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ओ काय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः अच्छा तो कल वैसे हमारा जो क्लास के बाद डिस्कशन उसमें दो पॉइंट मैंने देखे कि बड़े इंपॉर्टेंट है एक तो प्रश्न था कि जो इवोल्यूशन बारे में हम सोच रहे हैं व इवोल्यूशन क्या उसका परफेक्शन आ गया है कि नहीं कि यह परफेक्शन आने वाला है या तो फिर कहेंगे कि परफेक्शन का क्राइटेरिया क्या है व्ट इस दी आप क्या कहेंगे कि हम किसको परफेक्शन कहेंगे तो यह इतना बड़ा प्रश्न है कि जब तक आपको निर्विकल्प समाधि या ऐसा कुछ नहीं हो जाता और डायरेक्ट ऊपर से आपको आदेश नहीं मिलता या कोई वो विजन नहीं होता तब तक इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता है क्योंकि य पूरे मतलब बिगिनिंग ऑफ टाइम टू एंड ऑफ टाइम को ये करता है तो तो मेरा जो पर्सनल जो बिलीफ है इसमें कि यदि परफेक्शन की ही बात करें तो ऑन वन हैंड भगवान राम भगवान कृष्ण भगवान राम कृष्ण भगवान कृष्ण चैतन्य देखिए कि इन लोगों में मुझे कोई अप एंड डाउन नहीं दिखता ऐसा नहीं लगता मुझे पर्सनली कि बुद्ध या जीसस एक दूसरे से बड़े थे या छोटे थे एक ईश्वर दर्शन या तो निर्विकल्प समाधि या तो फिर जिसने एक दिव्य चैतन्य प्राप्त किया है ऐसा एक महापुरुष वो वो एक ही लेवल पर सब लोग जाकर के वो अटक हैं रुकते हैं माने उन लोगों में ये अप एंड डाउन या कम ज्यादा नहीं होता तो व परफेक्शन इंडिविजुअल परफेक्शन ऑलरेडी हम हमने प्राप्त कर लिया है और जहां तक पूरे सोसाइटल लेवल पर अभी परफेक्शन चाहिए वो अभी उस र हम जा रहे हैं एवरी पर्सन विल हैव टू बिकम ए बुद्धा एवरी पर्सन विल हैव टू बिकम ए जीसस ऐसा वो दैट विल बी द एंड ऑफ अवर इवोल्यूशनरी साइकल ऐसा मुझे लग रहा है सो एक वो पॉइंट था और दूसरा पॉइंट बहुत अच्छा था कि जैसे हम लोग इवोल्यूशन की बात कर रहे हैं तो इवोल्यूशन में हमने देखा कि होमो इरेक्टस से होमोसेपियंस तक के वो एक जर्नी है अभी हम कहेंगे कि अरे यह तो फिर भी चलो कोई बहुत बड़ी बात नहीं है आपने स्पेस में गए तो आपकी कंडीशन के अनुसार बॉन डेंसिटी कम ज्यादा होती रहेगी डजन मैटर यह सब तो एक अपनी बॉडी को एडजस्ट होने के लिए एक मिनिमल इंटेलिजेंस चाहिए किंतु सोच लीजिए कि वह जो लीप है सबसे बड़ा कि इन ऑर्गेनिक मैटर में से ऑर्गेनिक मैटर जड़ में से चेतन वो लीप क्या वह ईश्वर की इच्छा के बिना या तो फिर कोई जादुई चमत्कार िक शक्ति के बिना हो सकता है कि नहीं क्योंकि जो जड़ पदार्थ है वो जड़ है चेतन है वो चेतन है इन दोनों में जो डिफरेंस है वो तो बहुत बड़ा डिफरेंस है इन दोनों का डिफरेंस जो पहला जो इवोल्यूशनरी लीप होगा वो कैसे लगा होगा वो क्या माने इस तरह की कोई मिरेकुलम से होगा ना कि वो भी इवोल्यूशन के सिद्धांत के अनुसार ही होगा तो जैसे हमारे में से आप में से वो जो पॉइंट आउट किया कि ऑलरेडी साइंटिस्ट लोगों ने इस तरह के एक्सपेरिमेंट कर लिए हैं कि ऑर्गेनिक इन ऑर्गेनिक केमिकल्स को यदि आप गर्म पानी में रखें और इलेक्ट्रिक करंट उसमें से पार करें तो फिर वह इन ऑर्गेनिक केमिकल्स ऑर्गेनिक केमिकल्स में परिणत हो जाते हैं यह ऑलरेडी लेबोरेटरी में प्रूव हो चुका है और इसके पीछे की थरी यह है कि सर्वप्रथम पृथ्वी पर जीवन कब स्टार्ट हुआ तो हम हम लोगों का थिरी है कि ये समुंदर के सतह के नीचे में समुंदर के बॉटम में तल में वो जो हॉट वाटर ये वेंट जो होता है ना जहां सेय लावा निकलता है उसके आसपास में सर्वप्रथम ये इन ऑर्गेनिक में से ऑर्गेनिक केमिकल का ट्रांजीशन हुआ होगा यह लोगों का थिरी है और यह थिरी को लेब में प्रूव हो चुका है वो एक पात्र में गर्म पानी और इन ऑर्गेनिक केमिकल को रख दो और उसमें से करंट पसार करो तो ऑर्गेनिक केमिकल बन जाते हैं यह भी एक थिरी है दूसरा एक थिरी है कि जहां तक पृथ्वी पर ऑर्गेनिक के िकल कहां से आए सो दे केम फ्रॉम आउटसाइड माने ये मेटराइड वगैरह जो पृथ्वी पर गिरते रहते हैं तो उसमें ऑर्गेनिक कंपाउंड पाए गए हैं यहां तक कि ऑर्गेनिक कंपाउंड हमको इंटरस्टेलर गैसेस में भी मिले हैं यह जो स्पेक्ट्रोस्कोपिक एनालिसिस जब करते हैं कि वह बड़े-बड़े गैस के बादल मैटर के जो बादल है कॉस्मो में उसका स्पेक्ट्रोस्कोपिक एनालिसिस किया जाता है तो हमको पता चलता है बादल का कंपोजिशन क्या है केमिकल कंपोजीशन क्या है तो उस केमिकल कंपोजीशन में से हमको पता चला कि इंटरस्टेलर क्लाउड में ऑर्गेनिक मैटर मौजूद है यानी कि हम कह सकते हैं कि पहला लीप जो है इन ऑर्गेनिक टू ऑर्गेनिक पृथ्वी पे भी हुआ होगा वह हमारे लेबोरेटरी में भी हो सकता है और स्पेस में यह जो सब कंडीशन ऑलरेडी है वहां पे हायर प्रेशर फिर यह इलेक्ट्रिक करंट और यह टेंपरेचर यह केमिकल फ्यूजन वगैरह तो तो उस स्पेस में भी हो सकता है और पृथ्वी में पहली बार ऑर्गेनिक केमिकल आकाश में भी आ सकता आकाश अवकाश में से भी आ सकते हो वो पॉसिबिलिटी है तो यह दो पॉइंट वेरी गुड पॉइंट तो लेटस नाउ गो अहेड स्वामी जी के कंप्लीट वर्क्स में कंप्लीट वर्क्स वॉल्यूम टू ज्ञान योग कॉस्मो मैक्रो कजम पेज नंबर 210 कल हमने देखा कि स्वामी जी कहते हैं कि बड़े बड़े फिसिकल टर्म से घबराना नहीं है यदि आप घबराए तो आप फिलोसोफर नहीं हो पाएंगे तो हमको यह भी प्रश्न हो सकता है कि हमको फिलोसोफर होने की क्या जरूरत है हम भक्त ही रहे हम कर्म कर्मयोगी ही रहे हम लोग जब ध्यान करके ही प्रार्थना करके भी अपना जीवन बिता सकते हैं क्या जरूरत है ज्ञान योग या तो फिर यह दर्शन शास्त्र वेदांत या तो फिर फिलोसोफी सीखने की तो मेरा जो पर्सनल ओपिनियन है कि यह जैसे एक पूरा कोर्स है चार योगों का आपको वो ग्रेजुएशन करेंगे तो सभी सब्जेक्ट आपको करने पड़ेंगे क्लियर तो यह भी आप एक सब्जेक्ट आपको रामकृष्ण भावधारानी जी आगे कहते हैं आई हैव बीन आस्ड मेनी टाइम्स मुझे बहुत बार पूछा गया है व्हाई डू यू यूज दैट ओल्ड वर्ड गॉड ये जो पुराना शब्द है ईश्वर वो आप क्यों यूज करते हैं उसका इस्तेमाल आप क्यों करते हैं जैसे वेस्ट में ऐसा हुआ था कि क्रिश्चियन कैथोलिक चर्च की जो फिलोसोफी या तो थियोलॉजी है वह इतनी रिस्ट्रिक्टिव थी कि जब भी साइंटिफिक एडवांसमेंट होता है तो चर्च के साथ में साइंटिस्ट लोगों का झगड़ा लग जाता था जैसे कि कोपरनिकस है या तो गैलीलियो है जैसे ही बोलना शुरू किया कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केंद्र नहीं है सूरज पृथ्वी के आसपास नहीं घूमता इनफैक्ट रिवर से पृथ्वी सूर्य के आसपास में घूमती है और यह विश्व की शुरुआत कोई 4000 साल पहले नहीं हुई 400 करोड़ साल के पहले हुई है ऐसा कुछ बोलने से ही चर्च वाले आपके साथ में वो झगड़ा करना शुरू करेंगे पर्सीक्यूशन करेंगे जेल में डाल देंगे जिंदा जला देंगे क्या-क्या सब नाटक करेंगे तो वहां पे एक क्लियर रिफ्ट हो गया बिटवीन साइंस एंड रिलीजन धर्म जो कहता है और विज्ञान जो कहता है इन दोनों के बीच में कोई मेल कभी नहीं है धर्म अपने तरीके से एक दूसरे डायरेक्शन में जाता है साइंस अपने तरीके से दूसरे डायरेक्शन में जाता तो यह सेपरेशन ऑफ चर्च एंड स्टेट जो है वह रेनेसा का फाउंडिंग प्रिंसिपल था चर्च को स्टेट के किसी भी काम में वो वो टांग नहीं अडानी है यदि एक क्रूड भाषा में कहा जाए तो और स्टेट जो है वो चर्च के जो भी रिलीजियस प्रीचिंग है उससे दूर रहेगा हालांकि यह प्रिंसिपल है प्रैक्टिस में कितना संभव है वह तो हमको हिस्ट्री पढ़ के पता चलता है किंतु जो भी है यह सेपरेशन ऑफ चर्च एंड स्टेट यह साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑन वन हैंड और दूसरे हाथ में दूसरी तरफ दूसरी साइड पर है यह धर्म दोनों का मिलन कभी नहीं हो सकता दोनों एकदम अपने अलग-अलग रास्ते से चलेंगे और जो साइंटिफिक टेंपरामेंट जिसका है जिसका रेशनल टेंपरामेंट है जिसका एक मॉडर्न एक आउटलुक है उसको लगता है कि गॉड इज नथिंग बट अ सुपरस्टिशन ईश्वर क्या है सिर्फ एक अंधश्रद्धा है जैसे कि कार्ल मार्क्स कहता है कि रिलीजन इज द ओपियम ऑफ पीपल धर्म जो है वह गरीब लोगों का फम है ऐसा क्यों कहा क्यों उसको नशे के रूप में दर्शाया गया क्योंकि धर्म का नाम लेकर के जो भी पूंजीपति है जिन लोगों के पास में सत्ता है जिनके पास में अधिकार है वे लोग क्या करेंगे कि धर्म का नाम लेकर के लोगों का शोषण करेंगे कहेंगे कि तुम तो छोटे एक गरीब तुम्हारा कर्म पिछले जन्म का कहो ना कि ईश्वर के तुम्हारे पर श्रप कहो जो भी है देयर इज अ रिलीजियस रीजन फॉर यू टू बी पुअर एंड फॉर यू लिसन टू अवर अथॉरिटी टू ओबे अवर अथॉरिटी तुम्हारा तुमको हमेशा गरीब रहना है हमेशा हमारे वश में रहना है हम जो तुम्हारा जो शोषण करेंगे वह ईश्वर ने इसको सैंक्टिफाई किया है तो राजा का अपॉइंटमेंट पोप करेगा तुम्हारा जो शोषण हो रहा है तुम्हारी जो जमींदार है वो जमींदार को जितना जमींदार जितना चाहे तुमसे टैक्स निकाल सकता है और इसके लिए यदि तुम्हारा तुम्हारा परिवार बर्बाद भी हो जाए डजन मैटर क्यों क्योंकि ये ईश्वर की इच्छा है ईश्वर की इच्छा के अनुसार तुम्हारे साथ में यह सब मिसफॉर्चून ये बुरी घटनाएं तुम्हारे साथ में हो रही है सब ईश्वर की इच्छा से हो रही है ऐसा एक गरीब लोगों के मन में डाल दिया गया तो गरीब आदमी जद यह भी सोचता है कि नहीं मुझे अपना जीवन जो है वो अच्छे से जीना है मुझे ज्यादा ह्यूमन राइट्स चाहिए मुझे ज्यादा फैसिलिटी मेरे बच्चों के लिए मेरा बच्चा अभी वो थोड़ा सा ही बीमार क्या हुआ सीधा उसका मृत्यु हो गया उसके लिए ना ही मेडिकल ट्रीटमेंट है ना ही उसके लिए कोई एजुकेशन की यह है पॉसिबिलिटीज छोटी उम्र से ही वो चाइल्ड लेबरर की तरह वो बड़े-बड़े वो पूंजीपतियों के फैक्ट्रीज में वो लेबरर के रूप में चला जाता है वो अस्थमा वो टीबी वगैरह हो जाता है और 15 20 साल की उम्र में तो उसका देहांत वो बूढ़ा हो जाता है उसका देहांत हो जाएगा तो मुझे इस तरह से पशु वत जीवन नहीं जीना मुझे एक सम्मान पूर्वक जीना है तो यह जो डिग्निटी ऑफ ह्यूमन लाइफ है इट वाज डिनाइड टू हिम कहा गया कि धर्म नहीं चाहता कि तुम डिग्निफाइड होकर के रहो तो ये कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन कम्युनिस्ट भावधारानी ज्म के नाम प जो उन लोगों के पास में इस तरह का काम करवाया जाता है जो वो लोग नहीं करना चाहते हैं तो दिस आर ऑल ओपियम ऑफ पीपल यह सब एक नशे की तरह है लोगों को ये नशा लगा दो कि धर्म के नाम पर तुमको को करना है ये क्रुसेड धर्म युद्ध धर्म के नाम पर युद्ध करना है मैं क्यों युद्ध करने को जाऊंगा मैं मेरा एक छोटा सा फार्म है मैं बड़ा सुखी हूं कल कहीं जाकर के सडन वो राजा ने ऐलान कर दिया कि धर्म के नाम पर युद्ध करना है सब लोगों को तो मेरा मेरा फार्म है मेरी खेती है मेरा परिवार है सबको छोड़ कर के मैं वह शस्त्र लेकर के युद्ध के मैदान में जाऊंगा मेरा वध भी हो जाएगा मेरे परिवार को कोई देखने वाला नहीं है व क्या मने बड़े लोग लोग छोटे लोगों का धर्म के नाम पर शोषण कर करते हैं तो यह जो सोशलिस्ट थिंकिंग है यह रेनेसा का मॉडर्न थिंकिंग है इसकी वजह से एक पूरा एक क्लास ऑफ पीपल जैसे फेबियन सोसाइटी थी लंडन में वो ज बर्नार्ड शो वगैरह उसमें थे और अमेरिका में तो बात ही नहीं है वे लोग तो बहुत ही ज्यादा मतलब उ मॉडर्नाइज थे तो सभी लोगों का कहना है कि यदि आपको स्वामी जी कहते हैं कि आई एम नॉट प्रीचिंग जस्ट ओल्ड रिलीजन आई एम गिविंग यू द लाइफ आइडियाज आडिया दे विल अमृतस्य पुत्र आप लोग तो अमृत के पुत्र है आप लोग थोड़ी ना इस तरह से आपका वो पशु की तरह आपका शोषण किया जाएगा आपको तो मैं सर्वश्रेष्ठ विचार देने आया हूं तो सर्वश्रेष्ठ विचार में वही ईश्वर वापस आ गया जिसको कि हमने इतना 300 400 साल की मेहनत करके उसका उसके फंदे में से छूटे हैं और आप जो बोल रहे हैं तो उसका एक सामने उसका एक देखिए कि भारत में आपने क्या बहुत बड़ा तोप मार लिया है भारत में तो अभी चलो यूरोप यूरोप के लोगों का शोषण हो रहा है भारत की तो क्या अवस्था है यूरोप के लोगों का शोषण तो यूरोप के ही लोग कर रहे हैं भारत का शोषण तो हम लोग यहां पर बैठ के करते हैं तो तो आपका जो यह वेदांत है आपका जो ईश्वर है भारत के लिए कुछ किया नहीं ऊपर हम ऊपर से हमको ये उपदेश देने को चले आ है ये गुडविन गुडविन का क्या है ना बड़ा ही एंथू सियास्ट था बड़ा ही उसमें एनर्जी था तो स्वामी जी को तो ऐसे एनर्जी एनर्जेटिक लोग बड़े ही पसंद है तो तो स्वामी जी के साथ में वो इंडिया गया इंडिया जाकर के वो स्वामी जी ने कहा कि ये ये सब हमको करना है जैसे वो वहां पे मद्रास में ब्रह्मवादिनी है उसमें काम करना है वगैरह अभी इंडिया का पूरा जो टेंपो है ना वो एक व एक काम क्वाइट शांति से सब करना है उसके समय पे जो होगा वो होगा समय के बाहर में जाकर के वो दौड़ धाम करके कुछ भी नहीं करना ऐसा एक जो अपना एक एक माइंड सेट जो है तो ये गुडविन अपने लेटर में इंडिया से लिखता है मिसेस बुल को कि देखिए कि मैं जो कुछ कर रहा हूं ना वो सिर्फ स्वामी जी की वजह से कर रहा हूं क्योंकि ये जो पूरा भारत है ना उसका चरित्र है बड़ा ही निम्न तरीके का चरित्र है पूरे भारत देश का और यहां पर लोग सब समय एक दूसरे के पीछे में लगे रहते हैं मैं किसी के घर में खाने को जाऊंगा तो मुझे एकदम अलग-अलग से वह खाना देते हैं अपने परिवार के साथ में मुझे बिठाए नहीं मुझे अछूत जैसा समझते हैं और फिर आखिर में क्या कहता है पता है कि विवेकानंद इज नॉट हिंदू बिकॉज ही डजन बिहेव लाइक ए हिंदू क्योंकि हिंदू का जो चरित्र है वो पूरा ऐसा मीन चरित्र है मीन का क्या करेंगे नीच किस्म का नीच जाति का चरित्र है ऐसा वो अपने लेटर में मिसेस बुल को लिखता है तो देखिए कि ये ब्रिटिश लोग है अमेरिकन लोग है स्वामी जी को तो अपना लिए बिकॉज उनको लगता है कि स्वामी जी के विचार है ना फ्रॉम हिज आइडियाज ही इज नॉट अ हिंदू ही इज अ ग्लोबल सिटीजन ही इज मोर लाइक ए वेस्टर्नाइज्ड पर्सन रदर देन बिहेविंग लाइक ए हिंदू तो आप हमको वही उपदेश देना चाहते हैं जिस उपदेश को हमने आज से 500 साल पहले नकार दिया है जिस उपदेश से यह चर्च चर्च का करप्शन यह चर्च में पोप पोप यानी कि महा करप्ट व्यक्ति ऐसा उन लोगों का मानना है और ऐसा हुआ भी था एक समय था एक पोप मैं उसका नंबर भूल गया एक समय था मुझे सब पोप के नंबर याद थे 13वां कि 14वां 13 और 14 व्हाट एवर व वो पोप था एक्चुअली वो एक औरत थी और मतलब कार्डिनल लोगों ने एक औरत को पोप बना दिया था और माने य मतलब डिबो चरी माने इस तरह का एक का काम से अंध होकर के यह पूरा कार्डिनल कॉलेज जैसे रामकृष्ण मिशन में ट्रस्टी लोग प्रेसिडेंट महाराज वाइस प्रेसिडेंट महाराज का वो पॉइंट अपॉइंटमेंट नहीं कंफर्म करते हैं उनकी पोजीशन को तो जैसे पोप का पोजीशन है वो कार्डिनल कॉलेज के द्वारा माने वो 20 25 ना 30 40 जितने भी कार्डिनल हो वे लोग ठीक करेंगे कि किसको पोप बनाया जाए तो वहां पे इस तरह का व्यभिचार हो रहा था कार्डिनल्स में कि एक औरत को पोप बना दिया और पता लोगों को कब चला कि वो जब वो उसको बच्चा होने वाला था वह प्रेग्नेंट हुई तब लोगों को पता चला रही ये तो पुरुष नहीं ये स्त्री है माने सोच लीजिए किस तरह का व्यभिचार स्टालिन था स्टालिन क्या करता था अपना एक कुक था कुक को वोह जनरल बना दिया था स्टालिन तो सर मुख हथियार था डिक्टेटर था तो अपने वोह बावरची को वो जनरल बना सकता है आर्मी जनरल वह तो कुछ भी कर सकता है बड़े लोगों के पास में जब पावर आ जाता है तो किस तरह का व्यभिचार चलता है तो यह तो सब रिकॉर्डेड हिस्ट्री है तो चर्च में व्यभिचार होना वेटिकन में व्यभिचार होना इसके ऊपर में कितना सब कुछ लगा लिखा गया है तो उसी ईश्वर के पास आप हमको वापस क्यों ले जाते हैं यह प्रश्न स्वामी जी कहते हैं कि मुझे पूछा जाता है व्हाई डू यू यूज दैट ओल्ड वर्ड गॉड वो जो पुराना शब्द गॉड या तो ईश्वर है उसका इस्तेमाल आप क्यों करते हैं तो स्वामी जी कहते हैं बिकॉज इट इज द बेस्ट वर्ड फॉर अवर पर्पस मैं जो कहना चाहता हूं उसको डिस्क्राइब करने के लिए उसको समझाने के लिए वह सर्व सव श्रेष्ठ शब्द है ईश्वर यू कैन नॉट फाइंड बेटर वर्ड देन दैट इससे अच्छा शब्द आपको नहीं मिलेगा बिकॉज ऑल द होप एस्पिरेशंस एंड हैप्पीनेस ऑफ ह्यूमैनिटी हैव बीन सेंटर्ड इन दैट वर्ड क्यों मनुष्य जाति की सब एस्पिरेशंस यानी कि आशा आकांक्षा हमारी जितनी भी एंबिशन है हमारे जितने एस्पिरेशंस है हमारी जितनी आशाएं हैं वह सब एक ईश्वर शब्द के आसपास बुनी हुई है वही एक ईश्वर शब्द के आसपास हमारी सब आशाएं बनी हुई है देखिए ऐसा क्यों स्वामी जी कहते हैं क्योंकि आप ईश्वर के बारे में दो तरह से सोच सकते हैं एक तो है कि ईश्वर का नाम लेकर के यह बाद के धर्म संघ जो है उन्होंने जो व्यभिचार चलाया वो उस व्यभिचार से तो वेस्ट को छूटना ही था पश्चिम को छूटना ही था तभी तो वे लोग साइंटिफिकली इकोनॉमिकली सोशली पॉलिटिकल इतना डेवलपमेंट कर पाए ऑन द अदर हैंड एक समय ऐसा आया कि यही डेवलपमेंट ईश्वर के सहारे के बिना उनको फर्स्ट वर्ल्ड वॉर सेकंड वर्ल्ड वॉर और आखिर में कोल्ड वॉर तक ले गया ईश्वर की ही कृपा है कि वह एटम बम एक दूसरे के ऊपर में नहीं फेंके वरना यह जितना भी इवोल्यूशन साइंटिफिक टेक्नोलॉजिकल था सब वो रेडियोएक्टिव क्लाउड में सब खत्म हो जाता तो यह आपका प्रोग्रेस किस काम का कि जो आपको युद्ध की ओर ले जाए तो यह ईश्वर से ईश्वर के संबंध में जो अंधश्रद्धा है उससे छूटना है किंतु ईश्वर की जो सही सही कांसेप्ट है विभावना है ईश्वर के संबंध में जो सही आदर्श है देखिए कि जीसस का जो जीवन है कितना सुमधुर कितना प्रेरणादाई जीवन है जो भी धर्म गुरु को ले लीजिए भगवान बुद्ध है भगवान कृष्ण चैतन्य है राम कृष्ण है स्वामी विवेक नंद स्वयं है मां शारदा है हमारे जो डायरेक्ट डिसाइल है हमारे प्रेसिडेंट महाराज वाइस प्रेसिडेंट महाराज खैर इनके बारे में तो हम सोचते हैं उनके बारे में यदि देखा जाए उस समय जो स्वामी जी कहते थे तो टेरेसा ऑफ एवला है सेंट फ्रांसिस ऑफ एससी है ऐसे कितने ही लोग है वो सेंट थॉमस है तो जिन लोगों ने सेंट ऑस्टाइन है कि जिन लोगों ने जिन लोगों का जीवन देख कर के आपको एक अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा मिले वरना जद साइंस और टेक्नोलॉजी आपके उसका जो डेवलपमेंट उसका जो जो सक्सेस आपकी आपके सर में चली जाएगी आप घमंडी हो जाएंगे आप अहंकारी हो जाएंगे आप सोचेंगे कि यह पृथ्वी पे ये जो नेचुरल रिसोर्स है उसका एक्सप्लोइटेशन करके भोगवा बढ़ाने के लिए आपका जन्म हुआ है तो यह मटेरियल ज्म ये एक्सप्लोइटेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेस इट विल टेक यू टू द डिजास्टर इकोलॉजिकल डिजास्टर ह्यूमन डिजास्टर फाइनेंशियल डिजास्टर ये 2008 का फाइनेंशियल क्राइसिस क्यों हुआ हुआ कुछ कुछ लोगों ने मिलकर के सट्टा बाजी शुरू की है शेयर मार्केट में हम लोग आर्टिफिशली वो शब प्राइस सब बढ़ाएंगे और जैसे ही लोग दूसरे लोगों ने हमारे से प्रेरित होकर के खरीदना शुरू किया हम लोग सब बेच देंगे तो जैसे अपना वो जो हर्षद मेहता का हुआ था बहुत सारे लोगों ने अपने पैसे गवा दिए थे कोई बोलता भी नहीं था कि मैंने पैसे गवाए हैं शर्म के मार तो इस तरह से यह जो भोगवा आपको क्रूर हार्टलेस पशु वत बना देगा जदी साथ-साथ में ही ये ईश्वरीय चैतन्य दिव्य सत्ता यह दूसरों के प्रति करुणा मैत्री मुदिता उपेक्षा का भाव नहीं रहेगा यह जो मेरा भाई है मेरे पास में इतने रुपए हैं और इसके पास में कुछ नहीं है मैं इतना सब खाता हूं पीता हूं आनंद करता हूं और वो बेचारा अपने बच्चा बीमार हो जाता है छोटा रात भर रो रहा है उसके लिए वह कुछ नहीं कर सकता तो मेरा धन वैभव किस काम का है स्वामी जी का है ना वो सुंदर एग्जांपल है स्वामी जी शरद चंद्र चक्रवर्ती को उपनिषद सिखा रहे थे एक बार बैठ कर के तो व गिरीश घोष आ गए तो देखा कि स्वामी जी बड़े ही हवा में उड़ रहे हैं तो थोड़ा सा बलून में पंचर किया जाए तो गिरीश घोष ने जाकर के बोलना शुरू कर दिया कि नरेंद्र तुमको पता है कि यह जो उस परिवार में जब गरीबी की वजह से उस महिला को कितना मतलब वो क्या करेंगे वो कष्ट भुगतना पड़ा है वगैरह वगैरह जो सामाजिक परिस्थिति है विभ परिस्थिति समाज की गरीबी और ये मने भीतर में से ये जो आता है क्या करेंगे क्या नहीं करेंगे तो इसकी वजह से जो दूर अवस्था हो रही है सोसाइटी की इसके बारे में क्या तुमको पता है करके एक के बाद एक ऐसे ऐसे एग्जांपल उन्होंने देना शुरू किया कि स्वामी जी की आंखों में से आंसू आ गए वो एकदम वो चिल्ला कर के खड़े होकर के अपने कमरे में चले गए तो तब यह गिरीश घोष क्या कहता है कि देखो मैं तुम्हारे स्वामी जी को मानता हूं इसलिए नहीं कि वह वेद और वेदांत के पंडित है किंतु उसका उनके भीतर में एक मनुष्य चित हृदय है वो दूसरों के प्रति करुणा इतनी प्रचंड है उनकी कि जब एक गरीब परिवारों में एक महिला के साथ में अत्याचार होता है वो देख कर के वो रो उठते हैं तो ये ह्यूमन हार्ट जो है वो आपके डेवलपमेंट के साथ-साथ में चाहिए वो नहीं रहेगा तो आप ये वर्ल्ड वॉर में तो ठाकुर की कृपा है कि उस समय में न्यूक्लियर वेपंस हिटलर के हाथ में नहीं थे अमेरिका ने दो न्यूक्लियर वेपन फेंके वो तो वहीं पर सब समाप्त हो गया एंड में सब मिला हिटलर के हाथ में एटम बम होता तो वह क्या से क्या नहीं कर देता और इसके सामने यह लोग क्या नहीं करते माने मतलब कभी-कभी यह जो एक किताब मैंने पढ़ा था न्यूक्लियर एक्सीडेंट्स के ऊपर में किस तरह से वो मैंने वर्ल्ड वाज एट अ ब्रिंक ऑफ न्यूक्लियर डिजास्टर न्यूक्लियर होलोकास्ट एक किसी के गलती करने से वोह न्यूक्लियर वेपन आम हो जाता है ऐसे बहुत सारी कहानियां मैंने वो किताब में थी वो देख कर के पढ़ कर के मैं तो एकदम डर गया था हमको लगता है कि न्यूक्लियर वेपंस बड़े सेफ है इंडिया के पाकिस्तान के अमेरिका के चाइना के किंतु ऐसा कुछ नहीं है जब एक्सीडेंट होगा वो कहीं से अपना एक इंडिया का एक मिसाइल पाकिस्तान में जाकर के गिरा था कुछ समय पहले ठाकुर की कृपा से वो पाकिस्तान की जो दुरावस्था है उन्होंने खुद ने चुपचाप बैठ र कि उ हल्ला नहीं करना है वो सामने मिसाइल फेंकें तो फिर उसने सामने 100 मिसाइल अपने सर प आ जाएगी तो तो अभी जैसे पाकिस्तान यदि इकोनॉमिकली प्रोस्पेस होता और हमारी गलती से एक मिसाइल वहां पर च ली गई है तो उसने सामने 100 फेंक दी होती और हमने 1000 फेंक दी होती तो खत्म ही हो जाता फिर क्या रहता हमको यहां पर बैठ के बात करने के लिए तो ये जो हार्ट है वी नीड हार्ट अलोंग विद डेवलपमेंट यदि हार्ट नहीं रहेगा तो ये डेवलपमेंट आखिर में हमको युद्ध की ओर ले जाएगी और एक बार युद्ध होगा तो फिर से हम वही स्टोन एज की ओर वापस चले जाएंगे आइंस्टाइन का वो बड़ा फेमस उदाहरण है किसी ने पूछा कि थर्ड वर्ल्ड वॉर किस तरह के वेपन से लड़ी जाएंगी पता है कि सेकंड वर्ल्ड वॉर में व फाइटर जेट है ये टैंक है यह क्या क्या सब इनोवेशंस हुई है आखिर में तोय न्यूक्लियर वेपन भी आ गया तो जद थर्ड वर्ल्ड वॉर होगी तो वो कितने कितने एडवांस शस्त्र से लड़ी जाएगी तो आइंस्टाइन का क्या उत्तर था मुझे पता नहीं कि थर्ड वर्ल्ड वॉर किस तरह के शस्त्रों से लड़ी जाएगी किंतु मैं पक्के दावे के साथ कह सकता हूं कि फोर्थ वर्ल्ड वॉर है वो लकड़ी और पत्थर से लड़ी जाएगी क्योंकि थर्ड वर्ल्ड वॉर अपनी सिविलाइजेशन का जी दुरावस्था करेगी उसके बाद में हम वही स्टोन एज की ओर वापस चले जाएंगे वही जो जंगल में हम लोग शिकार करके घूमते थे वही जो पशु पक्षियों को मार करके जो खाते थे वो खेती करते थे उसी ओर हम वापस चले जाएंगे ट्राइबल एक एक्जिस्टेंस की ओर तो इसीलिए जो साइंटिफिक डेवलपमेंट है उसके साथ में रिलीजियस डेवलपमेंट या तो मैं कहूंगा स्पिरिचुअल डेवलपमेंट वो चाहिए और साथ में स्वामी जी क्या कहते हैं कि देखिए कि ईश्वर शब्द है उसकी आसपास हमारी सब आशाएं आकांक्षाएं बुनी हुई है क्योंकि मनुष्य जब अपने जो एक लिमिटेड कॉन्शसनेस है उसकी उसके जो लिमिटेड आइडियल है उसकी ये जो लिमिटेड लाइफ है उससे यदि वो उर्ध्व गति करना चाहता है तो वो किस तर किस डायरेक्शन में जाएगा हां एक साइंटिफिक डेवलप क्यूरियोसिटी जो है व साइंटिफिक क्यूरियोसिटी उसको बहुत हद तक ले जाएगी यदि वो कॉन्शियस नेस के लेवल पे यदि वो एक के बाद एक स्टेप एसेंड करना चाहता है उठना चाहता है किंतु साइंटिफिक क्यूरियोसिटी का भी एक लिमिटेशन है देखेंगे कि जितने भी साइंटिस्ट है उन सभी ने यह विश्व के जितने ग्रेटेस्ट क्वेश्चन जो है कि ईश्वर है कि नहीं है इसके बारे में उन्होंने सोचा है ईश्वर के बारे में आइंस्टाइन जो कुछ कहता है उसके बारे में एक छोटी सी मैंने किताब पढ़ी थी कंपाइलेशन था सुंदर किताब थी ऐसा नहीं है कि ये लोग ईश्वर में विश्वास करते हैं आई बिलीव इन द गॉड ऑफ स्पिनोज जैसा आइंस्टाइन एक बार कहता है अभी व उसका डिटेल में एक बार जाना पड़ेगा कि स्पिनोजा का गड कौन किस तरह का है किंतु इस तरह का गड कि वो जो आप गलत काम करते हैं तो आपको पनिश करता है और आप जो अच्छा काम करते हैं तो आपको वो प्रेज करता है या तो आपको रिवर्ड देता है इस तरह का गॉड नहीं गॉड मींस अ सुपरकॉन्शियस चैतन्य जो कि पूरे विश्व में व्याप्त है और आप एक सुपर कॉन्शियस स्थिति में जद आप पहुंच जाएंगे तो आपको वह साक्षात्कार होगा दैट सॉर्ट ऑफ गॉड जिसको कि स्पिरिचुअल गॉड कहते हैं रदर देन द ओल्ड टेस्टामेंट गॉड ओल्ड टेस्टामेंट ईश्वर किस तरह का है तो बहुत बड़ा राजा की तरह राजा क्या है कि उसका विचित्र एक दिमाग रहता है व गुस्सा हो गया तो गुस्सा ही हो गया वो खुश हो गया तो आपको बड़ा ही एक जमींदार बना देगा और गुस्सा हो गया तो आपका पूरे परिवार को व तहस नहस कर देगा तो ऐसा एक टेंपरामेंटल एक अनप्रिडिक्टेबल एक क्रूड एक तरह का एक ओल्ड टेस्टामेंट में एक तरह इस तरह के ईश्वर की कल्पना की गई किंतु बाद में न्यू टेस्टामेंट में देखिए कि गड क्या है कि प्रेम स्वरूप है भारत में भी देखिए कि धीरे-धीरे वो अपने यहां पर इंद्र वगैरह जो देवता थे इनको कि आप पशुबली वगैरह नहीं देंगे तो बड़े ही नाराज हो जाएंगे वो फ्लड लाएंगे वो बारिश लाएंगे क्या-क्या नहीं करेंगे किंतु इसके बाद में भगवान कृष्ण भगवान राम एक प्रेममय ईश्वर ै वो जो ट्रांजीशन है वो अपने वो भागवत में सुंदर है कि एक बार वृंदावन में सभी ने वो क्या इंद्र को कुछ पूजा नहीं की ना कि उसका कुछ अपमान कर दिया तो कितने दिनों तक बारिश और ये फ्लड वगैरह लेकर के आ तो भगवान कृष्ण ने क्या किया अपनी वो आखिरी उंगली के ऊपर में गोवर्धन को धारण किया वृंदावन को बचा लिया दिस इज अ ट्रांजिशन इन अवर इंडियन रिलीजियस थिंकिंग के उस ओल्ड टेस्टामेंट या तो फिर वो जो विचित्र दिमाग वाले ईश्वर से प्रेममय ईश्वर आप गलती करेंगे तो आपके लिए क्षमा है और यदि आप सही करना चाहते हैं तो आपके लिए सब दरवाजे खुले हैं इस तरह से एक मां के तरह का एक हृदय है एक इस तरह का का एक ईश्वर और इस ईश्वर की साधना करके इस ईश्वर के साक्षात्कार करके लाखों लाखों संत महापुरुष हो गए मनुष्य के इतिहास में सिर्फ भारत में ही नहीं चाइना में जापान में यूरोप में अमेरिका में जितने भी कॉन्टिनेंट है सब कॉन्टिनेंट्स पे सभी सिविलाइजेशंस में ऐसे महापुरुष हो गए जिन्होंने इस प्रेम रूप ईश्वर की आराधना करके अपने जीवन को धन्य बना दिया अपने जीवन को शांति और आशीर्वाद से भर दिया तो यह हाईएस्ट अचीवमेंट मनुष्य जीवन की जो है वह ईश्वर शब्द के इर्दगिर्द ही घूमती है ईश्वर को छोड़ कर के आप कहेंगे कि चलो मुझे आइंस्टाइन चाहिए मुझे न्यूटन चाहिए किंतु आई डोंट वांट सेंट टेरेसा ऑफ अविला सेंट भगवान राम कृष्ण या तो फिर ऐसे लोगों को मैं हटा देता हूं मनुष्य के इतिहास में से व जितने भी साइंटिफिक डेवलपमेंट करने वाले हैं उसी को मैं लूंगा तो साइंटिफिक डेवलपमेंट का एंड क्या तो एटम ब आइंस्टाइन ने खुद व प्रेसिडेंट ट्रूमैन को लेटर लिखा था कि मैंने सुना है कि हिटलर एटम बम बना रहा है तो आप अमेरिका भी एटम बम बना ले वरना जद हिटलर के हाथ में पहले एटम बम आ जाएगा तो पूरे सिविलाइजेशन का खात्मा हो जाएगा अभी आइंस्टाइन ने वो जो स्पिनोजा के गोड पर भरोसा करके नहीं कहा कि भगवान उसको रोकेंगे हिटलर को हमको आटम माने ये तो क्या है कि प्रोएक्टिव होकर के आप तो सामने वाला बुरा करेगा उससे पहले हम कुछ बुरा कर ले ये किस तरह का डेंजरस थिंकिंग है आप कितना ही आपका थिंकिंग बड़ा एडवांस हो जाए साइंटिफिक थिंकिंग किंतु जो मनुष्य चित ये जो आपके इनसिक्योरिटीज है इफरिट कॉम्प्लेक्शन होगा भले हिटलर एटम बम बनाने दो प्रयत्न करने दो हम कन्वेंशनल वेपन से ही हिटलर का सामना करेंगे इसी से हम जीत जाएंगे भरोसा उसको कभी नहीं होता क्योंकि उसके भीतर में वो इनसिक्योरिटी वो जू था ना वो हिटलर जूओ का संहार कर रहा था तो ये इनसिक्योरिटी बड़ा ही स्ट्रांग था उसके भीतर में वो यदि अमेरिका पे जीत जाएगा वो तो हिटलर आइंस्टाइन को तो जर्मनी से इसलिए व अपने को बचा करके दौड़ कर के अमेरिका आ जाना पड़ा क्योंकि पता था कि वो जर्मनी में रहता था और हिटलर के आने से सभी जू लोगों को वो उसके ऊपर में अत्याचार करने वाला है पहले से ही पता चल गया था तो वह बच कर के अमेरिका आ गया तो इनसिक्योरिटी उसके मन में सब समय है कि हिटलर जिस तरह से जू लोगों के ऊपर में जर्मनी में अत्याचार कर रहा है यदि उसके पास में न्यूक्लियर वेपन आ गया यदि अमेरिका पे उसने हमला किया तो यहां पे अमेरिका आ कर के वो हमारे पर अत्याचार करना शुरू करेगा तो ये इनसिक्योरिटी का फीलिंग वो कब जाएगा वो साइंटिस्ट होकर के वो प्रेसिडेंट को लेटर लिखता है कि हां आप न्यूक्लियर वेपन बनाइए हालांकि यह भी एक बात है कि बात-बात के जितने भी अमेरिकन प्रेसिडेंट हैं उन्होंने इस लेटर का सहारा लेकर के उन्होंने खुद जो न्यूक्लियर डेवलपमेंट किया वो आइंस्टाइन के सर पर डालना चाहा कि हमने जो ये हजारों हजारों न्यूक्लियर वेपन बनाए दुनिया के सभी देशों की और उसको हमने टारगेट करके रखा है वो आइंस्टाइन के कहने से हुआ हमने अपने से कुछ नहीं हैने आइंस्टाइन के लेटर का दुरुपयोग फिर इन लोगों ने इस तरह से किया तो जो भी है मनुष्य जीवन उचित जो भी हमारे इनसिक्योरिटीज है हमारी नेगेटिव इमोशंस से वो हम कितना ही हमारा साइंटिफिक टेंपरामेंट अपना खुद का डेवलप कर दे वो इनसिक्योरिटीज नेगेटिव फीलिंग इमोशंस वो जाने वाली नहीं है वो ईश्वर साधना करने से ही ईश्वर पर भरोसा करने से ही वो जाएगा तो एक श्रेष्ठ मनुष्य किसको कहेंगे तो स्वामी जी कहते हैं टेक द बेस्ट ऑफ वेस्टर्न एलिमेंट एंड टेक द बेस्ट ऑफ ईस्टर्न सिविलाइजेशन टेक द बेस्ट ऑफ बोथ सिविलाइजेशन ईस्टर्न एंड वेस्टर्न कंबाइन देम दैट विल बी द ग्रेटेस्ट सिविलाइजेशन स्वामी जी ने यह नहीं कहा कि यह जो पुराना हिंदुइज्म है उसको रिसरेक्ट करना है उसको फिर से लाना है हमको पश्चिम का जो सर्वश्रेष्ठ एलिमेंट है उसको हमारा भारत का सर्वश्रेष्ठ एलिमेंट दोनों के साथ में मिला ना है सर्वश्रेष्ठ मनुष्य कैसा होगा तो आइंस्टाइन की तरह उसके मन में क्यूरियोसिटी साइंटिफिक डेवलपमेंट करने की एक भीतर में से एक चाह रहेगी और भगवान राम कृष्ण के तरह या तो मैं कहूंगा स्वामी विवेकानंद की तरह एक हायर स्पिरिचुअल अटेनमेंट करने की मुमुक्षा मुमुक्षा ऑन वन हैंड एंड क्यूरियोसिटी एंड क्रिएटिविटी ऑन द अदर हैंड दिस टू एलिमेंट ब्रोट टुगेदर विल ब्रोट विल क्रिएट द ग्रेटेस्ट सिविलाइजेशन एवर सीन ऑन द फेस ऑफ अर्थ मनुष्य जीवन में पृथ्वी पर अभी तक जितनी भी सभ्यताएं आ गई उस सबसे सर्वश्रेष्ठ सभ्यता तब बनेगी तो यह स्वामी जी का थिंकिंग था तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम त श्री राम कृष्णर्पण मस्तु