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Swami Vivekananda's Teachings ·

Swami Vivekananda Hindi 25 May 2023

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स्वामी विवेकानंद हम शेयरिंग मी स्क्रीन हेयर स्वामी दूसरों को क्षति पहुंचना है तो आप फ्री नहीं है इस तरह के फ्रीडम से कोई लाभ नहीं है इस तरह का फ्रीडम जो है हमेशा हमको त्याग करना चाहिए देखिए यहां पर फ्रीडम हम लोग सब लोग ऐसा सोचते हैं हमारे मां में की मैं जो चाहता हूं वह मुझे करना चाहिए क्योंकि क्या है की मेरे पास में वो फ्रीडम है यदि मेरे पास में ऐसा कोई बंधन रहेगा की मुझे यह नहीं करना या मुझे वह नहीं करना तो फिर क्या है की मेरा डेवलपमेंट रुक जाएगा मेरे रिलेटिव है मुझे पता है की उनके पिताजी ने उनको परमिशन नहीं दिया यह कोई विदेश में जान की या फिर दूसरे शहर में जाकर के जोक करने की तो फिर क्या है की उनको सब समय के लिए वो एक र गया मेरे उनके मां में की मेरे पिताजी की परमिशन नहीं मिली तो इसके लिए मैं जो है मेरा डेवलपमेंट रुक गया अभी ये जो हम लोग जब भी सोचते हैं की दूसरों की हिस्ट्री की वजह से मेरा डेवलपमेंट रुक गया या तो मुझे यह चाहिए था मेरे जीवन में किंतु मैं नहीं प्राप्त कर पाया क्यों क्योंकि दूसरों की इच्छा नहीं थी ऐसा पहले तो बहुत होता था आजकल ऐसा भी थोड़ा कम हो गया है पहले क्या था वह जॉइंट फैमिली में रहते थे वह अरेंज मैरिज वगैरा होते थे तो अभी मैं क्या करना है मुझे तो मेरे सिर्फ यह नहीं की मेरे मां और मेरे पिताजी क्या कहते हैं किंतु यह काका कई चाचा चाचा मामा मानी जो कोई भी है सबका एक ओपिनियन राहत है की हां इसको ऐसा करना चाहिए और ऐसा नहीं करना चाहिए तो अभी देखिए की उसे जो हमको आजकल क्या है की एक ऐसा एक हमको एक इंडिविजुअल फ्रीडम चाहिए तो यह इंडिविजुअल फ्रीडम का एक जो हमारा कॉन्सेप्ट है उसकी वजह से पहले के ये जो जॉइंट फैमिली से धीरे-धीरे करके आजकल टूटने लगे हैं अभी स्वामी जी के बड़े में देखें तो स्वामी जी ने बहुत कम डिसीप्ल बनाए हैं अपने जीवन में बहुत ही कम शिष्यों को उन्होंने एक्सेप्ट किया है क्यों क्योंकि अच्छा अभी आप जैसे स्वामी जी के क्लास में स्वामी जी के साथ में बात करेंगे स्वामी जी की वो जो मतलब प्रवचन सुनेंगे और आपको लगेगा की स्वामी जैसे का रहे हैं उसे तरह से हम अपना जीवन गठित कर रहा है यह मैं बात बता रहा हूं जब स्वामी जी अमेरिका में क्लासेस और प्रवचन देते थे अभी जैसे मैं कैलिफोर्निया की बात को तो कैलिफोर्निया में देखेंगे की कितने सारे लोग जो है यह जो मिस और और मिसेज फ्रैंक रोड हिमाल है फिर मिस्टर और मिसेज एलेन है फिर मिसयूज ब्रो है यह हंस तीन हेल्थ सिस्टर थी वो तीनों एलिस मेरी एलिस मेरी और वो तीसरी थी वो मिसेज हंस ब्रो ऐसे तीन बहाने जो थे वो सभी लोग जो स्वामी जी के साथ में वो बहुत ही उनका जो है धनिष्ठा उनका संबंध था बहुत ही उनको उन्होंने प्रत्येक प्रति लेक्चर है प्रत्येक क्लास से यह लोग अटेंड किया करते थे तो अभी देखिए की स्वामी जी किंतु सबको एसिडिसिपल ट्वीट नहीं करते थे क्योंकि किसी को एजेंट डिसीप्ल ट्वीट करना अर्थात की गुरु को उसके रिस्पांसिबिलिटी लेनी पड़ती है अभी जैसे निवेदिता है तो निवेदिता को जब स्वामी जी ने अपने शिष्य के रूप में ग्रहण किया तो इसका अर्थ क्या हुआ की निवेदिता के जितने भी इतिहास है प्रीकंसीव नोटेशन से उसके जितने भी वो टेंडर्स पर्टिकुलर डायरेक्शन में जान की तो स्वामी जी क्या करते थे सभी चीजों के ऊपर में अटैक करते थे अभी निवेदिता ऐसा रहेगी की स्वामी जी अमेरिका में इंडिया में इतना अच्छा मैंने देखा की कोई चोर नहीं है मैंने लोग इतने शालीन सिस्टर और इतने ही मैन ईमानदार के ऑनेस्ट है तो स्वामी जी इम्मीडिएटली उसका विरोध करके कहते हैं की शायद कोई चोरी करता क्यों यदि चोरी करता तो कोई राजस बढ़ता तो तामसमे से राजस्व तो आते बाद में जो है कोई सेटन में जा सकता है अभी पूरा देश इतना तमस में डब गया है की अभी जड़ी कोई चोर भी नहीं है तो फिर चोरी भी नहीं करेगा तो थोड़ा भी रजिस्टर नहीं बचेगा सब लोग तमस में दुबे हैं और बहुत बार ऐसा क्या होता है की तमस जो है वो गतिविधि का अभाव है कार्य का कार्य का अभाव है तो बहुत बार हमको ऐसा लगता है की ये आदमी तामसिक आदमी को हम सात्विक मानकर के स्वीकार कर लेते हम लोग बोलते हैं की ये सात्विक है किंतु सात्विक नहीं है जो सात्विक है उसके मां में से ये कम कंचन के जितने भी विकार है वह धीरे-धीरे करके वो शिथिल होते जाते हैं धीरे-धीरे करके वो अदृश्य होते हैं जबकि तामसिक आदमी वो कार्य तो नहीं ही करता किंतु उपरांत ऊपर से यह इंद्रियों के जो सुख है इंद्रियों के जो भोग है उसके भीतर में दिन-रात डूबा राहत है तो तो कभी-कभी हम लोग यह डिस्टिंक्शन नहीं समझ पाते हम लोग सोचते हैं की जो कार्य नहीं करता वो है सातवीं तो जो है मैन जो ये भी साथ हुई थी ये भी साथ हुई लेकिन तो ऐसा नहीं ये तामसिके क्योंकि इंद्रियों के भोग में डूबा है कम कंचन में डूबा है तो स्वामीजी जब भी निवेदिता कुछ भी कहते थे तो उसका विरोध करते थे क्यों क्योंकि वो चाहते थे की निवेदिता का यह जो प्रीकंसीव मोशन से उसका जो एगो है उसका ये जो संस्कार है उसको पुरी तरह से तोड़ करके एक पूरा ही नया पर्सनालिटी बनाए जिससे की क्या है की वो सात्विक पर्सनालिटी के आधार पे वो आध्यात्मिक जीवन में आध्यात्मिक साधना में आगे बाढ़ पाएगी अभी जैसे ठाकुर के पास में ये जो सब डायरेक्ट डिसीप्ल आते थे ये जो लट्टू महाराज है शशि महाराज है निरंजन महाराज है तो सभी को ठाकुर जो है उनकी अपनी उनकी प्रीकंसीव नोटिफिकेशंस क्या है उनकी टेंडेंसी क्या है उसको करेक्ट करने के लिए ठाकुर जो है उनको शिक्षा देते थे अभी जैसे की वह लातूर महाराज को का दिया की बेल तालाब जो है जहां पे ठाकुर ने बेलतला अर्थात की वल्वा पुरुष के नीचे की वो जमीन जहां पे वो जो है पत्थर का एक चबूतरा जैसा बांदा हुआ था एक प्लेटफॉर्म जैसा बना हुआ था तो ठाकुर ने लाती महाराज को कहा की बेल ताला के नीचे जाकर के ध्यान मत करना वहां पे भैरव राहत है किंतु यह ठाकुर के शिष्य भी तो सब एक के बाद एक भैरव जैसा ही थे तो लातूर महाराज ने एक दिन वहां बैठ करके ध्यान करना शुरू कर दिया और सुद्दनली भैरव प्रकट हुआ और उसने विभिन्न विभीषिकाएं दिखाना शुरू कर दिया विभीषिका अर्थात क्या है की एक मैन बहुत ही भयानक दृश्य कोई मृत्यु का दृश्य दिखाई देगा या तो फिर कोई जैसे की कोई कुदरत कोई नेचुरल डिजास्टर हो रहा है बहुत बड़ा फ्लड ए रहा है की चारों और आज लगी है बहुत सारे लोग आज में जल करके मा रहे हैं वह इस लाइक विभट्ट दृश्य दिखाई देता है क्यों वे भैरव ऐसा क्यों करता है विभीषिका क्यों दिखता है क्योंकि कोई कोई जगह पे ध्यान करने से जो है प्रगति जो है बहुत ही जल्दी से हो शक्ति है और जैसे की शक्ति स्थान इसको बोलते हैं शक्ति स्थान पर जब हम साधना करेंगे तो मां शक्ति की कृपा से हमारा जो डेवलपमेंट है जब हम जैसे जब करना शुरू करते हैं तो एक जब का आपको जैसे की हजार हजार जाप करते हैं ऐसा फल इसे शक्तिष्ठान में मिलता है किंतु फिर जैसे कोई ऐसा कोई आदमी जो की यह एलिजिबल नहीं है शक्तिशाद ना करने के लिए ऐसा कोई आदमी जो की आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ाने के लिए वो योग्य नहीं है जैसे की कोई तामसिक व्यक्ति उसने अपना घमंड जो है अपने इंद्रियों के जो सुख भोग और लाल जो है उसके ऊपर में जिसने विजय प्राप्त नहीं किया है वो यदि थान में जाकर के साधना करता है है तो क्या होगा की अभी उसके पास में शक्ति भी ए गई है और साथ-साथ में इंद्रियों के भोग भी उसके बाकी है तो शक्ति आना और साथ में ये घमंड रहना यह तो कांबिनेशन जो है बड़ा ही भयानक है आपके हाथ में शक्ति आए इससे पहले ये आवश्यक है की आपका घमंड जो है उससे आप संपूर्ण रूप से मुक्ति पाल आपका जो अहंकार है उसे आप सबसे पहले मुक्त हो जाए वरना क्या होगा की जो शक्ति हमारे हाथ में आएगी उसका दुरुपयोग होगा इसलिए ऐसे शक्ति स्थान में जहां पर एक जाप करके 1000 जब का फल मिलता है वहां पर हमेशा भैरव की उपस्थित रहती है और भैरव जैसे ही आपने जाप करना शुरू किया भैरव आकर के विभीषिकाएं दिखाना शुरू करेगा ऐसे कोई भयावाद दृश्य दिखाएगा इससे कोई विपक्ष दृश्य दिखाएगा की कोई सामान्य आदमी जो है जो की इस तरह से कामवासनाओं में डूबा हुआ है उसका बिल पावर तो बड़ा रहेगा उसकी यह जो बुद्धि शक्ति है वो तो बहुत ही मतलब जो है विकसित रहेगी तो क्या होगा की वो इस तरह के दृश्य देखकर के वो डर जाएगा और या तो यहां तक की वो पागल तक हो जाए इतने भयानक दृश्य वह भैरव दिखता है तो ये एक गारंटी है मैन शक्तिशास्थान की वो जो सेंटी मेंटेन करने के लिए एक इंश्योरेंस पॉलिसी जैसा वो ईश्वर ने बनाया है की हर किसी के पास में जो जो सच्चा सड़क है उसके लिए शक्ति स्थान जो है शक्ति पीठ जिसको कहते हैं वो वो उसके लिए बहुत अच्छा पूरे समाज के लिए अच्छा है की जो सात्विक सड़क वहां पर जाकर के जाप करता है तो उससे जब से उसके भीतर में जो ओजस प्रकट होता है कल हमने बात किया था ओजस एक ऐसी शक्ति है की जब करने से हमारे हृदय में वह बढ़नी है और जितना हमारा ओजस बढ़ता है तो सिर्फ हम ही नहीं हमारी जो कुंडलिनी जो शक्ति है वो हमारी जो स्पाइन कार्ड है हमारी जो करोड़ रज्जू है उसमें सबसे आखिर में रहने से वो वहां से धीरे-धीरे करके हमको पता है की छह चक्र है हमारे शरीर में इस करोड़ और रज्जू को लॉक करके और सबसे हमारा जो मस्तिष्क का जो सर्वोच्च भाग है वहां पे सहस्रार चक्र है तो हमारी जैसे-जैसे जाप करते गए जैसे जैसे ओजस शक्ति या तो यह प्राण शक्ति बढ़नी गई वैसे-वैसे ही यह कल कुंडली जो है एक के बाद एक चक्र का भेद कर-कर के वह जो है सहस्त्र में जाएगी और शास्त्र रंध्र उसको बोलते हैं शास्त्र मंत्र वहां पर जाएगी और फिर जो है वहां से वो निकाल कर के जैसे ही वहां पर पहुंच गई तो हमको वो जो है समाधि प्राप्त हो जाएगी या तो फिर हमको ईश्वर दर्शन होंगे या तो आत्म दर्शन हो गए ठाकुर की एक बात हमने दिन अच्छी थी की कैसे ठाकुर वह जड़ योग है योग की साधना कर रहे थे और हत्स्यो की साधना के अंत में जड़ समाधि प्राप्त होती है तो अभी ठाकुर जो है हाथों की साधना करते-करते जड़ समाधि को प्राप्त होने ही वाले थे और यदि जड़ समाधि प्राप्त हो जाति तो उनका शरीर जो है वो त्याग हो जाता और ठाकुर जी कार्य करने के लिए जी मिशन के लिए अवनी हुए हैं वो मिशन जो है शायद अधूरा र जाता तो अभी जैसे दही वो योग जिसको कहिए की को इनसीडियस कहिए की क्या कहिए की जो हलधारी था ठाकुर का बड़ा भाई बड़ा भाई तो नहीं था वो उम्र में बड़ा था ठाकुर का वो रिलेटिव था तो ठाकुर उनको दादा करके ठाकुर ने जाकर के बोल दिया की मैंने सुना है की तुम साधना शक्तिशाड़ना के नाम पे तंत्र साधना के नाम पे कुछ कर रहे हो क्या यह बात सही है तुमको ऐसा नहीं करना चाहिए तो यह सुनकर के हलधारी बड़ा नाराज हो गया और ठाकुर को श्राप दे दिया की तुम्हारे मुख से जो है वो खून निकलेगा तो मुख दिए रुक तो उठ गए तो मैंने अभी ठाकुर तो क्या है की उनकी तो ये फर्श थी और जब उन्होंने सुना की अभी कोई भी सड़क कोई भी बड़ा अचार करता है तो क्या होता है अभी उसे सड़क का तो हनी होगा ही होगा सड़क के लिए तो कुछ बड़ा होगा ही होगा किंतु फिर पूरा समाज क्या है की ये सड़क समुदाय है उनको फिर एक कूद दृष्टि से देखना संदेह है की दृष्टि से देखने की शुरुआत कर देता है वे लोग सोचते हैं की हां देखा की हमने एक सड़क है वो इस तरह से कर रहा है दुराचार या अनाचार तो किसको पता की सभी सड़क ऐसा कर रहा है की नहीं कर रहे हैं तो क्या है की ये पूरा सड़क समय समाज जो है सड़क गण जो है उसके ऊपर में सबकी एक संदेह दृष्टि ए जाति है तो यह सिर्फ हलधारी के अच्छे के लिए ठाकुर ने नहीं कहा था सब तरह के योगी है सड़क है संत महापुरुष है साधु सन्यासी है सबके भले के लिए ठाकुर ने जाकर के वह हलधारी को ऐसी बात कहीं किंतु हलधारी नाराज हो गया और एक दिन सही में हुआ की ठाकुर अपने कमरे में बैठे थे और सडनली उनके मुंह में से वो खून बहाने लगा रक्त बने लगा और रक्त जो है इतना गधा था की उनके मुंह से वो जो है पूरा वो जो एक ये निकाल कर के वो जाम गया उनके मुंह में पूरा तो अभी ठाकुर तो एकदम मतलब उनको बच्चे जैसे थे ना वो बालक भाव था ठाकुर का तो ठाकुर एकदम वो रन लगे और उसे समय हलधारी मंदिर में था वह दौड़ा-दौड़ा आया सब एकदम सब लोग में मतलब डर का माहौल फेल गया क्या रे ठाकुर के मुंह से ऐसा क्यों हो रहा है रक्त क्यों निकाल रहा है तो हलधारी भी दौड़ा दौड़ा या मंदिर में था मां की पूजा का कुछ कार्य कर रहा था आकर के देखा की ठाकुर ने जब हलदरिया है तो ठाकुर ने रोटी रोटी उसको कहा की देखिए की आपने मुझे श्राप दिया तो मेरी ऐसी अवस्था हुई तो यह देख करके हलधारी भी रन लगा किंतु क्या हुआ देखिए की उसे समय वो पंचवटी में एक दूसरे एक महात्मा र रहे थे उन्होंने आकर के रक्त का परीक्षण किया और देखा की ये बहुत ही गधा रखना है तो उन्होंने ठाकुर को क्या कहा की देखिए की आप यह जो हथियारों की साधना कर रहे थे उसमें जो है आपको जड़ समाधि होने वाली थी आप जड़ समाधि को प्राप्त होने वाले थे अभी ये जो रक्त जो है वो आपके वो आपके जो सहस्त्र में चला जाता ये जो आपके सर के ऊपर में चला जाता तो क्या है की जड़ समाधि हो जाति किंतु आपके मुंह से निकाल गया इसका अर्थ है की वह जड़ समाधि का रास्ता बैंड हो गया कल कुंडली जो है वह आपकी ऊपर मस्तिष्क के जान की बजे वो यही पे रुक गई और रक्त के मध्य से वो जो एक्स्ट्रा एनर्जी जो थी जो जड़ समाधि से आपको जड़ योग के साधना करने से है योग्य साध करने से आपको मिली थी वह आपके मुंह से निकाल गई तो अभी आपको जड़ समाधि प्राप्त नहीं होगी तो यह एक तरह से तो अच्छा ही हुआ तो देखिए की अभी यह बहुत सर डिग्रेशन हमारा हो गया मैं जो कहना चाहता था की ठाकुर जो है अपने शिष्यों को इतना कंट्रोल में रख देते थे अपने शिष्यों के जितने भी प्रीकंसीव मोशंस थे अपने शिष्यों की जितनी भी वो संस्कार थे उनको तोड़ देना चाहते थे जिससे की एक नया सात्विक आधार बने और इस नए सात्विक आधार के ऊपर में एक नया जो पर्सनालिटी है एक आध्यात्मिक जीवन आध्यात्मिक शरीर उसका गठन हो स्वामी जी का भी ऐसा था स्वामी जी भी निवेदिता को स्ट्राइक डिसिप्लिन में रखते थे जिससे की निवेदिता जो है अपने जीवन का पुनः गठन कर सके तो अभी यह जो यहां पर लिखा है की यदि हमारा फ्रीडम दूसरों को हनी पहुंचना है तो वह एक्चुअली फ्रीडम नहीं है तो देखिए हमारी यह जो भारतीय परंपरा है गुरु शिष्य परंपरा जहां पर गुरु जो है अपने शिष्य को डिसिप्लिन में रखना है क्योंकि यह डिसिप्लिन जो है वो शिष्य का चरित्र गठन करता है शिष्य का करैक्टर बिल्डिंग करता है शिष्य को स्पिरिचुअल डिस्प्लेस सीखना है यह जो हम जॉइंट फैमिली में रहते थे यह जो हम संयुक्त कुटुंब में रहते थे उससे क्या होता था की एक जो भालोबासा जाके बोले बांग्लादेश एक जो स्नेहा और प्रेम का जो भाव है वो बच्चों में आता था अभी बच्चा है जो छोटा सा उसको उसके मामा है मानी है चाचा है चाचा है उसको वो चॉकलेट खिलाने हैं उसको प्रेम से बात करते हैं उसके साथ में खेलने हैं तो बच्चे का जो है वो इमोशनल नारिशमेंट होता है आजकल वो जो इक मेजर करते थे ना पहले इंटेलिजेंट क्वेश्चन अभी वह इमोशनल पोषण यह करते हैं मेजर करते हैं की उसका इमोशनल स्टेबिलिटी कितना है छोटी-छोटी चीजों में क्या वो गुस्सा हो जाता है छोटी-छोटी चीजों में क्या वह एकदम वह डिप्रैस हो जाता है की वह अपने को संभल सकता है उसका इतना इमोशनल मेच्योरिटी है की जब भी उसके सामने कोई ऐसा क्राइसिस ए गया तो वो डिप्रैस नहीं होगा और यदि उसको कोई मतलब उसके कार्य में कोई बड़ा पहुंची या तो फिर उसके सामने बड़ी चैलेंज ए गई तो वो क्रोधित नहीं हो जाता ये क्रोध है यह जो ईर्षा है फिर ये जो डिप्रेशन और डिस्पर जो है ये जो मैंने ये जो जितनी भी नेगेटिव इमोशंस हमारी उसको वो कंट्रोल में रख करके ऐसा चला जाए ऐसा तो नहीं होगा वो तो फिर जैसे समाधि प्राप्त करके हमारे संस्कार बीच हो जाएंगे तब ये जो है पंचकलेश अविद्या अस्मिता राज द्वेष और अभिनेश वो तब चले जाएंगे ये जो दगड़ा बीच होना ये है योगसूत्र का एक टेक्निकल टर्म यह जो बी होता है जो मैंने वे सीट जिसको कहते हैं कोई पेड़ होता है या कोई भी पौधा होता है उसके सी होते हैं सी को हम जमीन में बोएंगे तो उसमें से पौधा निकलेगा किंतु यह सर को यदि आप गम करेंगे तो क्या होगा की वो बीच जो है वो वो ये हो जाएगा जिसको ये कहते हैं ना की वो क्या बोलते हैं स्प्राउट ऐसा हो जाएगा और उसमें से नया पौधा जो है वो नहीं निकलेगा तो इसीलिए होना उसका अर्थ है ये जो बी है उसको इस तरह से उसको गम किया भट्ठी में डालकर के उसमें से नया पौधा ना हो नया पौधा अर्थात यह कम कंचन रूपी ये जो हमारी जो वासनाएं हैं वह उसमें से फिर से प्रगति ना हो उसको दगड़ा बीच कहते हैं है तो वह तो चलो दूर की बात है की समाधि प्राप्त होगी तो हमारे पांच क्लेश को दुग्ध बीज होंगे किंतु उससे पहले भी यह जो हमारी जो इमोशनल मेच्योरिटी है वह कितनी है वो बहुत ही मैच्योर करते हो बहुत ही मटर करते हैं अभी जैसे देखिए की ये बड़ी-बड़ी कंपनियां होती है वहां पे आपका सिर्फ टेक्निकल अंडरस्टैंडिंग या टेक्निकल स्किल नहीं है आपकी ये जो पर्सनालिटी और कम्युनिकेशन स्किल है वो भी इतना ही इंपॉर्टेंट है सक्सेसफुल होने के लिए तो पर्सनालिटी बिल्ड अप कब होती है यह कम्युनिकेशंस के लिए शार्प कब होती है जब हम अपनी इमोशन को कंट्रोल में रख करके बहुत सारे लोगों के साथ में हम कम करना वो आईटी इस पॉसिबल पर उस की हम बहुत सारे लोगों के साथ में कम कर सके यह जो हमारे इंडियन सीईओ जो है वह मल्टीनेशनल कंपनी में इतने सक्सेसफुल क्यों होते हैं क्योंकि बचपन से ही बहुत सारे जो है जैसे जॉइंट फैमिली में बड़े संयुक्त कुटुंब में इससे क्या होता है की उनको वह जो इमोशनल जो सपोर्ट मिला उनको जो प्रेम मिला उनको वो जो स्नेहा मिला उससे उनकी इमोशन की स्टेबिलिटी जो है इमोशनल नारिशमेंट जो है उनको इतना मिला की वो जो है अपने मन को कलर रख कर के ये जो आज का कॉन्सेप्ट है कॉल कॉल बिल्कुल ये जो मैनेजमेंट का जो कॉन्सेप्ट है अपने अपने माता को ठंडा रख करके वो 10 लोगों के साथ में कम कर सकते हैं मल्टीनेशनल कंपनी में क्या होता है कोई मैक्सिकन है तो कोई कोरिया है एन कोई फ्रेंच है ना की कोई रूस है ना की कोई अफ्रीकन है कोई पाकिस्तान है कोई श्रीलंका का है कोई इंडियन है बजरंगी वो एक राहत है वहां का कंपोजिशन कोई क्या जापानी बोलना है कोई मंडारिन बोलना है कोई सहेली बोलना है कोई पंजाबी बोलना है तो कोई फ्रेंड चोर कोई इंग्लिश तो इतनी मल्टीपल लैंग्वेज है मल्टीपल उनके संस्कार मल्टीपल उनका कलर है तो सभी लोगों को अपना माता ठंडा रखकर के सभी के साथ डील करना यह जो स्किल है वह अपने इंडियन सीईओ के पास सबसे ज्यादा रहती है क्योंकि वो मल्टीकल्चरल वह फैमिली में रहकर कैप एक संयुक्त कुटुम में रहकर के दो चीज उन्होंने प्राप्त की है एक तो इमोशनल सपोर्ट प्राप्त किया है दूसरा की सभी के साथ में डेल करना उन्होंने शिखा है जैसे मां का वो फैमिली था ना वो पगली मानी थी वो फिर राजू थी और वो मां को थी वो नलिनी थी फिर मां के वह भाई थे तीन इसे सब वो एक के बाद एक पागल थे किंतु फिर भी मां अपना माता ठंडा रख करके सबके साथ में डेल करती थी तो ऐसे जॉइंट फैमिली में भी ऐसा होता है कोई कुछ मतलब किसी का विचित्र बिहेवियर रहेगा किसी का कोई विचित्र हैबिट रहेगा किसी का कोई अनाेईंग उसका कोई टेंडेंसी रहेगा तो वह सबके साथ में डील करना भी हम लोग सिख जाते हैं बचपन से और फिर क्या है की एक इमोशनल सपोर्ट तो मिलता ही है तो जॉइंट फैमिली और यह जो गुरु शिष्य परंपरा ये हमारे सामाजिक हमारे साइकोलॉजिकल दो फाउंडेशन थे अभी क्या होता है की ये जो अपना आजकल का मॉडर्न कॉन्सेप्ट है की मैं फ्री रहना चाहता हूं मुझे डिसीजन मेकिंग करने का फ्रीडम चाहिए तो हमारे जॉइंट फैमिली है वो टूट गए अभी न्यूक्लियर फैमिली एक हसबैंड है एक वाइफ है उसका एक लड़का या दो लड़का है उसके तो अभी न्यूक्लियर फैमिली में क्या होता है की हसबैंड भी कभी-कभी जब हसबैंड और जब करेगा ही तो वाइफ को भी पिताजी तो जब करेंगे उसका बिजनेस है कभी-कभी जो मां भी है उनको भी जब करनी पड़ती है वो भी शायद कहानी अपना खुद का बिजनेस हो तो बच्चे जो है उनको वह जो है वह निकले होना फूल कर दे तो फूल करते हैं उनको ऐसा लगता है की कोई उनके ऊपर में अटेंशन नहीं दे रहा उनको कोई प्रेम नहीं कर रहा तो क्या है की अकेला अकेला यह लोनी ने जो है डेट इसे डेंजरस थिंक इन टुडेस लाइव अचानक ऐसा चीज है जो की हमारे हृदय को भीतर से वह जो है का जाता है हमको पूरा डिप्रेशन में भेज देता है और बच्चे इस तरह से जब अकेले अकेले रहते हैं अपने घर में तो क्या होता है की उनको वो एक इमोशनल सस्टेनेट नहीं मिलता और दूसरा है की वो डिफरेंट डिफरेंट टेंडेंसी वाले लोगों के साथ में वो डेल करना वो नहीं सीखने इसलिए उनका वह जो नेचर जो होता है ना बहुत ही वो आदिश हो जाता है अपनी मां से कोई चीज डिमांड करेंगे की मुझे ये पर्टिकुलर खाना खाना है मुझे यह पिज़्ज़ा खाना है मुझे ये खाना है मुझे रोटी और सब्जी नहीं खाना ऐसा वो सब समय वो जीत करता रहेगा और फेमो उसको कुछ बोलेगी अरे नहीं ऐसा ये हेल्दी फूड है इसको खाओ तो फिर वो बड़ा ही नाराज हो जाता है क्यों क्या है की वो अपनी ये मां के ऊपर में उसने कंट्रोल करना नहीं शिखा है तो यह तो सबसे बड़ा प्रॉब्लम हुआ जिसको हम आजकल की सो कोल्ड फ्रीडम कहते हैं यह जो आजकल लिबरल एटीट्यूड आने के बाद में एक तू जॉइंट फैमिली टूटे दूसरा एक गुरु शिष्य परंपरा टूटी इससे क्या गुरु जो होता है जो शिष्य को जी तरह से डिसिप्लिन उसको करना चाहिए वो नहीं कर पता आजकल मुझे पता नहीं बाकी सब स्टेटमेंट किंतु गुजरात में ऐसा है की आप जो है टीचर जो है स्टूडेंट को पनिश नहीं कर सकता और दूसरा एग्जामिनेशन नहीं लिए जाएंगे परीक्षा नहीं ली जाएगी क्यों क्योंकि एग्जामिनेशन की वजह से परीक्षा लेने से बच्चे के स्टूडेंट के सर पे वो प्रेशर ए जाता है वो प्रेशर ए जाएगा तो सुसाइड कर लगा क्या कर लगा कुछ पता नहीं है उसको किसी भी तरह से प्रेशर में मत डालो तो प्रेशर में नहीं डालो तो क्या उसका परिणाम आता है मैंने आठवीं नवीन कक्षा के लड़कों को देखा है वो अपना नाम तक नहीं लिख सकता है तो यह जो है की आप यदि बच्चे को डिसिप्लिन नहीं करेंगे तो उसका वो अभ्यास जो है वो शिक्षा जो है वो भी कहां से वो प्राप्त करेगा अपने मन को जो एकाग्र करके मां तो जो है वह तो एक बंदर की तरह है उसको बोलेंगे की यह टीवी है इसे यहां पे ये मोबाइल है मोबाइल पर ही आपके मित्र जो है सोशल मीडिया पर बैठे हैं ये टीवी पे कोई मूवी चल रहा है ये ये दोनों ऑप्शन है फिर साथ में तीसरा ऑप्शन है पढ़ाई करने का तो आप क्या करेंगे बच्चे के पास में फ्रीडम होगा तो कभी वो पढ़ा ही नहीं करेगा ऐसे बच्चे भी होते हैं किंतु कम होते हैं उसको बहुत सारे बच्चे क्या करेंगे की चलो टीवी देखते हैं या तो मोबाइल लेकर बैठे रहते हैं अपना टाइम वेस्ट करते हैं तो अभी जड़ ही वो उसको डिसिप्लिन नहीं करेंगे उसको अच्छी चीज आप क्या है उसको नहीं देंगे जबरदस्ती जैसे वो उत्तम वैद्य की ठाकुर बात करते हैं ना वह जो एक वही जो सामान्य वाहित क्या करता है की उसको दे करके चला जाता है मध्यमवेद क्या करता है की उसको समझता है प्रेम से उसको मैंने कन्वेंस करने को ट्राई करता है प्यार भैया दवाई ले लो तुम्हारा ही अच्छा है किंतु फिर वो उससे ज्यादा और कुछ नहीं करता किंतु उत्तम वैद्य है जो की पेशेंट को धक्का मार के जमीन पर लेट देगा उसकी छाती पर पर रखेगा जोर जबरदस्ती उसका मुंह खोल के उसको औषध जो है दवाई जो है दाल देगा उसके मुंह में तो वो है उत्तम वैद्य उत्तम गुरु तो यदि आपके पास में ऐसा कोई गुरु नहीं है जो की आपको जोर जबरदस्ती डिसिप्लिन करवाएं तो क्या होगा की आपका वो जो डेवलपमेंट है स्पिरिचुअल स वेल स इंटेलेक्चुअल दोनों जो है उसे स्टंट हो जाएंगे वो दोनों जो है वो अधूरे र जाएंगे तो इसीलिए ये जो स्वामी जी कहते हैं की इसके आगे वाले को कोटेशन में देखिए किंतु स्वामी जी ने कहा है की फ्रीडम स्ट्रैंथ और जो है की वह यूनिटी यह जो तीन जो ग्रेट कॉन्सेप्ट है जो की सार्थक में होने चाहिए किंतु वह फ्रीडम क्या है की धर्म के रास्ते पे चलने से यदि कोई आपको रोकना है तो उसका विरोध करने का आपको फ्रीडम होना चाहिए जैसे की विभीषण है तो रावण जो है उसका बड़ा भाई रक्षा है किंतु विभीषण सोचा की मैं जो है धर्म के रास्ते पे चलूंगा मैं भगवान राम का अनुबडूंगा और उसने ही जाकर के रावण बड़ा भाई है फिर भी जाकर के उसको बोला की तुमने जो सीता का हरण किया है वो बहुत ही गलत कम किया है तो वो एक फ्रीडम हमको होना चाहिए की धर्म के रास्ते पे चलने का उसे समय कोई यदि आपके हनी पहुंचाई आपको रोकने का पर्यटन करें सन्यासी होना चाहते हैं और मा या पिताजी कहते हैं की ना तुम साधु मत होना तो उनको फिर आप जो है इग्नोर कर सकते हैं उनकी आजा का उलझन कर सकते हैं किंतु जब वो अब घर में के रास्ते पे चल रहे हैं तब अभी आपको खुद को ही नहीं पता है की धर्म क्या है धर्म क्या है मेरे लिए क्या प्रिय है मेरे लिए क्या श्रेया है श्रेया अर्थात की इंद्रिय सुखों की वो सब चीज जो की मुझे बहुत अच्छी लगती है और श्रेया यानी की पढ़ाई लिखी और जब ध्यान साधना जो की मेरा भविष्य बी करती है तो मुझे यह नहीं पता है की मेरे लिए प्रेयर क्या है और श्रेया क्या है तब मुझे डिसिप्लिन में रहना बड़ा ही आवश्यक है जैसे बच्चा होते हैं बच्चे जब होते हैं स्टूडेंट होते हैं ब्रह्मचारी आश्रम जो जिसको कहते हैं उसे समय हमको इस तरह से बंधन में रहना ही चाहिए वरना क्या है हमारा डेवलपमेंट रुक जाएगा तो यह जो फ्रीडम जो है वो ड्यूल एजेंट स्वोर्ड है यानी की दो धारी तलवार फ्रीडम का आपने ठीक-ठीक उसे नहीं किया अपने को बिना मतलब किसी बंधन में रख दिए तो आपका स्पिरिचुअल डेवलपमेंट धर्म के रास्ते पे चलने की आपकी शक्ति जो है वो रूढ़ित हो जाएगी कुंठित हो जाएगी और यदि जो है आपने आपने अपनी कामना और वासनाओं को फ्रीडम दे दिया तो जो है की मां को डिसिप्लिन करने का एक रास्ता बैंड हो जाएगा और इससे भी हमारा एनी होगा तो फ्रीडम क्या है साधना करने का फ्रीडम है और बंधन क्या है तो अपनी वासनाओं के ऊपर में ये बंधन रखना है तो फ्रीडम कैसा होना चाहिए क्या है और जो पहले वाला जो कोटेशन हमने देखा था उसमें और इस कोटेशन में दो जगह पे स्वामी जी हमको समझते हैं देखिए पहले वाले कोटेशन में स्वामी जी ने कहा था की इन डी यूनिवर्सल मेलोडी थ्री आइडिया स्टैंडर्ड फ्रीडम स्ट्रैंथ और किंतु यहां पे ख्याल रखना है फ्रीडम अर्थात की साधना में आगे बढ़ाने का फ्रीडम कोई कहता है की अरे तुम ये मत करो तुम्हारा तो यह ड्यूटी है माता-पिता की सम्हाल रखना या यह करना पैसा धन अर्जन करना यह तुम्हारा ड्यूटी है तब आप हमको वो बात नहीं सुनने हैं क्योंकि साधना करने का फ्रीडम हमारे पास होना चाहिए किंतु साथ-साथ में स्वामी जी कहते हैं की हमारा फ्रीडम यदि दूसरों को हट करता है अर्थात की यदि हम इस तरह से हम अपने मां को इन डिसिप्लिन करके रख देते हैं की किसी की बात नहीं सुनेंगे किसी को हेल्पफुल नहीं होंगे सब समय वो चिड़चिड़ा भाव रहेगा डिप्रेशन में चल जाएंगे तो वह भी हमारा फ्रीडम नहीं है की जब हम स्टूडेंट होते हैं तब हमको अपने एक डिसिप्लिन में रखना है और जब एक हम एडल्ट होते हैं हमारा एक इंडिविजुअल एक आइडिया ओपन होता है एक इंडिविजुअल सेंस डेवलप्ड होती है की मेरे लिए क्या प्राय है क्या श्रेया है तब हमारे पास में फ्रीडम होना चाहिए धर्म और डिसिप्लिन के रास्ते पर चलने का तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं