल देखें