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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Macrocosm 30 Oct 2023

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ या राम कृष्णाय ते नमः तो इस बार फिर से हम कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद सेकंड वॉल्यूम में ज्ञान योग की जो सीरीज है उसमें से कॉस्मस द मैक्रो कोसम इस लेक्चर के ऊपर में थोड़ा सा पाठ और थोड़ा सा चर्चा करेंगे थोड़ा सा रिकप कर दूं अभी तक हमने क्या-क्या पढ़ा है स्वामी जी ने जो एक बहुत ही इंपॉर्टेंट आर्गुमेंट किया है कहा है कि जिस तरह से जैसे जैसे कोई भी सिविलाइजेशन कोई भी सोसाइटी कोई भी ह्यूमन ग्रुप हो वह जब तक किसी भी तरह के प्राकृतिक संघर्ष में उलझा हुआ रहता है जब तक किसी ना किसी बाह्य आक्रमण का भय रहता है तब तक वह अपने रक्षा की ही चिंता सबसे ज्यादा योगक्षेम जिसको कहते हैं या तो फिर रोटी कपड़ा मकान उसकी चिंता करने में ही उसका पूरा समय बीत जाता है किंतु जैसे-जैसे उसकी बाह्य सिक्योरिटी नेचुरल फिजिकल मटेरियल सिक्योरिटी ठीक होती जाती है उसके रोटी कपड़ा मकान यह जो सब बेसिक नेसेसिटीज वो सब उसकी ठीक हो जाती है तब क्या होता है तब व एक हायर थिंकिंग करने की शुरुआत करता है स्वामी जी ने पहले ही स्टार्टिंग में कहा कि यह जो भारत देश किस तरह से सिक्योर था इस लेक्चर में नहीं कहा किंतु और किसी एक लेक्चर में उन्होंने कहा है एक तरह एक साइड में हिमालय है एक साइड में यह हिंदू कुश पर्वतमाला है या हम नीचे में एक साइड में बे ऑफ बंगाल है फिर ये अरेबियन सी है और इंडियन ओशन है तो चारों ओर से ऊपर में दो पर्वत मालाएं इंडिया को बचा करके रखती है नीचे में समुंदर है अभी तो सब जब से ब्रिटिश लोगों ने यह स्टीम बोट स्टार्ट की तब उन्होंने पहली बार समुंदर के थ्रू भारत पर अटैक किया भारत पर हमला किया किंतु इससे पहले हजारों साल की हमारी जो सभ्यता है किसी ने समुद्र के रास्ते से आकर के भारत पर अटैक नहीं किया समुद्र के रास्ते से आए हैं किंतु आर्मी नहीं आ सकती थी समुद्र वो बोट्स में तो वो जैसे पारसी लोग है तो पारसी लोगों ने आकर के वो हमारे एक राजा को कहा कि हमको यहां पर रहने के लिए परमिशन दीजिए तो वह एक चीज थी रिफ्यूजी आएंगे कॉमर्स ट्रेड यह सब होगा ट्रांजैक्शन वगैरह होगा आर्मी जो है बोट के थ्रू ट्रांसपोर्ट होना इतने लंबे समुंदर के ऊपर में वह संभव नहीं था वो ब्रिटिश लोगों ने यह इंटरनल स्टीम स्टीम इंजन का डेवलपमेंट किया उसके बाद में यह सब संभव हुआ तो समुद्र के रास्ते से भी चारों और समुद्र नीचे में तीन तीन साइड में समुंदर तो वहां पर सेफ्टी सिक्योरिटी है ऊपर में यह साइड हिमालय है चाइनीज लोग कभी भी हमारे पर आक्रमण नहीं किए क्योंकि इतना बड़ा हिमालय बीच में खड़ा है और यहां पर हिंदू कुछ पर्वतमाला है बाद में कहीं जाकर के यह खैबर पास किसी ने खोज निकाला और फिर यह अफगानी लोग खैबर पास के थ्रू भारत में अटैक किए तो जब तक किंतु वो बाद में हुआ एक हजारों साल पुराना हमारा जो सभ्यता था उसके उस समय इतना सुंदर प्राकृतिक रमणीय वातावरण था गंगा का किनारा वहां पर बहुत ही फलदू बहुत ही फर्टाइल लैंड आप जो भी डालेंगे इमीडिएट वो यह हो जाएगा खेत है फार्मिंग है बहुत ही सुंदर तरीके से होगा खाने पीने की ऐसी कोई चिंता नहीं है तो ऑटोमेटिक इनका मन किसी एक हायर इंक्वायरी की ओर गया और फिर उन्होंने यह सोचना शुरू किया कि ऐसा क्या है जिसको जानने से सब कुछ जाना जा सकता है ऐसा क्या है जैसे नचिकेता ने हमको जाकर के पूछा कि मृत्यु के बाद में क्या होता है कोई कहता है ऐसा होता है ना कि कोई कहता है वैसा होता है आप मृत्यु के देवता है आप मुझे सही सही जानकारी दीजिए नच केता वो इतना अभी आज का कोई लड़का होगा कॉलेज में पढ़ता होगा ना कि हाई स्कूल में पढ़ता होगा वो जद जाएगा भगवान यम के पास में तो वो क्या सब उलट पुलट माग करके आएगा जद भगवान यम कहते हैं कि मैं तुमको तीन वरदान देता हूं तो उसका क्या सब उसके मन में उटपटांग बातें आएगी किंतु उस समय की संस्कृति थी उस समय के हमारे संस्कार थे तो मटेरियल बेनिफिट वाज सेकंडरी एक एक फिलोसॉफिकल स्पिरिचुअल इंक्वायरी इट रूड इंडिया जो भी मटेरियल बेनिफिट है वह आएगा जाएगा डंट मैटर फिलोसोफी और स्पिरिचुअल इंक्वायरी की जो स्थान था वो समाज में सर्वश्रेष्ठ था इसीलिए नची केता ने यह पूछा कि मृत्यु के बाद क्या होता है वह मुझे बताइए तो पूरी हमारी यह संस्कृति कि हायर थिंकिंग को प्राधान्य देती है अपने मन को अंतर्मुखी है यह ट्रेडिशनल चर भारत में डेवलप हुए उपनिषदों का प्रारंभ भी वहीं से हुआ कि उपनिषद तो किसी ऋषि ने लिखे नहीं है वे लोग जब समाधि में गए तो जो दिव्य वाणी उनको सुनने को मिली उसी से उन्होंने यह उपनिषद फिर उसका ट्रांसक्रिप्शन है तो जब यह हायर इंक्वायरी स्टार्ट होती है तो प्रश्न आता है कि यह विश्व ब्रह्मांड का रहस्य क्या है तो इसके लेकर के स्वामी जी ने बहुत सारा कुछ बेसिक ग्राउंड आर्गुमेंट प्रगट की हमारे सामने ग्राउंड आर्गुमेंट हमको बताई फिर आखिर में एक बड़ा ही स्टार्टिंग स्टेटमेंट देते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं टेक दिस होल इवोल्यूशनरी सीरीज फ्रॉम द प्रोटोप्लास्ट एट वन एंड टू द परफेक्ट मैन एट द अदर एंड दिस होल सीरीज इज वन लाइफ यह पूरा जीवन का यह प्रवाह है उसको एक समान रूप से लीजिए उसको उसको एक होलिस्टिक दृष्टि से देखिए उसको देखिए कि एक एंड पे है या तो बिग बैंग कहो ना कि य सिं जद पूरे विश्व ब्रह्मांड की दृष्टि से कहोगे तो बिग बैंग यहां की शुरुआत है इस कल्प की इस साइकल की और यदि यह ऑर्गेनिस्ट म के बारे में कॉन्शियस लाइफ के बारे में कहोगे तो कहेंगे कि यह सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म एक कोशी जीव था तो एक और वो है और दूसरे किनारे पे है दूसरी छोर पे है भगवान श्री राम कृष्ण परफेक्ट ह्यूमन बीइंग भगवान राम जीसस ना कि आइंस्टाइन ना कि महात्मा गांधी जो भी आपके ट व्हाट एवर इज योर डेफिनेशन ऑफ अ परफेक्ट मैन तो एक साइड पे है परफेक्ट मैन और एक साइड में है यूनि सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म या तो बिग बैंग स्वामी जी कहते हैं इसको संपूर्ण सीरीज को एक ही दृष्टि से देखिए एक सिंगल ऑर्गेनिस्ट सम की दृष्टि से देखिए एंड दिस इज द बिगिनिंग ऑफ अद्वैत वेदांत मटेरियल सिकली भी आप कह सकते हैं यदि आप मटेरियल यूनिवर्स की बात करते हैं बिग बैंग से लेकर के आज तक की ये य ब्लैक होल्स है ना कि ये स्टार्स है ना प्लेनेट है ना गैलेक्सी है ना नेबुला है जो कुछ भी है तो इसके भीतर में भी आप कह सकते हैं कि यूनिफॉर्म है क्योंकि जो कंसीट एलिमेंट्स है इस मटेरियल यूनिवर्स के वो तो है मैटर और एनर्जी मैटर यानी कि अ एटम्स एटम्स के भी और ज्यादा एनालाइज करेंगे डिसेक्शन करेंगे तो फिर सब एटॉमिक पार्टिकल्स जैसे कि ये न्यूट्रॉन प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन इसका भी और ज्यादा विश्लेषण करेंगे इसके भी कंसीट पार्टिकल्स खोजें तो स्ट्रिंग है ना कि क्वार्क्स है फिर और भी इसके भीतर में जाता है जो कि कटिंग एज फिजिकल थिरी फिजिक्स की थिरी क्या कहती है व्हाट एवर किंतु वो जो एलिमेंटरी पार्टिकल्स है दे आर द फंडामेंटल कांस्टीट्यूएंट्स ऑफ दिस यूनिवर्स और साथ में है एनर्जी तो यह मैटर और एनर्जी और यह स्पेस और टाइम की ये जो डायमेंशन है यह विश्व ब्रह्मांड को बनाता है यदि एक तारा भी कहो ना कि एक गैलेक्सी भी कहो ना कि मैं भी कहो ना कि इस माइक को भी कहो किताब को भी कहो वही बेसिक बिल्डिंग ब्लॉक से सब कुछ बना है तो यहां पर भी हमको एक यूनिटी देखने को मिलती है एक लिविंग ऑर्गेनिस्ट जो है सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म हो ना कि एक मछली हो ना एक वेल हो ना कि एक डॉल्फिन हो ना कि चीता हो ना कि शेर हो ना कि डायनोसोर हो या तो फिर यह प्राइमेट हो ना कि हम ह्यूमन बीइंग हो हम सबके भीतर में एक ही डीएनए का इवोल्यूशन हो रहा है जैसे कि आप को यदि पता होगा कि डीएनए के ह्यूमन जेनोम प्रोजेक्ट बोलकर के एक बीच में स्टार्ट हुआ था बहुत सारे साइंटिस्ट लोगों ने इकट्ठा होकर के यह ठीक किया कि यह जो ह्यूमन जिनोम है यह जो डीएनए है इसके भीतर में बिलियंस ऑफ बेस पेर है बेस पेर यानी कि ये जो एटी सी ऐसा कुछ वो बेसिक लेटर्स उन्होंने चार अ कांस्टीट्यूएंट्स इसके कहे हैं ये चार कांस्टीट्यूएंट एक दूसरे के साथ में मिलकर के दो-दो कांस्टीट्यूएंट्स मिलकर के पेर बना आते हैं जैसे कि सीढ़ी बनती है ना इस तरह से सीढ़ी की तरह ये दोनों दो-दो कंसीट एंट मिलते हैं फिर ये इस सीढ़ी को ट्विस्ट करेंगे तो इस तरह से वो डीएनए बनता है अभी ये जो बेस पेर है बिलियंस ऑफ बेस पेर है हजारों मतलब सैकड़ों करोड़ों बेस पे है तो किसी ने कहा कि इसमें से कोई कोई जीन है वो एक्टिव है और हमारे शरीर में उसकी इफेक्ट दिखती है जैसे कि ये जीन है य हमारे बालों का कलर ठीक करता है यह जीन है हमारी आंखों का कलर ठीक करता है यह जीन है वह हमारे हार्ट का स्ट्रक्चर ठीक करता है यह पार्टिकुलर जीन है यह ठीक करता है कि मनुष्य है ना कि ये बंदर बनेगा जो भी बनेगा तो किंतु उन्होंने देखा कि 10 ना कि 20 पर जीन ही एक्टिव होते हैं और बाकी के 70 ना की 80 पर जीन जो है वो इन एक्टिव रहते हैं तो उन्होंने यह सोचने का प्रयत्न किया कि यह तो इवोल्यूशन की इतने हजारों करोड़ों सालों का इवोल्यूशन होकर के डीएनए बना है तो कोई कोई ट्रेट जो है हमारे भीतर में जैसे कि बंदर की पूंछ तो बंदर की पूंछ भी उसी डीएनए के भीतर में शामिल है यह डॉल्फिन की तरह पानी में तैरना वो डॉल्फिन का जो सेंस ऑफ सोनार जो है हम लोग आंखों से देखते हैं कान से सुनते हैं डॉल्फिन क्या करती है वो सोनार सिग्नल फेंकते है यानी कि पानी के भीतर में वेव्स फेलते हैं वो वेव किसी चीज के साथ टकराएंगे वापस आएंगे तो जो रिटर्न सिग्नेचर है वेव्स का उसके ऊपर से डोल्फिन वो सामने वाली चीज का एक विजुलाइज कर पाएगी तो यह सोनार सेंस है कि जो कुछ भी है पूरे पृथ्वी के ऊपर में जितने भी पशु पक्षी है उन सभी की ट्रेट्स उसी एक ही हमारे डीएनए में अभी भी है हालांकि वह सब डी एक्टिवेटेड है यदि उसको एक्टिवेट कर दिया जाए समझ समझ करके कि यह कौन सा ट्रेट है वो कौन सा ट्रेट है तो वो गुण भी वो कैरेक्टरिस्टिक भी हमारे शरीर में प्रकट होगी इसीलिए अभी रिसेंटली मैंने ज ने एक आर्टिकल लिखा है कि व्हाट आर द ये क्रिस्पर टेक्नोलॉजी है क्रिस्पर टेक्नोलॉजी क्या करती है ये जीन है उसको एडिट करती है ज कोई कोई पेरेंट्स ऐसा कहते हैं कि मुझे एक पार्टिकुलर कैरेक्टरिस्टिक वाला बच्चा चाहिए इस तरह का बच्चा चाहिए जो कि गोरा हो उसकी आंखें ब्लू हो उसके बाल जो है वो केसरी वो गोल्डन कलर के हो दिखने में बड़ा ही सुंदर हो फिजिकली बड़ा ही हेल्दी हो बड़ा ही स्मार्ट और इंटेलिजेंट हो और लड़का ही चाहिए लड़की नहीं चाहिए यह सब होता है ना पेरेंट्स का तो वह किसी क्रिस्पर टेक्नोलॉजी जानने वाले को बोलेंगे कि हमारा जो डीएनए है हम दोनों का माता और पिता का उसको लेकर के एडिट करो और उस एडिटेड डीएनए को मां के गर्भ में प्रवेश करवाओ तो जब ऐसा होगा तो हमने जिस तरह से बच्चे को डिजाइन किया है जैसे हम लोग यह सॉफ्टवेयर डिजाइन करते हैं तो वैसे ही बच्चे को भी एक क्रिस्पर टेक्नोलॉजी से डिजाइन कर सकते हैं दिस आर वेरी डेंजरस टेक्नोलॉजी इसके बेनिफिट्स है आपके वह जो वंश परंपरागत जेनेटिक डिसऑर्डर है इससे आप बच सकते हैं ऑन वन हैंड ऑन दी अदर हैंड कोई पागल डिक्टेटर होता है वह सोचेगा कि मुझे सोल्जर्स प्रकट करना है मुझे कोई इंटेलेक्चुअल फिलोसोफर ऐसे सब लोग नहीं चाहिए ऑल आई वांट इज अ आर्मी ऑफ पीपल हु आर फिजिकली वेरी स्ट्रांग इंटेलेक्चुअली वेरी लिमिटेड उनको जो ऑर्डर दिया जाए वही करें यदि मैं कहूं कि जाकर के सिविलियन पर हमला करो तो कोई प्रश्न ना कर करें कि भाई हम लोग तो सोल्जर हैं हमको तो सिर्फ सोल्जर के साथ फाइट करना है हम क्यों किसी सिविलियन के साथ फाइट करें ऐसा कोई प्रश्न बन ना करें उसका बुद्धि बड़ा ही लिमिटेड हो फिजिकली बड़ा ही स्ट्रांग हो जितना भी चाहे वह पेन एंडोरेंस कैपेसिटी है स्ट्रेस एंडोरेंस कैपेसिटी है वह बड़ा ही हाई हो तो यदि ऐसा होता है दिस विल पोज अ ग्रेट रिस्क फॉर ह्यूमन माइंड क्योंकि ह्यूमैनिटी का अभी तक का क्या एक सिग्नेचर है मैं ह्यूमन हूं मुझे व्ट मेक्स मी ह्यूमन बिकॉज आई हैव कंपैशन इन माय हार्ट आई हैव अ कैपेसिटी फॉर हायर थिंकिंग व्हिच राइज अबोव माय सरकमस्टेंसस मैं इस छोटे से एक आश्रम में बैठा हूं छोटी सी ऑफिस में किंतु मेरे मन की जो सीमाएं हैं वो इस लिमिटेड ऑफिस के भीतर में लिमिट नहीं हो जाती मैं पूरे विश्व के बारे में सोचता हूं मैं अमेरिका के भी बारे में सोचता हूं मैं रशिया के बारे में भी सोचता हूं मैं जापान या तो फिर अर्जेंटीना ना कि केनिया इन सब के बारे में भी सोचता हूं मैं फिलोसोफी के बारे में भी सोचूंगा साइंस के बारे में भी सोचूंगा यदि मेरी इच्छा है तो दिस कैपेसिटी इज व्ट मेक्स मी ह्यूमन यदि मुझे कहा जाए कि तुम ऐसा करो मैं स्वामी जी ने कहा है कि वैसे ब्लाइंड ओबेडिएंस चाहिए स्वामी जी का बड़ा ही एक सुंदर है बाउंड एज ए डॉग एंड फ्री एज एयर माने यदि ऑर्गेनाइजेशन में रहते हैं तुमको यदि आदेश दिया जाए कि एक बड़ा गड्ढा एक कुआ है में एलिगेटर्स यानी कि मगरमच्छ है तुम उसमें जंप लगाओ तो आंख बंद करके उसमें जंप लगाने की कैपेसिटी तुम्हारे पास होनी चाहिए स्वामी जी कहते हैं कि डिक्टेटर होगा वही हमारे ऑर्डर को चला सकता है अभी भी इंडियंस डेमोक्रेसी के लायक नहीं हुए है तो जैसे आजकल का हमारा जो अंडरस्टैंडिंग है कि डेमोक्रेसी डिक्टेटरशिप का डेंजर क्या है ये चाइना में देखिए माओ जे दोंग या तो फिर ये हिटलर जर्मनी में रशिया में स्टेलिन और इतिहास में तो ऐसे पागल लोगों की कमी नहीं है पूरे देश को युद्ध में डाल दिया और हम हार भी रहे हैं फिर भी बोल रहे हैं बस मर्डर करते ही जाओ म करते ही जाओ यह जो सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में जर्मनी की जो परिस्थिति थी यह तो अमेरिका ने हेल्प नहीं किया होता तो व बेचारे कभी भी उनका कुछ होने वाला नहीं था तो इस तरह के डिक्टेटरशिप को स्वामी जी क्यों पसंद करते हैं ठाकुर का खुद का तो ऐसा नहीं था ठाकुर ने तो कभी ऐसा नहीं कहा ठाकुर ने खुद ने स्वामी जी को डेवलप होने के लिए कितना चांस दिया है ठाकुर ने कभी ऐसा कहा कि जो मैं कहता हूं वो तुम सुन लो स्वामी जी उनको टेस्ट करते गए और वो हंसी मुख से वो सब सहन करते गए जब निवेदिता स्वामी जी के साथ में इतनी आर्गुमेंट कर रही थी तो मतलब अपने इंडियन लोग तो छोड़ दो वो अमेरिकन डिसाइल जो एक दो लोग साथ में थे वे लोग भी बड़े परेशान हो गए तब स्वामी जी ने क्या कहा कि आई नो एव्री इंच ऑफ माय वे बिकॉज आई हैव फाउट एव्री इंच ऑफ माय वे विथ माय ओन गुरु महाराज मैंने मेरे खुद के गुरु के साथ में प्रत्येक स्टेप पर मैंने फाइट किया है तो बहुत सारे यह जितने भी उत्तर प्रश्न वह करती है सबके उत्तर मेरे पास में है तो इन लोगों ने अपने खुद के डिसाइल्स के साथ में या तो इनके खुद के गुरु ने इतना फ्रीडम दिया और स्वामी जी हमको बोलते हैं कि है वो परफेक्ट ओबेडिएंस किंतु साथ साथ में स्वामी जी यह भी कहते हैं फ्री जज ए बाउंड लाइक ए डॉग बट फ्री ज ए इसका बहुत विभिन्न तरीको से आप इंटरप्रिटेशन कर सकते हैं मेरा खुद का जो इंटरप्रिटेशन मैंने सीनियर साधुओं का भी सुना है डिफरेंट डिफरेंट मेरा खुद का जो इंटरप्रिटेशन है कि जहां तक हमारे कर्म का प्रश्न है हम लोग अपने आश्रम में जो जो भी एक्टिविटीज करते हैं जो कि बाहर के सोसाइटी के साथ में हमारा जो रिलेशनशिप है वह हमको ऑर्डर के नियम के अनुसार परफेक्टली ऐसा ही चलना चाहिए मुझे ऐसा का कहा गया कि तुमको आज मंदिर में काम करना है या तुमको आज में काम करना है या तो फिर तुमको डिस्पेंसरी में काम करना है और फिर मैं यदि ऐसा बोलना शुरू कर दूं कि नहीं नहीं यह तो ठीक नहीं है मुझे यह काम पसंद है यह काम पसंद नहीं है तो फिर यह ऑर्डर यह ऑर्गेनाइजेशन कैसे चलेगा इसलिए जहां तक कर्म का प्रश्न है वि शुड हैव ओबेडिएंस जहां तक कामिनी कांचन त्याग का प्रश्न है वी शुड बी परफेक्टली ओबेडिएंट कि संघ के नियम क्या कहते हैं स्वामी जी का एक बड़ा ही इंटरेस्टिंग एक है एक बार स्वामी जी ने कहा कि यदि मन में काम भावना का यदि मन में किसी के मन में काम भावना प्रकट होती है तो तुम साधुओं के सामने जाकर के अपने वस्त्र छोड़ छो फेंक दो निव स्त्र हो जाओ और कहो कि मेरे मन में इस तरह का पाप उठ रहा है देखो आप सब लोग देखो तो यदि सबके सामने इस तरह तर निव स्त्र हो जाओगे तो देखोगे कि काम भाव तभी का तभी अदृश्य हो जाएगा क्यों क्योंकि ये सब नेगेटिव इमोशन है वो अंधेरे में एक एकांत में वहीं पर प्रकट होती है जब तक आप यह सूर्य का प्रकाश जहां पर है जब तक आप अपने भाइयों के साथ में बैठे हुए हैं जब ऐसा होता है तब यह काम भाव ये जितनी भी नेगेटिव इमोशन है वो पूरी चली जाएगी तो इस तरह से संघ कार्य करता है किसी एक व्यक्ति का मन यदि कमजोर हो जाए किसी एक व्यक्ति के मन में इस तरह से पाप का आविर्भाव होने लगे तो वो देखेगा कि साथ में इतने सारे भाई है उसके साथ में रहने रहते हैं उसके ऊपर नजर रखते हैं यदि उसकी कोई गलती है तो उसको सुधारते हैं और यदि मेरे मन में कोई प्रश्न होता है तो मैं अपने भाइयों के साथ में जाकर के उनको मैं उसको उत्तर मांग सकता हूं पूछ सकता हूं कि हां मेरे मन में इस तरह का प्रश्न है इस तरह की दुविधा है मेरी यह समस्या है आपको आपका क्या मत है मुझे क्या करना चाहिए तो संघ इस तरह से अपने माइंड को डिसिप्लिन करता है तो साधना के रिलेटेड और कर्म के रिलेटेड वी शुड बी परफेक्टली ओबेडिएंट किंतु जहां तक हायर इंक्वायरी का प्रश्न है जो कि हमारी सनातन भारतीय परंपरा है कि हमेशा हमेशा के लिए हमारा मन एक उच्च कक्षा पे विराज करेगा विराजमान होगा एकदम हाईएस्ट लेवल की फिलोसोफी हम लोग बिना किसी द्विधा के हम चिंतन करेंगे मनन करेंगे रामकृष्ण मिशन में मैंने देखा है कि मैं जब ट्रेनिंग सेंटर में गया था अभी आजकल क्या है कि डिजिटल मीडियम बड़े ही सहज उपलब्ध है हमको किसी भी तरह की इंफॉर्मेशन चाहिए तो वह प्राप्त करने के लिए किंतु आज से 1015 साल पहले यह बात नहीं थी और खास करके बेलूरमठ में हमारा ट्रेनिंग सेंटर वह तो बड़ी ही कंजरवेटिव बड़ी ही ट्रेडिशनल जगह है वहां डिजिटल टेक्नोलॉजी का तो कोई नामो निशान भी नहीं है तो मैं वहां मुझे प पढ़ने का बहुत शौक है और मैं बहुत कुछ पढ़ता रहता हूं हिस्ट्री है जियोग्राफी है साइंस है जो कुछ भी हाथ में आ जाए अपनी लिमिटेड इंटेलिजेंस से हम जो भी समझ समझ पाए तो मैं जब बेलूरमठ में गया ट्रेनिंग सेंटर में तो मैंने सोचा कि अरे यहां की लाइब्रेरी में तो सब धार्मिक किताबें ही रखी होंगी पुराण होंगे या तो फिर अद्वैत वेदांत के ऊपर में वो सब बड़े-बड़े फिलोसॉफिकल वो होंगे ट्रीटीज मैं मुझे जो लाइट रेडिंग करना है या जो मेरी ये कंटीन्यूअस पढ़ते रहने की हैबिट है मुझे कहां वो कोई अच्छी किताब यहां पर मिलने वाली है तो ऐसा मैं सोच रहा था फिर एक दिन सोचा कि चलो मैं जाकर के मुलाकात तो ले लूं लाइब्रेरी का आया हूं तो क्योंकि मैं कहां जा कर भी जाता हूं सबसे पहले मैं वहां पर लाइब्रेरी है कि नहीं वो देखता हूं लाइब्रेरी में कौन-कौन से सेक्शन है कौन-कौन सी किताब कहां पे है ट ट टू लर्न द ले ऑफ द लैंड जद इंग्लिश में कहेंगे कि कौन सी चीज कहां पे है कौन सी किताब कहां पे है वो जाकर के एक बार देख लेना है फिर जिस तरह का मूड होता है वो लाइब्रेरी में जाकर के उस सेक्शन में जाकर के वो किताब ले लेनी है तो मैं जाकर के भीतर में प्रवेश किया तो एकदम आश्चर्य चकित हो गया एक पूरा ब्लॉक लाइब्रेरी को डिवोटा किया है लंबा सा मतलब इतनी नी बड़ी लाइब्रेरी ट्रेनिंग सेंटर में है वह पता ही नहीं चलेगा बाहर से और कितने विभिन्न सब्जेक्ट पर सब किताबें रखी हुई है अरे बाप रे मैं जनरली जिस सब्जेक्ट प टॉपिक पर पढ़ता हूं वो सबकी किताब और अच्छी-अच्छी किताब ऐसे वैसे नहीं कि किसी को बोल दिया होगा बुक सेलर को भाई तुम भेज देना उसने भेज दिया सिलेक्ट करके करके रखी हुई है तो मैंने जाकर के वो लाइब्रेरियन जो एक महाराज थे उनको पूछा मैंने कहा महाराज इतनी सुंदर किताबें यहां पर रखी है ये क्या रहा है इसके पीछे का क्या रहस्य है तो उन्होंने कहा कि देखो भजनानंद जी को भजनानंद जी ट्रस्टी थे उस समय असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी थे और ट्रेनिंग सेंटर में ही रहते थे तो कहा कि उनको प उनको भी पढ़ने का बड़ा शौक है ही इज अ वोरेसियस रीडर और वह जहां पर भी जाते हैं अच्छी-अच्छी किताबों के ऊपर में नजर रखते हैं कोलकाता में जद ये बुक फेयर होता है या ऐसा कुछ वो जाकर के अच्छी-अच्छी किताबें लेकर के आते हैं और फिर दूसरे साधु लोग भी डोनेट करते हैं सीनियर साधु लोग तो मैं मैंने कहा हां अच्छा ठीक है चलो मतलब ये मैं ऐसा नहीं है कि मैं कोई बिल्कुल ही एलियन जगह पर आ गया हूं यह अपने घर जैसा ही लग रहा है क्योंकि लाइब्रेरी यहां पर बड़ी ही अच्छी है तो यह रामकृष्ण मिशन में मैंने देखा है कि इस तरह की किताब हम लोग रखते हैं चच एक्सपेंस अवर होराइजन बिना किसी द्विधा के बिना किसी संकोच के हम क्वेश्चन कर सकते हैं इंक्वायरी कर सकते हैं फिलोसॉफिकल थिंकिंग कर सकते हैं दिस इज द ग्रेटेस्ट एसेट ऑफ रामकृष्ण मिशन तो यह है कि मुझे यहां पर अदर वाइज यदि एक इंटेलेक्चुअल एक कंजरवेटिज्म होता एक स्ट्रेट जैकेट की तरह तुमको यही सोचना है ऐसा यदि कहते तो मैं शायद यहां पर ना रह पाता मुझे सोचने का फ्रीडम चाहिए हालांकि मैं जो सोच रहा हूं जो मैं अपने खुद के साथ में जो मैं एक्सप्लोर कर रहा हूं एक के बाद एक टॉपिक्स मैं हो सकता है कि किसी के साथ डिस्कस ना करूं डजन मैटर किंतु आई शुड हैव अ परफेक्ट फ्रीडम टू डिस्कस एंड थ थिंक एनी टॉपिक दैट आई माइसेल्फ लाइक ये इंटेलेक्चुअल फ्रीडम मुझे चाहिए यदि मुझे किसी भी जगह पर रहना है तो रामकृष्ण मिशन में आई फाउंड दैट इंटेलेक्चुअल फ्रीडम इज देयर नो वन इज गोइंग टू टेल यू कि भाई ऐसा क्यों सोच रहे हो या वैसा क्यों सोच रहे हो हमारे बिहेवियर हमको मॉडिफाई करना है कामिनी कांचन त्याग यानी कि तो 100% कामिनी कांचन त्याग फिर मन में अपने मन में ब्रह्मचर्य के प्रति या तो फिर इस तरह के किसी विचार को लेकर के कोई द्विधा है तो इमीडिएट संघ छोड़ के घर चले जाओ कोई प्रश्न ही नहीं है कि संघ में रह कर के ऐसा कोई कार्य करोगे जैसे संघ बदनाम हो बिल्कुल नहीं करना है तो जहां तक हमारा बिहेवियर का प्रश्न है वी आर बाउंड एज डॉग बट एज फार एज अवर फिलोसॉफिकल इंटेलेक्चुअल स्पिरिचुअल इंक्वायरी गोज वी आर फ्री एज एयर तो यह जो पूरा डिस्कशन हमने स्टार्ट किया कि यह हायर थिंकिंग भारत में था बोलकर के हमने यह स्पिरिचुअल डेवलपमेंट स्टार्ट किया ये और जो बात चल रही थी डीएनए की कि ये क्रिस्पर टेक्नोलॉजी के बेनिफिट्स और डेंजर्स दोनों है ऑन वन हैंड स्वामी जी कहते हैं कि पूरे प्रवाह को जीवन के प्रवाह को एक रूप में देखिए देयर इज वन स्पिरिट वन आत्मन वन ब्रह्मण अद्वैत वेदांत की वो यहां पर शुरुआत करते हैं उसका एक काउंटर पॉइंट जैसे मैं बताना चाहता था कि मटेरियल यूनिवर्स है वो भी कहता है कि पूरा विश्व ब्रह्मांड एक है जैसे हम लोग अद्वैतवाद जैसे ये धार्मिक या आध्यात्मिक लोग कहते हैं कि पूरा विश्व जो लोग ध्व इत में मानते हैं वे लोग कहेंगे कि पूरा विश्व जो है ईश्वर की शरण में ईश्वर के संतान स्वरूप है और हम एज अ ब्रदर्स एंड सिस्टर्स हम सब लोग यूनाइटेड है जुड़े हुए हैं अद्वैत वेदांती कहेंगे कि हम सबके भीतर में वही सेम कॉन्शियस निस काम कर रही है तो जिसका मटेरियल इिक थिंकिंग है वो हमारे सामने दो आर्गुमेंट रखेगा यदि मटेरियल यूनिवर्स प्योर मटेरियल यूनिवर्स की बात कर रहे हो वी आर ऑल बिल्ड अप विद द सेम कंसीट एंट ब्लॉक्स जितने भी पदार्थ है विश्व ब्रह्मांड में वही इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन एटम्स और उसके भी सब कंसीट जो भी पार्टिकल्स है इसके बने होंगे मैटर और एनर्जी इसके इससे पूरा विश्व ब्रह्मांड बना है यहां पे मटेरियल िक यूनिटी है और यदि कॉन्शियस ऑर्गेनिस्ट म के बारे में कह रहे हो तो री डीएनए यूनिटी ऑफ जेनेटिक्स यूनिटी ऑफ जीनस तो यहां पर जैसे कॉन्शसनेस या तो फिर आत्मन की यूनिटी है ईश्वर की यूनिटी है ऑन वन हैंड धर्म और आध्यात्मा वहां पर मटेरियल िक यूनिटी है ऑफ डी जीनस एंड सब एटम एटॉमिक पार्टिकल्स तो यह दोनों यूनिटी प्रश्न होगा कि आपको क्यों एक भगवान को या तो आत्मन को ले आना पड़ा है आप जैसे कहते हैं कि देर इज वन लाइफ बिहाइंड एवरीथिंग तो हम लोग भी वही कहते हैं बिग बैंग से लेकर के बिग क्रंच या तो जो भी ब्रह्मांड का होने वाला है भविष्य तो वहां तक हम उसी कंसीट पार्टिकल से ही बने हुए हैं और कोई नया चीज नहीं होने वाला है तो हम लोग भी कहते हैं देर इज अ मटेरियल यूनिटी व्हाई डू यू हैव टू ब्रिंग दिस स्पिरिचुअल यूनिटी तो यह प्रश्न का उत्तर शायद स्वामी जी हमको आगे दे ना दे मेरी दृष्टि से जो है कि कॉन्शसनेस इट सेल्फ जैसे स्वामी जी कहते हैं कि पहले कॉन्शसनेस था फिर मटेरियल यूनिट स्टार्ट हो करके अल्टीमेटली वह कॉन्शियस निस फिर से प्रोजेक्ट हुआ फिर से प्रकट हुआ तो शून्य में से कुछ भी नहीं आता यदि एक छोर पे कॉन्शसनेस है तो दूसरे छोर पर कॉन्शसनेस होनी ही चाहिए जैसे एक बीज है बीज में से वटवृक्ष बना वटवृक्ष एक दूसरे बीज को जन्म देगा और उस बीज में में से फिर से वटवृक्ष बनेगा तो एक छोर प स्वामी जी ने कहा पहले बीज है फिर आखिर में बीज है शुरुआत की स्थिति और आखिर की स्थिति दोनों समान होनी चाहिए तो यदि आखिरी जहां पर परफेक्ट मैन भगवान राम कृष्ण भगवान राम इनके भीतर में एक हायर कॉन्शसनेस सुपर कॉन्शसनेस है तो वही सुपर कॉन्शियस स्टार्टिंग में भी होना चाहिए ये पूरा कॉस्मो का ये लेक्चर है अभी तक का यह स्वामी जी यह प्रतिपादित करने का प्रयत्न कर रहे हैं कि ईश्वर या आत्मन का अस्तित्व है यदि यह अस्तित्व नहीं होता तो एक छोर दूसरे छोर पर यह अस्तित्व प्रकट नहीं होता यदि आप लोग कहते हैं कि मटेरियल इसिक यूनिवर्स है सिर्फ डीएनए है या तो सिर्फ ये जीनस है या तो फिर ये सिर्फ एटमिक पार्टिकल्स है अब जद यह सोचते हैं तो एटॉमिक पार्टिकल्स कोई बहुत ही कॉम्प्लेक्शन एक बना बनाएंगे किंतु मैटेरियलिस्टिक ही रहेगा द प्रूफ द द ऑब्जर्वेशन कि एक छोर पे एक हमारे आखिरी छोर पे कॉन्शसनेस प्रकट हुआ है दैट इज अ प्रूफ के कॉन्शसनेस वाज देयर इन द बिगिनिंग यदि शुरुआत में कॉन्शसनेस नहीं रहता सुपरकॉन्शियस चेतन या तो फिर आत्मन या ब्रह्मण या तो ईश्वर तो इस छोर पर वो प्रकट नहीं होता इस ठाकुर ने मां काली का दर्शन किया तो मां काली यहां पर प्रकट हुई इसका अर्थ है कि ब्रह्मांड के शुरुआत में या तो फिर ब्रह्मांड का यह जो साइक्लिकल चल रहा है कल्प एक के बाद एक कल्प चल रहे हैं इसके ऊपर में माहा काली विराजमान है अवस्थित है वो नहीं होती तो यहां पे महाकाली नहीं होती यदि बीज नहीं होता तो वटवृक्ष नहीं होता वटवृक्ष नहीं होता तो बीज नहीं होता तो शुरुआत में जो परिस्थिति है वो आखिर में होने वाली है यदि आज हमारे सामने जीसस जैसे लोग फादर इन हेवन का दर्शन करते हैं यदि आज भगवान बुद्ध निर्वाण की स्थिति प्राप्त करते हैं आज यदि ठाकुर को मां काली का दर्शन होता है तो वही निर्वाण या तो वही फादर इन हेवन या तो वही मां काली या तो फिर जिस तरह से स्वामी जी ने निर्विकल्प समाधि प्राप्त की तो वही निर्विकल्प समाधि की अवस्था येय हायर कॉन्शसनेस यदि आज है तो ब्रह्मांड के शरू में भी उसको होना ही है उसी हायर कॉन्शियस में से इवॉल्व होकर के एक बीज बना व बीज हिरण्य गर्भ कहोगे कि जो भी कहोगे बिग बैंग कहोगे और इसी बीच में से विश्व ब्रह्मांड का यह इवोल्यूशन हुआ है इवोल्यूशन और इवोल्यूशन ब्रह्मण में से ब्रह्मांड का बीज प्रकट हुआ इस बीज में से पूरा ब्रह्मांड इवोल्व हो रहा है स्वामी जी आज की ये मॉडर्न थिंकिंग मॉडर्न साइकोलॉजी मॉडर्न मटेरियल साइंस को ध्यान में र रख कर के यह सब आर्गुमेंट करते हैं शास्त्र के साथ में स्वामी जी का यदि एक कंपैरेटिव एनालिसिस किया जाए तो हमको पता चलेगा कि इन दोनों में डिफरेंस कहां पे है डिफरेंस यह है कि कंक्लूजन का प्रश्न है कंक्लूजन इज सेम महावाक्य कंक्लूजन है उपनिषद का कंक्लूजन है महावाक्य स्वामी जी का कंक्लूजन है महावाक्य अहम ब्रह्मास्मि ये दोनों का सेम कंक्लूजन है किंतु ये अहम ब्रह्मास्मि तक आने की एक इंटेलेक्चुअल प्रक्रिया है वह दोनों की बड़ी डिफर करती है डिफर इसलिए करती है क्योंकि स्वामी जी आज के नए युग के नए उदाहरण देकर के समझाते हैं और ऋषि मुनि जो थे वो उस युग के उस समय के उदाहरण देकर के समझाते हैं हमारे मन में प्रश्न होगा कि स्वामी जी जो उदाहरण देते हैं वो उदाहरण जद अ ये साइंस के बेस पर देते हैं कल कहीं जाकर के साइंस गलत सिद्ध हो गया जिस साइंस पर उन्होंने बेस किया है या तो फिर कोई नई साइंटिफिक थिरी डेवलप हुई और स्वामी जी के 19th सेंचुरी लेट 19th सेंचुरी के जो आइडिया ऑलरेडी आज आउटडेटेड है किंतु यदि ऐसा है स्वामी जी ने जो आउटडेटेड आईडियाज पे वेदांत की एक्सप्लेनेशन बेस की है तो क्या स्वामी जी का खुद का वेदांत का अंडरस्टैंडिंग है वह गलत साबित हो गया क्या तो ऐसा नहीं है यह हमेशा उपमा के रूप में उदाहरण के रूप में देखना चाहिए बहुत बार मैंने यह देखा है कई-कई लोग प्रयत्न करते हैं कि ये फिजिक्स का यह कांसेप्ट है तो हमारा यह कांसेप्ट है यहां पर आपके पास में न्यूक्लियर वेपंस है तो हमारे पास में ब्रह्मास्त्र था आपके पास में ये एरोप्लेंस और फाइटर प्लेनस है तो हमारे पास में पुष्पक विमान था ये दोनों इक्विवेलेंट है हमको कभी भी इस तरह का इक्विवेलेंट नहीं खोजना है क्योंकि यह सबको हमको उपमा के रूप में देखना है ठाकुर कहते हैं कि वो गांव में कोई स्त्री काम करती है तो अब जैसे एक मेडक का उदाहरण देते हैं मेडक के पास में एक रुपया एक सिक्का आ गया तो व कहीं जाकर के एक हाथी जा रहा था तो हाथी के साथ में वो चिल्ला करके बोल उठा अरे तुमको पता नहीं मैं यहां पर हूं तो अभी प्रश्न होगा मेडक के पास में रुपया कहां से आएगा मेडक के पास में घमंड कहां से आएगा ये काम क्रोध मद लोभ मोह तो तो दिस आर द साइंस ऑफ हायर थिंकिंग मेडक के मन में घमंड वगैरह कहां से आएगा ये तो उपमा है उपमा को उपमा के तक ही रखना है बहुत बार मैंने अपने साधुओ में भी और खास करके मैं जब पहली बार रंगनाथन जी को पढ़ रहा था मैसेजेस ऑफ उपनिषद या तो फिर वो भगवत गीता तब मुझे ऐसा लगा कि उन्होंने साइंस को बहुत ज्यादा कुछ प्राधान्य दिया है और आज यदि पढ़ते हैं तो वोह 1980 1970 का जो साइंस है ऑलरेडी आज हमको आउटडेटेड लगता है तो यदि आप गीता को उसके बेस पर समझाएंगे और बहुत ज्यादा उसी के बेस पर समझाने को जाते हैं तो फिर आपकी गीता की अंडरस्टैंडिंग या तो गीता के कंक्लूजन वो गलत तो नहीं हो गए एक प्रश्न आता है तो मैं हमेशा मेरा खुद का जो थिंकिंग है आई लव साइंस आई लव वेदांत किंतु मैं हमेशा साइंस और वेदांत को मिक्स करने का प्रयत्न नहीं करता यह नहीं कहता कि वेदांत ने ये आइडियाज उसके बेस पर डिराइवर किया है फिजिक्स के बेस प या तो ये थिरी ऑफ जनरल रिलेटिविटी है उसने वेदांत के इस आइडिया को लेकर के डेवलप किया है दोनों को अपनी जगह ही रखो उपमा के रूप में लो यदि फिजिक्स कोई उपमा लेना चाहता है साइंस से दैट इज वेरी गुड साइंस फिजिक्स में से कोई उपमा लेना चाहता है दैट इज आल्सो वेरी गुड बट कीप देम सेपरेट डोंट मिक्स देम अप अदर वाइज हम लोग अपना ही कंफ्यूजन ज्यादा बढ़ाएंगे किंतु जो भी है बिकॉज के हम लोग आज के थिंकिंग ह्यूमन बीइंग से हम लोग आज के मॉडर्न लोग हैं तो हम आजकल यह मॉडर्न थिंकिंग मॉडर्न आर्गुमेंट मॉडर्न लॉजिक सुनते रहते हैं तो स्वामी जी ने इसके आधार पर अहम ब्रह्मास्मि महावाक्य है उसको प्रतिपादित करने का प्रयत्न किया स्वामी जी कहां तक सक्सेस होते हैं वह हमको देखना है क्योंकि हम सबका एक अलग-अलग थिंकिंग होता है मेरा एक पार्टिकुलर थिंकिंग है आपका एक पार्टिकुलर थिंकिंग मैंने देखा है कि मेरा थिंकिंग स्वामी जी के साथ में एकदम फिट हो जाता है ये हिस्टोरिकल एनालॉजी स्वामी जी देते हैं तो आई लव हिस्ट्री ये साइंस में से स्वामी जी उदाहरण दे आई लव साइंस तो मेरा स्वामी जी के साथ में उदाहरण उदाहरण का जो यह सिलसिला चला है स्वामी जी ने चला है मेरा एकदम परफेक्टली फिट हो गया दैट इज व्हाई आई ट्रूली लव स्वामी जी यदि मुझे ऐसा कहा जाता ये महावाक्य को तुम शास्त्र पढ़ कर के समझो तो मेरे से नहीं हो पाता आज यदि मैं फिर से शास्त्र पढ़ता हूं तो आई विल लाइक शास्त्र मुझे शास्त्र पसंद आएगी क्योंकि उसका जो कंक्लूजन है ऑलरेडी मैंने एक्सेप्ट कर लिया है महावाक्य का जो रूपी जो कंक्लूजन है वो ऑलरेडी मेरे माइंड में चला गया है तो मैं जब रिवर्स जाऊंगा कि ये महावाक्य प्रतिपादित करना चाहते हैं उपनिषद और बेस्ड अपॉन ट अभी शंकर भाष्य क्या कहता है चलो पढ़ते हैं तो मुझे वो थोड़ा बहुत समझ में आएगा वरना मैं शंकर भाष्य समझ करके उपनिषद को समझ कर के यदि मैं महावाक्य को डिराइवर करने का प्रयत्न करूंगा वह मेरे सर में कभी नहीं जाएगा क्योंकि मेरा उस टाइप का अपब्रिंगिंग नहीं है मेरा उस टाइप का वो बैकग्राउंड नहीं है ट्रेनिंग सेंटर में कुछ-कुछ ब्रह्मचारी थे वो उनका फैमिली बैकग्राउंड ही शास्त्र अध्ययन है उनका फैमिली बैकग्राउंड ही संस्कृत का स्टडी है बचपन से ही वे लोग उनके माता-पिता पुरखे जो संस्कृत पढ़ते आए हैं वो बच्चे को संस्कृत सिखाते हैं तो उनको मुझे उनके प्रति बड़ा ही ईर्ष होता था वो ट्रेनिंग सेंटर में आते हैं तो हमारे आचार्य महाराज सिखाते सिखाते उनको पूछेंगे अच्छा मैं जो कह रहा हूं वो ठीक है तो या तो फिर ये जो पार्टिकुलर इशू है उसका यही तो सोल्यूशन है तो वो ब्रह्मचारी महाराज कहेंगे हां महाराज ये ठीक है या तो फिर इसमें ये मॉडिफिकेशन करना चाहिए बचपन से ही संस्कृत सीखते आए हैं बचपन से ही ये शास्त्र चर्चा करते हैं हम लोग तो बूढ़े हो गए कंपैरेटिव स्पीकिंग तब कहीं जाकर के हमको तो पता चला पहली बार कि हां ये उपनिषद बोल के कुछ है शंकराचार्य का नाम सुना था शंकराचार्य का क्या कंट्रीब्यूशन है कुछ पता नहीं था जब कहीं जाकर के ट्रेनिंग सेंटर में जाकर के शंकराचार्य का ब्रह्मसूत्र भाष्य हाथ में लिया तो बाल पता चला अरे बाप रे ये किस जन्म में यह अपने सर में घुसने वाला है तो हम लोगों का पूरा थिंकिंग पूरे डिफरेंट डायरेक्शन में से हम लोग आए है तो हमारे लिए सर्वप्रथम कंक्लूजन तक पहुंच जाना है महावाक्य तक फिर महावाक्य से रिवर्स जाना है शास्त्र में कि बेसिकली शास्त्र महावाक्य को किस तरह से एक्सप्लेन करते हैं तो जो पोर्शन जो पार्ट महा वाक्य तक ले जाता है उसी को ज्यादा डिटेल में जाना है बाकी को हाथ जोड़कर बोलना है कि इस जन्म में नहीं होगा नेक्स्ट जन्म में आपके साथ में फिर से परिचय किया जाएगा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु