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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda English & Hindi 14 April 2023

Swami Vivekananda

विश्व देश कोटेशन ऑफ स्वामी जी यस्टरडे परफेक्ट स्ट्रैंथ बिल हैव नो एक्टिविटी इन दिस वर्ल्ड आईटी ओन्ली आईटी दोएस नोट एक्ट ओनली इसे नो व्हाट इसे डी मीनिंग फ्रॉम दिस वर्ल्ड बट दें देवर इस अंदर टाइप ऑफ स्ट्रैंथ डेट इसे डी स्ट्रैंथ ऑफ बर्थ स्ट्रैंथ ऑफ विद्या स्ट्रैंथ बेस्ड ऑन गॉड स्ट्रैंथ बेस्ड ऑन कनविक्शन इन ब्रह्म ज्ञान सो डेट इस कॉल्ड परफेक्ट स्ट्रैंथ और नो स्वामी जिससे स्टेट व्हाट दस परफेक्ट स्ट्रैंथ आईटी हेस नो एक्टिविटी इन दिस वर्ल्ड आईटी ओनली इस दस नोट एक्ट नो वे हैव तू अंडरस्टैंड डेट व्हेन वे मेनिफेस्ट ओवर स्ट्रैंथ पर एग्जांपल वे से डेट रामकृष्ण मिशन इस गोइंग सो में सर्विस एक्टिवेट मेनिफेस्टेशन ऑफ डी व्यक्ति इस एन से मेनिफेस्टेशन ऑफ स्ट्रैंथ डीओईएसएन'टी दिस मीन डेट वे आर वर्किंग हर बट वे हैव तू अंडरस्टैंड डेट दिस कर्म डेट वे आर डूइंग आईटी दस नोट लीव अन्य स्क्रैचेज ऑन अवर से आईटी देश नोट लाइव बिहाइंड अन्य कर्मफल इन आईटी डी कर्म डेट वे आर डूइंग दिस सर्विस एक्टिविटी आईटी एक्चुअली कट जो प्रीवियस करमास आईटी एक्चुअली लेसंस डी बर्डन ऑफ डी कर्मफल डेट वे हैव इन कर्ड डेट वे हैव कलेक्ट थ्रोट अवर प्रीवियस सो डेट इस वही स्वामीजी सेस आईटी ओन्ली इसे आईटी देश नोट एक्ट दिस स्वामीजी इस इतिहास ऑफ पुटिंग स्वामी जी वे ऑफ पुटिंग इतिहास इन शब्द वे हैव तू अंडरस्टैंड दिस सो में डिपर लेयर्स टेक वे कैन को ऑन दिगिंग और दिगिंग और अनकवरिंग और अनकवरिंग और अल्टीमेटली वे बिल ऑलवेज कम फेस तू फेस विद सम ऑफ डी ग्रेटेस्ट तृतस ऑफ वेदांत डेट हैव बिन एवर अट्टर्ड ऑन प्लेनेट अर्थ डेट इसे डेट व्हेन वे स्ट्रैंथ इस डर और व्हेन वे यूटिलाइज्ड इन ऑर्डर तू गेन सम बेनिफिट इन ऑर्डर तू गेम्स सम प्रेस्टीज इन डी वर्ल्ड इन ऑर्डर तू जेन डी थिंग्स ऑफ भोग थिंग्स ऑफ दी लाइट और प्लेजर दें दिस स्ट्रैंथ ओवर डी शक्ति डी ट्रेडिशनल शब्द वे मे उसे शक्ति आईटी वे कैन से डेट आईटी वर्क इन दिस वर्ल्ड और अलोंग विथ डी थिंग्स दिस मटेरियल थिंग्स डेट मैं चुम्मी लेट अलसो एकम्युलेट थे कर्मफल डी बर्डन ऑफ कर्म डी वेट रोज संसार ऑफ माया क डी मेनिफेस्टेशन ऑफ एन ट्रू स्ट्रैंथ इस टुवर्ड्स डी हेल्पिंग अदर पीपल आईटी इस टुवर्ड्स डी अपलिफ्टिंग अदर पीपल टुवर्ड्स गॉड सो व्हेन दिस ट्रेड दिस देवर इस एन वेरी नाइस स्टोरी डेट भगवान व्यास ही वज गोइंग सम वेयर डी रिवर ऑन डी वे और डर वेयर ही शो डेट ही बिल हैव तू क्रॉस डी रिवर बट डियर वज नो बोट और नेत्र वज अन्य ताल और रिवर वज वेरीफाइड सिंधु करंट वज वेरी स्ट्रांग करंट ऑफ डी वाटर और डी से टाइम ही सो डेट देवर वेयर सम वूमेन हूं हेड सम मिल्क और बटर और एवरीथिंग विच डेविड टेकिंग तू सम प्लेस तू अंदर विलेज सो दिस वूमेन रिक्वेस्ट्र्टेड दिस भगवान व्यास दत ऋषि व्यास प्लीज हेल्प उस क्रॉस रिवर तो व्यास मनी से स्थित ओके यू बिल हैव तू गिव मी सम ऑफ योर मिल्क और सेटअप आई बिल आईटी और दें आई बिल हेल्प यू तू क्रॉस रिवर सो दिस विमान से ओके दे गिव दिस मिल्क और बटर और एवरीथिंग और भगवान व्यास ही एट एवरीथिंग है वैसे वेरी हैप्पी और दें ही टेल्स तू दिस रिवर डेट हेड आई नोट ईटन एनीथिंग यू पार्ट डी वे पर दिस विमान तू क्रॉस योर वॉटर डी मोमेंट और मेड वे पर दिस वूमेन तू क्रॉस रिवर तू अंदर बैंक लिसनिंग तू दिस सिंग दिस मिरेकल दिस वूमेन वेयर इस सरप्राइज ग्रेटली सरप्राइज दे सादे तू भगवान व्यास बिफोर अवर ऑन की यू आते एवरीथिंग जो दिस फूड जो दिस बटन जो दिस मिल्क [प्रशंसा] आईटी इसे डी ब्रह्मांड लिविंग विद इन फायर दिस कॉस्ट मी फायर डेट इस लिविंग विथ इन मी डेट हज रिटर्न योर फूड डेट इस रिटर्न योर मिल्क और बटर सो वे हैव तू अंडरस्टैंड एवं दो एन परसों हूं इस परफेक्टली पूरे एवं आईएफ ही इसे वर्किंग ही इसे नोट वर्किंग एवं आईएफ आईटी डूइंग समथिंग और दें ही इसे नोट डूइंग एनीथिंग इंस्पीते ऑफ हज डूइंग एवरीथिंग इन एक्चुअल रियलिटी ही इसे नोट डूइंग एनीथिंग बिकॉज़ व्हाट इस डी डेफिनेशन ऑफ कर्म अन्य डेफिनेशन ऑफ कर्म मेंस डेट यू अलसो एक्रू यू अलसो गदर डी फ्रूट ऑफ डी कर्म देवर इस नो सच थिंक इस कर्म विदाउट फ्रूट बट ऑफ कोर्स कर्म विदाउट फ्रूट डेट इस कॉल्ड कर्म योग नोट जस्ट कर्म बट कर्म योग इन कर्म योग डी क डेट इस टर्न आईटी इसे पर डी सेक ऑफ बेनिफिट पर आदर्श और आईटी इस पर दी अटेनमेंट ऑफ कोर्ट आत्माराम जगत हटाया अन्य क डेट इस दान पर इट्स तू परपोज आईटी इस नोट जस्ट कर्म आईटी इस कर्म योग और पर डेट देवर इसे नो परफेक्ट परफेक्ट स्ट्रैंथ बिल हैव नो एक्टिविटी इन दिस वर्ल्ड एवं आईएफ यू आर वर्किंग यू आर नोट वर्किंग एवं अदर सपोज आई एम वर्किंग इन ए डिपे सॉरी और मी फ्रेंड इस अलसो वर्किंग इन एन डिस्पेंसरी बट अवर आंसर कंपलीटली डिफरेंट आईएम वर्किंग इन एन चैरिटेबल डिस्पेंसरी डेडीकेटेड शूट तू श्री रामकृष्ण और डेडीकेटेड तू हेल्प पुर पेशेंट बिग सो डेट इस व्हाट आई एम डूइंग और मी फ्रेंड ही इसे अलसो एड डॉक्टर और हज हज ऑन डिस्पेंसरी और हज में आइडिया इस डेट गेदर इस मैच फीस फ्रॉम डी पेशेंट सो आई कैन विकम मोर और मोर रिचर सो डेट आई कैन हैव वेकेशंस इन यूरोप नोटिस दिस इस आईटी मतलब प्रेस्टीजियस थिंक अमंग डी डॉक्टर आई हैव हट डेट दे वांट तू हैव वेकेशंस इन यूरोप वेकेशंस इन साउथ अमेरिका जो दिस एग्जॉटिक प्लेस और पॉसिबल और डेट इस वन थिंक और अंदर थिंक दे डू दे हैव अरेंजमेंट विथ दिस मेडिकल दिस मेडिसिन कंपनी इस मेडिसिन कंपनी दे बिल रिक्वेस्ट इस डॉक्टर डेट प्लीज प्रिसक्राइब अवर मेडिसिन और इन रिटर्न वे बिल गिव यू दिस मैच परसेंटेज फ्रॉम अवर प्रॉफिट वे बिल गिव यू दिस मैच कमीशन फ्रॉम अवर प्रॉफिट सो व्हाट डॉक्टर बिल डू एक्चुअली डॉक्टर अंस मोर फ्रॉम दिस कमीशन फ्रॉम दिस मेडिसिन कंपनी दें ही अंस फ्रॉम डी पेशेंट डेम सेल्स दिस मैच बीइंग एन राकेट आईटी इस इन मेडिकल वर्ल्ड व्हेन वे सी डी दे आफ्टर दे डी प्राइस ऑफ मेडिसिन गोस ऑन इंक्रीजिंग वे में वंडर व्हाट दस व्हाट डू दिस मेडिसिन कंपनी डू वे सो मैच मनी बट एक्चुअली दिस मेडिसिन कंपनी हस तू पेढ़ीश डॉक्टर धी मेडिसिन पर दिस डिजीज और दें डॉक्टर बिल सबमिट दिस प्रिसक्रिप्शन तू दिस कंपनी और इन रिटर्न डी कंपनी बिल गिव डेम इनफ इनफ मनी तू कप डेम सेटिस्फाइड और कप डेम सब्सक्राइब इन डियर मेडिसिन मोर और मोर सो डेट इस वही आईटी इस एंटीरे मेडिकल प्रोफेशन एस विकम एन राकेट एन मटर ऑफ करप्शन और पेशेंट आर सफरिंग बिकॉज़ ऑफ डेट सो देवर इस वन डॉक्टर हूं इस प्रिसक्रिपिंग अननेसेसरी मेडिसिंस तू डी पेशेंट और इन रिटर्न हूं इसे वर्किंग इन एन चैरिटेबल डिस्पेंसरी पर है स्पेड्स हज ऑन मनी तू को तू डेट डिस्पेंसरी और रिटर्न फ्रॉम डेट डिस्पेंसर्बे अननेसेसरी मेडिसिंस सो धी डॉक्टर और इस अंदर डॉक्टर बोथ आर वर्किंग बट वन डॉक्टर बिल एक्चुअली ही बिल गदर सो मैच डी रिजल्ट ऑफ इस कर्म ही बिल गदर सो मैच सचिन ग्रेट बर्डन अपन हज हेड आईटी बिल टेक हम बर्थ आफ्टर बर्थ तू स्पेंड इट्स बर्डन तू लेसन दत बर्डन और अंदर डॉक्टर हज प्लेईंग डी से थिंक बट ही इस थिंकिंग ऑफ डी वेलफेयर ऑफ डी पेशेंट ही इस थिंकिंग ऑफ डी प्योरिटी ऑफ हज अलसो सो वॅटीवर डी क ही दस ही बिल वेरी लिटिल बर्डन फ्रॉम डेट क आईटी इस नोट पॉसिबल तू हैव जीरो कर्मफल एन देवर बिल बी सम कर्मफल आ डी कर्मफल बिल बी गुड आईटी बिल बी सातवीं बट एवं दें दिस सात्विक कर्मफल इत्सेल्फ इस एन बर्डन डेट ही बिल हैव तू क आउट बट आईटी बिल बी वेरी ली कंपेयर्ड तू डी अदर डॉक्टर सो डेट इसे वही स्वामी जी से सत्व स्ट्रैंथ ऑफ शक्ति डेट इस बोर्न आउट ऑफ सत्व इंस्पीते ऑफ दिस शक्ति मेनिफेस्ट इन स्पाइट ऑफ शक्ति तू क इन दिस वर्ल्ड एक्ट इस एन पोएटिक वे ऑफ स्वामीजी सेइंग डेट अवर व्हेनेवर कर्म इस निष्काम दिस निष्काम कर्म बिल हैव वेरी लिटिल कर्मफल जैसे दो डॉक्टर होते हैं और एक डॉक्टर

स्वामी विवेकानन्द

सोचता है की मैं पेशेंट से इतना ज्यादा पैसा लूंगा और फिर क्या है की आजकल ये जो मेडिकल कंपनी होती है वो मेडिसिन कंपनियां वो क्या है की मेडिसिन नया प्रोड्यूस करने के लिए आपको बहुत सर वो उसमें रिसर्च और डेवलपमेंट करना पड़ता है बहुत लाखों करोड़ रुपया आपको इन्वेस्ट करना पड़ता है आरएंड में रिसर्च और डेवलपमेंट में जब भी कोई नई ट्रक जो है आपको डेवलप करनी होती है और आजकल क्या है की डिजीज भी है जैसे लोगों को ड्रग रेजिस्टेंट होते जाते हैं मैन वह मलेरिया है या ऐसा डेंगू है या ऐसा कुछ चिकनगुनिया है वो तो आपने जो आज से 5 1 साल पहले जो मेडिसिन से ठीक हो जाता था अभी आज है की आपको उसका डबल डोज लेना पड़ेगा वो दो की मंत्र जो है वो ज्यादा से ज्यादा बढ़नी पड़ेगी और कभी कभी इस तरह के रेजिस्टेंस ट्रेन ए जाते हैं की वो किसी भी तरह की मेडिसिन से कम नहीं करते और फिर क्या है नए नए डिजीज तो चलते ही रहते हैं ये हमने देखा पेडेमिक में कैसे ये कोरोना ए गया और सबको जो है की वो किसका कोई मेडिसिन ही नहीं था वैक्सीन ही नहीं था उसको डेवलप करना पड़ा तो ये मेडिसिन कंपनियां को करोड़ रुपए डालना पड़ता है आईएमडी में फिर जब वो ट्रक डेवलप करते हैं तब क्या करते हैं लोग डॉक्टर को बोलेंगे की तुम इसको अपने प्रिसक्राइब करो अपने पेशेंट को प्रिसक्राइब करोगे तो हम तुमको इतना कमीशन देंगे तो डॉक्टर क्या है की डॉक्टर यह नहीं देखेगा की एक्चुअली पेशेंट को इतनी मेडिसिन की जरूर है या नहीं या तो फिर ऐसा नहीं दिखेगा की वह यदि मतलब ये पर्टिकुलर डिजीज के लिए ये कंपनी की मेडिसिन बटर है ना की वो कंपनी की मेडिसिन बटर है वो सीधा-सीधी मेडिसिन लिख दे अभी किसी डॉक्टर का अपमान करने का मेरा इरादा नहीं है ये कहना है मैं तो जस्ट एक बता रहा हूं की इस तरह कुछ-कुछ डॉक्टर होते हैं जब वो लोग ऐसा करते हैं तो सभी पेशेंट को क्या है की एक पूरा एक डॉक्टर समाज जो है उसकी वजह से बदनाम हो जाता है तो जो भी है तो दो डॉक्टर के बड़े में सोच एक डॉक्टर इस तरह का करप्ट डॉक्टर है दूसरा है की वो एक जैसी चैरिटेबल डिस्पेंसरी में जाता है हो सकता है की अपने खुद के पैसों खर्च करके जा रहा है और फिर हो सकता है की पेशेंट की बड़ी ही अच्छे से ठीक से देखभाल करेगा अननेसेसरी मेडिसिन नहीं लिखेगा जो भी है की उसको ऑनेस्ट एडवाइस देगा तो दोनों डॉक्टर कम कर रहे हैं दोनों डॉक्टर जो है पेशेंट को ट्वीट कर रहा है किंतु होता क्या है एक जो करप्ट डॉक्टर है वह क्या है की जितना कर्म करेगा उससे 10 गुना वह कर्म फल उसके सर पे जो है आकर के भारत स्वरूप बंता जाएगा और जो दूसरा डॉक्टर जो है चैरिटेबल डिस्पेंसरी में कम करता है उसके मां में एक ऐसी है इच्छा की वो गरीब पेशेंट को हेल्प करें उनकी ये जो वेदना है उनके जो दुख दर्द है उसको करने का पर्यटन करें उसको कम होने का पर्यटन करें जब वो ये सोचता है तो वो भी कर्म करता है किंतु उसका जो रिजल्टिंग कर्म फल है और बहुत ही कम होगा कर्मफल ना हो ऐसा नहीं है अच्छा वो मतलब वो सात्विक कर्म फल भी हो सकता है किंतु कर्मफल होगा किंतु बहुत ही कम होगा उसके नेक्स्ट बर्थ में उसको बहुत ही कम यह जो बर्डन है उसको वर्कआउट करना पड़ेगा बहुत ही इजीली वह जो है ईश्वर की और जा सकता है इसलिए स्वामी जी कहते हैं की जिसकी परफेक्ट स्ट्रैंथ होती है वह इस जगत में कार्य नहीं करता यह कितना वह एक पोएटिक तरीके से स्वामी जी एक के बाद एक बात हमारे सामने रखते हैं की परफेक्ट स्ट्रैंथ कभी कार्य नहीं करती परफेक्ट स्ट्रैंथ के रहने से ही सब कुछ जो है ऑटोमेटिक हो जाता है अभी हमको पता है की ऑटोमेटिक कुछ होने वाला नहीं है किंतु यहां पर जो स्वामी जी कहना चाहते हैं की परफेक्ट स्ट्रैंथ अर्थात की लोक कल्याण के लिए जो शक्ति इस्तेमाल की जाति है वो शक्ति और ये शक्ति का जो है उसका कोई कर्म फल बहुत मिनिमम राहत है वो

श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ

अच्छा अभी कथामृति कथामृत बहुत दिन हो गए हमने नहीं किया बीच-बीच में गैप ग जाति है विद्यासागर के साथ में ठाकुर बात कर रहे थे और जैसे हमने देखा की सडनली ठाकुर जो है की वह ब्रह्मज्ञान के बड़े में जो है वह बात करना शुरू कर देते हैं तो क्यों ठाकुर ऐसा कहते हैं क्यों ठाकुर इमीडियाटली ब्रह्मज्ञान के बड़े में बात करता है उसके बड़े में भी हमने देखा की क्यों ऐसा किया तो वित्तीय सागर के मां में थोड़ा बहुत संशय था की यह जो हिंदू समाज जो है हमारे जो शास्त्र है वो ऊपर ऊपर से पढ़ने से क्यों आपस विरोधाभास सी बातें कर रहे हैं ऐसा क्यों ग रहा है ऐसा एक विद्यासागर के मां में था तो यह बात ठाकुर ने समझ ली और सिम ही ब्रह्मज्ञान के बड़े में बताना शुरू कर दिया है अभी ठाकुर एक के बाद एक उदाहरण देकर के बोलते हैं की ब्रह्मज्ञान कैसा है तो एक आदमी जैसे समुद्र देखकर के आया तो किसी ने पूछा समुद्र का वर्णन करो तो बेचारा भी क्या वर्णन करेगा समुद्र की ये जो विशालता है उसकी जो भव्यता है उसकी जो मजिस्टिक ब्यूटी है उसका एक जो मां पे एक एकदम एक असर होता है मैं मुझे याद है की मैं जब वैसे तो मैं समुद्र वगैरा देखा है किंतु पहले बार में जब कन्याकुमारी गया था और वहां पे वो विवेकानंद रोग जो है वहां पे खड़े रहकर के चारों और जो समुद्र उसका मैंने दर्शन किया था तो एक ऐसा एक उल्लासित एक भाव मेरे मां में प्रकट हुआ था जिसे लगता था की मैं किसी स्वर्ग में ए गया हूं यह जो रोज बरूज किया जो चिंता टेंशन वगैरा जो है वह सब कहां छोड़ कर के मैं कैसे एक सुदूर प्रदेश में ए गया हूं की जहां उत्साह उल्लास और यह मां का यह जो सात्विक भाव है वही वहां पर विराजमान है यह जो ओपन जगह है यह खली है यह सब चीजों से हमारे मां पर इस तरह का असर होता है किसी ने महापुरुष महाराज को पूछा था क्या हम जब निराकार ध्यान करते हैं सरकार ध्यान अर्थात की ईश्वर का स्मरण मनन चिंतन करना जैसे की मेरे इस्ट देवता है भगवान राम तो मैं जब सरकार ध्यान करूंगा तो मैं इमेज इन करूंगा की भगवान राम मेरे हृदय में बैठे हुए हैं या तो भगवान श्री राम कृष्णा मेरे हृदय में बैठे हैं मैं उनके नाम का जाप कर रहा हूं जय श्री राम जय श्री राम जय श्रीराम और उनके बड़े में चिंतन कर रहा हूं उनके जो गन है सदगुण है उनकी जो ग्रेटनेस है वगेरा ये हो गया सरकार ध्यान निराकार ध्यान क्या है की मैं इमेजिन करता हूं की मेरे हृदय में ही वो आत्मा का प्रकाश जो है वो उभर रहा है मेरा मां जो है उल्लासित हो रहा है और जो है की मैं ही आत्मा हूं इस तरह से वो जो कर महावक के जो अपने उपनिषद में कहे गए हैं हम ब्राह्मणी तो जैसे की हम लोग जो है पुरी संप्रदाय अपना जो रामकृष्ण मिशन है हम लोगों पुरी संप्रदाय कहते है यह जो दास नाम संप्रदाय में से एक है पुरी संप्रदाय तो हमारा जो मा वाक्य है वो है हम ब्राह्मणी तो अर्थात की में ही ब्राह्मण हो ऑफ कोर्स मैं नहीं हूं ब्राह्मण किंतु यह जो आवरण जो है मेरठी ये आवरण को भेद करके कम क्रोध मैड लोग मो रूपी ये जो बाकी आवरण है मेरा अहंकार अविद्या अस्मिता राज द्वेष अभिनवेश इस आवरण को भेद करके मैं अपने सही स्वरूप में जब प्रतिष्ठित होगा सही स्वरूप अर्थात मैत्री करुणा मुदिता अपेक्षा सहित यह जो सचित आनंद रूपी जो मेरा सही स्वरूप है उसमें जब प्रतिष्ठित होगा तो वह मेरा सही स्वरूप है वही ब्राह्मण है इस तरह या तो किसी साधु ने महापुरुष महाराज को पूछा स्वामी शिवानंद जी महाराज को की क्या हम लोग निराकार ध्यान करते हैं तो एक बहुत ही विशाल एक मैदान है उसकी हम कल्पना कर सकते हैं क्योंकि क्या है की एक विशाल मैदान को सोच करके हमारे मां में इस तरह का एक भाव एक भाव उद्दीपन होता है तो महापुरुष महाराज बोलते तो मैदान की कल्पना क्यों कर रहे हो तुम जल्दी कल्पना ही करनी है तो मुक्त विशाल गगन की कल्पना करो जहां पर की बादल जाते हैं जाते हैं किंतु यह जो ईश्वर का ये जो स्वरूप है ईश्वर का यह जो यह है वह मतलब यह जो सूर्य के जो किरण उसको कभी कोई भी है यह हनी नहीं पहुंचती क्या कुछ कहना है अच्छा तो यह जो ईश्वर का जो स्वरूप है जो सही स्वरूप उसके ऊपर में से कितने ही बादल आते हैं और जाते हैं उससे की जो है की यह जो सूरज को कोई उसको वो जो है उसकी जो प्रकाश की हां रस नहीं होता उसका प्रकाश जो कम नहीं होता वैसे ही उन्मुक्त गगन की तरह मेरा सही स्वरूप है उसके ऊपर में कितने ही ये जो नेगेटिव इमोशंस आपके चली जाए मेरा जो सही स्वरूप है वो हमेशा वैसे का वैसा ही रहेगा तो ये बात जो है की ठाकुर ने भी एक बार कहा था की जब वो एक ग्रैंड ट्रक रोड पकड़ कर के वो वॉकिंग करने के लिए जाते थे मॉर्निंग वॉक करते थे तो वह जीटी रोड है ना वो वहां पर ज्यादा ठाकुर बोलते हैं की मैं जब यह बहुत विशाल सव सूट रास्ते से जाते हैं तो ईश्वरीय भाव का उद्दीपन होता है तो ऐसे कोई विराट एक आप फिनोफेना है या कोई विराट एक प्रकृति का नजर दृश्य है जब आप और उसके सामने ए जाएंगे तो आपके मां में भी यह फुल्लासित ऐश्वर्या भाव का उद्दीपन होगा तो यहां पर ठाकुर बोल रहा है की ब्रह्मज्ञान का उदाहरण देकर के किसी को पूछते हैं की वो समुद्र देखा तो कैसा देखा तो अभी वो व्यक्ति शब्दों से तो क्या वर्णन कर लगा आपको यदि खुद का अनुभव नहीं है समुद्र देखने का तब तक आप समझ नहीं पाएंगे की ऐसी कोई विराट जगह का अपने हृदय पे क्या असर होता है तो ये इसलिए ठाकुर बता रहे हैं बार-बार घुमा-घुमा करके विभिन्न उदाहरण देकर के ये जो विद्यासागर को समझा रहा है की ये जो ब्राह्मण ज्ञान है जिसने ब्रह्मज्ञान की अनुभूति की है उसको इतना एक भाव एक उसको एक्सपीरियंस हुआ है की वो इस एक्सपीरियंस को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता और जब व्यक्त करने को जाएगा तो उसका एक अंश मंत्र व्यक्त होगा और विभिन्न विभिन्न ऋषि मनी साधु संत लोग अलग-अलग तरीके से एक अंश आपके समक्ष रखेंगे और उसे अंशु के बड़े में पढ़कर के आपके मां में एक ऐसा संशय होगा की उन्होंने सच में कोई अनुभूति नहीं की है वरना तो इन सब की अनुभूति आपस में विरोधाभासी कैसे हो शक्ति है किंतु वो विरोधाभासी नहीं है जो एक विराट सत्ता है उसका एक वन परसेंट 01% ही आप एक्सप्रेस कर पे हैं अपनी वाणी से अपने मां से चिंतन कर पे हैं अपने शब्दों से उसको बड़े में का का रहे हैं और विभिन्न विभिन्न अंशु के बड़े में कहा गया है तो आपत्व ऊपर ऊपर से लगता है यह विरुद्ध पासी है अभी ठाकुर होने से ब्रह्म ज्ञान होता है ब्रह्म दर्शन होता है उसे दशा में विचार बिल्कुल बैंड हो जाता है आदमी चुप हो जाता है ब्रह्म कैसी वास्तु है यह मुंह से बताने का समर्थ नहीं रखना जैसे ठाकुर ने एक के बाद एक उदाहरण दे रहे जैसे की एक दो लड़कों का उदा हरण दिया और किसी गुरुकुल में वो ब्रह्म ज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गए थे और वापस आकर के पिता जी ने पूछा की क्या शिखा तो एक लड़का जो है वेद उपनिषद पुराण तंत्र में से वो एक के बाद एक रिचा एक श्लोक वगैरा उत्त का भया यह सब का सहारा लेकर के ब्रह्मज्ञान को समझने लगा दूसरा लड़का जो है चुपचाप मुंह बैंड करके खड़ा रहा पिताजी ने समझ लिया की यह जो दूसरा लड़का है वही ठीक से समझ पाया है की ब्रह्मज्ञान क्या है अच्छा ये तो पुराने जमाने की बात है आज यदि ऐसा होगा की दूसरा लड़का कुछ नहीं बोल रहा है एक ही लड़का बोल रहा है तो पिताजी ये समझ लेंगे की उसने कुछ पढ़ाई लिखा किया ही नहीं है वो पूरा समय फकीर मार के घूमता राहत था किसको पता है ये भी तो हो सकता है किंतु यह है की वो चेहरे का वो प्रकाश जो है वो ये देख करके समझ में ए जाता है की उसने खाकी बाजी की है ना की सही-सही उसने ये बात समझिए देखिए ये जो सत्व और तमस बहिर रूप से एक ही जैसे दिखते हैं क्योंकि राजस में प्रवृत्ति है एक्टिविटी है राजस्व में वाणी विलास है की मैं बहुत सर कुछ बोलूंगा मैं बहुत सारे एक्टिविटीज करूंगा मैं बहुत कुछ करूंगा तो ये राजस्व को लेकर के लोग रखते हैं की हां ये कुछ हो रहा है यहां पे उसने सही-सही उसकी कोई सिद्धि है सही-सही उसने कुछ प्राप्त किया है किंतु सात्विक व्यक्ति क्या है वो ज्यादा कुछ बोलना नहीं है वो बोलने को भी जाएगा तो बेचारा परेशान हो जाएगा अरे भाई कहां मुझे मुसीबत में दाल रहे हो कोई जाकर के बोलेगा उनको महाराज जी आप कुछ बोलिए तो बेचारा परेशान हो जाएगा अरे भाई रहने दो ना मुझे मत बुलाओ और किसी को पकड़ लो तो और तामसिक आदमी है उसको पता ही नहीं है कुछ तो वो क्या बोलने वाला है आप क्या करने वाला है तो सत्व और तमस ऊपर ऊपर फिर से एक जैसे दिखते हैं किंतु जब किसी के मां में अब गहराई में मतलब कभी-कभी क्या होता है ना की चेहरे से ही पता चल जाता है की ये सिर्फ सही-सही उसने वो तामसिक आदमी है ना की उसने सही-सही कोई एक्सपीरियंस किया है तो ये चेहरे के प्रकाश से पता चल जाता है और यहां पे पिताजी जो थे इन दोनों बच्चों को इंटेरोगते कर रहे थे एग्जामनिंग क्रॉस एग्जामिनेशन कर रहे थे उनका खुद का कोई उपलब्धि होगा तो उन्होंने समझ लिया की छोटा लड़का जो है उसने सिर्फ हांकी लगकी मार करके समय बर्बाद नहीं किया है उसने सही-सही कुछ अनुभूति प्राप्त की है और फिर एक दूसरा उदाहरण ठाकुर देते हैं की जो समुद्र एक जो नमक की एक पतली है वह समुद्र की गहराई मापनी के लिए गई अभी क्या है की ऐसा एक परफेक्ट उदाहरण की जैसे ही ये पूर्व भूमिका उन्होंने भांति इम्मीडिएटली सब लोग समझते और हंसना शुरू कर दिए कितनी सुंदर बात कहीं नमक का जो पुतला होता है समुद्र तो नमक तो समुद्र में से ही निकलता है समुद्र में तो नमक गला हुआ है तो नमक का यदि पुतुल बनाएंगे छोटी सी गुड़िया बनाएंगे वह जो दिन समुद्र में डालेंगे तो वो एक क्षण भर में जो है समुद्र में विलेन हो जाएगी समुद्र का ही एक भाग हो जाएगी क्योंकि नमक जो है समुद्र का अभिन्न अंग है समुद्र के पानी का तो जैसे वो ऐसा होता है की ब्रह्मा ज्ञान में से हम निकले हैं और ब्रह्मजी के भीतर में से और ब्रह्म की गहराई नापने को गए तो हम ऐसे ब्रह्मा में विलेन हो गए ऐसे ही ब्राह्मण में मिक्स हो गए जैसे नमक जो है वो पानी में मिक्स हो जाता है पानी का एक भाग हो जाता है तो फिर खून में अपनी सा करके बोलेगा की ब्रह्मज्ञान ऐसा है या वैसा है किंतु साथ-साथ में ठाकुर कहते हैं की देखिए हम जब शंकराचार्य है या तो सुखदेव है या तो श्री रामकृष्ण स्वयं है उन लोगों को हम देखते हैं की ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके वापस आए हैं तो क्या ईश्वर की ही कृपा है ईश्वर की ही ये इच्छा है की ब्रह्मा ज्ञान में से ये जो बाहर निकाल कर के लोगो उपदेश के लिए कुछ कार्य करें ये जो भगवान बुद्ध है देखिए बुद्ध की कहानी मुझे बहुत पसंद है की जब उनको निर्माण प्रताप हुई तो वो 21 दिन तक वहां पे वो टहलते रहे यह सोच करके की क्या मैं अपने मां को जो निर्वाण की महत्व गहन शांति है प्रशांति है उसमें डूबा करके यह शरीर त्याग कर डन क्योंकि मनुष्य जीवन का जो सर्वोच्च हेतु जो है वो तो मैंने प्राप्त कर लिया है तो फिर इस जगत में इस संसार में क्यों रहना किंतु फिर उनके मां में यह बात एक उदय हुई उनके शुद्ध सात्विक मां में की नहीं ऐसे कई लोग हैं जो की यह जो निर्वाण प्रताप के लिए कर रहे हैं और उनमें से कुछ जो लोग है जैसे की वह जिनके साथ में भगवान बुद्ध स्वयं तपस्या किया करते थे तो ब्रह्मा निर्वाण के बहुत नजदीक ए गए हैं किंतु उनको आखिरी जो कुछ स्टेप्स जो है आखिरी जो कुछ कम है वो उनको मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं है बोलकर के वो आखिरी कुछ कम नहीं ले का रहा है वो आखिरी कुछ जो स्टेप्स हैं वो नहीं चढ़ का रहा है तो ये सोच कर के भगवान बुद्ध जो है वो वाराणसी गए जहां भी ये जो पांच विकु है वो लोग तपस्या कर रहे थे ऐसे उनकी कहानी पता है ना की भगवान तपस्या ये लोग साथ में मिलकर कर रहे थे और उनका था की बिल्कुल कम खाना है बिल्कुल कम पहनना है बिल्कुल एकदम अतिशेष शारीरिक तपस्या करने है किंतु एक दिन क्या हुआ भगवान बुद्ध जो है वो बहुत कम खाने की वजह से बार-बार उपवास करने की वजह से बेहोश हो करके गिर पड़े तो वह जो एक गोपी थी एक नंद बाला थी की उसने आकर के भगवान बुद्ध को खीर खिलाई और उनकी जो है सुश्रुषा की उनकी सेवा की तो इसकी वजह से भगवान बुद्ध जो है फिर से उनका स्वास्थ्य वापस आया और फिर उन्होंने सोचा की नहीं ये जो अतिशी शारीरिक कष्ट शारीरिक तपस्या जो है कृष्ण साधन जिसको बोलते हैं वो सही रास्ता नहीं है ऑफ कोर्स संसार के सुख भोग जो है वो भी तो रास्ता नहीं है तो सही रास्ता क्या है मध्य था तब मिडिल पाठ तो उन्होंने इस तरह से मिडिल पाठ संसार से भी दूर रहकर के और वो जो बहुत साड़ी जो फिजिकल वो भी उससे भी दूर होकर के जब उन्होंने ध्यान करने की शुरुआत की तो बाकी जो भी खून के साथ में थे उन्होंने सोच लिया की अभी बुद्ध जो है वो करप्ट हो गए हैं वह संसार में डब गए हैं फिर से तो उनको छोड़कर के उनको त्याग करके हम जाते हैं दूसरी जगह साधना करेंगे वरना उनकी देखा अच्छी हम लोग भी जो है करप्ट हो जाएंगे हम लोग भी जो है यह भूख सुख में डब जाएंगे देखो वो खीर कभी खीर खाएगा ऐसा सोच कर के वो चले गए तो बुद्ध को जब भगवान बुद्ध को निर्वाण प्रताप हुई तब उन्होंने सोचा की देखिए ऐसे बहुत सारे सड़क होंगे इस भारतीय पूनिया भूमि में जो लोग की लगभग आखिर तक चले गए हैं आखरी जो कुछ कम है वहां पर उनको ठीक-ठीक मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है जैसे वो जो मुझे भगवान बुद्ध को एक जैसे इनसाइट मिला था उनको जैसे चमत्कारिक रूप से एक आशा रूप आशा भाई रूप से एक रास्ता मिला था और दूसरों को मैं नहीं मिल रहा है तो आखरी खुद कुछ कम के लिए वो अंधेरे में भटक रहा है ऐसा सोच करके भगवान बुद्ध उनके पास गए तो वो भी खुद तपस्या कर रहे थे तो उनको इम्मीडिएटली बुद्ध का चेहरा देखकर के पता चल गया की उन्होंने निर्वाण प्रताप कर ली है तो उनके पर में गिर पड़े कहा की अभी हम मार्गदर्शन दीजिए तो बुद्ध ने उनको मार्गदर्शन देना शुरू किया तो देखिए निर्वाण से बाहर आकर के लोक कल्याण के लिए लोगों को मार्गदर्शन के लिए जो वापस आए वो पर यही कृपा है ईश्वर की ही प्रेरणा है एडरवाइज यह नहीं हो सकता हमको पता है की मैंने ठाकुर को क्या कहा था तू ही भागो मुख्यतः तक अर्थात ये जो बॉर्डरलैंड है ये जो सुपर कॉन्शसनेस और कॉन्शसनेस उसकी ब्रेड लेंथ पे रहना जब इच्छा हो सुपर कॉन्शियस में चले जाना जब इच्छा हो मेरे भक्तों के साथ में वो जो नृत्य कीर्तन गण भजन हसी मजाक ये सब कर लेना ठाकुर को ऐसा कोई बेट करके प्रवचन देने की या उपदेश देने की जरूर नहीं थी वो हंसी मजाक भी करते थे तो वो भी उनका वो जो है की उससे लोग सिख लेते थे अभी दो-तीन दिन पहले बात हो रही थी की वो कीर्तनी के ढांढ दिखा रहा है तो उसमें वो जो बच्चे लोग हैं हंसते-हंसते वो लोटपोट हो रहे हैं जमीन पे गिर जा रहा है जमीन पे आलोट रहे हैं तो वो भी उनका एक सीखने का तरीका है स्वामी जी ने कहा ना की जो महापुरुष होता है उसका जो हास्य उसका गुस्सा उसका वह जो थपका मतलब उसका स्कोल्डिंग वो गुस्सा जल्दी हम क्या करता है उसे सभी चीजों के पीछे में उसका आशीर्वाद राहत है हमारे साथ हंसी मजाक करेंगे तो भी हमारे कर्म कट जाएंगे और हम हमारे पर गुस्सा करेंगे तो भी हमारे कर्म कट जाएंगे अभी मैं वह जो किताब पढ़ रहा हूं तो मेरी लुइस क का ट्रांसलेशन करने के लिए गुजराती में डिसाइड जर्नल उसमें वो लिखती है की अशोकानंद जी बीच-बीच में इतना गुस्सा करते थे वो देवोते के ऊपर में तो लोग बेचारे डर जाते थे की क्या वो भी मतलब क्या से क्या नहीं हो गया एक बार यह मेरे लुई को बोला गया की वहां पे वो जो नया मंदिर का वो जो कंसेंरेशन होने वाला था सन फ्रांसिस्को में तो बहुत सारे वो अमेरिकन साधु इकट्ठा होंगे तो पवित्रानंद जी है अखिलानंद जी है सब प्रकाशानंद जी है विविध आनंद जी है चार-पांच-सात जो इकट्ठा होने वाले थे तो उनको लेकर के जो है की वह सन फ्रांसिस को शहर के जो अच्छे-अच्छे वह जो मैंने साइटसाींइग भारत से वहां पर ले जाना जैसे गोल्डन गेट ब्रिज वगैरा तो मेरे लिए उनको गाड़ी में लेकर के निकली और फिर जैसे ही थोड़े दूर गई वो भी थोड़ी टेंशन में है की इतने सारे पांच साधु गाड़ी में बैठे उसके साथ में तो वह सोचती है की वह उसकी तो एक रिस्पेक्ट है ना सन्यासी के प्रति तो थोड़ी दरी हुई भी है थोड़ी सी वो बात भी ठीक से नहीं कर का रही वैसे टेंशन में ही टेंशन में वो एक टर्न था वो मिस कर दिया और आगे निकाल गई अभी वहां के तो वो ट्रैफिक रूल्स वगैरा तो बड़े ही कड़े होते हैं हमारे जैसा नहीं की जहां से इच्छा टर्न लगा दिया जहां से अच्छा वो निकाल लिया और जहां से भी इच्छा हो रेड लाइट भी होती है बहुत सारे लोग निकाल जाते हैं आजकल नहीं होता अभी तो वो कैमरा ए गया है फोटो पढ़ लेते हैं तो वहां पर तो उसे समय से 1950 की बात है 1958 उसे समय की बात है जैसे ही वो आगे निकाल गई इमीडीएटली पीछे से पुलिस की सायरन आवाज आने लगी पुलिस वाले आए पड़ा और फिर उसका लाइसेंस जो है वो देख करके वो जितना पैसा है वो दंड उसको दिया तो यह साड़ी इतनी टेंशन में है की पांच साधु बैठे हैं और उसके सामने अमेरिकन पुलिस वाला की इंडियन साधु है उसे पर तो कुछ पड़ी नहीं है तो वो ऐसा गुस्सा कर रहा है साधु लोग बेचारे चुपचाप बैठे हैं अभी जैसे वह मेरे लिए गई वो सन फ्रांसिस को विधानसभा में और फिर जो अशोक आनंद जी ने उसको जो डाटा है वो बाहर के ही रास्ते पे ही भीतर में भी नहीं रास्ते पे ही डांटना जो शुरू किया है वो जो 52 जो उसके साथ में गए थे वो बेचारे टेंशन में ए गया अशोकानंद जी को बोलना है अरे इतना मत दांतों और फिर वो मेरी भी इसको बोल रहे थे टेंशन मत करो यह तो वैसे ही बोल रहे हो उसमें भीतर में गुस्सा कुछ नहीं है किंतु देखिए ये सब ही यदि कोई साधु या तो कोई महापुरुष उनका गुस्सा भी जो है तो उससे भी जो है अपने कर्म कट जाते हैं मेरे लिए इसकी ये जो डिसीप्लस जर्नल पढ़ेंगे ना तो उसमें बार-बार अशोकानंद जी के गुस्से होने की बात सबसे ज्यादा एक किंतु फिर भी अशोकानंद जी के ऊपर में उसकी जो श्रद्धा भक्ति थी वो कितनी गहन थी वो प्रत्येक सेंटर्स में वो हमको उसको देखने को मिलता है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं