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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नम मां काली का रुद्र तत्व इसके ऊपर में हम चिंतन कर रहे थे स्वामी विवेकानंद की कविता काली ध मधर उसका हमने पाठ भी किया और मां काली ठाकुर और स्वामी जी के जीवन के प्रसंग और उनकी वाणी के माध्यम से उनकी महिमा कैसे प्रकाशित होती है वह भी हम देख रहे थे और हमने देखा कि मां काली के तीन तत्व है मातृत्व है शक्तिवर्धक रुद्र तत्व किंतु जब भी हम ठाकुर और स्वामी जी या तो फिर मां के जीवन के दौरान जब रुद्र तत्व की आलोचना करेंगे तो उसमें जो सौम्य तत्व है मातृत्व वह भी आ जाएगा और जो शक्तिवर्धक चक्र प्रवर्तन किया जाता है स्वामी जी जैसे कहते हैं कि ठाकुर के आने से ये फिर से नए सत्य युग का प्रारंभ हो गया है तो यह नए सत्य युग के प्रारंभ के लिए जो ठाकुर की वाणी और ठाकुर के आदर्श को पृथ्वी के प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में प्रवेश करवाना होगा पृथ्वी के प्रत्येक व्यक्ति का जीवन परिवर्तन करना होगा अध्यात्म मुखी करना होगा सबको उसके लिए शक्ति तत्व आवश्यक है शक्ति की आराधना करके ही यह हो सकता है आज देखिए कि जो चारों ओर हम लोग देख रहे हैं खूना मर की ये युद्ध हो ना कि कुछ भी हो दो-तीन साल पहले यह पडेम भी आ गया तो यह महामारी और युद्ध मनुष्य जीवन के साथ में हमेशा जुड़े हुए हैं कभी-कभी चार पांच साल शांति से जाएंगे तो हमको लगेगा कि बस अभी मां काली अभी शांति से बैठी है अभी मां काली का आशीर्वाद हमारे पर है किंतु कुछ चार पांच साल जाएंगे ही और ऐसी खूना मर की प्रारंभ होगी हमको लगेगा कि मां काली और भगवान शिव फिर से तांडव नृत्य कर रहे हैं तो इनका तांडव नृत्य कभी समाप्त नहीं होने वाला है जन्म मृत्यु जरा व्याधि सृष्टि स्थिति प्रलय का यह चक्र यह हमेशा से चलता रहेगा और इसी चक्र के भीतर में हमको अपना रास्ता निकालना है आज जो हम डिस्कस करेंगे स्वामी जी के जीवन में मां काली का प्रवेश कैसे हुआ तो स्वामी जी का जो पहले इसके ऊपर में कोटेशन है मैं इसको पढ़ लेता हूं इसके बाद में जो प्रसंग है जिसकी बद उस जिस प्रसंग के माध्यम से मां काली का स्वामी जी के जीवन में प्रवेश हुआ उसका पाठ करेंगे उसके ऊपर थोड़ी चर्चा करेंगे तो स्वामी जी कहते हैं कंप्लीट वर्क्स में स्वामी जी क्या कहते हैं हाउ आई यूज टू हेट काली मैं काली की कितनी निंदा करता था काली के प्रति मेरा कितना गुस्सा था मेरी कितनी घृणा थी ही सेड रेफरिंग टू हिज ओन डेज ऑफ डाउट्स इन एक्सेप्टिंग द काली आइडियल स्वामी विवेकानंद उन दिनों के बारे में याद करके कहते हैं कि जब वह काली को स्वीकृत नहीं करते थे ठाकुर के बारे में जो भी मन में आए कथामृत में ठाकुर कहते हैं कि एक दिन था कि नरेंद्र जो मन में आए वह काली के बारे में बोलता था फिर एक दिन मैंने नाराज होकर के कहा जाओ यहां से तो फिर वो एकदम शांति से खड़ा होकर के फिर गया और फिर वो हुक्का सजाने लगा तो मां काली के बारे में ठाकुर के दर्शनों के बारे में एकदम मन घड़तय मत प्रदर्शित करने में नरेण कभी भी वो उसमें उसको द्विधा नहीं होती थी किसी भी तरह का संकोच नहीं होता था तो उन दिनों की बात याद करके नरेण या तो फिर भविष्य के स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि मुझे काली के प्रति कितना गुस्सा था एंड ऑल हर वेज दैट वाज द ग्राउंड ऑफ माय सिक्स इयर्स फाइट मां काली और काली का काली तत्व जो है इस तरह से वो कराल मुखी है फिर मुंडमाला गले में लगाई हुई है भगवान शिव के छाती के ऊपर में पैर रख के खड़ी है मैंने काली के बारे में जो तत्व कथाएं काली के बारे में जो दर्शन है उस सब चीजों के प्रति मेरी बड़ी घृणा थी और यह इसी की वजह से मैंने ठाकुर के साथ में 6 साल फाइट किया है कभी भी मैं उनकी बातों को स्वीकार नहीं करता था दैट आई वुड नॉट एक्सेप्ट हर मैं उनको मां काली को कभी भी स्वीकार नहीं करूंगा ऐसा करके ठाकुर के साथ में स्वामी जी ने 6 साल फाइट की बट आई हैड टू एक्सेप्ट हर एट लास्ट किंतु आखिर में तो मुझे मां काली को स्वीकार करना ही पड़ा राम कृष्ण परमहंस डेडिकेटेड मी टू हर भगवान श्री रामकृष्ण देव ने मुझे मां काली को बलि के रूप में अर्पण किया है मुझे मां काली को निवेदित किया है एंड नाउ आई बिलीव दैट शी गाइड्स मी इन एवरीथिंग आई डू और अब मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि मैं जो कोई भी कर्म अपने जीवन में कर रहा हूं जो निर्णय में ले रहा हूं जो मेरा वर्तन है सभी चीजों में वही मां काली मेरा पथ प्रदर्शन कर रही है एंड डज विथ मी व्ट शी विल और जो चाहे वह मेरे साथ में करती है मेरा जन्म मृत्यु जरा व्याधि जो कुछ भी है सब मां काली के हाथों में अभी है मां काली की इच्छा थी कि इनको अमेरिका भेजा जाए तो स्वामी जी अमेरिका आए मां काली की इच्छा थी तो कष्ट दिया जाए तो पिताजी का मृत्यु हुआ मां काली की इच्छा थी कि वह प्रसिद्ध हो तो वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन के बाद में स्वामी जी प्रसिद्ध भी हुए तो शी डज व्हाट शी डज विथ मी व्हाट शी विल मेरे साथ में वो जो चाहे वो करती है यट आई फाउट सो लंग फिर भी मैं मां काली को स्वीकार करने से पहले इतना मैंने फाइट किया है आई लव्ड हिम यू सी एंड दैट वाज व्हाट हेल्ड मी मैं ठाकुर को प्रेम करता था ठाकुर के ऊपर में मेरी अनंत श्रद्धा थी इसी वजह से मैं ठाकुर के पास में टिका रहा आई सो हिज मार्वेल अस प्योरिटी आई फेल्ट हिज वंडरफुल लव हिज ग्रेटनेस हैड नॉट डोन ऑन मी देन मैंने उनकी अति अद्भुत पवित्रता देखी मैंने उनका अति पवित्र प्रेम मेरे ऊपर में स्नेह मैंने महसूस किया उस समय मुझे यह पता नहीं था उस समय मुझे यह अंदाज नहीं था कि वह कितने महान है किंतु उनकी जो पवित्रता थी और मेरे प्रति प्रेम था इसी प्रेम और पवित्रता की वजह से ही मैं उनके पास में टिका रहा ऑल दैट केम आफ्टर वर्ड्स व्हेन आई हैड गिवन इन उनकी महत्ता उनकी उनकी उनका जो मिशन है इस जगत में ठाकुर का अवतरण क्यों हुआ वह सब मुझे तभी पता चला जबकि मैंने अपने को मां काली को मां काली के श्री चरणों में शरणागत कर दिया था मैं पूरा अपने को निवेदित कर दिया था तब कहीं जाकर के मुझे ठाकुर की महत्ता समझ में आई थी एट दैट टाइम आई थॉट हिम अ ब्रेन सिक बेबी व जब पहले पहले ठाकुर के पास आता था तो ये जब वो बुखार जिसको आ गया है एक बच्चे को तो बुखार के मारे वो क्या सब लप करता लेता है प्रलाप करता रहता है व मैंने उसको सब दिखता है परी दिखेगी ना कि राक्षस दिखेगा ना कि वो देवी देवता दिखेंगे वो बुखार है बच्चा कुछ भी बोलेगा तो बुखार आए हुए बच्चे की तरह ब्रेन सिक बेबी दिमाग का बुखार जिसको आ गया है उस तरह के बच्चे की भाति मैं ठाकुर को सोचता था बच्चा क्यों क्योंकि वह पवित्र थे बच्चे की तरह पवित्र थे किंतु बुखार क्यों साथ-साथ में क्योंकि यह सब उल्टे पल्टे दर्शन भी उनको होते थे तो अभी क्या प्रलाप कर रहे हैं पवित्रता है साथ में प्रलाप भी कर रहे हैं इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि ब्रेन सिक बेबी की तरह में उनको देखता था ऑलवेज सीइंग विजनस एंड द रेस्ट और ब्रेन सिक बेबी क्यों क्योंकि सब समय यह दर्शन होते रहते थे और क्या-क्या सब वो प्रलाप करते रहते थे इसके लिए वह उनको ब्रेन सिक बेबी की तरह स्वामी जी देखते थे आई टेड इट एंड देन आई टू हेड टू एक्सेप्ट हर मुझे यह जो सब ठाकुर के प्रलाप ठाकुर के दर्शन यह सब चीजों में ना तो विश्वास था ना ही मुझे उनके ऊपर में श्रद्धा थी किंतु आखिर में मुझे सब कुछ कुछ माहा काली को एक्सेप्ट करना पड़ा सब कुछ ठाकुर का एक्सेप्ट करना पड़ा ठाकुर के दर्शन ठाकुर के यह जो सब दूसरों के हृदय के भीतर में झाक करके दूसरों का चरित्र जो समझ लेते थे ठाकुर वह भी मुझे एक्सेप्ट करना पड़ा सब कुछ मुझे स्वीकृत करना पड़ा नो द थिंग दैट मेड मी डू इट इज अ सीक्रेट ट विल डाई विथ मी और यह जो मैं शरणागत हुआ यह जो मैंने संपूर्ण रूप से आत्म निवेदन ठाकुर के और मां काली के श्री चरणों में किया इसके पीछे जो रहस्य है वह उसके बारे में मैं कभी नहीं बताऊंगा वह मेरी मृत्यु के साथ में ही यह रहस्य भी अदृश्य हो जाएगा इसके बारे में मैं किसी को कुछ भी बताने वाला नहीं हूं आई हैड ग्रेट मिसफॉर्चून एट द टाइम यह उन दिनों की बात है मैं काली को स्वीकृत किया उन दिनों में मेरे साथ में बहुत ही यह बैड लक या तो मिसफॉर्चून मेरे साथ में चल रहा था बहुत सारी दुर्घटनाएं मेरे साथ में चल रही थी इट वाज एन अपॉर्चुनिटी शी मेड अ स्लेव ऑफ मी और यह जो दुर्घटनाएं थी दुर्घटनाएं मेरे लिए एक अपॉर्चुनिटी में परिणत हो गई और इसी अपॉर्चुनिटी के माध्यम का फायदा उठा कर के महाकाली ने मुझे अपना गुलाम बना दिया अभी देखिए अ दोस वेर द वेरी वर्ड्स स्लेव ऑफ यू एंड रामकृष्ण परमहंसा मेड मी ओवर टू हर यह मां काली के वही मां काली या तो ठाकुर उन्हीं के एग्जैक्ट शब्द है कि हमने तुमको अपना गुलाम बना लिया है अ स्लेव ऑफ यू और श्री रामकृष्ण ने मुझे माहाकाली को संपूर्ण रूप से अर्पित कर दिया था देखिए यहां पर स्वामी जी जो मिसफॉर्चून की बात करते हैं वह मिसफॉर्चून क्या है अभी पहले तो स्वामी जी कहते हैं कि जो घटना वली जो घटना परंपरा जो जिसके माध्यम से मैं मां काली के शरणं में आया इसके बारे में मैं कुछ भी नहीं बताऊंगा किंतु हमको पता है यह बात स्वामी जी ने अमेरिका में कही थी अमेरिका में उन्होंने इस बात को ज्यादा डेवलप नहीं किया था इस घटना को किंतु हमको भारत में रहते-रहते हमको बहुत सारी बातें स्वामी जी के जीवन में जीवन के बारे में पता है क्योंकि कथामृत में भी उल्लेख है लीला प्रसंग में भी उल्लेख है स्वामी जी के बहुत सारे गुरु भाइयों ने भी इस बात का उल्लेख किया है कौन सी दुर्घटना हुई स्वामी जी के साथ में तो उनके पिताजी का देहांत हो गया और यह देखिए यहां पे ये कहते हैं ना स्वामी जी कि इट वाज अ ग्रेट मिसफॉर्चून एंड इट वाज एन अपॉर्चुनिटी बहुत बड़ा मिसफॉर्चून था मेरे साथ में और साथ-साथ में ही यह अपॉर्चुनिटी भी थी देखिए इसी बात को ठाकुर मेंशन करते हैं कथामृत में ठाकुर कहते हैं संपत के विपत ज्ञान करवे बोले छलो तो से जन य सब हो अर्थात कि स्वामी जी तो बातो बातें करने में तो कम नहीं थे बस सब समय बातें करते रहते थे खूब बकते पार ठाकुर कहते हैं बहुत बातें कर सकता है वो बहुत बक सकता है बकबक कर सकता है तो ऐसा बकबक करते करते स्वामी जी ने उस समय के नर ने कह दिया होगा संपद के विपद ज्ञान करव अर्थात की विपद के संपद ज्ञान करो विपद अर्थात की दुर्घटना या तो किसी भी तरह का यह एक बुरी घटना तो विपद को संपद ज्ञान करूंगा अर्थात कि जो दुर्घटना होगी उसको मैं एक अपॉर्चुनिटी के रूप में लूंगा एक सद् भाग्य के रूप में लूंगा जो भी दुर्घटना होती है बहुत बार ऐसा होता है ना स्वामी जी खुद कहते हैं कि मनुष्य का चरित्र जैसे गुड डेज जो होते हैं उसके साथ में अच्छे दिन होते हैं वह मनुष्य का चरित्र जितना गठन करते हैं उससे कहीं ज्यादा मनुष्य के चरित्र का गठन होता है बुरे दिन नों से तो यहां पर भी स्वामी जी बहुत बार मैं ऐसा वो ऐसे कोटेशन भी है कि जब भी कोई भी मिसफॉर्चून हो उसको अपॉर्चुनिटी के रूप में देखो जिससे कि तुम अपने को चेंज कर पाओगे अपने जो एक रेड में एक सेट हो गया है अपना जीवन उसमें कुछ बदलाव ला पाओगे वगैरह वगैरह लोग बोलते रहते हैं तो स्वामी जी ने भी कहा था कि जितनी भी दुर्घटना होगी उसको मैं अपने सद भाग्य के रूप में गिनू जिससे कि मैं अपने जीवन को परिवर्तित कर पाऊं ट्रांसफॉर्म कर पाऊं उन्नत कर पाऊं तो ठाकुर इसी बात को लेकर के मजाक करते-करते कहते हैं काशीपुर की बात है नरेंद्र के साथ में जो बुरे दिन चल रहे थे उसी बात को लेकर के ठाकुर कहते हैं और विपद के संपद गन करवे बोले छलो तो से जन् माने वो वो कह रहा था तो कि मेरे साथ में जो भी विपद आएगी उसको मैं संपद के रूप में गिनू तो देखो अभी क्या हो रहा है तो ठाकुर मैंने मजाक करके कहते हैं किंतु हमको पता है स्वामी जी का जीवन जिसने भी स्टडी किया है कि पिताजी के देहांत के बाद में जो उनको कष्ट मिला उसी कष्ट के बाद में ही जो घटना परंपरा हुई उसी के माध्यम से उन्होंने महाकाली को स्वीकार किया था और वह कौन सी घटनाएं थी उसका विस्तृत विवरण भी हम करेंगे पढ़ेंगे य स्वामी जी के जीवन में उसका बड़ा ही सुंदर विवरण है वह हम बाद में देखेंगे किंतु यहां पर पहले हम स्वामी जी का कोटेशन कंप्लीट कर देते हैं स्वामी जी आगे क्या कहते हैं स्ट्रेंज आश्चर्य की बात है पहले तो उनके साथ में दुर्घटना नाए हुई इसके बाद में ठाकुर ने स्वामी जी को महाकाली के शरणागत किया संपूर्ण रूप से उनको निवेदित किया उसके बाद में स्वामी जी कहते हैं बड़ी विचित्र बात है ही लीव्ड ओनली टू इयर्स आफ्टर डूइंग दैट मुझे महाकाली को समर्पित करने के बाद में ठाकुर सिर्फ 2 साल ही जीवित रहे एंड मोस्ट ऑफ द टाइम ही वाज सफरिंग और जो 2 साल का ठाकुर का जीवन था हमको पता है कि अगस्ट 18864 महासमाधि हुई थी तो उसके 2 साल पहले यदि यह घटना हुई ऐसा स्वामी जी कहते हैं तो यह ऑलमोस्ट अगस्ट 18842 साल ही जीवित रहे और इस 2 साल में भी उनको बड़ा शारीरिक कष्ट सहन करना पड़ा था यहां पे स्वामी जी मेंशन नहीं करते कौन सा कष्ट हमको पता है कि ठाकुर को कैंसर हो गया था नॉट मोर देन सिक्स मंथ डिड ही कीप हिज ओन हेल्थ एंड ब्राइटनेस मुझे महाकाली को समर्पित करने के 6 महीने तक ही उनकी हेल्थ यानी कि उनका स्वास्थ्य और उनकी ब्राइटनेस अर्थात कि मन की प्रचंड होता यह दोनों बरकरार रहे सिर्फ 6 महीने तक और उसके बाद में स्वास्थ्य में जो अवनति आती गई उसके वह आखिर में कैंसर कैंसर के बा बाद में ठाकुर की महासमाधि तो सिर्फ छ महीने तक ही ठाकुर ने अपनी स्वास्थ्य ठीक रखा गुरु नानक वाज लाइक दैट यू नो लुकिंग फॉर द वन डिसाइल टू हु ही वुड गिव हिस पावर गुरु नानक ऐसे थे पता है जो एक डिसाइल को एक शिष्य को वह खोज रहे थे जिनको कि वह अपनी संपूर्ण शक्ति दे देंगे एंड ही पास्ड ओवर ऑल हिज ओन फैमिली हिज चिल्ड्रन वेर जज नथिंग टू हिम और गुरु नानक अपनी शक्ति किसी एक शिष्य को देने के लिए उस शिष्य को खोज रहे थे इस खोज में उन्होंने अपने खुद के परिवार को अपने खुद के पुत्रों को उन्होंने नजर अंदाज कर दिया था उनके पु खुद के पुत्र उनकी नजर के सामने कुछ नहीं थे क्योंकि वह आध्यात्मिक शक्ति जिनमें होगी उनकी उनके आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए उसी को तो वह अपनी यह शक्ति पसार करेंगे एंड ही पास्ड ओवर ऑल हिज ओन फैमिली टिल ही केम अपॉन द टू ही गेव इट एंड देन ही कुड डाई आखिर में गुरु नानक को वह शिष्य मिला उस शिष्य को गुरु नानक ने सभी शक्तियां समर्पित की और फिर उनकी महासमाधि हुई द फ्यूचर यू से विल कॉल रामकृष्णा परमहंसा एन इनकार्नेसियों क्या आप ऐसा कहना चाहते हैं कि भविष्य में भगवान श्री रामकृष्ण को लोग मां काली के अवतार के रूप में पूजेंगे हां इस बात में कतई संदेह नहीं है कि भगवान श्री रामकृष्ण के देह के माध्यम से ही मां काली ने अपना कार्य समाहित किया है पृथ्वी के ऊपर में यू सी आपको पता है आई कैन नॉट बट बिलीव दैट देयर इज समवेल अ ग्रेट पावर दैट थिंग्स ऑफ हर सेल्फ इज फेमिना एंड कोल्ड काली एंड मदर मुझे पक्का विश्वास है कि इस विश्व ब्रह्मांड में ऐसी एक तो शक्ति है एक तो महाशक्ति है जो कि अपने को स्त्री के रूप में वह पहचानती है स्त्री के रूप में वह परिचय देती है और वह काली या तो फिर मां के रूप से पहचानी जाती है दे इज ग्रेट पावर दैट थिंक्स ऑफ हर सेल्फ एज फेमिना वह अपने को स्त्री के रूप में वह स्वीकृत करते हैं थिंक्स ऑफ हर सेल्फ वह अपने को स्त्री के रूप में मानते हैं एंड इज कॉल्ड काली एंड मदर और जिनको हम काली या तो मां के रूप में पुकारते हैं ऐसी एक तो शक्ति है जो कि अपने को शक्ति के रूप में स्वीकृत करती है और जिनको कि हम काली या मां के रूप में पहचानते हैं एंड आई बिलीव इन ब्रह्मण टू और मुझे तो ब्रह्मण के ऊपर में भी विश्वास है देखिए यह दो किस तरह से एक हो जाते हैं एक है ब्रह्मण अद्वैत वेदांत के अनुसार वहां पर कहते हैं कि जगत में जो कुछ भी देख रहे हैं ब्रह्मण के अलावा सब कुछ अविद्या से प्रकट हुआ है व्यष्टि अविद्या से मनुष्य के भीतर में जो चेतन है वह प्रकट हुआ है और समष्टि अविद्या के माध्यम से जो ईश्वर जिनको हम कहते हैं वह प्रकट हुआ है तो ईश्वर भी तो अविद्या के राज्य के भीतर में ही है और वह मिथ्या है सत्य तत्व यदि कहा जाए कोई सही सही चीज जो कि सत चित आनंदमय है तो वह तो ब्रह्मण मात्र है बाकी सबको हमको जैसे कि ठाकुर ने निर्विकल्प समाधि प्राप्त करने से पहले मां काली को खड़ग से चिर दिया था तो वैसे ही इस काली का वहीं तक अस्तित्व है कि जिसके माध्यम से हम ब्रह्मण तक पहुंच पाए किंतु जो आखिरी बैरियर क्रॉस करनी है ब्रह्म साक्षात्कार के पहले उस बैरियर क्रॉस करने के लिए मां काली का भी हमको विनाश कर देना पड़ेगा संहार कर देना पड़ेगा अपने खुद के मन में तभी हमको ब्रह्म तत्व प्राप्त होगा तो स्वामी जी कहते हैं दो चीज कहते हैं सबसे पहले तो कहते हैं कि इस विश्व ब्रह्मांड में ऐसी तो एक शक्ति है जो कि अपने को शक्ति के रूप में मातृ स्त्रीत्व के रूप में पहचानती है और जिनको हम काली या तो मां कहते हैं एक पुरुष और प्रकृति जैसे कि वह सांख्य दर्शन है या तो फिर यदि अद्वैत वेदांत की भाषा में कहा जाए तो ब्रह्मण और अविद्या या तो फिर माया तो यह माया और ब्रह्मण तो ये माया जद कहेंगे तो वो हो गई मां काली और ब्रह्मण तो ब्रह्मण ही है तो स्वामी जी कहते हैं कि मुझे इस तरह की एक काली रूपी शक्ति के ऊपर में भी विश्वास है और मुझे ब्रह्मण के ऊपर में भी विश्वास है बट इट इज नॉट ऑलवेज लाइक दैट किंतु यह हमेशा से ऐसा नहीं था काली और ब्रह्मण मा माया और ब्रह्मण हमेशा से दोनों साथ-साथ अस्तित्व में रहे है क्या ऐसा हमेशा से नहीं था इज इट नॉट द मल्टीट्यूड ऑफ सेल्स इन द बॉडी दैट मेक अप द पर्सनालिटी द मेनी ब्रेन सेंटर्स नॉट द वन दैट प्रोड्यूस कॉन्शसनेस हमेशा क्या ऐसा नहीं था कि हजारों लाखों करोड़ों छोटे-छोटे कोष जो होते हैं अपने शरीर में वह कोष या तो फिर सेल अपने संपूर्ण शरीर को बनाते हैं अपनी जो कॉन्शियस है अपनी यह जो चेतना है इस चेतना को वह गठित करते हैं तो हमको अभी मैं ऐसा नहीं सोचूंगा कि मेरे यह हाथ अलग है और यह हाथ अलग है मेरे पैर अलग है या मेरा सर अलग है मैं तो अपने को एक ही व्यक्ति के बारे में सोचता हूं मैं एक ही हूं मैं कोई मल्टीपल नहीं हूं एक हाथ रूपी एक शशी अलग दूसरे हाथ रूपी यह व्यक्ति अलग ऐसा नहीं मैं एक ही हूं ये मल्टीट्यूड जो है मल्टीट्यूड विभिन्न विभिन्न ऑर्गन विभिन्न विभिन्न कोष मेरे शरीर के सब मिलकर के एक ही कॉन्शसनेस को बनाते हैं तो वैसे ही यूनिटी इन कॉम्प्लेक्शन यह जो कॉम्प्लेक्शन अपने शरीर के भीतर में है विभिन्न अंग प्रत्यंग अपने शरीर के भीतर में है सब मिला कर के एक ही कॉन्शसनेस एक ही मन को बुद्धि को मन बुद्धि चित्त अहंकार को जन्म देते हैं यूनिटी इन कॉम्प्लेक्टेड में एकता जस्ट सो ऐसे ही जैसे कि शक्ति है शक्ति और ब्रह्मण यह दोनों अभिन्न है एंड व्हाई शुड इट बी डिफरेंट विद ब्रह्मण यदि अपने शरीर के बारे में ऐसा है कि अंग प्रत्यंग तो है ही है मल्टीट्यूड जिसको कहते हैं विविध या तो विभिन्नता कहते हैं किंतु कॉन्शसनेस एक ही है तो वैसे ही यह जगत में जितना सब कुछ दिखता है कितना सुंदर एनालॉजी दिया है देखिए स्वामी जी ने यहां पे इसको थोड़ा सा ध्यान से समझना होगा कि जी क्या कहना चाहते हैं कि देखिए कि हमको दिखता है कि जगत में इतनी विविधता है इतना वैविध्य है किंतु हम साथ-साथ में कहते हैं ब्रह्मण एक है तो एक ब्रह्मण के साथ में इतनी विविधता कैसे जुड़ी हुई है हम यदि देवी देवताओं को महाकाली को भगवान शिव को भगवान राम भगवान कृष्ण को विष्णु को सबको यदि एक्सेप्ट करेंगे तो यहां पर देवताओं का भी वैविध्य है य मनुष्यों का भी वैविध्य है कितने 700 करोड़ लोग है पृथ्वी के ऊपर में जो लास्ट जो जनगणना हुई है उसके अनुसार 7 बिलियन समथिंग ह्यूमन पॉपुलेशन है पृथ्वी के ऊपर में तो यह 700 करोड़ मनुष्य कितने करोड़ करोड़ पशु पंखियो जीव जंतु कितने करोड़ करोड़ यह जो पेड़ पौधे वगैरा इतने करोड़ों तारे सितारे ब्रह्मांड में तो सब कुछ की संख्या लाखों करोड़ों में है इस विश्व ब्रह्मांड में तो यदि कहेंगे कि ब्रह्मण एक है तो इस जगत में इतना वैविध्य क्यों तो इसका सॉल्यूशन स्वामी जी अपने देह के जो एक सुंदर एनालॉजी अर्थात की उपमा देकर के कहते हैं कहते हैं कि अपने शरीर में लाखों करोड़ों सेल है कोश है सैकड़ों ऑर्गन है हार्ट है यकृत है लीवर है ना कि लंग्स है ना कि आंखें है कान है हाथ है पैर है इतना सब कुछ इतना वैविध्य है किंतु क्या प्रत्येक कोश अपनी एक अलग पहचान बनाता है मेरा यह हाथ ऐसा कहेगा कि मैं यह एक काम करना चाहता हूं दूसरा हाथ कहेगा कि नहीं मैं दूसरा काम करना चाहता हूं मेरा एक पैर कहेगा कि मुझे ऑफिस की ओर जाना है तो दूसरा पैर कहेगा कि नहीं मुझे मंदिर की ओर जाना है क्या कभी ऐसा होगा मेरा मुंह ऐसा कहेगा कि अभी मैं यहां पर जैसे साउथ इंडियन के अनुसार मैं बता रहा हूं मेरा मुंह एक बार एक दांत ऐसा कहेगा मैं ढोंस खाना चाहता हूं दूसरा दांत कहेगा कि नहीं इडली खाना चाहता हूं ऐसा है जो 32 से 32 दांत है मेरे जो दोनों हाथ है दोनों पैर है जितने भी कोश है जिन हार्ट्स लंग्स सब कुछ मिलकर के एक ही व्यक्ति का कार्य करते हैं एक ही महासत्ता को वो ओबे करते हैं उसके आज्ञा का आदेश का पालन करते हैं वो हूं मैं अभी आप कोई कह पाएगा कि मैं कहां पर रहता हूं मेरे ब्रेन में मैं अपने ब्रेन में रहता हूं मैं अपने हार्ट में रहता हूं मैं अपने हाथ में रहता हूं अपने पैर में रहता हूं अपने लंग्स में रहता हूं मैं कहां रहता हूं मैं तो पूरे शरीर में व्याप्त हूं और शरीर एक एक अंग टूट भी गया तो किंतु फिर भी मेरा अस्तित्व बना रहेगा तो ये इतनी सुंदर उपमा है तो वैसे ही जगत को देखिए जगत में इतना वैविध्य है किंतु चेतन जो है वो एक ही है वो है ब्राह्मण और यदि जगत में किसी का मृत्यु हो किसी का जन्म हो ब्राह्मण को कोई फर्क नहीं पड़ता देखिए हमारे सर के ऊपर में बाल है कभी जाते हैं कभी नए उगते हैं अपने जो स्किन सेल है आपको पता होगा कितने स्किन सेल प्रतिदिन उसका मृत्यु होता है नए-नए स्किन सेल बनते जाते हैं कहते हैं कि मनुष्य के जीवन में जितने भी कोश है जितने भी अंग है जितने भी सेल है वो सभी सेल आई थिंक चार पाच साल में उनका मृत्यु हो जाता है हर चार पांच साल में बिल्कुल नया एक मेरा शरीर गठित होता है पुराने सेल मर गए और नए सेल अपने एक के बाद एक जन्म लेते हैं तो हर पाछ साल में संपूर्ण रूप से मैं बदल जाता हूं किंतु फिर भी मेरे भीतर में जो चेतना है वह तो अकब रहती है वह एक ही रहती है जन्म से लेकर के मृत्यु तक एक ही चेतना मेरे भीतर में रहेगी उसका विकास होगा उसको ज्यादा ज्ञान प्राप्त होगा अज्ञान भी प्राप्त होगा उसका बिहेवियर समय के साथ में चेंज भी होगा किंतु जो चेतन तत्व है वो तो एक ही है तो यहां पर भी स्वामी जी यह अपने देह की उपमा देकर के कहते हैं कि जगत में आपको जितने भी सब कुछ दिखता है मनुष्य है पेड़ पौधे हैं पशु पंखी है यह पदार्थ है तारे हैं ग्रह है सितार है हम सबको इस विश्व ब्रह्मांड रूपी जो शरीर है वह सबके एक एक कोष है हम सभी लोग हम सभी लोग एक एक सेल है और अपना खुद का कोई कर्तृत्व नहीं है अपनी खुद की कोई बु ध नहीं है देखेंगे कि अपने शरीर के भीतर में वैज्ञानिक लोग या बायोलॉजिस्ट वो ये इसको लेकर के वो जो ये माइक्रोस्कोप होता है माइक्रोस्कोप लेकर के अपने शरीर के भीतर के जो सेल है उसको देखते रहते हैं देखिए वाइट ब्लड सेल ना कि रेड ब्लड सेल किस तरह से काम करते हैं यदि भीतर में एक बैक्टीरिया प्रवेश कर गया या तो वायरस प्रवेश कर गया तो यह वाइट ब्लड सेल या तो जो अपने ऑटो इम्यून सिस्टम जो होती है वो किस तरह से इसका मुकाबला करते हैं तो उसको देख कर के लगेगा प्रत्येक सेल का अपना-अपना एक ब्रेन है प्रत्येक सेल वह जो उसका जो कार्य करना है वह इस तरह से करेगा कि जैसे वह सजीव दिखता है जैसे वह अपनी खुद की बुद्धि से मैंने देखा है इस तरह का वीडियो कि भीतर में वह कोई एक प्लेग का वायरस ने कुछ प्रवेश किया है और यह जो वाइट ब्लड सेल वगैरह जो अपने को प्रोटेक्ट करते हैं वो इसके पीछे-पीछे दौड़ते हैं और उसको मार देते हैं ऐसा वीडियो सही में मैंने देखा है बहुत सारे वीडियो आप देखेंगे उस समय लगेगा कि क्या ये वाइट ब्लड सेल कि ये जो भी है अपने को प्रोटेक्ट करने वाले इसका खुद का एक ब्रेन है उसकी खुद की एक बुद्धि है वो डिटेक्ट करता है कि कौन है शत्रु फिर उसके पीछे में दौड़ता है फिर वो स्ट्रेटेजी बनाता है उसको कैसे कैप्चर करें उसका कैसे हत्या करें वो सब माने ऐसा लगेगा कि एक-एक सेल सजीव है तो हमको भी हमको लगता है कि मैं सजीव हूं मेरी खुद की एक बुद्धि है मैं अपनी बुद्धि के अनुसार कार्य करता हूं किंतु यदि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो मैं वही एक छोटा सा कार्य करता हूं जो कार्य करने के लिए मेरा जन्म हुआ है और उसी कार्य को करते-करते मेरा मृत्यु भी होगा किंतु मेरा खुद का ऐसा कोई इंडिपेंडेंस नहीं है मेरा खुद का ऐसा कोई ऐसा नहीं है अपनी अलग से सत्ता नहीं है एक ही जो सुपरकॉन्शियस नेस है ब्राह्मण उसी के विभिन्न विभिन्न ये परछाइयां मात्र हम है अभी यह वाइट ब्लड सेल है वह कहेगा कि मुझे ब्रेन का कार्य करना है तो ब्रेन के जो सेल होते हैं उसको को कहते हैं न्यूरॉन वो वाइट ब्लड सेल कोई न्यूरॉन का कार्य नहीं कर पाएगा या तो फिर न्यूरॉन जो है वो कहेगा कि मुझे यह जो डाइजेस्टिव सिस्टम है वो चलानी है तो अपने लीवर के भीतर में जो सेल है उसका कार्य ये न्यूरॉन नहीं कर पाएंगे तो सभी का न्यूरॉन का एक कार्य है वाइट ब्लड सेल रेड ब्लड सेल फिर ये जो लीवर के सेल जो है लंग्स के जो सेल है हार्ट के जो सेल है सबका अपना-अपना कार्य है वो करते हैं है तो वैसे ही पशु पंखी पेड़ पौधे मनुष्य ग्रह सितारे पृथ्वी चांद हम सब अपना-अपना कार्य करते हैं और हम सब मिलाकर के ब्रह्मण रूपी कॉन्शसनेस को जन्म देते हैं मेरे शरीर के भीतर में सिर्फ एक ही व्यक्ति जीता है भले ही चाहे करोड़ों सेल हो वैसे ही ब्रह्मण एक ही है माने सुपरकॉन्शसनेस एक ही है हम सबके पास में सबकॉन्शसनेस है छोटी-छोटी कॉन्शसनेस हम सबके पास में के माध्यम से एक सेल को जितना इंडिपेंडेंस होना चाहिए अपना कार्य करने के लिए उतना इंडिपेंडेंस हमारे पास में है तो बड़ी ही सुंदर उपमा देकर के स्वामी जी ने वैविध्य और वैविध्य के भीतर में एकता यूनिटी इन कॉम्प्लेक्टेड को स्वामी जी ने समझाया है जस्ट सो ऐसे ही मान लीजिए इस पूरा उदाहरण एंड व्हाई शुड इट बी डिफरेंट विद ब्रह्मण इट इज ब्रह्मण इट इज द वन एंड यट एंड यट इट इज द गॉड्स टू तो जिस तरह से अपने शरीर के विभिन्न सेल विभिन्न कोष एक ही व्यक्तित्व एक ही कॉन्शसनेस को जन्म देते हैं वैसा ही ब्रह्मण के साथ में है भले चाहे विभिन्न देवी देवता एं हो ब्रह्मण या तो फिर कॉन्शसनेस एक ही है देवी देवताओं कहो ना कि फिर आप मनुष्य प्राणी वगैरह जो कुछ भी कहो किंतु इसके भीतर की जो सुपर कॉन्शसनेस है व एक ही है अच्छा अभी स्वामी जी का यह कोटेशन होता है समाप्त और इसके बाद में यह जो पूरा प्रसंग है हमारे सामने स्वामी जी ने कहा ना कि मैंने 6 साल तक ठाकुर के साथ में फाइट की और 6 साल के बाद में मैंने माहाकाली को स्वीकार किया है अभी यहां पर देखिए कि इन लोगों का मैथमेटिक्स कोई इतना पक्का नहीं था तो ये सब चीजों को बहुत लिटरली नहीं लेनी है 6 साल 2 साल वगैरह क्योंकि हमारे कैलकुलेशन के अनुसार स्वामी जी ठाकुर के पास में आए हैं सम वेयर इन 18811 81 के आसपास में स्वामी जी का ठाकुर के साथ में प्रथम दर्शन हुआ है प्रथम मिलन हुआ है और ठाकुर का देहांत हुआ महासमाधि हुई 186 18864 मैथमेटिक्स सबका कच्चा था तो इस सोच कर के ही यह सब फिगर्स को लेना है जहां तक हमारा कैलकुलेशन जाता है 18818 के कभी स्वामी जी ठाकुर के पास में आए हैं और मास्टर महाशय के पहले ही स्वामी जी ठाकुर को मिल चुके हैं क्योंकि मास्टर महाशय तृतीय और द्वितीय तृतीय दर्शन में ही नरेण के बारे में बात करते हैं और ऑलरेडी नरेण ठाकुर के साथ में काफी परिचित था उस समय तो हम मान लेते हैं कि वो 1880 ही कुछ नरेंद्र का स्वामी ठाकुर के साथ में मिलन हुआ होगा और उनकी महासमाधि 86 तो 85 के मध्य में कहीं पे यह घटना हुई है ठाकुर ने स्वामी जी को माहाकाली को अर्पित किया हो तो स्वामी जी का मैथमेटिक्स यहां पे बहुत ज्यादा हमको सीरियसली लेने की जरूरत नहीं है अच्छा तो अभी इसके बाद में हम यह जो स्वामी जी के जीवन में यह जो घटना है जो दो घटनाए है बड़ी सुंदर घटनाएं है उसके बारे में देखेंगे किंतु मुझे लगता है आज जो दिन घटना को चालू करेंगे तो समाप्त नहीं होगी अधूरा छोड़ना पड़ेगा तो उसको हम कल ही लेते हैं आज हम यहीं पर समाप्त करते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु