Transcript
ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद कॉस्मस द माइक्रो कजम जो दो लेक्चर स्वामी जी ने अपने काकड़ी घाट के एक्सपीरियंस के आधार पर दिए थे उसमें पहला था कॉस्मस ी मैक्रो कजम और दूसरा है माइक्रो कजम मैक्रो कजम अर्थात कि यह पूरा विश्व ब्रह्मांड और माइक्रो कजम यानी कि इस ब्रह्मांड के मने एक छोर पे है संपूर्ण विश्व ब्रह्मांड तो उसके दूसरे छोर पे है हम हम इतने छोटे से हैं और यह विश्व ब्रह्मांड इतना बड़ा है हमको लगेगा कि जब यह साइंटिस्ट लोग यह दूरबीन लेकर के टेलिस्कोप लेकर के ब्रह्मांड की खोज करते हैं तो उनको कितना सब कुछ देखता है माने 14 बिलियन लाइट यर्स इस ओर 14 15 बिलियन लाइट यर्स इस ओर इतना सब कुछ दिखता है किंतु केंद्र में जद देखेंगे तो केंद्र में हम ही है अल्टीमेटली आप जितना दूर जाएंगे अपनी खोज में अपने आविष्कार में अपनी डिस्कवरीज में उतना ही आप अपने खुद के नजदीक आते जाएंगे मॉडर्न साइंस इतना सब कुछ डिस्कवरी करने के बाद में आखिर में इस कंक्लूजन पे आया है कि हमारा भी एक रोल है अभी वह यहीं तक आया है इसके आगे वेदांत को ले जाना होगा कि यस अवर रोल इज देयर वी आर दी ऑब्जर्वर्स वी आर दी सब्जेक्ट एंड इन दी अल्टीमेट एनालिसिस यू विल फाइंड दैट ओनली आई एजिस्ट नॉट द यूनिवर्स सिर्फ मेरा ही अस्तित्व है मैं ही सत्य हूं बाकी सब मिथ्या हालांकि जब मैं मैं कहता हूं तो पता चलता है कि दो तरह के में है एक तो है कि अहंकार मिश्रित में और दूसरा है शुद्ध चैतन्य रूपी अहम या तो फिर शुद्ध चैतन्य रूपी आत्मन ये आत्मन और अहम जद देखेंगे तो लिटरेरी मीनिंग दोनों का एक ही होता है सेल्फ किंतु अहम है जिसमें के भीतर में हमारी यह अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश ये जो पंच महा क्लेश है इसके साथ में जुड़े हुए हैं जबकि यह अपना अपनी आत्मन है वो सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह तपस्या तपस्या शोच संतोष स्वाध्याय ईश्वर प्रणन यह सबके आधार पर वो सुसंस्कृत मेरा सही स्वरूप है जिसको कि हम ईश्वर भी कहते हैं ब्रह्मण भी कहते हैं दोनों ही हमारे ही हृदय में विराजमान है हम किसको लेंगे प्रेय श्रेयष मनुष्य मतम मनुष्य मेत हमारे सामने हमेशा दो ऑप्शंस दो चॉइस दो सिलेक्शंस आते रहते हैं यदि आज सुबह को ऐसा हुआ कि एलाराम बज रहा है सुबह को मंगल आरती के लिए जाना है तो मैं कौन सा पाथ सिलेक्ट करूंगा या मैं सोता ही रहूंगा यह सोच कर के कि अरे चलो भाई ठंडी के दिन है थोड़ा सा 1520 मिनट थोड़ा सा और सो भी ले तो भी क्या फर्क पड़ता है और या तो फिर दूसरा बात है कि नहीं भाई हमने तो एक व्रत जैसा लिया है एक निष्ठा पूर्वक हमने यह ठीक किया है कि सुबह को मंगल आरती में जाएंगे ही जाएंगे तो फिर जो भी चाहे कुछ हो जाए भले ही चाहे मुझे जितना ही कष्ट हो जाए मैं ये बिस्तर प से उठूंगा ही उठूंगा यह जो ब्लैंकेट वगैरह जो हमको इतना कंफर्ट देते हैं सर्दी के दिनों में सुबह को इसका मैं त्याग करूंगा ही करूंगा और यह त्याग करने के बाद में मैं मंदिर में जाकर के ठाकुर के सामने बैठूंगा ही बैठूंगा यह जो हार्ड डिसीजन है अपने जीवन में जो हम दिन प्रतिदिन लेते रहते हैं यह चक्रवृद्धि व्याज की तरह वो इसको क्या बोलेंगे मल्टीप्लाइंग इंटरेस्ट की तरह यह बढ़ते ही रहते हैं और फिर बढ़ते बढ़ते या तो हमको स्वर्ग की ओर ले जाएंगे या तो फिर नर्क की ओर ऑफकोर्स यह स्वर्ग और नर्क वेदांत की दृष्टि से देखें तो मेटाफोरिकल है यदि अल्टीमेटली देखेंगे तो पता चलेगा कि नेगेटिव अपने प्रेय मेरे प्रिय डिसीजन जितने भी है हां मैं यह प्रिय कार्य कर रहा हूं मैं यह प्रिय कार्य कर रहा हूं आजकल देखिए कि सभी लोगों को 40 45 पे बहुत सारे लोगों को शुगर हाइपरटेंशन यह सब हो जाता है डायबिटीज है या तो फिर हाई ब्लड प्रेशर है यह लाइफस्टाइल डिसीज एक समय था कि आपको 60 70 80 के बाद में जीवन में दिखाई देते थे आजकल तो यह सब 40 45 इवन 30 की एज में यह सब दिखाई देते हैं कि हां आपका लाइफस्टाइल कैसा हो गया है हमने एक के बाद एक ऐसे डिसीजन लिए हैं कि हमारे जीवन में स्ट्रेस को ही जन्म देते हैं अभी मेरे पास में समय है बहुत सारे लोग ऐसा होता है एक लड़के के साथ मेरी बात हो रही थी तो मैंने उसको कहा कि अच्छा तुम्हारा जॉब का टाइम क्या है तो बोला कि वैसे तो देरी से जाना होता है वो 11 के आसपास जाना होता है तो मैं मैंने उसको पूछा कि सुबह को तुम मेरा क्लास में क्यों नहीं आ सकते तो मेरे पास में तो बात करने के लिए आते रहते हो बीच-बीच में तो क्लास में क्या है कि सिस्टमिकली बात होती है तो वो बोला कि अभी वह रात को देरी से सोने से सुबह को उठने का समय नहीं मिलता तो मैंने कहा ठीक है वोह भी एक बात है किंतु यदि चाहे तो आप डिसीजन अपने जीवन में अपने अपने फायदे के अनुसार ले सकते हैं वो फायदा हम किस चीज को देखते कंफर्ट को फायदे के रूप में दे देखते हैं ना कि फिर ये एक हायर पाथ है अपने जीवन में उसके अनुसार जीते हैं यह तो बड़ी आध्यात्मिक बातें हो गई चलो हम यदि ग्रास रूट लेवल पे ही देखते हैं तो मैंने ऐसे टीचर्स को देखा है अभी कुछ दिन पहले हमारे एक डिवोटा के साथ मेरी बात हो रही थी तो वो कहते हैं कि यह जो डिवोटा है वो हमारे लिटरेचर हमारी किताबें लेकर के गांव-गांव जाते हैं और वो गांव की स्कूल है उसमें थोड़ा सा एक प्रोग्राम करेंगे ठाकुर मा स्वामी जी कोई अच्छी दो-तीन बातें करेंगे और फिर प्रोग्राम के आखिर में बच्चों को कहेंगे कि जो थोड़ा बहुत रुपया है आपके पास में गांव के बच्चों के पास कितना होगा 5 10 ₹ से ज्यादा तो नहीं होगा भले हमारे पास में यह सस्ती किताबें हैं बिल्कुल और उसको भी हम सब्सिडाइज करके 50 पर डिस्काउंट वगैरह में स्कूल में बेचते हैं तो तुम लोग इस किताब को खरीदो तो अभी एक ये डिवटी बता रहे थे एक बार एक गांव में गए देखा कि एक लड़का है उसको पढ़ने की बड़ी इच्छा है किंतु वह बेचारा क्या करेगा तो अभी उसने सोचा कि मुझे यह किताब चाहिए वह किताब ऐसा करके करके वह किताबें लेने लगा अपने हाथ में और यह डिवटी है वह देख रहे हैं कि हां उसकी बातों से उसके एटीट्यूड से लगता है कि उसको पढ़ने की इच्छा है किंतु देख रहे हैं कि वह बेचारा पॉकेट खोल कर के देख रहा है कि पैसा तो नहीं है उसके पास में ज्यादा तो क्या करें तो अभी यह दृश्य एक टीचर भी देख रहे थे जो कि पास में खड़े थे तो ये वॉलंटिली चर को पूछा कि अरे यह तो 00 400 की किताब ले रहा है अपने हाथ में और पैसा तो है नहीं तो अभी क्या करेंगे मैं क्या उसको मना कर दूं कि क्या करूं तो वो टीचर बोलते हैं अरे नहीं एक काम कीजिए उसको लेने दीजिए पैसा मैं दे देता हूं अभी देखिए कि ये डिवटी मुझे कह रहा है कि बड़े लंबे समय से बहुत सारी गांव की स्कूलों में वह जाते रहते हैं और ऐसा नोबिलिटी ऑफ स्पिरिट सहज में देखने को नहीं मिलता कोई टीचर आपको 10 ₹ की चाय भी पिला देगा तो वह याद रखेगा कि हां मैंने इसको ₹10 की चाय पिलाई है ऐसा एटीट्यूड वाले भी मैंने बहुत देखे हैं और ऐसे टीचर भी देखे हैं कि उन्होंने उनको लगता है कि अच्छा हमको लगेगा शहर में बैठे हुए कि अरे यह 200 300 कौन सी बड़ी बात है यह टीचरों का सैलरी तो कितना है पता है 10000 15 200 हज पता नहीं कितना इनको सैलरी पेंशन वगैरह गवर्नमेंट देती है तो थोड़ा 200 300 स्टूडेंट को दे दे तो कौन सी बड़ी बात हो गई किंतु फिर भी यह जमाना जिस तरह का है सेल्फिश का सेल्फ सेंटर्स का उसमें यह छोटी-छोटी बातें भी हमको यह लगती है कि अरे वाह तो ये डिवोटा बोल र है कि मैंने सोचा कि जाकर के टीचर को प्रणाम करूं पेर छू उनके और बोलू कि अरे वाह आपका यह नोबल एटीट्यूड दे करर के मुझे कितना अच्छा लगा ये जमाने में आज आज के युग में ये नोबिलिटी ऑफ एटीट्यूड है ये नोबिलिटी एक हमारी स्वार्थ से थोड़ा सा ऊपर उठ कर के अपने चारों ओर देखने की थोड़ा सा सेल्फ सैक्रिफाइस करके और फिर बात क्या है पता है दो तरह की नोबिलिटी होती है नोबिलिटी बोलो ना कि दो तरह की हेल्पफुलनेस होती है एक तो है कि बड़ी क्रूड तरह की हेल्पफुलनेस होती है मेरे पास में अभी काफी पैसा आ गया है चलो मैं मंदिर में जाकर के थोड़ा बहुत दान दे देता हूं या तो फिर इस महाराज जी के साथ में मेरा अच्छा संबंध है रिलेशन है मैं जाकर के उनको थोड़ा प्रणामी दे देता हूं दैट इज वन काइंड ऑफ नोबिलिटी उसको लेजी नोबिलिटी या तो फिर लेजी सेल्फलेसनेस कहेंगे एक इजी वे आउट है दूसरा है थोड़ा सा डिफिकल्ट तरह का है दूसरा है कि लोगों के साथ में हृदय का एक जिसको कहेंगे रिलेशन तो नहीं कहूंगा मैं कहूंगा एंपैथी दूसरों का मन समझने की क्षमता यह बहुत कम लोगों में होती है किंतु होती है मैंने देखा है अब अब देखिए बच्चा स्कूल से घर आता है थका है य स्कूल में तो उसका स्टडी है उसका वर्क सब कुछ उसको स्कूल में करना होता है सुबह से लेकर के शाम तक का अभी वो घर जब आएगा दौड़ा दौड़ा दफ्तर एक साइड में फेंके और इधर-उधर घर में माने वो दौड़ धाम करेगा चिल्लाएगा वो क्या अपेक्षा रखता है कि उसकी मां सब कुछ छोड़ कर के उसके पीछे लगेगी अरे बेटा कैसे हो स्कूल कैसा गया चलो मैं तुमको दूध पिलाती हूं ये वगैरह तुमको कुछ नाश्ता देती हूं व वो ऐसी ही अपेक्षा करेगा उसको फिर उस समय उसका खुद का ही दिख रहा है किंतु उस समय यदि वो लड़का घर में आकर के यह देखता है कि अरे उसकी मां बेचारी बड़ी मायूस हो कर के बैठी है या तो फिर उसको कोई फिजिकल कष्ट हो रहा है या तो मेंटल कुछ उसको डिप्रेशन में है ये सेंस करना और फिर उसको सोचना कि अच्छा ठीक है मैं ये दफ्तरी सा साइड में एक बार रखता हूं अच्छे से और मां को में एक कप चाय बनाकर करके पिलाता हूं या कॉफी जो भी उसको अच्छा लगता है बच्चे को पता होता है कि मेरी मां को क्या अच्छा लगता है तो यह जो नोबिलिटी ऑफ स्पिरिट है कितना सामान्य चीज है कि दूसरे के मन में क्या चल रहा है उसको सेंस करना और उसको सेंस करके इस तरह से रिस्पांडर रिस्पांस करना ये ए एंपैथी जो होती है यह हम देखेंगे कि बहुत सारे लोग उनका बड़ा ही आप उनके आइडियाज देखेंगे ना तो बड़े ही हाई के आइडियल होंगे हां कि यह जगत में जितना भी पॉवर्टी है यह जितना भी गरीबी है उसके लिए क्या करना चाहिए किस तरह की इकोनॉमिक्स हमको डेवलप करनी चाहिए कि जैसे कि पॉवर्टी रिडक्शन हो किस तरह से य माइक्रो इकोनॉमी और मैक्रो इकोनॉमिक मैनेजमेंट करना चाहिए कि जैसे कि यह लोगों को यह एंप्लॉयमेंट मिल सके ना कि ये सेल्फ हेल्प ग्रुप चला सके ऐसे लोगों का अभाव नहीं है कि वह हायर लेवल पे हायर थॉट्स करते हैं हायर लेवल पे सेल्फलेस होते हैं किंतु ये माइक्रो लेवल पे सेल्फलेस होना यह मैंने खुद के जीवन में देखा है मैं दूसरों की बात नहीं कर रहा मैं खुद की बात कर रहा हूं मैं वैसे बड़े ऊपर ऊपर एकदम हवाहवा में विचार करता हूं कि यह जो राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन है इसके बारे में क्या करना चाहिए क्यों ऐसा बार-बार ऐसा होता है कि युद्ध में महामारी में और सिविल वॉर में कोई भी सिविलाइजेशन नष्ट हो जाती है उसमें आग लग जाती है मानव समाज वहां पर जो रहता है वो बड़े ही कष्ट में डूब जाता है तो व्हाट इज द सोल्यूशन फॉर दिस तो उस फिलोसोफर को पढ़कर लगता है कि रिलीजन इज द फाउंडेशन ऑफ सिविलाइजेशन वो फिर वह ठाकुर महा स्वामी जी को देखते हैं कि वह साधना और तपस्या रिलीजन का अर्थ क्या है तो बात सिर्फ यह नहीं कि मंदिर में जाओ और उत्सव और इवेंट्स में पार्टिसिपेट करो ना कोई विधि कोई व्रत कर दो रिलीजन ट्रूली मींस दिस कल्चर ऑफ हार्ट दिस चेंजिंग ऑफ अवर एटीट्यूड वगैरह वगैरह मैं पढ़ता रहता हूं किंतु फिर भी यह जो माइक्रो एंपैथी है वो मेरे में नहीं है वो मैं इजली सेंस नहीं कर सकता कि सामने वाले के मन में क्या चल रहा है उसको उस तरह से किस तरह से रिस्पांडर है मैंने कुछ-कुछ साधुओं को देखा है वो आपको कंप्लीमेंट देते हैं बड़ा ही इजली आपको बोल दे अरे वाह महाराज इतना अच्छा काम किया तो हम मैं शुरू शुरू में सोचता था अरे ये लोग वैसे ही अपने को इंग्रेस एट करना चाहते हैं उसकी गुड बुक में आना चाहते हैं जैसे कि उनके पास में वो रिटर्न में कुछ काम करवा सके ऐसा भी ऐसा उनका शायद उनके मन के भीतर में ऐसा होगा भी सही किंतु ऐसे किसी का यदि हमको लगता है कि कोई चाहता है कि मुझे कंप्लीमेंट दे क्योंकि मैंने एक अच्छा कार्य किया है तो वह उसकी चाह समझ करके उसको कंप्लीमेंट देना दैट इट सेल्फ इज अ काइंड ऑफ एंपैथी दैट वेरी फ्यू ऑफ अस हैव कल्ट वेटेड इस तरह का लोगों का हृदय समझ कर के लोगों का मन समझ करके हमको उनके उसके अनुसार वर्तन करना है यह एंपैथी हृदय से हृदय का संबंध ये सब दिस आर द साइंस ऑफ स्पिरिचुअल एलिवेटेड बस हमको लगता है कि स्पिरिचुअलिटी का क्या अर्थ हो गया हम लोग क्या ध्रुव की तरह एक पैर पर खड़े रह कर के 1000 साल तक तपस्या करेंगे वो सही में धर्म है ऐसा हो सकता है कि कोई कोई ऐसा कर रहा हो बीच में मैंने एक पिक्चर देखा था एक साधु का एक हाथ ऊपर रख कर के वो पता नहीं कितने सालों से उसने एक हाथ ऊपर रख कर के वो रह रहा है देख देख भी सकते हैं हाथ जो है पूरा सिकुड़ गया है सिर्फ हड्डियां दिखती है व उसमें से यह जो मसल है पूरे एट्रोसिटी क्या एक आशीर्वाद के समान हो गया है कि आपके सामने आएगा तो दो अच्छी बातें आपका मन समझ कर के ऐसी कर देगा कि फट करके अपना मन भी एक हायर लेवल पे एक हायर सूर में बं जाए ऐसा होगा ना कि फिर उसके मन में संशय संदेह द्वेष ईर्षा वही सब होगा आ कर के बैठ के सोचेगा अरे इसके पास में ये ये फैसिलिटी है मेरे पास में कुछ नहीं मैं तो के किस तरह का यह आदमी है भोगी कामी इस तरह का साधु है क्या है यह मने उसको की प्रेजेंस से यह नेगेटिविटी फैलती है कि पॉजिटिविटी फैलती है किसको पता ये आजकल के जो मीडिया के लोभ में पड़े हैं हमको यह बाहर से जो कुछ दिखता है हम बड़े ही प्रभावित हो जाते हैं किंतु अभी भी हमको यह हृदय को सेंस करने की आव एक एक टेक्निक कहो ना कि टेस्ट कहो डेवलप करने की जरूरत है वो टेस्ट करने से ही धीरे-धीरे हमको समझ में आएगा कि कौन सा इंसान आध्यात्मिक रास्ते प कितना आगे बढ़ा है बहुत सारे लोग होते हैं ऐसा बोलेंगे भी नहीं कि हां मैं आध्यात्मिक हूं या स्पिरिचुअल हूं उनको आप कहेंगे कि आपका एटीट्यूड स्पिरिचुअल एटीट्यूड है तो वह एक्सेप्ट ही शायद ना करे वो बोलेगा मैं तो नास्तिक हूं मैं मुझे कोई भगवान पर विश्वास नहीं है मैं आई एम जस्ट डूइंग गुड तो डूइंग गुड इट सेल्फ इज रिकॉग्नाइजिंग दैट देयर इज गॉड इन योर हार्ट यदि गॉड नहीं है तो गुड कभी नहीं होने वाला है दिस रिकॉग्निशन येय हमको फिलोसोफर जो पढ़ाई लिखाई करते हमको पता है बहुत सारे लोग ऐसा बोलते हैं कि ना बस आई वांट टू हेल्प पीपल दैट इज ऑल आई डोंट बिलीव इन एनी रिलीजन और आई डोंट नॉट बिलीव इन एनी पार्टिकुलर गॉड और आई डू नॉट गो टू एनी टेंपल डू नॉट वरी द टेंपल इज एस्टाब्लिशड इन योर ओन हार्ट आपके खुद के हृदय में वह मंदिर में से भगवान आकर के बस चुके हैं यह एंपैथी दूसरों के प्रति सहानुभूति यह होना यह सही सही स्पिरिचुअलिटी का लक्षण है तो यहां पर जो स्वामी जी कहते हैं कि दो बड़े-बड़े अपने सामने क्वेश्चन कहो ना कि इश्यूज कहो एक है कि पूरा विश्व ब्रह्मांड राइज एंड फॉल ऑफ द सिविलाइजेशन इवोल्यूशन यह बिग बैंग से लेकर के आज तक का ये यूनिवर्सल इवोल्यूशन यह एक है एंड ऑन दी अदर हैंड देयर इज द माइक्रो कजम मनुष्य का हृदय हमको लगेगा कि यह पृथ्वी इट सेल्फ मैंने कुछ कुछ फोटोग्राफ दे ये साइंस मैगजीन में यह अपने जितने भी प्लेनेट है उसको वह स्केल मॉडल करके दिखाते हैं तो जो सूरज होता है वह इतना बड़ा होता है फिर उसके पास में बाकी सब ग्रह रखे जाते हैं तो जु जद इतना बड़ा सूरज होगा तो इतना सा जुपिटर और सैटर्न दिखेगा उनको गैस जाइंट कहते हैं तो वो गैस जाइंट की साइज थोड़ी बड़ी रहती है किंतु फिर यह मार्स है अर्थ है यह सब प्लेनेट जब रखेंगे तो इतने इतने दिखाई देंगे इतना बड़ा सूरज है उसमें इसके साइड में इतनी सी पृथ्वी दिखाई देगी अभी हमको पता है कि एक अभी वो साथ में लिखते भी है कि एक सूरज के ऊपर में ना कि 10 लाख पृथ्वी यां ना कि इतनी कुछ पृथ्वी यां वो आप समा सकते हैं इतना बड़ा सूरज है अच्छा तो ये सोलर सिस्टम इट सेल्फ कितना बड़ा है तो सोलर सिस्टम ये गैलेक्सी को देखिए मिल्की वे गैलेक्सी मिल्की वे गैलेक्सी में 100 करोड़ से भी ज्यादा तारे होंगे उसमें एक छोटा सा हमारा सूरज है उसमें कोई स्पेशलिटी भी नहीं है उसके वो सबर्ट में रहता है गैलेक्सी के मिल्की वे गैलेक्सी के कोई स्पेशलिटी नहीं है तो एक 100 करोड़ तारों में से एक है सूरज उसमें से एक छोटी सी पृथ्वी उसमें से एक छोटे से हम हमारा अस्तित्व ही कहां है यदि हम यूनिवर्स के साथ में अपने को स्केल करें तो कहां यूनिवर्स ऑब्जर्वेटरी विरोधा भाषी एक्सट्रीम है किंतु स्वामी जी कहते हैं कि यदि वेदांत की दृष्टि से एक के बाद एक दोनों को देखा जाए जांचा जाए परखा जाए तो एक जगह पर आकर के वह दोनों समाहित हो जाएंगे ईश्वर में से ही बिग बैंग कहो ना कि विश्व ब्रह्मांड का बीज उत्पन्न हुआ है उसी बीज में से कॉस्मो इवोल्व हुआ है और यह कॉस्मो उसी बीज में समाहित हो जाएगा और वो जो डिवाइन सीड है हमारे ही भीतर में है दिस प्रोसेस ऑफ इवोल्यूशन इवोल्यूशन एंड इवोल्यूशन इज इटरनल एंड बोथ गेट टुगेदर एट वन प्लेस जैसे कि अगले लेक्चर में स्वामी जी कहते हैं कि इस डिविह्ली विद द सेम डिविटो है डिविली में सब समाहित हो जाता है और यदि फिर अद्वैत वेदांत की दृष्टि से देखें जो प्रगट उसका स्थिति और उसका विलय यह तीनों ही हमको ब्रह्म मात्र अज्ञान वसत अज्ञान की वजह से दिखते हैं यदि सही सही देखा जाए तो डिविला और कुछ नहीं है तो यह एक प्रिंबल फिर से हम आगे पढ़ना शुरू करते हैं स्वामी जी जो लिखते हैं कि देयर वाज अ रिवर गॉड अ स्काई गॉड अ क्लाउड गॉड अ रेन गॉड एवरीथिंग एक्सटर्नल ऑल ऑफ व्हिच वी नाउ कॉल द पावर्स ऑफ नेचर बिम मेटामिनडी मैसेंजर्स हमारी इंद्रिया जिस क्षण एक्टिवेट हुई आजकी आज की मॉडर्न लैंग्वेज यदि थोड़ा सा यूज करें तो इंद्रियां हमारी सेंसेस जिस क्षण एक्टिवेट हुई हमने बाहर की ओर देखना बाहर के विश्व को समझने का प्रयत्न किया और जो हमारी सबसे पहली समझ थी टू मेक द वर्ल्ड साधारण तः दौड़ता रहता है तो यह सब देवताओं का भी ऐसा होगा बस वही एक बात है कि हमारी इंद्रिया जितना भोग करने को सक्षम है उनकी इंद्रिया इससे भी लाखों गुना भोग करने को सक्षम है वही एक ह्यूमन बट सुपर ह्यूमन ये आज वेस्टर्न सोसाइटी में ये एक फिलोसोफर था जर्मन फिलोसोफर में शोपन होवर ना कि क्या मैं उसका एग्जैक्ट नाम भूल गया वो सुपर ह्यूमन की सुपरमैन की कल्पना करता है कि क्या है कि वो एक्चुअली क्या था उसका बैक स्टोरी कि वो फिजिकली बड़ा वीक था और आईसाइट भी उसकी थोड़ी वीक थी तो अभी उस उस समय की जो जर्मन सोसाइटी थी बड़ी मार्शल सोसाइटी थी अभी उसी मार्शल सोसाइटी में से तो आखिर में य नाजिम और हिटलर आया तो उस समय 1850 ना कि उसके आसपास की कुछ बात है यह जर्मन फिलोसोफर वो वो एक रास्ते प खड़े-खड़े परेड देख रहा सब सोल्जर कैसे फिजिकली स्ट्रांग है इतने अच्छे से वो ड्रेस पहन करके यूनिफॉर्म पहन कर के वो परेड कर रहे हैं तो यह जो एक फिजिकल मेनिफेस्टेशन ऑफ स्ट्रेंथ है ना उससे वो बड़ा ही प्रभावित हो गया फिर वोह लिखता है सुपरमैन की कल्पना करके मनुष्य का जो लाइफ है ना वो क्या है कि हमेशा एक सुपरमैन चाहता है मने ही ऑलवेज इज अ सर्च ऑफ सम सॉर्ट ऑफ सेवियर कि हां एक सुपरमैन आएगा और फिर यह समाज के जितने भी यह दूषण है जितने भी यह क्या कहेंगे कि इल से इवल से उसका वो उसको नष्ट कर देगा उसका विनाश कर देगा तो वही सुपरमैन में से फिर बाद में जाकर के सुपर हीरोज आज वो जो कॉमिक्स है वो चालू हुआ तो ये मनुष्य हमेशा यह सोचता रहता है एक ऐसा सुपरमैन एक ऐसा सुपर ह्यूमन मनुष्य के जैसे ही गुण धर्म हो किंतु उसकी इंद्रियां हमारे से 100 गुना ज्यादा सक्षम हो पावरफुल हो फिजिकल स्ट्रेंथ उसका हमारे से 100 गुना ज्यादा हो लाखों गुना ज्यादा हो जो कि हम जो काम करना चाहते हमारे जो डिजायर्स है वही डिजायर को वो बहुत ज्यादा मल्टीप्लाई करके वोह अप्लाई कर सके एंथ्रोपोमेट्री परर एंड डीपर दिस एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशंस फेल टू सेटिस्फाई द ह्यूमन माइंड एंड फाइनली द एनर्जी टर्न इनवर्ट एंड द क्वेश्चन वा आस्क ऑफ मैनस ओन सोल यह जैसे ही हम ज्यादा ज्यादा करके इस एक्सटर्नल वर्ल्ड को बाह्य प्रकृति का एनालिसिस विश्लेषण करते गए उतना ही हमको पता चला कि मनुष्य के गुणधर्म इस प्रकृति के ऊपर में हमने आरोपित किए हैं उससे मुझे कोई सेटिस्फेक्शन इंटेलेक्चुअल फिलोसॉफिकल सेटिस्फेक्शन नहीं हो रहा है देयर मस्ट बी समथिंग मोर टू दिस एक्सटर्नल वर्ल्ड तो धीरे-धीरे करके यह बात हमने पिछले लेक्चर में भी स्वामी जी ने कही थी प्राकृतिक सौंदर्य और फिजिकल सिक्योरिटी यह दोनों भारतवर्ष में थे तो यह हिमालय हिंदू कुष ये चारों ओर के समुंदर भारत को उस समय सेफ रखे हुए थे बाद में तो ये खैबर पास से यह सब अटैकर्स आना शुरू हुए और फिर सी और स्टीम बोट की वजह से वही समुंदर हमारे लिए ओपन हो गया अटैक करने के लिए किंतु उस समय में आज से 100 हज साल कि जितना भी हो हम देख सकते हैं कि वह पहाड़ और समुंदर बहुत बड़ी नेचुरल बैरियर्स थी और एक फिजिकल सिक्योरिटी था एक प्राकृतिक सौंदर्य भी था तो धीरे-धीरे करके कुछ लोगों का मन जिनको कि हम आज ऋषि मुनियों के नाम से पहचानते हैं उनका मन अंतर्मुखी बाहर में जो दिखता है उससे मुझे सेटिस्फेक्शन नहीं है उसके ऊपर में जो मैं मनुष्य के गुणध आरोपित कर रहा हूं वह मुझे नहीं लगता कि यह ठीक है तो फिर इससे बियोंड क्या है तो बियोंड जाकर के जितना दूर जाते जाएंगे इतना ही वह अपने पास में पास में आते गए और आखिर में हमारे हृदय की और वो मुड़े हमारे भीतर में जो आत्मन है जो आत्मन शब्द या तो आत्मन का कांसेप्ट तो धीरे-धीरे डेवलप होता है किंतु यह जो कॉन्शसनेस है अंतःकरण जो है मन बुद्धि चित्त और अहंकार का बना ना हुआ वो एक्चुअली क्या है मेरे यह जो ये जो हम एनालास करते हैं ना कि मुझे किसी पर गुस्सा आ रहा है इसका अर्थ यह नहीं कि उसने मेरे साथ में कुछ गलत किया है मेरे मन में क्रोध बोलकर के एक अवगुण है और इसका सोल्यूशन यह नहीं है कि जिसके ऊपर में मुझे गुस्सा आ रहा है उसका मैं मर्डर कर दूं या तो फिर मैं उसकी हत्या कर दूं सॉल्यूशन यह है कि मेरे भीतर में क्रोध बोलकर के जो अवगुण है उसका मैं विनाश कर ये राक्षस बाहर नहीं भीतर में है ये जो अंत मुख होने की प्रक्रिया ऐसा नहीं है कि जैसा भीतर में देखा वैसे ही सीधी आत्मन दिख गई ऐसा होने वाला नहीं है बहुत सारी कठिनाइयों में से वो जो ऑब्स्ट कल कोर्स जो होते हैं ना वो आप वो रिले रेस में देखते हैं कि एक बैरियर खड़ा कर देते हैं वो जो ऐसे ही एक रनिंग एक होता है कंपटीशन फिर एक ऑब्स्ट कल कोर्स होता है रास्ते में बैरियर खड़ी की होती है और जो रनर्स होते हैं उसके ऊपर में से जंप लगा कर के जाते हैं तो ये भीतर में बहुत लंबा ऑब्स्ट कल कोर्स है यदि आपको बाहर के जगत में सक्सेसफुल होना है धनपति होना है या तो ख्यात नाम होना है पॉपुलर होना है फेमस होना है वो शायद फिर भी अभी इजी है यह हम लोग बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट को देखते हैं आजकल के टेक सीईओ को देखते हैं या तो फिर ये सेलिब्रिटी साइंटिस्ट को देखते हैं नील डिग्रास टाइसन वो एक है अमेरिका में ऐसे सेलिब्रिटी साइंटिस्ट को देखते हैं तो हमको लगता है कि हम भी उनके जैसे हो जाए तो इतना आसान नहीं है ये जो क्रिकेटर्स है उनका चारों और अभी वह उनका पिक्चर्स उनके फोटोग्राफ्स देखते हैं तो वैसे ही वह नेशनल नेशनल टीम में सिलेक्ट नहीं हुए हैं व कितना ही प्रैक्टिस किए हैं तब कहीं जाकर के उनका सिलेक्शन होता है फिजिकल फिटनेस की टॉप उसकी चरम सीमा पर बैठना होगा तब कहीं जाकर के इंडियन नेशनल टीम में आपका सिलेक्शन होगा तो वो भी फिर भी सही मतलब अची वेबल है किंतु भीतर का ये जो ऑब्स्ट कल कोर्स है भीतर की ये जो अंतराय है उसका उसको क्रॉस करके उसको अपने कंट्रोल में लाकर के आत्मन का दर्शन करना साक्षात्कार करना वह उससे भी ज्यादा डिफिकल्ट है एक तरह से डिफिकल्ट है एक तरह से इजी है जद ठाकुर महा स्वामी जी का लिटरेचर जैसे मैंने कल कहा था अपनी किताबें अपनी किताबों में एक इस तरह का पावर है मैंने खुद ने अनुभव किया है 1015 मिनट अपनी किताबें पढ़ता हूं स्मृति कथा फिलोसोफी नहीं स्वामी जी को नहीं ने डायरेक्ट बाकी सब डायरेक्ट डिसाइल को तो मां की खास करके मां की स्मृति कथाए बहुत ठाकुर की कृपा है कि मां की बहुत सारी स्मृति कथाएं हैं ये जो मायर पद प्रांत हैं मातृ चरण है मायर कथा है श्री मां ओ जयराम बाटी है तो बहुत सुंदर-सुंदर स्मृति कथाओं का कलेक्शन है अपने पास में वोह पढ़ने से मन सहज शांत हो जाता है किंतु वो भी एक बात है कि मन को शांत करना और आखिर में अल्टीमेटली आत्म साक्षात्कार करना उसमें भी बहुत सारे लेवल्स का डिफरेंस है किंतु फिर भी प्रैक्टिस मेक्स परफेक्ट यदि आप प्रैक्टिस करके नेशनल क्रिकेट टीम में आपका सिलेक्शन हो सकता है तो प्रैक्टिस करके आत्मसाक्षात्कार क्यों नहीं हो सकता सब कुछ संभव है तो ये हम जितना ही आगे जाते हैं उतना ही भीतर में मुड़ते हैं स्वामी जी का जो एनालिसिस है द क्वेश्चन वाज आस्ड ऑफ मेनस ओन सोल अभी यहां पर देखिए कि जो स्वामी जी यहां पर सोल शब्द यूज करते हैं वो मुझे नहीं लगता कि वेदांत में जो आत्मन शब्द है उसको वह रेफर कर रहे हैं यदि हम कहेंगे कि मैं कौन हूं कहां से आया हूं कहां से जा रहा हूं तो बेसिकली हम अपना यह जो अहंकार है या तो यह जो कॉन्शसनेस है अंतःकरण है उसी को बेसिकली हम रेफर करते हैं जो कि सभी तरह के दुर्विन से कु विचारों से भरा हुआ है इसको क्रॉस करके फिर तो आखिर में आपका मेरा सही स्वरूप क्या है उसको प्राप्त करना है फ्रॉम द मैक्रो कजम द क्वेश्चन वाज रिफ्लेक्टेड बैक टू द माइक्रो कजम बड़ा ही सुंदर एक स्टेटमेंट है बाहर में जाकर के रिफ्लेक्ट माने आप जद यहां पर एक मिरर है मिरर के ऊपर में लाइट फेंकें तो सीधा आपके मुंह पर लाइट चलाएगा माने वो आपका इंक्वायरी जैसे बाहर जा रहा था जितना बाहर जा रहा था फ एक पॉइंट ऐसा आया कि इंक्वायरी रिफ्लेक्टेड बैक अपॉन अवर सेल्फ जैसे कि एक कॉस्मिक मिरर है ना कि वहां पर लगकर के इंक्वायरी रिफ्लेक्टेड बैक अपॉन अस फ्रॉम द मैक्रो रिफ्लेक्टेड टू द इंटरनल फ्रॉम एनालाइजिंग द एक्सटर्नल नेचर मैन इज लेड टू एनालाइज द इंटरनल दिस क्वेश्चनिंग ऑफ द इंटरनल मेन कम्स विथ हायर स्टेट ऑफ सिविलाइजेशन विथ डीपर इनसाइट इनटू नेचर विथ हायर स्टेट ऑफ ग्रोथ यह बहुत बड़ा स्टेटमेंट है और इसके बारे में हम थोड़ा सा चर्चा कल करेंगे आज यही तक ओ शांति शांति शांति श्री राम कृष्ण