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Swami Vivekananda Great Summer ·

भव्य ग्रीष्म: रिजली मैनर में स्वामी विवेकानन्द 3 sep 2024

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स्थापक च धर्मस्य स स्वरूप अवतार षय राम कृष्णा यते स्वामी विवेकानंद के जीवन का वह पर्याय जिसको कि हम ग्रेट समर के नाम से पहचानते हैं इसके बारे में थोड़ा सा पाठ करने का हमने प्रारंभ किया था हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी अमेरिका आए सेकंड टाइम अमेरिका आए और फिर उनके साथ में रयान जी थे वैसे तो भारत से तीन लोग निकले थे निवेदिता रयान जी और स्वामी जी किंतु निवेदिता अभी थोड़ा सा लंडन में रुक गई थी और थोड़ा सा देरी से आने वाली थी और स्वामी जी और यह रयान जी यह दोनों आगे निकल गए थे तो यह दोनों वहां पर पोर्ट जिसको कहा जाता है जहाज जहां पर रुकता है वहां पर बंदर जिसको हम गुजराती में कहते हैं हिंदी में तो वहां पर आए वहां पर उनको रिसीव करने के लिए उनके डिवोटा थे जैसे कि मिस मोड स्टोन थी जोसेफाइन मैक्लाउड थी और यह मिस्टर एंड मिसेस फ्रांसिस लगेट है तो यह सभी लोग स्वामी जी को ट्रेन में बिठा करके रिजली बोल कर के जो गांव है वहां पर ले गए और जो ट्रेन यात्रा थी रेल यात्रा उसका बड़ा ही सुंदर यहां पर डिस्क्रिप्शन भी हमने पढ़ा कि कैसे एक और बड़ा ही बड़ी ही विस्तृत नदी थी और एक और था यह नदी का बड़ा ही विस्तृत मैदान और उसमें हरियाली फल के बागान और फिर छोटे-छोटे गांव गांव के छोटे-छोटे सुंदर-सुंदर घर और इन सबके परे जद देखेंगे तो वो थे पहाड़ तो बड़ा ही सुंदर जर्नी वो क्रॉस करके ये लोग रिजली आए रिजली में रहना शुरू किया और अभी इसके बाद की जो घटनाएं हैं रिजली मैनर में किस तरह से स्वामी जी रहे हैं इसके बारे में अभी हम आगे पढ़ते हैं सबसे पहले देखते हैं कि बेटी लगेट ने अभी हमको पता है कि मिसेस ओली बुल जो कि स्वामी जी के अमेरिका के घनिष्ठ डिसाइल थे खास करके ये ईस्ट कोस्ट के ईस्ट कोस्ट और वेस्ट कोस्ट इस तरह से अमेरिका को कहा जाता है ईस्ट कोस्ट अर्थात कि अटलांटिक ओशन के किनारे जो सब आते हैं उसमें खास करके ये न्यूयॉर्क बोस्टन न्यू जर्सी शिकागो यह सब जहां पर स्वामी जी के डिसाइल्स थे और वेस्ट कोस्ट अर्थात की खास करके कैलिफोर्निया जहां पर भी स्वामी जी जाने वाले थे तो वो जो ईस्ट कोस्ट के जो घनिष्ठ डिसाइल थे न्यूयॉर्क में शिकागो में बोस्टन में उन सब में जो सब सबसे बड़ा जो नाम है वो है मिस्टर एंड मिसेस लगेट ये जो फिर ये जोसेफाइन मैकला और ये फोर्थ है मिसेस ओली बुल तो यह देखिए कि तीन लोग तो उस समय वहां पर थे मिस्टर एंड मिसेस लगेट और ये जोसेफाइन मैकल तो उस समय वहां पर रिचली मैनर में थे किंतु मिसेस ओली बुल वहां पर नहीं पहुंच पाई थी क्योंकि उनकी लड़की उनकी बेटी बीमार थी तो वह बीमार होने की वजह से उसके साथ में रह रही थी मिसेस सारा ओली बुल तो अभी इसका फायदा हमको इस तरह से है कि यह जोसेफाइन क्लाउड और यह बेटी लगेट यह दोनों नियमित रूप से मिसेस ओली बूल को लेटर लिखते हैं यह बताने के लिए कि स्वामी जी के साथ में क्या-क्या घटनाएं हुई स्वामी जी ने क्या-क्या कहा कौन-कौन से प्रसंग हुए तो इसका लाभ हमको इस तरह से मिल गया अदर वाइज यदि ये चारों लोग एक जगह पर होते तो कौन किसको पत्र लिखता वो ठाकुर कहते है ना कि वो जो मधुमक्खी है वो जब तक मध मध जो उसको खोजने के लिए घूमती है एक इस तरह का पुष्प जिस में कि मध प्रकट होता है तो उस पुष्प को खोजने के लिए जब तक जंगल में वह भ्रमण करती है तब तक बुन बुन करके आवाज करती है उसकी पंखों की आवाज होती है किंतु जैसे ही मधु पूर्ण पुष्प उसको दिख गया उसको मिल गया तो वहीं पर बैठ जाती है और बड़े ही शांति से मधुपाल करती है तो ये चारों जो घनिष्ठ डिसाइल थे स्वामी जी के ये चारों यदि स्वामी जी के साथ में रहने के लिए चले आते तो कौन किसको पत्र लिखता पत्र लिखने का अवसर किसको मिलता स्वामी जी की वाणी में स्वामी जी का जो सहवास है उसका आनंद में इतने डूब जाते कि कौन किसको पत्र लिखता कौन किसका पत्र पढ़ता तो अनफॉर्चूनेटली फॉर मिसेस ओली बुल और फॉर्चूनेटली फॉर अस कि चार घनिष्ठ डिसाइल में से एक वहां पर नहीं उपस्थित हो पाई और बाकी के दो जो है खास करके अभी फ्रांसिस लेगे तो क्या है वो पुरुष लोगों को ऐसा कोई यह नहीं होता कि लेटर लिखे और यह सब करें किंतु बाकी जो थी ये दो बहन ने जोसेफाइन मैक्लाउड और बेटी लगेट ये दोनों लोग मिसेस ओली बुल को नियमित पत्र लिखती थी तो उसमें से कुछ अभी यहां पर छोटा सा वर्णन है बेटी लगड ने मिसेस होली बुल को पत्र लिखा है स्वामी जी के आने के बाद में क्या लिखते हैं वी आर हैविंग सच प्रिविलेजेस एज ओनली स्वामी जी कैन कन्फर हम इतने सद्भाव है इस तरह के सद्भाव में जी रहे हैं जो कि स्वामी जी ही हमको दे सकते हैं इतना सद् भाग्य और कोई नहीं दे सकता हिज टॉक्स आर इंटरमिटेंट हिज हेल्थ इंप्रूविंग वह नियमित रूप से हमारे साथ बातें करते हैं और उनका स्वास्थ्य भी इंप्रूव हो रहा है स्वास्थ्य भी उन्नत हो रहा है हिज नाइट्स रेस्टफुल एंड ही स्लीप्स वंडरफुली उनकी रातें बड़ी ही शांति से बीती है और बड़े ही आनंद से वह सोते हैं स्वामी जी का अनिद्रा का रोग सबसे सब समय लगा हुआ था व एक सुंदर प्रसंग है बेलूरमठ में कि उस समय ग्रहण होने वाला था अभी ग्रहण होता है तो जनरली क्या होता है आज भी हमारे आश्रम में देखेंगे कि जहा जिस समय ग्रहण होता है उस समय खाना पना सब बंद हो जाता है ग्रहण समाप्त होने के बाद में आहार पकाया जाता है आहार बनाया जाता है उस तब तक उपवास करना है और मंदिर में इकट्ठा हो ग सभी साधु भक्त लोग भजन कीर्तन करेंगे तो अभी यह तो सनातन प्रथा है कि गहण के समय फिर इस तरह से भगवान का नाम लेना है और फिर ग्रहण समाप्त होने के बाद में गंगा स्नान करके फिर जो आहार विहार जो है बाकी का सब करना है तो स्वामी जी उस दिन ग्रहण था तो स्वामी जी ये शरद चंद्र को कहते हैं कि मैं एक काम करता हूं सुना है कि ग्रहण के समय जो करते हैं उसका 10 गुना फल बाद में मिलता है इसलिए तो लोग साधन भजन भजन कीर्तन ज्यादा करते हैं ना तो मैं एक काम करता हूं मैं सो जाता हूं क्योंकि मेरे जन्म में मेरे लाइफ में निंदर है ही नहीं इस समय यदि सो जाऊंगा ग्रहण के समय यदि नींद आएगी तो बाद में बहुत गुना ज्यादा होकर के मुझे नींद आएगी ऐसी संभावना है ऐसा करके स्वामी जी थोड़ा समय विश्राम किए थे तो ये नींद का स्वामी जी को हमेशा से प्रॉब्लम था स्वामी जी कहते हैं कि मैं बिस्तर में सोने से लेटने के बाद में एक दो घंटे तक मैं इधर उधर मतलब नींद नहीं आती कभी इधर घूमता हूं तो कभी उधर घूमता हूं और फिर एक दो घंटे के बाद में आखिर में मुझे थोड़ा बहुत ंदर आता है नींद आती है तो यहां पर किंतु देखिए कि बेटी लगेट क्या लिखती है कि स्वामी जी की जो रात है बड़ी ही शांतिपूर्ण है और बड़े ही अच्छे से वह सो रहे हैं अर्थात कि उनका हेल्थ इंप्रूव हो रहा है ही इज डायटिंग ईटिंग वेल वो डायटिंग करते हैं और किंतु साथ-साथ में अच्छे से खाना भी खाते हैं खाने के बारे में एक बड़ा सुंदर प्रसंग बाद में आएगा तब हम पढ़ेंगे एंड नो डाउट एज यू एंड जो हैव सेड सो फॉर लॉन्ग हिज ग्रेट वर्क इज टू कम और कोई प्र संशय नहीं है इस बात में कि जैसे आपने अर्थात की मिसेस ओली बुल ने और जो अर्थात की जोसेफाइन मैकला उनकी बहन बेटी लगेट की जो यह पत्र लिख रही है तो आप और जो यह दोनों लोग जो कहते हैं उसके अनुसार उनका जो सर्वश्रेष्ठ कार्य है वह तो अभी प्रारंभ भी नहीं हुआ वो तो अभी आने वाला है अब कि ये लोग किस किस तथ्य के आधार पर ये कह रहे हैं कि स्वामी जी का सर्वश्रेष्ठ कार्य अभी आरंभ नहीं हुआ वो तो पता नहीं किंतु यह बात सही सही सत्य है कि स्वामी जी कैलिफोर्निया जो जाने वाले हैं यहां से उसकी पूरी कहानी भी पूरा बैकग्राउंड भी आएगा हम लोग पढ़ेंगे तो वो कैलिफोर्निया जाकर के स्वामी जी ने जो मैसेज दिया है व्हिच इज यूनिक इन हिज लाइफ फर्स्ट टाइम स्वामी जी के जीवन के जो दो ग्रे लेटेस्ट पीरियड को याद करेंगे उनके मैसेज देने के तो फर्स्ट विजिट टू द वेस्ट जबकि उन्होंने कितने फेजस होते हैं उसमें सर्वप्रथम तो सब जगह पर घूम के उन्होंने एक जनरल मैसेज दिया जिसको कहते हैं जनरल अवेयरनेस कि हां यह भारत को जिसको आप एक गुलाम देश समझ रहे हैं वह गुलाम है वैसे तो बाहर से ऊपर से देखा जाए तो किंतु इसी धरती के भीतर में जिसको कि अंतः सार फल्गु नदी स ठाकुर एक लड़के के बाद में कहते है ना यह एक भक्त के बारे में और यह भक्त शायद मास्टर महाशय ही है मास्टर महाशय बहुत सारी बार अपनी अपने बारे में कुछ नहीं बोल ऐसा कहते एक भक्त के बारे में या एक लड़के के बारे में तो ठाकुर कहते हैं कि इसको देख कर के ऊपर से कुछ लगता नहीं किंतु अंतः सार फल्गु नदी इसके जमीन के भीतर में फल्गु नदी बह रही है यानी कि भीतर में अंतर में आनंद का प्रवाह है तो वैसे ही यह स्वामी जी ने पहले तो पूरे अमेरिका के बहुत सारे राज्यों में घूम कर के ले तो यह कहा कि जिसको आप गुलाम समझ रहे हैं वह गुलाम नहीं है उसके भीतर में भले ही चाहे बाहर से गुलाम हो किंतु भीतर से आध्यात्मिक प्रवाह बह रहा यह तो एक हो गया दूसरा कि उन्होंने न्यूयॉर्क में बैठ कर के जो अपने मुख्य प्रवचन जो दिए थे क्लासेस जो कंडक्ट किए थे उसमें से चार जो सीरीज थी सबसे इंपॉर्टेंट है एक तो ज्ञान योग राजयोग भक्ति योग और कर्म योग ये चार और उसके बाद में अपने कुछ डिसाइल को लेकर के वहां पे थाउज आइलैंड पार्क गए थे जहां पे उन्होंने इंस्पायर्ड टॉक बोलकर के सीरीज ऑफ प्रवचन सीरीज ऑफ क्लासेस लिए थे और उसके बाद में लंडन में जाकर के यही ज्ञान योग राजयोग भक्ति योग और कर्म योग इन चारों की सीरीज को आगे बढ़ाया था तो यह स्वामी जी की फर्स्ट विजिट का सबसे इंपोर्टेंट काम है उसके बाद में भारत आए भारत में सबसे इंपोर्टेंट काम की कोलंबो टू अल्मोड़ा पूरे भारत में घूम कर के भारतीय उत्थान के लिए प्रवचन दिए रामकृष्ण संघ की स्थापना की इतना तो स्वामी जी ऑलरेडी कर चुके हैं अभी यह तो अपने आप में एक बहुत बड़ी सिद्धि है किंतु फिर भी यह जो आखिरी फेज है उनके कर्म का उनके कार्य का अबाउट हिज मिशन इन दिस वर्ल्ड ये कैलिफोर्निया ये कैलिफोर्निया अपने आप में एक इतना इंपॉर्टेंट चैप्टर है कि उनके जो वेस्टर्न डिसाइल थे तो व अभी भी मानते थे कि अमेरिका में स्वामी जी को अभी भी सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट कार्य करना बाकी है तो अभी पता नहीं यह लोग किस तथ्य के ऊपर में कहते होंगे क्योंकि इस समय जबक यह पत्र लिखा गया था किसी को अंदाज नहीं था कि स्वामी जी को कैलिफोर्निया जाना पड़ेगा और वह भी किस तरह से जाना पड़ेगा व कहानी भी पूरी कोई भी उस समय अनुमान नहीं कर सकता था सस डेज आर प्राइसलेस यह जो दिन है वह अति मूल्यवान है प्राइसलेस अति मूल्यवान जिसकी कोई कीमत नहीं लगा सकता जिसका कोई आकलन नहीं है डू कम स्ट्रेट ऑन इफ पॉसिबल जितना जल्दी हो सके यहां पर आ जाइए आप बहुत कुछ मिस कर रही है तो वह मिस कर रही है तो इसका फायदा हमको यह मिला है कि यह नियमित पत्र के माध्यम से हमको पता चलता है कि वहां पर क्या हो रहा है अच्छा ऑन द सेम डे स्वामी जी रोट टू सिस्टर क्रिस्टिन हु वाज नाउ बैक होम इन डेट्रॉइट उसी समय स्वामी जी ने सिस्टर क्रिस्टिन को डेट्रॉइट में एक पत्र लिखा था वो पत्र में स्वामी जी लिखते हैं माय डियर क्रिस्टीना आई होप बाय दिस टाइम यू आर मच बेटर अभी क्रिस्टिन का भी वही कुछ-कुछ प्रॉब्लम चल रहा था उसकी जो हेल्थ थी वो तो थोड़ी सी कमजोर थी ही थी प्लस उसके बहुत सारे भाई बहन थे छोटे-छोटे और उनकी संभाल रखने के लिए उसको जॉब करनी पड़ती थी एज अ टीचर तो इसलिए स्वामी जी कहता है कहते हैं कि मैं आशा रखता हूं कि तुम्हारा स्वास्थ्य या तो तुम्हारी मानसिक परिस्थिति अभी कुछ अच्छी हुई होगी आई एम गेटिंग फिजिकली बेटर एवरी डे थो मेंटली नॉट मच मैं शारीरिक रूप से तो प्रतिदिन उन्नत हो रहा हूं किंतु मानसिक रूप से नहीं अ मानसिक रूप से क्यों नहीं यह स्वामी जी कहते हैं इसके बारे में सोचना मुश्किल है क्योंकि जितने लोग यह देखिए इसी पत्र में यह बेटी लगेट कहती है उसी दिन को पत्र लिखा गया है उसी दिन के पत्र में यह बेटी लगेट कहती है कि स्वामी जी बड़े ही शांत शांति से जी रहे हैं बड़े ही आराम से सो भी रहे हैं तो अभी देखिए स्वामी जी के साइकोलॉजी है स्वामी जी के कॉन्शसनेस है उसमें में इतने सारे लेयर है कि सरफेस लेयर पे कुछ हो रहा है डीपर लेयर्स में कुछ हो रहा है उसके भी डीपर लेयर में कुछ हो रहा है तो बाहर से तो किंतु हमको यही लगता है कि वह बड़े ही शांति से है द लंडन वर्क सीमस टू फॉल टू पीस लंडन का जो कार्य है उसमें सब कुछ गड़बड़ हो रहा है अभी व हमको पता है कि मिस मलर और इट स्टडी दोनों पागलपन चालू किए थे किंतु स्वामी जी के जो दूसरे जो डिसाइल थे मिस्टर एंड मिसेस सेवियर और तीसरी निवेदिता और चौथा था वैसे गुडविन गुडविन को वैसे हायर किया था अमेरिका में किंतु वह था ब्रिटिश तो यह चार ब्रिटिशर थे उन्होंने तो स्वामी जी का हमेशा से संपूर्ण रूप से सहयोग दिया ही दिया था किंतु यह जो जिसको कि विश्वास घात कहते हैं ना ट्रेचर तो वो दगा तो यह विश्वास घात स्वामी जी सहन नहीं कर पाए थे इन दोनों का मिस मलर का और इट स्टडी का द फ्रेंड्स ओवर देर आर ऑल शेकी इवन स्टर्डी वहां के जो मित्र है वो सब मेरे ऊपर में हो रहे हैं स्टडी भी इस तरह से कर रहा है एनीवे इन मिसेस बुल एंड मिस मैक्लाउड आई हैव वेरी स्ट्रांग फ्रेंड्स भले चलो लंडन में जो होना है सो हो यहां पर मिसेस ओली बुल और मिस मैक्लाउड यानी की जोसेफाइन के ब भीतर में इन दोनों मेरे सबसे टंच फ्रेंड्स है सबसे घनिष्ठ मित्र है मेरे दे स्टैड बाय मी हियर थ्रू थिक एंड थिन वे लोग मेरा हमेशा से साथ देंगे चाहे सक्सेस आ जाए जीवन में कि चाहे फेलियर आ जाए बहुत सारे मित्र होते हैं जिसको कि हम कहते हैं कि जब तक दिन अच्छे चलते हैं तब तक मित्र है जब जब गड़बड़ होना शुरू हो गया तो फिर यह मित्र दिखाई नहीं देंगे स्वामी जी के साथ में जैसे हुआ था उनके पिताजी का देहांत हुआ था और जिस मित्रों के ऊपर में उनको बड़ा भरोसा था वही मित्र उनको पता है कि पिताजी का देहांत हुआ है पता है देखते हैं नजरों से देखते हैं कि घर की परिस्थिति अच्छी नहीं है किंतु फिर भी अपने मुंह से ऐसा नहीं कहेंगे कि हां मैं तुमको थोड़ा मदद करूं थोड़ी सी सहाय करूं क्या हो सकता है मुझे बताओ कोई भी ऐसा नहीं कहेगा और देखने वाली बात ऐसी है कि कुछ-कुछ मित्र थे स्वामी जी के उस समय कॉलेज में जिसका कि चरित्र अच्छा नहीं था और बुरे लोगों के साथ में घूमते थे यह लोग ऊपर से स्वामी जी के पास में आकर के सहानुभूति व्यक्त करने लगे कि अरे नरेंद तुम्हारे साथ में ऐसा हुआ बताओ हम तुमको जद हेल्प कर सकते हैं कि नहीं और ये जो हो रहा था इसी वजह से यह भवनाथ वगैरह कुछ कुछ लोगों ने जाकर के ठाकुर को कंप्लेन किया था कि नरेण अभी ऐसे लोगों के संगत में पड़ा है जो कि जिनका चरित्र अच्छा नहीं है जो लोग बुरी संगत में रहते हैं तो अभी भवनाथ को खुद को क्या ये अकल नहीं है कि स्वामी जी को जाकर के थोड़ा सा हेल्प करे वैसे तो नरेंद्र और भवनाथ ये दोनों तो साथ-साथ में ठाकुर के पास आते थे और ठाकुर इन दोनों से कितने प्रसन्न थे तो जो भी है अभी क्या करेंगे ऐसे बहुत सारे लोग होते हैं कि जब तक अच्छा चल रहा है तब आपके मित्र है जैसे ही साथ आपके साथ में कुछ ना कुछ गड़बड़ होना शुरू हुआ वह आपका साथ तज देंगे किंतु यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि मिसेस ली बुल और जोसेफाइन मैक्लाउड दो ऐसे मित्र है जो कि हमेशा मेरे साथ में खड़े रहेंगे लाइफ इज अ सीरीज ऑफ फाइट्स एंड डिसल जन मेंट्स इज इट नॉट जीवन क्या है तो एक घटनाक्रम है संघर्ष और हताशा का निराशा का डिस इल्यूजन मेंट ये जो शब्द है इसका अर्थ है कि बार-बार आशा भंग होना किसी एक चीज पे आप आशा रख के बैठे हैं और आशा फलीभूत नहीं होती तो ये है जीवन संघर्ष और हताशा क्या यह बात सही नहीं है स्वामी जी यह बात कहते हैं उनके खुद के जीवन में देखिए यह बात कितनी सही हमको दिखाई देती है पिताजी के देहांत के बाद से जो संघर्ष प्रारंभ हुआ ठाकुर के पास में साधना करने के समय तो ठाकुर का संपूर्ण साथ था उनके साथ में किंतु ठाकुर की महासमाधि के बाद में जो कुछ कुछ गृहस्थ भक्त नरेंद्र के ऊपर में जो दोषा दोषा प्रण करने लगे दोष आरोपित करने लगे यह कह के कि बाकी सब यंग लड़कों को घर भगाकर घर में से भगा करके साधु बना कर के मठ में जो बिठा रहे हो यह सब क्या पागलपन म लगा रखा है तो वहां से स्टार्ट करके ये ईटी स्टडी है मिस मूलर है ऐसे कैसे कितने ही लोगों ने स्वामी जी को दगा दिया ये जो मजूमदार था स्वामी जी सर्वप्रथम अमेरिका में सक्सेसफुल हो गए तो ये थियोसोफिकल स्वामी जी के पीछे में पड़ गए थे तो यह संघर्ष स्वामी जी के जीवन में हमेशा लगा रहा है इसीलिए कहते हैं कि इट इज अ सीरीज ऑफ फाइट्स एंड डिस इल्यूजन मेंट्स वेल आई एम सीकिंग सम क्वाइट इफ आई कैन मैं चाहता हूं कि मुझे थोड़ी सी शांति प्राप्त हो बिफोर आई प्लज इन टू वर्क अगेन इससे पहले कि मैं मैं अपने कार्य में फिर से जंप लगा दूं मैं कार्य में फिर से डूब जाऊं उससे पहले थोड़ा सा शांति मुझे चाहिए वन हैज टू वर्क टू गेन अ लाइवलीहुड इवन लोगों को जद जीवन निर्वाह भी करना है तो उनको तो कार्य करना पड़ता है गुड दैट इट इज सो इट कीप्स अस स्ट्रेट अच्छा है कि हमको कार्य करना पड़ता है तभी हमको खाना मिलता है इसकी वजह से हम लोग सीधे रास्ते पर चलेंग सीधे रास्ते अर्थात कि बहुत ज्यादा फिर य हताशा निराशा से हम लोग विचलित नहीं हो जाएंगे क्योंकि जद बिना काम के बैठे रहेंगे तो अपना मन कहता है ना कि एमटी माइंड इज अ डेविल्स होम या तो फैक्ट्री ऑफ डेविल डेविल्स वर्कशॉप एमटी माइंड इज अ डेविल्स वर्कशॉप जो खाली दिमाग है वह शैतान का घर है व शैतान वहां पर बैठकर दुनिया भर की गड़बड़ गड़बड़ करता रहेगा बेटर है कि कर्म करके खाओ तो स्वामी जी कहते हैं कि किंतु यह नया कार्य में प्रारंभ करूं उससे पहले थोड़ा सा मुझे शांति चाहिए हाउ इज मिसेस फंकी यह मिसेस फंकी क्रिस्टीन सिस्टर क्रिस्टीन के साथ में स्वामी जी को मिलने के लिए सर्वप्रथम थाउज आइलैंड पार्क आई थी अब इसके बारे में स्वामी जी पूछ रहे हैं वर आर यू बोथ नाउ आप दोनों अभी कहां पे है आई एम ग्लैड दो दैट इन दिस लाइफ आई हैव गॉट अ नंबर ऑफ स्टोच फ्रेंड्स मुझे इस बात का आनंद है कि इस जीवन में मुझे कुछ-कुछ बड़े ही घनिष्ठ मित्र प्राप्त हुए हैं ट विल स्टैंड बाय मी जो लोग हमेशा मेरे साथ में खड़े रहेंगे वेदर आई एम इन गुड और बैड सरकमस्टेंसस भले ही चाहे मेरी परिस्थिति अच्छी हो ना कि बुरी वेदर आई एम इल और वेल भले ही चाहे मैं अच्छा हूं ना कि बीमार हूं एंड यू आर टू ऑफ थम और आप दोनों इस घनिष्ठ मित्रों में से एक है आई एम रदर हैप्पी दिस फ्यू डेज अभी यह जो कुछ दिन है मेरे बीत रहे यहां पर रिचली मैनर में मैं बड़ा ही खुश हूं इट इज सो क्वाइट हियर एंड एवरी बडी इज गुड यहां पर कितनी शांति है और सब लोग मुझे इतना अच्छे से मेरे साथ में वर्तन व्यवहार कर रहे हैं डेज आर पासिंग एनीवे कैसे भी करके दिन बीत रहे हैं एंड आई एम लर्निंग टू बी कंटेंटेड और मैं संतोष पूर्वक जीना सिख रहा हूं स्वामी जी के संतोष स्वामी जी के जीवन में संतोष कभी नहीं है य इसी घटना के कुछ दिनों के बाद में ही देखेंगे कि बेलूर मठ में कार्य ठीक से मतलब राजा महाराज है शरद महाराज है बाबूराम महाराज है महापुरुष महाराज है अभेदानंद जी है शशि महाराज यह लोग तो अपना जी जान लगा दिए थे बेलल मठ को कार्यरत करने में किंतु स्वामी जी की अपेक्षा इतनी थी कि बेचारे कभी भी उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं कर पाएंगे बोलकर के स्वामी जी उनको बार-बार डांटते हैं तो अभी महाराज जो थे शारदानंद जी यानी कि स्वामी जी के गुरु भाई ठाकुर के सन्यासी शिष्य तो ये शारदानंद जी भी तो अमेरिका आए थे एक समय और ये जो मिसेस ओली बुल को अच्छे से पहचानते थे उनको मिसेस ओली बुल को शारदानंद जी या तो फिर शरद महाराज ग्रेनी अर्थात कि दादी मां करके पुकारते थे तो ये शारदानंद जी ने मिसेस लीवुड को एक पत्र लिखा पत्र में उन्होंने अपने मन की व्यथा जाहिर की कि हम लोग तो जी जान लगा के काम करते हैं फिर भी स्वामी जी हमको डांटते हैं तो यह बात सुन करके अभी देखिए कि मिसेस ओली बुल के ऊपर में स्वामी जी का भरोसा कितना है यह बात हमको इसी विवरण में बाद में पढ़ने को मिलेगी किंतु यह जब मिसेस ओली बुल ने स्वामी जी को क्योंकि एक तो अपनापन होता है ना किसको आप श्रद्धा भक्ति व्यक्त करते हैं किसी के प्रति तो इनका अपने प हक हो जाता है वे लोग आपको कुछ बोल सकते हैं डांट करके आप ही के भले के लिए तो ये मिसेस ओली बुल ने उनको थोड़ा सा स्वामी जी को एक पत्र लिखा कहा कि आप अपने गुरु भाइयों को इस तरह से डांटते क्यों है बेचा इतना परिश्रम कर रहे हैं मेहनत कर रहे हैं आपको शर्म नहीं आती थोड़ी सी भी ऐसा करके मिसेस लीवल ने स्वामी जी को पत्र लिख दिया और उसके सामने में स्वामी जी ने जो लेटर लिखा है वन ऑफ हिज बेस्ट कि ये जो करुणा है यह जो प्रेम है वो मेरी सबसे बड़ी वीकनेस है आपको लगता है कि मैं कठोर हूं मुझे लगता है कि मेरा हृदय में बहुत ज्यादा प्रेम है यदि थोड़ा सा प्रेम कम होता थोड़ा सा कंपेरिजन करोना कम होती तो मैं थोड़ा सा शांति से जी पाता बड़ा ही सुंदर पत्र है वो बाद में द सीक्रेट ऑफ लाइफ इज नॉट एंजॉयमेंट बट एजुकेशन थ्रू एक्सपीरियंस जीवन का जो रहस्य है वह आनंद उपभोग नहीं है वह है अनुभूति के द्वारा ज्ञान प्राप्त करना एजुकेशन थ्रू एक्सपीरियंस बट वी आर किल्ड ऑफ द मोमेंट वी बिगिन रियली टू लर्न किंतु जिस क्षण हम सही सही सीखना प्रारंभ करते हैं उसी समय मृत्यु हमारे सामने उपस्थित हो जाता है यह कैसी विडंबना है हमारे जीवन की कि जीवन का तो उद्देश्य ही है कि अनुभूति के अनुभव के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करना ज्ञान प्राप्त करना विजडम जिसको कहते हैं वह प्राप्त करना किंतु जिस क्षण हमको यह बात अकल आती है हमारे मन में और जिस क्षण हम सही सही सीखना शुरू करते हैं तो उसी क्षण मृत्यु हमारे सामने आ जाता है ट सीम्स टू दैट सीम्स टू मेनी अ पोटेंट आर्गुमेंट फॉर ए फ्यूचर एक्जिस्टेंस यह जो तथ्य है कि जैसे ही हम सही सही अनुभव के माध्यम से सीखना शुरू करते हैं उसी समय मृत्यु सामने आ जाता है उसी समय हमारा मृत्यु होता है यह तथ्य इसको तथ्य को ध्यान में रख कर के बहुत सारे लोग ऐसा कहते हैं कि इसी यही कारण है यह एक एक एक रीजन है कि जिसकी मदद से हम प्रूव कर सकते हैं कि भविष्य में जन्म होने वाला है फ्यूचर लाइफ है क्योंकि ये यदि फ्यूचर लाइफ नहीं होती भविष्य में जीवन नहीं होता तो हम जीवन का उद्देश्य कैसे प्राप्त करें देखिए कि इस जीवन में मुझे पता नहीं है कि पहले तो मैं प्रारंभ से ही भोग विलास यानी कि जो इंद्रियों के आनंद है यही मेरे जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है बोलकर के मैंने जीवन प्रारंभ किया किंतु जैसे-जैसे ये जो आध्यात्मिक रास्ते प चलते गए या तो फिर यह जीवन ही सिखा देता है सुख दुख इष्ट अनिष्ट के माध्यम से कि हां जितना आप आनंद के पीछे एंजॉयमेंट के पीछे दौड़ेंगे उतना ही यह एंजॉयमेंट आपसे दूर जाते जाएंगे तो धीरे-धीरे करके हम यह अनुभूति के माध्यम से ज्ञान प्राप्ति के आध्यात्मिकता के रास्ते पर आते हैं किंतु उसी समय जद मृत्यु होता है तो जब हम नया जन्म होगा तो ये अवेयरनेस ये जो ऑलरेडी हमारे संस्कार बने हुए हैं उस समय विषयों के प्रति हमारा आकर्षण कम हो जाएगा और यह आध्यात्मिक रास्ते पे चलने का आकर्षण बढ़ जाएगा फिर हम जहां तक मान लीजिए थोड़े से दूर जाते हैं फिर से हमारा मृत्यु हुआ तो दूसरे जन्म में हम वहां से फिर से प्रारंभ करेंगे देखिए कि कुछ-कुछ बच्चों को हम जन्म से ही देखते हैं कि बहुत अच्छे व तबला बजा देते हैं ना कि संगीत या तो भजन गा लेते हैं गीत गा लेते हैं तो यह जिनको कि हम चाइल्ड प्रोड जी कहते हैं कि बचपन से ही यह लोग इतने एडवांस हो गए कोई भी एक विद्या में ऐसा क्यों कि पिछले जन्म के संस्कार उस इस जन्म में कार्यरत होते हैं तो आप हम भी ऐसे बहुत सारे बच्चों को देखेंगे छोटी उम्र से ही उन भीतर में आध्यात्मिक संस्कार होते हैं मंदिर में जाना ईश्वर का नाम गुणगान करना आध्यात्मिक चीजों के प्रति आकर्षण इन लोगों का ज्यादा होता है तो इसी वजह से क्योंकि पिछले जन्म में उन्होंने ऑलरेडी बहुत कुछ प्राप्त किया है आई होप सून टू बी एबल टू कम टू डेट्रॉइट मैं आशा रखता हूं कि जल्दी से डेट्रॉइट आऊंगा एवरी वेयर इट इज बेटर टू हैव ए वर्लविंड कम ओवर द वर्क यह मेरे जीवन में मेरे कार्य के ऊपर में झंझावात की तरह यह जो मिशन है ठाकुर मुझे देके गए हैं वो मेरे सर के ऊपर में मंडरा ही रहा है ट क्लियर्स द एटमॉस्फेयर एंड गिव्स अस ट्रू इनसाइट इनटू द नेचर ऑफ थिंग्स ये झंझावात जो है इसकी मदद से से क्या होता है पता है वो वातावरण क्लियर हो जाता है बहुत बार होता है ना कि आकाश में बादल छाए हुए हैं छाए हुए हैं बहुत दिनों से वातावरण पूरा गमगीन है पूरा ह्यूमिड एटमॉस्फियर हम लोग कहते हैं कि बारिश हो जाए तूफान आ जाए तो ये बादल हटे और थोड़ा सा सूरज का प्रकाश आए तो स्वामी जी कहते हैं कि ये कर्म का तूफान जब खड़ा होता है तो यह गमगीन जो बादल हमारे सर पर मंडरा रहे हैं उसको क्लियर करके एक क्लियर क्लेरिटी एक ज्ञान रूपी सूरज का प्रकाश हम हमारे ऊपर में छाएगा वी बिगिन अन्यू बट ऑन एन एडेमेंटाइन फाउंडेशन हम फिर से जीवन प्रारंभ करेंगे किंतु एक बड़े ही मजबूत फाउंडेशन के ऊपर में बड़े ही मजबूत नीव के ऊपर में आई एम स्ट्रांग वेरी स्ट्रांग नाउ अभी मैं मजबूत में ब बलवान हो गया हूं शक्तिशाली हो गया हूं बड़ा ही शक्तिशाली हूं शक्तिशाली माने फिजिकली नहीं मेंटली आई ऑलवेज एम वन लेफ्ट टू स्टैंड अलोन मैं हमेशा से स्ट्रांग हूं जब मैं अपने आप में अकेले खड़ा रहता हूं अपने आप अकेला संघर्ष करता हूं तब दुनिया भर की स्ट्रेंथ साहस करेज मेरे भीतर में आकर के प्रकट होता है मे यू बी स्ट्रांग वेरी स्ट्रांग ऑलवेज तुम भी हमेशा से स्ट्रांग से स्ट्रांग बनती रहो यही मेरी आशीर्वाद है आशा है योर्स एवर योर्स विथ लव एंड ब्लेसिंग्स विवेकानंद अभी कहानी आगे चलती है मेरी लुईज लिखती है स्वामी जी होस्ट एंड फेलो गेस्ट एट रिजली वेल अंडरस्टूड हिज नीड फॉर रेस्ट स्वामी जी के जो यजमान थे और जो बाकी सब वहां पर गेस्ट थे रिजली मैनर में उनको पता था कि स्वामी जी को विश्राम चाहिए स्वामी जी को विश्राम की अति आवश्यकता है फॉर प्राइवेसी एंड फॉर फ्रीडम एज वेल उनको प्राइवेसी भी चाहिए और फ्रीडम भी चाहिए बहुत बार आप खास करके ये ब्रिटिश कोई अमेरिकन कोई बड़े घराने में जाते हैं तो बहुत सारी फॉर्मा टीज होती है कि ये चाय पीने का समय है चाय पीने के समय में इस तरह के कपड़े पहनने है डिनर टाइम है तो डिनर जैकेट पहनना है यह लंच टाइम है तो उस तरह के कपड़े पहनने है फिर घंटी बजती है तो सभी लोगों को इकट्ठा हो जाना है वगैरह वगैरह फॉर्मेलिटी होता है फिर सबको एक साथ में खाने को बैठना है एक साथ में पोसा जाएगा एक साथ में खड़े होना है स्वामी जी को इस तरह की फॉर्मेलिटीज नहीं चाहिए थी वो अपने जो एक अंतर एक साधना है एक अंतर प्रवाह है उसमें डूब जाना चाहते थे तो उनको प्राइवेसी भी चाहिए फ्रीडम भी चाहिए और विश्राम भी चाहिए यह बात रिजली मैनर में सबको पता थी ए एज वेल एज फॉर कंज नियल लाइट हार्टेड कंपनी और साथ में ही उनको चाहिए थी एक लाइट हार्टेड कंपनी यानी कि एक हंसी मजाक एक हल्का सा हंसी मजाक वाला वातावरण बात यह नहीं है कि सब समय एक हल्लागुल्ला चलता ही रहे और स्वामी जी का जो अंतर प्रवाह है अंतर चिंतन मनन है उसमें डिस्टरबेंस हो यह भी नहीं चाहिए और सब लोग गंभीर होकर के बैठे रहे और स्वामी जी भी बेचारे निराश हो जाए कि ये मैं कहां पे रह रहा हूं ऐसा भी नहीं चाहिए एक लाइट हार्टेड हंसी मजाक जैसा सब समय चलना चाहिए साथ में ही स्वामी जी को फ्रीडम भी मिलना चाहिए उनके ऊपर में ऐसा कोई प्रेशर ना हो कि भाई सब लोग बैठ कर के बात कर रहे तो आपको भी आक के बैठ कर के बात करनी पड़ेगी यही सब्जेक्ट पर चल रही है बात तो इसी पर करनी पड़ेगी इस तरह से किसी प्रेशर में ना रहे एक और उनको मित्रता भी चाहिए दूसरी ओर उनको प्राइवेसी भी चाहिए फ्रीडम भी चाहिए तो ये दोनों रिचली मैनर में उनको मिलता था एंड दे गेव हिम व्ट एवर हिज मूड कॉल्ड फॉर उनका जिस तरह से मूड था होता था दिखता था उसी तरह से सभी लोग उनको उनके साथ में व्यवहार करते थे देखते थे कि वह अकेले टहल रहे हैं अकेले वहां पे एक पेड़ था उसके नीचे में बैठ कर के ध्यान कर रहे हैं या तो फिर कुछ बैठ कर के सोच रहे हैं कोई भी जाकर के उनको डिस्टर्ब नहीं करेगा और जैसे ही देखा वो किसी के साथ में बात कर रहे हैं तो सब इकट्ठा हो जाएंगे और सब लोग हंसी मजा करना शुरू कर देंगे जिस तरह का स्वामी जी का मूड था जिस तरह से उनकी आवश्यकता थी उसी तरह बाकी सब लोग अपने जीवन को उस आवश्यकता में ढाल दे रहे थे इट वाज दैट एटिट्यूड इन अवर फैमिली टुवर्ड्स स्वामी जी ट केप्ट हिम विथ अस एंड नियर अस जोसेफाइन मैक्लाउड एक पत्र में लिखती है कि हमारे परिवार का स्वामी जी के प्रति यह जो एटीट्यूड था यह जो वर्तन था इस वर्तन की वजह से ही स्वामी जी हमारे साथ में हमारे परिवार के साथ में इतने घनिष्ठ रूप से युक्त रहे हैं पूरा लंबा समय तक क्योंकि जोसेफाइन मैक्लाउड उनकी बहन बेटी लगेट और उनके पति ये जो फ्रांसिस लगेट यह जो तीन लोगों का जो फैमिली था और फिर वो जो फैमिली में जो बाद में होते हैं सब कच्चे बच्चे चाचा चाची नाना नानी वगैरह तो सबका एक ऐसा एटीट्यूड था स्वामी जी के प्रति कि उनका जिस तरह का मूड हो उस तरह से उनके साथ में बिहेव करना है तो इसी की वजह से स्वामी जी उनके साथ में इतने घनिष्ठ रूप से मिलित रहे हैं डेज विदाउट स्पीकिंग डेज एंड नाइट्स कंटीन्यूअस स्पीकिंग बहुत सारे दिन ऐसे गए हैं स्वामी जी कुछ नहीं बोलेंगे और ऐसे दिन और रात गए हैं कि स्वामी जी बोलते ही जा रहे हैं बोलते ही जा रहे हैं वी फॉलो हिज मूड्स एंड केप्ट अवर सेल्स बिजी इन अवर ओन लाइव्स हम लोग उनके साथ में उनके मूड के अनुसार वर्तन करते थे जब उनको आवश्य ता होती थी उनके साथ में बात करते थे उनको आवश्यकता नहीं होती थी हम लोग अपने कार्य में बिजी रहते थे बिजी इन अवर ओन लाइफ एंड हैप्पी वेन ही वाजन अबाउट सो दैट देर वाज नो सॉर्ट ऑफ वेट पुट अपॉन हिम कभी-कभी ऐसा होता है आप किसी के घर में महमान के रूप में गए हैं और आपको ऐसा लगता है कि यह आपका जिम्मा है कि आपके साथ में आप लोगों के साथ में बात करें सोशल प्रेशर रहता है हमेशा बात करने का एंगेज रहने का तो इन लोगों का जो एटीट्यूड था कि स्वामी जी को बात करनी है तो उनके साथ में बात करेंगे किंतु स्वामी जी गंभीर है आत्म चिंतन कर रहे हैं आत्म निरीक्षण कर रहे हैं तो ये लोग अपने अपने कार्य में व्यस्त हो जाएंगे जिससे कि स्वामी जी के ऊपर भी यह प्रेशर ना आ जाए कि ये लोग सब अभी उनकी राह देख कर के बैठे हैं कि मैं कब बातें करूं अभी ये सोशल प्रेशर की वजह से फिर वो अपना आत्मचिंतन छोड़ कर के बात करना शुरू कर देंगे तो ऐसा भी नहीं उनको बात करनी है तो बात करना है उनके साथ में और वो गंभीर है आत्म स्थित है तो अपने कार्य में बिजी हो जाना है जिससे कि स्वामी जी पर किसी तरह का सोशल प्रेशर ना पड़े सामने स्वामी जी क्या लिखते हैं आई फील परफेक्टली एट होम मैं एकदम जैसे कि मेरे घर में रह रहा हूं ऐसा मुझे लग रहा है एंड इनडीड नो सून हैड ही सेट फूट इन रिचली मैनर देन हिज थॉट्स वेर फ्लोइंग आउट फ्रीली और यह बात भी सही है कि जिस क्षण स्वामी जी ने रिजली मैनर में पदार्पण किया जिस उन्होंने अपने चरण स्थापित किए उसी क्षण से उनका मन एक सतत प्रवाह में ईश्वरीय प्रवाह में बहने लगा फ्लोइंग आउट फ्रीली टू द फ्रेंड्स हु सराउंडेड हिम उनके जो मित्र है उनके प्रति सतत एक एक ईश्वरीय आनंद उनका बहने लगा ही टोल्ड ऑफ न्यू आइडियाज ऑफ हिज न्यू मैसेज वह अपने नए-नए विचार नए आइडियाज नए मैसेज के बारे में बात करना शुरू कर दिए अ मैसेज रेडी फॉर द मिशन दैट ले स्टिल अनचार केड एंड अनसर्टेन इन द फ्यूचर उनका एक नया मैसेज तैयार था किंतु इस मैसेज को कार्य रद करने के लिए जो एक मिशन चाहिए जो एक जगह चाहिए जो उनको श्रवण करने के लिए श्र वृंद भक्त वृंद चाहिए वह अभी कौन होने वाला है यह किसी को पता नहीं था न्यूयॉर्क में तो काम कर लिया यह बोस्टन में भी काम कर लिया शिकागो में भी डेट्रॉइट में भी हो गया तो ऐसा तो कौन सी नई जगह है जहां पर यह नया मैसेज रिसीव होने वाला है तो वह नई जगह थी कैलिफोर्निया जिसके बारे में अभी किसी को पता नहीं है स्वामी जी इज ब्लेसेडनेस मैक्लाउड फिर से अभी ये जो दो बहने मिसेस ओली बुल को लिखती है उसमें लिखती है कि स्वामी जी सब ब बहुत ही आनंद में है स्वामी जी इज ब्लेसेडनेस है वो तैयार हो चुका है दैट ऑल देयर इज इन लाइफ इज कैरेक्टर जीवन में जो कुछ भी है वो एक ही चीज है वो है कैरेक्टर अपना अ अपना चरित्र एंड बुद्धास एंड क्राइस्ट डू मोर हार्म देन गुड और यह जो बुद्ध या जीसस जैसे जो अवतार है वह हानि ज्यादा पहुंचाते हैं हमको मदद करने की बजा देखिए कितना पावरफुल मैसेज है फॉर मैनकाइंड इज ट्राइट इमिटेटर जीसस या बाकी जो अवतार है हमको हानि कैसे पहुंचाते हैं क्योंकि हम सभी लोग उनका अनुकरण करने का प्रयास करते हैं इंस्टेड ऑफ डेवलपिंग इट्स ओन कैरेक्टर हमारा खुद का चरित्र घड़तय हमारा खुद का आत्म निर्माण करने की वजह हम लोग आंख बंद करके किसी अवतार को फॉलो करते हैं इसी यही कारण है कि अवतार के पृथ्वी पर आने से पृथ्वी के कुछ कुछ लोगों को हानि ज्यादा होती है और इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण हमको पता है कि यह ठाकुर के ही दो भक्त दो ग्रुप थे जो भक्तों के एक तो था कि यह रामचंद्र दत्त वगैरह कहते हैं कि ठाकुर के आशीर्वाद प्राप्त किए हैं तो अभी तपस्या करने की जरूरत नहीं है चलो अभी हम नगर कीर्तन करते घूमते हैं और स्वामी जी थे जो कि जिन्होंने कहा कि नहीं उनके जो त्यागी संतान थे ठाकुर के उनके साथ में लेकर के कि तपस्या करने की जरूरत है जब ध्यान करने की जरूरत है ठाकुर के दर्शन किए ठाकुर की सेवा की ठाकुर के आशीर्वाद प्राप्त हुए तो क्या हुआ हमको खुद को अपना चरित्र निर्माण करना है अपना जीवन आध्यात्मिक जीवन का घडतर करना है इसके लिए त्याग तपस्या संयम चाहिए ही चाहिए तो यह था अपने उस दिनों की जो भी उनकी यादें थी उनके ये जो स्वामी जी ने कहा ना कि जीवन का उद्देश्य क्या है तो एजुकेशन बाय एक्सपीरियंस तो ये एक्सपीरियंस जो उनको हुआ उसकी मदद से उन्होंने जो ये अपना खुद का ये नया मैसेज प्रारंभ किया एक नया मैसेज उन्होंने तैयार किया वो यह है कि आपका खुद का चरित्र घड़ तर करो आपका खुद का मन का निर्माण करो और बुद्ध जीसस वगैरह जो अवतार है उनको आने दो जाने दो उनसे प्रेरणा लो नो डाउट किंतु ये जो वराह नगर मठ में भी और कु उसके पहले काशीपुर मठ में भी पता है ना एक बार कि ठाकुर को काशीपुर में आने के बाद में ही ये मने कलकाता ट्रीटमेंट के लिए कैंसर का ट्रीटमेंट करने के लिए लाए गए उसी के कुछ ही समय के बाद में ही ये काशीपुर में हुआ था ना कि श्यामपुकुर में जहां पर भी हो स्वामी जी उस समय बोध गया चले गए थे साथ में ही काली महाराज और महापुरुष महाराज थे साथ उनके साथ में तो ये वहां पर जाकर के उन्होंने तपस्या प्रारंभ कर दी थी तो भगवान बुद्ध के प्रति स्वामी जी का एक निष्ठा हमेशा से रही है तो जब वराह नगर मठ में दीवाल पर कोयले से लिख दिया था इहा सने शतु में शरीरं त्व गस्ती मासम प्रलय चया ये जो भगवान बुद्ध का ये जो फेमस जो घोष है जो उनका एक घोषणा है कि इस आसन पर में विराजित होऊंगा और जब तक मुझे निर्माण प्राप्ति नहीं होगी बहु कल्प दुर्लभाम मने यह जो बहु बहुत कल्प से बहुत जन्म से मेहनत करने पर भी जो प्राप्त नहीं होता ऐसा निर्वाण जब तक प्राप्त नहीं होगा तब तक मैं इस आसन से खड़ा नहीं होंगा भले ही चाहे मेरी हड्डी पसलियां मेरा मांस मेरा शरीर गल करके खत्म क्यों ना हो जाए तो यह तपस्या य तपस्या के माध्यम से उन्होंने यह चरित्र निर्माण अपना किया था तो यह था स्वामी जी का नया मैसेज ओ एंड इट इज ग्रांड एंड थ्रिल्स वन वो कितना भव्य है यह मैसेज और यह सुन कर के य किस तरह की कंपन हमारे हृदय में प्रकट होती है यह जोसेफाइन मैक्लाउड कहती है ट इन वनस ग्रेटेस्ट ववर ऑफ नीड नो वन ग्रेटेस्ट ववर ऑफ नीड वन स्टैंड्स अलोन जिसका अपने जीवन में सबसे ज्यादा कठिन समय जा रहा है सबसे कठिन परिस्थिति में से हम जब पसार हो रहे होते हैं उस समय हम अकेले खड़े रहते हैं हमारे साथ में कोई भी हो अपने गुरुजन बंधु बांधव परिवार जन इसमें से उस समय अपने जीवन की सबसे कठिन समस्या से जब हम पसार हो रहे हैं हमारे साथ में कोई नहीं रहता हम अकेले खड़े रहते हैं वन स्टैंड्स अलोन ही इनडीड ही इज इनडीड अ प्रोफेट विथ अ न्यू मैसेज न जोसेफाइन लिखती है कि स्वामी जी एक नए मैसेज के साथ में एक नए प्रोफेट के रूप में अभी हमारे बीच में अवस्थित है यह जो उन्होंने स्वामी जी ने कहा कि इन अवर ग्रेटेस्ट नीड वी स्टैंड अलोन अर्थात कि देखिए कि जब सबसे ज्यादा संघर्षमय समय अपना जा रहा हो उस समय यह जो अपना चरित्र है अपना जो हमने यह जो आध्यात्मिक सफर करके जो संस्कार प्राप्त किए हैं वही हमारा सबसे बड़ा संबल है देखिए प्योर अद्वैत है द्वैत में जद जाएंगे तो कहेंगे कि शरणागति ही एकमात्र माध्यम है अपने जीवन का सबसे कठिन समय है उसमें ईश्वर ही हमारा साथ देते हैं और ईश्वर के प्रति शरणागति ही हमारा सबसे बड़ा संबल है यदि धत मार्ग से जाएंगे तो किंतु यहां पर स्वामी जी जो एक बिल्कुल नई भूमि में ये जो नया मैसेज देना चाहते हैं व प्योर अद्वैत कि हम अपना चरित्र निर्माण अपने हाथों से करते हैं और यह चरित्र ही है हमारी सबसे बड़ी संबल हमारी सबसे बड़ी मुड़ी हमारा सबसे बड़ा स्ट्रेंथ और मुसीबत के समय में यही चरित्र रूपी धन ही चरित्र रूपी शक्ति ही हमारे सबसे ज्यादा काम में आती है प्योर अद्वैत और यह भी देखिए कि स्वामी जी इस बात को कैलिफोर्निया में कहने वाले थे कैलिफोर्निया अभी आज हम जाएंगे तो हॉलीवुड और ये सिलिकॉन वैली जो कि भोग की महाभूमि कहलाती है जहां पे भोग सर्वोच्च कक्षा पे आज यदि विश्व में है तो वो कैलिफोर्निया में है वो भी हॉलीवुड में होगा जहां पे ये इंग्लिश मूवी बनती है और ये सिलिकॉन वैली में होगा जहां पे ये बिलियने लोग रहते हैं विश्व के सबसे ज्यादा धनी लोग जहां पे रहते हैं वो है कैलिफोर्निया और यही कैलिफोर्निया में स्वामी जी अद्वैत का झंडा गाड़ने वाले थे ये स्वामी जी ने जो अ वेदांत उसके प्योर फॉर्म में कैलिफोर्निया में जो सिखाया यही कारण है मेरी दृष्टि से कि कैलिफोर्निया आज इतना सक्सेसफुल क्यों है स्वामी जी यह प्योर अद्वैत को भारत में भी स्थापित करने से थोड़ा सा यह हो रहे थे क्योंकि उनको उन्होंने कहा कि भारत में जो जरूरत है वो कर्म योग की बिना कर्म के हम लोग कहीं पर भी नहीं पहुंचेंगे किंतु यह जो साहस शौर्य वीर्य ये चरित्र निर्माण ये जो प्योरिटी ऑफ पर्पस जो कि प्योर अधत वेदांत है उसके बारे में उन्होंने कैलिफोर्निया में कहा है तो यह देखिए कि प्योर अद्वैत वेदांत का मैसेज एक समाज को इस सोसाइटी को कहां तक ट्रांसफर कर सकता है हियर वास द थीम दैट वास टू साउंड फॉर सो फन एंड सो एंफेटिकली थ्रू आउट हिस सेकंड विजिट टू अमेरिका यह एक ऐसी थीम थी जो कि चरित्र निर्माण ही आध्यात्मिक जीवन का सर्वोच्च संबल है यह अपना जो नया मैसेज जो देने वाले थे उस नए मैसेज में स्वामी जी की यह थीम बार-बार जयघोष होकर के उसका नाद पूरे अमेरिका में फैलने वाला था वंस अगेन वी हियर इट्स अनाउंसमेंट एट रिजली मैनर इन अ रिकरेक्शन ऑफ मोड स्टम मोड स्टम बोलकर के स्वामी जी की जो डिसाइल थी जो एक बहुत ही अच्छी पेंटर थी और जिसके पास में स्वामी जी पेंटिंग सीखने वाले थे वो कहती है नियर एवरी डे स्वामी वाज वंडरफुल इन अ न्यू वे प्रतिदिन स्वामी जी नए-नए रूप में कोई अद्भुत बातें किया करते थे उनका एक अद्भुत नया स्वरूप हमारी नजर के सामने आता जाता था एंड नाउ इट वुड बी म्यूजिक दैट ही ड्वे अपॉन एंड नाउ आर्ट एंड वंस ही बर्स्ट इन टू मॉर्निंग रूम डिक्लेयर फॉर लिबर्टी कभी वो म्यूजिक के बारे में कुछ अद्भुत बात करेंगे जो कि पेंटर आर्टिस्ट होने के बाद में भी नहीं समझती थी कभी-कभी आर्ट यानी कि इन जनरल आर्ट के बारे में बात करेंगे और एक दिन वह जो एक सुबह को जो वहां पर बैठक कक्ष है उसमें लिबर्टी अर्थात कि मुक्ति की जयघोष करते हुए जैसे कि उन्होंने प्रवेश किया वट डू आई केयर इफ मोहम्मद वाज अ गुड मैन और बुद्धा यह मोहम्मद बहुत अच्छा व्यक्ति था बहुत अच्छे थे या बुद्ध बहुत अच्छे थे इससे मुझे क्या है डज ट ल्टर माय ओन गुडनेस और इवल इसके बुद्ध भगवान बुद्ध बहुत अच्छे थे भगवान राम बहुत ग्रेट थे भगवान कृष्ण बहुत माने ब बहुत बड़े सिद्ध महापुरुष थे अवतार थे ईश्वर स्वयं थे किंतु उससे मुझे क्या होता है मेरे भीतर में जो अच्छा या बुरा है उससे क्या कोई फर्क पड़ने वाला है लेट अस बी गुड फॉर अवर ओन सक ऑन अवर ओन रिस्पांसिबिलिटी हमारे खुद के लिए हमारे खुद के जिम्मे पर हम अच्छे बने नॉट बिकॉज सम बडी वे बैक देर वास गुड इसलिए अच्छे नहीं बने क्योंकि भ काल में पुराने भूतकाल में भगवान बुद्ध बड़े अच्छे थे तो मैं भी अच्छा बनू आज भगवान कृष्ण बड़े ही उ सिद्ध थे तो भगवान कृष्ण की मैं आराधना करूं आज इसके लिए मुझे अच्छा नहीं होना है मेरे खुद के बलबूते पर मेरे खुद के जिम्मे पर मुझे अच्छा होना है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिल री k