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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda : Life and Teachings : English & Hindi : 28 Feb 2023

Swami Vivekananda

वी हैव डिस्कस्ड दैट वी विल शेयर सम ऑफ द टीचिंग्स एवरीवंस इन अ वाइल। सो बिफोर सम डेज वी टॉक अबाउट महापुरुष महाराज एंड देन फॉर सम डे वी टॉक अबाउट मदर्स टीचिंग्स। सो आई थिंक इन रोटेशन नाउ इट इज टाइम फॉर स्वामी विवेकानंद। एंड देयर आर सम थिंग्स अबाउट स्वामी जी यू नो व्हेन इवन हियर अमोंग मक्स देयर इज ए यू नो देयर इज एन इंप्रेशन दैट स्वामी जी ओनली टॉक्स अबाउट पेट्रियोटिज्म अबाउट हाउ टू हेल्प पुअर मींस समथिंग एक्टिव मींस एक्टिविटी इज द ओनली थिंग दैट स्वामी विवेकानंद प्रीचिस दिस इज़ एन इंप्रेशन अमोंग मेनी पीपल्स माइंड बट वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट यू नो अह ठाकुर हिमसेल्फ हैड सेड दैट नरन इज एन अवतार एन अवतार ऑफ दिस सप्तर्षि वन ऑफ द सप्तर्शी इज द नरन नाउ सप्तर्शी वी नो दैट दे हैव बीन अब्सॉर्ब रिमेन अब्सॉर्ब्ड इन समाधि नाउ फॉर सच अ लॉन्ग टाइम सो इफ नरन एंड ही हैड अटेंड निर्विकल्प समाधि इन काशीपुर गार्डन इटसेल्फ इफ वी कंपेयर हिम टू अदर डायरेक्ट डिसाइपल्स देन वी विल सी दैट अदर डिसाइपल्स लाइक राजा महाराज लाइक महापुरुष महाराज दे हैड वर्क सो हार्ड इन ऑर्डर टू अटेन समाधि बट फॉर नरेंद्र द समाधि वाज़ इज़िएस्ट टू अटेन इनफैक्ट इन फैक्ट इन कंट्रास्ट टू अदर डिसाइपल्स टू हुम ठाकुर यूज्ड टू एनकरेज दैट यस यू शुड वर्क हार्ड इन ऑर्डर टू हैव स्पिरिचुअल एक्सपीरियंसेस ठाकुर हैड टू एक्चुअली लॉक स्वामी जीसस एक्सपीरियंसेस स्पिरिचुअल फ्लाइट बिकॉज़ इफ स्वामी जी गेट टू हाइली स्पिरिचुअल ही गेट्स टू अब्सॉर्ब्ड इन दी आत्मन व्हाट विल हैपन ही विल नॉट बी एबल टू वर्क सो देयर इज़ एन अनदर एस्पेक्ट ऑफ़ स्वामी विवेकानंदा ही इज़ अ स्पिरिचुअल टीचर पार एक्सीलेंस ही व्हाट ही सेस अबाउट आवर डे टू डे स्पिरिचुअलिटी आवर साधना जप ध्यान आवर एटीट्यूड आवर कंपैशन एथिक्स मोरालिटी योगा वेदांता दिस थिंग्स अह अह फॉर्म अ लार्ज पार्ट ऑफ ह टीचिंग्स इन फैक्ट वन डे व्हाट हैपन? आई वास टॉकिंग वि अ मक एंड आई टोल्ड हिम दैट सी आई एम कलेक्टिंग दिस स्पिरिचुअल टीचिंग्स ऑफ स्वामी विवेकानंदा। एस यू नो दैट आई हैव बीन शेयरिंग दिस कोटेशंस ऑफ स्वामी जी नाउ फॉर सम टू इयर्स समथिंग लाइक दैट। सो फार आई हैव कलेक्टेड समथिंग लाइक 1000 कोटेशंस ऑफ़ स्वामी विवेकानंदा। सो आई वास टेलिंग दिस अनदर मॉक दैट महाराज आई एम कलेक्टिंग ऑफ आउट ऑफ दिस 1000 टीचिंग्स आई एम कलेक्टिंग स्पिरिचुअल टीचिंग्स ऑफ स्वामी जी टू बी कंपाइल्ड इन अ बुक एंड अनदर पार्ट दैट विल बी एक्टिव पार्ट दैट राजसिक पार्ट इफ आई मे कॉल इट सो दिस पार्ट आई वांट टू कीप इट फॉर कर्म योगा फ्रॉम हाउ टू बिल्ड एन ऑर्गेनाइजेशन हाउ टू यू नो बी अ बी अ ब्लेसिंग टू सोसाइटी हाउ टू सर्व अदर दिस कंपैशन पार्ट एंड दिस डिवोशन पार्ट। तो ज्ञान भक्ति एंड वैराग्य दिस फॉर्म्स द स्पिरिचुअल कोर ऑफ़ स्वामी जीसस टीचिंग एंड कर्म योगा फॉर्म्स दिस सोशल एस्पेक्ट दिस कंपैशनेट एस्पेक्ट ऑफ़ स्वामी विवेकानंदस टीचिंग्स। सो फर्स्ट ऑफ़ ऑल आई वांट टू कलेक्ट ऑल दिस स्पिरिचुअल टीचिंग। सो स्वामी जी इन वन बुक। सो दिस मक टोल्ड मी दैट हाउ मेनी कोटेशंस विल इट बी आउट ऑफ 1000 इट वोंट बी मेनी बिकॉज़ स्वामी जी हैज़ में मोस्टली टॉक अबाउट दिस पेट्रियोटिज्म दिस कर्म योगा दिस एक्टिविटी एटसेट्रा आई से महाराज विल बी सरप्राइज्ड टू से दैट 75% ऑफ दिस कोटेशन दैट आई हैव कलेक्टेड फ्रॉम एव्री पार्ट ऑफ दिस कंप्लीट वर्क्स फ्रॉम लेक्चर्स फ्रॉम स्पीचेस फ्रॉम दिस क्लास टॉक्स फ्रॉम लेटर्स फ्रॉम राइटिंग्स फ्रॉम पोएम्स फ्रॉम एव्री पार्ट ऑफ कंप्लीट वर्क्स आई हैव कलेक्टेड दिस रिप्रेजेंटेटिव थाउजेंड कोड्स 75% ऑफ देम आर रिलेटेड टू इनर लाइफ रिलेटेड टू व्हाट वी मे कॉल दिस ट्रेडिशनल स्पिरिचुअलिटी एज अपोज्ड टू मेनी पीपल से दिस कर्म योग इज़ समथिंग कंप्लीटली न्यू देयर वाज़ कर्म योग इन गीता बट इट वाज़ एक्सप्रेस्ड डिफरेंटली इट वाज़ फॉर्मुलेटेड डिफरेंटली एज इफ फॉर एग्जांपल यू डू वरशिप टेंपल दैट इज अ कर्म योगा। इफ यू फॉलो द धर्मा व्हिच इज़ लेड डाउन फॉर यू से फॉर एग्जांपल विद्यार्थी धर्म, राज्य धर्म, पति धर्म, पत्नी धर्म, सती धर्म ऑल दिस इफ यू फॉलो दैट इज कॉल्ड कर्म योग। बट हियर स्वामी जी एक्सपंड्स दिस ट्रेडिशनल डेफिनेशन टू इंक्लूड दिस जनसाधारण दरिद्र नारायण, मूर्ख नारायण ऑल ऑफ देम। स्वामी विवेकानंदा। ही इंक्लूड्स इन दिस डेफिनेशन एंड सेज़ दैट नॉट ओनली राजा हैज़ अ रिस्पांसिबिलिटी टू टेक केयर ऑफ़ देम बट इवन द स्टूडेंट्स इवन द हाउसवाइफ इवन दिस फार्मर वर्किंग इन हज़ फील्ड ईच एंड एवरीवन ऑफ़ देम हैज़ अ रिस्पांसिबिलिटी टुवर्ड्स द अपलिफ्टमेंट ऑफ़ द सोसाइटी। नॉट लाइक दिस ट्रेडिशनल रोल्स व्हिच वेर डिस्क्राइब्ड इन आवर अह से आवर स्क्रिप्चर्स। इन आवर स्क्रिप्चर्स इट वाज़ सेड दैट यू सी ओनली अ किंग हैज़ अ रिस्पांसिबिलिटी टुवर्ड्स देम। अ फार्मर हैज़ रिस्पांसिबिलिटी ओनली टुवर्ड्स हज़ फार्मिंग। अ वैश्य हैज़ रिस्पांसिबिलिटी ओनली टुवर्ड्स ह मर्चेंडाइज़ व्हाटएवर ही इज़ डूइंग एज़ अ मर्चेंट। बट हियर स्वामी जी सेस वेदर वी मे बी अ स्टूडेंट, वेदर वी मे बी अ फार्मर, वेदर वी मे बी अ कोबलर, वेदर वी मे बी अ गोल्ड स्मिथ, वेदर वी मे अ हाउसवाइफ, हुएवर वी मे बी वेदर वी मे बी अ सोल्जर, डिप्लोमेट व्हाटएवर योर स्टेशंस मे बी गवर्नमेंट ऑफिसर, टीचर, डॉक्टर, व्हाटएवर बिज़नेसमैन, कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव, ईच एंड एवरीवन ऑफ़ अस हैज़ दैट रिस्पांसिबिलिटी टू रीच आउट टू दिस पुअर अह अह डाउन ट्रोडन सेक्शन ऑफ़ ऑफ द सोसाइटी एंड इट इज़ आवर रिस्पांसिबिलिटी टू हेल्प देम अगेन रेज अप। सो दिस टीचिंग ऑफ कर्म योगा स्वामी विवेकानंदा हैज़ एक्सपेंडेड एंड इफ यू रीड मोस्ट ऑफ द बुक्स ऑफ स्वामी जी यू विल रीड दिस एक्सपेंडेड डेफिनेशन ऑफ़ कर्म योगा एंड मोस्टली हाउ टू डील विद दिस कॉन्सिक्वेंसेस हाउ टू इंप्लीमेंट इट इन आवर लाइफ। बट एज आई सेड दिस 75 आई पर्सनली हैव फाउंड आउट ऑफ दिस 1000 कोटेशंस दैट 75% ऑफ देम डअल विथ व्हाट वी कॉल्ड ट्रेडिशनल स्पिरिचुअल लाइफ विथ आवर हाउ टू यू नो हाउ टू टर्न आवर माइंड इनवर्ड्स हाउ टू फोकस आवर माइंड अपॉन आवर हार्ट हाउ टू चेंज आवर एटीट्यूड हाउ टू मेक आवर हार्ट मोर डिवोशनल हाउ टू मेक आवरसेल्फ मोर एक्सेप्ट िंग टुवर्ड्स द पीपल लिविंग अराउंड अस। सो व्हेन आई फर्स्ट डिस्कवर दिस एनोमली दैट कंपेयर टू व्हाट इज बीइंग सेड अबाउट स्वामी जी दैट यस स्वामी जी मेनली टॉक्स अबाउट कर्म योगा। बट व्हेन आई फाउंड दैट ही मैक्सिमम ऑफ़ दिस टाइम ही टॉक्स अबाउट स्पिरिचुअलिटी देन आई रियलाइज़ दैट सी द फाउंडेशन ऑफ़ कर्म योगा इज़ दिस कर इज़ दिस स्पिरिचुअलिटी। इफ आवर हार्ट इज नॉट स्ट्रांग इनफ बिकॉज़ व्हेन यू डू कर्मा सो मेनी प्रॉब्लम्स विल कम यू विल बी एक्सेप्टेड बाय द सोसाइटी परहप्स परहेप्स यू विल बी प्रज़्ड बाय मेनी पीपल परहेप्स इट माइट आल्सो हैपन दैट पीपल विल रिवाइल यू पीपल विल क्रिटिसाइज यू सो दिस आइदर क्रिटिसिजम ओर प्रेज़ दिस बोथ विल कम आवर वे एंड व्हेन इट कम्स इट विल टेक आवर वेरी स्ट्रांग फाउंडेशन इज़ स्पिरिचुअलिटी टू नॉट टू रियेक्ट टू देम। इफ समवन प्रज़ेस यू एंड आई बिकम वेरी यू नो प्राउड ऑफ माइसेल्फ। आई बिकम वेरी एोगेंट दैट यस आई एम डूइंग ग्रेट वर्क एंड नाउ पीपल शुड स्टार्ट पेइंग रिस्पेक्ट टू मी। दिस सॉर्ट ऑफ़ एरोगेंस विल कम अप एंड व्हेन समवन डज़ नॉट्ट पे मी सफ्फिशियंट रिस्पेक्ट इफ समवन सेस दैट ओके, यू आर डूइंग ग्रेट वर्क। बट आई डोंट थिंक दैट इज़ दैट गुड देन वी विल फ्लेयर अप। वी विल बिकम एक्सट्रीमली एंग्री एंड वी विल से दैट सी ही डजंट नो व्हाट इज माय स्टेशन। आई एम सच एंड सच पर्सन एंड इनस्पाइट ऑफ गिविंग मी प्रॉपर रिस्पेक्ट ही इज़ आइदर इग्नोरिंग मी ओर ही इज़ टॉकिंग बिहाइंड माय बैक। ए सॉर्ट ऑफ़ पोइजनस टेंडेंसी विल स्टार्ट डेवलपिंग इन आवर हार्ट एंड इट विल बिकम अ कैंसर। इट विल बिकम अ करप्शन। इट विल डिस्ट्रॉय आवर व्हाटेवर एथिक्स एंड मोरालिटी वी हैव बीन फोल्लोविंग। एट द सेम टाइम व्हेन देयर इज़ एन एडवर्सिटी एंड व्हेन देयर इज अ एडवर्सिटी विल ब्रिंग फियर एंड व्हेन दिस फियर कम्स वी विल स्टार्ट एक्टिंग एज़ इफ आई कैन नॉट टेक एनी इनिशिएटिव यू नो दैट व्हेन बेलूरमट वाज़ इनिशियली फॉर्म्ड इट वाज़ से वन डे दिस वाइससरॉय ऑफ़ इंडिया आई डू नॉट रिमेंबर व्हाट हिज नेम वाज़ बट ही डिक्लेयर्ड इन वन डे दैट दिस रामकृष्ण मिशन इज़ हारबरिंग दिस फ्यूजिटिव्स फ्रॉम द लॉ दे आर हार्बरिंग दिस रेवोल्यूशनरीज़ वायलेंट रेवोल्यूशनरीज़ एंड एज़ सच वी आर कीपिंग एन आई ऑन रामकृष्ण मिशन व्हेन दिस वायसरॉय ब्रिटिश वाइससरॉय सेड समथिंग अबाउट लाइक दिस अबाउट रामकृष्ण मिशन यू कैन अंडरस्टैंड दैट व्हाट काइंड ऑफ़ डिवास्टेटिंग इफ़ेक्ट दिस विल हैव अपॉन द डिवोटीज़। दिस वाज़ समथिंग अराउंड आई थिंक 1911 और समथिंग लाइक दैट। सो पीपल गैदर्ड इन बेलूर मठ ऑल दिस डिवोटीज़ एंड दे स्टार्टेड टेलिंग राजा महाराज दैट सी दिस इज़ व्हाट वाइससोई हैज़ सेड एंड इफ पुलिस रेड्स बेलून मठ कंपाउंड ओर समथिंग लाइक दिस हैप्पेंस देन इट विल बी वेरी डेंजरस एंड डिवोटीज़ विल स्टार्ट स्टॉप कमिंग हियर। सो, यू सी, वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट व्हेन दिस सॉर्ट ऑफ़ क्राइसिस कम्स, वी कैन अंडरस्टैंड दैट हु इज़ अ रियल डिवोटी एंड हु कम्स हियर फॉर हिज़ ओन बेनिफिट। नॉट नेसेसरीली मटेरियल बेनिफिट मेनली फॉर स्पिरिचुअल बेनिफिट। आई विल कम हियर। आई विल अटेंड सम ब्लेसिंग फ्रॉम ठाकुर। एंड दैट इज़ इनफ फॉर मी। देयर आर दोज़ काइंड ऑफ़ डिवोटीज़ एंड देयर आर अनदर काइंड ऑफ़ डिवोटीज़ दैट यस आई एम टेकिंग ठाकुरस ब्लेसिंग। आई एम हैविंग दिस यू नो गुरु ग्रेट गुड फॉर्च्यून ऑफ़ साधु संघा। नाउ आई शुड कंट्रीब्यूट समथिंग बैक टू द मिशन। सो देयर आर दैट टाइप ऑफ़ डिवोटी आल्सो। सो ओनली दोज़ डिवोटीज़ रिमेन विद राजा महाराज एंड दे स्टार्टेड सेइंग दैट लेट अस फाइंड सम सॉल्यूशन टू दिस एंड दिस दिस मैटर वाज़ कन्व्ड टू जोसेफाइन मैक्लाउड जोसेफाइन मैक्लाउड वाज़ फ्रेंड्स विथ मिस्टर एंड मिसेज पैटर्सन आई थिंक दैट वाज़ देयर नेम दे वेर द एंबेसडर ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स। सो दिस एंबेसडर ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स इज़ अ ग्रेट मतलब पोजीशन बिकॉज़ यूनाइटेड स्टेट बाय दैट टाइम ऑलरेडी हैड बिकम अ ग्रेटर इंडस्ट्रियल मिलिटरी पावर देन ग्रेट ब्रिटेन। सो व्हेन दिस अमेरिकन एंबेसडर केम टू हियर दैट स्वामी विवेकानंद वाज़ अ सच अ ग्रेट पर्सन ही हैड ग्रेट इन्फ्लुएंस इन अमेरिका एंड दे ही हैड एस्टैब्लिश्ड दिस बेलून मठ एंड नाउ ब्रिटिश गवर्नमेंट इज़ हरेसिंग दिस बेलून मठ। सो दे इमीडिएटली कंप्लेंट टू दिस वायसरॉय दैट सी दिस इज़ नॉट व्हाट इज अ दिस इज़ नॉट ट्रू अबाउट बेलून मट्ट वी पर्सनली नो पीपल हु आर एसोसिएटेड विथ बैलून मड एंड नो सच वायलेंस एक्टिविटी इज़ गोइंग ऑन देयर व्हेन वायसरॉय केम टू हियर ही से ओके ही टूक हिज़ स्टेटमेंट बैक एंड अगेन डिवोटीज़ स्टार्टेड गैदरिंग इन बेलून मटड़ नाउ सी व्हेन दिस क्राइसिस कम्स इट इज़ इट इट टेस्ट्स आवर रिजल्ट दैट हाउ हाउ ग्रेटर आवर आवर डिवोशन टू ठाकुर इज। सो दैट इज व्हाई स्पिरिचुअल लाइफ इज सोेंट। इफ आवर स्पिरिचुअल फाउंडेशन इज़ नॉट देयर देन इफ एन स्मॉल क्राइसिस कम्स वी विल रन अवे। ओके लेट ठाकुर स्टफ सॉर्ट इज़ प्रॉब्लम आउट एंड देन वी विल रिटर्न एंड फाइंड वी विल रिटर्न बैक टू द टेंपल। इंस्टेड ऑफ दैट हैड वी बीन स्पिरिचुअल वेरी स्ट्रांगली स्पिरिचुअल देन व्हेन क्राइसिस कम्स वी विल रन टुवर्ड्स द टेंपल एंड वी विल से इफ देयर इज क्राइसिस अपॉन ठाकुर वी आर हियर टू टेक द बुलेट वी विल टेक द फर्स्ट बुलेट एंड देन अपॉन आवर डेड बॉडी पीपल विल हार्म बेलून मठ और रामकृष्ण मिशन। सो सी दैट इज व्हाई स्वामी जी अंडरस्टुड दैट इंप्लिकेशन ऑफ स्पिरिचुअलिटी इन आवर डे टू डे लाइफ इन ऑर्डर टू बिल्ड दिस पैलेस ऑफ कर्म योगा कंपैशन सोशल अपलिफ्टमेंट एंड दिस ऑर्गेनाइजेशन अबव दिस फाउंडेशन। सो स्टार्टिंग फ्रॉम टुडे वी विल टेक वन आफ्टर अनदर दिस स्पिरिचुअल कोटेशंस ऑफ़ स्वामी विवेकानंद एंड वी विल डिस्कस अबाउट इट अह फॉर सम टाइम। इट इज 8 ओ क्लॉक बट लेट मी टेक वन कोटेशन बिकॉज़ वी हैव स्टार्टेड हियर स्वामी विवेकानंदा सेस यू कैन सी द कोटेशन बिफोर यू स्वामी विवेकानंदा सेस द होल सोल पोर्स इन अ कंटीन्यूअस करंट टू गॉड देयर इज नो टाइम टू सीक मनी और फेम और नेम नो टाइम टू थिंक ऑफ एनीथिंग बट गॉड देन विल कम इंटू आवर हार्ट्स दैट इनफाइनाइट वंडरफुल ब्लिस ऑफ़ लव ऑल डिजायर्स आर बट बिट्स ऑफ ग्लास लव ऑफ़ गॉड इंक्रीसेस एव्री मोमेंट एंड इज़ एवर न्यू टू बी नोन ओनली बाय फिलिंग इट। ऑल अदर डिजायर्स आर लाइक बिट्स ऑफ़ ग्लास। सी दिस इज़ व्हाट वी शुड दिस इज़ हाउ वी शुड असाइन प्रायोरिटीज़ इन आवर लाइफ। वेदर यू मे बी अ हाउसहोल्डर, वेदर यू मे बी अ मॉक। बट, वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट द प्रायोरिटी इन आवर लाइफ। दिस दिस बर्थ माय प्रायोरिटी इज़ ऑफ़ कोर्स टू टेक केयर ऑफ़ दिस धर्म व्हिच द ड्यूटीज़ व्हिच आई एम असाइन टू इफ यू आर अ हाउसहोल्डर यू हैव योर ड्यूटीज़। आई एम ए मॉक। आई हैव माय ड्यूटीज़। हियर आई हैव टू सीट इन द डिपार्टमेंट इन माय ऑफिस होल डे। आई हैव टू डील विथ एवरीथिंग हियर। दिस इज़ माय रिस्पॉन्सिबिलिटी। दिस इज़ माई ड्यूटी फॉर नाउ। एंड व्हाटएवर यू आर डूइंग दैट इज़ योर ड्यूटी फॉर नाउ। बट दैट ड्यूटी इज ओनली फॉर दिस बर्थ। वन दिस बर्थ गोज अवे एव्री पीपल, एव्री पर्सन दैट वी न्यू ऑफ ऑल द वर्क दैट वी आर डूइंग इट विल रिमेन हियर। इट विल नॉट कम विथ अस इन आवर नेक्स्ट बर्थ। इट विल नॉट हैपन दैट देन दिस बर्थ आई एम ए मॉक एंड आई एम वर्किंग इन पब्लिकेशन डिपार्टमेंट। सो, अगेन द सेम वर्क कम टू मी इन द नेक्स्ट बर्थ। समथिंग एल्स माइट ऑल टुगेदर कम। सो दिस व्हाट इज द माय ड्यूटी ऑफ़ दिस बर्थ दैट वी हैव टू अंडरस्टैंड एंड व्हाट इज माय ड्यूटी दैट इज कंटिन्यूड बर्थ आफ्टर बर्थ आफ्टर बर्थ दिस एंटायर साइकिल ऑफ़ जन्म मृत्यु जरा व्याधि इट गोज़ ऑन रिपीटिंग एंड इट विल ब्रेक ओनली वंस वी हैव सम सॉर्ट ऑफ़ स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस इन आवर लाइफ। सो दैट इज़ आवर ड्यूटी। दैट इज़ आवर इटरनल ड्यूटी टू अटेन मोक्ष। एंड द वन ड्यूटी इज ओनली लिमिटेड टू दिस बर्थ धर्म अर्थ काम दिस फोर पुरुषार्थ आर पुट बिफोर अस धर्म अर्थ काम मोक्षा मोक्ष इज आवर इटरनल ड्यूटी धर्म अर्थ काम इज़ आवर लोकल ड्यूटी लिमिटेड टू दिस बर्थ ओनली एंड सी व्हाट स्वामी जी सेस दैट होल सोल पोर्स इन अ कंटीन्यूअस करंट टू गॉड व्हेन वी फोकस अपॉन गॉड सपोज वी आर सीटेड इन मेडिटेशन वी आर डूइंग जपम एंड ध्यानम देन व्हाट विल हैपन इफ वी आर सिंसियर इफ आवर प्रैक्टिस इज़ रेगुलर देन आवर एंटायर सोल आवर हार्ट विल ओपन दिस कंपैशन दिस लव दिस डिजायर्स देयर आर सी दिस इज़ अ सेम थिंग दिस इमोशन व्हेन इट इज़ इट टर्न्स नेगेटिव इट इज़ एक्सप्रेस एस दिस सेंसुअल डिजायर्स सेंसुअल थिंग्स दैट वी लव बट द सेम इमोशन व्हेन इट इज़ प्यूरिफाइड देन व्हेन इट इज़ मेड होली व्हेन इट इज़ ब्लेस्ड बाय ठाकुर ठाकुर दैट सेम इमोशन इज एक्सप्रेस टुवर्ड्स पीपल एस अ प्योर लव एज अ एमथी एज अ डिवोशन टुवर्ड्स ठाकुर नॉट नेसेसरी ओनली टुवर्ड्स ठाकुर बट टुवर्ड्स एवरीवन बिकॉज़ आवर हिंदूइज़्म टीचेस दैट गॉड लिव्स इन ईच एंड एव्री पर्सन ऑन अर्थ। सो दिस सेम इमोशन व्हेन इट इज इट टर्न्स नेगेटिव व्हेन इट टर्न्स तामसिक इट इज एक्सप्रेस ए सेंसुअल डिजायर्स एंड द सेम इमोशन व्हेन इट इज़ बिकम्स सात्विक व्हेन इट बिकम्स प्यूरिफाइड इट इज़ एक्सप्रेससेस एमैथी कंपैशन लव एंड डिवोशन लव दैट डिमांड्स नथिंग इन रिटर्न लव दैट इज़ नॉट लिमिटेड टू सम पर्सन और सम रिलेटिव बट इट इज़ डायरेक्टेड टुवर्ड्स ईच एंड एव्री ह्यूमन बीइंग ऑन ऑन प्लेनेट अर्थ ओके दिस मच फॉर इंग्लिश नाउ हिंदी

श्रीरामकृष्ण कथामृत : चतुर्थ दर्शन

अच्छा हिंदी में जो है कि हम लोग ऑलरेडी कथामृत का पाठ कर रहे हैं। श्री रामकृष्ण कथामृत कल हमने देखा कि किस तरह से मास्टर महर्षि दक्षिणेश्वर में आए देखा कि ठाकुर जो है वो जैसे बच्चों की तरह बच्चे होकर के ही हंसी मजाक कर रहे हैं और उन्होंने देखा कि क्या ये यही महापुरुष है जिन्होंने अगले दिन समाधि में जाकर के जो कि जन्म जन्मांतर से हमारा जो सर्वोच्च देह है इस तरह की जो समाधि जिसको पाने के बाद मनुष्य के जीवन में और कुछ करने का रह ही नहीं जाता। उसने सर्वोच्च जो प्राप्ति है मनुष्य धर्म मनुष्य जन्म की वो उसने प्राप्त कर ली है। तो ये वही महापुरुष है जिस जिन्होंने समाधि प्राप्त कर ली है जिनके मुंह पर सरस्वती बसी हुई है। वही महापुरुष आज इस तरह बच्चों के साथ में हंसी मजाक कर रहे हैं। और क्या ये यही महापुरुष है जिन्होंने मुझे कहा कि अरे 4:00 बजे मोर को अफीम खाने को दे दिया तो दूसरे दिन 4:00 बजे वही मोर वही अफीम खाने के लिए उपस्थित हो गया। तो ये हंसी मज़ाक करने वाले ठाकुर बच्चों जैसे बालक स्वभाववत ठाकुर और ये जो महापुरुष अवतार ठाकुर ये दोनों में क्या डिफरेंस नहीं दिखता? कंट्राडिक्शन पैराडॉक्स नहीं दिखता। एक ही आदमी इस तरह से एक क्षण आध्यात्मिक जीवन की सर्वोच्च ऊंचाई पर कैलाश शिखर पर सर है और अभी गंगा में पानी में तैरते तैरते बच्चों के साथ में हंसी मजाक कर रहा है। कहां वो कैलाश का शिखर और कहां ये गंगा का पानी गंगा की माने ये एक किस तरह का एक कंट्राडिक्शन ठाकुर के जीवन में दिख रहा है। मास्टर महाशय ये सोचते हैं और ठाकुर सामने क्या कहते हैं कि देखो ये सब छोटे-छोटे बच्चे हैं 18 19 साल के अभी आजकल तो 18 19 साल के बहुत मैच्योर हो जाते हैं किंतु उस समय तो ये मास मीडिया वगैरह नहीं था तो ये इनोसेंस बड़े लंबे समय तक बना रहता था तो ठाकुर कहते हैं कि देखो ये 18-19 साल के बच्चे तो अभी बच्चे ही है तो वो मेरे मेरी बातों से वो हंस रहा है किंतु ये थोड़ा बूढ़ा हो गया है और इसीलिए ये हंस नहीं रहा है तो मास्टर की उम्र जो थी उस समय तकरीबन आई थिंक 27 28 साल की थी। तो अभी आगे बात चलती है। मास्टर महर्षि कहते हैं कि बात ही बात में परम भक्त हनुमान की बात चली। हनुमान का एक चित्र श्री रामकृष्ण के कमरे की दीवाल पर टंगा था। श्री रामकृष्ण ने कहा देखो तो हनुमान का भाव कैसा है? धन मान शरीर सुख शरीर सुख कुछ भी नहीं चाहते केवल भगवान को चाहते हैं। जब स्फटिक स्तंभ के भीतर से ब्रह्मास्त्र निकाल कर भागे तब मंदोदरी नाना प्रकार के फल लेकर के लोभ दिखाने लगी। उसने सोचा कि फल के लोभ से उतर कर शायद वे यह ब्रह्मास्त्र फेंक दे। पर हनुमान इस भुलावे में कब पड़ने लगे? म यह एक आश्चर्य की बात है। कोई भगवान हनुमान के बारे में ऐसा सोच भी सकता है कि फल के लोभ से भगवान राम का काम कार्य जो है वो अधूरा छोड़ दे। माने देखिए जब आप किसी को पहचानते नहीं है तब उनके बारे में कैसी विचित्र विचित्र मनघणंत बातें जो है हम अपने मन में बना लेते हैं। किंतु जब हम उनको पहचानने लगते हैं। हमारे पास में 10,000 साल का समय है भगवान महावीर को समझने के लिए। हनुमान को समझने के लिए। आज हमको पक्का पता है कि हनुमान जी जो है इस तरह का कोई भी काम नहीं करेंगे जिससे राम के कार्य में व्याघात हो। अभी ठाकुर के बारे में भी देखिएगा किस तरह की मनगढ़ंत अफवाहएं जो है कुछ-कुछ लोग कोलकाता में फैला रहे थे। जब ठाकुर जीवित थे। कोई कोई कहता है कि जो उनकी जो धर्मपत्नी है शारदा देवी उनको वो नेगलेक्ट कर रहे हैं। उनका वो केयर नहीं कर रहे हैं। उनके ऊपर में ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसलिए बेचारी को जो है एक छोटे से कमरे में रहना पड़ रहा है। ऐसे ऐसा बोलने वाले लोग भी थे। किताबें भी लिखी गई है। ऐसी स्वामी जी को लेकर के भी किताबें लिखी गई है। किंतु देखिए 150 साल हो गए 200 साल हो गए ठाकुर मां स्वामी जी को आए हुए और ऐसा बोलने वाले ऐसी किताबें लिखने वाले कहां आकर के कहां चले गए? ठाकुर जो है हजारों हजारों साल तक जब तक ये मानव सभ्यता रहेगी तब तक जो है ठाकुर मां स्वामी जी का नाम अमर रहेगा। तो ऐसे बोलने वाले लोग भी आए आएंगे जाएंगे और कभी-कभी क्या होता है देखिए एक बात है जैसे निरंजन जी महाराज एक बार दक्षिणेश्वर आ रहे थे नौका में बैठ कर के तो ऐसे ही किसी ने ठाकुर की निंदा करने की शुरुआत कर दी तो निरंजनंद जी महाराज बड़े नाराज हो गए। अच्छा उस समय तो उनका नाम निरंजन था। वो कॉलेज में पढ़े हुए लड़के थे और किंतु उनका टेंपर बड़ा ही हाई था। तो जैसे ही सुना कि ये लोग ठाकुर की निंदा कर रही है वो कर रहे हैं तो उन्होंने जोर-जोर से नौका को हिलाना शुरू कर दिया। बोला तो ये लोग डर गए। अरे अरे आप क्या कर रहे हैं? नौका उलट जाएगी तो हम लोग नदी में डूब जाएंगे। तुम भी डूब जाओगे। तो निरंजन निरंजनंद जी कहते हैं कि अरे मैं यदि डूब जाऊंगा तो मेरे में इतनी शक्ति है कि मैं तर के गंगा पार हो जाऊंगा। आप लोग तैर नहीं पाएंगे। आपको शर्म नहीं आती इस तरह से ठाकुर की निंदा करते हुए तो बेचारे वो लोग बड़े डर गए और फिर निरंजनंद जी की माफी मांगने लगे। अभी जब ठाकुर के सुनने में ही यह बात आई तो कहा कि अरे तू पागल है क्या गाली मुझे दे रहे थे तुमको तुम्हारे पेट में क्या उससे दर्द हो रहा था कि देखिए यदि हम ठाकुर के पास आते हैं ठाकुर के भक्त है और किसी तरह से इस तरह से निंदा भी सुना दो दो चीज होती है यदि पता चलता है कि जो खतरा इतना बड़ा है तो बहुत सारे लोग भाग जाते हैं और खतरा जब छोटा-मोटा होता है, तो हम लोग एकदम लड़ने को उत्सुक हो जाते हैं। तो ये दोनों चीजें गलत है। मतलब बड़े खतरे आ जाने से भागना भी नहीं है और छोटे-मोटे लोगों को निंदा करते हुए देख के गुस्सा भी नहीं करना है। ये जो ठाकुर की लीला है, ठाकुर की लीला में ये सब चलता रहेगा। शांत मन से सब कुछ एक्सेप्ट करना है। ये थोड़ा डायवर्जन हो गया। अभी मंदोदरी सोच रही है कि इस तरह से फल का लोभ दिखा के जो हनुमान को जो है वो रोक लेंगे और किसी तरह से ट्रिक कर करके ये जो अस्त्र है उनके हाथ में से निकाल लेंगे। तब हनुमान ने क्या कहा? वो जो भजन है मुझे फलों का अभाव नहीं है। मुझे जो फल मिला है उससे मेरा जन्म सार्थक हो गया है। राम नाम का फल मिला है। मेरे हृदय में मोक्ष फल के वृक्ष श्री रामचंद्र जी स्वयं विराजमान है। श्री राम कल्पतरु के नीचे बैठा हूं। जब जिस फल की इच्छा होती है, वही फल खाता हूं। फल के बारे में कहता हूं कि तेरा फल मैं नहीं चाहता। तू मुझे फल ना दिखा। मैं इसका तुम्हें प्रतिफल दे जाऊंगा। अभी यह भजन है एक्चुअली यह सॉन्ग है इसको कि प्रोज़ कर दिया है हिंदी में ट्रांसलेट करके। इसीलिए ये जो कथामृत पढ़ने का सही आनंद होता है ओरिजिनल बेंगली में और ट्रांसलेशन में क्या है कि खास करके ये जो सॉन्ग्स है ठाकुर कुछ कुछ ऐसी बातें करते हैं जिससे कि उसको ट्रांसलेट करने से वो भाव नहीं रहता। तो जो भी है इसी भाव का एक गीत श्री रामकृष्ण गा रहे हैं। फिर वही समाधि देह निश्चल नेत्र स्थिर बैठे हैं जैसी मूर्ति फोटोग्राफ में देखने को मिलती है। भक्तगण अभी इतना हंस रहे थे पर अब सब एक दृष्टि से श्री रामकृष्ण की इस अद्भुत अवस्था का दर्शन करने लगे। मास्टर दूसरी बार यह समाधि अवस्था देख रहे हैं। देखिए एक तो हमने ठाकुर को देखा किस तरह से हंसी मजाक कर रहे हैं। फिर मास्टर सोच रहे हैं कि क्या ये वही ठाकुर है जो कि समाधस्त हो जाते हैं और जैसे सोचा वैसे ही देखा कि दूसरी क्षण में ही दूसरी पल में ही ठाकुर जो है समाधस्त हो गए हैं। तो यह जो कंट्राडिक्शन आपाततः जो हमको दिखती है ऊपर ऊपर से कि यह कितने भाव राज्य के राजा जो है ठाकुर उनके हृदय में कितने सारे भाव है वो कैसे एक एक के बाद एक भाव जो है उनके हृदय में उनके जीवन में एक के बाद एक खेल रहे हमको लगता है जैसे छोटा बच्चा होता है ना अभी वो अपनी मां के साथ में झगड़ा करके दौड़ दौड़ करके वो बाहर में जाकर के अपने मित्रों के साथ में खेलने लगेगा उसकी मां बुलाएगी आएगी भी तब भी नहीं आएगा। मां वो कहेगी अरे बेटा आजा खाने का समय हो गया है सोने। वो बच्चा जो है ना वो बोलता है मैं बच्चों मैं अपने मित्रों के साथ में खेलता ही रहूंगा। दूसरी क्षण है उसको अपनी मां याद आती है। बच्चे बच्चे रह जाते हैं। उसके मित्र रह जाते हैं। दौड़ के मां के वो गोद में जाकर के वो छुप जाता है। तो जैसे बच्चे के मन में बच्चे के जीवन में हमको एक एक मतलब कितना भाव का एक पूरा एक हमको रेनबो देखने को मिलता है कि एक के बाद एक अलग-अलग कलर के वो जो अलग-अलग वो तरह से प्रकाशित होने वाले भाव ठाकुर के जीवन में भी यही अभी हमारे साथ में हंसी मजाक कर रहे हैं तो दूसरे क्षण में मां काली की गोद में बैठे हैं। अभी वो जो है पंडित लोग जब शर्मा जाएंगे इस तरह से शास्त्रार्थ कर रहे हैं। हमारे वेद वेदांत उपनिषद पुराण तंत्र में से वो जो हाईएस्ट टीचिंग है वो भक्तों को बता रहे हैं और दूसरे ही क्षण जो है वो निर्विकल्प समाधि में वेदांत में कही हुई वो निर्विकल्प समाधि में चले जाएंगे। तो ये ज्ञान, भक्ति, कर्म और ध्यान ये चारों का ये जो सम्मिलन है ठाकुर के जीवन में हमको क्षण प्रतििक्षण देखने को मिलता है। हमारे जीवन में ऐसा होगा कि हम यदि इनमें से कोई एक भाव भी लेकर के थोड़ा बहुत भी आगे बढ़ बढ़ पाए तो हम हमको लगेगा कि हां मेरा जीवन जो है वो कृतार्थ हो गया है। चरितार्थ हो गया है। तो यही डिफरेंस है मनुष्य के बीच में और अवतार के बीच में। बड़ी देर के बाद में अवस्था का परिवर्तन होता है। मास्टर महाशय आगे कहते हैं देह शिथिल हो गई। मुख साहस्य हो गया। इंद्रियां फिर अपना अपना काम करने लगी। नेत्रों में से आनंद आश्रू बहाते हुए राम राम उच्चारण ठाकुर कर रहे हैं। मास्टर सोचने लगे क्या यही महापुरुष लड़कों के साथ में हंसी मजाक कर रहे थे? अब तो यह जान पड़ रहा था जैसे कि 5 वर्ष के बालक हैं। श्री रामकृष्ण प्रकृतिस्थ होकर के फिर प्राकृत मनुष्यों जैसा व्यवहार कर रहा है। जैसे देखिए मास्टर महाशय भी नए-नए आए थे ना वो भी सोचते हैं। जैसे कि आप अपने शिष्य है या तो अपने अंतरंग है उनके साथ में हंसी मजाक करना अर्थात ये आध्यात्मिक जीवन नहीं हुआ। और जब आप ठाकुर ईश्वर का नाम ले रहे हैं। जप ध्यान कर रहे हैं तो ये आध्यात्मिक जीवन हो गया। ये एक जो मिसकसेप्शन था जो मास्टर महाशय वैसे ये लिख रहे हैं ठाकुर की महासमाधि के 10 12 साल के बाद में जबकि उनकी धर्म और आध्यात्मिकता की अंडरस्टैंडिंग जो है कंप्लीटली वो वो मैच्योर हो चुकी थी। उस समय मास्टर महाशय ये लिख रहे हैं। किंतु फिर भी वो वाचकों जो है हमारे जो रीडर्स जो है उनको ये दिखा रहे हैं कि उनकी खुद की जो स्पिरिचुअल इवोल्यूशन कैसे हुआ। ऐसा नहीं है कि प्रथम चतुर्थ दर्शन में ही ठाकुर जो कर रहे हैं उसका अंडरस्टैंडिंग अभी जो ठाकुर की महा 1911 12 15 ये सब समय में ठाकुर की महासमाधि के कितने सालों के बाद में वो अपनी उस समय की अंडरस्टैंडिंग डालेंगे यहां पे कि ना ये ठाकुर जो कर रहे हैं ठीक ही कर रहे हैं अवतार को ऐसा ही करना चाहिए अदर इंस्टीड ऑफ दैट अपने मन की जो दुविधा है अपने मन की ये जो डाउट्स है वो यहां पे व्यक्त कर रहे हैं। हमारे साथ में भी ऐसा होता है। हम लोग भी जब पहली बार ये पढ़ना शुरू करते हैं हमारे मन में भी यही सब डाउट होंगे और हमको लगता है कि यदि ये लेखक ने यही डाउट एक्सप्रेस किया है और उस मतलब पहले 101 पेज में ही उसने डाउट एक्सप्रेस किया है और इसके बाद में हजार पेज और भी बचे हैं तो हमको यह आश्वासन रहता है कि जो लेखक जो है हमको मूर्ख नहीं बना रहा है। वो भी हमारी ही तरह एक एक अविश्वास या तो अविश्वास तो नहीं कहेंगे। हम कहेंगे कि एक थोड़ा सा डाउट लेकर के यह आध्यात्मिक जर्नी की शुरुआत की है। किंतु ये जर्नी जब समाप्त हुई तब 100% उनका जो मन है ठाकुर की ओर श्रद्धा भक्ति से भर गया था। तो ये सिर्फ ये बात नहीं है कि ठाकुर हमको क्या सिखा रहे हैं। कथामृत में ये भी देखना है कि एक भक्त जब ठाकुर के पास आता है खास करके आज के पढ़े लिखे लोग वो जो लाटू महाराज है नरेंद्र है वो सब की बात ही अलग है। वे लोग जन्म सिद्ध है नित्य मुक्त है। वे लोग के मन में डाउट वगैरह होंगे भी। जैसे नरेंद्र के मन में नरेंद्र के मन में बहुत सारे डाउट थे। ठाकुर को खुलेआम कहता घूमता था कि आपका मन खराब मतलब आप या तो पागल हो गए या तो फिर आपको ये हेलुसिनेशन हो रहा है। तो नरेंद्र तो ये खुलेआम कहता था किंतु फिर भी हम शायद नरेंद्र की जर्नी के साथ अपने को आइडेंटिफाई ना कर पाए। हम कहेंगे अरे वो तो शिव का अवतार है। सप्तर्शी का अवतार है। उससे हमारा क्या? किंतु मास्टर महाशय तो है समवन वी कैन आइडेंटिफाई आवरसेल्व्स विद। मास्टर महाशय को थोड़ा गर्व था कि मैंने एमए किया है। मैं विद्यासागर के स्कूल में टीचर हूं। तो आई एम अ पर्सन विथ अ ग्रेट स्टेटस। तो अभी ये आदमी जब इस तरह के जो मतलब एक डिवोटी ठाकुर के पास आते हैं मन में थोड़ा संशय है और धीरे-धीरे करके ठाकुर उनका हाथ पकड़ कर के किस तरह से ये अमृत की ओर ले जाते हैं ये जब हम अपनी नजरों से देखते हैं तो हमारे मन में भी भरोसा रहता है कि ठीक है चलो मैं भी तो एक सामान्य आदमी की तरह वर्तन कर रहा हूं अभी किंतु मुझे यह भरोसा है कि इवेंचुअली ठाकुर मेरा हाथ पकड़ कर के मेरे लिए जो श्रेष्ठ है वो अवश्य मुझे देंगे वो जो अमर और फल प्राप्ति जो है राम नाम का फल जिसके बारे में ये जो महावीर हनुमान कह रहे हैं वो राम नाम का फल जो है कल्पतरु में से निकाल करके तोड़ करके ये ठाकुर जो है वो हमको भी देंगे ये भरोसा हमको है। तो ये कथामृत देखिए कितने लेवल पे लिखा गया है। मास्टर महाशय जो है कितना सूक्ष्म तरह से इसकी रचना की है। यदि हम प्रत्येक लाइन को पढ़ें और इसका एनालाइज एनाल इसको एनालाइज करने का प्रयत्न करें तब हमको पता चलेगा कि यह सिर्फ ठाकुर की बातें नहीं है। सिर्फ ठाकुर का टीचिंग नहीं है। सभी डिवोटी की एक जर्नी है। जैसे ये गिरीश घोष के बारे में कहते हैं। जैसे ये जो रामचंद्र दत्त के बारे में यहां पर वर्णन है। या तो फिर ये जो केशव सेन के बारे में वर्णन है। या तो फिर यह जो है विद्यासागर के बारे में वर्णन है। कितने सारे लोग ठाकुर के पास आए। तो ठाकुर ने उनको क्या कहा इसका तो वर्णन यहां पर है किंतु कहने के बाद सामने वाले का जो जीवन परिवर्तन कैसे हुआ खास करके केशव सेन के बारे में यहां पे बहुत अच्छे से हमको बताया गया है कि किस तरह से ठाकुर सर्वप्रथम केशवसेन को मिले तो वो तो नेचुरली वो तो यही सोचेगा कि काली का पुजारी है और इस समय वो जो भद्र समाज में ये जो बात चलती थी कोलकाता के कि कालिका पुजारी अर्थात अंधश्रद्धा की आखिरी सीढ़ी माने इससे ज्यादा अंधश्रद्धा श्रद्धालु आदमी हो ही नहीं सकता जो कि काली का पुजारी है। गरीब ब्राह्मण है। कुछ मांगने के लिए आया होगा। अब ये मैं अनुमान करके कह रहा हूं लिखा नहीं है। किंतु ये मेरा एनालिसिस है। तो कहां वहां से सोचते हुए आखिर में यहां तक आ गए कि मां का नाम लेकर के खोल करत लेकर के कीर्तन कर रहे हैं वो। यही केशवसेन और जब ये वो जो ब्रह्म समाज में से अलग होकर के ये जो नवविध विधान न्यू टेस्टामेंट ब्रह्म समाज की स्थापना की वहां पे बहुत सारे ठाकुर के जो टीचिंग्स है वो उसमें लिए गए और ये जो सुरेश मित्र है उसने ये केशव सेन के लिए वो जो एक पेंटिंग की रचना की थी वो पेंटिंग ड्रॉ करवाया था। यदि आपने देखा हो ठाकुर खड़े हैं ऐसा वो वृक्ष है कल्पवृक्ष उसके नीचे में ठाकुर इस तरह से समाधि मग्न है और सभी धर्म के और रिप्रेजेंटेटिव अवतार संत जो है उस वृक्ष में चारों ओर है अर्थात ना सॉरी वो एक अलग पेंटिंग है ये जो पेंटिंग जो है वो सुरेश मित्र ने बनवाया है ठाकुर खड़े हैं वैसे और मंदिर है मस्जिद है ये चर्च है और फिर ये जो साधु है फिर पादरी है फिर वो जो एक ये जो इस्लाम धर्म का कोई है। इस तरह से पेंटिंग जो है वो के सुरेश मित्र ने जो है इनके लिए बनवाया था केशव सेन के लिए। तो किस तरह से ये मतलब ये स्लोली एंड ग्रेजुअली स्वामी जी कहते हैं ना कि रामकृष्ण संघ जो है श्री रामकृष्ण का टीचिंग्स कैसा है कि जैसे कि सुबह-सुबह ये जो ये जो रोज जो है गुलाब का फूल उसके ऊपर में ओस कैसे गिरती है? तो ओस गिरती है तो गुलाब का जो पौधा है वो किस तरह से परिपुष्ट होता है जो कि गार्डनिंग करते होंगे उनको पता होगा मैं यहां पे मेरे गार्डन में एक रोज का पौधा है तो उसमें देखिएगा इस गरम में पांच गुलाब के फूल उसमें आए हैं। मैं फोटो लेकर के भेजूंगा बाद में ग्रुप में। तो देखिए कि सुबह का जो ये ओस होता है वो बहुत ही इंपॉर्टेंट होता है। ये जो गार्डनर्स जो है वो आपको बताएंगे वे जो गुलाब के पौधों के लिए तो उससे क्या है उसकी जड़ जो है परिपुष्ट होती है। तो किंतु ये कितना जेंटल होता है। यदि हम उसके ऊपर में पानी डालेंगे तो पानी तो फोर्स से गिरेगा। यदि हम उसके भीतर में ये जो फर्टिलाइजर वगैरह है वो डालेंगे तो एक इन्वेसिव थेरेपी जैसा हो जाता है। इन्वेसिव प्रोसीजर जैसा हो जाता है। आप मिट्टी को इधर-उधर करेंगे उसमें वो खातर डालेंगे तो मतलब ये तो एक रेडिकल चेंज होता है ना उसकी केमिस्ट्री में उसकी इकोसिस्टम में किंतु सुबह की जो ओस उसके ऊपर में गिरती है गुलाब को पता भी नहीं चलता किंतु गुलाब देखने में इतना सुंदर हो जाता है और परिपुष्ट होता है। तो जैसे ही स्वामी विवेकानंद का ये एनालॉजी है कि इस तरह से ठाकुर का टीचिंग्स जो है वो भारतीय समाज के ऊपर में भारतीय जनमानस के ऊपर में इस तरह से वो सुबह की ये जो ओस है इस तरह से प्रेक्षित होता है और हमको पता भी नहीं चलता हमारा जीवन जो है परिवर्तित हो जाता है। तो वैसे ही ब्राह्म समाज में इस तरह से परिवर्तन आया। भारत की जो यह स्वतंत्र सेनानी जितने भी है देखिएगा किसी ने ऐसा नहीं कहा कि एक धर्म श्रेष्ठ है या दूसरा धर्म जो है निकृष्ट है उससे मतलब खराब है। सर्वधर्म समभाव जो है सभी के प्रति अपने हृदय में एक एमैथी और कंपैजन रखना है। एक मोरालिटी और एथिक्स के ऊपर में यह फ्रीडम मूवमेंट का गठन करना है। यही बात हमारे जो प्रथम पंक्ति के फ्रीडम फाइटर थे। बहुत सारे लोग थे फ्रीडम फाइटर में और बहुत सारे लोगों के बहुत सारे विचार भी थे। किंतु यदि इफ देखेंगे कि फर्स्ट लाइन जो है फ्रंट लाइन में जितने भी फ्रीडम फाइटर खड़े थे वे लोग सबने ठाकुर के जो टीचिंग से इन एसेंस अपना लिए थे। भले ही चाहे वो ठाकुर और स्वामी जी को एक्सेप्ट करें ना करें। वो जो एक शंकरी प्रसाद बसु है कोलकाता में अभी तो उनका निधन हो गया। कोलकाता के बेंगली डिपार्टमेंट में हेड ऑफ द डिपार्टमेंट है बेंगली लैंग्वेज के। उन्होंने बहुत ही सुंदर किताबें एक सीरीज़ ऑफ़ बुक्स लिखी है कि स्वामी विवेकानंद और समकालीन भारतवर्ष उसमें उन्होंने बहुत अच्छे से दिखाया कि किस तरह से उस समय के जो अग्रगण्य लोग थे ये जो देवेंद्रनाथ ये जो रविंद्रनाथ टैगोर है रवंद्र नाथ टैगोर कहते थे मैं स्वामी जी को कभी मिला नहीं किंतु ये एक अहम होता है ना कवि का कि मैं क्यों भाई उनसे मिलने को जाऊंगा और क्यों मैं उनके विचार ग्रहण करूंगा किंतु ये मतला अच्छे से वो रिसर्च करके दिखाते हैं कि नहीं वो ब्राह्म समाज की एक सभा हुई थी जहां पे नरेंद्र भी उपस्थित थे और यह जो रविंद्र नाथ टैगोर भी थे और वो उनकी मुलाकात ना हुई हो ऐसा संभव ही नहीं है अच्छे से प्रूव करते हैं बट अदर देन दैट ये जो प्रथम पंक्ति के जितने भी वो गणियामान्य व्यक्ति थे उस समय भारत भारतीय समाज के सबके जीवन में किस तरह से स्वामी जी के विचारों का प्रभाव उतरा है किस तरह से वे लोग वन इन वन वे और अनदर स्वामी जी से वो इन्फ्लुएंस हुए वो बहुत ही अच्छे से मतलब सेवन 8 वॉल्यूम में रिसर्च करके उन्होंने दिखाया है। तो ये मतलब कहते हैं कि जो ठाकुर का जो इन्फ्लुएंस है हमारा जीवन भी परिवर्तित कर देगा और जैसे कोई मतलब हमको ऐसा पता भी नहीं चलेगा कि कैसे स्टेप बाय स्टेप जो है हम आगे जा रहे हैं। ये ठाकुर ने एक बार बहुत अच्छा उदाहरण दिया था कि जैसे देखिए कोई कोई कहता है नहीं कि अरे मैं तो ठाकुर का नाम ले रहा हूं। जप ध्यान कर रहा हूं। जीवन में कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा। कल जैसा था आज भी तो मैं वही हूं। क्या करूं मैं मैं मुझे तो कुछ समझ में नहीं आता। क्या मेरा जीवन सार्थक भी हो रहा है कि मैं निरर्थक हो रहा है मुझे पता ही नहीं चलता। तो उस समय ठाकुर का वो उदाहरण याद करना है। ठाकुर कहते हैं कि जब किला म पता नहीं कौन से किले के बारे में बोल रहा है वो किंतु वहां पे वो जो कलमबाड़ा रास्ता अर्थात कि स्लोपिंग वो रैंप है। अभी वो रैंप के ऊपर में आप चढ़ेंगे तो आपको पता नहीं चलेगा। जब आप स्टेप्स चढ़ते हैं तो आपको थोड़ा एग्जशन फील होता है। आपको ऐसा लगता है कि थोड़ा बहुत मैं मेहनत कर रहा हूं, कष्ट कर रहा हूं, एक्सरसाइज कर रहा हूं। किंतु रैंप के ऊपर में चढ़ेंगे या उतरेंगे आपको कोई भी प्रकार का एक्सरशन नहीं फील होगा और आपको लगेगा जैसे मैं ये रास्ते पे जा रहा हूं। ऐसे ही जा रहा हूं। तो किंतु थोड़ी देर के बाद आप पीछे देखेंगे रैंप के। तो देखिए अरे कहां वो लोग अभी आप थोड़ी देर पहले जमीन पे खड़े थे और कहां पे अभी आप इतने ऊपर आ गए। तो ठाकुर का आशीर्वाद जो है वो रैंप के ऊपर में चढ़ने या उतरने के समान है। इस तरह से सूक्ष्म रूप से हमारे जीवन को परिवर्तित करता है कि हमको आप उसका पता भी नहीं चलता और मतलब एक रेडिकल चेंज होना जीवन में या तो फिर ऐसा कि बहुत सारी तपस्या करके अपना मन जो है वो बहुत ही तरह वो कष्ट पाए ऐसा कष्ट वगैरह नहीं होता। धीरे-धीरे करके ठाकुर के आशीर्वाद जो है हमारे जीवन को परिवर्तित करते हैं। हमारे जीवन को वो आशीर्वादमय बना देते हैं। अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्स श्री राम कृष्ण