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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमक जब से हमने महाकाली के ऊपर में क्लास स्टार्ट किए हैं यहां पर प्रकृति भी रद्र स्वरूप पकड़ी हुई है और कल से ही जोर जोर से बारिश हो रही है बिजली के धमाके हो रहे हैं लाइट आ रही है जा रही है मुझे तो आज यही डर था कि क्लास होगा कि नहीं क्योंकि सुबह से लाइट नहीं थी तो मां की इच्छा यह भी लगती है कि वह अपनी प्रेजेंस उनकी उपस्थिति भी हमको बताए कि हां मैं हूं और साथ में वह यह भी चाहती है कि क्लास चालू रहे तो बिल्कुल क्लास चालू होने से पहले लाइट आ गई वरना मैं अभी मैसेज करने ही वाला था कि लाइट नहीं है तो क्लास बंद रखना होगा तो लगता है कि मां की इच्छा है कि क्लास चले अच्छा कल हमने देखा कि किस तरह से एक रद्र स्वरूप प्रकृति हो ना युद्ध हो ना कि महामारी यह जब हमारे सामने आता है तो मनुष्य का हृदय किस तरह से भय से संकुचित हो जाता है भय से पैरालाइज हो जाता है और सबसे बड़ा भयानक घटना क्या होगा मनुष्य के जीवन में वही होगा कि न्यूक्लियर एक्सप्लोजन जो लोग जिन लोगों के ऊपर में यह हिरोशिमा और नागासाकी में जिन लोगों के ऊपर में सबसे पहला एटम बम फेंका गया उन लोगों का जो अनुभव है वह हम सुनेंगे तो हमारे हृदय भी जैसे कि एक क्षण के लिए मने यह हो जाएंगे डर के मारे बंद हो जाएंगे वह लोग कहते हैं कि जैसे दिन में एक दूसरा सूरज उगा हो ऐसा प्रतीत हुआ इतना प्रकाश सबसे पहले तो फैल गया क्योंकि पता है तो कि प्रकाश की स्पीड व है 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड और आवाज यानी कि साउंड की स्पीड है समथिंग लाइक 1000 किलोमीटर पर सेकंड और फिर उसके बाद में सबसे पहले प्रकाश फैलता है जब आप न्यूक्लियर एक्सप्लोजन देखेंगे ऐसा लगेगा कि जैसे एक दूसरा सूरज उने व आकाश में प्रकट हुआ है उसके बाद में उसका आवाज सुनाई देगा भयानक विस्फोट और उस उसके बाद में तीसरा होगा यह शॉक वेव्स जो शॉक वेव्स आएंगे वह जैसे कि पूरे उसके रास्ते में जो कुछ भी आएगा उसको तहस नहस कर देगा बिल्डिंग होगा गाड़ी होगा मनुष्य होगा सब कुछ खत्म हो जाएगा तो यह है न्यूक्लियर बम जब सबसे पहली बार न्यूक्लियर एक्सप्लोजन हुआ जिसको कि अमेरिका अमेरिकन लोगों ने यह न्यूक्लियर बम बनाया था और जो उनका प्रोजेक्ट था प्रोजेक्ट मेन हटन यह कोड नेम था न्यूक्लियर बम बनाने का और इस प्रोजेक्ट मेन हटन अ कोड नेम से जो न्यूक्लियर बॉम बना उसका जब सर्वप्रथम विस्फोट हुआ उस समय उस प्रोजेक्ट का जो लीड साइंटिस्ट था उने चीफ साइंटिस्ट उसका नाम था रॉबर्ट ओपन हैमर अभी यह रॉबर्ट ओपन हैमर का मूवी भी रिसेंटली रिलीज हुआ है उसको यह थोड़ा सा हिंदू शास्त्रों में थोड़ा सा एक रुचि था अभी कितना डेप्थ था उसका इसमें पता नहीं किंतु ऐसा कहा जाता है ऐसा कहते हैं कि जब प्रथम न्यूक्लियर एक्सप्लोजन उसने देखा और उसका भयावह स्वरूप देखा तब उसके मुंह से गीता का भगवान श्री कृष्ण का वह श्लोक उसके मुंह से निकल पड़ा भगवान क्या कहते हैं कालोसमी लोक क्षय कृत प्रवो लोकान समा हर्तो मह प्रवृत मैं लोगों का नाश करने वाला प्रवृत काल हूं इस समय में इन लोगों का संहार करने में प्रवृत्त हूं यानी कि जब कृष्ण अर्जुन किसी भी तरह से युद्ध करने पर राजी नहीं हो रहा था तो भगवान कृष्ण ने अर्जुन को अपना वोह विश्वरूप दर्शन करवाया अर्जुन ने क्या देखा कि भगवान कृष्ण के मुह में मुंह के भीतर में क्राल वदन के भीतर में अभी तो यहां पे उन्हीं की साइज के एक आम आदमी की तरह ही भगवान कृष्ण खड़े हैं अर्जुन के सारथी के रूप में अर्जुन को उपदेश दे रहे हैं और कहां अभी यह विराट मूर्ति उसके कितने ही चेहरे हैं कितने भयावह कराल मुख है और इन सब मुखं के भीतर में यह दुश्मनों की सेना कौरवों की सेना जैसे कि एक जलती हुई भट्टी के भीतर में सब प्रवेश हो रहे हो इस तरह से कौरवों की सेना भगवान कृष्ण के मुह में प्रवेश हो रही है और भगवान कृष्ण क्या कहते हैं मैं काल हूं और मैं इन लोगों का संहार करने के लिए प्रकट हुआ हूं अर्जुन तुम युद्ध करो ना करो इन लोगों का संहार आवश्यक है संहार निश्चित है तुम सिर्फ निमित्त बनो निमित्त मात्रमो सव्य साचीन तुम इन लोगों का संहार तुम नहीं कर रहे अर्जुन जब यह कहता है कि अरे यह मेरे काका मामा चाचा जो भी सामने खड़े हैं गुरुजन जिनके सामने जिनके साथ में मैं पला बड़ा हूं जिनके प्रति मेरी श्रद्धा है आज क्या मुझे उनके साथ में युद्ध करना होगा क्या आज मुझे उनका वध करना होगा इससे तो अच्छा है कि मैं सन्यास धारण कर लूं इससे तो अच्छा है कि मैं युद्ध के मैदान से चला जाओ उस समय भगवान कृष्ण को यह उपदेश देते हैं कि जिन सबको तुम देख रहे हो ऑलरेडी मृत्यु के घाट उतार दिए गए हैं ऑलरेडी उनका संहार हो चुका है संहार करने वाला मैं हूं क्योंकि जैसे होता है ना इवोल्यूशन में कैसा होता है इवोल्यूशन जो होता है ना बड़ा एक क्रूर एक सिस्टम है इवोल्यूशन क्या कहता है कि जिसका जब समय आता है उसको हम यह उसका पोषण होगा प्रकृति उसको लालन पालन करेगी अब जिसका समय समाप्त हो चुका है जिसकी एक्सपायरी डेट आ चुकी है उन लोगों का प्रकृति संहार कर देगी प्रकृति या ईश्वर जिस बात पर हमको विश्वास हो अभी डायनोसोर को देखिए एक समय था डायनोसोर का पूरी पृथ्वी पर राज था 6.5 65 मिलियन इयर्स अगो समथिंग लाइक दैट 65 करोड़ साल पहले की बात है कि पृथ्वी पर पूरा डायनोसोर्स का राज था किंतु एकाएक क्या हुआ कि एक उल्कापात हुआ पृथ्वी के ऊपर में और उससे जो ये तो उल्कापात यानी कि हजार एटम बम एक साथ में फोड़ उस तरह का भयानक विस्फोट उल्का यानी कि ये जो आकाश में जो ये मेटराइड इर्दगिर्द घूमती रहती है तो उसमें से एक आकर के पृथ्वी पर टकरा गई और फिर उससे जो भयानक विस्फोट हुआ जो प्रकृति ने जो अपना रुद्र स्वरूप दिखाया पृथ्वी के ऊपर में जितने भी डायनासोर थे वह सब उसका खात्मा हो गया सबका संहार हो गया और यह बदली हुई क्लाइमेट थी उसमें यह गर्म लहू वाले जो जानवर थे जिनको कि मैमल्स कहते हैं और मैमल्स का ही अल्टीमेट इवोल्यूशन हमारे भीतर हम है हम लोग ये जो मैमल्स प्रजाति में आते हैं डायनोसोर्स को रेप्टाइल कहते हैं तो वो रेप्टाइल्स अर्थात कि ठंडे खून वाले जो कि बदलती हुई क्लाइमेट के साथ में अपने को जिंदा रखने में अपने को बचाने में असमर्थ हो जाते हैं और अपना क्या है एसी जैसा होता है ना कमरे में बाहर का टेंपरेचर कितना ही बढ़ता कम होता रहे यहां पे हम टेंपरेचर मेंटेन करते हैं तो यह अपना जो गर्म खून है तो उसकी वजह से बाहर का टेंपरेचर थोड़ा बहुत आगे पीछे हो जाए हम लोग अपना टेंपरेचर इंटरनल टेंपरेचर मेंटेन कर लेंगे तो यह मैमल्स जो है इनका विकास इसी घटना के बाद हुआ यदि यह रेप्टाइल्स यानी कि डायनोसोर पृथ्वी पर रहते तो हम मैमल्स विकास विकसित नहीं हो पाते तो हमारे विकास के लिए डायनोसोर का जाना आवश्यक था सभी चीजों को सभी प्रजातियों को सभी स्पीशीज सभी सिविलाइजेशन सभी नेश सभी का एक ना एक एक्सपायरी डेट होता है जो लोग जो प्रजाति जो सिविलाइजेशन सतत अपने को इवॉल्व नहीं कर पाती उसका एक्सटिंक्शन हो जाता है यह एक्सटिंक्शन यह इवोल्यूशन का शब्द है उसका अर्थ है कि होलसेल संहार होलसेल खात्मा हो जाना पूरी पूरी प्रजाति पूरी पूरी सिविलाइजेशन नष्ट हो जाती है देखिए कि हम यूरोप का स्टडी करते हैं एक समय यूरोप का मैं उदाहरण बार-बार इसलिए देता हूं क्योंकि यूरोपीय सभ्यता के बारे में पढ़ना सहज उपलब्ध है तो यह ग्रीक सिविलाइजेशन थी ग्रीक सिविलाइजेशन ने एक के बाद एक साइंस टेक्नोलॉजी मेडिसिन फिलोसोफी पोएट्री आर्ट्स वरफेन जितने भी क्षेत्र थे बहुत सारा उसने डेवलपमेंट किया फिर एक समय ऐसा आया कि रोमन सिटीज जो थी इटली में वह डेवलप होना शुरू हुई और अभी ग्रीक जो सिविलाइजेशन थी या ग्रीक सिटी स्टेट्स थे वो रोम के सामने टिक नहीं पाए ग्रीक का खात्मा हो गया और रोम का विकास प्रारंभ हुआ तो धीरे-धीरे करके रोमन एंपायर डेवलप हुआ बाद में पता चला कि रोम भी जैसे डायनोसोर की तरह अपने को नई परिस्थिति के अनुसार ढालने में सक्षम नहीं हो रहा है तो रोमन एंपायर का भी खात्मा हो गया और उसके बाद में यह कैथोलिक सिविलाइजेशन प्रारंभ हुई कैथोलिक सिविलाइजेशन यूरोप में फैली कैथोलिक चर्च जिनको हम कहते हैं किंतु धीरे-धीरे देखा कि शुरू में तो हमने देखा कि बहुत अच्छे से डेवलप हो रहे थे रोमन एंपायर के ऊपर में जितने आक्रमण होते थे सबका यह लोग किसी भी तरह से लोगों को बचाते थे अर्ली जो चर्च थे शुरू शुरू के चर्च थे बहुत आध्यात्मिकता थी उसमें अच्छे-अच्छे संत उसमें प्रकट हुए थे लोगों को भरोसा भी दिलवा थे लोगों की रक्षा भी करते थे तो एक सुंदर स्वरूप एक सुंदर समय था एक आध्यात्मिक अच्छा एक सोशल स्वरूप था एक दिन थे कुछ कैथोलिक चर्च के किंतु वो भी डार्क एजेस की ओर जाना शुरू हुआ साइंस और टेक्नोलॉजी का डेवलपमेंट उन्होंने अटका दिया तो फिर यूरोप में प्रारंभ हुआ रेनेसा और रिफॉर्मेशन रीबर्थ ऑफ लर्निंग एंड रिफॉर्मेशन अर्थात कि चर्च का च कैथोलिक चर्च का वो डिवीजन होकर के प्रोटेस्टेंट और वगैरह बहुत सारे डिवीजन फिर बनना शुरू हुए तो वो एक समय आया तो कैथोलिक यूरोप या कैथोलिक सिविलाइजेशन धीरे-धीरे करके अस्ताचल की ओर बढ़ती गई हम भारतीय इतिहास को ही देखिए एक थी वैदिक संस्कृति सत्य युग या तो फिर कहेंगे कृत युग भगवान राम भगवान कृष्ण जितने भी मुनि ऋषि अपने जितने भी फिलोसोफर साइंटिस्ट है सभी का कृत युग में स युग में या तो फिर कहो कि त्रेता द्वापर इवन कली के युग तक भगवान कृष्ण का अस्तित्व था भगवान कृष्ण प्रकट हुए थे इवन कलियुग में भी किंतु कली के बाद हम देखते हैं कि या तो फिर कहेंगे कि कली का प्रारंभ जब से हुआ भगवान कृष्ण का जन्म तो हुआ द्वापर के अंत में कली जब से प्रारंभ हुआ तब से हम देखते हैं कि वैदिक संस्कृति धीरे-धीरे करके उसकी समाप्ति होने लगी अस्ताचल की ओर जाने लगी और यहां पर बुद्धिज्म प्रारंभ हुआ बुद्धिज्म का भी एक गोल्डन एज था किंतु धीरे-धीरे करके उसमें भी डिटेरिऑरेटिंग जिसको आज हम कहते हैं ये शंकराचार्य के बाद में जो नया हिंदुइज्म नया हिंदुइज्म तो नहीं कहेंगे कहेंगे कि हिंदुइज्म का एक रिफाइंड स्वरूप आधुनिक स्वरूप जो प्रकट हुआ है शंकराचार्य से लेकर के चैतन्य महाप्रभु से लेकर के चैतन्य महाप्रभु से यह जो यात्रा प्रारंभ हुई व आखिर में कल्मिनेट हुई उसका अंत आया भगवान श्री रामकृष्ण देव की आध्यात्मिक उपलब्धि में तो यह आज का गोल्डन एज है भले ही हम चाहे भारत में जो हो रहा है उसके ऊपर में हम लोग बड़े ही निराश होकर के बैठे हो मेरा खुद का मानना है कि इंडिया कैन डू मच बेटर माने हमारे सामने डेवलपमेंट की बहुत सारी तक है अभी का आज का भारत देखता हूं तो हताश हो जाता हूं अरे कहां अमेरिका कहां चाइना और कहां हम किंतु कंपेयर टू 100 इयर्स इवन कंपेयर टू 20 इयर्स आज से 20 साल पहले का भारत और आज के भारत में हमको आसमान जमीन का अंतर दिखाई देगा और आज के भारत और आज के 20 साल के बाद का भारत उसमें भी हमको आसमान जमीन का अंतर दिखाई देगा तो अपना ये अपवर्ड ट्रेजे क्ट है तो ये देखिए कि हमेशा कोई भी प्रजाति हो कोई भी सिविलाइजेशन हो स्पीशीज और सिविलाइजेशन जो भी हो उसका एक एक्सटिंक्शन काल आता है एक्सटिंक्शन कब होगा जबकि वह बदलते दौर के अनुसार वह कदम नहीं मिला पाएगा तब स्वामी जी का फेमस लेटर उसका उदाहरण हम बार-बार देते हैं योकोहामा जाकर के स्वामी जी योकोहामा अर्थात कि यह 18वीं 19वीं सदी का यह जापान का एक बहुत ही इंडस्ट्रियल इज नगर शहर वहां जाकर के स्वामी जी आश्चर्य चकित हो गए सोचते थे कि हम जो एशियन है सिर्फ भारतीय नहीं एशियन इन जनरल यह चाहे चाइनीज कहो ना कि कंबोडियन कहो ना कि ये श्रीलंका वाले कहो कि कोई भी कहो हम लोग एशियन इन जनरली हम लोगों की बुद्धि कम है और यह यूरोपियन और अमेरिकन लोगों की जबरदस्त बुद्धि है ऐसा जो हमको यह कॉलोनियल एजुकेशन सिस्टम सिखाता था स्वामी जी जापान गए तो आश्चर्य चकित हो गए किस तरह का किस लेवल का इंडस्ट्रियल इजेशन हमको वहां पर देखने को मिल रहा है तो स्वामी जी ने यह सब देखा तो फिर स्वामी जी वहां से पत्र लिख कर के कहते हैं कि सी हाउ द नेशंस आर ऑन द मार्च जाकर के बाहर आकर के देखो कि किस तरह से राष्ट्र एक के बाद एक आगे कदम कर रहे हैं जैसे कि परेड में सब सैनिक राजपथ के ऊपर में परेड जद देखेंगे तो अपना हृदय कैसा गर्व से एकदम भर जाता है कि हां यह अपनी भारतीय आर्मी है तो यह देश की भी एक आर्मी होती है पूरा नेशंस जो होते हैं एक के बाद एक आगे कदम करते जाते हैं आगे कुछ करते जाते हैं जिसमें भारत कहां पिछड़ गया है यही हमारी अवनति का सबसे पहला कारण है विदेशियों को दोष मत दो विदेशी तो मने यह तो क्या है कि जद हम कमजोर होकर के बैठेंगे और फिर बाहर वाले आकर के हमको लूट लेंगे तो बाहर वालों का क्या दोष देना हमारी कमजोरी को ही तो पहले ठीक करना चाहिए सो स्पेसस हो ना कि सिविलाइजेशन हो प्रजाति हो ना कि संस्कृति या फिर किसी भी तरह का देश हो इनका विनाश आवश्यक है उनका विनाश होगा ही यदि वह इवोल्यूशन या तो उत्क्रांति के साथ में आगे कदम आगे कुछ नहीं करेंगे इवोल्यूशन की यह रेस है सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट यह जो कहा जाता है जो फिट है वह रहेगा जो अनफिट है उसका खात्मा हो जाएगा तो यहां पर भी देखिए कि भगवान कृष्ण क्या कह रहे हैं कौरवों का विनाश होने का समय आ चुका है यह कौरव जाएंगे पांडव रहेंगे कौरव फैमिली जो पूरा था उन लोगों का पूरा जो यह यह था देश उनका यह सबका समय समाप्त हो चुका है अभी पांडवों का समय है तो यदि अर्जुन युद्ध नहीं करेगा संहार नहीं करेगा तो उनका संहार तो होने ही वाला है संहार भगवान कृष्ण स्वयं कर रहे हैं अर्जुन नहीं कर रहा ऐसा यदि देखेंगे इसको आज की परिप्रेक्ष्य में थोड़ा सा हमको सुन कर के यह होगा किंतु आज के परिप्रेक्ष्य में देखिए भारत को गुलाम किसने बनाया यह जो मुस्लिम आक्रमणकारियों ने या तो फिर यह ब्रिटिश आक्रमण कायों ने उन्होंने नहीं यह काल ने ही यह जो महाकाल रूपी ये जो ये है यह काल उसी ने हमको गुलाम बनाया है क्योंकि भारतीय संस्कृति समय के साथ में विकसित नहीं हो रही थी तो यहां पर भी जो इवोल्यूशन के साथ में कदम नहीं बना बढ़ा पाएगा उसका खात्मा हो जाएगा तो भगवान कृष्णा अर्जुन को कहते हैं कि कालोसमी लोक क्षय कृत प्रवो लोकान समा हर तुम यह प्रवृत मैं काल हूं लोगों का संहार करने के लिए प्रकट हुआ हूं और यदि तुम मेरा साथ नहीं दोगे तुम इन लोगों का संहार नहीं कर करगे तो भी इनका संहार तो होने ही वाला है तो यह हो गया कि संहार मूर्ति किस लिए प्रश्न होगा कि आप सृष्टि और स्थिति ही कीजिए ना आप संहार क्यों करते हैं क्यों अननेसेसरी भगवान को जाकर के हम कहेंगे कि अपने सर के ऊपर में दोष का टोपरा आप क्यों अपने से आ बेल मुझे मार ऐसा कर रहे हैं क्यों आप संहार कर रहे हैं क्यों आप विनाश कर रहे हैं यह जो इतना बड़ा ब्रह्मांड है उसमें सबके लिए रहने के लिए जगह है आप इस तरह की एक क्या 1000 पृथ्वी यां बना सकते हैं आज यह जो मंगल ग्रह के ऊपर में हम लोग रॉकेट भेज रहे हैं मतलब अमेरिका तो छोड़ ही दीजिए भारत भी अभी मंगलन भेज रहा है तो क्यों नहीं यहां की आधी पॉपुलेशन मंगल ग्रह के ऊपर में शिफ्ट कर दी जाए या तो फिर आकाश में स्पेस स्टेशन बना दिए जाए तो इनफ स्पेसस फॉर ऑल ऑफ अस संहार करने की फिर ये एक्सटिंक्शन करने की क्या जरूरत है डायनासोर के समय तो समझ लिए एक ही पृथ्वी थी और इतने बड़े-बड़े विराट राक्षसी डायनोसोर होंगे तो हम छोटे-छोटे मैमल्स का डेवलपमेंट नहीं होगा इवोल्यूशन नहीं होगा जो रिसोर्सेस है उसके लिए फाइट होती रहेगी और डायनासोर के समय में तो समझ में आता है आज क्यों आज तो साइंस और टेक्नोलॉजी हमको यह ऑप्शन देते हैं कि हम पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रह पर भी सिविलाइजेशन डेवलप करें हम इमीग्रेशन करें आज पहले क्या होता था यूरोप में बहुत जनसंख्या बढ़ गई तो चलो इमीग्रेट करते हैं नई-नई जगह खोजते हैं रहने के लिए तो उन्होंने नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका जाकर के कॉलोनाइज किया इंडिया को कॉलोनाइज किया एशिया को कॉलोनाइज किया फिर यह अफ्रीका ऑस्ट्रेलिया सब जगह पे ये यूरोपियन लोग फैल गए उन्होंने अपनी वसाहत बनाई उन्होंने अपनी कॉलोनी डेवलप की आज किंतु यदि हमको जहाज लेकर के समुंद्र ंदर क्रॉस करने की जरूरत नहीं है टुडे तो हमारे पास में स्पेसशिप है आज नहीं ना कल कल नहीं ना परसों इस तरह की स्पेसशिप डेवलप हो जाएगी कि जिससे कि हम स्पेस कॉलोनी बना पाए तो फिर क्या बिना मतलब लोगों का संहार करना बिना मतलब प्रजातियों के ऊपर में सिविलाइजेशन के ऊपर में यह महाकाल रूपी यह सब दुर्घटना या तो युद्ध या तो महामारी भेजना किंतु इसके पीछे एक रीजन है हम सबको इवोल्यूशन के साथ में आगे कुछ करनी होगी हम सबको इवॉल्व होता रहना पड़ेगा यह डायनोसोर होकर के बैठे रहेंगे जदी कि ना जैसा आज चल रहा है वैसा ही हमेशा चलता रहे तो ऐसा नहीं चलेगा अच्छा तो अभी प्रश्न होगा कि ये इवोल्यूशन क्या है किस चीज को हम इवोल्यूशन कहेंगे ये साइंस टेक्नोलॉजी ये इकोनॉमिक्स इंडस्ट्रियल इजेशन या तो फिर ये पॉलिटिकल मिलिटरी डेवलपमेंट क्या हम इसको इवोल्यूशन कहेंगे नहीं इसको नहीं हां हालांकि इवोल्यूशन का एक अभिन्न अंग है बट दैट इज ओनली 50 पर ऑफ इवोल्यूशन ये एक्सटर्नल वर्ल्ड जो है सो ओनली 50 पर ऑफ इवोल्यूशन अंदर में जो आंतरिक हृदय है हम भीतर में जो इवोल्यूशन होगा दैट इज अनदर 50 पर यदि भीतर में हम दया क्षमा फिर ये यम नियम मैत्री कर णा यह सब गुण राजी यदि हम डेवलप नहीं करेंगे उनका विकास नहीं करेंगे तो फिर यह हम क्या है कि डायनोसोर की तरह हो जाएंगे ऐसे लोगों को देखा है छोटी-छोटी बातों में नाराज हो जाएंगे छोटी-छोटी बातों में डर जाएंगे मने वो सब समय एक पशुवुलु िक है हो सकता है कि इंजीनियर डॉक्टर वगैरह भी होंगे किंतु यह भीतर में जो डेवलपमेंट होना है हृदय का डेवलपमेंट स्पिरिचुअल डेवलपमेंट इन लोगों का नहीं हुआ है मैंने मैं खुद ऐसे लोगों को मिला हूं देखा भी हूं कि बड़ी पोजीशन प भी है इंटेलेक्चुअल भी कहे जाते हैं बड़ी डिग्री भी है किंतु हृदय उनका इतना संकोच है लोगों के ऊपर में क्रोध तो करेंगे ही करेंगे खुद बड़े ही जल्दी डर जाएंगे हमेशा एक तरह के इनफीरियर वो कुछ नाना कुछ मेरा अहित करने का प्लान कर रहा है यह भी मेरा अहित करने का प्रयास कर रहा है वह भी माने पूरे जगत को अपने दुश्मन के रूप में देखना शुरू करेगा और यदि जो व्यक्ति स्पिरिचुअल है वह यदि गरीब भी है उसके पास में ज्यादा कोई धन बुद्धि या तो फिर यह पोजीशन नहीं भी होगा वह जगत को अपने मित्र के रूप में देखेगा जगत के प्रति उसकी सहानुभूति करुणा इतनी होगी कि ऐसे लोगों के साथ में आप जाकर के बैठेंगे तो आपका मन एकदम शांत हो जाएगा दोनों तरह के लोग है तो फिर यह जो बाह्य डेवलपमेंट है वह चलो उससे हम इंकार नहीं कर रहे हम भारत ने ऐसा बहुत 1000 साल तक स्वामी जी ने कहा कि एक रामकृष्ण को प्रकट करने के लिए एक रामकृष्ण को जन्म देने के लिए भारत में करोड़ों करोड़ों लोगों को यह गरीबी और बेकारी की चक्की में पस ना पड़ा है गुलामी की चक्की में पीसना पड़ा है यह स्वामी जी का खुद का स्टेटमेंट है तो हम यदि यही कहेंगे कि ना आंतरिक वैल्यूज जो है स्पिरिचुअल वैल्यूज वही इंपॉर्टेंट है और यह जो एक्सटर्नल वैल्यूज जो है स्किल जिसको कहते हैं या चाहे मे मेडिकल स्किल्स हो ना कि आर्ट हो ना कि साइंस हो व्हाट एवर तो उसका इंपॉर्टेंस नहीं है यह गलती हम फिर से नहीं करेंगे स्वामी जी ने क्या कहा कि द ग्रेटेस्ट सिविलाइजेशन इज द वन इन व्हिच द बेस्ट एलिमेंट ऑफ ईस्ट आर कंबाइंड विद द बेस्ट एलिमेंट्स ऑफ द वेस्ट सर्वश्रेष्ठ सभ्यता कौन सी है सर्वश्रेष्ठ देश कौन सा है जिसके भीतर में यह इष्ट पूर्व के जो सर्वश्रेष्ठ गुण है और उसके साथ में पश्चिम के जो सर्वश्रेष्ठ गुण है इन दोनों का खूब ही सुंदर रूप से संगम होगा वह सर्वश्रेष्ठ सिविलाइजेशन कही जाएगी इष्ट यानी कि पूर्व का सर्वश्रेष्ठ गुण है आध्यात्मिकता वह चाहे हम हिंदुइज्म हो ना कि चाहे बुद्धिज्म हो तो हमारी आध्यात्मिकता और यह पश्चिम का विज्ञान इन दोनों को कंबाइन कीजिए तो सर्वश्रेष्ठ सिविलाइजेशन डेवलप होगी तो दिस इज व्हाट वी नीड टू डू यह सतत इवॉल्व होता रहना पड़ेगा इंडिविजुअल लेवल पे भी और सोशल लेवल पर भी आज हम ऐसे सब देशों के बारे में पढ़ते हैं न्यूज़पेपर में जहां पर भी आप देखेंगे कि सब समय युद्ध चलता रहता है सब समय यह टेररिस्ट अटैक चलते रहते हैं सब समय यह कुछ ना कुछ माने वहां के लोगों के बारे में देखेंगे सुनेंगे पढ़ेंगे न्यूज़पेपर में हम लोगों को लगेगा कि अरे बाप रे ये लोग कैसे रहते हैं भारत में भले ही चाहे गरीबी हो किंतु भाई वो सब देशों से तो हम बहुत अच्छे हैं तो देखिए कि हम लोग धीरे-धीरे करके इवॉल्व हो रहे हैं भारत एज ए सभ्यता इवोल्व हो रहा है बात सिर्फ ये नहीं है कि यहां पर एक राम कृष्ण आते हैं ना कि एक चैतन्य देव आते हैं यहां पर चैतन्य देव और राम कृष्ण देव आकर के पूरे सभ्यता को इवोल्व करने का प्रयास करते हैं अपनी आध्यात्मिकता भूमि के भीतर में सिंचित करते हैं जैसे कि इस भूमि के भीतर में जिनका भी जन्म होता है इस भूमि के ऊपर में जिनका भी जन्म होता है वो सभी आध्यात्मिकता से परिपट्स तो यह है भारत कहो ना कि इवन अमेरिका को भी देखिए स्वामी जी खुद अमेरिका जब गए मेरी लुईस बर्क जो कि स्वामी जी के ऊपर में बड़े ही सुंदर छह ग्रंथ का उसने रचना की है स्वामी विवेकानंद इन द वेस्ट न्यू डिस्कवरीज उसमें वह लिखती है कि स्वामी जी अर्थात स्वामी विवेकानंद जैसे एक प्रोफेट एक महापुरुष एक महा संत का अमेरिका की भूमि पर जो आगमन हुआ अ अमेरिका की धरती पे उनके चरणों की रज गिरी यह इस चरणों की रज ने आज के नत आज का जो नया अमेरिका है उसके विकास में बहुत सारी सहायता की है यह मेरी लुईज वो खुद अमेरिकन है वो लिखती है हम यदि कहेंगे कि स्वामी जी ने जाकर के आज के अमेरिका का निर्माण किया तो लोग बोलेंगे अच्छा आप तो स्वामी जी के फॉलोवर है इसलिए ऐसी बातें करते हैं यहां पे मैं शाम को क्लासेस लेता हूं यहां पे कंप्यूटर क्लास वगैरह है हमारे तो बच्चे सब आते हैं तो आते हैं सीखने के लिए कंप्यूटर वगैरह किंतु ऐसा 15 मिनट एक प्रेयर सेशन होता है जिसमें मैं ठाकुर महा स्वामी जी की बातें करता हूं तो मैं जब कहता हूं कि य हां यह भगवान राम कृष्ण है यह स्वामी जी है तो उन लोगों के मन में प्रश्न होगा वो मुंह पे तो बोलेंगे नहीं वो तो इतना तो रिस्पेक्ट करते हैं साधु को कि महाराज आप यहां के साधु है बोलकर के आप उनकी प्रशंसा कर रहे हैं और किसी संस्था में जाएंगे रामदास वगैरह कहेंगे कि वो रामदास अमेरिका गए थे तो जो भी है नाम देने की कोई जरूरत नहीं है बहुत सारे लोग अमेरिका बहुत सारे संत गए हैं भारत से स्वामी जी के बाद में जो जिनको फॉलो करता है वह कहेगा कि हमारे संत के जाने से अमेरिका का डेवलपमेंट हुआ तो क्रेडिट लेना आसान है हम स्वामी जी के फॉलोवर है तो हम स्वामी जी को क्रेडिट देते हैं ब दैट इज वन थिंग किंतु देखिए कि अमेरिका भी जिस तरह से डेवलपमेंट कर रहा है आध्यात्मिकता जदी नहीं होती तो यह बात नहीं होती फिलहाल जद यह छोड़ देते हैं कि स्वामी जी का अमेरिका विकास में कितना कंट्रीब्यूशन है स्वामी जी को अमेरिका में जिस तरह से आकार मिला जिस तरह से वेलकम मिला यही तो बताता है और सिर्फ स्वामी जी नहीं स्वामी जी के बाद में कितने ही संत महापुरुष आध्यात्मिक प्रीचर्स जो प्रचारक भारत से अमेरिका गए हैं रामकृष्ण संघ के नहीं बहुत सारे अलग-अलग संप्रदायों से तो सबको अमेरिका ने आमंत्रण दिया आकार दिया उनको खुले हृदय से ग्रहण किया यह जो लोग जो धार्मिक प्रचारक है उनको सम्मान देना यही तो स्वामी जी ब्रिटेन क्यों नहीं गए ब्रिटेन के साथ में तो भारत का सबसे नजदीक का नाता था उस समय फ्रांस क्यों नहीं गए रशिया क्यों नहीं गए जापान में जाकर के स्वामी जी इतनी प्रशंसा करते हैं जापान में ही क्यों स्वामी जी रुक नहीं गए वहां पर वेदांत का प्रचार क्यों नहीं किया इतने सारे डेवलप कंट्रीज थे उस समय अमेरिका में ही स्वामी जी ने वेदांत का प्रचार किया और अमेरिका में ही स्वामी जी को सबसे हृदय ग्राही उनको य वेलकम प्राप्त हुआ वहां के ही ज्यादातर भक्त वह स्वामी जी के बने हैं तो वो अमेरिका के भीतर में वोह आध्यात्मिकता नहीं होगी स्वामी जी को स्वीकार ही क्यों नहीं स्वीकार ही कैसे करते स्वामी जी आने के समय टर्की भी गए हैं इजिप्त भी गए हैं जो कि एंसेट सिविलाइजेशन कही जाती है अपनी ईस्टन आध्यात्मिकता से प्रभावित वहां पर स्वामी जी क्यों नहीं रुके तो उसका कारण यही है कि अमेरिका के भीतर में आध्यात्मिकता थी जिसकी वजह से स्वामी जी को वहां पर इतना वेलकम प्राप्त हुआ तो आध्यात्मिक डेवलपमेंट जो भी सिविलाइजेशन नहीं करेगी दोनों तरीक से इंडस्ट्रियल एंड स्पिरिचुअल यह दोनों डेवलपमेंट इवोल्यूशन नहीं होगा तो उस सिविलाइजेशन का एक्सटिंक्शन हो जाएगा जैसे कि एक डेड बॉडी को आप देखिए यहां पर तो हम कोई भी किसी का भी मृत्यु होता है तो हम क्रीमेट कर देते हैं या तो फिर उसको ब ल उसको दे देते हैं उसको जमीन में गाड़ देते हैं जो भी जैसे की प्रथा हो जंगल में यदि किसी का मृत्यु होता है तो डेड बोर्डिंग वैसे ही नहीं पड़ी रहेगी क्योंकि प्रकृति का नियम है कि जो जिसका भी मृत्यु हुआ है उसको संपूर्ण रूप से या तो जिसका मृत्यु होने वाला है उसका संपूर्ण रूप से संहार कर दो देखिए कि दुनिया भर के पैरासाइट ये डेड बॉडी के ऊपर में इकट्ठा हो जाएंगे और उसको पूरा खा जाएंगे यह नेचर रिसाइकल सिस्टम है किसी भी तरह का वेस्ट जो है इसको प्रकृति सहन नहीं कर पाएगी क्योंकि यह वेस्ट जो है ना उसमें से फिर भयानक एक आपत्ति प्रकट होती है क्योंकि यह डेड बॉडी वैसे ही रखे रहेंगे तो उसमें से फिर धीरे-धीरे करके ना डिसीज फैले उसमें से रोग फैले और वह डिसीज या रोग जिसको लगेगा वह भी मर जाएगा तो यह नेचुरल रिसाइकल सिस्टम है जिसका मृत्यु होने वाला है या तो जिस जो वीक हो गया है प्राणी में भी देखिए हम लोग हम लोगों को लगता है किय प्रकृति जो है ना वह बड़ी ही अ सौम्य है बड़ी ही सुंदर है किंतु मैंने जब पहली पहली बार नेचरल ये जो नेशनल जियोग्राफी या डिस्कवरी चैनल है ना उसके ऊपर में मैं नेचुरल डॉक्यूमेंट्री देखना शुरू किया था मुझे याद है कि हमारे घर में पहली बार यह कलर टीवी आया था पहले तो क्या था कि सभी के घर में आज की तरह टीवी मोबाइल नहीं था तो हम किसी के घर में टीवी देखने के लिए जाते थे फिर मेरे घर में पहली बार टीवी आया और फिर ये कुछ चैनल भी हमने सब्सक्राइब की तो पहली बार मैं यह ये नेचुरल डॉक्यूमेंट्री वगैरह देख रहा हूं वो देख कर के ना मैं तो एकदम डर गया था एक नेवले का बच्चा जन्म लेता है और जैसे ही जन्म लेता है बहुत सारे सांप वहां पर राह देख कर के खड़े हैं जैसे ही नेवले के बच्चे ने जन्म लिया वैसे ही वह उसको खा जाएंगे बच्चे को यदि जीवित रहना है तो क्या करना पड़ेगा जैसे ही जन्म लेता है वैसे ही उसको दौड़ करके एक ऊंची जगह है उसके ऊपर में उसको उठ जाना होगा यदि वह ऊंची जगह पहाड़ी जैसी छोटी सी उसके ऊपर में यदि दौड़ कर के नहीं चला जाएगा तो यह सांप उसको खा जाएंगे यानी कि सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट नेवला 1520 ना कि जितने भी बच्चे हैं उसको जन्म देगा सब एक साथ में दौड़ेंगे जो जिसके भीतर में सबसे ज्यादा स्ट्रेंथ है स्टेमिना है वह ऊंची जगह पर चला जाएगा बच जाएगा जितने भी कमजोर बच्चे हैं साप इकट ठा हो कर के वहीं का वहीं उसको खा जाएंगे हमको प्रश्न होगा कि अरे यह बच्चे का किस तरह का कर्म है क्या बेचारा भाग्य लेकर आया है कि जन्म के साथ में ही यह सब साप उसके पीछे में पड़े हैं उसको मारने के लिए हमारे साथ में यदि ऐसा हो कि जन्म के साथ में ही कोई हमारी हत्या करने के लिए हमारे पीछे आता रहे तो हमारी कैसी अवस्था होगी बट दिस इज नेचर रेड इन टूथ एंड क्लो इंग्लिश में कहते हैं टूथ अर्थात कि दांत और क्लो अर्थात कि नाखून दांत और नाखून उसके लाल है लाल क्यों है क्योंकि वह लोगों का भक्षण करता है रक्त की वजह से लाल है रेड इन टूथ एंड क्लो तो टीथ एंड क्लो तो दिस इज नेचर यह प्रकृति है कि सब समय हमको एडेप्ट करना होगा इवोल्व होना होगा सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट हमको सशक्त होना होगा जदी नहीं हुए तो यह कराल मुखी प्रकृति हमारा संहार कर देगी तो यहां पे यह है कि प्रकृति का कराल स्वरूप की एक एक अंडरस्टैंडिंग हमारी दृष्टि से अच्छा इसके बाद का एक स्टेप आता है जैसे कि हमने देखा कि हमारे पुराणों में मां काली के बारे में क्या कहा गया है कि शुंभ निशुंभ या तो फिर यह दक्ष यज्ञ विनाशिनी यह सब राक्षसों का संहार करने के लिए या तो फिर जो आतताई है मां सती को जिस कारण से जिन लोगों की वजह से उनको शर देह त्याग करना पड़ा उनका संहार करने के लिए मां काली का आगमन होता है हम इस एलेगरे को यदि इवोल्यूशन के साथ में मैच कर दे तो पता चलेगा कि हमको लगेगा यह शुंभ निशुंभ राक्षस या तो दक्ष यज्ञ जो भी थे उसके भीतर में जिनका संहार हुआ वे सब डायनोसोर की तरह थे उनका समय आ चुका था समय समाप्त हो चुका था उनकी एक्सपायरी डेट आ चुकी थी इसलिए उनका संहार आवश्यक था जिससे कि जो नई जनरेशन है मोर एडेप्ट मोर निंबल स्ट्रांग देन बिफोर जो कि अपने को परिस्थिति के साथ में ढालने में और ज्यादा सक्षम हो और ज्यादा सशक्त हो आध्यात्मिक और ज्यादा डेवलप हो तो यह नई प्रजाति का उसका शुभारंभ हो उसका विकास हो उसके लिए पुराने लोगों का विनाश आवश्यक था ये ऐसा एक एलेग और यह नेचर के साथ में दोनों को मिला करर के हम कह सकते हैं अभी इससे एक स्टेप आगे बढ़ते हैं हमने गंभीरानंद जी महाराज की मां की जीवनी का अभ्यास हमने किया उसकी कर रहे हैं और उसकी जो अवतरण का है महाराज ने उसका जो इंट्रोडक्शन में जो लिखा है बड़ा ही खूबसूरत उन्होंने बड़ा ही फिलोसॉफिकली उन्होंने पैरेलल्स बनाए हैं उन्होंने कहा है उसमें कि जब पहले के समय में पौराणिक युग में राक्षस जो बाहर में रहते थे य शुंभ निशुंभ वगैरह तो आज के युग में देखिए कि सब राक्षस हमारे भीतर में रहते हैं यह काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर यह जो षड रिपु है या तो फिर यह पंच क्लेश है अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश यह सब हमारे हृदय में जड़ होकर के बैठे हुए हैं रूट गाड़ कर के जड़े गाड़ कर के बैठे हुए हैं इनका खात्मा करना है इनका संहार करना है और इसीलिए मां काली आज मां शारदा के रूप में व प्रकट होती है जगदंबा स्वयं मां शारदा के रूप में प्रकट होती है मां शारदा का आगमन या तो फिर आज के युग की आवश्यकता क्या है हमारे भीतर में जो अनिष्ट है उसका संहार करना अभी प्रश्न होगा कि हमारे भीतर के अनिष्ट का संहार करने के लिए मां काली को क्या करना पड़ेगा प्रश्न तो यही हो जाता है कि क्या हमारा संहार करना पड़ेगा क्योंकि हम अपने को अपने ने अहंकार से कैसे अलग करे जैसे कि वो एक फेमस जो एक जोक है ना वेदांत का कि एक साधु को कोर्ट में लाया गया जज ने पूछा साधु को कि तुमने सन्यासी होकर के सासा दुष्कर्म क्यों किया तो यह साधु वेदांती था कहा कि अरे जज महाशय यह दुष्कर्म मैंने नहीं किया मेरे शरीर ने किया है तो जज भी वेदांत पड़ता था तो उन्होंने कह दिया कि अच्छा ठीक है तुमको रिहा कर देते हैं तुम्हारे शरीर को फांसी दे देते हैं तो अभी प्रश्न होगा कि मैं अपने को अपने शरीर से अलग कैसे करूं जब एक संहार रूपी रुद्र मूर्ति मेरे सामने प्रकट होती है तो मैं तो ऐसा नहीं देखता हूं कि यह मेरे भीतर में रहे हुए काम क्रोध मद लोभ मोह का विनाश करने के लिए प्रकट हुई है मैं तो उसको मेरे ऊपर में ही देख लेता हूं मेरा ही संहार करने के लिए प्रकट हुई है आज मुझे कुछ भी हो गया मान लीजिए कि मेरा एक्सीडेंट हो गया कुछ भी कोई भी दुर्घटना एक भयानक मेरे साथ में हो गई क्या मैं यह कहूंगा कि मेरा अहंकार मिटाने के लिए यह हुआ है मेरा मेरे भीतर में जो अविद्या जो है अस्मिता है या तो ईगो है उसका संहार करने के लिए इसका इस तरह की दुर्घटना हुई है एक्चुअली होता वही है आज देखिए कि मनुष्य जो है कितनी आशा पोषण करके जीता है सब समय उसके मन में कोई ना कोई प्लान चलता रहता है चाहे वह कल क्या खाना बनाएगा ना कि कल क्या कार्य करेगा कि परसों दिन उसको क्या करना है कहां जाना है देखिए कि यह जो एक सातत्य बना रहता है इतिहास वर्तमान भविष्य का यह सतत बना रहता है कि कल यह हुआ आज यह होने वाला है आज मैं यह करूंगा और अगले दिन यह होने वाला है सतत प्लान चलते रहते हैं सतत कोई ना कोई रिग्रेट हमारे मन में घर करके बैठी हुई है सतत एक ऐसी उल में हम फसे रहते हैं कोई इतना ही खुश क्यों नहीं होगा कोई कितना समृद्ध क्यों नहीं होगा धनपति क्यों नहीं होगा उसका मन हमेशा कल के बारे में सोचता है आज के बारे में सोचता है आने वाले कल के बारे में सोचता है भूत वर्तमान भविष्य इन तीनों के बीच में उसका मन एक पुल एक सेतु बना कर के कार्य करता है वह सेतु किसी भी चीज का हो कल मेरे साथ में ऐसी घटना हुई मान लीजिए कि प्रमोशन जो जो चार पांच लोगों को प्रमोशन मिलने की बात थी उसमें मुझे प्रमोशन नहीं मिला और किसी को मिल गया या तो फिर मुझे यह धन प्राप्ति होने वाली थी नहीं हुई या तो फिर मेरा जो कोई एक प्रियजन था उसके साथ में मेरा कोई ना कोई अन बनाव हो गया है उसके साथ में संबंध टूट गया है तो उसकी वजह से एक रिग्रेट प्रकट होती है यह रिग्रेट हमेशा चलती रहेगी मेरे हृदय के कोने में हमेशा एक रिग्रेट बैठी रहेगी और यही रिग्रेट जैसे कि मुझे मेरे समय के पहले मुझे बूढ़ा बना देगी मुझे वृद्ध बना देगी यह रिग्रेट किसी के ऊपर में क्रोध होता है सतत ये क्रोध जैसे कि अपने सबकॉन्शियस में पड़ा रहता है भीतर में एक आगुण जला करके रखता है कहीं पर भी हमको शांति से बैठने नहीं देता है हमारे मन में कोई ना कोई कामना वासना या एंबिशन रहेगी जो कि सब समय हमको एक राजसिक परिस्थिति में लाकर के रहती है आंख बंद करके भी यह मेरा खुद का अनुभव है मैं एक ऐप डेवलप कर रहा था शारदा कोश बोलक के जिसमें कि रामकृष्ण संघ का जितना भी लिटरेचर है वह सब उसके भीतर में रहेगा जब यह डेवलप करने में करने का समय था मैं कर रहा था उस समय में आंख बंद करके भी बैठूंगा तो वही चलता रहेगा कि अच्छा इस तरह के स्क्रीन बनाना है इस तरह से इनपुट होगा इस तरह से आउटपुट होगा इस तरह से रिपोर्ट होगा इस तरह का बटन बनेगा यही मैंने मैं परेशान हो गया था एट वन पॉइंट मुझे उसको अधूरा छोड़ देना पड़ा मैंने सोचा कि ये ए मेरा खत्म कर देगी मेरा आध्यात्मिक जीवन हालांकि यह सब कार्य हम करते हैं आध्यात्मिक जीवन को बढ़ावा देने के लिए कि चलो ठाकुर महा स्वामी जी के लिटरेचर पर हम थोड़ा सा मन को कंसंट्रेट करें तो फिर बाकी सब बातें हमारे मन से दूर चली जाएगी किंतु यह उल्टा हो गया था फिर ये इतना ज्यादा ऑब्सेशन की तरह हो गया था कि फिर यह सभी चीजों में वो डिस्टरबेंस खड़ा कर रहा था तो फिर मुझे उसको छोड़ना पड़ा तो ये चाहे रिग्रेट हो ना कि चाहे क्रोध हो ना कि चाहे ये एंबीशन हो ना कि चाहे किसी भी तरह की कामना या वासना हो सब समय हमारे बैकग्राउंड में मन के बैकग्राउंड में बन कर के बैठी रहेगी और जैसे ही उसको समय मिलता है मैं कहीं पर जर्नी कर रहा हूं बस में बैठा हूं ना कि कार में बैठा हूं जैसे ही मेरा माइंड जो है वो मेरे सामने जो कार्य है उससे थोड़ा सा भी फ्री होऊंगा इमीडिएट वह सब बातें वापस आ जाएगी मान लीजिए अभी मैं क्लास ले रहा हूं मुझे जो बोलना है मुझे जो विचार करने हैं उसके ऊपर में मेरा मन फुल्ली कंसंट्रेटेड है किंतु जैसे ही यह क्लास पूरा हुआ सम हुआ मैं अपने रूम में अकेला बैठूंगा कुछ समय के लिए ऑफिस जाने से पहले तो जैसे ही मैं अकेला बैठा तो व जितना भी रिग्रेट है मेरी लाइफ में कि अरे मैंने यह मौका गवा दिया अरे मैंने यह अपॉर्चुनिटी मिस कर दी अरे मेरा उसके साथ में यह एक दुश्मना आवट हो गया है तो क्रोध है रिग्रेट है एंबिशन है सब मेरे भीतर में सब कॉन्शियस में जो बैठा है फट करके मेरी कॉन्शियस में आ जाएगा और मुझे परेशान कर देगा ऐसा मैंने ईश्वर की कृपा है तो कि यदि आपके पास में कुछ काम नहीं है तो आप शांति से बैठते हैं शांति से बैठते हैं आपका मन संपूर्ण रूप से शांत हो जाता है जैसे कि यह जो एक कैलाश मानसरोवर के चित्र यदि देखे होंगे मानसरोवर कितना प्राकृतिक रमणीय परिस्थिति में यह सरोवर बना है उसकी सतह जो है कितनी शांत है और कितनी स्वच्छ पानी है कि जैसे कि उसके भीतर में आप तल है उसकी जो है तल तक देख सकते हैं तो इस तरह का मन हो हमारा मानस सरोवर जैसा स्वच्छ हो सुंदर हो और शांत हो और रमणीय हो तो ऐसा नहीं होकर के जैसे कि एक जलाशय जिसमें डेड बॉडी भी पड़ी हुई है जिसमें क्या-क्या नहीं पड़ा हुआ है उस तरह का हमारा मन किस तरह का मन हमको चाहिए हमको चाहिए स्वच्छ सुंदर जलाशय जैसा उसकी वजह से कादो कीचड़ से भरा हुआ हमारा यह मन सबकॉन्शियस में इतना सब कुछ भरा हुआ है तो आदर्श यह है कि हमारे सबकॉन्शियस में किसी भी तरह का कचरा ना पड़ा हो यह है आदर्श किंतु प्रश्न यह है कि हमको उस परिस्थिति से कादवंथरा सबकॉन्शियस रिग्रेट क्रोध फिर आकांक्षाएं आशाएं यह सबसे भरा हुआ है उसको स्वच्छ करके अपने सब कॉन्शियस मन को संपूर्ण रूप से निर्मल कर देना है जैसे कि कभी कोई भी कार्य हमा सामने ना हो तब हम बिल्कुल शांत होकर के बैठ पाए हमारा मन सहज ऊर्ध्वगामी हो किसी किसी का ज्यादातर लोगों का मन सहज अधोगामी होता है कि जैसे ही सब कार्य समाप्त हो गया वैसे ही अपना मन जैसे कि गड्ढे में जाकर के गिरा इतना सब कुछ खड़ा होता है इससे बचने के लिए लोग फिर क्या करेंगे कि यह एडिक्शन है एडिक्शन के पीछे में दौड़ेंगे क्योंकि पहले तो काम बहुत किया उसके बाद में शराब पीना पड़ेगा या तो कोई जैसे सिलिकॉन वैली है ना सिलिकॉन वैली में कहा जाता है वर्क हार्ड पार्टी हार्डर ने बहुत काम करो काम जैसे समाप्त हो गया वीकेंड में आपको छुट्टी है जोर जोरदार पार्टी करो क्यों क्योंकि बिना पार्टी की ये लोग रह नहीं पाएंगे जब तक काम करते हैं तब तक किसी भी चीज में अपना मन एंगेज रहता है किंतु जैसे ही आपको थोड़ा सा विश्राम का समय मिला थोड़ा सा भी आपको लेजर टाइम मिला आज की लैंग्वेज में कहते हैं थोड़ा सा आपको फ्री टाइम मिला इमीडिएट देखेंगे कि मन ऐसा भयानक रूप से डिस्टर्ब हो जाएगा कि आप अपने घर में शांति से बैठ ही नहीं पाएंगे खड़े होकर दौड़ना शुरू कर देंगे यह काम करना है वो काम करना है यहां पे जाना है मने यू विल नेवर बी एबल टू सीट पीसफुली एक जगह पे शांति से बैठ ही नहीं पाएंगे इतना भीतर में से यह सब खड़ा होता है मन आपका सब समय जैसे कि आपका भक्षण करने के लिए दौड़ता है आपका संहार करने के लिए दौड़ता है ठाकुर ने देखा ना कि एक वृद्ध व्यक्ति उसका केशव सेन का रिलेटिव केशव सेन को मिलने के लिए ठाकुर गए तो देखा कि एक वृद्ध रिलेटिव है बैठ कर के ताश खेल रहा है वो फिर क्या कह रहा है कि मैं बिना काम के नहीं बैठ पा रहा हूं इसलिए मैं ताश खेलता हूं तो ठाकुर ने कहा अरे यह उम्र है ईश्वर का नाम लेने की वो ईश्वर का नाम नहीं लेकर ताश खेल रहा है यहां पर बात यह नहीं है कि ताश खेलने का उसको प्रलोभन था यहां पर डीपर साइकोलॉजी भी यह है कि ताश नहीं खेलेगा तो पागल हो जाएगा उसका जो मन है मन के भीतर में जो दानव है शुंभ निशुंभ ये जो है यह कंस फिर यह रावण जो मन के भीतर में बैठे हुए हैं उसको यदि थोड़ा सा भी शांति से बैठने का प्रयास करेगा आकर के उसको खा जाएंगे तो इसीलिए उसको किसी ना किसी प्रवृत्ति में अपने को उलझा करके रखना पड़ेगा यह हो गया राजसिक जीवन राजस को लेकर के ही आपका सब कुछ है बीच-बीच में रजस और फिर बीच-बीच में तमस तमस और रजस यह साइकिल चलती ही र ी जब तक आप कार्य करते हैं तब तक आपका मन ठीक रहता है जैसे ही कार्य करना बंद किया आपका मन सीधा तमस में जाकर के डूब जाता है यह तमस और रजस रूपी साइकल में हम लोग खेलते रहते हैं अभी प्रश्न यह है कि इस साइकिल को तोड़ कर के सत्व में कैसे प्रवेश किया जाए यहां पे यह जो रुद्र काली जो है काली का रुद्र स्वरूप यहां पर हमको किस तरह से हेल्प करता है स्पिरिचुअल इनलाइटनमेंट के पाथ के ऊपर में मां काली का कराल स्वरूप ले जाने में किस तरह से स्पिरिचुअलिटी की ओर ले जाने में सहाय करता है ट वी विल सी टुम तो आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु पू पोम हमरा लाइन बाय लाइन स्टडी करो हमरा सब स्टडी करो से समय आगे एक प्रस्तावना हो पर हमरा लाइन बाय लाइन जा पोम किंतु यहां पर है ना देखिए हम फिर से वही स्प्लिट कर रहे हैं गुड एंड इवल के बीच में सृष्टि स्थिति संहार किस चीज का कि जो कि इवोल्यूशनरी एडेप्ट है आज यह सोसाइटी या इंडिविजुअल व इवोल्व हो रहा है तो उसका लालन पालन होगा और उसने इवोल्यूशन होना बंद हो गया है तो संहार होगा यह काली का एक कॉस्मिक एस्पेक्ट है आप जो कह रहे हैं कि एविल का विनाश करना मने जो दुष्ट है देव और दानवों का युद्ध जैसे कि पहले के युग में होता था व्हिच इज अ वेरी लिमिटेड व्यू क्योंकि फिर हम लोग कहते हैं यह क्रिमिनल कहेगा कि यह लोग जो बैठे हैं बड़े-बड़े घरों में वो इसलिए बैठे हैं क्योंकि उनके पास में प्रिविलेज था हम लोग गरीब घर में बड़े हुए हैं हमारे पास में प्रिविलेज नहीं है अच्छी स्कूलों में स्टडी करने का बोलक के आज हमको चोरी करनी पड़ती है या तो फिर हमको कोई भी क्रिमिनल कार्य करना पड़ता है तो इविल एंड गुड तो हमारी दृष्टि से है ईश्वर की दृष्टि से ईश्वर किसको इविल बोलेगा किसको गुड बोलेगा वह कहना मुश्किल है तो यह तो एक रिलेटिव प्लेन पे हो गया कि जो बुरे लोग हैं उनका संहार करें आज भारत पर आक्रमण हुआ तो हम लोग कह रहे हैं कि आक्रमणकारी बुरे थे आक्र आक्रमणकारी कहेंगे कि जिन पर हम आक्रमण कर रहे हैं वो बुरे हैं इसलिए हम आक्रमण कर रहे हैं राइट तो गुड एंड इविल इज ऑन अवर प्लेन हमारे लेवल पर है भोलेनाथ को देखिए कि रावण ने पूजा की तो रावण को वरदान दे दिया उन्होंने यह नहीं सोचा राम अच्छे है रावण बुरा है तो इस गुड एंड इविल इज ऑन अवर प्लेन कॉस्मिक दृष्टि से देखे तो इवोल्यूशन इज अ गाइडिंग प्रिंसिपल जदी हमने इवोल्व करना छोड़ दिया है तो हमारा संहार होगा जब तक हम इवोल्व हो रहे हैं तब तक हम बचे रहेंगे किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि दुष्टों का दमन नहीं करना किंतु बात यह है कि फिर माहाकाली का रोल इसमें नहीं आता फिर यह अपना हो जाता है अपने बलबूते पर हमको करना है यदि हमारे में दम नहीं और हम फिर और किसी को दोष दे वह तो किसी काम का नहीं एस नेशन हमको डट के मुकाबला करना है सोट बट यहां पर जो कॉस्मिक प्रिंसिपल्स की चर्चा हो रही है किंतु यह थोड़ा रिलेटिव प्लेन में आ जाएगा आप जो कह रहे हैं स्वामी जी ने जैसे कि कहा कि हम लोग कृष्णा के फॉलोअर्स है यूरोपियन है क्राइस्ट के फॉलोवर्स किंतु बात हम सुनते हैं क्राइस्ट की और वे लोग मानते हैं कृष्ण को क्यों कि क्राइस्ट ने कहा कि कोई एक चाटा मारे तो दूसरा गाल दिखा दो और कृष्णा ने कहा चाटा मारे तो हाथ तोड़ [हंसी] दो यह क्रॉस कनेक्शन हो गया है सो आई एग्री विथ यू कि मतलब उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है जो स्वामी जी के फॉलोअर्स से अशोकानंद जी को देख लीजिए गांधी जी के प्रति उनका कितना क्रोध था वो प्रबुद्ध भारत मायावती में बैठे-बैठे प्रबुद्ध भारत में गांधी जी के विरुद्ध में एडिटोरियल लिखते थे अभी उस समय गांधी जी का इतना बड़ा नाम था कि एक बेलूरमठ वाले को टेंशन हो गया कि कहीं कांग्रेस के साथ में दुश्मना आवट ना कर दे तो उनको भगा दिया जाओ अमेरिका जाओ वेदांत सिखाओ इसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु जब हम रुद्र तत्व की जो हम बात करते हैं प्रिंसिपल एज सच सो दैट इज डिफरेंट फ्रॉम व्हाट दिस डे टू डे व्हाट वी आर सेइंग कि हमको रुद्र स्वरूप धारण करना है दुश्मनों का संहार करने के लिए दैट इज कंप्लीट डिफरेंट फिलोसॉफिकली फ्रॉम व्हाट के प्रकृति का रुद्र स्वरूप है और उसको हमको नजर के सामने रख कर के अपने को इवॉल्व करते रहना है जिससे कि हम उस रुद्र स्वरूप का भोग ना बन जाए सो दिस आर फिलोसॉफिकली डिफरेंट थिंग आप उस उपमा को आप ले सकते हैं ज से ठाकुर उपमा देते हैं ना कि वो एक मां अपने बच्चे को खाना भी खिला रही है और फिर यह यहां पे वो खरीददार है उसके साथ में बात भी कर रही है वो ढेंकी गिर रही है वो जो उसके वो धान भी उसके भीतर में डाल रही है अभी थोड़ा सा भी उस बे ध्यान हो जाएगी तो उसका हार्ट टूट जाएगा तो ठाकुर उपमा देकर के कंसंट्रेशन के बारे में कहते हैं तो हम उपमा दे सकते हैं मां काली का रुद्र स्वरूप हमको प्रकट करना है जिससे कि हम दुश्मनों का संहार कर पाए बट ब फिलोसॉफिकली दिस आर वेरी डिफरेंट थिंग्स ऐसा कि रुद्र तत्व जो है इज वेरी डिफरेंट इ अ स्पिरिचुअल सिग्निफिकेंट इवोल्यूशन के साथ में यह जुड़ा हुआ है हां इवोल्व होने के लिए इवोल्यूशन में बनाए रखने के लिए आप कहे कि बुद्धिज्म के आगमन से यह जो हमारे क्षत्रियों का जो एक यह हुआ कि क्षत्रिय लोगों ने अपना क्षत्रिय छोड़ दिया बोलकर के भारत का विनाश हुआ तो हम कहेंगे कि इवोल्यूशन की रेस में जो सर्वाइवल द फिटेस्ट की रेस में हम हार गए वह आप कह सकते हैं किंतु फिलोसॉफिकली बोथ आर डिफरेंट कि मुझे एक रुद्र स्वरूप धारण करना पड़ेगा दुश्मनों का संहार करना पड़ेगा इ डिफरेंट फ्रॉम एक कॉस्मिक रुद्र तत्व कि एक एक्सटिंक्शन रूपी एक महाकाल हमारे सामने सब समय खड़ा है इंडिविजुअल एज वेल एज सिविलाइजेशन और जब तक हम अपने को फिट नहीं रखेंगे तब हम उसका भोग बन जाएंगे फिलोसॉफिकली दिस आर टू डिफरेंट थिंग्स जैसे कि विश्वरूप में हम ने देखा ना कि भगवान कृष्णा के मुंह में अग्नि जल रहा है और सब कौरव सेना उसमें प्रवेश हो रही है तो यह विश्व में भी एक महाकाल है एक्सटिंक्शन रूपी संहार रूपी जिसकी ओर हम सब लोग बढ़ रहे हैं और यदि अपने को इवोल्व नहीं कर पाएंगे तो हम उसके भीतर में जाकर के गिरेंगे और जब तक हम अपने को कंटीन्यूअसली वी विल गोइंग टू एडेप्ट अवर सेल्फ सिविलाइजेशनल एज वेल एज इंडिविजुअली तब तक हम कराल काल से बच के रहेंगे ट इ द कॉस्मिक तत्व फिर बचने के लिए आप रुद्र स्वरूप धारण कीजिए ट इ अनदर मैटर हो जाता है कि दुश्मन ने आक्रमण किया हम अपना बचाव नहीं कर पाए तो वैसे ही काल मुख में जाकर गिरने वाले हैं तो अपना बचाव करने के लिए रुद्र स्वरूप धारण करना है बट ट इ डायनेमिक्स ऑफ इवोल्यूशन बट दिस कॉस्मिक तत्व जो है कॉस्मिक स्वरूप जो है रुद्र काली का टस वेरी डिफरेंट फिलोसॉफिकली क्योंकि यह जो तत्व है ना एक्सटिंक्शन और इवोल्यूशन मैंने बहुत समय से सब स्टडी करता रहा हूं और फिर मुझे समझ में आया कि एक्सटिंक्शन इज ऑलवेज देर जगत में आज जो बायोलॉजिस्ट है जो पुरातत्व का अभ्यास करते हैं वे लोग कहते हैं कि छह मेजर एक्सटिंक्शन इवेंट हुई है एक्सटिंक्शन इवेंट अर्थात कि एक ऐसी दुर्घटना कि पृथ्वी पर जो जीवन है 70 पर जीवन उसका संहार हो जाएगा डायनोसोर है ना कि जो कोई भी है छह बार ऐसी मास एक्सटिंक्शन इवेंट हुई है आखिरी मास एक्सटिंक्शन इवेंट थी कि जिसने यह डायनोसोर को खत्म कर दिया और यह साइंटिस्ट लोग बोलते हैं कि हर 6 करोड़ साल ना कि 10 करोड़ साल पे एक बार मास एक्सटिंक्शन इवेंट होती है जो पृथ्वी पे 70 पर जीवन समाप्त हो जाएगा उसके बाद में जो कि इवोल्यूशनरी एडेप्ट है वो स्पेसस बची रहेगी अभी यह तो हो गया कि स्पेसस लेवल पे एक्सटिंक्शन सिविलाइजेशनल लेवल पे देखिए भारत का ही उदाहरण देखिए बार-बार भारत को पराजय का सामना करना पड़ा है किंतु वी ऑलवेज एडेप्ट अवर सेल्फ ठाकुर आए शंकराचार्य आए ठाकुर आए तो हमने फिर से अपने को एडेप्ट कर दिया फिर से हम जीवित हो गए किंतु यह जो अमेरिकन जो एबोरिजिनल कहते है ना अमेरिकन इंडियन या तो फिर ये ऑस्ट्रेलियन इंडियन तो यूरोपियन जब वहां पर गए तो वे लोग अपने को पहली बार तो हार गए किंतु फिर बाद में अपने को व नहीं कर पाए तो फिर वो उनका एक्सटिंक्शन ही हो गया भारत ने एक बार हार कर के फिर से अपने को इवोल्व किया फिर से एडेप्ट किया तो हम फिर से जीवित हो गए अफ्रीका को देखिए अफ्रीका में एक बार यूरोपियन सेटलर्स कॉलोनाइजर्स गए उसके बाद में अफ्रीका जैसे खड़ा हो ही नहीं पा रहा है आज अफ्रीका में जो कुछ भी आप देखेंगे य यूरोपियन लोग कुछ हेल्प भेजते हैं कुछ डोनेशन भेजते हैं बोल कर के कुछ उनका इकोनॉमी चल रहा है अपने बलबूते प वो फिर भी खड़े नहीं हो पा रहे हैं इजिप्त को देखिए इजिप्त इतना पुरा सिविलाइजेशन इस्लाम एक बार प्रवेश किया तो इजिप्शियन ओरिजिनल सिविलाइजेशन का एक्सटिंक्शन ही हो गया फिर से वह अपने को एडेप्ट करके खड़ा नहीं हो पाया राइट हिंदुइज्म है स्वामी जी कहते हैं मनु यदि फिर से भी आ जाएगा तो आश्चर्यचकित हो जाएगा कि वही कल्चर संस्कार अभी भी है सो भारत ने बार-बार अपने को रिइन्वेंट किया है बार-बार अपने को री एडेप्ट किया है दिस सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट मंत्र जो है ना भारत ने जैसे कि ग्रहण कर लिया है तो यहां पर बात सिर्फ यह नहीं है कि हम दुश्मन का सामना करके करें इवोल्यूशन इज समथिंग मच मोर सटल एक पूरा माइंड सेट चेंज करना है सिर्फ बाह्य दुश्मनों का उनका प्रतिकार ही नहीं पूरा माइंडसेट पूरा लाइफस्टाइल पूरा सिविलाइजेशन समाज अपनी अर्थव्यवस्था है राजनीतिक व्यवस्था है पुलिस एंड जुडिशियस सिस्टम है आर्मी है मेडिकल साइंस है सब कुछ पूरा फंडामेंटल चेंज करना है तब कहीं जाकर के सिविलाइजेशनल हम एडेप्ट कर पाएंगे सेम थिंग इज अबाउट इंडिविजुअल जैसे कि आज हमने डिस्कस किया सबकॉन्शियस में हजार राक्षस बैठे हुए हैं यदि हम इस राक्षसों का प्रतिकार करके उनको मैनेज करके अपने को नहीं बचा पाएंगे तो हमने मतलब प्रीमेचूरली हम मृत्यु के मुख में चले जाए बहुत सारे प्रीमेच्योर एजिंग हो जाता है कि उम्र है 40 साल की और भीतर का शरीर हो गया है 50 साल का सो इवोल्यूशन या तो एडेप्ट अवर सेल्फ टू इवोल्यूशन इज मच मोर सटल मच मोर प्रोसेस यहां पर सिर्फ रुद्र स्वरूप धारण करने से नहीं होगा यहां पर अपने को फंडामेंटल री इंजीनियर करना पड़ेगा सो दैट इज टू डिफरेंट थिंग्स हां अभी अफगानिस्तान का ही दाखला ले लीजिए उदाहरण ले लीजिए अफगानिस्तान से गजनी आया चलो अफगानिस्तान का क्या हुआ आज किसको आज आज मैं ऐसा पहली पहले भी एक दो बार में ये उदाहरण दिया है यदि सभी देश विश्व के अपने इमीग्रेशन के दरवाजे खोल दे कहेंगे कि जिसको भी यहां पर आना है आ सकता है अमेरिका है ब्रिटेन है भारत है जापान है चाइना है अफगानिस्तान पाकिस्तान सब तो कौन सी देश की एंबेसी के सामने सबके सबसे लंबी लाइन खड़ी आपको दिने को मिलेगी अफगानिस्तान ना कि पाकिस्तान के सामने वहां पे इतनी मार्शल प्रजा है आपको पता है पाकिस्तान जो सेपरेट क्यों हुआ उसके कल्चरल क्यों डिफरेंट हुआ ब्रिटिश लोग जब इंडियन आर्मी बना रहे थे तो उन्होंने देखा कि पंजाबी है ना वो बेसिकली मार्शल रेस है माने वो एक अ व मार्शल रेस को एक सेपरेट स्टेटस मिलना चाहिए बोलकर के पंजाबियों को एक उन्होंने ज्यादा करके उन्होंने यह करना शुरू किया उन्होंने प्रेफर करना शुरू किया अ सब यह बेनिफिट देना शुरू किया अभी उन लोगों के पंजाबी जो यह सोल्जर्स हैं ना उनके मन में यह हो गया कि हमारा जन्म ही हुआ है लोगों पे राज करने के लिए तो चलो अभी जब भारत को इंडिपेंडेंस मिलने वाला था तो यह जो मार्शल रेस है सब वे लोग सोचे कि यह तो गुलाम रेस है हिंदू उनके साथ में रहकर हमको क्या मिलने वाला है हमको एक सेपरेट राज्य चाहिए वी विल रूल ओवर द वर्ल्ड रूल ओवर द वर्ल्ड में क्या हुआ अभी आज देख रहे एडेप्टेबिलिटी ट इज द की अभी एडेप्ट होने के लिए आप दुश्मनों का संहार करें ट इज ओके एडेप्ट होने के लिए आप साइंस टेक्नोलॉजी डेवलप करें ट इज वन थिंग बट दुश्मनों का संहार करना ट इज नॉट डकी एडेप्टेबिलिटी द की एडेप्ट होने के लिए संहार करना पड़े तो ठीक है झूठ मुठ का संहार करते रहेंगे तो पशुवैद्यकीय होगी वहां पर बड़े ही सॉफ्ट शांत प्रकृति के लोग इकट्ठा होते हैं जिनके भीतर में कंसंट्रेशन की शक्ति है लंबे समय तक बैठ कर के बड़ी-बड़ी किताबों को पढ़ कर के उसका कंक्लूजन निकाल करके उसके ऊपर में पेपर लिख सके उस तरह के स्कॉलर बड़े-बड़े चश्मे पहनते हैं फिजिकली वीक है स्कॉलर तो ऐसे ही होते हैं तो ऐसे लोगों को इकट्ठा करके आपको साइंस डेवलप करना होगा फिर वो साइंस डेवलप करके आप गन बोट बनाए ना कि मिसाइल बनाए फिर वो मिसाइल चलाने वा वाले वो जो फिजिकली स्ट्रांग हो तो हो एडेप्टेबिलिटी मींस आपको सब तरह से अपने को अपडेट रखना है साइंटिफिकली स्पिरिचुअली मटेरियल मिलिटर सब तरह से सिर्फ एक पार्ट है कि मिलिटरी उसमें अब मेरे को सशस्त्र होना है वो नहीं चलेगा ओवरऑल डेवलपमेंट होलिस्टिक डेवलपमेंट एक ही एक ही एक ही इंटरप्शन कि गिरीश घोष ने कहा कि ठाकुर ने प्रणाम अस्त्र से जगत को जय किया है अभी आप देख लीजिए एडेप्टेबिलिटी किसको बोलते [हंसी] हैं शस्त्रों का विनाश सिर्फ खड़ग और फिर यह सुदर्शन चक्र से नहीं प्रणाम से भी होता है ना इसके बारे में हमने ऑलरेडी डिस्कस किया है जो ज्ञान योग राज योग हम पढ़ रहे थे देखा कि किस तरह से स्वामी जी सृष्टि का यह करते हैं सृष्टि का जो यह होता है सृष्टि होती है उसका वर्णन कैसे करते हैं सर्वप्रथम ओमकार प्रकट होता है फिर ओमकार में से शब्द प्रकट होते हैं फिर शब्द में से पदार्थ प्रकट होता है जैसे कि वेद में शब्द है गाय तो गाय में से यह शब्द में से फिर यह गाय प्रकट हुई अर्थात कि गाय शब्द और गाय रूपी पशु यह दोनों अभेद है शब्द में से पदार्थ प्रकट होते हैं आज कहा जाएगा कि इलेक्ट्रॉन है प्रोटॉन है शब्द है तो उसमें से प्रकट हुए और जब सृष्टि का संहार होगा तो जितने भी पदार्थ है सब शब्द में विलीन हो जाएंगे शब्द जो है वो ओमकार में चले जाएंगे इस तरह से लार्जर तत्व देखे शब्द में से ही पदार्थ प्रकट हुआ है इसलिए नाम और नामी अभेद है ये मैंने सृष्टि स्थिति संहार स्वामी जी का वो याद है हम प स्टडी कर रहे थे यह स्वामी शिष्य संवाद में से एक पैसेज उसमें स्वामी जी यह कहते हैं और ठाकुर भी कहते हैं कि संध्या गायत्री में लय होगी गायत्री फिर ओमकार में लय होगा हम नहीं करेंगे किंतु स्वामी जी नेने यह भी कहा देखिए एगजैक्टली सेम सेंटेंस स्वामी जी ने कहा शरद चंद्र को कि हम या तुम बोलोगे तो नहीं होगा किंतु सत्य संकल्प ब्रह्मण है वह जब उच्चारण करेगा तब वह उसमें से पदार्थ प्रकट होगा यानी कि हमारी जब आध्यात्मिक उन्नति होती जाएगी हम भी तो सत्य संकल्प होते जाएंगे हम भी तो ब्रह्म स्वरूप होते जाएंगे तो हम भी जब ईश्वर का नाम स्मरण करेंगे तो ईश्वर के गुण हमारे में भी प्रकट होंगे हां किंतु ये जर्नी पे हम प्रारंभ कर देंगे क्योंकि अल्टीमेटली देखिए कि हम वेद में कहा जाता है कि मंत्र का स्पष्ट उच्चारण सही सही साइंटिफिक उच्चारण बहुत ही मायने रखता है क्योंकि मंत्र क्या है जगत को रिप्रेजेंट करते हैं जिस जिस तत्व के मंत्र है उस उस तत्व को वो मंत्र रिप्रेजेंट करते हैं आपने ठीक-ठीक उच्चारण किया तो आप उस तत्व को इवोक कर रहे हैं अग्नि के स्तुति के मंत्र है तो अग्नि देवता को वो आवाहन कर रहे हैं इंद्र की स्तुति के मंत्र तो इंद्र देवता को आवाहन कर रहे हैं इंद्र देवता अग्नि देवता मंत्रों के साथ में अभेद रूप से जुड़े हुए हैं तो भले ही चाहे आज मैं उच्चारण करना प्रारंभ करूं और देवता का प्राग्यवारे से मंत्र के उसके प्रभाव से सबकॉन्शियस प्यूरिफाई होता जाएगा और एक समय आएगा कि जब यह सत्य संकल्प व्यक्ति ठाकुर कहते हैं ना जो कि सत्यपाल करता है वह बोलेगा तो पहाड़ टल जाएगा आकाश उसका उसके नीचे गिर जाएगा उसके सामने माने सत्य संकल्प व्यक्ति क्या नहीं कर पाता है किंतु वह जर्नी है सही सही उच्चारण करने से जर्नी प्रारंभ हो जाती है कथ कथा था बांगला तो बो कथ कथा इसीलिए तो हमारा सत्संग चालू रहेगा जब तक आरोग्य भवन नहीं जाता हूं तब तक सत्संग करता रहूंगा सिर्फ आप नहीं मैं भी एक बार कार्य में प्रवृत होंगे तो वही फिर चलता रहेगा अभी यह अभी वो ये क्लास मेरे लिए भी एक वो क्या कहेंगे वाशिंग मशीन जैसा काम करता है और ये जो हम डेली क्लास करते हैं ना इसका फायदा जैसे कि अभी आपने प्रश्न किया नाम नामी अभेद तो इसके प्रिंसिपल हमने ऑलरेडी डेवलप डिस्कस कर लिए मुझे सिर्फ उसको रेफर ही करना है और आपको क्लियर हो गया मुझे वो एकदम सृष्टि के प्रारंभ से अल्फाबेटिकली ए बी सीडी करके नहीं करना है जेड का ही रिमाइंड करवा देना है ऑलरेडी यू नो