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Sri Ramakrishna's Stories ·

स्वामी ब्रह्मानन्द कथित : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा 9 Nov 2022

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जय राम कृष्ण यत नमः सो सी आर रीडिंग फ्रॉम थिस बुक remination सर ऑफ राजा महाराजा के जो दिन द उनके बारे में हम लोग पढ़ रहे हैं हम सबको पता है की राजा महाराज को ठाकुर जो है अपने मानस पुत्र कहते द यानी की राजा महाराज की जो आध्यात्मिक उपलब्धियां थी वह बाकी सब शिष्यों से स्वामी विवेकानंद को छोड़कर के बाकी सब शिष्यों से इतनी उच्च कक्षा की थी की वह ठाकुर के जोक संतान होता [प्रशंसा] यदि हमको देखनी है तो फिर वह राजा महाराज हिट है की जो उसमें सबसे आगे द हमको यह भी पता है की स्वामी विवेकानंद ने कहा है एक बार सो सी नो डेट ए राजा महाराज इस कॉल्ड मानस पुत्र ऑफ श्री राम कृष्ण बिकॉज ही वाज फार अहेड इन स्पिरिचुअल अटेंडेंस दें अन्य ऑफ है आदर डिसीप्लस मोनिस्टिक और हाउस होल्डर डेट इस वही हिज कॉल्ड अन - पुत्र सो नौ सी रीड ठाकुर कहां करते हैं दिन में जितनी इच्छा हो उतना भोजन करो किंतु रात्रि में तो स्वल्पाहार ही करो इसके पीछे यह विचार है की रात्रि में हल्का भोजन करने से दोपहर में किया गया पूरा भोजन आसानी से बच जाएगा और तुम्हारा शरीर हल्का रहेगा तथा तुम आसानी से मैन को एकाग्र कर सकते हो रात्रि में अधिक भोजन करने से अलसी और निद्रा आती है सो ठाकुर इस पॉसिबल डी थ्योरी बीइंग बाय डूइंग सो यू कैन डी फूड डेट वाटेवर यू हैव ईटन ड्यूरिंग डी डेट टाइम डेट विल बी डाइजेस्टेड एंड यू विल फुल फ्रेश इन डी मॉर्निंग तू सीट फॉर ए लंगर पीरियड ऑफ टाइम विदाउट अन्य फिजिकल डिस्टरबेंस इसे इन योर साधना सो अभी इसके बारे में एक हमको वो कहानी भी पता है या हमने कल ही शायद उसके बारे में बात किया की ठाकुर मैन को जा के बोलते हैं की अच्छा तुम इन लोगों को इतना रोटी क्यों खिलाती हो इसको दो रोटी दो इसको इतना रोटी दो जिन जिन करके दो तब माने कहा था की मेरे बच्चों की चिंता मैं करूंगी वह तुमको आपको करने की जरूरत नहीं है तो यहां पे आ मैन का भी एक है मात्रा भाव है और ठाकुर का भी एक फिलोसॉफिकल कंसर्न है यह जो साइंस के अनुसार जो होना है तो वह तो होता ही है किंतु हमको अपने लाइफ में जैसे कल हमने बात किया था ये दोनों पहलू जो है हमको लाइफ में बैलेंस करके चलना है चाहे वह हमारा यह हो आध्यात्मिक साधना या की हो फिर हमारा ये ठाकुर के प्रति प्रेम और भक्ति भाव ये दोनों का जब संगम होगा तब हमारा जीवन जो है आध्यात्मिक जीवन बड़ा अच्छे से आगे बढ़ेगा और देखिए हम लोग शायद कभी-कभी सोचेंगे की मैं साधना करके भी तो इतना लंबा टाइम चल सकता हूं मुझे क्या जरूरत है की मैं भक्ति का मार्ग लेकर चलो किंतु हमको यह बात याद रखनी है की जो पहले के जमाने में वैदिक युग में जिस तरह से तपस्या की जाती थी वो आज संभव नहीं है ध्रुव के बारे में हमने सुना है की 1000 साल तक वो एक पैर ऊपर खड़े रह करके उन्होंने तपस्या किया स्वामी जी ने खुद देखा है की एक साधु को उन्होंने देखा की उन्होंने उसने दोनों हाथ ऊपर करके वो कितने सालों से तपस्या कर रहा था दोनों हाथ जो है बिल्कुल वो अवश्य हो गए द बिल्कुल कम करने बंद हो गए द तो इस तरह की जो फिजिकल ऑस्ट्रेलिया है भगवान बुद्ध के बारे में हम पढ़ते हैं की वो जब वो डियर पार्क में जाकर के साधना करते द उसे समय दिन में इतना सा थोड़ा सा भोजन करते द और फिर दिन भर जो है वो जब वो मेडिटेशन में ध्यान में लगे रहते द दिगंबर जैन साधु जिनके बारे में शायद हम लोगों को इतना नहीं पता जैन संप्रदाय है जैन संप्रदाय में दो यह है ब्रांचेस एक तो है श्वेतांबर यानी की वह लोग सफेद वस्त्र पहनते हैं और दूसरे है दिगंबर जो की संपूर्ण निर्वस्त्र रहते है तो यह जो दिगंबर साधु जो है उनका जो अभी भी वह जीवित है मैं उनको पहचानता हूं मेरा मैं काफी दिगंबर साधुओं से मिला भी हूं और उनकी लाइफ में जो ऑस्टेरिटी मैंने देखी है वो अद्भुत ऑस्टेरिटी है इस तरह ठंडी हो गर्मी हो आप सबके सामने खड़े हैं अब सबको साथ बात भी कर रहे हैं सब कुछ बिना वस्त्र पहने और यदि एक गांव से दूसरे गांव जाना है एक शहर से दूसरे शहर तो आपको पैदल चलना होगा आपको आपको ये ट्रांसपोर्टेशन का कर में जाकर के प्लेन में जाकर ये सब नहीं कर सकते हैं खाना भी इस तरह से खाना है की आपकी हाथ में जितना आए उतना आप खा सकते हैं उसमें भी संध्या के बाद नहीं खाना है कितनी सारी चीज खाने वर्जित है कितने पर्युषण होता है तो कितना उपवास करना पड़ता है तो इतना स्ट्रांग ऑस्ट्रेलिया और उनका लाइफ होता है जो की रामकृष्ण मिशन में नहीं है रामकृष्ण मिशन में जो है एक तो है तपस्या है निश्चय तपस्या है किंतु तपस्या के साथ में ही कर्मयोग है और कर्मयोग के साथ में है भक्ति योग तो कर्म भक्ति और तपस्या और यह ज्ञान ऑफ कोर्स ज्ञान तो जैन साधुओं का भी होता है यानी की स्क्रिप्चर्स का पाठ करते हैं वगैरा तो वो सब मिलकर के राम कृष्ण संग की जो साधन पढ़ती है वह बनी हुई है तो हमारा जो रास्ता है वो पहले के साधुओं की अपेक्षा बहुत ही आसान कर दिया गया है ये ठाकुरमार स्वामी जी ने आकर के सो सी सी डेट इन रामकृष्ण मिशन ठाकुर से था सी शुड बी केयरफुल रिगार्डिंग हो मच सी एट आते डी नाइट इट शेर बट इंस्पीते ऑफ डेट अवर लाइफ लाइफ ऑफ ओवर मेंस एंड लाइफ ऑफ ओवर देवोतीस इस इजी कंपेयर तू डी ऑस्ट्रेलिया टेस्ट डैन बाय मेंस इन प्रीवियस एजीएस एंड एवं बाई डी मांस जैन मेंस स्पेशली हु आर डूइंग इट राइट नौ इन जैनिज्म देयर आर तू ब्रांचेस मुनीश श्वेतांबर वेनिस दिगंबर दिगंबर मोंक लाइव विदाउट अन्य क्लॉथ दे डू नॉट वेयर एनीथिंग एंड देयर सी कैन इमेजिन जस्ट बाय लुकिंग सचिन ऑस्ट्रेलिया ट्रांसपोर्ट तू गो फ्रॉम वैन सिटी तू अंदर दे हैव तू वर्क दे आर सो में रिस्ट्रिक्शंस इन फूड हिट डी इसको यू हैव तू रेमैन विदाउट क्लॉथस सो ऑल डीज postirities आर डियर डिस्क्राइब्ड प्रिसक्राइब्ड इन अवर स्क्रिप्चर्स बट रामकृष्ण संग गाइडेड बाय ठाकुर मैन एंड स्वामी जी भी है मिनिमल इसे डी इंपैक्ट ऑफ डी फिजिकल साधनास एंड सी हैव एक्सपेंडेड अपॉन दिस इमोशनल मेंटल साधना मच मोर सी हैव तू स्पेंड मच मोर ऑफ अवर टाइम फोकसिंग ऑफ अवर माइंड एंड प्रेम तू ठाकुर डूइंग फिजिकल स्टडी देर बट नॉट आज मच आगे इन कंपेयर तू आदर सेक्स राजा महाराज आगे कहते हैं श्री राम कृष्ण देव प्रत्येक व्यक्ति को ध्यान का अभ्यास करने हेतु प्रोत्साहित करते द नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास एन करने से मनुष्य का आध्यात्मिक जीवन अतः प्रतीत हो जाता है तो यह हम लोगों की साधन पढ़ती का एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पहलू श्री राम कृष्ण एवरीवन वर्सेस डिसएबल तू मेडीटते रेगुलरली एंड उसे तू से डेट इफ यू वांट मेडिट्रेड इफ यू वांट तू जब ध्यान दें योर स्पिरिचुअल लाइफ इट विल हैव इट विल हैव में प्रॉब्लम्स इन यू स्पिरिचुअल लाइफ मार दिया गया जो भी साधनाएं है हमारी वह हम मैन से करते हैं और इसीलिए मैन को ट्रेन करना हमारे विल पावर को ट्रेन करना वह सबसे ज्यादा आवश्यक है इट इसे वेरी इंपॉर्टेंट फॉर अस तू ट्रेन तू नर्चर वैकेंसी रामकृष्ण यह जो अहंकार को जो श्री रामकृष्ण देव के श्री चरणों में अर्पण कर देना है उसको भी बड़ा विल पावर चाहिए हमारा अहंकार छोटी-छोटी चीजों में जो है अंतरराष्ट्रीय स्वरूप हो जाता है यदि कहां पर किसी जगह पे जाना है हमको इनविटेशन नहीं मिला और बाकी सब जा रहे हैं तो हम लोग हम बोलेंगे अरे मुझे नहीं बुलाया मैं क्यों जाऊंगा मैं कोई ऐसा वैसा थोड़ी ना हूं बिना इनविटेशन का कहीं पर चला जाऊं किंतु ठाकुर एक बार कहते द की जहां पर हरिकथा हो रही है वहां पे कोई इनविटेशन की जरूरत नहीं है आश्रम में कभी-कभी ऐसा होता है कुछ दिनों पहले ही ऐसा हुआ एक यहां पे कुछ कार्यक्रम था एक भक्त एक देवोते है वालंटियर है उनको बुलाया था तो वो शायद उनको साथ में प्रॉपर बात नहीं हुई की क्या हुआ क्या कम्युनिकेशन गैप हो गया उनको ऐसा लगा की उनको ठीक तरह से अवकर नहीं दिया गया है ठीक तरह से उनका स्वागत नहीं किया गया वो नाराज होकर के चले गए अभी मंदिर है ठाकुर swayamvirajit है आपको साधु आपको या दूसरे भक्त आपको avkaar देते हैं आपका स्वागत करते हैं नहीं करते हैं उससे आपको क्या लेना देना है अब तो ठाकुर के लिए आए हैं ठाकुर के श्री चरणों में अपने अपना मैन अहंकार को समर्पित किया है तो और कोई आपको कुछ कहे ना कहे स्वागत करें ना की कोई कटु वचन का दे उससे आप मंदिर नाराज होकर क्यों चले जाएंगे ठाकुर के पास से नाराज होकर के क्यों चले जाएंगे तो ऐसा हमारा अहंकार इस तरह से हमको कभी कभी विडंबना में दल देता है इट इसे वेरी डिफिकल्ट तू सैक्रिफिस अवर एक फील्ड ऑफ श्री रामकृष्ण जस्ट अन फ़्यू डेज़ एगो इट हैपन डेट वैन ऑफ ऑल वॉलिंटियर्स फॉर कोल्ड हर इन डी आश्रम एंड आफ्टर ही कम हर ही थॉट डेट ही वसंत प्रॉपर्ली आ यू नो ब्रिटेन बाय आदर मेंस और देवोतीस एंड ही बिकम एंग्री एंड ही वेट आवे बैक तू हिज होम सो सी हैव तू अंडरस्टैंड फिनोमेना डेट इंस्पीते ऑफ अवर आफरिंग ओवर हो वही वुड आई कंसर्न मैं सेल्फ अबाउट व्हाट आदर्श आई हैव सेइंग आई ऍम हर डेट इसे व्हाट इसे डी मोस्ट इंपॉर्टेंट थिंग किंतु इतना आसानी से यह जो है उससे छुटकारा नहीं का सकते हैं शायद हम थोड़ा बहुत मूक हो जाएंगे किंतु अहंकार जो है वह आखिर तक उसका एक भीषण तो रह ही जाता है यदि आध्यात्मिक जीवन में किसी चीज का आप सभी चीजों का त्याग करेंगे तो हमको पता चलेगा की बहुत सारे आजकल तो क्या है ना की एवं बड़े-बड़े जो कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव भी बड़ा सिंपल लाइफ लीड करते हैं बोले हम लोग वेजीटेरियन फूड खाते हैं हम लोग अर्ली मॉर्निंग उठ जाते हैं हम लोग एक्सरसाइज करते हैं कहां आपका जीवन जितना है उतना ही तो हमारा है आप लोग दिन भर कम करते हैं और फिर उसमें हम भी करते हैं क्या डिफरेंस है तो आप देख सकते हैं शायद ऐसा कोई बोलता है और कोई ऐसा सोचता है मुंह से शायद नहीं बोलेंगे की तुम मैन में सोचेंगे यह जो साधु जिस तरह से रह रहे हैं उससे ज्यादा कठिन हमारा जीवन है हमको तो इतना सब कम करना पड़ता है बहुत सारे लोग हैं जिनको की यह जो कहीं दूसरे जगह पर कम करते हैं ना तो सुबह को अर्ली मॉर्निंग घर से निकल जाएंगे बस में या ट्रेन में वहां पर दो-तीन घंटे लग जाएंगे तो 7:00 बजे निकले हैं दो-तीन घंटे यानी 7 8 9 10 बजे तक ऑफिस पहुंचेंगे फिर 7:00 बजे वहां से छूटेंगे तो आते-आते घर पर 10:00 बज जाएंगे कुछ करने की क्षमता ही नहीं रहती सो जाते हैं फिर दूसरे दिन चलना शुरू कर देते हैं तो वे लोग सोचेंगे की अरे ये साधु लोग जितनी तपस्या कर रहे हैं उतनी तो हम भी कर रहे हैं क्या हमने डिफरेंस है किंतु यह सब चीजों को छोड़ना शायद अच्छा खाना या तो फिर एवं पैसों का मोह बहुत सारे लोग हैं वो कहते हमको पैसों का मोह नहीं हम तो कुछ सी वांट तू डू समथिंग गुड फॉर ह्यूमैनिटी अच्छा अच्छी बात है किंतु सब कुछ छूट जाएगा माने छूट तो पूरा नहीं जाएगा किंतु सब कुछ धीरे-धीरे उसके प्रति आपकी तृष्णा कम हो जाएगी किंतु जो आखिर तक रह जाएगा वह है आपका अहंकार अहंकार से यह जितने भी लोग इस तरह का यह क्लेम करते हैं दवा करते हैं जितना साधु लोग मेहनत करते उससे ज्यादा हम लोग करते हैं किंतु उनके जीवन में देखेगा छोटा सा भी उनको कहीं पे हो जाएगा उनके सम्मान में कहीं कमियां ए जाएगी या कोई उनको कटु वचन का देगा फैट करके वो मतलब रक्षा की तरह शेयर की तरह वो आपको मतलब आपके पीछे लगेंगे वो झगड़ा करना शुरू कर देंगे तो ये जो अहंकार है अहंकार निर्मूलन करना सबसे ज्यादा कठिन है अत्यधिक जीवन में बाकी सब चीज जो है आपके समय सापेक्ष है अभी मैं आश्रम में रह रहा हूं तो मुझे पैसों का कोई इतना जरूर नहीं लग रहा है मेरी जितनी भी जरूरी है आश्रम से हो जाती है और मैं तो बिल्कुल पहले से इस तरह से रह रहा हूं की मुझे मतलब खाना पीना कोई अच्छे कपड़े पहनना वो सब का कोई शौक ही नहीं था किंतु आश्रम में आकर के मैंने देखा की वहां से और यहां का जो जीवन है उसमें जो डिफरेंस जो है वह यह सांसारिक जीवन में और इस संन्यास जीवन में आध्यात्मिक जीवन वहां पर जो है हम लोग समझ नहीं पाते द की मेरे भीतर में अहंकार है हम लोग सोचते द मैं जिस तरह से बिहेव कर रहा हूं वह एक नेचुरल वे ऑफ लाइफ है किंतु यह नेचुरल वे ऑफ लाइफ ने जितना आप अंत के antkaran में आपके मैन का एनालिसिस करेंगे उतना ही आपको धीरे-धीरे समझ में आएगा की बहुत सारी चीज जो है जो आप कर रहे हैं जो जो की आपके मैन को कष्ट दे रही है वह आपके अहंकार से उत्पन्न होती है जितना जितना आप अपने मैन को एनालाइज करते जाएंगे एनालाइज करते जाएंगे उतना उतना आपको समझ में आएगा की अहंकार ही सब चीजों की सब दे जो हमारे साथ में जो समस्याएं हो रही है उसकी जड़ है इसीलिए योग शास्त्र में कहा गया panchklesh तो पंच क्लेश का सबसे रूट क्लेश कौन सा है abidhya यानी की हमको पता हम लोग मैन लेते हैं की मैं यह शरीर हूं तो सबसे पहले तो ये इग्नरेंस ए गया इसके बाद में होता है असली तार यानी की मैं अपने शरीर के साथ में अपने मैन को जो है jadied कर देता हूं और मानने लगता हूं की यह जो सेशन है कुछ ना सखना वही है जो की मेरा असली स्वरूप तो उसके बाद में बाकी सब चीज आती है अविद्या और अस्मिता के बाद में रात द्वेष और अभी निवेश वह सब बाद में आता है तो यह जो शरीर के साथ में अपना आईडेंटिफिकेशन है यह शरीर के साथ में हम लोग मैन लेते हैं की इसका भरण पोषण करना ही हमारे जीवन का कर्तव्य है वहीं से हमारा यह संसार चक्र जो है वो उसकी शुरुआत होती है व्हेनेवर सी बिलीव डेट सी आर दिस बॉडी सी ऑल ऑफ अवर पोर्टेबल स्टार्ट इन योग शास्त्र इट इस सईद डेट रूट कोस ऑफ अन ऑल ऑफ panchkulasha देयर कॉल्ड पंचलेस एंड panchkulasha एक्सप्लेन व्हाट आर डी रूट्स ऑफ अवर लाइफ ऑफ अवर लाइफ सो फर्स्ट इस इग्नरेंस अभी आईडेंटिफाई मैसेल्फ विद दिस बॉडी डी सेकंड इस अस्मिता अस्मिता इसे माय अहंकार आईएम दिस बॉडी ऑल ऑफ माय एक्सपीरियंस इस ऑल ऑफ माय संस्कार ऑल ऑफ डी bondees ऑफ कर्म डेट आई एम ब्रिंगिंग फॉरवर्ड फ्रॉम डी प्रीवियस लाइव फ्रॉम डी प्रीवियस बर्थ ऑल ऑफ दिस नेक्स्ट mihankar ऑल ऑफ दिस पार्ट ऑफ दिस अव्यय एंड अस्मिता आउट ऑफ दिस लेटर ऑन स्टार्टस kavvesha अभिनव शास्त्री क्या है राग है यानी की किसी भोग की चीजों के ऊपर में अपनी आसक्ति द्वेष क्या है जो की है कटु भाव vairbhav जो चीज हमको पसंद नहीं आती है और abhinevesh क्या है मृत्यु का भाई तो ये रात श्रेष्ठ और अभी निवेश जो है वो बाद में आते हैं और इसका जो जड़ है वो जड़ बनी हुई है अविद्या और अस्मिता में यह जो शरीर है वो मेरा सही स्वरूप है शरीर का पालन करना मेरा कर्तव्य है ये प्रथम हमारा क्लेश और इसके बाद में यह जो मैन बुद्धि चित्त और अहंकार मिलकर की ये जो मेरा मैन बनता है यह मैन ही है यह कर्मों को बंद ये कर्म हम बोलेंगे की कर्म कहां संचित होते हैं कर्म कहां पर रहते हैं हमारे शरीर तो ये हमारे चित्त में रहते हैं यह चित्त में सब कर्म मिलकर के वह जन्म अंतर हमारे साथ में चलते रहते हैं मेरा अच्छा मेरा मृत्यु हुआ मेरा शरीर तो चला गया तो दूसरे जन्म में क्या जाता है मेरी आत्मा नहीं आत्मा तो एक ही है वो तो तीर है वो तो कोई कर्म नहीं करती मेरा जो अंतःकरण है यह जो मेरी अस्मिता और मेरा विद्या है वो एक जन्म से दूसरे जन्मों में ट्रांस माइग्रेट करती है वोट ट्रांसमिट्स फ्रॉम माय वैन बर्थ तू अंदर सोल माय आत्मन कैन नॉट गो एनीव्हेयर बिकॉज आत्माओं इस ओनली वैन एंड इट्स निष्कर्ष तू एनीथिंग सो व्हाट ट्रांस माइग्रेट्स फ्रॉम बर्थ तू अंदर बर्थ इट इसे अवर अंतःकरण इट इस मेड ऑफ मानव बुद्धि चित्रा अहंकार एंड इट इसे डी रिजल्ट ऑफ विद्या एंड अस्मिता ठाकुर ने अपने गुरु तोता पुरी से पूछा था राजा महाराज आगे का रहे हैं आप तो सिद्धि प्राप्त कर चुके हैं तो फिर आप ध्यान क्यों किया करते हैं अपने चमकते हुए पीतल के लोटे की तरफ इशारा करते हुए तोतापुरी ने उत्तर दिया था यदि इस लोटे को प्रतिदिन एन मैन जा जाए तो इसमें धब्बे पद जाएंगे ठाकुर कहा करते शाहिद ध्यान का लक्षण यह है की मनुष्य परिवेश और अपनी डेको भी भूल जाता है सर पर कौवा बैठ जाने पर भी उसका बोध नहीं होता श्री रामकृष्ण देव ने वह अवस्था प्राप्त की थी नाटक मंदिर में ध्यान करते समय उनके सर पर एक कौवा बैठ गया आपका ध्यान बिल्कुल चला जाएगा ठाकुर हेड वनडे आस्क तो तब पुरी डिड यू हैव बिकम सिद्ध नौ यू हैव यू आर अन मास्टर ऑफ मेडिटेशन वही डू यू कीप मेडिटेटिंग एवरी दे सो तोता पुरी हेड रिप्लाई लुक इट दिस मेटल वेसल डट आई हैव गो लोटा आई हैव तू क्लीन इट एवरीडे आदर वाइस इट विल गिरधर दुषाद अभी ये जो लोटे की जो कहानी है इसके बारे में एक अच्छा एक बहुत दूसरा एक अच्छा उदाहरण है की ठाकुर ने एक बार कहा था यही बात कहते हुए की तोतापुरी के साथ मेरी यह बात हुई थी और यह जो पीतल का लोटा है उसको रोज धोना पड़ेगा वर्ण इसमें धूल लग जाएगी और दाग लग जाएंगे किंतु साथ-साथ में ही बाद में ठाकुर कहते हैं किंतु यदि ये लोटा जो है वो सोने का हो जाए तो फिर उसको धोने की जरूरत नहीं है क्योंकि सोना सब समय शुद्ध रहता है देखिए कितना बड़ा बात कर दिया सोने का हो जाना लोटा यानी की निर्विकल्प समाधि में हम चले जाएंगे तो हमारे जो पंच क्लेश इसके बारे में मैंने बताया वो बी हो जाएंगे योग शास्त्र में यह शब्द उसे किया गया है यह टेक्निकल टर्म उसे किया गया है उसका नाम है डागा बीच बी यानी की यह जो पेड़ का बी होता है वह धंधा यानी की उसका जल जाना किसी आप जमीन में करते हैं रोकते हैं उसको डालते हैं तो हम यह कर सकते हैं की उसमें से एक पेड़ निकलेगा तो यह क्या विद्या और अस्मिता रूपी अयोध्या रूपी ये जो बी है तो हम अपने कम कंचन के प्रति हमारी आसक्ति है यह राग द्वेष abhinavesh उससे हम कितना ही अपने को बचाने को ट्राई करें किंतु यह जो अविद्या रूपी ये जो बी है उसमें से सब समय पेड़ की माफा किए कम और कंचन आते ही रहेंगे यानी की हमारी उनके प्रति आसक्ति किंतु यदि हम बी को जला दे तो ये जले हुए बीच में से फिर से पेड़ नहीं निकलेगा यानी की निर्विकल्प समाधि के बाद में यह जो कम कंचन है उसका हमारे मैन में कभी उदय नहीं होगा सो देयर इसे अन नाइस स्टोरी रिगार्डिंग दिस वेसल ठाकुर ठाकुर वंश टोल्ड दिस स्टोरी एंड सईद डेट इफ दिस वेसल bikams अन वेसल ऑफ गोल्ड दें इट विल नेवर बिकम डर्टी अगेन एंड यू विल नेवर हैव तू वॉश इट अगेन यू विल हैव तू वॉश दिस मेटल वेसल बट एंड नेवर दिस गोल्ड वेसल व्हाइट ठाकुर सईद दिस बिकॉज इन योग शास्त्र डी वेयर डी सेड दिस अविद्या दिस इस डी रूट केशा एंड आउट ऑफ दिस आदर क्लेश आर बोर्न आफ्टर विद्या कॉम अस्मिता दें रात द्वेष अभी निवेश होवर मच बी ट्री तू गेट रीड ऑफ अवर अट्रैक्शन फ्रॉम मणि एंड कम इन कंचन बट एस लांगेस्ट सीड रेमैन सीड ऑफ अयोध्या रिमांड इट विल ऑलवेज गो बैक बट इन निर्विकल्प सीड ऑफ अयोध्या इट वंस आवे नो न्यू ट्री विल ग्रो सच्ची कलर फॉर एनालॉजी ये जो हमारा योग शास्त्र है या तो हमारे जितने भी शास्त्र है देखिए कितना सहज तरीके से ये बता देते हैं दक्ख- बी शब्द का जो प्रयोग किया है सभी किसान जो है वो उसे समय तो ज्यादातर किसान द ये समय ये लिखी गई है ये योग शास्त्र वगैरा तो सबको पता है की बीजा डालने से पेड़ होता है या पौधा होता है और बी को जला देते हैं तो उसमें से कुछ नहीं होगा ये कितनी कलरफुल एनालॉग सब ली गई है यह जो सब उदाहरण दिए गए हैं हमारे शास्त्र में इस तरह से लिए गए हैं जैसे की फैट करके जो है हमारे मैन में बैठ जाए यहां कोई टेक्निकल बड़ा शब्द उसे कर दिया होता तो वो शब्द समझने के लिए ही मुझे आपको एक घंटा चला जाता और वह किसान लोग तो कब समझता है किंतु दबी शब्द प्रयोग कर लिया तो वह शब्द सुनकर के ही हमारा जो है आधा क्लेरिटी दया की हान अभी इसका क्या अर्थ होने वाला है तो समाधि में हम जब nirvikal पर समाधि प्राप्त करते हैं साधना में तब हमको लोटे को जो है रोज khisne की जरूरत नहीं क्योंकि हमारा जो अविद्या रूपी बी जो है वो जल गया है उसका संपूर्ण रूप से दहन हो गया है और उसमें से नया पेड़ या पौधा फिर से निकलने की कोई बात ही नहीं आती अच्छा तो आज यहीं तक कल मिलेंगे पता नहीं आज कैमरा में फिर से क्या गड़बड़ हो गया यह माया के जगत में देखिए कुछ ना कुछ गड़बड़ जब होती है तो हमको याद आता है की हम माया के जगत में रह रहा है यानी की माया के जगत में कुछ भी ठीक से सब कुछ नहीं होने वाला है 10 दिन परफेक्ट चला तो एक दिन कुछ एन कुछ प्रॉब्लम ए गया तो यह कैमरा भी हमको इस तरह से रिमाइंड करवाता है की हम माया के जगत में जय राम कृष्ण जय राम कृष्ण कल मिलते हैं ओम तत्सत