Transcript
ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपने अवतार वय राम कृष्णा ते नमो स्वामी जी के जीवन का हम जो एक आउटलाइन देख रहे थे हम लोग पहुंचे हैं उनके जीवन के यह आखिरी जो मिशन है उनका उनका जीवन यदि हम कुछ कुछ मेजर फेजेस में बांट दे तो जो फर्स्ट मिशन टू द वेस्ट उनके जीवन का एक बड़ा ही महत्त्वपूर्ण समय था उसके बाद में भारत में वापस आए मैंने उसको नाम दिया है मिशन टू द ईस्ट क्योंकि वह सिर्फ भारत वापस आए हैं अपने मित्रों के साथ में गुरु भाइयों के साथ में शिष्यों के साथ में रहने के लिए और बाकी का जीवन आनंद से बिताने के लिए इसके लिए नहीं क्योंकि भारत में भी एक बहुत बड़ा कार्य उनको समाप्त करना था और इसके बाद में सेकंड मिशन टू द वेस्ट तो सेकंड मिशन के बारे में हमने थोड़ा सा चर्चा किया था रिजली मेनर के बारे में कि किस तरह से स्वामी जी अपने शिष्यों के साथ में अपने कनिष्ठ अंतरंग जितने भी अमेरिकन निवासी है उनके साथ में वहां पर रहे और फिर एक्सीडेंटली कहो कि ये फिर कहो कि विधि क्या यह विधान है प्रभु की यह इच्छा है जोसेफाइन मैक्लाउड को वहां से कैलिफोर्निया जाना पड़ा अभी अमेरिका का जियोग्राफी यदि आपको पता हो तो पता होगा कि यह जो न्यूयॉर्क शिकागो वगैरह ईस्ट कोस्ट पे आते हैं अटलांटिक ओशन के किनारे और कैलिफोर्निया आता है ऑन द वेस्ट कोस्ट पैसिफिक ओशन के किनारे और कैलिफोर्निया एक ऐसी जगह है जिसका कि भविष्य एक बहुत ही उज्जवल होने वाला था सभी क्षेत्रों में साइंस हो टेक्नोलॉजी हो न कि फिर आर्ट हो क्रिएटिविटी हो ना कि इंडस्ट्री हो टेक्नोलॉजी हो सभी क्षेत्रों में कैलिफोर्निया का विकास 20th सेंचुरी में एक बहुत ही उच्च रूप से होने वाला था तो वहां आवश्यक था कि वेदांत के बीच गाड़े जाए तब उससे कि क्या होगा विधांत के बीच होने से वहां का जो क्रिएटिव और इंडस्ट्री पावर है वहन ह्यूमैनिटी के बेनिफिट के लिए उसको यूज करे मानुष मानव जात के लिए मानव जात के कल्याण के लिए उसका कुछ ना कुछ यूज हो नहीं कि फिर यह जो एटम बम बना दिया तो फिर आंख बंद करके एक एटम बम यहां पर फेंका एक वहां पर फेंका और आखिर में ऐसा पता चला कि पूरी मानव सभ्यता ही खत्म हो गई है वो जो बड़ा ही फेमस इंसिडेंट है आइंस्टाइन को किसी ने पूछा कि फ थर्ड वर्ल्ड वॉर जो है उस समय सेकंड वर्ल्ड वॉर में न्यूक्लियर वेपन का यूज हुआ था और वो भी यह जो आईक का जो फेमस फॉर्मूला है a इक्व mc1 एनर्जी इज मास मल्टीप्ला बाय स्क्वायर ऑफ स्पीड ऑफ लाइट अभी स्पीड ऑफ लाइट इतना भयानक है 3 लाख किमी पर सेकंड ऐसा कुछ स्पीड ऑफ लाइट है उसका स्क्वायर करो और फिर उसको मास के साथ में मल्टीप्लाई करो अर्थात कि एक छोटा सा पेंसिल उसको यदि आप पूर्ण रूप से दहन करते हैं तो आधे पृथ्वी को वह उड़ा देगा उतना पावर सिर्फ एक छोटी सी पेन या पेंसिल में होता है तो इस इक्वेशन के बेस ऊपर में यह न्यूक्लियर वेपन तो तैयार हुए तो फिर किसी ने पूछा कि आपको क्या लगता है कि सेकंड वर्ल्ड वॉर में इतना पावरफुल टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट हुआ है तो थर्ड वर्ल्ड वॉर किस तरह के वेपन से लड़ी जाएगी तो आइंस्टाइन ने क्या उत्तर दिया कि पता नहीं थर्ड वर्ल्ड वॉर किस तरह के वेपन से लड़ी जाएगी किंतु यह पक्का पता है कि फोर्थ वर्ल्ड वॉर जो होगा वो पत्थर और लकड़ियों से लड़ी जाएगी क्यों क्योंकि थर्ड वर्ल्ड वॉर सेकंड वर्ल्ड वॉर में हालांकि विनाश बहुत हुआ था किंतु इमीडिएट आफ्टर वर्ड्स जो यूरोपियन सभ्यता है पश्चिमी सभ्यता है खास करके अमेरिका और यूरोप बहुत ही रेपिडली अपने को एडवांसमेंट की ओर रिकवर हो पाए थे यानी कि ऐसा कोई भयानक नुकसान नहीं हुआ कि वह कभी रिकवर ही नहीं होंगे वरना तो कुछ कुछ युद्ध ऐसे होते हैं कि जिससे रिकवर होना असंभव होता है तो थर्ड वर्ल्ड वॉर ऐसे ऐसे वेपन से लड़ी जाएगी इस तरह के शस्त्रों से लड़ी जाएगी कि फिर उसके बाद में मनुष्य सभ्यता कभी भी रिकवर नहीं होगी देखिए कि बगदाद खास करके एक उदाहरण ख्याल में आता है कि बगदाद था उस समय 13 सेंचुरी 12थ सेंचुरी उसके आसपास की बात है कि इस्लामिक सभ्यता का चरम शिखर वहां पर जब इस्लामिक स स इस्लाम धर्म का प्रारंभ हुआ और इस्लाम के नाम पर एक के बाद एक सभ्यता आए देश प्रतिष्ठित होते गए तो यह सब जब ईरान पहुंचा ईराक पहुंचा आज का ईरान और इराक उस समय का पचिया तो वहां पर बगदाद बोलकर के कैपिटल सिटी वहां पर स्थापित हुआ जहां पर खलीफा राज करता था और वो कि कल्चर और आर्ट और लर्निंग के दृष्टि से लिबरल लिबरल एटीट्यूड की दृष्टि से सर्वोच्च शिखर पर इस्लामिक सिविलाइजेशन पहुंच चुकी थी उसके बाद में किंतु जब यह मंगोल्स का अटैक प्रारंभ हुआ खास करके चंगेज खान ने एक के बाद एक अपने वह जो वड्स होते हैं इसको बोलते हैं र्ड्स ड अर्थात की यह जो घोड़े पर बैठे हुए सैनिक है सोल्जर्स जो कि पूरे घोड़ों का पूरा झुंड होता है वो जहां पर भी जाते हैं कहर बरसाते हैं विनाश बरसाते हैं और सिविलाइजेशन को सभ्यता को नष्ट कर देते हैं तहस नहस कर देते हैं तो यह मंगोल लोगों का होर्ड्स जो है यह जो मंगोल जहां जहां पर आक्रमण किए जैसे कि चाइना है जैसे कि भारत है सेंट्रल एशिया है रशिया था उस समय का उसमें से भारत और चाइना तो रिकवर हो पाए किंतु जब बगदाद के ऊपर में मंगोल ने आक्रमण किया और जो कहर बरसाया जो वहां पर तबाही मचाई उसके बाद में बगदाद शहर और इस्लामिक सभ्यता फिर से जैसे कि खड़े नहीं हो पाए जैसे कि कमर टूट गई और फिर वह जो खलीफ जो था और फिर वहां से उसको जाना पड़ा मने ये ऐसा है भयानक चीज कि कभी-कभी ऐसे युद्ध होते हैं कि वहां से मनुष्य सभ्यता है या तो वह देश रिकवर हो जाता है कभी-कभी नहीं भी होता तो यह था वह कैलिफोर्निया जहां पर भी स्वामी जी गए थे तो यहां पर देखिए कि यह जो पीरियड है कैलिफोर्निया का इसका मैंने नाम दिया है अमेरिका वेश कोष और वह दिसंबर 99 टू जुलाई 1900 तक है ऑलमोस्ट एक साल का यह पीरियड है ज्यादा नहीं है किंतु यह एक साल में स्वामी जी ने जो कैलिफोर्निया में काम किया कैलिफोर्निया में उन्होंने अपना जो प्रभाव विस्तरी किया उसकी मैंने उसका और कोई हिस्टोरिकल पैरेलल हमको नहीं मिलता है कि बिल्कुल ही अनजानी एक ऐसी जगह पर स्वामी जी गए हैं जहां पे वेदांत जहां पे हिंदुइज्म जहां पे भारत या तो भारतीय सभ्यता उसका कोई लेना देना वहां पर नहीं था हालांकि चाइनीज बहुत सारे कुली वहां पर मजदूर वहां पर ले जाए गए थे क्योंकि वहां पर रेल रोड रेल रोड डालना था तो उसके लिए किंतु वो एक पूरा एक डिफरेंट स्टोरी हो जाता है और यहां पर हिंदुइज्म का प्रवेश ऑलमोस्ट नहीं बथा वहां पर स्वामी जी ने जो कार्य किया और खास करके वहां पर स्वामी जी के कुछ कुछ क्लोज डिसाइल जो तैयार हुए जिनका जीवन इस तरह से परिवर्तित हुआ कि जिसका स्टडी करके हमको भी आनंद मिलता है उसमें मिस्टर एंड मिसेस एनन मिस्टर रोड हेमल उसके बाद में आडा अनसेल और सबसे मैंने जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं वो है ये मिसेस एलिस हेस ब्रोक जो कि तीन मीड सिस्टर्स थी मीड भगिनी त्रय जिनको की कहा जाता है उसका रीजन यह है कि ये जो रेमसंस ऑफ स्वामी विवेकानंद पुस्तक है उसमें वैसे बाकी सबके जैसे ये जो मिस्टर एंड मिसेस एलन है या तो फिर ये आइड अनसेल है इवन इट स्टडी के रेमसंस है वो इट स्टडी जिसने कि स्वामी जी को धोखा दिया उसका रेमसंस भी वो जो जो रेमस ऑफ स्वामी विवेकानंद पुस्तक में है किंतु एलिस एसप्रो है या तो फिर यह हेलन एंस ब्रो है या तो फिर केरी मीड वाइको जो कि तीन मीड भगिनी थी वो इन तीनों के कोई भी रेमसंस वहां पर नहीं है क्यों नहीं है मुझे पता नहीं यह आश्चर्य की बात है यह आपको मिलेंगे स्वामी जी की जो लाइफ है उसमें थोड़ा सा उल्लेख है किंतु ज्यादातर इनके बारे में सबसे सुंदर वर्णन यह न्यू डिस्कवर इस किताब के फिफ्थ और सिक्स्थ वॉल्यूम में है जो उसको पढ़ेगा वो बड़ा ही भाग्यवान है इतना सुंदर डिस्क्रिप्शन ये सबसे पहले तो स्वामी जी जब कैलिफोर्निया आए तो एक मिसेस बजेट करके वहां पे थी जिनके वहां पे वो रुके थे जिनके वहां पे एक्चुअली ये जो मिसेस बजेट थी वो जोसेफाइन मैकलोड़ के भाई की ट्रीटमेंट कर रही थी उनके केयर कर रही थी जिनके वहां पर भी जोसेफाइन खुद रुकी थी तो स्वामी जी भी कुछ समय के लिए रुके और उसके बाद में फिर यह जो मिसेस एलिस एसप्रो उनके घर पे वो रहने के लिए गए और यह कहानी भी बड़ी सुंदर है वो मिसेस एलिस एसप्रो कहती है कि वो अलास्का जाने वाली थी अभी अलास्का एक ऐसी जगह है कि मतलब वहां पर बड़ी ही कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो जाने के लिए रास्ते में स्वामी जी की राजयोग पुस्तक लेकर के गई अभी राजयोग पुस्तक ने उनके ऊपर में इतना प्रभाव विस्तारित किया कि जब वो वापस आई कैलिफोर्निया तो सब समय सोचती रहती थी कि क्या पता नहीं स्वामी विवेकानंद के साथ में कभी मुलाकात होगी कि भी नहीं वो जद कैलिफोर्निया आए तो कितना अच्छा है सही में वो न्यूजपेपर में ड देखा कि स्वामी विवेकानंद व एक प्रवचन देने वाले हैं वहां भा लॉस एंजेलिस में तो लॉस एंजलिस के पास में ही पसडी बोलकर के जगह है वहां प ये लोग रहते थे वो शहर जैसा जसे सर्व कहा जाता है ना बड़े शहरों के सर्व होते हैं तो पसडी नाइ सर्व जैसा ही था लॉस एंजेलिस का तो वहां पे वो रहते थे तो वहां से ये लोग लॉस एंजलिस आए स्वामी जी को सुनने के लिए इमीडिएट स्वामी जी को मुलक स्वामी जी के साथ में मिलने के लिए गए स्वामी जी जहां प रुके थे और स्वामी जी को कहा कि आप एक काम कीजिए हमारे घर पे आइए हमारे घर रहिए पसडी ना में तो स्वामी जी इमीडिएट एग्री हो गए तो दिसंबर और जनवरी यहां पे देखिए कि दो महीना स्वामी जी वैसे लॉस एंजेलिस में रुके हैं और फिर जनुअरी और फेब्रुअरी और एक डेढ़ महीना एक डेढ़ दो महीना ऐसा कुछ ढ़ महीना उनके होंगे लॉस एंजेलिस में और डेढ़ महीना जितना कुछ रुके है पेसना में तो पेसना में जब इनके घर आए रहने के लिए उन दिनों के इतने सुंदर रेमसंस है यह जो मिसेस ये जो मे केरी वाइक केरी मिड वाइको यह जो दूसरी पगनी थी दूसरी बहन थी उनको क्या था कि यह बाद की बात है स्वामी जी जब उनके घर से चले गए थे उस समय उनके घर का अपनी चिरू रख कर के गए थे और चिरू टरक करके गए और बोला कि और वैसे ही जब वो क्या है कि आप जब ट्रेवल करते हैं तो सब सामान तो आप साथ में ले जाते नहीं है तो अपनी चिरूप रख के गए थे अभी स्वामी जी के जाने के बहुत दिनों की बात है कि जब उनको हेडेक हो रहा था ये केरी वाइक को तो उसने क्या किया अभी हेडेक होता है तो बहुत पेन होता है बड़ा ही सफरिंग होता है क्या करें पूरा लाइफ ऐसा लगता है कि रहना मुश्किल हो जाता है तो उन्होंने क्या किया कि स्वामी जी का ये जो था चिरू वो वहां प पड़ा था मेटल पीस के ऊपर में मेटल पीस कौन सी जगह होती है जहां पर फायर प्लेस या अपने भारत में तो इतनी ठंडी नहीं पड़ती इंडिया में वहां पर ठंडी बहुत पड़ती है तो वो फायर वो जो है अग्नि जलाते हैं घर के भीतर में तो अग्नि जहां पे चलाते हैं उसको फायर प्लेस कहते हैं और फायर प्लेस के ऊपर में वो एक पत्थर का एक स्लेप होता है छोटा सा प्लेटफार्म जैसा जिसको कि ये मेंटल पीस कहते हैं तो उसके ऊपर में स्वामी जी का ये चिरू उन्होंने वहां पर रखा हुआ था तो जैसे ही केरी वाइ कोपने देखा कि स्वामी जी का चिरू तो उसको लेकर के अपने सर पर दो-तीन बार घिसा जैसे ही ऐसा किया वैसे ही उनका हेडेक चला गया तो मने इतना स्वामी जी का इनके ऊपर में इतनी कृपा थी फिर और एक बहुत ही फेमस इंसिडेंट इनके ही घर में है स्वामी जी एलिस इन वंडरलैंड के बारे में बोलते हैं एक बहुत ही फेमस किताबें बच्चों की तो अभी जैसे कि ये इनकी जो छोटी बच्ची थी मिसेस एस ब्रो की तो अपनी सहेलियों के साथ में अपने मित्रों के साथ में वहां पे बैकयार्ड में खेला करती थी तो स्वामी जी सब समय इनको ऑब्जर्व करते थे पूछते थे कि तुम लोग स्कूल में क्या पढ़ाई लिखाई करते हो किस तरह से तुम लोगों को शिक्षा ट्रेनिंग दी जाती है किस तरह की गेम्स वो आप किस तरह के खेल आप खेलते हैं वगैरह क्योंकि यह जो डेवलपमेंट किस तरह की प्रोसेस है एजुकेशन उसमें स्वामी जी को हमेशा से इंटरेस्ट था तो उसी सब चीजों को लेकर के स्वामी जी कहते हैं कि एलिस इन वंडरलैंड जो किताब है एक बहुत ही अच्छे तरीके से लिखी गई है इट इज वन ऑफ द ग्रेट बुक्स क्योंकि ये जो ममसिक नेचर है किताब का तो ये वर्ल्ड इट सेल्फ इज अ विम सिकल किताब में आप देखेंगे एक रेड क्वीन है फिर ये एक कैटरपिलर है फिर एक रेबिट है और इस तरह के पात्र है सब जो कि हमको बड़े ही हास्य जनक लगेंगे क्योंकि ये लिखी गई है बच्चों के लिए तो हास्य जनक तो होंगे ही होंगे ह्यूमर इज एसेंशियल पार्ट ऑफ आर्ट और बहुत सारे लोगों को ऐसे ह्यूमरस किताबें पढ़नी अच्छी लगती है तो ये जो फंसी है व ह्यूमर है य दिस इज स्वामी जी कहते हैं वर्ल्ड इज लाइक अ स्टेज यह जो विश्व है इसमें हम लोग बहुत ज्यादा सीरियसली अपने को ले लेते हैं सोचते हैं कि अरे नहीं हमको इसी तरह से रहना होगा इसी तरह से सब बिहेव करना होगा इसी तरह से ट्रेडिशनल सी फॉलो करनी होगी स्वामी जी कहते हैं माया के जगत में ठीक है कि अपनी स्पिरिचुअल साधना के लिए अपनी लाइफ को डिसिप्लिन में रखे दैट इज वन थिंग किंतु भीतर में एक मेंटल फ्रीडम होना चाहिए चाहिए यदि एक आइडियाज का फ्रीडम नहीं होगा तब क्या होगा कि अपनी लाइफ बहुत ज्यादा रिचड हो जाएगी और यह चेंजिंग परिस्थिति है चेंजिंग नेचर ऑफ वर्ल्ड जो है उसके साथ में आप अपने को कदम से कदम मिला कर के चल नहीं पाएंगे यह जो मॉडर्न इंडिया बोलकर के वर्तमान भारत बोलकर के स्वामी जी का एक एसे है एक एक आर्टिकल है उसमें उन्होंने बहुत ही सुंदर रूप से बताया है कि किस तरह से थ्रू आउट द हिस्ट्री ऑफ इंडिया एक बाद एक फोर्सेस उसका राइज हुआ और जिन जैसी जैसी ये जो समय के परिवर्तन के साथ में यह फोर्सेस भी चेंज होती गए जैसे कि ब्राह्मण एक समय था कि पुरोहित लोगों का राज्य था जो पुरोहित कहेगा जो ब्राह्मण कहेगा वह सबको सुनना पड़ता था इवन राजा लोग भी उनके उनके उनसे डर करके रहते थे इस तरह की विधि करनी है इस तरह का होम करना है इस तरह का यज्ञ करना है यदि नहीं करेंगे तो आपके सातों कुलों का सत्यानाश होगा श्राप दे देंगे ऐसा कर के उन लोगों ने समाज को अपने कंट्रोल में करके रखा था वो एक युग था उसके बाद में क्षत्रिय युग आया जबकि राजा महाराजा सम्राट यह जो चक्रवर्ती यह लोग सब बड़े-बड़े भोग विलास में युद्ध करके अपने वो अपने राज्य का विस्तार करते हैं और यह जो राज्य शक्ति है उसको इकट्ठा करते हैं उसके बाद में युग आया यह वैश्य का अर्थात कि ये ट्रेडिंग कंपनीज का यह जो ईस्ट इंडिया कंपनी है उसने जब भारत प आक्रमण किया तो यह राज्य शक्ति और पौरोहित्य शक्ति यह दोनों समझ नहीं पा रही है कि इसका सामना कैसे करें क्योंकि इनका यह जो ईस्ट इंडिया कंपनी है उसका उद्देश्य ना ही अपने भगवान जैसे कि ब्राह्मण लोगों का है कि मेरे भगवान श्रेष्ठ है उनकी आराधना कीजिए और मुझे बीच में दक्षिणा दीजिए तो ईस्ट इंडिया कंपनी को ना ही अपने किसी भगवान की स्थापना करनी थी वो क्रिश्चियनिटी को लिप्त सर्विस ही देते थे इससे ज्यादा और कुछ नहीं ना ही उनको राजा महाराजाओं की तरह राज्य विस्तार करना था उनका एक ही कार्य था यह जो ट्रेडिंग के द्वारा पैसे इकट्ठा करना यह धन शक्ति जो है इस वो था उनका मुख्य उद्देश्य तो अपने राजा अपने पुरोहित समझ ही नहीं पाए कि किस तरह से इसका सामना करें और फिर युग आया यह शुद्र शक्ति का ये जो आजकल जो कम्युनिज्म है साम्यवाद है ये जो वर्कर्स ऑफ द वर्ल्ड यूनाइट क्योंकि यह जिस तरह से इतने सालों से व रिप्रेस होते आ रहे हैं उनको एक आवाज मिली एक प्लेटफॉर्म अपनी पावर अपनी शक्ति को प्रोजेक्ट करने का तो स्वामी जी कहते हैं जो पूरा एक युग चक्र है ब्राह्मण से क्षत्रिय से वैश्य से शुद्र तक की ये एनर्जी शक्ति ट्रांसफर होती है तो ये जो फ्रीडम ऑफ माइंड अपने पास में नहीं होगा फ्रीडम ऑफ आइडिया नहीं होंगे तो इस तरह से रेडिकल थिंकिंग करके समय के साथ में चलने की कैपेसिटी हम खो बैठेंगे दैट इज वई स्वामी जी प्रेस दिस एलिस इन वंडरलैंड उसके बाद में लोस एंजलिस पेसना स फ्रांसिस्को तो पेसना में जब स्वामी जी इनके यहां प रह रहे थे मिसेस एलिस एंस ब्रो के वहां पे तो ऐसा हुआ ठीक कि स्वामी जी वहां से सैन फ्रांसिस को जाएंगे तो एलिस हैंस ब्रो कहती है कि स्वामी जी क्या मैं आपके एडवांस एजेंट के रूप में वहां पे जाऊं वहां पर जाकर के सब आपके रहने की व्यवस्था ठीक-ठाक करूंगी आपके आने की पब्लिसिटी वगैरह करूंगी जिससे कि क्या होगा कि आप आने से इमीडिएट आप क्लासेस स्टार्ट कर दे जिस तरह से केलिए लॉस एंजलिस में आपको थोड़ा सा वेट करना पड़ा अपने को एस्टेब्लिश करने के लिए वो नहीं करना पड़ेगा तो स्वामी जी ने कहा हां इमीडिएट जाओ जाओ तो स्वामी जी ऐसा कहते हैं किंतु इनकी जो दो बहने हैं जो हेलन और ये केरी वाइको वो दोनों कहती है कि अरे तुम तो बड़ी ही मने इंट्रोवर्ट हो बड़ी ही मने लज्जा शल हो दूसरों के सामने बात भी नहीं कर पाती इतने बड़े महानगर में जाकर के स्वामी जी के एडवांस एजेंट का काम करना है ये तो कोई छोटी मोटी बात नहीं है तुम वहां पर जाओगी तो किस तरह से यह सब काम करखा होगी स्वामी जी के एडवांस एजेंट के रूप में तो ऐसे किसी को जाना चाहिए जो कि हाईली एक्सपीरियंस है लोगों के साथ में बात करके काम करवा सकता है ऐसा कोई जाना चाहिए तो फिर यह जो मिसेस हेस ब्रो कुछ बोल नहीं ही वो थोड़ी सी मायूस हो गई और उसने सोचा कि ठीक है मैं नहीं जाऊंगी क्योंकि इन लोगों की बात तो सही है कि इस तरह से पब्लिक डियरिंग तो उन्होंने कभी किया नहीं है तो कुछ दिनों के बाद में स्वामी जी ने देखा कि वो कुछ नहीं कर रही जाने की बात नहीं कर रही तो स्वामी जी ने कहा कि क्यों क्या हुआ आप जाने की की बाद आप जाने वाले थे तो उसने कहा कि स्वामी जी मेरी बहनों का ऐसा कहना है कि मैं इतनी व पब्लिक डीलिंग में मेरी कोई एक्सपर्टाइज्ड के वो गई वहां से सैन फ्रांसिस्को और सही में इतना सुंदर रूप से उन्होंने सब आयोजन किया वहां पर होम ऑफ ट्रुथ बोलक के एक था और यह होम ऑफ ट्रुथ उसके बहुत सारे ब्रांचेस थी वहां पर वो एक न्यू थॉट मूवमेंट थी अमेरिका में जो न्यू थॉट मूवमेंट एक चल रही थी उसके अंतर्गत यह क्रिश्चियन साइंस है फिर यह होम ऑफ ट्रुथ है वगैरह काफी कोई उसके भीतर में थे कि ट्रेडिशनल क्रिश्चियनिटी और चर्च का जो ट्रंगल वड था सोसाइटी के ऊपर में तो उससे निकल कर के नए आइडियाज को ग्रहण करने की उनकी इच्छा थी तो ये होम ऑफ ट्रुथ जहां-जहां प भी थे वे लोग स्वामी जी को वेलकम करते थे तो उसने सीधा होम ऑफ ट्रुथ में गई वहां पे मिस लाइडिया बेल बोल कर के वो एक थी फिर और दो तीन थे तो वहां पे उनके साथ में संपर्क करके नकत में रहने की व्यवस्था कर दी स्वामी जी जिस दिन आए तो उस दिन स्वामी जी को लेने रिसीव करने के लिए वो जो फेरी घाट जो होता है क्योंकि वो तो एक ये था बी में एक समुंदर जैसा था वह क्रॉस करके वहां पर जाना होता था तो व फेरी में स्वामी जी आए थे फेरी यानी कि एक लच बोट जैसा स्टीम लॉन्च जैसा तो ये लॉन्च में स्वामी जी आए फिर स्वामी जी को लेकर के वहां पर गई ऑम ऑफ ट्रुथ में फिर दूसरे दिन से स्वामी जी के प्रवचन का प्रारंभ हुआ कुछ दिनों के बाद में किंतु स्वामी जी को लगा कि होम ऑफ ट्रुथ में रहने से क्योंकि वहां पर दूसरे भी लोग रहते थे तो उनको जो एक फ्रीडम चाहिए अपने को रहने के लिए क्लासेस फ्रीली कंडक्ट करने के लिए वो नहीं मिले तो फिर इमीडिएट फिर मिसेस हजरो ने ठीक किया कि व एक टर्क स्ट्रीट बोलकर के एक जगह थी वहां पर एक स्लेट को हम लोग हायर कर लेते हैं रेंट प ले लेते हैं तो वहां पे रेंट पे फ्लैट लिया गया और फिर वहां पर वह स्वामी जी की केयर टेकर के रूप में वो वहां पर रहती थी तो वो मिसेस एलिस ब्रो फिर ये जो होम ऑफ ट्रुथ के जो संचालक था संचालिका थी वो एक वो भी स्वामी जी की डिवटी हो गई थी वो दोनों वहां पर स्वामी जी के साथ में परमानेंटली रहने लगे और ये क्लासे स्टार्ट हुए और वहीं पे ये मिसेस एडिथ एलन वो स्वामी जी की उनके साथ में पहली मुलाकात हुई थी एडिथ लन के बहुत ही सुंदर रेमसंस है वो उस समय जिस समय स्वामी जी वो और मने पति पत्नी थे मिस्टर एंड मिसेस एलन तो टॉम एलन और एडिथ हेलन तो टॉम एलन पहली बार स्वामी जी को मिलने के लिए गया एडिथ एलन नहीं जाह पाई मैंने स्वामी जी का प्रवचन अटेंड करने के लिए एडिथ एलन नहीं जाह पाई क्योंकि वो बहुत ही बीमार थी उस समय तो टॉम ने सोचा कि मैं अकेला जाता हूं स्वामी जी को देख कर के सुन कर के ऐसा आश्चर्य चकित हो गया घर आ कर के अपनी वाइफ को कहता है कि टुडे आई हैव सीन अ गॉड आज मैंने एक ईश्वर को देखा है उनकी बातों में ऐसी आकर्षण शक्ति है उनका इतना प्रभावशाली व्यक्तित्व है सोच ही नहीं सकता कि पृथ्वी पर इस तरह के मनुष्य रहते हैं तो इतना उत्साह से बात करने लगा कि दूसरे दिन एडिथ एलन वो बीमार थी फिर भी कैसे भी कर के वो स्वामी जी को स्वामी जी का प्रवचन सुनने के लिए आई वहां पर बैठी और पहले तो सोच रही है कि क्या मैंने यहां पे आके गलती तो नहीं की क्योंकि शरीर में इतना पेन था कि क्या करें किंतु जैसे ही स्वामी जी उस हॉल में पधारे उन्होंने अपना प्रवचन देने की शुरुआत की वो सब कुछ भूल गए जैसे कि पेन सफरिंग डिसीज सब अदृश्य हो गया स्वामी जी का जो पावर था मनुष्य के मन को एलीवेट करने का तो फिर वो इतनी प्रभावित हो गई किंतु स्वामी जी के साथ बात करने की उसका साहस नहीं है इसलिए कोने में खड़ी है प्रवचन समाप्त हो गया स्वामी जी सभी भक्तों के साथ में जो व श्रोता थे उनके साथ में बात कर रहे हैं वो अकेली कोने में खड़ी है उस समय स्वामी जी ने उनको देखा तो स्वामी जी ने उनको सामने से बुलाया कि मैडम डू यू वांट टू टॉक विथ मी तो उन्होंने कहा कि हां मैं आपके साथ बात करना चाहती हूं तो उस समय क्या था कि स्वामी जी प्रवचन के लिए थोड़ा सा कलेक्शन भी किया जाता था तो स्वामी जी ने कहा कि एक काम कीजिए आप मेरे टर्क स्ट्रीट फलेट पे आइए वहां प ये कलेक्शन का पैसा देने का कोई झंझट नहीं है कल सुबह को आप आइए तो मिसेस एलन कहती है कि हां मैं आऊंगी तो उस दिन रात को तो उनको निनीन भी नहीं आई पूरी रात परर सोचती रहती है कि स्वामी जी को मिलने के लिए जाऊंगी क्या बात करूंगी क्या उनका प्रश्न करूंगी ऐसा करके फिर दूसरे दिन सुबह को जब गई तो जैसे ही वो फ्लैट में जा रही है किसी ने कहा कि स्वामी जी किसी से मिलेंगे नहीं क्योंकि वो बाहर जा रहा है तो बड़ी ही निराश हो गई कि अरे मैं तो स्वामी जी से मिलना चाहती थी किंतु फिर उसने सामने से कहा कि नहीं मुझे तो स्वामी जी ने बुलाया है वो मेरे साथ में अवश्य बात करेंगे तो अभी वो जो ऐसा कहने वाली कि स्वामी जी नहीं मिलेग आपसे वो थी मिसेस एलिसन प्र तो उसने कहा कि अच्छा ठीक है स्वामी जी ने आपको बुलाया है सामने से तो आप आइए बैठिए राह देखिए थोड़ी वो बैठी है वहां पे राह देख रही है खिड़की के पास में दो कुर्सियां थी सामने सामने रखी हुई इस साइड में ये विंडो है तो थोड़ी देर के बाद में स्वामी जी आए अपनी वो जो स्टाइल थे उनके बाल भी उस समय लंबे रखे थे डिवटी का कहना था कि बाल मत कटवाए तो ठीक है चलिए तो बाल लंबे थे वो फिर वोह जो एक ओवरकोट था ऐसा कुछ पहना हुआ था और आकर के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गए और वह बड़े ने हल्के शब्दों में संस्कृत के मंत्रों का उच्चारण कर रहा है कुछ क्षण तक ये मंत्रों का उच्चारण किया फिर बाद चैटिंग किया और बाद में कहा मिसेस एलन को कि बताइए मैडम कि आपकी क्या समस्या है आपकी क्या बात है तो जैसा ही स्वामी जी ने ऐसा कहा एडिथ एलन ने रोना शुरू कर दिया और रो रही है रो रही है उसका रोने का ही नहीं आ रहा है जैसे कि ये जन्म जन्मांतर के क्लेश जो है जन्म जन्मांतर के पाप है कु कर्मा है सब कुछ जैसे कि स्वामी जी के आशीर्वाद से उनके आंसुओं से सब कुछ धो गए मन बिल्कुल शांत हो गया और जब रोना बंद किया तो स्वामी जी ने कहा कि एक काम कीजिए आप कल फिर से आइए फिर से बात करेंगे तो फिर दूसरे दिन से यह मिसेस एलन प्रतिदिन स्वामी जी वहां प जितने दिन थे व टर्क स्ट्रीट फ्लेट में सैन फ्रांसिस्को में प्रतिदिन उनके पास में आती थी उनका प्रवचन सुनेगी और उसके बाद में स्वामी जी स्वयं जब भोजन बनाएंगे तो भोजन बनाने में उनकी सहाय करेगी और उस समय के भी इतने सारे रेमेडी सर्स कि जब स्वामी जी खाना पकाते हैं तो व सब समय कुछ ना कुछ मंत्रोच्चार किया करते हैं गीता में से चडि करेंगे उपनिषद में से करेंगे और उसका अर्थ इनको बताएंगे और फिर क्या है पता है कि देखिए कि वैसे तो स्वामी जी का बड़ा ही पवित्र भाव था किंतु ये जो अमेरिकन स्त्रियां जो बोती है उनका क्या है एक फेमिनिज्म जो एक होता है वो भी तो उनके कैरेक्टर का एक पार्ट है उनको ऐसा लगता है कि ये जो पुरुष जो है वो उनको अटेंशन दे और उनकी छोटी-छोटी मने चीजों को पर में लक्ष्य रखे जिसको कि च वेलरी कहते हैं ना यूरोप में कि जो पुरुष होगा वो जो सुंदर स्त्री को देखेगा तो फिर उसके ऊपर में ज्यादा अटेंशन देगा तो अभी स्त्रियों का भी ऐसा एक नेचर हो जाता है कैसा ना कैसा करके पुरुषों का अटैचर अपने ऊपर में लाने का तो अभी एक दिन क्या हुआ कि ये मिसेस एलन वो वहां पे उनको हेल्प कर रही थी एडिथ हेलन उस समय आचार थोड़ा सा उनके कपड़े प गिर गया उनके वस्त्र के ऊपर में जो ड्रेस पहना था उसके ऊपर तो अभी क्या है कि ये जो विदेशी पुरुष होंगे ना वो ऐसा मुके का लाभ उठा कर के बड़ा ही एक ऐसा सीन खड़ा करेंगे अच्छा अच्छा आपको ऐसा हुआ चलिए मैं इसको साफ कर देता हूं चलिए मैं आपको हेल्प करता हूं तो इसने सोचा कि स्वामी जी भी ऐसा ही उनका नेचर होगा कि अभी उनका पूरा अटेंशन खाना वगैरह बनाने में से जल कर के मेरे पे आ जाए तो वो राह देख रही है राह देख रही है कि कब स्वामी जी उनको हेल्प करते हैं और बीच-बीच में बोल भी रही है कि अरे देखिए मेरे ड्रेस पे आचार गिरा है तो अभी मैं क्या करूं अभी तो स्वामी जी किंतु देखिए कि उसके ऊपर में थोड़ा सा भी अटेंशन नहीं दिया उने अपना जो काम कर रहे हैं खाना पकाने का वो पका ही रहे हैं उसके ऊपर भी बिल्कुल ध्यान दिए बिना तो अभी उसको सडन ख्याल आया कि ये किसके साथ में वो खड़ी है किसके साथ में बात कर रही है किसके सानिध्य में है स्वामी जी कोई आम पुरुष नहीं है कि वो हां स्त्रियों के भीतर में डिविता हैं दिव्यता देखते हैं इसके लिए उनको सन्मान देखते हैं स्त्रीत्व या तो फेमिनिज्म देख कर के उनको सम्मान नहीं देते तो शी सेज क्या ये मेरे जीवन का एक बहुत बड़ा एक लेसन ये हो गया और यह मेरी लुईस जो है न्यू डिस्कवरी लिखती है उसने भी इस घटना को लेकर के काफी कुछ विस्तृत है जो ईस्टर्न माइंड सेट और ये वेस्टर्न माइंड सेट किस तरह से काम करता है काफी अच्छा कंपैरेटिव एनालिसिस किया है उसी टर्क स्ट्रीट की घटना है कि मिसेस एलिस हेस ब्रो स्वामी जी के लिए सुबह को खाना पकाया करती थी तो वो जो अभी वो खाना बना सूप बनाती थी सूप बनाती थी वो बनाते बनाते सूप को बहुत लंबा समय उबालना पड़ता था तो उबलते उबलते ऐसा हो जाता था कि अभी क्लास का समय हो रहा है स्वामी जी राजयोग के क्लासेस कंडक्ट कर रहे हैं मेडिटेशन सिखा रहे हैं ध्यान वगैरह उसकी बातें चल रही है तो अभी क्लास का समय 10 बजे नी कि ऐसा कुछ था तो स्वामी जी ने देखा कि क्लास शुरू हो गया है और मिसेस हैंब्रो आई नहीं है तो उन्होंने किचन में जाकर कहा कि क्या बात है क्लास का समय हो गया क्लास में नहीं आना तो उन्होंने कहा स्वामी जी मैं आपके लिए खाना पका रही हूं इसको उबालना पड़ेगा और ज्यादा समय सुब को तो थोड़ा सा टाइम लगेगा तो अभी मैं नहीं आ पाऊंगी क्लास तो स्वामी जी ने कहा डोंट वरी आई विल मेडिटेटर यू मैं आपके लिए ध्यान करूंगा और यह बात देखिए कि यही मिसेस एलिस एज इस घटना के कितने सालों के बाद में स्वामी अशोकानंद जी उस समय कैलिफोर्निया में थे नॉर्दर्न सोसाइटी ऑफ कैलिफोर्निया ये सन फ्रांसिस्को में और उन्होंने उनको पता चला कि स्वामी जी के जो क्लोजेस्ट डिसाइल है उसमें से मिसेस एलिस एसप्रो अभी भी जीवित है तो उन्होंने उनका संपर्क किया और कहा कि आपके जो रेमसंस है वो हमको लिखवाई है वोह तो बहुत ही मूल्यवान है तो उस समय स्वामी जी के साथ में मुलाकात हुई थी 1900 में और यह जो अशोकानंद जी जी के साथ में मुलाकात हुई हो गई समवेल के आसपास का ये समय बीत गया था तो ये मि अभी अशोकानंद जी भी जब रेमसंस किसी को यह क्या है बड़ा ही डेलिकेट प्रोसेस है आपके किसी पवित्र यादें है तो आप किसी के सामने इंटरव्यू लेने के लिए बैठ जाएंगे कहेंगे कि आपकी जितनी यादें हैं बताइए मैं लिख लेता हूं तो इस तरह से वो कोई रिकनेक्ट प्रॉपर होता नहीं है आपको एक ऐसा एटमॉस्फियर खड़ा करना पड़ेगा कि जिनको आप यह सब पूछ हैं उनके मन में से ऑटोमेटिक यह सब पुरानी यादें आना शुरू हो जाए तो अशोकानंद जी का ये साइकोलॉजिकल बढ एकदम कतम का तो उन्होंने क्या किया कि वेदांत सोसाइटी का जो टेंपल है वो जो त्रिगुणा तीता नंद जी ने वो जो फर्स्ट हिंदू टेंपल इन अमेरिका व जो कंस्ट किया था उसमें इनको नहीं बुला करके क्या ठीक किया कि लॉन्ग ड्राइव के लिए जाएंगे यह जो गोल्डन ग गोल्डन गेट ब्रिज जो है सैन फ्रांसिस्को में वहां पे वहां प सुंदर पार्क है तो इतना रमणीय प्राकृतिक दृश्य है और गाड़ी में आप ड्राइव कर रहे हैं फिर एक सुंदर रमणीय जगह पर जाकर के आप रुकते हैं और फिर यह सब बातें करते हैं कि हां स्वामी जी के समय की बातें स्वामी जी के साथ में क्या प्रसंग क्या अनुभव हुए क्या प्रसन्न हुए तो एक और समुंदर है एक और पार्क है एक सुंदर रमणीय वातावरण है तो और ड्राइवर था स्वामी चिदानंद बोलकर एक थे जो कि अमेरिकन थे और उनके डिसाइल थे अ इनके अशोकानंद जी के तो ये तीन लोग लॉन्ग ड्राइव के लिए जाते थे और ये लॉन्ग ड्राइव में ये पूरे रेमनी सेंस अशोकानंद जी ने कलेक्ट किए उस समय इस घटना का उल्लेख करके मिसेस एनिस हेस ब्रो कहती है कि वो जो स्वामी जी ने कहा था कि आई विल मेडिटेटर यू तो यह जो 2 साल का जो समय बीता प्रत्येक दिन मुझे अनुभूति हो रही है कि स्वामी जी इज रियली मेडिटेटिंग फॉर मी क्योंकि जो ध्यान करते करते जो शांति है एक आनंद है एक स्ट्रेंथ है उसका जो भाव आता है वो भाव मेरे जीवन में सब समय के लिए अक बं बरकरार बना रहा है कभी भी इसमें थोड़ी सी भी कमी नहीं आई वो कहती है कि वो उस समय में कैसी थी इतनी लज्जा शल थी लोगों के साथ में बात करने से डरती थी इवन यहां तक कि जोसेफाइन मेगला जोसेफाइन का नेचर कैसा था कि थोड़ा सा एक्सट्रोवर्ट था थोड़ा सा अग्रेसिव था और ये बेचारी थोड़ी सी इंट्रोवर्ट थी बोल नहीं पाती थी तो जोसेफाइन मैक्लाउड के साथ में अभी वो भी तो स्वामी जी के साथ में थी तो कुछ भी डिसीजन मेकिंग करना है किस तरह से ऑर्गेनाइज करना है स्वामी जी के लेक्चर को तो मैक्लाउड जोसेफाइन जो कहेगी वो होगा और इनकी हालांकि वोह लोकल निवासी है वहां की किंतु फिर भी इनकी बात को सुनेगा नहीं कोई तो किंतु किंतु धीरे-धीरे करके नेचर में जो परिवर्तन हुआ तो जोसेफाइन के मुंह पे बात सुना देना उनकी बात को काट दे ना यहां तक का साहस इनके भीतर में आ गया था आखिर में फिर पूरा समय यह स्वामी जी के साथ में रही थी और फिर यह जो कैम टेलर जहां पर जाकर के स्वामी जी की यह जो कैलिफोर्निया यात्रा का अंत आया था वहां तक वह स्वामी जी के साथ में थी और केम टेलर जाने की भी एक बहुत ही फनी स्टोरी है अभी ऐसा हुआ था कि वह घर छोड़ कर के तीन महीने से स्वामी जी के साथ में रह रही थी अभी स्वामी जी ने ठीक किया कि कैम टेलर जाएंगे कैम टेलर एक सुंदर रमणीय जगह है वहां पर इसे ओपन प्रकृति में कैम टेंट डाल कर के उसमें रहना है तो बाकी भी डिसाइल जाने वाले थे स्वामी जी के आइड अंसल थी मिस लीडिया बेल थी वगैरह तो स्वामी जी ने कहा कि हम लोग वहां पर जाएंगे आप भी चलिए तो अभी एलिस हेंस ब्रो की इच्छा नहीं थी जाए तीन महीने से घर से दूर है उनकी खुद की बच्ची छोटी है 6 सा साल की ही है तो अकेली मां के बिना इतने दिन कैसे रहेगी तो वो मना कर रही थी स्वामी जी ने कहा नहीं नहीं आपको आना ही पड़ेगा तो ठीक है चलिए कैसे भी करके जाने के लिए तैयार हुए अभी जिस दिन कैंप टेलर के लिए जाना था ट्रेन पकड़नी थी तो पता चला कि ट्रेन मिस हो गई थोड़ा देर ही हो गया था घर से निकलते निकलते तो अच्छा ठीक है और फिर दूसरी ट्रेन में जाक के बैठे बहुत देरी तक बैठे रहे फिर पता च सोच रहे कि ट्रेन चल क्यों नहीं रही है फिर बाहर आकर देखा तो ट्रेन में इंजन ही नहीं था वो सिर्फ डब्बे पड़े हुए थे अभी घर वापस आए और फिर वापस आकर के स्वामी जी ने कहा देखिए आपकी इच्छा नहीं है ना आपका हार्ट इस अपने घर पर था आपका हृदय अपनी बच्ची के साथ में था तो इसकी वजह से हम लोग जा नहीं पाए जो हृदय जो होता है उसकी शक्ति इतनी पावरफुल होती है कि उसको क्रॉस करके जगत की कोई भी घटना है वो आप यह नहीं उसकी घटना व अंजाम नहीं दे पाएंगे इसके बारे इसी के रिलेटेड एक सुंदर एक दूसरा भी एग्जांपल है यह मैंने सुना है इसका मुझे डिटेल इतना नहीं बता पाऊंगा और इसकी कितना फैक्ट है वो भी मुझे नहीं पता क्योंकि मैंने किसी से सुना था इसके बारे में यह जो स्वामिनारायण भगवान है जो कि गुजरात में उनका बड़ा ही नाम है और वैसे ही वह भारत में काफी उन्होंने भ्रमण किया था बाद में गुजरात में जाकर के रुके थे तो वो क्या था कि गांव गांव वो जाते थे वो मंडल होगा वहां पे हरी कथा वगैरह होगा भक्तों के साथ में आचार विचार सब चर्चा विचारना होगी वगैरह फिर वोह भोजन लिया जाएगा फिर वो घोड़े पर बैठ कर के दूसरे गांव जाएंगे तो उस समय वह एक गांव में गए वहां पर उनकी एक लेडी डिवटी थी तो उनकी इच्छा नहीं थी कि प्रभु उसी दिन वहां से चले जाए वहां प और एक दिन जद रह पाए तो बहुत अच्छा है ऐसी उनकी इच्छा थी तो अभी किंतु स्वामीनारायण उन्होंने ठीक कर लिया कि नहीं यहां से तो जाना ही है तो अपने घोड़े पर बैठे और घोड़े को कह रहे हैं कि चलो आगे तो किंतु घोड़ा चल ही नहीं रहा है चल ही नहीं रहा है सभी लोग उनके बहुत सारे डिसाइल थे सभी लोग आश्चर्य चकित हो गए कि ये स्वामीनारायण भगवान का ये जो घोड़ा है वो तो वैसे तो बड़ा ही आज्ञा कीत है आज ऐसा क्यों कर रहा है आज्ञा को सुन नहीं रहा है तो अभी कित स्वामिनारायण को पता चल गया कि बात क्या है वो घोड़े पर से उतरे वो जो लेडी डिवटी जहां पर खड़ी थी वहां पर जाकर के कहा कि माता जी आप आज्ञा दे तो मैं जाऊं तो देखिए कि उनकी इच्छा नहीं थी तो उनकी इच्छा की वजह से घोड़ा भी नहीं चल रहा जब उन्होंने कहा कि हां ठीक है आप जाइए तब ज कहीं जाकर के घोड़े ने चलना शुरू किया तो ये जो ये जो हार्ट जो होता है हार्ट य जो लव जो होता है उसका एक ऐसा पावर है कि ये जगत भी है ना कभी-कभी उसके वश में आ जाता है तो स्वामी जी ने ठीक कहा बिल्कुल कि आपका हृदय जो है अपनी बच्ची के पास में पड़ा हुआ है इसलिए हम आज यात्रा नहीं कर पाए तो उसके बाद में किंतु फिर ठीक है फिर वो हृदय से एग्री हो गई कि हां नहीं जाना ही है स्वामी जी के साथ तो फिर वो स्वामी जी के साथ में कैम टेलर आई थी और ये कैम टेलर की भी बड़ी ही एक सुंदर घटना है छोटी सी वहां पे स्वामी जी प्रतिदिन यह जो आइड अनसेल है मिस लीडिया बेल है ये एलिस हैंस ब्रो है उनको ध्यान सिखाते थे तो एक दिन स्वामी जी ध्यान करने के लिए सबके साथ में बैठे तो स्वामी जी ने कहा कि देखिए अच्छा इससे पहले दूसरी घटना है घटना नहीं एक सुंदर नेमिनी संसर यही आडा अनसेल का जिसने ये दूसरी घटना लिखी है ये आडा अनसेल का रेमसंस है वो कहती है कि मेरा ये जो एक एक्चुअली आइड सेल है ना वो एक तरह से उसको पैरालिसिस जैसा हो गया था वो ठीक से चल नहीं पा रही थी वो इसलिए अभी क्या होता है कि इनका लाइफ बड़ा ही कष्टम हो जाता है तो स्कूल से ही यह सब उनके साथ में शुरू हो गया था फिजिकल पेन सफरिंग पैरालिसिस वगैरह तो कहती है कि मेरा जीवन बड़ा लब्बा है किंतु सफरिंग के अलावा कुछ नहीं मिला वगैरह वगैरह वो अपना सुंदर वर्णन करती है फिर कहती है कि मेरे इस लंबे जीवन में किंतु दो घटनाएं ऐसी है दो प्रसंग ऐसे है कि जिसको मैं जब भी याद करती तभी मेरा मेरे जितने भी मने सफरिंग है पेन है स्ट्रेस है सब चला जाता है वो दो में से एक है कि हरि महाराज के साथ में शांति आश्रम में जो पहली रात बिताई थी जब हरि महाराज यानी कि रयान जी महाराज शांति आश्रम जो कि जमीन स्वामी जी को एक वैसे तो अभेदानंद जी के एक डिसाइल ने डोनेट की थी तो वहां पर तुर्या जी महाराज रहते थे अपने कुछ वेस्टर्न डिसाइल्स को लेकर के तो उसमें ये एक ये भी थी आइड अन सेल तो वो पहली रात जो ध्यान किया था वो एक है और दूसरी है कि केम टेलर में रात जग जब पहली रात जब कि स्वामी जी वहां पर थे वो जो केम फायर जो होता है नामा अग्नि जो प्रया जाता है तो वो अग्नि प्रक करके उसके आसपास में बैठ कर के ये ध्यान करते थे तो जो स्वामी जी का जो स्वरूप देखा है कि रात है अंधेरा है अंधेरे में ये अग्नि की ज्वाला है स्वामी जी के शरीर को जिस तरह से तेजो दीप्त करके व बना दिखा रही है स्वामी जी के चेहरे का भाव जैसे कि ऋषि मुनियों का भाव के चेहरे के पर में तो वो जो चेहरा स्वामी जी का देखा स्वामी जी का जो भाव देखा जो ध्यान देखा वह मैं अपने जीवन में कभी नहीं भूल पा उसके बाद में यह दूसरी बात करती है वही आडा अ से स्वामी जी उनको कहते हैं कि चलो हम लोग ध्यान करते हैं आप लोग जिस सब के ऊपर में ध्यान करना व कर सकते हैं हालांकि उ स्वामी जी ने सबको सिखाया था काफी डिटेल में कि किस तरह से ध्यान करना चाहिए तो स्वामी जी कहते हैं आपको जिस सब्जेक्ट पर ध्यान करना हो कीजिए आई विल मेडिटेटर द हार्ट ऑफ लायन मैं सिंह के हृदय के ऊपर में ध्यान करूंगा क्यों बिकॉज इट गिव स्ट्रेंथ एंड फोर्टीट्यूड क्यों क्योंकि वह हमको भयानक शक्ति प्रदान करता है और इस ऐसा कहक स्वामी जी ने सिंह के हद पर ऑन द हार्ट ऑफ लायन मेडिटेशन शुरू किया तो आइड हंसेल लिखती है कि उस दिन रात लोगों ने जो मेडिटेशन की जो तन मात्रा है स्वामी जी के मेडिटेशन के जो वाइब्रेशन है उससे प्रभावित होकर के हमको इतना गहन इतना पावरफुल इतना पीसफुल ध्यान हुआ था मेडिटेशन हुआ था कि जिसको हम शब्द में कभी भी वर्णन नहीं कर सकते थ वो कैम टेलर था कैलिफोर्निया में आखिरी समय स्वामी जी उसके बाद में वोह वहां पर वापस आए सैन फ्रांसिस्को कुछ समय के लिए एक डॉक्टर लोगन थे वहां पर जिनके घर पर रुके थे और वहां पर गीता पर कुछ प्रवचन दिए थे किंतु उसके बाद में ही ईस्ट पोस्ट आने के लिए वह ट्रेन में बैठ कर के रवाना हो तो यह मोर और लेस एक साल का जो पीरियड था कैलिफोर्निया का वेस्ट कोस्ट में एक साल नहीं यहां पर दिसंबर टू जुलाई है यानी कि ऑलमोस्ट छ महीने का यह पीरियड तो यह छ महीने का पीरियड उसमें इतने सुंदर रेमसंस है इतनी सुंदर घटनाएं हैं इतना सारा स्वामी जी ने काम किया है कि उसको जितना डिटेल में डिस्कस करें उतना कम है यह जो मैं मेरी लुईस की ये जो किताब है न्यू डिस्कवरी उसका फिफ्थ एंड सिक्स्थ वॉल्यूम यदि समय मिलता है मौका मिलता है तो अवश्य पढ़िए इतना सुंदर लगेगा इतना सुंदर विवरण स्वामी जी के जीवन के और किसी फेज में नहीं है जितना कि यहां इसके बाद में जो आखिरी समय है स्वामी जी का यूरोप यात्रा फिर भारत में आगमन और धीरे-धीरे करके उनका जीवन अस्ताचल की ओर बढ़ता जाता है सूर्य सूर्यास्त की वह हम कल डिस्कस करें i