Swami Vivekananda
अच्छा सो हियर स्वामी विवेकानंदा सेस दैट परफेक्ट स्ट्रेंथ विल हैव नो एक्टिविटी इन दिस वर्ल्ड इट ओनली इज इट डस नॉट एक्ट व्हाट इज द मीनिंग ऑफ़ दिस पर्टिकुलर सेंटेंस दैट देयर इज़ सच अ थिंग कॉल्ड परफेक्ट स्ट्रेंथ। नाउ फर्स्ट ऑफ़ ऑल वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट व्हाट इज़ स्ट्रेंथ? स्ट्रेंथ इज़ समथिंग दैट एवरीवन डिज़ायर्स। देयर आर पीपल हु बिलीव दैट द पाथ ऑफ धर्म द पाथ ऑफ रिलीजन इट मेक्स अस वीक बट दैट इज नॉट सो व्हाट मेक्स अस वीक इज़ इग्नोरेंस द व्हेन अ पर्सन हु डजंट अंडरस्टैंड धर्म प्रॉपर्ली व्हेन ही ट्राइ टू फॉलो ऑल दिस प्रिंसिपल्स ऑफ़ नॉन वायलेंस नॉन अग्रेशन फ्रेंडलीनेस टुवर्ड्स एवरीवन व्हेन ही ट्राइ टू फॉलो दिस पाथ विदाउट अंडरस्टैंडिंग द डीपर इंप्लिकेशन ऑफ अद्वैता देन ही बिकम्स वीक। द्वैता ऑलवेज मेक पीपल वीक इन वन सेस दैट व्हेन आई एम ट्राइंग टू सरेंडरिंग माय ईगो। सो व्हेन आई एम सरेंडरिंग माय ईगो एट द होली लोटस फीट ऑफ़ द गॉड देन व्हाट विल हैपन दैट व्हेन समवन अ पर्सन अनदर और सम सिचुएशन अटैक्स मी इट ट्राइ टू सप्रेस मी इट ट्राइस टू एक्सप्लोइट मी देन आई हैव नो डिफेंस लेफ्ट। आई हैव टू ऑलवेज डिपेंड 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बट हियर इज़ द प्रॉब्लम व्हाट हैप्स दैट मोस्ट ऑफ़ द टाइम वी बिलीव दैट दिस प्रिसेप्ट्स और द आइडियल्स व्हिच बी प्रच टू मक्स इट अप्लाई टू एवरीवन दैट वाज़ द वन बिग मिस्टेक ऑफ़ बुद्धिज्म सो व्हेन बुद्ध बुद्धिस्ट स्टार्टेड मेकिंग एवरीवन मक एवरीवन स्टार्टेड थिंकिंग बिकॉज़ दिस मक्स शुड रिटालिएट मक्स शुड डिफेंड देमसेल्व्स वी हाउसहोल्डर्स आल्सो शुड नॉट डिफेंड आवरसेल्व्स सेइंग दिस दिस हाउसहोल्डर दे बिकम वेरी वीक एंड द रिजल्ट वाज़ थाउजेंड ईयर लॉन्ग स्लेवरी नाउ स्वामी जी सेस दैट सी वी नीड स्ट्रेंथ वी नीड संकल्प शक्ति वी नीड दिस विल पावर इन ऑर्डर टू डिफेंड आवरसेल्फ नॉट जस्ट आवरसेल्फ सी गोइंग वन स्टेप अहेड इट इज द ड्यूटी ऑफ़ एवरीवन हु इज रिलीजियस इज टू प्रोटेक्ट धर्म एनीवन हु अ पर्सन हु इज रिलीजियस ही नीड्स टू बी प्रोटेक्टेड एंड रिलीजन इटसेल्फ नीड्स टू बी प्रोटेक्टेड टू टू प्रोटेक्ट धर्म एंड टू प्रोटेक्ट धर्मी द पर्सन हु फॉलोस धर्म अ पर्सन हु इज अ डिवोटी अ भक्त अ त्यागी अ साधक ही नीड्स टू बी प्रोटेक्टेड एंड इन ऑर्डर टू प्रोटेक्ट देम वी नीड स्ट्रेंथ बट व्हाट काइंड ऑफ स्ट्रेंथ इज नीडेड देयर आर टू टाइप्स ऑफ स्ट्रेंथ वन इज़ द स्ट्रेंथ दिस ग्रोस आउट ऑफ आवर एरोगेंस एंड ईगो दैट यस आई एम डूइंग समथिंग एंड आई व्हेनएवर आई एम सक्सेसफुल आई शुड बी क्रेडिटेड विथ दैट थिंग अह जस्ट यस्टरडे आई मेट सेवरल पीपल हियर हु केम टू माय ऑफिस दे आर पार्ट ऑफ़ सम सोसाइटी सम समाज नाउ यू नो इन इंडिया देयर आर सो मेनी समाज सो मेनी कास्ट ग्रुपिंग्स आर देयर सो दिस पीपल हैव मेड देयर ओन नॉन दिस नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ देयर ओन समाज एंड देन दे वांटेड टू ब्रिंग सम सॉर्ट ऑफ़ अवेयरनेस अमोंग द चिल्ड्रन एंड अमोंग दिस अदर मेंबर्स ऑफ़ देयर सो समाज ऑफ़ देयर कास्ट बट व्हेन दिस आई वाज़ टॉकिंग विथ दिस फाउंडर विथ दिस पर्सन हु इज़ द मेन यू मे से दैट मेन पर्सन ही इज़ सो फुल ऑफ़ एोगेंस एंड ही इज़ सो फुल ऑफ़ हिज़ ओन प्रज़ दैट यस आई डिड दिस एंड आई डिड दैट एंड आई डिड दैट वी कैन सी दैट मोर देन हिज़ ही इज़ लेस कंसर्न अबाउट द वेलफेयर ऑफ़ हिज़ अह कास्ट देन ही इज़ मोर कंसर्न अबाउट प्रोजेक्टिंग हिज़ ओनेंस। सो दिस इज़ व्हाट हैपेंस व्हेन अ पर्सन हु बेज़स ह स्ट्रेंथ अपॉन हिज ओन एोगेंस अपॉन हिज ओन ईगो दिस स्ट्रेंथ इज़ अल्टीमेटली वेरी इट हैज़ वेरी फेटल वीकनेसेस वन इनाइड इट दिस सॉर्ट ऑफ़ स्ट्रेंथ आर वेरी डेंजरस इट नॉट ओनली हार्म्स अदर्स इट आल्सो हार्म्स द पर्सन हु विल्ड्स इट बट देन देयर इज़ अनदर टाइप ऑफ स्ट्रेंथ दिस स्ट्रेंथ इज़ रिसाइडिंग इन द पावर इन इन द स्ट्रेंथ ऑफ गॉड इन द ब्लेसिंग्स ऑफ द गॉड और लेट मी से इफ वी आर द फॉलोअ ऑफ़ दैता वी कैन से दैट माय सेल्फ कॉन्फिडेंस माय स्ट्रेंथ माय अश्योरेंस दैट यस नथिंग इज़ गोइंग टू बी एबल टू हार्म मी एंड इफ आई सी धर्म बीइंग हार्म और अ पर्सन हु इज़ धार्मिक ही बीइंग हार्म देन आई एम गोइंग टू इंटरवीन ऑन देयर बिहाफ आई एम गोइंग टू प्रोटेक्ट देम तो पर्सन हु प्रोटेक्ट्स धर्म हज़ ट्रू स्ट्रेंथ कम्स फ्रॉम हज़ डिवोशन सरेंडर टू गॉड इफ ही इज़ द्वैतवादी ही इज़ अ भक्ति मार्गी बट फॉर अ ज्ञान मार्गी पर्सन साधक और अ पर्सन हु फॉलोज़ द अद्वैत फिलॉसोफी हिज स्ट्रेंथ कम्स फ्रॉम बिलीफ दैट नॉट जस्ट बिलीफ बट कन्विक्शन दैट आई एम द ब्राह्मण इन एवरीथिंग दैट इज़ इन विद इन दिस वर्ल्ड देयर इज़ माय ओन रिफ्लेक्शन इन दिस वर्ल्ड व्हिच सी डे टू डे वर्ल्ड व्हिच इज़ सो फुल ऑफ जन्म मृत्यु जरा व्याधि दिस साइकिल ऑफ डेथ बर्थ रिजेनरेशन एंड ओल्ड एज एंड डिसीज दिस वर्ल्ड दिस संसारा दिस संसार चक्र इज़ मेड ऑफ नथिंग बट वेपर एंड स्मोक इट विल जस्ट ब्लो अवे इन द विंड ऑफ़ अद्वैता इन द विंड ऑफ़ ब्रह्मज्ञाना। ब्रह्मज्ञान इटसेल्फ इज़ सच अ ग्रेट स्ट्रेंथ दैट रिसाइड्स इन आवर हार्ट दैट व्हेन आई बिलीव दैट आई एम ब्रह्मन नथिंग कैन हार्म मी एंड नॉट ओनली दैट आई विल एबल टू डिफेंड एनीवन हु इज फॉलोविंग द धर्म सो दिस स्ट्रेंथ इज़ नेसेसरी देयर इज़ अ वेरी डेंजरस थिंकिंग प्रिवेलेंट फॉर सम टाइम इट इज़ आल्सो प्रिवेलेंट इन बुद्धिज्म इन क्रिश्चियनिटी इन इस्लाम इस्लाम नॉट इन इस्लाम अपोल नॉट इन इस्लाम बट इन क्रिश्चियनिटी एंड यू नो देयर इज वेरी इंटरेस्टिंग थिंग अबाउट क्रिश्चियनिटी दैट स्वामी विवेकानंदा हैज़ सेड स्वामी जी सेस दैट व्हेन अह जीसस सेस दैट व्हेन समवन स्लेप्स यू ऑन वन चिक यू शो हिम द अदर साइड ऑफ योर फेस देन बट एट द सेम टाइम कृष्णा सेस दैट व्हेन समवन स्लेप्स यू ब्रेक हिस एंड बिकॉज़ ही हैज़ नो राइट टू पनिश यू और टू हार्म यू और टू एक्सप्लइट यू। नाउ स्वामी जी सेस दैट फॉलोअर्स ऑफ जीसस आर एक्चुअली प्रैक्टिसिंग द टीचिंग्स ऑफ़ कृष्णा एंड द फॉलोअर्स ऑफ कृष्णा आर प्रैक्टिसिंग द टीचिंग्स ऑफ क्राइस्ट। सच एन मिसमैच सच एन आयरनी सच अ पैराडॉक्स इन हिस्ट्री। क्राइस्ट सेस व्हेन समवन स्लैप्स यू ऑन वन साइड ऑफ योर फेस यू शो हिम द अदर साइड। एंड कृष्णा सेस व्हेन समवन स्लेप्स यू ब्रेक हिज एंड बट द फॉलोअर्स ऑफ क्राइस्ट हु आर द यूरोपियंस एंड अमेरिकनंस दे आर एक्चुअली पुटिंग इनू प्रैक्टिस कृष्णास टीचिंग दैट्स व्हेन समवन हर्म्स यू बिट हिम अप वेरी थरोली एंड वी हिंदूज वी आर सपोज्ड टू फॉलो कृष्णास टीचिंग वी आर इन रियलिटी इन प्रैक्टिस फॉलोविंग क्राइस्ट टीचिंग व्हेन समवन स्लेप्स अस वी शो अनदर साइड ऑफ़ आवर फेस दिस वाज़ नेवर अ पार्ट ऑफ़ हिंदूइज़्म। दिस सॉर्ट ऑफ़ वीकनेसेस हैव बीन एडेड लेटर ऑन बाय बुद्धिज़्म एंड टू अ लेज़ एक्सटेंट बाय जैनिज़्म। दे से दैट अहिंसा परमोधर्म व्हेन नॉन वायलेंस इज़ द अटर मोस्ट टॉप मोस्ट प्रिसेप्ट टॉप मोस्ट आइडियल दैट अ साधका शुड प्रैक्टिस। एंड आउट ऑफ दिस ऑब्सेशन विथ फॉलोविंग नॉन वायलेंस दे हैव बीन प्रैक्टिसिंग सम स्ट्रेंज प्रैक्टिससेस दैट यू शुड डू दैट। लेट अस नॉट गो इनू देर प्रैक्टिससेस बट वन थिंग इज़ वेरी क्लियर व्हेन स्वामी जी सेस दैट व्हेन द डिटेरेशन इन बुद्धिज्म स्टार्टेड इट थ्रू इंडिया इंडिया इन अ ग्रेट टर्मोइल एंड बिकॉज़ ऑफ़ दिस मिसअंडरस्टैंडिंग ऑफ़ द आइडियल ऑफ़ नॉन वायलेंस वी स्टॉप डिफेंडिंग आवरसेल्व्स वी स्टार्टेड ग्रोइंग वीकर एंड वीकर डे आफ्टर डे। दैट इज व्हाई स्वामी जी सेस दैट परफेक्ट स्ट्रेंथ विल हैव नो एक्टिविटी इन दिस वर्ल्ड। इट ओनली इज इट डज नॉट एक्ट।
स्वामी विवेकानन्द
सी यदि कोई पहलवान है तो पहलवान को उसके सामने जाकर के कोई धमकी नहीं देने वाला है। क्योंकि पता है कि पहलवान को धमकी देंगे तो अपनी पिटाई हो जाएगी। किंतु वो दुबला पतला रोता हुआ एक आदमी है। वो छोटी-छोटी चीजों में कंप्लेंट करता रहता है। उसको कोई भी जा के धमक दे देगा। अरे भाई तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? वैसा क्यों कर रहे हो? ऐसा करके ऐसा धमक देगा क्योंकि पता है कि वो वीक है। अपने को डिफेंड नहीं कर पा रहा है। जो स्ट्रेंथ होती है उसको अपने को मैनिफेस्ट करने की जरूरत नहीं पड़ती। स्ट्रेंथ की जो महिमा है, शक्ति की जो आभा है, शक्ति का जो तेज है, उसी से लोग उससे उसके सामने बड़ा एकदम क्या है कि डर के रहते हैं। उसके सामने बड़ा रिस्पेक्ट दिखाते हैं। उसको बड़ी श्रद्धा करते हैं। शक्ति की सब जगह पे श्रद्धा होती है। शक्ति की सब जगह पे रिस्पेक्ट होती है। तो इसीलिए जो परफेक्ट स्ट्रेंथ है वो परफेक्ट स्ट्रेंथ कहां से आता है? दो तरह की शक्ति है। दो तरह के स्ट्रेंथ है। एक तो है कि मेरे खुद के अहंकार से आता है कि हां मैं पावरफुल हूं फिजिकली या तो मेरे पिताजी है। कोई बड़ी पोस्ट पे है या तो बहुत बड़े पॉलिटिशियन है। या तो फिर मेरे पास बहुत सारे रुपए पैसे हैं या तो फिर मेरे पास बहुत बड़ी डिग्री है। कोई भी एक सांसारिक एक सक्सेस को ले लीजिए। उसके ऊपर में उसकी जो शक्ति वो है उसका आत्मविश्वास उसका वो जो है कि सेल्फ कॉन्फिडेंस टिका होता है। किंतु जो परफेक्ट स्ट्रेंथ होती है परफेक्ट सेल्फ कॉन्फिडेंस कहो ना कि परफेक्ट विल पावर कहो ना कि परफेक्ट संकल्प शक्ति कहो वो जो है हमेशा ईश्वर के प्रति हमारी भक्ति यदि हम भक्त है तो और यदि हम ज्ञानी है तो ब्रह्म ज्ञान के ऊपर में अपनी जो आस्था है उसके ऊपर में अपनी जो श्रद्धा है मैं ब्रह्म हूं वो जो उसके जो कन्विक्शन है उसके ऊपर में उसकी संकल्प शक्ति उसका विल पावर टिका होता है तो ज्ञानी का विल पावर टिका होता है ब्राह्मण के ऊपर में। भक्त का विल पावर टिका होता है ईश्वर के ऊपर में। किंतु वो विल पावर चाहे ब्राह्मण के ऊपर में टिका हो ना कि ईश्वर के ऊपर में वो जो है इस सांसारिक जगत से परे है। एक ऐसी दिव्य सत्ता है जिससे कि वो अपना जो सस्टेनेंस है जैसे कि पौधा है। पौधे को हम खातर देते हैं। उसको हम फर्टिलाइजर देते हैं। यहां पे छोटा सा गार्डन है। उसके फोटो वगैरह मैं बीच-बीच में शेयर करता हूं। तो उसमें क्या है कि रेगुलरली ये फर्टिलाइजर वगैरह देना पड़ता है। तो अभी इतना गर्म है राजकोट में तो उसमें भी हमारे वो गार्डन में वो जो टेरेस गार्डन में गुलाब के फूल आ रहा है। तो क्या है कि उसका ठीक से जतन करने से वो गर्मी में भी गुलाब निकलते हैं। तो हालांकि है वो ठंडी के। तो देखिए यदि आप ठीक से किसी व्यक्ति की ये जो ह्रदय है उसमें आप यह जो आत्मश्रद्धा का वो पूर्ण करेंगे वो वो जो फर्टिलाइजर है वो जो खातर है उसमें डालेंगे ह्रदय में वो आत्मश्रद्धा रूपी संकल्प शक्ति रूपी सेल्फ कॉन्फिडेंस रूपी ये जो खातर आप डालेंगे फर्टिलाइजर तो उसका वो जो है ना कि साधना जो है वो उसमें निखर कर आएगी निखर कर आएगी जैसे वो गुलाब का पौधा में अच्छे से आप उसका जतन करते हो कितना सुंदर गुलाब खिलता है। ये जो कमल के फूल है बंगाल में मैंने जैसे कमल के फूल देखे वो सिर्फ साउथ में देखे। यहां पे तो देखने को ही नहीं मिलते। इतने अपने दो हाथ जितने बड़े-बड़े कमल के फूल होते हैं। तो कितना जतन से उनको हां वैसे तो वो वाइल्ड में भी होते हैं। म जंगल में भी खेतर में भी होते हैं। किंतु जतन करने से भी वो बड़े-बड़े गुलाब के फूल होते हैं। तो अपने हृदय में ये जो आत्म श्रद्धा रूपी ये जो ये जो पोषक तत्व है विटामिंस है उसको देने से अपना वो जो ईश्वर के प्रति श्रद्धा और भी निखर के आती है। ये जो धर्मों को प्रोटेक्ट करने की अपनी जो संकल्प है अपना या तो फिर जो धर्म को फॉलो करता है जो भक्त है जो धार्मिक व्यक्ति है उसको उसकी रक्षा करने की अपनी ये जो क्षमता है वो दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है। बहुत बार कभी सोचा जाता है कि यदि मैं अन्याय देखता हूं तो अन्याय का मैं सामना करूं कि ना करूं तो अन्याय का सामना करना ही चाहिए। यदि आप अन्याय से डर कर के भाग गए तो फिर आपके लिए कोई एक्सक्यूज नहीं है कि नहीं मैं तो भक्ता हूं। मैं क्यों ये सब झमेले में जाऊं? मुझे ये सब चीजों से क्या पड़ी है? ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या ये तो ब्रह्म ही सत्य है। ईश्वर ही सत्य है। सांसारिक ये जो सब कुछ चलता रहता है। मेरी नजर के सामने यदि किसी के साथ अन्याय हो जाए या किसी के साथ में ऐसा कोई अत्याचार हो जाए तो उसे मुझे देखने से क्या है? किंतु स्वामी विवेकानंद ने जब पूरा भारत भ्रमण करके देखा कि अरे जो की जो दुरावस्था है वो कितनी ये है कि जितने भी व्यक्ति है हमारे जितने भारतीय हैं वो बेचारे दिन प्रतिदिन जो है उन हताशा निराशा गरीबी की ये जो खाई है उसमें ज्यादा से ज्यादा डूबते जाते हैं। तब कहीं जाकर के स्वामी जी ने सोचा था कि मैं अल्मोड़ा जाकर के हिमालय में जाकर के एक गुफा में बैठूंगा। जप ध्यान करके समाधि में चला जाऊंगा और समाधि में ही मैं शरीर त्याग कर दूंगा। किंतु ऐसा हुआ नहीं। जैसे ही वो अल्मोड़ा में गए, गुफा में बैठे कुछ दिन ध्यान किया और वो इतना एक दुसवाद आ गया। कितना एक मतलब वो उनके कितना कष्ट देने वाला एक समाचार आया कि उनकी जो बहन है उसने आत्महत्या की है। उसने सुसाइड किया है। तो ये देखकर के ही यह समाचार सुनकर के ही स्वामी जी का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने सोचा कि अरे मेरी खुद की जो बहन है उसको यदि इतना ये जो सांसारिक कष्ट सहन करना पड़ता है। ये जो अत्याचार है उसको सहन करने पड़ते हैं तो फिर ये जो भारत की इतनी सारी ये जो महिलाएं हैं जो बहने हैं उनको तो क्या से क्या अत्याचार नहीं सहन करना पड़ता होगा। तो ये सोच कर के वो अल्मोड़ा से हिमालय से नीचे आए वो भारत में फिर भारत भ्रमण करके ये जो सभी गरीबों की ये जो अवस्था देखी फिर उन्होंने कहा कि शिव ज्ञान से जीव सेवा का जो आदर्श है सन्यासी के लिए वही सर्वश्रेष्ठ है। अर्थात ये सन्यासी भी जो हम है कि संसार छोड़कर के नहीं भाग जाते। हम लोगों ने भी देखा कि हां यदि संसार में इतना किसी को इतना कष्ट होता है यदि किसी के प्रति इतना अत्याचार होता है तो उसका उकेल हमको अवश्य लाना चाहिए। हां लोगों का काम करने का माध्यम अलग-अलग हो सकता है। हम लोग जो है कि पॉलिटिक्स में नहीं जाते। हम लोग जो है कि वो जो एक्टिव कंट्रोवर्सी में नहीं जाते। कंट्रोवरर्शियल बहुत सारे मामले हैं। हम लोगों का है कि सन्यासी के साथ में सन्यासी सबसे अच्छा क्या कर सकता है? तो ये जो सर्विस एक्टिविटी है हम सबसे अच्छे से कर सकते हैं। एजुकेशन है। फिर ये हेल्थ है। फिर ये जो बोर्डिंग स्कूल्स वगैरह अपनी है। ये जो हमारा रूरल डेवलपमेंट है। फिर ये कल्चरल एक्टिविटी है। ये हमसे सर्वश्रेष्ठ रूप से हो पाएगा। तो हम इस तरह से लोगों की रक्षा करेंगे। लोगों की सेवा करेंगे। ये जो हम कर रहे हैं उसके लिए भी तो एक शक्ति चाहिए। ये जो हम स्कूल चलाते हैं यहां पे जैसे मैंने पहले भी कहा था कि डिस्पेंसरी इतना अच्छा चलता है डेली 1000 पेशेंट हो जाता है और अपने डॉक्टर महाराज है उनको कैंसर हो गया है किंतु कैंसर हुआ है किंतु उनके चेहरे पे पता नहीं चलेगा। उनके भीतर में कितना वो दर्द होता है हमको कभी बताते भी नहीं। चेहरा देख के लगता भी नहीं है। वैसा शरीर लेकर के दिन रात वो लगे हुए हैं। हजार पेशेंट का डेली ट्रीटमेंट होता है। तो ये हमारी शक्ति है। शक्ति का मैनिफेस्टेशन अलग-अलग हो सकता है। किंतु बिना शक्ति के इस संसार में रहना बिल्कुल असंभव है। शक्ति अवश्य हमको चाहिए ही चाहिए। भले ही चाहे शक्ति का मैनिफेस्टेशन अभी जैसे कोई किसी का एजुकेशन में किसी का लर्निंग में बड़ा ही उसका एपटीट्यूड है। उसका वो जो स्किल है लर्निंग में बहुत ज्यादा है। तो वो पीएचडी वगैरह कर करके वो कोई अच्छा सा रिसर्च कर करके अपने देश के लिए मानव सभ्यता के लिए बड़ा अच्छा सा कोई इन्वेंशन कर दे। फिर किसी का जो स्किल होता है वो डिप्लोमेटिक स्किल्स होती है। तो वो पॉलिटिक्स में जाकर के अच्छी-अच्छी ये जो पॉलिसीज है उसको इंप्लीमेंट करें। किसी किसी का फिजिकल स्ट्रेंथ अच्छा होता है तो वो जाकर के सैनिक बने, सोल्जर बने, अपनी सीमाओं की बॉर्डर की रक्षा करें। तो जिसका जिस तरह से शक्ति का मैनिफेस्टेशन होता है उसको उस तरह से उस मैनिफेस्टेशन को धर्म की रक्षा करने के लिए समाज की रक्षा करने के लिए लगाना चाहिए। हमारा जो मैनिफेस्टेशन है वो है सर्विस एक्टिविटी। तो सर्विस एक्टिविटी से हम लोग जो है इस समाज की धर्म की रक्षा करते हैं। किंतु यदि शक्ति नहीं होती तो हम लोगों का क्या होता? हम लोग जो है हां एक बात है कि जब ध्यान करके साधन भजन करके मेडिटेशन करके पूजा पाठ करके प्रार्थना करके सद ग्रंथों का पाठ करके तीर्थ यात्रा करके हम लोग अपना समय बिताते हैं। किंतु देखिए ये जो ह्यूमन साइकोलॉजी है मानव मन जो है वो ब्रह्म और शक्ति दो जो एस्पेक्ट है दोनों को साथ में लेकर के ही रह सकता है। यदि आप कहेंगे कि शक्ति को हटा दो सिर्फ ब्रह्म रहेगा तो यह कभी नहीं होगा। यह जो हमारे जो ईश्वर है और बाकी सब धर्मों के ईश्वर देखो भगवान बुद्ध जो है वो है कि सिर्फ ध्यान मग्न रहेंगे। किंतु भगवान विष्णु जो है या भगवान कृष्ण जो है या तो भगवान राम जो है वो जितना ही उनका वो जो ध्यान में मग्न होने की क्षमता है उतनी ही उनकी क्षमता धनुष बाण लेकर के या तो सुदर्शन चक्र लेकर के दुश्मनों की हत्या करने में है। ये दोनों क्षमता उनके पास है। ये जो यूनिकनेस है सिर्फ हमारे हिंदू धर्म में है। बाकी जितने भी धर्म देखे सब में देखेंगे। हां सभी धर्मों में नहीं। जैसे अभी सिख धर्म में है सिख गुरुओं ने तलवार उठाई थी दुश्मनों के अगेंस्ट में किंतु जिसको वर्ल्ड रिलीजन कहा जाता है तो एकदम सर्वश्रेष्ठ लेवल के जो रिलीजन है तो उसमें हिंदूज़्म जो है वो यूनिक है हमारे देवी देवता मां दुर्गा हो जैसे यहां पे देखिए अष्ट भुजाओं में सभी भुजाओं में एक-एक शस्त्र है सिर्फ एक हस्त है कि जिसमें कमल है किंतु बाकी सब में एक ना एक अस्त्र है तो मां काली है मां दुर्गा है या तो फिर इवन कहिए कि भगवान विष्णु भगवान शिव तो जितने भी ईश्वर है हमारे उनकी संहार शक्ति भी है और साथ-साथ में वो जो देवी शक्ति भी है देवी शक्ति की मदद से वो खुद वो ध्यान में उनको खैर उनको तो ईश्वर को तो ध्यान करने की जरूरत नहीं पड़ती किंतु देवी शक्ति की मदद से वो हमको आशीर्वाद देते हैं और संहार शक्ति की मदद से वो हमारी रक्षा करते हैं वो उस तरह के ईश्वर का अर्थ ही क्या है कि जो हमारी रक्षा ना कर पाए। तो वैसे ही उस तरह का साधक का क्या अर्थ है जो कि ना ही वो समाज की रक्षा कर पाए ना ही वो धर्म की रक्षा कर पाए। साधक है उसके दो ये होने चाहिए। उसके संकल्प उसके दो आदर्श होने चाहिए। खुद की साधना और धर्म की रक्षा। हां वो धर्म की रक्षा वो नॉट नेसेसरी कि भगवान कृष्ण की तरह वो सुदर्शन चक्र उठा के करे ना कि अर्जुन की तरह वो उठा के करे। तो धर्म की रक्षा करने के बहुत सारे रास्ते हैं। जैसे हम लोगों का है ये एजुकेशन एक्टिविटी है। ये जो मेडिकल एक्टिविटी है उसके माध्यम से हम करते हैं कल्चरल एक्टिविटी के माध्यम से। किंतु ये शक्ति का मैनिफेस्टेशन होना ही चाहिए। मैंने कहा था बीच में भी कि मैं अखंडानंद जी की स्मृति कथा जो है वो गुजराती में ट्रांसलेट कर रहा हूं। तो उन्होंने एक जगह पर बहुत ही हृदय विदारक वर्णन दिया है। वो पढ़ के ही हमको मतलब अपने हृदय में इतना कष्ट होता है कि वो जब वहां पे महला में वो जो वो हुआ था दुष्काल पड़ा था फेमिन तो वो गांवगांव जाकर के टिकट मांगते थे। अभी जो जिसको टिकट दिया वो टिकट लेकर के आएगा। निश्चित दिन को निश्चित समय को महुला में आएगा। वो अन्न वगैरह लेकर के वो धान वगैरह लेकर के अनाज लेके चला जाएगा। तो वो टिकट देते देते अखंडानंद जी एक दिन बड़े शाम को बड़ा देरी हो गया था। रात हो गया था। एक ऐसे गांव में पहुंचे। पहले तो पता ही नहीं चला यहां पे गांव है। फिर ध्यान से देखने से पता चला गांव है। गांव के एक भी घर में एक भी दिया नहीं चल रहा था। तो अखंडानंद जी लिखते हैं यहां के लोग ऐसे रहते हैं जैसे कि मानो भूत रह रहे हैं। अभी ये देख के मुझे ऐसा लगा कि देखिए शक्ति का एक दीपक भी यहां पे नहीं चल रहा। शक्ति का एक प्रकाश का किरण भी यहां पे नहीं है। तो लोगों का मतलब अखंडानंद जी ने ठीक ही कहा। ये तो मनुष्य का जीवन नहीं हुआ। ये तो भूत का जीवन हो गया। भूत में शक्ति नहीं है। भूत योनि में वो इधर-उधर भटकता रहता है और वो सबको जो है कि परेशान करता रहता है। किंतु मनुष्य योनि प्राप्त की है तो शक्ति का जो मेनिफेस्टेशन है वो होना ही चाहिए। जो अध्यात्म जो है और ये जो बाह्य शक्ति है ये दोनों एक दूसरे के अभिन्न अंग है। यह कभी नहीं मानना है कि यदि मैं धार्मिक हूं यदि मैं भक्त हूं यदि मैं जब ध्यान करने में चाहता हूं कि अपना जीवन व्यतीत करूं तो फिर मुझे शक्ति की कोई जरूरत नहीं है। तो ये मानना बिल्कुल गलत है। हां शक्ति का डेफिनेशन जो है वो हमको ठीक-ठीक मन में रखना है। जैसे मैंने कहा कि एक पॉलिटिकल पावर होता है। मनी पावर होता है। एक वो जो एोगेंस होता है कि मेरे पास इतने पैसे हैं मैं कुछ भी कर लूंगा। कोई मुझे किसी के ऊपर में भी मैं अन्याय कर सकता हूं। किसी को मुझे कुछ कहने की ताकत नहीं है। जिसके पिताजी पॉलिटिशियन है वो सब सब समय जाकर के दूसरे लड़कों को धमकाते रहता है। तो वो जो है अविद्या की शक्ति हो गई। असत की शक्ति हो गई। और ये जो है विद्या की शक्ति सत की शक्ति विद्या का संसार ठाकुर ये जो बात है वो कथामृत में बार-बार दोहराते रहते हैं विद्या और संसार बंगाली में जो कहते हैं कि ये जो संसार है दो तरह के होते हैं अविद्या का संसार विद्या का संसार अर्थात अपना जो फैमिली है अपना जो कम्युनिटी है हमको इस तरह से इसको गढ़ना है इस तरह से उसका गठन करना है अपने फैमिली का या कम्युनिटी का कि वो ईश्वर के प्रति समर्पित हो नहीं कि वो कोई सांसारिक चीजों के प्रति समर्पित हो। अभी जैसे मेरी एक कंपनी है। मान लीजिए कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उसने अपनी खुद की एक कंपनी चालू की है। तो गलत कुछ नहीं है। होना ही चाहिए। किंतु ये जो कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी बोल के एक होता है सीएसआर। तो वहां पर भी उसको ये देखना है कि कंपनी की जो आय है उसका वो जो मुनाफा प्रॉफिट है उसका एक अंश 5% 10% जो है लोक कल्याण के कार्य में लगाए या तो खुद कर पाए तो ठीक है वरना तो फिर जो है ये जो सब सेवाभावी संस्थाएं हैं वहां पे जाकर के वो दान करें। मैंने पहले भी एक उदाहरण दिया था Mahindra एंड Mahindra का कि वो जो उन लोगों का एक नन्ही कली बोल के एक अच्छा सा एक कार्यक्रम चलता है तो वो लोग एक छोटी बच्ची को स्पोंसर करेंगे 5000 6000 इतना कुछ होगा वो अमाउंट तो आप यदि वो एक लड़की को स्पोंसर करेंगे क्योंकि क्या है कि गांव में जाएंगे तो लड़कियों को एजुकेशन पाना कठिन होता है। लड़कों को तो लोग स्कूल में भेज देते हैं। लड़कियों के पास से घर में काम करवाते हैं। खेत में काम करवाते हैं। तो सिर्फ़ लड़कियों के लिए आप उसको स्पोंसर कीजिए। इतना रुपया देंगे तो हम जो है उसका पूरा एजुकेशन की व्यवस्था जिसको चाहिए जो भी फीस है उसका यूनिफ़ार्म है। उसका वह जो स्टडी मटेरियल है वह हम देंगे। ऐसा करके उन्होंने कितनी हजार लड़कियों को विभिन्न स्पोंसर के थ्रू स्पोंसर करवाया है। तो अभी तो ऐसी कंपनी है Mahindra एंड Mahindra कि कोई ऐसा ये भी नहीं करेगा उनके आक्षेप कि वो जो पैसा लेके अपनी पॉकेट में डाल देते हैं। उनको जरूरत नहीं है ये सब करने की। तो वैसे ही यदि हम बिजनेसमैन है या तो फिर हम जॉब करते हैं कहां पे भी है धर्म की रक्षा करने के लिए अपनी आय का जो एक हिस्सा तो हमको व्यतीत करना ही चाहिए। और फिर जो लोग तो यहां पर पूर्ण रूप से समर्थ समर्पित है अपने भक्त है या तो साधु सन्यासी है वो तो आश्रम में तो काम करते ही रहते हैं तो उनका इस तरह से कंट्रीब्यूशन होता है किंतु ये जो शक्ति का मैनिफेस्टेशन अपना कहां पे है अपना है कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा और ब्रह्म ज्ञान पे विश्वास और लोक कल्याण की एक भावना इसके ऊपर में अपना वो जो आत्मश्रद्धा है आत्मनिष्ठा है वो उसके ऊपर में टिकी हुई है तो ये सत्य की शक्ति असत सत की शक्ति। बहुत सारे लोग सोचते हैं कि जब मैं धार्मिक हो गया तो मुझे शक्ति की जरूरत नहीं है। मुझे ये जो है स्ट्रेंथ की जरूरत नहीं है। क्यों? क्योंकि वो स्ट्रेंथ जो है वो हमेशा दूसरों को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए यदि मेरे में शक्ति आ गई तो मैं क्या करूंगा? मैं भी है दूसरों को जाकर के परेशान करना शुरू कर दूंगा। तो ये तो बिल्कुल ही गलत बात है। ये धर्म की जो हानि हुई वो इसी तरह के गलत थिंकिंग से हुई है कि वीकनेस इज अ साइन ऑफ रिलीजन। बट दिस इज़ कंप्लीटली रोंग। स्ट्रेंथ इज़ द साइन ऑफ़ रिलीजन। इनफाइनाइट स्ट्रेंथ इज़ रिलीजन। दिस इज़ द सेंटेंस ऑफ़ स्वामी विवेकानंद। इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि परफेक्ट स्ट्रेंथ विल हैव नो एक्टिविटी इन दिस वर्ल्ड। इट ओनली इज इट डज़ नॉट एक्ट। अच्छा यह डज़ नॉट एक्ट का भी थर्ड मीनिंग देख लेना है। ऐसा नहीं है कि शक्ति का मैनिफेस्टेशन हमको नहीं करना है। वह है कि सत रूप से करना है। उसको सत कार्य में लगाना है। असत कार्य में उसको नहीं लगाना है। अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं। ओम शांति शांति शांति। हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णापस्तुत