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Swami Vivekananda Life ·

An Insight into Swami Vivekananda's Life 1 Aug 2024

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ॐ अकाय च धर्मस्य सव स्वरूप अवतार वषम कष्णा यते मेरी सब किताबें राजकोट से आ गई है तो मैं यहां पर सब कपड में इसको मैं सजा रहा तो स्वामी जी के जो लेटर्स है बंगोली में व एक वॉल्यूम में पब्लिश हुए हैं सभी लेटर्स स्वामी जी के एक साथ में एक मोटी सी किताब है उसके भीतर में सभी लेटर्स पब्लिश हुए तो अभी स्वामी जी के लेटर्स के बारे में तो शायद आपको पता होगा स्वामी जी ने कुछ लेटर्स बंगोली में लिखे हैं कुछ इंग्लिश में लिखे हैं बंगोली में लिखे हुए लेटर्स मेनली उन्होंने अपने गुरु भाइयों को लिखे हैं और गुरु भाइयों को और यह जो बंगोली डिवोटा है उनको किंतु मेनली गुरु भाइयों को और इंग्लिश लेटर तो उन्होंने पूरे जगत को लिखे हैं कि अमेरिका में जितने भी उनके डिसाइल्स थे चेन्नई में जितने भी थे और भी जैसे कि खेतड़ी के राजा वगैरह व सबको उन्होंने इंग्लिश में लिखे है अभी जब लेटर्स पब्लिश होना शुरू हुए कंप्लीट वर्ष के बारे में आपको पता होगा कि स्वामी विवेकानंद का उन्हो उन्होने जो कुछ भी लिखा है कहा है उनके जितने भी वार्तालाप है सब कुछ रामकृष्ण मिशन की ओर से नो वॉल्यूम में प्रकाशित कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद में पब्लिश हुआ है अभी यह कंप्लीट वर्क्स किस तरह से पब्लिश हुआ जैसे-जैसे स्वामी जी के लेटर्स लेक्चर मिलते गए वैसे-वैसे यह पब्लिश होता गया तो अभी जैसे कि स्वामी जी के कुछ लेटर्स सबसे पहले मिल गए जो कि उन्होंने अपने फॉरेन डिसाइल्स को लिखे थे तो यह फॉरेन क्या होते हैं थोड़े से पार्टिकुलर होते हैं अपने कॉरेस्पोंडेंस से और जो कुछ भी चीजें हैं उन सब चीजों के बारे में तो उन्होंने जो लेटर्स अच्छे से संभाल करके रखे थे तो उन्होंने हमको दिए पब्लिश करने के लिए उसकी कॉपी या जो कुछ भी होगा ओरिजिनल तो इस तरह से धीरे-धीरे करके नए-नए वॉल्यूम स्वामी विवेकानंद के कंप्लीट वर्स के आते गए और स्वामी जी के लेटर्स पब्लिश होते गए अभी इस तरह से जैसे जैसे लेट मिलते हैं वैसे-वैसे पब्लिश होने में दुविधा एक ही है कि स्वामी जी ने जिस क्रमानुसार पत्र लिखे हैं उस क्रम के अनुसार क्रोनोलॉजिकल समय के अनुसार यह पब्लिश नहीं होंगे ऐसा होगा कि जो पहले मिल गया 1900 1901 का पत्र पहले मिला और यह 18999 का पत्र बाद में मिला तो उ एक्चुअली लिखा गया है 18999 वाला पत्र पहले और 1900 वाला प में पब्लिश हुआ 1900 वाला पहले क्योंकि वह पहले मिला था 18999 वाला बाद में पब्लिश हुआ क्योंकि बाद में मिला था तो यह जो नो वॉल्यूम कंप्लीट वन से स्वामी जी का उसमें स्वामी जी के लेटर्स पूरे बिखरे पड़े हैं 700 प्लस जितने भी लेटर्स है वोह सब जैसे कि आला सिंगा को लिखे हुए लेटर कुछ एक साथ में मिल गए होंगे तो उसको एक साथ में पब्लिश कर दिया है मिसेस मेरी हेल को लिखे हुए लेटर कुछ एक साथ में होंगे तो एक जगह पर उनको पब्लिश कर दिया है फिफ्थ सिक्सथ सेवंथ एथ यह सब वॉल्यूम्स में स्वामी जी के लेटर्स है किंतु अभी देखिए कि यदि आपको स्वामी जी को ठीक ठीक से समझना है उनकी लाइफ का उनके आइडियाज का इवोल्यूशन यदि समझना है और वह जो स्वामी जी का बायोग्राफी है कंप्लीट युग नायक स्वामी विवेकानंद बंगोली में है और ईस्टन एंड लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद बाय ईस्टन वेस्टर्न डिसाइल जो कि इंग्लिश में है तो यदि स्वामी जी की बायोग्राफी के साथ में यदि स्वामी जी के लेटर्स भी पढ़ते जाए कि हां चलो वो अमेरिका में शिकागो वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन में उन्होंने प्रवचन दिया उसके बाद में अभी न्यूज़पेपर वालों ने स्वामी जी के बारे में क्या कहा है वह तो हमको पता है स्वामी जी के बारे में यह जो वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन है कमेमोरेटिव वॉल्यूम पब्लिश हुआ था उसमें क्या लिखा है वह हमको पता है किंतु स्वामी जी ने खुद ने वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन के बारे में क्या कहा उनके खुद के क्या अनुभूति थी अनुभव थे उन्होंने खुद ने क्या सोचा समझा उस इवेंट के बारे में वर्ल्ड फेमस इवेंट के बारे में वो यदि आपको जानना है तो स्वामी जी के लेटर्स द्वारा ही जाना जाएगा और यदि ऐसी कोई किताब अपने पास हो जो कि स्वामी जी के लेटर्स क्रोनोलॉजिकल सचा करके रखते हैं जो लेटर 1893 में 1893 में जो 11 सितंबर को उन्होंने 11 सितंबर को तो नहीं लिखा था उसके कुछ दिनों के बाद में उन्होंने अपने पत्र लिखने शुरू किए तो डॉक्टर बरोस को लिखते हैं फिर आखिर में गुरु भाइयों को लिखते हैं 18944 ऐसा नहीं है आपको यदि स्वामी जी के कोई पार्टिकुलर इवेंट अभी जैसे कि उन्होंने हावर्ड में लेक्चर दिया इसके बाद में उन्होंने जो कुछ भी लेटर वगैरह लिखे होंगे तो हो सकता है कि एक लेटर पड़ा होगा एक वॉल्यूम में दूसरा लेटर पड़ा होगा दूसरे वॉल्यूम में आपको सब कुछ एक साथ में सभी वॉल्यूम को एक के बाद एक खोल कर के देखना पड़ेगा तो किंतु यदि हमारे पास में क्रोनोलॉजिकल मिल जाए लेटर एक जगह पे तो हम कैसे स्वामी जी का लाइफ पढ़ते हैं साथ-साथ में ही स्वामी जी के लेटर पढ़ेंगे तो इससे फायदा क्या होगा इससे फायदा यही होगा कि हमको स्वामी जी की लाइफ जो हम लोगों ने लिखी है हम लोगों ने अर्थात कि यह जो हमारे पुरखे हैं विरजानंद जी महाराज है ना कि फिर यह स्वरूपानंद जी महाराज है फिर यह गंभीरानंद जी महाराज है जिनका कि सबसे बड़ा योगदान रहा है स्वामी विवेकानंद की जीवनी की रचना करने के बारे में उनके मंतव्य तो हमको पता है स्वामी जी के गुरु भाइयों ने स्वामी जी के बारे में क्या कहा वह पता है किंतु स्वामी जी खुद अपने जीवन की घटनाएं जैसे-जैसे बनती जाती है उसके बारे में उनके खुद के क्या मंतव्य है जैसे कि सेकंड टाइम अमेरिका गए थे तो फिर वह पता है कि भारत में जब वापस आए थे फर्स्ट टाइम विजिट से तब वो काफी बीमार रहते थे और फिर इसी बीमारी की वजह से ही आखिर में डॉक्टर ने कहा कि जाइए आप सेकंड टाइम विदेशी सफर कीजिए हो सकता है कि लंबी जहाज मुसाफर की वजह से आपको आपके भीतर ने जो एक अभी एक जो एक स्ट्रेस या टेंशन जैसा है हो सकता है कि इससे आपको मुक्ति मिले तो चलो स्वामी जी दूसरी बार विदेश यात्रा के लिए जहाज में निकले तो अभी वहां से जहाज में से जो पत्र लिखते हैं अमेरिका जाकर के पत्र लिखते हैं उस समय उनके मन की परिस्थिति कैसी है धीरे-धीरे करके वो धीरे-धीरे करके वो अपनी लीला संवरण कर रहे हैं वो चाहते हैं कि उनके गुरु भाई धीरे-धीरे करके रामकृष्ण संघ का पूरा जिम्मा ले ले और बस वो अभी उनको समझ में आ गया था कि उनके जीवन का अंतिम पर्व प्रारंभ हो चुका है सेकंड विजिट 18 18999 18999 के आसपास में उन्होंने प्रारंभ की और तीन ही साल के भीतर में 19002 4थ जुलाई 1902 की 4 जुलाई को उन्होंने महासमाधि ग्रहण कर ली तो ऑलरेडी सेकंड विजिट के समय उनको पता है कि महासमाधि का समय नजदीक आ रहा है तो उस समय जो पत्र लिखते हैं तो उनके जो मनोभाव है कितने सुंदर रूप से प्रकट होते हैं जोसेफाइन मैकल को लिखा हुआ एक पत्र है उसमें वो लिखते हैं कि मैं फिर से वही बालक नरेण हो चुका हूं जो कि पंचवटी के नीचे में बैठ कर के मंत्र मुक्त होकर के श्री राम कृष्ण देव की अमृतम वाणी को सुन रहा था फिर से मैं वही युवा नरेण हो गया हूं जोक भारत के भारत की ये गली गलियारों में यह गांव शहर में यह जंगल में खेत में नि संभल होकर के संपूर्ण रूप से ईश्वर पर भरोसा रख कर के घूम रहा हूं और यह जो मेरी यह जो असहाय है ये संपूर्ण रूप से शरणागति है यह शरणागति ही ईश्वर के मुझ मुझे ईश्वर के किसने नजदीक ले जा रही है तो ये जो स्वामी जी के जो भाव थे जो विचार थे स्वामी जी की लाइफ के साथ में आप पत्र पढ़ते जाए तो आपको इतना आनंद आएगा इट विल गिव अ डेप्थ टू स्वामी जी लाइफ स्वामी जी के जीवन को एक नई डायमेंशन मिल जाएगी हालांकि स्वामी जी के जीवन में जहां-जहां पर भी संभव हो रिलेवेंट जगह पर स्वामी जी के लेटर्स को कोट किया गया है किंतु फिर देखिए कि स्वामी जी के लेटर्स की किताब इतनी मोटी है बेंगोली में जो अभी पब्लिश हुई है किंतु उस समय तो नहीं थी तो मतलब आप सभी लेटर्स तो स्वामी जी के नहीं ले पाएंगे तो इसीलिए बहुत ही अल्प पैराग्राफ स्वामी जी की लाइफ में कोट प है तो ये एक मिसिंग पार्ट था स्वामी जी के जीवन के साथ में स्वामी जी के लेटर्स को पढ़ना तो मैं जब ट्रेनिंग सेंटर में था तो उस समय मैंने सोचा कि मैं स्वामी जी की लाइफ का एकदम अच्छे से स्टडी करूंगा बड़ा ही डिटेल में स्टडी करूंगा और इस डिटेल में स्टडी करने के लिए दो बात आपको चाहिए कि एक तो है स्वामी जी के प्रवचन अभी जैसे कि मान लीजिए कि स्वामी जी बोस्टन में रह रहे हैं तो बोस्टन में स्वामी जी के रहने का जो चैप्टर स्वामी जी की लाइफ में है उसी के साथ-साथ में ही बोस्टन में स्वामी जी ने कौन-कौन से प्रवचन दिए और बोस्टन से स्वामी जी ने कौन-कौन से लेटर लिखे अभी मान लीजिए कि स्वामी जी का कैलिफोर्निया पार्ट आप पढ़ रहे हैं तो कैलिफोर्निया रिलेटेड जो भी चैप्टर है स्वामी जी की लाइफ में युग नायक में या तो लाइफ बाय स्टन वेस्टर्न डिसाइल में तो उसी के साथ में ही स्वामी जी ने वहां पे कौन से प्रवचन दिए वहां पे स्वामी जी के रिलेटेड कौन से रेमसंस है मिसेस एसप्रो है ये एंड है मिस्टर हेमंड है उन लोगों ने स्वामी जी के कौन-कौन से रेमनी सेंस लिखे हैं और वहां से ही स्वामी जी ने कौन-कौन से पत्र लिखे ये सब कुछ आप एक साथ में मिलाकर के पढ़े तो कैलिफोर्निया में स्वामी जी के जीवन के बारे में आपको बड़ा ही डिटेल में जानकारी मिलेगा स्वामी जी कलकाता आ आए हैं फर्स्ट विजिट के बाद में कोलकाता में चारों ओर स्वामी जी का स्वागत हो रहा है उस समय स्वामी जी के मन के क्या भाव थे उस समय स्वामी जी ने किस तरह से रामकृष्ण सं की स्थापना की ये फर्स्ट में में जो चैप्टर है उसके साथ में ही स्वामी जी ने वहां से पत्र में क्या लिखा निवेदिता स्वामी जी के साथ में गई थी तो निवेदिता ने स्वामी जी के उस समय के बारे में क्या कहा सब कुछ पढ़ कर के आपको एक डिटेल जानकारी मिलेगी किंतु अनफॉर्चूनेटली और दूसरा क्या है पता है यदि आपको सही सही में स्वामी जी की लाइफ में डिटेल में जाना है तो स्वामी जी ने जिस लैंग्वेज में जो कहा है उसको उसी लैंग्वेज में पढ़ना है स्वामी जी बेसिकली दो लैंग्वेज में बात करते हैं लिखते हैं बंगो बोली और इंग्लिश तो मान लीजिए कि अभी उन्होंने कैलिफोर्निया से लेटर्स लिख रहे हैं तो अपने गुरु भाइयों को बंगोली में लिखे और बाकी जो है उन लोगों को उन्होंने इंग्लिश में लिखे तो बंगोली में लिखे हुए लेटर को बंगोली में ही पढ़ना है और इंग्लिश में लिखे हुए लेटर को इंग्लिश में ही पढ़ना है जो रेमसन स्वामी जी का जैसे कि स्वामी शिष्य संवाद जो है वो बंगोली में लिखा गया है तो उसको बंगोली में ही पढ़ना है फिर बाकी जितने भी जैसे कि अभी यह मेरी हेल है या तो फिर बाकी लोग जो है कॉर्नेलिया कोंगर है वगैरह जितने भी लोग स्वामी जी के बारे में जैसे कि मिसेस हेंस प्रो है ये लोग स्वामी जी के बारे में इंग्लिश में बोलते हैं इंग्लिश में इनके रेमनी सेंस है तो इसको इंग्लिश में ही पढ़ना है तब कहीं जाकर के आपको एक बड़ा ही अच्छा सा एक आईडिया आएगा कि स्वामी जी का लाइफ क्या है उनके विचार क्या है उनका जीवन कैसा है हालांकि जब तक स्वामी जी ने तो कहा था जब तक एक दूसरा विवेकानंद नहीं आ जाता तब त इस विवेकानंद ने क्या किया है समझ में नहीं आएगा तो आप कुछ भी कर लीजिए अल्टीमेटली वो स्वामी जी के जीवन का 1 पर भी यदि समझ में आए तो हमारे लिए बहुत है किंतु ये 1 पर तो करना होगा तो मैं जब ट्रेनिंग सेंटर में था तो मैंने क्या किया कि एक तो लाइफ पढ़ रहा था साथ-साथ में ही ये स्वामी जी का कंप्लीट वर्क है उसमें से जितने भी लेक्चर है उस सबको मैंने क्रोनोलॉजिकल टेबल बनाया कि ये लेक्चर जो है वो इस साल में इस डेट में लिखा गया है ये ले दिया गया है और यह लेक्चर इस साल को इस डेट में दिया गया है और यह पत्र है यह इस साल की इस डेट में यानी कि पत्र प्रवचन रेमसंस कंप्लीट वर्क्स जो है स्वामी जी का उसको पूरा पूरा मैंने क्रोनोलॉजिकल सजा दिया एक टेबल के भीतर में टेबल बना कर के और फिर मैं कंप्लीट वर्स और उसके सामने कंप्लीट वर्ष का एक पेज नंबर लिख दिया कि फिफ्थ वॉल्यूम में 40 40 नंबर पेज के ऊपर में यह प्रवचन है या यह लेटर है तो जब मैं पहले तो लाइफ में से वो एक चैप्टर पढ़ूंगा जैसे कि कैलिफोर्निया वाला चैप्टर मैंने पूरा पढ़ा फिर साथ-साथ में ही कैलिफोर्निया में अभी जैसे कि अलामे कैलिफोर्निया में भी स्वामी जी बहुत सारी जगह पे गए थे अलाम मेड़ा है फिर ये सान फ्रांसिस्को है फिर ये लॉस एंजेलिस है पसडी है ये चार जगह पे मेनली स्वामी जी गए थे तो अभी जैसे कि मैं आला मेडा वाला पार्ट पढ़ रहा हूं तो वो मैंने लाइफ में पढ़ा फिर अलामे में ही स्वामी जी ने कौन से वहां से कौन से लेटर लिखे वो पढ़े फिर स्वामी जी ने वहीं पर कौन से लेक्चर दिए थे कंप्लीट वर्क्स में वो पढ़े उसके बारे में स्वामी जी के रिलेटेड कौन से रेमसंस है रेमसंस ऑफ स्वामी विवेकानंद इस पुस्तक में उस पुस्तक का नाम है रेमसंस ऑफ स्वामी विवेकानंद तो उसमें पढ़े और फिर स्वामी जी के बंगोली रेमसंस जो है वो बंगोली कंप्लीट वर्क्स में पब्लिश हुए हैं तो बंगोली कंप्लीट वर्क्स में से बंगोली रेमसंस और फिर स्वामी जी के पत्रों का एक संचयन पूरा उद्बोधन से पब्लिश हुआ है वहां से स्वामी जी के बंगोली लेटर तो इतना सब कुछ लेकर के मैं बैठता था और एक जैसे कि एक सेक्शन स्वामी जी के जीवन का एक समय एक काल व वो पढ़ने के बाद में यह सब पढ़ता था और ऐसा करके पूरा एक अंडरस्टैंडिंग मैं समझने का प्रयास करता था कि स्वामी जी ने किस कॉन्टेक्स्ट में क्या किया है उनके विचारों का अभी देखिए कि इससे कितनी सारी इनसाइट मिलती है कि जैसे सिर्फ आप लाइफ पढ़ लेंगे या सिर्फ लेटर्स पढ़ेंगे या तो सिर्फ प्रवचन पढ़ेंगे या तो सिर्फ रेमसंस पढ़ेंगे या तो सिर्फ राइटिंग्स और पोयम्स पढ़ेंगे उससे स्वामी जी का एक तरह का आपको अंडरस्टैंडिंग होता है किंतु यह सबको आप क्रोनोलॉजी सजा करके क्रोनोलॉजिकल पढ़ना शुरू करेंगे तो आपको इतनी सारी डेप्थ स्वामी जी के जीवन में दिखेंगी इतनी सारी इनसाइट्स मिलेगी कि वो समझने के लिए हमको पूरा लाइफ टाइम चाहिए मैं ट्रेनिंग सेंटर में दो साल था 2 साल में मेरा जो कुछ कुछ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट लिए थे कि मेरा मुझे अपने फ्री टाइम में क्या करना है तो उसमें मैंने यह एम किया था और आई एम वेरी सेटिस्फाई उस समय कि चलो कि स्वामी जी के जीवन में इतना डीप में मैंने समझने का प्रयास किया अभी क्या होता है कि देखिए आप चेष्टा करते हैं प्रयास करते हैं कुछ करने का किंतु हमारी बुद्धि की भी तो एक सीमा होती है और ये जो बैकग्राउंड नॉलेज चाहिए एक शास्त्र का नॉलेज चाहिए फिर ये हिस्ट्री का नॉलेज चाहिए फिर ये वेस्टर्न फिलोसोफी का नॉलेज चाहिए इंडियन हिस्ट्री जो है उसका एक नॉलेज चाहिए तो यह सब तो इतना सारा तो अपने पास में नहीं है कि स्वामी जी जो कुछ कहते हैं सब कुछ 100% समझ ले किंतु यथाशक्ति जितना समझ में आता है उतना मैंने समझने का प्रयास किया था तो ये समझने के बाद में अभी वो तो ट्रेनिंग सेंटर खत्म हो गया और ट्रेनिंग सेंटर के बाद में ही फिर मैं पब्लिकेशन में पोस्टिंग हुआ तो फिर तो यह सब चीजें मेरे जैसे कि दिमाग से ही निकल गई ये एक मैंने कंट्रा इक्स है एक आयरानी है कि ट्रेनिंग सेंटर में पब्लिकेशन में आने से आपको और ज्यादा मतलब किताबों के पास में आप आएंगे और ज्यादा आपको मौका मिलेगा स्टडी करने का किंतु ऐसा नहीं है पब्लिकेशन में एडमिनिस्ट्रेटिव टास्क ही इतनी सारी रहती है अभी वो मैगजिन निकालना है हर महीने उसी का इतना टेंशन रहता है एक के बाद अभी एक कोई गेस्ट स्वामी जी वाइस प्रेसिडेंट महाराज की विजिट हो रही है तो वो इस किताब का इ लॉन्च करेंगे तो यह किताब को सबसे पहले कर दो बोल कर के हमको दौड़ा दौड़ी करनी पड़ती है कि ये किताब को कैसे भी करके निकालना है ये स्टडी वहां प इतना सीरियसली नहीं होता जो भी है अभी अभी मुझे अभी फिर से एक ऐसा एक समय मिल रहा है कि काफी कुछ फ्री समय है तो ये जो स्वामी जी के लेटर्स है उसमें भी खास करके बैंगोली लेटर्स है उसको मैं क्रोनोलॉजिकल फिर से पढ़ रहा हूं तो देखिए कि जो सब चिंतन मैंने टीसी में किया था एक बार वही चिंतन फिर से अभी वो धीरे-धीरे करके जागृत हो रहा है कुछ कुछ इनसाइट्स है जिसको कि मैं कहूंगा सबसे पहले तो है कि स्वामी जी अपने गुरु भाई को बंगोली में जो लेटर्स लिखते हैं उसका जो टोन है उसके जो टॉपिक और सब्जेक्ट है वच इज वेरी डिफरेंट फ्रॉम व्हाट एवर स्वामी जी राइट्स टू हिज अदर डिसाइल्स अपने दूसरे डिसाइल है वेस्टर्न डिसाइल या इवन ये आला सिंगा वगैरह जो चेन्नई के उनके डिसाइल्स थे उनको जिस तरह से स्वामी जी लिखते हैं उससे कई डिफरेंट स्वामी जी अपने गुरु भाइयों को लिखते हैं और सबसे बड़ा क्या है पता है सब समय उनको क्रिटिसाइज किया करते हैं कि तुम लोगों से कुछ होने वाला नहीं है मैं इतना कहता हूं जब तुम लोग किताब छपवाने में तो बड़े माहिर हो किताब छपवा करके जाहिर कर दे रहे हो कि हम भी स्वामी विवेकानंद के गुरुबाई है और जविस रामकृष्ण के हम शिष्य हैं चेले हैं उसी रामकृष्ण के ये विवेकानंद भी चेले हैं यानी कि अपनी खुद की महत्ता बढ़ाने के लिए अपनी खुद की बढ़ाई मारने के लिए तुम लोग किताब तो बड़ी छाप देते हो किंतु मैं जो कहता हूं कि एक संघ की रचना करो एक वहां पर अपॉइंटमेंट को कि जिसके पास में मैं लेटर भेजूं जिसके पास में मैं पैसा भेजूं या तो फिर तुम लोग मां के लिए एक जमीन की खरीद करो जिससे कि मां और उनकी जो सब शिष्या हैं उनके जब संगी निया है गौरी मां है गुलाप मां है फिर ये योगी मा है वे लोग वहां पर रहे और भारत में स्त्री शिक्षा स्त्री उन्नति का प्रारंभ हो वो सब तो तुम कर नहीं रहे हो और बिना मतलब की बड़ी-बड़ी बातें मैंने तुम्हारे पास में से ये कुछ शास्त्र की किताब मंगवाई क्योंकि मुझे यहां पर प्रवचन देने के लिए रेफरेंस के लिए उस सब की जरूरत पड़ती है तो वो सबने भेज कर के क्या सब कुछ मतलब जर्मन किसी जर्मन ने लिखे हुए कुछ किताबें भेज दी जिसके भीतर में मेरे खुद के दो लेक्चर भेज दिए मुझको मेरे लेक्चर भेज के क्या लाभ है मैं जो बोल रहा हूं वो नहीं करके बाकी सब उल्टा पुल्टा करते हो फिर जब स्वामी जी लंडन में गए तो लंडन में जाकर के ईट स्टर्डी के साथ में रह रहे थे तो अभी लंदन से जब वह स्वामी जी अमेरिका वापस जा रहे थे तो उनकी इच्छा थी कि उनका कोई एक गुरु भाई वहां पे चा लंडन में स्टडी के साथ में रहे और फिर स्टडी चाहता था कि ये नारद भक्ति सूत्र वगैरह जो संस्कृत ग्रंथ है उसका इंग्लिश में ट्रांसलेशन करके इंग्लैंड में पब्लिश करें तो कोई किसी को भेजो क्योंकि संस्कृत टू इंग्लिश ट्रांसलेशन कर सकता है जैसे कि शशि है शरद महाराज है काली है या तो फिर ये शारदा महाराज यानी कि त्रिगुणा तिता अंद जी है इन चारों का नाम स्वामी जी बार-बार ले रहे हैं किंतु चारों में से कोई भी नहीं जा रहा शशि महाराज को कोई बीमारी हो गई थी स्किन कुछ डिसीज हो गया था और शरद महाराज पता नहीं तो स्वामी जी ऐसा गुस्सा हो जाते हैं अभी उनका लंडन से अमेरिका जाने का समय आ गया तब तक लं भारत से उनका कोई भी गुरु भाई लंडन नहीं आया फिर स्वामी जी ने इनको जो गाली दे कर के चिट्ठी लिखना शुरू किया है तुम लोग इतने मतलब आल्सो हो कि तुम लोगों से कुछ भी काम होने वाला नहीं है इससे अच्छा है कि मेरे ये जो चेन्नई के जो शिष्य है वे लोग अच्छे हैं वे लोग फटाफट काम कर दे रहे हैं तो देखिए कि यह बात बाकी जितने भी लोग है अब जैसे कि ये इजाबेल मेडली है या तो फिर यह मेरी एल है या तो फिर मिसेस हेस ब्रो है या तो फिर इवन निवेदिता है मिसेस पोली बुल है जोसेफाइन मैक्लाउड है फिर ये सिस्टर क्रिस्टीन है ये सब लोग जिनको कि स्वामी जी ने सबसे ज्यादा लेटर्स लिखे उनका टोन कैसा है हमेशा एक इंस्पायरिंग इंस्पिरेशनल टोन है हमेशा कुछ ना कुछ हायर थिंकिंग लेकर के स्वामी जी उनके साथ में बात करते हैं वेदांत का कोई पॉइंट होगा ना कि उनकी खुद के आइडियाज को वो डेवलप करेंगे वो एक चीज है और अपना गुरु भाइयों को जो लेटर लिखते हैं सब समय कुछ ना कुछ क्रिटिसिजम उसमें रहता है किंतु देखिए कि जब स्वामी जी भारत वापस आते हैं तो रामकृष्ण संघ की स्थापना तो उन्होंने कलकत्ता में ही की रामकृष्ण संघ के जितने भी सर्वप्रथम ट्रस्टी थे उसमें उन्होंने अपने गुरु भाइयों को ही रखा पहली सबसे पहली ट्रस्टी बॉडी जो हुई थी उसमें मिसेस फॉलीबल का नाम था और शायद और शायद किसका था और दो विदेशी लोगों के नाम थे उसमें से मिसेस होली बुल तो एक थी ही थी तो उस समय एक ऐसा था कि लगता था कि स्वामी जी जब वो संघ की चालना करना चाहते हैं उस समय भारतीय और यह विदेशी डिसाइल दोनों मिलकर के उसको चलाएंगे किंतु अल्टीमेटली जब ट्रस्टी बॉडी फाइनली जब गठित हुई उसमें सिर्फ स्वामी जी के गुरु भाई ही थे स्वामी जी के एक भी शिष्य नहीं था एक भी डिसाइल उसमें नहीं था कि जिसके बार जिनके बारे में स्वामी जी ने इतनी आशा जताई और उन्हीं सबको इकट्ठा किया जिनको कि स्वामी जी बार-बार गाली देते थे तो देखिए कि ये एक है कि आप किसको क्रिटिसाइज कर जिसके ऊपर में आपकी सबसे ज्यादा आशा है आप किसको गाली देंगे जिसको कि आप सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं आप किसको ये उसकी किसके ऊपर में आप प्रेशर डालेंगे भाई यह करो वो करो जिसके ऊपर में आपको सबसे ज्यादा भरोसा है ये मास्टर महाशय है या तो गिरीश होष है या तो फिर यह इवन आला सिंगा है इनको स्वामी जी ने नहीं कहा कि तुम लोग संग की रचना करो तुम लोग यह करो वो करो हालांकि मास्टर महाशय गिरीश घोष इनके ऊपर में स्वामी जी को पूर्ण भरोसा था तो स्वामी जी एक बात समझते थे कि संघ की जद रचना करनी है श्री राम कृष्ण देव का कार्य हमेशा लंबा समय तक 1500 साल तक स्वामी जी कहते हैं कि मेरा मिशन चलेगा तो 1500 साल तक यदि संघ को चलाना है तो ये तभी संभव है जबकी त्यागी लोग इसकी इसकी जवाबदारी ले जब तक कोई त्यागी इसकी जवाबदारी नहीं लेगा जब तक सन्यासी इसका चन्मा नहीं लेगा तब तक ठाकुर का यह संग ज्यादा नहीं चलेगा तो स्वामी जी को यह बात पता थी और यह भी बात पता थी कि ये जितने भी गुरु भाई है जिनकी आलस के बारे में या जिनकी कर्म शिथिलता के बारे में आज वोह इतनी गाली दे रहे हैं शरद महाराज हो न कि ये शशि महाराज हो ना कि राजा महाराज हो इन सबको ठाकुर ने अपने हाथों से गड़ा है और इन्हीं के द्वारा ही सबसे महत कार्य होने वाला है और आखिर में हुआ भी सही शरद महाराज वहां पर उद्बोधन में बैठ कर के पूरे संघ के सेक्रेटरी के रूप में उन्होंने आजीवन कार्य किया राजा महाराज ने एज ए प्रेसिडेंट प्रथम प्रेसिडेंट प्रथम संघ अध्यक्ष के रूप में बेलूर मठ में और फिर विभिन्न केंद्रों में विभिन्न आश्रमों में घूम घूम करके एक आध्यात्मिकता और एक इनर लाइफ के एक उन्होंने एक प्रचलन किया और फिर कार्य तो सभी ने किया किंतु सबसे ज्यादा रिस्पांसिबिलिटी इन्हीं के ऊपर में थी सो दिस इज वन इनसाइट यह पूरा पढ़ कर के मिलता है दूसरा है क्या कि स्वामी जी जैसे-जैसे आप उनके विभिन्न स्टेजेस के बारे में पढ़ते जाएंगे उसी के साथ-साथ में ही स्वामी जी के पत्रों का टोन भी चेंज होता जाएगा यह तो एक है कि किसको लिखते हैं उसके अनुसार उनका नीडर्स का टॉपिक या टोन चेंज होता है साथ-साथ में ही स्वामी जी के जीवन के जितने भी स्टेजेस है उसके अनुसार भी उनके पत्रों का पूरा एक टॉपिक या पत्रों का जो कंटेंट है वो चेंज होता है स्वामी जी के जीवन को आप कितने स्टेजेस में बाटेंगे ज सबसे पहला स्टेज तो कहा जाएगा कि उनके बचपन का दूसरा स्टेज कहा जाएगा उनके यवन का जबकि वोह उक्त वय के होते हैं और जो हायर थिंकिंग हिस्ट्री है फिलोसोफी है समाज की जो परिस्थिति है यह सब समझने का वह प्रयास करते हैं यह सेकंड स्टेज होगा थर्ड स्टेज है डेज विथ श्री राम कृष्ण श्री राम कृष्ण के सानिध्य में आकर के श्री रामकृष्ण के पदानु सर पद चरण के समीप निवास करके बैठ कर के ठाकुर की जो शिक्षा उन्होंने ग्रहण की वो थर्ड स्टेज होगा फोर्थ स्टेज होगा उनके पिताजी की मृत्यु क्योंकि जब तक ठाकुर के पास आते थे तब तक एक बचपना वाला भाव था बाद बाद में ठाकुर की ही मजा किया करते थे वो हजरा के साथ में बैठ कर के हुक्का पिएंगे ठाकुर की नकल करेंगे ठाकुर की मजा करेंगे क्या ना क्या नहीं करेंगे ठाकुर को सब समय क्वेश्चन करते रहेंगे ठाकुर के ऊपर में विश्वास करते रहेंगे तो वो एक फेस था किंतु जब उनके पिताजी की मृत्यु हुई और तब से समाज ने उनको जिस तरह से धोखा दिया तब उनकी आंखें खुल गए पता चला कि ठाकुर ही सही सही मनुष्य है जब उनके गुरु भाइयों को एक बार पत्र में राजा महाराज उनको लिखते हैं कि किसी बात पे उनको संशय आ गया है किसी किसी भी कारण से ठाकुर पे संशय हो गया आध्यात्मिक जीवन पर संशय हो गया एक प्रश्न हुआ कि मैं क्या सही रास्ते पे हूं कि नहीं एक संशय तो तो क्या है कि आध्यात्मिक जीवन का एक एक इन्हेरेंट पार्ट है साधना करते जाएंगे तो बीच-बीच में ऐसा होगा ही होगा कि कभी-कभी मन बड़ा उच्च दिशा में चला जाता है तो कभी-कभी मन पूरा झुक जाता है तो ऐसा तो होने ही वाला है तो जब इस तरह का एक पत्र जब राजा महाराज ने स्वामी जी को अमेरिका में लिखा तो स्वामी जी ने कहा देखो भाई मैं पूरी दुनिया पर घूम करके देख चुका हूं ये जो बड़े और वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में जहां पर दुनिया के सबसे बड़े से बड़े धर्म गुरु जहां पर इकट्ठा हुए थे कैथलिसिजम के ऑर्थोडॉक्स रिलीजन के प्रोटेस्टेंटिज्म के ये बुद्धिज्म के ये हिंदू धर्म के थियो सोफिस्ट है ब्राह्मण समाज है ये जितने भी आधुनिक य क्रिश्चियन साइंस है ये जितनी भी आधुनिक सब ये पंथ है उसके भी सबसे बड़े से बड़े धर्म गुरु जहां प इकट्ठा हुए थे और बाद में भी जो मैंने विदेश में इतना भ्रमण किया एक बात समझ में आई है कि ठाकुर के पास में भाबे घोरे चूरी नाई सब जगाए भावे घोरे चोरिया से अर्थात कि भाव का घर मन मुख एक करना भाव के घर में चोरी अर्थात कि मैं सोचता हूं एक बोलता हूं एक तरह से कि ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए यह करना चाहिए वो करना चाहिए करता और ही कुछ तो ये भाव के घर में चोरी सब जगह पर होती है सिर्फ एक ठाकुर है कि जिनके भाव के घर में चोरी नहीं है उन्होंने जो कहा वैसा ही जीवन जिया जैसा जीवन जिया उसी के बारे में उन्होंने बात की मन मुख एक किया बोलना पूछ करना पूछ सोचना पूछ ऐसा वो एक के साथ में इन तरह का व्यवहार दूसरे के साथ में दूसरा ऐसा कुछ नहीं संपूर्ण 100% ट्रांसपेरेंसी कहो तो श्री राम कृष्ण के भीतर में ही मुझे मिली तो ये जो ठाकुर के ऊपर में उनका जो प्रचंड विश्वास जो उनका प्रारंभ हुआ वो उनके पिताजी की मृत्यु के बाद में तो अभी कितने स्टेज हो गए एक तो बचपन का दूसरा कि पुक्त व का जबकि उनका मन क्वेश्चन करना प्रारंभ किया था थर्ड कि ठाकुर के साथ में फर्स्ट फेस जबक वो आते थे ठाकुर की अस मजन ठाकुर पर विश्वास था भरोसा था अदर वाइज तो नारायण उनके पास आता ही नहीं किंतु साथ-साथ में क्वेश्चन भी बहुत करते थे और फिर फोर्थ फेज कि जबक पिताजी के मृत्यु के बाद में जो एक के बाद एक घटनाएं होती गई दो मैंने इंपोर्टेंट घटनाएं उस समय की उनके पिताजी की मृत्यु दूसरा की ठाकुर को कैंसर होना ये दोनों घटनाओं प स्वामी जी को इतना ठाकुर को संपूर्ण रूप से शरणागत हो गए ये जो स्वामी जी ठाकुर के पास में जाते हैं कहते हैं मेरे घर का कुछ कर दीजिए आप तो ठाकुर कहते हैं जाओ तुम भी मां के पास में जाकर के मांग लो तो जितनी भी बार मां के पास में जाते हैं मांगते हैं मां काली के पास में दक्षिणेश्वर के काली मंदिर के मां काली के पास में गर्भ गरूप में जाकर के जितनी भी बार कुछ मांगने का प्रयास करते हैं रोटी कपड़ा मकान में आता ही नहीं है बोलते हैं कि ज्ञान दो भक्ति दो वैराग्य दो तो मैंने उस समय उनको खुद को पता चला पहले तो ठाकुर पर नाराजगी व्यक्त ग कि महाशय आपी ने कुछ जादू लोना कर दिया है किंतु आखिर में उनको पता चला कि उनके मन का सही भाव जब मां के मंदिर में जाते हैं तो प्रकट हो जाता है उनमें ठाकुर को गाली देने से कोई लाभ नहीं है वो मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट अपने में ही है तो फिर जब उन्होंने एक बार फिर ठाकुर ने उनको काली का भजन सिखाया और स्वामी जी काली मंदिर में जाकर के पूरी रात मां काली का भजन गाते हैं और दूसरे दिन ठाकुर बड़े ही हर्ष से व्याकुल होकर के जितने भी लोग आते हैं सबको कहते हैं नरेन काली मैनेज है नरेन काली मैनेज है अर्थात की नरेंद्र ने काली को स्वीकार किया है काली को स्वीकार किया है अब तक वो जो मतलब लाठी मारने वाली सब बातें करता था ये आपके मन का भ्रम है ये वो वगैरह वो सब अभी नरेण भूल गया है और मां काली को स्वीकार किया है तो स्वामी जी का लाइफ ट्रांसफॉर्मिंग एक्सपीरियंस और ऑफकोर्स दूसरा लाइफ ट्रांसफॉर्मिंग एक्सपीरियंस था निर्विकल्प समाधि जब नरेंद्र वहा काशी पुर में वो ग्राउंड फ्लोर पर बैठा हुआ था निर्विकल्प समाधि में धीरे-धीरे करके जा रहा था तब वो एकदम सोचता है अरे मेरे हाथ कहां है मेरे पैर कहां है क्या हो रहा है मुझे जो बिल्कुल पहली बार स्वामी ठाकुर ने नरेंद्र को स्पर्श करके जिस तरह से नरेंद्र को भाव समाधि में मग्न कर दिया था उस समय जैसा डर गया था कि अरे मेरे पिताजी है माताजी है आप क्या कर रहे हैं मेरे साथ बिल्कुल वैसा ही अनुभव फिर से हाथ है पैर है सभी चीजें जैसे कि अदृश्य हो रही है एक ही ब्रह्म भाव में विलीन हो रही है किसी ने जाकर के ठाकुर को कंप्लेन किया ठाकुर के पास में जाए डरते डरते गए कि अरे देखिए कि नरेंद्र इस तरह से कंप्लेन कर रहा है हाथ पै दिख नहीं रहा है पता नहीं उसके साथ में क्या हो रहा है वो बोल रहा है कि मैं मर जा रहा हूं क्या तो ठाकुर कहते हैं कि भले साला य परिस्थिति साला था कि रकम वो आमा के बड़ो ज्वाला को छलो मने भले ये साला इसी परिस्थिति में रहे थोड़ा सा मुझे बड़ा परेशान करता था कि मुझे ये अनुभव करवा दो वो अनुभव करवा दो अभी अनुभव हो रहा है तो व च रहा है डर रहा है तो वो एक दूसरा लाइफ ट्रांसफॉर्मिंग एक्सपीरियंस तो बचपन वाला फिर ये युवान नर ठाकुर के पास में फर्स्ट फेज ठाकुर के साथ में सेकंड फेज कि जबकि उन्होंने काली को स्वीकार किया ठाकुर को स्वीकार किया फिर ठाकुर की महासमाधि के बाद में यह लोग सब वराह नगर मठ में रह रहे थे उस समय का पूरा एक समय 18864 तक का जबकि वरा नगर मठ में रह तो रहे हालांकि उन्होंने दो-तीन बार मुसाफर की नॉर्थ इंडिया की दो ट्रिप लगाई नॉर्थ इंडिया की काशी भी गए और फिर ये वहां भागलपुर है गाजी बाबा के पास में भी गए तो वो सब ट्रिप उन्होंने की किंतु मेनली रह रहे हैं बराह नगर मठ में तो वो फिफ्थ फेज हो गया सिक्स्थ फेज होगा स्वामी जी के जीवन का जबकि वह प्रेम राजक बनकर के 18999 में मां के आशीर्वाद लेकर के और अखंडानंद जी को साथ में में लेकर के मठ से निकले और अपने को प्रॉमिस किया कि जब तक मैं विश्व विजेता नहीं बन जाता हूं तब तक मैं कलकाता वापस नहीं लौटूंगा तो सही में जब वो विश्व विजेता बन गए तभी वापस आए आखिर में 1857 में 18976 फेज स्टार्ट हुआ स्वामी जी की परिव्राजक जीवन का कि जबक वोह अखंड मां उस समय घुसूरी में रह रही थी तो मां के पास में गए मां ने भजन गारी को कहा उन्होंने मां के सामने भजन गाया फिर मां ने अखंडानंद जी को कहा कि देखो मैं अपना सर्वस्व कुछ तुम्हारे हाथ में दे रही हूं तुम नरेण की बड़ी जतन करना बड़ी संभाल रखना क्यों अखंडानंद जी को ऐसा कहा क्योंकि अखंडानंद जी ऑलरेडी हिमालय है तिबेट है वहां पर घूम के आए थे तो स्वामी जी उनको गाइड के रूप में साथ में ले जा रहे थे तो वो सिक्स्थ फेज कि अखंडानंद जी के साथ में निकले एम था ऑब्जेक्टिव था कि सीधे हिमालय जाएंगे हिमालय जाकर के तपस्या में हो जाएंगे किंतु ऐसा नहीं होकर के अखंडानंद जी उनको वहां पर ले गए जगह का नाम में भूल गया वहां के महंत थे जानकी बल शरण उनके दर्शन करवाने के लिए तो स्वामी जी पहले तो बड़े नाराज थे कहा कि सीधा हिमालय जाने को बोल रहा हूं कहां तुम मुझे किसी साधु के दर्शन करवाने के लिए आ रहे हो य पहारी बाबा का तो दर्शन किया उसी से तो ठाकुर के नाराज होकर के उनको छोड़ कर के मुझे जाना पड़ा किंतु फिर जब जानती बल शरण का उन्होंने दर्शन किया शायद वृंदावन में एकट लोकेशन में भूल गया उनका कहां था आश्रम तो जब उनका दर्शन किया तो स्वामी जी खुद इतने प्रभावित हो गए कि इतने प्रेमी इतने पंडित इतने विद्वान साधु भारत में है तो उनके साथ में वार्तालाप करके कितना अच्छा लगा किंतु फिर उनके दर्शन के बाद में सीते गए हिमालय में सीते गए वह अल्मोड़ा के उस गुफा में जहां पर उन्होंने जब ध्यान समा बयान करने का प्रारंभ किया और चाहते थे कि वहीं पर शायद उनका चला जाएगा वहीं पर वह जीवन त्याग देंगे किंतु वो जो एक बहुत ही इंपोर्टेंट घटना दूसरी हुई स्वामी जी के जीवन के जो टर्निंग पॉइंट है पिताजी का मृत्यु फिर मां काली को स्वीकार करना फिर ठाकुर ने अपना शक्ति संचार उनमें किया फिर यह वरा नगर मठ छोड़ कर के निकले ऐसी जो इंपोर्टेंट घटना है स्वामी जी के जीवन की उसमें से एक है कि उनकी बहन ने आत्महत्या की ससुराल में थी और जो सब परेशानी थी उसकी वजह से तो आत्महत्या की यह टेलीग्राम स्वामी जी को मिला स्वामी जी व्यथित हो गए सोचा मेरी ही बहन की यह परिस्थिति है तो भारत में मेरी जो इतनी करोड़ों बहन है उनकी क्या परिस्थिति होगी तो लिटरली एंड मेटाफोरिकली ही डिसेंडेड फ्रॉम द हिमालय टू द प्लेंस ऑफ इंडिया हिमालय की ऊंचाइयों से भारत की धरती पर उन्होंने फिर से अवतरण किया गांव गांव शहर शहर में सब परिस्थिति से अवगत हुए और आखिर में ठीक किया कि अमेरिका जाएंगे तो ये प्रव्रज्या का स सिक्स्थ स्टेज फिर ये सेवंथ है कि फर्स्ट विजिट इन अमेरिका ये जो 1893 में उन्होंने वो वहां पे पहुंचे और 18966 विजिट टू अमेरिका फिर भारत में आए भारत में आकर के उन्होंने रामकृष्ण संध की स्थापना की कोलंबो से अल्मोड़ा तक उन्होंने प्रवचन दिए यह सब किया उसके बाद में सेकंड टाइम अमेरिका गए तो ये 5 6 7 8 ना फेज हो गया सेकंड टाइम विजिट का अमेरिका और 10थ हो गया कि वह जो आखिरी बार भारत में आए सेकंड विजिट उनकी तकरीबन 18999 से उस एक ही साल की थी और 1900 यानी कि जो आखिरी दिन था वो मिलेनियम का व 18993 जनवरी और फर्स्ट जनवरी 19001 जनुअरी उस समय वो अल्मो वहां मायावती की यात्रा कर रहे थे भारत में आ कर के तो वो आखिरी फेज स्वामी जी के जीवन का कि आखिरी बार भारत में आए 1900 से लेकर के 192 तक फोर्थ जुलाई उनकी महासमाधि का दिन तो इतने फेजेस है स्वामी जी के जीवन के और प्रत्येक फेज के लेटर को आप पढ़िए क्रोनोलॉजिकल तो उस फेज में स्वामी जी के जीवन की जो एक इनसाइट है उनका जो मूड है अंकीय जो भावधारानी सुंदर सुस्पष्ट रूप से प्रकट होकर के आती है मैं चाहता हूं कि एक ऐसी किताब पब्लिश हो कि जिसमें स्वामी जी के सभी लेटर्स क्रोनोलॉजी केली सजाए गए जो कि आज नहीं है यह जो नया कंप्लीट वर्स जब पब्लिश होगा तो उसमें शायद एथ सेवंथ और एथ वॉल्यूम होंगे जिसमें कि स्वामी जी के सभी लेटर क्रोनोलॉजिकल दिए होंगे अभी बंगोली में है किंतु उसमें तो सिर्फ बंगोली है इंग्लिश के लिए आपको इंग्लिश में लेटर्स ऑफ स्वामी विवेकानंद बोलकर एक किताब है किंतु उसमें स्वामी जी के सभी लेटर्स नहीं है लॉजिकली सजाए हैं किंतु सभी नहीं है कुछ कुछ सिलेक्टेड लेटर्स लिए गए हैं स्वामी जी के इंग्लिश में ऐसी कोई भी किताब नहीं जो कि सभी लेटर्स हो और वो भी क्रोनोलॉजिकल सजाए गए तो वो एक एक कमी रह गई है अपने ऑर्डर में हमने पैसा देख कर के हम लोग किताब छापते सोचते हैं कि इस किताब को कौन परचेस करेगा कौन नहीं करेगा तो बेटर होगा कि जद रिसर्च के रूप में ही जद ऐसी किताब पब्लिश कर दे जिस किताब के भीतर में सभी लेटर्स स्वामी जी के हो और वो भी क्रोनोलॉजिकल सजाए हुए इंग्लिश में बंगोली में उद्बोधन से ऑलरेडी पब्लिश हो चुका है तो और इससे भी जद मैं विशलिस्ट जद हो अपना इससे भी जदी मैं आगे बढ़ कर के अपेक्षा करूं कि एक ऐसी किताब हो जिसमें स्वामी जी के लेटर्स क्रोनोलॉजिकल हो और जिस लैंग्वेज में स्वामी जी ने लिखा है उसी लैंग्वेज में हो जैसे कि इंग्लिश में लेटर लिखा गया है तो वो इंग्लिश में हो और यदि बंगोली में लेटर लिखा गया है तो वह लेटर बंगोली में हो और वो डेट वाइज सजाए हुए तो इसको पढ़ कर के जिनको बंगाली और इंग्लिश दोनों आती है और जो स्वामी जी के जीवन में डीप में जाना चाहते हैं उनको इतना आनंद आएगा इतना आनंद आएगा यह जो सेकंड विजिट इन अमेरिका तो सबसे पहले लंदन गए लंडन में ईटी स्टर्डी ने जो स्वामी जी को जो धोखा दिया था उस समय के बारे में स्वामी जी निवेदिता के साथ में जो वार्तालाप कर रहे हैं उस समय के जो पत्र उन्होंने लिखे हैं वो देख कर के हमको पता चलता है कि स्वामी जी को कितना गहरा अघन पहुंचा है टी स्टडी की ये ये बेवफाई से ना कि उसकी ये व मैंने बैक स्टेमिंग से तो वो एक हो गया फिर वहां से जब अमेरिका आते हैं तो वातावरण बिल्कुल चेंज होता ता है वहां पे ये जो फ ये फ्रांसिस लगेट है फिर ये मिसेस लीवल है फिर ये जोसेफाइन मेगला है फिर मोड स्टुन है जैसे बहुत सारे डिवटी है ये वे लोग सब लोग स्वामी जी को इकट्ठा हो जाता है स्वामी जी के आसपास में और स्वामी जी को रिचली मैनर ले जाते हैं वहां पे वो जो एक सुंदर एक स्वामी जी के जीवन का स्वामी जी कहते हैं ना मेरा जीवन जैसे कि मरुभूमि जैसा है किंतु जब मैं एक अच्छे भक्त के संपर्क में आता हूं तो मुझे लगता है कि इस मरुभूमि में एक जगह प मुझे एक ओआसिस ओआसिस अर्थात कि यह जो सुंदर जलाशय और उसके तग ये जो पेड़ पते होते हैं उसको ओएसिस कहते हैं इंग्लिश में हिंदी शब्द ई मुझे याद नहीं तो इस मरुभूमि में एक सुंदर ऐसी जगह जहां प की छाव भी है और जल भी है एक ऐसी सुंदर जगह मुझे मिल गई है तो वो ऐसी कुछ-कुछ जगह कुछ कुछ समय स्वामी जी के जीवन में थे अल्प समय थे उसमें से एक था द ग्रेट समर जो कि ग्रेट समर अर्थात की दिव्य ग्रीष्म समर अर्थात की ग्रीष्म ग्रेट अर्थात कि भव्य भव्य या तो दिव्य तो ये दिव्य ग्रीष्मा या तो फिर ग्रेट समर बोलक के जो पीरियड था ये नाम दिया था जोसेफाइन मै क्लाउ ने और ये जो सेकंड विजिट में जब वो रिचली मैनर में रहे थे उस समय तो उस समय मान लीजिए कि सिर्फ ग्रेट समर का आप स्टडी करते हैं तो उस समय के जितने भी रेमसंस माने ये जो विश लिस्ट है मेरा वो अभी हमारे विश लिस्ट की तो कोई सीमा नहीं होती ना कि स्वामी जी का जीवन स्वामी जी का कंप्लीट वर्क्स स्वामी जी के लेटर्स और स्वामी जी के रेमसंस ये चार चीजें हैं उनके बारे में तो ये पूरा हमको क्रोनोलॉजी सजा करके मिले और जिस लैंग्वेज में लिखा गया है उस लैंग्वेज में मिले यह बहुत बड़ा हो जाएगा स्वामी जी का जीवन दो वॉल्यूम में है कंप्लीट वर्क्स नाइन वॉल्यूम में है रेमसंस का एक वॉल्यूम है इतना सब कुछ मिला कर के इसमें होगा 9 10 11 12 15 वॉल्यूम शायद इसके हो जाएंगे यदि आप ओरिजिनल लैंग्वेज में क्रोनोलॉजिकल सजाएंगे किंतु रिसर्च के लिए इसको इस तरह से पब्लिश करना चाहिए जिससे कि जिनको को कि स्वामी जी के जीवन में डीप में जाना है उनकी जो अवस्थाएं हैं उनके जो मूड्स है उनकी जो इंसाइट्स है इसके बारे में समझना है तो इससे अच्छा और कोई लिटरेचर अपने पास में नहीं है अपने पास में सब कुछ है किंतु जो नहीं है वो है एक विल पावर कि रिसर्च करने के लिए हम एक थोड़ा सा समय दे रिसर्च करने के लिए मैन पावर दे रिसर्च करने के लिए फंड एलोकेट करें वो सब हम इतना बड़ा साम्राज्य चला रहे हैं रामकृष्ण संघ का किंतु फिर भी संघ के जो स्थापक स्वामी विवेकानंद उनके बारे में हम इतना डीली नहीं सोचते जितना कि हमको सोचना चाहिए तो सुबह से वो जो लेटर पढ़ रहा था तो मुझे वो सब टीसी की बातें याद आ गई और मैंने सोचा कि शेयर करू आपके साथ में ठाकुर का कथामृत अभी कल से फिर से प्रारंभ करेंगे आज त फिर सेक्ष दे परीत श्री राम कृष्णा प स्वामी जी के जितने भी फेज है उनके जीवन के अभी प्रव्रज्या का फेज है न कि वोह फिर हिमालय में तपस्या कर रहे उस समय का फेज है न कि अमरनाथ गए वो है न कि राजपूताना गुजरात घूम रहे हैं ना कि साउथ में है ना कि कैलिफोर्निया है या तो शिका में है एक एक फेस को लीजिए उसके ऊपर में आपको इतना सब कुछ मैटर मटेरियल है चिंतन करने के लिए सोचने के लिए अनफॉर्चूनेटली सब कुछ बिखरा पड़ा है एक जगह पर आपको नहीं मिलेगा क्रोनोलॉजिकल सजाया हु तो जब तक ये नहीं होता है ना तब तक जो लोग स्वामी जी में रियली इंटरेस्टेड है जिनके बचों और कोई काम दम नहीं है जैसे हम लोग है तो हम लोग इसको पढ़ेंगे वो चलो इस किताब में अभी नेक्स्ट यहां पे है उसके नेक्स्ट डेट वाला यहां पे इसकी नेक्स्ट डेट वाला यहां पर है तो ऐसा वो खोल करके 10 किताब सामने रख के पढ़ेंगे क्तु एक जगह पर जद सब एक साथ में मिल जाए ना तो आप कॉलेज में ऐसे कोर्स इंट्रोड्यूस कर सकते हैं पीएचडी के रूप में कि अ तु कंप्रिहेंसिव लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद तब आप इसको कर सकते हैं रिसर्च लेवल पर उसको लिवेट कर सकते हैं स्टडी का मेन क्वेश्चन यह था कि सबसे पहले तो उसको स्वामी जी की लाइफस्टाइल उसको पसंद नहीं आई वो हिमालय गया था तो तो हिमालय जाकर के वो सब हिमालय के साधुओं के चक्कर में आया था थोड़ा सा तो बाह्य ऑस्टेरिटी उसके लिए बड़ी इंपोर्टेंट है कि खाने पीने में संयम वेजिटेरियन खाना खाना है बड़ा संयमित रहना है कपड़े वगैरह जो है बिल्कुल अल्प तरह के पहनने हैं वगैरह वगैरह उसके मन में बहुत कुछ था अभी स्वामी जी का था कि देखिए स्वामी जी कहते हैं कि मैं तो इतना मेहनत करता हूं चार-चार प्रवचन देता हूं दिन में तो मुझे तो नॉनवेज खाना ही पड़ेगा अदर वाइज मैं अपने शरीर को धारण नहीं कर पाऊंगा प्लस स्वामी जी एक चिरू फकते थे स्मोकिंग करते थे प्लस मने ये क्या है कि स्वामी जी का लाइफ स्टाइल उसको थोड़ा सा फ्लेशी दिखने लगा मैंने ज्यादा भोग विलास वाला दिखने लगा अभी हमारी दृष्टि से तो स्वामी जी का लाइफ में भोग विलास जैसा कुछ नहीं था किंतु यह उल्टा पुल्टा उसने पढ़ लिया था देख लिया था बोल कर के अब स्वामी जी का खाना देख कर के स्वामी जी की जो कुछ कुछ बेसिक डिमांड कि भाई थोड़ा सा तो कंफर्टेबल ही रहना चाहिए वरना सिख तपस्या करते तो बात अलग है यहां पर तो आप प्रवचन दे रहे हैं गांव गांव घूम रहे हैं इतना मेहनत कर रहे हैं स्टडी कर रहे हैं लिख रहे हैं तो आपको तो थोड़ा तो फिजिकल कंफर्ट चाहिए वो नहीं मिलेगा तो शरीर टिकेगा नहीं और तो यह बात स्टडी को सबसे पहले यहां से प्रॉब्लम स्टार्ट दूसरा है कि स्टडी के पास कुछ जमीन जायदाद थी तो अभी उसकी बीवी जो थी अभी बीवी को यह डर लग गया कि यह सब सन्यासियों के चक्कर में पड़े तो सब पैसा वगैरह इनको दे देंगे तो बीवी ने उसका दिमाग घुमाना शुरू किया इन सब लोगों के विरोध में तो एक दूसरा प्रॉब्लम स्टार्ट हुआ और ये दो प्रॉब्लम थे बेसिकली कि जिसकी वजह से उसका बेसिक प्रॉब्लम स्टार्ट हुआ और फिर तीसरा क्या था यह सुपीरियोर सिंपल रेशल सुपीरियोर वो भले ही चाहे अपने को कितना ही धार्मिक कितना ही वेदांती और कितना ही बताया आखिर में तो वो गोरा ब्रिटिश था और हम काले हिंदू थे जो कि उनके गुलाम थे तो जो स्टार्ट हुआ स्वामी जी की लाइफ स्टाइल को लेकर के और आखिर में यह जो बहुत सारे फैक्टर्स कंपाउंड हो करके उसमें भी निवेदिता जब आई ना तब एक बहुत बड़ा झटका इसको इस तरह से लगा कि वह था स्वामी जी का बड़ा कॉन्फिडेंट वेस जब तक व उसके साथ में अच्छा पट रहा था निवेदिता ने एक ही बार में स्वामी जी को गुरु के रूप में मास्टर के रूप में पुकारना शुरू किया अभी यह कहता है कि हां आई रिस्पेक्ट स्वामी जी किंतु उनको गुरु बनाना मास्टर को बनाने काले हिंदू को यह सब क्या सब उल्टा पुल्टा है तो निवेदित वा द फाइनल स्ट्रो निवेदिता जितना स्वामी जी को रिस्पेक्ट करती थी स्वामी जी के साथ में इंडिया आई पूरी सन्यासी नहीं हो गई पूरा जीवन समर्पित कर दिया और निवेदिता का सब प्रीचिंग नेचर था थोड़ा सा कि वो अभी जो मानती है सबको जोर जबरदस्ती दूसरों के सर पर बिठा देगी ऐसा एक थोड़ा सा था माने इतना सारा भी नहीं कि थोड़ा सा तो था और उसके एटीट्यूड से स्टर्डी को लगा कि अरे यह तो कुछ विचित्र डायरेक्शन में जा रहा है विविधता का जो श्र भक्ति है निष्ठा स्वामी जी के ऊपर में दूसरी डायरेक्शन में जा रही है इतना तो हमको हिंदू लोगों को सर पर नहीं बिठाना चाहिए तो यह रेसियल सुपीरियोर की बात उसके लेटर में या उसकी वाणी में कहीं दिखती नहीं है किंतु अल्टीमेटली वही सब फैक्टर इकट्ठा हो गए और फिर उसने स्वामी जी को ऐसा लिख कर के लेटर लिखा कि आप एक एक डॉलर की सिगार पीते थे महंगे महंगे कपड़े पहनते थे महंगे महंगे खाना खाते थे तो यह सब आप करते थे तो इसी वजह से मेरा आपके साथ में अभी आपके ऊपर में से मेरा विश्वास चला गया है तो स्वामी जी ने उसको पहले तो एक दो बार उसको इग्नोर कर दिया किंतु ये जो बार-बार ऐसा कहने लगता है तब स्वामी जी ने उसको डांट करके एक ऐसा लेटर लिखा ऐसा पावरफुल लेटर वो कंप र्स में है वो पढ़ने लायक है लेटर कि देखो मैं जो सिगार पीता था स्मोकिंग करता था वो मेरे अपने पैसों से और यह जो खाना खाता था नको लगता है कि नॉनवेज तो मैं तुम्हारे लिए चार-चार प्रवचन प्रतिदिन देता था मेरे शरीर का पूरा कचरा कर दिया मेरा भाई छोटा भाई लंडन आया था तो उस समय आप लोगों ने यह लोग उस समय लंडन में घर फड़ा करके रहते थे क्योंकि स्टडी का घर तो व किसी सर्ब में था तो स्टर्डी और मिस मुलर ये दोनों ने लंडन में एक घर घड़े पे लिया था और वहां पे रह रहे थे तो स्वामी जी कहते है कि मेरा जो भाई छोटा भाई बीमार था तो उसको मेरे साथ में रह कर के ट्रीटमेंट दिलवाने की बजाय आपने उसको भगा दिया और उस घर में भी मुझे एक ऐसा रूम दिया था जहां पे वो पूरा डैंप था चारों ओर से बंद था थोड़ा सा भी एन सर्कुलेशन नहीं था हवा उजास नहीं था और अच्छे से अच्छे रूम आप दोनों ने रखे हुए थे यह बोल कर के कि हम लोग भाड़ा दे रहे हैं तो बेस्ट रूम हमको मिलने चाहिए और फिर खाना खाता था तो मैंने इतना मेहनत करता था खाना नहीं खाऊंगा अच्छा तो स्वास्थ्य भंग हो जाएगा ऐसा बोल कर के स्कॉट विी ने जो उसको लेटर लिखा है सो आई थिंक दैट वाज हिज लास्ट कॉरेस्पोंडेंस विथ ये जब स्वामी जी सेकंड टाइम जब ब्रिटेन गए तो वो स्टडी उनको मिलने के लिए आए ही नहीं दूर दूर से वो एक लेटर लिख कर के उसने छोड़ दिया कि निवेदिता का आपके प्रति जो भाव है इस तरह का भाव मैं अपना नहीं रख पाऊंगा आई विल नॉट बी एबल टू कॉल यू मास्टर और गुरु एटस एटस ऐसा लिख कर के उसने कुछ दिया था तो स्वामी जी ने ज्यादातर तो इग्नोर ही किया था स्टडी को बस एक ही लेटर है पूरा कंप्लीट वर्स में आपको दिखेगा कि स्वामी जी ने किसी को सही सही अच्छे से डांट सुनाई है गुरु भाइयों को डांटते हैं किंतु क्या है वो तो रदय का प्रेम है किसी को सही सही डांटना इसी पत्र में आपको दिखेगा स्वामी जी के जीवन के सभी फेस को लीचे एक एक फेज एक एक स्टेज उसके ऊपर में आप लाइफ टाइम स्टडी कर सकते हैं ये जो ग्रेट समर है इतना सुंदर पीरियड है उसके ऊपर में आप कितना सब कुछ सोच सकते हैं बात कर सकते हैं ये कैम टेलर ये जब कैलिफोर्निया में स्वामी जी का कार्य समाप्त हो गया तो अभी पूरा फिजिकली तो यह हो गए शटर हो गए बोला कि चलो यहां पे कैप ग्राउंड है वहां पर चलते हैं तो कैंप टेलर बोल कर के एक जगह है वहां पर ये लोग थे कुछ ही दिन रुके हैं ज्यादा दिन रुके भी नहीं है किंतु उस कुछ ही दिनों की जो रेमसंस है वो पढ़ेंगे तो अरे बाप रे मतलब एक एक दिल स्वामी जी का जैसे कि दिव्यता और मधुरता से भरा हुआ है ये मिसेस हैंस प्रो उन दिनों का जो वर्णन करती है कि यहां पर हमारा स्टोप था यहां पर हम खाना पकाते थे यहां पर स्वामी जी का टेंट था यहां पर हमारा था हम यहां पर वो डेली वॉकिंग करने के लिए जाते थे यहां पर बैठ कर के स्वामी जी ध्यान करते थे तो एकएक वर्णन जो है उस जगह का जैसे कि हमारे हृदय को छू जाएगा आप उसको कभी भूल नहीं पाएंगे पढ़ कर के यह जो अमरनाथ गए खीर भवानी गए कश्मीर गए यह जो लाहौर पंजाब वगैरह की यात्रा की भारत वापस आने के बाद की सेकंड सेस की प्रव्रज्या के बाद की बात है जब वोह अमेरिका से लौटे थे उस समय की फिर आखिर में बिल्कुल देखिए कि अपनी जब 1901 और टू में अपनी माता जी को लेकर के नॉर्थ ईस्ट की यात्रा करते हैं ये जो कामाख्या देवी का दर्शन करवाने के लिए उस समय के जो रेमनी सेंस है उनके कि एक और सा स्टेटमेंट भी ऐसे फेंकते हैं बीच-बीच में कि अभी मेरे जीवन भर ठाकुर का काम किया अभी मैं अपना काम करता हूं ऐसा बोल कर के अपनी मां को लेकर के दर्शन करवाने के लिए ले गए थे फिर आखिर आखिर में काशी गए थे वो जो जापानीज जो इनके जो आए थे उनके एडमाइन इतना डिटेल में है कि आप जिस स्टेज के बारे में जितना डिटेल में जाना चाहे उसके बारे में आपको वहां पर प्रवचन दिया है वहां से लेटर लिखा है वहां के रिलेटेड किसी का रेमसंस है या तो फिर उसके बारे में लाइफ में कहीं पर लिखा है सब कुछ अपने पास अवेलेबल है किंतु एक स्टेज जैसे कि ये कामाख्या दर्शन के लिए गए तो उसके रिलेटेड जितने भी प्रवचन जितने लेटर जितना डिस्क्रिप्शन जितना वो सब एक जगह पर आपको नहीं मिलेगा यह सब कौन कह पाएगा आपको आप बोलेंगे कि चलिए केम टेलर के बाद बारे में सब कुछ बताइए तो व वही कह पाएगा जिसने की लाइफ कंप्लीट वर्क्स लेटर रेमस सबका थो स्टडी किया है अपने ब्रेन में सब बैठ करके बिठा करके रखा है वही सब अलग अलग जगह से लेकर के उसको इकट्ठा कर पाएगा तो अभी यूरोप की यात्रा हम लोग डिफरेंट डिफरेंट टॉपिक तो ले ही रहे हैं इसलिए मैं कंटीन्यूअस कोई टॉपिक नहीं लेता बीच बीच में थोड़ा सा क्योंकि मैं सोचता हूं इस तरह से कभी यह कभी वो कभी हो तो जो सोचता हूं उसके एक बार लेटर लिया था हमने स्वामी जी का एक लेटर लिया था प्रॉब्लम यही है कि जो चालू करेंगे उसका अंत नहीं आता है ऐसा अधूरा छोड़ा हुआ बहुत खुश है अपना मैंने क्रोनोलॉजी बनाया है वो क्रोनोलॉजी पूरा हजार पेन जाता है में जब डीसी में था तो यह जहां जहां पर जो कुछ भी मिला मैंने सोचा मैं एटलीस्ट क्रोनोलॉजी टेबल तो बनाता हूं फिर वो चाहे किताब का पब्लिश होना तो दूसरी बात है टेबल तो बनाता हूं वो भी हजार एंट्री तक जाती है उसमें भी पेजेस कितने हजार ते तो उसके पेजस स किंतु शॉर्ट फॉर्म में करके इनसाइट लेकर के कर सकते हैं जैसे कि अभी कैम टेलर का है या तो फिर यह पेसना का है या तो एनामे का है या सान फ्रांसिस्को का है या तो फिर ये बोस्टन या शिकागो का है ना कि खीर भवानी का है या तो फिर नॉर्थ वेस्ट विजिट का है काशी का है अल्मोड़ा का है कलकाता का ख का है दक्षिणेश्वर का है ऐसे कुछ कुछ लेकर के उसके ऊपर में इनसाइट्स क्या है पूरा डिटेल में नहीं जाकर एटलीस्ट इनसाइट क्या है उस समय उसको लेकर के कर सकते हैं बीच-बीच में