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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda English & Hindi 3 May 2023

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सो टीचिंग सो स्वामी विवेकानंद शेयरिंग इतना फाउंटेन ऑफ जो नॉलेज डी सिंबल्स डी इलस्ट्रेशन डी मिलेनियम एक्जिस्ट ऑलरेडी पर ठोस हो फाइंड आईटी वे हैव लास्ट ोरसेल्वेस और दें डी वर्ल्ड इसे लास्ट सो ओके इस स्वामी जी सेड यस्टरडे डेट दिस ईटरनल म्यूजिक इस कंटीन्यूअस सिंगिंग इनसाइड ओवर हार्ट सेइंग सच्चिदानंद सच्चिदानंद दिस डी से थिंक डेट ठाकुर अलसो डेवलप इन कथामृत और वे अलसो सी स्वामीजी डेवलप्ड हर नॉलेज यू वांट तू गेन आईटी इस देवर इनसाइड उस ऑलरेडी नीड तू डू फॉक्स और मन 29 पर्टिकुलर थीम पर्टिकुलर इश्यूज थे वांट तू एक्सप्लोर और डी नेचर बिल रिवील इट्स सीक्रेट और दिस गोस ऑन पर बोथ टाइप्स ऑफ फैक्ट्स और बोथ टाइप्स ऑफ लर्निंग देवर इसे एन स्पिरिचुअल लर्निंग और डी रीजंस साइंटिफिक लर्निंग नेचुरल लर्निंग सपोज आईएफ आई वांट तू सॉल्व डी प्रॉब्लम ऑफ से हो तू डेवलप एन सॉफ्टवेयर दें आई नीड तू फॉक्स मी मन अपोनेंट डी मोर आई बिल फॉक्स डी मोर आईटी बिल गिव मी मोर और मोर क्रिएटिव इतिहास तू एक्सप्लोर और तू अंडरस्टैंड डायनामिक ऑफ सॉफ्टवेयर क्रिएशन डी अंडरस्टैंडिंग ऑफ डी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और डी हो डी यूजर्स पर होम आई एम डेवलपिंग दिस सॉफ्टवेयर और इनसाइड इन डी रूसे केसेस और इनसाइड इन दिस साइकोलॉजी ऑफ डी यूजर्स सो दिस इस हो एन सी इन इंडिया वे हैव सीन वन थिंक डेट ऑन वन हैंड क्लेम डेट वे हैव डेवलप योग और वे हैव डेवलप मेडिटेशन और दिस आर डी तू मोस्ट पावरफुल टूल्स वन टूल ऑफ कोर्स मेडिटेशन इसे एन पार्ट ऑफ योग सो आईएफ आई मे उसे योग इन जनरल डी वर्ल्ड योग इन जनरल तू दिनो ओल्ड टाइप्स ऑफ स्पिरिचुअल साधना मेड बी कर्मयोग विज्ञान आयोग भी भक्ति योग मेट भी राज योग डेट इस एन मेडिटेटिव प्रैक्टिस आईएफ आई में उसे डी शब्द योग तू दिनो जो टाइप्स ऑफ स्पिरिचुअल प्रैक्टिस दें वे इंडियन पावरफुल टूल तू डिसिप्लिन अवर मन और तू एक्सपेंड अवर क्रिएटिविटी बट व्हाट हैपेंस वे सी टुडे डेट एवर साइंस डी रेनेसा एवर साइंस 13th 14th सेंचुरी देवर इस एन एक्सप्लोजन ऑफ लर्निंग इन डी वेस्टर्न सोसाइटी वे सी डेट वेस्टर्न साइंटिस्ट वेस्टर्न फिलॉस्फर्स वेस्टर्न फिजी सिस्ट वेस्टर्न कॉस्मोलॉजी वेस्टर्न मैथमेटिशियन डी वे दे हैव एक्सपेंडेड डी बाउंड्रीज एंटी डी बाउंड्रीज ऑफ ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग बाउंड्रीज ऑफ लर्निंग अबाउट अवर नेचर आईटी इस सो वंडरफुल और डी फ्रूट ऑफ दिस डेवलपमेंट इन साइंस और टेक्नोलॉजी वे सी एवरी दे अराउंड स टुडे वे नो डेट देवर बिन नो ग्रीन रिवॉल्यूशन हिद देवर बिन नो हाइब्रिड से फूड अवेलेबल पर अवर सोसाइटी दें आईटी वुड हैव बिन इंपॉसिबल पर इंडिया तू सस्टेन डी पापुलेशन ऑफ 1.4 बिलियन डेट वे हैव रिस्क टुडे टुडे इंडिया इसे डी मोस्ट पॉपुलर नेशन और हो आर वे एबल तू फीड दिस में पीपल देवर वज डी टाइम राइट आफ्टर इंडिपेंडेंस डेट यू नो बिफोर इंडिपेंडेंस डॉक्टर से मिंस सो मिनी फीमेल इन इंडिया आउट और स्पेशली इन सेकंड वर्ल्ड वार वे हैव सीन हो चर्चिल डायवर्टेड फूड ग्रेस विच यू आर मीन पर इंडियन पीपल तू डी सोल्जर व फाइटिंग इन डी सेकंड वर्ल्ड वार डेट कॉस्ट आर्टिफिशियल फमेज सो देवर नेचुरल फेमाइनस और देवर वेयर आर्टिफिशियल फेमिंस कॉज्ड बाय डी एक्शन सो ब्रिटिश गवर्नमेंट सो बोथ ऑफ दिस किड ऑफ फेमिंस वेयर देवर और आफ्टर इंडिपेंडेंस वे हैव सीन डेट एवं था वे स्टार्टड इंक्रीस इन डी फूड ग्रीन प्रोडक्शन इन इंडिया सफिशिएंट और वे हेड तू रिलाइज अपन अमेरिकन एड अमेरिकन आ एड इन फूड ग्रेट बट वे हैव सीन एवर साइंस डी ग्रीन रिवॉल्यूशन बटर क्वालिटी ऑफ दिस धन वे हैव सीन डी वे वे हैव इंक्रीस ओवर प्रोडक्शन ऑफ फूड ग्रीन डेट नो वे आर नेट सरप्लस कंट्री एक्सपोर्ट फूड ग्रीन वे डू नोट आई मीन डी डेज ऑफ फैमिन आर पर फ्लाइंग और गवर्नमेंट हज तू डंप सम ऑफ दिस ग्रेन इन ऑर्डर तू प्रिजर्व डी क्वालिटी ऑफ आईटी वे आर टुडे नेट एक्सपोर्टर ऑफ डी ग्रेट फ्रॉम डी डेज व्हेन डियर फेमाइनस तू डी डेज व्हेन वे यूज्ड तू व्हेन वे यूज्ड तू डिपेंड अपन डी अमेरिकन एट तू धी टेप व्हेन वे आर इन नेट एक्सपोर्टर वे हैव सीन दिस जर्नी इस पॉसिबल ओनली बिकॉज़ ऑफ दिस साइंटिफिक डेवलपमेंट डी वे वे हैव हार्नेस डी इरिगेशन सिस्टम डी वे वे हैव ट्रेड ओवर फार्मर्स तू उसे दिस टूल्स दिस मार्केट प्लेस तो उसे दिस फाइनेंशियल ऑफ रोड्स और ब्रिज और दिस टेलीकम्युनिकेशंस जो ऑफ दिस हेल्प इंडिया तू विकम सेल्फ सफिशिएंट इन अवर इंट्रोडक्शन और अलसो से इन डी इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बट वे हैव तू वे शुड नो डेट हूं क्रीटेड थिस बैकड्राप हूं क्रीटेड हूं डिस्कवर्ड हूं क्रिएट हूं हूं इन्नोवेट जो दिस इंडस्ट्रियल मैथर्ड और टेक्नोलॉजी आईटी वज डी हैंडफुल ऑफ साइंटिस्ट फ्रॉम डी वेस्टर्न वर्ल्ड टुडे एवं टुडे एवं आफ्टर वे आर सेल्फ सफिशिएंट इन फूड ग्रेट एवं इंडिया इसे इकोनॉमिकली मिल्रिटली सीकर योर बॉर्डर्स आर बटर डी प्रोटेक्टेड दें देवर एवर बिफोर एवं टुडे आफ्टर अटेनिंग टुडे वे आर डी फिफ्थ डी लार्जेस्ट इकोनामी इन डी वर्ल्ड वे आर डी मोस्ट पॉपुलर नेशन ऑन डी वर्ल्ड इस फाइट ऑफ डेट अवार्ड स्टूडेंट ओवरस्कॉलर्स ओवर साइंटिस्ट आर फॉर बिहाइंड वर्ल्ड स्टैंडर्ड व्हेन आईटी कॉम तू इनोवेशन और डिस्कवरी आई डू नोट नो वही आईटी इस टुडे वे आर वेरी प्राउड ऑफ डी अटेनमेंट्स अचीवमेंट्स ऑफ इसरो बट वे हैव तू अंडरस्टैंड डेट नासा और वेस्टर्न साइंटिस्ट डेवलप जो दिस टेक्नोलॉजी इसे सेंडिंग रॉकेट इन दिस स्पेस यू वांट तू डी मून यू वांट तू डी मार्स दे हैव डेवलप्ड जो डी टेक्नोलॉजी 56 इयर्स एगो वे आर सिंपली रीकैप वे आर सिंपली रिचिंग थे वे आर गेटिंग एवं इन डी कंपटीशन वे आर नोट गेटिंग अहेड ऑफ डेम वे हवन दान एनीथिंग विच नासा हज और दान और वेस्टर्न साइंटिस्ट एवं रॉकेट आर्कीपर तू बिल्ड दें देवर रॉकेट आर बट डेट इस डी बिकॉज़ डी लेबर कॉस्ट और मटेरियल कॉस्ट इन इंडिया साइंटिफिक डिस्कवरी और इंडस्ट्री रियल इनोवेशन टेक्नोलॉजी एक उन वन हेड वे हैव डेवलप डी साइंस ऑफ योग बाय यूटिलाइजिंग विच वे कैन फॉक्स अवर मन और क्रिएट एन एक्सप्लोजन इन अवर क्रिएटिविटी ऑन वन हैंड वे हैव डेवलप्ड योग विच कैन डू अदर हैंड ओवर स्टूडेंट ओवर स्कॉलर्स ओवर साइंटिस्ट यू सी डेट आई इनोवेशन और डिस्कवरी लैंडस्केप इन इंडिया आईटी इस डिप्रेसिंग में ऑफ डी स्कॉलर्स मनी ऑफ डी साइंटिस्ट राइट इन जर्नल्स विच आर नोट प्रॉपर्ली पियर रिव्यूज जर्नल्स डी लिटरेरी जर्नल्स दिस पेपर्स विच आर पब्लिश्ड इन डेम इंडियन जर्नल्स हैव नो वैल्यू ऑन इंटरनेशनल मार्केट बिकॉज़ इंडियन एचडी इस हैव वेरी लिटिल वैल्यू बिकॉज़ में ऑफ डी एचडी इस वे सी डेट दिस सिंपली कॉपी क फ्रॉम हर तू डर दिस प्लेजर इन डी वेस्ट और देवर इन इंडिया यस ठोस ऑन डी टॉप टायर टॉप वन परसेंट ऑफ ओवर बेस्ट माइंड्स दे कैन देवर आर डर इन इंडिया दे आर देवर बट दे हैव तू को तू डी वेस्ट इन ऑर्डर तू फाइंड एन बटर आउटलेट पर डी टैलेंटेड वे सी डी सुंदर पीछे सुंदर पीछे और सब दिस इस सीईओ ऑफ सेकंड हैंडल ऑफ माइक्रोसॉफ्ट और में आधार लाइक डेम दे हैव तू को तू वेस्टर्न कंट्रीज इन ऑर्डर सो दे टैलेंट कैन बी अप्रिशिएटिड इन इंडिया देवर इस नेपोटिज्म इन साइंटिफिक इन एचडी प्रोग्राम देवर इस नोट इनफ अटेंशन जिवन तू प्रोड्यूस ओरिजिनल इतिहास सो वही इस आईटी डेट ऑन वन हैंड वे हैव डी योग और ऑन दी अदर हैंड वे आर नोट एबल तू यूटिलाइज डी पावर ऑफ दिस योग दिस इस वन क्वेश्चन आई हैव नो आंसर बट वे सी अमेरिकंस वे एवर साइंस डी टाइम ऑफ स्वामी विवेकानंद स्वामी जी हिट सी डी वे दिस पीपल आर रिचिंग आते डी पिनेकल ऑफ मटेरियल प्रोस्पेरिटी मटेरियल डेवलपमेंट ओनली वे फॉरवर्ड फ्रॉम डेम पर डेम फ्रॉम डेट पॉइंट इसे योग इन डेट इसे वही स्वामीजी प्रीच योग इन डी वेस्ट बट व्हेन ही कम तू इंडिया ही अंडरस्टूड डेट इसे सच डिस्पर्सिंग लेवल ऑफ पावर्टी इन इंडिया गेट प्रीचिंग योग बिल नोट हेल्प आईटी बिल हैव तू वेट पर अनदर 100 200 इयर्स पर नो वे बिल हैव तू प्रीच कर्म योग डेट एन निष्काम सर्विस तू डी सफरिंग ह्यूमैनिटी वंस दिस पीपल रिचेस सर्टेन लेवल ओनली दें को तू सम हायर टाइप ऑफ थिंकिंग एन सिस्टर निवेदिता ने एक बार

स्वामी विवेकानन्द

स्वामी जी को कहा था की कितना अच्छा है की भारत में कोई चोरी नहीं करता तो स्वामी जी ने कहा काश कोई चोर होता काश कोई चोरी करता क्यों ऐसा कहा स्वामी जी ने चोरी करना बटर है उन्हें स्वामी जी ने एक बार कहा था की आईटी इस बटर तू प्ले फुटबॉल जेंट तू रीड गीता गीता पढ़ने से अच्छा है की फुटबॉल खेलो तो वो तो चलो फिर भी हम समझ सकते हैं अभी स्वामी जी कहते हैं चोरी करना भी अच्छा है ये क्या का रहे हैं किंतु उन्होंने देखा की भारत में जो तमस है वो तमस इतना गहरा है तमस इतना दीप है की यदि हम तमस में से राजस्व नहीं जाएंगे तो राजस में से सातों में जान की बात तो बहुत दूर की र जाति है तो सबसे पहले तो हमको वो जो है की वो एक राजस एक प्रचंड कर्म एक्टिविटी को हमको जागृत करना है तभी तो कहानी ये उद्योग पर वह महाभारत में है ना उद्योग पर हुआ तो ऐसे ही हमको भारत में ऐसे एक उद्योग पाव को एक उसको उजागर करना है जिससे की क्या होगा की हमारी इंडस्ट्रीज है हमारी यह जो साइंटिफिक लेंस के जो है उसको उसमें ज्यादा से ज्यादा इन्नोवेशंस होते ज्यादा से ज्यादा डिस्कवरी होते रहे इसरो को सिर्फ नाच नासा के साथ में केचप नहीं करना है ऐसा नहीं की नासा ने जो किया आज से 60 साल पहले वो हम आज करके दिखा रहे और वे आर वेरी प्राउड ऑफ अवर सेल सिर्फ इतना नहीं अभी नासा ने तो क्या है की मून पे आदमी भेजो था एस्ट्रोनॉट को भेजें थे वे शुड बी डी फर्स्ट तू सेंड एस्ट्रोनॉट ऑन ए प्लेनेट डेट इस एन मार्स पहले सबसे पहले एक एक्स्ट्रा टेरेस्टेरियल बॉडी जिसको कहा जाएगा मून उसके ऊपर में एस्ट्रोनॉट भेजो गया तो किंतु वो तो क्या है की सैटेलाइट है अभी प्लेनेट पे तो नहीं सैटेलाइट और प्लेनेट का डिफरेंस पता है ना सैटेलाइट अर्थात की हमारा चंद जो है वो हमारा सैटेलाइट है इसको की मून कहते हैं और फिर प्लेनेट है प्लेनेट बहुत एक दूर राहत है और उसका एक उसकी साइज भी बहुत ज्यादा रहती है तो प्लेनेट दूसरे प्लेनेट पे एक एस्ट्रोनॉट को भेजना डेट इसे पर मोर चैलेंजिंग टर्म्स ऑफ प्रिजर्विंग डर 2 साल का जर्नी रहेगा तो 2 साल आकाश में दो-तीन लोग एस्ट्रोनॉट रहेंगे ज्यादा से ज्यादा तो वे लोग साइकोलॉजी कल क्या उनके ऊपर में असर होगा की कंप्लीट सिक्लूजन में रहना है फिर दो-तीन लोग रहते हैं इतना लंबा टाइम साथ में बिना किसी एक्सटर्नल कांटेक्ट तो फिर क्या एक साइकोलॉजिकल टेंशन बिल्ड अप होता है झगड़ा होना शुरू हो जाता है छोटी-छोटी चीजों को लेकर के पृथ्वी के साथ में सब समय वो कम्युनिकेशन कांस्टेंट नहीं बना राहत तो चलिए कोई मां लीजिए की फॉल्ट ए गया किसी इक्विपमेंट में तो बस उनके लिए एक ही उपाय है डेट इस डेथ यह जो मूल मिशन अपोलो मिशन जो थे अपोलो मिशन में जो एस्ट्रोनॉट चंद पर जाते थे तो उन लोगों को एक साइनाइड का कैप्सूल दिया राहत था यह बात बहुत बाद में रिबेल हुई थी मैंने इसके बड़े में एक आर्टिकल पढ़ा था यदि यदि वहां पर आपका वो रॉकेट है या तो फिर जो शिव है जो आपको चंद पर ले जाता है वो कहानी पर बिगड़ गया तो फिर उसको तो रेस्क्यू का कोई उपाय ही नहीं है यहां पे तो जैसे हम लोग पेपर में पढ़ने हैं ना की चलो वो एवरेस्ट पे गए कुछ लोग अभी रिसेंटली हुआ था की एक पहाड़ पे कुछ लोग गए और फिर पता चला की बर्फ के तूफान में फैंस गए हैं तो आर्मी वाले क्या करेंगे हेलीकॉप्टर लेकर के जाएंगे और उसको पकड़ के ले आएंगे वापस फिर कोई समुद्र में यदि ये जो है सबमरीन है या तो फिर शिव है वो यदि ब्रेकडाउन हो जाति है तो फिर से वो हेलीकॉप्टर से जाकर के रेस्क्यू करेंगे किंतु यदि अवकाश में स्पेसशिप बिगड़ जाता है तो रेस्क्यू का कोई उपाय मैन रेयरली पॉसिबल है ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है तो जो एस्ट्रोनॉट जिनको की चंद पर भेजो गया था उनको एक साइनाइड का कैप्सूल दिया था एक सुसाइड पल जिसको बोलना है की एक गली का लो तो आप मा जाओगे शांति से मारोगे वरना देखो की आप आकाश में ड्रिफ्ट हो रहे हैं चारों और कुछ नहीं है और अकेले बैठे हैं तो कितना वो आपके मन पे किस तरह का एक हॉरिबल इफेक्ट वो क्रिएट करेगा आदमी पागल हो जाएगा बिना खाए बिना पिए और ऑक्सीजन रन आउट हो जाएगा तो जो मृत्यु होगी वो कितनी भयानक होगी तो इससे बटर है की एक पल का लो एक टैबलेट का लो शांति से वो मा जो तो बटर डेथ बटर रहेगा तो देखिए की ये जो सेंस ऑफ एडवेंचर भी उन लोगों का था की ये सब मैंने ऐसा नहीं है की आप पृथ्वी पर रहेंगे तो आपको खाने को नहीं मिल रहा है तो बटर है की मैं एस्ट्रोनॉट बन जाऊं थोड़ा बहुत सैलरी मिलेगा तो मेरा घर चल जाएगा ऐसा तो नहीं है जो लोग एस्ट्रोनॉट बनते थे वह लोग को इतने हाली क्वालिफाइड फिजिकल फिट और इंटेलेक्चुअल वो शार्प रहते थे जो पृथ्वी पे रहेंगे तो उनको मतलब हैवी लीव इन एन ग्रेट कंफर्ट बहुत ही अच्छी जब मिलेगी किंतु सेंस ऑफ एडवेंचर उनका कैसा है की सब छोड़ करके एक ऐसी हॉरिबल स्थिति में एक वेरिएबल पोजीशन में अपने को दाल रहे हैं की वह सबसे पहले बार मानव जाति के इतिहास में हमने आदमी को पृथ्वी से बाहर भेजो है तो ये देखिए ये जो एडवेंचर है ये इनोवेशन टेक्नोलॉजी ठीक हो तो इतना बड़ा प्रोजेक्ट जब हम हाथ में लेते हैं तो हमको लगता है की देखो दिस इस दी ह्यूमंस पीरियड की हम लोग जो है नेचर के सामने लाड सकते हैं और नेचर के सामने जीत भी सकते हैं ऐसा नहीं है की हम छोटे कीड़े की तरह है और वह फिर एक बारिश का एक जैसे ए गया पूर्व ए गया तूफान ए गया तो हम लोग हमारा सब कुछ चला गया हम सर पर हाथ रख करके रोटी हुए है हमको इस स्थिति में से ऊपर आकर के पूरे ब्रह्मांड को मैंने जो है की हमारा जो सिविलाइजेशन जैसे की आप यूरोपियन कंट्रीज को देखें एक के बाद एक जो एक्सपीडिशंस थी उनकी लेवल एक्सपीडिशन तो उन्होंने नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका को कॉलोनाइज किया इंडिया को खोलो ना किया हम इंडियन को यह बात अच्छी नहीं लगती है किंतु देखिए हमारा ये जो प्राण शक्ति उसे समय खत्म हो गई थी और उन लोगों की प्राणशक्ति बाढ़ गई थी यह जगत ही इस तरह से चला है की किसमे कितनी प्राण शक्ति है यदि हम एक्सपेंशन नहीं करेंगे तो हमारे सामने फिर एक ही उपाय है वो है डेथ एक्सपेंशन इस लाइफ कांट्रेक्शन इस डेथ स्वामी विवेकानंद कहते हैं तो वे बिल हैव तू एक्सपेंशन और इस एक्सपेंशन के लिए हमको एक डिसिप्लिन मन चाहिए यदि अपना मन डिसिप्लिन नहीं है सोच लीजिए की अपोलो मिशन में 1000 इंजीनियर साथ में कम कर रहे हैं यदि 1 इंजीनियर ने भी अपना कम ठीक नहीं किया एक छोटा सा मूविंग पार्ट भी ठीक से नहीं चला तो रॉकेट टूट जाएगा एस्ट्रोनॉट मा जाएंगे और फिर यदि दो-तीन लोग मा गए उसका कोई बड़ी बात नहीं है किंतु फिर पूरे जगत में अमेरिका की जो प्रेस्टीज है वो चली जाएगी देखिए अमेरिका और सोवियत यूनियन में क्या डिफरेंस था सोवियत यूनियन क्या करता था सबसे पहले सेक्रेटली वो सब मिशन चलते थे वो एस्ट्रोनॉट को भेज देते थे फिर यदि सक्सेस होगा तो लोगों को बताएंगे यदि कोई मा गया तो किसी को बताएंगे ही नहीं जाति रॉकेट एक्सपेरिमेंट से ऊपर जाते समय वो एचडी फैट गया एक्सप्लोद हो गया तो किसी को नहीं बताएंगे की हां अभी हम लोगों को निष्फलता मिली है अमेरिका ने जितना भी स्पेस मिशन है लोगों की नजर के सामने किया तो यानी की वो रॉकेट उड़ भी रहा है उसने एक्सप्लोजन भी हो गया तो सबको दिखाई देता यार है नजर के सामने ऐसा हो गया तो पूरे विश्व में मेरी साथी मिल जाएगी और निष्फल होगा तो सबके सामने मेरा नाक कट जाएगा आपको यदि पता होगा की जो फर्स्ट एस्ट्रोनॉट था इन नील आर्मस्ट्रांग और उसके साथ में दूसरे दो लोग वो लोग पृथ्वी पर वापस आए तो फिर यह तो यह पूरा मिशन तो लोगों की नजर के सामने हुआ था तो अमेरिका ने क्या किया सब दुनिया के जितने भी फ्रेंडली कंट्री से उन सब में ये एस्ट्रोनॉट को भेजो तो जाकर के लोग उसको मतलब उनको वेलकम करेंगे उनका स्वागत करेंगे उनको बधाई देंगे तो अभी बात ये है की जब अमेरिकन एस्ट्रोनॉट को आप बधाई दे रहे तो बेसिकली तो अमेरिका का सॉफ्ट पावर की तो बाढ़ रहा है तो वो इंडिया में भी आए थे उसे समय कौन था आई थिंक 69 के बाद में इन डेरा होगी शायद इन डेरा या तो फिर हमारे ये वो मोरारजी देसाई पीएम होंगे उसे समय वो इंडिया में आए थे मैंने कुछ वीडियो फुटेज देखा है उनका कितना वो चारों और इतना स्वागत हो रहा है तो देखिए वो संस्कृत मैं कहता एन की वीर भोग्यं वसुंधरा यह जो पृथ्वी है उसका भोग वही करेगा जो वीर है भोग करना अर्थात की एक इस तरह का जिंदा दिल जीवन जीना जिससे की हमारा मां प्राण शरीर उन्नत हो एक मतलब एक श्रेष्ठ विचार हमारे मां में आए एक मा मा के जीना एक डिप्रेशन में जीना यह तो क्या कोई जीना है यह तो पशु का जीवन है जीना वो है जो की सक्सेसफुल हो हमारा जीवन सक्सेसफुल हो हम जी चीज में जो जो प्रोजेक्ट हाथ में लेते हैं उसमें हमको सफलता प्राप्त भले लोग बधाई दें हमको अच्छी बात है उससे कोई प्रतिष्ठा वह सब चीजों से हमको डरना नहीं है बहुत सारे लोग समझते हैं की यह देखिए हमारे इंडिया में एक बहुत ही डेंजरस टाइप का एक विचार बीच में चला था की आप स्पिरिचुअल है तो आपको सक्सेसफुल नहीं होना है यदि आप स्पिरिचुअल है तो आपके जगत में आपकी कोई यह सिद्धि नहीं हनी चाहिए बाकी ये जगत में आपकी कोई मूवमेंट नहीं हनी चाहिए वरना तो फिर अहंकार बाढ़ जाएगा लोग आपकी प्रशंसा करेंगे इससे जो है की आप जो है की जब ईश्वर रास्ते में आपका जो प्रगति है वो रुक जाएगा ये दिस इस एन वेरी डेंजरस थिंक यह जो हम यदि बहिया जगत में यह जो प्रचंड कर्म करके यदि सफलता प्राप्त नहीं करेंगे तो हम लोग जो है तमस में डब जाएंगे बटर है की रजिस्टर में रहे और फिर वहां से जान का पर्यटन करें ऐसा शक्ति में टीके रहना इस जगत संसार में वन परसेंट लोगों से होता है तो मैं सात्विक बनेगा मैं जब ध्यान करूंगा मैं साधन भजन करूंगा मैं ईश्वर प्रताप करूंगा यह सब कहना अच्छा है किंतु यह सब दिन के 1 घंटे के लिए बहुत हो गया इससे ज्यादा आप इस थिंकिंग को आगे बढ़ाएंगे और फिर आपके जीवन के अन्य जो कर्म है उसके ऊपर में यदि इसकी असर होने लगी और फिर तो क्या होगा की आपका कर्म यदि अट तो आप सीधे डिप्रेशन में चले जाएंगे बिना कर्म के इंसान र नहीं सकता है हां अपने कर्मों को सु संस्कृत कर सकते हैं जैसे की यह रामकृष्ण मिशन में जो होता है की हमारा जो कर्म है वो मानव कल्याण के लिए कर्म है तो आप जी भी क्षेत्र में हो उसमें उसे कर्मों को सु संस्कृत करने का पर्यटन करें यदि आप मां लीजिए की एक बिजनेसमैन है तो देखिए की किस तरह से जो टेक्नोलॉजी सब डेवलप कर रहे हैं या तो फिर जी टेक्नोलॉजी के साथ आप कम कर रहे हैं उसका कोई ग्रेटर बेनिफिट ह्यूमन किड को मिले अब जैसे आजकल बहुत सारे इंडस्ट्रीज में यह सर फंड एक रखा जाता है कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी आपके प्रॉफिट का एक हिस्सा जो है जो की आप इस तरह से किसी गो को डोनेट करेंगे जो लोग की इस तरह से गरीब लोग जो है उनको शिक्षा है या तो फिर उनको फिर उनका हेल्थ जो है वो प्रोवाइड करने में उनका ट्रीटमेंट प्रोवाइड करने में वे लोग कम करते हैं इस तरह की गो कर देंगे तो फिर आपका आपके कंपनी का खुद का एक प्रोजेक्ट होगा तो जो भी है ये लोक कल्याण के लिए कर्म बैंड कर देना वो बड़ा ही डेंजर है कर्मों को सु संस्कृत करना जैसे की कर्म जो है लोग कल्याण के लिए हो जाए इसके बाद में जो है हमको उसके ऊपर जाकर के सातों में स्थित होना है तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं ना की डी फाउंटेन ऑफ जो नॉलेज इसे इन एवरी वन ऑफ फर्स्ट इन डी और इसे इन डी हाईएस्ट एंजेल हमारे भीतर में ही जो है वो जो क्रिएटिविटी और स्पिरिचुअलिटी का वो जो ये खजाना जो है फाउंटेन यानी की जो फवारा जो है वो सब समय जो है वो चला राहत है और सिर्फ इंसान के भीतर नहीं एक चींटी के भीतर में भी वो है रियल रिलिजन इस वन बट वे कोरल विद डी फॉर्म्स डी सिंबल है और कोई रहेगा नहीं मेरे भगवान सही है तो हमको यही याद रखना है की जो सही सही भगवान है वो ऐसा थोड़ी ना है की वो अमेरिकन को लोगों के लिए अलग होंगे हमारे लिए अलग होंगे ईश्वर तो एक ही है हम अपनी बुद्धि क्षमता के अनुसार अपनी अंडरस्टैंडिंग के अनुसार विभिन्न रूप से उसको बुलेट हैं तो इंग्लिश इलस्ट्रेशन डी मिलेनियम एग्जिट ऑलरेडी पर ठोस हो फाइंड आईटी वे हैव लास्ट ोरसेल्वेस और दें वे थिंक डी वर्ल्ड इसे लास्ट हम लोग जो है की ये जो बाकी अचार है उसको लेकर के बड़े व्यस्त हो जाते हैं और फिर सोचते हैं की मुझे क्यों इशू हम लोग मेरे हृदय में मुझे कोई दर्शन नहीं मिल रहा है ना ही मुझे कोई आध्यात्मिक अनुभूति हो रही है ना ही मेरी कोई इस तरह की मैं भविष्य नहीं देख सकता ठाकुर को पढ़ के लगेंगे की ठाकुर तो सबके वो जो संस्कार है वो देख लेते थे तो मेरे साथ में ऐसा क्यों नहीं होता यहां पे 10 लोग आकर के मुझे तक जाते हैं और मैं समझ ही नहीं पता की वो भले ही चाहे मुंह से अच्छी-अच्छी बातें करते हो उनके हृदय में मेरे प्रति विश्व भारत हुआ है तो मैं क्यों नहीं उसके हृदय में देख सकता ये सब बातें हमको लगती है किंतु देखिए की हम जब तक अचार में व्यस्त हैं तब तक हम जो आंतरिक जो आध्यात्मिकता है उसको नहीं पहचान पाएंगे तो यहां पे एक्चुअली हमको करने यह जो सब देखिए हायर टीचिंग जो है योग के वह हमने डेवलप किया किंतु इसका बेनिफिट जो है वो यूरोप और अमेरिका ले रहा है वे शुड बी डी वन तू उसे दिस टीचिंग्स तू ए डेवलप दिस मैटेरियल्स साइंस और मटेरियल टेक्नोलॉजी दो चीज हैं देखिए ये डिस्टिंक्शन कितने वो सेटल है कितने सूक्ष्म है मटेरियल भोग जो है उसको अवॉइड करना है ये जैसे बेस्ट साइंटिस्ट को देखेंगे बेस्ट प्रोफेसर को देखेंगे बेस्ट इंजीनियर को देखेंगे उनको ये सब चीजों में ध्यान नहीं राहत की वह कितना पैसा काम रहे हैं या तो फिर अच्छा खाना कितना का रहे हैं वो एक स्टेबल फैमिली लाइफ राहत है उनका बीबी बच्चे रहते हैं मां-बाप रहते हैं फिर उनके साथ में घर में जाकर गैप लगाते हैं रात को शाम को सुबह को और दिन भर जो है वो लैबोरेट्री में या तो फिर वो क्लास रूम में वह लोग बीजी रहते हैं तो युटुब यदि आप रियल साइंटिफिक इंजीनियरिंग इंडस्ट्रियल डिस्कवरी या इनोवेशन में रहेंगे तो भोग भी वो चला जाएगा अर्थात की रियल डेवलपमेंट विदीन और रियल डेवलपमेंट आउटसाइड जो अवॉइड करना है वह है की भोग जब तक हम यह जो इंद्रिय सुख का त्याग करेंगे तो बाकी जगत में भी सक्सेस होंगे और आंतरिक जगत में भी सक्सेसफुल होंगे

श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ

अच्छा रामकृष्ण कथामृत कल हमने देखा की विश्वास का जोर कितना है ठाकुर ने हमको उदाहरण दिया की एक आदमी वह विभीषण के पास गया लगा के राजा के पास कहा मुझे समुद्र पर करना है विभीषण ने उसको एक पेट पर कुछ लिख के दे दिया कहा अपने वस्त्र में ये बंद दो तो उसने बंद दिया फिर वो समुद्र लांग करके चल रहा है चल रहा है अपने राजा पर भरोसा है विभीषण के ऊपर में किंतु फिर उसके मां में क्यूरोसिटी प्रकट हुई जिज्ञासा प्रगति हुई थी क्या है भाई इसमें ऐसा की जिसको की उन्होंने ऐसा मंत्र लिख दिया है तो मैं उसके जोर से मैं टायर रहा हूं तो मैं भी यदि यह मंत्र को पढ़ लूंगा तो मैं भी अपने शिष्य बना पाऊंगा मैं भी वो विभीषण के राजा की तरह प्रख्यात हो जाऊंगा ऐसा कुछ उसके मां में हुआ होगा उसने वह कागज निकाल कर के देखा तो श्री राम मंत्र लिखा है तो यह सोच करके उसने सोचा अरे दूध सिर्फ इतना ही तो जैसे उसके मां में विश्वास आया वैसे ही वो डब गया और कैसे हमने देखा की पूर्ण ब्रह्मा नारायण होने के बावजूद भगवान राम को ठाकुर कहते हैं की उनको सेतु बांधना पड़ा किंतु पत्थर जो है वो उनके चरण स्पर्श से पत्थर जो है उनका नाम किस पेरिस मंत्र से टायर गए तो यह भक्ति और ज्ञान के बीच का किस तरह का कांट्रडिक्शन है वो हमको देखने को मिलता है मुझे ज्ञान है की मैं आत्म तो मैं आत्मा हूं मैं अवतार हूं यह ज्ञान यदि मुझे रहेगा तो उससे मैं सामग्र विश्व को बड़े में सर्वज्ञ सर्वव्यापीठ अमृत यह सब मेरे में ए जाएगा किंतु जब वो समंदर तैरने की बात आएगी तब मुझे वो ब्रिज बनाना पड़ेगा वो पत्थर का पुल बनाना पड़ेगा किंतु पत्थर को पता है की वह भगवान राम का भक्ति है तो वह भक्ति से ही वो उसने समुद्र भाव सागर जो है उसने पर कर दिया की भक्ति और ज्ञान के बीच का ये जो कनफ्लिक्ट हमारी सोसाइटी में इच्छा से चला रहा है हालांकि दोनों अपनी जगह श्रेष्ठ है किंतु यह जो सड़क जो होता है भक्ति जो हम लोग जो चिंतक जो होते हैं जो होते हैं हमको इस तरह से कांट्रडिक्शन खड़ा करना बड़ा अच्छा लगता है हम लोग बीच-बीच में कंपटीशन करवाएंगे वरना तो क्या सब बोरिंग हो जाएगा ना की अच्छा ठीक है जो भक्ति का हृदय है वो भक्ति करें ज्ञानी का हृदय ज्ञान करें वो ज्ञान मार्ग पे चले बीच में दोनों को लाडा देंगे तभी तो मजा आएगा और ठाकुर एक जगह पे कहता है जैसे काली और कृष्णा के दो भक्तों में झगड़ा हो गया तो वो कृष्णा भक्ति कहता है की अरे कृष्णा तो बहुत सागर के कंडारी है अनुभव सागर के वो जो नव का जो चलती है उसके वो जो नाविक है सबको ये इस कोनी से जो पृथ्वी पर से वो स्वर्ग में ले जाते हैं तो वो काली भक्ति कहता है अरे तो मां काली ने ही उसको रख दिया है मां काली इतनी ग्रेट है महान है उनके पास समय थोड़ी ना है लोगों को इस तरह से नोखा में बैठकर के इधर से उधर ले जान का उन्होंने ही वो कृष्णा को नौकरी पे रखा हुआ है तो ऐसे जो है हालांकि वो नहीं काली के ऐसा कोई टाइम है कृष्णा के साथ झगड़ना के लिए नहीं कृष्णा काली के साथ झगड़ा था किंतु भक्तों में इस तरह से होता राहत है वो ठाकुर एक जगह पे दूसरी जगह कहते हैं ना की राम और शिवा राम के गुरु शिवा के गुरु राम दोनों के बीच में झगड़ा भी हो गया फिर सलाह भी हो गए सैंडी भी हो गए मित्रता भी हो गई किंतु राम के जो बंदर है और शिवा के जो भूत है उनका जो झगड़ा और उनके बीच का जो मारपीट वो कभी मिटेगा नहीं तो वैसे ही हम लोग जो है राम के बंदर है शिवा के भूत है तो हम लोग भी इस तरह से कांट्रडिक्शन खड़ा करके एक आनंद ले रहे हैं एक देखिए एक इंद्रियों का आनंद होता है एक इंद्रियों का सुख होता है अभी उसको तो हम त्याग कर रहे हैं तो फिर कहानी से तो जाकर के थोड़ा बहुत एक जो है हंसी मजाक एंटरटेनमेंट चाहिए तो वो है ये धर्म को लेकर के इस तरह से थोड़ा बहुत चला है और ठाकुर को देखेंगे की किस तरह से वो ठाकुर कहते हैं की मैं ने जो लड़के जो उनके पास में आते थे मैं सिर्फ उनको रुख सुख रोटी नहीं खेलना हूं बीच-बीच में अचार है अमल है ये सब भी उनको देता हूं मच्छर झोल भी देता हूं जिससे की क्या है की वे लोग मेरे पास आते रहे सब समय तो मां जो है इसे उच्च आध्यात्मिक स्थिति में स्थित नहीं होता है तो उसे समय जो है की इस तरह की कोई हंसी मजाक वाली बात सुनकर के बड़ा अच्छा लगता है अभी जैसे रिसेंट इमेज शशि महाराज की एक रिमेंशंस जो है उसको मैं ट्रांसलेट कर रहा था उसमें एक सुंदर एक उदाहरण है की विशुद्ध नानजी महाराज आपको पता है की वो तो हमारे प्रेसिडेंट है तो किंतु विध्वधान जी महाराज जो है वो बड़े यंग थे उसे समय बेलूर मठ में जॉइन किया थे तो बैलून मठ में जॉइन किया तो राजा महाराजा उनको कहा की जो तुम दक्षिण मद्रास जा वहां पे शशि महाराज है उनकी सेवा करना वो जो कम दे वो करना तो विशुद्ध जी महाराज बिल्कुल नए-नए आए हैं तो बड़े ही उत्साह और उमंग लेकर के वो तो लोग यहां पर आए मद्रास में सोचा की ठाकुर के शिष्य साक्षात सन्यासी शिष्यों शशि महाराज जिनके बड़े में मैंने तो इतना सब कुछ सुना था की स्वयं स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण नंद नाम लेना चाहते थे किंतु उन्होंने देखा की शशि महाराज की ठाकुरों पर कितनी एक निष्ठा है कितनी निष्ठा से उन्होंने ठाकुर की सेवा की है ये देख करके स्वामी जी ने राम कृष्णा नंद नाम जो है सन्यास नाम वो शशि महाराज को दे दिया तो ये सब बातें तो बेलूर मठ में सभी को पता है तो अभी शशि महाराज के साथ रहना ठाकुर के ऊपर जिनकी इतनी निष्ठा हो तो हमारे लिए कितना सद्भाग्य है कितनी सुंदर बात है तो ये सब सोचकर के विश्वविद्यालय ठाकुर सेवा में आपकी तनिक भी त्रुटि होगी थोड़ा सा भी इधर उधर हो गया समय का थोड़ा सा भी यदि समय के प्रति ध्यान हो गए की इस समय एक्जेक्टली जो करना है भोग लगाना है या तो फिर पूजा करनी या तो आरती करनी है जो भी उसमें थोड़ा सा भी एक सेकंड का भी इधर-उधर हुआ तो इतना गुस्सा हो जाते थे और फिर इतनी गाना गली देते थे की मतलब कोई तो हम समझ पूरा आदमी तो डर जाएगा तो ये देखिए की विशुद्ध जी महाराज बेचारे इतनी वो आशा लेकर के आए थे और यहां पे प्रत्येक छोटी-छोटी गलती पे इतनी दांत सनी पड़ती थी इतनी गली सनी पड़ती थी शशि महाराज की और आजकल तो क्या है की मिडिल क्लास फैमिली से आते हैं तो मां मां और पिताजी हमको इतना जतन से रखते हैं पहले जैसा वो मारपीट पिताजी करते थे छोटी-छोटी गलतियां पे ऐसा तो ज्यादातर घरों में अभी नहीं होता है तो विशुद्ध आनंद जी का भी ऐसा वो कभी इस तरह का दांत नहीं सुना था कभी इस तरह की गली नहीं सनी थी वो बड़े अच्छे सु फैमिली से आए थे कलर फैमिली से और यहां पर देखा की एक साधु है उनको बार-बार गली दे रहे हैं तो देख कर के बेचारे बड़े ही परेशान हो गए तभी राजा महाराजा आए थे उसे समय मद्रास में शशि महाराज ने उनको बुलाया था वो पूरा वो है वह सभी जितने भी तीर्थ यात्रा तीर्थ स्थान है उसका दर्शन करवाने के लिए राजा महाराज को इनवाइट किया था तो राजा महाराजा कंप्लेंट कर रहे हैं देखा की शशि महाराज बात-बात में मुझे दांते हैं तो अभी मैं क्या करूं मैं कैसे रहूं यहां पे तो राजा महाराजा कहते हैं की देखो तुमको शशि महाराज की जो दांत है उनका गुस्सा है उनकी गली है यही तुमको याद रहेगा क्या तुमने उनका यह जो प्रेम है उनका स्नेहा है वो सब तुम भूल गए सामने में तो विशुद्ध आनंद जी कहते हैं हां ये बात तो सही है शशि महाराज जब खाने को बैठेंगे सब लोग साथ में बैठेंगे और उनके वो थाली में यदि आम है या कोई मिठाई है या कोई भी एक अच्छी यदि कोई चीज ए गई तो थोड़ा सा खाकर के उनको अरे बड़ा अच्छा है तो सिद्ध जी है या फिर दूसरे एक दो साधु थे उनको दे देते थे अच्छा देखो खाओ कितना सुंदर है तो मैन अच्छी चीज खाना उनको थोड़ा सा भी लोग नहीं था मटके वो तो अध्यक्ष है बोल करके अच्छी चीज तो उन्हें को सबसे पहले मिलेगी थोड़ा सा ही उसका ग्रहण करके बाकी सब जो है वह बांट देते थे इतना उनका प्रेम था और ऑफ कोर्स की आध्यात्मिक जीवन में जी किस तरह से जब ध्यान करना है किस तरह से साधना करना है चरित्र गठन करना है ये सब तो वो अच्छे से उनको उपदेश देते ही थे तो ये देख करके उन्होंने कहा अच्छा ठीक में र जाता हूं यहां पे अभी अच्छा और भी बहुत साड़ी कहानी है मैं कल बताऊंगा बहुत ही ये जो विशुद्ध आनंद जी के रिमिनीसेंस में ट्रांसलेट कर रहा हूं अभी ज्योत के लिए बहुत ही सुंदर वो शशि महाराज की बातें हैं उसमें कल बताता हूं