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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 12 Feb 2025

Invocation

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद भारत में दिए हुए भाषणों में से एक भाषण माय प्लान ऑफ कैंपेन जिसका हिंदी नाम है मेरी समर नीति जिस पॉइंट को हम डिस्कस कर रहे हैं उस पॉइंट का नाम है गुड एंड इव आर टू साइड्स ऑफ द सेम कॉइन इष्ट और अनिष्ट अच्छा या बुरा यह दोनों एक ही सिक्के के दो पहलु हैं अभी इसको कल हमने एक बड़ा ही इंपोर्टेंट पॉइंट डिस्कस किया था पहले तो मैं कल वाला पैराग्राफ फिर से एक बार पढ़ लेता हूं और फिर जो थोड़ा सा डिस्कशन कर लेते हैं फिर से एक बार स्वामी जी क्या कहते हैं चिल्ड्रन आई चिल्ड्रन टू ट्राई टू रेमेडी एविल इज नॉट द ट्रू वे अनिष्ट को ठीक करना इस समाज में इस समाज में तो दूषण है ही है दूषण को दूर करने की इच्छा से कार्य करना यह कोई सही रास्ता नहीं है अवर फिलोसोफी टीचस दैट इवल एंड गुड आर इटरनल कंजन द ओवर्स एंड द रिवर्स ऑफ द सेम कोइन हमारी फिलोसोफी हमारा दर्शन शास्त्र हमको सिखाता है कि इष्ट और अनिष्ट अच्छा और बुरा वह दोनों हमेशा से एक दूसरे के साथ में जुड़े हुए हैं जैसे कि दो जुड़वा भाई हो या तो जिसको कि कंजो ट्विंस कहते हैं सिया मीस ट्विंस उसकी तरह यह एक ही सिक्के की दो पहलुओं हैं इफ यू हैव वन यू मस्ट हैव द अदर यदि इष्ट है तो अनिष्ट भी आएगा ही और यदि अनिष्ट है तो इष्ट भी साथ में आएगा अ वेव इन द ओशन मस्ट बी एट द कोस्ट ऑफ अ होलो एल्सवर्ड जैसा बनाएगी ही बनाएगी होलो अर्थात कि डिप्रेशन जैसा कुछ बनाएगी ही माने कहीं से तो वोह एक्स्ट्रा पानी लेना होगा तो वह जहां से एक्स्ट्रा पानी लिया वहां समुंदर की सतह नीचे चली जाएगी ने ऑल लाइफ इज इवल माने सिर्फ इतना ही नहीं कि इष्ट और अनिष्ट अच्छाई और बुराई यह दोनों एक दूसरे के साथ में रहती है एक्चुअली जो जीवन है जीवन के साथ में इवल या तो अनिष्ट हमेशा से जुड़ा हुआ ही है नो ब्रेथ कैन बी ब्रीद विदाउट किलिंग समवन एल्स एक सांस भी हम बिना किसी की हत्या किए बिना नहीं ले सकते जैसे हमने कल देखा था कि जैन साधु जो होते हैं अपने मुंह पर वह सफेद तरह का एक वस्त्र पहनते हैं कपड़ा ढाक देते हैं जिससे कि सांस से जीवाणुओं की हत्या ना हो किंतु यही जैन साधु जब चलेंगे तो उनके पैरों के नीचे कितने जीवाणु मर जाएंगे जब आहार करेंगे तो वेजिटेबल भी जद खाएंगे तो हमको पता है कि वन पेड़-पौधे में भी जीवन है तो उसकी भी तो हत्या होगी खाना खाने से हत्या होगी चलने से हत्या होगी कोई भी कार्य करने से हत्या होगी तो यह जीव हिंसा हम जान जान कर के अनजाने में करते ही रहते हैं नॉट अ मोर्सल ऑफ फूड कैन बी इटन विदाउट डिप्राइविंग समवन ऑफ ईट यदि एक फल मैं खाता हूं तो मान लीजिए मैं नहीं खाता तो कोई पंखी खाता ना कि कोई गाय ना बकरी खाती अभी वह फल मैंने खाया है यानी वह गाय है या बकरी है या तो कहीं पर कोई गरीब बच्चा है उसको वह फल नहीं मिला है उसके हक का फल मैंने खाया है कोई भी अनाज मैं खाता हूं तो वह गरीब लोगों को मिलने की वजह मुझे मिलता है और यदि आप यह कहते हैं कि नहीं इस जगत में तो अभी सब खास करके भारत में ये ग्रीन रेवोल्यूशन के बाद में इनफ फूड ग्रेन हम प्रोड्यूस करते हैं तो मनुष्य को नहीं तो जीव जंतुओं को पशु पक्षियों को तो हम डिप्राइव करते ही हैं यानी कि एक टुकड़ा अन्न खा ने से भी हम दूसरों का छीन करके खाते हैं ट दिस इज द लॉ दिस इज फिलोसोफी यही कानून है यही दर्शन शास्त्र है देयर फॉर द ओनली थिंग वी कैन डू इज टू अंडरस्टैंड दैट ऑल दिस वर्क अगेंस्ट इवल इज मोर सब्जेक्टिव देन ऑब्जेक्टिव इसलिए यह समझ करके हमको यह समझना है यह ठीक करना है कि यह जगत में अनिष्ट के साथ में बुराई के सामने कार्य करने बुराई के साथ में लड़ने वाला बुराई को कम करने वाला जितना भी कार्य है वह एक्चुअली सब्जेक्टिव है यानी कि मेरे खुद के चरित्र का गठन करता है मैं जो भी करता हूं सोसाइटी को क्या बेनिफिट हुआ वह तो होगा ही होगा किंतु पहले मेरा चरित्र का गठन होना चाहिए यदि मेरे चरित्र का गठन नहीं हुआ और मैं ट्राई कर रहा हूं कि सोसाइटी को बेनिफिट पहुंचा हंगा तो इससे काम नहीं होने वाला है क्यों नहीं होगा हम थोड़ा सा डिस्कस कर पहले मैं इस पैराग्राफ को कंप्लीट कर दूं द वर्क अगेंस्ट इवल इज मोर एजुकेशनल देन एक्चुअल हाउ एवर बिग वी मे टॉक अनिष्ट के सामने या तो फिर बुराई के सामने करने वाला कराने वाला जितना भी कार्य है वह हमारी खुद की शिक्षा है वह हमारे खुद के चरित्र का घडतर करता है भले ही चाहे हम कितने भी बड़े-बड़े स्टेटिस्टिक्स दे दे जैसे कि कल हमने डिस्कस किया था कि मैंने राज में इतना सारा काम किया अभी पता नहीं कि कोरोना में से उसमें कितने बचे और कितने चले गए आज कहीं लैंड स्लाइड हुआ कहीं क्लाउड बर्स्ट हुआ कहीं यह पडेम हो गया क्या-क्या कुछ-कुछ होता रहता है इस समाज में आप लोगों को हजार खाना खिलाएंगे किंतु प्राकृतिक आपदा आपदा के सामने तो आप उनकी रक्षा नहीं कर पाएंगे यानी कि अल्टीमेटली मैंने जो रांची में किया आप जो भी कल्याण साधन करते हैं समाज का उससे जदी मेरे खुद का चरित्र का गठन हुआ कि नहीं वह की टेक अवे होना चाहिए दिस फर्स्ट ऑफ ऑल इज द आइडिया ऑफ वर्क अगेंस्ट इवल एंड इट ओट टू मेक अस कार्मर इट ओट टू टेक फेनेटिसिजम आउट ऑफ अवर ब्लड तो यह है अनिष्ट के सामने कार्य करने की कुंजी या चावी दिस इज द सीक्रेट अबाउट वर्क अगेंस्ट इवल या तो फिर रिफॉर्मिंग और ग्रोइंग द नर्चरिंग द सोसाइटी रिफॉर्मिंग शब्द नहीं यूज करके नर्चरिंग इज अ बेटर वर्ड क्योंकि नर्चरिंग यान या तो फिर पोषण देना या तो पोषक तत्व देना इससे ग्रोथ यह जो कल हमने डिस्कस किया था इसके पहले वाला पॉइंट परसों दिन कि ग्रोथ इज बेटर देन रिफॉर्म तो रिफॉर्म में आप सोसाइटी जो बिगड़ी हुई है उसको आप ठीक करते हैं या तो फिर किंतु यहां पर स्वामी जी क्या कहते हैं अ मैन नेवर गोज फ्रॉम एरर टू ट्रुथ ही ऑलवेज गोज फ्रॉम लोअर ट्रुथ टू हायर ट्रुथ यानी कि अभी जो जगह पे है वह बुरा नहीं है बस हमको इससे भी बेटर पोजीशन में इसको ले जाना है तो फिर नर्चरिंग इज अ बेटर वर्ड यह जो हम सोसाइटी है या तो फिर यह गरीब लोग हैं या तो फिर कुछ भी हम अच्छा कार्य करते हैं नर्चरिंग का कार्य करते हैं वह यदि हम यह सीक्रेट समझ लेंगे कि इस कार्य से सबसे पहले तो मुझे बेनिफिट होना है या तो फिर मेरे खुद के चरित्र का गठन होना है यह हम समझ लेंगे तब हमारा मन थोड़ा सा शांत हो जाएगा और हमारे भीतर में जो जनून है वो कम हो जाएगा अभी यह स्वामी जी जो कहते हैं देखिए कि हाउ दिस वर्क्स आउट इन द 20th सेंचुरी 20वीं सदी का इतिहास है उसमें स्वामी जी को स्वामी जी ने यह सब बातें कही थी अमेरिका से भारत लौटने के बाद में यानी कि 1900 से लेकर के फर्स्ट 50 यह पूरी सेंचुरी देखें तो 1900 से लेकर के 2000 तक का तो यह स्वामी जी की कही हुई बात कितनी परफेक्टली अप्लाई होती है देखिए कि फर्स्ट तीन मेजर मूवमेंट थी 20th सेंचुरी में यदि इस तरह की मूवमेंट को हम काउंट करें कि जिसने सबसे ज्यादा लोगों को उसने इवॉल्व किया है या तो फिर सबसे ज्यादा लोगों को को उसने इफेक्ट किया है अफेक्ट किया है सबसे ज्यादा लोगों का जीवन उसने परिवर्तन किया है तो तीन मूवमेंट कौन सी थी सर्वप्रथम तो थी फर्स्ट एंड सेकंड वर्ल्ड वॉर व्हिच इज मोर ऑफ ए यूरोप सेंट्रिक दूसरा था यह चाइनीज कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन और तीसरा था इंडियन फ्रीडम मूवमेंट अभी यह फर्स्ट एंड सेकंड वर्ल्ड वॉर के बारे में हम देखें तो देखिए कि इन लोगों की यह जो एक्चुअली यह जो जर्मनी है फ्रांस है ब्रिटेन है रशिया है वो लड़ क्यों रहे हैं क्योंकि उनको कॉलोनिस्ट चाहिए क्योंकि ब्रिटेन को उन्होंने देखा ब्रिटेन और कुछ हद तक ये पहले की जनरेशन के थे स्पेन और पोर्ग उनको सबने देखा कि किस तरह से इन्होंने अ कॉलोनिस्ट बना कर के यानी कि बड़े-बड़े देशों को गुलाम बना कर के उनके पास में से धन चुरा रहे हैं तो यह देख कर के जर्मनी और रशिया के पास में बहुत ज्यादा कॉलोनी नहीं थी उन्होंने सोचा कि हम भी जद हमारे पास में अभी अभी ज्यादातर कंट्रीज है एशिया और अफ्रीका के उसके ऊपर में फ्रांस और ब्रिटेन का जद कब्जा है तो कहीं तो हम एक काम करते हैं इसी फ्रांस और ब्रिटेन पर हमला करके या तो फिर यूरोप के जो छोटे-छोटे देश हैं उनके ऊपर में हमला करके हम अपनी कॉलोनी इन लोगों से छीन लेते हैं तो ऐसा करके ही फर्स्ट वर्ल्ड वॉर स्टार्ट हुआ फर्स्ट वर्ल्ड वॉर की जितने भी वो मिस जो बिहेवियर था अ इन लोगों का अ वर्ल्ड वॉर खत्म होने के बाद में फ्रांस और ब्रिटेन का उसकी वजह से सेकंड वर्ल्ड वॉर स्टार्ट हुआ तो उस समय के जो लीडर्स थे यूरोप के एक तो था स्टालिन एक तो था हिटलर एक था कि चर्चिल तो इन तीनों चौथा था रूजवेल्ट अमेरिका का इन चारों का आप चरित्र देखें रूजवेल्ट को अभी छोड़ दे और ये चर्चिल हिटलर और स्टालिन तीनों को देखें कि देखिए कि तीनों थे पेट्रियोटिक उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है स्टेलिन बड़ा ही पेट्रियोटिक था उसकी इच्छा थी सोवियत यूनियन बड़ा प्रोग्रेस करें हिटलर भी बड़ा पेट्रियोटिक था वो चाहता था जर्मनी प्रोग्रेस करें और यहां पर चर्चिल भी बड़ा पेट्रियोटिक था उसकी इच्छा थी ब्रिटेन का डेवलपमेंट हो किंतु यह पैट्रियोटिज्म और अपने खुद के चरित्र के बीच में इतना एक गैप है कि चरित्र उनका इतना बुरा था कि झूठ बोलना चीटिंग करना फिर वो लोगों की हत्या करना लोगों का शोषण करना इस तरह से वे लोग कुछ अच्छा कार्य करना चाहते थे जर्मनी का डेवलपमेंट कैसे होगा मैं इतने सारे जी है वो सब जीव को पकड़ कर के यहूदियों को पकड़ कर के कंसंट्रेशन कैंप में भेज दूंगा उनकी संपत्ति हथिया लूंगा छोटे-छोटे दोषों पर मैं हमला करके उनकी संपत्ति हथिया लूंगा यानी कि चरित्र और यह अच्छा करने की जो इच्छा है उनकी इन दोनों के बीच में कोई कॉमिनेशन नहीं है वो दोनों अलग-अलग चलते हैं तो दूसरों की हत्या करके दूसरों का शोषण करके यदि आप अपने देश का डेवलपमेंट करना चाहेंगे तो उसका परिणाम क्या आएगा सेकंड वर्ल्ड वर के बाद में जर्मनी संपूर्ण रूप से तबाह हो गया था स्टालिन को देखें कि उसने अपने ही देश के सोवियत यूनियन के कितने करोड़ों लोगों की उसने खुद ने हत्या करवा दी थी और करोड़ों लोग वो जर्मनी के साथ में युद्ध करते मरे जा और इतने दूसरे कुछ करोड़ उसने खुद ने मार दिए इंटरनल सिविल वॉर में तो देखिए कि और चर्चिल भी कुछ कम नहीं था भारत का जो फूड ग्रेन था वह भारत में से छीन करके अपने सोल्जर्स को खिलाने के लिए यूरोप में ले गया तो उससे भारत में जो अकाल पड़ा हमारे यहां पर कितने लाखों लोग मर गए जिसका कि कोई हिसाब ही नहीं है तो यह तीनों लोगों ने अपने देश का हित तो करना चाहा किंतु तीनों का चरित्र राक्षस जैसा था इसकी वजह से क्या हुआ करोड़ों करोड़ों लोग उनके ही देश बांधव मर गए यदि भारत को जद आप ब्रिटिश एंपायर का हिस्सा गिने गे तो चर्चिल ने अपने ही ब्रिटिश एंपायर के अपने ही सब्जेक्ट्स यह भारतवासी है उसमें से लाखों लोगों की हत्या कर दी तो यह आप चरित्र और अच्छे गुड इंटेंशन इन दोनों को जैसे ही सेपरेट करेंगे इस व्यक्ति के भीतर में भयानक राक्षसी भाव प्रकट होगा और वह जिसका कल्याण साधन करना चाहता है उसी का वह अहित कर बैठेगा किंतु यदि अपना चरित्र और अपना कल्याण साधन करने की इच्छा जिसके प्रति है इन दोनों के बीच में समभाव है यह देखिए कि आध्यात्मिकता और सोसाइटी इन दोनों को जोड़ती हुई कड़ी कौन सी है यह जो मिसिंग लिंक या तो इन दोनों के बीच में ब्रिज क्या है तो वो ब्रिज है एथिक्स एंड मोरालिटी मोरालिटी यानी कि वैल्यूज और एथिक्स यानी कि साइंस ऑफ वैल्यूज यह भजनानंद जी की डेफिनेशन है तो यह एथिक्स और मोरालिटी यह है जो कि अपने आध्यात्मिक साधना को इस समाज के साथ में जोड़ती है यदि मान लीजिए मैं भीतर में से चाहे कितना ही आध्यात्मिक हूं बाहर में समाज में जाकर के मैं झूठ बोलूंगा लोगों का शोषण करूंगा लोगों का अपमान करूंगा तो वह भीतर की आध्यात्मिकता किसी काम की नहीं है एक चीज दूसरा कि यह जो अ वैल्यूज को इग्नोर करना यानी दो तरह की वैल्यूज होती है एक तो पॉजिटिव वैल्यू है एक नेगेटिव वैल्यू है पॉजिटिव वैल्यू में है मैत्री करुणा मुदिता और उपेक्षा जिसको कि हम चित्त प्रसाद कहते हैं और नेगेटिव वैल्यूज है षड रिपु काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर या तो फिर जिसको कि पंच क्लेश कहते हैं अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश तो यह नेगेटिव वैल्यूज हो गई और यह चित्त प्रसाद है पॉजिटिव वैल्यू यदि मैं बाहर में सोसाइटी के साथ में पॉजिटिव वैल्यू से इंटरेक्ट करता हूं लोगों के प्रति मैत्री करुणा सद भावना रखता हूं तो उसका यह फीडबैक लूप मेरे चरित्र पर होगा मेरी आध्यात्मिक जीवन पे होगा मेरा आध्यात्मिक जीवन डबल स्पीड से प्रोग्रेस करने लगेगा मान लीजिए मैं अपने व्यक्तिगत आध्यात्मिक जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करता हूं एकाग्रता है मेरे भीतर में विल पावर है मैं अपनी वासनाओं से दूर रहता हूं मैं अपने मन को एकाग्र करके नियमित साधना कर सकता हूं किंतु यह जद समाज के प्रति में मिसबिहेव करता रहूंगा तो उसका नेगेटिव फीडबैक मेरी आध्यात्मिक साधना पर पड़ेगा गिरेगा और मेरी साधना धीरे-धीरे करके करप्ट हो जाएगी दूसरा है कि यदि मेरी पॉजिटिव वैल्यूज से मैं समाज के साथ इंटरेक्ट करता हूं तो मेरी जो इंटरनल साधना है मेरा जो रिलेशनशिप विद गॉड है ईश्वर है उसके ऊपर में वह पॉजिटिव फीडबैक देगा तो यह पॉजिटिव फीडबैक लुप स्टार्ट हो जाएगा यहां पे मैं साधना कर रहा हूं समाज के साथ में मैत्री करुणा उनको मदद करने का शिव ज्ञान से जीव सेवा वह सब वैल्यूज का पालन कर रहा हूं तो वो वैल्यूज मेरी आध्यात्मिक साधना पर पॉजिटिव इफेक्ट करेगी मैं जितना ही आध्यात्मिक मेरी आध्यात्मिक साधना में सबसे इंपॉर्टेंट क्या है तो ब्रह्मचर्य तो ब्रह्मचर्य और सत्य यह इसके ऊपर में जद इफेक्ट होगी मेरी एकाग्रता बढ़ेगी मेरी जदी यह ध्यान करने की कैपेसिटी बढ़ेगी तो साथ में ही ये पॉजिटिव वैल्यूज पे इफेक्ट होगा यानी एक पॉजिटिव फीडबैक लूप स्टार्ट हो जाएगा मैं समाज को भी और ज्यादा से ज्यादा हेल्प कर पाऊंगा और मेरी आध्यात्मिक साधना भी इतनी ही स्पीड अप होती जाएंगी यानी यानी कि नेगेटिव वैल्यूज की एक नेगेटिव फीडबैक लूप है और पॉजिटिव वैल्यूज की पॉजिटिव फीडबैक लूप है और मान लीजिए कि यदि आप दोनों में से एक में भी सक्सेसफुल है मान लीजिए मैं लोगों के साथ में कितना ही मिसबिहेव करता रहूंगा किंतु भीतर में से यदि मेरी आध्यात्मिक साधना चालू हो गई है तो आखिर में कहीं ना कहीं वह लोगों के साथ में मेरा बिहेवियर है उसके ऊपर में पॉजिटिव इफेक्ट अवश्य लाएगा और यदि मैं इंटरनली चाहे करप्ट हूं किंतु लोगों को मदद करने का प्रयास कर रहा हूं तो इससे उसकी पॉजिटिव इफेक्ट मेरी इंटरनल कंडीशन के ऊपर में भी पड़ेगी देखिए एक मनसुख मास्टर की कहानी है यह आशा यह मैंने मोरारी बापू से यह सुनी थी कहानी तो मैंने रा के राजा उस समय की यह बात है शायद 200 300 साल हो गए होंगे स्वामी जी के पहले की बात है तो वह मनसुख मास्टर वहां पर थे व एक गांव में और वैसे तो विद्यार्थियों को ठीक-ठाक पढ़ाते थे किंतु साधुओं के ऊपर में उनका बड़ा गुस्सा था जो भी साधु वो डाकोर तो एक धर्म धार्मिक स्थान है तो डाकोर में प्रणाम करने के लिए सब साधु यात्रालू यह भक्त साधक वगैरह आते रहते थे तो उस गांव पास में ही था तो उस गांव के दूसरे दूसरे लोग जो होते थे वे लोग क्या करते थे कि जो यात्रालू आते हैं उन तो रहने के लिए जगह देंगे खाने के लिए कुछ खाना देंगे भिक्षा देंगे वगैरह किंतु ये मनसुख मास्टर है वो बड़े कड़े थे उनका मिजाज बड़ा ही गुस्सा वाला था शॉर्ट टेंपर थे उनके घर में एक भी साधु भक्त किसी को आश्रय नहीं मिलेगा उन साधु भक्तो को देख कर के ही व नाराज हो जाएंगे कि किंतु उनकी जो बीवी थी उनकी जो वाइफ थी वो बड़ी भ ति मती थी तो एक दिन हुआ क्या कि एक साधुओं का दल उस गांव में आया और उन्होंने आकर के यह जो मनसुख मास्टर की जो पत्नी थी उनको तो घर जाकर के पत्नी से कहा कि खाने का कुछ दे दीजिए भिक्षा वगैरह तो उस समय मनसुख मास्टर वो स्कूल में थे बच्चों को पढ़ा रहे थे क् तो उसकी पत्नी तो वैसे बड़ी वो भक्ति मती थी और पति का आदेश था कि घर में से किसी को भी इस तरह से भिक्षा नहीं देनी है किंतु बिकॉज कि उनके पति स्कूल में है तो पत्नी ने क्या किया कि इनको भिक्षा दे दी अभी यह साधुओं का दल जा रहा है तो योगायोग ऐसा हुआ कि उसी समय यह मनसुख मास्टर घर में प्रवेश किए उन्होंने सोचा कि अरे यह साधू लोग यहां पे आए हैं और उसकी पत्नी उनको भिक्षा भी दिए हैं और वह भिक्षा लेकर खुश खुश होकर के जा रहे हैं तो वैसे ही उसका चेहरा लाल हो गया मनसुख मास्टर का और वो गुस्से से क्रोध करके अपनी पत्नी को डांटने ही वाले थे उसमें क्षण भर में एक साधु ने पूरा मामला देख लिया साधुओं की तो साधकों की तो अत दृष्टि होती है और वो अंतर्दृष्टि उसके पास में कुछ साधना करके सिद्धि भी प्राप्त हुई थी तो इस साधु ने क्या किया वो समझ गया कि अभी उसकी पत्नी को डांट पड़ेगी वो हमको भिक्षा दी है बोलकर के और हमको हमारी वजह से उसको डांट पड़े यह नहीं चाह कर के इस साधु ने क्या किया मनसुख मास्टर को हल्के से स्पर्श कर दिया और स्पर्श करके बड़े ही मृदु स्वर से कहा कि भाई आपके घर में हमको भिक्षा मिली हम बड़े प्रसन्न हुए हैं ऐसा बोलकर वह साधु चला गया अभी यह साधु ने जैसे ही मनसुख मास्टर को स्पर्श किया देखिए कि एकाएक वो चिल्ला करके क्रोधित अपनी पत्नी पर वो गुस्सा करने वाला था एकाएक उसका गुस्सा ठंडा हो गया पता नहीं चला कि ऐसा क्यों हुआ किंतु अभी वह पत्नी को बोला तो सही कि अरे भाई तुमने इसको भिक्षा क्यों दी किंतु क्रोध करके जो बोलने वाला था डांटने वाला था वो नहीं हुआ और इसके बाद में देखिए कि साधु के स्पर्श का आशीर्वाद का क्या परिणाम हुआ भीतर भीतर में से ही यह जो डाकोर के जो प्रभु है उसके प्रति उसकी श्रद्धा बढ़ती गई और फिर एक दिन उसने कहा अपनी पत्नी को मैं एक काम करता हूं इसके पहले वह कभी डाकर जाकर के प्रभु का दर्शन नहीं किया था एक दिन उसने पहली बार पत्नी को कहा कि मैं जा रहा हूं डाकोर वहां जाकर के प्रभु का दर्शन करके मैं वापस आऊंगा तो पत्नी तो आश्चर्य चकित कि यह क्या बात है पहले ही उस दिन आश्चर्य हुआ था कि साधुओं के हाथ में भिक्षा देख कर के उसका पति डांटने ही वाला था गुस्सा करने ही वाला था वह क्यों एकाएक शांत हो गया वह तो समझ में नहीं आ रहा है किंतु जब इसने यह कहा कि मैं डाको और जा रहा हूं तब पत्नी को पता चला कि नहीं कि व साधु ने जो स्पर्श किया है जो साधु के जो आशीर्वाद है इसी की वजह से उनका हृदय परिवर्तन हुआ है ऐसा लग रहा है अभी देखिए मंसूब मास्टर जब पहली बार डाकोर गए तो उनका हृदय इतना अभिभावक हो गया प्रभु का दर्शन करके कि फिर उन्होंने ठीक किया कि प्रत्येक पूनम को या प्रत्येक एकादशी को मैं भूल गया एगजैक्टली तो वो वो वहां पे डाकोर जाकर के प्रभु का दर्शन करेंगे यहां पे गांव वाले कुछ जो असामाजिक तत्व होते हैं ना वो सभी जगह पर असामाजिक तत्व होते हैं तो उन्होंने देखा यह मास्टर बच्चों को तो ठीक-ठीक पढ़ा रहा था अभी क्यों भक्ति भाव की बातें कर रहा है वो क्यों डाक और दर्शन करने के लिए जा रहा है यानी कि मनसुख मास्टर अकेले नहीं थे उस समय इस तरह की धार्मिक गतिविधियों पर कड़े मतलब तीक्षण नजर रखने वाले माने कु नजर रखने वाले दूसरे भी कुछ असामाजिक तत्व थे उन्होंने सोचा था मनसुख मास्टर तो अपने ही दल के हैं अपने ही बांधव है कि जितने साधु झुठ मुठ के यहां पर आते हैं भिक्षा मांगते हैं धार्मिक स्थान पास में है तो हमारी जो घर का इस तरह से बेनिफिट उठाते हैं तो इस तरह से उनकी कुदृष्टि ऐसे साधुओं पे थी और मनसुख मास्टर को लगता था अपने ही दल के हैं एकाएक देखा कि मनसुख मास्टर का स्वभाव परिवर्तन हो गया है वो डाकोर जा रहे हैं क्लासरूम में भी बच्चों को इस तरह के वह जो नरसिंह मेहता के प्रभातिया वगैरह है वह सिखा रहे हैं क्या माजरा क्या है फिर उन्होंने एक बात ठीक की उन्होंने कहा कि हम लोग एक काम करते हैं वह जो गायकवाड़ तो राजा थे उस समय वड़ोदरा के उनके पास जाकर केयह तो गायकवाड़ का ही सब प्राइमरी स्कूल्स वगैरह थी और ये मास्टर लोगों को वो सैलरी भी वही राजा ही देते थे और इंसीडेंटली स्वामी जी को पूछा गया स्वामी जी ने पूरे भारत का भ्रमण किया था उनको पूछा गया कि आपको सर्वश्रेष्ठ राजा कौन सा लगा आपने तो खेतड़ी के अजीत सिंह को भी देखा है मैसूर के महाराजा को भी देखा है और भी कितने राजाओं को आप मिले हैं वो जो लीमड़ी वाले जो राजा थे उनको भी मिले हैं तो आपको सर्वश्रेष्ठ राजा कौन से लगे तो उसके उत्तर में स्वामी जी ने गायकवाड़ का नाम दिया था तो मैं अभी देखिए गायकवाड़ का हिस्ट्री पढ़कर समझ पाएंगे कि उन्होंने एजुकेशन वगैरह के बारे में बहुत अच्छा काम किया वगैरह वगैरह स्वामी जी का गायकवाड़ के साथ में डायरेक्ट कुछ इंटरेक्शन हुआ है कि नहीं वह हमको नहीं पता है हमको इतना पता है कि जब वह वड़ोदरा गए थे तो गायकवाड के मंत्री के साथ में उनकी मुलाकात हुई थी आज का जो दिलाराम बंगलो जो कि आज अप हमको दिया गया है रामकृष्ण मिशन को उस दिलाराम बंगलो में स्वामी जी रुके थे तो किंतु गायकवाड़ राजा के साथ में स्वामी जी का डायरेक्ट रेट इंटरेक्शन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो स्वामी जी ने किस हिसाब से यह बात कही होगी उसका इलाबेन तो स्वामी जी ने नहीं किया है किंतु यह बात अभी जो यह कहानी पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि इस तरह से उनका एक एजुकेशन बोर्ड था गायकवाड़ का अपना खुद का और इस तरह से स्कूल इंस्पेक्टर होते थे जो कि स्कूल इंस्पेक्टर गांव में जाकर के जिस टीचर्स को सैलरी पर रखा है उनका इंस्पेक्शन करेंगे यदि ठीक काम नहीं कर रहे हैं तो दंड देंगे और यदि ठीक काम कर रहे हैं तो प्रमोशन भी दें तो गांव वालों ने उन्होंने ठीक किया कि हम लोग वह गायकवाड़ के जो एजुकेशन वह जो इंचार्ज है प्रभारी उनको जाकर कंप्लेन करते हैं कि यह जो टीचर है मास्टर वह हर पूर्णिमा को डाकोर चला जाता है इस तरह से छुट्टी लेने की परमिशन क्या आपने दी है कि वह झूठ मुठ की छुट्टी लगाता है बोल कर के इन्होंने कंप्लेन की तो यहां से वह शिक्षण अधिकारी वह भी उसी दिन पूर्णिमा को वहां पर गया वैसे यह कहानी बड़ी लंबी है मैं थोड़ी सिंपल करके कह रहा हूं तो यह शिक्षण अधिकारी गया डाकोर में जाकर के देखा कि अभी देखिए कि भक्त की जब रक्षा करनी होती है तो भगवान स्वयं कैसे आ जाते हैं वह जो धोबी वाली घटना हमने देखी कि वह एक आदमी रास्ते से जा रहा था धोबियों ने रास्ते पे वह कपड़े सुखाए थे व कपड़ों पे पैर गिर गया और वह धोबी लोग उसको मारने के लिए दौड़े तो भगवान स्वयं वैकुंठ वह जो कैलाश में से उनकी रक्षा करने के लिए जा रहे हैं तो यहां पे भी देखिए कि डाकोर के जो प्रभु थे उन्होंने देखा कि देखो कि मेरा भक्त तो यहां पे है और वहां पे एजुकेशन अधिकारी स्वयं वहां पर जाकर के स्कूल का इंस्पेक्शन करने के लिए गया है तो भक्त की रक्षा तो मुझे करनी ही होगी तो प्रभु स्वयं यह मनसुख मास्टर का स्वरूप धारण करके वहां पर गए स्कूल में और जब अधिकारी और वह गांव वाले जो कु सामाजिक तत्व थे उन्होंने सोचा कि आज मास्टर नहीं होंगे वो तो गए हैं डाक और अपने नियम के अनुसार तो हम उसको पकड़ेंगे आज कि वह स्कूल में एब्सेंट है बच्चे लोग बिना किसी काम के बैठे हुए हैं तो जा कर के देखा तो वही मनसुख मास्टर वहां प उपस्थित है वही सिखा रहे हैं और अभी इन लोगों ने कहा कि आप एक काम कीजिए आप पहले तो गांव वाले बड़े आश्चर्य चकित हो गए अरे ऐसा कैसे हो गया कि यह मास्टर डाकोर नहीं जाकर के यहां प खड़े हैं तो फिर उन्होंने दूसरा एक ट्रिक अजमाया उन्होंने एजुकेशन इंस्पेक्टर को कहा कि आप पे काम कीजिए बच्चों को प्रश्न कीजिए देखिए कि वो उसको क्या सिखाता है हमको तो यही दिखता है कि वह नरसिंह मेहता के प्रभातिया है भजन है यही सब सिखाता है झूठ मुठ का वो ना ही मैथमेटिक्स सिखाता है ना ही लैंग्वेजेस सिखाता है अब बच्चों को टेस्ट कीजिए अभी देखिए कि मास्टर है स्वयं त्रिभुवन के स्वामी वहां पर खड़े हुए और यह एजुकेशन मिनिस्टर बच्चों को प्रश्न कर रहा है अ वो प्रश्न कर रहा है और मास्टर प्रभु स्वयं खड़े हैं उनकी उनकी प्रेजेंस में में प्रत्येक बच्चा जो प्रश्न कर रहा है उसका ऐसा उत्तर दे रहा है कि एजुकेशन मिनिस्टर बेचारा बड़ा ही आश्चर्य चकित हो गया और वह कहता है कि मास्टर आप इतना अच्छा सिखाते हैं कि मैं आपको प्रमोशन देके जाता हूं अभी जैसे ही वो एजुकेशन वो ऑफिसर ने ऐसा कहा वह असामाजिक तत्व बेचारे बड़े ही दुखित हो गए सोचा था कहां उसको बुलाया था उसको पनिश करवाने के लिए और झूठ मुठ का उसको प्रमोशन मिल गया तो जो भी है अभी यह एजुकेशन ऑफिसर देखिए गतिविधि मतलब यह जो मतलब योगायोग कैसे होता है यह सभी लोग वो असामाजिक तत्व फिर ये एजुकेशन मिनिस्टर वो जा रहे हैं ट्रेन स्टेशन पे रेलवे स्टेशन पे वहां पर गाड़ी में बैठेंगे वड़ोदरा जाने के लिए अभी वही गाड़ी डाकोर से आ रही थी और डाकोर भा जिस गाड़ी में से जैसे ही गाड़ी स्टेशन पर आई वोह एजुकेशन ऑफिसर उसमें चढ़ रहा है देखा वहां से मनसुख मास्टर उतर रहे हैं वो डाकोर से वापस आ रहे थे और यह एजुकेशन ऑफिसर को व जाना था वड़ोदरा तो मनसुख मास्टर को देख कर के इतना आश्चर्य चकित हो गया अरे मास्टर आप यहां पर क्या कर र है मैं तो आपके स्कूल में जाकर के देखा कि आप तो बच्चों को सिखा रहे हैं तो मास्टर बोलता है कि नहीं मैं तो डाकोर गया था मैं तो वहां पे था ही नहीं तब सबको पता चल गया कि डाकुर के प्रभु अपने भक्त की रक्षा करने के लिए स्वयं उस भक्त का स्वांग रच करके स्कूल में गए थे तो ये एजुकेशन ऑफिसर वो मास्टर के पैरों में पड़ गया और फिर कहा कि आपका दर्शन हुआ मैं धन्य हो गया आपकी वजह से मुझे प्रभु का भी दर्शन हुआ अभी यह घटना जैसे हुई तो वह मास्टर समझ गया कि देखिए मेरे लिए प्रभु को इतना कष्ट उठाना पड़ रहा है तो फिर वह घर गया और अपनी पत्नी को कहा कि अभी यह मास्टर का काम छोड़ो मैं जद मास्टरी करूंगा तो प्रभु को कष्ट होगा चलो हम कहीं जाकर के जिस तरह से वानप्रस्थ आश्रम होता है नाना सब कार्य त्याग करके पति पत्नी ऋषि मुनियों की तरह साधन भजन लेकर के रहते हैं तो इस तरह से साधन भजन लेकर के कहीं पर शांति से रहेंगे और यह प्रमोशन यह स्कूल की मास्टरी सब छोड़ कर के दोनों चले गए और इस तरह से उन्होंने अपने जीवन का आखिरी समय बिताया तो देखिए कि वह जो साधुओं के ऊपर में क्रोध था यह मास्टर का भीतर में जैसे ही हृदय परिवर्तन होना शुरू हुआ सबके प्रति उसका समभाव आ गया सबके प्रति उसकी करु है मैत्री है यह जो सबके प्रति दया है यह भाव उसके हृदय में प्रकट हुआ यानी कि यह जो अपनी बेसिक थियर है कि ब्रह्म शक्ति एक आप यदि एक क्षेत्र में भी अच्छा कार्य करेंगे एक आदमी यदि बहुत ही आध्यात्मिक है तो वह बाहर के वालों के साथ में कितना ही क्रोधित होकर के व्यवहार करेगा कि एक ना एक दिन उसका बाहर वालों के साथ में बिहेवियर चेंज होना शुरू होगा और एक आदमी भीतर से चाहे कितना ही करप्ट है वो जेनुइनली लोगों की मदद करेगा तो उसका असर उसके भीतर में भी होगा किंतु स्वामी जी यहां पर हमको क्या कहते हैं कि आप इस तरह से स्प्लिट करते ही क्यों है कि मैं बाहर में अच्छा काम करूंगा भीतर से मैं बुरा रहूंगा या तो फिर मैं भीतर से अच्छा रहूंगा बाहर में मैं बुरा करूंगा आप दोनों को कनेक्ट कर दीजिए एक पॉजिटिव फीडबैक लूप आप स्टार्ट कीजिए कि भीतर में भी आपकी आध्यात्मिक उन्नति होती रहे और बाहर में भी आप कल्याण साधित करते रहे देखिए कि इससे आपका आध्यात्मिक जीवन भी कितना पावरफुल हो जाएगा कितना फटाफट करके बढ़ने लगेगा और यहां पर बाहर में देखेंगे कि आप जहां पर भी रहते हैं आप लोगों का कल्याण करेंगे ही करेंगे वही फेमस घटना कि वह हरि महाराज को स्वामी जी ने कहा लीड अ होली लाइफ दैट इज इनफ एक पवित्र जीवन बिताओ बस इतना काफी है जहां पर भी हम रहेंगे पवित्र जीवन बिताएंगे हजार लोगों को इससे जो मने खाना शायद हम उनको नहीं दे पाएंगे यह जो स्वामी जी का वो जो कैटेगरी इजेशन है अन्नदान है फिर उससे उच्च है यह जीवन दान है फिर उससे बेटर है विद्यादान है किंतु सर्वश्रेष्ठ है ज्ञानदान तो हम यदि एक पवित्र आदमी जहां पर भी रहता है सबको ऑटोमेटिक ज्ञान मिलने लगेगा सबको ऑटोमेटिक अपने भीतर में हृदय का परिवर्तन स्टार्ट हो जाएगा तो स्वामी जी यहां पर कहते हैं कि स्प्लिट करने की जरूरत नहीं है बाहर में अच्छा भीतर में बुरा या तो भीतर में अच्छा बाहर में बुरा दोनों को कनेक्ट कर दो क्योंकि ठाकुर की थिरी कहती है कि वही ब्रह्मण जिसको कि हम अपने अंतर मन में खोज रहे हैं वही ईश्वर जिनको कि हम मंदिर में ढूंढ रहे हैं वही ईश्वर लोगों के भीतर में शिव रूप से विराजमान है तो यह थिरी समझ लिया और फिर यदि हमने कार्य किया जगत में रहे तो हमारा भी कल्याण होगा समाज भी धन्य धन्य हो जाएगा अच्छा इसके बाद बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं द हिस्ट्री ऑफ द वर्ल्ड टीचस अस दैट वेर एवर देयर हैव बीन फेनेटिकल रिफॉर्म्स द ओनली रिजल्ट हैव बीन दैट दे हैव डिफीटेड देयर ओन एंड्स वि विश्व का इतिहास हमको सिखाता है कि जहां-जहां पर जोर जबरदस्ती रिफॉर्म करने का प्रयास लाया गया है जहां पर जोर जबरदस्ती करके समाज को परिवर्तित करने का प्रयास किया गया है उस प्रयास ने उस लोगों का कल्याण करने का जो हेतु था हेतु के ऊपर में ही जैसे कि हथोड़ा मारा है उस हेतु का ही उसने तोड़ दिया है नो ग्रेटर अप हीवल फॉर द एस्टाब्लिशड ऑफ राइट एंड लिबर्टी कैन बी इमेजिन देन द वॉर ऑफ वॉर फॉर द एबलेशन ऑफ स्लेवरी इन अमेरिका अभी इस हिस्ट्री का स्वामी जी उदाहरण देते हैं हम भी देखेंगे कुछ उदाहरण किंतु पहले स्वामी जी का उदाहरण देख लेते हैं स्वामी जी कहते हैं कि यह जो लोगों को राइट्स देना लोगों का बारे में गरीब है या तो पद दलित है उनको उत्थान करना इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिका में यह जो काले लोगों को गुलाम बना करके रखा गया था उनका उनकी गुलामी दूर करना गुलामी से मुक्त करना इससे अच्छा उदाहरण और कोई हो नहीं सकता है एस फार एज इंटेंशन गोज जहां तक मेरी भावना जाती है तो एबो ऑफ स्लेवरी यह जो गुलाम प्रथा का नाश करना गुलाम प्रथा को समाप्त कर देना इससे अच्छा उदाहरण और कोई नहीं नहीं हो सकता है किंतु यू ऑल नो अबाउट इट आप सबको इसके बारे में पता है एंड व्हाट हैज बीन द रिजल्ट किंतु उसका परिणाम क्या आया है द स्लेव्स आर 100 टाइम्स वर्स ऑफ टुडे देन दे वेर बिफोर द एबो यह जो गुलाम है वो जब तक गुलाम थे एटलीस्ट किसी की प्रॉपर्टी थे उनके मालिक उनका कुछ अच्छा करते थे आज उनकी ऐसी परिस्थिति है कि गुलामी से भी बदतर अवस्था में है गुलामी से बाहर निकलने के बाद में बिफोर द एबलेशन दिस पुअर नीग्रोस वेर द प्रॉपर्टी ऑफ सम बडी एंड एज प्रॉपर्टीज दे हैड टू बी लुक्ड आफ्टर सो दे माइट नॉट डिटेट गुलामी प्रथा से पहले जब कि वोह गुलाम थे उस समय वे लोग किसी ना किसी जमींदार की प्रॉपर्टी थे और प्रॉपर्टी के साथ में जैसे होता है आपको मेंटेन करना पड़ता है प्रॉपर्टी को मेंटेन नहीं करेंगे तो इसमें डिटे हो जाएगा टुडे दे आर द प्रॉपर्टी ऑफ नोबडी आज वह किसी की भी प्रॉपर्टी नहीं है किसी के भी गुलाम नहीं है देयर लाइव्स आर ऑफ नो वैल्यू उनके जीवन की कोई भी कीमत नहीं दे आर बंट अलाइव ऑन मियर प्रिटेंस उनको मने छोटे-छोटे गुनाह में ऐसा शक हुआ कि कोई गुनाह किया है तो छोटे-छोटे प्रिटेंस यानी कि एक्सक्यूज के ऊपर में उनको जिंदा जलाया जाता है दे आर शोट डाउन विदाउट एनी लॉ फॉर देयर मर्डर फॉर दे आर निगर्स दे आर नॉट ह्यूमन बीइंग्स व बिकॉज कि वे लोग काले लोग हैं जिनको कि ये लोग कहते हैं क्योंकि वो पशु से भी बदतर है मनुष्य है ही नहीं बोलकर के उनको बिना किसी गलती के कुत्ते की तरह उनको गोली मार दी जाती है दे आर नॉट इवन एनिमल्स वो पशु पशुओं से भी बदतर है एंड दैट इज द इफेक्ट ऑफ सच वायलेंट टेकिंग अवे ऑफ इविल बाय द लॉ और बाय फेनेटिसिजम और यह परिणाम है कि आपने जोर जबरदस्ती करके गुलामी प्रथा को बंद किया जनून से धर्म जनून में करके आपने यह प्रथा बंद की इसका आज यह परिणाम है सच इज द टेस्टिमोनी ऑफ हिस्ट्री अगेंस्ट एवरी फेनेटिकल मूवमेंट इवन फॉर डूइंग गुड और यह इतिहास का गवाह है इतिहास साक्षी देता है कि अच्छा कार्य करने के लिए भी जब भी कोई भी मूवमेंट यदि ब्रूट फोर्स का आश्रय लेती है जोर जबरदस्ती करती है तो उसका दुष्परिणाम हमेशा आता है माय ओन एक्सपीरियंस हैज टोट मी ट मेरा खुद का अनुभव मुझे यही बात बताता है देयर फॉर आई कैन नॉट जॉइन एनी वन ऑफ दिस कंडेमनिंग सोसाइटीज इसीलिए यह जो कुछ सोसाइटी है रिफॉर्म सोसाइटी जो कि समाज के समाज को गाली देती है समाज के क्रिटिसाइज करती है उस उस सोसाइटीज के साथ में मैं कभी भी जॉइन नहीं हो पाऊंगा उस सोसाइटी का सदस्य मैं कभी नहीं हो पाऊंगा देखिए यह जो सेकंड वर्ल्ड वॉर के बारे में हमने देखा इससे भी बड़ा जो भयानक जो हत्याकांड हुआ है हिस्ट्री में वह है चाइना में चाइना में माओ जे दोंग था उसने सोचा कि मैं चाइना का उत्थान करूंगा सेंचुरी ऑफ ह्यूमिन यह उनका एक कांसेप्ट है कि कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आने से पहले 18th 19th सेंचुरी थी वो पूरा 100 साल यूरोपियन लोगों ने चाइना का शोषण किया चाइना के गले में जबरदस्ती यह ओपीएम ट्रेड डाल दिया और क्योंकि क्या है कि चाइना में सिल्क बनता था फिर चाइना में यह पेपर बनता था और भी बहुत बहुत सारी अच्छी-अच्छी चीजें बनती थी जो कि यूरोपियन को चाहिए अभी ये यूरोपियन चाइना से खरीदते ही रहेंगे तो ट्रेड इंबैलेंस हो जाएगा चाइना के फेवर में जो कि आज है फिर से उस समय भी उनको यह डर था कि चाइना में चाइना के साथ में हम खरीद ही रहे हैं चाइना हमसे कुछ नहीं खरीद रहा है तो ट्रेड इंबैलेंस हो रहा है तो उन्होंने क्या चालाकी की कि ओपियम उनको खिलाना शुरू कर दिया अभी ये ओपियम अभी वैसे भी वहां पे चाइना में तमस तो था ही से और फिर यह लोग ओपियम खा खाना अफीम खाना शुरू कर देंगे इससे परिणाम यह आया कि लोग ओपियम खा कर के पूरे गांव के गांव शहर के शहर वो बर्बाद होने लगे और अभी ओपियम आता है अफगानिस्तान वगैरह से इंडिया वगैरह से यह ब्रिटिश लोग यहां पे ओपियम की खेती करते थे वहां जाकर के बेचते थे तो ये ट्रेड इन बैलेंस को समाप्त करने के लिए इन लोगों के पास में सिल्क वगैरह लेते हैं तो इनको ओपियम खिला कर के एडिक्टेड बना दो तो यह लोग हमारे से ओपियम खरीदेंगे ऐसा बोलक के ट्रेड बैलेंस करना चाहा उसका परिणाम हुआ कि चाइनीज सोसाइटी भीतर से कंप्लीट करप्ट होने को आन बैठी थी तब यह कम्युनिस्ट रिवोल्यूशन आया उन्होंने सोचा कि ओपीएम ट्रेड को समाप्त करो जो लोग अपने देश में ओपीएम खा रहे हैं ओपीएम का सेवन कर रहा हैं उनको पनिश करो कैसे भी करके जो अपनी पुरातन भव्यता है एंसेट ग्लोरी वहां पर देश को ले जाओ ऐसा गुड इंटेंशन से उन्होंने यह सत्या हत्याई ये जो कम्युनिस्ट पार्टी का चाइनीज कम्युनि पार्टी का फाइनेस्ट्राइड उसमें प्रकट हुए कि उसका परिणाम है कि चा ये लॉन्ग मार्च इज कंसीडर्ड टू बी वन ऑफ द फाइनेस्ट्राइड आसपास में इन लोगों ने सत्ता भी हथिया लिए जापान डिफीट हुआ जापान की सेकंड वर्ल्ड वॉर में हार हुई इसके बाद में यह कम्युनिस्ट लोगों ने अपना राज्य स्थापित किया किंतु उसके बाद में उन्होंने सोचा कि चाइना को मॉडर्नाइज करना है यह जो पूरी कन्फ्यूशियस प्रथा थी ये बुद्धिस्ट सुपरस्टिशन थी उन सबको दूर करो जितनी भी मॉनेस्ट्रीज है सबको जला दो जितने भी बौद्ध भिक्कू है पकड़ पकड़ करके जोर जबरदस्ती उनकी शादी करवा दो ऐसा ऐसा करके ऐसे भयानक उन्होंने यह कार्यकलाप आरंभ किए यह जमींदारों के पास में बहुत ज्यादा जमीन है तो जमींदारों की हत्या करके उनकी जमीन किसानों में बांट दो वगैरह वगैरह दो भयानक कांड उन्होंने किए एक तो कहा जाता है कल्चरल रेवोल्यूशन दूसरा है ग्रेट लीप फॉरवर्ड तो जैसे लॉन्ग मार्च वो बहुत अच्छा एक उनका पीरियड था तो यह कल्चरल रेवोल्यूशन और उसके साथ में यह ग्रेट लीप फॉरवर्ड इसने चाइनीज सोसाइटी के भीतर में करोड़ों लोगों की हत्या करवाई है यह जो माओ जेदो उसका लीडर था तो देखिए कि स्वामी जी जो निग्रो के बारे में उस समय की जो उनकी अनु अनुभव जाता था ये 20th सेंचुरी में भी सच है भारत में देखिए कि ये जो लैंड रिफॉर्म मूवमेंट कैसे हुई है ये जो विनोबा भावे का भूदान यज्ञ चाइना का हिस्ट्री पढ़िए है साथ में कंपैरेटिव इंडिया का हिस्ट्री पढ़िए है आश्चर्य चकित हो जाएंगे वो विनोबा भावे गांव-गांव जाते थे जमींदारों को रिक्वेस्ट करते थे कि आपके पास में एक्स्ट्रा जमीन पड़ी है तो खेत किसानों को दे दीजिए तो कहीं जाकर के वे लोग अपनी जमीन पर काम करेंगे तो उनका कल्याण होगा तो यह जो भूदान मूवमेंट थी उसी को बाद में ये इंदिरा गांधी ने लॉ बना कर के खेड़े जो खेड़ेगांव आ दी तो किंतु भारत में बिल्कुल ब्लड शेड नहीं हुआ है ऑलरेडी ये गांधी जी का सत्याग्रह मूवमेंट विनोबा भावे का भूदान यज्ञ और यह इंदिरा गांधी का यह जो लॉ और यह फिर यह जो राजा लोग थे उनके पास में उनके राज्य छीन लेना सब कुछ बिना किसी ब्लड शेड के हुआ है अभी जहां पे यह लैंड रिफॉर्म नहीं हुआ है चाइना में खूना मर्की से लैंड रिफॉर्म हुआ भारत में शांति से हुआ पाकिस्तान में लैंड रिफॉर्म कभी नहीं हुआ उसका कारण अभी उसका परिणाम यह है कि ज्यादातर जमीन कुछ 10 15 बड़े-बड़े वो जमींदार हैं उनके पास में है ज्यादातर पब्लिक कंप्लीट बैंकर पट है और वहां पे यह टेररिज्म स्टार्ट हुआ है तो देखिए कि जहां पे लैंड रिफॉर्म नहीं होता है पाकिस्तान का जितना भी प्रॉब्लम है आज आज हम देख रहे हैं वो सब लैंड रिफॉर्म नहीं हुआ है उसकी वजह से है तो जहां-जहां पे लैंड रिफॉर्म हुआ है वे लोग सब देश इंडस्ट्रियल इज हो गए हैं जहां पे लैंड रिफॉर्म नहीं हुआ वे देश वैसे ही वो मिडिवल एजेस में अंधकार युग में पड़े हुए हैं किंतु वही बात है कि चाइना में लैंड रिफॉर्म हुआ ब्लड शेड से और भारत में ये लैंड रिफॉर्म हुआ एकदम शांति से तो देखिए कि आप जनून से कोई भी रिफॉर्म लाना चाहेंगे उसका बड़ा ही भयानक असर होगा यह सब इंटरनल ग्रोथ होना चाहिए स्पिरिचुअलिटी शुड बी एन एकंपनीइंग फैक्टर टुवर्ड्स एनी रिफॉर्म नर्चरिंग ग्रोथ ट यू वांट टू डू विद द सोसाइटी अच्छा अभी इसके बाद में पड़ा लंबा पैराग्राफ है इसको अभी हम कल देखते हैं आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण

प्रश्न: जैसा कि आपने कहा, आंतरिक और बाह्य दोनों साधनाएं करना आवश्यक है।

मस्तु देखिए यहां पर मैं एक बात कहूंगा आप बाहर वाले फैक्टर को कंपलीटली छोड़ दीजिए बोलेंगे मैं सिर्फ भीतर में से साधना करके ईश्वर को प्राप्त करना चाहता हूं तो भीतर में सिर्फ इंटरनल साधना ठाकुर ने जैसा किया था वैसा करना पड़ेगा अपना अहंकार खत्म करने के लिए अपने बालों से वो मेहतर का लेटन क्लीन किया था यह आपको अहंकार खत्म करने के लिए करना पड़ेगा किंतु यदि आप बाहर में एंगेज होते हैं तो ऑटोमेटिक आपका अहंकार वो आपको अभी जैसे मैंने कहा था ना कि गांव वालों के साथ में काम करना है ट्राइबल एरिया में मैं जाता था अभी ट्राइबल लोग भी बड़े चालाक है देखेंगे कि आपके पास में कुछ देने के लिए है तो आपको रिस्पेक्ट करेंगे कुछ देने के लिए नहीं है तो कल आपके साथ में अच्छी-अच्छी बातें करते थे आप आपको आज आपको या तो इग्नोर करेंगे या तो सीधा झगड़ा करने को आएंगे तो उस समय हमको यह देखना है कि मैं यहां पर कोई आईएएस ऑफिसर या बैंक ऑफिसर नहीं हूं मैं तो एक भिक्षुक साधु हूं यह लोग किस तरह जिस तरह का भी मेरे साथ बिहेव करें मेरा ईगो राइज नहीं होना चाहिए प्रशंसा करें तो घमंड नहीं आ जाना चाहिए निंदा करें तो फिर क्रोध नहीं आ जाना चाहिए आपको मैंने वैसे ही अपने इगो को कंट्रोल में लाना होगा यदि मैं वो नहीं करता तो अपने बालों से यह उसका वो मुझे लेटरिंग क्लीन करना पड़ता मैंने आधर और आपको छुटकारा नहीं है

प्रश्न: या तो हम लेट्रिन को बालों से साफ करें या आदिवासियों की मदद करें, लक्ष्य एक ही है - अपने अहंकार को मारना, अपने चरित्र का निर्माण करना।

यानी मैंने तमस भी नहीं आ जाना चाहिए जैसे हमने कल डिस्कस किया था कि यह हमारी प्रोडक्टिविटी को डाउन कर देता है कभी-कभी मने सेल्फ सेंटर्ड नहीं हो जाना चाहिए तो कैरेक्टर बिल्डिंग करते हैं बट वी आर नॉट सेल्फ सेंटर्ड दैट इज मने देखिए कि ये किस तरह से बैलेंस होता है एक और आप जद चले गए तो आप मेगालो मेनिक हो जाएंगे दूसरी ओर आ गए तो आप सेल्फिश हो जाएंगे बहुत ज्यादा जगत की चिंता की तो मैंने आजकल के जो लीडर को देखते हैं कितना घमंड से भरे हुए हैं और बिल्कुल जगत को छोड़ दिया तो कितने सेल्फिश हो जाते हैं तो एग्जैक्ट परफेक्ट बैलेंस करके चलना है जगत में भी अपना कंट्रीब्यूशन है आध्यात्मिक जीवन भी है दैट बैलेंस इज नेसेसरी यह सब चीजें ना मुझे रांची में नहीं समझ में आती थी मैं बड़ा टेंशन में आ जाता था कभी-कभी कि अरे मैं जितना चाहता हूं इतना नहीं कर पा रहा हूं मैंने सोचा था सभी गांव में रेवोल्यूशन ला देंगे वगैरह वगैरह काम कर रहा हूं 400 गांव में कैसे चलेगा वगैरह किंतु फिर धीरे-धीरे करके यह सब कुछ समझ में आया मैंने ठाकुर मा स्वामी जी को पढ़ना सीरियसली राची में ही शुरू किया सो नाउ माय आइडियाज आर मच इवॉल्वड अभी मैं जद राची में पोस्टिंग हो आई विल बी एबल टू वर्क बेटर देन लास्ट टाइम एट द सेम टाइम आई विल नॉट बी अटैच टू द वर्क द वे आई वाज लास्ट टाइम मैं जो कर रहा था वही करता

प्रश्न: इस पर विस्तार से बताएं। यदि आप अभी रांची जाते हैं तो वहां कैसे काम करेंगे?

किंतु टेंशन नहीं लेता उस समय जो था कि इससे भी बेटर करना है इससे भी बढ़ाना है इससे भी ग्रो करना है आई विल डू एवरीथिंग द सेम वे एक्सटर्नली जो मैं करता था एगजैक्टली वही करूंगा और भी पुश करूंगा अपने वॉलंटस को और भी पुश करूंगा कि ज्यादा फंडिंग आए और भी पुश करूंगा बेटर प्रोजेक्ट स्टार्ट हो किंतु इन सब का मैं टेंशन नहीं लूंगा उस समय में बहुत ज्यादा टेंशन में आ जाता था यह क्यों नहीं हो रहा है यह क्यों नहीं हो रहा है मेरी जो एंबिशन है उतने उसके अनुसार क्यों नहीं हो रहा है अभी जो कुछ भी करूंगा श्री राम कृष्ण अर्पण मस्तु जो है ठाकुर का है ठाकुर की इच्छा से सब हो रहा है ठाकुर को मैं सब अर्पित कर रहा हूं किंतु इसका तमस नहीं है जो बहुत सारे लोग श्री राम कृष्णर्पण मस्तु बोल कर के जो करते हैं तमस आ जाता है हुआ तो हुआ नहीं हुआ तो नहीं हुआ ऐसा भी नहीं और टेंशन लेकर करना है ऐसा भी नहीं दोनों के बीच में परफेक्ट बैलेंस अभी ऐसा नहीं है कि मैं मैं परफेक्ट बैलेंस ला पाऊंगा एटलीस्ट मैं थियोरेटिकली ये कह रहा हूं कि ऐसा होना चाहिए ना बहुत परफेक्टली कर सकते हैं बहुत

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद की कार्यशैली क्या थी? उन्होंने इतना संतुलन कैसे बनाए रखा?

परफेक्टली कर सकते हैं देखिए स्वामी जी ने अपना जीवन दान कर दिया अपने हृदय का खून बहा दिया बेलूरमठ की स्थापना करने के लिए रामकृष्ण संघ की स्थापना करने के लिए दैट वाज द अल्टीमेट प्रोडक्ट ऑफ व्हाट ही डिड राइट अभी किंतु देखिए जैसे ही रामकृष्ण संघ की स्थापना हुई उन्होंने कंट्रोल पूरा अपने गुरु भाइयों को दे दिया ना ही अपने पास में रखा ना ही अपने डिसाइल को दिया वरना ऐसा कोई है क्या इस जगत में आप बता दीजिए कि जिसने मेहनत करके एक इंस्टिट्यूशन खड़ा किया हो फिर उसका कंट्रोल दूसरे के हाथ में दे दिया हो असंभव है वह पूरा अपना फुल कंट्रोल बना कर के रखेगा और अल्टीमेटली अपने चमचों को अपने जाने से चमचों को बिठाए ये नेपोटिज्म इंडिया के जितने भी कॉर्पोरेशन है फादर सन को देता है पॉलिटिकल पार्टीज वो लीडर अपने सन को देता है सत्ता क्यों वो खुद को जेल जाना पड़े तो अपनी बीवी को सीएम बनाएगा क्यों ऐसा करेगा क्योंकि किसी भी तरह से यह मूवमेंट मैंने स्टार्ट किया है पावर मैंने हथ आया है कॉरपोरेट हाउस मैंने खड़ा किया है कंट्रोल मेरे हाथ में रहना चाहिए यहां पे स्वामी जी इन सभी लोगों से आज के जितने भी पॉलिटिकल लीडर है कॉरपोरेट हाउस है सबसे ज्यादा हार्ड वर्क उन्होंने किया है और हार्ड वर्क ने के बाद में संघ की स्थापना करने के बाद में कंट्रोल पूरा अपने गुरु भाइयों को दे दिया यानी कि ऑन वन हैंड जगत के लिए परफेक्ट कार्य किया ऑन द अदर हैंड भीतर में से संपूर्ण रूप से निर्लिप्त थे ये परफेक्ट बैलेंस स्वामी जी की लाइफ में है 000 उधार लिया है अपनी मां को देने के लिए मां के पास में रहने के लिए मकान नहीं है मठ में से 5000 लिया अी मठ का पैसा कहां है वो तो खुद का पैसा है खुद अपने हृदय का खन बहा करके अमेरिका से लेकर आए थे उन्हीं के डिसाइल ने दिया है किंतु दे दिया सब मठ को राजा महाराज को बना दिया लीडर क्योंकि ठाकुर ने कहा था कि राजा एकटा राज्य चलाते प रहे है राजा एक राज्य चला सकता है राजा महाराज से उधार लिया है इंस्टिट्यूशन के पास में अभी वो 5000 चुकता करने के लिए सेकंड टाइम अमेरिका जाकर के वो गांव-गांव शहर शहर घूम रहे हैं पैसा कलेक्ट करने के लिए कि वो 5000 का ऋण मुझे बेलूरमठ को वापस देना है दिस इज कॉल्ड परफेक्ट बैलेंस कि आपने हार्ड भयानक हार्ड वर्क किया ऑन वन हैंड दूसरा कि आप संपूर्ण रूप से टेच है

प्रश्न: लीला चिंतन कठिन मुद्दों को स्पष्ट करने में मदद करता है

फिलोसोफी और लीला चिंतन दोनों साथ में चलना चाहिए आपका फिलोसॉफिकल क्लेरिटी आ जाएगा लीला चिंतन का आनंद 10 गुना बढ़ जाएगा आप सिर्फ कहानी सुनेंगे किंतु फिर फिलोसोफी के साथ में मैच करेंगे तब और ही आनंद आएगा ना गुड मैंने नॉलेज एक्सपें होना चाहिए क्योंकि क्या है कि तभी हमारा एक पर्सपेक्टिव ब्रॉड होगा वरना एक नैरो माइंडेड से सोचने से हम लोग एक वो जो कप मंडूक जिसको बोलते हैं ना ऐसे हो जाएंगे