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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद पार्ट वन राजयोग राजयोग वन ऑफ द मोस्ट सेलिब्रेटेड ऑफ स्वामी विवेकानंद कंट्रीब्यूशन राज्य को जिस तरह से स्वामी जी ने रिप्रेजेंट किया है मुझे लगता है कि यह एक यूनिक है उनका एक कंट्रीब्यूशन क्योंकि हम जब अपने हिंदू शास्त्र पढ़ते हैं अपने सनातन धर्म के जो शास्त्र एक के बाद एक पढ़ते हैं यह एक ऐसा एक स्वामी जी का एक है कि उन्होंने किस तरह से बिल्कुल जो ट्रेडिशनल वे में अपनी यह जो आध्यात्मिक साधनाएं बताई गई थी उसको आज के आधुनिक युग के साथ में संयुक्त करके हमको बताया है कि यह जो साधनाएं थी इसका एक सॉलिड साइंटिफिक बेसिस है स्वामी जी ने अमेरिका में जो योग का प्रचलन प्रारंभ किया वहीं से तो फिर आज जितना भी आप योग योगासन यह हठयोग हठयोगी वहां पे तो आसन ही तो तो ज्यादातर चलते हैं किंतु जो भी है एक तो एक तो ऐसा है ना कि जो भी जड़वा द में डूबा हुआ है उसको पकड़ कर के आप सीधा सधी आध्यात्मिकता की ओर नहीं ले जा पाएंगे उसके लिए आपको स्टेप बाय स्टेप जाना पड़ेगा सो वन ऑफ द स्टेजेस इज दैट कि अभी यह लोग आसन का और प्राणायाम का अभ्यास कर र है फिर वह आसन और प्राणायाम के पीछे का फिलोसोफी वो कैसे भी करके ट्विस्ट करके करें किंतु जो भी है वे लोग करते तो है तो स्वामी विवेकानंद कंट्रीब्यूशन इज देयर कि पूरे देश को जो कि जड़वा द में डूबा हुआ था उसको एक स्टेप उठा कर के वह स्वामी जी ने हमेशा कहा है मैन नेवर गोज फ्रॉम एरर टू ट्रुथ ही ऑलवेज गोज फ्रॉम लोअर ट्रुथ टू द हायर ट्रुथ अर्थात कि मनुष्य कभी भी गलती में से वह सही करने की ओर जाता नहीं है छोटा सा सही करता है उसके बाद में और ज्यादा सही करता है सो ऑलवेज ऐसा नहीं होता आध्यात्मिक जगत में कि आप फर्स्ट स्टेप पर खड़े हैं तो सीधा आप समिट के ऊपर में जंप लगाए शिखर के ऊपर में जंप लगाए यहां से यदि आपको कैलाश मानसरोवर जाना है तो सर्वप्रथम स्टेप लेकर के ही आपको अपनी यात्रा शुरू करनी है ऐसा होगा नहीं कि यहां सदृश्य होक के कैलाश मान सरोवर पहुंच गए इस कमरे से बाहर निकलना ट विल बी द माय फर्स्ट स्टेप सो इसीलिए स्वामी जी ने जो प्रारंभ किया अमेरिका में जो कि आज योगासन के रूप में फेमस है और इसी के लिए यह देखिए कि 21 जून को इंटरनेशनल योगा डे सेलिब्रेट होता है हालांकि यह अपनी इंडियन गवर्नमेंट ने इसको मौके का फायदा उठा करके यूएन डे के रूप में यह तो कर दिया मैंने किंतु इसके पीछे जो पूरी मूवमेंट थी वह अमेरिका में स्टार्ट हुई थी अमेरिका और यह लोग भी वो लोग भी एक्नॉलेज करते हैं मैंने अच्छे-अच्छे आर्टिकल पढ़े हैं टाइम मैगजीन न्यूयॉर्क टाइम्स ये सब एकदम स्टैंडर्ड पब्लिकेशन है अमेरिका के तो वहां पर भी हाउ स्वामी विवेकानंदा स्टार्टेड योगा क्रेज इन अमेरिका ऐसा करके वो सब आर्टिकल्स पब्लिश हुए हैं सो स्वामी जी ने अमेरिका में जो योगा का प्रारंभ किया या तो फिर योगा का जो बीज बोया वो उसके पीछे जो प्रवचन माला जिसके लिए जवाबदार थी रिस्पांसिबल थी वो है यह राजयोग सीरीज राजयोग सीरीज में स्वामी जी ने साइंटिफिकली साधना क्या है साधना कैसे करनी चाहिए साधना के बेनिफिट्स क्या है पिटफॉल्स क्या है यानी कि डेंजर्स क्या है सब कुछ बड़ा ही साइंटिफिकली उन्होंने लेआउट किया है किंतु इवन विद इन दिस राजयोग वच इज समथिंग सो एसटेल इसके बारे में बोलना चाहते हैं यह जो तीन चैप्टर है प्राण साइकिक प्राण एंड द कंट्रोल ऑफ साइकिक प्राण दज आर एसोटेस्ट िक माने कि आश्चर्यजनक वैस है पूरा राजयोग आश्चर्यजनक अद्भुत है उसमें भी और ज्यादा अद्भुत है यह तीन चैप्टर्स यह तीन चैप्टर्स को मैंने जब पहली बार पढ़ा था पहली बार सोचने का प्रारंभ किया था मैंने सोचा कि ओनली अ पर्सन विद द स्टेचर ऑफ स्वामी विवेकानंदा कैन डेर टू से समथिंग लाइक दिस माने स्वामी विवेकानंद की कक्षा का जिनका आध्यात्मिक उपलब्धि है वही वही एक महापुरुष इस तरह की बातें करने के लिए सक्षम है तो इसमें से जैसे हमने उस दिन भी पहले दिन भी डिस्कस किया था बाकी हम जो कुछ भी डिस्कस करें कथामृत है ना कि लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा है ना कि राजा महाराज का ये जो ध्यान धर्म साधना है कोई भी लिटरेचर अपने ऑर्डर का ले लीजिए स्वामी जी के कर्म योग है भक्ति योग है हम लोग हमेशा अपना खुद का अनुभव अनुभूति उसके साथ में मैच करके कुछ बोल सकते हैं कुछ टीका टिप्पणी कर सकते हैं कि हां इस किताब में जो लिखा है इसको आप इस तरह से समझ सकते हैं या तो इसका इस तरह से अर्थ घटन कर सकते हैं किंतु यह जो कुछ लेक्चर है इसका हमारी डे टू डे लाइफ के साथ में कोई रिलेशन नहीं है इसके ऊपर में टिका टिप्पणी करना इसका अर्थ घटन करना वो ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है हमारे डे टू डे लाइफ के एक्सपीरियंस से यह सब कब हो पाएगा इसके ऊपर में कुछ हम कब बोल पाएंगे जबकि हमको उस लेवल की कोई आध्यात्मिक अनुभूति हुई होगी तब हम शायद कहीं कुछ बोल पाएंगे जो कि मेरी नहीं है ऑफकोर्स नहीं है तो किंतु फिर भी हम लोग इसको पढ़ेंगे और जो लिमिटेड इंटेलेक्चुअल उपाय है इसको समझने का बुद्धि से जितना हम सामान्य यत किंचित समझ सकते हैं वह हम समझेंगे तो कल हमने परसों दिन हमने देखा कि स्वामी जी सबसे पहले कहते हैं कि यह विश्व ब्रह्मांड दो शक्ति या तो दो परिब से चल रहा है एक है आकाश दूसरा दूसरा है प्राण अभी आकाश का डेफिनेशन स्वामी जी ने दिया ये जितना भी मटेरियल चीज आप इस जगत में देख रहे हैं या तो मनुष्य है या तो सूर्य है या तो चंद्र है या तो सितारे हैं पशु पक्षी है पेड़ पौधे हैं जो कुछ भी है पृथ्वी है जल है हवा है जो कुछ भी है मटेरियल जिसको आप अपनी ज्ञानेंद्रियों से ग्रहण कर सकते हैं या तो सेंस कर सकते हैं और इंद्री कर्मेंद्रियों से उसके साथ में इंटरेक्शन कर सकते हैं यह सब कुछ आकाश रूपी एक पदार्थ का या एलिमेंट का बना हुआ है अभी आकाश अपने प्योर फॉर्म में उसको आप ना ही देख पाएंगे ना ही उसको सेंस कर पाएंगे किंतु यही आकाश जब विभिन्न रूप धारण करना प्रारंभ करेगा नाम रूप धारण करना शुरू करेगा तब यह पूरा नाम रूप रूपी जगत यह आकाश गठित करेगा कंस्ट्रक्ट करेगा तो यह हो गई आकाश की डेफिनेशन और हमने कहा हमने देखा था कि आज की मॉडर्न कॉस्मोलॉजी और फिजिक्स की दृष्टि से आकाश को हम मैटर एनर्जी के रूप में डिफाइन कर सकते हैं मैटर एनर्जी और स्पेस टाइम एनर्जी और मैटर दोनों को बहुत लंबे समय से दो बिल्कुल पृथक पदार्थ क्या है गिने जाते थे जैसे कि अभी मान लीजिए कि मेरे पास में यह एक पेन है यह स्पेशल पेन है मेरा एक बैचमेट है बंबई में है तो उसने क्या किया है कि उसके जितने भी हम जितने भी बैचमेट्स है सभी के लिए एक पेन उसने बनाई है और सबको उसने भेजी है सबके ऊपर में हमारा नाम लिखा है यहां प इस पर मेरा नाम लिखा है स्वामी कृष्णा सखानू पेन है एकदम स् फट करके वो स्नेप हो जाता है तो ये एक मेरे पास में पेन है अभी जदी मैं इस पेन को जला दूंगा और इसमें से अग्नि प्रकट होगी तो क्या होगा यह अग्नि जो इस पेन को जलने से जो प्रकट होता है और यह पेन है आपको लगेगा कि ये दोनों बिल्कुल डिफरेंट पदार्थ है नहीं क्योंकि कहां अग्नि कहां यह पेन किंतु एक्चुअली देखें तो यही पेन ही अपना स्वरूप को चेंज करके परिवर्तन करके एनर्जी में या तो फिर अग्नि में रूपांतरित होती है आइंस्टाइन ने यह इक्वेशन सबसे पहले दिया था कहा था e इक्वल एसी स्क्वा मैटर इक्वल्स एनर्जी मल्टीप्लाई बाय स्पीड ऑफ लाइट स्क्वेयर ऑफ स्पीड ऑफ लाइट व्हाट एवर तो ये हमको आकाश की डेफिनेशन स्वामी जी ने सर्वप्रथम बता दी अभी स्वामी जी इससे ज्यादा आगे जाकर के प्राण के बारे में बताते हैं क्या कहते हैं बाय व्हाट पावर इज दिस आकाशा मैन्युफैक्चर्ड इनटू दिस यूनिवर्स जद यह आकाश सब कुछ गठन करता है सब कुछ कंस्ट्रक्ट करता है इस जगत में बिग बैंग हुआ बिग बैंग के बाद में यह सब एलिमेंट्स एक के बाद एक कुक होना शुरू हो गए यह पहले तो हो सकता है कि क्वार्क और स्ट्रिंग व्हाट एवर जो कि मॉडर्न थिरी कहती है अभी वो वो प्रकट हुए और उसमें से फिर यह सब एटमिक पार्टिकल्स इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन और बहुत सारे जिसको कि फर्मिन कहा जाता है बेसिकली वो एक के बाद एक प्रकट हुए फिर उसमें से इंटरेक्शन होकर के यह जो सब अ एटम्स जैसे कि ऑक्सीजन है हाइड्रोजन है वो सब एटम्स प्रकट हुए और उसमें से पूरा विश्व ब्रह्मांड बना तो इसके पीछे ऐसा तो कौन सा फोर्स है जो कि इस आकाश को पदार्थ में कन्वर्ट करता है बाय द पावर ऑफ प्राण यह फोर्स है इस फोर्स को कहते हैं प्राण जस्ट एज आकाश इज द इनफाइनों मेनिफेस्टिंग पावर ऑफ दिस यूनिवर्स जिस तरह से आकाश ना ही अंत है ओमनी प्रेजेंट हर जगह पर विद्यमान है हमको लगेगा हवा में कहां आकाश है हवा में भी आकाश है इस पेन के भीतर कहां आकाश है पेन के भीतर में ही है इस चश्मे के भीतर ओमनी प्रेजेंट एवरी वेयर यदि एंड्रोमेडा गैलेक्सी में कहेंगे वहां पर भी आकाश है चांद पर कहेंगे वहां पर भी आकाश है पूरे विश्व में व्याप्त है सो इज दिस प्राण तो जैसे जिसका प्रारंभ नहीं जिका अंत नहीं जो सर्वव्यापी ऐसा एक आकाश है वैसा ही प्रारंभ और अंतहीन सर्वव्यापी प्राण है द इनफाइकिल ऑफ दिस यूनिवर्स आकाश को कहेंगे मटेरियल ऑफ दिस कॉस्मो तो प्राण को कहेंगे कि मेनिफेस्टिंग पावर ऑफ दिस यूनिवर्स अर्थात कि इस आकाश को इस अभी जैसे कि फोर जो होता है ना कि जमीन में से हम लोग लोहा निकालते हैं वो नगेट्स जिसको बोलते हैं जो माइनिंग करते हैं माइनिंग करते बड़े-बड़े माइनिंग मशीन अर्थ मूवर्स जिसको कहते हैं आपने शायद देखे होंगे जहां पे वो माइनिंग वगैरह होता है वहां पे ये बड़े-बड़े अर्थ मूवर्स होते हैं तो ये अर्थ मूवर जहां पे भी होते हैं वो जमीन में से खुदाई करके माइनिंग के लिए यह सोना है या तो फिर ये लोहा है वो सब निकालते हैं वो नगेट्स के रूप में होते हैं छोटे-छोटे पत्थर के रूप में पता भी नहीं चलेगा इसका यह वैल्यू है जदी सोना है या जद लोहा है पता भी नहीं चलेगा किंतु उसको भट्ठी में पिघला जाता है भट्ठी में से पिघल करके उसकी जो इंप्योरिटीज है वो सब निकाल दी जाती है जब प्योर होता है तब उसका फिर जो भी इस्तेमाल करना है यदि अस्त्र शस्त्र बनाना है यदि सर्जन के कोई टूल्स बनाना है ना कि फिर यह पेन बनाने हैं ना कि ये चश्मे बनाने हैं ना कि ये हमारी विंडोज ना जो कुछ भी कहो जो कुछ भी बनाना है पहले तो इसको भट्ठी में पिघल करके बाद में जो फॉम होते है उसको फम फम उसके भीतर में डाल कर के उसको शेप दिया जाता है तो वैसे ही यह मटेरियल है यह आकाश और यह जो भट्टी है जो कि उसको पिघल करके फिर आखिर में उसको शेप देती है एनालॉजी के रूप में मैं कह रहा हूं नॉट लिटरली तो वो जो मने वो जो उसको शेप करने वाला जो पावर है वो है प्राण एट द बिगिनिंग एंड एट द एंड ऑफ अ साइकल एवरीथिंग बिकम आकाश एंड ऑल द फोर्सेस ट आर इन द यूनिवर्स रिजॉल्व बैक इनटू द प्राणा सृष्टि के प्रारंभ में और सृष्टि के अंत में सब कुछ आकाश में लय हो जाता है सृष्टि के प्रारंभ में सर्वप्रथम आकाश प्रकट होता है फिर इस आकाश से यह स्टार्स एंड गैलेक्सी एंड ब्लैक एंड ह्यूमंस एंड प्लांट्स एंड एनिमल्स जो कुछ भी कहो वह गठित होते हैं और जितनी फोर्सेस है वह सब फोर्सेस इस प्राण के भीतर में से प्रकट होती है और प्राण के भीतर में लय हो जाती है और सृष्टि के आखिर में यहां पर जैसे स्वामी जी ने कहा कि आकाश में से जैसे सब कुछ प्रकट होता है सृष्टि के प्रारंभ में तो सृष्टि के अंत में प्रलय के समय सब कुछ यह तारे यह चांद यह मनुष्य इस आकाश के भीतर में फिर से विलीन हो जाएंगे एंड ऑल द फोर्सेस थट आर यूनिवर्स दैट आर इन द यूनिवर्स रिजॉल्व बैक इनटू द प्राण यूनिवर्स के भीतर में जितनी भी फोर्सेस से वह सब प्राण के भीतर में विलीन हो जाएगी अभी प्रश्न होगा यदि हम आकाश को कहेंगे कि यह मैटर एनर्जी स्पेस और टाइम है तो प्राण क्या है तो प्राण इज द फोर्स अभी साइंटिस्ट लोग कहते हैं कि देयर आर बेसिकली फोर फंडामेंटल फोर्सेस इन दिस यूनिवर्स फर्स्ट इज द न्यूक्लियर लेवल फोर्स फर्स्ट टू फोर्सेस आर न्यूक्लियर लेवल फोर्स इसको कहेंगे कि स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स और वीक न्यूक्लियर फोर्स तीसरी है इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म जिस ये स्ट्रांग और वीक न्यूक्लियर फोर्स एटम को बना कर के रखती है यह इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म है थर्ड फोर्स इसमें से यह प्रकाश की किरण हमको दिखाई देते हैं और फोर्थ इज ग्रेविटेशनल फोर्स जो कि सब कुछ को इकट्ठा करके रखती है इसको फोर ये चार फोर्स हो गई स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स वीक न्यूक्लियर फोर्स इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म एंड ग्रेविटी अभी साइंटिस्ट लोगों का कहना है कि शायद एक फिफ्थ फोर्स हो सकती है जिसको कि यह लोग कहते हैं कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट या तो फिर कहेंगे कि एंटाई ग्रेविटी यानी कि य यर्स एक्सपें हो रहा है ऐसा कुछ आखिरी 1015 साल में हमको पता चला है तो यदि यूनिवर्स एक्सपेंड हो रहा है तो देर इज एंटाई ग्रेविटी बोल कर के कोई फोर्स है जो कि यूनिवर्स को स्प्रेड कर रही है यह अभी स्पेक्युलेटिव आउट नहीं हुआ है किंतु चार फोर्स जो है यह चार फोर्स तो पक्की है तो अभी देखिए कि स्वामी जी कहते हैं कि यदि आकाश है मैटर एनर्जी तो यह प्राण है यह चार फंडामेंटल फोर्सेस तो जैसे कि यह जितनी भी चीजें आप देख रहे हैं वह आकाश में से प्रकट हुई है सृष्टि के प्रारंभ में और सृष्टि के अंत में आकाश में लय हो जाएगी वैसे ही जितनी भी फोर्सेस आप देख रहे हैं वह प्राण में से प्रकट हुई है सृष्टि के प्रारंभ में और प्रलय के समय सृष्टि के अंत के समय इसी प्राण में फिर से लय हो जाएगी तो यह हो गए आकाश और प्राण इन द नेक्स्ट साइकल आउट ऑफ दिस प्राण इज इवॉल्वड एवरीथिंग दैट वी कॉल एनर्जी एवरीथिंग दैट वी कॉल फोर्स इसी प्राण में से सृष्टि के आगामी चक्र में वह सब कुछ प्रकट होगा जिसको हम कहते हैं एनर्जी जिसको हम कहते हैं फोर्स अभी यहां पर थोड़ा सा देखने वा बात है स्वामी जी कहते हैं कि प्राण क्या है प्राण है एनर्जी या तो फोर्स और आकाश क्या है मैटर किंतु यह 19th सेंचुरी फिजिक्स है 20 सेंचुरी फिजिक्स में आइंस्टाइन ने यह परफेक्टली प्रूव कर दिया है कि मैटर और एनर्जी एक ही सिक्के की दो साइड से टू एस्पेक्ट ऑफ द सेम कॉइन अर्थात कि मैटर और एनर्जी को आप सेपरेट नहीं कर सकते जबकि फोर्स क्या है फोर्स इज एन इंटरेक्शन बिटवीन टू मैटर जैसे कि मान लीजिए कि ये पेन है पेन को मैं जोर से फेंकता हूं तो क्या हुआ ये मेरा हाथ जो है वो पदार्थ का बना हुआ है जिसको हम मैटर कहेंगे ये पेन जो है ये एक पदार्थ की बनी हुई है इसको भी हम मैटर ही कहेंगे अर्थात कि ये दोनों आकाश के बने हुए हैं किंतु ये जो फेंकने की जो प्रक्रिया है ना यह फोर्स है फोर्स अर्थात कि यह पेन और हाथ के बीच का इंटरेक्शन इन दोनों के बीच का कार्यकलाप मैं इस हाथ के माध्यम से कोई भी कार्य करूंगा इसको यह आज का फिजिक्स फोर्स कहता है फोर्स अर्थात कि कार्य अभी एनर्जी इ समथिंग डिफरेंट ये पेन के भीतर में एनर्जी है पेन को जलाएंगे तो इसके भीतर में से एनर्जी प्रकट होगी मेरा जब देहांत हो जाएगा जब मेरी चिता जलेगी यह शरीर में से भी यह पंचमहाभूत के देह में से भी एनर्जी प्रकट होगी तो उसको एनर्जी कहते हैं जो कि पदार्थ के भीतर में निहित है किंतु दो पदार्थ जब आपस में इंटरेक्शन करते हैं तो इस इंटरेक्शन को कार्य को कहते हैं फोर्स यह हो गया आज का मॉडर्न फिजिक्स तो प्राण को आप एनर्जी या फोर्स ऐसा नहीं कह सकते क्योंकि एनर्जी और फोर्स का डेफिनेशन इस वेरी डिफरेंट इसीलिए कहेंगे कि आकाश है मैटर एनर्जी और प्राण है फोर्स प्राण के साथ में एनर्जी शब्द यूज करना आज के विज्ञान की दृष्टि से तर्क संगत या तो फिर युक्ति संगत नहीं होगा स्वामी जी 19th सेंचुरी फिजिक्स को पढ़ कर के यह सब बातें कहते हैं ये हमेशा मॉडर्न साइंस के साथ में आध्यात्मिकता का कॉमिनेशन करने से यह प्रॉब्लम हमेशा हमारे सामने आएगा यह हमने कॉस्मो माइक्रो कजम में भी देखा स्वामी जी स्पैकुलेट करते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है कि मनुष्य सभ्यता कहो ना कि यह सृष्टि का प्रारंभ कहो पृथ्वी का प्रारंभ कहो चलो पृथ्वी का प्रारंभ आज से 400 करोड़ साल पहले हुआ है मॉडर्न साइंस की दृष्टि से फर बिलियन इयर्स 4 बिलियन इयर्स आगे हुआ है वहां से लेकर के जितने भी पशु पक्षी प्राणी पेड़ पौधे मनुष्य बंदर वेल डॉल्फिन यह ऊंट शियाल हाथी घोड़ा सब कुछ सबका इवोल्यूशन मने पूरा इवोल्यूशन की यात्रा के आखिर में इवोल्यूशन का सर्वोच्च कदम जो है वह मनुष्य आकर के प्रकट हुआ तो स्वामी जी पूछते हैं कि यह जितना भी 200 करोड़ साल पहले आज से ऐसा स्पेक्युलेटिंग प्रकट हुआ था पृथ्वी के ऊपर में तो ये 200 करोड़ की यात्रा के अंत में जितना भी यह फिजिकल ट्रेट है जेनेटिक मटेरियल है हमारा जो कि डिफाइन करता है कि इसके आने वाली पेढ़ी के प्रजनन के बाद में आने वाली पेढ़ी के कान आंख का कलर कैसा रहेगा त्वचा का कलर कैसा रहेगा उसका साइज और शेप क्या रहेगा इंटरनल ऑर्गन कैसे काम करेंगे 200 साल का इवोल्यूशन का आखिर में आपने छोटे से एक कोश के भीतर में क्या ने पूरा उसका ब्लूप्रिंट लिख दिया क्या ऐसा क्या कभी हो सकता है स्वामी जी स्पेक्युलेटिंग ऑर्गेनिस्ट म के भीतर में है और इस डीएनए के भीतर में सही सही में वह ब्लूप्रिंट है जो कि 200 करोड़ साल की यह इवोल्यूशन यात्रा की जर्नी इस छोटे से डीएनए में लिखी हुई है तो यह आज का मॉडर्न साइंस वो इतना एडवांस हो गया है कि जो स्वामी जी को असंभव सा दिखता था उसको भी उसने यह संभव पर बना दिया है देखिए कभी-कभी लोग कहते हैं कि विज्ञान की स्पीड जो है कितनी भयानक है यह 1905 या कि उसके आसपास में यह जो राइट ब्रदर्स थे उन्होंने सर्वप्रथम एरोप्लेन को उड़ाया था और विदिन बेरली 60 इयर्स ये 1967 ना कि 68 मनुष्य ने चांद के ऊपर में कदम रखा सर्वप्रथम तो यह जो सबसे पहला वो जो किटी होक बोलकर के जगह है अमेरिका में वहां पे जो सर्वप्रथम बाय पलेन जिस उस समय के प्लेन को कहते थे दो तरह की विंग्स उसकी होती थी जो सर्वप्रथम बाय पलेन जो उड़ाया गया वो जिसने वो वीडियो देखा है वो वीडियो देख कर के आश्चर्य हो सकता है कि मैंने ये उसने कहा यह थोड़ा सा उड़ा और फिर थोड़ा सा आ गया जमीन पे वो वो कहां वो वो और ये कहां 1967 ना 68 एग्जैक्ट ईयर में भूल गया वो इस तरह का वो सेटन फाइव बोलक के रॉकेट जो कि पृथ्वी की ये जो गुरुत्वाकर्षण को भेद करके ये इंटर प्लेनेटरी स्पेस को पार करके चांद पे जाकर के अटका है और चांद पे जैसे वो मनुष्य को वापस लेकर पृथ्वी पे आया है वह सेफ लैंडिंग दोनों जगह किया है चांद में भी किया है पृथ्वी पे भी किया है समथिंग इंपॉसिबल लगता है साइंस की जर्नी 60 साल में 70 साल में हमने काट ली तो अगले 60 70 साल में क्या होगा मैंने क्या हो सकता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच गए यानी ये जो साइंस की जर्नी है व्हिच इज वेरी अमेजिंग और इसीलिए वेदांत या योग का साइंस के साथ में कॉमिनेशन करके लोगों को समझाना कि हां तुम लोगों का साइंस यदि ऐसा कहता है तो हम लोगों का वेदांत या योग ऐसा कहता है ऐसा करने से हमेशा एक बेनिफिट यह है कि मॉडल लोग फटाक करके इस बात को एक्सेप्ट करेंगे अच्छा साइंस और वेदांत या योग का तो अच्छा कॉमिनेशन नेशन बन रहा है हम लोग तो क्रिश्चियनिटी पढ़ते थे या और जितने भी रिलीजन है हिंदुइज्म और बुद्धिज्म को छोड़ कर के उसका व्यू पॉइंट इतना रिस्ट्रिक्टेड है उसका टाइमलाइन इतना सा छोटा सा है और यह वेदांत है या तो यह योग है जो कि कहां करोड़ों करोड़ों साइल के साइकल्स को एक्सेप्ट करता है सृष्टि स्थिति प्रलय को एक्सेप्ट करता है मनु ट्रांस माइग्रेशन को एक्सेप्ट करता है ट्रांस माइग्रेशन ऑफ द सोल य मने उसको एकदम एक्सपेंसिव वर्ल्ड व्यू दिखता है जो आज का मॉडर्न साइंस स्टडी करता है तो यह बेनिफिट है कि वह फटाक करके वह योग और वेदांत की ओर अट्रैक्ट हो जाएगा किंतु डेंजर भी यही है कि आज हम जिस साइंटिफिक अल्ट्रा मॉडर्न साइंटिफिक डिस्कवरीज या तो इनोवेशन के साथ में अपनी थिरी को योग और वेदांत को कनेक्ट करते हैं अभी कुछ चंद सालों के बाद में वह साइंस की थिरी वो प्रिमिटिव हो जाएगी और कुछ नया आ जाएगा और हमको लगेगा अरे भाई यह लोग जब इस दोनों को कंबाइन कर रहे हैं तो इस तरह की बेतुकी बातें क्यों करते हैं ऐसा एक प्रश्न हो सकता है हम लोग तो स्वामी जी के डिवटी है इसलिए हम तो स्वामी जी को क्वेश्चन नहीं करेंगे हम लोग नहीं पूछेंगे कि स्वामी जी को थर्ड आई से ऐसा क्यों नहीं दिखा वो समाधि में उनको ऐसा क्यों नहीं दिखा कि उस समय का साइंस जो है वो बड़ा ही लिमिटेड है और भविष्य में और भी बहुत कुछ होने वाला है रंगनाथ आनंद जी का ही मैं जब यहां पर नया-नया जवाइन करने को आया था तो यह रंग नाथा आनंद जी का मैसेज ऑफ द उपनिषद या तो फिर यूनिवर्सल मैसेज ऑफ भगवत गीता यह जो गीता और उपनि निषद के ऊपर में किताबें हैं मुझे बहुत अच्छी लगती थी क्योंकि मैं उस समय यह सब साइंस वगैरह स्टडी करता था और यहां पर इमीडिएट मैंने देखा उसी साइंस के बेस के ऊपर में उन्होंने यह सब ट्रेडिशनल आइडियाज एक्सप्लेन किए है तो मैं इतना इंप्रेस हो गया था मैंने कहा अरे वाह यह रामकृष्ण मिशन के साधु को तो देखिए ये कितनी गजब इंटेलेक्ट है उनके पास में और कितना सुंदर रूप से यह मॉडर्न एज और ये एंसेट एज ये अपना सनातन भारत और ये आधुनिक विश्व इन दोनों के बीच में इतना सुंदर एक सेतु एक ब्रिज बनाते हैं मैं उस समय बड़ा इंप्रेस था किंतु आज मैंने जब मेरा राजकोट में पोस्टिंग हुआ और यह पब्लिकेशन डिपार्टमेंट में तो मैंने एक बड़ा ही खुशी-खुशी होकर के एक प्रोजेक्ट स्टार्ट किया कि रंगनाथ आनंद जी की ये जो गीता है व उसको गुजराती में ट्रांसलेट करना अब जैसे मैंने ट्रांसलेशन का काम स्टार्ट किया वैसे ही एक ग्लेयरिंग डिस्पेरटनेस और आज से 10 साल के बाद में आफ्टर दैट इतना चेंजेज हो गया है और रंगनाथ आनंद जी ने तो वह जो बोल दिया था वह बोल दिया था 1960 70 80 के युग में तो अभी साइंस तो उसके बाद में बहुत आगे आ गया है किंतु यह किताबें तो उसी समय प्रवचन बो कहे गए थे और किताबें लिखी गई थी यह तो अपडेट नहीं हुआ है तो आज जितना पढ़ते हैं ना उतना ही यह प्रश्न होता है अरे भाई यहां पर तो एक फुट नोट ड करनी चाहिए कहना चाहिए आज का वो 1980 का साइंस ऐसा कहता है किंतु यह 2020 का साइंस ना किय 2015 2018 में यह पब्लिश हुआ था हमने किया था काम 1819 में तो ये 201819 का साइंस ऐसा कहता है ऐसा बहुत सारी फुट नोट मुझे देनी पड़ेगी फिर आखिर में मैंने ठीक किया कि फुट नोट वगैरह नहीं देना वाचक को जो उसकी बुद्धि के अनुसार जितना ग्रहण करना चाहे वह कर सकता है मुझे कोई उसमें रंगनाथ आनंद जी के ऊपर में कोई अपनी फुट नोट नहीं बिठा नहीं तो बोलकर के किंतु दैट वाज अ शॉक फॉर मी तो पहली बार मुझे ऐसा रियलाइक्स और वेदांत या तो योग को कंबाइन करके क्या हो सकता है बेनिफिट क्या है और ड्रॉबैक्स क्या है तो यहां पर जब स्वामी जी कहते हैं कि हम एनर्जी या फोर्स इन दोनों को प्राण कह सकते हैं तब हमको समझना होगा कि मॉडर्न साइंस की दृष्टि से एनर्जी और फोर्स की डेफिनेशन आर कंप्लीट डिफरेंट इन दोनों को आप एक कांसेप्ट के साथ में बिठा नहीं पाएंगे तो तो हम आज के अनुसार एनर्जी मैटर को मैटर एनर्जी को आकाश कहेंगे और यह इंटरेक्शन है या तो कार्य है जिसको कहेंगे फोर्स उसको प्राण के साथ में इक्वेट करेंगे इट इज द प्राण ट इज मेनिफेस्टिंग एज मोशन यह प्राण है जो कि गति के रूप में मेनिफेस्ट हो रहा है गति के रूप में कार्यान्वित हो रहा है इट इज द प्राण दैट इज मेनिफेस्टिंग एज ग्रेविटेशन एज मैग्नेटिज्म प्राण ही है जो कि ग्रेविटेशन और मैग्नेटिज्म बन कर के हमको दिखाई देते हैं उस समय का मैग्नेटिज्म था आज को हम उसी चीज को कहेंगे इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म क्योंकि साइंस एडवांस हो गया है डेफिनेशंस भी एडवांस हो गई है तो जिसको कहेंगे हम कार्य या तो फिर जिसको कहेंगे ग्रेविटेशन या तो फिर इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म और जो दो दूसरी फोर्स जो कि शायद स्वामी जी को नहीं पता थी स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स और वीक न्यूक्लियर फोर्स इन सबको हम कहेंगे प्राण इट इज द प्राण दैट इज मेनिफेस्टिंग एज द एक्शंस ऑफ द बॉडी एज द नर्व करंट एज थर्ड फोर्स अभी यहां पे प्राण की एक दूसरी डेफिनेशन स्वामी जी कहते हैं यदि कॉस्मिक लेवल पर प्राण को हम फोर्स के साथ में या तो कार्य के साथ में इक्वेट करेंगे तो मनुष्य के लेवल पर माइक्रो कजम के लेवल पर हम इसी प्राण को हमारे शरीर में हो रहे कार्यों के साथ में इक्वेट करेंगे जैसे कि कहा गया है प्राण अपान व्यान उदान समान यह पांच तरह के प्राण है और यही पांचों प्राणों के साथ में कोई ना कोई कार्य जुड़ा हुआ है वो एक बार में पढ़ कर के आपको बताऊंगा तो यह पच प्राण है जो कि हमारे शरीर में कार्य कर रहे हैं विभिन्न तरह के तो प्राण ऑन द कॉस्मिक लेवल इज इक्वेटेड विथ फोर फंडामेंटल फोर्सेस ऑफ द नेचर एंड प्राण ऑन द इंडिविजुअल लेवल इज इक्वेटेड विथ पंच प्राण जो कि विभिन्न तरह के कार्य हमारे शरीर में करते हैं फ्रॉम थॉट डाउन टू द लोएस्ट फोर्स एवरीथिंग इज बट द मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राण हाईएस्ट मेनिफेस्टेशन है मनुष्य का विचार प्राण का हाईएस्ट मेनिफेस्टेशन है मनुष्य का विचार और लोएस्ट मेनिफेस्टेशन है इसको आप जो कुछ भी कहेंगे यह जितने भी फोर्स के मेनिफेस्टेशन है सभी प्राण के विभिन्न रूप से विकार है प्राण के कार्य प्राण के यह ट्रांसफॉरमेशंस है द सम टोटल ऑफ ऑल फोर्सेस इन द यूनिवर्स मेंटल और फिजिकल व्हेन रिजॉल्वड बैक टू देयर ओरिजिनल स्टेट इज कॉल्ड प्राण यह जो मैं अपने नोट किताब में वह जो मार्किंग करता हूं ना तो जहां पे अच्छा-अच्छा की पैसेज जाता है मैं उसको मार्क कर देता हूं तो यह जो सब चैप्टर्स है ना वैसे जनरली ऐसा होना चाहिए आईडियली कि एक पेज के ऊपर में आप एक पैसेज या एक कोटेशन मार्क करेंगे क्योंकि वैसे तो स्वामी जी का इतना कंडेंस उन्होंने सब कुछ बोला हुआ है कि प्रत्येक शब्द वो इट्स अ इट्स लाइक अ डायमंड इट्स लाइक ज्वेल प्रत्येक शब्द का एकदम इंपॉर्टेंस है किंतु हम मार्क तो इतना ही करेंगे ना कि जो कि एकदम एसेंस ऑफ एसेंस हो बेस्ट ऑफ द बेस्ट हो तो अभी ये जो मैंने मार्किंग चालू किया अभी जो पैसेजेस आते हैं ना अभी एक के बाद एक पेजेस आते हैं आधा-आधा पेजेस मार्क किया हुआ है इतना कंडेंस स्वामी जी ये सब पेजेस के भीतर में है तो ये पहला मार्किंग आता है इस लेक्चर द सम टोटल ऑफ ऑल फोर्सेस इन द यूनिवर्स मेंटल और फिजिकल व्हेन रिजॉल्व बैक टू देयर ओरिजिनल स्टेट इज कॉल्ड प्राण इस जीवन की विश्व ब्रह्मांड की जितनी भी फोर्सेस है फिजिकल हो ना कि मेंटल हो यह पदार्थ वाली हो ना कि मानसिक हो सब कुछ जब अपने ओरिजिनल स्टेट में अपने ओरिजिनल स्वरूप में जब विघटित हो जाती है या तो लय हो जाती है तो उस ओरिजिनल स्टेट को कहते हैं प्राण तो जैसे सृष्टि के प्रारंभ में आकाश में से सब पदार्थ प्रकट हुए और सृष्टि के अंत में सब पदार्थ आकाश में लय हो जाएंगे वैसे ही सृष्टि के प्रारंभ में जितनी भी फोर्सेस सबसे पहले प्राण में से सब फोर्सेस प्रकट हुई और सृष्टि के अंत में जितनी भी फोर्सेस है अपने इंडिविजुअल लेवल पर ना कि कॉस्मिक लेवल पर वह सब प्राण के भीतर में उसका लय हो जाएगा व्हेन देयर वाज नादर ओट नॉर नॉट वन डार्कनेस वास कवरिंग डार्कनेस व्ट एसिस्टेड देन नासदीय सुक्तम ट आकाश एसिस्टेड विदाउट मोशन जब कुछ भी नहीं था सृष्टि के प्रारंभ में कुछ नहीं था और कुछ सिफ डार्कनेस कवर्ड बाय डार्कनेस अंधेरे से अंधे ढका हुआ था उस समय किस चीज का अस्तित्व था ट आकाश वह आकाश उसका अस्तित्व था इट लीव्ड विदाउट मोशन आकाश किंतु उसमें कोई गति नहीं उस तरह के आकाश का अस्तित्व था नासदीय सुक्तम अगेन स्वामी जी ने मैक्रो कजम में इसका उल्लेख किया है वन ऑफ द बेस्ट हिम्स ऑफ अवर वेदास सब सर्वश्रेष्ठ यह जो वेद के है उनमें से यह एक है नासदीय सक्ता द फिजिकल मोशन ऑफ द प्राण व स्टॉप बट इट एसिस्टेड ऑल द सेम यह प्राण गति प्राण की जो गति है वह तो अटक गई है सृष्टि के प्रारंभ में या तो अंत में किंतु प्राण इट सेल्फ एलिमेंटल फॉर्म में हमेशा से रहेगा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति श शही ह दसत श्री राम
Questions & Answers
कृष्णर्पण अर ज मने होए जो मुझे लगता है कि स्वामी जी को जो दर्शन हुए स्वामी जी को कितने ही दर्शन हुए थे सबसे फेमस दर्शन पर पता है ना स्वामी जी का कौन सा है कि बेलूर मठ में थे उस समय जब बेलूर मठ की स्थापना हुई थी बहुत सारे लोग ऐसी बातें करना शुरू कर दिए थे कि यह मठ नहीं है यह ट्रेडिशनल यह आश्रम नहीं है यह बाबू लोगों की बागान वाड़ी यहां पर सब विदेशी लोग आकर के एशो आराम करते हैं वो भोग वगैरह करते हैं किंतु यह तो एक्चुअली ट्रेडिशनल मठ की तरह ही है तो किंतु यह जो लोगों का भ्रम खास कर के आसपास के लोगों का वैसे तो तो पूरे विश्व में स्वामी जी की ख्याति फैल गई थी किंतु यह जो बेलूर ग्राम जो है बेलूर बाली ये आसपास के लोग उन लोगों का भ्रम पता है कैसे वो टूटा था जब एक दिन स्वामी जी को एक दर्शन हुआ कि गंगा में से मां दुर्गा प्रकट हो रही है तो जैसे ही स्वामी जी को यह दर्शन हुआ दौड़े-दौड़े राजा महाराज के पास गए राजा महाराज को पूछा राजा हमको दुर्गा पूजा करनी होगी क्यों क्योंकि मुझे मां दुर्गा का दर्शन हुआ है तो राजा महाराज ने इमीडिएट हां बोल कर के कहा हां ठीक है मुझे भी तो मां दुर्गा का दर्शन हुआ तब से बेलूरमठ में दुर्गा पूजा प्रारंभ हुई बिल्कुल ट्रेडिशनल तरीके से वो पूजा होती है और उस पूजा में भाग लेने के लिए ये बेलूर बाली या आसपास के जितने भी लोग रहते थे सब आए और पहली बार उनको लगा कि ना ये ट्रेडिशनल मठ या ट्रेडिशनल आश्रम ही है तो स्वामी जी के एक के बाद एक बहुत सारे विजन है उनको सबसे हमको पता है कि बड़ा ही सुंदर घटना कि जब उनके माता जीी पिताजी का देहांत हुआ मां और भाई के पास में खाने के लिए कुछ नहीं है वह बड़े ही दुखित होकर के एक दिन रात को दक्षिणेश्वर गए और ठाकुर को विनती की कि महाशय आप मेरे परिवार के लिए कुछ व्यवस्था कर दीजिए तो ठाकुर ने क्या कहा जाओ तुम काली मंदिर में जाओ मां के पास में मांगो मां तुमको जो चाहिए वो दे देगी तो जैसे ही ठाक स्वामी जी गए काली मंदिर में गर्भगृह में जाकर के बोलने वाले थे रोटी दो कपड़ा दो मकान दो उसकी वजह क्या एक ऐसा एक दर्शन हुआ स्वामी जी ने क्या मांग लिया ज्ञान दो भक्ति दो वैराग्य दो है ना तो ये ऐसा स्वामी जी के जीवन में बार-बार हुआ है कि कितने ही उनको दर्शन हुए हैं अभी एक तीसरा एक बड़ा ही सुंदर उदाहरण है कि यह आलम बाजार मठ की शायद बात है कि स्वामी जी सोए हुए थे साथ में बाकी गुरु भाई भी सोए हुए थे और यह एकाएक आधी रात को महापुरुष महाराज की नींद खुल गई देखा कि यह बटुक भैरव स्वामी जी की चारों ओर प्रदक्षिणा कर रहे हैं तो ये देख कर के उनको पता चला कि यह स्वामी जी शिव के ही अंश से उन्होंने जन्म ग्रहण किया है तो अभी हम स्वामी जी को क्या गिने ठाकुर को यदि हम अवतार गिनते हैं तो स्वामी जी को क्या गिने देखिए बहुत ज्यादा कोई थरी में नहीं जाकर के ठाकुर की ही बात जद ले ठाकुर ने कहा कि कोलमी दोल एकटा के टान लेबाई टेने आश अर्थात की ये पुकुर अर्थात कि तालाब में यह जो कमल खिले हैं उन सबकी जड़े एक दूसरे के साथ में इस तरह से मिश्रित हो गई है कि आप एक गुलाब को खींचें तो सभी गुलाब खींच के चले आएंगे यानी कि यह सब पार्षद है जन्म जन्मांतर से य अवतार की लीला में सहाय होने के लिए आए हैं भगवान कृष्ण के समय में यह अर्जुन धर्मराज युधिष्ठिर यह सब रूप धारण करके आए थे राम कृष्ण लीला में वही यह स्वामी जी वही यह महाराज और यह योगानंद जी इनका रूप धारण करके आए यानी कि एक ही पेड़ के विभिन्न फल है एक ही अवतार के विभिन्न जन्मों में पार्षद रूप से यह होते आए हैं यानी कि स्वामी जी को दर्शन हो इस बात में हमको कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए अनेक समय हमरा डिक्शनरी देखर ई की बोलेना परिश्रम करीना एक अनुमान कर लिए नहीं आता बोले आता अत की फल ठाकुर एक फल उदाहरण किंतु आता आता माने की की बोले केने मोम मोम की वेस अनेक समय जानता सीताफल सीताफल फल ठकुर बोल तो आता माने अनेक दिन रे जानता ला क प प जा एक दिन कथा बोल संग तो उदाहरण स्वरूप आता बोले बो जानी माने संदर्भ ककर य करने बली री क इा अनुमान माने कोंटेक्स्ट बेस आत्माओ है पर जन्म के लिए दो चीज समझनी होगी एक तो देह के भीतर में आत्मा तो है ही है यानी कहेंगे कि आत्मा का एक किरण प्रकाश है किंतु साथ साथ में सूक्ष्म शरीर भी है क्योंकि सूक्ष्म शरीर ही तो एक के बाद एक नए देह धारण करता है सूक्ष्म शरीर के भीतर में ही हमारे संस्कार का बैलेंस लेखा जोखा एक देह से दूसरे देह एक जन्म से दूसरे जन्म वो जाता है वो यात्रा करता है यानी कि जद पुनर्जन्म वाद को समझना होगा तो सबसे पहले समझना होगा इस सूक्ष्म देह को क्योंकि सूक्ष्म देह ही है जो कि मेरी मेमोरीज मेरे संस्कार पुण्य कर्म पाप कर्म का लेखा जोखा बैलेंस शीट एक जन्म से दूसरे जन्म लेकर जाता है यह सूक्ष्म शरीर की यात्रा जन्म जन्मांतर तक चलेगी आखिर में यह सूक्ष्म शरीर समझेगा कि हां ये जितना भी मैं देह के सुख है संसार के सुख है उसमें मैं जितना ही फंसता जाता हूं उतना ही आखिर में तो मेरी मेरे पास में आंसू के अलावा कुछ नहीं आता तो इसको मैं छोडूं और एक उर्ध्व गति करूं तो यह सूक्ष्म शरीर को य अकल आती है और जैसे ये सूक्ष्म शरीर अच्छे संस्कार वो प्रकट करना शुरू करता है अच्छा-अच्छा शुभ कर्म करना शुरू करता है हर देह में उतना ही उसकी आध अमिक उन्नति होती जाती है आखिर में सूक्ष्म देह की मुक्ति होगी और वह आत्मा में विलीन हो जाएगा और अपना यह जो जन्म मृत्यु जरा व्याधि का जो चक्र है एक देह से दूसरे देह की यात्रा व समाप्त हो जाएगी आद प्लेट कंप्लीट वर्क्स देखिए जब मैक्रो कजम माइक्रो कजम का अंत हुआ था हमने उसके लिए समरी सेशन रखे थे क्योंकि मैं भी समझ पा रहा था कि इतना लंबा अभी हो गया है एक्सप्लेनेशन कि कुछ समरी की आवश्यकता है तो वैसे ही यहां पर भी हम अभी फिलहाल सेंटेंस बाय सेंटेंस पढ़ेंगे डिटेल में डिस्कशन करेंगे किंतु आखिर में इसका भी मैं एक समरी सेशंस रखूंगा एक दो नहीं काफी एक सप्ताह तक चलेगा और फिर आखिर में यह जो मैक्रो कजम माइक्रोकॉस्म में जो पढ़ा और यहां पे प्राण साइकिक प्राण जो है इन दोनों का फिर कॉमिनेशन करके एक ओवरऑल पिक्चर क्या नजर के सामने आता है उसको भी हम देखेंगे किंतु यह सब समरी डिस्कशन करने से पहले क्या है ना डिटेल में जाना आवश्य है यह ऐसा हो गया ना कि पीएचडी लेवल का कुछ क्वेश्चन हम जद डिस्कस कर रहे तो हमको फर्स्ट स्टैंडर्ड सेकंड स्टैंडर्ड थर्ड स्टैंडर्ड यह सब पार करके जाना पड़ेगा यदि ट्रिगोनोमेट्री सीखना है हमको तो पहले ये एडिशन सब्सट्रैक्शन मल्टीप्लिकेशन डिवीजन यह सब सीखना पड़ेगा तभी हम ट्रिगोनोमेट्री और कैलकुलस सीख पाएंगे तो वैसे ही हम ट्रिगोनोमेट्री कैलकुलस तक जा रहे हैं पहले ये एडिशन डिस्ट्रक्शन मल्टीप्लिकेशन डिवीजन हो जाए आखिर में सबका ओवरऑल मैंने वो कर सराइज करके हम करेंगे डिस्कस करेंगे अभी तो इसके बाद में कॉम्प्लिकेशन और बढ़ेगा जब स्वामी जी ये ईडा पिंगला और कुंडलिनी की बात करेंगे वो जब बातें चालू होगी तो और भी कॉम्प्लिकेशन बढ़ेगा देखिए यह सब चीजें स्वामी जी ने समझाई है और जैसा स्वामी जी ने समझाया है हम भी समझने का प्रयास करते हैं ऐसा तो है नहीं कि मेरा इन सब सब्जेक्ट में एक्सपर्टाइज्ड बोलने के लिए ना ही मैं फिजिसिस्ट हूं ना ही मैं बायोलॉजिस्ट हूं ना ही मैंने ऐसा तो है नहीं कि अपने ट्रेडिशनल शास्त्रों का बड़ा ही डिटेल में स्टडी किया है इट इज नॉट लाइक दैट मैंने भी सिर्फ स्वामी जी को ही पढ़ा है और स्वामी जी की जो एक्सप्लेनेशन है उसको मैं अपनी अंडरस्टैंडिंग के साथ में जोड़ करके बताने का प्रयास करता हूं सम टाइम्स ये डिफिकल्ट लगता है कॉम्प्लिकेशंस लगते हैं किंतु यह मेरा मानना है कि जब हम समरी के लेवल तक पहुंच जाएंगे तब बहुत सारी बातें क्लियर हो जाएगी देखिए स्वामी जी ने जिस तरह से यहां पर जो एक्सप्लेनेशन दी है ना इट इज वेरी यूनिक मैंने इसको इस तरह की कहीं पर भी नहीं पढ़ा है जैसे आपने कहा कि ये अपने जहां-जहां पे भी अब जैसे वेदांतसार है सबसे स्टैंडर्ड शास्त्र के बारे में बताता हूं वेदांतसार या तो फिर यह विवेक चूड़ामणि है ना कि यह पंचदशी है यहां पर जिस तरह से आपने पंच भूतों का वर्णन है वहां पर जिस तरह से आकाश का वर्णन है और स्वामी जी यहां पर जो करते हैं इट्स कंपलीटली डिफरेंट वेरी यूनिक वहां पे पंजीकरण की प्रक्रिया इसको कहते हैं कि किस तरह से कॉस्मस का प्रारंभ हुआ है उसको पंजीकरण कहते हैं तो यह पंजीकरण जो विधि है वो वो विधि वहां पर जो हम पढ़ते हैं और यह जो यहां पर हम स्वामी जी हमको बताते हैं वो बहुत डिफरेंट दिखता है तो अभी देखिए मैं तो ऐसा कहूंगा नहीं कि स्वामी जी सही है वो गलत है या तो फिर वो गलत है स्वामी जी सही है स्वामी जी ने हमको ऐसा कहा है और हम स्वामी जी के फॉलोवर है इसलिए हम स्वामी जी को पढ़ते हैं अभी यदि हमको विरोधाभास दिखता है होना नहीं चाहिए ऊपर ऊपर से ही विरोधाभास दिखता है डिटेल में जाएंगे तो नहीं रहेगा किंतु यदि स्टार्टिंग में दिखता भी है लेट अस हैव फेथ इन स्वामी जी बिकॉज वी फॉलो स्वामी जी राइट तो स्वामी जी के ऊपर मैं विश्वास करके वो जो कहते हैं उसको समझने का प्रयास करें और आखिर में आखिर तक यदि कोई डाउट रह जाते हैं तो स्वामी जी कोई ठाकुर को ही प्रार्थना करें कि ठाकुर ये जो आखिरी डाउट जो बचे हैं कुछ वो आप सॉल्व कर दो क्योंकि आखिर आखिरी जो अल्टीमेट लेवल के जो डाउट होते हैं वो बिना कृपा के सॉल्व नहीं होते बुद्धि से सब कुछ सॉल्व नहीं होगा एक्चुअली स्वामी जी ने इस बात को जिस तरह से एक्सप्लेन किया है व क्या है पता है स्वामी जी कहते हैं कि हम लोगों ने सबसे पहले प्रिंसिपल्स खोज लिए हैं लार्जर प्रिंसिपल इसके बाद में हमने ऋषि मुनियों ने क्या किया ऋषि मुनियों ने बेसिक प्रिंसिपल्स खोज लिए कि जगत ब्रह्मांड की सृष्टि की पीछे का जो कहेंगे कि स्ट्रक्चर कहो ना कि आइडियाज कहो ना कि प्रिंसिपल्स कहो वो इस तरह के है किंतु उन्होंने नेक्स्ट जनरेशन के ऊपर में इसको वर्क आउट करना छोड़ दिया है कि इसका डिटेल्स जो है वह आप इस तरह से वर्कआउट कीजिए वह नेक्स्ट जनरेशन के ऊपर में उन्होंने छोड़ा हुआ है इसलिए हमको ऐसा लगता है कि अभी डिटेल तो वर्कआउट करनी होगी और डिटेल तो बहुत लंबे समय तक वर्कआउट होती रहेगी तो यह डिटेल वर्कआउट होना एक चीज हो गया और यह बेसिक प्रिंसिपल्स एक चीज हो गए अभी जैसे कि मान लीजिए कि आपने कहा कि फोर्स इक्वल्स अ ए मास एंड एक्सीलरेशन ए ए f इक्व ए अब ये बेसिक प्रिंसिपल डेवलप हो गया अभी इसको वर्कआउट कैसे करेंगे इसके बेस के ऊपर में आपने रॉकेट बनाया अभी यही रॉकेट आपको चांद पे ले जाता है अभी यह मार्स मिशन जो है वह प्रारंभ हो रहा है अभी इसके बाद में मान लीजिए कि हम कॉस्मिक जर्नी करेंगे हमारी स्पीड बढ़ती जाएगी अपनी स्पेस शटल की वगैरह की स्पेसशिप की किंतु प्रिंसिपल तो वही है ए इक्वल्स ए आप जितनी गति से आप वो जो इंजन चलाएंगे उतनी ही गति से आपका स्पेसशिप फ्लाई करेगा तो बेसिक इक्वेशन आज डेवलप हो गए उसका एप्लीकेशन कब कहीं जाकर के डेवलप होगा डिटेल वर्कआउट होता रहेगा जैसे कि एक सॉलिड स्टेट फिजिक्स है यह सॉलिड स्टेट फिजिक्स का डेवलपमेंट 1920 1930 के समय में स्टार्ट हुआ था बाद बाद में इसी सॉलिड स्टेट फिजिक्स के प्रिंसिपल पे यह माइक्रोप्रोसेसर डेवलप हुआ आज देखिए कि माइक्रोप्रोसेसर डेवलप होने की जर्नी तो चलती ही रहेगी अभी यह 10 नैनोमीटर स्केल पे वह माइक्रोप्रोसेसर बन रहा है फिर 5 नैनोमीटर के स्केल पे अभी सुना कि लेटेस्ट जो है वोह 3 नैनोमीटर तक आ गया है उसका वो जो सिंगल ट्रांजिस्टर का जो साइज है तो और इसके बाद में फिर फोटोनिक चिप डेवलप होगी ना कि इसके बाद में बायोनिक चिप डेवलप होगी इसके बाद में क्वांटम कंप्यूटर्स डेवलप होंगे किंतु जो बेसिक आइडियाज है वो 1920 1930 में हो गए डेवलप तो ये बेसिक प्रिंसिपल डेवलप होता है फिर उसकी एप्लीकेशंस जो है वोह चलती ही जाएगी चलती ही जाएगी सो इट इज लाइक दैट कि यह ब्रह्मण है यह माया है यह माया कहो फिर तो यह प्रकृति कहो फिर यह आकाश कहो ना कि प्राण कहो ना कि व्हाट एवर यू कहो यह बेसिक प्रिंसिपल हो गया अभी इस बेसिक प्रिंसिपल को वर्क आउट करने की इसको अप्लाई करने की इसके ऊपर में जो एप्लीकेशन डेवलप होगी वो कितनी ही डेवलप होगी यह कंप्यूटर एक बार जब पहली बार जब डेवलप हुआ था तो एक बेसिक प्रिंसिपल हो गया कि यह मेमोरी है यह प्रोसेसर है यह आउटपुट है और इस तरह से प्रोसेस होती है यह जो 1930 40 के दशक में जो हुआ डेवलप आज कंप्यूटर जितना डेवलप हो रहा है हो रहा है उसका कभी अंत नहीं आएगा हमेशा नया-नया डेवलपमेंट होता ही रहेगा तो बेसिक प्रिंसिपल एक हो गया और एप्लीकेशन दूसरी हो गई सो एप्लीकेशन तो डेवलप होती ही रहेगी हम ऐसा कभी नहीं कहेंगे कि हां एप्लीकेशन ने एक जगह पे आक के रुक गई किंतु जो बेसिक प्रिंसिपल है उसका डेवलपमेंट एक जगह पे रुकेगा क्योंकि आखिर में तो विश्व ब्रह्मांड जिस स्ट्रक्चर का बना हुआ है उस स्ट्रक्चर के लेवल पे यदि हम चले गए तो फिर उससे तो ऊपर में कुछ जाना है नहीं मुझे नहीं लगता कि इतना भी डिफरेंस होगा क्योंकि क्या है ना कि जैसे-जैसे हम कॉन्शसनेस के भीतर में जाते जाते हैं ये सब बाउंड्रीज है ना एक्सटर्नल वर्ल्ड और इंटरनल वर्ल्ड ये बाउंड्रीज धीरे-धीरे करके ना डिसोल्व होती जाएगी क्योंकि अभी जैसे आइंस्टाइन को ही देख लीजिए अ वो एक थॉट एक्सपेरिमेंट कर रहा था कि यदि मैं प्रकाश की स्पीड के साथ में गति करता हूं तो मुझे क्या मिलेगा देखने को या तो फिर मैं एक लिफ्ट में जाता हूं और लिफ्ट उसी स्पीड के साथ में जमीन पे गिरती है जिस स्पीड के साथ में ग्रेविटेशनल वेव मने ग्रेविटी व चलता है तो वो मैं ग्रेविटी ने फ्री फॉल और यह लिफ्ट में जाना ये दोनों में क्या मुझे फर्क दिखेगा यह जो थॉट एक्सपेरिमेंट है वो इतने मतलब क्या कहेंगे दे र सॉर्ट ऑफ विजनस विजंस कंबाइंड विथ सम सॉर्ट ऑफ एसोटेस्ट तो मुझे ऐसा नहीं लगता कि यदि जिस ऋषि ने यह देखा होगा कि चलो कि ये ब्रह्मांड के जैसे स्वामी जी का काकड़ी घट का दर्शन है टू बी टू वेरी सिमिलर जद हम देते हैं सिमिलरिटीज एग्जांपल यहां पे आइंस्टाइन का जो वो एक थॉट एक्सपेरिमेंट था कि प्रकाश की स्पीड के साथ में गति करने से क्या होगा और यहां पे काकड़ी घट पे स्वामी जी का जो एक विजन था कि ये मेरे हृदय के भीतर में जो आत्मन है और वही यह विश्व ब्रह्मांड के भीतर में जो ब्रह्मण है ये जीव ब्रह्म ऐक्य ये जो स्वामी जी का विजन और ये आइंस्टाइन का विजन मुझे नहीं लगता कि उस लेवल पे बहुत ज्यादा कोई डिफरेंस होगा हमारे लेवल पे जब हम साधक है और साधना करते हैं और साइंटिस्ट ये फिजिसिस्ट हो ना कि केमिस्ट हो ना कि बायोलॉजिस्ट हो हम हम लोगों के लेवल पर यह इंटरनल वर्ल्ड और एक्सटर्नल वर्ल्ड में एकदम जैसे कि स्टोन वॉल है वो दोनों जगत ही बिल्कुल अलग है किंतु उस लेवल पे हाईएस्ट लेवल पर मुझे नहीं लगता कि यह ऐसा स्टोन वॉल होगा या ऐसा कोई हार्ड एंड फास्ट बाउंड्री होगा दिस इज एक्सटर्नल वर्ल्ड दिस इज इंटरनल वर्ल्ड मुझे लगता है कि वो जो इनोवेशन या क्रिएटिविटी की जो प्रोसेस है या तो यहां पर जिसको हम दर्शन करते हैं वच मस्ट बी वेरी सिमिलर एट वन पॉइंट हालांकि हमने ना ही वो इनोवेशन किया है ना ही हमको वो विजन हुआ है ना मैं भी इसके बारे में सोच रहा हूं और मैंने चार्ट्स बनाना भी शुरू कर दिया है कि किस तरह से हम इसको इस पर्टिकुलर करेंगे इस क्लास को और थोड़ा सा डेवलप हो जाए मेरा ये मटेरियल स्टडी मटेरियल इसके बाद में हम करेंगे वह क्लास क्योंकि आई माइसेल्फ फील दैट के क्लास आफ्टर क्लास में जो शब्दों का व्यवहार कर रहा हूं वो कंसिस्टेंट होने चाहिए मुझे खुद को ऐसा लग रहा है तो और स्वामी जी का प्रॉब्लम यह है ना कि वह जिस मूड में है उस मूड में बात करते है ना तो मुझे खुद को एक कंसिस्टेंसी चाहिए मेरी वोकेबल में तो वो स्टडी मटेरियल मैं तो डेवलप कर रहा हूं वेरी सून हम वो सीरीज ऑफ क्लास करेंगे जिसमें डेफिनेशन क्लियर कर देंगे चार्ट्स एंड डेफिनेशन दोनों रहेगा कि इसके बाद में हमको टर्मिनोलॉजी में कोई कंफ्यूजन नहीं रहेगा वो हम करेंगे इंग्लिश में कहावत है वेयर एंजल्स आर अफ्रेड टू ट्रीड फुलस रसिन वहां पर जहां पर देवता लोगों को जाने में डर लगता है मूर्ख लोग आंख बंद करके दौड़े जाते हैं राजयोग ऐसा टॉपिक है कोई उसको हाथ नहीं लगाना चाहता बड़ा डेंजरस टॉपिक है तो हमारी इतनी बुद्धि नहीं है ना डेंजर समझने की इसलिए आख बंद करके हम चालू कर दिए