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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda : English & Hindi : 17 April 2023

Swami Vivekananda

हर स्वामीजी से विले रियल परफेक्शन इस ओनली वन रिलेटिव परफेक्शंस मस्त बी में ना इन एन वेरी शॉर्ट सेंटेंस स्वामीजी लेस आउट एन वेरी परफेक्ट आइडिया ऑफ बैलेंस बिटवीन अध्यात्म और बिटवीन संसार नव वे नो डेट धर्मो अर्थ गम और मोक्ष देवर आर पर पुरुषार्थ एंजॉयिंग तू स टोल तू उस तू फॉलो बाय अवर शास्त्र नो धर्म अर्थ और कम दिस थ्री पुरुष आर पर ठोस हो लाइव इन डी संसार और मोक्ष इस पर ठोस हो लाइव यू हैव लेफ्ट संसार इन ऑर्डर तू अटेंड ईश्वर प्रताप और ईश्वर दर्शन और आत्मज्ञान नो आईटी इस एंटायरली पॉसिबल तू फॉलो दिस पाठ ऑफ ईश्वर दर्शन बाय लिविंग इन संसार बट व्हाट इस डेट इस डी पाठ ऑफ धर्म डेट वॅटीवर यू आर डूइंग यू पर एग्जांपल आई एम ए टीचर सो आईएफ आई टीच मी स्टूडेंट सो आई बिल टीच दम विथ सच एन डेडीकेशन और ऑनेस्टी और इंटीग्रिटी विद आई बिल बी एबल तू फ्रॉम डी कैरक्टर्स ऑफ मी स्टूडेंट और अलसो आई बिल बी एबल तू मेक डेम एक्सपर्ट इन देवर सब्जेक्ट मटर नो यू नो डेट इन राज ओवर पब्लिकेशन डिपार्मेंट प्रीवियसली देर उसे तू कम एन वॉलिंटियर हूं वज एन रिटायर्ड प्रिंसिपल नो यू यू सी आईएफ यू सी हम ही है नाम वज मनसुख साहब सो आईएफ यू सी हम ही हेड स्टूडेंट इन सो में एरियाज ही हद बिकॉज़ ही वज डी प्रिंसिपल और ही वो सच है टीचर और ही हेड स्पेंसर टाइम और फोर्ट और हार्ड क इन ट्रिंग तू टीच दो स्टूडेंट और नोट जस्ट टेस्ट सब्जेक्ट मटर बट ही अलसो यूज्ड तू हेल्प डेम पोटेंशियल सपोज तेरे इस सम पुर स्टूडेंट सो ही बिल हेल्प हम तू पे हिल बिल हेल्प हम तू परचेज इसे नोटबुक्स स्टडी मैटेरियल्स वेयर सो स्टूडेंट हिट श्रद्धा ओवर हम सच फेथ और सच रिस्पेक्ट ओवर हम से सपोज मनसुख साहब दिस प्रिंसिपल ओवर वॉलिंटियर ही बिल फल इल और ही बिल को तू मीत सम डॉक्टर नो दिस डॉक्टर इसे मनसुख सीड्स स्टूडेंट और ही बिल ट्री टीम पर फ्री बिकॉज़ ही वज इन सच एन ग्रेट डेट ऑफ हम और सपोज ही गोस तू बैंक और देवर इस अलसो बैंक ऑफिसर ही इसे हुडेंट सो दिस स्टूडेंट बिल हेल्प हम एट व्हाट एवर डी क इसे डी बैंक और सपोज है गोस तू सम प्लेस पर परचेज इन समथिंग वेयर एवर ही को ही बिल फाइंड दे बिल शो सच ग्रेट रिस्पेक्ट टुवर्ड्स हम वही बिकॉज़ एवरीथिंग दिस क ऑफ टीचिंग डी दिस प्रिंसिपल है दान और है हार्ट आउट इन हज क सो क बाज नोट जस्ट क पर हम डेट आई एम रिसीविंग दिस मैच सैलरी फ्रॉम डी स्कूल सो आई बिल डू दिस मैच क दिस आईटी वज नोट ए ट्रांजैक्शंस रिलेशनशिप ही हेड हज हार्ट इन हज टीचिंग क और डेट मेड हम एन ग्रेट टीचर सो डेट आईएफ यू पर योर हार्ट आउट इन वॅटीवर क यू डू आईटी सिंसेरली डू आईटी विद डिवोशन और विथ मन सेट तू हेल्प आदर्श डेट क बिल विकम योर साधना ही वुड कम हर इन पब्लिकेशन और बिकॉज़ है वज एन पिक्चर ऑफ गुजराती लैंग्वेज ही हेड वेरी गुड ड्रेस ऑफ गुजराती और ही वज एन वेरी इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ अवर पब्लिकेशन डिपार्मेंट वेयर ही उसे तू ट्रांसलेट आर्टिकल्स राइट आर्टिकल्स प्रो फ्री ओवर बुक्स इट्स एत्र और हर अलसो बिकॉज़ जस्ट वॉलिंटियर और एवं था है वज रिटायर्ड यू वुड कम हर से आईटी थ्री और 230 आफ्टरनून विदाउट मिस यू बिल कम इन डी मॉर्निंग बिल रेगुलरली कम आते 230 एवं स्टाइल हज लास्ट दे तिल ही लास्ट दे तू कम हर रेगुलरली अनफॉर्चूनेटली विलोज टीम ड्यूरिंग कोरोना पेडेमिक ही कांट्रैक्टेड कोरोना यह हेड सम शॉर्ट इलनेस वन वीक ही तू बी हॉस्पिटल और दें ही लेफ्ट इस बॉडी सो सच ए ग्रेट मां सच ए ग्रेट लाइफ और फाइनली सच्चे ग्रेट डेथ डेट एवरीवन वांट हज डेथ सो हर स्वामीजी सेस डेट रिलेटिव परफॉर्म परफेक्शंस मस्त बी में रियल परफेक्शन इसे ओनली वन व्हाट इसे रियल परफेक्शन इसे एन रियल परफेक्ट इस परफेक्शन इन वर्ल्ड साधना टुवर्ड्स अटेनिंग गो बट रिलेटिव परफेक्शंस विच इसे डेट व्हेनेवर वे लाइव इन दिस वर्ल्ड आईएफ आई एम एन डॉक्टर आईएफ आई एम ए टीचर आईएफ आई एम एन शॉपकीपर आईएफ आई में बिजनेस एग्जीक्यूटिव बिजनेस ओनर आईएफ सोल्जर आईएफ आईएमएस फॉर्म आई नीड तू डू आईटी विद सच सिंसेरिटी डिवोशन और विद सच हेल्पफुलनेस हेल्पफुल नेचर तू आदर्श डेट तू क बिल विकम वर्षीय दत बिल विकम साधना सो देवर इस वन साधना दत वे डू इन ऑर्डर तू अटैं गुड न्यू नो डेट इन अवर सोसाइटी देवर इस एन मिस्टेकन एटीट्यूड डेट लेट मी को तू टेंपल और लेट मी गिव लोट ऑफ डोनेशन तू दिस अन्य टेंपल और सम मोंक इट्स एत्र और लेट मी गिव सो मैच मनी तू सम पर्टिकुलर कोर्स सो दिस आई बिल डू आई बिल डू थर्मस सेपरेटली और इन मी बिजनेस लाइफ आईटी डीओईएसएन'टी मटर आईएफ आई एम दिस फोन बिकॉज़ वही डेट आई एम डूइंग जो दिस चैरिटी क और गिव डोनेटिंग मनी इन डी टेंपल और आई एम रेगुलरली विजिटिंग सम टेंपल और सी आई एम रेगुलरली विद रीडिंग रामायण और महाभारत जरा सम पीपल हूं ट्राई तू सेपरेट धी तू पथरिस धर्म और उसे देवर इस मोक्ष मार्ग और देवर इसे एन अर्थ और गम बट दिस थर्मो और अर्थ और काम आर नोट तू सेपरेट थिंग्स डेट आर पार्ट ऑफ डी से सिंगल रियली यू कैन नोट से डेट आई एम गोइंग तू टेंपल आई एम रीडिंग भागवत एवरी दे आई ऍम गिविंग मनी डोनेशन तू दिस पंडी और आई एम डूइंग रेगुलर साधु संघ और आई एम रेगुलरली विजिटिंग सम होली प्लेस सो डेट मेंस आई एम ओके आईएफ आई एम दिस ऑनेस्ट इन मी क आईएफ आई एम आई हाव एन बिजनेस दें आई एम नोट पेइंग मी टैक्स और से डी प्रोडक्ट डेट आई मेड दिस प्रोडक्ट्स आर पैरहैप्स हार्मफुल तू डी कस्टमर बट आई ट्री तू हायड देवर आर में फूड प्रोडक्ट्स दे में नोट राइट वॅटीवर व्हाट आर डी कंटेंट विच इस डी इनग्रेडिएंट्स पट इन दिस फ्रूट प्रोडक्ट और सम पीपल हूं आर एलर्जिक तू सम इनग्रेडिएंट दे मैं आईटी आईटी और दें पाल मिल शुद्ध जी पीपल थिंक डेट लेट मी नोट पट दिस इनग्रेडिएंट ऑन डी लेबल ऑफ दिस प्रोडक्ट आईएफ आई पट आईटी पीपल बिल नोट परचेज आईटी तो लेट मी फूल पीपल सो डेट पीपल बिल परचेज आई बिल अर्न मैं मनी डीओईएसएन'टी मटर आईएफ पीपल फल मिल आईएफ मी कस्टमर आई ऍम कंसर्ट ओनली विथ मनी सो धी सॉर्ट ऑफ एटीट्यूड तू सेपरेट दिस धर्म ऑफ फ्रॉम अर्थ और कामा इस एक्सट्रीमली डेंजरस आईटी दस नोट गिव यू एनीथिंग आईटी कट इट्स अदर ऑफ सो वे नो डेट देवर इस एन पॉजिटिव बोले बैलेंस और हेयर इस नेगेटिव बैलेंस व्हेन दे मीत टुगेदर दे कैंसिल एच अदर आउट और डी रिजल्ट इस जीरो रिजल्ट यू हैव तू बोथ योर संसार और योर धर्म योर क और योर साधना बोथ मस्त हैव पॉजिटिव बैलेंस इन ऑर्डर पर यू तू प्रोग्रेस इन योर रिलिजियस लाइफ वन हे नेगेटिव बैलेंस और अंदर हज पॉजिटिव बैलेंस दें दे बिल ओनली कैंसिल और लीव नथिंग पर यू तू टेक विद यू इन योर नेक्स्ट बर्थ तो अदर वाइस आईएफ बोथ पॉजिटिव बैलेंस दें आई बिल बी एबल तू टेक समथिंग पॉजिटिव सम गुड कर्म सम गुड करैक्टर सम गुड एटीट्यूड सम गुड संस्कार इन अवर इन मी नेक्स्ट बार और फ्रॉम देवर आई बिल बेगन फ्रॉम ओपनिंग बैलेंस यू नो डेट डी सो स्टडी अकाउंट इस ओपनिंग वेल एस सो डी फ्रॉम डी नेक्स्ट बर्थ आई बिल हैव वन मिलियन रुपीज ₹1 लाख ओपनिंग बैलेंस इन डी नेक्स्ट बर्थ इट्स सेल्फ आई हैव दिस में पॉजिटिव संस्कार सो फ्रॉम डी चाइल्डहुड इत्सेल्फ यू बिल सी दिस बॉयज और दिस गर्ल्स डेट दे आर वेरी इंटरेस्टेड इन रिलिजियस दे आर वेरी इंटरेस्टेड इन मीटिंग मेंस व्हेनेवर देवर इस सम रिलिजियस सीरियल और टीवी और मूवी ऑन दे वो चीट विद ग्रेट इंटरेस्ट आईएफ यू तेल डेम डा स्टोरी फ्रॉम रामायण और महाभारत और आईएफ डी टेक बर्थ आउटसाइड ऑफ इंडिया और डिफेंस दे डी प्लेस फ्रॉम बाइबल और विच एवर रिलिजन इन विच देवर बोर्न दे बिल लिसन तू आईटी वेरी केयरफुल सो दिस बॉयज और गर्ल्स यू कैन सी फ्रॉम चाइल्डहुड इत्सेल्फ डेट दे आर बोर्न विद पॉजिटिव ओपनिंग बैलेंस और देवर आर सम हूं आर बोर्न विद नेगेटिव ओपिनियन बैलेंस दिस इस अलसो पॉसिबल सो फ्रॉम राइट नो वे मेक दिस रेजोल्यूशन दत आई बिल कप बोथ दिस धर्म ऑन वन हैंड और अर्थ और काम ऑन डी अदर और बोथ आई बिल हैव पॉजिटिव बैलेंस इन मी लाइफ दिस रिलेटिव परफेक्शंस रिलेटिव परफेक्शंस मिंस अन्य परफेक्शन विच इस रिलेटेड तू दिस रिलेटिव शब्द व्हाट इस रिलेटिव शब्द रिलेटिव वर्ल्ड इसे दिस संसार सो अन्य कर्म अन्य क डेट आई डू सर आई बिल ट्राई पर परफेक्शन और व्हाट इसे स्वामी विवेकानंद डेफिनेशन ऑफ परफेक्शन इन रिलिजियस साधना और इन रिलिजियस लाइफ अच्छा

श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ

इसमें छोड़ देते हैं है तो हमने ऑलरेडी देखा की ठाकुर ने किस तरह से ब्रह्म जो है या तो फिर ब्रह्मज्ञान जो है वह अभी तक झूठ नहीं हुआ क्योंकि वह मुंह से बताया नहीं गया इसके बड़े में ठाकुर को बात करते हुए सुना और पूरा बहुत सर एक ठाकुर के वो जो टीचिंग में थर्ड है ना देखिए इसको ना क्लोज रीडिंग बोलते हैं ये जो लिटरेचर जो लोग लिटरेचर स्टडी करते हैं तो लिटरेचर में दो-तीन तरह से स्टडी होता है एक तो है की जो ऑथर जो है वो ऑथर क्या कहना चाहता है उसका एक ओवरऑल मैसेज क्या है ओवरऑल फिलासफी क्या है वो एक बताया जाता है फिर वो जो कोई भी तरह का राइटिंग है तो राइटिंग का जो इंटरनल स्ट्रक्चर है टेक्स्ट का वो टेक्स्ट का स्ट्रक्चर किस तरह से उसने डेवलप किया है किस तरह की राइटिंग स्टाइलिश उसे करता है जी तरह का ग्रामेटिकल कंस्ट्रक्शन उसे करता है किस तरह का उसका भाव है उसका एलीवेटिंग भाव है ना की डिप्रेशन लिखना है किस तरह के वो शब्द उसे करता है और शब्द के हमारे पर क्या इंपैक्ट होती है यह सब को क्लोज रीडिंग बोला जाता है तो कथामृत का क्लोज रीडिंग करेंगे तो एक ठाकुर के बड़े में एक चीज पता चलेगी की वह आपको लगेगा की यह बहुत लंबा चैप्टर है इसमें बहुत साड़ी बातें ठाकुर ने की है किंतु देखिए ठाकुर क्या कहते हैं करते हैं की पहले तो एक ओपनिंग थीसिस आपके सामने रख देंगे की हां यह एक बेसिक आइडिया है उसके बाद में वो एग्जांपल्स के एग्जांपल्स देखकर करके ये उपमा है या स्माइल से उसको दे दे करके वो क्या करते हो उसे बेसिक थीसिस को या बेसिक प्रेमाइश को वो डेवलप करता है और उसके बाद में वो जो सब इतिहास देते हैं जो की सब इतिहास जो है वो जो ओरिजिनल जो बेसिक आइडिया जो है प्राइमरी आइडिया फर्स्ट आइडिया उसको सपोर्ट करता है और इस आर्गुमेंट को फरदर डेवलप करता है तो ये जो न्याय शास्त्र जो पढ़ने हैं उनको पता है की किस तरह से आपको किसी भी थीसिस को या किसी भी आर्गुमेंट को डेवलप करना है और उसके लिए बहुत सालों तक ये लोग स्टडी करते हैं भारतीय डर अपने जो लिटरेचर है धर्म साहित्य आपको पता है की उसका हमने पहले किया था श्रुति स्मृति और न्याय शंकराचार्य कहते हैं की हमारी यह जो हजारों वेद पुराण तंत्र उपनिषद वगैरा जो है ये प्रस्थान है तो हजारों ग्रंथ है हमारे पास में से किंतु हिंदू धर्म या तो हिंदू संस्कृति या तो हिंदू आध्यात्मिक साधना उसका फाउंडेशन क्या है तो शंकराचार्य उसको प्रस्थान या कहते हैं प्रस्थान रायता क्या अर्थ हुआ की तीन किताबें या तो तीन शास्त्र जो की सबसे फंडा मेंटल है तो एक तो है उपनिषद दूसरा है भागवत गीता और तीसरा है हमारा ब्रह्म सूत्र उपनिषद को बोलते हैं श्रुति प्रस्थान श्रुति अर्थात की ऋषि मुनियों ने श्रवण किया था जब वो ध्यान में चले जाते थे समाधि में चले जाते थे तो ईश्वरीय वाणी या तो आत्मा की जो आत्मा की जो नद है आत्मा की वो जो आवाज जो भीतर से जो पर होती है उसका उन्होंने श्रवण किया था उसमें कोई बीच में कोई मिडिल मां नहीं है सीधी वह ईश्वर की वाणी है या तो ब्राह्मण की वो जो एक्सप्रेशन है इस जगत में वो उन्होंने श्रवण किया इसलिए उसको श्रुति प्रस्थान करता है उपनिषद को फिर है स्मृति प्रस्थान अर्थात की भागवत गीता भागवत गीता जो है स्मृति प्रस्थान इसलिए कहते हैं क्योंकि एक के बाद एक गुरु शिष्य की परंपरा से वो हमारे पास से चला ए रहा है तो एक गुरु ने अपने शिष्यों को बताया तो शिष्य की मेमोरी में उसे शीशे की स्मृति में यह बात र गई की हां मैंने मां भागवत गीता का श्रवण किया था उसका जो अर्थ है मैंने अपने गुरु से शिखा था तो भागवत गीता का यह जो श्लोक है या तो दूसरा जो श्लोक है उसका यह अर्थ होना चाहिए और यदि मैं खुद जाति थोड़ा इस श्लोक के ऊपर में चिंतन मनन निदि्डया सुन करता हूं तो मुझे एक दूसरा या तो डिपर मीनिंग मिलेगा किंतु उसका जो बेसिक स्ट्रक्चर है वह मैंने अपने गुरु के रूप से शिखा है जो की अभी मेरी मेमोरी में है तो मेमोरी में से जो लिखा गया है स्मृति में से जो लिखा गया है वो है स्मृति प्रस्थान अर्थात भागवत गीता और तीसरा है न्याय प्रस्थान न्याय प्रस्थान अर्थात किसी भी आप विधर्मी जो है विधर्मी अर्थात हमारे हिंदुओं के भीतर में विधार्वी धमार्थक की मैं जी स्कूल को फॉलो करता हूं मैं दव दी हूं तो मेरा धर्म हो गया दवाई वो जो अद्वैतवादी है उसका धर्म हुए अद्वैत तो वो जो द्वाहित है या तो अद्वैत है वो जो दूसरी स्कूल वालों के साथ में जब डिबेट करते हैं तो डिबेट का किस तरह से स्ट्रक्चर होना चाहिए उसको वो न्याय शास्त्र में वो लोग डिफाइन करते हैं की इस तरह से आपको सब अरगुमेंट्स डेवलप करनी है तो वो जो आर्गुमेंट न्याय शास्त्र में डेवलप करने का जो बहुत ही एक सिस्टमैटिक

स्वामी विवेकानन्द

तरीके से सिर्फ समझाया गया है जो सिस्टमैटिक तरीके से बताया गया है वो जो न्याय शास्त्र का लोग सालों तक अभ्यास करते हैं फिर उनका जो मत है वो प्रतिपादन करने के लिए अपने प्रतिद्वंदी के साथ में वो डिबेट कर सकते हैं आपको यह बहुत फेमस स्टोरी मैंने पहले भी बताई होगी शंकराचार्य की तो शंकराचार्य ने उसे समय जो घूम रहे थे वह तो बच्चे जैसे ही थे तो पूरे भारत में भ्रमण कर रहे थे भ्रमण करते करते उन्होंने देखा की जो धर्म का जो स्थिति है हिंदू धर्म की जो अवस्था है बहुत ही वो बुरी हो गई है बहुत साड़ी जगह पे लोगों जो हिंदू धर्म के नाम पे बहुत सर अनाचार भ्रष्टाचार दुराचार ये सब प्रवेश कर चुका है तो जो सही सही ओरिजिनल उपनिषद कृत जो हिंदू धर्म है उसकी स्थापना वो डिबेट के थ्रू करेंगे तो वो एक जगह पे गए तो वहां पे वो जो ये जो मुंडन मिश्रा करके एक उनको एक कर्मकांडी एक सड़क दिखाई दी है अभी उसे सिटी में मुंडन मिश्रा का बहुत बड़ा नाम है और कहते हैं की वो जो कर्मकांड जो है उसमें उनसे उनके जितना जो बड़ा जो मतलब सड़क दूसरा नहीं है अभी ये जो है शंकराचार्य उनका था ज्ञान मार्ग ज्ञान मार्ग अर्थात की त्याग और मेडी ध्यान के द्वारा आपको ईश्वर प्रताप करनी स्मरण मनन दे दिया सन और ध्यान इसके द्वारा आपको ईश्वर प्रताप करने या तो फिर आत्मज्ञान की प्रताप करनी है और मुंडन मिस्र का था की वेद में यह जो कर्मकांड जितने भी दिखाएं गए हैं ये याद यज्ञ हवन होम फिर ये जितनी भी विधियां हैं ये जो ब्राह्मण का जो संस्कार है दशरथ संस्कार जो ब्राह्मण लोगों के होते हैं वो जो अपने समाज में कर आश्रम है फिर ये कर धर्म है पुरुष आरती धर्म अर्थ कम मोक्ष ये सबका वो जो संपूर्ण रूप से अनुष्ठान करके आपको जीवन जीना है और शंकराचार्य कथा एकदम रेडिकल जैसे खली तलवार होती है उतना उनका मोक्ष मार्ग का वो जो ये था उनका वो वक्तव्य तो शंकराचार्य और मंडल मिस्र के बीच में वो जो आर्गुमेंट होती है डिबेट होती है दोनों जो है न्याय शास्त्र और अपने अपनी जो फिलासफी उसमें एक्सपर्ट तो वो मुंडन में अभी वो जो मैंने उनके बीच में वो जो ये कौन करेगा डिसाइड कौन अंपायर कौन होगा जो उनको ठीक कौन करेगा की कौन जीता कौन क्योंकि यह तो डिबेट करते हैं वे लोग तो हमेशा यही सोचते हैं की मैं ही सही हूं सामने वाला गलत मॉडरेशन कौन करेगा आज की लैंग्वेज में तो देखिए की उसे समय की जो इंटीग्रिटी थी धर्म का इतना प्रभाव था की जो मुंडन मिस्र की जो धर्म पत्नी थी भारतीय उनको कहा गया की दोनों में से कौन जीता है कौन खाता है आप ठीक करेंगे अभी देखिए वो जो भारती थी भाई भारती उसका खुद का एक वो सेल्फिश इंटरेस्ट है यहां पे की उसके जो पति है वो यदि हर जाते हैं तो बात ठीक ऐसा हुआ था जो हर जाएगा वो जो डिबेट में जिनकी हर होगी वो सामने वाला जो पक्ष जीत जाता है उसका धर्म अंगीकार करेगा अर्थात यदि मुंडन मिश्रा हर जाते हैं तो वो जो है की शंकराचार्य के रास्ते पे चल करके सन्यासी हो जाएंगे और शंकराचार्य यदि हर जाते हैं तो मंडन मेष रखें रास्ते पे चल करके वो संसारी हो जाएंगे वो फिर ये जो वैदिक कर्मकांड है उसका वो अनुष्ठान करेंगे इस तरह से वो ठीक हुआ था अभी शंकराचार्य हर गए तो हर गए उनको और कोई आपत्ती नहीं है किंतु यदि वह मंडल मिश्रा हर जाता है तो जो उभय भारती उनकी जो वाइफ है वो तो विधवा हो जाएगी और विधवा के जी तरह से वो जो क्योंकि उनका पति सन्यासी हो गया जो सन्यास करने से लेने से पहले तो सबसे पहले अपना श्रद्धा करना पड़ता है जिसका श्रद्धा हो गया वो तो वैदिक रूप से वो तो मृत्यु होगा उसका तो डेथ हो गया वो तो मृत्यु हो गया उसका तो फिर उसकी पत्नी तो विधवा हो गई तो और विधवाओं के जो रहने खाने के जो नियम थे उतने कठिन थे उसे समय की जो बात है तो वो बेचारी को अपने को पर्सनल एक बहुत ही बड़ा उसको एक सेट में होने वाला था जब ये उसका हसबैंड यदि वो डिबेट में हर जाता है किंतु फिर भी शंकराचार्य को विश्वास था की भले ही चाहे उसको पर्सनल जितना भी वो जो है उसको वो ये वो मतलब उसको प्रॉब्लम हो बहुत ही ज्यादा उसके ट्रबल में ए जाएगी समस्या में पद जाएगी विधवा हो करके डीओईएसएन'टी मटर उसको जो धर्म की आस्था जो है वो इतनी स्ट्रांग है की कभी भी वो गलत निर्णय नहीं लेंगे तो ये अपने जो हिंदू परंपरा जो है अपने धर्म की भारतीय परंपरा है की धर्म जो है वो सर्वश्रेष्ठ है मेरा जो पर्सनल बेनिफिट है वो उसके आगे जो है मैं धर्म को रखूंगा तो अभी डिबेट्स स्टार्ट हुई और उभय भारती ने क्या किया दोनों को फूलों की एक माला पहने दी और कहा की जिसकी माला की ये फूल है सबसे पहले वो जो है मुरझा जाएंगे वो हर जाएगा क्यों क्योंकि हमने पहले भी डिस्कस किया था की अपना जो मां है उसमें दो तरह के भाव रहते हैं एक तो पंचकूलेश है अविद्या अस्मिता राज द्वेष अभिनवेश या तो जिसको हम शाद रिपु कहते हैं की कम क्रोध मैड लाभ मोहमद सर तो वो जो है नेगेटिव टाइप का इमोशन है और दूसरा पॉजिटिव टाइप का इमोशन है चित्र प्रसाद मैत्री करुणैता अपेक्षा अर्थात या तो फिर जिसको हम नियम कहते हैं सत्य अहिंसा असते परिवार ब्रह्मचर्य लव शॉट संतोष स्वाध्याय और ईश्वरपानियेदार तो यदि आप डिबेट करते हैं और आप अपनी डिबेट में गलत बात नहीं करते हैं दूसरों को लांछन लगाने वाली बात नहीं करते हैं दूसरों को इंसल्ट करने वाली बात नहीं करते हैं अपने पॉइंट पे पॉइंट तू पॉइंट बात करते हैं धर्म को लेकर बात करते हैं और आत्म श्रद्धा है विश्वास है की मैं जो का रहा हूं वो सही है मेरी जीत होगी यह जो आत्मा श्रद्धा जो प्रकट होती है तो अपना मां जो है चित्र प्रसाद से भर जाता है मैत्री करुणा बुध्दिता और अपेक्षा से और जैसे ही मुझे लगता है की मैं हर रहा हूं तो मैं झूठ-मूठ का अक्षय करना स्टार्ट कर दूंगा अभी आजकल जो डिबेट आप देखते हैं ना डिबेट में पॉइंट कुछ नहीं राहत है सीखने वाली बात कुछ नहीं हो रही है सब सामने वाले का इंसल्ट करो सामने वाले को झूठ पड़ो उसको लांछन डालो उसके सर पर और उसका ये सब पूरा नेगेटिव मामला तो यदि मैं हरण शुरू कर दूंगा तो मैं इस तरह से नेगेटिव बात करना शुरू करूंगा मेरा मां जो है कम और क्रोध से भर जाएगा तो यह जो जो फूलों की माला जो है वो मुरझा जाएगी और मेरे मां में चित प्रसाद है तो फूल जो है वो फ्रेश के फ्रेश ही रहेंगे फिर उनको पानी देने की जरूर नहीं है और कुछ करने की जरूर नहीं है जो सड़क होता है असली सड़क उसके जो मां का ये जो क्षमता है उसके भाव की उसकी इमोशन की ये शक्ति है की वो जहां पे बैठता है तो फूल जो है वो वैसे ही खेल हुए रहते हैं फूल जो है वो वैसे ही फ्रेश रहते हैं हमारे से नहीं होता है किंतु उसे समय की बात थी यहां पे हमारा टेरेस गार्डन है तो कभी-कभी कोई ये जैसे मार्मिक जी आता है तो हम लोग वहां बैठता है तो वो तो गार्डन में हमको पानी देना ही पड़ेगा मैं चाहे जितना ही चाहे वहां पे बैठ करके जब ध्यान कर लो वो फूल अपने से तो वो खेलने वाले नहीं है तो वो बात चली गई अभी आजकल के जमाने में किंतु उसे समय ऐसा होता था की जब आप डिबेट करते हैं या तो साधना करते हैं या तो आप जो है की आप धर्म का पालनपुर करते हैं तो आपके मां का वो जो भाव है उसे भाव से आपके आसपास के जो लोग रहते हैं पशु पक्षी फूल पेड़ पौधे वे लोग भी किल जाते हैं तो डिबेट आरंभ हुआ और डिबेट चलने लगा दिन प्रतिदिन चल रहा है और अभे भारती ने देखा की अरे यह तो क्या हुआ की उसका जो हसबैंड है मंडन मिश्रा उसके जो फूलों की माला है वो मुरझा रही है फूल मुरझा रहे अर्थात की मंडल मिश्रा जो है वो आर्गुमेंट में हर रहा है अभी उसके बाद में क्या हुआ वो भी तो हमने वो एक बार देखा है की मुंडन मिश्रा हर गए उनको सन्यास ग्रहण करने की बड़ी आई और फिर जो है की अभे भारती ने शंकराचार्य को प्रश्न किया की अच्छा संसार में कैसे रहा जाता है वो बताओ वो स्टोरी हमने पुरी अच्छी है शंकराचार्य ने कैसे एक राजा के शरीर में प्रवेश करके ये जो राज्य कैसे चलाया जाता है संसार कैसे किया जाता है वो शिखा और फिर वो जो शरीर त्याग करके ए करके वो सब बातें की और वो डिबेट में अल्टीमेटली जीत गए किंतु खाने की बात ये है की यदि आपको डिबेट करनी है या तो फिर एक स्ट्रक्चर और फॉर्म में आपको आर्गुमेंट करनी है यदि आपको किसी स्ट्रक्चर जो है उसका अभ्यास आवश्यक है और ये जो शंकराचार्य है या तो मंडन मिश्रा जैसे हमारे जो भारतीय ये जो सड़क या तो संत महात्मा थे उन्होंने सालों साल ये सब न्याय शास्त्र का पाठ करके अभ्यास करके ये सब डिबेट किया करते थे आवाज नहीं ए रही अच्छा मेरी क्या क्या करूं अच्छा गई तो हमको पता है की उभय भारती ने डिक्लेअर किया की मंडन मिश्रा जो है वो हर गए हैं तो मैं जो स्टोरी मैंने क्यों कहीं की को न्याय शास्त्र का जी तरह से डेवलपमेंट हुआ उसे बात को उसको हाईलाइट करने के लिए मैंने ये स्टोरी बताए अभी ये बात उसके बाद की जो स्टोरी है मैंने पहले डिस्कस की थी की किस तरह से जब उभय भारती ने ये डिक्लेअर किया की मंडन मिश्रा हर गए हैं तो फिर अभे भारती ने कहा की देखिए की मैं तो उनकी धर्मपत्नी हूं भले ही चाहे मैं मॉडरेटर थी भले ही चाहे मैं जैसे जज के रूप में मैंने न्याय दिया मैंने चुका था दिया किंतु अभी मेरा ये धर्म है क्योंकि जो धर्म जो है उसमें कहा जाता है की यह जो है की दोनों एक दूसरे के परिपूर्ण है जैसे पत्नी और पति इसीलिए भगवान शिवा का अर्धनारीश्वर स्वरूप है इसलिए जब वो वैदिक होम या तो कोई वैदिक विधि होती है तो पति या पत्नी अकेले नहीं बैठ सकते यदि शादीशुदा है तो दोनों को साथ में बैठना होगा इसीलिए भगवान राम ने जब राजस्विनी अगना वगैरा किया था और मां सीता वहां पर नहीं थी तो सोनी की सीता बना करके भगवान राम के साथ में बिताया गया था भगवान राम भी इस नियम में वो जो है वो ये नहीं है उनके लिए भी इस नियम में छठ नहीं है तो पत्नी होने के हिसाब से ये मेरा राइट है की मैं यदि मेरे पति हर गए हैं तो उनके उनकी और से मैं एक प्रश्न अपना करो तो शंकराचार्य कहते हैं की ठीक है आप अपना एक प्रश्न कीजिए तो उभय भारती ने प्रश्न किया की संसार में किस तरह से रहा जाता है तो इस प्रश्न के बाद में क्या हुआ ये स्टोरी मैंने पहले भी गई थी की किस तरह से शंकराचार्य ने एक दूसरे का एक राजा के शरीर में प्रवेश करके पूरा संसार के बड़े में ज्ञान प्राप्त किया और फिर वापस आकर के वो उभय भारती को बताया किस तरह से संसार में रहा जाता है और फिर वो डिबेट में अल्टीमेटली जीत गए तो यह पुरी स्टोरी का वो जो मतलब पॉइंट है की किस तरह से हमारे सड़क या तो अपने वह जो धर्म महापुरुष है सालों साल तक न्याय शास्त्र का अभ्यास करने के बाद में वे लोग जो है की इस तरह से वो डिबेट करते थे आर्गुमेंट करते थे अपने विद्यार्थियों को सीखने थे अभी ठाकुर जो है ना ही इस तरह से किसी गुरुकुल में जाकर के वो विधिवत शिक्षा लिए हैं ना ही उन्होंने इस तरह से कोई पंडिताई में कोई सिद्धि प्राप्त की है ना ही मैंने कभी यह सुना है की नया शास्त्र का उन्होंने अभ्यास किया हो हां उनके पास में बहुत तारक के वो गुरु आए हैं महापुरुष सिद्ध पुरुष आए हैं और ठाकुर को बहुत कुछ बताएं हैं किंतु न्याय शास्त्र ऐसे चुनो ने स्टडी किया हो यह बात तो कहानी भी नहीं है किंतु यही ठाकुर जब कथामृत का क्लोज रीडिंग करेंगे एक बहुत ही डिटेल में उसका अभ्यास करेंगे तो पता चलेगा की किस तरह से वो पॉइंट बाय पॉइंट अपनी जो ओरिजिनल है उसको डेवलप करते हैं किस तरह से जबकि वो किस लिए तो विद्यासागर है उनको मिलने के लिए आए तो एक ओरिजिनल पॉइंट रख दिया विद्यासागर का संस्कार उनकी प्रकृति उनका जो स्वभाव है उनका मूड देखकर के फिर इस ओरिजिनल पॉइंट को उन्होंने किस तरह से एक के बाद एक उदाहरण देकर के इसके बाद एक कहानी बता करके एक के बाद एक दूसरे दूसरे आर्गुमेंट पॉइंट देकर के उन्होंने किस तरह से ये थीसिस को डेवलप किया ये बात हमको ये हम लोग पढ़ के पता चलती है तो यदि न्याय शास्त्र भी यदि सीखना है मैंने न्याय शास्त्र यदि कहेंगे की उपनिषद जो है वो ब्रह्मज्ञान बताता है फिर ये उन्हें श्रुति प्रस्थान ये जो स्मृति प्रस्थान है अर्थात गीता जो है हमको ये बताती है की संसार में किस तरह रजाई संसार में रहकर के किस तरह से ईश्वर प्रताप की जाए वो यदि हमको स्मृति प्रस्थान से पता चलती है तो न्याय प्रस्थान से पता चला है की किस तरह से हम लोग जो है की यह जो धर्म के ही नहीं किसी भी तरह की जो एजुकेशन फिलासफी है उसको हम डेवलप कैसे करें उसके बड़े में आर्गुमेंट कैसे करें तो ये जो श्रुति और श्रुति तो अपने वह जो कथामृत में है प्रस्थान ट्रे जो है श्रुति स्मृति न्याय तीनों यहां पे है आप बोलेंगे की चलो कथामृत पढ़कर तो मुझे ब्रह्मज्ञान के बड़े में पता चला कथामृत पढ़कर उन्हें श्रुति प्रस्थान के बड़े में पता चला कथामृत पढ़कर मुझे ये पता चला की किस तरह से संसार में रहा जाए ठाकुर कहते हैं की इस तरह की वो जो कम वाली जो बाई होती है ना वो जो मलिक के घर में रहती है किंतु मानपाडा राहत है उसके गांव में जहां पे उसका लड़का राहत है और वो अपने जो जी सेठ के घर में रहती है अपने मलिक के घर में वो कहती है मेरा रामू मेरा रामू किंतु उसके मां में पता है की ये जो सेठ का जो लड़ता है खुद का लड़का नहीं है उसका खुद का लड़का कहानी धूल मिट्टी में खेल रहा है गांव में तो ऐसे ही ठाकुर कहते हैं की संसारसारं का सब कम करो किंतु मां रखो ईश्वर के ऊपर में तो स्मृति पर स्थान जो है की संसार में कैसे रहकर के जो ईश्वर प्रताप की जाए वो हमको कथामृत में से पता चला है किंतु जो तीसरा प्रस्थान है न्यायप्रस्थान तो हम सोचेंगे की न्याय प्रस्थान न्याय के साथ में ये जो आर्गुमेंट के साथ डिबेट की बहुत ही वेरीफाइड अकादमी टॉपिक है बहुत ही हाली डेवलप वो एकेडमिक टॉपिक है उसका कथामृत के साथ में या ठाकुर के साथ में क्या संबंध किंतु बहुत ही क्लोज रीडिंग करके बहुत ही डिटेल में रीडिंग करके हमको पता चलेगा की किस तरह से आर्गुमेंट को डेवलप किया जाए किस तरह से अपनी बात जो है दूसरों को कन्वेंस कराया जाए वो किताब है ना हो तू मेक फ्रेंड्स और आ हो तू वन फ्रेंड्स और इन्फ्लुएंस पीपल या तो फिर हो तू इन्फ्लुएंस अदर पीपल ये इस तरह की आजकल बहुत साड़ी किताबें चलती रहती है तो ऐसा नहीं कुछ भी सीखना है तो वो भी आपको कथम रूप में से पढ़ने को मिलेगा जैसे ठाकुर ए करके पहले से ही विद्यासागर को कंप्लीमेंट देते हैं वो फिर वो किस तरह से अपना वो जो बात रखते हैं की ब्रह्मा जो है वो झूठ नहीं हुआ है किस तरह से इसी बात को वो स्टेप बाय स्टेप विद्यासागर को कन्वेंस करते हैं तो यह जो न्याय प्रस्थान जो है आर्गुमेंट डिबेट स्टेप बाय स्टेप डेवलपमेंट ऑफ यह सब भी जो इन्फ्लुएंस पीपल और हो तू मेक फ्रेंड्स यह आपको कथम रूप में से सीखने को मिलेगी अर्थात यह जो अपने प्रस्तावना ट्रे जो है वो तीनों प्रस्थान का सर तत्व जो है वो कथामृत में है और जैसे-जैसे हम दीप में जाते जाएंगे जैसे जैसे के बाद एक लेयर ओपन होते जाएंगे हमको पता चलेगा जैसे महाभारत के बड़े में बोलते हैं ना की संसार में जो कुछ है वो सब महाभारत में है जो महाभारत में नहीं है इस संसार में नहीं है यही बात आप कथामृत के बड़े में बोल पाएंगे संसार अर्थात की आध्यात्मिक जगत में जो कुछ भी है सब कुछ कथामृत में है और कथामृत में जो नहीं वो किसी भी आध्यात्मिक कोई भी सिस्टम नहीं की जहां पे वो बात की गई हो संपूर्ण अध्यात्म संपूर्ण धर्म ग्रंथ यदि कहा जाए तो वो कथा तो आज यही पर कल फिर से मिलता है