Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda English & Hindi 12 Mar 2023

Swami Vivekananda

ओम स्थापकााय धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः सो टीचिंग्स ऑफ स्वामी विवेकानंद आई एम शेयरिंग माय स्क्रीन हियर यू कैन सी यस्टरडे वी वेर ऑलरेडी रीडिंग दिस पर्टिकुलर कोटेशन एंड वी सॉ दैट हाउ स्वामी जी वेरी पोएटिकली डिस्क्राइब्स व्हाट इज दी अद्वैत वेदांता। नाउ अद्वैत वेदांता एज वी ऑलरेडी नो दैट इट इज़ वेरी डिफिकल्ट टू एक्सप्रेस से द कॉन्सेप्ट इज़ सो डिफिकल्ट दैट यू कैन नॉट जस्ट इज़ली डिस्क्राइब इट इन नॉर्मल वर्ड्स। दिस इज़ द डिफरेंस बिटवीन अद्वैतिक एंड नॉन अद्वैतिक फ़िलॉसोफीज़। फॉर नॉन अद्वैतिक फिलॉसोफीस द ऑब्जेक्ट इज अदर देन द सब्जेक्ट। देयर इज़ अ क्लियर डिमार्केशन ऑफ व्हाट इज एन ऑब्जेक्ट एंड व्हाट इज़ अ सब्जेक्ट एंड व्हाट इज़ द रिलेशनशिप बिटवीन द सब्जेक्ट एंड ऑब्जेक्ट एंड व्हाट इज़ द रिलेशनशिप बिटवीन डिफरेंट सब्जेक्ट्स और डिफरेंट ऑब्जेक्ट्स। सो दिस रिलेशनशिप एंड वेरियस एंटिटीज़ एग्ज़िस्टेंस एंड डिमार्केशन ऑफ़ वेरियस एंटिटीज़ इज़ वेरी क्लियर। दैट इज व्हाई वी नो दैट नॉन अद्वैतिक फिलॉसोफीस मे इट बी साइंस मे इट बी टेक्नोलॉजी मे इट बी ह्यूमैनिटीज मे इट बी सोशल स्टडीज और इवन द रिलीजियस थॉट दीज़ आर इज़ियर टू एक्सप्लेन बट वि अद्वैत वेदांता द सब्जेक्ट द ऑब्जेक्ट एंड द रिलेशनशिप बिटवीन द सब्जेक्ट एंड ऑब्जेक्ट आर वन आर ओनली इन वन प्लेस इट इज़ अ वन सिंगल स्पॉट दैट इज़ व्हाई व्हेन वी ट्राई टू डिस्क्राइब अद्वैत विथ नॉन अद्वैतिक टर्मिनोलॉजीस दैट वी हैव डेवलप्ड सो फार इट फेल्स आवर वर्ड्स फेल आवर आइडियाज फेल दैट इज व्हाई स्वामी जी यूज दिस पोएटिकल एनालॉजीस पोएटिकल सिमाइल्स इन ऑर्डर टू एक्सप्रेस हाउ दिस अद्वैता वर्क्स सो हियर ही सेड दैट ऑल लाइफ्स बिलोंग टू अस एज लीव्स टू अ बुक बट वी आर अनचेंज्ड द विटनेस द सोल अपॉन हुम द इंप्रेशन इज मेड। द सोल इज द यूनिटी ऑफ ऑल पर्सनालिटीज़ एंड बिकॉज़ इट इज़ एड्रेस, इटरनल, अनचेंजबल। आई कैन गिव यू अह अनदर एग्जांपल। सपोज़ देयर इज़ अ ट्रेन स्टेशन एंड वन आफ्टर अनदर मेनी ट्रेन कम। सो सपोज़ अह हियर अह यू गो टू सम बिग रेलवे स्टेशन लाइक हावड़ा। यू विल सी दैट देयर आर ट्रेंस व्हिच आर कमिंग फ्रॉम दिल्ली कमिंग फ्रॉम बॉम्बे कमिंग फ्रॉम कोलकाता एंड ट्रेंस लिविंग अगेन फॉर से बेंगलुरु और मैसूर और से फॉर एग्जांपल नागपुर और कानपुर इन सो मेनी प्लेसेस ट्रेंस आर कमिंग एंड गोइंग बट द रेलवे स्टेशन इटसेल्फ हावड़ा रिमेंस देयर इन इट्स ओन प्लेस इट डज़ नॉट चेंज देयर इज़ अ शेड्यूल ऑफ़ कमिंग्स एंड गोइंग्स ऑफ़ द ट्रेन। देयर इज़ अ शेड दे पैसेंजर्स कम एंड दे बोर्ड वन ट्रेन एंड दे अलाइन फ्रॉम अनदर ट्रेन दे कम दे लीव बट द रेलवे स्टेशन इटसेल्फ रिमेंस द सेम सिमिलरली अद्वैत द आवर ट्रू नेचर द ट्रू रियलिटी आत्मन और ब्रह्मन इट रिमेंस सेम अनचेंजिंग अनफेक्टेड सपोज़ देयर इज़ अह वन ट्रेन इज़ लेट और सपोज़ देयर इज़ अ एक्सीडेंट ऑन द बिटवीन टू ट्रेंस और अनदर ट्रेन डिरे्स एंड सेवरल पैसेंजर्स आर अनफॉर्चूनेटली डाइड बट डस दैट अफेक्ट द रेलवे स्टेशन ऑफ़ हावड़ा इटसेल्फ? द नो इट विल नॉट द रेलवे स्टेशन इटसेल्फ विल रिमेन द सेम एज़ इट वाज़। सो हियर द सेम थिंग द माया द लाइफ दैट वी ऑल अह टेक द बॉडीज़ दैट वी ऑल टेक आई एम आई एम माय बॉडी। यू आर योर बॉडीज एंड देयर आर 700 करोड़ पीपल ऑन प्लेनेट अर्थ वी ऑल हैव आवर बॉडीज वन बॉडी कम वन बॉडी टेक्स बर्थ अनदर बॉडी अनदर पर्सन डाइस इट पाससेस अवे सो बर्थ एंड डेथ डिसीज एंड डीजनरेशन और एजिंग दिस साइकिल जन्म मृत्यु जरा व्याधि विल गो ऑन एंड ऑन एवरीडे एव्री आवर एव्री मिनट एव्री सेकंड थाउजेंड्स ऑफ बेबीज आर बोर्न ऑन अर्थ एंड थाउजेंड्स ऑफ ओल्ड मैन और वुमेन आर डाइंग आइदर फ्रॉम ओल्ड एज और डिसीज और एक्सीडेंट व्हाटएवर एव्री सेकंड देयर आर पीपल टेकिंग बर्थ एव्री सेकंड देयर आर पीपल डाइंग बट दी आत्मन दैट इज बिहाइंड ईच ऑफ अस दी वन सिंगल आत्मन व्हिच एनिमेट्स एव्री अदर बॉडीज एव्री अदर पर्सन इट रिमें रिमेन सेम अनचेंजिंग अनमूविंग अनफेक्टेड दैट इज व्हाई स्वामी जी डिस्क्राइब्स दिस सो ब्यूटीफुली सपोज़ देयर इज़ अ बुक महाभारता महाभारत सो मेनी चैप्टर्स सो मेनी कैरेक्टर्स सो मेनी इमोशंस आर इनवॉल्वड समटाइम्स देयर इज़ अ वीर भाव समटाइम्स देयर इज़ अ मातृ भाव समटाइम्स देयर इज़ अ देयर इज़ अ मधुर भाव समटाइम्स देयर इज़ अ सख्य भाव सो मेनी डिफरेंट-डिफरेंट भावास आर देयर सो मेनी डिफरेंट-डिफरेंट रिलेशनशिप्स आर देयर बट द स्टोरी महाभारता इटसेल्फ रिमेंस अनचेंज इटरनल अनमूविंग अनफेक्टेड इट अफेक्ट्स अस परहप्स दोज़ हु आर रीडिंग द स्टोरी बट द स्टोरी इटसेल्फ रिमेंस अनफेक्टेड नाउ स्वामी जी सेज़ फर्दर इट इज़ गॉड आत्मन इट इज़ नॉट लाइफ बट इट इज़ कोइंड इंटू लाइफ इट इज़ नॉट प्लेज़र बट इट इज़ मैन्युफैक्चरर्ड इनू प्लेज़र सी सच पोएटिक वर्ड्स अगेन दैट आत्मन इज नॉट लाइफ आउट ऑफ दी आत्मन लाइफ इज बोर्न आत्मन इज नॉट प्लेजर सेंसुअल प्लेजर बट आउट ऑफ दी आत्मन द सेंसुअल प्लेजर इज़ मैनिफेस्टेड इज़ प्रोड्यूस्ड बिकॉज़ आत्मन इज़ अल्टीमेटली अल्टीमेट यू कैन से द थिंग दैट अह दैट टेक्स दैट दैट अल्टीमेट विटनेस एवरीथिंग दैट आई डू इन माय लाइफ आत्मन विटनेस इज़ इज़ बिहाइंड मी। दैट इज़ व्हाई वी डिस्कस यस्टरडे दैट इज़ व्हाट इज़ द अद्वैतिक वे ऑफ़ मेडिटेशन। व्हाट इज़ अद्वैतिक मिस्टिसिज्म? दिस ईयर आई थिंक इन जनवरी आवर प्रबुद्ध भारत मैगज़ीन इज़ ब्रिंगिंग आउट अ स्पेशल इशू। आई थिंक इट इज़ 125 ईयर ऑफ़ एस्टैब्लिशमेंट ऑफ़ प्रबुद्ध भारत मैगज़ीन। सो दे आर ब्रिंगिंग आउट अ स्पेशल इशू इन जनवरी 2024। द इशू इज़ अद्वैत मिस्टिसिज्म। सो दे हैव आस्क्ड मेनी मॉक्स इन आवर ऑर्डर टू राइट एन आर्टिकल फॉर दैट। आई आई एम आल्सो आस्क टु राइट एन आर्टिकल देन आई एम राइटिंग एन आर्टिकल टेकिंग दैट लीड फ़ स्वामीजीस दैट पोएम काली द मदर द स्टार्स आर ब्लोटेड आउट द क्लाउड्स आर कवरिंग क्लाउड्स इट इज़ डार्कनेस वाइब्रेंट सोनंट द वेरी ब्यूटीफुल पोएम ऑफ स्वामी विवेकानंद इट इज़ कॉल्ड काली द मदर नाउ व्हेन वी रीड दिस टाइप ऑफ पोएम वी कैन सी दैट स्वामी जी एक्चुअली हेड दिस मिस्टिक विज़न स्वामी जी एक्चुअली हेड दैट दर्शन एंड आउट ऑफ दिस दर्शन आउट ऑफ दिस मिस्टिक एक्सपीरियंस ही हैड रिटन सच अ ब्यूटीफुल पोयम अदरवाइज हाउ कैन वन से दैट स्टार्स आर ब्लोटेड आउट डार्क क्लाउड्स आर कवरिंग क्लाउड्स इट इज़ डार्कनेस वाइब्रेंट सोनंट व्हेन वी रीड दिस वर्ड्स वी कैन रियलाइज सच अ ग्रेट पावर स्वामी जी हैड ओवर द आइडियाज ऑफ वेदांता ओवर द आइडियाज ऑफ़ अद्वैता एज वेल एस सच अ पावरफुल स्ट्रांग स्ट्रंग ग्रेस ऑन पोएट्री एंड दैट इज व्हाई हियर स्वामी जी सेस दैट आत्मन इज नॉट लाइफ लाइफ इज मैन्युफैक्चरर्ड कोइंड इनू आत्मन लाइफ इज कोइंड आउट ऑफ दिस आत्मन प्लेजर इज मैन्युफैक्चरर्ड आउट ऑफ आत्मन दैट मींस दैट दिस माया व्हिच इज अ सरफेस लेयर ऑफ दिस आत्मन दिस माया हैज़ दिस लाइफ दी माया हैज़ दिस प्लेजर एंड एंगेजमेंट विथ द अर्थ विथ द वर्ल्ड दिस काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह और ऑल दिस द थिंग्स दैट अ बॉडी डिजायर्स अह गुड थिंग्स टू ईट, अ गुड प्लेस टू ट्रैवल टू टू हैव सम प्लेज़र, टू हैव सम हैप्पीनेस। एवरीथिंग इज़ डिजायर्ड बाय दिस बॉडी। बट नॉट बाय दिस आत्मन, बट दिस बॉडी इज़ अ एनिमेटेड। दिस बॉडी इज़ अह फ्यूल्ड बाय दी आत्म। सपोज़ देयर इज़ अ कार। सपोज देयर इज़ अ वेरी ब्यूटीफुल कार। बट इफ देयर इज नो पेट्रोल इनसाइड कार, व्हाट दिस कार विल डू? इट विल डू नथिंग। इट विल रिमेन इन वन प्लेस एंड गैदर डस्ट। बट द मोमेंट यू पोर पेट्रोल इनटू द कार, यू कैन द कार इज़ रेडी टू स्टार्ट। कार इज़ रेडी टू ड्राइव। एंड यू कैन टेक दिस कार सपोज़ इट इज़ अ Ferrari, सपोज़ इट्स अ Rolls Roys. वेरी ब्यूटीफुल वेरी पावरफुल, वेरी कॉस्टली एक्सपेंसिव कार। बट विदाउट पेट्रोल, द कार रिमेंस गैदरिंग डस्ट इट डज़ नथिंग नाउ इमेजिन देयर इज़ वेरी देयर इज़ अ सेकंड हैंड ओल्ड Maruti आवर यू नो ओल्ड मॉडल ऑफ़ Maruti और एंबेसडर व्हेन आई वाज़ प्रीवियस 10-15 इयर्स एगो देयर ओनली टू मॉडल्स वेर अवेलेबल इन इंडिया। वन वाज़ Maruti एंड अनदर वाज़ दिस एंबेसडर कार। बट टुडे देयर आर सो मेनी वैरायटीज़ ऑफ़ कंपनीज़ ऑफ़ कार अवेलेबल इन इंडिया। सो Bently एंड BMW एंड इवन से Mercedes Rolls Ryce सो बट इफ यू टेक एनी ओल्ड इवन अ ओल्ड मॉडल सेकंड हैंड वेरी डिलेपिटेड Maruti और एंबेसडर कार और यू कैन टेक अ बैटली और BMW लेटेस्ट मॉडल हाईली एक्सपेंसिव ₹1 करोड़ इट्स कॉस्ट यू कैन टेक दैट कार एवरी व्हाट इज द वन थिंग सिमिलर टू ऑल द कार्स इट इज़ द फ्यूल मे इट बी पेट्रोल मे इट बी डीजल मे इट बी इलेक्ट्रिक मे इट बी ड्रिवन बाय गैस व्हाटएवर दिस फ्यूल इज़ वन कॉमन थ्रेड अमोंग ऑल दी कार्स मे इट बी ₹0000 सेकंड हैंड वेरी रस्टी कार और ₹1 करोड़ वेरी एक्सपेंसिव कार ऑल दिस कार्स विल गैदर डस्ट इफ देयर इज़ नो फ्यूल इनसाइड देम बट द मोमेंट यू पोर फ्यूल इनसाइड देम देन दिस कार्स आर रेडी टू टू रन, रेडी टू ड्राइव, रेडी टू गिव अस प्लेज़र। द सेम थिंग दिस लाइफ, द प्लेज़र्स ऑफ़ दिस लाइफ ऑल आर एनिमेटेड, ऑल आर फ्ल्ड बाय दी आत्मन। इफ देयर इज़ नो आत्मन बिहाइंड दिस, यू नो व्हाट हैपेंस विथ द डेड बॉडी, डेड बॉडी विल रोट एंड इट विल सिंपली डिसइग्रेट। बट एज़ लोंग एज़ देयर इज़ आत्मन इन दिस बॉडी, यू कैन सी दट बॉडी इज़ हेल्दी, विथ समटाइम्स बॉडी इज़ ब्यूटीफुल। द बॉडी इज़ कैपेबल ऑफ़ एंजॉयंग सो मेनी भोगाज़, सो मेनी सेंसुअल प्लेज़र्स। बॉडी इज़ कैपेबल ऑफ़ डूइंग सो मच गुड वर्क आल्सो। अ बॉडी इज़ कैपेबल ऑफ वेरी गुड फ्रेंडशिप। बॉडी इज़ कैपेबल ऑफ लॉयल्टी देश पेट्रियोटिज्म एंड सम गुड वर्क्स एंड साधन भजन। दिस बॉडी इज़ कैपेबल ऑफ एवरीथिंग। ओनली एस लॉन्ग एस देयर इज़ आत्मन बिहाइंड दिस। द मोमेंट दिस आत्मन गोज़ अवे और रेदर लेट मी से द बॉडी डाइस इट सिंपली रिमेंस अ रोटन केयर कास्ट रोटन डेड बॉडी एंड देयर इज़ नथिंग इनसाइड इट। सो व्हाट इज़ द डिफरेंस बिटवीन दिस रोटन डेड बॉडी एंड दिस अलाइव हेल्दी ब्यूटीफुल बॉडी। इट इज़ दी आत्मन। आत्मन एनिमेट्स द बॉडी एज़ लॉन्ग एज़ देयर इज़ आत्मन बिहाइंड इट। एंड व्हेन दिस आत्मन गोज़ अवे नथिंग रिमेंस इनसाइड दिस बॉडी। इट वाज़ मेड ऑफ पंचमहाभूत एंड इट विल अगेन डिसइीग्रेट इनू पंचमहाभूत। सो आत्मन इज इट इज नॉट लाइफ बट लाइफ इज मैन्युफैक्चरर्ड आउट ऑफ आत्मन। दिस प्लेज़र्स आर नॉट आत्मन बट आउट ऑफ दिस आत्मन दिस प्लेज़र्स आर बोर्न। ये जो इतना

श्रीरामकृष्ण कथामृत : भक्तों के साथ श्रीरामकृष्ण : 11 मार्च 1882

ब्यूटीफुली जो स्वामी जी समझाते हैं कि यदि एक कार है बहुत पुरानी कार हो ना कि बहुत महंगी कार हो। इन सबके पीछे एक जो पेट्रोल कहो या डीजल कहो या इलेक्ट्रिक से चलती हो या गैस से चलती हो ये जो फ्यूल है इस जो ईंधन जो है वो कार को चलाता है यदि ईंधन नहीं रहेगा तो कार क्या है पड़ी पड़ी धूल खाएगी और यदि ईंधन भरा जाए कार में तो कार फटाफट दौड़ना शुरू करेगी हमको इतना आनंद देगी तो इसीलिए यह जो चेतन तत्व है हमारे शरीर में चेतन तत्व की वजह से ही तो हमारा शरीर हेल्दी रहता है हमारा शरीर यह जो सुख भोग जो है उसका उपभोग करता है और यही शरीर जो है साधन भजन करता है। ईश्वर के मंदिर में जाकर के ठाकुर के सामने दो हाथ जोड़कर के खड़े रहता है और यही जो शरीर है वो शायद जो है यह जो क्राइम है, चोरी चपाटी है, किसी का मर्डर करना है। ये शरीर भी वही यही शरीर सब कुछ करता है। आप कहेंगे कि क्या ऐसा है कि इसके पीछे कोई डिफरेंट टाइप का चेतन तत्व होगा जो कि मंदिर में जाकर प्रार्थना करवाता है और कोई डिफरेंट टाइप का चेतन तत्व होगा जो कि हमारे से कोई गलत कार्य करवाता है। नहीं चेतन तत्व एक ही है। यह शरीर अपने कर्मों के अनुसार, अपने इंक्लिनेशन के अनुसार, अपने संस्कार के अनुसार कार्य करता है। तो कोई कहेगा कि क्या यह जो आत्मन के भीतर में यह संस्कार है, क्या आत्मन के भीतर में यह कर्म है, क्या आत्मन के भीतर में यह सब टेंडेंसी, साइकोलॉजी या मनोविज्ञान क्या आत्मन के भीतर है? यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि आत्मन इज नॉट लाइफ, बट इट इज कोइंड इन टू लाइफ। अर्थात यह आत्मन जो है वो यह हमारे टेंडेंसी हमारे संस्कार या हमारी साइकोलॉजी या तो फिर हमारा कर्म यह आत्मन नहीं है किंतु आत्मन जो है इन सबको चेतन बनाता है। इन सबको चेतनवंत बनाता है। इस चेतना की वजह से ही आत्मन की चेतना की वजह से ही मैं शरीर के द्वारा विभिन्न कर्म कर सकता हूं। विभिन्न संस्कार जो है मेरे मन के ऊपर में जो उसकी प्रतिलिपि उसकी छाप छोड़ जाते हैं। यदि चेतन नहीं रहता तो जो है डेड बॉडी जो है उसमें और ये जो लाइव बॉडी जो है उसमें डिफरेंस क्या है? डेड बॉडी पूरा रोट हो जाता है। वो कुछ भी काम नहीं कर सकता। जबकि ये चेतन जो शरीर है वो सब कुछ कर सकता है। तो बुरा कहो ना कि भला कहो वो सब इस चेतना की वजह से है। जैसे ही चेतना चली गई तो ये बुरा भला सब कुछ चला जाएगा। रह जाएगा सिर्फ एक डेड रोटिंग डेड बॉडी। तो इसीलिए जो आत्मन है वो इस जो ये जो पूरा विश्व है उसको उजागर करता है। जैसे सूरज जो है पूरी पृथ्वी को उजाला देता है और सूरज चला जाएगा तो पृथ्वी ही नष्ट हो जाएगी। क्योंकि सूरज की वजह से ही तो सूरज ही तो पूरी जैसे गाड़ी में हम ये पेट्रोल या डीजल डालते हैं। पृथ्वी में ये पेट्रोल या डीजल डालने वाला है सूरज। ये फोटोसिंथेसिस की वजह से ही तो ये जो ये जो माने पशु ये जो मतलब प्लांट लाइफ है वो वो माने सस्टेन होता है और प्लांट को खाकर के पेड़ पौधों को खाकर के पशु-पक्षी जिंदा रहते हैं। हम लोग भी इससे जिंदा रहते हैं। यदि सूरज चला जाएगा तो सब कुछ जो है नष्ट हो जाएगा। तो इसी तरह से ये जो आत्मन जो है वो जीवन है, संस्कार है, कर्म है, ये सबको पीछे बैठकर के चलाता है किंतु उससे वो जो है अफेक्ट नहीं होता। कोई कहेगा कि पृथ्वी पर चलो युद्ध हो गया। तो क्या सूरज को क्या फर्क पड़ने वाला है? सूरज को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। वो जैसे पृथ्वी को जो प्रकाश देता है ऐसे वो दूसरे जो नाइन प्लेनेट्स हैं, नौ प्लेनेट है वो सोल मतलब सोलर सिस्टम में। सबको वैसे ही प्रकाश देता है। पृथ्वी यदि नहीं भी रहेगी तो बाकी आठ प्लेनेट जो रहेगी उसको आराम से सूरज प्रकाशित करता रहेगा। उसको कुछ आता जाता नहीं है। पहले यहां पे डायनासोर थे। फिर वो मटेरियर्ड गिरा और डायनासोर खत्म हो गए। मैमल्स डेवलप हुए। इवॉल्व हुए। मैमल्स में से धीरे-धीरे करके वो इवोल्यूशन होते फिर बंदर बने। बंदर में से मनुष्य बने। हमने ये सिविलाइजेशन बनाया। हमने ये जो स्पेसशिप्स है रॉकेट्स डेवलप किए। सुपर कंप्यूटरटर्स डेवलप किए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलप किया। इंटरनेट डेवलप किया। ये जो सिविलाइजेशन है, ये साइंस एंड टेक्नोलॉजी है, यह रिलीजन जो है, संत महापुरुष सब कुछ ये पृथ्वी पर हुआ, आए और गए। किंतु सूरज को तो कोई फर्क नहीं पड़ता कि पृथ्वी पे क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा है। वो जो है निर्विकल्प निराकार अपने आराम से वह जो है प्रकाश की किरण पृथ्वी पर फेंक रहा है। तो वैसे ही हम अपने जीवन के साथ में कुछ भी करें। अच्छा करें ना बुरा करें। अच्छे संस्कार अर्जित करें ना बुरे संस्कार अर्जित करें। हम यदि जीते हैं या तो फिर मृत्यु पामते हैं। मृत्यु को प्राप्त होते हैं। जन्म मृत्यु जरा व्याधि की ये जो साइकिल है पृथ्वी पे प्रतिदिन जो दोहराती रहती है। प्रतििक्षण जो पृथ्वी पे हजारों लोग जन्म लेते हैं। प्रतििक्षण पृथ्वी पे हजारों लोग मृत्यु पामते हैं। तो उससे जो आत्मन जो है उसको कोई फर्क नहीं पड़ता। इसीलिए जो है ये जो मेडिटेशन की टेक्निक है अद्वैत वेदांत में कि जब हम आंख बंद करके ये सोचते हैं कि मैं आत्मन हूं मैं ब्रह्मन हूं। जैसे सूरज जो है वो अपने प्रखर रुद्र स्वरूप से किस तरह से पृथ्वी को प्रकाशित किए ही जाता है। वो पृथ्वी पर युद्ध हो ना कि पृथ्वी पर शांति हो पृथ्वी पर कोई फेस्टिवल हो ना कि पृथ्वी पर लोग जो दुखी हो अकाल पड़ा हो कुछ भी हो उससे जो है सूरज को कोई फर्क नहीं पड़ता। वैसे ही जब मैं ध्यान करता हूं तो मैं सूरज हूं, मैं ब्राह्मण हूं। और ये जो मेरे मन के जो जितने भी ये सब जो कॉम्बिनेशंस है, जितने भी विकार है, विकार है, अभी आज मुझे ये काम करना है, कल मुझे वो काम करना है, मुझे इसका टेंशन है, मुझे उसका टेंशन है, ये स्ट्रेस है, वो स्ट्रेस है। वो सब चीजें जो है मुझे अफेक्ट नहीं करती। क्योंकि मेरे दो भाग हैं। एक तो परमानेंट में हूं, एक टेंपरेरी मैं हूं। तो अभी मैं अपने को टेंपरेरी मैं के साथ में आइडेंटिफाई कर दिया है। किंतु जैसे-जैसे मेरी साधना में आगे बढ़ता जाऊंगा मैं सोचूंगा कि अरे ये जो टेंपरेरी मैं हूं वो तो सही-सही मैं नहीं हूं। वो तो सिर्फ एक माया का आवरण मात्र है। जब एक छोटा बच्चा मां उसको जब उसको धमक देकर कहती है वो जो कि कोई वो गुंडा आ जाएगा, भूत आ जाएगा या तो कोई राक्षस आ जाएगा। तुम अपना होमवर्क ठसे करो वरना वो आकर के तुमको खा जाएगा। तो बच्चा जो है बड़ा डर के मारे रहता है कि नहीं वो भूत आ जाएगा राक्षस होगा क्या होगा पता नहीं थोड़ा जब बड़ा होता है तब वो हंसी मजाक में उसको लगता है अरे ये तो वैसे ही मुझे बिना मतलब डरा रहे थे ये लोग तो वैसे ही जैसे हम जो स्पिरिचुअल मैच्योरिटी प्राप्त करेंगे पता चलेगा कि ये जो सब ये जितने भी प्रवाह है अह हमारी ये जो इंद्रिय आसक्ति है इंद्रियों के सुख भोग है या तो ये जो हमारी सब इमोशंस है, स्ट्रेस है, टेंशन है, इवन हैप्पीनेस है जो कुछ भी है वह सब माया के जगत में है और मैं रियल मी रियल मायसेल्फ सहीसही जो मेरा स्वरूप है वो सूरज का स्वरूप है वो ब्राह्मण का स्वरूप है जिसमें कोई चेंज नहीं है जिसको कि ये माया के जगत के साथ में कोई लेना देना नहीं है बाहर में कुछ भी हो वो कभी भी अफेक्ट नहीं होता तो यह जो आईडिया है स्वामी जी इतना ब्यूटीफुली जो है पोएटिकली हमको एक के बाद एक ये कोटेशन के थ्रू कहते हैं अच्छा अभी कथामृत हमने देखा कि किस तरह से वह मास्टर महाशय वहां पर गए वो ठाकुर ने कहा कि गिरीश जो बलराम बसु के वहां पर आ जाना बलराम बसु के घर गए तो पहली बार उन्होंने देखा कि भक्तों के साथ में मिलकर के ठाकुर जो है कीर्तन कर रहे हैं। चतुर्थ दर्शन अच्छा बलराम के मकान पर श्री रामकृष्ण तथा प्रेमानंद में नृत्य अभी यहां भी यह भी हमको एक बताया गया कि किस तरह से राखाल की भाव समाधि हुई और ठाकुर जो है उसकी छाती पर हाथ लगाकर कहते हैं शांत हो जाओ शांत हो जाओ कल और राखाल का परिचय भी दिया राखाल का माने एक क्या कहेंगे मनोमोहन करके भक्त था उनकी जो लड़की थी उनके के साथ में राखाल का विवाह हुआ। मनोमोहन जो है राखाल को ठाकुर के पास ले आए और जो ठाकुर के मतलब अभी वो जो आध्यात्मिक शक्ति से राखाल इतने आकर्षित हो गए पता चला कि वो भी वृंदावन के राखाल है। उनका जो जन्म जो है ये सब सुख भोग करने वो जमींदार के लड़के थे और मनमोहन तो फिर वह तो वो तो एक माने प्रति लब्ध प्रतिष्ठित आदमी था वह जो उस कोलकाता के समाज का तो बढ़िया मजे से वह जीवन जी सकते थे। नहीं पैसों की ऐसा कोई कमी थी। वो बहुत ही एक जो है एक अच्छी उनको ये जो वाइफ भी मिली थी। क्यों वो ये सब छोड़कर के ठाकुर के पास जाएंगे। किंतु फिर भी जैसे ही पता चला कि वो ठाकुर के साथ में वो राखाल बनकर के वृंदावन में उनके जो है ये जो थे उनके मित्र थे सहभागी थे जो भी काम करते थे उसमें तो सब छोड़ के ठाकुर के साथ में आ गए। अभी कुछ दिनों के बाद में तो पता है कि ठाकुर की महासमाधि हो गई और फिर जो है राजा महाराज जो है परिव्राजक बनकर के उन्होंने भारत में भ्रमण करना शुरू किया। वो वृंदावन में कहीं पर थे। आई थिंक कुसुम सरोवर के किनारे वो जब ध्यान तपस्या कर रहे थे उस समय उनकी जो ये जो वाइफ थी ये जो उसका नाम था विश्वेश्वरी सब लोग उसको बी करके बुलाते थे। तो ये जो विश्वेश्वरी है वो उसने जैसे ही राखाल ने ठीक किया कि वो ठाकुर के पास जाकर के रहेंगे और जो है कि अभी सन्यास जीवन भी उन्होंने बाद में ग्रहण किया तो उसने भी एक बहुत ही पवित्र त्याग संयम और तपस्या का जीवन जीना शुरू किया। वो जो है बालों में तेल नहीं डालती थी। वो जो खाना वगैरह जो है बहुत ही शुद्ध सात्विक खाना खाती थी। वो जो पथारी पर बिस्तर पर नहीं सोएगी। जमीन पर सोएगी। माने जैसे एक जो साध्वी जो है जिस तरह से रहती है कठोर संयम तपस्या करके वैसे ही वो रह रही थी। एक दिन क्या हुआ कि उसको स्वप्न में ऐसा आया कि ठाकुर जो राजा महाराज है राखाल है उनका देहांत हो गया है। तो यह बात सुनकर के विश्वेश्वरी ने दूसरे दिन आत्महत्या कर ली। अभी देखिए कि मनोमोहन के दिल पर वो क्या बीती होगी। उसकी लड़की के साथ में जो राखाल का विवाह हुआ फिर जो है वही राखाल को ठाकुर के पास ले आए। अभी ठाकुर को तो उन्होंने अपना जीवन सर्वस्व दे दिया है। और ठाकुर ने उनको उनके जमाई को भी ले लिया। उनकी लड़की को आत्महत्या भी करनी पड़ी। किंतु फिर भी जो है जो ठाकुर के ऊपर में उनकी जो भक्ति है, श्रद्धा है वो कभी भी थोड़ी सी भी विचलित नहीं हुई। और अदर वाइज आप सोच के देखिए और कोई पिता के साथ में ऐसा होता कि उसका जमा इस तरह से साधु बन जाता। उसकी लड़की का कष्ट देखकर के वो कितना विचलित होता। फिर वो जो साधु को तो कितनी गाली देता किंतु यह देखिए ठाकुर की किस तरह की माया है जो भक्त माया नहीं कहेंगे ठाकुर का किस तरह का ये जो आध्यात्मिक दिव्य शक्ति है कि जितने भी भक्त उनके पास में आते थे वो अपना जो ये मेरे लिए अच्छा है मैं यह करूंगा ये मेरे लिए ये ठाकुर के लिए अच्छा है तो मुझे यह करना है तो मेरे लिए अच्छा क्या है वो भूल कर के ठाकुर के संग के लिए क्या अच्छा है वो करना ये जो है जो अंतरंग रंग भक्त और बहिरंग भक्त ये जो दो डिवीजन हो गया था तो ठाकुर को कैंसर होने के बाद में किसी ने ठाकुर को पूछा कि कैंसर क्यों हुआ तो लोक बाछाए जन ठाकुर ने कहा कि ये जो फिल्टर करने के लिए कौन अंतरंग है वो मेरे साथ में रहेंगे कौन बहिरंग है वो चले जाएंगे ये सोच के कि ठाकुर को कैंसर हुआ ठाकुर अपने को क्योर नहीं कर सकते अपनी खुद की ट्रीटमेंट नहीं कर सकते कोई मैजिक या मिरेकुलस पावर लगा के तो हमारे लिए क्या कर देने वाले हैं तो ये जो मनमोहन है रामचंद्र चंद्र दत्त है, बलराम बसु है, मास्टर महाशय है, गिरीश घोष है, योगेन मां है। ये फिर यह जो कोलाप मा है, ये जो ये जितने भी गृहस्थ भक्त थे त्यागी भक्तों की तो बात ही छोड़ दीजिए। गृहस्थ भक्तों ने यह सोच के ठीक किया कि अपने साथ में जो भी होना हो सो या ना हो, हम लोगों का जीवन सर्वस्व ठाकुर को समर्पित है। इसीलिए तो वो हमारे साहित्य में अमर हो गए। जब तक ठाकुर का यह संग रहेगा, जब तक ठाकुर की कहानियां रहेगी, तब तक ठाकुर के ये जो गृहस्थ भक्त हैं, उनके साथ में ही अमर रहेंगे। वैसे तो उनको आध्यात्मिक उनको आशीर्वाद प्राप्त हुआ ही हुआ। जन्म, मृत्यु, जरा व्याधि का जो संपूर्ण चक्र है वो टूट भी गया किंतु साथ-साथ में वो विश्व के इतिहास में अमर भी हो गए। श्री रामकृष्ण ने मास्टर को दक्षिणेश्वर में कहा था मैं कलकत्ते में बलराम के घर जाऊंगा तुम भी आना इसीलिए वे उनका दर्शन करने के लिए आए हैं। फाल्गुन कृष्णा सप्तमी शनिवार 11 मार्च 1882 ईस्वी श्रीयुक्त बलराम श्री रामकृष्ण को निमंत्रण देकर के लाए हैं। अब भक्तगण बरादे में बैठकर के प्रसाद पा रहे हैं। दासवत बलराम खड़े हैं। देखिए उस दिन मास्टर महाशय कहते थे कि मैं यदि वहां पर जाऊंगा बड़े आदमी है बलराम क्या मुझे वो घर में प्रवेश भी करने देंगे कि नहीं यहां पर देखिए दासवत हाथ जोड़ के खड़े हैं देखने से समझ नहीं आता कि वे इस मकान के मालिक है। इस तरह से निरहंकार वो हो गए हैं। मास्टर श्री रामकृष्ण के पास कुछ दिनों से आने लगे हैं। उनका अभी तक भक्तों के साथ परिचय नहीं हुआ है। केवल दक्षिणेश्वर में नरेंद्र के साथ परिचय हुआ था। अभी दूसरा पैराग्राफ दूसरा पैसेज है। कुछ दिनों के बाद श्री रामकृष्ण दक्षिणेश्वर में शिव मंदिर की सीढ़ी पर भावाविष्ट होकर के बैठे तभी ये नए-नए आना शुरू हुए ना ठाकुर जो कुछ भी कहते हैं शब्दशः लिखना अभी उन्होंने शुरू नहीं किया है। कुछ-कुछ इंप्रेशंस से उन्होंने लिख ली है। वरना ये बलराम भवन पे ठाकुर ने क्या कहा वो सब अभी तक उन्होंने उस समय उन्होंने नहीं लिखा था। एक-द दिन के बाद में ही सब कुछ ठाकुर खड़े भी होते हैं तो हां लिखेंगे कि ठाकुर खड़े हुए। इस डायरेक्शन में देख कर के खड़े हुए। खड़े होने के बाद क्या किया और बैठ गए तो किस दिशा में मुंह करके बैठे हैं उनके सामने जमीन पे कौन बैठा है पुंखानुप एकदम वो जो परफेक्ट वो जो है वो जो उनके जो कंडीशंस एनवायरमेंट सब कुछ लिखता है यदि ठाकुर के जीवन पर कोई मूवी भी बनाता है यदि तो म बहुत अच्छा एक्टर मिलना चाहिए वरना तो वो सफल नहीं होगी तो उसके लिए सब पूरा मसाला यहां पे है उसको इमेजिनेशन करने की कुछ जरूरत नहीं सब कुछ जो है मास्टर महा महाशय ने यहां पे लिख लिया है। कुछ दिनों बाद शिव मंदिर की सीढ़ी पर भावाविष्ट होकर के बैठे हैं। दक्षिणेश्वर में दिन के 45 बजे का समय होगा। मास्टर भी पास में बैठे हैं। थोड़ी देर पहले श्री रामकृष्ण अपने कमरे के फर्श पर जो बिस्तर बिछाया गया है उस पर विश्राम कर रहे थे। अभी उनकी सेवा के लिए सदैव उनके पास कोई नहीं रहता था। हृदय के चले जाने के बाद उनको कष्ट हो रहा है। कोलकत्ते से मास्टर के आने पर वे उनके साथ बात करतेकरते श्री राधाकांत के मंदिर के सामने वाले शिव मंदिर की सीढ़ी पर आकर बैठे। मंदिर देखते ही वे एकाएक भावाविष्ट हो गए हैं। वे जगन माता के साथ बातचीत कर रहे हैं। कह रहे हैं मां सभी कहते हैं मेरी घड़ी ठीक चल रही है। ईसाई हिंदू मुसलमान सभी कहते हैं मेरा धर्म ठीक है। परंतु मां किसी की भी तो घड़ी ठीक नहीं चल रही है। तुम्हें ठीक-ठीक कौन समझ सकेगा? परंतु व्याकुल होकर पुकारने पर तुम्हारी कृपा होने पर सभी पथों से तुम्हारे पास पहुंचा जा सकता है। देखिए यहां पर जो घड़ी की जो बात कही है ना वो हमको लगता है वैसे भक्ति मार्ग की बात कही है। भक्ति की दृष्टि से कही है। किंतु यहां पे ठाकुर पूरी बात नहीं करते। बाद के दूसरे तीसरे पैसेज में एक कहीं जगह पे ठाकुर ने कहा है यदि आपको लगता है कि आपकी घड़ी अलग टाइम पर चल रही है आपकी घड़ी अलग टाइम पर चल रही है तो जो सूरज है उसके साथ में अपनी घड़ी मिला लेने से सब ठीक हो जाएगा तो देखिए ये प्योर अद्वैत हो गया जैसे हमने यहां पे स्वामी जी कहते हैं ना कि जो है मतलब ये जो विभिन्न जो जीवन है विभिन्न ये जो सब कैरेक्टर्स है वो जो महाभारत के डिफरेंट कैरेक्टर्स है महाभारत को कोई असर नहीं पहुंचता। या तो हमारे जो विभिन्न जीवन है उसको आत्मन से आत्मन को उससे कोई असर नहीं पहुंचता। पृथ्वी पे मनुष्य आते हैं जाते हैं सूरज को कोई असर नहीं होता। वैसे ही हम लोगों की घड़ी जो है 700 करोड़ लोग 700 करोड़ घड़ियां पहनेंगे। अलग-अलग टाइम पे वो उनकी घड़ी रहेगी। किंतु जो सूरज जो है वो ठीक अपने टाइम से उगता है। अपने टाइम से अस्त होता है। उदय होता है और अस्त होता है। तो उसके साथ में अपनी घड़ी ठीक मिला लेने से सब की घड़ी ठीक चलेगी। तो दिस इज प्योर अद्वैत माने ठाकुर यदि भक्ति की बारे में भी बात करते हैं तो भक्ति के पीछे जो अद्वैत का वो जो सबस्ट्रेटम रहता है अद्वैत का वो जो फाउंडेशन रहता है ज्ञान मार्ग का फाउंडेशन रहता है। माने ठाकुर और स्वामी जी दोनों को आप जितना पड़ेंगे जितना उनको अच्छे से सोचेंगे देखेंगे कि अद्वैत वेदांत के बेस पर ही उन्होंने भक्ति की व्याख्या की है। उससे पहले ऐसा होता था भक्ति मार्ग पूरा सेपरेट रहता था। ज्ञान मार्ग के साथ में वो अपने को तनिक भी थोड़ा सा भी मिलाते नहीं थे। किंतु अभी इन दोनों के साथ में है और ऑफ कोर्स मां शारदा देवी के साथ जो अद्वैत का ज्ञान मार्ग का फाउंडेशन है उसके ऊपर में उन्होंने भक्ति मार्ग की यह जो मंदिर है भक्ति मार्ग का जो मंदिर है वो अद्वैत के फाउंडेशन पे उन्होंने खड़ा किया है। अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु