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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूप अवतार षय मेरी लुईस द्वारा रचित स्वामी विवेकानंद इन द वेस्ट न्यू डिस्कवर इस का फिफ्थ वॉल्यूम में एक चैप्टर है जिसका नाम है द ग्रेट समर स्वामी विवेकानंद जब सेकंड टाइम अमेरिका गए थे तो रिजली मैनर उनके जो क्लोजेस्ट डिसाइल थे अमेरिका में बेटी लगेट और फ्रांसिस लगेट और जोसेफाइन मैकला वे लोगों का यह वैसे तो फ्रांसिस लगेट का ये घर था और पेटी लगेट के साथ में उनकी शादी हुई थी विवाह हुआ था और जोसेफाइन मैक्लाउड थी वो बेटी लगेट की बहन थी तो इन तीनों ने स्वामी जी को रिचली मैनर में आमंत्रित किया था वहां के दिनों की कुछ घटनाएं हम देख रहे हैं अभी थोड़ा सा हम पढ़ते हैं कि मेरी लुईस क्या लिखती है देर वास अ टाइम स्वामी जी स्टार्टल्ड मिसेस लगेट एंड लिया विथ हिस डिनंसीएशन ऑफ द रिजट लॉस एंड कन्वेंशन ऑफ सोसाइटी बाय मींस ऑफ चच द स्ट्रांग ऑपरेस द वीक एंड विद हिज एडमिरे ऑ इंडिविजुअल स्ट्रांग एंड करेजियस इनफ टू ब्रेक थ्रू दिस लॉस स्वामी जी कभी-कभी समाज के उन नीति नियमों की कड़ी निंदा किया करते थे उनका प्रतिवाद किया करते थे जिस नियमों के द्वारा समाज के एक पूरे ग्रुप को समाज के एक पूरे हिस्से को वे लोग जो धनपति है जो लोग बड़े आदमी कहलाते हैं सोल्ड पावरफुल वे लोग गरीब लोगों का शोषण करते हैं इस तरह के कुछ नियम बनाए हुए हैं सभी सोसाइटीज में इस तरह से होता है तो स्वामी जी उन नियमों की निंदा किया करते थे और वे लोग जिन लोगों में यह करेज है साहस है उन्हे भीषण भीतर में से एक श्रद्धा है एक उनके भीतर में आत्मविश्वास है और जो लोग इस तरह के कठोर नियमों का भंग करते हैं भंग करने का उन लोगों में है उन लोगों की प्रशंसा किया करते थे अभी इस बात के पीछे में देखिए हम यह जो स्वामी जीी का स्टेटमेंट है उसको दो लेवल पर देख सकते हैं एक तो रिलीजियस लेवल प भी दूसरा सोशल लेवल पर भी सोशल लेवल पर तो बड़ा ही क्लियर है कि बहुत सारे समाज में बहुत सारे देशों में ऐसा होता है कि कोई कोई लोग इस तरह के नियम बनाते हैं जिससे कि वे लोग बाकी सबका शोषण कर पाए जैसे कि ब्रिटेन में फैक्ट्री लॉ था तो जो लोग फैक्ट्री में खास करके इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के बाद समय का यह है कि 18th सेंचुरी में उस समय के आसपास का कि जो लोग फैक्ट्री में काम करते थे उन लोगों की बड़ी ही दयनीय हालत थी और जब यह कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो कार्ल मार्क्स ने उसकी रचना की मार्क्स और एंजल्स तो वह मेनिफेस्टो पढ़ कर के उस उससे कम्युनिज्म से प्रभावित होकर के बहुत सारी फैक्ट्रीज में यूनियन बनना शुरू हो गए थे और जो जो लोग यूनियन बनाते थे वे लोग फैक्ट्री मालिकों के सामने अपने हक के लिए जो तो एक मिनिमम मिलना चाहिए इतना उनको हेल्थ के लिए व्यवस्था करनी चाहिए यह जो वर्क प्लेस हजार्ड जो होते हैं फैक्ट्री में काम करते-करते एक्सीडेंट हो सकते हैं तो फैक्ट्री में सेफ्टी के लिए वर्कर्स की सेफ्टी के लिए कुछ उनको यह मतलब नियम बनाने चाहिए कुछ इक्विपमेंट रखने चाहिए इस तरह से फिर उनके हेल्थ के लिए कुछ करना चाहिए उनको वेतन ज्यादा मिलना चाहिए वर्किंग वव से वो थोड़े से मॉडरेट होने चाहिए तो यह सब चीजों के लिए यह फैक्ट्रीज में इस तरह से उन्होंने न यह करना शुरू कर दिया स्ट्राइक करना तो यह जो फैक्ट्री में स्ट्राइक करना फिर यह जो खास करके हम लोग रशिया और चाइना में देखते हैं कि वहां पर जिस तरह से जमींदार थे पूंजीपति वे लोग बाकी लोगों का जिस तरह से शोषण करते थे तो खेतों में खेत मजदूरों का शोषण उन लोगों का एक्सप्लोइटेशन और फैक्ट्री में फैक्ट्री वर्कर्स का शोषण उन लोगों का एक्सप्लोइटेशन तो यह खेत मजदूर और यह फैक्ट्री वर्कर सब लोगों ने मिलकर के जो रिबेलियस में फिर किस तरह से यह सोवियत यूनियन या तो फिर यह मॉडर्न चाइना का प्रारंभ हुआ भारत में भी देखिए भारत में किस तरह से स्वामी जी ने देखा कि वो ब्रिटिश साम्राज्य लोगों का शोषण कर रहा था हालांकि स्वामी जी तो पॉलिटिकल नहीं थे किंतु यह कांग्रेस की रचना तो उसी समय हो चुकी थी भारतीय क्रांतिकारी उसी समय तो धीरे-धीरे करके स्वामी जी के वचन और अग्निमुख के अपनी आजादी की लढत के लिए उन्होंने कमर कसना शुरू कर दिया था तो कांग्रेस ने एक तरह से जो फाइट की चंपारण से लेकर के एक के बाद एक जो आंदोलन कांग्रेस ने किए महात्मा गांधी की आगे वानी है ठर और यहां पे दो तरह के उस समय यह हो गए थे डिवीजन एक तो था कि नॉन वायलेंट एक डिवीजन था फ्रीडम फाइटर्स का दूसरे लोगों का थोड़ा सा रेडिकल डिवीजन था वे लोग का कहना था कि यदि यह ब्रिटिश ऑफिसर का मर्डर भी कर दे जो लोग हमारे पर अत्याचार करते हैं तो भी उसमें कोई हानि नहीं है यह धर्म ही है जैसे कि सरहद के ऊपर में आप दुश्मनों के साथ में लड़ते हैं तो तो जब दुश्मन की हत्या करते हैं तो वो तो कोई अधर्म नहीं कहा जाएगा तो यहां पर भी इसी तरह से जो लोग हमारा शोषण करते हैं उन लोगों की हत्या करें तो वो भी अधर्म नहीं देश की रक्षा के लिए धर्म ही है तो ये दो डिविजन वहां से स्टार्ट हुए तो देखिए कि स्वामी जी का ये अच्छा तो ये जो स्वामी जी ने कहा कि समाज के वो नियम जो कि लोगों के ऊपर में अत्याचार करने के लिए बनाए गए हैं उस नियम का भंग करना वह कर्मवीर का वह वीर का कर्तव्य है यह स्टेटमेंट स्वामी जी का यह सुनकर के वहां के बाकी लोग बड़े ही घबरा गए थे घबरा इसलिए गए क्योंकि खास करके यह जो कम्युनिज्म जो उस समय राइज हो रहा था तो उस समय ऐसा लग रहा था कि चलो जो लोग जन्म गत पूंजीपति है जो लोग जन्म गत जमींदार है उनसे जमीन हथिया लो जैसे यूरोप में हो रहा है तो वह एक चीज जैसे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के सामने युद्ध हो रहा है वह एक चीज है किंतु अमेरिका पूरा कैपिटिस प्रिंसिपल के ऊपर में बना था अभी वहां पे इंडिविजुअल प्रॉपर्टी का बहुत ही एक प्राधान्य है यह जो स्वामी जी जहां पर भी जाते हैं कहते हैं कि एक ब्रह्मण है विथ इन दिस ब्रह्मण अपना आइडेंटिटी ये हो जाता है डिसोल्व हो जाता है मेरा यदि कोई भी एक इंडिविजुअल अस्तित्व है तो यह अस्तित्व ब्राह्मण के में विलीन हो जाएगा तो यह अपना आइडेंटिटी को कोई एक लार्जर आइडेंटिटी में विलीन कर देना यह बात से अमेरिकन लोगों को डर जो लगता था इसका पीछे का यह भी एक कारण था कि जिस तरह से यूरोप में जिस तरह से एशिया में कम्युनिज्म चल रहा था तो कम्युनिज्म का जो बेसिक सिद्धांत है कि इंडिविजुअल प्रॉपर्टी नहीं रखने देंगे जो भी प्रॉपर्टी होगी वो स्टेट की होगी वो सरकार की होगी फिर सरकार आप काम कीजिए किंतु आपको मेहता ना मिलेगा आपका ओनरशिप नहीं रहेगा आपको प्रॉफिट नहीं मिलेगा आपको सिर्फ सैलरी मिलेगी तो ये कम्युनिज्म और कैपिट इजम ये दोनों के बीच की जो ये थी दरार वो अमेरिका में बहुत ही ज्यादा शार्प थी क्यों क्योंकि अमेरिका में जो अमेरिका का जो डेवलपमेंट हुआ ना उसका भी जो एक हिस्टोरिकल कॉन्टेक्स्ट है कि बहुत सारे लोग जिन लोगों में शक्ति था साहस था उत्साह था यह लोगों को यूरोप त्याग करना पड़ा क्योंकि यूरोप में डेवलपमेंट का कोई ज्यादा स्कोप नहीं था यूरोप में पहले से ही पूंजीपति लोग बैठे हुए थे कैपिट इस्ट लोग व अपना राज्य चला रहे थे तो पॉलिटिक्स में भी वही इंडस्ट्री में भी वही इकोनॉमिक्स में भी वही सोसाइटी में भी वही अभी जिसमें थोड़ा सा साहस है उसको तो एक नया फील्ड चाहिए अपनी प्रतिभा को मेनिफेस्ट करने के लिए अपनी जो टैलेंट है उसको एक्सप्रेस करने के लिए तो ये नया फील्ड कहां मिलेगा तो कोई कोई लोग थे कभी जो लोग भारत आते थे भारत में तो ब्रिटिश साम्राज्य था और ब्रिटिश लोगों का बड़ा ही यहां पे यह था प्रेषित था तो कोई ब्रिटिशर ब्रिटेन में भले ही चाहे गरीब हो भारत में आकर के वह राजा की तरह रह सकता है तो यही ब्रिटिशर या यही यूरोपियन यदि अमेरिका में जाकर के बसता है तो वहां के रेड इंडियन को तो पहले ही मार के भगा दिया था तो उनकी जमीन हथिया लेगा और वहां पर 100 100 एकड़ के फाम है 200 200 एकड़ के फार्म है वहां पर जाकर के वह खेती करेगा वो यह करेगा पशुपालन करेगा तो उसको तो बड़ा स्कोप है इकोनॉमिक डेवलपमेंट का सोशल डेवलपमेंट का वगैरह यह वर्जिन लैंड है बिल्कुल एक नई भूमि है बिल्कुल नया जगत है तो इस नए जगत में जिस किसी को अपना एक खड़ा करना है पूरा एक लाइफ बनाना है वो यहां पर बना सकता है तो यह अमेरिका का बैकग्राउंड है द लैंड ऑफ फ्रीडम द लैंड ऑफ अपॉर्चुनिटी जितने भी लोग यहां पर आते हैं सभी के सिविल राइट्स है सभी के यह लिबर्टी है कि सभी की इंडिविजुअल प्रॉपर्टी पर अधिकार है राज्य या सरकार या तो फिर यह गवर्नमेंट यह लोग हमारे से संपत्ति हथिया करके हमको ओवरनाइट रास्ते पर नहीं ले आ पाएंगे जिस तरह से यूरोप में उस समय सतत होता था कहां पे तो कम्युनिज्म है तो कम्युनिस्ट गवर्नमेंट आपकी प्रॉपर्टी को उठा उ लेगी कहां पर राजा शाही है तो राजा लोग आपकी प्रॉपर्टी को उठा लेंगे रातों रात आपको अपने घर में से बाहर निकाल देंगे जिस तरह से चाहे आपके ऊपर में अत्याचार करेंगे तो आप मेरा तो खुद का तो एक ह्यूमन राइट होना चाहिए भाई कि मैं डिग्निटी से जू मैं फ्रीडम से जो मैं अपनी टैलेंट को मेनिफेस्ट कर पाऊं एक्सप्रेस कर पाऊं तो यह जगह कहां मिलेगी तो दैट लैंड ऑफ फ्रीडम लैंड ऑफ अपॉर्चुनिटी वाज अमेरिका तो अभी अमेरिका में आकर के जब कुछ लोगों ने यह कम्युनिज्म स्टार्ट किया मिल जो फैक्ट्री ओनर जो होते थे उसके अगेंस्ट में यह स्ट्राइक करना शुरू किया तो पूरा सोसाइटी उसके अगेंस्ट में हो गया बात यह नहीं है कि फैक्ट्री ओनर के सामने जो फ्रीडम चाहिए मतलब फैक्ट्री ओनर से उनके जो ह्यूमन राइट्स है जो इकोनॉमिक राइट्स है वो चाहिए वो बात नहीं है वो मिले ना मिले बात यह है कि ये जो इस तरह का कोई भी ऑर्गेनाइजेशन जो कि ह्यूमन राइट्स को अपने वश में कर लेता है ह्यूमन राइट्स को सुपर सड करके अपना आइडियो जीी उन लोगों के ऊपर में बिठा देता है तो ऐसा तो नहीं चलेगा एक तो ह्यूमन राइट से दूसरा है आइडियो जीी कोई भी मेरा कोई भी आपका आइडियो जीी महान हो आप लोग जीसस क्राइस्ट में मानते हैं ना कि आप कम्युनिज्म में मानते हैं ना कि आप फासिज्म में मानते हैं ना कि जिस किसी तरह की आइडियो जीी में आपको विश्वास हो आप विश्वास को रखिए आपके पास में मेरा जो राइट्स है मेरा जो फैमिली का राइट्स है मेरा मेरा जो इकोनॉमिक राइट है मेरा लैंड एंड लेबर राइट जो है मेरा जो अपॉर्चुनिटी जो राइट है वह सब मुझे मिलना ही चाहिए वह सब मेरे पास में होना ही चाहिए तो ये जो मने ये जो फ्रीडम के लिए लोग अमेरिका में इकट्ठा हुए थे तो अमेरिका में ये जो यूरोपियन आइडियो जीी थी ये फासिज्म है ये कम्युनिज्म है या तो प इंपिरियलिज्म कॉलोनियलिज्म जो है तो ये तीनों आइडियो जीी को यूरोप में अमेरिका में बिल्कुल ही उस को रिजेक्ट कर दिया था किसी भी तरह का कम्युनिज्म भी वहां पर नहीं चला फासिज्म भी नहीं चला कॉलोनियलिज्म भी नहीं चला यूरोप के जितने भी देशों है उन लोगों ने दूसरे एशिया के देशों के ऊपर में या तो अफ्रीका के ऊपर में आक्रमण करके उनको कॉलोनाइज किया था अमेरिका ने इस तरह से नहीं किया है अमेरिका का खुद का पॉलिटिक्स है उस बात में कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु जो यूरोपियन कॉलोनियलिज्म जो था उस तरह से वे लोग नहीं गए हैं उन लोगों ने जद एशियन और अफ्रीकन देशों का शोषण भी किया है तो बड़ी सूक्ष्म वो सब पॉलिटिक्स करके किया है ओवर अटैक करके मैं आजकल की बात नहीं कर रहा हूं मैं स्वामी जी के समय तक की बात कर रहा हूं यह 1890 की बा सब बातें हैं तो अमेरिका जो फ्री फ्रीडम मिला वो 1780 के आसपास में जो मिला होगा और यह था 1880 तो ऑलमोस्ट 100 3 100 इयर्स हो गए थे अमेरिकन फ्रीडम को उस उस समय के आसपास की ये सब सब बातें हैं तो तब तक था कि अमेरिका इज अ लैंड ऑफ फ्रीडम अमेरिका इज अ लैंड ऑफ अपॉर्चुनिटी यहां पे ह्यूमन राइट्स है इकोनॉमिक राइट है आपके लैंड एंड लेबर राइट है प्रॉपर्टी राइट है इन सबकी संपूर्ण रूप से रक्षा होगी कोई भी गवर्नमेंट कोई भी ऑर्गेनाइजेशन का यह पावर नहीं है कि आपका घर आपका आपकी आपका रोटी रोजगार आपका फैमिली आपसे छीन ले जैसे कि यूरोप में होता है जैसे यह फासिस्ट लोग थे फासिज्म ऐसा करता था कम्युनिज्म ऐसा करता था या कॉलोनियलिज्म ऐसा करता था कॉलोनियलिज्म यानी कि यह ब्रिटेन ने जो भारत पर आक्रमण करके भारत की ऊपर में जो सत्ता जो शासन कर रहे थे वो तो अमेरिका छोड़कर के ज्यादातर देशों में इस तरह की सरकार थी कि वे लोग जब चाहे उनके जो सिटीजन है वहां के जो निवासी है उन लोगों के ऊपर में उनके ह्यूमन राइट्स के ऊपर में आक्रमण कर सकते हैं जबकि अमेरिका में ही उस समय तक जो स्वामी जी अमेरिका गए उसके पीछे का यह सब रहस्य है कि वो जो फ्रीडम था इंडिविजुअलिटी थी मेरा जो ह्यूमन राइट्स था उसकी जो भावना इतनी स्ट्रांग थी कि ब्रिटेन ने जब यह कॉलोनी अमेरिकन जो कॉलोनी थी ब्रिटेन की उस समय उनके ऊपर में टैक्स डाला तो सीधा-सीधा उन्होंने कह दिया कि आपकी पार्लियामेंट में रिप्रेजेंटेशन दीजिए तब हम टैक्स देंगे बिना मुफत का टैक्स कैसे लेंगे आप नो टैक्सेशन विदाउट रिप्रेजेंटेशन इस बात के ऊपर में तो अमेरिकन लोग ब्रिटिश के साथ में युद्ध कर दिए थे और वहां तक कि उन लोगों ने देखा कि एक कोई स्ट्रांग व्यक्ति होता है ना इसको आप सत्ता देते हैं तो उसकी राजा बन जाने की एक बड़ी तीव्र महत्वाकांक्षा होती है और लोगों का भी एक होता है जनसाधारण का कि चलो यह बड़ा आदमी है इसको राजा बना दो उसके सामने झुक जाओ वगैरह तो उन्होंने अपने कांस्टिट्यूशन में यह पक्का रखा था कि अमेरिकन प्रेसिडेंट उस समय जॉर्ज वाशिंगटन उन लोगों के सेनापति थे युद्ध में ब्रिटेन के अगेंस्ट में तो जॉर्ज वाशिंगटन का बड़ा ही प्रेस्ट था उस समय तो इन लोगों को जो कांस्टिट्यूशन बना रहे थे अमेरिकन उन लोगों को यह डर लग गया कि यदि जॉर्ज वाशिंगटन का नाम इतना जदी प्रेस्टीजियस है बड़ा बहुत बड़ा आदमी जद ये हो जाता है और अपने को राजा डिक्लेयर कर लेता है जिस तरह से यूरोप में होता है सब राजाशाही ही थी सप्तम पूरे विश्व में व राजा ही लोग राज करते थे डेमोक्रेसी जैसा तो नाम मात्र का था ब्रिटेन में पार्लियामेंट थी किंतु अल्टीमेट पावर राजा के पास में था तो अभी अ जद जॉर्ज वाशिंगटन अपने को किंग या एंपरर डिक्लेयर कर लेते हैं तो वही हम ब्रिटिश ब्रिटेन के नीचे में थे गुलाम अभी अपने डोमेस्टिक राजा के नीचे में गुलाम हो जाएंगे तो उन्होंने कांस्टिट्यूशन में रखा कि प्रेसिडेंट की जो मुद्दत होगी जो पीरियड होगा प्रेसिडेंसी चा साल की ही होगी और फिर वो सिर्फ एक बार रीइलेक्शन वो जीत पाएगा खैर यह एक बार या दो बार इलेक्शन लड़ पाए यह तो बहुत बाद में हुआ था ये रूजवेल्ट के टाइम में हुआ था सेकंड वर्ल्ड वॉर में किंतु यह इतना तो उन्होंने ठीक कर दिया कि एवरी फोर ईयर वे लोग इलेक्शन लड़ना पड़ेगा इलेक्शन में जीतेगा तभी वह प्रेसिडेंट हो पाएगा उसका जो राज्य उसका शासन का गवर्नमेंट का पीरियड 4 साल तक लिमिट कर दिया था तो यह था कि अमेरिका का बैकग्राउंड कि किसी भी तरह की अथॉरिटी के अंडर में नहीं आना है किसी भी तरह के नियम के अंडर में नहीं आना है और यहां पर यहां पर स्वामी जी आकर के दो चीज इनको बता हैं कि पहले तो हम लोगों की जो सो कॉल्ड इंडिविजुअलिटी है यह जो सो कॉल्ड ह्यूमन राइट्स है जिसके ऊपर में यह अमेरिका की रचना हुई है अमेरिका का फाउंडेशन लगा है यह सब आपके मन का भ्रम है यहां पे सिर्फ ईश्वर ही है पूरे जगत ने और हम लोग ईश्वर के ही प्रकाश के एकएक किरण है ईश्वर में से ही हमारा जन्म हुआ है ईश्वर में से ही वापस चले जाना है तो जैसे ही स्वामी जी ने ऐसा कहा कुछ-कुछ लोगों को बड़ा ही ये ये लोग टेंशन में आ गए कि ये तो वही बात हो गई यूरोप में क्या होता था यह चर्च और राजा ये जो चर्च एंड किंग ये दोनों मिलकर के राज करते थे लोगों के ऊपर में जबी राजा की होगी टेंपोरल अथॉरिटी और ये पोप की होगी ये सेक्रेड अथॉरिटी ये यानी कि व एक एक का होगा कि ईश्वरीय मने किंगडम ऑफ हेवन दूसरा है कि किंगडम ऑफ अर्थ ये दोनों मिलकर के चक्की की तरह वो किसानों को खेत मजदूरों की पिसाई करते थे जबी कुछ भी मन में हुआ रिबेलियस जैसा अपने खेत मालिक जो है उसके अगेंस्ट में या फैक्ट्री मालिक के अगेंस्ट में और चर्च में गया तो चर्च का वो जो है लोकल पादरी या जो जो भी है बिशप वो कहेगा कि देखो यह जो अथॉरिटी है उसको स्वीकार करना ही तुम लोगों का धर्म है अथॉरिटी के सामने कुछ भी बोलोगे तो तुम लोगों का सत्यानाश हो जाएगा यहां पर चर्च की अथॉरिटी स्वीकार करनी है वहां पर फैक्ट्री मा मा है ना कि खेत मालिक है उसकी अथॉरिटी को स्वीकार करना है तो इससे तो रिबेलियस तो मैंने इससे तो नाराज होक के तो बहुत सारे लोग अमेरिका में आए थे तो जब यहां पर स्वामी जी वैसे यह जो एक बात करते हैं कि जो लॉ है उसके अगेंस्ट में जाना इस तरह के लॉ इस तरह के नीति नियम कानून कायदे कानून जो कि मनुष्यों का शोषण करते हैं इस तरह के कानून का भंग करना वह हमारा धर्म है और जो इस तरह का भंग करेगा वह बड़ा ही शूरवीर है तो एक तरह से देखें तो यह अमेरिका के कैरेक्टर में ही आता है जो स्वामी जी कहते हैं स्वामी जी का खुद का जो अनुभव है यहां पे वो यह बात बिल्कुल ठीक ही उनको लगेगी कि ये तो रेबेल लोगों का ही तो देश है अमेरिका तो फिर ये लोग स्वामी जी की इस बात के सामने चौक क्यों जाते हैं किंतु बात ऐसा था कि बाय दैट टाइम स्वामी जी वहां पर पहुंचे थे तो अमेरिका का खुद का एक क्या कहेंगे एक डेंजरस परिवर्तन होना शुरू हो गया गया था अभी यह फ्रांसिस लगेट खुद एक बहुत बड़ा पूंजीपति था और उसको लगता था कि समाज के यह जो खास कर के ये जो क्रिमिनल लॉज है ये क्रिमिनल लॉज को य जितने भी लॉज और रेगुलेशन है गवर्नमेंट के इनका एक ही काम है किय पूंजीपतियों कीय जो पूंजी है उनकी फैक्ट्रीज है उनके बिजनेस है उनका जो मर्केंटाइल एंपायर है उनकी रक्षा करना तो जब स्वामी जी यही बात उन लोगों को कहते हैं तब यह लोग थोड़े से डर जाते हैं ये एक समझने वाली बात है दूसरा एक है कि यह तो हो गया कि इकोनॉमिकल पॉलिटिकल एस्पेक्ट इसका जो स्पिरिचुअल एस्पेक्ट जो है इसके बारे में भी हमने देखा कि किस तरह से वहां पे एक तरह से है कि इंडिविजुअल फ्रीडम हमको चाहिए मेरा एक मोरल राइट है मेरी प्रॉपर्टी के ऊपर में मेरे फैमिली के ऊपर में मेरे घर के ऊपर में मेरा एक ह्यूमन राइट है मुझे अपॉर्चुनिटी चाहिए ये इंडिविजुअलिज्म या तो ह्यूमन राइट पर्सनल ह्यूमन राइट यह तो मुझे चाहिए ही चाहिए वरना तो यदि मेरा ह्यूमन राइट्स मेरे से ले लिया जाएगा मेरी इंडिविजुअलिटी यदि मेरे से छीन ली जाएगी तो मैं तो एशिया में अफ्रीका में यूरोप में जो आम आदमी जिस तरह से राजा की या तो शासन की गुलामी करता है मैं भी तो गुलाम ही हो जाऊंगा मेरा इंडिपेंडेंस कहां पे रहेगा मेरा फ्रीडम ऑफ एक्शन फ्रीडम ऑफ चॉइस फ्रीडम ऑफ स्पीच यह सब कहां पे रहेगा यह सब जो अमेरिकन कांस्टिट्यूशन है उसमें बड़े ही इंपॉर्टेंट यह सब लॉज है कि जितने भी सिटीजन है उनको फ्रीडम ऑफ चॉइस होना चाहिए फ्रीडम ऑफ स्पीच होना चाहिए फ्रीडम ऑफ एक्शन होना चाहिए उनको एक गवर्नमेंट को उनकी रक्षा करने के लिए लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए गवर्नमेंट को पूरा अपना मेहनत करना पड़ेगा अपना जी जान लगा देना पड़ेगा यह सब होना चाहिए तभी तो एक अमेरिका का एक यूनिकनेक्ट में यह खेत मजदूर और फैक्ट्री मजदूर गुलाम है ब अफ्रीका में तो वैसे ही गुलाम लोगों का ही फैक्ट्री है वहां से तो गुलाम लाकर के पूरे विश्व में बेचे जाते हैं तो ये यूरोप एशिया और अफ्रीका ये तीनों जो पूरे जगत है जगत में यही तो तीन चार बड़ी-बड़ी जगह थी अमेरिका है यानी कि न्यू वर्ल्ड और दूसरा है ओल्ड वर्ल्ड ओल्ड वर्ल्ड में यूरोप अफ्रीका और एशिया तो ये ओल्ड वर्ल्ड और न्यू वर्ल्ड ऐसा उनका कांसेप्ट था पुराने जगत में क्या होता है ओल्ड वर्ल्ड में कि जो आम आदमी है वह जो शासन करता है उनका गुलाम है और न्यू वर्ल्ड में क्या है कि आम आदमी के पास में सब तरह के राइट है और जो शासन करता है वह सब समय संदेह की दृष्टि में रहते हैं कि वे लोग अपने शासन को अपनी सत्ता को यहां तक ना एक्सपें कर दें कि आम आदमी के ह्यूमन राइट्स को व छीनना ना शुरू कर दे तो ये इंडिविजुअलिटी वाज द फाउंडिंग प्रिंसिपल ऑफ द न्यू वर्ल्ड और खासकर करके न्यू वर्ल्ड में भी यह नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका धीरे-धीरे करके वही ओल्ड वर्ल्ड की दिशा में जा रहा था यूरोप और एशिया और अफ्रीका की दिशा में किंतु एटलीस्ट नॉर्थ अमेरिका था यह अमेरिका और कैनेडा खास करके कैनेडा से भी ज्यादा यह खास करके अमेरिका ये यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका यूएस इन लोगों का था कि इंडिविजुअलिटी को बिल्कुल पक्का हमको बनाए रखना है तो अभी और यह रिलीजन में भी वही इंडिविजुअलिटी चाहिए कि या ओल्ड वर्ल्ड में क्या क्या होता है जो धर्म गुरु है उन लोगों का एकदम भयानक अधिकार है उनके पास में भयानक सत्ता है वे लोग जो चाहे अपने जो उनके जो भक्त है उनका शोषण कर सकते हैं और उसमें भी यह जो भारत की यह जो काष्ट प्रथा जो थी नाती प्रथा उसका तो बहुत ही अमेरिका में लोगों ने अमेरिका में लोगों को बहुत ज्यादा भड़काया गया था इन सबके बारे में कि जो यह हिंदू औरत होती है उनकी यदि लड़की का जन्म होता है तो सा उसको मगरमच्छ को खिला देते हैं क्रोकोडाइल को खिला देते हैं स्वामी जी को इस तरह से प्रश्न भी किसी ने किया था कि आपको मगरमच्छ को क्यों नहीं खिला दिया गया जब आप छोटे थे तो स्वामी जी ने उत्तर दिया कि मैं बहुत मोटा छोटा था बच्चा जब था तो मेरी मां ने जब मगरमच्छ के सामने फेंक दिया तो मगरमच्छ ने मुझे खाने की वजह मुझे छोड़ दिया इसलिए मैं अभी तक बचा हूं इस तरह के वो भारत के बारे में बहुत उल्टी पुल्टी बातें अमेरिका में चलती थी बहुत कुछ उसमें सही भी था खास कर के ये सती प्रथा थी ये बाल्य विवाह प्रथा थी थी ये नाती और जाति प्रथा थी अस्पृश्य लोगों की प्रथा थी ये मतलब भयानक जो परिस्थिति थी एशिया में वो अमेरिका में ना आ जाए इसके बारे में यह लोग बड़े चौकन थे कि किसी भी तरह की गवर्नमेंट अथॉरिटी को मैं नहीं स्वीकार करेंगे किसी भी तरह की धार्मिक अथॉरिटी को भी नहीं स्वीकार करेंगे चर्च को भी नहीं स्वीकार करेंगे और स्टेट को भी नहीं स्वीकार करेंगे और चर्च और स्टेट में सेपरेशन तो बना ही रहना चाहिए ये सब अमेरिका के फाउंडिंग प्रिंसिपल थे तो उसके ऊपर जब स्वामी जी कहीं जाकर के कहते हैं कि हमारी जो इंडिविजुअलिटी है वो एक एक परछाई मात्र है सूरज जब प्रगट होता है तो परछाई दिखती है सूरज जब चला जाता है तो परछाई अदृश्य हो जाती है यह परछाई मात्र है मेरा जो असली अस्तित्व है मेरा जो असली स्वभाव है माय रियल ट्रू नेचर इट इज द आत्मन तो जब भी ये स्वामी जी इंडिविजुअलिटी को आत्मन के भीतर में मर्ज करने की बात करते थे इन लोगों को यही लगता था पहले तो अभी तो आत्मन कह रहे हैं बाद में एक धर्म गुरु आकर के बैठ जाएगा वोह बोलेगा कि आपकी इंडिविजुअलिटी हमको दे दीजिए देखिए अमेरिका में ऐसे कल्ट जो चलते हैं ना उन लोगों का भी बड़ा ही दुर नाम है कि ये कोई एक लीडर खड़ा होता है वो डिक्लेयर करता है मैं मैं जीसस हूं या तो फिर मैं ऐसा कोई अवतार हूं मैं कोई धर्म गुरु हूं फिर उसके नाम पर लोग पागल हो जाते हैं फिर यह लीडर क्या करता है धर्म गुरु क्या करता है लोगों की संपत्ति हथिया लेता है कहता है सबको कि आप लोग मुझे डोनेट कीजिए आपकी जो प्रॉपर्टी है आपका घर है आपका बैंक बैलेंस है जो कुछ भी है आपके पास में सब कुछ मुझे डोनेट कर दीजिए आप यहां पे अपनी कम्युनिटी में या आश्रम में आकर के रहिए और यहां पे जो खाना मिलता है वो खाइए यहां पर जो काम दिए जाता है वो कीजिए तो इस तरह से अमेरिका में कुछ-कुछ धर्म गुरु काफी बदनाम हो चुके थे उस समय भी और अभी भी चल चल ही रहा है ऐसे बहुत सारे केसेस चले हैं वो रजनीश के बारे में भी यही सब जाता था वहां पे कि उसने उसके जो फॉलोअर है अमेरिकन फॉलोअर्स उनके पास में जोर जबरदस्ती डोनेशन इकट्ठा करता था उसकी लग्जरी लाइफस्टाइल थी रजनीश की ओशो की वो लगजरी लाइफस्टाइल उसको चाहिए थी तो बोल कर के लोगों से पैसा पढ़ाता था अपने फॉलोअर्स के पास से यह सब बातें बहुत चलती है और सिर्फ यह रजनीश के बारे में ही नहीं वहां के लोकल अमेरिकन धर्म गुरु भी कोई कम नहीं है तो सब तरह से लोगों को ये एक डर था कि जद ऐसा कहेंगे कि आपकी इंडिविजुअलिटी जो है वह एक किसी महत एंटिटी के भीतर में मर्ज कर देनी है तो पहले तो डर यही लगेगा कि मेरा ह्यूमन राइट्स जो है मेरी ये जो प्रॉपर्टी है यह सब क्या मेरे से छीन लेंगे कि नहीं मेरी अवस्था वही भारतीय गुलाम ये अफ्रीकन गुलाम ये यूरोपियन गुलाम ऐसी ही हो जाएगी क्या यह डर सबसे पहला लगता है तो स्वामी जी देखिए कि स्वामी जी पॉलिटिक्स में नहीं जाना चाहते थे किसी भी तरह की ऑर्गेनाइज ऑर्गेनाइजेशनल सेटअप उनको नहीं नहीं अच्छा लगता था उसके पीछे में भी एक कारण है पहले तो अपना रिलीजन वेदांत यह कहता है कि आपकी जो इंडिविजुअलिटी है वह ब्रह्म मात्र है आपको शरणागति और आत्म श्रद्धा इन दोनों के द्वारा आपको ईश्वर प्राप्ति करनी है आत्मज्ञान प्राप्त करना है अभी प्रॉब्लम यह है आत्म श्रद्धा के सामने कि धर्म के साथ में जिस तरह से शरणागति को जोड़ा गया है धर्म के साथ में जिस तरह से भक्ति को जोड़ा गया है वैसे ही यह शरणा ये आत्म श्रद्धा या तो फिर यह त्याग इन दोनों की बातें बहुत कम लोग करते हैं तो वेदांत के नाम पर यदि वही नाटक चालू हो जाएगा कि आप शरणागति कीजिए आप भक्ति कीजिए बस इसी से आपका काम हो जाएगा किंतु त्याग और आत्म संयम और आत्म श्रद्धा यह सब बातें नहीं करेंगे तो क्या होगा आखिर में फिर एक दो गुरु लोग खड़े होंगे धर्म गुरु खड़े होंगे फिर यही लोग लोगों का शोषण करना चालू कर देंगे और वेदांत को जिस तरह से भूतकाल में बदनाम किया गया था भारतीय हिंदू धर्म को सनातन धर्म को वही बदनामी का कलंक हमारे सर पे फिर से एक बार लग जाएगा तो स्वामी जी एक और किसी भी तरह के ऑर्गेनाइज्ड रिलीजन का विरोध करते थे जब भी कोई भी कहता था यह ब्रह्मवादिनी थी या तो फिर ये क्रिश्चन साइंटिस्ट थे या तो फिर यह होम ऑफ ट्रुथ वगैरह इस तरह के मॉडर्न रिलीजियस मूवमेंट यूरोप में अमेरिका में काफी चल रही थी तो उन किसी के साथ में किसी भी तरह के एसोसिएशन का स्वामी जी जिस तरह से विरोध करते थे वैसे ही वेदांत सोसाइटी को एस्टेब्लिश करने के पहले भी स्वामी जी ने बहुत कुछ सोचा था कि वही नाटक ना फिर से चालू हो जाए कि वेदांत सोसाइटी में एक गुरु जा करके बैठ जाएगा बोलेगा मेरी बात सुनो मेरी आज्ञा का पालन करो ये गुरु लोग जो होते हैं शरणागति के बारे में तो बढ़िया सी बातें करते हैं किंतु आत्म श्र आत्म संयम आत्म त्याग उसके बारे में कुछ भी नहीं बोलेंगे क्यों क्योंकि शरणागति और आत्म श्रद्धा यह दोनों एक दूसरे के मने एक सिक्का होता है उसकी एक पहलू और उसका दूसरा पहलू ये किस तरह से एक दूसरे के साथ में भिन्न रूप से जुड़े हुए हैं किंतु कुछ कुछ लोग है ज्यादातर जो गुरु है वह आपको शरणागति के बारे में ही बताएंगे वे लोग ऐसा नहीं कहेंगे कि आपके भीतर में आत्म श्रद्धा भी होनी चाहिए क्योंकि यदि किसी के भीतर में आत्म श्रद्धा होती है तो वो सभी चीजों को क्वेश्चन करता है स्वामी जी को हाजरा पसंद क्यों था हाजरा का क्वेश्चनिंग नेचर था सभी चीजों को प्रश्न करेगा ठाकुर ये जो दर्शन कर रहे हैं वो सही है कि नहीं ठाकुर की भी बात हम क्यों मान ले हमको तो कुछ तो अनुभूति होनी चाहिए तभी तो जाकर के हम लोग ठाकुर के सामने शरणागत होंगे तभी तो जाकर के हम किसी भी एक गुरु को अपने अपने गाइड के रूप में अपने अपना हाथ पकड़ कर के ये भवसागर पार करवाएंगे इस तरह से किसी को स्वीकार करना वो भी तो तभी होगा जब भी हमारे भीतर में प्रचंड आत्म श्रद्धा होगी प्रचंड आत्म संयम होगा तभी तो यह होगा तो ये धार्मिक जीवन के जो एक एक सबसे इंपोर्टेंट गुण या तो फिर सबसे इंपोर्टेंट साधना जिस तरह से शरणागति है जिस तरह से भाव और भक्ति है तो उतना ही यह त्याग और आत्म श्रद्धा है किंतु लोगों को वश में करने के लिए त्याग और आत्म श्रद्धा को भूल कर के लोगों को ऐसा सिखाया गया झूठ मूठ का कि आप लोगों से त्याग होगा नहीं त्याग करना तो बहुत वीरो का काम है आप लोग शरणागति होकर के लेकर के रहिए आप लोग तो गृहस्थ है गृहस्थ लोगों से तो ज्यादा कुछ आपका विल पावर भी कमजोर है आपकी कैपेसिटी भी बड़ी ही लिमिटेड है आपके पास में समय भी नहीं है तो बस हमारी पूजा कीजिए और बस हमको डोनेशन देते रहिए इसी में आपका काम हो जाएगा आपको और कुछ करने की जरूरत नहीं है ऐसा करके जो एक नाटक सदियों तक चला है इसी में तो धर्म इतना बदनाम हो गया है कि जैसे एक धर्म गुरु कोई गलत आचरण करता है तो उसका नाम लेकर के सभी लोगों कहते हैं कि यदि धर्म गुरु ऐसा है तो धर्म भी ऐसा ही होगा तो यह जो विशय साइकल थी उसको तोड़ने के लिए स्वामी जी ने बहुत कुछ सोचा था अभी देखिए कि आज के कांटेक्ट में यदि देखा जाए कि स्वामी जी का यह जो आईडिया है कि शरणागति और भक्ति के साथ में त्याग और आत्म श्रद्धा इन दोनों को इक्वल इंपो पोटेंस देना है वो आज हम लोग इसको किस तरह से देखते हैं आज हमारे साथ में एक दूसरा भ्रम खड़ा हुआ है हम लोगों ने इस तरह से सोचना शुरू कर दिया है कि ईश्वर को समझने के लिए दो डिफरेंट आइडियो जीी है एक है धत और दूसरा है अद्वैत अद्वैत को वही लोग फॉलो करेंगे जो लोग सन्यासी है या तो जिनका मनोबल मनः शक्ति या तो फिर यह विल पावर बड़ा स्ट्रांग है वही अद्वैत को फॉलो करेगा बाकी हम लोग द्वैत के पथिक है हमको भक्ति शरणागति लेकर के रहना है यहां पर स्वामी जी अपना जो नया संदेश देना चाहते थे कि अद्वैत फॉर ऑल जो भी जगत में निवासी है बच्चा हो ना कि बूढ़ा हो स्त्री हो ना कि पुरुष हो सभी के लिए अद्वैत पंथ है इसका पीछे का कारण क्या है बात सिर्फ यह नहीं है कि भगवान है वह साकार है ना कि निराकार है ईश्वर है ना कि ब्रह्मण है वो सब आइडियो कल डिस्कशन में स्वामी जी नहीं चाहते जाना चाहते स्वा जी चाहते हैं कि यह जो आत्म श्रद्धा और आत्म संयम यह दो गुण है यह जो कैरेक्टरिस्टिक है सभी के भीतर में जाए धर्म को सिर्फ शरणागति का रास्ता मत स्वीकार कर लो धर्म को सिर्फ ईश्वर की आराधना के रूप में मत देखो धर्म को साथ-साथ में ही अपना विल पावर अपना कॉन्फिडेंस अपनी इंद्रियों पे अपने डिजायर्स पर एक तरह का संयम मॉडरेशन उसके रूप में भी देखो जब तक ये दो एक स्प्लिट हो गया था ये स्प्लिट को आप फिर से हील करो ध्व पार्ट और अद्वैत पार्ट यह सब की ज्यादा चिंता में ना जाकर के जस्ट साधन पद्धति के रूप में यह दो आप जो एस्पेक्ट है उनको एक साथ में ले आओ फिर ईश्वर का स्वरूप क्या है साकार है कि निराकार है द्वैत है कि अद्वैत है कृष्णा है ना कि काली है ब्रह्मण है ना कि शिव है वो सब बाद में देखा जाएगा फिलहाल सबसे पहला कार्य करो कि ईश्वर पर आपकी जितनी भक्ति है कोई भी पंथ कोई भी संप्रदाय कोई भी गुरु को आप रिस्पेक्ट देते हैं तो साथ-साथ में ही भीतर में से आत्म श्रद्धा रूपी मशाल को प्रज्वलित करो और इस मशाल के उजाले में सब कुछ देखना आरंभ करो आंख बंद करके कोई भी यदि जिसके प्रति मेरी श्रद्धा है उसने मुझे ऐसा कहा तो मैं ऐसा आंख बंद करके कर दूंगा ऐसा कभी मत करो तो यह स्वामी जी का फंडामेंटल कंट्रीब्यूशन था धर्म के जगत में और इसीलिए स्वामी जी इस तरह के बम शेल स्टेटमेंट ठका करते थे तो मैं फिर से एक बार पढ़ता हूं यह पैसेज को देयर वास द टाइम स्वामी जी स्टार्टल्ड मिसेस लगेट एंड ओलिया विथ हिस डिनंसीएशन ऑफ द रिजिल एंड कन्वेंशंस ऑफ सोसाइटी बाय मींस ऑफ व्हिच द स्ट्रांग ऑपरेस द वीक एंड विथ हिस एडमिरेशन ऑफ इंडिविजुअल्स स्ट्रांग एंड करेजियस इनफ टू ब्रेक थ्रू दोज लॉड्स दो तरह से लोग जो लोग पावरफुल है वे लोग कमजोर लोगों पर राज करते हैं एक तो सामाजिक आर्थिक राजनीतिक दृष्टि से दूसरा धार्मिक दृष्टि से दोनों ओर से लोगों को समझाया जाता है तुम गुलाम थे गुलाम हो गुलाम रहोगे उस समय यह मु की घोषणा करना जैसे कि अर्थनीति या तो राजनीति में कम्युनिज्म में की थी और भारत में यह जो फ्रीडम मूवमेंट चला था तो वैसे ही धर्म के क्षेत्र में वेदांत इ द सॉन्ग ऑफ फ्रीडम वेदांत है वह जो आजादी का जयघोष जो कि लोगों को कहता है कि यह जो धर्म गुरु यह फिर यह धर्म फिर यह चर्च और यह जो सब बड़े-बड़े इंस्टिट्यूशन जो आपको दबा करके रख देते हैं कहते हैं कि आपका सिर्फ एक का है यह गुरुओं की सेवा करना उनको डोनेशन देना इससे भी कहीं आगे धर्म का एक बड़ा उच्च आयाम है अपने भीतर में आत्म श्रद्धा प्रकट करो और आत्म संयम करना प्रारंभ कर दो यह कोई आत्म संयम की बहुत के ऐसा कि आज मेरे से गलती हो गई तो मैं बस पूरे हजारों जन्म के लिए हमेशा के लिए मैं गड्ढे में गिर गया ऐसा क्या है भाई कोई कोई लोगों को में मैं देखता हूं मेरी किसी के साथ बात हो रही थी तो मैंने उसको पूछा कि अच्छा तुम मंदिर में जाते हो क्या तो कहा कि नहीं मंदिर में जाना प्रॉब्लम यह है सुबह की बात चल रही थी सुबह को शाम को जो भी है मंदिर में जाते हो कि नहीं तो कहा कि स्नान करके जाना पड़ेगा उस इसलिए फिर ऐसा सब होता नहीं इसलिए मैं मंदिर में नहीं जाता मैंने कहा देखो ऐसा मत सोचो कि तुम स्नान करोगे तभी मंदिर में जाओगे यह कहां का नियम बना दिया है बिना स्नान किए भी तुम जा सकते हो तुम्हार तो भक्ति का रिश्ता है ना भगवान के साथ में धुले हुए कपड़े पहने है कि तुमने अपने को धोया है कि नहीं इससे भगवान को क्या निस्बत है तो एकदम वो सामने वाला नाराज हो गया क्या क्या क्या कहते हो तुम बिना स्नान किए में मंदिर में जाना चाहते हो ऐसा मैंने कहा ऐसा भी नहीं है मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं कि तुम बिना स्नान किए मंदिर में चले जाओ मैं ऐसा भी नहीं कह रहा हूं मैं तो सिर्फ तुमको यह पूछ रहा हूं तुमने जब से ये नियम फॉलो करने का प्रयास किया कि जब तक तुम स्नान नहीं करोगे मंदिर में नहीं जाओगे तो तो उस समय के बाद में तुम कितनी बार मंदिर में गए हो बोला बहुत कम बार क्योंकि ऐसा हो नहीं पा रहा है जिस तरह से घर का रूटीन वगैरह है कि मैं मंदिर में स्नान करके जाऊं तो मैंने कहा देखो कि यही तो मैं कह रहा हूं मैं तुमको यह नहीं कह रहा कि तुम बिना स्नान किए मंदिर में चले जाओ मैं यह कह रहा हूं कि यदि यह जो स्नान करने का नियम है जिसकी मदद जिसको फॉलो करके तुम मंदिर में नहीं जा पा रहा हो तो तुम्हारा नुकसान हो रहा है तुम इस नियम को छोड़ दो फिलहाल मंदिर में जाना शुरू कर दो फिर जब स्नान करना स्टार्ट होगा और तुम शुद्ध पवित्र कपड़े पहन के मंदिर में जाओगे तब की बात तब है एज ऑफ टुडे तुम मंदिर में जाना शुरू कर दो तो देखिए कि नियम भी इस तरह से बना दिए हैं स्त्रियों को फिर इस समय मंदिर में जाना है इस समय नहीं जाना अरे भगवान को क्या पड़ी है इतना सब कुछ कि आप किस तरह की पोजीशन में किस तरह की परिस्थिति में है भगवान को देखते हैं आपकी श्रद्ध भक्ति देखते हैं नियमों से लोगों को वशीभूत कर लेना लोगों को डरा देना अरे तुमने ये नियम का भंग किया क्यों किया अभी जैसे ये भगवान दास बाबा जी बोलकर के थे तो ठाकुर उनको मिलने के लिए गए थे तो बात ऐसी थी कि ये चैतन्य सब सभा होती है चैतन्य देव के नाम पे तो बंगाल में इस तरह की चैतन्य सभाएं बहुत सारी थी ब्राह्मण वैष्णव लोगों की तो एक तरह इस तरह की एक सभा में गए और इस सभाव में क्या होता है कि कीर्तन वगैरह होता है तो वहां पे भगवान महाप्रभु चैतन्य देव का एक आसन उनके लिए रखा जाता है यह सोच कर के कि यहां पे आकर के महाप्रभु अवस्था करेंगे अवस्थित होंगे आसन ग्रहण करेंगे और हमारा कीर्तन सुनेंगे ऐसा एक एक मन का भाव है बड़ा शुद्ध भाव है बड़ी अच्छी बात है उनके लिए आसन बड़ा ही पवित्र ऐसा करके रखा जाता है अभी ठाकुर गए कीर्तन चल रहा है भाव में आकर के क्या पता नहीं महाप्रभु का आवेश हुआ होगा कि जो भी है भाव में आकर के उस चैतन्य देव के आसन प बैठ गए तो अभी वहां के लोग तो कुछ बोले नहीं क्योंकि सभी लोग देख रहे हैं कि ठाकुर के भीतर में बाव का आवेश हुआ है और सभी लोग एकदम मंत्रमुग्ध हो गए थे किंतु ये जो वहां के जो गुरु थे वैष्णव लोगों के वो बड़े ही नाराज हो गए जब उनको यह बात पता चली ये तो कि अरे ये किस तरह से कोई भी एक साधक है चैतन्य देव के आसन पर बैठ जाता है वो कितना भी बड़ा हो परमहंस भी क्यों हो वो चैतन्य देव के आसन पर कैसे बैठेगा ऐसा बोलकर के वहां के वो जो जिस सभा में ऐसा हुआ था वहां के कर्ता लोगों को डांटा तो ये सब बात ठाकुर के कानों में गई तो ठाकुर ने सोचा कि जाकर के मैं उनको मिलता हूं बात करता हूं उनके साथ में तो हृदय को लेकर के गए उनको मिलने के लिए अभी हृदय गया है आगे बताने के लिए कि मेरे मामा है वो भी भक्त है वो भी ईश्वर का गुणगान की तन करते हैं आपको मिलना चाहते हैं और ठाकुर अपने पूरे शरीर को एक चादर में आवृत करके कि कोई उनका चेहरा ना देख पाए इस तरह से बड़े ही संकुचित होकर के उनके साथ में गए थे अभी यह बाबा जी ब बड़े वृद्ध थे और सब समय माला जप किया करते थे तो जब यह हृदय गया ठाकुर गए तो देखा वहां पर क्या हो रहा है ये बाबा जी किसी साधु को किसी साधु के बारे में वो कुछ बोल रहे हैं कि ये साधु ने कोई अन्याय काम किया है तो उसके वस्त्र और उसकी कंठी उसकी माला यह सब जप्त कर लेने चाहिए क्यों उसने यह सब गलत काम किया ऐसा करके यह बाबा जी उनको बड़ा ही ठप का दे रहे हैं तो यह सुन कर के ठाकुर थोड़ी देर के लिए तो सुने कि यह बैठ कर के एक हाथ से तो जप कर रहे हैं दूसरे हाथ से पूरे गांव की चिंता कर रहे हैं यह साधु ने ऐसा किया उसके साथ में यह पनिशमेंट दे दो यह भक्त ने ऐसा किया उसके साथ में यह कर दो तो ऐसा सब एकदम अपना घमंड दिखा रहा है तो ठाकुर ने वस्त्र हटाया अपना चेहरा प्रकट किया और उसको पहले ही बोल दिया कि आप क्यों यह सब एक हाथ में कंठी माला है और यहां पर बैठकर के यह सब कर रहे हैं क्या है यह तो फिर वो बाबा जी थोड़े से ये हो गए ठाकुर का रुद्र स्वरूप तो पता है ना तो बाबा जी थोड़े ठंडे हो करके बोले मैं ये सब एक हाथ से माला इसलिए करता हूं मुझे तो जरूरत नहीं है किंतु लोगों को दिखावा मतलब मैं जद माला जप नहीं करूंगा तो लोग क्या कहेंगे तो यह सब सुनकर के ठाकुर को उसको उपदेश देना पड़ा था कि भाई अपना नाता है शि ईश्वर के साथ में ईश्वर के साथ में नाता रखो बाकी समाज का जो होना होगा वह होगा तो यहां पर भी देखिए कि इस तरह के लोग होते हैं जो कि एक बार उनके सा लोगों की एक रिस्पेक्ट मिलना शुरू हो जाए फिर अपने को वह गुरु के आसन पर बिठा देंगे फिर वोह लोगों को कंट्रोल करना शुरू करेंगे तुम ऐसा करो तुम वैसा करो ये मतलब इसको इसका बहिष्कार करो इसको पनिश करो तो यह सब तो धर्म के साथ में सनातन रूप से चलता ही आ रहा है धर्म के साथ में भी और राज्य शासन अर्थनीति यह सब क्षेत्रों में भी कोई भी क्षेत्र हो कोई भी व्यक्ति एक बार उसके हाथ में पावर आ जाए तो पावर का वो क्या उसका एक्सप्लोइटेशन किए बिना वह छोड़ने वाला नहीं है दिस इज द नेचर ऑफ द पावर वो एक एक ब्रिटिश एक स्टेट्समैन है उसने कहा था नाम भल गया पावर करप्ट्स एंड एब्सलूट पावर करप्ट्स एब्सलूट पावर जो है सत्ता है हमारे मन में विकार खड़ा करता है और जिसके पास में प्रचंड सत्ता आ जाती है उसके मन में प्रचंड विकार खड़ा होता है तो यह बात एकदम हमेशा के लिए सभी क्षेत्र में यह सही है कोई भी व्यक्ति हो वो धार्मिक हो ना कि राजनीतिक हो ना कि अर्थनीति यदि उसके पास में बहुत सारा पावर आ गया तो उसके मन में बहुत सारा विकार भी प्रकट होना ही होना है तो इसीलिए स्वामी जी इस तरह के स्टेटमेंट दे पाते थे और इसीलिए स्वामी जी का यह जो था कि इंडिविजुअल फ्रीडम एक तरह से विदेशी लोग स्वीकार भी करते थे समझ लेते थे कि हम लोगों को जिस तरह से फ्रीडम चाहिए उस तरह से इंडिविजुअल फ्रीडम की बात सबसे ज्यादा वेदांत में ही की गई है दूसरी ओर अपनी जो इंडिविजुअल आइडेंटिटी है आइडेंटिटी है उसको एक हायर आइडेंटिटी में मर्च कर देना इसमें इन लोगों को कम्युनिज्म जैसा कुछ लगता था तो यह कंफ्यूजन अमेरिकन लोगों के मन में समय-समय पर रहता था कि स्वामी जी अपनी इंडिविजुअलिटी को सबमर्ज करने की भी बात करते हैं ऑन वन हैंड और दूसरी और कहते हैं कि यह और बुद्ध ने आकर के हमारा बुरा ही किया है भला नहीं किया क्योंकि उन्होंने धार्मिक अथॉरिटी की रचना की और हम अंध होकर के यह सब धार्मिक अथॉरिटी को फॉलो कर रहे हैं आज जीसस नहीं है बुद्ध नहीं है तो उनका संघ है उनका चर्च है उनको ब्लाइंड फॉलो कर रहे हैं नथिंग इज मोर पावरफुल नथिंग इज ग्रेटर देन कैरेक्टर तो स्वामी जी ऑन वन हैंड इंडिविजुअल कैरेक्टर पर भार दे रहे हैं ऑन द अदर हैंड कह रहे हैं कि जो इंडिविजुअलिटी है वो एक भ्रम मात्र है स्वप्न मात्र है इट हैज टू बी सब्स्यूम सबमर्जड इनटू दी आत्मन और ब्राह्मण तो ये कॉन्फ्लेट स्वामी जी के मैसेज में इन लोगों को कभी-कभी दिखाई देता था हमको नहीं दिखाई देता बिकॉज वी हैव अ कंप्लीट पिक्चर नाउ हम लोगों के पास में ये फिलोसॉफिकल अंडरस्टैंडिंग रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य को समझ कर के जो एक इंटेलेक्चुअल मैच्योरिटी आनी चाहिए वो हमारे पास में है इसलिए हमको आज इस तरह का कंफ्लेक्स में किंतु उन समय उस समय जो लोग स्वामी जी के साथ में रहते थे उन लोगों को ये कंफ्लेक्स खुद का कैरेक्टर मजबूत करना है अपने खुद के कैरेक्टर में भार देना है दूसरा है कि अपनी आइडेंटिटी को एक हायर अथॉरिटी में मर्ज कर देना है हाउ इज दिस बहुत पॉसिबल तो पॉसिबल इज इन दैट सेंस दैट अ एक परमार्थ और व्यवहार यह दो जगत है जब तक हम जगत के भीतर में रहते हैं तब तक हमको अपनी यह जो कैरेक्टर है अपना कैरेक्टर अपनी इंडिविजुअलिटी उसको आपको स्ट्र बना कर के रखना है दूसरा कि जब ईश्वर के समीप जाते हैं तब आपको अपनी आइडेंटिटी को ईश्वर के शरणागत कर देना है तो ये ठाकुर के और मां के यह जो पता है ना ठाकुर कहते हैं कि लज्जा घृणा भय तीन थकते नहीं तो मां ने कहा था कि लज्जा घृणा भय आमी बोल मां कहती है कि मैं कह रही हूं सुनो लज्जा घृणा भय तीन थकते होए लज्जा घुणा और भय तीन होने से होगा ठाकुर कहते है कि ईश्वर के सामने लज्जा भी नहीं करनी है ईश्वर के सामने भय भी नहीं रखना है ईश्वर के सामने घृणा भी नहीं दिखानी है करोगे तो नहीं होगा और मां कहती है विरोधाभास कहां पे है जगत में जब तक हम रह रहे हैं तब यह कामिनी कांचन का यह जो जगत है विषय के जो वस्तुएं हैं वहां पर लज्जा घृणा और भय यह तीन रखना होगा वरना तो हम उसी प्रवाह में बह जाएंगे तो दोनों आपस में अपोजिट बातें करते हैं एट सेम टाइम दे मीन ओनली वन थि तो आज यही तक कल फिर से श शा हरा ठाकुर से शम ट लज्जा घणा ट हेड एंड ट इ फियर शेम ट्रेड एंड फियर वी शुड नॉट हैव दिस इन रिलेशन विद गॉड बट मदर सेज दैट एज लंग एज वी आर लिविंग इन द वर्ल्ड एज लंग एज वी आर लिविंग इन द वर्ल्ड ऑफ सेंशुअल प्लेजरस वी मस्ट बी अफ्रेड ऑफ सेंशुअल प्लेजरस वी मस्ट बी अशम्ड ऑफ सेंशुअल प्लेजरस एंड वी शुड हेट सेंशुअल प्लेजरस सो दिस ट्रेड फियर एंड शेम इन रिलेशन टू गॉड दे शुड नॉट बी बट इन रिलेशन टू सेंशुअल प्लेजर व शुड कल्ट वेटम दिस इ द ऑन सरफेस यू कैन सी दिस इ अपोजिट बट इन एसेंस दे आर द सेम थि मेरा जो कहना था इनको कि ऐसा नहीं है कि बिना स्नान किए आप कीजिए किंतु बिना स्नान कि आप नहीं कर पा रहे हैं तो नुकसान तो हम ही को है ना स्नान का मन बड़ा ही पाजी है बड़ा ही वह नाटक करने वाला है वोह धर्म अनुष्ठान करने से सब समय दूर भागता है तो अभी जद यह बहाना बनाता है कि मैंने स्नान नहीं किया तो मैं यह सब नहीं करना चाहता हूं यह तो झुठ मुट का बाना हो गया ना यदि आपके पास में जेनन रीजन है कि समय नहीं है जो भी जिनन रीजन है स्नान नहीं कर रहे हैं तो फिर यह सोच कर के आप पूजा मत बंद कर दीजिए कि मैं बिना स्नान कि कैसे पूजा करूं किंतु जो मन बना बनाता है तो पाजी मन को पकड़ लीजिए कि नहीं ऐसा नहीं चलेगा यानी कि आपकी मनहर स्थिति को देख कर के आपको ठीक करना है नियम कुछ नहीं स्नान करके पूजा करनी बिना स्नान किए पूजा करनी वह बात नहीं है बात है कि मन किस तरह का है आपका मन झुठ मुट का आपको भ्रमित कर रहा है कि आपके पास में जेनन रीजन है वह आपको देखना है हा ठीक करते प आपना जनन रीजन शरीर अतो जन न आपनी के से जन्म जब ध्यान करवेना पूजा पाठ करवेना