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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपने अवतार षय राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का कंप्लीट वर्क्स उसमें राजयोग चैप्टर थ्री चैप्टर का नाम है प्राण प्राण में अभी तक हमने देखा कि स्वामी जी हमको कल जैसे कि हमने देखा कि कॉन्शसनेस के तीन लेवल बताते हैं एक तो है सबकॉन्शियस दूसरा है कॉन्शियस एक है सुपरकॉन्शियस सबकॉन्शियस अर्थात की निद्रा और सुश उक्ति कॉन्शियस जिसको कहते हैं जागृत अवस्था और सुपरकॉन्शियस अर्थात कि वेदांत में जिसको कहते हैं तुरीय अवस्था सुपरकॉन्शियस लेवल में से बहुत सारे क्रिएटिव आइडियाज ईश्वरीय दर्शन जो कुछ भी हमको होता है जो कि मनुष्य सभ्यता के फाउंडेशन है यदि आज कोई ऐसा पूछे कि अच्छा ये ह्यूमन सिविलाइजेशन जो है एक टॉपिक है हिस्ट्री में उसका टाइटल उसका नाम है राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन अभी जैसे कि आर्नोल्ड टोयन भी बोलकर के एक हिस्टोरियन था ब्रिटिश हिस्टोरियन उसने काफी कुछ इस बारे में स्टडी किया है और इस तरह से और भी कुछ-कुछ हिस्टोरियंस से यदि आप बोलेंगे कि हम लोग हिस्ट्री पढ़ते हैं तो हमको लगेगा अरे यह कैसा एक बोरिंग टॉपिक है इस इस जैसे कि हम लोग स्कूल में हिस्ट्री पढ़ते थे तो हमको तो कैसा लगता था हिस्ट्री में क्या पढ़ना इस साल में इस राजा ने यह काम किया इस साल में ये इन लोगों के बीच में यह युद्ध हुआ बस यही सब बोरिंग चीजें एक के बाद एक रिपीट होती रहेगी किंतु एक्चुअली जद आप हिस्ट्री का स्टडी करें तो वह तो मानव सभ्यता का स्टडी है मनुष्य का स्टडी है हिस्ट्री और कुछ नहीं है मनुष्य का स्वभाव ही लार्ज स्केल पर मेनिफेस्ट होता हुआ दिखाई देता है जैसे कि वेदांत में व्यष्टि और समष्टि कहते हैं कि इंडिविजुअल लेवल पर मेरे भीतर में जीवात्मा है और कॉस्मिक लेवल पे ब्रह्मांड के लेवल पे आत्मन है या तो ब्रह्मण है तो ऐसा कैसा व्यष्टि और समष्टि दो डिवीजन हो गया है आध्यात्मिक जगत में तो वैसे ही ह्यूमन स्टडीज या तो फिर ह्यूमैनिटीज कहते हैं उसमें भी दो लेवल के स्टडीज है एक तो इंडिविजुअल लेवल का स्टडी जिसको कि हम साइकोलॉजी कहेंगे और दूसरा सोसाइटल लेवल का स्टडी जिसको कि हम हिस्ट्री कहेंगे सोशियोलॉजी कहे ना कि हिस्ट्री कहे ना कि इवन आर्कियोलॉजी कहे जो भी है यह सब एक इंटरववन थीम है इंटरववन फील्ड्स है सभी यह तो यह हिस्ट्री सोशियोलॉजी यह जो फील्ड है उसमें हमको यह जानने को मिलता है कि मनुष्य का नेचर किस तरह से ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम डेवलप होता आ रहा है तो यही हिस्ट्री का स्टडी जद हम करेंगे तो देखिए कि जैसे यह प्रश्न होगा कि जिसको हम सिविलाइजेशन कहते हैं सिविलाइजेशन का फाउंडेशन क्या है ऐसा क्या है कि अमेरिका आज इतना धनवान है अमेरिका आज इतना अमेरिकन लोगों की इंडिविजुअल जो पर कैपिटा इनकम है वो ना कि 40000 $40000 है और इंडिया की पर कैपिटा इनकम अर्थात की पर हेड एवरेज इनकम और पर एनम समथिंग लाइक दो ढाई ढाई 3 हज के आसपास होगी तो कहां ये तीज पर एनम हमारी इनकम और कहां 0000 लर उन लोगों की पर एनम पर कैपिटा पर हेड और स्वामी जी को खुद को देखिए स्वामी जी को सबने समझाया कि जद अमेरिका में यूरोप में आपकी जद आपकी प्रशंसा होगी आपको यदि स्वीकृति होगी तब कहीं जाकर के भारत में उतना असर पड़ेगा वरना भारत में कितने ही घूम लीजिए कितना ही भ्रमण कर लीजिए यह तो गुलाम देश है गुलाम मानस में जिए आप ऐसा यदि देखेंगे कि अपना ही एक देश बांधव इतना प्रगति कर रहा है आध्यात्मिकता के क्षेत्र में तो 10 लोग आकर के आपके पैर खींच करके आपको रि मने वो आपके ईर्षा की वजह से आपको ऊपर में से नीचे पछाड़ का यह लोग प्रयास करेंगे तो यह स्वामी जी को भी यह लॉजिक समझ में आया उन्होंने भी अमेरिका गए यूरोप गए वहां पर वेदांत का प्रचार किया फिर भारत आए तो यह प्रश्न होता है कि कोई भी एक देश एक राष्ट्र एक सिविलाइजेशन उसका जो प्रोग्रेस होता है फिर उसकी अवनति भी होती है भारत का ही उदाहरण देख लीजिए एक वैदिक युग था वैदिक युग में ऋषि मुनियों ने एक के बाद एक यह विज्ञान आध्यात्मिकता यह योग यह आयुर्वेद इवन यह धनुर्वेद जिसको कहते हैं जिसको वेपंस मिलिटरी साइंस मिलिटरी टेक्नोलॉजी जिसको कि धनुर्वेद कहते हैं उसमें व पाक शास्त्र ये फिर इतनी सारी विद्या हैं एक के बाद एक आप देखेंगे जिनके बारे में इतना सब कुछ डेवलप किया और यही भारत आखिर में इस तरह की परिस्थिति में आ गया कि जो कोई भी आकर के हमको लात मारे हम लोग चुपचाप सहन कर लेते थे अभी यह परिस्थिति नहीं है पहले थी 1000 साल तक चली तो यह प्रश्न होता है कि सिविलाइजेशन का फाउंडेशन क्या है एक सिविला कौन सी ऐसा फैक्टर है जो कि एक सिविलाइजेशन को बनाता है तो हम देखिए कि एक फैक्टर है आध्यात्मिकता दूसरा फैक्टर है क्रिएटिविटी और तीसरा फैक्टर है कंपेज तो ये स्पिरिचुअलिटी कंपेज एंड क्रिएटिविटी यह तीन जब तक एक सिविलाइजेशन के पास में है तब तक यह सिविलाइजेशन तब तक यह देश तब तक यह राष्ट्र प्रगति करता जाएगा और जिस दिन इन तीनों का प्रवाह अटक गया उसकी अवनति उसकी अधोगति प्रारंभ हो जाएगी क्रिएटिविटी क्या है जिसमें सब तरह के विज्ञान सब तरह की आर्ट्स सब तरह के शास्त्र सब तरह की लर्निंग यह सब कुछ इसके भीतर में आ जाता है एक समय था कि हम लोग वास्तुशास्त्र में भी महान थे फिर हम लोग पाक शास्त्र में भी हमने इतनी उन्नति की थी आयुर्वेद में हमने इतना डेवलपमेंट किया था योग और वेदांत की तो बात ही छोड़ दीजिए तो वो क्रिएटिविटी का जो फील्ड था उसमें हमारे पास एक से बढ़कर एक रत्न थे उसके बाद में कंपेज का फील्ड देखिए कंपेज अर्थात की करुणा जब मनुष्य के हृदय में करुणा जागृत होती है और करुणा में इस सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से नहीं कह रहा हूं देखिए कि भारत में स्वामी जी ने कहा है कि भारत में स्त्री का स्थान कहां पे है भारत में स्त्री है मां मात्र स्थानीय स्त्री है जबकि विदेश में देखिए कि स्त्री का स्थान है पत्नी के रूप में या तो प्रेमिका के रूप में अर्थात कि स्त्री का वो जो भाव है उसको सबसे ज्यादा उसको मैंने प्रोमिन दिया जाता है ऐसा नहीं है कि स्त्रियां मां नहीं बनती वो मिसेस हेल है या तो फिर ये मिसेस पोली बुल है उन लोगों का स्वामी जी के प्रति कितना मातृ भाव था स्वामी जी भी उनको कितना आदर और श्रद्धा करते थे तो ऐसा नहीं है कि मातृ भाव वहां पर नहीं है किंतु देश की दृष्टि से देखा जाए तो पत्नी या प्रेमिका वाला जो भाव है उसी को सबसे ज्यादा प्रोमिन से मिलता है जबकि भारत में मातृ भाव को सबसे ज्यादा प्रोमिन मिलता है उसी की सबसे ज्यादा महिमा गाई गई है तो यह मां का हृदय होता है करुणा से भरपूर अपने बच्चे के प्रति अपने परिवार के प्रति पड़ोसियों के प्रति इनका मां का जो एक भाव होता है उसको अपना किस तरह से उनको वह हेल्पफुल हो किस तरह से उनको प्रेम करें मां किस तरह से यह सोचती है मां शारदा की कहानी तो हम सबने सुनी ही है तो यह हो गया कंपेज या तो फिर करुणा और स्पिरिचुअलिटी यानी कि ये आध्यात्मिकता का क्षेत्र तो है ही है एक के बाद एक व्यास मुनि वशिष्ठ मुनि शंकराचार्य रामानुजाचार्य और फिर मने वैदिक युग के कहे तो कितने सारे ऋषि मुनि थे अवतार की तो बात ही छोड़ दीजिए भगवान राम भगवान कृष्ण भारत की इस पवित्र भूमि में एक के बाद एक अवतरित होते गए और अपनी आध्यात्मिकता से इस भूमि का सिंचन करते गए तो देखिए कि तीन चीजें होने से कोई भी एक सिविलाइजेशन महान होती है ग्रेट होती है उसका राइज होता है एक है कंपैशन दूसरा है क्रिएटिविटी और तीसरा है स्पिरिचुअलिटी अब यहां पर स्वामी जी जो कल हमको बता रहे थे अपने कॉन्शियस लेवल अर्थात कि जहां पर हम जागृत अवस्था में रहते हैं हमको लगता है कि मेरे मन की सीमाएं कितनी लिमिटेड है मुझे बस आज सुबह को मैं उठता हूं तो फिर आज के दिन का क्या प्लान करूंगा या तो फिर मैं करियर मेरा किस डायरेक्शन में जा रहा है बिजनेस में मुझे प्रमोशन कैसे मिले मैं जो भी प्रोडक्ट सेल कर रहा हूं तो मार्केटिंग कैसे बेटर कर पाए यही सब चीजें तो चलती है किंतु ये हायर आइडियाज ये हायर आइडियल से वो मनुष्य के भीतर में कहां से आते हैं व आते हैं यह सुपरकॉन्शियस प्लेन में से सुपरकॉन्शियस लेवल से जयदिश का उदाहरण मां के हृदय में जो मातृ भाव था तो वोह सुपरकॉन्शियस के साथ में डायरेक्ट कनेक्शन था तो वहां से यह मातृभासा जैसे स्वामी जी का ये क्रिएटिविटी इतना वो स्वामी जी ने अमेरिका जाकर के वो जो लेटर लिखते हैं उसमें एक जगह पे लिखते हैं इन लोगों को तपस्या पपसुरा दिखाने से नहीं चलेगा इनको तो विद्वता और वक्ति होता यह तो दिखाना पड़ेगा तभी ये लोग मानेंगे अदर वाइज इन लोगों को कुछ पड़ी नहीं है आपकी साधु होता की तो यह विद्वता और वक्त होता की जो धूम मचाई स्वामी जी ने वो क्रिएटिव आइडियाज क्रिएटिव थिंकिंग निकोला टेस्ला स्वयं निकोला टेस्ला के बारे में सुना है कि वह किसी को अपॉइंटमेंट नहीं देता था इतना बिजी रहता था वो टेस्ला स्वयं स्वामी जी के न्यूयॉर्क क्लास में अपना काम छोड़ कर के लेबोरेटरी छोड़ कर के वह स्वामी जी के न्यूयॉर्क क्लासेस में आता था और उस समय तो क्लासेस पूरे भर जाते थे तो पीछे में खड़ा रहता था पीछे में खड़े रह के खड़े-खड़े बैठने की जगह नहीं है खड़े-खड़े स्वामी जी का लेक्चर सुनता था तो इस तरह के साइंटिस्ट क्यों स्वामी जी को सुनेंगे रॉकफेलर रके फेलर यानी कि उस समय का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियलिस्ट तो वो आकर के स्वामी जी के पास में किस तरह से चैरिटी किस तरह से अपनी खुद की संपत्ति का ट्रस्ट बना कर के देश सेवा में यूज किया जाए वह स्वामी जी के पास में सीख करके गया स्वामी जी जब ब्रिटेन गए थे तो एक राज परिवार की एक लेडी आकर के स्वामी जी को मिली थी माने बाकी सब लोग तो आते ही है स्वामी जी के पास में किंतु जिस गुलाम देश का एक धर्म महे एक धर्म प्रचारक उसको राज परिवार की कोई लेडी मिलने को जाए वो उस समय बहुत बड़ी घटना मानी जाती थी हालांकि उस घटना को पूरा छुपा दिया गया था ऑफिशियल कहीं पर स्वीकार नहीं किया गया है किंतु जो भी है अपने रिकॉर्ड्स में यह सब बातें हैं तो यह क्रिएटिविटी और ऑफकोर्स ठाकुर के दर्शन एक के बाद एक उनको जो दर्शन होते थे यह दर्शन यह सब आते थे यह सुपरकॉन्शियस लेवल से तो यह कल स्वामी जी ने हमको बताया कि सुपरकॉन्शियस इज द रिपोजिटरी ऑफ कंपेज क्रिएटिविटी एंड स्पिरिचुअलिटी यह सुपरकॉन्शियस एक ऐसा बैंक है जिसमें भरपूर माय रिजर्व बैंक में रिजर्व बैंक केसे एक करेंसी वह इशू करता है उसके ऊपर में वह गवर्नर का साइन रहता है ₹1 की नोट होगी तो गवर्नर कहता है कि मैं ₹1 देने का वादा करता हूं तो इसी तरह से यह है अपनी यह भगवान की बैंक और यह बैंक में से यह करेंसी जो निकलती है वह है यह कंपेरिजन या तो फिर यह क्रिएटिविटी या तो य स्पिरिचुअलिटी और इसके ऊपर में जो भगवान की बैंक के गवर्नर कौन है वह डिवाइन बैंक के कैलाश में यह जो बैंक है वह भगवान शिव स्वयं उनकी साइन से यह सब करेंसी पास होती है तो यह जो स्पिरिचुअल करेंसी इसकी रिपोजिटरी इसकी बैंक इसका यह जो फिक्स डिपॉजिट अकाउंट जो भी आप बोल दीजिए इसको आज की लैंग्वेज में वो सब सुपरकॉन्शियस लेवल पे है अच्छा कल एक टॉपिक डिस्कस दूसरा हुआ था कि इन लोगों को कैसे पता जैसे कि भारत में तो प्राणायाम का विज्ञान डेवलप हुआ है लोग प्राणायाम का विज्ञान की सहायता लेकर के यह सब चीजें डेवलप कर सकते हैं सुपरकॉन्शियस के साथ में कनेक्शन बिठा सकते हैं किंतु अमेरिका में तो इन लोगों को यूरोप अमेरिका स्वामी जी कहता है नाय क्रिश्चियन साइंस कहो ना कि ये फेथ हीलर्स कोहो ना कि ये जो भी लोगों को कहो आप यह सब लोग उन्होंने प्राण शक्ति का ही सहारा लेकर के यह सब सिद्धियां प्राप्त की है तो प्रश्न होगा कि उन्होंने प्राणी कनेक्शन कैसे बिठाया होगा सुपरकॉन्शियस के साथ में यह होट लाइन कैसे स्टार्ट की होगी तो इसका उत्तर है प्राणायाम का हार्थ क्या है प्राणायाम का हार्ट क्या है प्राणायाम का हृदय क्या है हृदय यह है कि हम लोग यह नाक दबा करके एक साइड में से पूरक फिर दूसरी साइड में से रेचक फिर दो दोनों नाक बंद करके कुंभक ऐसा सब कुछ करें पूरक रेचक कुंभक नहीं यह प्राणायाम का हार्ट नहीं सही सही यह सब एक्सरसाइज है जो कि हेल्पफुल है किंतु सबसे इंपॉर्टेंट एक्सरसाइज है एकाग्रता कंसंट्रेशन यह कंसंट्रेशन देखिए कि जितने बड़े-बड़े साइंटिस्ट थे जितने बड़े-बड़े आर्टिस्ट है जितने बड़े-बड़े म्यूजिशियंस है ये बड़े-बड़े स्पोर्ट स्टार्स है इन लोगों को आप देखिए 100 अवर्स का ना कि 1000 आवर्स का रूल ऐसा कुछ है मैं भूल गया एगजैक्टली यह सब चलता रहता है तो मोटिवेशनल किताब है आप यह 1000 आवर्स प्रैक्टिस कीजिए तो आप इस इस विद्या में माहिर हो जाएंगे इसमें आप एक्सपर्ट हो जाएंगे आपको क्रिकेट सीखना है तो इतना घंटा प्रैक्टिस कीजिए तो आप क्रिकेट बहुत बढ़िया क्रिकेटर हो जाएंगे आपको यदि एमबीए की कंपट आईए जो आईआईटी जी यह 10000 अवर्स यस 10000 अवर्स तो यह आईआईटी जी यह सब एग्जामिनेशन क्रैक करनी है नेशनल लेवल की तो यह 10000 अवर्स ने इतना कुछ प्रैक्टिस कीजिए तो आप यह सब परीक्षा में आसानी से पार हो जाएंगे इसके पीछे का सीक्रेट क्या है कंसंट्रेशन यदि आपके भीतर में कंसंट्रेशन नहीं रहेगा तो 10 मिनट आप ठीक से नहीं बैठ पाएंगे स्टडी नहीं कर पाएंगे प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे 10000 अवर्स यानी कि 10000 घंटे तो कहां दूर की बात है तो एक एक जगह पर बैठ कर के एक विद्या में एक स्किल में एक चीज में अपने मन को परोना अपने मन को कंसंट्रेट करना यही प्राणायाम का हार्ट है यह जो न्यूटन की बात हमने देखी ये मैं बार-बार कहता रहता हूं क्योंकि मुझे बड़ी ही पसंद है दो तीन चीजें कोई कभी न्यूटन को पूछता था कि आप इतना दूर कैसे देख पाए जो कि बाकी साइंटिस्ट इतना दूर तक नहीं देख पाए आप इतना किस तरह से इतने इंपॉर्टेंट सिद्धांत आपने खोज निकाले फिजिक्स के तो एक बार तो वह बड़ी ही विनम्रता से दनता पूर्वक कहता है बिकॉज़ आई वाज स्टैंडिंग ऑन द शोल्डर्स ऑफ द जायंट्स मैं बहुत मने विराट कद के जो लोग थे उनके कंधों पे खड़ा था अर्थात कि न्यूटन के आने से पहले ही यह कोपरनिकस है यह प्लेटो है यह गैलीलियो है उन्होंने बहुत सारी इंपॉर्टेंट डिस्कवरीज कर दी थी तो टन ने उसी डिस्कवरीज का फाउंडेशन बना कर के अपनी डिस्कवरीज ऐड की तो यह तो एक विनम्रता से उसने कह दिया कि और बड़े-बड़े महामानव आए थे उनके कंधों पर मैं खड़े रहा इसलिए मैं इतना दूर तक देख पाया किंतु और एक बार वह क्या कहता है बाय थिंकिंग अपॉन वन प्रॉब्लम अगेन एंड अगेन एंड अगेन एंड फॉर अ लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम टिल आई डू नॉट टिल आई फाइंड इट्स सॉल्यूशन अभी यह वाक्य रचना एगजैक्टली मुझे याद नहीं है किंतु समथिंग लाइक दैट कि कोई भी एक प्रॉब्लम के ऊपर में घंटों घंटों घंटों भर तक में सोचता ही गया सोचता ही गया सोचता ही गया खाना पीना सब बंद कर दिया तब कहीं जाकर के मुझे इसके इस प्रश्न में इस प्रॉब्लम में मुझे प्रकाश दिखाई दिया उसका मुझे उत्तर मिला वाचस्पति मिश्र की बात भी हमने कही कि जिस दिन उनकी शादी हुई उसी दिन वह पता नहीं वह वेदांत की थिरी में ऐसे डूब गए सोचा कि मैं इसके ऊपर पर मैं ग्रंथ लिखता हूं लिखते गए लिखते गए लिखते गए पता नहीं समय काल सब कुछ भूल गए अपने खुद की स् अपना खुद का हेल्थ अपनी खुद की स्वास्थ्य सब कुछ भूल कर के जब आखिर में ग्रंथ समाप्त किया तब देखा कि एक स्त्री वो वहां पे उनके लिए खाना वगैरह आ कर के रख रही है वो खाते भी थे तो पता नहीं हश नहीं रहता था सब सोच पूरी उस ग्रंथ के भीतर में पड़ी है तो जब उस होश आया तो देखा कि ये स्त्री उनकी सेवा कर रही है तो पूछा तुम कौन हो तो उसने कहा मैं तो आपकी पत्नी हूं तो अच्छा तुम्हारा नाम क्या है तो उसने कहा भामती तो भामती के नाम से उस उन्होंने अपने ग्रंथ का नाम रखा कि देखिए मैं तो उसकी देखभाल नहीं कर पाया इतने साल और उसने मेरी संभाल रखी इसके लिए उसका नाम मेरे ग्रंथ के साथ में हमेशा जुड़ जाना चाहिए ग्रंथ का नाम रखा भामती टिका तो यह क्या है कोई भी अ आप जिसको कि कहे कि लेखक है कोई भी यह स्पोर्ट्समैन है कोई भी यह संगीतकार है यह जाकिर हुसैन को देखिए ये जितने भी बड़े-बड़े संगीतकार अभी संगीत में मेरा इतना इंटरेस्ट नहीं है इसलिए मैं ज्यादा नाम नहीं बता पाऊंगा किंतु ये जितने भी बड़े-बड़े संगीतकार हैं उनको देखिए घंटों के घंटों रियास करते ही जाते हैं करते ही जाते हैं मैंने एक संगीतकार के बार सेनाई का मैं नाम भूल गया जो कि बहुत बड़े प्रख्यात शहनाई का है काशी में रहते हैं और वो उन्होंने उनका एक इंटरव्यू मैंने पढ़ा था वो मुझे कहते थे बिस्मिल्ला खान अच्छा अच्छा वेरी गुड तो उनका एक इंटरव्यू मैंने पढ़ा था वो क्या कहते हैं कि मैं वो काशी में रहते थे तो तो गंगा के किनारे बैठ कर के मैं घंटों के घंटों में रियाज करता रहता था तो यह रियाज करते करते करते मेरा ऐसा प्रैक्टिस कभी-कभी क्या होता था वो मुंह में से यह खून निकलने लगता था वोह शहनाई बजानी है ना सब समय आप उसके ऊपर में फूंक रहेंगे तो क्या फेफड़ों पर तो असर होगी तो मुंह में से खून निकल आता था किंतु फिर भी रियाज नहीं बंद करते थे तो यह फ्यूरियस कंसंट्रेशन एक ऐसा कंसंट्रेशन की आप खाना पना अपना खुद का सुख सुविधा सब कुछ सर्दी गर्मी ठंडी दिन रात अपने बंधु बांधव यह संबंधी सब कुछ भूल कर के एक चीज में आप इतने मग्न हो जाते हैं इतना अपने को उसमें डुबा देते हैं कि उसके अलावा आपके सामने आपके जीवन में और कुछ नहीं रह जाता तब उस विद्या के साथ में आप एकाकार हो जाते हैं और उसमें आप सिद्धि प्राप्त करते हैं यही प्राणायाम यह जो स्वामी जी कहते हैं ना हमारे भीतर में जो प्राण है प्राण को जागृत करना है प्राण को जागृत करके यह कॉस्मिक प्राण के साथ में कनेक्शन बिठाना है कॉस्मिक प्राण यानी कि सुपर कॉन्शियस लेवल पे जब अपनी नॉर्मल कॉन्शियस का जब यह कनेक्शन बैठेगा तब वहां से इस तरह की विद्या इस तरह की बुद्धि इस तरह की क्रिएटिविटी की बारिश अपने यह नॉर्मल कॉन्शियस लेवल पे होनी शुरू हो जाएगी कि लोग ये जो विद्या देखेंगे तो वह अभिभूत हो जाएंगे जैसे य बिस्मिल्लाह खान है कि जो भी है बड़े-बड़े संगीतकार उनका म्यूजिक सुनकर के उनकी रचना सुनकर के लोग कितने मतलब खुश हो जाते लोग दुखी है उदास है किंतु वो संगीत सुनिए तो बस वो उनका मन यह हो गया अभी य आजकल तो यह फिर भी नॉर्मल उनका लगता है प्रैक्टिस एक समय था जबकि वो कौन-कौन से सब राग थे वो उस बारिश नहीं होती और उस राग आपका उस राग गाएंगे तो बारिश होना शुरू हो जाएगी बहुत सारे राग है अगेन मुझे तो यह सब याद नहीं किंतु देखिए कि आप इस तरह का राग इस तरह से गाएंगे कि उसको बारिश होना शुरू हो जाएगा मेघ राग ना कि मलहार राग वो जो भी है तान सेन तानसेन का बड़ा ही नाम था तो कौन से राजा के वो उसमें वो कैबिनेट में वो था नवरत्न तांस आई थिंक अकबर के ही राजा में उसके उसमें वो तो अकबर ने एक बार कहा कि यह तो बहुत बड़ा संगीतज्ञ है तो तानसेन ने कहा अरे महाराज आप क्या कहते हैं कि मैं बड़ा संगीतज्ञ हूं आप मेरे गुरु को देखने को चलिए मैं तो यहां पर आपकी कृपा पर बन रहा हूं मेरा परिवार का जो गुजरान चलाना है मैं यहां पर आपके सामने गाता हूं आपकी खुशी के लिए और आप मुझे सामने यह धन देते हैं तो मेरे परिवन का गुजरान चलता है अर्थात कि मैं अपनी विद्या को बेच रहा हूं किंतु जो जिसके पास में सही विद्या है ना वो कभी भी अपनी विद्या को बेचेगा नहीं जो विद्या को सेल करता है उसकी विद्या का कोई मतलब उसकी विद्या एक लेवल पे जाके अटक जाती है जो स्व प्रसाद के लिए अपने खुद के आनंद के लिए और यदि वह धार्मिक व्यक्ति है तो कहेगा कि ईश्वर के आनंद के लिए गा रहा है तो उसकी विद्या का लेवल ही कुछ अलग होगा बोल कर के वह राजा को अपने गुरु को मिलाने के लिए ले गया वह गुरु जंगल में बैठे हैं और गा रहे हैं तो गा रहे हैं तो पूरा जंगल जैसे कि उस धून में मत होकर के झूम रहा है तो मने देखिए कि यह विद्या को आप किस लेवल पर ले जा सकते हैं और यह सब तो सामान्य विध्या है संगीत विद्या ना कि यह स्पोर्ट्समैनशिप है न कि यह कंप्यूटर कोडिंग है यह जितने भी कंप्यूटर कोडर्स को देखिए यह प्रोग्रामर्स थे ये उनकी आप कहानियां पढ़ेंगे दिन रात बैठ कर के प्रोग्रामिंग करते ही रहेंगे करते ही रहेंगे एक के बाद एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशंस ये वो सब डेवलप करते ही रहेंगे आज यह वर्ल्ड वाइड वेब यह इंटरनेट यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मुझे थोड़ा सा इंटरेस्ट है तो उसके शुरू से ही उसका जो न्यूरल नेटवर्क और यह जो लार्ज लर्निंग मॉडल्स और यह जो मशीन लर्निंग यह जो सब बेसिक कांसेप्ट जब से यह डेवलप हो रहे हैं यह मान लीजिए कि 2010 के बाद की बात है तो मैं उसको मैं नियमित रूप से पढ़ता रहता हूं तो यह जो सब न्यूरल नेटवर्क्स वगैरह जो डेवलप हो रहे थे तभी मैं इसके बारे में पढ़ता था तब मुझे लगता था कि भाप रे किस लेवल का यह इनोवेशन है किस लेवल की ये क्रिएटिविटी है कि यह मनुष्य का ब्रेन जिस तरह से मल्टी मॉडल ब्रेन है अपना मल्टी लेयर ब्रेन है उसी उसको समझ करके उसी के बेस के ऊपर में यह न्यूरल नेटवर्क बना रहे हैं तो मने देखिए कि यह जो जिनको कि हम जागतिक विद्या कहते हैं जिनको कि हम सेकुलर साइंस कहते हैं उसमें भी यदि आप दिन रात एक कर दीजिए अपने मन को पूरा डाल दीजिए तो आप क्या से क्यास रीजन नहीं कर पाएंगे जो कहानियां लिखते हैं अरे कहानियों में भी ऐसा जादू होता है जैसे कि यह जेके रोलिंग उसने यह हैरी पॉटर लिखी है उसकी 40 करोड़ बुक्स आज सर्कुलेशन में है 40 करोड़ माने ये छोटा ये नंबर नहीं है तो उसकी जो स्ट्रगल मुझे ये सब बायोग्राफी पढ़ना मुझे बड़ा अच्छा लगता है ये जो ग्रेट मैन होते हैं ना जिन्होंने अपने जीवन में कुछ अचीव किया है जिन्होंने अपने जीवन में संघर्ष करके कुछ अचीव किया है अच्छा आपके पिताजी बहुत बड़े कोई है धनवान व्यक्ति और सीधा जाकर के उनका बिजनेस आपने संभाल लिया तो आपका खुद का पर्सनल अचीवमेंट तो ऐसा कुछ है नहीं किंतु जो लोग बिल्कुल मने ग्रास रूट लेवल से स्ट्रगल करके ऊपर आते हैं इन लोग और फिर ग्रेट होते हैं जैसे कि नेपोलियन है ना कि जैसे कि ये बहुत सारे हैं इस तरह से तो यह बायोग्राफी पढ़ना मुझे बड़ा अच्छा लगता है तो जेके रोलिंग का मैं बायोग्राफी पढ़ रहा था तो किस तरह से शी वाज अ सिंगल मदर डाइवोर्स हो गया था उसकी एक बच्ची है उसका हाथ में और वो बच्ची को ले करके वो पोर्ग में रहती थी अपने हस्बैंड के साथ में तो उसके साथ में झगड़ा हो गया उसके हस्बैंड ने उसको मार कर के भगा दिया अपने घर में से तो अभी बेचारी क्या करेगी वो छोटी बच्ची को लेकर के पोर्टल से स्कॉटलैंड वापस आई जहां प उसका घर था वो अपनी बहन के साथ में रह रही है अभी क्या है कि बहन के पास थोड़ा पैसा वगैरह है तो अभी वो उसका भी एक उसकी भी एक बच्चा ना कि बच्ची ऐसा कुछ है तो अभी उसकी बहन उसके लिए खिलौने लाएगी वगैरह करेगी तो अभी अपनी बहन को घर में तो रहने देती है जेके रोलिंग को किंतु ऐसा तो नहीं है ना कि खुद की बच्ची के लिए जितने भी खिलौना लाएगी वोह उसके लिए भी लाएगी ऐसा तो मने हमेशा एक डिस्क्रिमिनेशन तो बना ही रहता है तो इस तरह से जीना फिर वह उसने एक सेपरेट अपार्टमेंट लिया जेके रोलिंग ने उस अपार्टमेंट में हिटिंग नहीं है अभी उस वहां पर तो इतना बर्फ गिरता है बर्फ गिरेगा और वहां पे प्रॉपर टिंग की जद नहीं है तो तो कितना मुश्किल हो जाता है रहना वो अपनी बच्ची को स्ट्र लर में बिठा कर के कैफे जो होता है ना जहां पे कॉफी मिलता है वो कैफे कल्चर बड़ा ही वहां पे ये है तो कैफे में चले जाइए एक टेबल पे आराम से बैठे-बैठे आप कॉफी पीते रहिए तो एक कैफे में चली जाती है वहां उसका वो जो उसका मालिक था उसका रिलेटिव था डिस्टेंट रिलेटिव तो उसको लंबा टाइम तक एक टेबल प बैठे रहना देता था तो वहां पे वो जो फायर फायर जल रहा है आगन अग्नि जल रहा है फायर पलेस में वहां पे वो बैठे थोड़ा सा गर्मी मिलेगा और वहां पे बैठे-बैठे उसने वो किताब लिखी है वह स्टोरी लिखी इस स्ट्रगल करके व ऊपर आई है और जो कंसंट्रेशन है उसका लिखने का उसका जो पूरा इंटरेस्ट है एक कहानी को डेवलप करने में जैसे कि उसने अपना पूरा जीवन इस कहानी को डेवलप करने के लिए उसने लगा दिया जितने भी बड़े-बड़े साइंटिस्ट्स के बारे में पढ़ेंगे इस और फिर इस दृष्टि से आप ठाकुर महा स्वामी जी का जीवन देखिए हम लोगों को लगता है कि अरे यह तो आध्यात्मिक लोग हैं तो नेचरली कि यह लोग प्रैक्टिस वगैरह करते होंगे जब ध्यान स धारणा वगैरह तो करते होंगे तो कौन सी बड़ी बात है किंतु ये जब हमको इसका साइंस पूरा समझ में आता है एकाग्रता का और प्राण का और यह कॉन्शियस लेवल सुपरकॉन्शियस लेवल का उस दृष्टि से फिर हम इनको देखिए स्वामी जी के जीवन में जो एकाग्रता थी ठाकुर के जीवन में जो एकाग्रता थी ठाकुर जब वो ध्यान समाधि मग्न हो जाते थे तो पूरे शरीर पर मिट्टी जम जाती थी जटाए बढ़ जाती थी और उनको होश नहीं रहता था स्वामी जी का उदाहरण तो हमने कल ही देखा कि गिरीश घोष के साथ में ध्यान करने को बैठे हैं वहां पर दक्षिणेश्वर में और गिरीश ध्यान नहीं कर पा रहा है क्योंकि मच्छर काट रहे हैं बार-बार फिर उसने आंख खोल के देखा तो जो दृश्य देखा वह बेचारा डर गया स्वामी जी के शरीर पर इतने सारे मच्छर इकट्ठा होकर के बैठ गए जैसे कि मच्छर का ब्लैंकेट शरीर पर बिछाया हो तो गिरीश ने इमीडिएट खड़े होकर के नरेंद्र को धक्का मारा कि अरे भाई तुम देखो तुम्हारे शरीर प इतने मच्छर है तो जैसे पत्थर की मूर्ति ध्यान में बैठी है उसको धक्का मारेंगे तो कैसी ध्यान मुद्रा में ही वो गिरेगी वैसे ही स्वामी जी पत्थर जैसे हो गए थे ध्यान करते-करते उसी मुद्रा में गिरे पीछे में तो देखिए कि इसको कहते हैं लेवल ऑफ कंसंट्रेशन जबकि आपके शरीर के ऊपर में से मन बिल्कुल चला जाएगा जिस ऑब्जेक्ट के ऊपर में आप मन को एकाग्र करते हैं जिस विध्या के ऊपर में आप मन को एकाग्र करते हैं उस ऑब्जेक्ट वह चाहे ईश्वर हो ना कि चाहे संगीत हो ना कि चाहे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग हो ना कि चाहे क्रिकेट हो उसमें आप मास्टर हो जाएंगे तो यह एकाग्रता टू द एक्सक्लूजन ऑफ एवरीथिंग एल्स फोकस अपॉन द ऑब्जेक्टिव टू द एक्सक्लूजन ऑफ एवरीथिंग एल्स इज द सीक्रेट ऑफ प्राणायाम इसीलिए स्वामी जी कहते हैं ऑल मैनिपुलेशंस ऑफ द सटल फोर्सेस ऑफ द बॉडी द डिफरेंट मेनिफेस्टेशंस ऑफ प्राण इस इफ ट्रेंड गिव अ पुश टू द माइंड हेल्प इट टू गो अप हायर एंड बिकम सुपरकॉन्शियस फ्रॉम वेयर इट ए यदि हमारे शरीर में जो भी सूक्ष्म शक्तियां है उसका हम नियमन करना सीख ले यदि हमारे शरीर में विभिन्न तरह के प्राण है प्राण अपान ज्यान समान यह जितने भी प्राण उनको हम कंट्रोल करना सीख ले उनको हम ट्रेन करें तो वह हमारे मन को धक्का देंगे हमारे कॉन्शियस मन को धक्का देक के ऊपर में धक्का देकर के उसको सुपर कॉन्शियस लेवल पर ले जाएंगे और उस सुपरकॉन्शियस लेवल पर जाकर के हमारा मन फिर कार्य करेगा आज अभी कॉन्शियस लेवल पर कार्य कर रहा है यदि हमारे भीतर में प्राण है उस प्राण को यदि हम ट्रेन कर पाए तो प्राण की मदद से इस मन को धक्का देकर के सुपरकॉन्शियस लेवल पर ले जा सकते हैं उसको सुपरकॉन्शियस लेवल से उसको फिर वह अपना मन कार्य करेगा जैसे कि ठाकुर कहते हैं मां राश ठेले दे व विद्वान लोगों के साथ में बात कर रहे हैं पहले तो लगा कि मैं तो मूर्ख हूं और यह इतना बड़े विद्वान है फिर सडन भीतर में से एक हासी आई माने वो ईश्वरीय आवेश हुआ तो भीतर में से एक अट हास्य प्रकट हुआ यह देख कर के कि ये जो सब सामने सो कल्ड विद्वान है तथाकथित विद्वान उनकी नजर उस गीध की तरह है कि उड़ते तो है बड़े आकाश में किंतु नजर है कुड़े दान के ऊपर में तो ऐसे तथाकथित विद्वानों के सामने ईश्वरीय प्रभा ईश्वरीय माया स्वयं प्रकट होकर के उनके सामने जब बात करेगी तो यह पंडित लोग सब मुंह में उंगली डाल देंगे उनकी बात उनकी वाणी बंद हो जाएगी मंत्र मुग्ध होकर के वे लोग ठाकुर को सुनेंगे तो ये बांगला में जो कहते हैं ठाकुर की मां राज ठेले दे अभी मां जैसे कि वो जो धन का ये जो धान का जो भंडार है बारबार वह धकेल देगी अपने मन में विद्या का भंडार विद्या को कभी समाप्त नहीं होने देग तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओ श दक्षा देवी परि श राम कृष्णा अर्पण मस्तु विल पावर तो चाए ही चाहिए फिर साथ में यह इंद्रिय संयम भी चाहिए अब जैसे बहुत इंटरेस्ट है यह मूवी देखने के लिए फिर मित्रों के साथ में गप लगाने के लिए घूमने फिरने में यह इंटरेस्ट बड़े स्ट्रांग होंगे तो आपका जितना ही विल पावर क्यों ना होगा आप पढ़ाई करने को बैठे हैं सब समय वह चीजें आपको खींचे गी यानी कि वह सब चीजें जिनको कि हम इंद्रिय सुख कहते हैं उसके ऊपर में संयम चाहिए यह जो बड़े-बड़े जो लोग होते हैं ना देखि वो लोग इंट्रोवर्ट कितने होते हैं बड़ा इजली चलो होटल में चले जाते हैं आज चलो वहां पर घूमने के लिए चले जाते हैं लो इंट्रोवर्ट होते हैं यह सब एंगेजमेंट को थोड़ा सा अवॉइड करते हैं नेचुरली इंट्रोवर्ट होते हैं ऑफकोर्स हाईएस्ट मेनिफेस्टेशन है इंद्रिय संयम का ब्रह्मचर्य किंतु ब्रह्मचर्य को फिलहाल छोड़ दे वह तो एकदम आध्यात्मिक उच्चा यों पर जाने के लिए है एक जनरल दृष्टि से भी देखें इंद्रिय संयम बड़ा ही आवश्यक है उसके बाद में ही विल पावर प्रॉपर काम करना शुरू करेगा वरना सब समय क्या होगा कि यह इंद्रियां जो है वह विल पावर के सामने युद्ध करती रहेगी तो कहां विल पावर को आप कंसंट्रेशन करने में लगाएंगे उसकी वजह से इंद्रियों के साथ युद्ध करने में ही वह बेचारा उसकी सब एनर्जी खत्म हो जाएगी माने देखिए कि जिसको हम जनरली एंटरटेनमेंट कहते हैं आजकल तो उसको तो उसके ऊपर में थोड़ा सा तो आपको एक लिमिट रखना पड़ेगा वैसे तो है नहीं कि सबको साधु होना है साधु जीवन पूरा एक अलग ही चीज है किंतु इन जनरल आपको यह जो ये सब चीजें हैं उसको अवॉइड करना बेटर है ये जब टॉपर्स को देख लीजिए जितने भी टॉपर्स है वो क्यों गरीब परिवार से आते हैं क्योंकि एक बार घर में पैसा जाओ जलाली हो गया उसके बाद में बच्चों के पास में बहुत सारे ऑप्शंस आ जाते हैं वो बोलेंगे चलो आज वहां पर चलते हैं चलो आज यह करते हैं चलो गाड़ी लेकल के घूमने के लिए निकल जाते हो फिर पढ़ाई लिखाई का समय कब मिलेगा प्रॉपर कंसंट्रेशन कब होगा जबकि वो जो मैंने वो सब्जी बेच रहा है ना कि वह मजदूर है उसके घर में और कोई इंस्ट्रूमेंट ही नहीं है एंटरटेनमेंट का व बेटर है कि वो बच्ची या बच्चा बेटा बेचारा बैठ कर के वो पढ़ाई लिखाई ही करता रहेगा वो लड़कियां सबसे ज्यादा आजकल क्यों पढ़ाई लिखाई में आगे चली जाती है क्योंकि लड़कों के पास में बहुत सारे ऑप्शन फिर भी होते हैं इवन गरीब घर का भी लड़का होगा 10 मित्र होंगे दिन में 10 बार घर से बाहर निकलता होगा लड़कियां है कि सर्टेन एज के बाद में घर से निकलना उन के लिए बार-बार थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है तो वैसे ही घर में रहना है वैसे ही गरीब परिवार है और तो कोई आपका आउटलेट नहीं है आपकी एनर्जीस को मेनिफेस्ट करने का तो फिर स्टडी है तो इसीलिए गरीब घर की लड़कियां देखेंगे कि टॉप 10 में सबसे ज्यादा रिप्रेजेंटेशन उनका होता है आजकल एक्चुअली सुपरकॉन्शसनेस तो डेस्टिनेशन है और शरणागति या समर्पण है वह जर्नी या तो फिर इंस्ट्रूमेंट टू रीच थेर अब जैसे मुझे दिल्ली जाना है तो सुपर पर कॉन्शसनेस दिल्ली है मैं ट्रेन में बैठ के जाऊंगा या प्लेन में बैठ के जाऊंगा वह सब शरणागति या समर्पण है और यह सब टर्मिनोलॉजी जो है इनमें ऐसा कोई हार्ड एंड फास्ट डिफरेंशिएबल है चारों की भक्ति यानी कि ईश्वर के प्रति अपना समर्पण या तो फिर शरणागति या तो फिर ईश्वर के ऊपर में निर्भरता फिर कर्मा है कि निस्वार्थ सेवा फिर ये निस्वार्थ कार्य या तो ईश्वर समर्पित कार्य फिर ज्ञान है कि एक्चुअली अपना ज्ञान का बेसिक अर्थ नॉलेज नहीं है ज्ञान का बेसिक अर्थ है विल पावर और इंद्रिय संयम तो यह इंद्रिय संयम ज्ञान का रास्ता है और फिर राजयोग का बेसिक डेफिनेशन है मन की एकाग्रता तो ये मन की एकाग्रता एक रास्ता है दूसरा है कि इंद्रिय संयम तीसरा है कि समर्पण या तो फिर निर्भरता ईश्वर निर्भरता और चौथा है यह निष्काम कर्म या तो फिर ईश्वर समर्पित कर्म यह चार बेसिक रास्ते हैं इन चार रास्तों का यूज करके हम लोग सुपरकॉन्शियस लेवल पर पहुंच सकते हैं इंद्रिय संयम जो एक्चुअली है ना वह आपको विल पावर के अलावा और कोई माध्यम नहीं है या तो फिर मैं क्या कहूंगा पता है इसको आप इस तरह से देखिए कि इंद्रिय संयम आपका डेस्टिनेशन है इंद्रिय जैसे कि आप जैसे ठाकुर का एक उदाहरण बड़ा ही सुंदर है जितना जितना आप सूरज के नजदीक जाते जाएंगे आपको उड़ना आता है और मान लीजिए आप सूरज की ओर उड़ रहे हैं तो जितना जितना आप सूरज के पास जाएंगे उतना ही आप पृथ्वी से दूर होते जाएंगे मान लीजिए आपको अंधेरे को भगाना है तो उसका एक क्या उपाय क्या है कि मैं अंधेरे के साथ में व एक तलवार लेकर के ना बंदूक लेकर के लडू ना कि मैं उ उजाले को अपने वहां पर डालो कि यहां पर अंधेरा है मैं उजाला डालता हूं तो जैसे उजाला डाला तो अंधेरा अपने आप चला जाएगा तो वैसे ही इंद्रिय संयम बोलकर के यदि हम डायरेक्टली कुछ करने को जाएंगे तो हमको शायद फ्रस्ट्रेशन ही हाथ में आएगा यह सन्यास का जो रास्ता है वह विल पावर का कि जोर करके अपने मन को संयम करने का वह एक पूरा रास्ता ही अलग है एक सामान्य दृष्टि से देखा जाए तो ये जो साधनाएं है कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान इन साधना हों का अनुष्ठान करके देखेंगे कि ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम 10 साल 15 साल धीरे-धीरे करके यह इंद्रियां अपने से संयमित होती जा रही है हमको समझ में भी नहीं आ रहा है हमको पता भी नहीं चलेगा कि अरे यह मैं आज आप जैसे मान लीजिए कि आप कथामृत पढ़ने की शुरुआत करते हैं यहां पर अपने गुरु महाराज से आपने दिक्षा ली है और मंत्र जप नियमित कर रहे हैं बीच-बीच में सत्संग में जाते हैं मंदिर में जाते हैं उत्सवों में पार्टिसिपेट करते हैं जो कि एक जनरल गृहस्थ के लिए यह विधान है यह सब इतना आप 10 साल करेंगे तो देखेंगे 10 साल पहले आप कहां थे और आज आप कहां पे हैं और ऐसा नहीं है कि आपने कोई बहुत बड़ा कुछ मने आपने एफर्ट लगा दिया ना कि कोई बहुत बड़ा युद्ध कर दिया ना कि ऐसा कुछ आपने कर दिया सहज रूप से ही आपका जीवन चल रहा है सहज रूप से ही बच्चों की समाल रह रहे हैं सहज रूप से ही घर चला रहे सहज रूप से ही खाना पना बना रहे हैं सहज रूप से ही संसार का सब जो ड्यूटीज होता है जो यह ऑब्लिगेशंस होता है उसको निभा रहे हैं साथ-साथ में ही यह कर रहे हैं सहज रूप से ही 10 12 साल में देखेंगे कि आप कहां थे और कहां पहुंच गए