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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

Swami Vivekananda's Cosmos Microcosm: Summary And Outline (3) 27 May 2024

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णा यते नमः तो स्वामी जी का कॉस्मस माइक्रो कजम का हम समरी देख रहे थे और समरी का आई थिंक हम लास्ट पार्ट चार पार्ट में मैंने समरी बनाया था तो उसका लास्ट पार्ट तक हम पहुंच गए हैं मैं अपना स्क्रीन शेयर करता हूं तो देखिए कि इसमें पहले तो हमने सभी स्लाइड पार्ट पार्ट वन से यदि एक बार स्टार्ट करें तो पार्ट वन में एक तो माइक्रो कजम क्या है हमारे शरीर के भीतर में क्या-क्या किस चीज की ये है मतलब हमारा ची शरीर मन बुद्धि प्राण जो भी कहो वो किस चीज का बना है तो वह हमने स्वामी जी ने हमको पूरा बताया कि किस तरह से हमारा शरीर देह बना है य तो दैट इज एनाटोमी ऑफ माइक्रो कजम दैट वास द पार्ट वन फिर पार्ट टू था कि नेचर ऑफ दी आत्मन आत्मन का स्वरूप क्या है इट इज सेल्फ लुमिनस सत चत आनंदमय अवकाश और समय के परे हैं और जन्म और मृ मृत्यु के परे हैं तो यह हो गया आत्मन का स्वरूप उसके बाद में स्वामी जी ने हमको समझाया कि पुनर्जन्म क्या है पुनर्जन्म की थिरी क्या है तो पार्ट थ्री और फोर पूरा पुनर्जन्म के बारे में हमको बताया अभी पार्ट फाइव है फाइनल कंक्लूजन कि इस पूरे प्रवचन से स्वामी जी क्या प्रूव करना चाहते हैं उनका अल्टीमेट कंक्लूजन क्या है सर्वप्रथम कंक्लूजन तो हमने देखा कि आत्मन का स्वरूप एक तो इस जड़ देह के भीतर में एक सूक्ष्म शरीर है और यह सूक्ष्म शरीर के परे भी एक आत्मन है जो कि ना ही इस जड़ देह के ऊपर में ना ही इस सूक्ष्म शरीर के ऊपर में डिपेंडेंट है किंतु इसी पंचमहाभूत के देह को यही आत्मन प्रकाश दान करता है प्रकाशित करता है तो वह तो एक कंक्लूजन था हमारे इस माइक्रो कजम प्रवचन का और दूसरा कंक्लूजन क्या है पुनर्जन्म वाद जद जदिया विराजमान है जिसका ना ही जन्म है ना ही मृत्यु है ना ही जरा है ना ही व्याधि है जिसका ना ही सृष्टि है ना ही स्थिति और ना ही प्रलय है समय और अवकाश के परे है पूर्ण ज्ञान उसका स्वरूप है पूर्ण आनंद उसका स्वरूप है वह सत स्वरूप स्वयं है जीवन स्वयं है यदि ऐसा कहेंगे इस आत्मन के साथ में तो प्रश्न होगा कि यह आत्मन तो बार-बार देह धारण करेगा हालांकि आत्मन देह धारण नहीं करता आत्मन से प्रकाशित होकर के सूक्ष्म शरीर बार-बार देह धारण करता है और यह देह धारण करने की साइकिल तब तक चलती रहेगी कि जब तक फाइनली कहीं जाकर के इस सूक्ष्म शरीर को मुक्ति ना मिल जाए कामना वासना से जो जड़ा हुआ यह सूक्ष्म शरीर है जो कि सब समय हमेशा ये इंद्रियों के सुख उप भोग के लिए दौड़ता फिरता है कि हां मुझे यह सुख चाहिए वो सुख चाहिए यह सब तो इस सुख से जब वह मुक्ति उसको मिल जाएगी उस समय इस सूक्ष्म शरीर की यह वो विघटित हो जाएगा और फिर आत्मन और ये स्थूल देह इन दोनों के बीच का जो सेतु है इन दोनों के बीच का जो ब्रिज है वो कट जाएगा अच्छा यहां तक तो अभी हम लोग समझे किंतु गोइंग बियोंड ट ये पुनर्जन्म वाद का यह तो एक कंक्लूजन है दूसरा एक सीरियस कंक्लूजन स्वामी जी हमारे सामने रखते हैं वो कंक्लूजन क्या है हम पढ़ते हैं स्वामी जी क्या लिखते हैं इस स्लाइड शो के पूरे शब्द स्वामी जी के हैं मेरा एक भी शब्द नहीं सिवाय के टाइटल और स्वामी जी के शब्द में जो यह ब्रैकेट में जो रेफरेंस लिखा है वह भी स्वामी जी के कंप्लीट वर्क्स में है वॉल्यूम टू पेज नंबर 224 तो स्वामी जी क्या कहते हैं इंकार्नेट इज द थिरी दैट एडवांसेज द फ्रीडम ऑफ द ह्यूमन सोल पुनर्जन्म वाद मनुष्य की आत्मा को मुक्ति प्रदान करता है मैन इन जनरल ले ऑल द ब्लेम ऑफ लाइफ ऑन देयर फेलो मैन जनरली हम लोग क्या अच्छा पहली बात तो है कि आत्मन को मुक्ति प्रदान करता है यह कैसी बात हो गई आत्मन तो सदा ही मुक्त है नृति प्रदान करता है हमारी थिरी को हमने जद थियोरेटिकली सोच के रखा है कि आत्मन बंधन में तो उस थियोरेटिकली हमको वह बंधन से मुक्त करता है दूसरा कि मनुष्य जनरली मेरे साथ में कोई भी दुर्घटना होती है तो उसका दोष पूरे जगत को देता है अभी जैसे कि पडेम पेंडम की वजह से मेरी नौकरी चली गई घर में खाने को कुछ नहीं है तो अभी यह तो नेचुरली वो तो जिसने पए वो कोरोना वायरस पता नहीं वह कहां से स्टार्ट हुआ था कैसे फैल गया तो जिन लोगों ने फैलाया होगा उन्हीं का तो दोष होगा ना यह मेरा दोष कैसे हो सकता है जनरली दुख तीन तरह के बताए गए हैं एक तो है आध्यात्मिक दूसरा है आधि भौतिक तीसरा है आधि दैविक आध्यात्मिक अर्थात कि मेरे किए की करनी मुझे मिल रही है मैं रेकलेट ड्राइव करूंगा एक्सीडेंट होगा तो फिर वो तो मेरा ही जिम्मा है मेरे सर के ऊपर में आदि भौतिक अर्थात कि इस जगत के साथ में जो भी घटनाएं होती है मेरा किसी के साथ में झगड़ा होता है या कहीं पर जाकर के मेरे साथ में इस बाह्य जगत के साथ में जो कोई भी रिलेटेड घटनाएं हैं उससे जो दुख प्राप्त होता है कहेंगे आदि भौतिक और जो दैव दुख है जैसे कि यह पडेम जैसे ना कि ये फ्लड हो गया ना कि कुछ महामारी हो गई ना कि दुष्का आ गया यह आधि दैविक दुख तो यह आध्यात्मिक आधि भौतिक आधि दैविक तीन तरह के दुख है आप कहेंगे कि अच्छा ठीक है चलिए मेरे किए की करनी तो मुझे मिल रही है किंतु यह पेंडम स्टार्ट हुआ मेरे किए की करनी कैसे हो सकती है कौन ऐसा कहेगा कि मैंने पिछले जन्मों में पाप किया था तो ये पडेम आ गया यदि पडेम सबको इफेक्ट करता है उसका अर्थ तो यह हुआ कि भाई पूरे जगत ने पाप किए हैं ये तो बड़ा ही विचित्र हो गया ये सोचना वगैरह तो देखिए इसका कोई मैथमेटिकल फार्मूला नहीं है कि मैंने पिछले जन्म में इतना पाप किया तो इस जन्म में मुझे इतना इक्वल इतना मुझे दुख भुगतना पड़ेगा ये बहुत ही कॉम्प्लिकेटेड क्वेश्चन है तीन लेवल के दुख है उसमें से कौन से मेरे पाप की वजह से है कौन सा यह कलेक्टिव है वह हम एगजैक्टली बता नहीं पाएंगे किंतु यह हमेशा हमको सोच कर के रखना है यह हमेशा जान कर के रखना है कि यदि आज मेरी आज मेरे हाथ में नहीं है तो मेरा कल आने वाला कल हमेशा मेरे हाथ में है क्योंकि यदि पिछले जन्मों के या तो पिछले बीते सालों के मैंने जो कर्म किए उसका फल यदि मैं आज भुगत रहा हूं तो कल जो मैं भुग दूंगा या तो कल मेरे साथ में जो होगा उस कर्मों का उस फल का कर्म मैं आज कर सकता हूं जदी में एक बार प्रश्न हुआ था बहुत ही सुंदर प्रश्न था कि साधना करके क्या हम कर्म को काट सकते हैं क्या साधना और कर्म इन दोनों के बीच में रिलेशन क्या है बड़ा सुंदर प्रश्न है एक्चुअली देखें तो साधना और कर्म में बेसिकली कोई रिलेशन नहीं है जैसे ठाकुर ने कहा मिर्ची खाएंगे तो तीखा तो लगने ही वाला है इसके बाद में मैं हजार प्रार्थना कर दूं हजार जप कर दूं वो तीखा ना लगे ऐसा तो होने वाला नहीं है तो किंतु साधना करके मिलता क्या है विवेक वैराग्य त्याग यह जो विद्या का ऐश्वर्य है व सब मुझे मिलता है जिससे कि क्या कर्म करना है उसके ऊपर में मेरा कंट्रोल आ जाता है मैंने मिर्ची खा लिया है तो अभी तो मुझे तीखा लग नहीं ही वाला है उससे तो मैं मुक्त नहीं होंगा किंतु भविष्य में मैं मिर्ची ना खाऊं इस प्रलोभन से मैं मुक्त हो जाऊंगा ठाकुर कहते हैं कि ऊंट कैमल कैमल जो होता है मरुभूमि में वो कांटे वाले छोड़ को पौधे को खाता है वह पौधा खाता है पौधे के भीतर में कांटे हैं और मुंह में कांटे जाते हैं मुंह में से रक्त निकलता है किंतु फिर भी उस पौधे को खाने का प्रलोभन इतना स्ट्रांग है कि मुंह से र रक्त निकल रहा है कांटे लग रहे हैं उसको भी वह माइंड नहीं करता तो क्यों क्योंकि वह प्रलोभन उसका इतना स्ट्रांग है साधना करके हमको इस प्रलोभन से मुक्ति मिलेगी एक बार हमने कांटे वाले पौधे खा लिए तो उससे जो रक्त निकलना था मुंह से वह तो बंद नहीं होगा आप जितने ही चाहे वह आप यह कर लीजिए जब ध्यान साधन भजन राज योग कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग जितना ही कर लीजिए एक बार कांटे वाला प खाया है तो मुंह से तो रक्त निकलने ही वाला है वह बंद नहीं होगा क्या हो सकता है भविष्य में जो हम खाएंगे वह भविष्य में हमारे हाथ में इतना विवेक आ जाएगा इतना विल पावर आ जाएगा कि हम भविष्य में क्या खाएंगे क्या नहीं खाएंगे उसके ऊपर हमारा कंट्रोल होगा तो यह इसके लिए स्वामी जी कहते हैं कि यह पुनर्जन्म वाद जो है वह हमको भविष्य में होने वाले के फल से मुक्ति देते हैं इट गिव्स द फ्रीडम टू ह्यूमन सोल इस बात का यह अर्थ है ऐसा नहीं कि मनुष्य के आत्मन को कहीं पिंजरे में डाल करके बंद कर दिया है और उसको मुक्ति मिलने वाली है ऐसा नहीं हमारी चॉइस हमारे कर्म अपने हाथ में है एक विल पावर एक डेवलप होता है एक चॉइस हमको मिलती है फिर मेन इन जनरल ले ऑल द ब्लेम ऑफ लाइफ ऑन द सेलो मेन और वेलिंग ट ऑन गॉड और दे कंजर अप अ घोस्ट एंड से इट इज फेट जनरली हम हमारे साथ में जो कुछ भी बुरा होता है उसका दोष का टोपला अपने साथियों पर डालते हैं जद साथी जदी झगड़ा करने के ऐसा हो सकता है कि उन लोगों का टेंपर बहुत ज्यादा है और झगड़ा कर सकते हैं और डर लगता है उनके ऊपर दोष का टोपला डालने से कहीं भगवान के ऊपर में डालेंगे और कहीं जद भगवान का डर लग गया कि नहीं नहीं भगवान प दोष डालेंगे तो भगवान आएंगे झगड़ने के लिए तो कहीं भूत को खड़ा कर देते हैं हां वो एक ऐसा चं बोलो नहीं कि वो मां की कहानी है ना हमने वो देखा था उस दिन कि राधू बीमार है और एक के बाद एक सभी लोग आकर के मां को देते हैं सलाह देते हैं वो काली मामा आके कहते हैं कि उसके सर पर वो एक तो पागली मामी कहती है नलिनी सबसे पहले कहती है कि वो उसको वो खेपा काली खेपा काली अर्थात की पागल लोगों की काली पागल लोगों की काली का एक कड़ा पहना दो एक चूड़ी पहना दो तो ऐसा पहनाया तो फिर वह राधू की मां नाराज हो गई राधू की मां ने कहा नहीं इसके सर के ऊपर में बर्फ डालो बर्फ लगाओ अभी बर्फ का सेक कर रहे हैं वहां पर काली मामा आ गए काली मामा आ कर के कहते हैं अरे नहीं बर्फ का सेक नहीं चलेगा इसको तो उसके सर के ऊपर में भूत सवार हुआ है किसी तांत्रिक को बुलाओ तो मां ने बेचारी ने सब कुछ कर लिया वो भूत को भगाने वाले तांत्रिक को भी बुला दिया वो मां काली का मं मंत्रिक वो एक कड़ा भी पहना दिया सर के ऊपर में सब कुछ कर दिया किंतु देखिए मां में और हम लोगों में जो डिफरेंस है मां जो करती है भीतर से एकदम क्लियर है कि यह सब कुछ माया है माया के जगत में रहने के लिए सब कुछ करना है यह सब स्वामी जी को पढ़ कर के प्रश्न होगा कि मां का जीवन ऐसा क्यों है स्वामी जी जो कहते हैं एगजैक्टली बिल्कुल वो विरोधी कुछ करती है मां ने एक भूत खड़ा कर दिया है और भूत को भगाने के लिए तांत्रिक को भी बुला दिया है और उसके सामने हाथ जोड़ कर के बड़े ही करुण स्वर से आंखों में से आंसू निकलते निकलते मां कहती है विनती करती है कि आप ही हमारे तारणहार है उस महामूर्ख महाठग तांत्रिक को कि आप नहीं बचाएंगे तो मेरी बच्ची का मेरी बिटिया का क्या होगा यह जो स्वामी जी कहते हैं उसका बिल्कुल विरोधाभासी मां करती है तो ये एक दिस अ वेरी डिलीशियस कंट्रास्ट इन अवर लिटरेचर कि थिरी को किस तरह से आप अप्लाई करते हैं ना वो भी एक देखने की बात है हमने यहां पे थिरी तो समझ ली कि थिरी क्या है वेदांत क्या है किंतु वेदांत को प्रैक्टिकल डे टू डे लाइफ में अप्लाई कैसे करना है वो एक नए तरीके से देखना होगा मने ऐसा कभी-कभी होगा कि थिरी से बिल्कुल विरोधाभासी दिखे ठाकुर का देखिए ठाकुर सभी चीजों में मानते थे एक बार कथामृत में ठाकुर कहते हैं कि हां मैं आज सुबह को अ सबसे पहला चेहरा किसका देखेंगे ना उसके ऊपर डिपेंड करता है कि आपका दिन कैसा जाएगा किसी अशुभ लक्षण वाले लोगों का चेहरा दिख लिया तो फिर दिन भी अशुभ जाएगा और शुभ लक्षण वाले का चेहरा देखा तो दिन भी शुभ जाएगा तो ठाकुर ने एक दिन कहा कि आज सुबह को उठ कर के मैंने सोचा किसी के पगलो की आहट सुनी आते हुए तो मैंने सोचा राखल आ रहा है तो मैंने उसके सामने देख लिया तो राखल नहीं था और कोई था अभी और कौन था उसका नाम तो नहीं कहा हम अनुमान करके कह सकते हैं कि हो सकता है ये हाजरा महाशय होंगे ना कि ऐसा कोई होगा तो ठाकुर ने अभी जब ठाकुर ऐसा कहते तो सब कुछ लोग हसना शुरू कर देते हैं तो ये भी एक बात है कि ठाकुर और मां यही वेदांत की साधना को पकड़ कर के वेदांत की साधना से परे जाकर के वेदांत की जो भी अनुभूतियां है जो भी उपलब्धियां है वो सब प्राप्त करके सर्वोच्च शिखर पर बैठे हैं किंतु फिर भी बिहेव ऐसे कर रहे हैं जैसे यह नियम कानून उनको लगते ही ना हो जो कुछ भी स्वामी जी ने कहा है कि मेरे दो मेने जो दोष है या तो मैं अपने साथियों प डालूंगा ना ही मैं किसी भगवान पर डालूंगा ना ही किसी भूत पर डालूंगा तो ठाकुर ने किसका चेहरा देखा तो वो वो अपना अपना दिन पता नहीं यदि बुरा जाएगा तो उस आदमी का जिसका चेहरा देखा था अनुमान करके कहेंगे कि शायद हजरा का तो हजरा के सर पर डाल दिया अरे भाई आपका दिन खराब जाता है तो हजरा का क्या दोष है फिर एक बार स्वामी ठाकुर ने कहा था कि नरेण आया था कल दक्षिण कलकाता से दक्षिणेश्वर एक जन अपना एक मित्र को लेकर आया था मित्र की आंख थोड़ी सी टेढ़ी है टेरी टेरी मांगला ते बोले तो मैंने सोचा र ये नर नरेट की घोटालो नर ने यह क्या कर दिया किस तरह के अशुभ लक्षण वाले आदमी को लेकर आया है तो अभी ठाकुर के साथ में कुछ बुरा होगा तो सामने वाले का लक्षण अशुभ है ऐसा कहना तो भाई बड़ा ही मैंने आपने फिर तो वेदांत क्या समझा क्या दिस इज अ वेरी डिलीशियस कंट्रास्ट इन अवर थरी एंड एप्लीकेशन बोथ मने स्वामी जी ये ठाकुर खुद जब यह कहते हैं कि जब ईश्वर निर्भर होकर के आप रहते हैं तो आपका सब कुछ ईश्वर के हाथों में है इसके बावजूद ठाकुर सब किसी चीजों में मानते थे अद्वैतानंद जी महाराज एक बार कहते हैं कि उन्होंने ठाकुर काशीपुर की बात है ठाकुर को कैंसर हुआ था आखिरी समय था उस समय की बात तो अद्वैतानंद जी महाराज कहते हैं मैं उनके लिए खाने का एक थाला लेकर के गया और खाने का थाला उनके ऊपर में रखा और उनके पास सामने में रखा और रखते रखते खाने के ऊपर में उनकी सांस गिर गई मने ऐसा निश्वास उसके ऊपर में गिरी अभी श्वास गिरना या निश्वास गिरना यह सब क्या है अभी जो आपको अपने लिए खाना बनाएगा या तो जो खाना सर्व करेगा उसकी सांस उसके ऊपर में तो गिरेगी उस भी पता नहीं क्या उसका किस तरह से एक्सप्लेन करेंगे ठाकुर ने इमीडिएट कह दिया अच्छा इस खाने को रहने दो मैं अभी नहीं खा पाऊंगा अद्वैतानंद जी महाराज अपने मुंह से इस बात का वर्णन करते हैं तो यह किसी की निश्वास खाने पर गिरना फिर वह खाना नहीं खाना सैनिटेशन और हेल्थ की दृष्टि से एक हो सकता है कि बहुत सारे कुक जो होते हैं वो मास्क पहनते हैं फिर सर के ऊपर में टोपी पहनते हैं जिससे कि बाल वगैरह खाने में ना गिर किंतु यहां पर ठाकुर हेल्थ और सैनिटेशन की दृष्टि से नहीं कहते हैं वो दूसरी दृष्टि से कहते हैं खाने के ऊपर में किसी की नजर लग गई है अभी इस तरह का खाना खाना उचित नहीं है तो ठाकुर और मां यह सब चीजों में विश्वास रखते थे किंतु फिर भी स्वा जी कहते हैं कि देखिए कि यदि आप अपने साथ में जो कुछ भी मिसफॉर्चून हो रहा है अर्थात कि बुरी घटना परंपरा आपके साथ में हो रही है तो इसके लिए दोष का टोपला आप किसी अपने साथियों के ऊपर में या तो परिवार जनों के ऊपर में ना कि सगे संबंधियों के ऊपर में मत डालिए भगवान के ऊपर में भी मत डालिए ना कि कोई भूत को खड़ा कर दीजिए और उसके सर प भी मत डालिए मान लीजिए कि आपके साथ जो हो रहा है आज व कल आपने जो किया था उसी का यह रिजल्ट है उसी का परिणाम है स्वामी जी क्या कहते हैं वी रीप व्हाट वी सो हम वही फसल बटोर जो कि हमने मिट्टी में बोया है यदि हमने गेहूं का बीज मिट्टी में लगाया है तो गेहूं की ही फसल को काटेंगे शेयरडीवीएन मिलेगा जयराम बाटी में शुगर केन का हमारा खेत है तो हम लोग जब टीसी से ना पीपीटीसी से जाते थे तो हम सब लोग उस खेत में जाते थे फिर वहां पर जो इंचार्ज स्वामी जी है वो हमको वो शुगर कैन काट काट करके हम सबको देते थे उस समय मेरे दांत भी इतने स्ट्रांग थे कि मैं खा पाता था अभी नहीं खा पाऊंगा किंतु उस समय ने इतना मीठा टेस्ट प्योर शुगर खाते हैं ना इतना मीठा टेस्ट था उस शुगर केन का था मतलब क्या अभी भी होगा ही किंतु अभी वो डायरेक्ट वो खाने की अभी नहीं है कैपेसिटी तो यदि आप जो मिट्टी में बोएंग उसी फसल आपको मिलने वाली है आपके साथ में आज शुभ घटना परंपरा हो रही है तो उसका अर्थ यही है कि आपने शुभ कर्म किए थे दुर्घटनाओं की परंपरा चल रही है तो उसका अर्थ यही है कि आपने दुष्कर्म किए थे अभी इसके साथ में चलो ठाकुर और मातो जो मानते थे वो मानते थे कुछ-कुछ चीजों का अभी जैसे कि राजकोट में ही कल एक आग लग गई और बहुत सारे लोगों की मृत्यु हो गई तो अभी आप कहेंगे कि जो दुर्घटना बहुत सारे लोगों को एक साथ में अफेक्ट करती है तो क्या सभी ने एक साथ में एक ही तरह का पाप किया होगा इस बात को कैसे रिकंस इल करें पडेम है ना कि यह फ्लड है ना कि ये क्लाउड बर्स्ट है ना कि यह फेमिन है ना कि ये क्लाइमेट चेंज है जो कि ग्लोबल डिजास्टर है उसको हम किस तरह से इस थिरी के साथ में कनेक्ट करें तो सही बताऊं मैंने एक बार प्रयास किया था कल ही मेरा एक अपने वॉलंटस साथ में बात हो रही थी कि किस तरह से ये ग्लोबल डिजास्टर को हम अपने इंडिविजुअल कर्म शुभ या अशुभ कर्म के साथ में कनेक्ट करें किस तरह से इस फार्मूला को बिठाए मैंने कहा कि देखिए मुझे नहीं लगता कि इस तरह से एग्जैक्ट वन टू वन इक्वेशन आप बिठा सकते हैं कि मैंने इतने पाप किए तो ये पडेम हुआ इसमें इतने लोग मर गए या तो कलेक्टिव पाप किया होगा व्हाट एवर मैं कहता हूं कि इस तरह के इक्वेशन करके हम मेंटल जिम्नास्टिक में जद जाएंगे तो इसका कोई लाभ किसी को मिलने वाला नहीं है बेटर है कि यह समझे कि हमारा डेस्टिनी अपने हाथ में है आज जो हो रहा है उसका जो भी सॉल्यूशन आप निकाले कल आपके साथ में अच्छा हो इसके लिए आज से ही शुभ कर्म करना शुरू कर दीजिए अभी ऐसा होगा कि भविष्य में पडेम तो होते ही रहेंगे भविष्य में नेचुरल डिजास्टर हो ही रहेंगे आप कहेंगे कि अरे भाई हम कितने शुभ कर्म कर दे क्लाउड बर्स्ट जद होने वाला है मैं अमरनाथ की यात्रा में गया हूं कितने ही हजार शुभ कर्म करने के बावजूद जो क्लाउड बस्ट होना था तो हुआ ही तो फिर ऐसा क्यों तो ऐसा कोई एग्जैक्ट वन टू वन इक्वेशन हम नहीं बिठा सकेंगे एक जनरल इक्वेशन बिठा करके हमको चलना है कि आने वाला भविष्य अपने हाथ में है देर फॉर ब्लेम नन फॉर योर ओन फॉल्ट्स स्टैंड अपॉन योर ओन फीट एंड टेक द होल रिस्पांसिबिलिटी अपॉन योरसेल्फ इसीलिए और किसी को अपने दोष का जिम्मेदारी मत दीजिए अपने दोष का जिम्मा मत ठहराए स्टैंड अपऑन योर ओन फीट अपने खुद के पैरों पर खड़े रहिए अपने खुद के पैरों प पैरों पे खड़े होइए एंड टेक द होल रिस्पांसिबिलिटी अपॉन योरसेल्फ पूरा जिम्मा अपने कंधों पर ले लीजिए से कहो दिस मिजी दैट आई एम सफरिंग इज ऑफ माय ओन डूइंग यह जो दुख दर्द दुर्घटना मेरे साथ में हो रही है इसका जिम्मा जिम्मेदार मैं खुद हूं एंड दैट वेरी थिंग प्रूव्स दैट इट विल हैव टू बी अनन बाय मी अलोन और इस दुर्घटना परंपरा की चेन को तोड़ ने का परंपरा को काटने का रास्ता उपाय मेरे ही हाथ में है ट च आई क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर ना पाप का घर बनाते हैं उसके साथ में तो मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा अभी यह प्रश्न होता है कि दूसरों ने जो पाप किया उसका जदी छाटा मेरे सर पर जदी उड़ेगा कि नहीं उड़ेगा उसके साथ में उसके बारे में मैं क्या कर सकता हूं जैसे कि अभी दूसरे आदमी ने पाप कर्म किया अभी वह उसकी गाड़ी भगा रहा है उसके साथ में एक्सीडेंट हो गया अभी चलो उसने पाप किया उसके साथ में एक्सीडेंट हुआ वहां तक तो ठीक है वो एक्सीडेंट मेरे साथ में हो गया तो भाई प्रश्न होगा कि उसका पाप का जिम्मा मैं मेरे सर पर कैसे आ गया उसके साथ में तो जो मरा ना कि हाथ पैर टूटे जो भी कुछ हुआ मेरा क्या मैंने तो कुछ नहीं किया था फिर भी आई बिकम पार्ट ऑफ दिस एक्सीडेंट तो इसका कोई इजी सलूशन नहीं है हम ऐसा कह सकते हैं कि यदि एक्सीडेंट मेरे साथ में हुआ उसके पाप के साथ में मेरा भी पाप थोड़ा बहुत जुड़ा होगा कि जो भी है यहां पे स्वामी जी बड़ा ही स्पष्ट कहते हैं कि यदि दूसरों ने कोई पाप किया है और उसका फल यदि वो भुगत रहा है तो उसके साथ में मैं ज्यादा कुछ नहीं कर पाऊंगा जो अवतार पुरुष होते हैं जो ज्ञानी पुरुष होते हैं जो सिद्ध पुरुष होते हैं वो दूसरों का कर्म अपने सर पर ले सकते हैं जैसे कि ठाकुर की ही जीवन में यह घटना है कि ठाकुर की साधना जब समाप्त हुई उसके बाद में हमको पता है कि मथुर बाबू का विवाह रानी रासमुस की वजह से राणी रासमुल मंदिर उनके आधिपत्य के अंदर था उनके आधिपत्य में था उसका मैनेजमेंट मथुर बाबू के हाथ में था अभी वह उस उनकी बीवी की मृत्यु हो गई तो अभी रास मणी ने सोचा कि अच्छा चलो मथुर बाबू जदी अभी उन दोनों के बीच में तो रिलेशन क्या था रानी रामानी और मथुर बाबू के बीच में उनकी कन्या ही तो रिलेशन थी अभी वह कन्या का मृत्यु हो गया है तो मथुर बाबू बिखड़ जाएंगे रास माणी से और मथुर बाबू का ये जो मैनेजमेंट का स्टाइल था रास माणी को बहुत अच्छा अा लगता था उनको लगता था उनके जितने और दूसरे जमाई है या तो फिर और जितने भी रिलेटिव है उन सबसे बेहतर मैनेजमेंट एडमिनिस्ट्रेटिव स्किल मथुर बाबू में है तो मथुर बाबू जद उनसे बिछड़ जाए तो उनका यह जो पूरा फाइनेंशियल एंपायर खड़ा हुआ है जमींदारी है काली मंदिर है जो कुछ भी है ब्रिटिश गवर्नमेंट के साथ में डीएल करती है तो ये डीएल करने वाले मथुर बाबू यदि उनसे बिछड़ जाएंगे तो पूरा फाइनेंशियल एंपायर ध्वस्त हो जाएगा और स्त्रियों की तो एक लिमिट होती है रामानी खुद कितना कर पाएगी उनकी कन्या कितना कर पाएंगी तो रासमुसेन का विवाह इनके साथ में करवा दिया मथुर बाबू के साथ में अभी रास माणी का तो देहांत हुआ और दूसरी कन्या जगदंबा दासी जिसका मथुर बाबू के साथ में पुनर्विवाह हुआ था वो खुद बीमार हो गई वो बीमार हुई ऐसी बीमार हुई कि मृत्यु के दरवाजे के ऊपर में आकर के खड़ी हो गई उस समय मथुर बाबू ने आक के ठाकुर को कहा कि मेरी बीवी का मेरी पत्नी का मृत्यु होगा और रानी रामनी की सं पत्ति का जो मैनेजमेंट एडमिनिस्ट्रेशन मेरे हाथ में है व मेरे हाथ से चला जाएगा दूसरे ज जमाई है या दूसरे रिलेटिव है राजमणि के शायद उनके हाथ में ये आ जाएगा ये फाइनेंशियल एंपायर रानी राजमणि का उससे मुझे कोई गम नहीं है किंतु मैं काली मंदिर का वही वट मेरे हाथ से चला जाएगा और आपकी सेवा का जो मुझे मौका मिला है वह अधिकार छीन लिया जाएगा इस बात का मुझे सबसे ज्यादा गम है ऐसा बोल कर के मथुर बाबू ने ठाकुर को कहा तो ठाकुर ने जगदंबा दासी का जो बीमारी है अपने सर पर ले ली और उसी वजह से ठाकुर को छ महीने इतना भुगतना पड़ा इतना भुगतना पड़ा किंतु उनकी पत्नी जगदंबा दासी बच गई और बच गई तो फिर मथुर बाबू का फिर से वह अधिकार था काली मंदिर के ऊपर में वही वट का एडमिनिस्ट्रेशन का वो वैसा ही रहा और मरते दम तक उन्होंने ठाकुर की सेवा की तो यहां पे स्वामी जी कहते तो है जो पाप का मकान दूसरे बनाते हैं वो उस मकान को वही लोग तोड़ पाएंगे हम लोग कुछ नहीं कर पाएंगे किंतु स्वामी जी ये कहते हैं हम जैसे सामान्य लोगों के बारे में ठाकुर या तो जो कि उ उच्च कोटि के जो महात्मा होते हैं दूसरों के पाप अपने सर पर ले लेते हैं तो हालांकि पाप का तो भोग भुगतना ही होगा वही है कि इन्होंने दया करके हमारे पाप ले लिए हैं तो दूसरा कोई भुगते तो ये यहां पे एक केविट है यहां पे एक कंडीशन है देयर फोर स्टैंड अप बी बोल्ड बी स्ट्रांग इसलिए खड़े हो बोल्ड हो स्ट्रांग हो साहसिक हो वीर्य वान हो टेक द होल रिस्पांसिबिलिटी ऑन योर ओन शोल्डर्स पूरा जिम्मा अपने कंधों पे ले लो एंड नो दैट यू आर द क्रिएटर ऑफ योर ओन डेस्टिनी स्वामी जी का बहुत ही फेमस कोटेशन जितनी ही वो छोटी-छोटी किताबें है शक्ति दई विचार ना कि वो जितनी भी वो थॉट्स ऑफ पावर वगैरह सब में शायद आपको यह कोटेशन मिलेगा बड़ा ही स्टैंडर्ड बड़ा ही फेमस कोटेशन है कि आप ही है अपने भविष्य के निर्माता यू आर द क्रिएटर ऑफ योर ओन डेस्टिनी ऑल द स्ट्रेंथ एंड सकर यू वांट इज विदन योरसेल्फ जो भी साहस चाहिए जो कोई भी प्रेरणा चाहिए वह आपके भीतर में ऑलरेडी विद्यमान है तो यदि यह कोटेशन पढ़ते हैं तो हमको एक ऐसा एक माइंड में आता है कि स्वामी जी कहते हैं कि परीक्षा में बहुत मेहनत करो तो परीक्षा पास हो जाओगे मिलिट्री में आपको भर्ती चाहिए वह आर्मी में जद आपको आर्मी का भर्ती मेला होता है ना तो लोग पहले से ही वो रनिंग का जॉगिंग का प्रैक्टिस कर देते हैं वोह 10 किलोमीटर ना कि इतना कुछ आपको दौड़ना होता है तो मेहनत करोगे अभी से दौड़ना शुरू कर दो वो भर्ती मेले में आप निकल जाएंगे या अभी कुछ साधु लोग वो अमरनाथ वगैरह जाने के बारे में सोच रहा है तो उनके साथ में मैं बात कर रहा था तो बोल रहा है कि अभी से स्टेप्स चढ़ना उतरना प्रैक्टिस कर दो क्योंकि वहां पर क्या है वो सीधा चढ़ना होता है और जनरली हम शहर में रहने वाले लोग तो सब एक सरफेस एक सपाट जमीन पर चलना सीखे हैं ना तो वो पहाड़ पर चलना हमारे लिए मुश्किल है तो ये स्टेप्स चढ़ना उतरना शुरू करो दिन में आधा घंटा एक घंटा तो एक कैपेसिटी बिल्ड अप होगी कि पहाड़ पर जा रहे हैं अमरनाथ की यात्रा में तो हम सीधा-सीधा जो चढ़ा है पहाड़ के ऊपर में तो हमारा बॉडी अभी से बिल्ड अप हो जाए तो हमको इस तरह से कुछ सोचते हैं कि कंपटीशन परीक्षा में पास होना है ना कि अमरनाथ की यात्रा करनी है ना कि आर्मी का भर्ती मेला है वो सब चीजों में यदि हमको यह कंपटीशन एग्जाम है इन सब चीजों में हमको जद पास होना है तो हमको मेहनत करनी है ये एक सरफेस मीनिंग है दैट इज अ डीपर मीनिंग इनसाइड दैट ये जन्म जन्मांतर की यात्रा है इस जन्म जन्मांतर की यात्रा में यदि सफलता प्राप्त करनी है ईश्वर दर्शन या तो फिर आध्यात्मिक उन्नति कहो ना कि ये पार मार्थी उन्नति कहो बाहर के जगत में ना कि भीतर के जगत में जब भी सक्सेस प्राप्त करनी है तो उसके लिए शुभ कर्मों का एक फाउंडेशन आज से ही बनाना शुरू कर दो तो कल जाकर के पुण्य पैलेस एक पुण्य का एक महल इस शुभ कर्म के फाउंडेशन के ऊपर में आप डाल पाएंगे इसका सरफेस मीनिंग भी तो है ही है कि वो स्वामी जी ने कहा ना कि वो सेकंड टाइम अमेरिका जा रहे हैं यात्रा करते करते देखा कि ये जहाज के जितने खलासी वगैरह जो है ना वो जो मैनुअल लेबरर जो होते हैं जहाज के ऊपर में वो सड़ उठाना है ना कि वो यह सब जो करना है वो मैनुअल वर्क जहाज के ऊपर में तो देखा कि सभी लोग इंडियन है और इतना मेहनत करते हैं मन में इतना स्फूर्ति है विल पावर है फिजिकल स्ट्रेंथ है कि स्वामी जी कहते हैं कि भारतीय प्रजा पे एक तरह की मेरी हताशा हो गई थी ये ब्रिटिश लोग कहते हैं ना कि जब युद्ध जब स्टार्ट होगा तो ये इंडियन सिपाही जितने हैं वह सब भाग जाएंगे और यह ब्रिटिश ऑफिसर है वही साहज से वह युद्ध के मैदान में डटे रहेंगे ये 1857 कहो न फिर जितने भी युद्ध कहो ब्रिटिश ऑफिसर की वजह से ही हम लोगों ने विजय प्राप्त की है वरना यह इंडियन सिपाही पे सब होता तो कब के हम लोग ये लोग तो कब के भाग खड़े हुए होते और वो हार गए होते तो यह जो सब एक प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा था कि इंडियन लोग कायर है इंडियन लोग डरपोक है अ स्वामी जी ने खुद ने कहा है इस प्रजा के ऊपर में हताशा आ गई थी मेरी किंतु फिर ये इंडियन खलासिया को देखा कि किस तरह से यदि तूफान आता है तो तूफान में नौका डूब जाने का जो डर रहता है उसमें यह जो ब्रिटिश खलासी होते हैं ना मैनुअल लेबरर जितने भी वे लोग शराब पी कर के नशे में मत्त हो जाते हैं शराब क्यों पीते हैं नशा क्यों करते हैं जिससे कि यह जो डर होता है मृत्यु भय वो थोड़ा सा कट जाए यदि आप नशे में होंगे तो मृत्यु भय नहीं होगा किंतु यह इंडियन खलासी नशा नहीं करेंगे पूरे ज्ञान से पूरे होश से मृत्यु का सामना करेंगे और उसी जो तूफान है उसी में यह जो सर्ड खोल कर के रखना है या तो जो जहाज को प्रॉपर्ली मेंटेन करना है मैनेज करना है यह इंडियन लोग करते हैं तो यह देखिए कि यह स्ट्रेंथ फिजिकल स्ट्रेंथ एंड यह विल पावर मेंटल स्ट्रेंथ दोनों ही यह है एक सक्सेस का फाउंडेशन स्वामी जी दोनों लेवल पे कहते हैं कि यह जो आपका डे टू डे लाइफ में सक्सेस चाहिए वो तो है फिर यह जन्म जन्मांतर की यह जो सफलता हमको चाहिए यात्रा उसमें सफल होने के लिए उसके लिए भी यह पुनर जन्म वाद और अपने किए कर्म का अपने को ही फल मिलता है यह लॉ ऑफ कर्मा दैट इज हेल्पफुल टू अस और आखिर में देयर फॉर मेक योर ओन फ्यूचर अपना भविष्य अपने हाथों से गढ़ो लेट द डेड पास्ट बरी इट्स डेड आज मेरे साथ में जो हुआ उसके लिए पता नहीं कितने जन्मों पहले का कितने सालों पहले का मेरा दुष्कर्म रिस्पांसिबल था वह सब छोड़ दो जो हो गया सो हो गया कल को भूल जाओ आगामी कल को आने वाले कल को याद रखो लेट द डेट पास्ट बरी इट्स डेड द इनफाइनों एं भविष्य की आपके सामने खड़ी है एंड यू मस्ट ऑलवेज रिमेंबर दैट ईच वर्ड थॉट एंड डीड लेज अप ए स्टोर फॉर यू एंड दैट एज द बेड थॉट्स एंड बेड वर्क्स आर रेडी टू स्प्रिंग अपऑन यू लाइक टाइगर्स सो आल्सो देयर इज द इंस्पायरिंग होप दैट द गुड थॉट्स एंड गुड डीड्स आर रेडी विद द पावर ऑफ 100000 एंजल्स टू डिफेंड यू ऑलवेज एंड फॉवर हमेशा ये याद रखो कि प्रत्येक विचार प्र प्रत्यक शब्द और प्रत्येक कर्म जो कि आप करते हैं जो कि मुंह से उच्चारण करते हैं और मन से सोचते हैं वह एक फाउंडेशन बनाते हैं और यह शुभ कर्मों का फाउंडेशन कहो ना कि दुष्कर्म का फाउंडेशन कहो आपकी यात्रा में हमेशा आपका संग ही रहेगा यदि आपने दुष्कर्म का फाउंडेशन डाला है तो यात्रा कर रहे हैं तो शेर और भालू की तरह आकर के आपके ऊपर में आक्रमण करेंगे आपको तहस नहस कर देंगे और यदि शुभ कर्मों का फाउंडेशन डाला है शुभ विचारों का फाउंडेशन डाला है शुभ शब्दों का आशीर्वाद मय वाणी का फाउंडेशन डाला है तो यही शुभ कर्म शुभ वाणी शुभ विचार लाखों लाखों देवताओं की शक्ति से आपकी रक्षा करने के लिए तत्पर रहेंगे लाइक विद द पावर रेडी विद द पावर ऑफ ए 100 थाउ एंजल्स टू डिफेंड यू ऑलवेज एंड फॉवर लाखों लाखों देवताओं की शक्ति से हमेशा ह हमेशा आपकी रक्षा करने के लिए तैयार रहेंगे यह शुभ कर्मों का फाउंडेशन और यह दुष्कर्म का फाउंडेशन दोनों दोनों हमारे सामने आते हैं रास्ते में और हम जिस तरह से हम जो कुछ किए हैं इस रास्ते में आगे में हम जो कुछ करिए हैं उसी का फल हमको इस रास्ते में इस यात्रा में आगे में भुगतना तो फिर आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि तसत श्री राम कृष्णा

Questions & Answers

प कर्मो से और प्रारब्ध में डिफरेंस क्या है जद यह प्रश्न करेंगे कर्म है कि जो कर्म हम करते हैं और प्रारब्ध है कि कर्म का किस तरह का फल हमको मिलता है यह हमारे प्रारब्ध कर्म है ऐसा कहा जाता है कर्म शब्द को किए हुए कर्म के रूप में भी हम डिफाइन कर सकते हैं और कर्म के फल के रूप में भी इसको डिफाइन कर सकते प्रारब्ध कर्मा अर्थात की पहले किए हुए कर्मों का फल कर्म बेसिकली दो तरह के हैं एक तो कर दिए हैं और नहीं किए हैं दो तरह के कर्म है जो कर्म हमने कर दिए हैं वो हाथ से छूटे हुए तीर की तरह है वो प्रारब्ध कर्मा वो तीर छूट गया अभी तीर कहीं के तो लगने वाला है हम तीर को रिकॉल नहीं कर पाएंगे जो तीर अपने हाथ में है और जो तीर उसके भीतर में है तीर रखने का वो जो होता है ना रामायण महाभारत देखा होगा सुमर हां अच्छा वो रामायण महाभारत में वो जो भगवान राम वो पीछे में वो रख कर के आता है ना उसमें तीर रखा होता है फिर उसमें से निकालता है तो जो तीर हाथ में है ना कि तीर उसके वो जो बैक पैक में है तो वो इस तरह के कर्मा है जो कि हमने नहीं किए या तो फिर करने को जा रहे हैं यदि विवेक जागृत होगा तो हम उसको शुभ कर्म करेंगे और विवेक सोया हुआ है तो दुष्कर्म करते रहेंगे ये स्वामी जी ने जैसे कहा ना देखिए विचार वाणी और वर्तन तीन है थॉट डीड एंड वर्ड्स माने हम सिर्फ ये नहीं है कि अच्छे विचार अच्छे कर्म करें या बुरे कर्म करे अच्छे विचार भी और बुरे विचार भी इसके ऊपर में असर करते हैं अच्छी वाणी भी बुरी वाणी भी असर करती है स्वामी जी ने शिकागो वक्त में कहा था कि पहले के समय में तलवार से लोगों को मारा जाता था आज यह कलम की मदद से लोगों का हनन किया जाता है लोगों की हत्या की जाती है कलम की वजह से ऐसा स्वामी जी ने क्यों कहा कि कलम का उपयोग करके पेन का उपयोग करके जो कुछ भी लिखा गया है भारत के बारे में यह ब्रिटिश लोगों ने कि भारतीय प्रजा डरपोक है उनका कोई इतिहास नहीं है इन लोगों की संस्कृति पूरी राक्षसी संस्कृति है उन्होंने उनके पास में जो कुछ भी अच्छा है उनके शास्त्र में उनकी राजनीति में वह सब भारत से लिया हुआ है तो यह जो सब इन लोगों ने लिखा है वो कलम से लिखा है और कलम से भारत की हत्या कर रहे हैं तो मैंने सिर्फ यह बात नहीं है कि आप अपने कर्म से जो कर रहे हैं बात यह है कि आप वाणी से और विचार से भी लोगों को हानि पहु पहुंचा सकते हैं इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि तीनों तरह के चीजों से हमको बचना है आप वो पुराने व प्रवचन आप देखेंगे तो मैं बहुत डिटेल में डिस्कस किया हूं यहां पर मैं जद शॉर्ट में डिस्कस करूं तो देखिए तीन चीज है एक तो है स्थूल देह एक तो है आत्मन ठीक अभी स्थूल देह को एक घड़े के रूप में ले लीजिए जिसम में आपने पानी भरा है और आत्मन को ले लीजिए जो कि सूरज है अभी होगा क्या कि घड़े के भीतर में पानी के भीतर में सूरज का प्रतिबिंब गिरेगा ठीक तो आपको लगेगा कि यह प्रतिबिंब की मदद से यह घड़ा प्रकाशित हो रहा है एक्चुअली आप देखिए कि सूरज का और घड़े का कोई रिलेशन नहीं घड़ा तोड़ दे घड़ा नया ले आए हजार घड़े बना दे कि एक ही घड़ा रखे सूरज को उस घड़े के साथ में कोई रिलेशन नहीं किंतु प्रत्येक घड़े के भीतर में सूरज का एक प्रतिबिंब रहेगा ही रहेगा तो यह प्रतिबिंब जो है ना सूरज का वो घड़ा और सूरज के बीच में एक लिंक है एक ब्रिज है वो प्रतिबिंब जिसको हम कहते हैं सूक्ष्म शरीर तो ये सूक्ष्म शरीर हमको लगता तो है जीवंत हमको लगता तो है इसके भीतर में ज्ञान है इसके भीतर में जीवन है इसके भीतर में एक इच्छा शक्ति है बुद्धि है इसके इसका एक अहंकार मन बुद्धि चित्त और अहंकार मन जो कि संकल्प विकल्प करता है बुद्धि जो कि अपनी इंटेलेक्ट है जिससे कि हम एक इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन अपना लाइफ का बनाते हैं चित्त अर्थात कि हमारे संस्कारों का स्टोरेज और अहंकार अर्थात कि एक अस्मिता मैं मैं मेरा नाम है कृष्ण सखानू तो मैं कृष्ण सखानू हूं मेरा जन्म इस समय हुआ था मेरे माता-पिता मेरे गुरु मेरा यह संघ मेरे बंधु बांधव ये लोग है ऐसा जो सेंस ऑफ आइडेंटिटी होती है इसको अहम कहते हैं तो ये मन बुद्धि चित्त और अहंकार जो कि मुझे आइडेंटिटी देते हैं जो कि मैं मुझे मैं बनाते हैं मुझे आपसे डिफरेंट बनाते हैं वो दैट इज अ सूक्ष्म शरीर तो हमको लगता तो है कि सूक्ष्म शरीर चेतन वंत है किंतु चेतन वंत नहीं है वो तो सिर्फ असली चेतन्य का सिर्फ प्रकाश मात्र है अभी आप देखेंगे कि एक घड़ा टूट गया तो दूसरा घड़ा बना तो दूसरे घड़े के भीतर में वही सूक्ष्म शरीर का प्रकाश रहेगा घड़े के बाद घड़े बनते जाएंगे टूटते जाएंगे सूक्ष्म शरीर की या तो फिर सूरज के प्रकाश की यह पर परछाई की यात्रा चलती रहेगी आखिर में एक समय ऐसा आएगा कि परछाई को घड़े के भीतर में रहना है वो मोह भंग हो जाएगा मोह रहता है उसका ये परछाई का कि मैं घड़े के साथ में मित्रता करके घड़े के भीतर में रहूं वो मोह भंग एक समय हो जाएगा कामना वासनाओं से मुक्ति मिल जाएगी फिर वो परछाई कहेंगे कि हजार घड़े बनते रहे मैं उसके साथ में युक्त नहीं होना है तो फिर उसने पुनर्जन्म लेने का बंद कर दिया गड़े के साथ में एसोसिएट होने का बंद कर दिया तो क्या हुआ ये जो मेरी सेल्फ आइडेंटिटी थी वो मेरे सही स्वरूप में मिल गई परछाई अदृश्य हो गई सूरज वैसे का वैसा ही है परछाई की जो घड़े एक घड़े से दूसरे घड़े में जाने की यात्रा थी वो टूट गई राइट ये है पुनर्जन्म वाद मेरा सूक्ष्म शरीर एक के बाद एक स्थूल शरीर ग्रहण करता रहता है क्यों क्योंकि सूक्ष्म शरीर के भीतर में कामनाएं वासना एं है अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश मोह मद मोह मा श्य वगैरह षड रिपु वगैरह जो कुछ भी है सब इसके भीतर में है जिस दिन साधना करके ये सब चले जाएंगे यह सूक्ष्म देह नया स्थूल देह ग्रहण करना बंद कर देगा और अपने सही स्वरूप में लीन हो जाएगा उपमा आप कैसे भी दे सकते हैं मैंने देर इज नथिंग हार्ड एंड फास्ट अबाउट उपमा क्योंकि उपमा हमेशा एक देशी होती है वो जो ठाकुर ने कहा ना कि शेर की तरह दहाड़ता है तो क्या शेर की तरह चार पैर है शेर की तरह पूंछ है शेर की तरह वो मान है क्या नहीं वो शेर की तरह दहाड़ता है वो माने आप कुछ भी कह सकते हैं आईडिया क्लियर होना चाहिए कि स्थूल देह और आत्मन ये दोनों एब्सलूट डिफरेंट है इन दोनों के बीच में कहीं पे कुछ भी सिमिलरिटी नहीं है किंतु ये सूक्ष्म देह का कांसेप्ट है ना यही समझने में हमारी सब इंटेलेक्चुअल जिम्नास्टिक हो जाती है क्योंकि हम लोग एक वेस्टर्न आइडियाज हमारे मन में घर कर गए हैं भले ही चाहे हमने वेस्टर्न फिलोसोफी ना पढ़ा हो किंतु आजकल का जो पूरा पॉपुलर कल्चर है ना वो पूरा वो हॉलीवुड का सीधा सधी कॉपी पेस्ट है तो अभी हॉलीवुड क्या है कि वो क्रिश्चन थियोलॉजी के बेस पे ये सब बना है ना वेस्टर्न एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पूरी उनकी स्टोरी टेलिंग उनकी मिथ्स उनके लेजेंड्स सब तो क्रिश्चन थियोलॉजी के ऊपर में बने हैं तो देयर इज एन एब्सलूट गुड एंड देयर इज एन एब्सलूट इवल तो ये जो एब्सलूट गुड और एब्सलूट इविल का फाइट होगा और एब्सलूट गुड विल ऑलवेज विन तो ये उनकी स्टोरीज होती है जो कि हमने सीधी अपने यहां पर ले आई है अपना अपनी पौराण कथाओं को देखिए रावण और राम के बीच में युद्ध हुआ किंतु रावण तो वेदज था शास्त्रज्ञ था और रावण के ही भाई उसको डांटते हैं कि तुम क्या पागलपन करके आए हो सीता का हरण करके आए लंका ऑलरेडी नष्ट हो चुकी है जिस दिन सीता की आह इस नौका के ऊपर में लंका के ऊपर में गिरी लंका ऑलरेडी भस्म हो चुकी है तो ये जो अपने यहां पर ऐसा एब्सलूट गुड एब्सलूट इविल ऐसा नहीं जैसे शेड्स ऑफ ग्रे राम को देखिए भगवान राम को पु पुरुषोत्तम है किंतु पीछे से वाली का संहार किया ने मां सीता का त्याग किया एक धोबी ने बोल दिया तो यह सब चीज मुझे बड़ी ही लगती है क्योंकि हम मां का जीवन पढ़ते हैं तो मा सीता को किसी ने बोल दिया हो त्याग कर दिया अरे भैया क्या ये सो देर इ लवेज शेड ऑफ ग्रेन अवर पर्सनालिटी क्योंकि हम लोग ऐसा कभी नहीं सोचते कि देर इ एब्सलूट गुड और एब्सलूट बैड ज एब्सलूट ब्रह्मण विदन चच सत्व रजस तमस ल गुण आर देर सो ये जो आइडिया है ईस्टन थियोलॉजी प बने स्टोरी टेलिंग ये भीतर में जाने में थोड़ा दे देर लगता है और हम कभी-कभी ये डिफरेंस नहीं कर पाते हैं ये कभी-कभी ये सुपर हीरोज ये सुपरमैन वगैरह स्टोरीज देखते हैं ना अमेरिका की और ये फिर रामायण को भी सुपरमैन की तरह प्रोजेक्ट करते हैं भगवान राम को भी हियर कम्स अ ग्रेट डिफरेंस कि आप रामायण को ठीक-ठीक तरीके से किसने लिखा है वो जो रामायण जो टीवी सीरीज जो चली गई उसमें रावण का चरित्र तो नंस था उसके भीतर में व उस शेड्स ऑफ ग्रे दिखाए थे अच्छा कार्य भी करता है बुरा कार्य भी करता है मति भ्रष्ट हो गई तो मां सीता का अपरण कर लिया किंतु आजकल रामायण का डिपिक्शन कैसे होगा वो हॉलीवुड की तरह वो एब्सलूट विलन है और ये एब्सलूट हीरो है और दोनों फाइट करके हीरो विलन को हरा के जीत जाता है दिस इज नॉट इंडियन फिलोसोफी दिस इज नॉट इंडियन स्टाइल ऑफ स्टोरी टेलिंग ठाकुर महा स्वामी जी की सही में बताऊ तो कोई व्याख्या नहीं है य मां का देखिए जयराम बाटी में ब्राह्मण भोज हुआ तो ब्राह्मण भोज बीच-बीच में होता है इट्ज अ वेरी गुड थिंग अभी वो ब्राह्मण भोज में ऐसा नियम है कि ब्राह्मणी परोसें यहां पे मां के तो सब सन्यासी शिष्य भी है वो तो कोवाल पाड़ा से गए हुए लड़के सब काम कर रहे हैं वहां पे वो तो ब्राह्मण है नहीं तो अभी क्या करेंगे सन्यासी का तो मतलब वो तो ब्राह्मण ब्राह्मण के परे है ना तो वे लोग सर्व कर रहे हैं तो कुछ ब्राह्मण लोगों ने देख लिया कि अरे ब्राह्मण भोज में ब्राह्मणों को अब्राह्मण सर्व कर रहा है परोस रहा है यह तो इतना बड़ा पाप सब लोग खड़े हो गए कि हम लोग नहीं इसके हाथों का खाना खाएंगे मां बेचारी ऐसी असहाय होकर के सर के ऊपर में वस्त्र डाल के और दो हाथ जोड़ के रोती रोती कहती है अरे आप खाना खा लीजिए बैठ जाइए कृपा करके आधा खाना छोड़ के मत चले जाइए कितना पाप लगेगा इससे ये वो फिर ये ब्राह्मण लोगों ने समझ लिया कि आ गया है एक मूरख अपने हाथ में तो पूरा दंड वसूल किया कि इतना रुपया दंड करना होगा तब कहीं जाकर के हम खाना खाए तो दंड भी दिया खाना खा कर के गए अभी प्रश्न होता है कि मां जगत जननी जगदंबा स्वयं ये हजार ब्राह्मण जद उनके घर पर खाना खाएंगे तो उनका जन्म धन्य हो जाएगा ना कि मां उनके सामने हाथ जोड़ कर के रोती रोती कहती है आंखों में से आंसू कि आप खाना खा लीजिए खाना खा लीजिए बाद में क्या हुआ पता है एक ललित चट्टोपाध्याय चोपाद के लास्ट नेम में भूल गया ललित ललित फर्स्ट नेम था ललित मां के बहुत बड़े बड़े भक्त थे तो एक दिन उनके कान में बात गई कि मां के साथ में ऐसा हुआ है गांव के ब्राह्मण लोगों ने मां से दंड वसूल किया है और मां को रुल है बस व आए एक हाई टेंपर लेकर के गुस्से में क्रोध में आए मां के पास में मां आपके साथ में इन लोगों ने ऐसा किया मैं दिखा दूंगा इन लोगों को तो मां कहती है अरे बेटा बेटा तुम कहीं जाकर के ब्राह्मण लोगों को और ज्यादा नाराज मत करके आना तो ये ललित चटो पाय क्या कहते हैं मां आज मैं तुम्हारी बात नहीं सुनूंगा आज मैं तुम्हारा कुपुत्र हूं तुम्हारी बात का उल्लंघन करके अवगणना करके मैं जा कर के बदला लूंगा वो गांव में गए मां बेचारी टेंशन में बैठी है पता नहीं ये क्या कर देगा व गए वहां प गांव के बीच में और ग्रामोफोन चालू किया अभ ये ग्रामोफोन उस समय तो नई चीज है गांव में किसी ने देखा नहीं है सभी लोग आ गए वहां पर ग्रामोफोन सुनने के लिए क अच्छा देखते हैं क्या है नया चीज तो कुछ क्षण तो कुछ समय तक तो ग्रामोफोन चलाया उसके बाद में ग्रामोफोन बंद किया जितने लोगों ने मां से दंड वसूल किया था वो लोग सब आ गए हैं वहां पे वो फिर ये ललित ने वो बंदूक निकाला रिवॉल्वर निकाला अपनी पॉकेट में से और हवा में फायरिंग किया सब लोग डर गए अरे बाप रे ये क्या करेगा और फिर जिन्होंने दंड वसूल किया था मां से सीधा बंदूक दिखाया बोला पैसे निकालो जो भी मां से लिए थे और जाओ मां के सामने जाके माफी मांगो वरना अभी मैं शूट कर दूंगा अभी गोली मार दूंगा तो बेचारे ऐसे डर गए वो जो भी दंड लिया था वापस कर दिया जाके माफी मांगी तब कहीं जाकर के उनकी मुक्ति हुई तो ये प्रश्न है कि ये इन लोगों का बिहेवियर ऐसा क्यों है क्यों ऐसा ब्राह्मी लोगों से डरना क्यों उनके सामने हाथ जोड़ कर के प्रार्थना करना तो इनकी व्याख्या नहीं है व्याख्या एक ही है कि ये लीला माधुर्य है हम सबको आनंद देने के लिए इसका चिंतन बार-बार करेंगे तो चित्त निर्मल होगा चित्त शुद्धि होगी इसके लिए यह लीला रची है उन्होंने इसके अलावा और कोई व्याख्या नहीं बिल्कुल ठीक कहा कि मरुभूमि में तो कैक्टस ही मिलता है थोर जिसको कहते हैं और कैक्टस ही खाना है बेचारे को तो ऑप्शन क्या है उसके पास में किंतु यहां पर देखिए कि उपमा एक देशी है ऊंट के पास में शायद ऑप्शन नहीं है हमारे पास में है राइट हम लोग इंद्रियों के भोग में डूब भी सकते हैं और हम लोग कथामृत के आनंद में भी डूब सकते हैं जो नके पास में जो ऑप्शन नहीं है वह अपने पास में है किंतु ये अच्छा गुड पॉइंट वेरी गुड पॉइंट है देखिए ये सब इसी सब चीजों को चिंतन करके ही तो अपना जीवन है ना जद ये सब चीजों को आंख बंद करके एक्सेप्ट कर लेंगे तो हम किस चीज का चिंतन करेंगे यही है न्यूज़पेपर में यहां पे आग लग गई यहां पे एक्सीडेंट हुआ यहां पे युद्ध हो रहा है यहां पे इलेक्शन हो रहा है इससे तो बेटर है कि ये सब चीजों का चिंतन करें रयान जी का जीवन तो देखिए कि शुद्ध पवित्र जीवन था वेदांत की प्रतिमूर्ति थे अपने जितने भी डायरेक्ट डिसाइल कहे उसमें वेदांत को मूर्तिमंत तुर्या अंद जी के बारे में कहा जाता है तो यही तुर्या अंद जी जब वो आखिरी समय में बार-बार बीमार होते थे उनके ऊपर में सर्जरी करनी पड़ती थी तो यही रयान जी ने कहा कि स्वामी जी का काम छोड़ कर के मैं यहां पर चलाया ना स्वामी जी ने कहा था अमेरिका जाकर के वेदांत का प्रचार करना है तो वो गए तो सही वो शांति आश्रम में तुर्या अंद जी के दिनों की बहुत सुंदर-सुंदर बातें हैं किंतु आखिर में एक ऐसा समय आया कि बीमार हुए तो स्वामी जी ने कहा चलो थोड़े समय के लिए इंडिया आ जाओ रिकवर होक जाना तो 1902 के प्रारंभ में भारत आए और 1902 के ही जुलाई महीने में फोर्थ जुलाई को स्वामी जी की महासमाधि हो गई इससे वो इतने भग्न हो गया उनका मन डिप्रेसो गए कि फिर वो अमेरिका कभी गए ही नहीं तो अभी अमेरिका में स्वामी जी का काम करना था छोड़ के वापस आ गए हैं इंडिया तो उन्होंने अपने मुंह से कहा कि स्वामी जी का काम छोड़ कर के मैं वापस आ गया हूं इसका परिणाम में भुगत रहा हूं तो अभी प्रश्न होगा भाई जिनका पूरा जीवन ही पवित्रता ठाकुर के संग के साथ में गया है उनको इस काम के लिए माने ये तो ऐसा हो गया ना पुण्य कर्म तो पूरा जीवन भर किया किंतु और ज्यादा पुण्य कर्म नहीं कर पाए तो उसका पाप लग गया यह तो बड़ा डेंजरस है भाई पाप नहीं किया उसका तो पाप करते तो पाप का फल भुगतना पड़ता वोह तो एक समझ में आने वाली बात है पुण्य कर्म नहीं किया उसका पाप लग गया वो गीता में जैसे कहते हैं गहना कर्मण गति ही ये ललित बाबू ये मां को बचाने के लिए बंदूक मारने को तैयार हो गए थे मां का आदेश का उल्लंघन कर दिया अभी इसको आप क्या कहेंगे अच्छा कहेंगे बुरा कहेंगे सही बताइए तो इन सब का डेफिनेशन वो कमेंट्री या तो फिर डिफाइन करना कि सही गलत क्या है कैसे कहेंगे ठाकुर को खुद को कैंसर हो गया तो क्या डेफिनेशन है तो जगत के पाप अपने सर पर ले लिए मने गुड डेफिनेशन चलो मां को खुद को काला ज्वर होता था शरीर पूरा क्षीण प्राय हो गया था तो इस तरह के किसी कैलकुलेशन में हम जाए कि मैं जो कर रहा हूं या करने वाला हूं वह अच्छा है या बुरा है इसमें क्या है पता है अपना हृदय ही आपका गाइड है बहुत सारे समय ऐसा होता है कि जो आपात तः बुरा लगता है भगवान कृष्णा ने जिस तरह से महाभारत वर कंडक्ट किया बहुत सारे लोग कहेंगे कि अरे क्षत्रिय धर्म का तो उन्होंने उल्लंघन किया जिस तरह से कर्ण का वध किया जिस तरह से द्रोणाचार्य का वध किया तो यह सब तो नीतिमत्ता के विरुद्ध जाता है किंतु भगवान कृष्ण तो नीतिमत्ता स्वयं है है ना तो जो आपात बुरा लगता है वो सही हो सकता है जो बाहर से सही लगता है वो बुरा हो सकता है करण का बड़ा ही सुंदर लॉजिक है कि भाई आपने तो मेरा त्याग कर दिया था बचपन में और जिसने मेरा लालन पालन किया उसने मुझे बड़ा किया और अभी आपको जरूरत पड़ी है तो मुझे मेरे सामने आ रहे हैं विनती करने के लिए तो ऐसा तो क्या है ना तो करण का तो लॉजिक बड़ा पक्का है कि जिसने मुझे बचाया लालन पालन किया मेरा लॉयल्टी उसके प्रति है भीष्म पितामह कहते हैं कि जिन जो राजा का अन्न खाता हूं उस राजा के प्रति मेरी लॉयल्टी है किंतु ऐसा करने से वे लोग अधर्म के रास्ते पर चले गए धर्म का रास्ता तो अपनाना चाहते हैं किंतु चले गए अधर्म के रास्ते पे तो यह धर्म क्या है अधर्म क्या है ठीक करना कभी-कभी बड़ा मुश्किल हो जाता है जो महापुरुष होते हैं उनके कार्य कभी कभी अधार्वा होते हैं कि धर्म की रक्षा करने के लिए ये सब करना पड़े तो अल्टीमेटली क्या है ना कि मैं कौन सा कर्म कर रहा हूं लेट अवर हार्ट बी द गाइड फॉर ट हमारा हृदय साधना करते जाइए कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान रूपी साधना यह साधना करके जो शुद्ध चित्त जो होगा ना वो शुद्ध चित्त हमको गाइड करेगा कि अभी क्या करना है इसके लिए कोई भी फार्मूला कोई भी नियम या तो किसी भी एडवाइस आपको काम में नहीं लगेगी उसके लिए शुद्ध चित्त ही आपका एक मात्र गाइड है और साधना करते-करते मन में से अंतः स्फूर्ण होगा देखिए बहुत सारे साधु यह घर छोड़ कर के यहां पर आते हैं तो यह कितना बड़ा डिसीजन है उनके जीवन का अभी कुछ समय पहले यहां पर एक ब्रह्मचारी आया था जॉइन करने के लिए तो अभी हुआ ऐसा कि उसके घर में सिर्फ बूढ़े मां और बाप है और बूढ़ी अम्मा है मने नानी है तो अभी तीन लोग घर में है अभी पिताजी का मृत्यु हो गया एक्सीडेंट में अभी बूढ़ी मां है और उससे भी बूढ़ी अम्मा नानी है अभी दो लोग घर में है अभी यह ब्रह्मचारी घर गया है उनको शांतोना देने के लिए अभी वो वापस आएगा तो वो वापिस आ आया तोव धर्म होगा कि अधर्म होगा धर्म था जब तक पिताजी जीवित थे भले ही चाहे अकेले रहते हो किंतु चलो बूढ़े बूढ़ी साथ में अपना जीवन यात्रा तो कर रहा है तो पिताजी चले गए बूढ़ी अम्मा और बूढ़ी नानी दोनों को कैसे और वो भी पुराने जमाने के अनपढ जैसे हैं गांव में रहते हैं कैसे जिएंगे वो उनको छोड़ कर के यदि मिशन में आता है साधु होने के लिए तो धर्म हुआ ना कि अधर्म हुआ ये कैसा कैसा डिसीजन है ये सिर्फ ठाकुर ही उसको गाइड कर सकते हैं उसके लिए हम लोग हजार उपदेश दे मेरा तो कहना है कि भाई तुम घर में रहो मां की सेवा करो किंतु ये मेरा उद्देश तो कोई उसको काम नहीं करने वाला ठाकुर यदि उसको लेके आएंगे उसके हृदय में त्याग और वैराग्य की ज्वाला कितनी प्रचंड रूप से जल रही है ठाकुर वो बताएंगे और उसके बेस पे उसको डिसाइड करना है कि उसका धर्म क्या है बूढ़ी अम्मा और बूढ़ी नानी की सेवा करना कि इस सनातन त्याग और साधना के रास्ते पर चलना यह उसका खुद का हृदय उसको गाइड करेगा हम लोगों की सलाह उसको काम नहीं लगेगी यही स्वामी जी ठाकुर कहते हैं जाओ मां के पास में मांग के आओ ठाकुर स्वामी जी मां के पास में जाते हैं और मुंह से क्या शब्द आता है कि मेरे परिवार के लिए खाने पीने की व्यवस्था कर दो ना कि ज्ञान दो भक्ति दो वैराग्य दो क्या मु ठाकुर के पास आकर के ठाकुर से झगड़ा करने लगते है कि महाशय आपने ही कुछ गड़बड़ किया है इसीलिए मेरे मुंह से सब उल्टी पुल्टी बातें निकलती है तो ठाकुर कहते हैं अरे भाई तुम्हारे जो नसीब में है वही होगा तो मैं क्या करने वाला हूं फिर से जाओ फिर से गए फिर से रोटी कपड़ा मकान नहीं फिर से ज्ञान भक्ति वैराग्य तो जो नसीब में है व ठाकुर कहते हैं आखिर में फिर नरेंद्र ने ठाकुर को पकड़ा महाशय अभी को कुछ करना पड़ेगा अभी तो फिर ठाकुर ने कहा ठीक है चलो फ मोटा भात का पड़े भाव थवे ना जनरली खाने पीने का अभाव नहीं रहेगा तो हजरा को स्वामी जी ने मुक्ति दिलवाई हजरा को आशीर्वाद हजरा को लेकर गए थे स्वामी जी ठाकुर के पास में इसको आपको मुक्ति देनी ही पड़ेगी आशीर्वाद देना ही पड़ेगा स्वामी ठाकुर ने कहा अरे भाई उसके नसीब में जो नहीं है मैं कैसे दूंगा तो नारद ने कहा नहीं नसीब के घने घडतर आप ही करते हैं जो नसीब के मालिक है आप ही है आप ही को आशीर्वाद देना होगा ठाकुर ने आशीर्वाद दिया जोर करके दिलवाया स्वामी जी को हाजरा बड़ा अच्छा लगता था हाजरा स्केप्टिक था ना और बाकी लोग ठाकुर के पास आते थे ऐसे भक्ति मान थे जो कुछ भी सुनते थे स्कार कर लेते हजरा सभी चीजों को प्रश्न करता था तो स्वामी जी को बड़ा अच्छा लगता था ठाकुर कहते हजरा नरेन फेरेंड इंग्लिश शब्द