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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Macrocosm 31 Oct 2023

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ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद वॉल्यूम टू ज्ञान योग ज्ञान योग सीरीज का प्रवचन कोसमस कॉस्मो द मैक्रो कजम इंग्लिश में पेज नंबर है 200 एंड ना 209 हम कल एक रिकप कर लिया इसलिए अभी मैं यहां से सीधा आगे पढ़ता हूं स्वामी जी का जो सबसे रेवोल्यूशन सेंटेंस था कि टेक द एंटायस ऑफ लाइफ एज अ सिंगल यूनिट सीट एज सिंगल कॉन्शसनेस अभी स्वामी जी इसको फर्द आगे समझाते हैं इफ द लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी इज ट्रू जद यह कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी का नियम या तो यह साइंटिफिक रूल यदि सही है ट्रू यू कैन नॉट गेट एनीथिंग आउट ऑफ अ मशीन अनलेस यू पुट इट इन देयर फर्स्ट किसी मशीन में हम आउटपुट मिलेगा वो आउटपुट जो हम इनपुट दे रहे हैं उससे ज्यादा नहीं होगा इसके बारे में भी हमने लास्ट पिछले सता वाले क्लास में हमने डिस्कस किया था कि जैसे कि आज की हम गाड़ी है या बाइक है हम लोग चलाते हैं तो हम लोगों को पेट्रोल डालना पड़ता है पेट्रोल डीजल या तो फिर यह आजकल सीएनजी के ऊपर में भी कार्स चलती है तो जो भी इंधन हम डाले जो भी फ्यूल डाले तो जितना फ्यूल डाला है उतना ही गाड़ी चलेगा यदि गाड़ी का माइलेज है आपका कि 40 किमी पर लीटर तो यदि आपने 10 लीटर डाला है तो वो 400 किमी ही चलेगा इससे ज्यादा नहीं चलेगा जितना इनपुट है उतना ही आउटपुट है इसको थर्मोडायनेमिक्स का फर्स्ट लॉ ऑफ दिस इज कॉल्ड फर्स्ट लॉ ऑफ थर्मोडायनेमिक्स थर्मोडायनेमिक्स बोल कर के फिजिक्स का एक ब्रांच है उसको उसका यह पहला नियम है जिसको कहते हैं कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी अभी जहां तक मैथमेटिक्स की बात कह र है स्वामी जी ने कहा इसके बाद में स्वामी जी कहते हैं द अमाउंट ऑफ वर्क ट यू गेट आउट ऑफ एन इंजन इज एटली द सेम एज यू हैव पुट इनटू द फॉर्म ऑफ वाटर कोल वाटर एंड कोल नादर मोर नोर लेस येय उस स्वामी जी के समय में ये स्टीम इंजन थे तो स्टीम इंजन आपने हमने वो उस गाड़ियों में सफर किया है पहले की ट्रेन अभी तो बहुत सारी ट्रेन इलेक्ट्रिकल ट्रेन हो गई है वो इलेक्ट्रिसिटी से चलती है किंतु हम लोग जब छोटे थे और अभी भी शायद बहुत सारी होगी कि कोयले प चलती है वोह जो एक काले कलर का एक बड़ा सा इंजन होता है उसके भीतर में वो कोयले का एक बहुत बड़ा स्टो स्टोरेज रहता है फिर वो जो फायरमैन है वो पावडे से लेकर के कोयला वो इंजन में डालता है और इंजन में वो अग्नि प्रकट होती है फिर वहां से वोह ट्रेन चलती है तो हमने देखा है तो स्वामी जी के समय में यह स्टीम इंजन एक कटिंग टेक्नोलॉजी था तो इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि पानी और यह कोयला या तो जो कुछ भी इंधन हो हम किसी इंजन में डालेंगे तो उतना ही आउटपुट हमको मिलेगा अभी जहां तक ये मैथमेटिकली प्रूव करने की बात स्वामी जी कर रहे हैं तो इसके ऊपर में से एक दूसरी बात हमको शशि महाराज का एक उदाहरण सबको पता होगा शायद कि शशि महाराज ने एक बार विरजानंद जी ने ये कहा था मोस्ट प्रोबेबली विरजानंद जी ने कहा था कि शशि महाराज ने मैथमेटिकली प्रूव करके दिखाया तो व्हाट इज ठाकुर तो ऑल द डायरेक्ट डिसाइल्स ऑफ ठाकुर ल द हाउसहोल्डर्स डिसाइल्स ऑफ ठाकुर प्लस ठाकुर लव फॉर अस एंड प्लस डिसाइल्स रेवरेंस श्रद्धा ये जो भक्त है उनकी ठाकुर के ऊपर में श्रद्धा भक्ति वह सब मिला कर के जो होता है ट इक्वल्स ठाकुर ऐसा करके शशि महाराज ने मैथमेटिकली यह विरजानंद जी को कहा था द वर्क आई एम डूइंग नाउ इज जस्ट व्ट आई पुट इन टू मी आज मैं जो कार्य कर रहा हूं वह जो मैंने अपने भीतर में जो एनर्जी डाला है उसी का यह आउटपुट है इन द शेप ऑफ एयर फूड एंड अदर थिंग्स यह हवा है खुराक है आहार है इसके रूप में मैं एनर्जी ग्रहण कर रहा हूं और उस एनर्जी को मेटामिनडी का शरीर धारण हो रहा है इट इज ओनली ए क्वेश्चन ऑफ चेंज एंड मेनिफेस्टेशन यह जो हवा और खोराक आहार और पानी और यह स्वामी जी का स्पीच या तो स्वामी जी का जो कार्य है प्रश्न होगा कि आहार जद आध्यात्मिक साधना में या तो फिर प्रवचन देने में या तो फिर बुद्धिमत्ता में परिणत होता है तो हमारे साथ में ऐसा क्यों नहीं हो रहा स्वामी जी जो आहार करते थे उसी टाइप का आहार तो हम भी करते हैं तो किंतु स्वामी जी की जो मेधा शक्ति थी और हमारी मेधा शक्ति है वो स्वामी जी के सवे हथ पार्ट ऑफ स्वामी जी होगा स्वामी जी की जितनी है उसका 100वां पार्ट होगा और स्वामी जी तो छोड़ ही दीजिए स्वामी जी तो फिर कैटेगरी अलग है मैं स्कूल में पढ़ता था तो मैं एक लड़के को पहचानता था वो मेरा मित्र था और आजकल तो यह बोर्ड 10थ और 12थ की परीक्षा का महत्व थोड़ा कम हो गया है ये बोर्ड में रैंकिंग आता था पहले फर्स्ट रैंक सेकंड रैंक आजकल तो यह सब रैंक भी निकाल दिए हैं तो यह जो मेरा मित्र था तो उसका 10थ गुजरात बोर्ड की एग्जामिनेशन में उसका फिफ्थ ना कि सिक्स्थ नंबर आया था तो वह लड़का मैं जिस मैं जिस स्कूल में पढ़ता था तो स्कूल के सामने ही उसका घर था तो दो मंजिला घर था परिवार कोई बहुत ये नहीं था मध्यम वर्गीय परिवार था उसके पिताजी तो जॉब करते थे और जॉब करने वाले लोगों की तो जो परिस्थिति होती है महीने में जितना आता है पॉकेट में उतना ही चला जाता है तो ऐसा ही एक बड़ा मध्यम वर्गीय परिवार था तो उसका घर हमारी स्कूल के सामने थोड़ा सा डिस्टेंस पे ही था तो मैं जब भी स्कूल में आता था लड़का वैसे दूसरी स्कूल में पढ़ता था हमारे से उसका टाइमिंग्स अलग होता था तो मैं हमेशा देखता था कि व उसको सेकंड फ्लोर था या तो फिर फर्स्ट फ्लोर कहेंगे ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर तो फर्स्ट फ्लोर की विंडो पर बैठा बैठा वह अपनी किताब पढ़ता था या होमवर्क करता रहता था अभी उसके सामने स्कूल के सब लड़के हमारी स्कूल में 1000 1500 लड़के होंगे तो सब हज 1500 स्टूडेंट उसकी घर के सामने से निकल रहे हैं या तो फिर वहां पर जमा हुए हैं गप लगा रहे हैं हल्लागुल्ला कर रहे हैं और यह लड़का और कोई भी होता तो उसकी नजर सबसे पहले वहां पर जाती कि यह लोग क्या कर रहे हैं देखें यह एक एक होता है ना ह्यूमन क्यूरियोसिटी कि दूसरे लोगों जब एक यहां पे ऑफिस में भी य जब भी ये बैंडबाजा बचता है कोई बारात जाती है ना कुछ भी होता है आजकल तो यह रैलियां कितनी होती है पॉलिटिकल रैलियां कुछ भी होता है वो स्पीकर बजेगा सब लोग दौड़ के देखने को जाएंगे क्या हो रहा है क्या हो रहा है व होता कुछ नहीं है कि जस्ट ह्यूमन क्यूरियोसिटी कि 10 लोग इकट्ठा होते तो 11वें लोगों की 11वां जद साइड प खड़ा है तो उसकी नजर वहीं प जाएगी ज ह्यूमन ज अट्रैक्शन ऑफ ह्यूमन लाइफ तो यह लड़का किंतु मैं दिन प्रतिदिन मैंने उसको सालों तक देखा है कि वह फर्स्ट फ्लोर की विंडो पर बैठा बैठा जो होमवर्क कर रहा है स्टडी कर रहा है उसकी खिड़की के सामने से 1 1200 लड़के आ रहे जा रहे हैं रिसेस होती है स्कूल के बीच में तो वहां पर खड़े रहकर हल्लागुल्ला करते हैं उसकी ओर उसकी नजर कभी नहीं जाएगी जो पढ़ाई करता है वह करता है तो वो उसकी एकाग्रता का क्या प्रभाव है मुझे उस समय समझ में आ मैं खुद की बात करूं तो मेरे से तो यह संभव ही नहीं यह जैसे हमारा स्टाफ जदी दौड़ के चला जाता है देखने के लिए क्या हो रहा है मैं भी जाता हूं मैं भी देखता हूं कि भाई देखते हैं कि किस चीज का जुलूस है क्या है ये क्या मचा के रखा है तो इ इ जस्ट ह्यूमन क्यूरियोसिटी अपनी एकाग्रता 10 और बिखरी हुई है यदि आप मन को एकाग्र करेंगे तो आप जो चाहे वह कर पाएंगे वही आहार वही हवा वही पानी हम भी ग्रहण करते हैं स्वामी जी भी ग्रहण करते थे ऐसा नहीं है कि स्वामी जी ने कोई मल्टीविटामिन पिल्स कोई हायर लेवल की एडवांस टेक्नोलॉजी की बना कर के खाली थी बोल कर के उनकी मेधा शक्ति इतनी शार्प हो गई थी आजकल हम लोगों को ये जो स्टूडेंट लोगों को मूर्ख बनाने वाले ये जो शंख पुष्पी वगैरह जो नई-नई जो सब होता रहता है आयुर्वेद कहता है शंख पुष्पीन की ऐसा कुछ लो तो आपकी बुद्धि शक्ति बढ़ जाएगी अरे किसको उल्लू बना रहे हो यदि इस तरह से यदि कुछ होता तो ठाकुर ही सबसे पहले इसको रिकमेंड करते हैं मैं कुछ भी आजकल अपनी ट्रेडिशनल चर के बारे में सुनता हूं आयुर्वेद हो को जो भी हो मैं फर्स्ट ठाकुर महा स्वामी जी को रेफर करता हूं क्या उनकी लाइफ में ऐसा कोई उल्लेख है जद नहीं तो इस सब चीजों को कोई बहुत ज्यादा सीरियसली नहीं लेना है क्योंकि ठाकुर महा स्वामी जी डायरेक्ट डिसाइल इवन इन लोगों के सामने सब तरह के प्रश्न उत्तरी इनके साथ में होती थी जैसे कि इंडिपेंडेंस के बारे में महापुरुष महाराज है त्रिगुणा रयान जी महाराज है इन दोनों का खास करके लेट उनका तो लंबा जीवन था ना 1933 में महापुरुष महाराज का मोस्ट प्रोबेबली शरीर त्याग हुआ है 33 या 32 के आसपास में और तुर आनंद जी है वो ऑलमोस्ट वो 22 19 22 के आसपास में उनका देह त्याग हुआ तो मॉडर्न इंडिया यह इंडिपेंडेंस मूवमेंट यह कांग्रेस ये महात्मा गांधी यह नॉन कोऑपरेशन सत्याग्रह सब कुछ उस समय स्टार्ट हो गया था और सब तरह के प्रश्न इनको किए जाते थे और यह उत्तर भी देते थे और बाकी डायरेक्ट डिसाइल राजा महाराज थे राजा महाराज का देह त्याग 1922 में हुआ है वो भी 1921 22 में उसके बाद में शरत महाराज का 1926 में खोका महाराज का 1930 के आसपास में और ये लोग थे सब अखंडानंद जी थे तीसरे अखंडानंद जी अपना मंदिर हुआ 1936 में 1935 में अपना मंदिर हुआ बेलूरमठ का मेन टेंपल उससे थोड़ा सा पहले उनका देह त्याग हुआ मंदिर का इन जो ये कहते हैं इनगुन या तो फिर कॉंक्रेते विज्ञान और सबसे आखिरी शरीर गया अपने अभेदानंद जी महाराज का काली महाराज का वो 1937 में तो यह डायरेक्ट डिसाइल में से यह दो-तीन लोग थे कि जिनका यह कन्वर्सेशन आज हमारे सामने है रयान जी महाराज है महापुरुष महाराज है अखंडानंद जी महाराज है जिनके जिन्होंने बहुत सारे विभिन्न प्रश्नों का उत्तर दिया है जो कि उस समय की हमारी पॉलिटिकल इकोनॉमिकल सोशल कंडीशन को वो रिफ्लेक्ट करते थे कोई भी प्रश्न आ कर के करेगा कि यह महात्मा गांधी का यह असरकार का आंदोलन या फिर यह ब्रिटिश गवर्नमेंट ने ऐसा कहा है तो इन लोगों का प्रश्नोत्तर सब कुछ है तो मैं जनरली देखता हूं कि आज के मॉडर्न युग में भी हमारे कल्चर ट्रेडिशनल करर के कोई बात होती है तो अपने डायरेक्ट डिसाइल इसके बारे में क्या कहते हैं वो मैं पहले एक बार रेफर कर लेता हूं कहीं पर किसी ने शंख पुष्पी की बात नहीं की ये मैं आपको गारंटी देक कह सकता हूं तो ये देखिए कि ये लोग हमको उल्लू बनाते हैं कि कोई बाहर से ऐसा कोई मटेरियल हमारे भीतर में डालेंगे कि जो कि हमारी मेदा शक्ति को बहुत बढा देगा किंतु हमको यह बात याद रखनी है कि इनपुट आउटपुट और प्रोसेस तीन चीजें होती है स्वामी जी ने भले ही यहां पे इनपुट और आउटपुट के बारे में ही कहा उन्होंने भले ही ऐसा कहा कि मैं जो आहार मैं हवा और पानी जो ग्रहण करता हूं वही मेरे कार्य शक्ति में परिणत होता है किंतु हमको तो प्रश्न होगा ना कि स्वामी जी की तरह हमारी कार्य शक्ति क्यों नहीं है 40 साल की उम्र में जो करके गए हमारे 40 जन्मों में भी यदि हम उसका 1 पर भी कर पाए तो हम लोग नसीबदार अपने को महसूस करेंगे वीी विल फीर अवर से फॉर्चूनेटली नहीं क्योंकि स्वामी जी की जो एकाग्रता की शक्ति थी दैट वाज फार ग्रेटर देन अवर्स और इसीलिए आजकल देखिए कि विभिन्न तरह की गाड़ियों में विभिन्न तरह के माइलेज होते हैं कि बहुत बड़ी गाड़ी होगी तो पर लीटर आपको 15 किमी ना कि 20 किलोमीटर का माइलेज देगी कंपैक्ट गाड़ी होगी उसका का जो इंजन होगा वो एफिशिएंट होगा तो पर लीटर आपको 40 किमी ना कि 50 किमी का माइलेज देगी तो ऐसा आप जद कहेंगे प्रश्न उठाएंगे कि अरे इनपुट और आउटपुट यदि समान है तो यहां पे 1 लीटर में 10 किमी चलती है यह गाड़ी और यह बाइक है 1 लीटर में 50 किमी चलती है तो बात है कि उसका इंजन का एफिशिएंसी क्या है वो भी मैटर करता है तो प्रोसेसिंग कैपेसिटी तो ह्यूमन लेवल पे वो प्रोसेसिंग कैपेसिटी को हम एकाग्रता कहते हैं जो इनपुट हमारे भीतर में डाला जाएगा उसको यदि हम एकाग्र करेंगे अपने मन को तो दैट इनपुट विल मल्टीप्लाई थाउ फोल्ड इन द फॉर्म ऑफ आउटपुट तो बात यह नहीं है हमेशा समझ लेना है कि स्टूडेंट्स को खास करके कि शंख पुष्पी जैसे जो भी आजकल चलता है शंख पुष्पी हमारे जमाने में चलता था इसलिए मुझे याद है आजकल क्या है मुझे पता नहीं तो इस तरह के शॉर्टकट हमको कभी भी हेल्प करने नहीं वाले हैं यदि हम यह मान भी ले कि अच्छा स्वामी जी ने कहा है कि इनपुट और आउटपुट इक्वल है तो जद इनपुट बढ़ा दे तो आउटपुट बढ़ जाएगा तो डजन मैटर स्वामी जी यहां पे जो एक क्रुशल बात नहीं करते और जगह पर उन्होंने एकाग्रता के बारे में तो उन्होंने बहुत कुछ कहा है तो हमको वो पोर्शन यहां पर लाकर के बीच में डाल देना है इनपुट प्रोसेस एंड आउटपुट यह तीन जो है एक समान एक साइकल में चलते हैं जितना इनपुट डालोगे वही ट्रांसफॉर्म होकर के इसके रिलेटेड इनपुट का ही जद बात आ गया है तो स्वामी जी का कुछ कुछ रेमसंस बिकॉज की ये पर्सनल क्लास है इस प्राइवेट क्लास है मैं बता रहा हूं यहां पर गुजरात में थोड़ा नॉनवेज को लेकर के है थोड़ा सेंसिटिविटी इसलिए इस तरह की रेमसंस हम जनरली नहीं बोलते हैं किंतु स्वामी जी नॉनवेज खाते थे यह बात हम सबको पता है तो एक बार क्या हुआ स्वामी जी कैलिफोर्निया में थे और सैन फ्रांसिस्को में टर्क स्ट्रीट बोलकर के एक जगह है वहां पे वह एक फ्लैट लिया था सेकंड थर्ड फ्लोर के ऊपर में और वहां पे रह रहे थे और उनके साथ में थे मिसेस एलिस हेंस ब्रो और मिसेस एस पिनॉल ये एलिस हेंस ब्रो लॉस एंजेलिस की डिवोटा थी स्वामी जी की और स्वामी जी जाकर के सबसे पहले लॉस एंजेलिस में गए थे फिर वहां से सन फ्रांसिस्को में गए थे आपको यदि पता होगा तो लॉस एंजेलिस और सन फ्रांसिस्को दो दोनों ही कैलिफोर्निया के बड़े मेजर सिटीज है तो पहले लॉस एंजेलिस गए वहां पर क्लासेस दिए और यह मिसेस एलिस हेंस ब्रो तीन बहने थी जिनको हम मिड सिस्टर्स कहते हैं उनमें से सबसे बड़ी थी मिसेस एलिस हें तो एलिस जब स्वामी जी ने कहा कि मैं कैलिफोर्निया जाना चाहता हूं मतलब यह सब डिवटी बाद में प्लान कर रहे थे कि स्वामी जी कैलिफोर्निया जाएंगे किस तरह से रहेंगे क्या करेंगे तो एलिस हेंस ब्रो ने कहा कि मैं आपके एडवांस एजेंट के रूप में कैलिफोर्निया सॉरी सन फ्रांसिस्को जाऊंगी और वहां पर जाकर के आप आप आ रहे हैं इस तरह से न्यूज़पेपर में नोटिस दूंगी थोड़ा सा बड़े लोगों के साथ में बात करूंगी आई विल प्रिपेयर अ वे फॉर यू आप आ रहे हैं तो मैं थोड़ा रास्ता क्लियर करूं वहां पर जाकर के प्रचार प्रसार रहने की व्यवस्था सब कुछ खाने की व्यवस्था कर देती हूं तो इसका भी एक बैकग्राउंड है बहुत सुंदर बैकग्राउंड है कि बाकी जो दो बहने थी व उनको ऐसा था कि ये लि जो है सबसे बड़ी बहन तो वो क्या है ना थोड़ी शाय है व बोलने में व बड़ी ही द्विधा करती है कुछ-कुछ लोगों का नेचर बड़ा ही अग्रेसिव होता है इसमें पुरुष और स्त्री का बात नहीं है मैं खुद बड़ा ही मतलब कोई भी सोशल कन्वेंशन जब होता है सोशल गैदरिंग में बोल ही नहीं आई बिकम टोंग टाइड इंग्लिश शब्द जो है मैं कुछ बोल ही नहीं सकता वो बोलने का मैं हमेशा अवॉइड करता हूं किंतु कोई कोई लोग होते हैं बहुत ही अच्छे से बोल सकते हैं अपनी बात रख सकते हैं देर वेरी आर्टिकुलेट जिनको कहेंगे और वो दे आर वेरी अग्रेसिव आल्सो कि अपना जो टारगेट है अपना जो गोल है अपना एम है उसको वो ये करेंगे उसको वो इंप्लीमेंट करेंगे कैसे भी करके वह अपना काम निकाल लेंगे तो ये काम निकालने की बात थोड़ा सा अग्रेसिव होक के लोगों के साथ में मिलने की बात लोग तो ये सब किसी का टैलेंट होता है तो मेरा बिल्कुल नहीं है मेरा बिल्कुल जीरो है तो मिसेस एलिस हेंस ब्रो का भी ऐसा था वो बड़ी शाय थी डिफिडेंट जिसको इंग्लिश में कहते हैं इंट्रोवर्ट थी तो अभी वो जाएगी स्वामी जी के एडवांस एजेंट के रूप में सैन फ्रांसिस को बहुत मतलब उस समय का क्या कहेंगे अग्रेसिव मॉडर्न सिटी वहां पे ऐसे लोगों का तो काम ही नहीं है और ये एक्चुअली जो मिड सिस्टर्स थी वो वैसे लॉस एंजलिस भी वैसे बड़ ग्रोइंग सिटी था किंतु ये लोग लॉस एंजेलिस में नहीं रह रही थी वे लोग पसडी बोल कर के एक ये था सबर्ट था वहां पे रह रही थी तो सबर्ट तो छोटा सा था शांत सबर्ट था यहां पे वो इंट्रोवर्ट लोग रहते हैं वो अपना काम करते हैं धीरे-धीरे जो भी है वहां से इतने बड़े शहर में जाना स्वामी जी के एडवांस एजेंट के रूप में तो बीच वाली बहन और छोटी बहन इन दोनों ने एलिस हेसब को बड़ा ही डिस्कस किया कि अरे तुम तो हमारे घर में कुछ नहीं बोल पा रही हो अपना पॉइंट ऑफ व्यू नहीं रख पा रही इतने बड़े अग्रेसिव सिटी में बसलिस सिटी में जाकर के स्वामी जी के एडवांस एजेंट के रूप में काम करोगी कैसे तुम्हारे से होने वाला है तो बेचारी एलिस हेंस ब्रो बड़ी ही निराश हो गई थोड़ी डिस्कस हो गई और कुछ बोले दो-तीन दिन के बाद में स्वामी जी ने पूछा कि अरे तो तुमने तो कहा था कि तुम जाने वाली हो तो क्या हुआ तो उसने कहा कि वो मेरी बहन है वो ऐसा कह रही है कि तुम्हारे से होने वाला नहीं है वो बड़ा सिटी है तुम क्या हो तो स्वामी जी ने कहा देखो अपने मन की जो बात है एक बार अपने मन में प्रकट होती है तो हमेशा समझो कि उसको इंप्लीमेंट करना कोई गलत कुछ नहीं है क्योंकि यदि तुम्हारे भीतर में से अंतरात्मा का ये जो गांधी जी कहा करते थे वो स्मॉल इनर वॉइस उ भीतर में से एक आवाज आती है वो आपको बताती है कि तुमको ऐसा करना है तुमको ऐसा करना है ये जो इनर वॉइस है ना दैट शुड बी अवर बिगेस्ट गुरु दैट शुड बी अवर ग्रेटेस्ट गाइडेंस नहीं कि तुम्हारे बहने क्या करती है यदि तुम्हारे मन अंतरात्मा के भीतर से तुमको ऐसा लग रहा है कि तुम जाओगे तो तुम जाओ डू इट एंड इफ यू फेल डजन मैटर एटलीस्ट फॉलो योर इनर वॉइस तो जैसे वैष्णव शास्त्र में कहते हैं अ गुरु कृष्ण वैष्णव तीन दया होले तीन दया होलो किंतु एकर दया बिने जीव चारे छारे खारे गेलो अर्थात कि वैष्णव धर्म गुरु कृष्ण और वैष्णव वैष्णव यानी कि भक्त गुरु यानी कि जिनसे आपने दीक्षा ली है और कृष्ण यानी कि इष्ट तो इष्ट गुरु और भक्त तीनों की महिमा बड़ी गाई गई है तीनों का आपके ऊपर में कृपा हुई उपकार हुआ किंतु एक की दया के बिना आपकी साधना ना सर्वनाश हो गया वो एक क्या आपका मन आपका मन जो है आपके वश में रहे आपको गाइड करे तभी यह गुरु कृष्ण और वैष्णव की कृपा उनके आशीर्वाद फलित होंगे वरना तो एक बहुत ही अच्छी नस्ल का बीज है आपने इस तरह की बंजर जमीन में बोया है कि वो कि बिल्कुल ही इनफर्ट इल है तो क्या फर्क पड़ने वाला वो बीच कभी उसमें से पौधा नहीं निकलेगा किंतु एक बहुत ही नीच नस्ल का बीज है बड़ी ही कॉमन नस्ल का बीज य फर्टाइल जमीन में डाला है तो जमीन की फर्टिलिटी की वजह से बीज वो वटवृक्ष में निकलेगा तो अपने मन की बात सुनो एलिस हेंस ब्र स्वामी जी की बात सुन कर के वहां पे गई वहां पे य होम ऑफ ट्रुथ था वहां पे एक मिसेस एस्पी नोल थी तो वहां पर रहने की व्यवस्था की स्वामी जी आए सैन फ्रांसिस्को में सब लोग मिलकर के फिर कुछ जाहिर में प्रवचन किए किंतु उसके बाद में टर्क स्ट्रीट पे एक फ्लैट लेकर के ये लोग रहने लगे स्वामी जी प्रतिदिन वहां पर क्लास करते थे और मिसेस एलिस हेंस ब्रो थी वो स्वामी जी का खाना पकाया करती थी तो जो हमारा मेन पॉइंट था कि वो स्वामी जी के लिए मटन का जूस बनाती थी तो किस तरह से कि उस मटन जो है उसको दो घंटे तक उबालना होता है दो दो ढाई घंटे तक उबालने से उसका जितना भी प्रोटीन और उसका जो पोषक तत्व है वह पानी में आ जाएगा पानी में मिल जाएगा वो उसका एकदम म नरी शिंग जूस उसका सूप तैयार होगा तो यह सूप स्वामी जी प्रतिदिन खा पीते थे तो उस समय स्वामी जी की हेल्थ भी बहुत अच्छी हो गई थी उस समय देखिए कि जब आप किसी की प्रेम से सेवा करते हैं हृदय से सेवा करते हैं तो जो जिनकी आप सेवा भी करते हैं ना देखेंगे कि उनके चेहरे पे ये आपका जो भाव है ना उनके भीतर में भी प्रकट होगा स्वामी जी के जितने भी फोटोग्राफ आप देखेंगे कैलिफोर्निया के फोटोग्राफ देखिए वो पगड़ी पहन के ऐसा करके खड़े हैं या तो बिना पगड़ी का रेड कोट का जो फोटो है मैं बहुत लंबे समय तक सोचता था कि स्वामी जी की हेल्थ भारत में इतनी खराब थी और कैलिफोर्निया जाकर के इतनी इंप्रूव कैसे हो गई जितने भी कैलिफोर्निया के फोटो देखेंगे स्वामी जी एकदम चेहरे पे एकदम डिवाइन लाइट दिखती है किंतु ये सब रेमसंस पढ़ के पता चलता है कि ये हेंस ब्रो एलिस हेस ब्रो स्वामी जी के लिए खाना पकाती थी एक दो घंटे तक मटन को उबाल थी मटन का जूस मटन का सूप स्वामी जी के लिए बनाती थी स्वामी जी उसको खाते थे और वो रिष्ट पृष्ट होते थे और साथ में ही स्वामी जी एक एक दिन की घटना है कि एलिस हैंस ब्रो ने स्वामी जी को कहा कि स्वामी जी मैं आपका क्लास अटेंड नहीं कर पाऊंगी आज सुबह को मुझे कुछ दूसरे काम की वजह से मुझे आपका सूप बनाने में देरी हो गई तो दो घंटे तक मुझे उबालना पड़ेगा वहां पर खड़े रहना पड़ेगा किचन में तो मैं आपका राज योग का क्लास अटेंड नहीं कर पाऊंगी जिसमें आप ध्यान के बारे में बो बोलते हैं तो स्वामी जी कहते हैं यू डू नॉट हैव टू वरी आई विल मेडिटेटर यू तुमको चिंता करने की जरूरत नहीं है मैं तुम्हारे लिए ध्यान करूंगा और यह रेमसंस मिसेस एलिस हेंस ब्रो ऑलमोस्ट स्वामी जी का वहां पर आगमन हुआ था 1890 के साल में 19999 1890 और यह रेमन सेंस मिसेस एलिस हेंस ब्रो 1930 के आसपास में अशोकानंद जी को बता रही है एलिस कहती है कि आई स्टिल फील एज इफ स्वामी जी इज मेडिटेटिंग फॉर यू मुझे आज भी ऐसा लगता है कि जैसे स्वामी जी मेरे लिए ध्यान कर रहे हैं तो य येने ये आहार की जो इनपुट हम डालते हैं वही आउटपुट वो आता है तो कैलिफोर्निया में स्वामी जी ने जो संदेश दिया स्वामी जी ने जो प्रवचन दिए उसका जो हम पाठ करेंगे स्टडी करेंगे तो हमको लगेगा कि अरे बाप रे क्या पावर है तो यह 100% वैसे स्वामी जी की सक्सेस तो हम स्वामी जी की मेंटल प्रोसेस के ऊपर में ही हम छोड़ेंगे किंतु यह जो भक्त लोग स्वामी जी को प्रेम से जो खिलाते थे उसका भी कुछ अंश उस प्रवचन में आएगा नहीं आएगा ऐसा हो ही नहीं सकता श्रद्धा भक्ति हमेशा इवन अवतार भी होते हैं शिव स्वयं जद शरीर धारण करके पृथ्वी पर आएंगे भक्त की श्रद्धा उनको पोषण देगी ऐसा ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि रिवर्स ऐसा ही इतना ही सही है स्वामी जी लंडन में प्रवचन दे रहे थे फर्स्ट टा सेकंड टाइम जब लंडन में गए थे उस समय की मैं बात कर रहा हूं लंडन में प्रवचन दे रहे थे तो उसी समय ऐसा ही हुआ था ईटी स्टर्डी और मिस मुलर इन दोनों ने लंडन में एक मकान भाड़े लिया और स्वामी जी को वहां पर रखा और वे लोग सब तत्वावधान वे लोग करते थे इट स्टडी और मिसेस ये मिस मलर और स्वामी जी का खाना क्या होगा क्या क्या किस तरह से रहेंगे सब कुछ ये लोग डिटरमाइंड करते थे कितने क्लासेस देंगे तो उस समय यह स्टर्डी क्या था वेजिटेरियन हो गया था और वो बोलता था कि स्वामी जी को भी वेजिटेरियन खाना खाना चाहिए तो एक बार स्वामी जी को बोलना पड़ा भाई मैं जितना मेहनत करता हूं इससे यह तुम्हारा लटिल सूप है और यह बींस है बीन यानी किय वटाना मुझे पता नहीं उसका हिंदी नाम क्या है तो इसके ऊपर में मेरा जीवन निर्वाह नहीं नहीं होने वाला है मुझे मांस खाना ही पड़ेगा तो किंतु देखिए कि ये लोगों के मन में ये द्विधा एक एक तरह का एक संदेह था कि एक साधु होकर के मांस खाता है यह क्या सही है कि नहीं है तो सही में स्वामी जी की हेल्थ जो है लंडन में डिटेट होना शुरू हो गई थी सीरियसली डिटेट होना शुरू हो गई थी जब स्वामी जी हम इंडिया वापस आए तब उनको डायबिटीज वगैरह व उस समय हो गया था तो ये क्या आहार करते हैं उसका इंपॉर्टेंस है नहीं है ऐसा नहीं है व एकाग्रता उसको प्रोसेस करती है किंतु अदर वाइज इंपोर्टेंस अवश्य है इट स्टडी को लेकर के बाद में बहुत कुछ है इट स्टडी बोलता है कि आप बड़े लग्जरी में रहते हैं हमको तो पता ही नहीं कि इंडियन साधु इस तरह की लगजरी में रहते होंगे लग्जरी माने क्या स्वामी जी एक चिरू पीते थे एक पाउंड का ना कि ऐसा कुछ महंगा वाला चिरू पीते थे तो वो बोला कि आप नॉनवेज खाते हैं चिरू पीते हैं तो स्वामी जी ने कहा मैं जो कुछ कर रहा हूं अपने पैसे से कर रहा हूं तुमको तुम्हारे पास से तो मैंने पैसा नहीं मांगा तुमको इसमें पेट में क्या दर्द हो रहा है स्वामी जी ने उसको बड़ा ही डांट करके लेटर लिखा था देखिए कि भक्त की श्रद्धा भक्ति और फिर भक्त का द्वेष ये दोनों ईश्वर को इवन अवतार भी है ना तो उनको अफेक्ट करते हैं ये मैंने स्टडी को ऑन वन हैंड देखे और ये देखिए स्वामी जी के जो फेमस डिसाइल है उनके बारे में तो सबको सब कुछ पता है ये जोसेफाइन मैक्लाउड है सिस्टर निवेदिता है ये शुद्धाओ है स्वामी जी के गुरु भाई है शरद चंद्र चक्रवर्ती है मिसेस ओली बुल है इ इन लोगों के बारे में सब कुछ पता है किंतु ये मिसेस एलिस हेंस ब्रो है मिस्टर एलन है मिसेस एलन है मिस्टर रोड हेमल है ये लोग सब कैलिफोर्निया के डिसाइल थे कैलिफोर्निया की सेकंड विजिट थी ना उसके बारे में बहुत ज्यादा कुछ लोगों को अभी नहीं पता है क्योंकि फर्स्ट टाइम स्वामी जी अमेरिका गए थे तो जब इंडिया वापस आए थे तो अपने डिसाइल्स को मिस्टर एंड मिसेस सेवियर्स वगैरह को इंडिया लेके आए थे तो इंडियन कॉन्शियस में हमारे साहित्य में उनका नाम नाम उल्लेख मिलता है सेकंड विजिट में जो गए और वापस आए तो आए फिर उनको उनका देह त्याग तो हमको पता है 1902 में फोर्थ जुलाई को हो गया था तो सेकंड विजिट के डिसाइल्स के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता खास करके इंडिया में वह जो हमारे साहित्य में इतने नाम उल्लेख नहीं है किंतु इनके बारे में भी पढ़ेंगे ना तो हमको लगेगा कि अरे बाप रे मतलब उनका स्वामी जी के प्रति डेडिकेशन वो एक अलग लेवल का था उनके बारे में हम कभी डिस्कस करेंगे तो स्वामी जी जो कहते हैं कि आहार हवा और पानी के रूप में जो मैं ग्रहण करता हूं वही मेरे कार्य के रूप में प्रकट होता है इट इज ओनली अ क्वेश्चन ऑफ चेंज एंड मेनिफेस्टेशन चेंज एंड मेनिफेस्टेशन ओनली ए क्वेश्चन ये ओनली क्वेश्चन नहीं है हमारा चेंज और मेनिफेस्टेशन और स्वामी जी का चेंज और मेनिफेस्टेशन आसमान जमीन का फर्क है मैं ज्यादा से ज्यादा यहां पर पब्लिकेशन में आकर के काम करूंगा जदी मैं व अपने पंगत में जाकर के आहार करूंगा स्वामी जी ने जो आहार किया है पूरे विश्व में वेदांत का प्रचार किया है चेंज ओनली ए क्वेश्चन ऑफ चेंज इन मैनिफेस्टो सच एन अंडरस्टेटमेंट इंग्लिश में कहते हैं अंडरस्टेटमेंट यानी कि उसको कितना उसका महत्व कम करके उसको दिखा रहे हैं कि सिर्फ च उसका मेनिफेस्टेशन डिफरेंट डिफरेंट होता है वो मेनिफेस्टेशन का ही प्रभाव है आजकल ठाकुर मां स्वामी जी डायरेक्ट डिसाइल या तो जो सेकंड जनरेशन साधुस थे आत्मस्थानंद जी महाराज भूतेशानंद जी महाराज है रंगनाथ नंद जी महाराज या तो फिर आउटसाइड ऑफ रिलीजियस ट्रीम देखिए आइंस्टाइन है न्यूटन है रुथ फोर्ड है फिर ये ओपन हैमर है जस्ट नेम इट के साइंटिस्ट बोलो ना कि आर्टिस्ट बोलो ना कि स्पोर्ट्समैन बोलो की साहित्यकार बोलो अपने अपने क्षेत्र के वो जो बादशाह एक के बाद एक उन्होंने वही हमारी तरह का ही आहार ग्रहण करके उसको किस हद तक ट्रांसफॉर्म ट्रांसम्यूट किया वह हमको पता है इट्स ओनली अ क्वेश्चन ऑफ चेंज एंड मेनिफेस्टेशन सच अ ग्रेट अंडरस्टेटमेंट देयर कैन नॉट बी देयर कैन नॉट बी एडेड इन द इकोनॉमी ऑफ दिस यूनिवर्स वन पार्टिकल ऑफ मैटर और वन फुट पाउंड ऑफ फोर्स नोर कैन वन पार्टिकल ऑफ मैटर और वन फुट पाउंड ऑफ फोर्स बी टेकन आउट बड़ा ही इंपोर्टेंट स्टेटमेंट है पूरे विश्व ब्रह्मांड में एक पार्टिकल भी आप ऐड नहीं कर सकते एनर्जी जिसको कि जूल में मापा जाता है मेजर होता है जूल तो वन सिंगल यूनिट ऑफ एनर्जी आप विश्व ब्रह्मांड में ऐड नहीं कर सकते ना ही कि एक पार्टिकल या एक यूनिट ऑफ एनर्जी आप विश्व ब्रह्मांड में से माइनस कर सकते हैं यह स्वामी जी का यह जो कांसेप्ट है बिल्कुल फिजिक्स की थिरी के ऊपर में व बराबर बना हुआ है थर्मोडायनेमिक्स के अनुसार जिस जो एनर्जी बिग बैंग में प्रकट हुई वही एनर्जी में से हमको पता है आइंस्टाइन का फेमस इक्वेशन e = mc1 अर्थात कि एनर्जी ट्रांसफॉर्म्स इनटू मैटर और मैटर ट्रांसफॉर्म्स इनटू एनर्जी इस इक्वेशन का सबसे बड़ा प्रूफ क्या है तो एटम बॉम है माने थोड़ा सा वन कुछ एटम्स यदि आपस में टकराएंगे और जुड़ जाएंगे आपस में यदि उनका फ्यूजन होगा तो वह जो फ्यूजन बम बनेगा एटम बम बनेगा ट वो कितना पावरफुल है हिरोशिमा नागासाकी में हमने देखा और यदि दो यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसा हैवी एटम है वह सेपरेट होंगे उसके जो न्यूट्रॉनस और प्रोटॉन उसका न्यूक्लि तो वो जो एनर्जी प्रकट होगी फिशन बोम एक्चुअली हिरोशिमा नागासाकी पे फिशन बम फेंका गया था नहीं कि हाइड्रोजन बम तो जो भी है ये न्यूक्लियर वेपन जो है दैट इज द ग्रेटेस्ट डेमोंस्ट्रेट ऑफ आइंस्टाइन थिरी ऑफ रिलेटिविटी कि e इक्वल एमसी स्क्र एनर्जी और मैटर एक दूसरे में कन्वर्ट होते हैं बिग बैंग में एनर्जी प्रकट हुई इतनी प्रचंड एनर्जी प्रकट हुई कि उस प्रचंड एनर्जी में से कुछ-कुछ कन्वर्ट होकर के मैटर में ट्रांसफॉर्म हुई और यही मैटर आज पूरे तारे हैं गैलेक्सी है ग्रह है हम है मनुष्य शरीर है पशु पक्षी है प्राणी है जो भी मैटर है वह बिग बैंग के समय उत्पन्न हुई एनर्जी में से ही कन्वर्ट हो कर के बना है यहां पर स्वामी जी ने दो अलग-अलग उसके बारे में कहा है कि मैटर का एक कण भी आप प्लस या माइनस नहीं कर सकते एनर्जी का वन यूनिट भी प्लस और माइनस नहीं कर सकते आज हम इसी बात को थोड़ा सा आइंस्टाइन के इक्वल्स एसी स्क्वा इक्वेशन को लगा कर के कहेंगे कि मैटर एनर्जी यह जो ड्युअलिटी है वो एक ही है वैसे एक ही य रियलिटी के दो विभिन्न पहलू है दो विभिन्न स्वरूप है तो ये मैटर एनर्जी मैटर एनर्जी का सिंगल यूनिट या सिंगल पार्टिकल भी बिग बैंग के बाद में ऐड नहीं हो सकता और या तो फिर माइनस नहीं हो सकता एनर्जी ट्रांसफॉर्म होती है एनर्जी चली नहीं जाती जैसे कि पेट्रोल है तो पेट्रोल ट्रांसफॉर्म हुआ आपकी स्पीड के रूप में आपके कार्य के रूप में और हीट के रूप में इंजन गर्म होगा तो वह हीट प्रकट होगी तो उसमें ट्रांसफॉर्म होगा वह आएगा या जाएगा नहीं तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु