Skip to transcript
ClassesSaradakosh

General ·

Reflections on alien visitations documentary: Age of Disclosure UAP UFO 24 Nov 2025

Highlight

यदि मान लीजिए कि कभी ऐसा एक मौका आ जाए कि एलियन हमारे पे अटैक करें। नाउ दिस इज़ प्योर फेंटसी इन अ प्योर साइंस फ़िक्शन जो भी करें कि एलियन यदि हमारे पे अटैक करें और उन लोगों के पास में नेचुरली कि वो कहां-कहां से वो स्पेसशिपिप लेके आएंगे। हमारे से उनकी टेक्नोलॉजिकल एडवांस मान लीजिए हमारे से हजारों हजारों साल वे लोग टेक्नोलॉजिकली ज्यादा एडवांस है। उन लोगों के पास में इस तरह की वेपन सिस्टम है जो कि हम लोग जिसकी कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। इस तरह के एनर्जी सोर्सेस है जीरो पॉइंट एनर्जी कल मैं देख रहा था। तो इसके बारे में थ्योरेटिकली तो हमको पता है किंतु प्रैक्टिकल हमको कुछ ज्ञान नहीं है। तो इस तरह के एनर्जी सोर्स, इस तरह के एडवांस वेपंस, इस तरह के एडवांस स्पेसक्राफ्ट यह सब लेकर के एलियंस यदि आते हैं पृथ्वी पर हमला करने के लिए तो फिर हमारे पास में डिफेंस कहां पे है? हमारे पास में डिफेंस क्या है मनुष्य समाज के पास में? तो देखिए सबसे पहले तो स्वामी जी का एक स्टेटमेंट है। ऑल द पावर्स ऑफ गुड अगेंस्ट ऑल द पावर्स ऑफ इवल अर्थात कि यह जो इवल अर्थात कि यह अनिष्टकारी जितनी भी शक्तियां है उसके सामने इष्ट गुड अर्थात कि यह शुभ शक्तियां जितनी भी है इष्ट शक्तियां जितनी भी है उन सबको एक साथ में खड़ा रह के लड़ना है। देन इन टर्न विथ द पावर ऑफ दिस प्राणायाम वी कैन कंट्रोल एव्री मैटर इन द यूनिवर्स। स्वामी जी कहते हैं यह ग्रह नक्षत्र जो है आकाश में उसकी गति को परिवर्तित कर सकते हैं। तो मान लीजिए कि यदि प्राणायाम या तो प्राण के विज्ञान को समझ करके हमने ऐसी कोई पावर डेवलप कर दी कि जब इन लोगों के एकदम हाई टेक एडवांस स्पेसक्राफ्ट है या तो एनर्जी वेपन्स है। वो हमारे सामने आए तो यहां पे वो इस तरह के कुछ फाइटर बैठे होंगे। दे कैन एबल टू फाइट विद देर माइंड। मां को पूछा कि मां यह तो इतना बड़ा विश्व ब्रह्मांड है। इतने बड़े विश्व ब्रह्मांड में कितने ही ग्रह है। कितने ग्रहों पे कितने तरह के लोग किस तरह का जीवन होगा किसको पता? तो मां सुन रही है। जय राम बाटी की बात है। मां सब सुन रही है। फिर सुनने के बाद में धीरे से कहती है कि बेटा वो जितने भी ग्रह है कहीं पे कुछ भी जीवन नहीं है। जीवन है तो सिर्फ पृथ्वी पे है। ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णायते नमः

Age of Disclosure: Are Aliens Among Us?

संडे को कल मैं एक डॉक्यूमेंट्री देख रहा था उसका नाम है एज ऑफ डिस्क्लोज़र। इसमें क्या है? अभी रिसेंटली वैसे यह न्यूज़ जो है वह रिसेंट नहीं काफी पुराना है। अ दूसरे ग्रह से जो कुछ यूएफओस अर्थात कि अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट। तो यह यूएफओ को लेकर के स्पेककुलेशन अमेरिका में काफी समय से चल रहा है और वे लोग ऐसा बहुत सारे लोग ऐसा मानते हैं वहां पे कि दूसरे ग्रह से लोग आए हैं पृथ्वी पर विजिट करने के लिए और हमारे साथ में कहीं-कहीं पर बात भी की है और अमेरिकन गवर्नमेंट के पास में इसके बहुत सारे प्रूफ भी है। तो ऑलमोस्ट पिछले 1940 से यह सब चलता आ रहा है। तो अभी तक कोई इसको सीरियसली नहीं लेता था। किंतु रिसेंटली पिछले तीन-चार साल से हमने देखा कि यूएस गवर्नमेंट ने कुछ-कुछ वीडियोस जो है वो पब्लिक किए और इस वीडियोस में इस तरह के फ्लाइंग क्राफ्ट के बारे में दिखाया गया है कि दे फ्लाई एट द स्पीड ऑफ मोर देन 4ाउज कि.मी. पर आवर। हमारे जो फ्लाइंग क्राफ्ट है एरोप्लेन है ना कि फाइटर जेट है उसकी स्पीड ज्यादा से ज्यादा कितनी होगी तीन चार पांच छ मेक फाइव सिक्स मेक एट द मोस्ट मेक अर्थात कि स्पीड ऑफ साउंड तो स्पीड ऑफ साउंड है 1000 किमी पर आवर मान लीजिए तो ज्यादा से ज्यादा कितना 1015000 किमी पर आवर इतना मैक्सिमम हमारे जो एक्सपेरिमेंटल एयरक्राफ्ट होंगे अमेरिका के खास करके वह इतना स्पीड से उड़ पाएंगे। किंतु यह जो वीडियो उन्होंने कुछ रिलीज की अमेरिकन गवर्नमेंट ने उसमें दिखा रहा है कि मोर देन 4ाउज कि.मी. पर आवर और कभी-कभी उससे भी ज्यादा स्पीड से यह जो अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट है और आजकल इसको कहते हैं अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनोमिना यूएपी। तो वह इतना स्पीड से उड़ते हैं और फिर इतना ही नहीं कभी-कभी इतना स्पीड से उड़ने के बाद में वह हवा में से कहीं जमीन के पानी के भीतर में भी चले जाते हैं। तो हवा में भी इतना स्पीड से उड़ेंगे। पानी में भी इतना स्पीड से उड़ेंगे और कभी-कभी रडार में से अदृश्य हो जाते हैं। इस तरह के जो फ्लाइंग क्राफ्ट है उसमें पता नहीं इस तरह की एडवांस टेक्नोलॉजी है। तो यह इसके ऊपर में अभी जस्ट एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज हुआ है। उसका नाम है एज ऑफ डिस्क्लोज़र। तो मैं कल देख रहा था। तो इसमें इस डॉक्यूमेंट्री में वैसे नया कोई इंफॉर्मेशन नहीं है। जो कुछ इंफॉर्मेशन है वह पिछले चारप साल से वह अमेरिकन गवर्नमेंट रिलीज कर रही है। किंतु इस डॉक्यूमेंट्री में बहुत अच्छे से सजा करके सब कुछ दिखाया गया है। तो वहां पे दो-तीन साइंटिस्ट स्पेकुलेट करते हैं कि यह जो इतनी सुपीरियर स्ट्रेंथ है यह जो अनआइडेंटिफाइड यह फ्लाइंग क्राफ्ट जो है उसमें तो उसके पीछे कौन सा साइंस काम करता है? तो वे लोग स्पेकुलेट करते हैं कि स्पेस टाइम को बेंड करने की कैपेसिटी इन लोगों में है। तभी एक स्पेस टाइम बबल बनता है एयरक्राफ्ट के आसपास और फिर इसी बबल की वजह से ना ही उसको जो पृथ्वी का वातावरण है ना ही पृथ्वी का ग्रेविटी है यह असर करता है। इंस्टेंटली कहां से भी कहां जा सकते हैं और माने इनक्रेडिबल उसका जो एनर्जी ड्राइव है इनक्रेडिबली स्ट्रांग है। तो यह सब मैं कुछ कल देख रहा था। मुझे एक बात का जो आश्चर्य हुआ और अभी तक देखिए कि इस तरह के जो यूएफओस वगैरह है उसमें जनरल पब्लिक में तो किसी किसी को इंटरेस्ट है। ज्यादातर लोग इसको बोगस ही समझते थे। क्योंकि इतना बड़ा इंफॉर्मेशन कि दूसरे ग्रह से कोई आकर के वो मनुष्य तो नहीं ही कहेंगे उसको ईटीआई कहेंगे। एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस या तो फिर कहेंगे एलियन जो भी नाम देना चाहे यदि दूसरे ग्रह पर जीवन है और वह पृथ्वी पर आकर के हमारे साथ में कहीं-कहीं किसी रूप से इंटरेक्ट कर रहा है तो यह कितना बड़ा न्यूज़ है कंपेयर टू दैट ना ही न्यूज़ पेपर में ऐसा कुछ देखने को मिलता है ना ही गवर्नमेंट ऑफिसर्स कोई कुछ बोलते हैं और इतना ही नहीं दूसरा है कि यह जो स्पेकुलेशन है वह ज्यादातर अमेरिकन मीडिया में ही चलता है। ना ही इंडिया में ऐसा कोई न्यूज़ पढ़ने को कभी आया है कि इंडिया में कभी कोई यूएफओ दिखा ना ही यह चाइना, रशिया और कहीं पे दिखा। तो यह अमेरिका में ही क्यों इस तरह के यूएफओ दिखते हैं? इंडिया में आए हैं तो क्या इस न्यूज़ को कोई हम इसका प्राधान्य नहीं देते कि क्या टू मेनी क्वेश्चंस टू मेनी क्वेश्चंस। इसको देखकर के बार-बार मेरे मन में यही आ रहा था कि यदि इतना इंपॉर्टेंट यह न्यूज़ है इवन इसका पॉसिबिलिटी भी है कि दूसरे ग्रह पे जीवन है और वह पृथ्वी पे आ रहे हैं कोई स्पेसक्राफ्ट में माने इस तरह का टेक्नोलॉजी लेकर के कि व्हिच इज थाउजेंड्स ऑफ इयर्स एडवांस तो फिर इसके बारे में बहुत कुछ चर्चा होनी चाहिए पता नहीं और फिर कुछ-कुछ बातें इस डॉक्यूमेंट्री में और रिसेंटली जो न्यूज़ आया माने उसमें ऐसा कहते हैं कि यह जो एलियन क्राफ्ट है तो अमेरिका के जो न्यूक्लियर वेपन है उसके ऊपर में जाकर के वो मंडराते हैं और न्यूक्लियर वेपन को डिसेबल कर देते हैं। तो वि इज इवन मोर डेंजरस। न्यूक्लियर वेपन के साथ में ये लोग कोई खिलवाड़ करें और मान लीजिए कि इन्होंने ऐसा सोचा कि चलो अमेरिका और चाइना में वॉर करवा दी जाए। अमेरिका के न्यूक्लियर वेपन को कंट्रोल करके चाइना की ओर फेंकेंगे। अभी चाइना थोड़ी ना ये स्वीकार करने वाला है कि अमेरिका के कंट्रोल में यह न्यूक्लियर वेपन नहीं है। यह मिसाइल जो आ रही है वो किसी एलियन ने कंट्रोल करके किया है। ऐसा वे लोग सामने और 50 मिसाइल फेंकेंगे। फिर अमेरिका वाले और 100 मिसाइल फेंकेंगे। ऐसा 50 न्यूक्लियर मिसाइल इधर-उधर फेंकी वो पूरा पृथ्वी खत्म हो जाएगा। सो दिस सॉर्ट ऑफ न्यूज़ व्हिच इज इवन मोर डेंजरस। मुझे पता नहीं कि इसके बारे में ज्यादा स्पेकुलेशन या ज्यादा लोगों को इंटरेस्ट क्यों नहीं है। यदि इसमें थोड़ा सा भी सत्य है और इस डॉक्यूमेंट्री में तो मार्को रुबियो जो कि आज अमेरिका का सेक्रेटरी ऑफ स्टेट है और एनएसए है नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर यानी कि ये तो बड़ा प्रेस्टीजियस और गवर्नमेंट ऑथॉरिटेटिव पोस्ट है। वह खुद बोलता है कि इस तरह की पॉसिबिलिटीज़ है और इस तरह के प्रूफ भी है और इस डॉक्यूमेंट्री में और जो कुछ रिसेंट न्यूज़ आए हैं उसमें यह भी स्पेककुलेट किया गया है कि यह जो एलियन है उनका डेड बॉडी हमको मिला है और इस डेड बॉडी को लेकर के हमने डिसेक्शन वगैरह भी किया है। और यह जो एलियन क्राफ्ट है वह कहीं पर क्रैश हो गए हैं। तो उनका क्रैश हुआ जो क्राफ्ट है वह अमेरिकन गवर्नमेंट ने उसको लेकर के उसको रिवर्स इंजीनियर करके कुछ-कुछ बड़ी ही एडवांस टेक्नोलॉजी भी डेवलप की है। ऑल ऑफ दिस यदि सही है तो इट इज अ वेरी बिग न्यूज़। आई डोंट नो कि इसके बारे में और ज्यादा क्यूरियोसिटी क्यों नहीं है। इंडिया में तो इस तरह का कोई भी ना ही स्पेककुलेशन मैं सुनता हूं ना ही गवर्नमेंट की ओर से कुछ बोला जा रहा है। व्हिच इज वेरी सरप्राइजिंग। क्योंकि मान लीजिए ये तो सब टेक्नोलॉजी की बात हुई। थोड़ा सा फिलोसोफिकली सोचे कि दूसरे ग्रह पर जीवन होने का अर्थ क्या है कि अब पृथ्वी पर अब जैसे देखिए भारत का खुद का एग्जांपल देखिए हमारे साथ में क्या हुआ है एक समय था कि भारत स्वर्ण युग में जी रहा था किंतु एक समय ऐसा भी आया कि टेक्नोलॉजिकली साइंटिफिकली और इकोनॉमिकली हम लोगों का डिटेरेशन प्रारंभ हुआ इकोनॉमिकली तो नहीं किंतु यह मिलिटरीली तो अपना डिटेरेशन प्रारंभ हुआ और फिर यह विदेशी हमलावर जितने भी आए उन्होंने भारत पे आक्रमण करके हमको गुलाम बना करके हमारे ऊपर में कितना अत्याचार किया है। पिछले 1000 साल का इतिहास है। और यही जो यूरोपियन जिन्होंने भारत पे आक्रमण किया था। किसी यूरोपियन ने अमेरिका जो आज का नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका है वहां पर जाकर के वहां की जो इंडीजीनियस पपुलेशन थी उसको ऑलमोस्ट सफाया कर दिया है। उस वहां की जो सिविलाइजेशंस थी उसको संपूर्ण रूप से तबाह कर दिया है। ये जो इस्लामिक इन्वेशन जहां-जहां पे हुए इजिप्ट में देखिए कि पुरानी सभ्यता थी किंतु वो सभ्यता संपूर्ण रूप से उन्होंने डिस्ट्रॉय कर दी है। संपूर्ण रूप से खत्म कर दी है। ईरान में देखिए कि पर्शियन एंपायर इतना पुराना था किंतु जैसे ही यह इस्लामिक इन्वजन प्रारंभ हुआ पर्शियन एंपायर संपूर्ण रूप से नेस्तनाबूद हो गया। तो जब भी एक एडवांस सिविलाइजेशन एक प्रिमिटिव सिविलाइजेशन के कांटेक्ट में आती है तो पृथ्वी का जो इतिहास है हमारा जो मानव सभ्यता का जो अनुभव है वह बहुत ही बुरा रहा है। तो मान लीजिए कि यहां पर पृथ्वी पे हम लोग आपस में झगड़ा करके ना कि ऐसा करके रह रहे हैं। यह भारत में तो देखिए क्या परिस्थिति है हमारी और इस अवस्था में अभी हम लोग यह चाइना पाकिस्तान इसी को संभालने में पसीना निकल जा रहा है तो कहीं यह दूसरे ग्रह से आ गए हमारे पर राज्य करने के लिए या तो हमारा शोषण करने के लिए तो इमेजिन कि हमारी परिस्थिति क्या होगी और दूसरी बात क्या है पता है देखिए यह जो स्पेस ट्रैवल है यह स्पेस ट्रैवल बड़ा ही मुश्किल है सबसे नजदीक का स्टार है वो अल्फा सेंटोरी तो वहां पे जाने के लिए यदि हम एट द स्पीड ऑफ लाइट हम जाते हैं उड़ते हैं हमारा स्पेसक्राफ्ट तो 4 साल लगेगा और स्पीड ऑफ लाइट से उड़ना ऑलमोस्ट असंभव है। उसके लिए आपको फिर बड़ी ही एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलप करनी होगी। जैसे ये वार्म होल है। ये जैसे स्पेस टाइम बबल है। यह ज़ीरो पॉइंट एनर्जी है। क्या-क्या सब एडवांस कांसेप्ट है। इस तरह के स्पेसक्राफ्ट, इस तरह की टेक्नोलॉजी, इस तरह का ह्यूमन माइंडसेट ये डेवलप करना होगा। तो जो सिविलाइजेशन यह स्पेस फेयरिंग सिविलाइजेशन जिसको कहते हैं अर्थात कि इस तरह की सिविलाइजेशन जिसने कि ये स्टार्स के बीच में जर्नी करना सीखा है वो इतनी एडवांस होगी। इतनी एडवांस होगी कि हम लोगों के साथ में यदि कांटेक्ट में आएंगे तो ऐसा कुछ नहीं है हमारे पास में जो कि इन लोगों को किसी भी तरह से हरा सके। इंक्लूडिंग न्यूक्लियर वेपंस। यदि आप स्पेस टाइम बबल बनाना सीखे हैं तो उसको क्रॉस करके तो न्यूक्लियर वेपंस कभी उनको कुछ नहीं कर पाएंगे। सो दिस इज वेरी सरप्राइजिंग कि इस तरह की सिविलाइजेशन है हो सकती है और इस तरह के लोग पृथ्वी पे आकर के हमारी जो हाईएस्ट टेक्नोलॉजी है हाईएस्ट मिलिट्री टेक्नोलॉजी दैट इज न्यूक्लियर वेपंस उसका इंस्पेक्शन कर रहे हैं। व्हिच इज वेरी डेंजरस आल्सो। तो यह

A Message from an Alien: We Do Not Know Our True Potential. Compare this with Vedantic wisdom.

तो एक बात है। दूसरी एक बात मैंने देखी कि डॉक्यूमेंट्री देखने के बाद में इसका जो डायरेक्टर है उसका एक पडकास्ट मैं देख रहा था। तो यह डायरेक्टर जो है वो और और कुछ एक्स्ट्रा बातें करता है जो कि उसने डॉक्यूमेंट्री में नहीं की। एक बड़ी इंटरेस्टिंग बात यह डायरेक्टर कहता है कि हम लोगों ने इस एयरक्राफ्ट पे अटैक किया है और उसको तोड़ गिराया है। कैसे? तो न्यूक्लियर एक्सप्लोजन से। तो मुझे तो यह बड़ा सरप्राइजिंग लगता है कि जो एयरक्राफ्ट स्पेस टाइम बबल के भीतर में है उसको किस तरह से न्यूक्लियर एक्सप्लोजन इफेक्ट कर सकता है। नहीं करेगा। किंतु खैर यह अभी इस तरह का दावा करता है डायरेक्टर कि हम लोगों ने न्यूक्लियर एक्सप्लोजन करके ऐसे कुछ-कुछ एयरक्राफ्ट को तोड़ गिराया है। यह तो एक बात उसने कही और दूसरा वेरी सरप्राइजिंग। वो कहता है कि जब इस तरह का एक एलियन एयरक्राफ्ट टूट के गिरा था तो हमारे कुछ सो हमारे यानी अमेरिका के अमेरिका के कुछ सोल्जर ना साइंटिस्ट उसको इंस्पेक्ट करने के लिए गए। तो वहां पे एक एलियन था। अभी एलियन ऑलमोस्ट मृत्यु के किनारे था। किंतु मरतेमरते उसने यह जो अपना ह्यूमन है उसके साथ में टेलीपथी से उसको इंफॉर्मेशन भेजा। टेलीपथी से उसको कुछ बात बताई। क्या कहता है पता है कि यू ह्यूमंस डू नॉट नो व्हाट इज योर पोटेंशियल। तो आप तो मानवजात आप लोग जो है मनुष्य आपको पता नहीं है कि आपका पोटेंशियल कितना है। व्हिच इज अभी देखिए कि यह कह रहा है डायरेक्टर इस डॉक्यूमेंट्री का। जब यह इस तरह की बातें करेगा तो अभी इस बात को सत्य कितना मानना, गलत कितना है, मिसइफ कितना है? कौन बता पाएगा? किंतु यदि देखिए कि यह पूरी कहानी में यह डॉक्यूमेंट्री में और इस पडकास्ट में यदि 1% भी सत्य है तो मनुष्य सभ्यता के लिए दिस इज वन ऑफ द ग्रेटेस्ट चैलेंज। देखिए कि अभी देखिए कि वेदांत की दृष्टि से रामकृष्ण विवेकानंद जो भावधारा है इसकी दृष्टि से इसको कैसे देखेंगे? सबसे पहले तो इसकी यह कमेंट से ही प्रारंभ करते हैं। यह एलियन हमको कहता है यह डायरेक्टर यह एज ऑफ डिस्क्लोज़र जो डॉक्यूमेंट्री है उसका जो डायरेक्टर है वह खुद यह बात बताता है। उसने कहीं यह सीक्रेट सोर्स से यह जानकारी उसको मिली है। यह एलियन कहता है कि यू ह्यूमंस डू नॉट नो व्हाट इज योर पोटेंशियल। तुम आदमियों को पता नहीं है कि तुम्हारा पोटेंशियल क्या है। तो ऑब्वियसली कि बहुत सारे लोगों को पता नहीं है। देखिए हम लोग जो कि ठाकुर को फॉलो करते हैं। हमारे लिए एक ऐसा एक सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन कहो ना कि एक ऐसा फिलॉसोफिकल पावर कहो ठाकुर के विज़ देखिए। अभी हमारा जो नॉर्मल इंफॉर्मेशन गैदर करने का या एक जनरल क्रिएटिविटी का जो माध्यम है वो है अपना ब्रेन या तो फिर अपना कॉन्शियसनेस। अभी ये कॉन्शियसनेस है इटसेल्फ लाइ विद इन द बबल ऑफ स्पेस टाइम। राइट? यह जो अपने चारों ओर जो स्पेस टाइम रूपी यह जो फोर डायमेंशनल यह है क्या कहेंगे? मीडियम उसी के भीतर में रहकर के ही तो अपना कॉन्शियसनेस कार्य करता है। किंतु वेदांत की दृष्टि से देखें तो हमारे पास में यह पोटेंशियल अवश्य है कि वी कैन ट्रांसेंड दिस बबल ऑफ स्पेस टाइम एंड वी कैन लर्न अबाउट थिंग्स व्हिच लाई बिय्ड आवर नॉर्मल परसेप्शन रेंज। अपनी इंद्रियों की जो जहां तक दौड़ जाती है। अभी देखिए हमारे जो टेलीिस्कोप है यह टेलीिस्कोप ज्यादा से ज्यादा कितना दूर देख पाते हैं। सबसे दूर का तारा हमने देखा है। तारा तो नहीं कहेंगे उसको वो गैलेक्सी प्रोटो गैलेक्सी जिसको कहते हैं। सबसे दूर की प्रोटो गैलेक्सी देखिए। आई थिंक हमने 13 की इतना बिलियन लाइट ईयर इतना दूर है। तो हमारे जो इंस्ट्रूमेंट है टेलीिस्कोप इतना दूर देख सकते हैं। अपने जो माइक्रोस्कोप है वो बहुत छोटे से छोटा चीज तो देख सकते हैं। तो वो भी हमने देख लिया। अपनी जो बुद्धि है क्रिएटिविटी जो साइंटिफिक हमारी अंडरस्टैंडिंग वो हमने प्लांक जो टाइम कहते हैं माने बिग बैंग के बाद में प्लांक एपोक था। उसके बाद में था ग्रैंड यूनिफाइड एपोक। तो यह अप टू ग्रैंड यूनिफाइड एपोक तक तो हमने कैलकुलेशंस करके कर लिया है कि इस तरह से कुछ हुआ होगा। प्लांक एपोक तक अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं। अभी तक अपनी थ्योरिटिकल सोफिस्टिकेशन इतना नहीं हुआ है। किंतु फिर भी यह सृष्टि के प्रारंभ में क्या था? सृष्टि में वर्तमान में क्या है? किस तरह से यह ग्रेविटी वगैरह जो है काम करता है? स्पेस टाइम कर्वेचर किस तरह से काम करता है? फ्यूचर क्या है यूनिवर्स का? वह क्लोज है ना कि ओपन है ना कि यह इनफाइनाइटली एक्सपेंडेबल है वगैरह देखिए कि क्वांटम डायनेमिक्स और थ्यरी ऑफ रिलेटिविटी और आजकल का यह जो है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एलएलएम तो देखिए कि यह सब हमने इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी से बहुत कुछ हासिल किया है आज हमारे पास में। किंतु हमको यह भी पता है जो लोग ठाकुर और यह वेदांत को फॉलो करते हैं कि अपनी जो कैपेसिटी है दैट गोस फार बिय्ड कि हम क्रिएटिव प्रोसेस से कितना जान सकते हैं। हम लोग यह जो अपना थ्योरेटिकल लिमिटेशंस है, यह अपनी ये जो इंद्रियों की लिमिटेशंस है, कर्मेंद्रिय हो ना कि ज्ञानेंद्रिय हो इससे परे जाकर के सब कुछ जान सकते हैं। खास करके देखिए ठाकुर के विज़ंस एक के बाद एक ठाकुर दर्शन देखते थे और उसमें ठाकुर को इस सब तरह की चीजें पता चलती थी जो कि हम अपनी इंद्रियों की क्षमता से या तो अपनी बुद्धि की क्षमता से कभी नहीं जान पाएंगे। वो एक एक इंसिडेंट है ठाकुर मिलने को गए हैं देवेंद्रनाथ टैगोर को। तो उसको कहते हैं कि तुम वेद में से कुछ बोल के सुनाओ। तो तो यह देवेंद्रनाथ है वेद में से एक उदाहरण देते हैं। तो अभी जो उदाहरण था तो ठाकुर कहते हैं कि अच्छा तब तो इस आदमी ने काफी स्टडी किया है क्योंकि वह जो उसने वेद में से जो पढ़ा है वो तो मुझे एक्चुअली विज़ उसका हुआ है। मैंने उसका दर्शन किया है। तो अभी देखिए कि ठाकुर जो वेद में बातें कही गई है नेचुरली वह जो बातें हैं ऋषि मुनियों ने अपनी क्रिएटिविटी या अपनी बुद्धि से तो नहीं खोज निकाली है। उन्होंने तो अपनी यह जो क्षमताएं हैं कॉन्शियसनेस की लिमिटेशन उससे परे जाकर के सुपरकॉन्शियस लेवल पर जाकर के इसको देखा है। डायरेक्ट दर्शन किया है। बोल करके उनको दिखा है। तो ठाकुर को भी यह सब चीजों का डायरेक्ट दर्शन हुआ था। तो यह एक कैपेसिटी है मनुष्य के पास में। यह जो एलियन कहता है ना कि तुम लोगों को अभी पता नहीं तुम्हारी पोटेंशियल क्या है? क्षमता क्या है? तो एटलीस्ट हम लोगों को पता है जो वेदांत और ठाकुर को फॉलो करते हैं कि हां यह जो कॉन्शियसनेस की लिमिटेशन जो है उसके परे जाकर के एक सुपर कॉन्शियस वर्ल्ड में हम प्रवेश कर सकते हैं। या तो फिर यह यह जो माया है या अज्ञान है अज्ञान के परे ब्राह्मण है और ब्राह्मण में स्थित होकर के हम इस पूरे वर्ल्ड को ट्रांसेंट कर सकते हैं। सो दैट सुपर पावर वी हैव गॉट यदि मान लीजिए कि

All the powers of good against all the powers of evil

कभी ऐसा एक मौका आ जाए कि एलियन हमारे पे अटैक करें नाउ दिस इज प्योर फेंटसी इन अ प्योर साइंस फिक्शन जो भी कहें कि एलियन यदि हमारे पे अटैक करें और उन लोगों के पास में नेचुरली कि वो कहां-कहां से वो स्पेसशिपिप लेके आएंगे हमारे से उनकी टेक्नोलॉजिकल एडवांस मान लीजिए हमारे से हजारों हजारों साल वे लोग टेक्नोलॉजिकली ज्यादा एडवांस है। उन लोगों के पास में इस तरह की वेपन सिस्टम है जो कि हम लोग जिसकी कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। इस तरह के एनर्जी सोर्सेस है जीरो पॉइंट एनर्जी कल मैं देख रहा था। तो इसके बारे में थ्योरेटिकली तो हमको पता है किंतु प्रैक्टिकल हमको कुछ ज्ञान नहीं है। तो इस तरह के एनर्जी सोर्स, इस तरह के एडवांस वेपंस, इस तरह के एडवांस स्पेसक्राफ्ट यह सब लेकर के एलियंस यदि आते हैं पृथ्वी पर हमला करने के लिए तो फिर हमारे पास में डिफेंस कहां पे है? वही होगा जो कि भारत के साथ में हुआ। जब यह हमारे राजा लोग थे, वह हाथी पर चढ़ के युद्ध करते थे। तो कहीं यह लोग सा अरेबिया से ना कि अफगानिस्तान से ये लोग कैनन ना बंदूक वगैरह लेके आए और जैसे ही बंदूक फोड़ा तो ऐसा जोर से आवाज हुआ कि यह हाथी जो है वो ऐसा उल्टा घूम कर के माने हाथी तो बेचारे डर गए तो ऐसा दौड़ा चालू कर दिया कि अपने ही सैनिकों को अपने पैरों के नीचे कुचड़ दिया। तो इस तरह से हम लोग यह छोटी-मोटी बंदूक लेकर के ना कि न्यूक्लियर वेपन लेकर के लड़ने को जाएंगे। वे लोग इतना थाउजेंड टाइम्स टेक्नोलॉजिकल एडवांस इस तरह के वेपंस एयरक्राफ्ट ले लड़ने को आएंगे। सो व्हाट इज आवर डिफेंस? हमारे पास में डिफेंस क्या है मनुष्य समाज के पास में? तो देखिए सबसे पहले तो स्वामी जी का एक स्टेटमेंट है। ऑल द पावर्स ऑफ गुड अगेंस्ट ऑल द पावर्स ऑफ इवल अर्थात कि यह जो इवल अर्थात कि यह अनिष्टकारी जितनी भी शक्तियां हैं उसके सामने इष्ट गुड अर्थात कि यह शुभ शक्तियां जितनी भी है, इष्ट शक्तियां जितनी भी है, उन सबको एक साथ में खड़ा रह के लड़ना है। ऑल द पावर्स ऑफ़ गुड अगेंस्ट ऑल द पावर्स ऑफ़ इवल। यह स्वामी जी का स्टेटमेंट है। सो, इट इफ़ इट इज़ पॉसिबल कि मनुष्य समाज आज पृथ्वी पे ये जो देश वगैरह में बंटा हुआ है, यह चाइना है, ना कि यह रशिया है, ना यह यूक्रेन है, ना ये इजराइल है। ये जो सब आपस आपस में लड़ते रहते हैं। तो हमारा जो आपसी वेयर है वो हम भूल जाए क्योंकि वही भारत के साथ में वही हुआ था ना डिवाइड एंड रूल। यह ब्रिटिश लोग एक राजा को कहते हैं कि दूसरे राजा को हराने में हेल्प करो। हम तुमको फिर तुम्ही को राजा बना देंगे। तो उसको अपने पक्ष में लेकर उसके साथ में युद्ध किया। आखिर में जीत गए और फिर जिस राजा ने सहाय की उसको भी मार दिया। तो देखिए कि ये डिवाइड एंड रूल भारत में बहुत हुआ है। इफ वी कैन लर्न फ्रॉम दिस। यह एलियन आ जाता है पृथ्वी पे और कहेंगे अमेरिका को कि ये चाइना को हराने में हेल्प करेंगे। फिर तुम लोग पूरी पृथ्वी पर राज करोगे। यह अमेरिकन मूर्ख लोग यदि यह बात मान लिए और एलियन के साथ में मिल गए तो तो फिर देखिए कि यह चाइना को जीतने के बाद में यह एलियन जो है यह अमेरिका को भी साफ कर देंगे। उनको क्या पड़ी है किसी को राजा बनाने की। तो मान लीजिए कि यह इतिहास से हम कुछ सीखें और सब एक साथ में इकट्ठा होकर के खड़े रहे। स्वामी जी ने अमेरिका से एक लेटर में लिखा था। वो अमेरिका में तो स्वामी जी पर बहुत अटैक हो रहे थे। तो मिशनरी है, यह वह है। तो स्वामी जी एक बार अमेरिका से लेटर लिख के अपने गुरु भाइयों को कहते हैं कि मैं पूरी दुनिया से लड़ सकता हूं। मुझे किसी का डर नहीं है। जब तक तुम लोग सब इकट्ठा होकर के मेरे पीछे खड़े हो तब तक मुझे किसी की चिंता नहीं है। तो वैसे ही यह इकट्ठा हो के लड़ना। दिस ऑल द पावर्स ऑफ गुड अगेंस्ट ऑल द पावर्स ऑफ इविल व्हिच इज वेरीेंट। सो यह पृथ्वी के ये जितने भी देश है, जितनी भी यह रेसेस है, जितनी भी ये लिंग्विस्टिक टाइप्स है, हम लोग आपस में झगड़ा छोड़ के एक साथ में इकट्ठा रह पाए, इकट्ठा खड़ा रह पाए। अ देन इट विल बी अ वेरी गुड थिंग फॉर अस कि म अदरवाइज देखिए कि आज आज आज पृथ्वी का भविष्य क्या है कि हम लोग ऐसा ना हो जाए कहीं कि आज से 50 100 साल के बाद में ये जो बड़े-बड़े देश हैं चाइना अमेरिका रशिया ईरान वगैरह वो आपस में लड़ना शुरू कर दे किसी पागल ने एक न्यू फेंका तो सामने वाले ने 10 फेंका तो उसने 20 फेंका तो इसने 100 फेंका खत्म पृथ्वी खत्म पे तो अभी देखिए ये पाकिस्तान का यूनिटी है। पाकिस्तान की यूनिटी के पीछे हाथ किसका है? तो यह इंडिया का है। इंडिया का डर दिखा करके ही तो पाकिस्तान अपने को यूनाइट कर पा रहा है। वरना आज इंडिया चला जाए तो ये पाकिस्तान है, सिंध है, पंजाब है, ये नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस है। उसमें कितना डिवाइड हो जाएगा? इंस्टेंटली डिवाइड हो जाएगा। पाकिस्तान को इकट्ठा करने के पीछे यह इंडिया ही कारण भूत है। एक बाहर से बहुत बड़ा डर हमको जब दिखता है तब हम इकट्ठा खड़े रहते हैं। सो ये एलियन का एग्जिस्टेंस यदि है एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस का देन इट कैन बी अ बून फॉर अस इन वन वे कि हम लोग 10 बार सोचेंगे कि भाई एटम बम एक दूसरे पे डालने की बजाय 10 बार सोचो। ऐसा ना हो जाए कि हम लोग आपस में लड़ के कमजोर हो जाए। फिर यह एलियन आकर के हम पर राज करना शुरू कर दे। सो दैट इज वन यू कैन से पॉजिटिव आउटकम वी कैन इमेजिन। तो वो तो एक है। दूसरा है कि

Powers of mind - science of Prana - to fight against the aliens

यदि वो आ जाते हैं हम लोग इकट्ठा होकर के लड़ते भी हैं देन व्हाट वेपन विल वी हैव? ऐसा कौन सा शस्त्र है जिससे कि हम लड़ पाएंगे। ऑब्वियसली न्यूक्स काम नहीं करने वाले हैं। क्योंकि यदि जो सिविलाइजेशन स्पेस टाइम बबल बना सकती है वे लोगों के सामने किसी भी तरह का एनर्जी वेपन या मटेरियल वेपन काम नहीं करेगा। सो कौन सा वेपन काम करेगा? तो अगेन यहां पर यह वेदांत जो है यह जो स्वामी जी का राजयोग हमको यह सिखाता है और राजयोग में हमने स्पष्ट देखा कि आकाश और प्राण का थ्यरी जितना भी मैटर है वह सब आकाश में से प्रकट हुआ है और फोर्सेस और एनर्जी जो भी है सब प्राण में से प्रकट हुई है। यदि हम प्राण को कंट्रोल करना सीख लें देन इन टर्न विद द पावर ऑफ दिस प्राणायाम वी कैन कंट्रोल एव्री मैटर इन द यूनिवर्स। स्वामी जी कहते हैं यह ग्रह नक्षत्र जो है आकाश में उसकी गति को परिवर्तित कर सकते हैं। तो मान लीजिए कि यदि प्राणायाम या तो प्राण के विज्ञान को समझ करके हमने ऐसी कोई पावर डेवलप कर दी कि जब इन लोगों के एकदम हाई टेक एडवांस स्पेसक्राफ्ट है या तो एनर्जी वेपन से वह हमारे सामने आए तो यहां पे वह इस तरह के कुछ फाइटर बैठे होंगे दे कैन एबल टू फाइट विद देयर माइंड। तो यह लोग होंगे जो कि अपने माइंड से ही प्राण की शक्ति को कंट्रोल करके ही इनके यह जो एनर्जी वेपन्स है एलियन के या तो इनके जो स्पेसक्राफ्ट है उसको तोड़ दें व्हिच इज एंटायरली पॉसिबल। देखिए कि रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में थोड़ा सा आप जाएंगे तो सभी चीजों का उत्तर आपको मिलना शुरू हो जाएगा। यह एक बात है कि क्या ठाकुर ने ऐसा कुछ देखा था कि पृथ्वी पर ही सिर्फ जीवन नहीं है। दूसरे भी ग्रह पर है। आई डू नॉट नो कि मैंने मुझे ऐसा ऑफ द टॉप ऑफ माय माइंड मुझे याद नहीं आ रहा है। अभी उन्होंने देखा भी होगा। उन्होंने देखा बहुत कुछ। राइट? हमको यह पता है कि ठाकुर जब काशीपुर में ही थे मोस्ट प्रोबेबबली उस समय उन्होंने बात करना बंद कर दिया। एक दिन एकाएक तो फिर तो और कैंसर है तो मृत्यु के पास में खड़े हैं और यहां पर बात करना बंद कर दिया है। तो सब लोग तो बड़े ही दुखी हो गए। मां ठाकुर के कमरे में आकर के रो रही है। फिर बहुत देर के बाद में ठाकुर ने अपना मौन तोड़ा और मौन भंग करने के बाद में कहते हैं कि देखो मैं एक ऐसे देश में गया था वहां पर सब गोरे-गोरे लोग हैं और वे लोग और वहां पे मुझे मेरी पूजा हो रही है। तो मां सोचती है कि ये इस तरह का तो कैसा देश होगा जो कि गोरे लोगों का होगा। हालांकि कोलकाता में रहने वालों को तो पता होना ही चाहिए कि ये गोरे लोग जो है ब्रिटिश लोग उन लोगों का एक देश तो होगा ही होगा। किंतु खैर मां का अभी क्या है कि ये जियोलॉजिकल नॉलेज मां का कितना होगा पता नहीं। किंतु मां खुद कहती है कि यह जब निवेदि निवेदिता जब मां के पास में आई निवेदिता फिर मिज ओलीबुल जोसेफाइन मेकलाउड मां कहती है कि तब मुझे पता चला कि अच्छा यह लोग ठाकुर को इतनी भक्ति करते हैं तो ठाकुर ने वो जो कहा था कि मैं एक ऐसे देश में गया हूं जहां पर सब गोरे लोग रहते हैं और मेरी इतनी भक्ति करते हैं तो वो बात अभी सत्य लगी कि हां ठाकुर क्या बोलना चाहते थे अभी मुझे पता चला तो मां ने खुद यह बात कही है सो इट इज एंटायरली पॉसिबल कि यह यदि ठाकुर कोलकाता में बैठकर के ब्रिटेन का या अमेरिका का दौरा कर सकते हैं तो हो सकता है कि उन्होंने दूसरे ग्रह पे जीवन है कि नहीं उसके बारे में उनको पता होगा क्योंकि अल्टीमेटली देखिए यह दूसरा एक बहुत इंपॉर्टेंट बात यहां पे क्या है पता है फिजिकल टेक्नोलॉजी जहां तक बात है फिजिक्स की जहां तक बात है वो मटेरियल साइंस जो है वो जिस तरह से पूरे विश्व ब्रह्मांड में सिमिलर है वो एलियन ऐसा नहीं नहीं है कि दूसरे तरह के फिजिक्स पे काम करते हैं। बात वही है कि उन लोगों के पास में जो साइंस है बड़ा ही एडवांस है। किंतु साइंस वही तो है ना जो कि हमारे पास में है। हम लोग भी साइंस को एडवांस आज से 100 साल पहले देखिए कि घोड़ा गाड़ी पे लोग चलते थे। आज हमारे पास में स्पेसक्राफ्ट है। इवन भारत जैसा भारत भी आज मंगल पे एक स्पेसशिपिप भेज रहा है। तो 100 साल में ही देखिए कि हम लोगों ने कितना एडवांसमेंट किया है। और 100 200 साल में हम और कितना एडवांसमेंट करेंगे। ये किसको पता आज से 5 साल पहले कोई ऐसा कहेगा कि एआई जो है वह डेवलप हो जाएगा और पृथ्वी के ज्यादातर लोग एआई को यूज करते होंगे तो हम तो इस बात पे हंसना ही शुरू कर देते हैं ना किंतु आज देखिए कि विदिन फाइव ईयर हम लोग कहां से कहां पहुंच गए हैं एआई के फील्ड में तो ऐसा हो सकता है एंटायरली पॉसिबल कि आज से 100 साल के बाद में 50 साल के बाद में आज के जो एलियंस के पास में टेक्नोलॉजी है वो हमारे पास में आ जाए। सो जिस तरह से फिजिक्स जो है वो यूनिवर्सल है तो वेदांत भी तो यूनिवर्सल है। अभी वेदांत क्या कहता है देखिए कि यहां पे है ब्रह्मन फिर ब्राह्मण में माया का आवरण होने से यह सगुण ब्रह्मण या तो फिर ईश्वर का प्रागट्य हुआ फिर ईश्वर में से ही यह सृष्टि का जो प्रारंभ होता है। हम लोग जो है हमारे भीतर में जो आत्मन है वह व्यष्टि अज्ञान में से प्रकट हुई है और ईश्वर जो है वह समष्टि अज्ञान का आवरण होने से प्रकट हुए हैं। तो हमारे भीतर का जो व्यष्टि अज्ञान है उसको भी हम तोड़कर के आत्म साक्षात्कार कर सकते हैं और इतना ही नहीं यह समष्टि अज्ञान से प्रकट हुए जो ईश्वर है ईश्वर के साथ में वार्तालाप भी कर सकते हैं। तो ठाकुर ने जिस तरह से ईश्वर के साथ में वार्तालाप करके मां काली के पास में से इतना जो सब कुछ सीखा दैट गिव्स अस अ होप कि कहीं जाकर के यह इंटर सिविलाइजेशनल प्लेटरी वॉर यदि चालू हो जाए या पृथ्वी के सामने और 101 ग्रह इस तरह से चालू हो जाए तो ऐसा नहीं है कि हम लोग बिल्कुल हेल्पलेस है। हमारे पास में देखिए कि वेदांत है। वेदांत का हम यदि सही-सही इस्तेमाल करें तो इट विल गिव अस सच अ स्ट्रेंथ। आज प्राणायाम का विज्ञान है, प्राण का विज्ञान है। यह जो ठाकुर के विजंस जो थे, इसकी यह जो सब क्षमताएं थी कि पृथ्वी पर बैठकर के अपनी जो नॉर्मल कॉन्शियसनेस है, उसकी सीमाओं के परे जाकर के सुपर कॉन्शियस स्टेट में प्रवेश करके उन लोगों की जो ग्रह है वहां पर जाकर के हम लोग विजिट कर सकते हैं। और वे लोग क्या कर रहे हैं, क्या नहीं कर रहे हैं, वह हम देख सकते हैं और हो सकता है कि उन्हीं के बीच में डिवाइड एंड रूल करने का प्रयास कर सकते हैं। ऑल ऑफ दिस इज़ एंटायरली पॉसिबल इफ वी कैन डेवलप वेदांत एज ए साइंस। तो क्या है कि मेरी दृष्टि से तो भारत का आज का जो परिस्थिति है, हमको वेदांत को एज ए साइंस के रूप में डेवलप करना होगा। और यह बात सिर्फ भारत की स्ट्रेंथ के लिए ही नहीं पूरी पृथ्वी के लिए आवश्यक है। क्योंकि हम सिर्फ टेक्नोलॉजी से यह एलियंस का मुकाबला नहीं करने वाले हैं। नहीं कर पाएंगे। वी नीड समथिंग मोर देन टेक्नोलॉजी। सो व्हाट इज दिस मोर देन टेक्नोलॉजी? सो दैट इज वेदांत। वेदांत को सीख करके यह वेदांतिक स्किल जो है इफ वी कैन यूटिलाइज देम एज वेपंस। अभी यह रामायण और महाभारत का यह युद्ध आप देख लीजिए। यह ब्रह्मास्त्र वगैरह क्या थे? सिर्फ आप एक तीर के एक धनुष के ऊपर में तीर बांध करके छोड़ेंगे। उसमें थोड़ी ना ऐसी कोई शक्ति आ जाने वाली है जो कि यह आधी सभ्यता का सफाया कर दे। यह ब्रह्मास्त्र है। यह सुदर्शन चक्र है। पाशुपथ अस्त्र है। यह जो जितनी भी यह सब यह मंत्र है। यह जिस तरह के आयुध है, जिस तरह के औजार है, यह इंद्र का यह जो वज्र है, यह सब का जो वर्णन हमको मिलता है शास्त्र में, वह कहां से आया? वह तो सब वेदांत की शक्ति से ही और मोर टेक्निकली यदि कहे स्वामी जी की लैंग्वेज में कि प्राण की शक्ति से ही तो यह सब डेवलप हुआ है। तो यदि प्राण की शक्ति को यूज करके हम सिर्फ अपना आध्यात्मिक जीवन ही नहीं अपने खुद के बचाव के लिए भी हम यूज कर पाए तो यह समय आ चुका है क्योंकि अगेन यह जो मैंने देखा और आप लोग भी देख

Humanity Must Unite Against Alien invasion

पाएंगे थोड़ा सा सर्च करेंगे कि यह क्या है सब दूसरे ग्रह से मनुष्य का या तो फिर दूसरे ग्रह के निवासियों का पृथ्वी पर आना इस बात के भीतर में यदि 1% भी सत्य है। तो इसको बहुत ही सीरियसली हमको लेना चाहिए। आजकल हम जिस माइंडसेट में जीते हैं उस माइंडसेट को संपूर्ण रूप से त्याग कर देना चाहिए। कल मैंने यह डॉक्यूमेंट्री देखा यह एज ऑफ डिस्क्लोज़र और इसके बाद में इंडिया में जो सब चल रहा है, मैं यह सब न्यूज़ देख रहा हूं। मैं तो एकदम हताशी हो जाता हूं। यह कहां यह मंडल कमंडल और यह हिंदू मुस्लिम और यह यह पॉलिटिकल पार्टी और वो पॉलिटिकल पार्टी और यह टेररिस्ट अटैक ना कि क्या कौन से जमाने में हम लोग जी रहे हैं यदि माने ये उस समय भी ऐसा ही हुआ था। म जो भारत पे जब विदेशी आक्रमण चालू हुए थे हम भी लोग ये नात जात की ये जो उसमें ऐसा फंसे हुए थे स्वामी जी कहते हैं ना कि ये दाएं हाथ से ये पानी पीना है ना कि बाएं हाथ से ये सर के ऊपर में तिलक लगा रहे हैं वो सीधा करके लगाना है कि टेढ़ा करके लगाना है यह जो शंख चक्र गदा पद्म पद्म चक्र शंख गदा स्वामी जी कहते हैं ऐसा ही करते रहे हैं हम लोग और इसी में यह विदेशी आक्रमणकारी है हम पे आक्रमण करके हमको गुलाम बना करके करके हमारा शोषण कर रहे हैं और शोषण होने के बाद में भी हम लोगों को अकल नहीं आती। ये पता नहीं ये भारतीय लोगों का क्या डीएनए है कि [हंसी] हजार साल की गुलामी के बाद में भी हम लोगों को ये अकल नहीं आती कि यह सब चीजों को ट्रांसेंड करके नेशनल रिजुइनेशन जो है भारतीय जो शक्ति है उसको कहां से कहां ले जाना है। किंतु ऐसा नहीं करके हमेशा हमेशा से हमारी यही एक प्रॉब्लम कि आपस में झगड़ो आपस में लड़ो आपस में एक दूसरे को काटो। स्वामी जी कहते हैं ना वही मजूमदार अमेरिका गए तो देखा कि ये पहले तो यह मजूमदार था ब्राह्म समाज का उसने तो पहले तो सोचा अच्छा ठीक है ये कोलकाता का लड़का है थोड़ा बहुत पहचान वाला है तो ठीक है आया है तो आया है किंतु जैसे ही स्वामी जी को सफलता मिली फिर यही मजूमदार स्वामी जी की निंदा करने के लिए चालू कर दिया यह जो हम इस सप्ताह जो देखेंगे स्वामी जी का माय प्लान ऑफ कैंपेन लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा में से देखिए स्वामी जी ने प्रारंभ में ही कहा ये जितनी भी रिफॉर्म सोसाइटी वाले वाले हैं। यह थियोलॉजिकल सोसाइटी वाले हैं। यह ब्राह्म समाज का यह मजूमदार है। इन लोगों ने क्या किया है? प्रत्येक क्षण प्रत्येक पग फुटस्टेप पे मेरे रास्ते में उन्होंने विघ्न खड़ा करने के अलावा और कुछ नहीं किया है। ना ही मुझे हेल्प की है। हेल्प तो नहीं की। बस मेरे रास्ते पर विघ्न खड़ा किया है। तो यह जो अपना माइंडसेट है कि अपना एक भाई अच्छा कर रहा है। ईर्ष्या स्वामी जी कहते हैं कि भारत का एक जो बहुत बड़ा प्रॉब्लम वो है ईर्ष्या। आज कोई भी कुछ भी अच्छा कर रहा है तो उसको तोड़ने के लिए उसकी निंदा करने के लिए उसका चरित्र हनन करने के लिए सब लोग होकर तैयार हो जाएंगे। क्यों? क्योंकि वह हमसे आगे निकल जाएगा तो फिर हम लोगों का क्या होगा? वो माने यह जो इनसिक्योरिटी है, जेलसी है, यह सब हम लोगों के डीएनए में इतना डीपली चला गया है। तो अब सोच के देखिए कि ये सिर्फ ये इस्लामिक अटैक ना कि ये ईस्ट इंडिया कंपनी का अटैक उसमें ही हमको इतना सहन करना पड़ा। तो यह दूसरे ग्रह से यह जो आ जाएंगे लोग जो कि मनुष्य भी नहीं है। मनुष्य के भीतर में तो क्या है ना फिर भी थोड़ा बहुत सिंपथी होता है। ऐसे कितने ही सारे इस्लामिक संत है। ऐसे कितने ही सारे सहृदय ब्रिटिशर्स थे जो कि हमारे मित्र थे। स्वामी जी ने खुद ने कहा है ना कि मैं जब कोलकाता में था मैं भारत में जब तक था यह ब्रिटिश लोगों के सामने में देख भी नहीं पाता था। इतना द्वेष था मेरा इन लोगों के ऊपर में। किंतु जिस क्षण मैंने ब्रिटेन की मुलाकात ली लंदन जाकर के ब्रिटिशरों से मिला उनके खुद के घर में तो इन लोगों के प्रति मेरा रिस्पेक्ट और बढ़ गया है। क्यों? क्योंकि यह बड़ा ही हार्ड वर्किंग प्रजा है और आपस में डिबेट तो करते हैं किंतु एक बार जब ठीक किया कि एक काम को सब लोग साथ में मिलकर करेंगे और यह हमारा लीडर रहेगा तो फिर बिना किसी क्वेश्चन के यह लीडर को ओबे करेंगे। तो यह जो सब टीम वर्क और लीडरशिप डेवलप करने की उनकी कैपेसिटी है, ऑनेस्टी है इन लोगों में यह जो साहस है, करज है, ये सब चीजों को देख के मैं कितना प्रभावित हो गया हूं। यह बात स्वामी जी इसी ब्रिटिशरों के बारे में कहते हैं। तो देखिए कि यह मुस्लिम थे ना कि यह ईस्ट इंडिया कंपनी वाले थे। थे तो मनुष्य ही थे तो इंसान ही। हमारे साथ में यदि हमारा शोषण भी किया है तो हमारे साथ में मित्रता भी की है। हमको एक तरह से हमारे हाथ से हमारे से छीना है तो दूसरे हाथ से दिया भी है। किंतु यह जो एलियन है जिसके साथ में हमारा कहीं पे किसी भी तरह का कोई भी एक कल्चरल लिंग्विस्टिक ह्यूमैनिटी ह्यूमेनिस्टिक कांटेक्ट नहीं रहने वाला है। वे लोग यदि शोषण करेंगे तो हमको पूरा खत्म ही कर देंगे। सो यह जो समय है आज हम जिस क्रॉस रोड पर खड़े हैं मुझे ऐसा लग रहा है कि वी शुड फॉरगेट ऑल दिस अपना जो छोटा-मोटा झगड़ा वगैरह है और और सिर्फ भारत ही क्यों दुनिया के जितने भी देश हैं सबको अभी इकट्ठा हो के अपने ये जो छोटे-मोटे झगड़े हैं उसको भूल करके हम सबको एक साथ में कुछ ना कुछ डेवलप करना होगा। यदि यह बात सच है क्योंकि इवन 1% भी ये सब चीजों में सच होगा तो भी देखिए कि हमारे सामने कितना बड़ा खतरा है। आज वो हमारी न्यूक्लियर साइट पे आकर के हमारी अर्थात कि अमेरिका की ये तो अमेरिका की न्यूक्लियर साइट पर खड़े रह के यह एलियन है। वो उनके न्यूक्लियर वेपन है। उसको वह कंट्रोल कर सकते हैं। तो यह लोग और क्या नहीं कर सकते? तो दैट इज भविष्य को हमको सोचना होगा। यदि इस बात में थोड़ा सा भी दम है तो तो यह सब मैं कल सोच रहा था कि कहां देखिए कि यह अनंत आकाश है ब्रह्मांड है। इस ब्रह्मांड में कितनी पॉसिबिलिटीज है। इतना सब कुछ है जिसके कि बारे में अभी तक हम लोगों ने कुछ सोचा ही नहीं है। यह जो दिन प्रतिदिन के झगड़े ये दिन प्रतिदिन के हमारे द्वेष ईर्ष्या ये सब जो है उसी को लेकर हम लोग बैठे हुए हैं। यदि हम लोगों के पास में एक विज़न नहीं होगा ना तो सही में कि सभ्यता को आगे बढ़ाना मुश्किल

Humanity Must Unite Against runaway Technological Threats

है। आज का ये एआई को ही देखिए ना एआई जिस तरह से डेवलप हो रहा है देखिए कि कहीं ये एआई ही अपने से एक सेंशिएंट ना हो जाए। ऐसे बहुत सारे साइंस फिक्शन स्टोरीज आपने पढ़ी होगी कि ये एआई है। उसमें खुद वो सेंशंट कॉन्शियस हो गया है। अर्थात कि उसमें एक सेल्फ अवेयरनेस आ गई है। और फिर उसने यह सोच लिया कि मनुष्य जो है वही है विकास में एक बाधा के रूप में क्योंकि मनुष्य तो इररेशनल है। तो मनुष्य को ही पहले मार दो और हम ही लोग फिर पृथ्वी पर राज करेंगे। तो एआईबी एक थ्रेट है। यदि हम उसको ठीक-ठीक कंट्रोल नहीं करेंगे तो। सो और भी देखिए कि मॉडर्न जो सब इनोवेशंस डेवलपमेंट हो रहा है जेनेटिक साइंस है ये जेनेटिक मॉडिफिकेशन जो है व्हिच आर सो डेंजरस एंड सो एक्साइटिंग आल्सो कोई भी टेक्नोलॉजी है इसका सदुपयोग भी कर सकते हैं दुरुपयोग भी कर सकते हैं अभी जेनेटिक टेक्नोलॉजी आपने एक बार समझ लिया कि यह जीन है यह जीन है आंखों का कलर बदल सकता है तो मैं अभी मुझे एक तरह तरह इस तरह का बच्चा चाहिए जिसकी आंखों का कलर ब्लू हो। तो मैंने डॉक्टर को जाकर कहा कि यह मेरा डीएनए है तो यह डीएनए में से इस तरह के मॉडिफिकेशन कर दो कि ब्लू आई बच्चा मुझे मिले। तो अभी तक तो यहां तक तो पहुंचे हैं। अभी बाद में ऐसा हो रहा है कि बचपन में ये डीएनए के भीतर में ही हम लोग देख लेते हैं कि ये भविष्य में इसको कैंसर होने वाला है कि नहीं। कैंसर का जीन यदि है जो कि वारसा में आता है तो उस कैंसर के जीन को काट दो। उसको मॉडिफाई कर दो। तो यह यहां तक पहुंचे हैं। कल हम कहेंगे कि यह इंटेलिजेंस का यह जेनेटिक सीक्वेंस है। तो मुझे इस तरह का बच्चा चाहिए जो कि सुपर इंटेलिजेंट हो। तो इस तरह से मुझे मॉडिफाई करके दो। अच्छा ठीक है। इस तरह के सुपर इंटेलिजेंट बच्चे को जन्म तो दिया किंतु फिर वो क्या सोच रहा है? क्या नहीं सोच रहा है? क्या करेगा भविष्य में बड़ा हो के? मोरालिटी यदि नहीं है, सिर्फ इंटेलिजेंस है तो फिर तो काम नहीं बनेगा। और क्या मोरालिटी के जींस होते हैं? वी डू नॉट नो। इंटेलिजेंस के जीन हो सकते हैं। वो समझ सकते हैं। किंतु मोरालिटी और एथिक्स के जीन होते हैं क्या? वी डू नॉट नो। सो इन एब्सेंस ऑफ़ मोरालिटी यदि आप किसी को हाइपर इंटेलिजेंस दे देंगे तो वो अपनी इंटेलिजेंस के साथ में क्या करेगा? हु नोस ऑल ऑफ दिस एडवांसमेंट आजकल जो हम देख रहे हैं अभी किसी ने एक जगह पे मैंने पढ़ा कि आज के जो पब्लिश्ड जो एआई मॉडल है जीपीटी 5.1 कि ये जो जेमिनी 3 जो भी आजकल जो फ्रंटियर लेवल के पब्लिश्ड एआई मॉडल तो ये तो उन्होंने जनरल पब्लिक के लिए दिए हैं व्हिच इटसेल्फ्स लुक्स सो एडवांस। अभी वे लोग अपनी खुद की लैब में कितना एडवांस मॉडल के साथ में वह काम करते होंगे किसको पता जिसको कि उन्होंने अभी तक हमको रिलीज नहीं किया है पब्लिक में तो उनके खुद के जो सीक्रेट मॉडल होंगे वो कितने एडवांस होके जस्ट इमेजिन सो [हंसी] म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ये फिर ये जेनेटिक मॉडिफिकेशन फिर ये जो एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस दीज़ आर टॉपिक्स दीज़ आर सब्जेक्ट्स कि जिसके ऊपर में हमको सोचना चाहिए चाहिए और देखिए अगेन जो लोग

Vedanta: a path to transcend societal and human limitations

ठाकुर को ठाकुर मास्वामी जी को वेदांत को फॉलो करते हैं हमारे पास में वह फ्रेमवर्क है यह सब समझने के लिए ये सब का उत्तर देने के लिए ठाकुर के विज़ ये स्वामी जी का प्राण का जो विज्ञान है यह जो स्पिरिचुअल पावर जो हमारे पास में है हमको पता है कि कॉन्शियस लेवल की क्या लिमिटेशन है। हमको पता है कि किस तरह से सुपरकॉन्शियस लेवल पे जा सकते हैं और सुपरकॉन्शियस लेवल पे जाकर के ये जो इंटेलेक्चुअल और ये जिस तरह का क्रिएटिविटी और इंटेलिजेंस और इसका जो एक बहुत बड़ा जो भंडार है वो हमारे सामने इस तरह से खुल जाएगा कि हम कोई भी एडवांस सिविलाइजेशन है एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल सिविलाइजेशन उसको साथ में हम फाइट कर सकते हैं। वी कैन फाइट विद देम ऑन अ लेवल प्लेइंग ग्राउंड। सो दिस टेक्नोलॉजीस आर अवेलेबल विद अस राइट नाउ भारत में है। हजारों सालों से ये ऋषि मुनियों ने हमको दी हुई है। सो व्हाई नॉट टू स्टार्ट यूजिंग दैट हमारी एजुकेशन सिस्टम को फंडामेंटली चेंज करना होगा। वेदांत है योग है बिल्कुल फ्रॉम द किंडरगार्डन इटसेल्फ हमको इंप्लीमेंट करना होगा। तभी तो कहीं जाकर के बच्चा अब आजकल क्या सीखते हैं ये बड़े होकर के? ज्यादातर ये जो ग्रेजुएट होते हैं अनइंप्लॉयबल है। बेचारे को ग्रेजुएशन की झूठ-मूठ की डिग्री मिली है। वो किसी काम की नहीं है। और ये एआई फिर ज्यादातर लोगों को अभी देखिए कि ये एआई की वजह से जो ये कंपनी में से इंजीनियर को निकालना शुरू किया है। वो देखेंगे कि अनइंप्लॉयमेंट अभी विदेश में भी बढ़ने वाला है। तो भारत में तो क्या होगा पता नहीं। ऑलरेडी हमारे जो एडवांस इंजीनियर थे अमेरिका जाते थे नौकरी खोजने के लिए। अभी अमेरिका ने अपना दरवाजा बंद कर दिया है। तो कहां जाएंगे हम लोग? तो वी हैव दैट पावर टू ट्रांस द लिमिटेशंस ऑफ मॉडर्न साइंस, मॉडर्न टेक्नोलॉजी, मॉडर्न थिंकिंग सिस्टम, मॉडर्न पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिकल फ्रेमवर्क इसको ट्रांसेंट करके वी कैन कंस्ट्रक्ट समथिंग फार बेटर। दैट पावर वी हैव। किंतु ये जो अवेयरनेस है, अवेयरनेस कब आएगी? आई डू नॉट नो। मैंने कभी-कभी मुझे ऐसा फ्रस्ट्रेशन जैसा लगता है कि कहां पे न्यूज़पेपर में ये सब न्यूज़ आ रहा है भारत के न्यूज़पेपर में और कहां पे ये जो एडवांस सब थिंकिंग हमारे पास में पड़ा हुआ है। व्हाई कैन नॉट वी यूज़ दैट वेदांत व्हाई कैन नोट वी ट्रांसफॉर्म आवर लाइफ व्हाई कैन नॉट वी ट्रांसफॉर्म आवर नेशन व्हाई कैन नॉट वी ट्रांसफॉर्म ट्रांसेंड आवर सिविलाइजेशन लिमिटेशंस आई डू नॉट नो कि व्हाट इट विल टेक माने वो 1000 साल गुलाम होने के बाद में हम लोगों में थोड़ी बहुत अकल आई और ये जो अपना ये जो इंडिपेंडेंस मूवमेंट है वो हमने सब भारतीयों ने इकट्ठा होकर के फाइट किया गांधी जी के वो लीडरशिप में। सो बट इट टूक अस 1000 ईयर ऑफ स्लेवरी। पता नहीं कि वो फिर से ऐसा कौन सा लीडर प्रकट होगा और और कितना ही हमको सफर करना पड़ेगा कि हम सभी लोग अपने जो छोटे-छोटे ये जो डिफरेंसेस है इसको भूल करके फॉर द सेक ऑफ नेशनल रिजुमिनेशन सब कुछ फेंक करके अपनी पूरी एनर्जी लगाए एक ऐसा एक फ्रेमवर्क बनाए पॉलिटिकल सोशल इकोनॉमिकल एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाए एजुकेशन सिस्टम एक इस तरह से क्रिएट करें व्हिच कैन टेक अस आज जो भारत की परिस्थिति है यह $3000 पर कैपिटा जो अपना जीडीपी है उससे कहां हमको ऊपर ले जाए। ऑल दिस पोटेंशियल वी हैव। किंतु जैसे स्वामी जी ने कहा ना कि इंडिया हैज़ द ग्रेटेस्ट ऑफ़ फिलॉसोफी बट द वर्स्ट ऑफ इंप्लीमेंटेशन। तो कब हम इस नींद से जगेंगे? आई डू नॉट नो। ऐसा एलियन का एक दो अटैक होना चाहिए। तो फिर थोड़ा हम हो सकता है कि नींद से जग पाए। सो दैट इज मैं ये सब सोच रहा था। और फाइनली वन लास्ट थिंग

Ma Sarada says there are no aliens. We humans are alone in the universe.

मां की बात किसी ने अरूपानंद जी मोस्ट प्रोबेबबली मां को पूछा कि मां यह तो इतना बड़ा विश्व ब्रह्मांड है। इतने बड़े विश्व ब्रह्मांड में कितने ही ग्रह हैं। कितने ग्रहों पे कितने तरह के लोग किस तरह का जीवन होगा किसको पता? तो मां सुन रही है। जय राम भाटी की बात है। तो मां सब सुन रही है। फिर सुनने के बाद में धीरे से कहती है कि बेटा वो जितने भी ग्रह है कहीं पे कुछ भी जीवन नहीं है। जीवन है तो सिर्फ पृथ्वी पे है। तो व्हिच इज मदर्स इनपुट इन दिस एंटायर डिबेट। अभी देखिए कि बहुत बार हम लोग सोचते हैं। मैंने कहा था ना कि मैं किसी के साथ वेदांत के बारे में बात कर रहा था। मैंने कहा वो मां का वो लेटर है ना मां कहती है कि ठाकुर अद्वैत थे तुम लोग भी अद्वैतवादी हो। तो मुझे ऐसा उत्तर मिला था कि मां को फिलोसोफी थोड़ी ना आती है। मां के लेटर को सीरियसली लेने की जरूरत नहीं। आई डू नॉट नो कि किस तरह का थिंकिंग उनका है। मां को ना ही एस्ट्रोफिजिक्स आता है। ना ही कॉस्मोलॉजी आती है। ना ही ये मॉडर्न साइंस और टेक्नोलॉजी मां ने कैसे बोल दिया कि दूसरे ग्रह पे जीवन नहीं है। तो इट इज ऑल अपनी श्रद्धा पे है कि मां को कितना सीरियसली लेना। क्योंकि एक ओर यह सब हो रहा है तो दूसरी ओर मां की यह बात है और बहुत सारे स्पेककुलेशन भी है। कोई कहता है कि दूसरे ग्रह से नहीं आकर के यह इंसान ही है। भविष्य में से टाइम ट्रैवल करके पास्ट में आए हैं। तो किसको पता कि व्हाट इज इंटरडाइमेंशनल ट्रैवल है कि इंटर गैलेक्टिक ट्रैवल है ना कि यह टाइम ट्रैवल है। व्हाटएवर इट इज़। यदि इन सब चीजों में 1% भी तथ्य है तो बहुत ही सीरियसली इसके बारे में इन्वेस्टिगेशन होना चाहिए। लोगों को प्रश्न करने चाहिए कि क्या है गवर्नमेंट इसका उत्तर दे। सो ओके। सो अभी नेक्स्ट कल से हम देखेंगे स्वामी जी का यह माय प्लान ऑफ कैंपेन और मैंने कुछ यह बनाए हैं स्लाइड्स बनाई है तो अभी हम इसको कल देखते हैं। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु

प्रश्न: एलियंस और स्वामीजी—दोनों एक बात पर सहमत हैं: मनुष्य अपनी शक्ति को नहीं पहचानता

एक एक्चुअली क्या है पता है? मैंने जब यह डॉक्यूमेंट्री देख रहा था ना तो अभी देखिए ये न्यूज़ तो काफी समय से चल रहा है। वो जो TikTok वीडियो वगैरह जो है ये काफी समय से चल रहे हैं। तो थोड़ा बहुत तो हम सबको पता ही होगा जो लोग न्यूज़ देखते हैं। प्रॉब्लम क्या हुआ पता है? और ये डॉक्यूमेंट्री अच्छे से उन्होंने बनाया है। वो सभी ऑथेंटिक सोर्सेस को लिया है। अमेरिकन गवर्नमेंट में जितने भी ये सेनेटर ये सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट वगैरह के इंटरव्यू वगैरह। सो बहुत ही ऑथेंटिक लगता है। किंतु जब मैंने इसका डायरेक्टर का पॉडकास्ट देखा और यह फिर डायरेक्टर यह कह रहा है कि मैंने ऐसा सुना कि ये लोग हमारे से टेलीपथी से बात करते हैं और ऐसा कहते हैं तुम लोगों का बहुत पोटेंशियल है। फिर मुझे सडनली डाउट होने लगा। मैंने कहा यार ये कहां से आ गया? [हंसी]

प्रश्न: हम आपको निःशब्द होकर सुन रहे थे. सच कहें तो aliens के विषय में सोचने की हमारी कोई वैचारिक पृष्ठभूमि नहीं है

ना देखिए कि आज से हजार साल पहले यही हुआ था ना। हम लोग अपने छोटे जगत में ऐसे डूबे हुए हैं। यह जब आक्रमण होना शुरू हुआ तो कौन है यह लोग कहां से आए हैं? क्यों हम पे आक्रमण करें? समझ में ही नहीं आ रहा है। समझते समझते सीधे गुलाम हो गए। सो सेम थिंग टुडे

प्रश्न: वेदांत को अत्यन्तिक दुःख-निवृत्ति और परमानन्द-प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। फिर वह technologically advanced aliens से fight करने में हमारी कैसे सहायता कर सकता है? क्या वेदांत किसी सभ्यता की उन्नति में भी सहायक है? स्वामीजी कहते हैं कि वेदांत शक्ति की खान है—यह कैसे संभव है?

कि किसी ने मुझे बताया था कि हम लोग जानबूझकर के पाप करते हैं। मतलब बेंगली बेंगली एक लड़के के साथ में मेरी बात हो रही थी। हमारा जानता पापी अर्थात कि वह पता है कि पाप कर रहा है। माने पता है कि यह वेदांत है और ऐसा जीवन जीना चाहिए किंतु ऐसा नहीं करके दूसरी डायरेक्शन में जा रहा है। जो पता ही नहीं है तो हम बड़े खुशी से रहते हैं। क्योंकि करना वही है भौतिक जगत में ही रहना है। अभी जो पता है ना वह अननेसेसरी गिल्ट फीलिंग खड़ा करता है। ना ही हम भीतर में जा सकते हैं ना ही बाहर में जा सकते हैं। वो जैसा आपने कहा ना कि गले में घंटी का पत्थर की तरह ये वेदांत बना हुआ है हम लोगों के ज्ञान पापी अच्छा सो ये क्या है कि गले में घंटी के पत्थर की तरह ये बन गया है हमारा सो इन दैट वे यू आर राइट किंतु देखिए जहां तक ये बात को ले कि वेदांत का प्रैक्टिकल एप्लीकेशन रिसेंटली कहां देखने को मिलता है तो यहां पे नेचुरली कि डिसअपॉइंटमेंट ही है सो फार किंतु थ्योरिटिकली यदि ले अह इमेजिन के स्ट्रेंथ क्या है? व्हाट इज स्ट्रेंथ? आज यदि हम जिसको कहते हैं कि ये अमेरिका है व्हिच इज मोर पावरफुल देन पाकिस्तान। फॉर एग्जांपल कहां पे कोई कंपैरिजन ही नहीं है। पाकिस्तान की पपुलेशन और अमेरिका के पपुलेशन वो ऑलमोस्ट इक्वल है। जहां तक नेचुरल रिसोर्सेज जाएंगे वो भी ऑलमोस्ट इक्वल होगा। ये पंचनद का देश है पाकिस्तान। तो वो तो ऐसा नहीं है कि इन लोगों के पास में रिसोर्सेज की कमी है। किंतु अमेरिका का डेवलपमेंट देखिए। पाकिस्तान का देखिए। व्हाट इज स्ट्रेंथ? व्हाट इज द डेफिनेशन ऑफ स्ट्रेंथ? तो दो स्ट्रेंथ होती है। एक तो है कि नेशनल यूनिटी। जब तक नेशनल यूनिटी नहीं होती, वह देश किसी काम का नहीं है। तो पाकिस्तान और अमेरिका में डिफरेंस यही है कि अमेरिका में एक नेशनल यूनिटी है। पाकिस्तान में नहीं है। सो वि इज सबसे ग्लेरिंग एक दिखाई देता है। दूसरा है कि क्रिएटिविटी। आज कोई भी स्ट्रेंथ है टेक्नोलॉजिकल स्ट्रेंथ उसके पीछे में आपको क्रिएटिविटी चाहिए। एक इंटेलेक्चुअल पावर चाहिए। तो अमेरिका में जिस तरह से नंबर ऑफ नोबेल प्राइज विनर्स है आज आई थिंक 150 के आसपास है। पाकिस्तान में एक ही नोबेल प्राइज विनर है और उसको भी उन्होंने एज ए नॉन मुस्लिम अहमदिया वो अब्दुल सलीम तो वो अहमदिया है। तो अहमदिया को तो यह लोग मुस्लिम गिनते नहीं है। तो उसको भी डिसक्रेडिट करके रखा है। सो दीज़ आर द टू स्ट्रेंथ। एक तो है कि आपकी क्रिएटिविटी की स्ट्रेंथ होनी चाहिए जो कि आपको यह रिलेटिविटी है, क्वांटम डायनेमिक्स है ना कि यह क्वांटम ड्राइव है, यह एलएलएम है। यह सब डेवलप करने में हेल्प करें। व्हिच इज द मोस्ट फंडामेंटल कंडीशन। दूसरा है कि नेशनल यूनिटी होनी चाहिए। तो देखिए कि वेदांत हमारे पास में क्लियर रोड मैप देता है। वी कैन इंक्रीस आवर क्रिएटिविटी थाउजेंड टाइम्स। इसमें कोई प्रश्न ही नहीं है। यदि वेदांत को वेदांतिक मेडिटेशन टेक्निक को फॉलो करें। वो तो एक हो गया। दूसरा कि कम्युनिटी लाइफ देखिए कि अगेन भारत में अब वेदांतिक बाकी सब सिस्टम को नहीं ले। शिव ठाकुर मां स्वामी जी को ले तो आप देखिए कि मां का जो लाइफ है इट गिव्स अस अ क्लियर रोड मैप टू लिव अ वेरी हेल्दी वेरी यूनाइटेड कम्युनिटी लाइफ। सो दैट सॉलशंस आर देयर माने वेदांतिक सॉलशंस आर नॉट ओनली इनवर्ड लुकिंग दे आर आल्सो देयर फॉर आउटवर्ड लुकिंग प्रॉब्लम हमारे साथ में वही है ना कि प्रैक्टिकल वेदांत स्वामी जी के जो चार लेक्चर है प्रैक्टिकल वेदांत के क्यों देने पड़े उनको क्योंकि हम सभी लोग यही समझते हैं वेदांत इज सॉर्ट ऑफ अ रिटायरिंग फिलॉसोफी बट इट इज नॉट लाइक दैट दैट इज योर मिसअंडरस्टैंडिंग ऑफ वेदांत हां स्वामी जी ने जो स्पष्ट रूप से कहा ना कि मैं वन वन के वेदांत को किसान के खेत में ले आओ। ये जो गृहिणी है उसके किचन में ले आओ। स्टूडेंट का क्लासरूम है वहां पर ले आओ। जो वेदांत को हमने मेहनत करके जंगल में फेंका है उसको वापस लेके आओ। सो मेक वेदांत प्रैक्टिकल। तो अगेन जैसे हमने देखा कि हमारे हाथ में डिसअपॉइंटमेंट के अलावा ज्यादा कुछ नहीं है। फिलहाल तो बट एटलीस्ट थ्योरिटिकल पॉसिबिलिटीज दे। दैट इज व्हाट [हंसी]

प्रश्न: मैंने वेदांत के अनेक व्याख्यान सुने हैं, किंतु स्वामीजी के प्रैक्टिकल वेदांत के बारे में कहीं विस्तार से सुनने को नहीं मिला। स्वामीजी के प्रैक्टिकल वेदांत को एक सुव्यवस्थित, वैज्ञानिक और सैद्धांतिक विकास की आवश्यकता है

देखिए जहां तक यह फिलॉसोफिकल फ्रेमवर्क का प्रश्न है वो फिलॉसफ फ्रेमवर्क इट विल बिगिन विद द अंडरस्टैंडिंग कि ठाकुरमा स्वामी जी तीन को एक साथ में लेना होगा। यह जहां तक मैं लोगों को मेरा भी वही ऑब्जरवेशन है जैसा आपने कहा कि जितने भी जो लोग हैं जो कि ठाकुर मां स्वामी जी पे या वेदांत पे कोई इंटेलेक्चुअल बातें करते हैं वे लोग एक थीम को पकड़ करके बोलते हैं। अब जैसे सर्वप्रियंद जी का वेदांत है और आप बलभद्रानंद जी को देखेंगे तो रामकृष्ण जो बेंगली साहित्य है अपना उसमें उनका बड़ा अच्छा एक अंडरस्टैंडिंग है। किंतु ऑन वन हैंड वेदांत ठाकुर मां स्वामी जी ये चारों एस्पेक्ट को या तो फिर कहेंगे कि वेदांत को छोड़ दें। वेदांत एज रिफ्लेक्टेड इन ठाकुर मास्वामी जी। क्योंकि इंटरनल एस्पेक्ट ऑफ वेदांत इज एग्ेंंपलीफाइड बाय ठाकुर। यह जो कम्युनिटी एस्पेक्ट है एग्ेंंपलीफाइड बाय मदर एंड जो सिविलाइजेशनल एस्पेक्ट है एग्ेंंपलीफाइड बाय स्वामी जी। सो थ्री एस्पेक्ट ऑफ वेदांता प्रैंक और इसलिए मैं हमेशा से कहता हूं कि ठाकुर मां स्वामी जी को तीन को साथ में पढ़ना होगा। दैट इज द ओनली सॉल्यूशन टू अंडरस्टैंड वेदांता इन ऑल इट्स फेसेस। वेदांत इज़ अप्लाइड इन आवर स्पिरिचुअल लाइफ। वेदांत इज़ अप्लाइड इन आवर कम्युनिटी लाइफ एंड वेदांत इज़ अप्लाइड ऑन अ सिविलाइजेशनल स्केल। यू कैन नॉट इग्नोर एनी ऑफ़ देम। क्योंकि मान लीजिए कि देखिए कोई भी देश आज कितनी अब आज कोई भी बॉक्सर है वो कितना ही बढ़ाई कर दे। मैं यह हूं। मैं मैं इतना खाना खाता हूं। मैं इतना प्रोटीन शेक पीता हूं। मैं इतना आवर्स मैं जिम में वर्कआउट करता हूं। इतना घंटा में जोगिंग करता हूं। कितना ही कर दे। उसका सही स्ट्रेंथ तो रिंग में ही पता चलेगा ना। ना जब अपोनेंट का फेस करता है [हंसी] तो कोई भी देश है आज कितनी ही बड़ी-बड़ी बातें क्यों ना कर ले उसका सही टेस्ट कब होगा जब वो युद्ध होगा तब उसका टेस्ट होगा तो अभी मान लीजिए कि ये अफगान है कुछ 121 अफगान जो सरदार थे घोड़े पे आकर के आधे भारत को खा गए तो ये हमारी 10,000 साल की सिविलाइजेशन का क्या नामोनिशान रह गया राइट सो क्या है कि रीजन था तो पक्का था कि हम लोग भीतर से पूरे करप्ट हो गए थे सिस्टम पूरा करप्ट हो गया था बोल के ही तो इतना इतना बुरा हमको सामना करना पड़ा। ये जो मारबेरियन कंट्री था ये ब्रिटेन उस समय का ये 101 गन बोट ले आ गए। हम लोग पूरे झुक गए उनके सामने। सो अभी आप बोलेंगे कहां वो अफगान कहां ये ब्रिटेन और कहां ये सोने की चिड़िया वैदिक युग का भारत वगैरह वगैरह जब युद्ध होता है सब खुला हो जाता है। फिर आप कुछ छुपा नहीं सकते। सो यहां पे क्या है ना कि अब अंटिल एंड अनलेस देयर इज़ अ कॉम्प्रहेंसिव डेवलपमेंट। अ हम लोग युद्ध के मैदान में हारते ही रहेंगे। एंड वि इज द अल्टीमेट टेस्ट ऑफ एनी सिविलाइजेशन। आज भगवान बुद्ध कहे कि चलो आप क्षत्रिय हो। आप घर बार छोड़कर के जंगल में चले जाओ। अच्छा है। सुनने में बड़ा अच्छा लगता है। किंतु जब युद्ध होगा तो हमको बचाने के लिए क्षत्रिय ही नहीं रह गया। तो जो जंगल में वो तपस्या कर रहा है उसका आकर के सर काट देंगे। तो क्या उसका मीनिंग रहा आपकी तपस्या का? सो दिस कॉम्प्रहेंसिव डेवलपमेंट फ्रेमवर्क इज गिवन टू अस बाय ठाकुर मास्वामी जी। नहीं हमारे हमारे यहां पर यह थ्योरिटिकल फ्रेमवर्क डेवलप होने का सब होने चाहिए। सब एनकरेजमेंट होना चाहिए। इंस्टीटशंस होने चाहिए कि हाउ यू कैन अप्लाई वेदांत इन ऑल थ्री एस्पेक्ट इन योर इनर लाइफ, इन

प्रश्न: हमें इस बात का खेद है कि हमारा विकास पूरी तरह पश्चिमी विज्ञान पर आधारित रहा है। आधुनिक युग में वेदांत भारत की कहाँ और कैसे सहायता कर सकता है?

योर कम्युनिटी लाइफ एंड ऑन द सिविलाइजेशनल स्केल। सो सिविलाइजेशनल स्केल पे भी सब कुछ आ जाता है ना। आपका एजुकेशन सिस्टम है, साइंस एंड टेक्नोलॉजी है, आपका हायर एजुकेशन है, गवर्नेंस है, आपकी मिलिट्री सिस्टम है, जुडिशियल सिस्टम है, लॉ एंड ऑर्डर सिस्टम है, लेजिसलेटिव सिस्टम्स है, एवरीथिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है, मॉडर्न साइंस टेक्नोलॉजी है। हाउ यू कैन इंप्लीमेंट हाउ कैन यू कैन इंसल्ट वेदांत इन ऑल ऑफ़ देम। व्हिच यू कैन डू? वेदांत इज़ दैट दैट अह फ़िज़िक्स एंड वेदांत। दीज़ टू आर द फंडामेंटल फोर्सेज़ ऑफ़ नेचर। यू कैन यूटिलाइज दिस बोथ इन एव्री फील्ड ऑफ लाइफ। सो हम हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा? आज ऐसा कोई नहीं है। जो लोग वेदांत के बारे में बात करते हैं वो सब इनवर्ड हो जा इनवर्ड हो जाते हैं। तो वेदांत को एक्सटर्नल लाइफ में एप्लीकेशन करना कांसेप्ट स्वामी जी ने ही दिया है और स्वामी जी के ही फॉलोअर हैं। जो कि वेदांत को एक्सटर्नल सिविलाइजेशनल स्केल पे अप्लाई करने का एटलीस्ट उनको पता है कि होना चाहिए। [हंसी] सो हम लोग नहीं करेंगे यह फ्रेमवर्क डेवलप। हु विल डू दैट? अब जैसे देखिए मैं आपको मैं एक एग्जांपल देता हूं। मैं कुछ समय विवेकानंद केंद्र में रहा था वहां कन्याकुमारी में। तो उन लोगों का माइंडसेट मैंने समझने का प्रयास किया। उन लोगों का बड़ा क्लियर है कि देखो ये जिसको ट्रेडिशनल वेदांत है, ठाकुर है, मां है उनको भूल जाओ। स्वामी जी का ये पेट्रियोटिज्म है वो ले लो। मैंने कहा कि आप ठाकुर को छोड़कर के स्वामी जी की कल्पना कैसे कर सकते हैं? और यह उस समय की बात है। जबकि मैं तो बिल्कुल नया था इस पूरे फील्ड में। म यहां पे आने के पहले की बात है। उस समय से मुझे पता था कि ठाकुर को छोड़ के आप स्वामी जी को कैसे ले सकते हैं। तो ये जितने भी ऑर्गेनाइजेशन है भारत में जो कि तथाकथित स्वामी जी के नाम पर काम करते हैं उन लोगों का एक बहुत बड़ा एक ब्लाइंड साइड है। ठाकुर को छोड़ के स्वामी जी को लेना है। वरना फिर वही गड़बड़ में चले जाओगे। अरे भाई ठाकुर को छोड़ के स्वामी जी हो ही नहीं सकते। नहीं मैंने ऐसे लोगों से बात किया है जो कि बड़ा वेदांती है। तो मैं उनके साथ में बात कर रहा था एक दिन। मैंने कहा मां ने ऐसा कहा है तो मुझे पूछते हैं कौन मां? मैंने कहा वो वही मंदिर में बैठी है और कौन सी मां? क्या मैं अपनी मां की बात कर रहा हूं क्या? वो पूछना पड़ा कौन सी मां? ओम